बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अस्सलाम वालेकुम नाजरीन नजरे इमाम अली मकाम इमाम हुसैन इब्ने अली अली सलाम ने मैदान ए कर्बला में 72 सर अल्लाह हरबल इज्जत के हुजूर पेस किया और इस्लाम की सर बुलंदी की खातिर दुश्मन आने इस्लाम के सामने दत गए और यजीद इब्ने माविया के हाथ पर बैठ करने से इनकार कर दिया मैदान ए कर्बला में यजीद इब्ने मुआविया की फौजी ने रसूल खुदा इमाम अल अंबिया जनाबे मुहम्मदूर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलेही वल्लम के खानदान पर जुल्म के पहाड़ तोड़े और उनको इंतिहाई बेदर्दी से प्यासा शाहिद किया नाजरीन बेशक खाली के कायनात ने बरोज कयामत उन
लाइनें के लिए जहन्नुम में अजियत नाक ठिकाना तैयार कर रखा है मगर ये कैसे मुमकिन है की वो इस दुनिया के अंदर भी निशाने एवर्ट ना बनाए जाते कटली ने इमाम हुसैन इब्ने अली अली सलाम का इबरतनाक अंजाम क्या हुआ इस दुनिया में कर्बला के शहीदों का बदला किसने और कैसे लिया वो कौन था जिसने कटीला ने इमाम हुसैन इब्ने अली अली सलाम को चुन चुन कर मारा यही हमारी आज के वीडियो का मौजूद होगा और आज हम आपको कायनात के बेहतरीन जालिमों यजीद इब्ने माफिया स्नान और कोली इब्ने यजीद समेत दीगर की इबरतनाक दास्तान
सुनेंगे [संगीत] नाजरीन तारीख के मुताबिक इमामे अली मकाम इमाम हुसैन इब्ने अली अली सलाम की शहादत के बाद दुनिया में साथ दिन अंधेरा रहा धूप दीवारों पर पड़ती तो इंतहाई फीकी और दर्द रंग की होती कूफियों की फौजी के पास जरदरंग वाली घास थी वो सब मिट्टी हो गई बैतूल मुकद्दस के जी पत्थर को उठाया जाता उसके नीचे खून होता वो बैतुल्लाह इब्ने ज्याद के मकान में खून बा रहा था आसमान के किनारे सुर्ख हो गए और फिर ये सुरखी हॉकी होती गई जो अब भी शफात की सूरत में मौजूद है और कयामत तक रहेगी
7 दिन तक लगातार आसमान पर सितारे टूटे रहे एक शकी ने कर्बला में इमाम अली मकाम इमाम हुसैन इब्ने अली अली सलाम की शान में गुस्ताखी की थी एक सितारा टूट कर आया और उसको अंधा कर गया गोष्ट पकाते तो वह गोष्ट आपके अंगारे बन जाता फिर हिम्मत करके खाने लगता तो वो कड़वा होता मॉरीसन लिखने हैं की शहादते हुसैन के बाद जब हम सुख को उठाते तो तमाम बर्तन खून से भरे होते आबू सैड कहते हैं की दुनिया में कहानी भी कोई पत्थर उठा जाता उसके नीचे ताज खून पाया जाता आसमान से भी खून
बर्स और जी कपड़े पर भी पड़ा कपड़ा फटने तक भी सुर्ख रहसन शाम और कूफा के हर घर में खून ही खून था कूफा में एक शख्स ने इमाम अली मकाम की शान में गुस्ताखी की तो वो फौरन जल गया इमाम अली मकाम इमाम हुसैन इब्ने अली अली सलाम के कातिल ऐसी शदीद किम की प्यास में मुकाला हो गए की मश्मों की मास्क पानी पी जान पर भी प्यास एन बुझती चंद लोग एक जगह बैठकर जिक्र कर रहे थे की इमाम अली मकाम के मुकाबला में जी जिसने भी हिस्सा लिया वो बुरी तरह मुक्त ले
