रुकिए, बस एक पल के लिए रुकिए। [संगीत] आप अभी जो भी कर रहे थे, वह सब छोड़ दीजिए। अगर आप किसी भीड़ में हैं, तो हेडफोन्स लगा लीजिए। क्योंकि जो मैं अभी आपसे बात करने वाला हूं, वह आपकी जिंदगी के सबसे गहरे, सबसे कच्चे और सबसे दर्दनाक सच से जुड़ी बात है। यह कोई धार्मिक उपदेश नहीं है। यह कोई मंदिर की घंटी नहीं है। यह कोई मीठी-मीठी बातें नहीं है जो सुनकर आप 10 मिनट अच्छा महसूस करें और भूल जाएं। यह गरुड़ पुराण का वह सच है जो हजारों सालों से बंद किताबों में दफना पड़ा
था। जो हमारे पंडितों और विद्वानों ने कभी आम इंसान को इसलिए नहीं बताया क्योंकि यह सुनकर इंसान टूट सकता है, बिखर सकता है और अगर वह ठीक से समझ ले तो शायद जुड़ भी सकता है। मैं आज एक सवाल पूछना चाहता हूं। एक ऐसा सवाल जो कोई नहीं पूछता जो पूछने की हिम्मत बहुत कम लोगों में होती है। वह सवाल यह है जिस बेटे को आप रात दिन पालते हैं पूछते हैं जिसके लिए आप अपना खून पसीना एक कर देते हैं क्या आप सच में [संगीत] जानते हैं कि वह आपके घर में क्यों आया है?
क्या वह आपका वारिस है? क्या वह आपके बुढ़ापे की लाठी है? क्या वह आपकी दुआओं का फल है या क्या वह किसी बहुत पुराने और बहुत गहरे हिसाब को चुकाने आया है जो आपने खुद पिछले जन्म [संगीत] में बनाया था। आज हम गरुड़ पुराण के उन पन्नों को खोलेंगे जिन्हें आज तक किसी ने इतनी गहराई और इतनी सच्चाई से नहीं खोला। इस वीडियो को अंत तक देखिए हर एक शब्द हर एक पल। क्योंकि जो सच अंत में आपके सामने आएगा वह आपको हिला देगा। लेकिन उसी झटके में आपको एक ऐसी आजादी भी मिलेगी जिसे पाने
के लिए लोग सालों साधना करते हैं। हमारे देश में, हमारे समाज में, हमारे घरों में जब एक बेटे का जन्म होता है तो एक अलग ही दुनिया बन जाती है। [संगीत] मैं चाहता हूं आप उस पल को महसूस करें। उस सुबह वो अस्पताल का कमरा, वो नर्स का आना, [संगीत] वो खबर का आना कि बेटा हुआ है और उस खबर के साथ एक पिता की आंखों में आंसू। पर वो रोने के आंसू नहीं है। वो जीत के [संगीत] आंसू हैं। वह एक ऐसे इंसान के आंसू हैं जिसे लग रहा है कि उसकी सारी जिंदगी की
मेहनत आज सफल हो गई। घर में ढोल बजते हैं। मिठाइयां बांटी जाती है। पड़ोसी आते हैं। रिश्तेदार आते हैं। खानदान के बुजुर्ग आते हैं। और सबसे पहले जो बात कही जाती है, वह यह है। वंश आगे बढ़ा। नाम रोशन होगा। बुढ़ापे का सहारा आ गया। यह वाक्य, यह तीन वाक्य इनमें पूरी जिंदगी की उम्मीद है। पूरा भविष्य है, पूरा सपना है और यहीं से शुरू होती है वह गलती जो [संगीत] बाद में पीड़ा बन जाती है। एक पिता अपने नवजात बेटे को गोद में उठाता है। वह उस छोटे से चेहरे को देखता है। उन बंद
