हेलो दोस्तों वेलकम टू पीडब्ल्यू ओनली आईएएस दोस्तों आपके पीछे दो शब्द लिखे हुए हैं करंट अफेयर्स जब हम बात करते हैं यूपीएससी एग्जाम की या डिफरेंट डिफरेंट स्टेट पीसीएस के एग्जाम्स की तो वहां पर करंट अफेयर्स का रोल आप सभी जानते हैं कि बहुत ही इंपॉर्टेंट होता है अलग-अलग एग्जाम में इनकी अलग-अलग इंपॉर्टेंस है इसी इंपॉर्टेंस को समझना हमारे लिए इंपॉर्टेंट बन जाता है क्योंकि आप नोटिस करो आजकल जो एग्जाम्स के अंदर क्वेश्चंस आ रहे हैं ना वहां पर डेफिनेटली चीजें करंट से पूछी जा रही हैं बट उनका लिंकेज कहीं ना कहीं स्टैटिक के साथ
भी होता है यही जो लिंकेज है नाना आज हम समझने की कोशिश करेंगे और आज के सेशन के अंदर हम पिछले 6 महीने के करंट अफेयर्स डिस्कस करने की कोशिश करेंगे तोय जो पूरा एक कंप्रिहेंसिव वीडियो होगा यह आपको एक आईडिया देगा कि कैसे चीजों को हम कनेक्ट करते हैं किस तरह से आपकी अंडरस्टैंडिंग को और बेटर किया जाता है करंट का मतलब सिर्फ ये नहीं है कि आपने ये रट लिया ये न्यूज़ ये रट लिया ये न्यूज़ नहीं उसको कहीं ना कहीं जिस एंगल से यूपीएससी एग्जाम में क्वेश्चन पूछता है ना उस एंगल से
समझना इंपॉर्टेंट है तो डेफिनेटली मैं आपको यही रिकमेंड करूंगा कि आज के सेशन को आप स्टार्टिंग से लेके अंत तक अच्छे से देखिएगा ताकि आपको कंप्लीट क्लेरिटी मिल पाए करंट अफेयर्स के रिगार्डिंग दोस्तों आज के सेशन को हम स्टार्ट करेंगे बट उससे पहले आपके लिए एक छोटे सी इंफॉर्मेशन है आप सभी सीजन के बारे में जानते होंगे पिछली बार जो सीजन का इनिशिएटिव था बहुत ही हेल्पफुल रहा बच्चों के लिए बहुत सारे एस्परेंस के द्वारा आप लोगों ने बहुत सारे वीडियोस देखे होंगे जिन्होंने सीजन की काफी तारीफ करी थी अब बच्चों की बहुत ज्यादा डिमांड
थी कि सर 2025 के लिए भी आप श्रीजन का जो हमारा जो प्रोग्राम है टीजन जो इनिशिएटिव है उसकी आप शुरुआत कीजिए तो इसी वजह से इस बार थोड़ा जल्दी ये इनिशिएटिव स्टार्ट हो रहा है ताकि प्रीलिम्स मेंस और प्रॉपर मेंटरशिप इसके माध्यम से मिल पाए यही फोकस है हमारा कोशिश यही है कि सीजन के माध्यम से ना कोई भी बच्चा जिसको यहां पे एक सपोर्ट सिस्टम चाहिए इस एग्जाम को क्रैक करने के लिए वो सपोर्ट सिस्टम सीजन जैसा कि पिछले सालों में रहा है इस बार और भी एक तरह से एनहैंस्ड तरह से आपके
सामने है यहां पर आप नोटिस कर पाओगे कि सीजन के माध्यम से आप डेली बेसिस के ऊपर एमसीक्यू और साथ ही साथ मेंस के करेस्पॉन्डिंग्ली इसके अलावा आपके सीजन प्रोग्राम के अंदर बहुत सारे सेक्शनल टेस्ट एंड आपको फुल लाट टेस्ट मिलेंगे इवन आपका ना वीकली बेसिस के ऊपर आपकी टेस्ट प्रैक्टिस भी होती रहेगी ठीक है रेगुलर भी हो रही है डेली बेसिस के ऊपर एंड वीकली बेसिस के ऊपर भी होती रहेगी ताकि जो आपने एक हफ्ते के अंदर पढ़ा हुआ है ना आप उसको और अच्छे से कंसोलिडेट कर पाओ इवन यहां पे एक बहुत इंपोर्टेंट
कंपोनेंट है दैट इज पर्सनलाइज मेंटरशिप क्योंकि देखो कई बार हमारी तैयारी चल रही होती है कई बार शायद पटरी से थोड़ी सी तैयारी कई बार नीचे चली जाती है ऐसे समय के ऊपर जो मेंटरशिप है हमें मदद करेगी सनेही डायरेक्शन के ऊपर लेके जाने के लिए राइट तो मेंटरशिप का और भी बहुत रोल है आपके आंसर चेकिंग के अंदर आपके एमसीक्यू के अंदर क्या स्ट्रेटजी आप अडॉप्ट कर सकते हो तो सारे कंपोनेंट्स आपको इस पर्टिकुलर इनिशिएटिव में देखने को मिल जाते हैं तो ध्यान रखिएगा ये जो इनिशिएटिव है ये डेफिनेटली आप ऑनलाइन जॉइन कर सकते
हैं साथ ही साथ ऑफलाइन भी आप इसको जवाइन कर पाओगे इंग्लिश एज वेल एज हिंदी दोनों माध्यम के अंदर आप इस इसको जवाइन कर सकते हो तो दोस्तों ध्यान रखिए प्रीलिम्स मेंस टेस्ट सीरीज एंड मेंटरशिप प्रोग्राम आप सभी के लिए बहुत ही बेनिफिशियल है एंड यह बहुत जल्दी स्टार्ट होने जा रहा है यहां पर आप कांटेक्ट नंबर भी देख पाओगे 8045 अ 88 8846 कोई भी क्वेरी आती है तो हमारी टीम को रीच आउट कर सकते हो बाकी इसका जो लिंक होगा मैं नीचे डिस्क्रिप्शन में दे दूंगा ताकि आप वहां से जाके इस पर्टिकुलर इनिशिएटिव
को जवाइन कर पाओ एंड अपनी प्रिपरेशन को और भी बेहतर कर पाओ तो चलिए दोस्तों बिना कोई टाइम वेस्ट किए हुए स्टार्ट करते हैं जो बहुत बहुत इंपॉर्टेंट करट अफेयर की वीडियो है चलिए शुरू करते हैं सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही इंटरेस्टिंग फैसला दिया है यहां पर इन्होने बात करी है दरअसल मैं आपको बताता हूं कि जैसे अरुणाचल प्रदेश के ना एक एमएलए है उनके द्वारा यहां पर जब भी इलेक्शन लड़ा जाता है तो आप जानते होंगे इलेक्शन से पहले क्या होता है इलेक्शन से पहले जब कोई अपना पर्चा फिल करता है राइट कि वह
इलेक्शन में खड़ा होना चाहता है तो उनको क्या देना पड़ता है एक एफी डेबिट देना पड़ता है ठीक है क्या होता है ए डेबिट के अंदर इस एफी डेबिट के अंदर बात करी होती है कि उनके ऊपर कितने क्रिमिनल रिकॉर्ड वगैरह क्या है राइट एंड साथ साथ इसमें लिखा होता है उनके एसेट और लायबिलिटी के बारे में कितने का लोन ले रखा है घर कितने का है इस तरह से गाड़ियां क्या-क्या है बहुत सारी ऐसी चीजें होती हैं जो उनको एसेट और लायबिलिटी के अर डिस्क्लोज करनी पड़ती है एजुकेशनल इंफॉर्मेशन में इनकी होती है फिर
एक बार जब उनका चुने जाते हैं अगर उनका सक्सेसफुल हो जाते हैं तो जब भी आप मेंबर ऑफ पार्लियामेंट बनते हो या फिर एमएलए बनते हो तब आपको एक प्रॉपर डेक्ले रेशन देना पड़ता है इसी चीज का आपके एसेट लायबिलिटी का ठीक है ना अगर आप लोकसभा में हो तो स्पीकर साब को दोगे अगर आप राज्यसभा के हो तो वहां पर आपके जो चेयरमैन साहब होते हैं उनको दोगे एंड अगर आप एमएलए वगैरह हो तो आप अपनी स्टेट्स के केस में उस तरह से आप प्रोवाइड करते हो ठीक है तो ये जो अरुणाचल के एमएलए
थे ना इन्होंने अपना कुछ डाटा वगैरह दिया था ये जो मैं एसेट एंड लायबिलिटी की बात कर रहा हूं उसके अंदर इन्होंने कुछ चीजें मिस कर गए बहुत छोटी-छोटी चीजें थी जैसे इन्होंने रेंट वगैरह दिया अपना बिजली का रेंट वगैरह कोई पेंडिंग तो नहीं है या फिर ऑन द अदर हैंड घर पर कोई स्कूटी वगैरह ऐसे छोटी छोटी चीज कुछ पाज 100 हज वाली चीजें कुछ बहुत ही माइन्यूट चीज मिस कर ग अच्छा ठीक है तो इनके ऊपर फिर इनके जो अपोजिशन वाले थे उन्होंने केस चला दिया कि भाई इन्होंने तो गड़बड़ करी है इन्होंने
पूरी इंफॉर्मेशन नहीं दी तो भाई सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है सुप्रीम कोर्ट ने बोला है कि हां जी देखो कै हमारे जो जनता है उनके पास राइट टू इंफॉर्मेशन बिल्कुल है बट एट द सेम टाइम राइट टू प्राइवेसी भी है लोगों का राइट टू इंफॉर्मेशन को हमें बैलेंस करना पड़ेगा जो कैंडिडेट की राइट टू प्राइवेसी है तो अगर कैंडिडेट ने कुछ छोटी मोटी आइटम्स मिस कर भी दी जिनकी हाई वैल्यू नहीं है उस केस में उसके ऊपर कोई एक्शन नहीं लेया जाएगा यानी कि हर आइटम डिक्लेयर करना जरूरी नहीं है इसका मतलब पता क्या
है देखो मैं आपको एक एग्जांपल बताता हूं मान लीजिए आपके पास ना 00 400 की कोई घड़ी है ठीक है ना होती है तो अगर किसी कैंडिडेट ने यह डिक्लेयर करना भूल गया कि भाई मेरी 00 वाली घड़ी है तो उसके ऊपर ऐसा नहीं है कि उसको बोलेंगे भाई तू अब हट जा तूने झूठ बोला है नहीं पर अगर लेट्स से किसी के पास ₹ लाख वाली घड़ी है कुछ बहुत ही लग्जरी घड़ी लेकर बैठा हुआ है और वो डिस्क्लोज नहीं करता तब कहीं ना कहीं वो चीज गलत है तो एक्चुअल में ना सुप्रीम कोर्ट
ये कहना था कि ये जो चीजें हम देख रहे हैं जो इनसे एसेट लायबिलिटी पूछ रहे हैं इनसे ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इनका रवैया क्या है रहने का रवैया क्या है कैसे रहते हैं कैसा लाइफ स्टाइल कैसा है वो सारी चीजें जानने का परपस था समझे इस बात को तो यहां पर थोड़ा डिस्कस कर लेते हैं कि आखिर मूवेबल एसेट्स क्या होते हैं और इमूवेबल क्या होते हैं देखो नाम में क्या है मूवेबल जिसको मूव किया जाए जैसे फॉर एग्जांपल आपकी गाड़ी आपका ज्वेलरी आपका लैपटॉप है इनको आप आसानी से एक
जगह से दूसरी जगह लेके जा सकते हो इसीलिए इनको फ्लोटिंग एसेट्स भी बोला जाता है अब जब ये हमारा रजिस्ट्रेशन एक्ट की हम बात करें ना तो उसमें और भी चीजें आ जाती है जैसे आपके पास कितनी लकड़ी है कितने पास आपके घास वगैरह कितना है आपके पास फ्रूट्स वगैरह कितने हैं ठीक है ना ये सारी चीजें याद आती है उसी तरह से एक क्या होती है इमूवेबल एसेट इमूवेबल जिसको मूव करना काफी मुश्किल होता है जैसे फॉर एग्जांपल आपका जो फिक्स एसेट हो गया आपका घर हो गया आपकी दुकान आपकी फैक्ट्री इनको एक जगह
से दूसरी जगह थोड़ी लेके जा सकते हो बहुत मुश्किल है राइट तो ये आ जाते हैं आपके इमूवेबल के अंदर इनके अंदर आपके आपके पेड़ वगैरह भी इनके अंदर ही इंक्लूड कर लिए जाते हैं क्योंकि इनको ना कहीं ना कहीं बहुत मुश्किल है ट्रांसफर करना या तो आप विल बनाओ तब जाके ट्रांसफर होगा या किसी को गिफ्ट करो उसके बिना तो नहीं ये ट्रांसफर हो पाएंगे राइट तो इसी तरह से जैसे मैं आपको बता रहा था जब कोई इलेक्शन के लिए खड़ा होता है तो उसको एफिट देना पड़ता है एंड जब इलेक्शन के रिजल्ट आ
जाते हैं और वो बंदा सक्सेसफुल हो जाता है तो आपके लोकसभा के एमपी को स्पीकर साहब को ये डिक्लेरेशन दे देनी पड़ती है राज्यसभा के एमपी को चेयरमैन साहब को राज्यसभा के एंड इसी तरह से एमएलएस को भी देनी पड़ती है तो सुप्रीम कोर्ट ने यही बोली है कि भैया कुछ ऐसी छोटी-मोटी इंफॉर्मेशन अगर वो मिस कर गया तो इसको करप्ट प्रैक्टिस की तरह नहीं माना जाए अदर वाइज क्या होता है ऐसी कुछ इंफॉर्मेशन जो इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन है अगर वो मिस करता है ना तो इसको करप्शन की कैटेगरी में माना जाता है अंडर द सेक्शन
123 ऑफ आरपीए एक्ट राइट तो ये क्राइटेरिया है कि जो केस बाय केस बेसिस पे देखा जाएगा हर चीज को डिक्लेयर करना यहां पे जरूरी नहीं है एसेट इस को इसीलिए डिक्लेयर किया जाता है ताकि वोटर्स की पार्टिसिपेशन इंक्रीज कर पाए तो वोटर्स के पास राइट टू इंफॉर्मेशन बिल्कुल है पर कहीं ना कहीं उसको हमें बैलेंस्ड अप्रोच रखनी पड़ेगी बिटवीन द कैंडिडेट्स राइट टू प्राइवेसी एंड वोटर्स राइट टू एक्सेस इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन ठीक है ना तो ये सेक्शन 123 डेफिनेटली याद रखिएगा जो यहां पर बात करी गई है करप्ट प्रैक्टिसेस की जिसमें आपका ब्राइबरी आ गया
अनड्यू इन्फ्लुएंस आ गया कुछ फाल्स इंफॉर्मेशन देना ये कहीं ना कहीं ब्राइबरी कहलाता है पर वही है अगर छोटी-मोटी इंफॉर्मेशन मिस हो जाए वो यहां पे करप्शन के अंदर नहीं आता बाकी अनड्यू इन्फ्लुएंस आप समझ लो कोई भी पर्सन जो कहीं ना कहीं हाम का थ्रेट करता है ठीक है ना या फिर किसी जगह से उसको एक्सपेल करने की बात करता है ये सारे अनड्यू इन्फ्लुएंस के अंतर्गत आ जाते हैं नेक्स्ट चलते हैं अगले टॉपिक की तरफ दैट इज वोट फ्रॉम होम अब ये क्या चीज है देखो ईसीआई इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने ना फैसिलिटी
प्रोवाइड करी है होम वोटिंग की फॉर द एल्डरली एंड पर्सन विद डिसेबिलिटी इन द 2024 लोकसभा इलेक्शंस देखो आप इस चीज को नोटिस करिएगा कि जैसे कुछ कैटेगरी ऑफ वर्कर्स होते हैं या फिर कुछ कैटेगरी ऑफ पर्सन होते हैं जैसे फॉर एग्जांपल कुछ लोग होंगे जो जो एसेंशियल सर्विसेस के अंदर एंप्लॉयड होंगे यहां पर एसेंशियल सर्विस के अंदर वो लोग आ जाएंगे जैसे आपके मेट्रोस के अंदर काम करने वाले रेलवेज हो गया हेल्थ केयर हो गया ये सारे ये कहीं ना कहीं एसेंशियल सर्विसेस के अंदर आते हैं एज पर द रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट 1951
साथ में आपके जो सीनियर सिटीजन जिनकी एज काफी ज्यादा हो चुकी है 85 इयर्स से ऊपर हो गए हैं पर्सन विद डिसेबिलिटी हो गए हैं या फिर कोविड-19 के सस्पेक्टेड या अफेक्टेड पर्सन है तो आप नोटिस करोगे तो यहां पर ये सबको ना इंक्लूड किया गया है अंडर द कैटेगरी ऑफ अब्सेंटी वोटर ठीक है ना तो जो एब्सेंट वोटर्स हैं एज पर रूल 27a ऑफ कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल 1961 इनको यहां पे अलाउ कर दिया गया है वोट फॉर वोट फ्रॉम होम का ठीक है ना तो ये इनके पास फैसिलिटी होगी अगर यह चाहे तो
अपने घर से कहीं ना कहीं यहां पे वोट कर सकते हैं ऑलरेडी आप नोटिस करोगे ये जो चीजें होती हैं जैसे पोस्टल वोटिंग के बारे में आप जानते होंगे जैसे फॉर एग्जांपल कुछ मीडिया पर्सन होते हैं जो पोलिंग एक्टिविटीज को कवर करते हैं एट द सेम टाइम सर्विस वर्कर्स हो गया आपके आर्म्ड फोर्सेस के अंदर जो काम करते हैं सीपीएफ अंदर काम करने वाले इलेक्शन ड्यूटी के ऊपर जो लोग होते हैं वो कहीं ना कहीं अपनी वोट्स को कास्ट नहीं कर पाते तो उनके लिए पोस्टल वोटिंग की फैसिलिटी है इसी तरह से जो प्रीवेंटिव डिटेंशन
के अंदर होते हैं उनके भी यहां पे फैसिलिटी ये देखने को मिल जाती है तो वोट फ्रॉम होम का प्रोसीजर कुछ ऐसा रहेगा कि आपको ना इलेक्शन कमिशन ऑफ इंडिया की वेबसाइट से या फिर डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन कमिशनर के ऑफिस से यहां पर आप एक फॉर्म डाउनलोड करोगे डाउन 12 डी फॉर्म ठीक है ना ये कहीं ना कहीं एप्लीकेशन उसके गार्डिंग फाइल करनी पड़ेगी एंड फिर आपके घर के ऊपर दो पोलिंग ऑफिशल्स आएंगे साथ ही साथ एक पर्सन आएगा वीडियो ग्राफ लेने के लिए एंड एक सिक्योरिटी पर्सन आएगा इसके द्वारा मतलब इंश्योर ये किया जा रहा
है कि ऐसा ना हो कि बंदा घर से वोट कर रहा है तो किसी के दबाव के अंदर किसी के प्रेशर के अंदर वोट करें नहीं इसीलिए पोलिंग ऑफिशियल वीडियोग्राफर ऑफ सिक्योरिटी वर्शन आएंगे एंड वहां पे आप अकॉर्डिंग वोट कर पाओगे और दो बार कोशिश करी जाएगी अगर मान लो आपको पहले टाइम बता दिया जाएगा कि भाई हम 19 तारीख को 6:00 बजे या 4:00 बजे इतने बजे आएंगे अगर आप उस टाइम घर पे नहीं मिलते फिर एक बार और ट्राई किया जाएगा मान लो 21 तारीख को 2 बजे अगर दो बार के बाद भी
आप अपने घर पर नहीं मिलते हो तो इसका मतलब फिर आपको तीसरा मौका नहीं दिया जाएगा फिर आप वोट नहीं डाल पाओगे तो ये कुछ चेंजेज थे जो यहां पे अभी इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने अलाउ कर दिए हैं ई विजल सिटीजन ऐप अब ये क्या चीज है देखो जैसा मैंने आपको कहा कि इलेक्शंस आ रहे हैं देश के अंदर तो आप जानते हो देश में क्या लगा हुआ है सर एमसीसी लगा हुआ है व्हाट इज एमसीसी मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट बिल्कुल सही बात है अब मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट है डेफिनेटली आपके पॉलिटिकल पार्टीज को
आपके जो कैंडिडेट्स हैं उनको बहुत सारी चीजें फॉलो कर होती हैं पर क्या वो फॉलो होती हैं द आंसर इज नो ठीक है बहुत सारी उनकी वायलेशंस देखने को मिलती हैं फॉर एग्जांपल कई जगह आपको देखने को मिल जाएगा कि कहीं दारू बटर है कहीं पर कुछ फ्री में पैसे दिए जा रहे हैं कहीं पेड न्यूज़ हो गया हेट स्पीच हो गया प्रॉपर्टी डिफेसमेंट हो गया पैसा डिस्ट्रीब्यूटर जा रहा है राइट वोटर ट्रांसपोर्टेशन फायर आर्म्स हो गया इस तरह की अलग-अलग चीजें हो रही हैं ये सारी चीजें आती हैं आपकी मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट एमसीसी
के वायलेशंस के अंदर तो यहां पर इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ईसीआई ने सोचा यार एमसीसी की इतनी सारी वायलेशंस होती हैं तो क्यों ना थोड़ी पावर हम सिटीजंस या नागरिक के हाथ में दे दें बिल्कुल ठीक बात है तो क्या पावर दे दी सिटीजंस के हाथ में सिटीजंस को बोला गया कि यार आपको कहीं एमसीसी का वायलेशन देखने को मिल रहा है कोई दिक्कत नहीं आप ये ऐप है सी विजल ए ठीक है आप इस पे जाइए अपने अकाउंट को वेरीफाई कीजिए जो भी आपको जगह प दिख रहा है जहां पर ये कुछ भी ये
चीज होती हुई देखने को मिल रही है सभी चीजों में से आप उसकी फोटो या वीडियो हमें शेयर कर दीजिए इस ऐप के ऊपर इस ऐप के अंदर जीपीएस भी लगा हुआ है तो ऑटोमेटिक ना जिस जगह के ऊपर ये वायलेशन हो रही है तो ईसीआई के पास वो डाटा भी पहुंच जाएगा एंड अकॉर्डिंग आपकी कंप्लेंट दर्ज हो जाएगी फिर उसका आप स्टेटस भी ट्रैक कर सकते हो इसके लिए ये ऐप यहां पे बनाई और आपकी अगर मैं बात करूं ना ईसीआई इन्होंने ये भरोसा किया कि हम कोशिश करेंगे 100 मिनटों के अंदर आपकी जो
कंप्लेंट है उसका निपटारा हो जाए आप लोग सोचोगे सर 100 मिनटों के अंदर कैसे हो पाएगा ये चीज देखो एक्चुअल में क्या होता है ना जैसे ही एक सिटीजन ने क्या किया एमसीसी वायलेशन इंसीडेंट शेयर किया तो डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल यूनिट जो होगा वो अलॉट करेगा फ्लाइंग स्क्वाड को वो आपके घर के आपके एरिया के आसपास कोई भी हो सकता है वहां पर 15 मिनट के अंदर वहां पे उनकी टीम वहां पे पहुंच जाएगी जहां पर भी वायलेशन हुआ है एंड अकॉर्डिंग वहां पे इंक्वायरी करके रिपोर्ट करके वो रिटर्निंग ऑफिसर को रिपोर्ट भेजेगी कि हां या
तो उस कंप्लेंट को ड्रॉप कर दिया जाएगा या डिस्पोज कर दिया जाएगा या फिर उसको आगे एस्केलेट कर दिया जाएगा 50 मिनटों के अंदर तो 100 मिनटों के अंदर इस तरह से निपटारा हो जाएगा तो ऐसा बताया जा रहा है कि जब से एमसीसी स्टार्ट हुआ है ना मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट अभी लगा है टोटल 79000 जो कंप्लेंट्स थी वो यहां पे अभी तक रिसीव हो चुकी हैं इनमें से 99 पर कंप्लेंट्स का निपटारा हो चुका है एंड 89 पर जो कंप्लेंट्स थी उनका निपटारा 100 मिनट से कम टाइम के अंदर हो चुका है तो
दरअसल में जो सी विजल पप है ना उसके दो फंडामेंटल प्रिंसिपल्स माने गए हैं एक है आपका ट्रांसपेरेंसी एंड दूसरा है स्पीड तो ईसीआई ने बोला है कि भैया हम दोन हम इन दोनों पिलर्स के ऊपर काम कर रहे हैं एंड अकॉर्डिंग ये जो नंबर्स दिखा रहे हैं ये इसी डायरेक्शन में ये चीज दिखा रहे हैं आई होप आप एम समझ गए होंगे किस तरह से यूजर इसके ऊपर रिपोर्ट कर सकते हैं वायलेशंस ऑफ मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट साथ ही साथ जीपीएस वगैरह है ट्रैक कर सकते हो प्रोग्रेस को एंड कहीं ना कहीं एनोनिमस इसको
आप केस को रिपोर्ट भी कर सकते हो तो यूजर फ्रेंडली है काफी हद तक ऑडियो वीडियो कैप्चर ये सारी चीजें कर लेगा 100 मिनट का काउंटडाउन होगा ताकि आपकी कंप्लेंट का निपटारा हो पाए पार्टिसिपेशन इससे कहीं ना कहीं बढ़ेगी एंड एंड पॉलिटिक्स केर टेक्नोलॉजी आ गई है ठीक है ना ट्रांसपेरेंसी हो गया एंड फ्लाइट स्कड्स को आपकी पूरी जो प्रॉपर लोकेशन वगैरह है वो मिल जाएगी एंड साथ ही साथ जो पर्सन है जिसने कंप्लेंट दर्ज करी है उसको भी उसकी भी प्रीवे स का ध्यान रखा जाएगा सुप्रीम कोर्ट ने बोला है कि जितनी भी प्लीज
है रिगार्डिंग वेरीफाइंग काउंट इन ईवीएम वो प्लीज सारी की सारी वो आपके इलेक्शन से पहले सुनेगा मैं आपको थोड़ा समझाता हूं कि आखिर मुद्दा क्या है देखो आप ईवीएम के बारे में आप जानते होंगे राइट जब हम बात करते हैं ना देखो इलेक्शंस की तो आप जानते हो जब आप वोट करने जाते हो एक तो यहां पर जो आपके प्रोसाइट ऑफिसर होते हैं उनके पास इस तरह से कंट्रोल यूनिट होता है जिसके माध्यम से वह अगला वोट कब डालेगा उसको रिफ्रेश वगैरह कर सकते हैं आपके सामने यह वाली एक होती है जहां पर सारी अलग-अलग
पार्टीज और उनके जो चुनाव चिन्ह होते हैं तो जिसको भी आपने वोट करना होता उसके सामने यह बटन को दबा देते हो ठीक है इसको बोलते हैं बैलेट यूनिट सही बात है अब बैलेट यूनिट के साथ में ना एक मशीन और होती है जिसको हम बोलते हैं वीवीपैट वीवीपैट होता है वोटर वेरीफाइबिलिटी को वोट डाला क्या नाम था उस बंदे का क्या पार्टी का उसका क्या सिंबल था वो आपको यहां पर देखने को मिल जाएगा अब आप पूछेंगे ये क्या जरूरत है इस पर्टिकुलर वीवी पैट की देखो वीवी पैट के माध्यम से ना आप देख
पाओगे कि मेरा वोट आखिर जा किसको रहा है आपको भी तो ऐसे मतलब शटी हो जाती है इसको देख के सही बात है पर होता क्या है ना दरअसल में अगर मैं बात करूं इस प्रोसेस की तो आप नोटिस करिएगा कि एक असेंबली कंसीट के अंदर केवल पांच पोलिंग स्टेशंस के ऊपर ही वीवी पैट को मैच किया जाता है कि क्या जो इधर वोट्स आई है और जो इधर वोट्स आई है क्या वो बराबर है ये एक असेंबली कांस्टेंसी के अंदर सिर्फ पांच जगह ही पांच पोलिंग स्टेशन के ऊपर ही इसके रिगार्डिंग किया जाता है
अब एक्चुअल में अगर आप नोटिस करो तो देश भर में ना पिछली बार 24 लाख वीवी पैट यूज हुई थी पर वेरीफाई कितने किए वेरीफाई किए गए सिर्फ और सिर्फ 20000 नोटिस कर पा रहे हो यूज इतनी सारी हो रही है पर वेरीफाई हो रहे हैं सिर्फ इतने कम तो बहुत सारी प्लीज गई कि भाई आप सारे के सारे क्यों नहीं वेरीफाई कर देते ताकि लोगों के अंदर और कॉन्फिडेंस आए कि हां यार हमारा वोट जिसको भी जा रहा है उसी बंदे को ही जा रहा है एंड ऊपर 10 ऊपर से आप नोटिस करगे यह
जो पर्ची यहां पर आई ये नीचे इस डब्बे में गिरी या नहीं गिरी कई लोगों को यह भी डाउट है इसके रिगार्डिंग तो कई बार ऐसी प्लीस भी आती है कि भैया इसका आप ट्रांसपेरेंट बना दो इस बक्से को ताकि हमें दिखे कि हां यार पर्ची एक्चुअल में गिर रही है उस डब्बे के अंदर तो इस तरह की बहुत सारी प्लीज है जो कि इसके रिगार्डिंग बात कर रही है बहुत सारी प्लीज ने बोला कि यार आप 100% काउंट क्यों नहीं कर लेते ये इतना कम काउंट क्या है कि 24 लाख आपके पास वीवी पैट
आप सिर्फ 200 व पैट को कर रहे हो तो इलेक्शन क्वेशन ऑफ इंडिया का बोलना है कि भैया एक तो इससे टाइम फालतू का जाएगा इससे बहुत टाइम ल जाएगा इनको मैच करने में इतना सारा चीजें करने के अंदर इसके साथ ही 2023 के अंदर इलेक्शन कमीशन ने ना एक बात बोली थी कि भैया देश के नागरिकों के पास कोई फंडामेंटल राइट नहीं है कि अपनी रिकॉर्ड्स को वह अपने क्या कर पाएं वह देख पाएं और उसको वेरीफाई कर पाए दे डोंट हैव द फंडामेंटल राइट टू वेरीफाई थ्रू वीवी पैड दैट देर वोट्स र क्ड
कास्ट एंड काउंटर गड ये फंडामेंटल राइट नहीं है ऐसा ईसीआई का कहना है अब सुप्रीम कोर्ट को इस मुद्दे के ऊपर क्या कहता है यह सारी चीजें हमें आने वाले दिनों के अंदर पता लगेंगी 2013 में सुब्रह्मण्यम स्वामी वर्स इलेक्शन ऑफ इंडिया केस था उसके अंदर बात करी गई थी कि फुल ट्रांसपेरेंसी नाने के लिए कहीं ना क इससे कॉन्फिडेंस ऑफ वोटर्स बढ़ता है वीवी पैट वगैरह जैसी चीजों से नेक्स्ट टॉपिक की तरफ आगे चलते हैं दैट इज यूथनेट क्या हुआ है एक 28 साल की डच महिला है इन्होंने अपनी जिंदगी को लीगली एंड कर
लिया है देखिए इनके द्वारा दरअसल में बताया गया कि पूरी जिंदगी भर इन्होंने बहुत सारे मेंटल हेल्थ इश्यूज को कहीं ना कहीं फेस किया इवन थेरेपी वगैरह भी लेने की कोशिश करी पर जब थेरेपी से भी काम नहीं बना तो अब इन्होंने यहां पर यूथनेट का सहारा लेने की बात करी है दरअसल में देखो होता क्या है ना जब कहीं ना कहीं एक कोई पर्सन अपनी जिंदगी को खत्म करने की कोशिश करता है जब उनको कोई ऐसी कंडीशन होती है जो कि क्योर नहीं हो सकती या फिर अनलिमिटेड सफरिंग होती है उस केस को यूथनेट
बोल सकते हैं आप नोटिस करोगे यहां पर टोटल चार तरह के यूथनेट आपको देखने को मिल जाएंगे एक होता है एक्टिव यूथनेट का मतलब क्या होता है एक्टिव मतलब आप बाहर से कोई ना कोई चीज एंटर कर रहे हो मान लो जैसे फॉर एग्जांपल मान लो एक कोई पेशेंट है वो पेशेंट डेथ बेड पे है काफी हालत खराब है उसकी हेल्थ काफी खराब है ऐसे में अगर कोई बाहर से कोई पर्सन इंजेक्शन देके उसको मार दे उसको बोलते हैं एक्टिव नेशिया मारना मतलब कि उसकी मर्जी थी यार कि अब इतना नहीं जी सकते इतना हेल्थ
कंडीशन इतनी खराब है पैसिव थने शिया के अंदर क्या होता है यहां पर देखो बाहर से कुछ इंजेक्ट नहीं किया जाता पर आपके लिए जो भी ऑक्सीजन वगैरह लगी हुई है जो भी आपकी लाइफ सपोर्ट है अगर हम उसको हटा देंगे तो कहीं ना कहीं तब भी उस पर्सन की तो डेथ होगी ना तो ये इसको बोलते हैं पैसिव यूथनेट एक्टिव के अंदर क्या होता है आप बाहर से ना कुछ ऐड कर रहे हो पैसिव के अंदर बस आप लाइफ सपोर्ट को हटा देते हो वॉलंटरी होता है जो आपकी मर्जी से होता है आपकी कंसेंट
के साथ इवॉलेंट होता है जो आपके बिना पेशेंट की कंसेंट के होता है अब इंडिया जुडिशरी की अगर हम बात करें तो एक बहुत दुखदायक केस था अरुणा शन बाग केस जो हुआ था मतलब अरुणा शन बग जी के साथ जो हुआ था तो उसके बाद एक अरुणा शन यूनि ऑफ इंडिया केस देखने को मिलता है जहां पर सुप्रीम कोर्ट ने बोला कि पैस नेशिया अलाउ किया जा सकता है अंडर एक्सेप्शनल सरकमस्टेंस उसी तरह से कॉमन कॉस यूनिन ऑफ इंडिया में भी यह चीज को अलाउ किया गया ठीक है ना और साथ साथ यहां पर
यह बात भी करी गई कि लिविंग विल्स जो होती है ना इन टर्मिनली इल पेशेंट्स की उनको हम रिकॉग्नाइज करें कहने का मतलब क्या है मान लीजिए अगर मान लो कि अब कोई पर्सन किसी केस के अंदर अपनी इच्छा को नहीं व्यक्त कर पाएगा कल को अगर कुछ मेडिकल चीज के बाद तो वहां पर ना एक लीगल डॉक्यूमेंट होता है जिसके माध्यम से ना यह पता लग जाता है कि किस तरह की मेडिकल केयर वो पर्सन एक्सपेक्ट करेगा क्या वो कहेगा कि यार अगर मान लो कुछ ऐसा हो गया तो मुझे आप पैसिव यूथ नेशिया
दे दीजिए ठीक है ना तो बेसिकली एक एडवांस डायरेक्टिव उसने दे दिया कहीं ना कहीं कि क्या किस तरह की उनको केयर मिलनी चाहिए इवन सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में जो गाइडलाइंस थी उनको मॉडिफाई किया तो राइट टू डाई विद डिग्निटी को मोर एक्सेसिबल बनाने के लिए काफी सारे लोग इसको सुसाइड के साथ कंफ्यूज कर लेते हैं पर ये सुसाइड नहीं है सुसाइड देखो क्या होता है एक बंदा खुद ही सब चीजें कर लेता है है ना जो लोग सुसाइड करते हैं वो खुद ही व्हाट एवर वेज से वो सुसाइड करते हैं पर यूथनेट के
अंदर क्या होता है वहां पर आपको एक्सटर्नल सपोर्ट की हेल्प मिलती है चाहे व एक्टिव हो गया पैसिव हो गया वहां पर कोई ना कोई और पर्सन भी यहां पे इवॉल्व होता है ठीक है तो ये फर्क चीजों का आपको पता होना चाहिए इनका सबका क्या अर्थ है एक्टिव पैसिव का मैंने आपको अर्थ बता ही दिया सुसाइड का मतलब आप जानते होंगे वॉलंटरी होता है आपका अपनी मर्जी के साथ आप ऐसा डिसीजन लो फिजिशियन असिस्ट सुसाइड का मतलब होता है जब कहीं ना कहीं डॉक्टर ना नॉलेज के साथ आपको कुछ मींस प्रोवाइड करता है जिसके
माध्यम से सुसाइड किया जा सकता है दैट इज फिजिशियन असिस्टेंट सुसाइड नेक्स्ट चलते हैं अगले टॉपिक की तरफ दैट इज सिंबल अलॉटमेंट टू पॉलिटिकल पार्टीज देखिए इलेक्शंस आ रहे हैं ठीक है बिल्कुल 19 तारीख से इलेक्शन स्टार्ट है तो बहुत सारे इलेक्शन सिंबल्स को लेके खींचातानी चल रही है एनीवेज न्यूज़ इतनी इंपोर्टेंट नहीं है हमें इंपोर्टेंट है इसका जो पॉलिटिकल एप है उसको पढ़ना देखो आप एक चीज जानते हो कि जो भी आपके सिंबल्स होते हैं वो बहुत इंपॉर्टेंट रोल प्ले करते हैं देखो लिटरेसी हालांकि इंडिया में बढ़ गई अब तो पर फिर भी सिंबल्स
कहीं ना कहीं बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट रोल प्ले करते हैं स्पेशली उन लोगों के अंदर जिनको उतना शद पड़ा उनको शायद उतना समझ नहीं आता पढ़ने लिखने के रिगार्डिंग मैं आपको एग्जांपल समझाता हूं जैसे कई बार ना किसी पर्सन को हो सकता है कि यार पढ़ाई उतना पढ़ के ना समझ आए कि कौन सी पार्टी है पर वो सिंबल्स के थ्रू ना बड़े आराम से उस चीज कोड फाई कर लेगा कि चलो ठीक है यार ये हाथ बना हुआ है तो ये कांग्रेस का है ये कमल का फूल बना हुआ है तो बीजेपी का है इस
तरह से सिंबल्स अपने आप में एक बहुत-बहुत इंपॉर्टेंट रोल प्ले करते हैं हमारी डेमोक्रेसी को और भी स्ट्रेंथ करने के अंदर तो जो इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया है ईसीआई वो कहीं ना कहीं रिस्पांसिबल है सिंबल्स को अलॉट करने के लिए एज पर इलेक्शन सिंबल्स ऑर्डर 1968 तो इसके अंदर आप नोटिस कर पाओगे आपके पार्लियामेंट्री और असेंबली कंटेंस के रिगार्डिंग ये सारी चीजें यहां पे प्रोवाइड करता है अब आप लोग जानते होंगे यार कि जो हमारी यहां पे पार्टीज होती हैं वो नेशनल पार्टीज होती हैं जैसे आपका कांग्रेस है आपकी बीजेपी है आम आदमी पार्टी है
इस तरह से कुछ और पार्टीज भी आपको देखने को मिलेंगी जो कि नेशनल पार्टीज है इसी तरह से बहुत सारी आपको स्टेट पार्टीज भी देखने को मिल जाएंगी अब देखो जो नेशनल पार्टी है ना उसको तो सिंबल जो मिल गया वो मिल गया जैसे कांग्रेस का हाथ का सिंबल है ना तो ये पूरे इंडिया में हाथ ही चलेगा बीजेपी का अगर कमल का फूल है तो पूरे इंडिया में वही है अगर मैं बात करूं स्टेट की तो उस स्टेट के अंदर वो पार्टी को वही सिंबल मिलता है कहने का मतलब विद इन दैट स्टेट दैट
पार्टी हैज द सेम सिंबल पर आप नोटिस करोगे ना बहुत सारी और भी तो पार्टीज होती हैं हमारे यहां पे जिनको हम क्या बोलते हैं जिनको हम बोलते हैं रजिस्टर्ड पार्टीज बट दे आर अनरिकॉग्नाइज्ड ठीक है ना रजिस्टर्ड अनरिकॉग्नाइज्ड पार्टीज देखो रिकॉग्नाइज के अंदर तो ये आ गई ना नेशनली रिकॉग्नाइज या स्टेट रिकॉग्नाइज्ड पर कुछ ऐसी पार्टीज होती हैं जिन्होंने रजिस्टर तो किया होता है पर ना वो नेशनल पार्टी होती है ना वो आपकी स्टेट पार्टीज होती हैं ऐसी पार्टीज को बोलते हैं हम रजिस्टर्ड अनरिकॉग्नाइज्ड पार्टीज तो होता क्या है ना जो आपकी नेशनल स्टेट
पार्टीज है उनको तो एक्सक्लूसिव सिंबल मिल जाएंगे जो उनका है पर बाकी जो सिंबल्स होते हैं फ्री होते हैं वो फ्री सिंबल्स किनको मिलते हैं रजिस्टर्ड बट अनरिकॉग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टीज को तो उनको वहां पे अकॉर्डिंग यहां पर सिंबल मिल जाएगा ठीक है ना अकॉर्डिंग आप नोटिस कर पाओगे कि उनको मिलता है जिनको पास बहुत ज्यादा अच्छे वोट्स नहीं मिलते एंड अकॉर्डिंग वो इनको चूज कर सकते हैं ऐसा भी हो सकता है कि मान लो एक इलेक्शन के अंदर आपको वो सिंबल मिल गया फिर वापस से वो फ्री हो जाएंगे फिर अगले इलेक्शन में आपको कुछ