मुसीबत हुआ एक शख्स ने कहा की यह बात गलत है मैं भी उसे जंग में मौजूद था मुझे तो कुछ नहीं हुआ इस रात वो अपने घर गया चिराग की बत्ती दुरुस्त करने लगा तो आज ने उसके जिस को अपनी लपेट में ले लिया और फिर आज आज करता हुआ जहन्नुम में पहुंच गया उसका जिस लकड़ी के कोयल की तरह सिया हो चुका था जोहरी का बयान है की उनमें से कोई मारा गया कोई अंधा होकर मा गया किसी का मुंह कल हो गया किसी की सूरत मस्त हो गई वाकई कहते हैं की एक शख्स
को हुजूर नबी ये करीम सल्लल्लाहु अलेही वल्लम ख्वाब में मिले आपने अस्ति ने चढ़ाई हुई थी और हाथ में तलवार थी और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के कातिलों में से 10 आदमी युवक हुए आपके सामने पड़े थे वह शख्स कहता है की हुजूर ने मुझे गजब नाक होकर फरमाया तुमने मेरे बेटे के कातिलों की तादाद क्यों बधाई और फिर खून की एक सलाई मेरी आंखों में फ़िर दी जब मैं बदर हुआ तो मैं अंधा हो चुका था इब्ने जोजी कहते हैं जी शख्स ने कूफा से शाम जाते हुए इमामे अली मकाम इमाम हुसैन इब्ने अली अली
सलाम का 10 कपड़े में बांधकर घोड़े की गार्डन में लटकाया था उसका मुंह इम्तिहाई माकुर और कल हो गया था लोगों ने उससे पूछा की तू तो बड़ा खूबसूरत था तुझे क्या हो गया तो उसने बताया की मैंने इमाम के सर को दिन से घोड़े के साथ लटकाया है इस दिन से मुसीबत में मुकाला हूं वह शख्स इस मुसीबत में मुकाला रहा खाने लगा दो शख्स रात को आते हैं और मुझको उठा कर भटकती हुई आज पर ले जाते हैं और फिर उसमें धक्का दे देते हैं फिर मेरा सर झुकता है और आज चेहरे को
जलसती रहती है फिर वो बुरी हालात में इस अजब के साथ मारा नाजरीन इमाम अल अंबिया जनाबे मोहम्मद और रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलेही वल्लम का इरशाद है की मुझे जिब्रील ने बताया की हजरत ए याहिया अलैहिस्सलाम के कत्ल के बदले में 70 हजार आदमी कत्ल हुए थे और मेरे नवाज से के कत्ल के बदले में दो बार 70 हजार आदमी कत्ल होंगे और फिर यह फरमान पूरा होकर रहना हुसैन इब्ने अली अली सलाम पर का रहे और गजबे खुदा बंदी टूट पड़ा था और वह इंतिहाई खौफनाक मौत मा रहे थे नजरे जी शख्स ने इमामे
अली मकाम इमाम हुसैन इब्ने अली अली सलाम के कातिलों से बदला लिया उसे शख्स का नाम मुख्तार बिन अभी उबैद सफी था मुख्तार बिन अभी उबैद सफी एकम हिजरी में टाइप में पैदा हुए मगर परवरिश मदीना में हुई नाम मुख्तार और कुनियत आबू इस हक थी ताल्लुक बानो हवाजन के काबिले साकिब से था इसीलिए इन्हें मुख्तार बिन अभी उबैद सख्ती कहा जाता है इनके वालिद का नाम अभी ओ बेड़ा था जिन्हें हजरत उमर राजी अल्लाह हो ताला नॉन ने इराक की एक महिम में सिप सालार बना कर भेजो था जहां वह शाहिद हो गए थे
मुख्तार बिन अभी उबैद सख़्फी के बचपन में एक बार शेर खुदा अली अल मुर्तजा कर्म अल्लाह हूं वजूल करीम ने आपको खेलने हुए देखा तो शफकत से आपके सर पर हाथ फेरा और उन्हें नजरे जी वक्त वाक्य कर्बला पेस आया मुख्तार बिन अभी उबैद सख़्फी ओबेदुल्ला इब्ने ज्याद की कैद में अहलेबैट्टे अथर्व से मोहब्बत की जुर्म में कैद रहे जी तरह इमाम हुसैन इब्ने अली सलाम की शहादत के वक्त बिस्तर मेहरबानी अली को कैद में बैंड कर दिया गया था तारीख में कैदियों की ये तादाद कई लाख लिखी हुई है यानी गुफा के अहलेबैत से
