गिद ने बताया कि इन चार लोगों को जो छोटा समझता है वह चोट जरूर खाता है मित्रों बात बहुत पुरानी है जब हमारे यहां गिद बहुत बड़ी तादाद में रहती थी उन्हीं दिनों जंगल में एक पेड़ पर घोसला बनाकर एक गिद अपने बच्चों के साथ रहता था गिद के बच्चे अभी छोटे ही थे गिद रोजाना जंगल में निकल जाता था और मरे हुए जानवरों का मांस अपने बच्चों के लिए लेकर था गिद्द की जिंदगी बड़े आनंद से गुजर रही थी एक दिन की बात गिद्द पूरे जंगल में भटकता रहा उसे कहीं अपने बच्चों के लिए
भोजन नहीं मिला इधर गिद्द के बच्चे घोसले में भूख से तड़प रहे थी आज उन्हें भोजन के बिना काफी समय बीत गया था वे भूख से बुरी तरह बेचैन थ गिद उने भूख से व्याकुल देखता तो भोजन ढूंढने के लिए चल देता काफी देर जंगल में भटक के बाद उसकी नजर एक लोमड़ी के बच्चे पर पड़ी जो अभी छोटा ही था उसे देखकर गिद बड़ा खुश हुआ सोचने लगा कि क्यों ना आज इसे ही उठा ले जाऊ इसका नरम नरम मांस मेरे बच्चों को खूब पसंद आएगा अब तो गिद ने बिना एक पल का समय
गवाए झपट्टा मारकर उस लोमड़ी के बच्चे को पंजों में जकड़ लिया और उसे लेकर र चला लोमड़ी का वो बच्चा गिर्द के पंजों में चीखता जा रहा था इधर अपने बच्चे की चीख पुकार सुनकर लोमड़ी व्याकुल होकर भागने लगी बच्चे को मौत के मुंह में देखकर लोमड़ी बहुत घबराई वह रोती हुई गिद का पीछा करती करती उसी पेड़ के नीचे आ पहुंची जिस पर गिद का घोसला बना हुआ था गिद उसके बच्चे को घोसले में रखकर नोचने खसने में लगा वोह बच्चा बुरी तरह पीड़ा से चिल्ला रहा था की चीख पुकार सुनकर लोमड़ी का हृदय
बैठा जा रहा था आखिर वह एक मां थी वो रोने और गिड़गिड़ा के अलावा और कुछ कर भी क सकती थी लोमड़ रो रोकर गिद से विनती करने लगी हे गिद भैया मेरे बच्चे को मत मारो मेरा इकलौता बच्चा है मैं इससे बहुत प्यार करती हूं तुम्हारे बच्चों के लिए तो भोजन और भी मिल जाएगा अगर मेरा बच्चा मर गया तो मैं इसे कहां से लाऊंगी तुम इस पर दया दिखाओ मैं तुम्हारा जीवन भर उपकार मानूंगी और तुम्हें और तुम्हारे बच्चों के लिए रोजाना दुआए करूंगी गिद्द बोला लोमड़ी क्यों यहां व्यर्थ में खड़ी रो रही
है दया जैसे शब्द हम गिदों के पास नहीं होते तेरा इस प्रकार रोना गिड़गिड़ाना अब बेकार ही है मैं हाथ आए शिकार को भला कैसे छोड़ सकता हूं तेरे बच्चे का नरम नरम मांस खाकर मेरी बच्ची बहुत खुश होंगे काफी दिनों के बाद तो इन्हें इतना अच्छा भोजन मिला है और तू कह रही है कि मैं इसे छोड़ दूं तू पागल तो नहीं हो गई हे लोमड़ी तू यहां से भाग जा और खड़ी खड़ी तू व्यर्थ अपना मुंह बका रही है अपने बच्चे की आस छोड़कर यहां से चली जा तेरी प्रार्थना से मेरा हृदय नहीं
पसीज वाला दर्शक बंधुओं गिद के कठोर वचन सुनकर लोमड़ी कहती है हे गिद भैया यह तुम क्या कह रहे हो तुम तो समस्त पक्षियों के राजा हो तुम इस जंगल में भला किस चीज की कमी है जहां से चाहो वहां से भोजन इकट्ठा कर सकते हो किंतु मेरे बच्चे को छोड़ दो मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूं और अपने कोमल बच्चे के प्राणों की भीख मांगती हू कृपया एक मां की पीड़ा को समझो कोई मां अपने बच्चे को मरता हुआ नहीं देख सकती लोमड़ के बारबार विनती करने पर भी गिद का हृदय नहीं पसीजा गिद्द