नया सिंबल चूज कर सकते हो दिस काइंड ऑफ थिंग्स डू हैपन ठीक है ऐसा भी आप कर सकते हो कि मान लो अगर अगर आपकी खुद की कोई पॉलिटिकल पार्टी है और आप कुछ नया सिंबल देना चाहते हो तो वो भी एक चीज कर सकते हो अब 1968 का ये ऑर्डर देखने को मिल जाएगा बस ध्यान में रखने वाली बात ये है कि जब भी कुछ ऐसा हो तो वहां पर आप कोई धार्मिक चीजों का सिंबल नहीं यूज कर सकते कोई किसी को ऑब्जेक्शन नहीं होना चाहिए बेसिकली कहने का ये पॉइंट है कोई बर्ड एनिमल
हो गया ठीक है तो इनके साथ कुछ रिजेंस या फिर रिलीजियस या कम्युनल आपका कोनोटेशन उस सिंबल का नहीं होना चाहिए तो इंडिया की डेमोक्रेसी के अंदर जहां पर अभी भी कुछ लोग इलिटरेट हैं तो डेफिनेटली वोटिंग प्रोसेस के अंदर एक बहुत-बहुत इंपोर्टेंट रोल प्ले किया जाता है एक पर्सन यहां पे न्यूज़पेपर में आ रहे थे लेट एम एस सेठी जी दरअसल में ना ये इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया से रिटायर होते हैं 1992 के अंदर और ये आखिरी ड्रॉट्समैन थे यानी कि जो कि जिनका काम होता है इस तरह की चीजों को ड्रॉ करना जो
सिंबल्स होते हैं अब सिंबल कोई ड्रॉ तो करेगा ना यार कि जैसे हाथ हो गया तो कांग्रेस का है किसी ने ड्रॉ किया होगा झाड़ू आम आदमी पार्टी का है तो ये चीजें होती हैं ये इन्होंने यहां पे ड्रॉ करी जाती थी 1992 के टाइम के ऊपर तो ये रिटायर हो गए थे 1992 में ईसीआई से नेक्स्ट बढ़ते हैं अगले टॉपिक की तरफ दैट इज डेमोक्रेसी मेजर्ड बाय ग्लोबल इंसेस देखो पिछले कुछ दिनों से ना बहुत सारे ऐसे इंसेस आ रहे हैं जो यह दिखा रहे हैं कि इंडिया के अंदर डेमोक्रेसी या तो अब रही
नहीं या फिर डेमोक्रेसी के लेवल के अंदर कमी आई है मैं आपको कुछ एग्जांपल देता हूं जैसे पिछले दिनों के अंदर हमने वडम इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के बारे में भी डिस्कस किया था इसने इंडिया को ना वन ऑफ द वर्स्ट ऑटोटर ऑटोक्रेसी बेसिकली डिक्लेयर किया है उसके अलावा अगर हम बात करें यहां पर फ्रीडम हाउस की तो फ्रीडम हाउस ने इंडिया को पार्टली फ्री बोला है ईआईयू इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट इन्होंने यहां पर इंडिया को फ्लड डेमोक्रेसी बोला है या इवन इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी बोला है अब आप पूछ रहे होंगे सर ऐसा क्या हो गया इंडिया के
अंदर कि ये सब चीजें ऐसे कह रहे हैं देखो एक्चुअल में ना यहां पर इन्होंने अपने अपने तर्क दिए हैं हालांकि इंडिया उसको तर्कों को बहुत ज्यादा मानता नहीं है हमारी सरकार ने उसको काफी क्रिटिसाइज किया है हैवली पर इनके जो तर्क थे वो इस तरह से दिए जा रहे थे कि अगर आप देखोगे तो इलेक्शंस के समय के ऊपर फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन में कमी देखने को मिलती है जो भी सरकार को क्रिटिसाइज करता है उसको जेल के अंदर डाल दिया जाता है कुछ मुख्यमंत्रियों को भी डाला गया है जो प्रिंसिपल अपोजिशन पार्टी
है उसके अकाउंट्स को फीज कर दिया जाता है इस तरह से बहुत सारी इन्होंने यहां पे पॉइंट्स दिए हैं जिस वजह से इन्होंने ये बताया है कि इंडिया में डेमोक्रेसी कम हो रही है पर हमारी सरकार ने ये च साथ-साथ बोली है कि आपके जो भी आंकड़े हैं ना वो बिल्कुल गलत है रीजन इसका ये है कि यहां पर ना ये सारे जो आपके आंकड़े हैं ये कहीं ना कहीं सब्जेक्टिविटी के ऊपर डिपेंड करते हैं आपको लगता है डेमोक्रेसी खत्म हो गई किसी और को नहीं लगता जब आप इस तरह से सब्जेक्टिविटी वाले पैरामीटर्स डालोगे
ना तो कहीं ना कहीं रिजल्ट ऊपर नीचे तो आएंगे ही आएंगे प्लस एट द सेम टाइम इन पर्टिकुलर जो भी अ सर्विस किए जाते हैं इनका सैंपल साइज बहुत कम होता है अब हमारी देखो पॉपुलेशन ही अगर 140 करोड़ के आसपास है उसमें कोई इंसान या कोई कंपनी इन में से कोई 2000 लोगों का कोई 5000 लोगों का या मैक्सिमम 10000 लोगों का भी सैंपल ले रही है ना तो अपने आप में बहुत ही छोटा सैंपल है आप 51 हजार लोगों से पूछकर कि भैया डेमोक्रेसी कम हो रही है नहीं हो रही तो उससे 140
करोड़ लोगों के दिमाग में क्या चल रहा है उसका अनुमान लगाना अपने आप में बहुत मुश्किल है तो हमारी सरकार ने इसके रिगार्डिंग भी क्रिटिसाइज किया है बाकी साथ ही साथ इन्होंने आइडियो जिकल बायस भी यहां पे गिनाए गए हैं कि एक्चुअल में इंडिया को काफी इंडिया इज अ डिफरेंट टाइप ऑफ डेमोक्रेसी अब देखा जाता है कि यूएस में क्या है यूके में क्या है वहां पर जैसी डेमोक्रेसी है वैसे इंडिया में लेके आओ तो ऐसा उनके दिमाग में बायस है जिस वजह से उनको ये सब कंसर्न्स देखने को मिल जाते हैं एंड बाकी कुछ
छोटी कंट्रीज को भी ओवरलुक्ड सेस हैं चाहे वैराइटीज ऑफ डेमोक्रेसी रेजीम ऑफ द वर्ल्ड ग्लोबल स्टेट ऑफ डेमोक्रेसी ईआईयू का मैंने बताया डेमोक्रेसी इंडेक्स यहां पर इंडिया का रैंक काफी काफी ज्यादा प खराब आपको देखने को मिलेगा बट इंडिया का कहना यही है कि कहीं ना कहीं ये सारी चीजें बायड है ये सारी चीजों के अंदर प्रॉपर डाटा यहां पे इन्होंने गैदर नहीं किया गया है बाकी देखो जैसे मैंने आपको बताया हमारे डॉक्टर एस ज शंकर हमारे एक्सटर्नल फेन मिनिस्टर उन्होंने भी ये बात बोली है प्लस एट द सेम टाइम ये भी बोला गया है
कि इंडिया अब खुद का अपना एक डेमोक्रेसी इंडेक्स बनाएगा जिसकी मदद से क्या होगा जिसकी मदद से हम बताएंगे कि एक्चुअल में इंडिया में डेमोक्रेसी है कितनी ठीक है ना बट ऐसा नहीं है कि बिल्कुल ही इनको हमें निका देना चाहिए हमें कहीं ना कहीं इससे सीखने को भी मिलता है कुछ स्ट्रेंथ एंड वीकनेस भी या अलग-अलग चीजों की हाईलाइट करते हैं कुछ अच्छी इनसाइट्स भी देते हैं कि हम अपने आप को और कैसे-कैसे बेहतर कर सकते हैं नेक्स्ट हमारा टॉपिक है स्टार कैंपेनर्स के रिगार्डिंग देखो जो अरविंद केजरीवाल जी की वाइफ है सुनीता केजरीवाल
उनको यहां पे आज के समय स्टार कैंपेनर बनाया गया है बाय आम आदमी पार्टी फॉर इट्स कैंपेन इन गुजरात तो थोड़ा सा हमें स्टार कैंपेनर के बारे में समझ लेना चाहिए कि आखिर ये स्टार कैंपेनर होता क्या है देखो स्टार होते है ना स्टार स्टार मतलब कोई फेमस बंदा राइट तो यहां पर कोई भी फेमस पर्सन जिसकी अच्छी खासी ह्यूज फैन फॉलोइंग होती है तो पॉलिटिकल पार्टीज उनको एज अ स्टार कैंपेनर की तरह बना देती हैं अब आप पूछेंगे सर ऐसा कैसे बना दिया देखो दरअसल में ना हमारे पास रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट है 1951
का इसके माध्यम से आप जानते होंगे कि एक तो होती है आपकी रिकॉग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टीज रिकॉग्नाइज्ड का मतलब कि या तो वो नेशनल पार्टीज हैं या फिर आपकी स्टेट पार्टी नेशनल पार्टी जैसे आपका आम आम आदमी पार्टी हो गया भारतीय जनता पार्टी हो गया इंडियन नेशनल कांग्रेस हो गया नेशनल पॉलिटिकल पार्टी हो गया एनपीपी ऐसे टोटल छह पॉलिटिकल पार्टीज आपको नेशनल पार्टीज देखने को मिलती हैं सिमिलरली बहुत सारी स्टेट पार्टीज हैं हमारे पास जब ये नेशनल स्टेट पार्टीज होती है ना तो ये मैक्सिमम 40 स्टार कैंपेनर्स को अपॉइंट्स पार्टी भी नहीं है स्टेट पार्टी भी
नहीं है पर वो रजिस्टर्ड है ऐसी पॉलिटिकल पार्टी ब स्टार कैंपेनर्स को अपॉइंट्स पार्टी के द्वारा नॉमिनेट किया जाता है कोई लॉ वगैरह नहीं है कि किसको बना सकते हैं किसको नहीं बना सकते बस जनरली यही होता है कि वो पॉलिटिकल पार्टी के मेंबर होने चाहिए राइट अब होता क्या है ना यहां पे अगर आप नोटिस करोगे ये जो भी नाम होंगे मतलब मैक्सिमम 40 आपके नेशनल और स्टेट पोलिटिकल पार्टी के और अदर वाइज अन रिकॉग्नाइज के 20 जो नाम होंगे वो यहां पर इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को देने होते हैं एंड साथ साथ चीफ
इलेक्टोरल ऑफिसर जो स्टेट्स के होते हैं विद इन सेवन डेज फ्रॉम द डेट ऑफ नोटिफिकेशन ऑफ सच इलेक्शंस पर आप बोलेंगे सर इंडिया में तो अब आज के समय सात चरणों में चुनाव हो रहा है सेवन में चुनाव हो रहा है तो बिल्कुल तो डिफरेंट डिफरेंट फेजेस के लिए डिफरेंट डिफरेंट स्टार कैंपेन की लिस्ट आप अलग से सबमिट कर सकते हो अब आप पूछेंगे इसका बेनिफिट क्या होता है देखो एक्चुअल में अगर आप बात करोगे ना इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के द्वारा क्या किया गया है एक लिमिट फिक्स करी गई है किस चीज की लिमिट
कि एक जो कैंडिडेट होता है व कितना खर्चा कर सकता है तो कैंडिडेट की तो लिमिट लगा रखी है और वो लिमिट है आपकी 95 लाख फॉर लार्जर लोकसभा कंसीट एंसी एंड 75 लाख फॉर स्मॉलर कंसीट एंसी पर जब हम बात करते हैं एक पॉलिटिक पार्टी कि वो कितना खर्च कर सकती है इसके ऊपर तो कोई लिमिट ही नहीं है राइट तो एक्चुअल में अगर आप नोटिस करो अगर मान लो एक पर्सन है जो इलेक्शन के लिए इलेक्शन में खड़ा हुआ है अब वोह चाहता है कि उसकी सीट के ऊपर बहुत बड़े-बड़े लोग आकर प्रचार
करें यानी कि स्टार कैंपेनर्स आके प्रचार करें पर उसके पास पैसा तो लिमिटेड है कि इतना ही पैसा वो खर्च कर सकता है तो इस केस में पता है क्या होता है इस केस में अगर वो स्टार कैंपेनर वहां पर आकर प्रचार करता है तो वो जो खर्चा होता है वो इस कैंडिडेट के अंदर अंदर नहीं डाला जाएगा कैंडिडेट के खर्चे के अंदर नहीं जोड़ा जाएगा यह बात आपको पता होनी चाहिए ठीक है ना तो द इंपोर्टेंट पॉइंट इज द स्टार कैंपेनर एक्सपेंसेस आर नॉट डिडक्टेड फ्रॉम द कैंडिडेट एक्सपेंडिचर तो पॉलिटिकल पार्टीज पूरा उनका कॉस्ट
कवर करती हैं पर ध्यान रखने वाली बात ये है कि अगर मान लीजिए उस स्टार कैंपेनर ने कैंडिडेट के साथ स्टेज को शेयर किया या फिर अपनी स्पीच के अंदर उस कैंडिडेट का नाम लिया तो जितने भी चार्जेस होंगे उस स्टार कैंपेनर के वो सारे के सारे कैंडिडेट के एक्सपेंसेस के अंदर कवर हो जाएंगे मतलब उसको ही कवर करने पड़ेंगे ठीक है ना तो इस तरह से आपको जान पाओगे साथ में ही अगर हम बात करें ट्रेवल वगैरह का जो एक्सपेंडिचर होता है अगर यह सब चीजें नहीं होती ना कि वो नाम नहीं लेता या
फिर उसका स्टेज शेयर नहीं करता तो ये पॉलिटिकल पार्टी देखती है अदर वाइज कहीं ना कहीं वो कैंडिडेट के एक्सपेंडिचर में से कट जाएगा इसके साथ में अगर आप बात करो जैसे हम बात करते हैं अगर मत लो कोई प्रधानमंत्री जी आके ए स्टार कैंपेन की तरह काम करें या फॉर्मर प्राइम मिनिस्टर तो आप जानते होंगे कि उनकी साथ में सिक्योरिटी भी होती है तो इस केस में जो भी पूरा खर्चा होता है वो कैंडिडेट से डिडक्ट नहीं किया जाता वो सरकार वो गवर्नमेंट की बेयर करती है इंक्लूडिंग द एक्सपेंडिचर ऑन बुलेट प्रूफ व्हीकल पर
अगर मान लो प्राइम मिनिस्टर के साथ में कोई और स्टार कैंपेनर भी है तो उस केस के अंदर जो कैंडिडेट होता है उसको सिक्योरिटी का 50 पर बियर करना पड़ता है इसके अलावा अगर हम बात करें अगर मान लो कोई कैंडिडेट ट्रैवल करता है स्टार कैंपेनर के साथ तो उस केस में भी 50 पर जो ट्रेवल एक्सपेंडिचर होता है स्टार कैंपेनर का वो भी कैंडिडेट को ही बियर करना पड़ता है तो ये कुछ पॉइंट्स है जो आपको यहां पे पता होने चाहिए नेक्स्ट टॉपिक हमारा है अबॉर्शन ऑफ 30 वीक फीट्स अलाउड बाय सुप्रीम कोर्ट देखो
एक्चुअल में अगर हम बात करते ना हमारे मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट है हमारे यहां पे हालांकि यह एक्ट 1971 के अंदर आया था पर बाद में अभी कुछ दो तीन साल पहले ही इसको अमेंड किया गया ठीक है ना और जब यह अमेंडमेंट किया गया ना तो ऐसा बोला गया कि इंडिया का जो मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट है व काफी लिबरल है प्लस एट द सेम टाइम प्रो चॉइस है क्योंकि महिला को काफी हद तक हम चॉइस देते हैं कि व अपनी प्रेगनेंसी को टर्मिनेट कर पाए तो जो न चेंजेज के हिसाब से
जो ये अमेंडमेंट आया उसके बाद से यह हुआ कि होता क्या है कि अगर मान लो 20 वीक से कम का टाइम है उस केस के अंदर प्रेगनेंसी टर्मिनेट करी जा सकती है वहां पर एक डॉक्टर की एडवाइस चाहिए होगी अगर मान लीजिए समय हो चुका है 20 से 24 हफ्ते का इस केस में भी आप कर सकते हो पर यहां पर दो रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स की आपको एडवाइस चाहिए होगी पर आप पूछेंगे सर अगर 24 हफ्ते के ज्यादा टाइम हो चुका है बच्चे को उस केस में क्या होता है उस केस में मेडिकल बोर्ड
को यहां पे एक मेडिकल बोर्ड होता है वो यहां पर बताता है कि क्या यह हो सकता है या नहीं हो सकता रीजन बीइंग पता है क्या होता है इसका रीजन एक्चुअल में यही होता है कि यहां पे ना हमारे चेक करते हैं हम फीटल वायबिलिटी के बारे में फीटल वायबिलिटी मतलब कि मान लो अगर आपने एक बच्चे को जन्म दे दिया और बच्चे का अभी जन्म मान लो जैसे वैसे तो 9 महीने का बोला जाता है पर मान लो 6 महीने या 7 महीने के बाद भी ना आजकल हमारे पास इतनी साइंटिफिक इक्विपमेंट आ
चुका है कि वो मां के पेट के अंदर नहीं वो बाहर भी अपने आराम से सरवाइव कर सकता है इस तरह के हमारे पास आजकल साइंटिफिक अरेंजमेंट्स आ चुके हैं तो प्रीमेच्योर जो बेबीज होते हैं उनकी मैं यहां पे बात कर रहा हूं तो वो चीज भी यहां पे इस हिसाब से मेडिकल बोर्ड के हिसाब से देखी जाती है कि क्या अब सही है इसको टर्मिनेट करना या नहीं सही है तो केस टू केस बेसिस के ऊपर वो चीजें डिसाइड करी जाती हैं बाकी यहां पे सेक्शन थ्री भी है जो रूल्स का मेडिकल टर्मिनेशन प्रेगनेंसी
एक्ट का जो कि फोर्स प्रेगनेंसी की सात कैटेगरी को यहां पे बताता है जैसे रेप हो गया माइनर हो गया मेरिटल स्टेटस हो गया इस तरह की चीजें तो एक्चुअल में अभी पता क्या हुआ अभी ये मुद्दा गया सुप्रीम कोर्ट के अंदर कि एक एक 14 साल की बच्ची है ठीक है ना उसके ऊपर सेक्सुअल असोल्ट हुआ था तो वो चाहती थी कि अपनी जो 30 हफ्ते की प्रेगनेंसी हो चुकी है उसको यहां पर टर्मिनेट करना चाहती थी जो मेडिकल बोर्ड था देखो उसने तो मना कर दिया पर बहुत सारे और हॉस्पिटल्स जैसे एक म्युनिसिपल
हॉस्पिटल का डीन का एक रिपोर्ट सबमिट भी करी गई उसमें बोला गया कि अगर यह बच्ची अब म ऑलरेडी 14 साल की बच्ची है अगर वो इस छोटे बच्चे को जन्म देती है तो कहीं ना कहीं पता क्या होगा इस 14 साल की लड़की के ऊपर फिजिकल और मेंटल वेल बीइंग के ऊपर बहुत मैसिव लेवल के ऊपर नेगेटिव इफेक्ट आएगा सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को माना इस बात को सुना एंड इस चीज के ऊपर वर्डिक्ट भी यही दिया कि हां हम अलाव करते हैं कि ये टर्मिनेट कर पाए अपनी प्रेगनेंसी को साथ ही साथ
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने ये भी बोला कि इंडिया का जो मेडिकल टर्मिनेशन प्रेगनेंसी एक्ट है वो काफी लिबरल है काफी प्रो चॉइस है जैसे यूएस में रो वर्सेस वेड एक बहुत ही फेमस केस हुआ था ना हालांकि बाद में जाके भी बहुत सारी स्टेट्स ने इसको मना किया कि ये चीज सही नहीं है तो इंडिया में बहुत हम क्लियर हैं कि हम लिबरल है हमारा लॉ एंड काफी प्रो चॉइस की तरफ हम यहां पर जाते हैं और फीटल वायबिलिटी आपको मैंने समझा दिया कि मां के गर्भ के बाहर भी कहीं ना कहीं जो फिटस
कब सरवाइव कर सकता है उस टाइम को बोला जाता है फीटल वायबिलिटी और ये सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जो चीजें बोली गई ये मैंने आपको यहां पे बता भी दी है सीपी ग्राम्स अब यह क्या है सर सीपी ग्राम्स देखो इसकी फुल फॉर्म समझो सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवा ड्रेसल एंड मॉनिटरिंग सिस्टम पब्लिक गवास मतलब पब्लिक की शिकायतें उनको रिड्रेस करना मतलब उन शिकायतों को ठीक करना शि शयतों का निपटारा करना यही है क्या सीपी ग्राम्स तो दोस्तों है क्या ये ये एक ऑनलाइन पोर्टल है जिसके माध्यम से जो हमारे नागरिक हैं वो 24 घंटे और सातों
दिन अपनी ग्रीवांसेज को अपनी शिकायतों को पब्लिक अथॉरिटीज के रिगार्डिंग इनको यहां पर दर्ज करवा सकते हैं ध्यान रखने वाली बात यह है कि हमारी जो मिनिस्ट्री है मिनिस्ट्री ऑफ पर्सनल पब्लिक रिमास एंड पेंशन उसके अंदर जो डिपार्टमेंट आता है डीए आरपीजी डिपार्टमेंट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म एंड पब्लिक रीवांस ये यहां पे इसको इंप्लीमेंट करता है ये एक सिंगल एक मात्र पोर्टल है जो कहीं ना कहीं सारी मिनिस्ट्री चाहे वो स्टेट की हो चाहे वो इंडिया की हो गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की भी गवर्नमेंट ऑफ स्टेट्स की भी उनके मिनिस्ट्री डिपार्टमेंट सबके लिए एक सिंगल पोर्टल आपको
देखने को मिल जाएगा आप लोगों ने ना उमंग ऐप भी शायद डाउनलोड कर रखी होगी तो उमंग ऐप के साथ यहां पे पूरा इसका इंटीग्रेशन आपको देखने को मिल जाता है तो यहां पर आप ट्रैक कर सकते हो अपनी शिकायत का कि कोई उसके रिगार्डिंग निपटारा हुआ या नहीं हुआ कहां पर मेरी स्टेटस है उसका एट द सेम टाइम अगर मान लो आप उस रेजोल्यूशन प्रोसेस के साथ खुश नहीं हो तो प्रॉपर आप फीडबैक भी दे सकते हो अगर मान लो आप कहते हो कि नहीं यार अच्छे से मेरी शिकायत का निपटारा नहीं हुआ और
आपने फीडबैक दिया रेटिंग दी पुअर तो आप कहीं ना कहीं उसकी अपील भी यहां पर दर्ज कर सकते हो अकॉर्डिंग उसको भी फिर यहां पे आप प्रॉपर्ली ट्रैक वगैरह कर सकते हो बट ध्यान रखने वाली बात यह है कि यहां पर कुछ चीजें एप्टेड है जैसे जो आरटीआई में मुद्दा मैटर है वो एमटे है कुछ कोर्ट में मुद्दा चल रहा है वो एमटे है रिलीजियस मैटर एप्टेड है प्लस एट द सेम टाइम मान लो कोई यहां पे गवर्नमेंट एंप्लॉई है एंड उसकी कोई शिकायत है विद रिगार्ड्स टू सर्विस मैटर वो भी यहां पे एमटे है
एक्सेप्ट फॉर द फैक्ट मान लो और कोई चैनल बचा ही नहीं तो ये कुछ पॉइंट्स थे सीपी ग्राम्स के रिगार्डिंग अब आपका क्वेश्चन ये आएगा कि सर आखिर हम इसको डिस्कस क्यों कर रहे हैं देखो डिस्कस इसलिए कर रहे हैं कि जो कॉमनवेल्थ सेक्रेटेरिएट है ना उसने सीपी ग्राम्स को एस अ बेस्ट प्रैक्टिस डिक्लेयर किया गया है एक्चुअल में आप लोग ना कॉमनवेल्थ के बारे में जानते होंगे कॉमनवेल्थ इसका जो ओरिजिन है वोह कहीं ना कहीं हमें ब्रिटिश एंपायर के साथ देखने को मिलता है 187 के अंदर स्टार्ट हुआ कुछ पॉलिटिकल एसोसिएशन ऑफ स्टेट्स के
साथ जैसे इंडिया भी का एक पार्ट है ऐसा बोला जाता है कि जो ज्यादातर कंट्रीज है ना कॉमनवेल्थ की वो कहीं ना कहीं पहले ब्रिटिश एंपायर के अधीन थी पर ध्यान रखना सारी कंट्रीज ऐसी नहीं है पर ज्यादातर कंट्रीज ऐसी आपको देखने को मिलेंगी जो कहीं ना कहीं पहले ब्रिटिश अंपायर के अंदर आती थी उन्हीं का एक फैमिली ऑफ नेशंस आपको देखने को मिल जाता है जिसको हम कॉमनवेल्थ के नाम से जानते हैं जो मॉडर्न कॉमनवेल्थ ऑफ नेशन है वो कहीं ना कहीं 1949 के अंदर एक्जिस्टेंस में आया इन अ मीटिंग इन लंडन जहां पर
हमें लंडन डिक्लेरेशन देखने को मिल जाएगा आज के समय इसकी टोटल 56 इंडिपेंडेंट एंड इक्वल कंट्रीज इंक्लूडिंग इंडिया आपको देखने को मिल जाएंगी ये चीज इसलिए इंपोर्टेंट है क्योंकि अब हम किसी के गुलाम नहीं है ठीक है ना ना इनमें से कोई कंट्री किसी के गुलाम नहीं है अब अब सारी की सारी कंट्रीज इक्वल है तो एक वॉलंटरी एसोसिएशन है अगर कोई कंट्री चाहे तो इसको बिल्कुल छोड़ के भी जा सकती है ठीक है 2022 के अंदर गबन और टोगो इनने में भी जवाइन किया पर ध्यान रखने वाली बात मैंने आपको बताया अब आज के
समय इसकी मेंबरशिप सबके लिए ओपन है चाहे वो ब्रिटिश एंपायर के अधीन थी या नहीं थी तो कोई भी इसको अब जवाइन कर सकता है कोशिश इनकी यही रहती है कि लोग मिलकर कहीं ना कहीं डेमोक्रेसी डेवलपमेंट पीस इनके लिए यहां पे काम करें एंड अकॉर्डिंग इसके लिए अलग-अलग ऑर्गेनाइजेशंस है कॉमनवेल्थ सेक्रेट जिसने अभी रिसेंटली सीपी ग्राम्स को यहां पे बेस्ट प्रैक्टिस बताया है कॉमनवेल्थ फाउंडेशन हो गया कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग तो इस तरह से अलग-अलग आपको ऑर्गेनाइजेशन इसके अंतर्गत देखने को मिल जाती हैं ध्यान रखिएगा इसके हेड क्वार्टर्स आपको लंदन में देखने को मिलते हैं
तो दीज आर सम ऑफ द थिंग्स व्हिच शुड बी नोइंग अबाउट कॉमनवेल्थ एज वेज सीपी ग्राम्स नेक्स्ट हमारा टॉपिक है थोड़े पॉलिटी के रिगार्डिंग टॉपिक है जैसे पहला हमारा है कि व्हेन इज द कैंडिडेट इलेक्टेड अन पोजड देखो सूरत हो गया आपका इंदौर हो गया यहां पर इलेक्शन शुरू होने से पहले ही खत्म हो गए हैं क्यों यहां पर जो भी इनके एमपी बनने थे वो बन चुके हैं अब आप पूछेंगे सर ऐसे कैसे क्योंकि भाई इन लोगों को ना बिना कोई इलेक्शन के अनअपोज्ड यहां पे इलेक्ट कर लिया गया है सर ऐसा कैसे हो
सकता है बिल्कुल है देखो हमारे पास ना रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट है 1951 का जिसका अगर आप सेक्शन 533 पढ़ोगे ना उसके अंदर यही बात करी गई है देखो समझो इस बात को मैं आपको एक चीज एग्जांपल से समझाता हूं जैसे मान लो कोई एक जगह के ऊपर ना एक सीट फिल करनी है और मान लो इस एक सीट के फिल करने के लिए सिर्फ एक ही बंदे ने आवेदन किया तो क्या वहां पर कोई एग्जाम कंडक्ट कराने की या कोई इलेक्शन करवाने की जरूरत पड़ेगी आंसर इज नो सिमिलर चीज यहां पर है जैसे सूरत
की बात करें तो लोगों ने अपने पर्चे भरे थे पर किसी का पर्चा या तो रिजेक्ट हो गया या फिर किसी ने अपना पर्चा विथड्रावल तो फिल करनी है और पर्सन एक ही है तो क्या होगा वहां पे इलेक्शन की जरूरत ही नहीं होगी तो ये चीज है सेक्शन 53 3ac की बात करता है कि अगर मान लो नंबर ऑफ कैंडिडेट्स अ नंबर ऑफ सच कैंडिडेट इज लेस दन द नंबर ऑफ सीट्स टू बी फिड उस केस में जो रिटर्निंग ऑफिसर होगा वो उनको अकॉर्डिंग इलेक्ट कर देगा तो इस तरह से इस एक्ट के माध्यम
से यह चीज हमें देखने को मिल जाती है ठीक है ना कि जैसे मैंने आपको बताया कि अगर सिर्फ तो उस केस में पोल जरूरी नहीं होता क्योंकि अगर मान लो किसी जगह प तीन सीट्स थी मान लो और तीन ही लोग है उसके लिए तो डिंगली सबको हम इलेक्ट मान लेंगे उस केस में पोल की कोई भी बात जरूरी नहीं होती तो ये चीज यहां पे आपका रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट सेक्शन 533 इसी के बारे में बात करता है एक मुद्दा और जो चल रहा है वो है आपका नोटा के पर्सपेक्टिव के अंदर देखो
नोटा आप यहां पे समझते होंगे ये आ रहा आपका नोटा ठीक है ना नन ऑफ द अबब अगर मान लो आप किसी भी कैंडिडेट से खुश नहीं हो आपको नहीं लग रहा यार कि इसके अगेंस्ट तो क्रिमिनल केसेस है ये भी बंदा अच्छा नहीं है वो भी बंदा अच्छा नहीं है तो आप कहीं ना कहीं नोटा के अंदर जाके अपना वोट डाल सकते हो ठीक है तो बट इसका क्रिटिसिजम भी बहुत हैवी किया जाता है नोटा का क्योंकि आप नोटिस करो अगर मान लो कि पहले एक कैंडिडेट वन है एक कैंडिडेट टू है और तीसरा
है आपका नोटा अगर मान लो कैंडिडेट वन को 100 वोट मिले कैंडिडेट टू को 200 वोट मिले और नोटा को लेट्स से 500 वोट मिल गए तो मुझे बताओ कौन जीतेगा आप बोलोगे सर जीतेगा कैंडिडेट टू एक्चुअल में क्या होता है ना नोटा के वोट्स काउंट ही नहीं किए जाते मतलब काउंट किए जाते हैं बट दे आर नॉट कंसीडर्ड व्हेन वी डिसाइड कि विनर कौन है तो बेसिकली बस आपने अपना वो बता दिया कि यार हमें पसंद नहीं है ये लोग हमें अच्छे नहीं लगे ये कैंडिडेट जो आपने खड़े किए हैं पर उसका विनिंग के
ऊपर कोई इंपैक्ट नहीं आता जो जीतना होता है वो नोटा के बाद जिसका जो भी नंबर होगा अगर उसके हाईएस्ट वोट्स है तो अकॉर्डिंग वो जीत जाएगा तो आप अपना डिस अप्रूवल तो यहां पर दे पा रहे हो पर उसका कोई खास फायदा नहीं हो रहा समझे और यही मुद्दा गया है कोर्ट्स के अंदर यहां पर भी यही बात हो रही है कि कि दरअसल में बात करें अगर हम नोटा की तो एक्चुअल में पॉसिबिलिटी देनी चाहिए कि लोगों के पास भी कि नोटा को थोड़ी ज्यादा पाव दी जाए जैसे फॉर एग्जांपल यहां पर बात
करी जाती है महाराष्ट्र की महाराष्ट्र के जो लोकल इलेक्शंस होते हैं ना वहां पर अगर आप नोटिस करोगे तो महाराष्ट्र के स्टेट इलेक्शन कमीशन ने यह बोला था कि नोटा अगर मान लो वहां पे एक कैंडिडेट की तरह ही उसको ट्रीट किया जाएगा और अगर मान लो नोटा जीत जाता है तो वहां पर दोबारा से पोलिंग होगी या फिर कुछ लोग यह भी कहते हैं कि मान लो अगर नोटा के मैक्सिमम वोट्स आते हैं इसका मतलब यह है कि बाकी सारे कैंडिडेट लोग के साथ लोग खुश नहीं थे फिर इन कैंडिडेट्स को अगले 5 साल
के लिए आपको इलेक्शन में खड़ नहीं ही ना दिया जाए तो इस तरह के अलग-अलग यहां पे तर्क दिए जाते हैं पर आप समझ गए होंगे कि अभी के लिए नोटा का सिस्टम क्या है कि जब भी हम बात करते हैं ना तो जो भी पर्सन का वोटिंग हाईएस्ट होती है इर रिस्पेक्टिव ऑफ नोटा वो यहां पे जीत दिया जाता है 2013 के अंदर यहां पे इसको इंट्रोड्यूस किया गया था यहां पे सुप्रीम कोर्ट ने यही बोला था कि एक वोटर का हक है नॉट टू वोट वाइल प्रोटेक्टिंग हिज राइट टू सीक्रेसी तो इस वजह
से नोटा का ऑप्शन आपको दिया जाता है प्लस एट द सेम टाइम आप जानते हो कई बार ना जमानत जप्त हो जाती है कुछ लोगों की जिनको बहुत कम वोट्स मिलते हैं ऐसे केस में भी ना नोटा वोट्स को काउंट ही नहीं किया जाता उनको अकाउंट में लिया ही नहीं जाता जब हम कैलकुलेट करते हैं टोटल वैलिड वोट पोल्ड की अब ये तो नोटा की बात हो गई इसके साथ ही एक मिलता जुलता कांसेप्ट है जिसको हम क्या बोलते हैं जिसको हम बोलते हैं रूल 49 ओ अंडर कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल 1961 देखो थोड़ा सा
फर्क है नोटा और इसके अंदर आप पूछेंगे सर क्या फर्क है देखो नोटा के अंदर तो क्या था आप गए ईवीएम के अंदर आपने नोटा दबा दिया तो आपने नोटा को वोट डाल दिया कई बार पता क्या होता है कई बार मान लो आप गए वहां पे आपने वहां पर आके जो रिटर्निंग ऑफिसर होंगे आप उनको बोलोगे कि यार मुझे ना वोट ही नहीं करना क्यों नहीं वोट करना मुझे वोट लिस्ट नहीं करना क्योंकि मुझे कोई बंदा पसंद ही नहीं है देखो पहले केस में जो बात कर रहा हूं नोटा वाली वहां पर आपने वोट
किया है आपने बेसिकली नोटा को वोट किया है दूसरे केस में क्या हो रहा है रूल 49 ओ क्या कहता है यह कहता है कि भाई आप मना कर रहे हो कि मुझे वोट करना ही नहीं है आई एम नॉट वोटिंग इन एनी फेवर ना नोटा को वोट कर रहा हूं ना किसी को वोट कर रहा हूं आई एम नॉट वोटिंग फॉर एनी वन दैट ट इज रूल 49 ओ अब आप पूछेंगे सर नोटा और इसमें फर्क क्या हुआ देखो नोटा में आप वोट कर रहे थे रूल 49 ओ में आप वोट ही नहीं कर
रहे हो नोटा में आपका राइट टू सीक्रेसी प्रोटेक्ट है आपने किसको वोट दिया आपके अलावा किसी को नहीं पता पर जैसे आप रूल 49 ओ के माध्यम से आप वोट कर रहे हो तो कहीं ना कहीं आपकी सीक्रेसी खत्म हो गई है यहां पे समझ रहे हो आपने तो साफसाफ जाके बोल दिया कि भाई मुझे नहीं वोट करना मेरा रिफ्यूज टू वोट है समझे तो ये चीजें होती है यहां पर आपका सिग्नेचर और थंब इंप्रेशन आपका लिया जाता है इस रिमाग के अंदर कि हम अपना वोट दर्ज ही नहीं कराना चाहते ठीक है ना पर
नोटा के केस में ऐसा कुछ भी इशू नहीं होता है तो ये फर्क आपको थोड़ा सा जानना चाहिए था नोटा और रूल 49 ओ के बीच रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स का एंड अपने आप में काफी चिंताजनक बात इन्होंने भी यहां पे बात करी है विद रिगार्ड्स टू प्रेस फ्रीडम इंडेक्स एक्चुअल में हुआ क्या है मैं पहले आपको बताता हूं एक ना रिपोर्टर सेंस फ्रंटियर्स है क्या है रिपोर्टर सेंस फयर जिनको हम रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर के नाम से भी जानते हैं ये क्या है ये एक इंटरनेशनल ए जो है जो बोलती है कि हम दुनिया भर में
मीडिया की फ्रीडम को प्रमोट करते हैं उनको प्रोटेक्ट करते हैं प्लस एट द सेम टाइम वहां पर जर्नलिस्ट को कितनी रिस्पेक्ट दी जाती है कि ऐसा तो नहीं कि जर्नलिस्ट को वहां पर डराया धमकाया जाता है या फिर इंटरफेरेंस कितना ज्यादा होता है यह सारी चीजें ताकि फ्रीडम प्रेस की इसको इंक्रीज किया जा पाए और जर्नलिस्ट की सेफ्टी का ध्यान रखा जा पाए यह सब बातें करती है रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ठीक है इस तरह से ना पूरी दुनिया में लगभग 180 कंट्रीज को अंदर ये चीज नोटिस करते हैं कि कहां-कहां पर कितनी प्रेस फ्रीडम है
अब इंडिया के केस में ना इन्होंने बताया है कि भाई देश में प्रेस फ्रीडम कम हो गई है देखो मैं फिर से बता रहा हूं यह इन्होंने बोला है यह मैं नहीं बोल रहा यह रिपोर्ट क्या कह रही है मैं वो बता रहा हूं रिपोर्ट ने बोला है कि पिछले साल इंडिया में जो प्रेस फ्रीडम इंडेक्स था तो इंडिया का स्कोर उसमें 36.6 2 था अब ये नीचे गिरकर 31.2 हो चुका है अब आप पूछेंगे सर ऐसा क्या हो गया कि हमने प्रेस फ्रीडम में हम नीचे गिर गए या फिर हमारा स्कोर नीचे गिर गया
ठीक है रैंक हालांकि हमारा इंप्रूव हुआ है पिछले साल हम 161 पे थे इस साल हम इंप्रूव होके 159 हो चुके हैं पर उसका कारण यह है कि बाकी कंट्रीज नीचे गिरी है ठीक है तो इस कोट नीचे गिरने का सर कारण क्या है देखो यहां पर ना रिपोर्ट के अंदर कुछ बातें करी गई है मैं फिर से रिइटरेट कर दूं ये इस रिपोर्ट की बातें है मेरी बातें नहीं है इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि जब से 2014 से सरकार आई है पावर के अंदर तो देश में एक अनऑफिशियल स्टेट ऑफ इमरजेंसी चल
रही है देश के अंदर गोदी मीडिया चल रहा है देश के अंदर बीजेपी का प्रोपेगेंडा चल रहा है एंड जो आपके रिपोर्टर्स हैं वो एक ही साइड को दिखाते रहते हैं पूरा दिन हिंदू मुस्लिम करते हैं एंड ऑन द अदर हैंड बाकी जो मेन मुद्दे हैं आपके बेरोजगारी इंफ्लेशन इन सब चीजों के ऊपर डिस्कशन नहीं होती तो हमारे जो मीडिया है अब वो कहीं ना कहीं बायसन बायस तरह से चीजें नहीं दिखाता है ऐसा इस रिपोर्ट ने बोला है अब देखो पिछले साल भी कुछ ऐसी ही बातें बोली गई थी उस समय भी हमारी सरकार