मोहब्बत करने वालों को कैद करके ओबेदुल्ला इब्ने जायद ने ऐसे दिन फरोश अफराद के सपोर्ट कूफा कर दिया था जिन्होंने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के भेजें हुए अपने खास सफर और तायजाद भाई मुस्लिम बिन अखिल को तन्हा कर दिया और यूं उन्हें हालात में मजलूमियत में शाहिद कर दिया गया सबसे पहले मुस्लिम बिन अखिल जिसके घर तशरीफ़ ले थे और जिन्होंने मुस्लिम बिन अखिल को अपने घर बना दी थी वो मुख्तार बिन आबू उबैद सख़्फी ही थे नजरे मुख्तार बिन अभी उबैद सख़्फी ने कुछ लोगों को हम खयाल बनाया और कहा की हम कोन हुसैन का
इंतकाम लेंगे उसने लोगों को एक तहरीर दिखाई जो मोहम्मद बिन हनीफिया बिरादरी इमाम हुसैन के नाम से ठीक है हम तुझे इस अमर की इजाजत देते हैं की इंका में हुसैन लिया जाए नसरीन यहां मौजूद के दरमियां इख्तिलाफ है हाले तशरियों के मुताबिक मोहम्मद बिन हांफिया ने मुख्तार शक्ति के नाम वो तहरीर लिखी थी जबकि अहले सुन्नत के मुताबिक मुख्तार सफी की उसे तहरीर के हवाले से मोहम्मद बिन हनीफिया ने कहा था की हमने ऐसी कोई तहरीर नहीं भेजी तो हम इस बात पर तमाम और यकीन मुत्तफिक हैं के मुख्तार सखी के हवाले से मोहम्मद
बिन हनीफिया ने फरमाया था की अगर कोई नवाजी रसूल का इंतकाम लेट है तो हमें कोई एतराज नहीं और जनाबे मोहम्मद बिन हांफिया ने फरमाया था की अगर कोन हुसैन का बदला लिया जाए तो यह दुरुस्त है यहां तक के कूफा के वह लोग जो उसे वक्त खामोश थे अपनी गलती पर पछता रहे थे और तलाफी के तोर पर उसे तहरी को मजबूत करते गए और खुदा की उसे हम की अमली तफसीर बनकर सामने आए जो कोनी मूसा को बछड़ा पूजने की सजा पर हुआ था कल मूसा अली या कौमी इन नकुम सलाम तुम एनएफ
सुकून इत्तेफ़ाज़ एक मुलाई जिला बड़ी इकुम फकतुलु एनएफ सुकून बैरहाल मुख्तार बिन अभी का दूर ए चुका था और नंबर कातिल आने हुसैन का इंतकाम शुरू हो चुका था सिमर मल्हूं का अंजाम नाजरीन शिमार्जील रोशन को जब गिरफ्तार करके मुख्तार बिन अभी उबैद सख्ती के सामने लाया गया तो मुख्तार की आंखें गुस्से से सुर्ख हो गई गजब नाक होकर खड़ा हो गया और हिम्मत से खाने लगा जी हाथ से गार्डन ए हुसैन पर खंजर फेरा था उठा वह हाथ सिमर ने रॉक कर कहा की मैं प्यासा हूं पहले थोड़ा सा पानी पीला दो मुख्तार ने
कहा बाद वक्त तूने अहलेबैत मुस्तफा पर पानी बैंड किया था और अब पानी मांगता है फिर पहले नेज से मार मार कर उसको जख्मी किया और फिर कत्ल करके लाश कुत्तों के आगे फेंकवा दी एक रिवायत में है की पहाड़ों पर छुपता फिर रहा था तो उसको गिरफ्तार करके लाया गया और हालात किया गया हरमाला का अंजाम नसरीन हरमाला वो बदबख्त और मलून शख्स था जिसने 6 मा के जनाबे अली असगर के हलक पर तीर चलाया था जब मुख्तार शक्ति के सामने आया तो उसने सिपहिया को हम दिया के मासूम अली असगर का गलत चीरने