और गिद्द के बच्चे लोमड़ के बच्चे को उसके सामने ही नोच नोच कर खाने लगे चीख पुकार करता हुआ लोमड़ी का बच्चा बेदम हो गया अपने बच्चे को अपनी आंखों के सामने इस तरह मरते देखकर लोमड़ी के क्रोध की सीमा नहीं रही वह समझ गई कि दुष्ट के आगे रोने कल्पने का कोई फायदा नहीं दुष्ट कभी प्रार्थना से उपदेश से कभी नहीं समझता वो तो सिर्फ दुष्टता को ही मानता है नीम की जड़ में मीठा दूध डालने से भी उसमें मिठास नहीं आ सकती कहते हैं दुष्ट के साथ दुष्टता का ही बर्ताव करना चाहिए लोम
कहने लगी ओ नीच पापी तुझे मैं तेरी करनी का ऐसा मजा चंगी कि तू जब तक जिएगा तब तक आंसू नहीं पहुंच पाएगा गिद को अपने बल पर बड़ा गुमान था और उसे इस बात का भी बड़ा घमंड था कि वो पेड़ के सबसे ऊपरी हिस्से पर बैठता है उसके पास लोमड़ी भला क्या पहुंच पाएगी गिद्द हसता हुआ लोमड़ी की खिल्ली उड़ाने लगा कहने लगा अरे धूर्त लोमड़ी मैं तेरी धमकी से बिल्कुल भी नहीं डरने वाला ज भाग यहां से और कहीं और जाकर अपने गाल बजा लोमड़ी चुप हो गई और उसने इधर उधर देखा
तो उसे एक जगह कुछ आग जलती हुई दिखाई दी उसने गिद को नीचा दिखाने का उपाय खोज लिया था लोमड़ी ने आसपास से कुछ लकड़िया इकट्ठी की कुछ सूखे पत्ते लिए और वृक्ष के नीचे जमा कर दिए और एक जलती हुई लकड़ी मुंह में दबाकर लाई और उन लकड़ियों के ढेर में रख दी सूखे पत्तों ने झट से आग को पकड़ लिया देखते ही देखते आग की लपटे आसमान को छूने लगी वृक्ष पर जो सूखे पत्ते और सूखी डालिया थी उनमें भी आग पहुंच गई अब तो वह वृक्ष धू धू करके जलने लगा आख की
तपन को गिद सहन नहीं कर सका विवस हो कर के उसे अपने घोसले से हटना पड़ा परंतु गिद के बच्चों को अभी उड़ना नहीं आता था इसलिए आग में झुलस झुलस कर नीचे गिरने लगे लोमड़ी भी उन्हें एक एक करके उठा उठा कर खाने लगी गिद दूसरे पेड़ पर बैठकर अपने बच्चों की यह दुर्दशा देख रहा था वो देख रहा था कि उसके बच्चे आग से झुलस करर नीचे गिर रहे हैं और लोमड़ी उन्हें उठाकर खा लेती है वो चाहकर भी अपने बच्चों को नहीं बचा पा रहा था जिस तरह उसने लोमड़ी के बच्चे को
मारा था उसी तरह लोमड़ी उसके बच्चों को मार रही थी गिद्द का सारा घमंड चूर चूर हो चुका था वह रोते रोते लोमड़ी से बोला बहन मैंने जैसा किया था वैसा फल भोग लिया तूने अपने बच्चे का बदला मुझसे ले लिया है मेरा पूरा परिवार नष्ट हो गया है मैं समझ चुका हूं कि बुरे का बुरा ही अंजाम होता है मेरी यह गलती है कि मैंने आपको तुच्छ समझा किसी को छोटा या तुच्छ समझकर उसकी अलना नहीं करनी चाहिए मैं पहले ही ठीक था जो मरे हुए जानवरों का मांस खाकर जी रहा था लेकिन तुम्हारे
बच्चे को मारकर ने अच्छा नहीं किया विद्वान लोग कहते हैं कि इन चार चीजों को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए जो लोग इन चार चीजों को छोटा समझते हैं वे चोट जरूर खाते हैं नंबर एक आग नंबर दो शत्रु नंबर तीन कर्जा नंबर चार रोग कहते हैं इन चारों के शेष को भी कभी शेष नहीं छोड़ना चाहिए यदि यर थोड़े भी शेष रह जाते हैं और मनुष्य इनकी अवमानना कर देता है तो समय के साथ यह भयंकर रूप ले लेते हैं और लापरवाही बरतने वाले को नष्ट कर डालते हैं कहते हैं जिसका घर नदी के
किनारे हो जिसकी पत्नी दूसरे का संग करती हो जिसके घर में सर्प का वास हो जो दूसरे के आधीन रहता हो पराए घर में निवास करता हो संख्या में जिसके शत्रु अधिक हो उसे कभी सुख की कल्पना नहीं करनी चाहिए वो सारे जीवन दुख और कलेश में चिंताओं और भय में घिरा रहता है दर्शक बंधुओं आज गिद्ध को अपनी करनी का दंड मिल गया तो चलिए दोस्तों मिलते हैं आपसे अगली वीडियो में एक और चर्चा के साथ आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद जय श्री कृष्णा