ने क्या बोला था कि भैया यह जो रिपोर्ट है यह अपने आप में मिस इफॉर्म है प्रोपेगेंडा दिखा रही है एंड हमने इस रिपोर्ट को रिजेक्ट कर दिया था ऑन द अदर हैंड मैं बाकी चीजें अगर बताऊं तो यूएसए की बात करें तो भैया यूएसए में भी गिरावट देखने को मिली है पिछले साल यूएसए का रैंक 45 था इस बार गिर के वो 55 हो चुका है इवन जैसे डोनाल्ड ट्रंप की जब प्रेसिडेंसी थी ना तो इन्होंने उनको भी क्रिटिसाइज किया है कि उस समय भी उन्होंने मीडिया को बहुत हैवी लेवल के ऊपर क्रिटिसाइज किया
तो दुनिया भर में भी अगर हम बात करें तो दुनिया भर में ही गिरावट देखने को मिली है ऐसा नहीं कि एक दो देशों में है नहीं लगभग सभी दुनिया की कंट्रीज के अंदर एक गिरावट ही देखने को मिली है ओवरऑल अगर हम बात करें तो 7.6 पॉइंट्स ग्लोबली ये फॉल हुआ है राइट तो ये चीजें आपको पता होनी चाहिए कि कौन रिलीज करता है इस रिपोर्ट को वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स को रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स 180 कंट्रीज के अंदर देखा जाता है जर्नलिज्म की क्या हालत है इसके बेसिस के ऊपर देखा जाता है पॉलिटिकल लेजिस्लेटिव
इकोनॉमिक सोशो कल्चर एंड जर्नलिस्ट की कितनी सेफ्टी है यहां पर ना आप इस पिक्चर के अंदर देख भी पाओगे यहां पर आप नोटिस करिएगा कि जहां-जहां पर आपको ग्रीन देखने को मिल रहा है ना जैसे यहां पे यहां पे सिचुएशन बहुत बढ़िया है एंड जो जितना ज्यादा डार्क है वहां पर सिचुएशन उतनी ज्यादा खराब है जैसे फॉर एग्जांपल अगर मैं बात करूं इर तरिया की इर तरिया यहां पे लोएस्ट आया है इस पर्टिकुलर रैंकिंग के अंदर उनके अलावा अफगानिस्तान सीरिया ये सेकंड और थर्ड पे है एंड टॉप क्या है नॉर्वे और डेनमार्क ने कि यहां
पर प्रेस फ्रीडम काफी अच्छी खासी है ऐसा इस रिपोर्ट ने यहां पे बताया है इंडिया का फॉल क्यों हुआ है मैंने आपको वो भी समझा दिया पर हालांकि इंडिया 2 साल पहले 150 रैंक पे था 2023 में और गिर के हम 151 161 हुए हुए अब हम 159 पे आ चुके हैं तो यहां पे इंडिया ने दो रैंक इंप्रूव जरूर किया है पर इसका पीछे कारण है कि बाकी कंट्रीज की रैंकिंग नीचे गिरती हुई हमें देखने को मिल जाती है ठीक है दोस्तों अगले टॉपिक की तरफ बढ़ते हैं अगला हमारा टॉपिक है आर्टिकल 361 के
रिगार्डिंग देखो जो वेस्ट बंगाल के गवर्नर है ना उनके अगेंस्ट एक कंप्लेंट आई है कंप्लेंट किस चीज की है सेक्सुअल हरासमेंट की केस अपने आप में काफी अ गंभीर है पर अगर हम बात करें आर्टिकल 361 की तो उसकी वजह से उनको क्या मिल जाएगी कांस्टीट्यूशनल इम्युनिटी मिल जाएगी अब है क्या देखो आर्टिकल 361 की बात करें तो यहां पे बात करता है कि गवर्नर को प्रोसीक करने के ऊपर एक टोटल प्रोहिबिशन आपको यहां पे देखने को मिल जाती है एक्चुअल में आपको मैं थोड़ा बताता हूं जब मैं बात करता हूं ना आर्टिकल 361 की
यहां पे लिखा गया है कि कोई भी क्रिमिनल प्रोसीडिंग्स आप नहीं कर सकते अगेंस्ट द प्रेसिडेंट और द गवर्नर ऑफ द स्टेट अ उनके अगेंस्ट कोई चीज कंटिन्यू नहीं कर सकते साथ ही साथ जब तक वो अपने उसमें है तो उनका अरेस्ट का इंप्रिजनमेंट का उसके रिगार्डिंग भी कोई प्रोसेस इशू नहीं किया जा सकता हालांकि सिविल प्रोसीडिंग्स जो होती है ना वो यहां पे इसके अगेंस्ट इशू करी जा सकती है पर उसके लिए भी उनको नोटिस वगैरह देना पड़ता है ठीक है ना तो इस तरह से आप नोटिस करोगे बाकी जो भी उनकी ड्यूटीज होती
है उनके लिए वो किसी भी कोर्ट के अंदर यहां पे आंसरेबल नहीं होते हैं जो पुलिस वगैरह को एक्शन लेना होता है इस तरह का आपका जो स्पेशली क्रिमिनल एक्शन की बात करूं तो वो तभी ले सकते हैं जब वो अपने ऑफिस से उनका ऑफिस खत्म हो चुका है या तो उन्होंने रिजाइन कर दिया है या फिर उनका कॉन्फिडेंस अब खत्म हो चुका है प्रेसिडेंट का उनके ऊपर उसी केस में उसके बाद जाके ही इनके ऊपर एक्शन लिया जा सकता है बहुत सारे जुडिशियस केसेस भी हुए हैं जैसे फॉर एग्जांपल रामेश्वर प्रसाद वर्सेस यूनियन ऑफ
इंडिया केस यहां पर भी इन्होंने सुप्रीम कोर्ट ने यही बात करी थी कि किस तरह से गवर्नर के पास इम्युनिटी होती है प्लस एट द सेम टाइम जो कल्याण सिंह जी है ना यूपी के चीफ मिनिस्टर जो हुआ करते थे तो उनके ऊपर भी यहां पर बात करी गई थी 2017 के अंदर कि उनके अगेंस्ट जो 1992 के अंदर बाबरी मस्जिद को डिमोलिश किया गया था तो इनके अगेंस्ट फ्रेश चार्जेस लगाए जाए पर एक्चुअल में 2017 के अंदर यह राजस्थान के गवर्नर थे राजस्थान के गवर्नर थे तो इनके ऊपर एक्शन लिया नहीं जा सकता था
तो ये कुछ ऐसी चीजें होती है जहां पर हमें देखने को मिलता है कि कैसे गवर्नर्स को इम्युनिटी मिलती है अंडर आर्टिकल 361 तो ये पूरा केस ना गवर्नर ऑफ राजस्थान का ये उसी के साथ यहां पे लिंक करता है दोस्तों अगला हमारा टॉपिक है मद्रास हाई कोर्ट अप होल्ड्स डॉक्टर्स बॉन्ड एग्रीमेंट देखो एक्चुअल में क्या होता है ना जैसे लोग एमबीबीएस करते हैं ठीक है ना फिर उसके बाद एमडी करते हैं या एमएस वगैरह करते हैं राइट अब ना हर स्टेट का अपना अपना प्रोसेस चलता है क्या मतलब देखो जैसे फॉर एग्जांपल या तो
अब एमबीबीएस या एमडी करते टाइम आप एक गवर्नमेंट हॉस्पिटल में एडमिशन ले सकते हो जहां पर फीस वगैरह बहुत ही कम होती है ऑन द अदर हैंड आप प्राइवेट हॉस्पिटल में लेते हो जहां पर फीस सर बहुत बहुत ज्यादा होती है डॉक्टर्स के लिए तो है ना तो ये चीजें आपको पता होंगी अब देखो जब गवर्नमेंट हॉस्पिटल के अंदर आप यहां पे एडमिशन ले रहे हो बहुत ही कम फीस के अंदर तो एक्सपेक्टेड यह रहेगा कि आप बाद में पता क्या करोगे आप बाद में कहीं और जाने से पहले आप वहां के लोगों को क्या
दोगे सर्विसेस प्रोवाइड करोगे कहने का मतलब क्या है मैं आपको समझाता हूं जैसे एमबीबीएस पता है क्या होती है साढे साल की होती है फिर एक साल की इंटर्नशिप होती है अब अगर आपने गवर्नमेंट हॉस्पिटल में पढ़ाई करी है जहां पर फीस बहुत ज्यादा सस्ती थी तो सरकार आपसे एक्सपेक्ट करेगी कि मान लो एक साल आप वहां काम करोगे ये काम क्यों कर रहे हो क्योंकि देखो आपके लिए इतनी कम फीस के अंदर ये चीज थी तो आपकी एक्सपेक्टेड है आप भी आपसे एक्सपेक्टेशन ये है कि आप भी ह्यूमैनिटी के लिए सर्व करोगे तो एक
साल का ना आपका बॉन्ड होता है कि आपको एक साल वहां पर काम करना ही करना है सर अगर मैं ना काम करना चाहूं तो तो कुछ पैसे पे करने पड़ेंगे मान लो 5 लाख हो गया या ऐसे कुछ सिमिलर मैनर में आप एमडीएमएस करते हो किसी पर्टिकुलर गवर्नमेंट हॉस्पिटल से तो वहां पर भी ये चीज एप्लीकेबल होती है मैं फिर से बता दूं ये स्टेट टू स्टेट वेरी करता है ठीक है ना एजुकेशन एक स्टेट मतलब एजुकेशन के रिगार्डिंग आपकी मतलब वैसे तो कॉन्करेंट लिस्ट में आता है पर स्टेट्स भी इसके रिगार्डिंग अपने अलग-अलग
कानून बनाते हैं तो आप नोटिस करोगे हर स्टेट टू स्टेट में ये चीज अलग है किसी जगह एक साल का बंड है किसी जगह दो साल का बॉन्ड है कितने पैसे देने हैं वो भी अलग-अलग जगह प अलग-अलग आपको देखने को मिल जाता है तो अभी यह मुद्दा गया था मद्रास हाई कोर्ट के अंदर वहां कुछ बच्चों ने बोला यार ये बॉन्ड वगैरह हमसे मत साइन करवाया करो ठीक है ना ये मतलब कहीं ना कहीं ये इशू है मतलब कि आप पब्लिक हॉस्पिटल में हम बोलते हो कि 2 साल के लिए सर्व करना है यह
बात ठीक नहीं है तो कहीं ना कहीं मद्रास हाई कोर्ट ने बोला कि नहीं ऐसा कुछ नहीं है बॉन्ड एग्रीमेंट बिल्कुल ठीक चीज है मद्रास हाई कोर्ट ने यह बोला कि देखो मेडिकल प्रोफेशन का ऑब्जेक्टिव ही क्या है कि कहीं ना कहीं वो ह्यूमैनिटी को सर्विसेस दे पाए राइट तो इस तरह से अगर आप बोलोगे कि यार हम गवर्नमेंट हॉस्पिटल में काम नहीं करेंगे हम पुअर पेशेंट्स को ट्रीटमेंट नहीं देंगे आपने बॉन्ड के ऊपर एग्रीमेंट भी कर दिया ये कहीं ना कहीं आपके मेडिकल एथिक्स के ही अगेंस्ट जाता है ठीक है ना आपको जो एजुकेशन
मिली है वो कहीं ना कहीं उनके एक्सपेंस के ऊपर मिली जो इतने सस्ते दामों के ऊपर तो आप ये सिफ चीजें मना नहीं कर सकते या फिर या तो मना कर रहे हो तो बॉन्ड का पैसा भर के जाओ नहीं तो आप जो भी जिस स्टेट में जो भी है मान लो किसी जगह एक साल है किसी जगह दो साल है तो आपको बॉन्ड पीरियड को कंप्लीट करना ही पड़ेगा जैसे मध्य प्रदेश के अंदर ना एक साल का बॉन्ड एग्रीमेंट आपको देखने को मिलता है इस तरह अलग-अलग स्टेट्स के अंदर अलग-अलग रूल्स आपको देखने को
मिल जाएंगे और बात थी यूएपीए के ऊपर बात थी न्यूज़ क्लिक के ऊपर जो अरेस्ट हुआ था उसके बारे में तो हुआ यह न्यूज़ क्लिक असल में एक वेबसाइट है जिसके ऊपर आरोप यह लगा था कि यह असल में चाइना से फंडिंग लेके और चाइनीज प्रोपेगेंडा को इंडिया में स्प्रेड कर रहे थे और इलीगल एक्टिविटीज का भी इनके ऊपर आरोप लगा था इनके चीफ एडिटर को अरेस्ट किया गया था यूएपीए केस के अंतर्गत अब मामला यह था कि इस अरेस्ट को कोर्ट ने साइडलाइन किया था और यहां कुछ बातें कही गई जैसे राइट टू बी
इफॉर्म या ग्राउंड टू अरेस्ट कौन से कॉन्स्टिट्यूशन आर्टिकल से जुड़ी हुई है क्या इसका रेलीवेंस है यह हमें पता होना चाहिए ठीक है अब कहा ये जाता है कि भाई फंडिंग आपको चाइना से मिली इस वजह से वो अरेस्ट हुए हैं ये न्यूज़ जो है हमारे लिए उतनी इंपोर्टेंट नहीं है लेकिन जो रीजन दिए गए सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट में उन्होंने कहा कि एफआईआर इलीगल है इसके बारे में उन्होंने कुछ बातें बोली पहला कि जब उनको अरेस्ट किया गया तो उनको एफआईआर की कॉपी दो दिन बाद मिली गई मिली थी लेकिन उनको तब तक रिमांड
में रखा गया जो उनके फंडामेंटल राइट्स के खिलाफ था अब मेरा आपसे सवाल है फंडामेंटल राइट्स कौन से एसोसिएटेड है अरेस्ट के हिसाब से या जो गोल्डन ट्रायंगल है फंडामेंटल राइट्स का आर्टिकल 14 19 और 21 जिसको हम कहते हैं गोल्डन ट्रायंगल ऑफ फंडामेंटल राइट्स इसमें कुछ ऐसे आर्टिकल्स हैं जो डील करते हैं अरेस्ट के बारे में हालांकि इन तीनों से बाहर है वो 22 प्राइमर डील करता है इसके बारे में वो क्या है तो देखिए एज पर द कॉन्स्टिट्यूशन सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट में ये फिर बताया गया यू हैव राइट टू बी इफॉर्म अंडर
आर्टिकल 20 21 एंड 22 इसमें सबसे इंपॉर्टेंट चीज यह है कि अंडर आर्टिकल 22 सबसेक्शन व यह आपका अधिकार है कि आपका जो ग्राउंड्स ऑफ अरेस्ट है वोह आपको पता रहना चाहिए और यहां पर यह भी बोला गया कि जो लॉज है जैसे यूएपीए के बारे में हमने कल जाना था यूएपीए के अंदर 180 दिन तक किसी को आप रख सकते हैं रिमांड में लेकिन वो भी बोला गया था कि यूएपीए जैसे लॉज के मामले में भी किसी व्यक्ति के पास यह फंडामेंटल राइट है कि वो उनको इफॉर्म किया जाए कि किस ग्राउंड पर उन्हें
अरेस्ट किया जा रहा है यहां दो चीज है एक होती है रीजन ऑफ अरेस्ट और एक होता है ग्राउंड ऑफ अरेस्ट रीजन ऑफ अरेस्ट मतलब होता है क्या कारण है अरेस्ट करने का ऐसे कई सारे कारण हो सकते हैं कि तबाही मत जाएगी आप कुछ आतंकवादी गतिविधियां कर रहे हो कोई भी कारण हो सकता है लेकिन ग्राउंड्स ऑफ अरेस्ट देना बहुत जरूरी है कि व्हाट इज द रीजन ऑफ यूर गेटिंग टू बी अरेस्टेड आप ही को क्यों अरेस्ट किया जा रहा है ट इज द ग्राउंड ऑफ अरेस्ट तो कोर्ट ने बोला है ग्राउंड ऑफ अरेस्ट
इज योर राइट जिसके हिसाब से आपको पता होना चाहिए तो अगर आपसे ऑप्शन में दिया जाए ग्राउंड रेस्ट या फिर रीजन ऑफ अरेस्ट तो वहां ग्राउ ग्राउंड ऑफस की बात की किस ग्राउंड्स पे किस बिना प किसी को गिरफ्तार किया जा रहा है यह जानना उनका अधिकार है और प्राइमर ये किसके अंदर आएगा आर्टिकल 22 सबसेक्शन वन के अंतर्गत आता है ये कि आपको पता होना चाहिए आपको रिटर्न में मिलना चाहिए कि किस ग्राउंड में आपको एस्ट किया जा रहा है सभी फैक्ट्स के साथ और सुप्रीम कोर्ट ने इसी हिसाब से फिर उनको बेल दिया
कि भई इनको बताया नहीं गया था अ लीगल है अब दूसरी बात आती है किसके अंतर्गत इन्हें अरेस्ट किया गया था यूएपीए के अंतर्गत मैंने आपको पहले भी पूछा था यूएपीए कब लागू हुआ था कब फॉर्म में आया था 1967 में असल में पहले बन के तैयार हुआ था आज जो है वो 2019 वाला वर्जन हम हमारे देश में लागू है जिसके अंदर आप किसी इंडिविजुअल को भी अरेस्ट कर सकते हो जो इंडिया के बाहर सिटीजन है उसके ऊपर भी लागू होता है फॉरेन व्यक्ति के ऊपर लागू हो सकता है शिप एयरक्राफ्ट आप इंडिया से
बाहर भी कोई क्राइम है उसमें भी लागू हो सकता है इन्वेस्टिगेशन कौन करता है तो एनआईए करती है इसमें जो बदलाव रिसेंटली किए गए उसमें यह था कि टेररिस्ट एक्टिविटीज के खिलाफ भीय लागू हो सकता है जो इंडिविजुअल है उसको आपसे टेररिस्ट भी डिक्लेयर कर सकते हो पहले प्रावधान नहीं था कि इंडिविजुअल को आप टेररिस्ट डिक्लेयर कर पाओ तो शेड्यूल फोर जो एक्ट है उसमें बिना ड्यू प्रोसेस के भी बदलाव किया जा सकता है कि य आतंकवादी है उसके बाद उनको यूएपीए के अंतर्गत अरेस्ट किया जा सकता है याद रखिए ग्राउंड्स ऑफ अरेस्ट आपका अधिकार
है जानना रीजन ऑफ अरेस्ट ना भी बताया जाए काउ रेस्ट पता होना चाहिए किसके अंदर है 22a के अंतर्गत यूएपीए कब लागू हुआ कौन सी इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को लीड करती है क्या इसमें बदलाव किए गए अभी जो एनई है उनके डीजी जो है वो अगर अगर किसी के ऊपर यूएपीए लगता है तो कोई प्रॉपर्टी के आसपास कोई ऐसी चीज है जिनको पता चले किय प्रॉपर्टी किसी चीज में संलिप्त है तो उसके ऊपर भी सीजर या अटैच करने का अधिकार एनआईए को मिलता है अंडर यूएपीए ठीक है यूएपीए की फुल फॉर्म बताइए क्या है कल हमने
डिस्कस किया था कमेंट सेक्शन में लिखिए अब फिर आते हैं उस टॉपिक प कि भाई राइट टू बी इफॉर्म इन केस ऑफ अरेस्ट ये क्या कहानी है तो पहले एक है भारत की न्याय संहिता उसका सेक्शन 47 जो है वो मेंशन करता है कि पुलिस ऑफिसर जब भी किसी को अरेस्ट कर रहा होता है तो उसको किसी वारंट की अगर बिना अगर अरेस्ट किया जा रहा है तो उसकी जानकारी देनी चाहिए ग्राउंड ऑफ ऑफेंस किसके लिए उन्हे अरेस्ट किया जा रहा है य क्लीयरली मेंशन है किसी बिना किसी वारंट के लिए कि अगर किसी को
आप य अरेस्ट करें उस व्यक्ति को बताना पड़ेगा वो क्या उसने ऐसा ऑफेंस किया है क्या क्राइम केसके बदले में उ किया जा रहा है और अगर वो जो क्राइम है व अवेलेबल है तो उनको यह भी बताना पड़ेगा कि वो बेल पे छूट सकते उनका अधिकार है और क्या इसका सिस्टम है उन्हें बताना अधिकार होता है अंडर सेक्शन 51 ए ऑफ सीआरपीसी सेक्शन 49 इन भारतीय न्याय संघ का पहले सीआरपीसी था अब बीएनएसएस कहते हैं इसको ठीक है ये तो हमने समझ लिया अब कांस्टिट्यूशन में क्या है आर्टिकल 22 कि अरेस्टेड व्यक्ति को ग्राउंड्स
ऑ अरेस्ट पता होनी चाहिए किस ग्राउंड पर अरेस्ट किया जा रहा है और इतना ही नहीं उके फैमिली मेंबर्स या रिलेटिव है या दोस्त है तो उनको उनके गिरफ्तारी के बारे में जानकारी देना अधिकार होता है ठीक ये यहां पता चल गया देखो अब यहां एक चीज समझो कि राइट टू बी इफॉर्म इन केस ऑफ अरेस्ट अलग है और राउट टू बी इफॉर्म अलग है राउट राइट टू बी इफॉर्म कई मामलों में लागू होता है कि अगर आप कोई खाने का पैकेट भी खरीद रहे हो तो जो पैकेज है उसके ऊपर भी आपको इंफॉर्मेशन मिलनी
से क्या दिया जा रहा है तो वो ज कंज्यूमर राइट्स है राइट टू बी इफॉर्म ड्यूरिंग अरेस्ट इ स्पेसिफिकली रिलेटेड पुलिस के मामले में तो ये जो अगर राइट टू इफॉर्म है ये आपका कंज्यूमर राइट्स में भी आता है तो अगर आपसे पूछा जाए राइट टू बी इनफॉर्म इसको सीधा अरेस्ट के साथ मत जोड़ लेना राइट टू बी इफॉर्म जनरली भी ट्रांसपेरेंस की बात करते हैं कि एक् इन राइट टू इंफॉर्मेशन हमारी आरटीआई जो है वो भी असल में इसी के अंदर काम करती है कि आप किसी भी सरकारी संस्था से पूछ सकते हैं उ
निर्णय या जो भी आप जानना चाहे आप उनको एक एक एफीड एफिट देके या फिर एक एप्लीकेशन लिख के पता कर सकते हैं तोय कंज्यूमर राइट्स और एक नॉर्मल सिटीजन के जो राइट है इफॉर्म होने के वो अलग है और अरेस्ट वाली मामला थोड़ा और डिटेल में चला जाता है तो यहां जब हम बात करें राइट टू बी इनफॉर्म यहां कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 का आता है जिसके अंदर आपके पास एक लीगल राइट है टू नो टू बी इफॉर्म कि क्या चीज आप कंज्यूम कर रहे हो क्या चीज आपको बेची जा रही है अगर आप
डाटा आपसे लिया जा रहा है सरकार आपका फिंगरप्रिंट अगर लेती है या रेटिना का स्कैन लेती है आयस का स्कैन लेती है तो वो आपको इफॉर्म करेगी कि आपका पर्सनल डाटा कहां-कहां यूज होगा दैट इज योर लीगल राइट एंड नाउ दिस इज अ ग्राउंड टू बी वो जो आपको पता चलना चाहिए कि किस ग्राउंड पे आपको एस किया जा रहा है दैट इज योर फंडामेंटल राइट ठीक है ये समझ गए हम डिफरेंस आरटीआई जैसे मैंने बताया आपको 2005 का या 2000 सेक्शन ए जो है इसका यह भी बताता है कि कुछ चीजें डिस्क्लोज नहीं की
जा सकती लेकिन बाकी चीजें आपको जानकारी मिलना आपका अधिकार है तो फंडामेंटल राइट लीगल राइट का डिफरेंस क्या है राइट टू इंफॉर्मेशन एंड राइट टू बी इफॉर्म ऑन द ग्राउंड्स ऑफ र अरेस्ट दोनों अलग-अलग चीजें है फंडामेंटल राइट और लीगल राइट का अंतर आपको समझ आ गया इस केस में जानकारी हमें देनी चाहिए थी मिल गई दोस्तों सुप्रीम कोर्ट के द्वारा एक बहुत ही इंपॉर्टेंट यहां पर निर्णय दिया गया है यहां पर आप नोटिस करोगे कि बहुत जदा डिस्कशन हो रहा है पिछले दिनों के अंदर फॉर्म 17 सी के बारे में तो आखिर यह फॉर्म
17 सी क्या है फॉर्म 177a क्या है आइए पूरा डिटेल में इसको समझने की कोशिश करते हैं देखो दरअसल में ना मान लीजिए कि आप किसी इलेक्शन में खड़े हुए ठीक है अब आप जिस भी इलेक्शन में खड़े होते हैं मान लो जैसे आप लोकसभा के इलेक्शन में खड़े हुए हैं ठीक है अब लोकसभा का इलेक्शन एक जगह थोड़ी होगा बहुत सारे अलग-अलग आपके पोलिंग बूथ होंगे राइट उनके अंदर इलेक्शंस होता है अब हर बूथ के ऊपर बहुत सारे लोग आएंगे जिनको अपनी वोटिंग करनी होगी बिल्कुल ठीक बात है तो एक फॉर्म होता है फॉर्म
177a पहले 177a समझाता हूं फिर 17 सी के ऊपर आता हूं 177a के अंदर पता क्या होता है जो भी आपका पोलिंग अधिकारी होता है ठीक है ना जो पोलिंग बूथ के रिगार्डिंग जो भी अधिकारी होता है उनका वह यहां पर क्या करता है फॉर्म 17 ए के माध्यम से जो भी वोटर वोट देने आया है उसका पूरा डाटा उसके पास होता है चलो ठीक है अब बात करते हैं फॉर्म 17 सी की जिसके ऊपर सारा मतभेद हो रखा है आज के समय एक्चुअल में क्या है ना फर्म 17 सी के दो पार्ट्स होते हैं
एक है आपका पार्ट वन एंड दूसरा होता है आपका यहां पर पार्ट टू अब जो फॉर्म का पार्ट वन है वो तब बढ़ा जाता है जब कहीं ना कहीं वोटिंग होती है जैसे मान लो आज वोट हो गया यहां पे तो इस पोलिंग बूथ के ऊपर ये सारी चीजें देखी जाएंगी क्या चीजें देखी जाएंगी कि कितने इलेक्टर साइंड है उस बूथ के लिए कितने रजिस्टर्ड वोटर्स है उस एरिया के अंदर कितने लोगों ने वोट नहीं दिया कितने लोगों को वोट दिया करने नहीं दिया गया टोटल नंबर ऑफ वोट्स कितने रिकॉर्ड हुए ईवीएम के हिसाब से
एंड इस हिसाब से फिर पूरा डाटा यहां पे आ जाता है तो हमारे पास ना एक प्रॉपर नंबर बन जाएगा कि कितने लोगों ने एक्चुअल में वोट दिया है सारे वोट हटा के जो कि कहीं ना कहीं इनवैलिड वगैरह थे ऑन द अदर हैंड जब वोटिंग हो चुकी है एंड जब रिजल्ट आएंगे जिस दिन काउंटिंग होगी तब ना यहां पे फॉर्म 17 सी का पार्ट टू को फिल किया जाता है यहां पर आपका नंबर नेम ऑफ कैंडिडेट होता है जो भी आपके अलग-अलग कैंडिडेट खड़े हुए हैं डिफरेंट पोलिटिकल पार्टी या इंडिपेंडेंट भी खड़े हो सकते
हैं उनको कितनी किनी वोट्स मिली उनका यहां पे टोटल किया जाएगा अब मुझे यह बताओ यह वाला जो टोटल यहां पर आया वर्सेस यहां पर जो हमने देखा था टोटल नंबर ऑफ वोट्स रिकॉर्डेड उसके बाद वो सारा माइनस करने के बाद जो नंबर आया क्या वो मैच करना चाहिए द आंसर इज ओबवियसली यस क्योंकि ऐसा थोड़ी हो सकता है कि वोट आप देख रहे हो कितने डले वर्सेस आप देख रहे हो कि वोट कितने काउंट हुए उनमें अंतर थोड़ी आना चाहिए जब आपने इनवैलिड हटा ही दिया फिर तो सेम आना चाहिए बिल्कुल सही बात है
अब यहां पे मुद्दा पता क्या आ रहा है जब हम बात करते हैं ना फॉर्म 17 सी की यह फॉर्म 17 सी पता है किसको दिया जाता है यह फॉर्म दिया जाता है जो भी आपके इलेक्शन में लोग खड़े हुए हैं ना उनके एजेंट को क्योंकि आप जैसे मान लो आप लोकसभा के चुनाव के लिए खड़े थे आप सब जगह थोड़ी जा सकते हो पर आपके एजेंट जरूर होते हैं उस पोलिंग बूथ के ऊपर तो उन एजेंट को जरूर दे दिया जाएगा पर यहां पर ना एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म जो एडीआर है और भी बहुत
सारे साथ में थे इन्होंने बोला था कि ईसीआई को ऐसा करना चाहिए इलेक्शन क्शन ऑफ इंडिया को कि जितना भी डाटा है फॉर्म 17 सी का वो सारा का सारा डाटा अपलोड कर देना चाहिए अब सुप्रीम कोर्ट ने बोला नहीं ऐसा कुछ नहीं है इसकी कोई जरूरत नहीं है इसके लिए फ्री एंड फेयर इलेक्शंस के ऊपर सबका ध्यान होना चाहिए ऐसे बीच इलेक्शंस के समय हम ये यहां पर इलेक्शन कमीशन को इतना ज्यादा काम नहीं दे सकते तो यहां पर जो सिस्टम चल रहा है वो ठीक चल रहा है अब आप पूछेंगे सर एडीआर को
इतनी क्या जरूरत पड़गी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स को कि वो बोले जाके कि भैया फॉर्म 17 सी का डाटा अपलोड करो या और लोग क्यों बोल रहे हैं इसके पीछे देखो एक्चुअल में पिछले दिनों में हुआ पता क्या है अक्सर ना ईसीआई इलेक्शन क्वेन ऑफ इंडिया डाटा देता है किस चीज का डाटा यह बताता है कि किसी फेज के अंदर कितने परसेंट पोलिंग हुई आप लोग अगर प्रीलम बूस्टर को रेगुलरली सुन रहे हो ना मैंने भी आपको कई बार बताया कि यार इस फेज वन में 61 पर 62 ऐसे कुछ कुछ नंबर्स मैंने आपको बताए
थे है कि नहीं अब हो पता क्या रहा है यह ना डाटा इलेक्शन क्वेश्चन ऑफ इंडिया रिवाइज कर रहा है मतलब कई बार हो रहा है कि पहले नंबर कुछ और दिया फिर 3 4 5 पर नंबर बढ़ा के कुछ और बता दिया प्लस एट द सेम टाइम आज तक जितने भी चुनाव हुए हैं उनमें जो डाटा था ना जो डेटा था वो 24 से 48 घंटे के अंदर नॉर्मली पब्लिश हो जाता था नॉर्मली विदन एक दिन के अंदर ही हो जाता था पर इस बार कुछ-कुछ फेजेस के अंदर ऐसा भी रहा है कि 10
दिन लग गए उसको पब्लिश करने के अंदर किसी बार चार दिन भी लग गए तो काफी सारे लोगों का ना ट्रांसपेरेंसी के रिगार्डिंग क्वेश्चन यहां पे उठ रहा है तो इस वजह से ये थोड़ा फॉर्म 17 सी वाला मुद्दा न्यूज़ में आ चुका है आई होप आपको फॉर्म 177a समझ आ गया होगा एंड उसी तरह से फॉर्म 17 सी भी समझ आ गया होगा अब एक बात और भी य पे बोली गई ना कि किसी लॉ के अंतर्गत ऐसा मैंडेट नहीं किया गया कि ईसीआई को ये डाटा अपलोड करना ही है ठीक है ना बस
यहां पे आप नोटिस कर पाओगे कि हमें जो फॉर्म 17 सी होता है वो यहां पे जो भी उनके एजेंट्स होते हैं उनको यहां पे देना यहां पे जरूरी होता है एज पर दीज रूल्स ठीक है ना तो अंडर रूल 49s 56c ऑफ द कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल 1961 प्रिसा इडिंग ऑफिसर होता है इस तरह से अकाउंट ऑफ वोट्स को रिक्वायर्ड करता है पार्ट वन के अंदर जैसा मैं आपको कह रहा था एंड जो भी उनका पोलिंग एजेंट होता है उनको यहां पे वो अवेलेबल करवा आता है ठीक है तो काफी इंफॉर्मेशन होती है जैसे
मैंने आपको सारी इंफॉर्मेशन यहां पे एक्सप्लेन कर ही दी है पार्ट वन के अंदर पार्ट टू के अंदर ये सारा डाटा यहां पे अवेलेबल होता है फिर जब आपकी काउंटिंग होती है ना उस दिन पार्ट टू ऑफ फॉर्म 17 सी इंपॉर्टेंट बन जाता है तो उसके माध्यम से आप वेरीफाई कर सकते हो कितने वोट्स डले थे वर्सेस कितने काउंट हुए हैं एंड इन केस कुछ भी डिस्क्रिपेंसी आती है तो उस केस में आप जो भी कंसर्न हाई कोर्ट होता है उसके ऊपर मूव कर सकते हो तो इससे कहीं ना कहीं देखो ट्रांसपेरेंसी बनती है क्योंकि
आप नोटिस करो ना जब हम बात करते हैं की डेटा की तो डेटा के बेसिस प हमें पता लग जाता है कि हां यार इतने लोगों को वोट मिला इतने वोट काउंट हुए हैं तो डेफिनेटली इट इज परफेक्टली ऑलराइट एक चीज आपको और जाननी है कि एक ना एनकोर करके चीज है एनकोर क्या है एनकोर स्टैंड्स फॉर इनेबलिंग कम्युनिकेशन ऑन रियल टाइम एनवायरमेंट एक्चुअल में ना एनकोर को ईसीआई के द्वारा डेवलप किया गया है उसी का एक मॉड्यूल है वोटर टर्नआउट इसके माध्यम से क्या होता है इसके माध्यम से जो भी आपका रिटर्निंग ऑफिसर है
असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर्स है राइट वो यहां पर सारी एंट्रीज को यहां पे डालते रहते हैं रियल टाइम बेसिस के ऊपर पोल के एंड के ऊपर अगर आप नोटिस करोगे तो प्रॉपर हमें प्रॉपर डाटा मिल जाएगा कितने मेल लोगों ने वोट डाला कितने फीमेल हो गया कितने थर्ड जेंडर हो गया वो सारा डाटा अकॉर्डिंग हमें यहां पे मिलता रहता है तो यह चीज भी आपको एनकोर के बारे में पता होनी चाहिए जैसा मैंने आपको पता था बताया था इसके बेसिस के ऊपर सारी चीजें मॉनिटरिंग आप कर पाओगे पूरा प्रोसेस अपने आप में बहुत ज्यादा सिंपलीफाई हो
पाएगा ऑल ऑफ दिस थिंग्स अब एक चीज आपको और यहां पर जो पढ़नी है ना वो है आपका एडीआर के बारे में एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक फॉर्म्स देखो यह अपने आप में पॉइंट इसलिए बन जाता है क्योंकि अगर हम अपना मेंस का सिलेबस नोटिस करोगे ना तो मेंस के अंदर हमारे सिलेबस के अंदर एक पार्ट है दैट इज सिविल सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशन सिविल सोसाइटी ग्रुप्स के बारे में तो कल को अगर यूपीएससी आपसे पूछता है कि सिविल सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशन की क्या-क्या इंपॉर्टेंस है वहां पर एज एन एग्जांपल आप डेफिनेटली एडीआर का एग्जांपल दे सकते हो क्योंकि मैं
आपको बताता हूं एडीआर ने ना बहुत अच्छे-अच्छे काम किए हुए हैं जैसे फॉर एग्जांपल एक चीज 1999 के अंदर इन्होंने केस डाला था तो उसके बाद में उस केस के माध्यम से कैंडिडेट का क्रिमिनल बैकग्राउंड एजुकेशनल क्वालिफिकेशन एसेट्स वगैरह डिस्क्लोज करना मैंडेटरी हो चुका है आज के समय आप लोग भी देखते होंगे कि आपके जो भी एमपी खड़ा है उसका क्या क्रिमिनल बैकग्राउंड है वो आपको इसी केस के बाद पता लगने लगा उसी तरह से अगर हम बात करें तो सुप्रीम कोर्ट का एक लैंडमार्क जजमेंट था जहां पर नोटा नन ऑफ द वर्व को यहां
पे इंट्रोड्यूस करवाया गया वो भी यहां पे ईडीआर के ही कामों की वजह से हुआ प्लस एट द सेम टाइम इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम हमने बहुत बार चर्चा करी प अपना प्रिम बूस्टर के अंदर ही वो जो इलेक्टोरल बंड्स को सुप्रीम कोर्ट ने बाद में स्ट डाउन किया ना उसको भी चैलेंज किसने किया था उसको भी चैलेंज आपके एडीआर ने ही किया था तो दीज आर सम ऑफ द पॉइंट्स जो आप होप आपको वोटर टर्न आउट डाटा फॉर्म 17 सी एडीआर ये सारी चीजें आपको समझ आ गई होंगी यूरोपियन पार्लियामेंट की इलेक्शंस के बारे में देखो
भारत में चुनाव तो हो गए अब चुनाव होंगे किस चीज के लिए यूरोपियन पार्लियामेंट के लिए एंड आपको यह जान के इंपॉर्टेंट फील होगा कि यूरोपियन पार्लियामेंट ना यूरोपियन यूनियन की एक मात्र इलेक्टेड बॉडी है एंड यहां पर आम लोग वोट करेंगे तो ऐसा बताया जा रहा है लगभग 35 करोड़ लोग यहां पे अक्रॉस द 27 मेंबर स्टेट्स वो यहां पर वोट करने जा रहे हैं आज से लेकर अगले चार दिनों के लिए अब यह लोग मिलकर चूज करेंगे यूरोपियन पार्लियामेंट को एंड यूरोपियन पार्लियामेंट का काम पता क्या होता है आपकी जो भी यहां पे
यूरोपियन पार्लियामेंट के अंदर अलग-अलग सॉरी यूरोपियन यूनियन के अंदर अलग-अलग आपकी मेंबर स्टेट गवर्नमेंट्स होंगी उनके साथ मिलकर डिस्कस करना कि क्या यूरोपियन यूनियन के लॉस को लाया जा सकता है देखो ध्यान से समझो मैं यह नहीं कह रहा कि ये यहां पर लॉज लेकर आएंगे एंड वो लॉज फिर सामने वाली कंट्री को मानने ही पड़ेंगे ऐ ऐसा नहीं है यह अपना बजट वगैरह बिल्कुल करते हैं बट यह यहां पर क्या करते हैं यहां पर नेगोशिएट करते हैं कि कैसे उस चीज को हम कर पाए ठीक है तो आपका बजट वगैरह हो गया यूरोपियन यूनियन
का डिफरेंट डिफरेंट इंटरनेशनल एग्रीमेंट्स के ऊपर हो गया वो सारा काम यूरोपियन पार्लिमेंट का ही रहता है कई बार सोचना होता है कि ब्लॉक को बड़ा करना है तो वो सारी चीजें यूरोपियन पार्लियामेंट ही उस चीज को करता है बाकी ईयू बजट अप्रूव करता है डिफरेंट एग्रीमेंट्स हो गया ये सारी चीजें हमें देखने को मिल जाती हैं साथ ही साथ आप ये समझिए कि जो यूरोपियन यूनियन के कमीशन के प्रेसिडेंट होते हैं उनको अप्रूव करना या उनको रिजेक्ट करना उनके अपॉइंटमेंट को वो काम इन्हीं का रहता है दरअसल में आपके जो यूरोपियन पार्लियामेंट के मेंबर्स
होते हैं वो चुने जाते हैं 5 साल के लिए पर जो प्रेसिडेंट साहब होते हैं यूरोपियन कमीशन के उनको ढाई साल के लिए चुना जाता है यानी कि एक बार ढाई साल वो कंप्लीट करेंगे फिर अगले वाले का चुनाव हो सकता है अगले ढाई साल के लिए तो एक यूरोपियन पार्लियामेंट दो प्रेसिडेंट्स को यहां पे इलेक्ट कर सकती है इसके साथ में अगर हम बात करें एक चीज आपको इंटरेस्टिंग जानने को मिलेगी कि अलग-अलग कंट्रीज की ना अलग-अलग यहां पे ए लिमिट होती है कुछ कंट्रीज में 18 साल से ऊपर वाले लोग वोट कर सकते
हैं कुछ कंट्रीज में आपकी शादी हुई होनी चाहिए एज कुछ भी हो फर्क नहीं पड़ता कुछ केसेस में 17 साल वाले भी हैं कुछ केसेस में 16 साल वाले भी हैं यानी कि काफी यहां पे डिफरेंसेस आपको इन कंट्रीज में वोटिंग के ऊपर देखने को मिल जाएंगे लोग अब्रॉड से भी वोटिंग कर सकते हैं डिफरेंट डिफरेंट कंट्री से भी तो ये थोड़ा सा ना जब इस तरह से चुनाव न्यूज़ में रहते हैं तो कई बार ना यूपीएससी ऐसे इंडिया और बाकी कंट्रीज में क्या अंतर है उनके ऊपर क्वेश्चन आ जाता है जैसे मेंस में क्वेश्चन
