हेलो फ्रेंड्स आज की वीडियो में हम लोग देखेंगे कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने किस तरह भारत में कलक प्रेसिडेंसी को बनाया इससे पहले की वीडियोस में हम लोग ऑलरेडी देख चुके हैं कि 1641 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने मद्रास में फोर्ट सेंट जॉर्ज को बनवाया था और इसके बाद से पूरे के पूरे कोरोमंडल कोस्ट रीजन में मद्रास ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का हेड क्वार्टर बन गया था इसके बाद हम लोगों ने यह भी देखा कि किस तरह 1687 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने बम्बे को अपना हेड क्वार्टर बनाया और यहां पर बॉम्बे
कासल का निर्माण किया तो चलिए कलकाता प्रेसिडेंसी के फॉर्मेशन को डिटेल में समझते हैं कहानी की शुरुआत होती है 1651 से उस समय भारत में मुगलों का राज हुआ करता था और रूलर थे शाहजन जिन्होंने 1628 से लेकर 1658 तक रूल किया था इन्हीं के टेरिटोरियल एरिया में एक प्रोविंस था बंगाल बंगाल का प्रोविंस यानी बंगाल का जो सूबा था वहां पर सूबेदार थे शाह सूजा और उस समय इनकी कैपिटल हुआ करती थी ढाका ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में ट्रेड करने की परमिशन शाह सूजा से ही मिली थी और तय यह हुआ था
कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को अगर बंगाल में ट्रेड करना है तो शाह सूजा को हर साल 3000 देने होंगे तो 1651 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को जब बंगाल में ट्रेड करने की परमिश मिली तो इन्होंने बंगाल में अपनी पहली फैक्ट्री हुगली में लगाई और इसी के साथ-साथ एक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बनाने के लिए इन्होंने राजमहल और पटना में भी अपने सेंटर्स बनाए और जिस व्यक्ति को बंगाल के इस पूरे ट्रेड का इंचार्ज बनाया गया उनका नाम था विलियम हेजेस यह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बंगाल में पहले एजेंट थे अब इसके बाद का जो
पीरियड है 1651 से लेकर 1700 तक का इसे हम लोगों ने तीन पार्ट्स में डिवाइड किया है चलिए सबसे पहले देखते हैं कि 1651 से लेकर 1681 तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी बंगाल में किस तरह प्रोग्रेस कर रही थी एक्चुअली 1651 में बंगाल में ट्रेड परमिशन मिलने के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को लग रहा था कि अब चीजें आसान होंगी उन्हें सिर्फ इतना करना है कि बहुत सारा माल अपनी नाव में भरना है और य यहां से ले जाकर बाहर के देशों में बेचना है बट एक चीज जो उन्हें नहीं पता थी वह यह
कि जगह-जगह मुगल चेकपोस्ट लगे हुए थे जहां पर बहुत सारे कस्टम ऑफिसर्स हुआ करते थे और यह कस्टम ऑफिसर्स ब्रिटिश ंडिया कंपनी से इन चेक पोस्टों पर टोल मांग रहे थे ब्रिटिश स् इंडिया कंपनी को लग रहा था कि यार हमारे पास फरमान है इसके बावजूद अगर हम लोग टोल दे रहे हैं तो यह बात गलत होगी इस चक्कर में कस्टम ऑफिसर्स के साथ इनकी झड़प होती थी और इन झड़पों में कई बार इनका माल लूट लिया जाता था ऐसे में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को यह जरूरत महसूस हुई कि उन्हें अपनी हुगली वाली फैक्ट्री
को फोर्टिफाइंग यानी फैक्ट्री के चारों तरफ किलेबंदी करनी होगी और इस परपस के लिए 1682 में यह बंगाल के मुगल गवर्नर शाहिस्ता खान के पास पहुंचे इन्होंने शाहिस्ता खान से अपनी हुगली वाली फैक्ट्री के अराउंड किलेबंदी करने की परमिशन मांगी बट शाहिस्ता खान को यह बात मंजूर नहीं थी उन्हें यह बात बिल्कुल भी मंजूर नहीं थी कि उनके एरिया में एक कंपनी जो ट्रेड करने आई है वह किलेबंदी करना शुरू कर कर दे लेकिन विलियम हेजेस इस बात पर अड़ा हुआ था कि उसे अपनी फैक्ट्री की किलेबंदी करनी है और इसीलिए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी
और शाहिस्ता खान के बीच में तनातनी शुरू हो गई इसी तनातनी में विलियम हेजेस ने कई सारी मुगल टेरिटरीज के ऊपर अटैक कर दिया जैसे कि थाना हिजली और बालासोर इसके रिटेल में शाहिस्ता खान ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की हुगली फैक्ट्री के ऊपर अटैक किया और वहां से सारे अंग्रेजों को भगा दिया और ओबवियस सी बात है कि राजमहल और पटना वाले जो सेंटर्स थे वो तो छोटे सेंटर्स थे वहां से भी अंग्रेजों को भगा दिया गया इसका मतलब यह कि अब इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सभी लोगों को बंगाल से भगा दिया गया
है अब यह बंगाल के आउटस्कर्ट्स में बैठे हुए थे और 1690 आते-आते सिचुएशन अब यह है कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के जो भी लोग मौजूद हैं बंगाल में वह बिल्कुल आउटस्कर्ट्स में मौजूद हैं और अब एंट्री होती है जॉब चारनो की जॉब चारनो ने मुगल गवर्नर शाहिस्ता खान के साथ नेगोशिएशन शुरू किए उन्होंने कहा कि देखो भाई हम लोग लोग यहां पर आउटस्कर्ट्स में सूता नति में बैठे हुए हैं आप एटलीस्ट हमारे पास यह सूता नति रहने दो मुगल गवर्नर इनकी बात को मान गए और इस तरह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मुगल गवर्नर
ऑफ बंगाल शाहिस्ता खान के बीच में एक ट्रीटी हुई 1690 में इस ट्रीटी के अनुसार ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लोग अब सूता नति में रह सकते थे तो हम कह सकते हैं कि 1691 तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के पास सूता नती आ चुका था और इसके सात सालों के बाद यानी 1698 में ब्रिटिश ई इंडिया अपनी तीन विलेजेस सतान उती गोविंदपुर और कालीकट इन तीन विलेजेस की जमींदारी मात्र ₹2000000 में बनकर तैयार हो गया था और यह जो फोर्ट है फोर्ट विलियम यह कलकता प्रेसिडेंसी का हेड क्वार्टर बना और यहां पर एक व्यक्ति
को अपॉइंट्स आयरे चार्ल्स आयरे फोर्ट विलियम के पहले प्रेसिडेंट बने तो आज की इस वीडियो में हम लोगों ने देखा कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने कलकट प्रेसिडेंसी को किस तरह से फॉर्म किया यूपीएससी के लिए इंडिया की हिस्ट्री इंडियन पॉलिटी और इंडियन इकॉनमी को डिटेल में समझने के लिए बुवा की प्लेलिस्ट को फॉलो कीजिए थैंक यू सो मच फॉर वाचिंग एंड सपोर्टिंग बुवा