आंखों को, उन नन्हे हाथों [संगीत] को और उस पल में उसके मन में क्या चल रहा होता है। वो सोच रहा होता है यही मेरी असली दौलत है। [संगीत] यही मेरी पहचान है। इसी के लिए मैं जिऊंगा। इसी के लिए मैं मरूंगा और उसी रात से वह पिता बदल जाता है। उसकी नींद बदल जाती है। उसकी भूख बदल जाती है। उसके सपने बदल जाते हैं। अब उसके हर सपने में एक बेटा है। एक पढ़ा लिखा कामयाब संस्कारी बेटा [संगीत] जो उसके नाम को चार चांद लगाएगा। जो उसके बुढ़ापे में उसके पास बैठेगा जो उसके जाने
के बाद उसकी चिता को आग देगा और उसकी आत्मा को मोक्ष दिलाएगा। यह सोच यह है अंधा प्यार। यही पुत्र मोह है और गरुड़ पुराण कहता है कि यही पुत्र मोह इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी है। यही उसका सबसे बड़ा बंधन है और अक्सर यही उसकी सबसे बड़ी पीड़ा का कारण भी बनता है। अब मैं आपसे एक बहुत जरूरी सवाल पूछना चाहता हूं। अगर मैं आपसे कहूं कि यह सब जो आप सोचते हैं यह मेरा बेटा, मेरा वारिस, मेरा बुढ़ापे का सहारा। यह सब एक बहुत मीठा, बहुत खूबसूरत और बहुत बड़ा झूठ है। तो क्या
आप सुनेंगे? क्या आप सच को सुनने की हिम्मत रखते हैं? अगर हां, तो अगले कुछ मिनट बहुत ध्यान से सुनिए। गरुड़ पुराण में एक संवाद है। एक बहुत ही गहरा बहुत ही रहस्यमय संवाद। यह संवाद [संगीत] है पक्षीराज गरुड़ और मृत्यु के देवता यमराज के बीच। गरुड़ पूछते हैं, हे यमराज, जब एक आत्मा मृत्यु के बाद आपके दरबार में आती है, तो उसे वापस धरती पर भेजने का फैसला कैसे होता है? किस घर में, किस रूप में? और क्यों? और यमराज का जवाब वह जवाब इतना गहरा है, इतना भारी है कि सुनकर सांस रुक जाती
है। यमराज कहते हैं हे गरुड़ [संगीत] इस ब्रह्मांड में कुछ भी संयोग नहीं है। एक आत्मा जब किसी घर में जन्म लेती है। चाहे बेटे के रूप में हो, बेटी के रूप में हो या किसी और रूप में यह सब ऋणानुबंध के कठोर [संगीत] नियम से तय होता है। ऋणानुबंध। यह शब्द सुनिए ऋण यानी कर्ज, [संगीत] अनुबंध यानी बंधन। एग्रीमेंट ऋणानुबंध का मतलब है कर्मों का वह बंधन जो आत्माओं को बार-बार एक दूसरे के पास खींच लाता है जब तक हिसाब बराबर ना हो जाए। सोचिए अभी आपके घर में जो बेटा है छोटा हो या
बड़ा वो आपकी जिंदगी में किसी ना किसी कारण से है और वह कारण आपकी [संगीत] मन्नतें नहीं है। वो कारण आपकी पूजा पाठ नहीं है। वह कारण है आपके और उस आत्मा के बीच का वह पुराना अधूरा हिसाब जो पिछले जन्म में या जन्मों में पूरा नहीं हुआ था। और अब इस जन्म में वह हिसाब चुकाने का वक्त आया है। यमलोक के दरबार में जब चित्रगुप्त [संगीत] किसी आत्मा की फाइल खोलते हैं तो वह देखते हैं इस आत्मा ने पिछले जन्म में क्या किया था। किस-किस के साथ क्या हुआ था? कौन-कौन से हिसाब अधूरे हैं
और उसी हिसाब के आधार पर तय होता है। यह आत्मा अगले जन्म में किसके घर, किस रूप में, किस उद्देश्य से जाएगी और शास्त्रों में बहुत साफ लिखा है कि एक बेटा मुख्य रूप से चार रूपों में किसी घर में जन्म [संगीत] लेता है। चार रूप, चार कहानियां, चार सच। आज हम इन चारों को इतनी गहराई से समझेंगे कि शायद आप पहली बार अपने ही बेटे को नई आंखों से देख पाएंगे। पहला रूप सबसे खौफनाक, सबसे दर्दनाक और दुर्भाग्य से [संगीत] आज के समाज में सबसे आम शत्रु पुत्र। यह नाम सुनकर ही [संगीत] रोंगटे खड़े