आया था इंडिया और फ्रांस के के प्रेसिडेंट के इलेक्शंस के रिगार्डिंग वो कहीं ना कहीं करंट अफेयर्स में ही था तो ये चीजें भी हमें थोड़ी सी पता होनी चाहिए अब यहां पे देखो चीज ये होती है कि सारे के सारे कैंडिडेट्स यूरोपियन यूनियन के सिटीजंस ही होने चाहिए एंड वोटर्स उनमें से किसी को भी चूज कर सकते हैं दोस्तों नेक्स्ट हमारा टॉपिक है नोटा के रिगार्डिंग ठीक है ना नन ऑफ द अबब के बारे में आप जानते होंगे जब आप लोग वोट डालने गए होंगे अभी अपने रिस्पेक्टेड कंसीट के अंदर तो आपने नोटा को
भी देखा होगा सबसे एंड में आपको नोटा इस तरह से देखने को मिल जाता है अब देखो इंदौर के अंदर सबसे ज्यादा हमें नोटा वोट्स इस बार देखने को मिले हैं तो थोड़ा सा हमें इसके बारे में पता होना चाहिए वैसे पहले भी डिस्कस किया था बट वी मस्ट हैव एन आईडिया अबाउट इट देखो नोटा हमेशा से एजिस्ट नहीं करता था 2013 के अंदर सुप्रीम कोर्ट का एक ऑर्डर आता है जिस पर्टिकुलर ऑर्डर के अंदर बात कर जाती है कि अब से ईवीएम के अंदर नोटा भी होगा क्यों क्योंकि ताकि जो आपके वोटर्स हैं ना
उनकी राइट टू सीक्रेसी को हम यहां पे प्रोटेक्ट कर पाएं तो 2013 के अंदर ही आपके कुछ स्टेट्स थे मध्य प्रदेश राजस्थान छत्तीसगढ़ मिजोरम दिल्ली के इलेक्शंस में यहां पे नोटा का इस्तेमाल करना शुरू हो चुका था अब इसका फोकस थोड़ा यही रहता है कि इनडायरेक्टली ना जो आपकी पॉलिटिकल पार्टीज है वो कहीं ऐसे लोगों को खड़ा मत करें जिनके ऊपर यू नो बहुत दाग लगे हो या फिर बहुत ज्यादा उनके अगेंस्ट क्रिमिनल केसेस हो ये सब चीजों से रोकने के लिए किया जाता है अब आपको इंपॉर्टेंट बात ध्यान में रखनी है कि जो पीयूसीएल
वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया केस था ना उसके अंतर्गत यहां पे नोटा को लाया गया पीपल यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी के द्वारा काफी एफर्ट्स यहां पे करे गए अब यहां पर उन्होंने ये बोला कि आपके जो कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल है ना वो कहीं ना कहीं सीक्रेसी ऑफ वोटर्स को यहां पे वायलेट करते हैं एंड यहां पे सुप्रीम कोर्ट ने भी इसको माना कि वोटर की सीक्रेसी एक काफी एसेंशियल फीचर है फ्री एंड फेयर इलेक्शंस का एंड अकॉर्डिंग ये भी बोला गया कि यहां पे आपका जो रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट 1951 है उसके सेक्शन 79 डी
भी यह बोलता है कि एक इंसान के पास वोट करने का अधिकार है एंड उससे ना वोट करने का भी या अपनी सीक्रेसी मेंटेन करने का भी प्रॉपर यहां पे अधिकार आपको देखने को मिल जाएगा बाकी यूडी एचआर के अंदर भी ये सब चीजें डेफिनेटली मेंशन है पर एक जो चीज आपको पता होनी चाहिए कि नोटा का कोई लीगल कंसीक्वेंस देखने को नहीं मिलता अगर सबसे हाईएस्ट नंबर ऑफ वोट्स भी अगर नोटा को मिल जाते हैं ना तो ऐसा नहीं है कि कुछ हो जाएगा जो उसके बाद वाला बंदा था वो जीत जाएगा ठीक है
ना तो इस चीज को थोड़ा सा इसको क्रिटिसाइज भी इसी वजह से नोटा को अक्सर किया जाता है एक इंपॉर्टेंट बात आपको और ध्यान में रखनी है कि जो नोटा ऑप्शन है ना ये राज्यसभा चुनावों के अंदर वर्क नहीं करता ऐसा यहां पर शैलेश मनुभाई परमार वर्सेस इलेक्शन फशन ऑफ इंडिया केस के अंदर बोला गया था तो काफी सारे लोग डिफरेंट डिफरेंट तरह के यहां पे सुझाव देते हैं कि हम इसको कैसे बेहतर कर सकते हैं एक यह अक्सर बोला जाता है अभी इनफैक्ट सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन भी चल रही है कि अगर मान लीजिए
नोटा को सबसे मैक्सिमम मिले वोट्स तो उस इलेक्शन को हीनल एंड वाइड कर दो ध्यान रखना ये रिफॉर्म्स बोले जा रहे हैं कि ऐसा होना चाहिए ऐसा अभी नहीं है ऐसा कह जाता है कि ऐसा होना चाहिए तो उसके कुछ सजेशंस है एक सजेशन ये बोला जाता है कि यहां पर अगर मान लो ऐसा होता है तो वहां पर दोबारा से इलेक्शंस करवाए जाए नए कैंडिडेट्स के साथ पुराने वाले कैंडिडेट दोबारा खड़े ना हो कुछ लोग ये भी बोलते हैं कि अगर मान लीजिए इसके रिगार्डिंग यूनिफॉर्म इंप्लीमेंटेशन होना चाहिए जो आपके स्टेट इलेक्शन कमीशंस है
ना जैसे महाराष्ट्र हरियाणा पुडुचेरी दिल्ली और चंडीगढ़ यहां पर नोटा को एक फिक्शनल कैंडिडेट की तरह यहां पे ट्रीट किया जाता है अगर मान लो नोटा के वोट्स ज्यादा बढ़ गए उस केस के अंदर फ्लेग इलेक्शंस करवाए जाते हैं कुछ केसेस के अंदर तो इसको भी हम अडॉप्ट कर सकते हैं एंड इंश्योर किया जाना चाहिए कि अगर मान लो कोई भी ऐसा कैंडिडेट है जिसको नोटा से कम वोट मिले हैं फिर उसको अगले 5 साल तक के लिए खड़े नहीं होना देना चाहिए ये सारे कुछ अलग-अलग लोग रिफॉर्म सजेस्ट करते हैं कैबिनेट कमिटीज के बारे
में ही है देखो मैंने आप लोगों को कल समझाया था कि काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स क्या होते हैं कैसे उसके अंदर आपको कैबिनेट मिनिस्टर्स भी देखने को मिल जाएंगे आपको मिनिस्टर ऑफ स्टेट्स भी देखने को मिल जाएंगे एंड मिनिस्टर ऑफ स्टेट्स इंडिपेंडेंट चार्ज भी आपको देखने को मिल जाते हैं ठीक है पर कई बार पता क्या होता है आपने कैबिनेट बोल तो दिया बाकी चीजें काउंसल ऑफ मिनिस्टर्स भी बोल दिया पर कई बार क्या होता है आपस में अच्छी डिस्कशन करने के लिए हमारे पास कैबिनेट कमेटी हो सकती है जहां पर ना मिलजुलकर अच्छे से हम
कैबिनेट का जो वर्क लोड है उसको मैनेज करने की कोशिश करते हैं एक अच्छी कोऑर्डिनेशन आपस में होती है राइट एंड पॉलिसी मैटर्स के ऊपर अच्छे से डिस्कशन हो सकती है इसकी वजह से बनाया जाता है किसको कैबिनेट कमिटीज को अब आपको ध्यान पता क्या रखना है ध्यान यह रखना है कि हमारे संविधान में कहीं पर भी कैबिनेट कमिटी का जिक्र नहीं है ध्यान से सुनो कैबिनेट वर्ड यूज हुआ है इसमें कोई डाउट की बात नहीं है हालांकि जब संविधान लिखा गया तो कैबिनेट वर्ड भी नहीं था बट बाद में 44th अमेंडमेंट के अंदर जब
लिखा गया ना कि इमरजेंसी लगाने के लिए रिटर्न एडवाइस ऑफ द कैबिनेट चाहिए होता है तो कैबिनेट वर्ड तो आ गया पर कैबिनेट कमेटी चीज ऐसा संविधान के अंदर जिक्र नहीं है तो आप पूछेंगे सर फिर कैबिनेट कमेटी बना कैसे दी देखो दरअसल में ना आर्टिकल 77 है हमारे संविधान का वहां पर ना प्रेसिडेंट के पास अथॉरिटी होती है कि वो रूल्स बना पाए फॉर द स्मूथ कंडक्ट ऑफ यूनियन गवर्नमेंट एंड कैसे इनको वर्क को मिनिस्टर्स में डिस्ट्रीब्यूटर है इसके हिसाब से यहां पर दो सेट्स ऑफ रूल्स हमें देखने को मिल जाएंगे एक है आपका
एलोकेशन ऑफ बिजनेस रूल दूसरा आपका ट्रांजैक्शन ऑफ बिजनेस रूल पहला एलोकेशन वाला कहता है कि कैसे आपके सब्जेक्ट डिस्ट्रीब्यूटर वेरियस मिनिस्ट्री और ट्रांजैक्शन ऑफ बिजनेस रूल बताता है कि कैसे आपको मिनिस्ट्री को हैंडल करना है एंड इसी के माध्यम से आपको कैबिनेट कमेटी का फॉर्मेशन देखने को मिल जाएगा तो वेरी वेरी इंपोर्टेंट पॉइंट इज की कैबिनेट कमिटीज आर व्हाट दीज आर एक्स्ट्रा कांस्टीट्यूशनल बॉडीज ये कांस्टीट्यूशन के अंदर स्पेसिफाइड नहीं है चलो ठीक है अब इनको ना प्रधानमंत्री जी अपनी सहूलियत के हिसाब से बना सकते हैं या हटा सकते हैं जैसे फॉर एग्जांपल पहले देश में
ना छह कैबिनेट कमिटीज हुआ करती थी बट प्रधानमंत्री मोदी जी ने बोला नहीं हम दो इसमें और ऐड कर देंगे तो आज के समय आपको आठ कैबिनेट कमिटीज देखने को मिल जाएंगी तो समय समय के ऊपर उनके क्या मेंबर्स होंगे क्या चीजें होंगी कैसे उनका कंपोजिशन होगा क्या नाम होगा उनका ये सारी चीजें आपके प्रधानमंत्री जी ही यहां पर डिसाइड करते हैं संविधान में कहीं पर भी इनका यहां पे मेंशन आपको नहीं देखने को मिलता रूल्स ऑफ बिजनेस के माध्यम से इनको एस्टेब्लिश यहां पे किया जाता है काम इनका यही होता है कि कैबिनेट का
वर्क लड को थोड़ा सा मैनेज कर पाए प्लस एट द सेम टाइम आपस में मिलकर पॉलिसी मैटर्स के ऊपर डिबेट एंड डिस्कशन हो पाए दीज आर सम ऑफ द फोकस एरिया अब दो तरह की आपको कैबिनेट कमिटीज देखने को मिलती हैं एक होती है स्टैंडिंग स्टैंडिंग का अर्थ होता है आपकी जो परमानेंट वाली कमिटीज होती हैं एड हॉक होती है जो किसी एक पर्टिकुलर पर्पस के लिए बनाई जाती हैं जैसे ही वो पर्पस खत्म हुआ तो कमेटी हट गई तो जो मैं आठ की बात कर रहा था ना वो दरअसल में आठ आपकी स्टैंडिंग कमिटीज
आपको देखने को मिल जाती है कितने मेंबर हो सकते हैं देखो कितने मर्जी हो सकते हैं जनरली तीन से आठ मेंबर्स होते हैं इनमें पर दो भी हो सकते हैं उससे ज्यादा भी हो सकते हैं दैट इज अप टू प्राइम मिनिस्टर टू डिसाइड एक इंपॉर्टेंट पॉइंट जो आपको बिल्कुल भी मिस नहीं करना है दैट इज दिस स्टेटमेंट देखो इनका नाम भले ही कैबिनेट कमेटी है पर ऐसा नहीं है कि सिर्फ और सिर्फ कैबिनेट मिनिस्टर इसका पार्ट होंगे नहीं आपके नॉन कैबिनेट अगर मिनिस्टर्स है ना तो वो भी यहां पर इसका पार्ट हो सकते हैं वेरी
वेरी इंपोर्टेंट पॉइंट ठीक है इसके अलावा और सीनियर मिनिस्टर्स इसका पार्ट हो सकते हैं बाकी देखो होता पता क्या है जैसे आज के समय मैं आपको थोड़ा बताता हूं देश में आपको आज के समय टोटल आठ कैबिनेट कमिटीज देखने को मिल जाएंगी मैं आपको एक-एक करके समझाता हूं थोड़ा जैसे फॉर एग्जांपल एक है आपकी कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स ये हमारे प्रधानमंत्री जी ही हेड करते हैं यहां पर जो भी आपके सेंटर स्टेट रिलेशनशिप होते हैं उनके जो भी इश्यूज होते हैं उनको एड्रेस करने की यहां पे कोशिश करी जाती है उसके अलावा कैबिनेट कमेटी
ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ये भी प्रधानमंत्री जी के द्वारा ही इसको हेड किया जाता है तो कुछ बड़े पॉलिसी लेवल डिसीजन होते हैं इकोनॉमी के रिगार्डिंग वो यहां पे देखे जाते हैं जैसे फॉर एग्जांपल जो फॉरेन इन्वेस्टमेंट आती है ना कई बार अगर मान लो इन्वेस्टमेंट है कोई हजार करोड़ से ज्यादा वाली तो उन प्रपोजल्स को कंसीडर आपकी कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स के द्वारा ही किया जाता है आप लोगों को जब मैं एमएसपी पढ़ाता हूं तो एमएसपी के अंदर मैं कई बार डिस्कस करता हूं कि इसको रिकमेंड तो आपका कमीशन ऑन एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेस
करता है पर इसका फाइनल अप्रूवल कौन देता है कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर तो इसी की यहां पे बात हो रही है सीसीईए की प्रधानमंत्री जी ही इसको हेड करते हैं इसके अलावा अपॉइंटमेंट कमेटी होती है जिसको प्रधानमंत्री जी हेड करते हैं तो चाहे आपके टॉप मिलिट्री पोजीशन एयर एंड आर्मी कमांड के चीफ और जो इस तर की डिफेंस पोजीशन होती है उनकी अपॉइंटमेंट कैबिनेट कमेटी ऑफ अ अपॉइंटमेंट कमेटी के द्वारा यहां पे करी जाती है इसके अलावा कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ये भी प्रधानमंत्री जी हेड करते हैं ठीक है कोई लॉ एंड ऑर्डर का
मुद्दा हो गया इंटरनल सिक्योरिटी फॉरेन अफेयर्स वाले पॉलिसी मैटर्स उनको देखा जाता है कोई डिफेंस एक्सपेंडिचर हो 2000 करोड़ से ज्यादा उनको यहां पे कंसीडर यही कमेटी करती है इसके अलावा कैबिनेट कमेटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स राइट अब ये पार्लियामेंट अफेयर्स मतलब पार्लियामेंट में जो भी शेड्यूल वगैरह होगा कैसे-कैसे उसमें क्या-क्या बिल्स का चर्चा होगी वो सब चीजें कैबिनेट कमटी पार्लियामेंट्री अफेयर्स देखता है कैबिनेट कमेटी ऑन अकोमोडेशन ये आपके जो भी नॉन एलिजिबल पर्सन होते हैं उनको क्या एलोकेशन होना है कहां पे अलॉटमेंट होना है रेंट वगैरह उनसे क्या लिया जाएगा ये सब चीजें उनके द्वारा
देखी जाती है कैबिनेट कमेटी ऑन इन्वेस्टमेंट एंड ग्रोथ ये नई कमेटी बनी थी ठीक है ना ना ताकि इन्वेस्टमेंट को और हम एक बूस्ट कर पाए एंड एक और जो नई कमेटी बनी थी दैट वाज कैबिनेट कमेटी ऑन एंप्लॉयमेंट एंड स्किल डेवलपमेंट की लोगों के अंदर कैसे एंप्लॉय बिलिटी एंड स्किल डेवलपमेंट किया जा पाए अब इंपॉर्टेंट बात जो आपको बिल्कुल नहीं भूलनी कि देखो जितनी भी कमिटीज हैं वो सारी आपके प्रधानमंत्री जी हेड करते हैं एक्सेप्ट टू कमिटीज कौन सी दो कमिटीज देखो जो कैबिनेट कमेटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स है ना इसको हेड करते हैं आपके
डिफेंस मिनिस्टर ये आज के समय ऐसा है फ्यूचर में चेंज भी हो सकता है और कैबिनेट कमेटी ऑन अकोमोडेशन को हेड किया जाता है आपके होम मिनिस्टर के द्वारा तो ये दो कमिटीज का अलग से हेड अलग है और बाकी जो छह कमिटीज बची उनको प्रधानमंत्री जी ही हेड करते हैं तो दीज वर सम ऑफ द पॉइंट्स जो आपको पता होने चाहिए आई होप आपको कैबिनेट कमेटी वाला टॉपिक बहुत अच्छे से समझ आ गया होगा एक और पॉलिटी का टॉपिक डिस्कस कर ले हैं दैट इज स्वेरिज सेनर मी यानी कि आपका जो शपथ ग्रहण समारोह
होता है देखो परसों आपने शाम में ये विटनेस किया होगा शपथ ग्रहण समारो तो थोड़ा सा पॉलिटिक पर्सपेक्टिव से हमें ये चीजें पता होनी चाहिए देखो जब मैं बात करता हूं ना शपथ ग्रांड समारोह की तो यहां पर पता क्या होता है कुछ इंपॉर्टेंट पॉइंट्स जो आपको ध्यान में रखने हैं कि जब आपके चीफ मिनिस्टर को या जो मिनिस्टर्स होते हैं स्टेट लेवल के ऊपर उनको जो ओथ एडमिनिस्टर करने वाले पर्सन कौन होते हैं वो होते हैं गवर्नर इसी तरह से जब हम बात करते हैं प्रधानमंत्री जी उनको कौन यहां पे ओ ओथ एडमिनिस्टर करवाई
जा रही है बाय द प्रेसिडेंट इन अ सिमिलर मैनर अगर मान लो ऑफिस ऑफ प्रेसिडेंट के लिए ओथ एडमिनिस्टर करवानी हो तो वो कौन करवाता है दैट इज चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया तो ये कुछ पॉइंट्स हैं जो आपको बिल्कुल पता होने चाहिए क्योंकि ये क्वेश्चंस पूछे जा सकते हैं कि कौन किसको ओथ एडमिनिस्टर करवाता है ठीक है अब हमारे संविधान के अंदर आपको थर्ड शेड्यूल देखने को मिल जाएगा अब आपको ना थोड़ा सा एक आईडिया होना चाहिए कि थर्ड शेड्यूल के अंदर किस-किस पर्टिकुलर पोजीशन की बात करी गई है जहां पे ओथ की बात होती
है देखो एक्चुअल में ना थोड़ा सा आप इसको समझना एक तो देखो आपके जो यूनियन मिनिस्टर्स होते हैं राइट इनको जो ओथ है ना वो आपको थर्ड शेड्यूल में देखने को मिल जाएगी प्लस अगर कोई पर्सन पार्लियामेंट के इलेक्शंस के लिए खड़ा हो रहा है उसकी ओथ आपको यहां पे देखने को मिल जाएगी आपके मेंबर ऑफ पार्लियामेंट्स हो गया राइट एंड इन तीनों के काउंटर पार्ट्स मतलब स्टेट के रिगार्डिंग जो स्टेट मिनिस्टर्स हो गया वो आपके जो लोग खड़े हो रहे हैं इन स्टेट लेजिस्लेटर्स स्टेट मिनिस्टर्स स्टेट लेजिसलेच्योर के जज उनका मेंशन भी आपको शेड्यूल
थ्री में देखने को मिलेगा एंड आखिरी कैग कंट्रोल आउटर जनरल इन नौ पोजीशंस की जो आपको ओथ देखने को मिलती है वो थर्ड शेड्यूल के अंदर ही देखने को मिलती है ये लिस्ट आपको पता होनी चाहिए कल को यूपीएससी आपसे पूछ भी सकता है ठीक है सर अब जो भी ओथ ली जाएगी वो या तो भगवान के नाम के अंदर या फिर आए सोलली अ फर्म तो आप इस तरह से अपने स्टार्ट कर सकते हो कि आई स्वेर इन द नेम ऑफ गॉड या फिर आई सोलली अर् दैट आई विल बी अ ट्रू फेथ ए
एजस टू द कांस्टिट्यूशन यानी कि मैं संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा रखूंगा आप लोगों ने इसको सुना भी होगा जब हम बात करते प्रेसिडेंट की ओथ की तो वहां पर जो ओथ लेते हैं ना वो बात करते हैं प्रिजर्व प्रोटेक्ट एंड डिफेंड द कॉन्स्टिट्यूशन एंड द लॉ इस चीज की यहां पे वो ओथ लेते हैं अब इंपोर्टेंट बात आपको ध्यान में यह रखनी है कि भैया जो जो ओथ होती है ना ये एज इट इज ही पढ़नी होती है ऐसा नहीं होता कि आप अपनी मर्जी से कुछ भी पढ़ के चले जाओ नहीं जो लिखा
गया है ना उस ओथ के अंदर आपको एज इट इज वही पढ़ना होता है देखो मैंने भी कई बार ऐसे एग्जांपल देखे हैं जैसे मान लो कोई बंदा ओथ पढ़ रहा है तो ओथ के बाद उसने बोल दिया वंदे मातरम या भारत माता की जय या फिर कुछ भी इस तरह से देखो ये तो हम मानते हैं कि ये चलो ठीक है पर ओथ लेते टाइम आप ऐसे शब्द यूज नहीं करेंगे मतलब कोई भी शब्द आपने यूज़ नहीं करना ठीक है देश मा देश से सबको प्यार है बिल्कुल होना भी चाहिए पर ओथ लेते टाइम
कोई डिस्क्रीशन नहीं कोई कुछ नहीं जो लिखा गया आपको एज इट इज उसको वही पढ़ना होता है उसमें कोई चेंजेज अलाउड नहीं होते मान लो सर अगर किसी ने ऐसा कर दिया कुछ शब्द बोल दिए तो उस केस में ना उसको ओथ जो लेनी होती है वो दोबारा लेनी होती है डू यू अंडरस्टैंड ऐसे बहुत सारे एग्जांपल हैं ये तो एक बिहार का आपके सामने एग्जांपल है पर अभी रिसेंटली पार्लियामेंट में भी ये चीज हुई थी राज्यसभा के इलेक्शंस के अंदर तो बिल्कुल भी ओथ के से एक शब्द भी इधर-उधर नहीं होना होता जैसी ओथ
लिखी होती है आपको वैसे ही बिल्कुल उसको पढ़ना होता है कोई डिस्क्रीशन यहां पे अनाउंस आपका अलाउड नहीं होता क्लियर हुई ये बात उस केस में अगर ऐसा कुछ होता है तो ओथ को दोबारा से किया जाता है दोस्तों अगला हमारा टॉपिक है स्पीकर एंड प्रोटर स्पीकर के रिगार्डिंग देखो 18वीं जो लोकसभा है उसका पहला सेशन जून 24 से लेकर जुलाई 3 तक होगा होगा जिसके बीच में जो नए स्पीकर ऑफ द हाउस इलेक्ट किए जाएंगे राइट और जो सीनियर कांग्रेस लीडर है के सुरेश जी जो कि सीनियर मोस्ट मेंबर होंगे लोकसभा के उनको एक्सपेक्ट
किया जा रहा है कि वो प्रोटेम स्पीकर की तरह यहां पे अपॉइंटमेंट का अर्थ होता है टाइम बीइंग यानी कि टेंपरेरी तौर के ऊपर आप स्पीकर बनने जा रहे हो सर कहीं पर इसका जिक्र है देखो संविधान के अंदर तो इसका कोई भी जिक्र नहीं है राइट पर अगर हम बात करें हैंडबुक ऑन द वर्किंग ऑफ पार्लियामेंट्री अफेयर्स इसके अंदर यहां पर बात करी गई है कि प्रो टम स्पीकर की किस तरह से अपॉइंटमेंट एंड स्वेरिज जी के द्वारा एंड साथ ही साथ हैंडबुक में यह मेंशन होता है कि जैसे स्पीकर की पोस्ट खाली हो
जाती है ना बिफोर अ लोकसभा तो जो भी स्पीकर की रिस्पांसिबिलिटीज होती है वो यहां पर प्रोटेम स्पीकर के द्वारा यहां पर देखी जाती है एक चीज मैं आपको बताना चाहूंगा देखो स्पीकर के केस में पता क्या होता है स्पीकर के केस में आप एक चीज नोटिस करो आर्टिकल 94 आर्टिकल 94 क्या बोलता है कि जब भी कभी लोकसभा डिसोल्व हो जाती है उस समय स्पीकर अपने ऑफिस को वोकेट नहीं करते इमीडिएट कब तक नहीं करते जब तक हाउस ऑफ पीपल की पहली मीटिंग नहीं हो जाती फिर जैसे ही वो चीज होती है तो अकॉर्डिंग
प्रोटेम स्पीकर हमारे सामने देखने को मिल जाते हैं अब प्रोटेम स्पीकर के रिगार्डिंग चीज क्या होती है कि जब 24 जून को सेशन स्टार्ट होगा 11 बजे तो यहां पर जो टाइम जो फिक्स किया जाएगा स्पेयरिंग इन ऑफ प्रोम स्पीकर का वो उसी दिन सुबह 9:30 बजे का होता है तो काम इनका यह रहता है कि जो भी नए एमपी चुन के आए हैं उनको यहां पे ओथ देने वाले का उनको इस ओथ को एडमिनिस्ट्रेट कौन करते हैं प्रोटर इनके साथ साथ तीन और मेंबर्स को भी यहां पे अपॉइंट्स मेंबर्स है उनको ही यहां पर
चूज किया जाता है इस परपस के लिए पर बहुत बार हमारे सामने एक्सेप्शन भी देखने को मिल है साथ ही साथ अगर मैं बात करूं आर्टिकल 99 की आर्टिकल 99 यह बोलता है कि बिफोर कोई मेंबर ऑफ पार्लियामेंट अपनी पोजीशन लेता है अपनी सीट तक पहुंचता है उसको यहां पे थर्ड शेड्यूल ऑफ कांस्टिट्यूशन के हिसाब से ओथ और अफ फर्मेन को यहां पे लेना होगा साथ में बात करें कि कैसे यहां पे इनको आइडेंटिफिकेशन किया जाता है पर हालांकि इसमें एक्सेप्शन है तो हम उन एक्सेप्शन में नहीं जाएंगे तो एक लिस्ट प्रिपेयर की जाती है
सीनियर मोस्ट लोकसभा मेंबर्स की फिर उनको मिनिस्टर ऑफ पार्लियामेंट अफेयर्स को सौंपा जाता है या फिर प्रधानमंत्री जी को सौंपा जाता है जब एक बार प्रधानमंत्री जी का अप्रूवल आ गया तो यहां पर राइट जनरली टेलीफोन के ऊपर अप्रूवल आ जाता है फिर एक नोट सबमिट किया जाता है प्रेसिडेंट साहब को एंड अकॉर्डिंग प्रेसिडेंट जी क्या करते हैं प्रेसिडेंट जी उनको अकॉर्डिंग अपॉइंट्स करर को भी और तीन और मेंबर्स को भी फिर इस हिसाब से उनका स्वेर इन सेरेमनी और डेट एंड टाइम का देखा जाता है तो ये था प्रोगम स्पीकर के बारे में बाकी
स्पीकर की रोल्स एंड रिस्पांसिबिलिटीज तो हम पढ़ते ही रहते हैं जस्ट एक बार क्विकली रिवाइज कर लेते हैं स्पीकर के जो आपके रूल्स हैं स्पीकर को इलेक्ट करने के वो आर्टिकल 93 में दिए गए हैं स्पीकर पोस्ट वेकेंट हो जाती है जस्ट बिफोर द न्यू लोकसभा मीट मैंने आपको बताया था ना यहां पे आर्टिकल 94 क्या कहता है जब लोकसभा डिजॉल्वेशन इमीडिएट आपका विकेट करने की जरूरत नहीं है वो कब विकेट करेंगे जैसे ही फर्स्ट मीटिंग ऑफ हाउस होने वाली होती है उससे जस्ट पहले इसके साथ में अगर मैं बात करूं कोई ऐसा क्राइटेरिया नहीं
है कि कैसे इनको अपॉइंटमेंट ऑफ पार्लियामेंट है लोकसभा के तो आपस में मिलके वो लोकसभा स्पीकर को यहां पे चुन लेते हैं सिंपल मेजॉरिटी के साथ जो भी आपके हाफ ऑफ द मेंबर प्रेजेंट होंगे हाउस के उनको अकॉर्डिंग वोट करना होता है राइट इनकी ड्यूटीज क्या रहती हैं कैसे इस हाउस को चलाना है एजेंडा डिसाइड करना पार्लियामेंट्री मीटिंग्स का मोशंस को अलाव करना कोई गलत काम कर रहा है डिसक्वालीफाई करना उन मेंबर्स को प्लस एट द सेम टाइम रूल्स वगैरह को इंटरप्रेट करने का जो पावर होती है वो स्पीकर के पास ही होती है एंड
क्योंकि वह लोकसभा के प्रोसाइट ऑफिसर होते हैं तो उनको कुछ डे टू डे प्रोसीडिंग्स को भी यहां पे ड्यूटीज को फॉलो करना पड़ता है कोशिश यही रहनी चाहिए देखो स्पीकर्स की कि वो नॉन पार्टिजन रहे यानी कि ऐसा ना हो कि जिस पॉलिटिकल पार्टी से वो आते हैं सिर्फ उसी को फेवर करें ठीक है ना तो इंडिया में देखो जो ट्रेडीशन फॉलो किया जाता है इंडिया में ना पर्सन को रिजाइन करने की जरूरत नहीं है जैसे अभी जो ओम बिरला जी थे ठीक है ओम बिरला जी भारतीय जनता पार्टी से बिलोंग करते थे वो स्पीकर
बने पर ऐसा नहीं है कि उन्होंने बीजेपी से रिजाइन कर दिया नहीं बाकी और देशों में ये चीज होती है कुछ-कुछ देशों में जैसे इंग्लैंड वगैरह के अंदर बट इंडिया में ऐसा नहीं है आप इस पार्टी से बिलोंग कर सकते हो आपको रिजाइन देने की जरूरत नहीं है पर एक्सपेक्टेशन आपसे यही रहेगी कि आप भैया अब आप ना पूरे सदन के स्पीकर हो आप एक पार्टी के स्पीकर नहीं हो राइट तो कुछ एक एग्जांपल्स पहले भी रहे हैं जैसे फॉर एग्जांपल नीलम संजीवा रेड्डी जी इन्होंने कांग्रेस से रिजाइन कर दिया था जब इनको इलेक्ट किया
गया थाज अ स्पीकर ठीक है ना तो कुछ एक ओकेज रहे हैं जब स्पीकर्स ने पार्टी क्विट करी है पर इंडिया में इस चीज की जरूरत नहीं है पार्टी क्विट करने की आपसे एक्सपेक्ट किया जा रहा है कि आप बिना कोई भेदभाव के सभी पार्टीज के साथ इक्वल बिहेव करेंगे दैट शुड बी द पर्पस ऑफ स्पीकर वो है विद रिगार्ड्स टू एग्जिट पोल्स अब देखो जैसा मैंने अभी थोड़ी देर पहले आपको बताया कि आज आखिरी फेज का चुनाव है 1 जून को राइट अब जैसे ही शाम का आखिरी वोट डले ना उसके आधे घंटे के
बाद आप कोई भी न्यूज़ चैनल उठा के देख लेना वहां पर सब जगह एग्जिट पोल की चर्चा हो रही होगी राइट वहां पर वोह लोग बता रहे होंगे जो एक्सपर्ट्स होते हैं वो लोग बता रहे होंगे कि भाई किस पर्टिकुलर पार्टी को कितनी सीटें मिलने वाली हैं बीजेपी को इतने मिलेंगी आपके कांग्रेस को इतनी मिलेंगी इस तरह से यह डिस्कशन होता रहेगा पर हमें थोड़ा सा इसका ना टेक्निकल एंगल हमें पता होना चाहिए एक्चुअल में होता क्या है ना जब आप मान लो आप वोटिंग देके निकले तो कई बार कुछ लोग आपसे इंटरव्यू लेने लग
जाते हैं और पूछते हैं कि भाई आपके कौन-कौन से मुद्दे थे जिनके बेसिस के ऊपर आपने वोट दिया लोकल मुद्दे कैसे हैं आपके लिए कौन सा मुद्दा इंपॉर्टेंट है तो आपसे ये जो इंटरव्यू या बातचीत कर रहे हैं ना उसके बेसिस के के ऊपर वो एक आईडिया लगाने की कोशिश करेंगे कि देश में सरकार किस चीज की आ सकती है कौन सी पार्टी की सरकार आ सकती है बेसिकली एक एस्टीमेट लगाया जाता है पर एक बात जो जरूरी आपको जाननी यह है कि भैया जब इलेक्शन चल रहे हैं ना उसके बीच में आप एग्जिट पोल
नहीं दिखा सकते अब आप नोटिस करो ना काफी टाइम से हमारे इलेक्शंस चल रहे हैं तो कभी भी बीच में कभी बीच में फेजेस के बीच में कोई एग्जिट पोल नहीं आया एग्जिट पोल कब आता है जब आपके चुनाव खत्म हो जाते हैं उसके आधे घंटे के बाद यहां पे वो दिखा सकते हैं अब ऐसा क्यों सर बीच में क्यों नहीं दिखा सकते अरे सोचो अगर बीच में दिखाने लग जाएंगे ऐसे एग्जिट पोल तो जो वोटर्स होते हैं वो इन्फ्लुएंस हो सकते हैं अगर उनको पता लगेगा यार ये एक्स वाईजी वाली पार्टी है ये तो
आगे चल रही है तो वोटर्स जो बाकी बचे हुए वोटर्स होंगे उनको भी लगेगा चलो इसी को वोट डाल देते हैं राइट तो वोटर्स इन्फ्लुएंस ना हो इस वजह से चुनावों के समय जब चल रहे होंगे तब वोटिंग प्रोसेस के समय एग्जिट पोल बिल्कुल भी नहीं दिखाए जा सकते ऐसा ईसीआई ने यहां पे बैन डाला गया है ऐसे कैसे डाल दिया बैन क्योंकि हमारे पास लॉज है आपके पास सेक्शन 126 ए ऑफ रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट है ठीक है ये कहीं ना कहीं प्रोहिबिट करता है कि आप एग्जिट पोल रिजल्ट्स को ड्यूरिंग द वोटिंग पीरियड
नहीं इस तरह से पब्लिश कर सकते कोई कर देगा तो फिर क्या होगा उसको 2 साल तक की सजा हो सकती है फाइन हो सकते है या दोनों हो सकते हैं राइट तो दीज आर सम ऑफ द पॉइंट्स जो आपको एग्जिट पोल्स के बारे में जानने चाहिए अगला आर्टिकल बात करता है प्रधान राष्ट्रपति के मर्सी पावर की अभयदान जि हम कहते हैं जीवन दान वाली बात अभी रिसेंटली एक मर्सी पिटीशन आई थी मोहम्मद आरिफ की जो व्यक्ति जेल में है लाल किला के ऊपर जो अटैक हुआ था 2000 में उसमें तीन लोगों की जाने गई
थी उसके पीछे जो सबसे बड़ा शरकारी था मोहम्मद आरिफ एक मर्सी पेटीशन उसने लिखी थी और प्रेसिडेंट ने उसको रिजेक्ट कर दिया तो जब ये चीज होती है तो सामने न्यूज़ आती है मर्सी पिटीशन कैसे होता है क्या प्रोसीजर है क्या-क्या नियम है कौन से केसेस में क्या बदलाव किए गए आर्टिकल बहुत रिलेवेंट है तो इसमें पूरी डिटेल में बात की गई है कहां-कहां पे क्या-क्या चीजें होती हैं व्हिच यू शुड नो तो मर्सी पिटीशन क्या अगर मान लो आपने गवर्नमेंट प्रेसिडेंट को दी और आपको न्याय नहीं मिला मैं नहीं चाहता कि आपको कभी ऐसा
कुछ करना पड़े पर मान लेते हैं कोई व्यक्ति मस पशन लिखता है और प्रेसिडेंट उसकी बात नहीं मानते तो क्या वो कोर्ट में जा सकते हैं नहीं क्या ये उनका अधिकार है मस पशन लिखना उसका मल्ट पशन प ध्यान जवाब देना नहीं ये कुछ भी नहीं है ये असल में एक रिक्वेस्ट है कि जब आपको सुप्रीम कोर्ट ने भी फैसला सुना दिया तो उसके बाद आप राष्ट्रपति या राज्यपाल को लिख रहे हो कि भाई मुझे मे जीवन दान दे दीजिए ये एक प्ली है इट इज नॉट अ राइट ठीक है और मर्सी पेटीशन लेने का
कोई भी बिजनेस के पास अधिकार नहीं होता ये कंसीडर किया जाता है उसकी सेहत को देखते हुए उसके परिवार में उसका रोल है या घर का एकलौता कमाने वाला व्यक्ति या कई तरह के ऐसे कारण है जिसको देखते हुए कहा जा सकता है अच्छा व्यक्ति की हालत बहुत खराब है या परिवार की हालत बहुत खराब है इसको ये चीज देनी देनी चाहिए उसके हिसाब से विस परद जीवन दान दिया जाता है लेकिन भारत में अभी तक इसके लिए कोई ऐसा राइट किसी के पास नहीं है जो भारत में संविधान का प्रोसीजर है वो ऐसा है
कि एस पर आर्टिकल 72 जो इंडिया के प्रेसिडेंट है वो किसी भी कन्फेक्ट को कन्फ कफ्ट अगर जिसको सजा सुनाई जा चुकी है वह उनके सामने एक मर्सी पिटीशन देता है तो उस म मर्सी पिटीशन के में राष्ट्रपति के पास य अधिकार है एस पर द कॉन्स्टिट्यूशन आर्टिकल ऑफ आर्टिकल 72 वह चाहे तो उसको सजा उसकी माफ कर सकते हैं मृत्यु दंड भी उसका माफ कर सकते हैं आर्टिकल 161 के अंतर्गत पार्डन की पावर गवर्नर को भी प्राप्त है राज्यपाल को लेकिन एक फर्क ये है कि आर्टिकल 72 में जो राष्ट्रपति के पास पावर है
वो पार्डन रिप रिस्पा रिमिशन सस्पेंड रिमिटर कम्यूटर की है यहां तक कि वो अगर कैपिटल पनिशमेंट हैनी मृत्युदंड भी दिया गया है तो वहां भीय उनके पास अधिकार है आर्टिकल 161 के अंतर्गत वो है उसी में दिया जा सकता है जो कि स्टेट के एग्जीक्यूटिव लॉ के हिसाब से जो सजा दी गई है उसके हिसाब से जो राज्यपाल है वो सजा वो माफ कर सकते हैं उसको सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में एक रूलिंग दी थी जो खास बात है इन्होंने यह कहा था कि राज्यपाल जो है वो भी जो कैदी है उनको पार्डन कर सकते
हैं इवन उनको भी जो डेथ रोपर है जिनको मिलने वाली है और यह भी रूल नहीं कि किसी को मान लो उमर कद मिल गई किसी को मिला उम्र 14 साल की उसके बाद उसे डेथ रो मिल रही मृत्य की सजा दी गई है लेकिन कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल भी चाहे तो ऐसा कर सकते य नहीं कोटने उनको करना ही पड़ेगा ब दे ल् हैव राइट ना दे कैपेसिटी इट तो इसलिए यह जरूरी है कि हम ध्यान रखे कि यह राइट नहीं है अब कैसा प्रोसेस होता है मर्सी पशन का देखि रूल य है
सुप्रीम जो सुप ऑ पुलिस है उसके हिसाब से कोई भी व्यक्ति अगर कोर्ट में है और सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट आती है तो उसके सात दिन के अंदर पहले वो सुप्रीम कोर्ट में जाके अपना पेटीशन लिखते हैं कि भाई हमें माफ कर दीजिए सुप्रीम कोर्ट पिटीशन रिजेक्ट करे उसके सात दिन के अंदर गत उन्हें मर्सी पिटीशन लिख के देनी होती है रिटन पिटीशन प्रेसिडेंट या गवर्नर को दिया जाता है जो भी उसका कारण उन्हें बताते हैं किस ग्राउंड पे वो मांग रहे हैं कि उनका मेंटल हेल्थ खराब है फिजिकल हेल्थ खराब है परिवार के इकलौते
कमाने वाले हैं या उनको लग रहा है कुछ गड़बड़ हो रखी है उनको जरूरत है तो वो बहुत ज्यादा हार्श सज सजा सुनाई जा रही है तो वो ये पिटीशन लिख सकते हैं फिर इसके बाद होम मिनिस्ट्री इसको रिव्यू करती है रिकमेंड करती है कि भाई क्या करना चाहिए भेजना चाहिए नहीं भेजना चाहिए फिर उसके बाद प्रेसिडेंट के डिस्क्रिप्शन के ऊपर है वो चाहते हैं या नहीं वो सब जो उनकी चाहत होती है प्रेसिडेंट करेंगे या नहीं करेंगी वो डिपेंड करेगा होम मिनिस्ट्री के रिकमेंडेशन के ऊपर प्रेसिडेंट एक्सेप्ट करेगा या रिजेक्ट करेगा यह इसके लिए