वाले हरामजादे के गले पर तीर चलाओ उसकी गार्डन खुटि्टयों में प्रयोग कर फिर उसके हाथ कटवाए गए फिर पाओ कटवाए गए और फिर आज जलाकर उसमें फेक दिया गया ये है खून ए अली असगर का इंतकाम होली बिन यजीद का [संगीत] इंतकामलुन था जिसने हुसैन इब्ने अली अली सलाम के कष्ट में रखकर दरबार शक्ति में पेस किया गया तो उसने कहा यही वो मजदूर है जिसने सारे शब्बीर को नेज पर चढ़ाया था यह कहकर उसने पहले उसका डायन हाथ काटा फिर बाय हाथ काटा फिर दोनों पाओ कैट दिए और फिर उसका धड़ सर से जुड़ा
करके फेक दिया स्नान अपने अनस मल्हूं का अंजाम नाजरीन इस शकील ने इमामे अली मकाम इमाम हुसैन इब्ने अली अली सलाम के साइन के आर-पार नेहा भी किया था और आपके सर को भी काटा था ये आगे आगे भगत और पनाह तलाश करता और मुख्तार की फौजी इसके पीछे-पीछे होती ये पहले बसरा गया वहां से कैट सिया और फिर कासिया और रेडिकल हिजानात के दरमियां गिरफ्तार कर लिया गया पहले इसकी उंगलियां कटी गई फिर हाथ फिर पाओ कटे गए और फिर इसके कान क्या दिए गए फिर खंजर से इसकी आंखें निकाल गई और रोकने जैतून
की देख चढ़कर इसको जिंदा उसमें दाल दिया गया था और जनाबे अब्बास अलमदार पर तीर चलाएं और उनके बाजू कलाम ने गिरफ्तार किया और फिर इस पर तीर चला कर वास ले जहन्नम कर दिया ओबेदुल्ला इब्ने ज्याद मल्हूं का अंजाम नजरें यह मद्दूद भी छुपा हुआ था जब मुख्तार शक्ति के लश्कर ने घेराव किया तो मुकाबला करता रहा आखिर गिरफ्तार होकर इस दारुल अमर के सामने लाया गया जहां बैठकर बड़े गुरुर और तकबुर के साथ अहले बेट अथर के साथ जुल्म के आ कम जारी करता था उसको गिरफ्तार करके उसके साथ तस्कर मास्क बंदी गई
और सिपाही उसके मुंह पर तमंचे करने लगे जब मुख्तार शक्ति के सामने आया तो उसने पहले उसके जिस की एक-एक बोई काटने का हम दिया जब उसका एक-एक कट गया तो फिर उसकी लाश पर घोड़े दौड़े गए फिर उसका सर कैट कर रख लिया गया और लाश को आज में फेक दिया गया उसका सर अभी लोगों के सामने ही पड़ा हुआ था की एक सांप नमूदार हुआ और उसके एक नथनी में घुसकर दूसरे नाथ ने से बेर ए गया उसे सांप ने ऐसा कई बार किया और फिर गायब हो गया यह था कोन हुसैन का
इंतकाम नाजरीन अब बात करते हैं कायनात के बेहतरीन जालिम मलून यजीद इब्ने माविया की एजाज ए मुकद्दस में इमाम हुसैन इब्ने अली अली सलाम की शहादत का बेहद गहरा असर हुआ और लोगों ने यजीद से मुस्तफा होना शुरू कर दिया कोन हुसैन इब्ने अली अली सलाम पुरी रनाई और बेलवाई जी के साथ अपने असरत म्यूरेटक कर रहा था जिन लोगों से जबरदस्ती यजीद ने बायत कुबूल करवाई थी वो भी और जिन्होंने खुद की थी वो भी अब यजीद की बात तोड़कर जनाबे अब्दुल्ला इब्ने जुबेर के हाथों पर बैठ कर रहे थे यजीद के जासूसों ने
उसे इत्तिला दी तो उसने आमले मदीना वलित को मजदूर करके उसकी जगह मोहम्मद बिन उस्मान को मदीना का गवर्नर बना दिया मगर लोग बदस्तूर यजीद इब्ने माविया से इजहारे नफरत कर रहे थे यजीद तो वही यजीद था जो पहले था फर्क सिर्फ यह है की इमाम अली मकाम उसके फिस्को फुजुर और हुडूड इस्लामिया को तोड़ने के मुतालिक पहले ही जानते थे और लोगों को अब मालूम हुआ अहले मदीना से कई लोग दमिश्क जा जाकर उसकी अय्याशी और साहसी के करतूत को अपनी आंखों से देख आए थे जब इब्ने उस्मान गवर्नर बन कर आया तो उसने