हो जाते हैं। शत्रु पुत्र यानी वह बेटा जो शत्रु के रूप में दुश्मन की आत्मा बनकर आपके [संगीत] ही घर में आपकी ही पत्नी की कोख से पैदा हुआ है। अब आप कहेंगे यह कैसे हो सकता है? मेरा अपना बेटा मेरे खून से पैदा हुआ मेरा दुश्मन। हां और यही सबसे बड़ी विडंबना है। आपका सबसे करीबी दुश्मन वह नहीं जो बाहर से आता है। आपका सबसे करीबी [संगीत] दुश्मन वो है जिसे आप खुद घर लाते हैं, खुद पालते हैं। खुद बड़ा करते हैं। मैं आपसे [संगीत] एक सच्चाई शेयर करना चाहता हूं। आपने कभी ना कभी
चाहे अखबार में पढ़ा हो, टीवी पर देखा हो या अपने किसी जानने वाले के साथ हुआ हो। ऐसी कहानी सुनी होगी। एक बूढ़ा [संगीत] पिता। उसने अपनी पूरी जिंदगी मेहनत की। सरकारी नौकरी या फिर छोटी-मोटी दुकान। जो भी था उसने ईमानदारी से कमाया। हर पैसे को संभाल कर रखा। बेटे को पढ़ाया। अच्छे स्कूल में भेजा। [संगीत] इंजीनियरिंग पढ़ाई, शादी करवाई और उस बेटे की शादी के 5 साल बाद वो बूढ़ा पिता एक दिन उठा और देखा कि उसका बेटा उसके घर का कागज लेकर रातोंरात किसी और के नाम कर चुका है। घर गया। पैसे गए
और उस पिता को खुद बेटे ने बाहर निकाल दिया। उस पिता की आंखें खाली हो गई। वह सोच रहा था मैंने तो इसे पाला था। इसके लिए तो मैंने कभी दो वक्त की रोटी नहीं खाई। इसने ऐसा क्यों किया? वो पिता नहीं जानता था। पर गरुड़ पुराण जानता है। गरुड़ पुराण कहता है किसी पिछले जन्म में शायद बहुत सालों पहले आप किसी ऊंचे पद पर थे या आपके पास ताकत थी [संगीत] या धन था। और उस समय आपने किसी बेकसूर इंसान के साथ बहुत बड़ा अन्याय किया था। शायद उसकी जमीन [संगीत] छीनी थी। शायद उसका
हक मारा था। शायद उसे इस कदर तड़पाया था कि वह मर गया और मरते वक्त उस इंसान के दिल में क्या था? बदला सिर्फ एक ही इच्छा बदला। उस आत्मा ने मरते वक्त कसम खाई थी। मैं इससे अपना हिसाब जरूर चुकाऊंगा और वही आत्मा उसी कसम के साथ इस जन्म में आपकी पत्नी की कोख से आई। [संगीत] आपके बेटे के रूप में यमलोक के न्याय ने उसे आपके सबसे करीब बिठा दिया। क्योंकि दुश्मन को सबसे ज्यादा नुकसान तभी [संगीत] होता है जब वह सबसे करीब हो। जब तक वह आपकी एक-एक पाई बर्बाद नहीं कर देता।
जब तक आपके घमंड को [संगीत] मिट्टी में नहीं मिला देता। जब तक आपकी आंखों से खून के आंसू नहीं निकाल देता, उसे चैन नहीं मिलेगा। और यह कोई श्राप नहीं है। यह ब्रह्मांड का सबसे कठोर और सबसे निष्पक्ष न्याय है। लेकिन यहां एक सवाल उठता है जो हर पिता के मन में उठना चाहिए। अगर शत्रु पुत्र इतना भयंकर है तो क्या मैं उससे प्यार करना बंद कर दूं? क्या मैं उसे दुश्मन समझकर व्यवहार करूं? नहीं। हजार बार नहीं। क्योंकि यह सच जानने का मतलब भागना नहीं है। इसका मतलब है जागना। और जागने का मतलब है