कोई टाइम लिमिट भी नहीं है आपने आज मसी पिटीशन लिख दिया इसका मतलब य नहीं कि प्रेसिडेंट उसको तुरंत एक्सेप्ट कर लेगा या इतने टाइम में कर लेंगे उसके लिए प्रेसिडेंट के पास अपना अधिकार क्षेत्र है वो जितना समय लेना चाहे ले सकते हैं गवर्नर की अथॉरिटी है कि वो डेथ सेंटेंसेस को अभी तक पार्डन नहीं कर सकते लेकिन जैसा बोला गया सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट के हिसाब सेसा बोला गया कि हां वो चाहे तो कर सकते हैं ये एक डिफरेंस है 2021 के जजमेंट में ये बदलाव किया गया था अब मसी पिटीशन में कहानी
क्या देखिए कई बार मसी पिटीशन को लेकर मामला गया है कोर्ट तक तो उसको लेकर क्या इंपॉर्टेंट केसेस अक्सर पूछे जा सकते हैं आपसे रंगा बिल्ला केस काफी फेमस है रंगा बिल्ला केस में बोला गया था कि मर्सी पिटीशन कंपलीटली डिस्क्रीशनरी है और मैंडेटरी नहीं है प्रेसिडेंट चाहे तो देंगे नहीं नहीं तो नहीं देंगे केहर सिंह केस था केहर सिंह केस में य बात था कि प्रेसिडेंट जो आपको मर्सी पिटीशन पर हां बोले या ना बोले यह कोई राइट नहीं है यह एक्ट ऑफ ग्रेस है वह करेंगे या नहीं करेंगे उनके अधिकार क्षेत्र में उसको
लेकर आप कोर्ट नहीं जा सकते फिर धनंजय चटर्जी का जो केस था वेस्ट बंगाल का यहां पर यह हुआ था कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आर्टिकल 72 और 162 के अंतर्गत केवल जो सेंट्रल या स्टेट गवर्नमेंट उनको लिख के दे रही है जिस हिसाब से रिकमेंडेशन उसी हिसाब से वो एक्ट करेंगे ऐसा नहीं कि बिल्कुल ऑटोनोमी है उनके पास कि भाई जिसको मर्जी उसको आप वो अभयदान दे दे ऐसा नहीं है जो पहले प्रोसेस है उसके थ्रू ही वो कर सकते हैं वाया द स्टेट और सेंट्रल गवर्नमेंट फिर अफजल गुरु केस में यह
बताया गया था कि कम से कम कोर्ट ने मैंडेट दिया था कि जब मर्सी पशन रिजेक्ट होती है और जब किसी को फांसी दी जाती है एग्जीक्यूट किया जाता है तो उसके बीच में कम से कम 14 डेज का गैप होना चाहिए ठीक है ताकि जो लीगल रिकर्स है अगर कुछ और वो चाहते है तो उसको मिल सके उनको हालांकि आप मर्सी पिटीशन को लेके कोर्ट नहीं जा सकते लेकिन सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट था 2014 में ही कि भाई कम से कम 14 डेज का गैप होना चाहिए फ्रॉम रिजेक्शन ऑफ मर्सी पिटीशन टिल द डे
ऑफ एग्जीक्यूशन फांसी लगाए जाने के दिन तक तो ये इंपॉर्टेंट केसेस है फर मारू राम का केस है मारू राम केस में यह है कि ये जो वो निर्णय लेते हैं वो काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की एडवाइस को भी ध्यान में रखना चाहिए उनको कि पार्डन ऐसे ही नहीं दिया जा सकता किसी को बिल्कुल ये 1981 की जजमेंट है फिर इप्रू सुधाकर केस है इसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राष्ट्रपति का जो पावर है और जो राज्यपाल का पावर है दज आर सब्जेक्ट जुडिशल रिव्यू य पहले की न्यूज जो जजमेंट थी वो थी बाद में
तो कहा गया बिल्कुल य अंडर जुडिशल रिव्यू नहीं आता पिटीशन जुडिशल रिव्यू कब ले सकता है किस ग्राउंड पर ले सकता है जब प्रॉपर एप्लीकेशन ऑफ माइंड ना हो जब बैड फेथ में मेला फाइड इंटेंशन के साथ लिया गया ऑर्डर इरेलीवेंट हो लेकिन जैसे मैंने पहले बताया इस केस के इतर अगर हम देखें तो हमें पता लग रहा है कि मस पशन कंप्लीट डिस्क्रीशनरी है जो रंगा बिल्ला केस में पता लगता है जो कहर सिंह केस में भी पता लगता है तो यह हमें यहां से ये चीजें पता लगती है अब लीगल फ्रेमवर्क क्या है
इसका देखिए भारत में कई केसेस ऐसे हैं जिनमें मौत की सजा दी जाती है फॉर एग्जांपल दफा 302 यानी आईपीसी सेक्शन 302 जो मर्डर से जुड़ा हुआ है 121 जो ट्रिजन है गद्दारी है 121a टेररिज्म से रिलेटेड केस है ये सब डेथ के द्वारा पनिशेबल है फिर सीआरपीसी 1973 में बताया गया है कि डेथ पेनल्टी केस में जब है तो पहले डेथ पेनल्टी को कोई डिस्ट्रिक्ट कोर्ट नहीं दे सकती उससे पहले किसी हायर कोर्ट से आपको उसके बारे में कंफर्मेशन दी जाती है कि भाई मौल की सता किसी को सुनाया जाए तो एस पर सेक्शन
366 हायर कोर्ट के द्वारा एक कन्फर्मेशन मैंडेटरी है और एक राइट टू अपील अंडर सेक्शन 374 दिया जाता है प्रिजनर को अगर उनको मौथ की सजा सुनाई गई है तो कई ऐसे स्पेशल लॉज है जैसे टाडा या एनडीपीएस या पोस्को ये भी कैपिटल पनिशमेंट दे सकते हैं कैपिटल पनिशमेंट मतलब होता है मौत की सजा देना तो लीगल फ्रेमवर्क है ठीक है ये चीजें याद रखिए कि भाई किसमें क्या चीजें रिलेवेंट है क्या जो प्रेसिडेंट की पावर है कौन-कौन से केसेस रिलेवेंट थे ये हमने डिस्कस किया यहां पर मुझे पता है थोड़ी सी ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड चीज
हो गई है तो इसको सिंपल समझने का तरीका ये है कि भाई मर्सी पिटीशन जब आप अप्लाई करते हो तो क्या यह अंडर जुडिशियस रिव्यू है तो नहीं क्या यह अ कंप्लीट ऑटोनोमस प्रेसिडेंट डिसीजन ले सकते हैं नहीं क्या यह डिस्क्रीशनरी है हां है क्या इसके लिए कितने दिन का टाइम होना चाहिए अगर मशन रिजेक्ट हो जाती है तो 14 डेज का टाइम होता है मसी पिटीशन रिजेक्शन को लेकर के आप कोर्ट जा सकते हो तो नहीं जा सकते क्योंकि उनका डिस्क्रिप्शन है कि वो एक्सेप्ट करते हैं या रिजेक्ट करते हैं उसको ठीक यह समझ
लिया हमने ई साक्षी पोर्टल के रिगार्डिंग यह पोर्टल को समझना जरूरी है पर उससे पहले हमें ना एक स्कीम के बारे में जानना होगा जिसका नाम है एमपी लड्स देखो जब मैं बात करता हूं एमपी लड्स की इसका अर्थ होता है मेंबर ऑफ पार्लियामेंट लोकल एरिया डेवलपमेंट स्कीम देखो हम सब लोग अपने एमपीज को चुनते हैं स्पेशली लोकसभा एमपीज को चुनते हैं बाकी इसके अलावा एमपीज तो और भी होते हैं राज्यसभा के मेंबर ऑफ पार्लियामेंट भी होते हैं नॉमिनेटेड मेंबर्स भी होते हैं राइट अब 1993 में क्या हुआ 1993 में एक स्कीम लाई गई जिसका
नाम था एमपी लेट्स यह एक सेंट्रल सेक्टर स्कीम है बेसिकली सारा पैसा यहां पर स्कीम में सेंट्रल गवर्नमेंट के द्वारा दिया जाता है अब इसमें होता पता क्या है जो भी आपके मेंबर ऑफ पार्लियामेंट होते हैं ना वो कुछ काम को रिकमेंड कर सकते हैं क्या मैंने बोला रिकमेंड कर कर सकते हैं जो भी वहां की डिस्ट्रिक्ट अथॉरिटीज होंगी ना उनको काम रिकमेंड करेंगे कि भाई आप क्या काम करवाना चाहते हो समझ गए जैसे मैं आपको एग्जांपल देता हूं देखो सचिन तेंदुलकर जी भी एक टाइम के ऊपर हमारे मेंबर ऑफ पार्लियामेंट रहे हुए हैं राइट
इनके द्वारा यहां पर रिकमेंड किया गया था कि मुंबई के अंदर एक स्कूल खुलवा दिया जाए इसी तरह से और भी बहुत सारी चीजें कोई मेंबर ऑफ पार्लियामेंट ड्रिंकिंग वाटर के लिए मतलब एजुकेशन के लिए हेल्थ के लिए सैनिटेशन रोड्स इस तरह के काम वो क्या कर सकता है ध्यान से वर्ड सुनो रिकमेंड कर सकता है समझ गए जब ये स्कीम स्टार्ट हुई थी तब तो बहुत कम पैसे थे आज के समय हर साल 5 करोड़ मिलता है ध्यान रखने वाली बात है ये मेंबर ऑफ पार्लियामेंट को पैसा नहीं मिलता ये पैसा आपके डिस्ट्रिक्ट अथॉरिटीज
के पास ही जाता है जो डीएम वगैरह होते हैं एमपी बोलेगा अच्छा आपके पास ये पैसा आया हुआ है जो कि मेरी वजह से आया है तो इस पैसे का आप स्कूल बनवा दो या यू नो कोई सड़क बना दो कुछ अच्छा पानी पीने की व्यवस्था कर दो ऑल दोस थिंग्स आर देयर ठीक है मेरे खुद के मेंबर ऑफ पार्लियामेंट के द्वारा एक सड़क बनाई गई थी ठीक है तो इस तरह से ये चीजें हमें देखने को मिल जाती हैं तो एक्चुअल में आपको यह बात ध्यान में रखनी पड़ेगी कि आज के समय जो मिनिस्ट्री
है ना इसके लिए रिस्पांसिबल वो है आपकी मोस पी मिनिस्ट्री यानी कि मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स है ठीक है जैसा मैं आपको कह रहा था हर साल 5 करोड़ यहां पे प्रोवाइड किए जाते हैं एंड ये गवर्नमेंट फंडेड स्कीम आपको देखने को मिल जाएगी एक इंपॉर्टेंट बात आपको और ध्यान रखनी है वो ये है कि इसके अंतर्गत जो फंड्स होते हैं वो नॉन लैप्स बल होते हैं नॉन लैप्स बल का अर्थ क्या है कि मान लो आपको एक साल के अंदर 5 करोड़ दे दिया ठीक है अब किसी कारणवश मान लो आप पैसा यूज ही नहीं
कर पाए राइट तो क्या होगा तो क्या पैसा खत्म हो जाएगा नहीं वो अगले साल ट्रांसफर हो जाएगा यानी कि अगर आप इस साल वो 5 करोड़ नहीं यूज कर पाए ना कोई दिक्कत बात नहीं अब अगले साल कर लेना अगले साल नहीं कर पाए कोई दिक्कत नहीं उससे अगले साल कर लेना इस तरह से ये चीज होती है साथ ही साथ जो भी अगर मान लो जिस एरिया का मेंबर ऑफ पार्लियामेंट है वो तो वहां पर जो शेड्यूल कास्ट पॉपुलेशन वाले रीजन है ना तो 15 पर फंड तो वहां पे उसको स्पेंड करना पड़ेगा
एंड इस तरह से शेड्यूल ट्राइब पॉपुलेशन वाले एरियाज में 7.5 पर हमें देखने को मिल जाएगा बाकी साथ ही साथ 75 लाख प्रोवाइड किया जाता है गाइडलाइंस के तहत ठीक है ना ट्राइब्स के बेनिफिट के लिए तो ये सब बातें चलो ठीक है ये चीज भी आप नोटिस कर सकते हो अब जो क्वेश्चन एक बार बनता है ना वो ये है कि देखो यार लोकसभा के जैसे मेंबर ऑफ पार्लियामेंट है मैं आपको आईडिया देता हूं जैसे हमारे प्रधानमंत्री जी वो भी तो वाराणसी से हैं ठीक है एमपी है बिल्कुल तो वो जो 5 करोड़ खर्चे
की बात करेंगे ना कहां पे खर्च करना है वो सिर्फ और सिर्फ 12 ससी लोकसभा कंसीट एंसी के अंदर ही खर्च कर सकते हैं क्यों क्योंकि वो तो उसी कंसीट एंसी के एमपी है ना इसी तरह से जैसे अगर मैं राहुल गांधी जी की बात करूं तो वो रायबरेली में 5 करोड़ खर्च कर पाएंगे ठीक है ये तो लोकसभा एमपीज की बात होगी इसके अलावा अगर आप नोटिस करो जो हमारे राज्यसभा के मेंबर ऑफ पार्लियामेंट होते हैं वो तो किसी एरिया के नहीं ना होते वो तो एक स्टेट के होते हैं पूरा कि मान लो
कोई हरियाणा से एमपी बन गया राज्यसभा का कोई राजस्थान से बन गया जैसे मैं बात करूं अगर सोनिया गांधी जी की वो आज के समय आपकी राजस्थान से मेंबर ऑफ पार्लियामेंट है राज्यसभा की तो वहां पर वो पूरे स्टेट के अंदर स्पेंड करने के लिए बोल सकती हैं जो 5 करोड़ होगा वो पूरे राज्य पूरे राजस्थान के अंदर कहीं भी खर्च हो सकता है इसके अलावा एक चीज और होती है जो हमारे नॉमिनेटेड मेंबर्स होते हैं अब ये भी आपको पता है राज्यसभा के अंदर लिटरेचर आर्ट साइंस सोशल सर्विस के अंदर भी लोगों को नॉमिनेट
किया जाता है वो तो ना किसी एरिया के होते हैं ना किसी स्टेट के होते हैं वो तो पूरे देश के होते हैं हां तो बिल्कुल तो वो जो काम रिकमेंड करेंगे वो पूरे के पूरे देश के अंदर कर देंगे ये है आपकी एमपी लाइट स्कीम आई होप दिस हैज बिकम क्लियर टू यू ठीक है अब यहां पर इसी पर्टिकुलर एमपी लेट्स के रिगार्डिंग ना एक हमें पोर्टल देखने को मिलेगा जिसका नाम है ई साक्षी दरअसल में जो ई साक्षी वर्ड आया है ना ये इसी से आया है संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना ठीक
है तो ये एसए और क्षेत्र का यहां पे हमने ले लिया साक्षी के लिए तो कहने का अर्थ बहुत ही सिंपल है एक मेंबर ऑफ पार्लियामेंट है बिल्कुल उसके सामने इतने सारे प्रोजेक्ट ने देखने हैं कि यार जो पैसा आया कहां स्पेंड कर रहे हैं कैसे-कैसे कर रहे हैं कितना काम हो गया अगर स्कूल बनाने के लिए बोला या पानी पीने की व्यवस्था के लिए बोला तो क्या वो काम हो भी पाया या ऐसा थोड़ी है कि रुका ही पड़ा हुआ है तो जो भी आपके प्रपोज काम है उनको ट्रैकिंग करना उनको मैनेज करना उसके
लिए आपके सामने एक पोर्टल है जिसका नाम है ई साक्षी पोर्टल तो रियल टाइम एक्सेस से मिलता रहता है इससे डिसीजन मेकिंग इंप्रूव होगी क्विक रिस्पांस हो पाएगा एंड जो भी आपस में आपस में बातचीत होनी चाहिए ना एमपी और अथॉरिटीज के बीच में वो काफी तेजी से हो पाएगी इस पर्टिकुलर पोर्टल के माध्यम से बजट मैनेज हो पाएगा ठीक है ना खर्चा कहां पे हो रहा है कैसे उसको मैनेज करना है ऑल दोस थिंग्स ये सारे ई साक्षी पोर्टल के माध्यम से किए जा सकते हैं आई होप आपको एमपी लड्स भी समझ आ गया
होगा एंड साथ ही साथ आपको जो ई साक्षी पोर्टल था इसके रिगार्डिंग भी क्लेरिटी मिल गई होगी लीडर ऑफ अपोजिशन इन लोकसभा ही डिस्कस करेंगे जैसा मैं आपको कह रहा था कि राहुल गांधी जी को लीडर ऑफ अपोजिशन इन लोकसभा चुन लिया गया है अब होता क्या है लीडर ऑफ अपोजिशन ना कौन होते हैं देखो लोकसभा के कोई मेंबर होंगे जैसे कि राहुल गांधी जी अब रायबरेली से चुन के आए हुए हैं तो उसी के लोकसभा के कोई इलेक्टेड मेंबर होते हैं साथ ही साथ जो कि ऑफिशियल अपोजिशन पार्टी जो आज के समय आपको इंडियन
नेशनल कांग्रेस देखने को मिलती है उसी को यहां पे हेड करते हैं साथ ही साथ इट इज इंपॉर्टेंट कि अगर किसी भी अ पार्टी को लार्जेस्ट अपोजिशन पार्टी का लीडर अगर आप देखें तो कम से कम उसके 10 पर ऑफ द टोटल सीट्स इन लोकसभा होने ही चाहिए जैसे मान लो जितने भी आपके सीट्स है ना लेट से 543 है तो इसका 10 पर जो होगा यानी कि ग्रेटर देन 54 सीट्स तो होनी ही चाहिए ताकि उसको हम लीडर ऑफ अपोजिशन की तरह रिकॉग्नाइज किया जा पाए ठीक है एटलीस्ट 10 पर ऑफ टोटल सीट्स इन
लोकसभा अब सबसे इंपॉर्टेंट बात आपको ध्यान में ये रखना है कि लीडर ऑफ अपोजिशन का जो रोल है ना ये कहीं भी संविधान के अंदर मेंशन नहीं है इट इज नॉट मेंशन इन द कॉन्स्टिट्यूशन तो फिर कहां मेंशन है इट इज मेंशन अंडर सलप सलप क्या है सैलरीज एंड अलाउंस ऑफ लीडर ऑफ अपोजिशन इन पार्लियामेंट एक्ट 1977 ये अपने आप में बहुत-बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट पॉइंट है ये एक्ट के अंदर इस बात को डिफाइन किया गया है कि लीडर ऑफ पोलेशन क्या है संविधान के अंदर यह बात डिफाइंड नहीं है साथ में अगर हम बात करें
कैसे इसको इलेक्ट किया जाता है देखो ये पार्टी का इंटरनल मुद्दा है जैसे कांग्रेस का खुद का मुद्दा था कि कैसे को किसको हम इलेक्ट करेंगे कौन सा पर्सन होगा तो उन्होंने जो भी आपस में बातचीत करनी थी उस हिसाब से वो कर लिया तो इसके अंदर हमें नहीं जाना है एट द सेम टाइम एक बार ये डिसाइड हो जाता है फिर वो प्रपोजल जो होता है वो स्पीकर के सामने रखा जाता है वो नोटिफिकेशन एंड फिर स्पीकर इनको कहीं ना कहीं फॉर्मली एक्नॉलेज कर देते हैं कि हां लोकसभा के यही लीडर ऑफ अपोजिशन होंगे
इसी तरह से अगर राज्यसभा का केस होता है तो वहां पर आपके जो राज्यसभा के चेयर पर्सन होते हैं जो कि हमारे वाइस प्रेसिडेंट होते हैं देश के वो यहां पर इसको रिकॉग्नाइज कर देते हैं फिर अकॉर्डिंग क्या होता है जैसे उनको अपॉइंटमेंट को पब्लिक कर दिया जाता है इंपॉर्टेंट बात आप ये नोटिस कीजिए कि एक्चुअल में एक्ट तो ये आया 1977 के अंदर जो मैं बात कर रहा था सलो प एक्ट की पर 1969 तक ना कोई भी फॉर्मल रिकॉग्निशन नहीं था 1969 के बाद ही इनको लीडर ऑफ अपोजिशन को रिकॉग्नाइज करना स्टार्ट हुआ
एंड उसके 8 साल बाद यानी कि 1977 के अंदर इसको एक्ट के माध्यम से ऑफिशियल रिकॉग्निशन यहां पे मिलता है इसी पर्टिकुलर एक्ट के अंदर इनकी जो सैलरी है इनके एलाउंसेस हैं वो सारे इसी एक्ट के अंदर यहां पे मेंशन है अब कुछ क्वेश्चंस आएंगे कि क्या-क्या कंडीशंस होती है इनकी पहली चीज तो यही है कि जो मेंबर होंगे उनको लोकसभा का मेंबर होना जरूरी है प्लस एट द सेम टाइम जो भी अपोजिशन पार्टी की सबसे न मेरिकल स्ट्रेंथ है उसी को वो बिलोंग करेंगे एंड साथ-साथ उनको स्पीकर के द्वारा रिकॉग्नाइज होना चाहिए अब जिम्मेदारियां
क्या होंगी अब जब राहुल गांधी जी बन गए हैं लोकसभा के अपोजिशन लीडर लीडर ऑफ अपोजिशन इन लोकसभा तो देखिए इनके ना कुछ एक रिस्पांसिबिलिटीज हैं एंड कुछ एक रोल्स भी हैं फॉर एग्जांपल कुछ इंपॉर्टेंट पार्लियामेंट्री कमिटीज के मेंबर होंगे जैसे कि पब्लिक अकाउंट कमेटी के चेयरमैन की तरह सर्व करेंगे उसके अलावा आपकी जो पब्लिक अंडरटेकिंग कमेटी है एस्टीमेट कमेटी है और डिफरेंट डिफरेंट पार्लियामेंट्री कमिटीज के मेंबर होंगे साथ में ही बहुत सारे ऐसे बॉडीज रहती हैं जहां पर ना लीडर ऑफ पोजिशन वन ऑफ द मेंबर्स होते हैं जो कि चूज करने में मदद करते
हैं जैसे सीवीसी सेंट्रल विजनस कमीशन सीआईसी सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन सीबीआई एनएचआरसी लोकपाल इन सबके सिलेक्शन के अंदर वन ऑफ द मेंबर्स जो कि रिस्पांसिबल होते हैं वो होते हैं लीडर ऑफ अपोजिशन इन लोकसभा बाकी क्योंकि लीडर ऑफ अपोजिशन है तो डेफिनेटली जो अपोजिशन है उसकी वॉइस की तरह ये काम करेंगे इनको कई बार शैडो प्राइम मिनिस्टर विद द शैडो कैबिनेट के नाम से भी जाना जाता है एज पर बुकलेट ऑन इंडियन पार्लियामेंट प्लस एट द सेम टाइम सरकार की जो भी पॉलिसीज होंगी सरकार को कटकड़ में खड़ा करना होगा तो वो काम इनके द्वारा यहां
पे किया जाएगा पॉलिसी फॉर्मूलेशन के रिगार्डिंग अगर लगेगा सरकार अच्छा काम नहीं कर रही है तो कुछ कंस्ट्रक्टिव आइडियाज इनके द्वारा दिए जा सकते हैं एंड सरकार को ना अपने एक्शंस के लिए रिस्पांसिबल ठहराया जाएगा तो बेसिकली ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी अकाउंटेबिलिटी बढ़ेगी एंड गुड गवर्नेंस इससे बढ़ती है ये अपने आप आप में काफी अच्छी चीजें हमें देखने को मिल रही हैं ठीक है दोस्तों तो लीडर ऑफ अपोजिशन लोकसभा को काफी डिटेल में डिस्कस किया इवन आई थिंक 2019 में यूपीएससी ने इसके रिगार्डिंग क्वेश्चन पूछा हुआ था जहां पर ना क्वेश्चन क्या था क्वेश्चन ये था कि
लीडर ऑफ अपोजिशन इन लोकसभा के लिए कितने वोट्स चाहिए होंगे तो वहां पर उन्होंने बात करी थी 75 सीट्स की तो वो स्टेटमेंट अपने आप में बिल्कुल गलत हो जाता है क्योंकि यहां पे बात ना परसेंटेज टर्म्स में है कि 10 पर ऑफ टोटल सीट इन लोकसभा होनी चाहिए तब जाके उसके अपोजिशन पार्टी के लीडर को एल ओपी इन लोकसभा अनाउंस किया जा सकता सकता है अगला दोस्तों हमारा आर्टिकल है एनिमी एजेंट्स ऑर्डिनेंस के बारे में पहले मैं आपको ना एक बार एनिमी एजेंट्स का अर्थ बता देता हूं फिर इस मुद्दे पे आ जाएंगे पहली
बात तो आप देखो एनिमी क्या होता है एनिमी तो कुछ ऐसा इंसान ही होता है जो कहीं ना कहीं हमारे देश के खिलाफ काम करता है ये तो चीज आपको पता ही होगी पर जब मैं बात करता हूं एनिमी एजेंट की एजेंट क्या होता है किसी की मदद करने वाला तो अगर कोई ऐसा इंसान है जो कहीं ना कहीं एनिमी की मदद कर रहा है उसको बोल देंगे हम एनिमी एजेंट अब मैं आपको एग्जांपल देता हूं देखो यार स्पेशली यहां पे बात हो रही है ना जम्मू एंड कश्मीर की जम्मू एंड कश्मीर में देखो आप
एक तो जानते हो कि दूसरे देशों से लोग कई बार आ जाते हैं जबरदस्ती घुसपैठ कर लेते हैं ऑल दोस थिंग्स एंड पता क्या होता है दिक्कत वहां पे आ जाती है जब ना कोई ऐसा इंसान जो है इंडिया का ही जो है लोकल पर कहीं ना कहीं इन लोगों की मदद करता है इन लोगों की मतलब जो एमीज होते हैं उनकी कई बार मदद करने लग जाता है अब आप पूछेंगे किस तरह की मदद देखो किसी भी तरह की एनिमी को असिस्ट करना इंडियन मिलिट्री के काम को रोकना एयर ऑपरेशंस को रोकना राइट कुछ
ना कुछ इस तरह की चीजें करना जिससे ना कोई सामने वाला बंदा जो एनिमी है हमारा वो यहां पे अटैक कर पाए ऑल दोज थिंग्स अगर कोई भी बंदा इस तरह से मदद कर रहा है उनको ग्राउंड के ऊपर हेल्प कर रहा है फंडिंग रेज करने के अंदर मदद कर रहा है या फिर यू नो लोगों को रिक्रूट करने के अंदर मदद कर रहा है कुछ भी ऐसा कर रहा है तो वो क्या हो गया वो हो गया सर एनिमी एजेंट अब एनिमी एजेंट है तो देश के खिलाफ काम कर रहा है ये इंसान बिल्कुल
तो देश के खिलाफ काम कर रहा है तो उसके रिगार्डिंग एक्शन भी तो कुछ शक्ति लेना पड़ेगा बिल्कुल ठीक बात है इसी वजह से ये चीज को देखते हुए ना 1917 के अंदर पहली बार उस समय जो डोगरा महाराज से जम्मू एंड कश्मीर के उनके द्वारा ये एनिमी ऑर्डिनेंस एक्ट लेके आया गया एनिमी एजेंट ऑर्डिनेंस लाया गया अब एक्चुअल में क्या होता था ना ऑर्डिनेंस वर्ड ना एक्ट को ही बोला जाता है या लॉ को ही बोला जाता है ठीक है ना ऑर्डिनेंस एक तो वो होता है जो प्रधान आपके राष्ट्रपति जी या आपके गवर्नर
साहब देते हैं अंडर आर्टिकल 123 ए 213 मैं उसकी बात यहां पे बिल्कुल नहीं कर रहा हूं जम्मूकश्मीर के अंदर ना ऑर्डिनेंस का अर्थ ही एक तरह से लॉ की तरह यहां पे लिया गया है तो वहीं से इस चीज को कंटिन्यू करते हुए 1917 के अंदर ये ऑर्डिनेंस आता है समय-समय के अंदर इसके अंदर बदलाव आते हैं तो 2005 वाला ऑर्डिनेंस हमें देखने को मिलता है बदलावों के चक्कर में ही 2019 में आप जानते हो आर्टिकल 370 लाया जाता है आर्टिकल 370 लाने से ना बहुत सारी चीजें तो हट गई जैसे फॉर एग्जांपल आप
नोटिस करोगे जो आरपीसी था रणवीर पनल कोड इसको रिप्लेस कर दिया गया आईपीसी इंडियन पिनर कोड के साथ पर कुछ एक चीजें एजिस्ट करती रही जैसे फॉर एग्जांपल एनिमी एजेंट ऑर्डिनेंस काम करता रहा पब्लिक सेफ्टी एक्ट काम करता रहा ठीक है अब एक दो चीजें जो हमें इसके बारे में जाननी है इसके फीचर्स हैं वो यह है कि में ना थोड़ी सी जो प्रोविजंस है थोड़ी सी नहीं बल्कि बहुत जो प्रोविजंस है वो अपने आप में काफी मतलब ऐसी है क्योंकि इंडियन सिक्योरिटी मतलब हमारी सिक्योरिटी के साथ कहीं ना कहीं कॉम्प्रोमाइज ना होना चाहिए तो
हमने इसकी प्रोविजंस को थोड़ा सा स्ट्रांग बनाया हुआ है फॉर एग्जांपल यहां पर जो ट्रायल होगा उसको स्पेशल जग यहां पे कंडक्ट करेंगे जिनको अपॉइंट्स पेशन विद द हाई कोर्ट तो यानी कि जो एक्यूज्ड होते हैं ना वो किसी लॉयर के साथ एंगेज नहीं कर सकते अपने आप को डिफेंड करने के लिए हालांकि अगर कोर्ट परमिट कर दें तो ये चीज हो भी सकती है तो आप नोटिस कर रहे हो नॉर्मली हम यही बात करते हैं ना कि हर बंदा कोई ना कोई अपना लॉयर रख सकता है पर यहां पर ऐसा नहीं है यहां पर
उसके ऊपर रोक लगाई जा सकती है साथ ही साथ आपके अगेंस्ट जो भी वर्डिक्ट आया उसके अगेंस्ट आप यहां पर अपील भी नहीं कर सकते समझ रहे हो तो जो स्पेशल जज का जो भी डिसीजन आया उसको रिव्यू किया जा सकता है एक पर्सन के द्वारा पर वह जो पर्सन होगा वो चूज कौन करेगी वह सरकार ही चूज करेगी एट द सेम टाइम अगर हम बात करें तो हम इसके ऊपर किसकी केस की जो प्रोसीडिंग्स है उसका पब्लिकेशन है उसके ऊपर भी रोक लगाई जा सकती है एंड अगर कोई तब भी इसको पब्लिश वगैरह करता
है तो उसके अगेंस्ट भी हम एक्शन ले सकते हैं जैसे फॉर एग्जांपल दो साल तक का एक्शन लिया जा सकता है फाइन लगाया जा सकता है एंड ऑल दिस थिंग्स तो इस वजह से ना हमने अपनी सिक्योरिटी के साथ हम कंप्रोमाइज बिल्कुल नहीं करना चाहते इस वजह से हमने इसकी प्रोस को थोड़ा सा सख्त बनाया हुआ है अब यहां पर आप नोटिस कर पाओगे अदर वाइज जो नॉर्मली हम बात करते हैं ना तो बहुत सारे प्रोटेक्शन हमने लोगों को प्रोवाइड करे हुए हैं जैसे फॉर एग्जांपल आर्टिकल 22 आर्टिकल 22 बात करता है कि जब भी
किसी बंदे को अरेस्ट किया जाएगा तो उसको बताया जाएगा कि आपको किस बिना के ऊपर अरेस्ट किया गया है आप लॉयर को कंसल्ट कर सकते हैं अरेस्ट के 24 घंटे के अंदर-अंदर आपको यहां पे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा एट द सेम टाइम आपको एक फेयर ट्रायल मिलेगा जस्ट ट्रायल मिलेगा एंड आपको स्पीडी ट्रायल मिलेगा जैसा कि हुसैनारा खातून वर्सेस स्टेट ऑफ बिहार में बोला भी गया है और साथ ही साथ ये आर्टिकल 14 और 21 का भी पार्ट है प्लस एट द सेम टाइम आर्टिकल 39a के अंदर राइट टू फ्री लीगल एड भी
है तो ये सब चीजें डेफिनेटली लोगों को अवेलेबल हैं पर हमने एनिमी एजेंट्स ऑर्डिनेंस के अंदर ये सब चीजें बोली है कि हमें ये सब चीजें नहीं चाहिए यहां पर बात हो रही है देश की सिक्योरिटी की ठीक है ना तो इस सब चीजें यहां पर हम नहीं देते हैं एनिमी एजेंट ऑर्डिनेंस के अंतर्गत ठीक है तो ये कुछ पॉइंट जो आज हमें डिस्कस करने थे संपूर्णता अभियान के बारे में दोस्तों आप लोगों को एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और एस्पिरेशनल ब्लॉक्स प्रोग्राम के बारे में थोड़ा सा पता होगा नहीं पता तो अभी बता देता हूं दरअसल में
2018 के अंदर नीति आयोग के द्वारा इंट्रोड्यूस किया गया ईडीपी एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम यहां पर फोकस यह था कि जो 112 डिस्ट्रिक्ट्स हैं जो थोड़े अभी उतने अच्छे नहीं है मतलब जहां पर अभी और डेवलपमेंट होना बाकी है इनको हम अच्छे से कैसे ट्रांसफॉर्म कर सकते हैं इस वजह से ये स्टार्ट किया गया यहां पर फोकस था हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एजुकेशन एग्रीकल्चर वाटर रिसोर्सेस फाइनेंशियल इंक्लूजन स्किल डेवलपमेंट को और बेहतर करने के लिए एंड अकॉर्डिंग कैसे चेक करेंगे यहां पर टोटल 81 डेवलपमेंट इंडिकेटर्स के बेसिस के ऊपर इनकी प्रोग्रेस को मेजर करना था कि हां
एक्चुअल में हम यहां पे काम कर पा रहे हैं या नहीं कर पा रहे चलो ठीक है उसी तरह से यहां पे 2023 के अंदर ना नीति आयोग ने एस्पिरेशनल ब्लॉक्स प्रोग्राम कर दिया पहला क्या था एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स यहां पे बात करी एस्पिरेशनल ब्लॉक्स की अब कुछ हमने देखे कुछ ऐसे ब्लॉक्स थे देश भर में 500 के करीब जो क्या थे जहां पर गवर्नमेंट सर्विसेस को प्रॉपर कवरेज नहीं था तो हमने जब इन 500 ब्लॉक्स को आइडेंटिफिकेशन डेवलपमेंट इंडिकेटर्स हमने देखे कि इनकी प्रोग्रेस को हमने कैसे असेस करना है ठीक है यह बात तो हमें
समझ आई एडी और एबीपी क्या था यह तो हमें समझ आया अब नीति आयोग ने यहां पर लॉन्च कर दिया है क्या संपूर्णता अभियान मतलब लच करने वाला है अब यह तीन महीने का एक इनिशिएटिव होगा जहां पर फोकस किया जाएगा कि एडीपी और एबीपी यहां पर ना छह की इंडिकेटर्स का फुल कवरेज हो पाए व आप पूछेंगे ये क्या चीज है छह इंडिकेटर्स देखो ये ये वाले छह इंडिकेटर हैं अगर हम बात करें एस्पिरेशन ब्लॉक्स की तो की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स यहां पे यह होंगे कि आपके जैसे प्रेग्नेंट महिलाएं हैं कितने प्रतिशत प्रेग्नेंट महिलाएं ने
एंटी नेटल केयर के लिए यहां पे पहले ट्राइमर के अंदर यहां पे रजिस्टर किया प्लस एट द सेम टाइम कितने प्रतिशत पर्स संस को स्क्रीन किया गया फॉर डायबिटीज इसके अलावा अगर आप नोटिस करो हाइपरटेंशन के लिए है यहां पे इस तरह से ना आपको टोटल छह यहां पे देखने को मिल जाएंगे एस्पिरेशन ब्लॉक्स के एपीआई एंड इसी तरह से छह आपको अलग और एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स के लिए केपीआर एक सेम भी है जैसे आपका एंटीनेटल केयर वाला बाकी कुछ एक डिफरेंट भी है ठीक है तो ये कुछ छह छह इन्होंने यहां पे बनाए हैं संपूर्णता
अभियान के अंतर्गत ताकि यहां पर ना इन इंडिकेटर्स को को हम यहां पे आने वाले टाइम्स के मत अंदर यानी कि आने वाले तीन महीनों के अंदर हम यहां पे अचीव करने की कोशिश करें इसी वजह से यहां पे संपूर्णता अभियान यहां पे बनाया गया है तो ये चीजें आपको थोड़ा सा एक आईडिया पता होना चाहिए नीति आयोग का क्या रूल है वो आप आई होप समझ गए होंगे दोस्तों नेक्स्ट हमारा जो टॉपिक रहेगा वो है हमारा अनंद मैरिज एक्ट के बारे में देखो शादियों के बारे में तो आप सब लोग जानते होंगे ठीक है
ना बिल्कुल सही बात है अब देखो जो सिख जम में जो मैरिज हो होती है ना उसको हम अनंत मैरिज बोलते हैं या फिर अनंत कार्य जो उनको बोला जाता है ठीक है अब जो सिख रिलीजन के अंदर शादी होती है इट इज डिफरेंट फ्रॉम अ शादी चच इज डन इन हिंदू रिलीजन है ना तो इस वजह से ना 1909 के अंदर अनंद मैरिज एक्ट को पास किया गया ताकि एक तरह से ना सिख कम्युनिटी के जो मैरिजस है उसके लिए एक लीगल स्टेट्यूट हमारे पास हो तो एक तरह से डिफरेंट एक लीगल रिकग्निशन इससे
मिल गया सिख मैरिजस को चच सेपरेट देम फ्रॉम द हिंदू मैरिज ठीक है अदर वाइज उससे पहले क्या होता था हिंदू मैरिज के एक्ट के अंतर्गत इनको रजिस्टर किया जाता था तो समय समय के ऊपर आप नोटिस करोगे कि इस तरह के एक्ट के अंदर चेंजेज लाए गए ताकि एक तरह से जो अनंत कारज है ना उसको ऑफिशियल तरह से रिकॉग्नाइज कर पाए स्टार्टिंग में तो जब 1909 के अंदर ये एक्ट आया था उसमें रजिस्ट्रेशन का प्रावधान नहीं था पर ओवर द टाइम अमेंडमेंट्स आते रहे हैं अब जाके यहां पे रजिस्ट्रेशन का प्रावधान भी इसके
अंदर आपको देखने को मिल जाएगा एंड सिख कपल्स के लिए एक लीगल सिक्योरिटी का ये मैकेनिज्म आपको देखने को मिल जाता है अब यहां पर क्या हुआ इनकी कुछ मीटिंग हुई थी नेशनल क् ऑफ माइनॉरिटी की उसके समय डिस्कशन हुआ तो इस वजह से यह न्यूज़ में था बट इसका एक बेसिक आईडिया आपको पता लग गया होगा एक चीज़ मैं आपको और बताऊं ना यह वाला जो एक्ट था यह जम्मूकश्मीर के लिए एप्लीकेबल नहीं था क्योंकि आप जानते हो यार जम्मू कश्मीर के अंदर तो आर्टिकल 370 था ठीक है ना तो हर चीज़ वहां पे
अलग तरह से एप्लीकेबल होती थी पर क्योंकि अब तो देखो 370 तो है नहीं अब यहां पे ना 2023 के अंदर अनंत मैरिज एक्ट को वापस पास किया गया एंड अब यह जम्मूकश्मीर के ऊपर भी आज के समय आपको एप्लीकेबल देखने को मिल जाता है समझ गए इस बात को तो इस के माध्यम से आप नोटिस करोगे जम्मू कश्मीर के अंदर भी जो सिख रिलीजन के पीपल हैं उनका भी रजिस्ट्रेशन का प्रावधान यहां पे अब देखने को मिल जाएगा तो इस तरह से दिस इज नोन एज अनंत मैरिज एक्ट आई होप आपको ये चीज समझ
आ गई होगी एक छोटा सा टॉपिक और है दैट इज कंपोजिट लाइसेंसेस एक्सट्रैक्ट क्रिटिकल मिनरल क्या है ये मुद्दा सर ये बार-बार न्यूज़ में आ रहा था इसलिए थोड़ा सा इसके बारे में डिस्कस कर लेते हैं देखो यार आप लोग ना एक बात समझते हो एक होता है लाइसेंस जिसको बोलते हैं माइनिंग के लिए लाइसेंस माइनिंग के लिए लाइसेंस का मतलब क्या हुआ मैंने बोला कोई जगह है वहां पर आपको अलग-अलग तरह के मिनरल सोर्सेस मिलेंगे ठीक है ऑलरेडी हमें पता है कि वहां पर मिनरल सोर्सेस है फिर वहां से मिनरल सोर्सेस को एक्सट्रैक्ट करना