मदीना के बुजुर्गों को बुलाकर समझाया की यजीद के मुतालिक आप तक गलत अफवाएं पहुंची हैं इसलिए आप उसकी बायत ना तोड़े यह वह लोग थे जिन्होंने साहब इकराम रिजवानुल्लाही ताल अलेही अजमाइन की जिंदगियां के नमूने देखें हुए थे आसानी से कैसे मां जाते तो हम उन्होंने वादा कर लिया की हम खुद जाकर तस्दीक करते हैं अगर यजीद शरीयत की खिलाफ वजी करता हुआ ना पाया गया तो हमें कोई एतराज नहीं सोनाक्षी उन बुजुर्ग हस्तियां का वफद्दमेश को रावण हो गया गवर्नर ने अपने आदमी पहले ही रावण कर दिए ताकि यजीद को उसे वक्त की आमद
की इटला पहले हो जाए और वो उनके सामने अपनी हरकत से बाज रहे यजीद अपनी हरकत कैसे छोड़ सकता था जो कभी हाथ उसने इख्तियार की हुई थी उनसे कैसे बचत हां अलबत्ता उसने इतना जरूर किया की उसे वफा की दिल खोलकर शाहाना ठाठ से खिदमत की और काफी तहाएफ और ये निमत देकर उन्हें वापस कर दिया वो उन्हें कही और शामिल लोग समझ रहा था जिनको ख़ज़ाने के मुंह खोल कर दिए जैन तो खरीदा जा सकता है और यही उसकी गलती थी वो मदीना तो रसूल का वफा था और यह वह लोग थे जिनके
सामने सब इकराम रिजवानुल्लाही ताल अलेही अजमाइन की मुकद्दस जिंदगी की तस्वीर थी यह लोग मदिन मुनव्वर में पहुंचे तो उन्होंने साफ तोर पर आवामून नस को बता दिया की माविया का बेटा फानसिक फजर तारिक के नमाज है कुत्तों और बंदरों का शिकारी शराब पीने वाला और मोहर्रम आपको जय समझना वाला है कई लोगों ने बताया है वो शरीयत के केबिन की हरगिज़ परवाह नहीं करता वो अपनी मनमानी करता है उसका फेस को हुजूर इस कादर है मदीना यह मुनव्वर के लोगों ने सुना तो उन्होंने एकदम उसकी बायक तोड़कर अब्दुल्ला बिन जुबेर के हाथों पर बैठ
कर ली और फिर अब्दुल्ला बिन जुबेर मक्का ये मस्जिदों के आदिल बन गए अब यजीद इब्ने माफिया ने बड़ी सोचो बेचार के बाद मुस्लिम बिन यूकेबीए को लाश करेेजरार देकर मदीना पर चढ़ाई करने का हम दे दिया मुस्लिम बिन उफ़बा जिससे मुझमें सिर्फ बिन उफ़बा के नाम से याद किया जाता है उसको यजीद ने जो हुकुम दिया वो मौत अवर रिवायत के मुताबिक यह था की मदीना के लोगों से हरगज हरगज किसी नमी का सुलूक ना किया जाए उन लोगों के सर कलाम कर देना तुम्हें उन लोगों पर फतेह हासिल करने के लिए हर किम
की कार्यवाही की इजाजत है चुनाचे खबीस उमर दूध मुस्लिम बने मदीना तो रसूल पर फौजी खुशी कर दी हजरत ए मदीना के लोगों को साथ लेकर मुकाबला में आए मगर यजीद की फौजी बहुत ज्यादा थी बड़े-बड़े मुकद्दर और लोग शाहिद कर दिए गए और बिलाकिर फौजी यजीद मदीना पर कब्ज हो गई और फिर मदीना यह पाक की जो बेहुरमति वो हदे बयान से बहिर है उन्होंने दूसरे दिन नववी में घोड़े बंदे मोहम्मद अरबी सल्लल्लाहु अलेही वल्लम के मेंबर शरीफ को गलाजत से आलूदा किया खुदा की मार हो उन लोगों पर जन्नत की क्यारी में उन