यह समझना कि जो दर्द वह आपको दे रहा है वह आपके ही पिछले कर्मों की वापसी है। [संगीत] वह सजा नहीं वह चुगौती है। और जब आप इस सच को दिल से स्वीकार कर लेते हैं तो उस क्षण वह बंधन कमजोर होने लगता है। दूसरा रूप [संगीत] ऋण पुत्र यह रूप शत्रु पुत्र जितना हिंसक नहीं होता। लेकिन इसका दर्द शायद उससे भी ज्यादा गहरा होता है। क्योंकि इसमें आपको दर्द देने वाला कोई बुरा इंसान नहीं होता। इसमें दर्द [संगीत] देती है नियति किस्मत वह परमात्मा का वह हिसाब जो कभी गलत नहीं होता। ऋणपुत्र वह बेटा
है जो पैदा होते ही या [संगीत] बचपन में ही किसी भयंकर बीमारी का शिकार हो जाता है और उस बच्चे के माता-पिता की जिंदगी बस उसी बच्चे के इर्द-गिर्द [संगीत] घूमती रहती है। मैं यहां एक इंसानी कहानी सुनाना चाहता हूं। मेरे एक परिचित थे। उनका नाम मैं यहां नहीं लूंगा लेकिन उनकी कहानी लाखों लोगों की कहानी है। वह एक साधारण सरकारी शिक्षक थे। ईमानदार मेहनती जब उनका बेटा 3 साल का था तो पता चला उसे एक दुर्लभ बीमारी है। उन्होंने सब कुछ किया। दिल्ली गए मुंबई गए। विदेश के डॉक्टरों से ऑनलाइन कंसल्टेशन लिया। जो घर
था बेचा जो जमीन थी गिरवी रखी। पत्नी रात-रात भर रोती रही। वह खुद मंदिरों में जाते रहे। 7 साल 7 साल तक वह लड़के रहे और एक दिन वह बच्चा चला गया। उन माता-पिता के लिए दुनिया रुक गई। वह पिता आज भी कहते हैं मैंने ऐसा क्या किया था? गरुड़ पुराण का जवाब है। किसी पिछले [संगीत] जन्म में आपने या आपके परिवार ने उस आत्मा के साथ कोई आर्थिक अन्याय किया था। [संगीत] कोई ऐसा कर्ज जो आपने लिया था और नहीं चुकाया। कोई ऐसा धन जो आपने बेईमानी से हड़पा था। वह हिसाब अधूरा था। और
इस जन्म में वह आत्मा आपकी अपनी औलाद बनकर आई और जब तक उसने अपने हिस्से का वह सब वसूल नहीं कर लिया। अस्पताल के बिलों के रूप में, आपकी नींद के रूप में, आपके आंसुओं के रूप में वह रुकी और जब हिसाब पूरा हुआ, वह चली गई। यह सुनकर दिल पत्थर हो जाता है। आंखें भर आती है। लेकिन गरुड़ पुराण यह भी कहता है, यह न्याय क्रूर नहीं है। यह न्याय निष्पक्ष है। ब्रह्मांड [संगीत] में कोई भी दर्द बिना कारण नहीं होता। और जब इंसान इस सच को जान लेता है तो उसके दुख में [संगीत]
से एक अजीब सी शांति निकलती है। वो शांति जो कहती है हिसाब हो गया। अब आगे बढ़ो। अब तक हमने दो बहुत भारी सच सुने। अब एक ऐसा सच सुनिए [संगीत] जो आपके दिल को गर्म कर देगा। तीसरा रूप सेवक पुत्र। कभी-कभी किसी घर में ऐसा बेटा पैदा होता है जिसे देखकर [संगीत] पड़ोसी कहते हैं यार इनकी किस्मत बहुत अच्छी है। वो लड़का बचपन से ही कुछ अलग होता है। जब सब बच्चे खेलने जाते हैं वो मां के पास बैठता है। जब पिता थके हुए घर आते हैं वो पानी लेकर आता है। जब दादा-दादी बीमार