उसके लिए आप ऐसे नहीं कर पाओगे उसके लिए आपके पास एक माइनिंग लाइसेंस होना चाहिए यानी कि हमें पता है किसी जगह के ऊपर मिनरल सोर्सेस है आपको बस वो एक्सट्रैक्ट करने हैं उसके लिए आपको चाहिए होता है मिनरल माइनिंग लाइसेंस ठीक है यह बात समझ आ गई ध्यान रखने वाली बात यह है कि इस माइनिंग लाइसेंस के अंदर ना एक्सप्लोरेशन वाली चीज नहीं होती कि वहां पे सर्वे करना ड्रिल करना और देखना कि कितना वहां पे रिसोर्स है यह वाला चीज माइनिंग लाइसेंस के अंदर कवर नहीं होता पर एक चीज होती है हमारे पास
कंपोजिट लाइसेंस कंपोजिट लाइसेंस के अंदर दोनों चीजें आ जाती हैं आपका एक्सप्लोर करने के राइट भी एंड आपके एक्सट्रैक्ट करने के राइज भी मतलब कि यहां पे अगर आपके पास कंपोजिट लाइसेंस है ना तो आप सब कुछ चीजें कर सकते हो आप वहां पे सर्वे करोगे पहले ड्रिल करोगे रिसोर्स को एस्टीमेट करोगे फिर उसके बाद आपने एक बार ये देख लिया कि कितना मिनरल सोर्स आपके पास वहां प्रेजेंट है एंड अगर वहां पे प्रेजेंट है तो वहां पे आप उसको माइन भी कर पाओगे आप उसका एक्स्टेक्स्ट वहां से कर पाओगे इसी चीज को बोला जाता
है आपका कंपोजिट लाइसेंस एक्चुअल में हुआ क्या था ना जो हमारा माइंस एंड मिनरल डेवलप आपका डेवलपमेंट रेगुलेशन एक्ट है एमएमडीआर एक्ट जिसको आप बोलते हैं उसके माध्यम से सरकार ने ये प्रपोज किया कि हमारे पास ना यहां पर ये सब चीजें भी होनी चाहिए कंपोजिट माइनिंग का लाइसेंस भी यहां पे होना चाहिए ताकि वहां से आपकी जो कंपनीज हैं वो प्रोस्पेक्ट कर पाए कितनी यहां पे हमारे पास रिसोर्सेस हैं कितना रेवेन्यू हम वहां से अर्न कर सकते हैं एंड ऑल दोस थिंग्स तो सेंटर अभी आज के समय के ऊपर यहां पे देख रहा है
कंपोजिट लाइसेंस को इशू करने के लिए जिसके माध्यम से दोनों एक्सप्लोरेशन और एक्सट्रैक्शन राइट्स यहां पे दिए जा पाए उनको यहां पे इंटीग्रेट किया जा पाए तो यहां पे आप अच्छे से मिनरल सोर्सेस को कितनी प्रेजेंस है वो भी देख पाओगे एंड अगर वो चीज होती है एंड उसके साथ फिर आप एक्सक्स भी ये चीज आप कर पाओगे इसी सी को बोला जाता है आपका कंपोजिट लाइसेंस आई होप दिस मीनिंग इज प्रेटी क्लियर टू ऑल ऑफ यू दोस्तों अगला हमारा टॉपिक है सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइंस टू प्रिवेंट डिस्क्रिमिनेशन ऑफ डिफरेंटली एबल्ड इंडिविजुअल्स देखो कई बार पता
है क्या होता है आप लोग मूवीज वगैरह देखते हो राइट एंड उन मूवीज के अंदर ना जो हमारे स्पेशली एबल्ड हमारे जो होते हैं दिव्यांग जन की अगर मैं बात करूं उनको बहुत ही गलत तरह से दिखाया जाता है जिससे कहीं ना कहीं डिस्क्रिमिनेशन हो गया स्टिग्मेटाइजेशन हो गया बहुत हैवी लेवल के ऊपर चला जाता है अब ऐसा ही एक केस गया सुप्रीम कोर्ट के अंदर एक बेसिकली पिटीशन फाइल करी गई थी एक्टिविस्ट निपुल मल्होत्रा जी के द्वारा उन्होंने यहां पे बात करी कि जो फिल्म एक आई थी आंख मिचोली उसके अंदर बहुत सारा इनसेंसटिवेनेस
कोर्ट ने कुछ गाइडलाइंस इसके बारे में बोली है मैं आपको एक आईडिया देता हूं जैसे फॉर एग्जांपल आप लोगों ने लगान मूवी देखी होगी उसमें कचरा की बात होती है कचरा का मतलब होता है गार्बेज एंड इसमें आप नोटिस करो कि एक डिसेबल्ड और अनटचेबल करैक्टर का नाम कचरा रखा गया ये भी एक तरह की स्टीरियोटाइपिंग ही है तो दरअसल में सुप्रीम कोर्ट ने बोला कि यार इस तरह के स्टीरियोटाइपिक वर्ड्स को आप यूज नहीं करोगे जैसे क्रिप हो गया स्पिक हो गया फ्लिक्ड हो गया सफरिंग विक्टिम ये सब वर्ड जब आप यूज करते हो
आपने अनइंटेंशनली शायद यूज किए होंगे पर कहीं ना कहीं लोगों के दिमाग में वो परपे चुएट हो जाता है प्लस एट द सेम टाइम जो भी लैंग्वेज यूज करी जाएगी वो इंक्लूसिव होनी चाहिए और ऐसा ना हो कि दिव्यांग जनों को एलियने करे प्लस एट द सेम टाइम कई बार ना मूवीज में कहते बहुत सारे मिथ्स दिखाए जाते हैं ऐसा बोला जाता है कि यार ये पर्सन को ना अ कुछ और डिसेबिलिटी है जिसकी वजह से इसकी कुछ और पावर आ चुकी है पर ऐसा नहीं होता है मतलब उनको सुपर क्रिपल्स की तरह दिखाया जाता
है पर यहां पे सुप्रीम कोर्ट ने बोला ऐसा जब होता ही नहीं है इसके प कोई साइंटिफिक प्रूफ ही नहीं है तो आप लोगों के मन में ऐसी गलत चीजें क्यों बना रहे हो प्लस एट द सेम टाइम यहां पर ठीक है ना मिस इंफॉर्मेशन वगैरह नहीं देनी चाहिए प्लस साथ में आप नोटिस करोगे जो सक्सेस स्टोरीज है उनको आप हाईलाइट कीजिए जैसे आप नोटिस करो इकबाल हो गया चंदू चैंपियन अभी रिसेंटली ही मूवी आई वो कैसे एक पॉजिटिव अप्रोच दिखाती हैं कि लोगों की जिंदगी में जो भी चैलेंज आए हमारे दिव्यांग जनों की जिंदगी
में जो भी चैलेंज आए उन्होंने कैसे उनको टैकल करें ठीक है ना प्लस एट द सेम टाइम रिप्रेजेंटेशन और पार्टिसिपेशन को हम यहां पे इंप्रूव करें एट द सेम टाइम जो भी सिनेमेट ग्राफिक रूल्स है ना वहां पर भी कैसे डिसीजन लिए जाते हैं वो एक चीज हो गया इसके साथ ही साथ ना आपके जो भी कमिटीज वगैरह होती हैं जो इन मूवीज वगैरह को देखती हैं वहां पर भी इनको एक पार्टिसिपेशन इनका होना चाहिए ताकि जो रूल्स हैं वो इनके लिए भी अकॉर्डिंग अच्छे से बन पाएं तो ये सब चीजें यहां पे सुप्रीम कोर्ट
के द्वारा बात करी गई प्लस एट द सेम टाइम दो चीजें होती हैं एक होता है डिसेबलिंग ह्यूमर एक होता है डिसेबिलिटी ह्यूमर जब हम डिसेबलिंग ह्यूमर की बात करते हैं तो एक नेगेटिव चीज हो जाती है कि आपने ह्यूमर को ना एक पर्सन को उसकी इमेज को खराब करने के लिए ये चीज करी है पर अगर आप ह्यूमर को यूज करते हो कि लोगों को इफॉर्म करने के लिए किसी डिसेबिलिटी के बारे में तो वो चीज करी जा सकती है प्लस एट द सेम टाइम जैसे आप नोटिस करोगे जो भी गाइडलाइंस बताई गई है
राइट टू पर्सन वि डिसेबिलिटी एक्ट के अंतर्गत उनको इंप्लीमेंट किया जाए आपके मूवीज वगैरह जो होती हैं उनको प्रॉपर उन्हीं लैंग्वेज में भी बनाया जाए ताकि अ हमारे जो दिव्यांग जन है वो उसको समझ पाए ठीक है प्लस एट द सेम टाइम जो मिनिस्ट्री ऑफ आईबी के द्वारा यहां पे ड्राफ्ट गाइडलाइंस दी गई है एक्सेसिबिलिटी स्टैंडर्ड्स की उनको भी यहां पे फॉलो किया जाना चाहिए मैं आपको एक आईडिया देता हूं जैसे फॉर एग्जांपल ना जैसे साइन लैंग्वेजेस के अंदर मूवीज वगैरह बननी चाहिए ठीक है ना साथ ही साथ एक्सेसिबिलिटी स्टैंडर्ड्स होने चाहिए अगर मान लो
अ सीबीएफसी को जब सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन को जहां पर अ जो प्रोड्यूसर है वो यहां पे दो सेट्स ऑफ फिल्म्स यहां पर डिलीवर करेगा एक पब्लिक व्यूइंग के लिए एंड दूसरी एक्सेसिबिलिटी फीचर्स के साथ बेसिकली वहां पर साइन लैंग्वेज होंगी हियरिंग एंड विजुअल इंपेयरमेंट वाले लोग भी उस मूवीज को अच्छे से देख पाएंगे ये यहां पे फोकस है इन गाइडलाइंस का ठीक है ना तो ए दर सेम टाइम आप नोटिस करोगे जो भी मूवीज लेट्स से नेशनल फिल्म अवार्ड्स के लिए इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के अंदर यहां पे उनको कंसीडर किया जाता
है उनके अंदर तो कैप्शनिंग पक्का होनी ही चाहिए ऑडियो डिस्क्रिप्शन भी होनी चाहिए ताकि जो लोग हमारे दिव्यांग जन है वो भी इन मूवीज का अच्छे से उनको देख पाए प्लस आप एक दो पॉइंट्स और भी देख पाओगे कि कुछ शिकायतें हैं तो उनके लिए भी प्रॉपर मेजर्स बताए गए हैं इन गाइडलाइंस के अंदर प्लस एट द सेम टाइम सरकार जो होगी ना वो फंडिंग सपोर्ट भी प्रोवाइड कर सकती है ताकि ये एक्सेसिबिलिटी फीचर्स मूवीज के अंदर आ पाए तो ये कुछ गाइडलाइंस थी जो यहां पे बताई गई थी जो आपकी मिनिस्ट्री ऑफ इंफॉर्मेशन एंड
ब्रॉडकास्टिंग के द्वारा ठीक है ना ड्राफ्ट गाइडलाइंस ऑफ एक्सेसिबिलिटी स्टैंडर्ड इन पब्लिक एग्जिबिशन ऑफ फीचर फिल्म्स ए सिनेमा थिएटर की जो गाइडलाइंस थी एसडीजी इंडिया इंडेक्स के बारे में थोड़ा सा समझने की इसको कोशिश करते हैं दोस्तों आप लोग ना सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के बारे में जानते होंगे यहां पर आपके अ स्क्रीन के सामने टोटल 17 गोल्स आपको देखने को मिल जाएंगे जिसमें एसडीजी व नो पॉवर्टी ज़ीरो हंगर फिर गुड हेल्थ एंड वेल बीइंग क्वालिटी एजुकेशन जेंडर इक्वलिटी ऐसे टोटल आपको 17 गोल्स देखने को मिल जाते हैं अब फोकस यह है कि 2030 तक हम
इन गोल्स को अचीव करना चाहते हैं इनके फर्द आगे टारगेट्स भी आप जानते होंगे राइट अब यह तो है हमें इंटरनेशनल लेवल के ऊपर हमें इस चीज को अचीव करना है सही बात है पर आप नोटिस करेंगे कि हमारी अलग-अलग स्टेट्स इनमें कैसा परफॉर्म कर रही हैं वो भी तो जानना जरूरी है ना क्योंकि देखो अगर इंडिया को अचीव करना है इसका मतलब इंडिया अचीव करने का अर्थ यही है कि हमारे यूपी को भी करना पड़ेगा पंजाब को भी करना है मणिपुर को भी करना है महाराष्ट्र को भी करना है तमिलनाडु को भी करना है
राइट तो हमारी सभी स्टेट्स हमारी यूटी को भी यह चीज फॉलो करनी पड़ेगी अब उसी चीज की प्रोग्रेस को मेजर करने के लिए हमारा जो नीति आयोग है ना उसके द्वारा 2018 के अंदर एसडीजी इंडिया इंडेक्स को लांच किया गया ताकि एक तरह से जो य सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स हमें अचीव करने हैं ना इनके लोकलाइजेशन एफर्ट्स हम देख पाएं कि हमारी स्टेट्स हमारी यूटी कैसा काम कर रही हैं उनकी क्या अचीवमेंट्स हैं आपस में एक दूसरे से क्या सीख सकते हैं तो एक अच्छे से एनालिसिस हो जाता है तो इस बार ना यहां पे 2023
24 का एसडीजी इंडिया इंडेक्स हमारे सामने आ चुका है ये चौथा एडिशन हमें एसडीजी इंडिया इंडेक्स का देखने को मिला पहला एडिशन 2018 में आया फिर 1920 में फिर 2021 में उस उसके बाद काफी टाइम के बाद 23 24 एडिशन हमें देखने को मिल रहा है आप यहां पर सोच रहे होंगे सर ये 71 क्या है देखो ये दरअसल में स्कोर है जितना स्कोर हमारा 100 के पास में होगा ना मतलब उतना हम बढ़िया काम कर रहे हैं एसडीजी गोल्स को अचीव करने के लिए 2018 में जब शुरुआत करी थी तब ये स्कोर हमारा 57
था बढ़ते बढ़ते अब हम 71 तक यहां पे पहुंच गए हैं तो ये एक अच्छी बात है कि हमारी ग्रोथ हो रही है अब बात करें देखो कौन सी स्टेट बढ़िया कर रही है कौन सी स्टेट खराब कर रही है तो यहां पर आप नोटिस कर पाओगे कि उत्तराखंड केरला यह टॉप के ऊपर आपको देखने को मिल जाएंगी इंडिया का एवरेज स्कोर 71 है पहले से प्लस फ इंप्रूवमेंट हुआ है पर अगर हम बात करें झारखंड और बिहार की ये दो स्टेट्स हैं जिनको अभी काफी काम करना बचा हुआ है यानी कि लोएस्ट में ऊपर
आपको बिहार और झारखंड देखने को मिल जाएंगे टॉप के ऊपर आपका केरला एंड उत्तराखंड आपको देखने को मिल जाता है तो ये जो पर्टिकुलर इंडेक्स है बेसिकली स्टेक होल्डर्स स्टेट्स यूटी मिनिस्ट्री ऑफ़ स्टैटिस्ट एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन और अन्य मिनिस्ट्री यूएन एजेंसीज के साथ मिलकर कंसल्टेशन के माध्यम से इसको बनाया गया है तो 113 इंडिकेटर्स के क्रॉस प्रोग्रेस को ट्रैक करता है ध्यान रखने वाली बात ये है कि देखो वैसे तो टोटल 17 गोल्स हमारे पास होते हैं एसडीजी गोल्स हमारे पास टोटल 17 है पर जो 177th वाला है ना पार्टनरशिप फॉर द गोल्स यहां पर
बात ना दरअसल में इंटरनेशनल कोलैबोरेशन की होती है तो यार ये तो स्टेट्स के लिए उतना पॉसिबल है नहीं तो हमारे यहां पे ना जो एसडीजी इंडिया इंडेक्स है तो उसमें 177th वाले को हम कंसीडर नहीं करते बाकी वन टू लेके 16 सबको कंसीडर किया जाता है तो इन 16 गोल्स के ऊपर यहां पे परफॉर्मेंस ट्रैक करी जाती है बाकी जैसे मैंने आपको बताया 100 जीरो से लेकर 100 तक का स्कोर होगा 100 का जितना स्कोर पास में होगा मतलब हम उतना बढ़िया यहां पे कर रहे हैं अब यहां पर ना आप एक और भी
यहां पे इमेज देख पा रहे होंगे ये अलग-अलग गोल्स के रिगार्डिंग है एसडीजी व से लेकर 16 सारे आपको यहां पे देखने को मिल जाएंगे एक जो कंसर्निंग बात है ना वो है हमारी जेंडर इक्वलिटी के गार्डिंग ये देख रहे हो रेड कलर ये रेड कलर पता है क्या शो करता है कि यहां पर हमारा स्कोर अभी 50 से भी कम है जहां पर ग्रीन शो कर रहा है ग्रीन का मतलब है कि हम बहुत बढ़िया कर रहे हैं 65 से 99 स्कोर है एंड जहां पे अगर ब्लू है जो तो अभी है नहीं वहां
पे मतलब 100% अचीव कर लिया है पर आप नोटिस करो ग्रीन भी हम काफी जगह पे कर रहे हैं दैट इज अ गुड थिंग जैसे फॉर एग्जांपल एसडी से अफोर्डेबल एंड क्लीन एनर्जी में हम अच्छा कर रहे हैं पर जेंडर इक्वलिटी अभी भी हमारा 50 से कम स्कोर है 49 यहां पे स्कोर देखने को मिल रहा है तो इसमें हमें अच्छा करना है जीरो हंगर वाले के अचीव करने में अभी बहुत काम बचा हुआ है क्वालिटी एजुकेशन हो गया एंड साथ ही साथ इंडस्ट्री इंफ्रास्ट्रक्चर यहां पर ये कुछ सेक्टर्स है जहां पर हमें बहुत इंपॉर्टेंट
काम करना भी बचा हुआ है खासकर आपका जेंडर इक्वलिटी का काम ठीक है तो बहुत सारे सेक्टर्स में अच्छा काम किया भी है जैसे फॉर एग्जांपल हाउसिंग के अंदर पीएम आवास योजना ने मदद करी आयुष्मान भारत ने हेल्थ में इंप्रूवमेंट करी है जल जीवन मिशन हो गया ये सभी चीजों ने काफी इंप्रूवमेंट में हमारी मदद करी है तो आप नोटिस करोगे ठीक है ना तो अ हेल्थ हो गया सैनिटेशन रिन्यूएबल एनर्जी इनमें अच्छा काम किया है पर अभी और काम करने की जरूरत है तो फ्रंट गोल्स में अगर हम बात करें तो नो पॉवर्टी में
अच्छा काम किया है डिसेंट वर्क एंड इकोनॉमिक ग्रोथ यहां पे हो गया आपका क्लाइमेट एक्शन के रिगार्डिंग हो गया ये सब चीजों ने काफी अच्छी प्रोग्रेस यहां पे दिखाई है पर मैंने आपको कुछ एरियाज ऑफ इंप्रूवमेंट भी बता दिए इन चीजों को ना आप अपने मेंस के आंसर में भी लिख सकते हो बाकी यूपी पीएससी भी आपसे प्रीलिम स्पेसिफिक क्वेश्चंस भी यहां पे पूछ सकता है बाकी जैसे मैंने आपको बताया ही है ठीक है ना यहां पर अगर आप नोटिस करोगे तो काफी सारी ऐसी स्टेट्स हैं 10 स्टेट्स हैं हमारी और यूटी जो कि फ्रंट
रनर कैटेगरी में आ गई हैं यानी कि उनका स्कोर 66 से ऊपर चला गया है तो इन स्टेट्स ने भी इंप्रूवमेंट दिखाई है एज कंपेयर्ड टू जो पिछले बार का रैंकिंग थी जैसे आप इस मैप में भी अगर आप ग्राफ में देखना चाहो तो आप नोटिस करोगे लगभग पूरा इंडिया ही यहां पे ग्रीन में देखने को मिल जाएगा कुछ एक एरियाज जहां पे येलो है ना इनको अभी और इंप्रूव करना जैसे इसमें झारखंड बिहार हो गया ठीक है एंड नॉर्थ ईस्ट की दो स्टेट्स हो गया इनको काम करना है पिछले बार के कंपैरिजन में काफी
जगह येलो था पर बाकी स्टेट्स ने काम करके अपने आप को फ्रंट रनर की कैटेगरी में ले आए हैं तो दैट इज अ गुड थिंग बाकी स्टेट से भी यही उपेक्षा रहेगी कि आने वाले समय में वो भी और बढ़िया काम करके वो भी फ्रंट रनर की कैटेगरी में चले जाए नेक्स्ट दोस्तों हमारा टॉपिक रहेगा र कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ नीति आयोग बाय द गवर्नमेंट अब ये क्या मुद्दा है सर देखो दरअसल में ना नीति आयोग के बारे में आप जानते होंगे नीति आयोग क्या है एक थिंक टैंक है पहले हमारे पास क्या होता था प्लानिंग कमीशन
होता था प्लानिंग कमीशन को रिप्लेस करके हमने बनाया नीति आयोग अब इंपॉर्टेंट चीज आपको जो ध्यान में रखनी है कि चाहे आप प्लानिंग कमीशन की बात कर लो चाहे आप नीति आयोग की बात कर लो दोनों के दोनों क्या है आपकी एग्जीक्यूटिव बॉडीज थी ठीक है मतलब प्लानिंग कमीशन भी एग्जीक्यूटिव बॉडी थी और नीति आयोग भी एक्जेक्टिव बॉडी है प्लानिंग कमीशन भी संविधान में मेंशन नहीं है प्लानिंग कमीशन का भी कोई लॉ या स्टेट्यूट के माध्यम से नहीं बना था सेम चीज नीति आयोग के लिए है तो फॉर्मेशन का तरीका तो बिल्कुल सेम है कि
दोनों एग्जैक्ट बॉडीज हमें देखने को मिल जाती है 2015 में यहां पे नीति आयोग नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया यहां पे बनाया गया एज अ इंपॉर्टेंट पार्ट ऑफ मतलब इंडिया का एक थिंक टैंक के रूप के ऊपर राइट हालांकि फर्क जरूर है डेफिनेटली प्लानिंग कमीशन और इसके अंदर प्लानिंग कमीशन के अंदर क्या होता था ना प्लानिंग कमीशन के अंदर फंड्स ग्रांट करने की पावर भी थी पर नीति आयोग के पास ऐसी कोई पावर नहीं है नीति आयोग अपने आप में एक एडवाइजरी बॉडी ही है साथ ही साथ अगर हम बात करें नीति आयोग आपका कोऑपरेटिव
फेडरलिस्ट म के साथ-साथ आपके कॉम्पिटेटिव फेडरेलिज्म की भी बात करता है बेसिकली कोऑपरेटिव फेडरेलिज्म का अर्थ बहुत सिंपल है यहां पे आपका सेंटर और स्टेट्स एंड साथ साथ स्टेट्स यहां पे मिलकर काम करती हैं एक तरह से कोऑपरेशन करती हैं बेस्ट प्रैक्टिसेस सीख हैं ताकि साथ में मिलकर यहां पे काम किया जा पाए कॉम्पिटेटिव फेडरेलिज्म एक तरह की कॉम्पिटेटिव स्पिरिट की बात करता है जिसके माध्यम से हेल्दी कंपटीशन आता है एंड हर स्टेट कोशिश करती है दूसरे से बढ़िया करने की जैसे फॉर एग्जांपल आपने अलग-अलग तरह के इंसेस देखे होंगे अभी जैसे कंपोजिट वाटर मैनेजमेंट
इंडेक्स एसजी इंडिया इंडेक्स तो ये सारे इंडेक्सेस के माध्यम से कॉम्पिटेटिव फड प्रमोट होता है इंपॉर्टेंट बात यह है कि जो आपका प्लानिंग कमीशन था वो टॉप डाउन अप्रोच को फॉलो करता था पर हमारा जो नीति आयोग है वो बॉटम अप अप्रोच को फॉलो करता है अब इसमें अच्छी बातें अगर मैं और बात करूं तो अच्छे-अच्छे यहां पे इनपुट्स वगैरह ये प्रोवाइड करता है यहां पर ना इसकी फॉर्मेशन को आप नोटिस करिए इसके कंपोजीशन को तो प्रधानमंत्री जी इसके चेयर पर्सन की तरह काम करते हैं इसके साथ ही इसके एक वाइस चेयर पर्सन होते हैं
जो कि एक फुल टाइम ऑर्गेनाइजेशन मेंबर होते हैं जिनको प्रधानमंत्री जी के द्वारा ही अपॉइंटमेंट इम मेंबर्स होते हैं जिनको मिनिस्टर ऑफ स्टेट का यहां पे जो रैंक एंजॉय करते हैं साथ में अगर मैं बात करूं गवर्निंग काउंसिल ये अपने आप में बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट हो जाती है क्योंकि यहां पर आपको स्टेट्स का रोल देखने को मिलेगा कैसे जो भी आपके स्टेट्स के चीफ मिनिस्टर होते हैं वो प्लस एट द सेम टाइम जो आपके स्टेट्स विद द लेजिसलेटिव असेंबली जैसे दिल्ली का हो गया ना तो दिल्ली के भी आपके सीएम साहब ही यहां पे आपको
देखने को मिल जाएंगे उसके साथ ही साथ आपके यूनियन टेरिटरीज के आपके लेफ्टनंट गवर्नर्स आपको देखने को मिल जाते हैं तो ये गवर्निंग कांसिल कहीं ना कहीं स्टेट्स के रोल को बहुत इंपॉर्टेंट यहां पे बना देती है इसके अलावा यहां पे रीजनल काउंसिल हमें देखने को मिल जाती हैं मान लो कोई स्पेसिफिक एक रीजन है मान लो दो-तीन स्टेट्स का आपस में कुछ मसला है या ऐसा कुछ है तो उनके करेस्पॉन्डिंग्ली भी हो सकती है जो भी उस स्टेट्स के चीफ मिनिस्टर होंगे या लेफ्टनंट गवर्नर्स होंगे वो यहां पे होंगे एंड यहां पे प्रधानमंत्री जी
या उनके कोई नॉमिनी यहां पे उसको चेयर कर सकते हैं इसके अलावा पार्ट टाइम मेंबर्स होते हैं यहां पे दो मेंबर्स हो सकते हैं फ्रॉम लीडिंग यूनिवर्सिटीज या कुछ रिसर्च ऑर्गेनाइजेशंस के अंदर जो कि रोटेशनल बेसिस के ऊपर सर्व करते हैं इसके साथ ही साथ यहां पे आप नोटिस कर पाओगे आपके यूनियन कांसिल ऑफ मिनिस्टर चार हो सकते हैं यहां पे जिनको नॉमिनेट किया जाता है प्राइम मिनिस्टर जी के द्वारा प्लस यहां पे सीईओ होते हैं वेरी वेरी इंपोर्टेंट ठीक है ना इनको फिक्स्ड नर के लिए यहां पे प्रधानमंत्री जी के द्वारा पॉइंट किया जाता
है एंड इसके साथ ही हो सकते हैं स्पेशल इनवाइट जिसमें एक्सपर्ट्स हो गया स्पेशलिस्ट हो गया जिनको प्रधानमंत्री जी नॉमिनेट करते हैं अभी सर हम इसको डिस्कस क्य कर रहे हैं नीति आयोग वाले टॉपिक को डिस्कस इसलिए कर रहे हैं क्योंकि रिकंस्टीट्यूट किया गया नीति आयोग को जिसके माध्यम से जो आपके स्पेशल इनवाइटीस पहले पांच हुआ करते थे ना उसको बढ़ाकर 11 कर दिया गया है इसी चीज की वजह से आपके जो यूनियन मिनिस्टर है उनकी संख्या अपने आप में काफी ज्यादा बढ़ती हुई हमें यहां पे देखने को मिल जाती है बाकी आप जानते होंगे
देखो नीति आयोग ने बहुत सारे काम किए हैं फॉर एग्जांपल इंडिया चें जो है जो कि एक ब्लॉकचेन नेटवर्क है वो नीति आयोग के द्वारा ही प्रमोट किया जाता है पब्लिक डाटा के लिए ई अमृत जो आपको देखने को मिल जाएगा पोर्टल वो पोर्टल भी नीति आयोग ने डेवलप किया है ताकि जो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स ई का मतलब क्या है इलेक्ट्रिक व्हीकल्स ही है तो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के बारे में पूरी जानकारी यहां पे बताई जा पाए साथ ही साथ जो इंडिया यूके का जो जॉइंट रोड मैप 2030 है उसका भी ये पार्ट देखने को मिल जाएगा
साथ ही जो प्रोजेक्ट है साथ का मतलब होता है आपका ह्यूमन कैपिटल के साथ लिंक सस्टेनेबल एक्शन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग ह्यूमन कैपिटल चाहे आपका एजुकेशन हो गया आपका हेल्थ हो गया आपके स्किल्स हो गया उसको हम कैसे बेहतर कर सकते हैं वही साथ ही प्रोजेक्ट देखने को मिल जाएगा अटल इनोवेशन मिशन तो यूपीएससी ने ऑलरेडी पूछा ही हुआ है ये नीति आयोग का ही है इनोवेशन और एंटरप्रेन्योर ठीक है आपका वुमेन एंटरप्रेन्र्दे ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवार्ड्स हो गया ये सारे आपके नीति आयोग के फंक्शंस हैं एंड साथ ही साथ जो एनजीओ दर्पण प्लट प्लेटफॉर्म है ना यह
भी नीति आयोग का ही प्लेटफॉर्म है जहां पर आपके एनजीओस और वॉलंटरी ऑर्गेनाइजेशन का आपको एक डेटाबेस यहां पे देखने को मिल जाता है अगला दोस्तों हमारा टॉपिक रहेगा हाई कोर्ट जजेस के अपॉइंटमेंट के बारे में एक्चुअल में क्या है यूनियन लॉ मनिस्टर जी ने पार्लियामेंट में बोला है कि 219 प्रपोजल्स फॉर अपॉइंटमेंट ऑफ हाई कोर्ट जजेस अक्रॉस द कंट्री आर इन वेरियस स्टेजेस ऑफ प्रोसेसिंग यानी कि 219 प्रपोजल्स के ऊपर यहां पे चर्चा चल रही है एक्चुअल में होता क्या है ना जब मैं बात करता हूं हाई कोर्ट जजेस के अपॉइंटमेंट की तो आर्टिकल
217 में आपको देखने को मिलेगा कि जजेस जो होते हैं हाई कोर्ट के उनको पॉइंट किया जाता है प्रेसिडेंट जी के द्वारा आफ्टर कंसल्टिंग द चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एंड द गवर्नर ऑफ द स्टेट एक्चुअल में ना आप थोड़ा सा इस बात को समझने की कोशिश करना ये जो पूरा प्रोसेस है ना दरअसल में कोलेजियम सिस्टम के थ्रू आता है अब आप जानते होंगे कि जब मैं बात करता हूं कॉलेजियम की तो कॉलेजियम कहीं संविधान के अंदर तो मेंशन है नहीं आपकी जो सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट्स है उसके थ्रू यहां पे हमें इवॉल्व होता हुआ
कॉलेजियम देखने को मिल जाएगा जब मैं बात करता हूं हाई कोर्ट जजेस की तो उस केस में आप लोग जानते होंगे कि कोलेजियम के अंदर आप आपके चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एंड साथ ही साथ दो सीनियर मोस्ट जजेस आपको देखने को मिल जाएंगे राइट जब वैसे अगर हम बात करें अपॉइंटमेंट एंड ट्रांसफर ऑफ जजेस की उस केस में तो आप जानते होंगे कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के साथ-साथ आपको चार सीनियर मो सुप्रीम कोर्ट जज देखने को मिलते हैं पर जो हाई कोर्ट लीजम की बात होती है ना वहां दो सीनियर वो जजेस हमें देखने
को मिल जाते हैं उसके साथ ही अगर मैं बात करूं तो जो भी यहां पर प्रपोजल्स वगैरह आते हैं फिर रिकमेंडेशन भेजा जाता है चीफ मिनिस्टर को जो एडवाइज करते हैं गवर्नर को एंड अकॉर्डिंग वो फॉरवर्ड कर दिए जाते हैं आपके यूनियन लॉ मिनिस्टर को तो जो भी यहां पर रिकमेंडेशन दी गई है ठीक है ना तो अकॉर्डिंग वो यहां पे सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम तक जाते हैं उनके एडवाइस के लिए एंड जो भी रिकमेंडेशन होती है सुप्रीम कोर्ट लीजम की व यहां पे मैंडेटरी हमें यहां पे देखने को मिल जाती है बाकी अगर हम बात
करें तो चीफ जस्टिस जो होते हैं हाई कोर्ट के उनको जनरली ऐसा देखा गया है कि रिस्पेक्टिव स्टेट से बाहर उनको यहां पे अपॉइंटमेंट हमें देखने को मिल जाती है इनके यहां पे जजेस का कुछ क्राइटेरिया आप यहां पे नोटिस कर पाओगे कि जो कैंडिडेट होना चाहिए वो डेफिनेटली इंडियन सिटीजन होना चाहिए मिनिमम एज 35 साल की होनी चाहिए एंड द सेम टाइम जो जुडिशियस एक्सपीरियंस होना चाहिए कम से कम 10 साल एक्सपीरियंस एज अ जज इन सबोर्डिनेट कोर्ट या फिर आपका 10 साल का प्रैक्टिस एज एन एडवोकेट इन हाई कोर्ट होना चाहिए इसके साथ
साथ जो ओथ ली जाती है ना दे टेक द ओथ बिफोर द स्टेट्स गवर्नर या उनके द्वारा जो भी रिप्रेजेंटेटिव को डेजिग्नेट किया जाता है बाकी जो ड्यूरेशन होती है वो अंट्स होती है अगर रिजाइन करना हो तो प्रेसिडेंट साहब को रिजाइन करेंगे एंड एट द सेम टाइम जो रिमूवल होता है वो प्रेसिडेंट जी के द्वारा किया जा सकता है बेस्ड ऑन द रिकमेंडेशन फ्रॉम द पार्लिया ठीक है ना जजेस अगर अपनी पोजीशंस को विकेट करते हैं वो तब करते हैं या किसी और हाई कोर्ट उनका ट्रांसफर हो जाए या फिर उनको सुप्रीम कोर्ट के
अंदर अपॉइंटमेंट कर दिया जाए अब आपको जो एक बात ध्यान में रखनी है ना कि हाई कोर्ट जजेस की सैलरीज के बारे में दरअसल में ना अगर इनकी हाई कोर्ट जजेस की जो सैलरीज होती है वो सैलरीज दरअसल में चार्जड होती है ऑन द कंसोलिडेटेड फंड ऑफ स्टेट ठीक है ये मैं बात कर रहा हूं हाई कोर्ट जजेस की सैलरी की उसी तरह से अगर मैं बात कर रहा हूं सुप्रीम कोर्ट जजेस की सैलरी की तो एएसएल में वो चार्ज होती है आपके कंसोलिडेट फंड ऑफ इंडिया के ऊपर पर अगर मैं बात करूं पेंशंस की
और पेंशंस में किसकी दोनों की चाहे हाई कोर्ट की हो या सुप्रीम कोर्ट की ये आपका कंसोलिडेट फंड ऑफ इंडिया के ऊपर ही यहां पे चार्ज रहती है ये बात आपको ध्यान में रखनी है कि हाई कोर्ट जजस की सैलरी जो है वो स्टेट के ऊपर कंसोलिडेट फंड ऑफ स्टेट के ऊपर चार्जड है आपके सुप्रीम कोर्ट जजेस की सैलरी वो आपकी कंसोलिडेट फंड ऑफ इंडिया के ऊपर चार्जड है पर पेंशंस किसी की भी हो यहां पर कंसोलिडेट फंड ऑफ इंडिया के अंदर यहां पे आपको चार्ज देखने को मिल जाएगी देखो इनकी जो भी टर्म टर्म्स
ऑफ कंडीशन होती है उनको कभी अल्टर नहीं किया जा सकता टू देयर डिसएडवांटेज एक्सेप्ट ड्यूरिंग फाइनेंशियल इमरजेंसी फाइनेंशियल इमरजेंसी जब आर्टिकल 360 लगता है ना उस समय ये चीज करी जा सकती है ब अदर वाइज नहीं करी जा सकती समय-समय के ऊपर इनकी सैलरीज अपडेट भी की जाती है उनको एडिशनल बेनिफिट्स मिलते हैं प्लस एट द सेम टाइम इनको मंथली पेंशन भी मिलती है एज पर द 50 पर ऑफ देर लास्ट ॉन सैलरी तो ये कुछ पॉइंट्स है जो आपको यहां पे जानने चाहिए थे दोस्तों नेक्स्ट टॉपिक हमारा है भुवन पंंचायत जिओ पोर्टल 4.0 के
रिगार्डिंग देखो दरअसल में ना हमारे जो यूनियन मिनिस्टर ऑफ स्टेट इंडिपेंडेंट चार्ज फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी है उनके द्वारा दो जिओ पोर्टल्स यहां पर इंट्रोड्यूस किए जा रहे हैं एक का नाम है आपका भुवन पंचायत एंड दूसरा के नाम है आपका नेशनल डेटाबेस फॉर इमरजेंसी मैनेजमेंट दरअसल में इसका 4.0 वर्जन हमें देखने को मिल जाता है एक्चुअल में जब मैं बात करता हूं ना भुवन यह भुवन जो बात होती है यह धरती की बात होती है रसल में धरती को ही अर्थ को ही संस्कृत में आपके भुवन नाम से जाना जाता है ठीक है पर
इस पोर्टल की जरूरत क्या पड़ी देखो आप एक चीज नोटिस करो जगह अगर हम बात करें हमारी पंचायत की तो अगर पंचायत को अच्छे से फंक्शन करना है तो उनके पास जानकारी होनी चाहिए कि किस तरह के उनके पास एसेट्स है राइट तो यहां पर पता क्या होता है यहां पर पंचायत को डाटा प्रोवाइड किया जाता है कैसे आपकी जो अर्थ ऑब्जर्वेशन सेटेलाइट्स होती हैं उनके माध्यम से अब पंचायत के पास ये अलग-अलग जानकारी पहुंचेगी बिल्कुल तो उनके लिए ना चीजें प्लान आउट करना आसान हो जाएगा अगर मान लो उनको प्लान करना है कि यार
अपना हेल्थ केयर यूनिट कहां पर बनाए या पानी की व्यवस्था कहां पर करें ऑल दोस थिंग्स वहां पर उनको ना यह डिसेंट्रलाइज प्लानिंग के अंदर भुवन पंचायत जिओ पोर्टल यह बहुत-बहुत ज्यादा मदद करने वाला है प्लस एट द सेम टाइम जब सारे मैप्स वगैरह होंगे तो लोकल बॉडीज के पास भी और जानकारी आएगी तो टेक्नोलॉजी को भी डेवलपमेंट के अंदर यूज किया जा सकता है एंड जो डिजिटल इंडिया का सपना है उसके अंदर भी काफी बढ़ोतरी करी जा सकती है यही फंक्शन है आपके भुवन पंचायत जिओ पोर्टल 4.0 के बारे में तो इसको डेवलप किया
गया है एनआर एससी यानी कि नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के द्वारा एंड साथ साथ इसरो हो गया उसने यहां पे मदद करी है बाकी और भी यहां पे आप नोटिस कर पाओगे बाकी और एंटिटीज भी यहां मदद करती हैं पर इसरो का जो डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस है हमारा जो मिनिस्ट्री ऑफ पंचायती राज है वो बहुत-बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट रोल प्ले करते हैं इस भुवन पंचायत jio.co भी यहां पे हमारी यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के द्वारा इंट्रोड्यूस किया गया है ये दरअसल में जो पोर्टल है ना यहां पे बात आती है किसकी इमरजेंसी
मैनेजमेंट की यानी कि यहां बात हो रही है किसकी आपके डिजास्टर्स की तो डिजास्टर्स के रिगार्डिंग हमारे पास क्या इमरजेंसी सिचुएशन आ सकती है वहां पर उनको टैकल करने के लिए हम किस तरह से हमारी जो भी स्पेस बेस्ड इंफॉर्मेशन है ना उसको यूज करते सकते हैं ताकि डिजास्टर्स को फोरकास्ट किया जा पाए या डिजास्टर्स के लिए हम अच्छे से प्रिपेयर्ड रह पाए एंड उनके रिगार्डिंग जो रिस्क रिडक्शन है वो हर जगह पे कर पाए दिस इज द फोकस ऑफ नेशनल इमरजेंसी नेशनल डेटाबेस फॉर इमरजेंसी मैनेजमेंट पोर्टल ठीक है बाकी रिकवरी के रिगार्डिंग हो गया
डाटा प्रोवाइडर नोट की तरह काम करेगा ठीक है ना और ऐसा एक रूम हमें यहां पे मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के द्वारा नई दिल्ली के अंदर भी एस्टेब्लिश किया जा रहा है ताकि अकॉर्डिंग ना हर जगह के रिगार्डिंग रिस्पांस के काम को हम यहां पे अच्छे से चेक कर पाएं अगला दोस्तों हमारा टॉपिक है आईसीएल के बारे में इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑडिट ऑफ लोकल गवर्नमेंट देखो ऑडिटिंग आप जानते हो बिल्कुल कुछ भी आपने पैसा वगैरह खर्च किया तो क्या वो सही पर्पस के लिए खर्च किया सही ढंग से उसको खर्च किया क्या एक्चुअल में उसका