लोगों के घोड़े लेद और पेशाब कर रहे थे और वो व्यहशत और बरबरियत की इंतिहान करते हुए मदीना तो रसूल की बहू बेटियों की इस्मत ल रहे थे तारीख के मुताबिक उन्होंने 1000 से भी ज्यादा पाक बाजू की इस्मतदारी की गुजर ए रसूल के बाहर 70 हजार मालिका एक तरफ दुरूद-ओ-सलाम की हड्डी पेस कर रहे थे और दूसरी तरफ यजीद इब्ने माविया के बदमाश जलालत में दुबे हुए जुल्म की इम्तिहान कर रहे थे ऐसी फौजी भेजना वाले पर लानत ऐसी फौजी पर लानत मदीना की बेहुरमति करने के बाद उसकी जगह आज लगा दी माजजनिको में
पत्थर रखकर कब पर बरसाए गए और कब को आज लगा दी गई खिलाफ एक कब जलने लगा मां जाला जुल्मी सितम की कोई ऐसी हद नहीं थी जो लश्कर यजीद ने ना तोड़ी हो और ये सब कुछ हम यजीद से हुआ था कर्बला के वाकियत में यजीद इब्ने को मुनवीस होने से बचाने वाले यजिदीअत में दुबे हुए लोग इस जुल्म का क्या जवाब पेस करेंगे मदीना में जो कयामत बर्प हुई उसको छोड़ दो सिर्फ यह बता दो की मदीने मुनव्वर पर फौजी खुशी की इस्लाम इजाजत देता है या नहीं मदीना वालों को खूब ज्यादा करने
वालों के लिए कुरान की क्या ताजिर है निगाह की हिमायत करने से शिवाय जिल्लत और आतिश जहन्नुम के और क्या हासिल होगा उधर खिलाफ एक कप जल रहा था और इधर यजीद इब्ने मुआवियर पर अज़ाब-ए-इलाही मुसल्लत हो चुका था उसको पेट के दर्द ने शादीन तकलीफ में मुकाला कर दिया अल्लाह ने उसे पर को लंच को मुसल्लत कर दिया एक ऐसी बीमारी जिससे आंतों में शाहिद दर्द शुरू हो गया हकीमी से कोई इलाज ना हुआ और दर्द बढ़ता गया वो ऐसे तड़पने लगा जैसे मछली पानी के बगैर तड़पती है उसने अपने बेटे को बुलाया और
खाने लगा की मुझे यकीन हो गया है की अब मेरी मौत का वक्त करीब है मैं तुम्हें उमरी सल्तनत से आ करना चाहता हूं बेटे का नाम निकली और खाने लगा जी ताज और तक पर आले रसूल के खून के डब्बे हो मैं उसको किसी सूरत को भूल नहीं कर सकता अल्लाह मुझे ऐसी मानस खिलाफत की हुकूमत से मैं रूम रख के जिसकी बुनियाद रसूलुल्लाह वास्तविक खून पर राखी गई अपने बेटे की बात सुनकर तड़प उठा और शिद्दत ए रंजू आलम से बिस्तर पर पाओ करने लगा और मौत से कुछ दिन पहले यजीद की आंखें
सब गई और उसमें कीड़े पद गए तकलीफ की शिद्दत से वो चीखें मारता था पानी का कटरा हलक से नीचे उतारने के बाद तीर की तरह चुभना लगा उसे पर अल्लाह ताला का अजीब गैर था की पानी के बगैर भी तड़पता था और पानी प्रकार भी चीखता था बिलाकिर इस दर्द की शिद्दत से तड़प तड़प कर उसकी मौत वाक्य हो गई और लाश से ऐसी हाल नाक बदबू आने लगी की कोई करीब ना चाहता जैसे-तैसे मालूम को दफन कर दिया गया तो उन्होंने उसकी हड्डियां जलन के लिए उसकी खबर कोड़ी तो वह पहले ही जाली
हुई और सीयती उसकी कब्र पर लोग पत्थर फेंका करते थे और बाबू सागर दानिश में जहां उसकी खबर थी अब वहां शीशे का कारखाना है और ठीक इस जगह शिक्षा डालने वाली भट्टी बनी हुई है मलून को दोनों तरफ से आज ने घर रखा है और उसकी सजा भी यही थी नाजरीन इसी उम्मीद के साथ इजाजत दीजिए की आपको हमारी वीडियो पसंद आई होगी मिलते हैं बहुत जल्द एक नई तारीखी टेकी की और मालूमात वीडियो के साथ देखते रहिए इन्फो आते आदिल अल्लाह रबल इज्जत आपका हम ही होना सर हो [संगीत]