पड़ते हैं, वह उनकी सेवा करता है बिना किसी शिकायत के। वह कभी नहीं कहता है। [संगीत] मुझे क्यों करना है? वह कभी नहीं सोचता है। इसमें मेरा क्या फायदा? वह बस करता रहता है। खुद आधी रोटी खाएगा [संगीत] पर मां को पूरी देगा। खुद फटे कपड़े पहनेगा पर पिता की दवा कभी नहीं रुकने देगा। अपनी शादी तक रोक देगा। [संगीत] बस इसलिए कि मां-बाप के साथ कोई रहे। ऐसा बेटा ऐसी आत्मा गरुड़ पुराण कहता है। यह वह महान आत्मा है जिस पर आपने पिछले किसी जन्म में कोई बहुत बड़ा बहुत निस्वार्थ उपकार किया था। शायद
आपने उसकी भूखे मरने से बचाया था। शायद किसी भयंकर संकट में आप उसके साथ खड़े रहे। जब पूरी दुनिया ने उसका साथ छोड़ दिया था। वह आत्मा भूली नहीं। वह कहीं किसी अदृश्य रजिस्टर में आपका वह उपकार दर्ज था और इस जन्म में वह आई आपके सेवक बेटे के रूप में आपका कर्ज चुकाने, आपको सुख देने, आपके बुढ़ापे की मजबूत लाठी बनने। अगर आपके घर में ऐसा बेटा है तो रोज सुबह उठकर अपनी आंखें बंद कीजिए और उस परमात्मा का दिल से शुक्रिया कीजिए क्योंकि इस कलयुग में ऐसी आत्मा बहुत कम घरों में आती है।
आपका पिछला जन्म बहुत शुद्ध था। बहुत पवित्र था। इसीलिए आपको यह अनमोल उपहार मिला है। और अब सबसे अंतिम, सबसे पवित्र, सबसे दुर्लभ [संगीत] रूप, धर्म पुत्र, लाखों में, करोड़ों में किसी एक घर में ऐसी आत्मा [संगीत] आती है। यह वह बेटा है जो सिर्फ माता, पिता का नहीं होता। यह पूरे कुल का, पूरे समाज का, पूरी मानवता का होता है। वह बचपन से ही अलग होता है। उसकी [संगीत] आंखों में एक अजीब सा नूर होता है। उसके शब्दों में एक वजन होता है। उसके कामों में एक निस्वार्थ [संगीत] होती है जो देखकर लोग कहते
हैं, यह बच्चा कुछ और है। वह पढ़ता है, पर सिर्फ नौकरी के लिए नहीं, वह कमाता है। पर सिर्फ अपने लिए नहीं, वह जीता है। पर सिर्फ अपने लिए नहीं, वह दूसरों की भलाई के लिए काम करता है। वह सच के रास्ते पर चलता है। चाहे [संगीत] कितनी भी तकलीफ हो, वह भगवान की सच्ची भक्ति करता है। मतलब के लिए नहीं बल्कि प्रेम के लिए और मृत्यु के बाद उसके महान कर्म इतने शुद्ध होते हैं कि वह अपने माता पिता की आत्मा को भी तार देता है। उन्हें मोक्ष के मार्ग पर ले जाता है। धर्म
पुत्र यह रूप किसी के संचित पुण्यों का फल है। यह रूप उस इंसान को मिलता है जिसने कई जन्मों में अपना जीवन धर्म के लिए, सेवा के लिए, सत्य के लिए जिया हो और अगर आपके घर में ऐसी आत्मा आई है तो यह ब्रह्मांड का सबसे बड़ा पुरस्कार है। अब यहां वह सवाल आता है जो हर माता पिता के मन में होगा। अगर मेरा बेटा मेरी जागीर नहीं है। अगर वह मेरे कर्मों का हिसाब है। अगर वह एक अलग आत्मा है जो अपनी यात्रा पर है तो मैं क्या करूं? क्या प्यार करना बंद करूं? क्या