आउटपुट निकला भी या नहीं निकला ठीक है तो पैसे का आपको अगर देखना होता है ना प्रॉपर चेकिंग करनी होती है तो ऑडिटिंग उसके अंदर हमारी काफी हद तक मदद कर देती है अब यहां पर पता है क्या हुआ है ऑडिटिंग यहां पर हम बात करेंगे किसकी लोकल गवर्नेंस के रिगार्डिंग अगर मैं थोड़ा अभी तक आपको बताऊं ना तो अभी भी लोकल बटीज की ऑडिटिंग होती है ऐसा नहीं है कि नहीं होती एक्चुअल में क्या होता है ना आप नोटिस करोगे एक हमारे पास एग्जामिनर ऑफ लोकल फंड अकाउंट या फिर आपके डायरेक्टर ऑफ लोकल फंड
अकाउंट ये ऑडिट करते हैं कि जो भी आपके लोकल गवर्नमेंट्स को जो आपकी लोकल बॉडीज को जो भी फंड वगैरह दिया गया है उसका कैसे यूज हुआ उसको ऑडिट यहां पे इनके द्वारा किया जाता है बाकी कैग भी जो कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल है वो भी यहां पे ऑडिट वगैरह करते हैं इन तीनों का बाकी सुपरविजन भी यहां पे डेफिनेटली कैग प्रोवाइड करते हैं तो ये तो करंट वाला सिस्टम हो गया पर एक्चुअल में ना इस सिस्टम के अंदर कुछ ना कुछ इश्यूज हैं फॉर एग्जांपल देखो देश भर में आपकी जो ढाई लाख पंचायतस हैं
और 8000 अर्बन लोकल बॉडीज हैं इनमें आपस में बिल्कुल भी कोलैबोरेशन नहीं है ऑडिटिंग के पर्सपेक्टिव से प्लस कुछ जगह पे कुछ अलग तरह की प्रैक्टिसेस चल रही है कुछ जगह प अलग तरह की तो आपस में एक दूसरे से सीखने का मैकेनिज्म नहीं है प्लस एट द सेम टाइम देखो गोल प्रैक्टिस के साथ अभी हम अलाइन नहीं करते हैं एंड इसके अलावा जो भी आपके फंड यूटिलाइजेशन के अंदर इनएफिशिएंसी होती है ना वो भी देखने को मिलती है पता है क्यों क्योंकि बहुत सारी म्युनिसिपालिटीज अभी तक भी आपकी ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स को नहीं यूज
करती अब नहीं यूज करेंगे तो दिक्कत तो आएगी ही आएगी अब यही सारी दिक्कतों को सॉल्व करने के लिए हमारे पास आ गया है आईसीएल इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑडिट ऑफ लोकल गवर्नेंस अब यह राजकोट गुजरात के अंदर यहां पे इनॉगरेशन किया गया हमारे जो कैग हैं भारत के गिरीश चंद्र मुरमू जी के द्वारा अब ये पहला एक ऐसा इनिशिएटिव होगा जिसके माध्यम से ग्लोबल स्टैंडर्ड बन जाएगा लोकल बॉडीज के लिए कि उनको कैसे ऑल्ट करना है प्लस एट द सेम टाइम इसी को ही एज अ मेकर एंड ऑडिटर्स भी यूज करेंगे सब अपनी बेस्ट प्रैक्टिसेस
को यहां पे शेयर करने की कोशिश करेंगे तो एक तरह से ना लोकल गवर्नमेंट ऑडिटर्स की इंडिपेंडेंस और बेहतर हो पाएगी एंड प्रॉपर मैकेनिज्म बन पाएगा जिसके माध्यम से फाइनेंशियल परफॉर्मेंस इंप्रूव होगी एंड लोगों के पास हम जो सर्विस डिलीवरी करते हैं वो भी बेहतर हो पाएगा बाकी ये सारी चीजें जो मैंने आपको बताई ये सभी आईसीएल इसके अंदर हमारी मदद कर देगा अब आते हैं नए टॉपिक के ऊपर जो बात करता है कि क्या गवर्नमेंट जॉब में आप आरएसएस से एफीलिएशन के बाद काम कर सकते हैं या नहीं तो डीओपीटी ने एक ऑर्डर जारी
किया है डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग ने कि भाई कोई भी गवर्नमेंट एंप्लॉई आरएसएस राष्ट्रीय सम सेवक संघ के एक्टिविटीज में पार्टिसिपेट नहीं कर सकता यह उन्होंने इसके बारे में नया यह सर्कुलर जारी किया है एक जजमेंट भी बताई थी जहां जो सुप्रीम कोर्ट ने बोला भी था कि आप किसी को डिनायर सकते एंप्लॉयमेंट बेस्ड ऑन देर पास्ट पॉलिटिकल एफिनिटीज पहले आपने क्या किया आप कोई आरएसएस के मेंबर है या कम्युनिस्ट पार्टी के मेंबर हैं उसके हिसाब से आपको जो आपके एंप्लॉयमेंट है वो नहीं छीनी जा सकती लेकिन जब आप उस अब जो ये जो जो
गवर्नमेंट ने जो किया है यह थोड़ा अलग है सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जो भी पहली की एफीलिएशन है उसके हिसाब से आप किसी को डिनायर सकते एंप्लॉयमेंट लेकिन वो किस आर्टिकल के अंदर कवर होता है 14 और 16 यहां पर डीओपीटी का कहना है कि जब आप सर्विस में आ चुके हो उसके बाद आप शाखा की एक्टिविटी आरएसएस की एक्टिविटी में भाग नहीं ले सकते उसके ऊपर रोक लगाने की बात की गई जो अभी तक बाय लीगल प्रोसीजर सिस्टम अवेलेबल है नेक्स्ट दोस्तों अपने टॉपिक की तरफ बढ़ते हैं इज टू हॉल्स इन राष्ट्रपति
भवन गेट नेम्स दरअसल में आप यहां पर नोटिस करोगे कि हमारा जो हमारे जो प्रेसिडेंट हैं उनके द्वारा यहां पर दो इंपॉर्टेंट हॉल्स का रिनेमिंग करी गई है एक नाम था आप नोटिस करोगे पहले दरबार हाल उसको नाम दे दिया गया है गणतंत्र मंडप एंड उसी तरह से अशोक हॉल को नाम दे दिया गया है अशोक मंडप के नाम से अब आप पूछेंगे सर ये नाम क्यों बदला गया देखो यार जब हम बात करते हैं दरबार की दरबार से हमें ऐसा नहीं लगता कि कोई राजा का दरबार चल रहा है है ना दरबार वर्ड हम
तभी यूज करते हैं तो बिल्कुल एक्चुअल में पहले हम बात करें तो दरबार को इसीलिए रेफर किया जाता था कि या तो भारतीय रूलर या कोई ब्रिटिश रूलर की यहां पर बात करी जा रही है पर अब तो ऐसा नहीं है है ना हम तो गणतंत्र में रहते हैं एक तरह से भारत तो एक रिपब्लिक है तो हमने यहां पे ये सोचा यार कि ये दरबार वर्ड सही नहीं है तो हमने यहां पर इसका नाम रख दिया गणतंत्र मंडप ठीक है तो जो हमारे डेमोक्रेसी की बात होती है उसको यहां पे ये रिफ्लेक्ट करता है
उसी तरह से अगर मैं बात करूं अशोक हॉल की तो दरअसल में ना आप शोक वर्ड जानते होंगे शोक का मतलब होता है दुख और जब मैंने अ लगा दिया आगे तो मतलब कोई चीज दुख के बिना है बिना कोई दुख के है ना और हमारे यहां तो देखो जो एंपरर अशोका है उनकी भी बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंस है तो दरअसल में अशोक वर्ड उसी चीज को डिनोट करता है बाकी आप नोटिस करो कि नेशनल एंबलम जो हमारा है वो अशोक लायन कैपिटल को यहां पे फीचर करता है और अपने आप में अशोक ट्री भी बहुत
ज्यादा इंपॉर्टेंट बन जाता है तो क्योंकि हमारी लाइफ के अंदर हमारी ट्रेडीशंस के अंदर अशोक वर्ड के अपने पे बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंस है प्लस एट द सेम टाइम हम चाहते थे कि एक तरह की लैंग्वेज के अंदर यूनिफॉर्म हो जहां पर हम अपने ट्रेडीशन को भी दिखाएं एंड मॉडर्निटी को भी दिखाएं तो इसी वजह से हमने यहां पे अशोक हॉल यहां पे इसका नाम रख दिया गया है अशोक हॉल को नाम बदल के अशोक मंडप यहां पे रख दिया गया है तो ये चीजें आपको यहां पे पता होनी चाहिए नेक्स्ट दोस्तों एक्चुअल में ना एक
छोटी सी चीज आपको बता दूं जैसे ना आपके ये जो दरबार हाल हुआ करता था बेसिकली जिसको अब गणतंत्र मंडप बोल दिया गया है यहां पर ना आपके बहुत सारे जो नेशनल अवार्ड्स वगैरह होते थे वो यहां पर दिए जाते थे ठीक है ना तो यह बात आपको ध्यान में रखनी है प्राइवेट मेंबर बिल के बारे में दरअसल में एक प्राइवेट मेंबर बिल यहां पर इंट्रोड्यूस किया गया है राज्यसभा के अंदर राज्यसभा के एक एमपी के द्वारा दरअसल में एक्चुअल में होता क्या है ना मैं आपको पहले ना दो यहीं से आपको मैं सारा चीज
समझा दूंगा एक होता है प्राइवेट मेंबर बिल एक होता है आपका पब्लिक बिल अगर तो मान लो सरकार का कोई मिनिस्टर यहां पर बिल लेकर आता है तो उसको हम पब्लिक बिल बोलते हैं मिनिस्टर के अलावा कोई भी और मेंबर यहां पर पार्लियामेंट का बिल लेकर आए उसको यहां पर हम बोलते हैं प्राइवेट मेंबर अब ध्यान में रखना ऐसा भी हो सकता है कि जो मेंबर हो वो हो सकता है अपोजिशन से बिलोंग करे या इवन आपकी रूलिंग पार्टी का भी हो सकता है समझ रहे हो जैसे मान लो कि अभी एनडीए की सरकार है
ठीक है ना पर सारे लोग तो मिनिस्टर्स नहीं है ना नहीं है ना तो जो भी आपके मान लो कोई बीजेपी का एमपी ही है और अगर वो मिनिस्टर नहीं है अगर वो कोई अपना बिल लेकर आए तो दैट विल आल्सो बी कॉल्ड एज प्राइवेट मेंबर बिल तो एनी वन अदर देन द मिनिस्टर जो यहां पर इस तरह बिल लेकर आ रहा है उसको हम प्राइवेट मेंबर बिल बोल देते हैं यह दोनों हाउस में इंट्रोड्यूस हो सकता है जस्ट लाइक आपका पब्लिक बिल अब देखो जो पब्लिक बिल होता है उसके पास होने के चांसेस ज्यादा
होते हैं उसका कारण यही है कि आप समझो ना क्योंकि सरकार है तो लोकसभा के अंदर तो स्पेशली उनकी मेजॉरिटी है ही है तो वहां पर तो नंबर्स के माध्यम से पास हो जाना चाहिए राइट और राज्यसभा में भी कुछ ना कुछ करके मतलब अगर उनके नंबर्स होंगे तो डेफिनेटली वो चीज हो जाएगी ऑन द अदर हैंड अगर मैं बात करता हूं ना यहां पर प्राइवेट मेंबर बिल की तो इसके पास होने के चांसेस बहुत कम होते हैं इसका कारण यही है कि देखो अपोजिशन ने यहां तो लाया होगा और अगर रूलिंग पार्टी का कोई
एमपी लाता तो वो आपकी सरकार के माध्यम से ले आता तो नॉर्मली रूलिंग पार्टी के एमपीज तो बहुत ही कम लेकर आते हैं तो इस वजह से अगर अपोजिशन लेकर आ रही है इस चीज को तो बहुत ही कम चांस होंगे उसके पास होने के अगर मान लो बिल रिजेक्ट हो गया तो प्राइवेट मेंबर बिल रिजेक्ट हो रहा है कोई बड़ी बात नहीं है तो सरकार की पोजीशन प क्यों ये इफेक्ट होगा पर अगर मान लो पब्लिक बिल रिजेक्ट होता है ना इसका मतलब ये है कि भाई लोकसभा के अंदर कुछ ना कुछ तो गड़बड़
है है ना एंड हो सकता है फ्यूचर में फिर सरकार गिर भी सकती है है ना यहां मे लिखा है ऐसा नहीं है कि रेजिग्नेशन हो ही जाएगा वो आपके नो कॉन्फिडेंस मोशन वो एक अलग चीज होती है यहां पर बिल की सिंपली बात हो रही है एट द सेम टाइम इंट्रोडक्शन के लिए जो नोटिस पीरियड होता है तो पब्लिक बिल के लिए सात दिनों का होता है पर आपके प्राइवेट मेंबर बिल के लिए एक महीने का नोटिस हमें देखने को मिलता है बिल को ड्राफ्ट करते समय ना पब्लिक बिल के अंदर जो कंसर्न डिपार्टमेंट
है वो लॉ डिपार्टमेंट के साथ भी कंसल्ट करता है पर प्राइवेट मेंबर के बिल के अंदर यह सब नहीं होता जो बंदा यहां पे बिल ला रहा है ना वही सारा का सारा काम यहां पे देखेगा अब ध्यान रखने वाली बात यह है जैसा मैं आपको कह रहा था कि प्राइवेट मेंबर बिल बहुत ही कम पास होता है तो दरअसल में अगर आप नोटिस करोगे पिछली बार जो प्राइवेट मेंबर बिल जो दोनों सदनों के द्वारा पास किया गया था वो था आपका 1970 के अंदर ठीक है एट द सेम टाइम वो बिल कौन सा था
सुप्रीम कोर्ट बिल आपका 1968 का टोटल आज तक 14 प्राइवेट मेंबर बिल्स इस तरह से पास हुए हैं ठीक है जिनमें से पांच इंट्रोड्यूस हुए थे राज्यसभा के अंदर ये उनके कुछ एग्जांपल भी देख सकते हो प्रोसीडिंग ऑफ लेजिसलेच्योर 1964 और आपका इंडियन पीनल कोड बिल 1967 ये कुछ इंपॉर्टेंट बिल्स आपने नोटिस किए होंगे जो प्राइवेट मेंबर्स बिल्स के द्वारा बने इन दी एंड एक एक्ट की तरह हमारे सामने आए हैं अगला टॉपिक हमारा है लोक अदालत के बारे में ठीक है हालांकि थोड़ा स्टेटिक टॉपिक आपका ज्यादा रहेगा क्योंकि ये पॉलिटी में आप पढ़ते भी
हो जब मैं बात करता हूं लोक अदालत की तो दरअसल में सुप्रीम कोर्ट ने ना एक हफ्ते का यहां पे स्पेशल लोक अदालत ड्राइव यहां पे स्टार्ट करी है ताकि जो भी डिस्प्यूट्स है बहुत लंबे पेंडिंग है उनको यहां पर टैकल किया जा पाए अब एक्चुअल में आप जानते हो लोक अदालत जैसा नाम ही मेंशन है ना ये एक्चुअल में गांधियन प्रिंसिपल्स के ऊपर बेस्ड है एंड टज अ मैकेनिज्म ऑफ एडीआर इट इज अ कंपोनेंट ऑफ एडीआर अल्टरनेट डिस्प्यूट रेजोल्यूशन जिसमें आपके बहुत सारे आपका मीडिएट हो गया कंसल हो गया वो सब चीजें आ जाती
हैं अब एक्चुअल में आपको थोड़ा सा एक्सप्लेन करने की कोशिश करता हूं पहली बार इंडिया के अंदर जो लोक अदालत थी वो 1982 जूनागढ़ गुजरात के अंदर यहां पे पहली बार हेल्ड करी गई इंपॉर्टेंट बात आपको ध्यान में रखनी है कि 1987 के अंदर एक एक्ट आता है लीगल सर्विस अथॉरिटी एक्ट ऑफ 1987 जिसने लोक अदालत को स्टैचूट स्टेटस दिया लोक अदालत को जो चेयर किया जाता है वो अक्सर आपके जुडिशियस ऑफिसर के द्वारा किया जाता है चेयर या तो वो सिटिंग चेयर हो सकते हैं सिटिंग जुडिशियस हो सकते हैं या रिटायर्ड जुडिशियस ऑफिसर भी
हो सकते हैं इनके अलावा दो जनरली और मेंबर्स रहते हैं एक लॉयर और एक सोशल वर्कर दिस इज जनरली ठीक है कुछ चेंजेज भी हमें कई बार देखने को मिलते हैं बट नॉर्मली यह हमें कंपोजीशन देखने को मिल जाएगा लोक अदालत का अवार्ड एक सिविल कोड डिग्री की तरह होता है ठीक है ना ना एक्चुअल में इंपोर्टेंट बात ये है कि जो आपके जैसे आपके जो पहले जैसे आपका सिविल प्रोसीजर हो गया इंडियन एविडेंस एक्ट हो गया उनसे यहां पे बाउंड नहीं होते ये वर्क करते हैं एज पर प्रिंसिपल्स ऑफ नेचुरल जस्टिस दिस इज वेरी
वेरी इंपोर्टेंट थिंग प्लस कोई लीगल रिप्रेजेंटेशन होने की कोई जरूरत नहीं है कोई फीस वगैरह यहां पे नहीं देनी ठीक है तो एक तरह से ना बहुत आसान लगता है अदर वाइज एक इंसान अगर कोर्ट कचहरी जाने का सोचे तो बहुत सारे खर्चे बहुत सारे इश्यूज उसको फेस हो सकते हैं बट यहां पर लोक अदालत में वो सब चीजें यहां पे नहीं देखने को मिलती बाकी इनफॉर्मली डिसीजंस करे जाते हैं एंड जो डिसीजन लिया जाता है वो पार्टीज के ऊपर बाइंडिंग होता है एंड उसके ऊपर कोई अपील का प्रावधान नहीं होता बाकी जैसे मैंने कहा
था सिविल कोड्स की इनके पास पावर होती है कि इसको समन वगैरह यहां पे किया जा सकता है एज पर कोड ऑफ प्रोसीजर सिविल प्रोसीजर 1908 राइट तो डेफिनेटली इट इज कंसीडर्ड एज अ सिविल कोर्ट ये चीजें हमने डिस्कस कर ली बात करें कितने तरह की हमें पास लोग अदालत होती है तो तीन मेजर तरह की हो गया एक हो गया आपका नेशनल लॉक अदालत एक होता है आपका स्टेट लॉक अदालत और एक होते हैं आपके परमानेंट लोक अदालत थोड़ा सा मैं आपको बताता हूं नेशनल लोक अदालत तो आप समझ गए होंगे कि नेशन वाइड
एक कोई दिन चूज किया जाता है उस दिन पूरे इंडिया भर में आपको ये देखने को मिल जाएंगी तो हर महीने नॉर्मली ये किसी स्पेसिफिक सब्जेक्ट के ऊपर यहां पे कंडक्ट होती है बात करें स्टेट लोक अदालत की इनको रेगुलर लोक अदालत भी बोलते हैं इनको आप डिवाइड कर सकते हो कंटीन्यूअस लोक अदालत जो कहीं ना कहीं कंटीन्यूअसली बैठती है किसी सर्टेन पीरियड के लिए डेली लोक अदालत आपकी रोज होती है उसके अलावा मोबाइल लोक अदालत ये वैन के माध्यम से कुछ गांव वगैरह में भी जाते रहते हैं हैं केसेस को हैंडल करने एक होती
है मेगा लोक अदालत जो कि पूरे स्टेट कोर्ट्स के अंदर एक सिंगल डे के ऊपर कंड करी जाती है उसके अलावा अगर मैं बात करूं परमानेंट लोक अदालत की जिसको पब्लिक यूटिलिटी सर्विस भी बोलते हैं ये दरअसल में ना आपकी अ इसके अंदर अगर मैं बात करूं परमानेंट लोक अदालत के अंदर तो यहां पर आपका कोई भी मुद्दा हो जस जिसकी जो वैल्यू है आज के समय 1 करोड़ तक की हो उसको यहां पर ये हैंडल कर सकते हैं ये यहां पर नॉन कंपाउंडेबल क्रिमिनल फेंसेस को ऊपर जूरिस क्शन नहीं होती नॉन कंपाउंडेबल वो वाले
ऑफेंसेस होते हैं जैसे मर्डर हो गया रेप हो गया राइट इनके अंदर अगर सेटलमेंट कर भी ले ना तब भी केस चलता रहता है तो वो चीजें को यहां पे बोलते हैं प्लस एट द सेम टाइम ठीक है ना अगर मान लो कोई मुद्दा परमानेंट लोकदल में चला गया वहां पर कोई पार्टी उसके ऊपर यहां पे डिशियल इंटरवेंशन नहीं सीख कर सकती इंपॉर्टेंट बात ये है कि जो पब्लिक सर्विस वाली चीजें होती है ना पब्लिक लिटी वाली वो यहां कवर होती है जैसे फॉर एग्जांपल ट्रांसपोर्ट हो गया टेलीफोन सर्विस हो गया इस तरह के मुद्दे
यहां पे कवर होते हैं ठीक है ना तो ठीक है अगर सेटलमेंट के ऊपर नहीं पहुंच पाते तो उस केस में परमानेंट लोकरा तो अकॉर्डिंग अपने आप से डिसाइड कर देगा देखो कोशिश एक्चुअल में यही होती है कि आपस में बातचीत करकर सही मसले तक सही सोल्यूशन तक यहां पे पहुंचा पाए पर अगर वो सब नहीं हो पाता तो तो देखो फैसला लिया ही जाता है ठीक है बाकी देखो 1987 वाला जो एक्ट था इसको अमेंड किया गया 2002 के अंदर ताकि ये जो परमानेंट लोक दलत है या पब्लिक यूटिलिटी सर्विस है इसको यहां पर
हम यहां पर एस्टेब्लिश कर पाए यहां पर भी आपको एक चेयरमैन हो गया ठीक है ना जो कि डिस्ट्रिक्ट जज होने चाहिए या फिर एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज रहे होने चाहिए ठीक है ना या इस तरह से दो और मेंबर्स हमें देखने को मिलते हैं जिनका कि काफी एक्सपीरियंस होता है पब्लिक यूटिलिटी सर्विस के अंदर तो यह पूरा मुद्दा हमने लोक दलकर में अच्छे से डिस्कस कर लिया कांसिल के बारे में देखो यहां पर कह रहा है कि जो स्टेट की लेजिसलेटिव काउंसिल होती है उसके साइज के बारे में बात करी गई है पहली बात आप
यह समझो देखो जब मैं बात करता हूं ना संविधान की कांस्टिट्यूशन की तो संविधान में एक चीज लिखी गई है क्या लिखा गया संविधान के अंदर संविधान के अंदर लिखा गया है कि जो मतलब आर्टिकल 171 के अंदर ऐसा लिखा गया है कि जो आपकी लेजिसलेट काउंसिल होगा ना उसकी मिनिमम स्ट्रेंथ तो 40 होगी 40 से कम नहीं हो सकती मिनिमम स्ट्रेंथ कितनी होगी 40 एंड मैक्सिमम कितनी हो सकती है जो भी वहां की लेजिसलेटिव असेंबली होती है ना उसका 1/3 ये इसका लिमिट बताई गई है कि मिनिमम स्ट्रेंथ होगी उसकी 40 एंड मैक्सिमम हो
सकती है 1/3 ऑफ द लेजिसलेटिव असेंबली ऑफ द स्टेट ठीक है ये कहां लिखा गया है ये संविधान के अंदर लिखा गया है पर होगा कितना क्या उसमें 45 होंगे 50 होंगे 55 होंगे 60 होंगे जो एग्जैक्ट नंबर होगा वो कौन डिटरमिन करेगा सर वो डिटरमिन किया जाता है पार्लियामेंट के द्वारा तो यह बात आपको बहुत ध्यान से पढ़नी है कि यह चीज पूछी गई है या एग्जैक्ट नंबर पूछा गया है तो अगर एग्जैक्ट नंबर की बात करें तो पार्लियामेंट डिटरमिन करता है तो जो पहली बात कह रहा था तो गलत हो गया ठीक है
क्योंकि हाफ से ज्यादा तो हो नहीं सकता ये मैंने बताया ना मैक्सिमम लिमिट कितनी है 1 / ऑफ लेजिसलेटिव फमली तो दिस इज इनकरेक्ट दूसरा कह रहा है कि गवर्नर ऑफ द स्टेट जो होते हैं वो नॉमिनेट करते हैं लेजिसलेटिव काउंसिल के चेयर पर्सन को नहीं लेजिसलेटिव काउंसिल के जो मेंबर होते हैं वो कैसे सिलेक्ट किए जाते हैं वो तो इनडायरेक्टली इलेक्ट कर लिए जाते हैं ठीक है फिर जो भी मेंबर्स यहां पे इनडायरेक्टली इलेक्ट हुए वो आपस में क्या करते हैं आपस में डिसाइड कर लेते हैं आपस में इलेक्ट कर लेते हैं कौन यहां
पे उसको चेयरमैन होगा लेजिसलेटिव काउंसिल का गवर्नर का यहां पे कोई रोल नहीं होता तो ऑप्शन नंबर डी नीदर वन नॉट टू विल बी द करेक्ट आंसर दूसरा आपके होमवर्क मैंने स्पीकर के बारे में दिया था देखो पहला स्टेटमेंट कह रहा है कि स्पीकर जो होते हैं लेटी असेंबली के अगर वो मेंबर हट जाए मतलब अगर उनकी मेंबरशिप खत्म हो जाए या कुछ भी मतलब इफ ही सीजस टू बी मेंबर बेसिकली अगर वो मेंबर ना रहे तो उस केस में उनका स्पीकर वाली पोजीशन भी खाली हो जाएगी आंसर इज यस जैसे फॉर एग्जांपल मान लो
मेंबर ना रहे या फिर मान लो उन्होंने रिजाइन कर दिया या उनको हटा दिया गया तो उस केस में क्या रहेंगे वो मेंबर नहीं रहेंगे ना तो बिल्कुल तो वो स्पीकर भी नहीं रहेंगे ठीक है दूसरा स्टेटमेंट कह रहा है कि जब भी लेजिसलेटिव असेंबली डिसोल्व होती है तब स्पीकर को उसी समय यहां पे इमीडिएट अपने ऑफिस को वोकेट करना पड़ता है देखो ये जो वर्ड है ना यहां पे इमीडिएट ये स्टेटमेंट को गलत बना देता है मैं आपको एग्जांपल बताता हूं जैसे आपने चलो ये तो लेज असेंबली की बात कर ली है पर लेट्स
से मैं लोकसभा की बात करता हूं जैसे ओम बरला जी आप जानते हो पिछली बार हमारे स्पीकर थे पिछली लोकसभा के अंदर अब जब लोकसभा खत्म हुई तो क्या ओम विरला जी भी स्पीकर रहना बंद करके नहीं वो स्पीकर थे कब तक जब तक नई लोकसभा नहीं बनी आप जानते हो प्रोटेम स्पीकर बने थे बीच में राइट तो जब तक नई लोकसभा का पहला मीटिंग नहीं हो जाता जस्ट बिफोर दैट तक वो यहां पर स्पीकर बने रहते हैं तो ये जो इमीडिएट वाली चीज थी ना ये गलत हो जाती है तो इसलिए आपका ऑप्शन नंबर
ए वन ओनली विल बी द करेक्ट आंसर पंचायत की मतलब मेंबर ऑफ पंचायत बनने के लिए मिनिमम एज कितनी होती है तो ये 25 साल नहीं होता ये स्टेटमेंट गलत है ये आपकी 21 इयर्स आपको देखने को मिल जाएगी तो फर्स्ट स्टेटमेंट इज रॉन्ग अगर मैं बात करूं सेकंड स्टेटमेंट की तो सेकंड स्टेटमेंट अपने आप में बिल्कुल सही है एक्चुअल में क्या होता है ना कि अगर मान लो कोई पंचायत है वो अपना पूरा 5 साल का टेनर कंप्लीट नहीं कर पाई मान लो 3 साल के बाद ही वो डिजॉल्ड्रिंग के लिए बनेगी 5 सालों
के लिए नहीं बनेगी तो यानी कि इट इज इट इज कॉन्स्टिट्यूशन पीरियड ये रिमाइंडर मतलब पांच में से जितने बच गए थे कितने बच गए थे 2 साल बच गए थे ना तो सिर्फ दो साल तक काम करेगी तो ये सेकंड स्टेटमेंट बिल्कुल सही है तो ऑप्शन बी टू ओनली विल बी द राइट आंसर दूसरा मैंने आपसे पूछा था ये वाला क्वेश्चन अब यार देखो ऐसे क्वेश्चन देख के ना बहुत सारे बच्चे अक्सर डर जाते हैं यार ये तो क्वेश्चन ही बहुत लंबा लग रहा है है कि नहीं एंड मैं आप लोगों को ना ये
जो चीजें बताता हूं ये आप लोगों के जो सीनियर स्टूडेंट्स हैं उन्होंने मुझे कभी ना कभी बताई है कि यार ये क्वेश्चन सर मेरे से नहीं होते ऐसे वाले है ना तो आप लोग भी थोड़ा सा समझा करो ऐसा नहीं होता कि क्वेश्चन लंबा है तो टफ ही होगा ये थोड़ा सा आप इमेजिन करो ऐसा नहीं होता आपको यहां पे थोड़ा सा चीजें पढ़नी पड़ेंगी ऐसे लंबे क्वेश्चंस भी मे बी हो सकता है लेटर पार्ट में अटेंप्ट करो बट कई बार आसान क्वेश्चन भी होते हैं फॉर एग्जांपल देखो या जैसे फॉर एग्जांपल इसमें सेकंड स्टेटमेंट
की बात करूं यहां पर ये कह रहा है कि संविधान के अंदर जो आपका इनकैपेसिटी एंड प्रूवन मिसबिहेवियर है इसको यहां पे डिफाइन किया गया है और इसकी डिटेल्स दी गई है देखो ऐसे क्वेश्चन यूपीएससी ने कई बार पूछे हुए हैं कि य कि आपका अ संविधान के अंदर ये डिफाइंड है ऑफिस ऑफ प्रॉफिट डिफाइंड है अनटचेबिलिटी डिफाइंड है नहीं ये सब चीजें नहीं डिफाइंड है इवन आपका इनकैपेसिटी एंड प्रूवन मिसबिहेवियर भी आप पे डिफाइंड नहीं है तो ये वाला थोड़ा सा ना आपका अगर आपने पीवा क अच्छे से करे होते तो आपको पता लगता
है यार ये सब चीजें डिफाइंड नहीं है कांस्टीट्यूशन के अंदर तो सेकंड स्टेटमेंट तो गलत हो जाती है इसमें कोई डाउट होना ही नहीं चाहिए उसके अलावा अगर आप स्टेटमेंट फोर की बात करो तो ये भी आप कर सकते थे यहां पर आप जानते हो कि जज का अगर इंपीच मेंट होता है तो बिल्कुल उसका प्रोसेस एकदम यही होता है कि क्या होता है कि दोनों के दोनों जो हाउसेस ऑफ पार्लियामेंट है वहां पर मोशन बैकअप होना चाहिए कैसे टोटल मेंबर शिप ऑफ हाउस एंड नॉट लेस दन 23 ऑफ टोटल मेंबर ऑफ़ दैट हाउस प्रेजिडेंट
एंड वोटिंग तो ये स्टेटमेंट बिल्कुल ठीक है तो आप ना एटलीस्ट इतना जरूर कर सकते थे कि आप ऑप्शन सी एंड ऑप्शन डी तक पहुंच गए इतना तो होना चाहिए था बाकी मैं थोड़ा बहुत समझ सकता हूं कि किसी को शायद फर्स्ट स्टेटमेंट ना पता हो या थर्ड ना पता हो आई कैन अग्री टू दिस बट सेकंड और फोर्थ स्टेटमेंट तो आप पहुंच सकते थे बट बाकी मैं बता देता हूं अगर मैं बात करूं देखो ये बात बिल्कुल स्टेटमेंट ठीक है कि जो इंपीच मेंट का जजेस का प्रोसेस है वो यहां पे दिया गया है
जजेस इंक्वायरी एक्ट ये बात अपने आप में करेक्ट है एंड ये जो पहली स्टेटमेंट यहां पे कह रहा है ना कि मान लो कि जज सुप्रीम कोर्ट के जज को इंपीच करना है तो वो स्पीकर के पास जाएगा बिल्कुल ठीक बात है अब ध्यान रखने वाली बात यह है कि स्पीकर इस मोशन को एक्सेप्ट करें या ना करें ये स्पीकर के ऊपर होता है तो ये जो लिखा है कैन नॉट बी रिजेक्टेड यह बात अपने आप में गलत हो जाएगी स्पीकर के ऊपर होता है कि क्या वो उसको एक्सेप्ट करना चाहता है या नहीं करना
चाहता तो इसलिए इसका आंसर बनेगा ऑप्शन नंबर सी थ्री एंड फोर गवर्नर के डिस्क्रीशनरी पावर्स की तो आप जानते होंगे कि आर्टिकल 163 एक ऐसा आर्टिकल है जहां पर डिस्क्रीशनरी पावर्स की यहां पे बात करी गई है इवन आपका जो नबम रेबिया जजमेंट हुआ था ना उसके अंदर भी सुप्रीम कोर्ट ने बोला था कि जो गवर्नर की डिस्क्रीशन पावर्स है अपने आप में वो लिमिटेड हैं जैसे फॉर एग्जांपल जब भी कभी प्रेसिडेंट रूल लगता है आर्टिकल 356 के अंदर तो या तो लगेगा वो कि गवर्नर ने मान लो कोई रिपोर्ट भेजी है तब वो प्रेसिडेंट
के पास जाती है उसके बेसिस के ऊपर लग सकता है या इवन अदर वाइज यहां पर प्रेसिडेंट साहब क्या लगा सकते हैं यहां पर आपका प्रेसिडेंट रूल लगा सकते हैं तो ये वाली जो बात होती है कि रिपोर्ट भेजनी है प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया को कि आर्टिकल 356 के अंदर प्रेसिडेंट रूल लगाएं ये आपकी जो गवर्नर है उनकी डिस्क्रीशनरी पावर है उनकी मर्जी वाली पावर है ठीक है ऑन द अदर हैंड अगर मैं बात करता हूं मिनिस्टर्स को अपॉइंट्स को अपॉइंटमेंट का अधिकार है तो यहां पर ये इसकी डिस्क्रीशनरी पावर बिल्कुल भी नहीं है सेकंड इज
गलत थर्ड स्टेटमेंट की बात करें कि कुछ बिल्स को रिजर्व करना है फॉर द कंसीडरेशन ऑफ प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया डेफिनेटली ये आपके गवर्नर की आपकी डिस्क्रीशन पावर हो जाती है आर्टिकल 200 की हम बात यहां पे कर सकते हैं कि गवर्नर के पास पावर है कि किसी बिल को उनको रिजर्व करना हो चौथा बात करें कि रूल्स ऑफ द कंडक्ट ऑफ द बिज़नेस ऑफ स्टेट गवर्नमेंट ये बात अपने आप में गलत हो जाती है तो आपका आंसर क्या करेक्ट बनेगा ऑप्शन नंबर बी वन एंड थ्री ओनली इज़ द करेक्ट आंसर इसी तरह से मैंने आपको
दूसरा होमवर्क दिया था कि ओरिजिनल जूरिस जिक्स ऑफ सुप्रीम कोर्ट के अंदर क्या-क्या इंक्लूड होता है देखो आप लोगों ने ना आर्टिकल 131 पढ़ा होगा अपने कांस्टिट्यूशन के अंदर वहां पर बात होती है किसकी ओरिजिनल जूरिस इक्स की ओरिजिनल जूरिस जिक्स का अर्थ यही है कि आप डायरेक्टली सुप्रीम कोर्ट को अप्र अप्रोच कर सकते हो है ना तो अगर मैं बात करूं कि कोई मुद्दा है मान लो जहां पर एक साइड आपका गवर्नमेंट ऑफ इंडिया है या फिर सामने वन एंड मोर स्टेट्स है या फिर दो या दो से ज्यादा स्टेट्स के बीच में कोई
ना कोई डिस्प्यूट है ना तो उस केस में आप डायरेक्टली सुप्रीम कोर्ट को प्रोच करोगे तो यहां पे करेक्ट आंसर बनेगा ऑप्शन नंबर सी वन एंड फोर ओनली इज द करेक्ट आंसर भारत 85 मिलियन डॉलर डोनेट करेगा टू मेडिसिन सेंटर इन गुजरात आखिर यह क्या मुद्दा है मैं आपको थोड़ा एक्सप्लेन करता हूं देखो 2000 23 के अगस्त समय की आई थिंक बात थी उस समय पता क्या होता है डब्ल्यू एओ यानी कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन प्लस एट द सेम टाइम हमारी भारत सरकार की जो मिनिस्ट्री है ना आयुष मंत्रालय आयुष आप जानते होंगे आयुर्वेदा योगा
यूनानी सिद्धा होम्योपैथी ठीक है ना यह जो आपका मिनिस्ट्री ऑफ आयुष है इनके द्वारा मिलकर जामनगर गुजरात के अंदर एक सेंटर लांच किया गया जिसका नाम क्या था डब्ल्यू एओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर अब नाम में ही जैसे वर्ड क्या यूज हो गया ट्रेडिशनल मेडिसिन अब ट्रेडिशनल मेडिसिन के अंदर ये सब चीजें आ जाती है जो मैंने आपको बताया आयुर्वेदा बाकी और चीजें जो मैंने आपको एक्सप्लेन करी तो उसका एक तरह से नॉलेज सेंटर की तरह ये काम करता है जीएमटीसी यानी कि ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर अब ये इस तरह का पहला इसका जो ग्लोबल
समिट था इसके रिगार्डिंग कि वो 2023 के अंदर ही हुआ जामनगर गुजरात के अंदर ही एंड आपको ध्यान में यह रखना है कि जीएमटीसी पहला एंड ग्लोबली आउट पोस्टेड सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन ये एक मात्र ही है आपको दुनिया भर में जो देखने को मिलता है अब ये पांच अलग-अलग एरियाज में काम करता है जैसे एक हो गया आपका एविडेंस एंड लर्निंग के रिगार्डिंग कि जो भी आपके ट्रेडिशनल मेडिसिन है उनका हम जो एविडेंस है एंड यूज है उसको मैप करें विद द यूज ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ताकि लोगों के अंदर इसके रिगार्डिंग अवेयरनेस भी बढ़े
लोगों के अंदर एजुकेशनल रिसोर्सेस को हम और डेवलप कर पाएं ये पहला फोकस दूसरा हो गया ट्रेनिंग प्रोग्राम्स ताकि एक तरह से जो ट्रेनिंग वगैरह है वो प्रोवाइड करी जा पाए कैंपस बेस्ड भी हो वहां पर रहने वाले लोगों के लिए भी वेब बेस्ड ट्रेनिंग भी यहां पे प्रोवाइड करी जा पाए इस फील्ड के अंदर इसके साथ ही साथ डेटा एंड एनालिटिक्स हो गया ठीक है किस तरह से डेटा और एनालिटिक्स को हम स्ट्रेंथ करें अलग-अलग तरह के ट्रेडिशनल मेडिसिंस के रिगार्डिंग सर्वेस के ताकि इनमें एविडेंस जो है ना वो और अच्छे से बाहर आ
पाए इसके साथ में अगर हम बात करेंगे तो सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए कैसे हम इसको यूज कर सकते हैं इक्विटी एंड राइट्स के लिए वो इसका फोकस रहता है प्लस इस सेक्टर के अंदर हम कैसे और इनोवेशन बेहतर कर सकते हैं ये सारे फोकस आपके ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर के यहां पर रहते हैं अब हम डिस्कस क्यों कर रहे हैं इस मुद्दे को डिस्कस इसलिए कर रहे हैं क्योंकि भारत ने ऐसा बोला है कि अगले 10 साल के लिए यानी कि बेसिकली 2022 से 32 वाले जो टाइम के लिए हम यहां पर 85 मिलियन डॉलर
यहां पर डोनेट कर रहे हैं टू डूओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर ताकि जो भी इसके काम हैं वो इसको कर पाए ठीक है ये जो एग्रीमेंट साइन हुआ था वो आपका डब्ल्यूएचओ हेड क्वार्टर जेनेवा में यहां पे साइन होता हुआ देखने को मिल जाएगा बाकी कोशिश यही है कि एक तरह से अच्छे से इंप्लीमेंट कर पाए फाइनेंशियल टर्म्स वगैरह और यहां पे डिस्कस हुई हैं एक तरह से अच्छे से नॉलेज हब की तरह यहां पे काम कर पाए तो दैट इज ऑल द फोकस ठीक है तो ये मेडिसिन सेंटर के बारे में आपको जानना ज्यादा