उसे अपना ना मानूं? क्या उसकी [संगीत] परवाह छोड़ दूं? नहीं। गरुड़ पुराण भगवत गीता हमारे सारे शास्त्र एक स्वर में कहते हैं नहीं। बल्कि उलटा जब आप यह जान लेते हैं कि [संगीत] आपका बेटा एक स्वतंत्र आत्मा है। तब आप उससे और भी गहरा और भी शुद्ध और भी सच्चा प्यार कर सकते हैं। [संगीत] क्योंकि अब वह प्यार मोह से नहीं निकलता। अब वह प्यार अपेक्षाओं से नहीं निकलता। अब वह प्यार डर से नहीं निकलता। वह प्यार निकलता है करुणा [संगीत] से, समझ से और आत्मा की सच्ची गहराई से। भगवान श्री कृष्ण ने गीता में
क्या कहा था? कर्म करो। फल की चिंता मत करो। यही बात माता पिता के लिए भी लागू होती है। अपने बेटे का पालन, पोषण करना आपका धर्म है। उसे अच्छी शिक्षा देना आपका कर्तव्य है। उसे सही और गलत का रास्ता दिखाना आपकी जिम्मेदारी है। लेकिन उससे यह [संगीत] उम्मीद रखना कि वह हमेशा आपके कहे पर चलेगा। हमेशा आपकी सेवा करेगा। हमेशा आपकी पसंद नापसंद के हिसाब से जिएगा। यह उम्मीद आपकी है। उसकी नहीं। और जब वह उम्मीद टूटती है तो दर्द होता है और उस दर्द का कारण वह नहीं है। उस दर्द का कारण आपकी
वह उम्मीद है। [संगीत] जिस दिन आपने अपने बेटे को एक ऐसी आत्मा के रूप में देखा जो अपनी यात्रा पर है और आप सिर्फ [संगीत] उसे इस दुनिया में लाने के माध्यम है। उसी दिन आपकी आत्मा का एक बहुत बड़ा बोझ उतर [संगीत] जाएगा। अब गरुड़ पुराण का वह सच जिसे सुनकर शायद आपकी रातों की नींद उड़ जाए। जो पिता अपने बेटे के मोह में अंधा हो जाता है। जो पिता अपने [संगीत] बेटे के लिए दूसरों का हक मारता है। जो पिता अपने बेटे को राजा बनाने के लिए बेईमानी करता है। भ्रष्टाचार करता है। गरीबों
की रोटी छीनता है। गरुड़ पुराण [संगीत] कहता है। उस पिता की मृत्यु के बाद यमदूत उसे सीधे तप्त मूर्ति नरक में [संगीत] ले जाते हैं। वहां उसे लाल गर्म लोहे के खंभों से बांधा जाता है। वह तड़पता है, चीखता है और जिस बेटे के [संगीत] लिए उसने यह सब किया था, वह बेटा उस नरक में उसके पास नहीं आता क्योंकि पाप बांटे नहीं जाते। पाप सिर्फ उसी के खाते में जाते हैं जिसने किए और वह बेटा वह बेटा उसी बेईमानी के पैसों [संगीत] से इस दुनिया में मौज कर रहा है। यह सुनकर कुछ लोग कहेंगे
यह तो बहुत क्रूर है लेकिन क्रूरता यह नहीं है। क्रूरता तो वो है जो उस पिता ने की थी जब उसने किसी बेकसूर के आंसुओं की [संगीत] परवाह नहीं की। जब उसने किसी गरीब का हक मारा। ब्रह्मांड का न्याय क्रूर नहीं है। ब्रह्मांड का न्याय बस सटीक है। अब वह बात [संगीत] जो इस पूरे वीडियो की असली जान है। मुक्ति आजादी उस रणानुबंध के चक्र [संगीत] से बाहर निकलने का रास्ता। गरुड़ पुराण बहुत साफ कहता है। जो इंसान यह सच जान लेता है और इसे दिल से स्वीकार कर लेता है। उसके बहुत सारे कर्म उसी
क्षण काट जाते हैं। यह ज्ञान ही मुक्ति है। अगर आपका बेटा आज आपको दुख दे रहा है तो एक पल के लिए रुकिए। अकेले बैठिए। अपनी आंखें बंद कीजिए और दिल से कहिए हे ईश्वर हे परमपिता मेरा जो भी पिछले जन्म का कर्ज था जो हिसाब अधूरा था [संगीत] वह आज इन आंसुओं से इस दर्द से पूरा हो रहा है। मैं इसे स्वीकार करता हूं। मैं इस बंधन से मुक्त होना चाहता हूं। और जब आप यह कह देंगे सच में दिल की गहराई से तो आप [संगीत] महसूस करेंगे कि आपके अंदर का एक बहुत पुराना
बहुत भारी पत्थर उठ गया। यही है मुक्ति। यह कोई जादू [संगीत] नहीं है। यह कोई धर्म का ढोंग नहीं है। यह है स्वीकृति का विज्ञान। जब आप किसी दर्द को लड़कर नहीं बल्कि समझकर स्वीकार करते हैं, तो वह दर्द आपको तोड़ नहीं सकता। वह आपको मजबूत बना देता है। मैं आज इस वीडियो को एक बहुत जरूरी बात से बंद करना चाहता हूं। यह बात उन सभी माताओं के लिए है जो आज किसी अकेले कमरे में बैठकर रो रही हैं। [संगीत] उन सभी पिताओं के लिए है जो जिंदगी भर मेहनत करने के बाद आज बेटे की
ठंडी नजरों का सामना कर रहे हैं। [संगीत] उन सभी परिवारों के लिए है जो यह समझ नहीं पा रहे कि हमने तो सब सही किया। फिर यह दर्द क्यों? आपने गलत नहीं किया। आप बुरे नहीं हैं। आप अपना कर्ज चुका रहे हैं। और जब हिसाब पूरा होगा तो इस दर्द में से एक नई रोशनी निकलेगी। अपने बेटे से प्यार कीजिए। पर उसे अपनी जिंदगी की एकमात्र जरूरत मत बनाइए। उसे अच्छे संस्कार दीजिए। पर उसके हर फैसले को कंट्रोल करने की कोशिश मत कीजिए। [संगीत] उसे दुनिया की हर खुशी देने की कोशिश कीजिए। पर इसके लिए
कभी किसी का हक मत मारिए। क्योंकि जो आप आज किसी और के साथ करेंगे वह कल किसी रूप में आपके पास वापस आएगा। यही है कर्म। यही है सत्य। यही है गरुड़ पुराण का वो कड़वा और नंगा सच। आज हमने [संगीत] एक बहुत लंबी यात्रा की। हमने गरुड़ पुराण के उन पन्नों को छुआ जिन्हें छूने की हिम्मत बहुत कम लोग कर [संगीत] पाते हैं। हमने जाना कि बेटा कोई संपत्ति नहीं है। वो एक आत्मा है जो अपनी यात्रा पर है। वह शत्रु हो सकता है। वह जणी हो सकता है। वह सेवक हो सकता है। वह
धर्म पुत्र हो सकता है। पर वह सिर्फ आपका [संगीत] नहीं है। वह परमात्मा का है। और आप आप भी परमात्मा के हैं। इस वीडियो को देखने के बाद अगर आपके दिल में एक [संगीत] भी विचार आया हो, एक भी पुराना दर्द हल्का हुआ हो, एक भी पुराना बोझ थोड़ा सा उठा हो, तो यह वीडियो [संगीत] सार्थक हुआ। इसे उन सभी माता पिता तक जरूर पहुंचाइए जो आज अपने पुत्र के दिए हुए दर्द में अकेले बैठे हैं। उन्हें आज इस रोशनी की जरूरत है और नीचे कमेंट में लिखिए पूरे गर्व के [संगीत] साथ पूरे विश्वास के
साथ मेरा ईश्वर ही मेरा असली वारिस है [संगीत] ताकि वह परमपिता तक आपकी यह आत्मा की आवाज पहुंच सके। आत्म रहस्य चैनल से जुड़े रहिए। अपना, अपने कर्मों का और अपनी आत्मा का बहुत-बहुत ख्याल रखिए। वह परमपिता नारायण आपको और आपके परिवार को हर झूठे मोह से मुक्त रखें और आपको वह सच्ची शांति दें जिसे कोई दुनिया की दौलत नहीं दे सकती। जय श्री कृष्णा।