जरूरी था न्यूज़ तो चलो इतनी इंपॉर्टेंट नहीं थी इसके अलावा भीना भारत की तरफ से ड आपका मिनिस्ट्री ऑफ आयुष एंड डब्ल्यू एओ इनके बीच में और भी चीजों से कोलबेट होता है जैसे फॉर एग्जांपल अगर मैं बात करूं यहां पर आयुर्वेदा यूनानी सिद्धा सिस्टम्स के अंदर यहां पर अलग से डॉक्यूमेंट यहां पे क्रिएट किए गए हैं प्लस एट द सेम टाइम वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की टर्मिनोलॉजी भी है इन पर्टिकुलर प्रैक्टिस के रिगार्डिंग तो वहां पर कोलैबोरेशन देखने को मिल जाता है इसके अलावा अगर मैं बात करूं यहां पर डब्ल्यू एओ ने जो ट्रेडिशनल मेडिसिन
चैप्टर ऑफ इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीज 11 उसके अंदर सेकंड मॉड्यूल को भी ऐड किया है वो भी आपकी आयुष मंत्रालय के साथ लिंक करता है इसके साथ ही साथ एम योगा जैसी एप्स को लॉन्च किया गया है एंड उसके साथ ही जब मैं बात करता हूं ना इंटरनेशनल फार्माकोपिया ऑफ हर्बल मेडिसिन इसका अर्थ यह है कि एक तरह की पब्लिकेशन बेसिकली है जिसके अंदर अलग-अलग ड्रग्स के बारे में उनके इफेक्ट्स क्या होते हैं उनको कैसे यूज करना है वो सारा का सारा डब्ल्यू एओ के द्वारा क्रिएट किया गया है एंड ये भी आपके आयुष मंत्रालय
के साथ लिंक कर जाता है तो इस तरह से बहुत सारे एरियाज के अंदर आयुष मंत्रालय एंड डब्ल्यू एओ आपस में कोलैबोरेट करते हैं अगला दोस्तों हमारा टॉपिक है प्रधानमंत्री आवास योजना अर्बन 2.0 के बारे में पहला जैसे वर्ड आ गया अर्बन तो आप समझ गए होंगे कि यहां पे हमारी मिनिस्ट्री कौन सी है मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स के बारे में नाम में ही है ना आवास वर्ड आ गया अर्बन वर्ड आ गया तो हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स तो यहां पर फोकस यह है कि किस तरह से हम फाइनेंशियल असिस्टेंसिया या तो कंस्ट्रक्ट
कर पाएं परचेज कर पाएं या रेंट कर पाएं हाउसेस को एट द अफोर्डेबल कॉस्ट ऐसा यहां पर इस स्कीम के माध्यम से हम 1 करोड़ अर्बन परिवारों को मदद करना चाहते हैं अब इस चीज के अंदर आप नोटिस करोगे जो इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन है वो आ जाएंगे आपके लो इनकम ग्रुप्स आ जाएंगे एंड आपके मिडिल इनकम ग्रुप्स आ जाएंगे जिनके पास कोई पक्का घर नहीं है एनीव्हेयर इन द कंट्री वो सारे के सारे यहां पर एलिजिबल देखने को मिल जाएंगे ठीक है ना अर्बन एरियाज के लिए है मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स के द्वारा
ये स्कीम रन करी जा रही है ताकि पक्का हाउस ऑल वेदर पक्का हाउस यहां पे एलिजिबल बेनिफिशियरी को प्रोवाइड किए जा पाए 1 करोड़ 18 लाख हाउसेस को भी सैंक्शन किया गया है और साथ साथ 85 लाख जो हाउसेस है वो लगभग ऑलरेडी कंस्ट्रक्ट और डिलीवर भी कर दिए जा चुके हैं जितने भी देश भर में स्टैचूट टाउंस है वो सारे के सारे यहां पे कवर होते हैं एज पर सेंसस 2011 एंड इवन जो और चीजें है वो भी यहां पे कवर्ड है फाइनेंशियल सस्टेंस की बात करें तो आप नोटिस कर पाओगे कि स्टेट्स और
यूटी के तरफ से यहां पर असिस्टेंसिया रही है प्लस एट द सेम टाइम यहां पर सरकार की तरफ से 230000 करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है जिसकी वजह से टोटल इन्वेस्टमेंट अगर हम बात करें तो 10 लाख करोड़ का कंट्रीब्यूशन हमें देखने को मिल जाएगा तो यह पॉइंट्स थे प्रधानमंत्री आवास योजना अर्बन 2.0 के रिगार्डिंग रिसेंटली यूनियन कैबिनेट के द्वारा इसको अप्रूव किया गया है तो यह चीज हमें पता होनी चाहिए अगला टॉपिक है डिस्कस कर लेते हैं दैट इज रिगार्डिंग जेपीसी यानी कि जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी अब आप लोग जानते हो कि पिछले दिनों
के के अंदर ही हिंडन बर्ग रिपोर्ट का एक अपडेटेड वर्जन देखने को मिला जहां पर उन्होंने सेबी चेयर पर्सन के ऊपर यहां पर कुछ एलिगेशंस लगाए अब यहां पर जो अपोजिशन पार्टीज हैं उन्होंने यहां पे ये बोला है कि हम चाहते हैं कि जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी इसकी जांच करें और अगर जांच नहीं करे आई जाएगी सरकार के द्वारा इसके द्वारा तो कहीं ना कहीं यहां पर देश भर के अंदर प्रोटेस्ट हम देखने को मिल सकते हैं अब क्या मुद्दा है ये जीपीसी होती क्या है देखो जैसा कि है ना जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी अब जॉइंट वर्ड
का मतलब क्या है यहां पर जो लोग होंगे वो लोकसभा के मेंबर्स भी होंगे आपके राज्यसभा के मेंबर्स भी होंगे एंड यहां पर जो मेंबर्स आएंगे वो आपके सरकार की तरफ से भी होंगे प्लस जो सरकार के नहीं है यानी कि आपका अपोजिशन हो गया और बाकी जो पार्टीज हो गया वहां से भी लोग यहां पे साथ में आएंगे वो यहां पर पूरे इस मुद्दे के ऊपर चर्चा करेंगे उसके गार्डिंग इन्वेस्टिगेशन करेंगे एंड जो भी उनका फैसला होगा वो फिर आगे वो पार्लियामेंट को बताएंगे कि हमने ये जांच पड़ताल करी उसमें ये निकल के आया
तो होता क्या है ये एक एड हॉक बॉडी होती है एड हॉक मतलब एक स्पेसिफिक पर्पस के लिए बनाई हुई बॉडी होती है तो उस पर्टिकुलर पर्पस और के लिए वो काम करती है दोनों सदनों के यहां पर मेंबर्स होते हैं रूलिंग अपोजिशन के भी मेंबर्स आपको देखने को मिल जाएंगे कितने मेंबर्स होते हैं इसके अंदर यह फिक्स नहीं होता समझ गए देयर इज नो फिक्स नंबर ऑफ मेंबर्स इन जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी जब एक बार इनका काम कंप्लीट हो जाता है तो इसको डिसोल्व कर दिया जाता है एक मोशन के द्वारा इसको सेट अप किया
जाता है जब मान लो कोई भी पार्लियामेंट का सदन है वो मोशन को पास करे एंड दूसरा सदन उसके ऊपर एग्री कर जाए तो जेपीसी फॉर्म हो जाएगी इसके अलावा अगर हम बात करें जो भी इसकी रिकमेंडेशन होंगी वो सिर्फ एडवाइजरी होंगी एंड सरकार के ऊपर वो बाइंडिंग नहीं होती है मैंडेट यही होता है कि जो मोशन से उसको कांस्टीट्यूट किया गया जैसे अगर मान लो अब जेपीसी बनाई जाती है तो जेपीसी का पर्पस यही होगा हिंडन बर्ग रिसर्च के ऊपर हिंडन बर्ग रिपोर्ट के ऊपर एक तरह से देखना क्या वो सही थी क्या वो
गलत थी इंपॉर्टेंट बात ये रहती है कि जेपीसी को चेयर कौन करता है जेपीसी को चेयर किया जाता है एक ऐसे मेंबर के द्वारा जिसको के अंदर क्या ऐसा हुआ है कि कोई जेपीसी बनी है हां जी बिल्कुल एक दो बार नहीं कई बार आप लोगों ने हर्षद मेहता स्कैम आपने सुना होगा जब ये स्कैम हुआ था तब जेपीसी बनी उसके बाद आपने केतन पारे एक जो स्कैम हुआ था तब जेपीसी हमें देखने को मिली इवन आपके जब एनआरसी आया था ना 2016 के अंदर नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन उसके ऊपर जेपीसी बनी बो फो स्कैंडल
समय के ऊपर जेपीसी बनी तो इस तरह से जब भी कुछ ऐसा बड़ा मुद्दा आता है तो जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी की एक डिमांड उठती है कई बार इसको मान लिया जाता है कई बार नहीं माना जाता बट इस तरह से डिमांड तो डेफिनेटली उठती ही है अगला दोस्तों हमारा टॉपिक है वीसी के बारे में वर्चुअल कोर्ट्स के बारे में एक्चुअल में क्या हुआ ना अभी केरला हाई कोर्ट के द्वारा एक नया इनिशिएटिव यहां पे रन किया जा रहा है 24 * 7 ओन कोर्ट ओन का मतलब है ओपन एंड नेटवर्क कोट तो 247 तो आप
मान गए होगे कि 24 घंटे सातो दिन ये चीज चलेगी अब हो क्या रहा है ना ये एक पायलट प्रोजेक्ट है अभी के लिए जहां पर सारे जो कोड प्रोसेसेस होंगे वो पूरी तरह से ऑनलाइन होंगे पूरी तरह मतलब पूरी तरह एक्सक्लूसिवली ऑनलाइन होंगे कुछ भी ऑफलाइन यहां पे नहीं होगा होगा तो जैसे फॉर एग्जांपल अगर मान लो केस किसी को फाइल करना है रजिस्टर करना है वो भी ऑनलाइन एडमिशन ऑनलाइन अपीयरेंस सारी ऑनलाइन सुनवाई और ऑर्डर वगैरह जजमेंट देना ये सारी चीजें ऑनलाइन होंगी तो अभी के लिए पायलट प्रोजेक्ट है अगर ये सक्सेसफुल रहता
है इसको फिर बाकी और जगह पे भी किया जा सकता है तो यहां पर सारी चीजें हो गया ट्रांसमिशन इंफॉर्मेशन वगैरह भेजना वो भी सब चीजें ऑनलाइन होंगी प्लस एट द सेम टाइम अगर हम बात करें समन वगैरह भेजने होंगे वो भी सब चीजें ऑनलाइन ही होंगी इसके अलावा ना यहां पर ई सेवा केंद्र की एक बात करी गई है कि मान लो अगर इंटरनेट वगैरह अवेलेबल नहीं है तो जो भी आसपास के आपके एरियाज के अंदर आपके कोर्ट कॉम्प्लेक्टेड सेंटर होंगे उसके माध्यम से इस पोर्टल को एक्सेस किया जा सकता है जो आपका यहां
पे ये चीज बनाई गई है ठीक है तो सारी चीजें यहां पर आपकी इंफॉर्मेशन हो गया स्टेटस वगैरह हो गया वो सब चीजें आप सारी चीजों के बारे में इंफॉर्मेशन यहां पे प्राप्त कर पाओगे तो एक एग्जांपल के तौर के ऊपर कहीं पर आ सकता है या फिर बताया जा सकता है कि किसने ये जो मैं बात कर रहा था 24 * 7 ऑन कॉट हो गया ये किसने स्टार्ट किया है तो केरला हाई कोर्ट के द्वारा यहां पे इनिशिएटिव लॉन्च किया गया है बिल्कुल छोटा सा टॉपिक था अगला दोस्तों हम टॉपिक डिस्कस करेंगे वो
है आपको ऑफेंसेस अंडर एससीएसटी लॉ देखो एक्चुअल में ना एक केस हुआ है बस उस केस का आपको आउटपुट जानना है कि उसके आउटकम में सुप्रीम कोर्ट ने बोला क्या है देखो दरअसल में ना एक आपको यहां पे एक पर्सन देखने को मिलते हैं इनका नाम है सजन शिकारिया ठीक है ये इसको मैं एसएस बोल देता हूं और यहां पर जो अ दूसरे पर्सन है वो केरला के एक एमएलए हैं पीवी श्री जनम इनको मैं पीवी बोल देता हूं ठीक है अब ये जो एसएस पर्सन है ना यह आते हैं मतलब ये नॉन शेड्यूल कास्ट
शेड्यूल ट्राइब से आते हैं यानी कि ये शेड्यूल कास्ट या शेड्यूल ट्राइब के मेंबर नहीं है वेयर एस जब मैं बात करता हूं ये पीवी की ये आपके एससी एसटी कम्युनिटी को बिलंग करते हैं बेसिकली एससी कम्युनिटी को बिलंग करते हैं ठीक है समझ गए अब हमारे पास ना एक एक्ट है 1989 का प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटी अगेंस्ट शेड्यूल कास्ट एंड शेड्यूल ट्राइब्स एक्ट आप लोग जानते होंगे बहुत ही फेमस ये एक्ट आपको देखने को मिल जाएगा ठीक है इसके माध्यम से कोशिश यही होती है कि कोई नॉन एससी या नॉन एसटी पर्सन कोई ऐसी चीज
ना कहे जो कहीं ना कहीं हिस्टोरिकल इंजस्टिस को मतलब उसको अग्री हो पाए कि शेड्यूल कास्ट शेड्यूल ट्राइब के जो लोग हैं उनके अगेंस्ट कोई ऐसे वर्ड नहीं होने चाहिए जो कहीं ना कहीं डायरेक्टली हिस्टोरिकल जो एक तरह से नोशन है ना उसको एंट्रेंच ना करें आर यू गेटिंग माय पॉइंट तो हुआ क्या पिछले दिनों के अंदर ये जो एसएस पर्सन थे ना इन्होंने अपने अब पीवी पर्सन चले गए कोर्ट कि भाई इन्होंने मेरे अगेंस्ट कुछ बोला है इनके अगेंस्ट जो 1989 वाला शेड्यूल कास्ट मतलब प्रिवेंशन ऑफ शेड्यूल कास्ट एंड एट्रोसिटी अगेंस्ट शेड्यूल कास्ट शेड्यूल
टाइप एक्ट जो है ना उसके माध्यम से इनके ऊपर कारवाई करी ग तो सुप्रीम कोर्ट ने बोला नहीं ऐसा नहीं हो सकता इन्होंने आपकी बेइज्जती करी है इन्होंने आपके अगेंस्ट कुछ बोला है इन्होंने शेड्यूल कास्ट या शेड्यूल ट्राइब्स के अगेंस्ट कुछ नहीं बोला आर यू गेटिंग द पॉइंट तो सुप्रीम कोर्ट का यह कहना था कि यह जो आपका 1989 का एक्ट है ना यह तभी एप्लीकेबल होगा जब जो इंसल्ट होगी ना वो डायरेक्टली उस विक्टिम की शेड्यूल कास्ट या शेड्यूल ट्राइब की आइडेंटिटी के अगेंस्ट होगी समझ रहे हो कोई इंसान इस मतलब इस पर्सन को
अगर कोई जाति सूचक वर्ड बोलता कोई ऐसा वर्ड बोलता है जो कहीं ना कहीं शेड्यूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब्स को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है तब इनके ऊपर एक्शन होगा इस एक्ट के अंदर अगर ये सिंपली यह बोल रहा है कि ये पर्सन ठीक नहीं है पर्सन खराब है पर्सन ने करप्शन करा व्हाट एवर तो उस केस में उसके ऊपर शेड्यूल कास्ट वाला ये जो 1989 वाला एक्ट है ये नहीं लगेगा ये एक्ट तभी लगेगा जब जो इंसल्ट है वो डायरेक्टली शेड्यूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब कम्युनिटी के अगेंस्ट करी जाएगी ठीक है तो
क्राइटेरिया यहां पे सुप्रीम कोर्ट ने यहां पे बता दिया है कि इंसल्ट को अगर हमें ऑफेंस कंसीडर करना है ना तो वहां पर क्या होना चाहिए कि कास्ट बेस डिस्क्रिमिनेशन अगर किसी द्वारा करी गई है या फिर जो हम बोलते हैं कि शेड्यूल कास्ट ऐसा है या फिर कुछ अनटचेबिलिटी के अगेंस्ट कोई बोल रहा है या कोई प्योरिटी के अगेंस्ट ऐसे कुछ कांसेप्ट बोल रहा है प्योरिटी और पोलूशन वगैरह अगर कुछ ऐसी चीजें बोली जाती है शेड्यूल का शेड्यूल ट्राइब एक्ट के कम्युनिटी के अगेंस्ट तब ये 1989 वाला जो एक्ट होगा तब इसके अगेंस्ट लगेगा
तब ये चीज आपको यहां प पता होनी चाहिए कि 1989 का जो एक्ट है उसके अंदर आपको सेक्शन देखने को मिल जाते हैं जहां पर इस चीज की बात करी जाती है दिस इज वेरी वेरी इंपोर्टेंट पॉइंट जो आपको यहां पर पता होना चाहिए अगला दोस्तों हम टॉपिक डिस्कस करेंगे कुछ चार चीजों के बारे में आप लोगों ने नोटिस किया होगा पिछले समय के अंदर हमने जो हमारे इंडियन एविडेंस एक्ट है इंडियन पीनल कोड हो गया सीआरपीसी हो गया यह हमने चेंज करकर हमने इसमें नए कानून लेकर आए राइट उन नए कानूनों में कई नई
प्रावधान भी है उसी प्रावधान को इंप्लीमेंट करने के लिए ना यहां पर ये कुछ एप्स यहां पर लंच करी गई है किसने ऐप लांच करी हमारे होम अफेयर्स के जो मिनिस्टर है ना अमित शाह जी उन्होंने यहां पर इन एप्स को लच किया समझते हैं पहली ऐप का नाम क्या है ई साक्ष्य साक्ष्य का मतलब क्या होता है सर साक्ष्य का मतलब होता है एविडेंस एंड जब मैंने वर्ड यूज कर दिया ई ई का मतलब हो गया इलेक्ट्रॉनिक बिल्कुल सही बात है तो पॉइंट सिंपल सा यह है कि मान लो जैसे कुछ भी कोई किसी
की टेस्टिमोनी लेनी है तो सारी की सारी टेस्टिमोनी एक एविडेंस सर्वर के ऊपर स्टोर हो जाएगी प्लस किसी ने मान लो उस रीजन की जो पूरा एरिया होता है उसमें इन्वेस्टिगेशन करी हो प्रॉपर क्राइम सीन को यहां पर सारी चीजों को एक तरह से सेव करके रखना हो तो व सारे आपके ई साक्ष्य पप के ऊपर जो एविडेंस सर्वर है वहां पर स्टोर हो जाएंगे तो इलेक्ट्रॉनिकली एविडेंस आपका पूरा का पूरा स्टोर रहेगा दैट इज द पर्पस ऑफ ई साक्ष पप एट द सेम टाइम एक वर्ड है ई समन अब समन आप सब लोग जानते
हो कोर्ट के द्वारा समन भेजे जाते हैं ना किसी को बुलाना होता है है ना तो अभी तक क्या होता था एक डाकिया आता था वो डाकिया आपको समन भेजता था कि य भाई आपको बुलाया गया है अब जो भी एविडेंस होगा या जो भी आपके समंस होंगे वो अकॉर्डिंग उस इंडिविजुअल को इलेक्ट्रॉनिकली भेज दिए जाएंगे इस ऐप के माध्यम से तो ये ऐप का यूज उसमें होगा प्लस एट द सेम टाइम जो भी एविडेंस वगैरह होगा वो भी इलेक्ट्रॉनिकल स्टोर हो जाएगा या फिर किसको भेजना होगा जो भेजना होगा वो कोर्ट जो होगा ना
वो पुलिस स्टेशन को इस ऐप के यूज करते के माध्यम से ऑनलाइन भेज पाएगा तो यह पर्पस हो गया ई समन का उसके अलावा अगर मैं बात करूं न्याय सेतु न्याय का मतलब होता है जस्टिस सेतु एक तरह से हम ब्रिज को बोल देते हैं कनेक्शन को बोल देते हैं जब एक किसी चीज को हम कनेक्ट बोलते हैं अब यहां पर क्या है डिफरेंट डिफरेंट हमारे जो पुलिस स्टेशंस है आपके मेडिकल आपके फॉरेंसिक प्रोसीक प्रिजंस इन सबको कनेक्ट करने के लिए हमारे पास एक डैशबोर्ड बनाया गया है न्याय सेतु डैशबोर्ड इसके अलावा आखिरी जो चीज
लॉन्च करी गई है वो है न्याय श्रुति न्याय का मतलब जस्टिस श्रुति का मतलब होता है आवाज को एक तरह से हम बोलते हैं है ना जो कोई चीज बोल के करी जाए तो अगर मान लीजिए विटनेस को हमने सुनना हो तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अब जो कोर्ट है उसको सुन पाएगा यूजिंग न्याय श्रुति तो ये चार चीजें थी मैंने हर किसी चीज का उसको वर्ड्स को ब्रेक करके आपको उसका मीनिंग समझा दिया है तो इन चारों एप्स का आप देख सकते हो कि किस तरह से हम इसको यूज करेंगे अपने हमारे जो
पुलिसिंग सिस्टम है उसको बेहतर करने के लिए हमारे कोर्ट्स के सिस्टम को बेहतर करने के लिए तो ये सारी चीजें आपको पता होनी चाहिए अगला दोस्तों हमारा टॉपिक रहेगा एल्डर मैन के बारे में अब इसको थोड़ा समझने की कोशिश करते हैं पहले तो आप ये समझो कि आखिर एल्डर मैन होते क्या है अब एक्चुअल में क्या है एल्डर मैन जब आता है ना वर्ड ये वर्ड आया है मेंबर ऑफ अ सिटी काउंसिल और म्युनिसिपल बॉडी के लिए एक ऐसा इंसान जो सिटी काउंसिल या म्युनिसिपल बॉडी का मेंबर होता है उसको हम एल्डरमैन बोलते हैं ठीक
है अब जब दोस्तों मैं बात करता हूं दिल्ली की तो दिल्ली दरअसल में अलग-अलग जोनस के अंदर डिवाइड है इस तरह से टोटल आपको 12 जोनस आपको देखने को मिल जाएंगे और जोन के करेस्पॉन्डिंग्ली भी देखने को मिल जाती है अब वर्ड कमेटी जो है उसके अंदर कुछ तो ऐसे लोग होते हैं जिनको इलेक्ट किया जाता है प्लस उसके साथ-साथ वहां पर हमें एल्डर मैन देखने को मिल जाएंगे एक्चुअल में क्या होता है एल्डर मैन एक ऐसा पर्सन होता है जो बेसिकली नॉमिनेट किया जाता है जैसे मैंने कहा सिटी कांसिल या म्युनिसिपल बॉडी का ही
मेंबर होता है अब उस चीज की फ के लिए वर्ड कमेटी की फंक्शनिंग के लिए एल्डरमैन का रोल बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट है कैसे एक्चुअल में एल्डरमैन की अगर हम बात करें ना तो एमसीडी मीटिंग्स के अंदर तो वोटिंग का हक नहीं होता पर यहां पर एमसीडी की जो स्टैंडिंग कमेटी होती है ना उसके अंदर वोट ये डेफिनेटली कर सकते हैं तो डेफिनेटली इंपोर्टेंट बन जाता है जो आप नोटिस करोगे जो 12 वार्ड कमिटीज हमें देखने को मिल जाती हैं उनको यहां पर मेंबर को इलेक्ट करना पड़ता है अपनी मीटिंग के अंदर ही तो इसके अंदर
जो वोटिंग वगैरह का प्रोसेस होता है ना उस वोट के अंदर मतलब वोट का हक वहां पर ल्डन मैन के पास भी है एमसीडी की स्टैंडिंग कमेटी के अंदर प्लस एट द सेम टाइम जो छह स्टैंडिंग कमेटी मेंबर्स होते हैं वो डायरेक्टली एमसीडी हाउस के द्वारा ही चूज किए जाते हैं वहां पर भी एल्डर मैन की वोटिंग हमें देखने को मिल जाती है एल्डर मैन कैन वोट फॉर दोस थिंग्स राइट प्लस एट द सेम टाइम एक एक कैंडिडेट की तरह खड़ा होना हो तो स्टैंडिंग कमेटी के लिए मेंबर के तौर के ऊपर यहां पर एल्डर
मैन भी यहां पे खड़ा हो सकता है तो एल्डर मैन के पास काफी हद तक हमें पावर्स देखने को मिल जाती है स्टैंडिंग कमेटी के इलेक्शंस के अंदर एमसीडी इन हाउस इलेक्शंस के अंदर एंड वर्ड कमेटी मीटिंग्स के अंदर प्लस एट द सेम टाइम जो वोटिंग प्रोसेस के अंदर स्टार्ट नहीं हो सकता जब तक एल्डर मैन पार्टिसिपेशन वहां पर हमें फिक्स नहीं हो जाता इसके अलावा जो स्टैंडिंग कमेटी देखो इतने सारे काम करती है अलग-अलग कांट्रैक्ट के अंदर इवॉल्व होना हो सकता है 5 करोड़ से ज्यादा जिनमें खर्चा हो एमसीडी ऑफिसर्स को पॉइंट करना हो
गया बजट को रिवाइज करना हो गया या फिर कुछ और चीज को अप्रूव करना हो गया वहां पर स्टैंडिंग कमेटी का रोल आता है और क्योंकि स्टैंडिंग कमेटी का रोल आएगा तो कहीं ना कहीं एल्डर मैन का भी रोल आएगा तो डेफिनेटली एल्डर मैन का रोल तो है ये तो हमें बात समझ आ गई अबर आप नोटिस करो ना जब हम बात करते हैं दिल्ली की तो दिल्ली की सिचुएशन बड़ी ही गंभीर हमें देखने को मिल जाती है क्योंकि देखो दिल्ली में एलजी भी है और दिल्ली में हमारे चीफ मिनिस्टर भी है या रेजर से
दिल्ली में सरकार भी है राइट अब होता क्या है टेक्निकली तो अगर हम बात करें 2018 का सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के जजमेंट के अंदर कहा था कि जो दिल्ली के एलजी हैं उनको काम करना पड़ेगा काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की एड एंड एडवाइस के ऊपर इन ऑल द मैटर एक्सेप्ट जो कि आपको जैसे फॉर एग्जांपल जो तीन एक्सक्लूडेड सब्जेक्ट्स है उसके ब साइड्स जैसे आपका लैंड हो गया लॉ एंड ऑर्डर हो गया पुलिस हो गया ये मुद्दों के अंदर अगर हम छोड़ दे ना बाकी जगह के ऊपर यहां पर एलजी को
काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की बात माननी पड़ेगी ऐसा तो 2018 के जजमेंट ने बोला पर अगर मैं बात करूं एक डीएमसी एक्ट है 1957 का वहां पर बात करता है कि आपके एलजी साहब के पास ये पावर है कहीं ना कहीं एल्डर मैन को नॉमिनेट करने की एंड वो बोलता है कि यहां पर आपको काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की एडवाइस लेने की जरूरत नहीं है तो फाइनली सुप्रीम कोर्ट ने इस पर्टिकुलर द्वंद को एक तरह से बता दिया दिया है कि अब पता क्या है जो म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के एल्डरमैन है ना वो डायरेक्टली एलजी साहब नॉमिनेट कर
सकते हैं वहां पर एलजी साहब को चीफ मिनिस्टर या दिल्ली की सरकार को पूछने की जरूरत नहीं है कि भाई मैं इसको एल्डरमैन अपॉइंट्स को एल्डरमैन की तरह अपॉइंटमेंट की एड एंड एडवाइस मानने की जरूरत नहीं है ऐसा यहां पे सुप्रीम कोर्ट ने फाइनली क्लेरिफाई कर दिया है क्योंकि बहुत सारी कंफ्यूजन हो रही थी कि किस एक्ट के माध्यम से जाए क्या मसिप कॉपरेशन एक्ट 1957 का उसके हिसाब से जाएं या फिर सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के हिसाब से जाएं तो सुप्रीम कोर्ट ने फाइनली क्लेरिफाई कर दिया है कि एल्डर मैन अपॉइंट्स के पास डेफिनेटली
हमें देखने को मिल जाती है प्रिविलेज मोशन अब एक्चुअली क्या हुआ है अगर हम बात करते हैं ना एनसीआरटी बुक्स की तो एनसीआरटी बुक्स के अंदर ना आपको प्रीमल देखने को मिलता है राइट पर अगर हम बात करें नई वाली जो एनसीआरटी एडिशंस आए हैं ना स्पेशली क्लास थ्री एंड क्लास सिक्स वाली यहां से प्रिंबल हटा दिया गया है अब आप पूछेंगे क्यों हटाया देखो एक्चुअली इसका जवाब किसी के पास भी नहीं है कि प्रिंबल क्यों हटाया अब यहां पर क्या हुआ एजुकेशन मिनिस्टर जी से यही सवाल पूछा गया हमारे जो देश के एजुकेशन मिनिस्टर
हैं धर्मेंद्र प्रधान जी उन्होंने यहां पर पार्लियामेंट में बोला कि नहीं ऐसा कुछ भी हुआ ही नहीं है बट बाद में जो हमारे सामने एनसीआरटी की बुक्स मार्केट में आई है या सब जगह आई है उनमें यह चीज प्रूव हो चुकी है कि एनसीआरटी में अब प्रिंबल नहीं देखने को मिलता तो अब अपोजिशन क्या कर रही है अब अपोजिशन ने एजुकेशन मिनिस्टर के अगेंस्ट प्रिविलेज मोशन यहां पे रेज किया है क्योंकि उन्होंने संसद में ऐसा बताया जा रहा है कि झूठ बोला है कि प्रिंबल नहीं हटाया गया जबकि एनसीआरटी बुक्स में प्रिंबल अब है ही
नहीं मतलब जो कुछ एक क्लासेस वाली बुक्स है राइट अब ये प्रिविलेज मोशन आखिर होता क्या है यह थोड़ा सा हमें समझना बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट बन जाता है देखो एक्चुअल में क्या है ना अगर हम बात करते हैं पार्लियामेंट्री प्रिविलेजेस की तो ये कुछ स्पेशल राइट्स इम्युनिटी एंड एमपशो हैं जो कि आपके दोनों हाउसेस ऑफ पार्लियामेंट्स के द्वारा एंजॉय की जाती हैं इंपॉर्टेंट बात नोटिस करो टू हाउसेस ऑफ पार्लियामेंट एंड साथ ही साथ उनकी जो पार्लियामेंट्री कमिटीज होती हैं एंड उनके मेंबर्स होते हैं अब आप लोग एक चीज जानते होंगे कि जब मैं बात करता
हूं पार्लियामेंट की तो पार्लियामेंट की मीटिंग्स के अंदर जैसे अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया ये भी पार्टिसिपेट कर सकते हैं तो हां जी बिल्कुल पार्लियामेंट्री प्रिविलेजेस इनको भी यहां पे मिलेंगी उसके अलावा लेट्स से कोई मिनिस्टर है हमारा यूनियन मिनिस्टर है बट अभी वो पार्लियामेंट का मेंबर नहीं बना आप जानते हो ना छ महीने तक कोई मिनिस्टर बन सकता है विदाउट बीइंग अ मेंबर तो उनको भी यहां पर ये चीज एंजॉय करते हैं तो होता क्या है सर पार्लियामेंट्री प्रिविलेजेस ये देखो पार्लियामेंट्री प्रिविलेजेस कुछ ऐसी प्रिविलेजेस दी जाती हैं ताकि पार्लियामेंटेरियंस अपना काम बहुत आराम से
कर पाएं ये दो तरह के आपको देखने को मिल जाएंगे एक होती है इंडिविजुअल एक होती है कलेक्टिव जैसे फॉर एग्जांपल एक पार्लियामेंटेरियन को ना सिविल केसेस के अंदर अरेस्ट नहीं किया जा सकता बिफोर द 40 डेज ऑफ स्टार्टिंग द सेशन एंड आफ्टर 40 डेज ऑफ एंडिंग द सेशन प्लस एट द सेम टाइम हमारे जो पार्लियामेंटेरियंस होते हैं उनके पास फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन होता है यह पूरी तरह से पार्लियामेंट के अंदर उनका कोई भी दिया गया जो जो बात की जाती है ना उनके लिए वो किसी भी कोर्ट के अंदर लायबल नहीं होते
अपने फंक्शन परफॉर्म करने ना अच्छे से तो उनके पास कुछ ना कुछ प्रिविलेजेस होनी चाहिए प्लस एट द सेम टाइम लेट्स से किसी पर्टिकुलर कोर्ट में उनकी पेशी है या फिर किसी कोर्ट में एज अ विटनेस की तरह उनको जाना है तो उस केस में वो भी जाने से मना कर सकते हैं क्योंकि पार्लियामेंट का सेशन चल रहा है तो ये पार्लियामेंट के काम को अच्छे से करवाने के लिए ना यहां पर हमें पार्लियामेंट्री प्रिविलेजेस देखने को मिल जाती हैं कुछ आपके कलेक्टिव प्रिविलेजेस भी होती हैं जैसे फॉर एग्जांपल उनकी जो रिपोर्ट्स होती हैं डिबेट्स
वगैरह उनको पब्लिश करवाया जा सकता है या फिर किसी को रोकना हो इन चीजों को पब्लिश करने से तो वो भी किया जा सकता है सीक्रेट मीटिंग्स करनी हो पार्लियामेंट ने तो वो भी करी जा सकती है जिसकी कोई प्रोसीडिंग्स ना यहां पे हो राइट तो ये सब चीजें इनकी अलग-अलग प्रिविलेजेस होती हैं इंपॉर्टेंट बात आपको ध्यान में ये रखनी है कि देखो प्रेसिडेंट भी पार्लियामेंट का ही पार्ट होते हैं पर इनको यहां पर पार्लियामेंट्री प्रिविलेजेस नहीं मिलती हैं क्यों क्योंकि आर्टिकल 361 के अंदर प्रिविलेजेस जो प्रेसिडेंट के लिए हैं वो अलग से डिफाइन कर
रखी हैं संविधान के अंदर आर्टिकल 105 दो प्र की बात करता है एक हो गया आपका फ्रीडम ऑफ स्पीच इन पार्लियामेंट जो मैंने आपको एक्सप्लेन किया एंड उसके साथ ही साथ पब्लिकेशन ऑफ प्रोसीडिंग्स को राइट का ये दो प्रोसीडिंग ये दो पार्लियामेंट प्रिविलेजेस आपके संविधान में गिवन है साथ में ही इसके अलावा हमारे पास जो कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर 1908 है वो बात करता है फ्रीडम फ्रॉम अरेस्ट एंड डिटेंशन ऑफ मेंबर्स अंडर सिविल प्रोसेस मैंने जैसा बताया था 40 दिन बिफोर द स्टार्टिंग ऑफ सेशन एंड 40 दिन आफ्टर द कंक्लूजन ऑफ द सेशन बट इंपॉर्टेंट
बात आपको ध्यान में ये रखनी है कि पार्लियामेंट ने अभी तक कोई भी लॉ नहीं बनाया है इन प्रिविलेज को कोड करने के लिए दिस इज रिगार्डिंग द प्रिविलेज मोशन यह बात आपको पता होनी चाहिए ठीक है तो एक तरह से एक फॉर्मल नोटिस सबमिट किया जाता है बाय एमपी या फिर अगर मान लो एमएलए वगैरह के रिगार्डिंग है तो उनके द्वारा किया जा सकता है कि यहां पर उनके पार्लियामेंट प्रिविलेज का ब्रीच हुआ है जब कोई ना कोई मेंबर राइट्स एंड इम्युनिटी जो कहीं ना कहीं बहुत एसेंशियल है उनके काम करने के लिए उनका
डिस रिगार्ड किया जाता है ना तब प्रिविलेज मोशन आपका पिक्चर में आ जाता है आपके लोकसभा के मेंबर भी एंड साथ ही साथ राज्यसभा के मेंबर भी आपके जो एमपीज होते हैं वो इस प्रिविलेज मोशन को मूव कर सकते हैं एंड जैसा मैंने आपको कहा था एमएलएस वगैरह के रिगार्डिंग भी ये चीज होती है नो डाउट अबाउट इट इसके साथ ही होता क्या है ना कि जिस भी मेंबर ने यहां पर इसको मूव किया होगा इस पर्टिकुलर प्रिविलेज मोशन को वो फिर मोशन जाएगा अगर तो लोकसभा है तो वहां पर स्पीकर जी के पास अदर
वाइज आपके जो राज्यसभा है वहां पर उनके जो चेयर पर्सन होते हैं उनके पास जाएगा अब जो स्पीकर होंगे या चेयर पर्सन होंगे वो या तो इस पर्टिकुलर मुद्दे के ऊपर खुद ही इसको देखेंगे इसकी स्क्रूटनी करेंगे या फिर इसको जो प्रिविलेज कमेटी होती है उसको दे देंगे फिर प्रिविलेज कमेटी उसके ऊपर कहीं ना कहीं इन्वेस्टिगेट करेगी एंड अकॉर्डिंग जो रिपोर्ट आएगी ना वह फिर सदन को दे देगी उस सदन को अगर लोकसभा है तो लोकसभा वाले हाउस को अदर वाइज राज्यसभा के हाउस को यहां पे इस तरह से प्रोवाइड कर देगी दिस इज़ हाउ
द एंटायस वर्क्स तो होता क्या है ये जो प्रिविलेज कमेटी होती है ये अलग-अलग होती है लोकसभा की कमेटी में 15 सदस्य होते हैं एंड राज्यसभा की कमेटी के अंदर आपको 10 सदस्य देखने को मिल जाएंगे अगर राज्यसभा की यहां पे कमेटी है तो यहां पर इसको चेयर किया जाता है डिप्टी चेयर पर्सन के द्वारा आपकी जो लोकसभा वाली होती है तो वहां पर स्पीकर जिसको नॉमिनेट करते हैं अकॉर्डिंग वो उस कमेटी को चेयर करता है तो इन्वेस्टिगेशन इनके द्वारा करी जाती है एंड अकॉर्डिंग रिपोर्ट दी जाती है फिर इस रिपोर्ट के बेसिस के ऊपर
अलग-अलग पनिशमेंट्स जो है ना जिसने भी अगर मान लो ब्रीज किया है उसके ऊपर अलग-अलग पनिशमेंट्स लगाई जा सकती हैं चाहे वो एक्सपेंशन के रिगार्डिंग हो या और भी इस तरह की यहां पे कि कुछ पेनल्टी हो गया राइट तो वो सब चीजें करी जा सकती हैं इस तरह से आपको देखने को मिल जाएगा कि ये रूल्स वगैरह हैं इसके नंबर ध्यान नहीं रखना आपको बट एक बेसिक आईडिया होना चाहिए कि कैसे से पूरा प्रोसेस वर्क करता है अगला दोस्तों हमारा टॉपिक है कावेरी बॉडी सीक्स सेंटर अप्रूवल फॉर एनवायरमेंटल असेसमेंट थोड़ा सा मैं आपको ना
एक्सप्लेन करता हूं यहां पर ना इस आप पिक्चर को देखना यह आप नोटिस कर पा रहे हो जो मैं आपको हाईलाइट कर रहा हूं यह आपको कावेरी नदी देखने को मिल जाती है बिल्कुल ठीक बात है यहां पर पहली बात तो आप जानते होंगे वैसे तो कावेरी नदी डिफरेंट डिफरेंट स्टेट से आती है पर मेजर जो कॉन्फ्लेट हमें देखने को मिलता है वो आपको कर्नाटका और तमिलनाडु के बीच देखने को मिलता है वाटर शेयरिंग के रिगार्डिंग बिल्कुल ठीक बात है अब यहीं पर करना एक प्रोजेक्ट है जो कि अपने आप में प्रपोज्ड है वो प्रोजेक्ट
क्या है मेक दे टू प्रोजेक्ट यहां पे आप देख भी पाओगे इस प्रोजेक्ट की यहां पे मैं बात कर रहा हूं मेक द टू प्रोजेक्ट ये दरअसल में जो प्रोजेक्ट है ना ये आपको कृष्णा नदी सॉरी कावेरी नदी आई एम वेरी सॉरी कावेरी नदी प्लस एट द सेम टाइम आपकी जो अर्का वती नदी है ना अर्का वती और साथ ही साथ जो कावेरी है इन दोनों का जहां पे आपको कॉन्फ्रेंस देखने को मिलता है वहीं पर आपको ये मेका दे टू प्रोजेक्ट आपको प्रपोज देखने को मिल जाएगा दरअसल में जो अर्कवती नदी है वो भी
आपकी कवेरी की ही ट्रिब्यूटरी आपको देखने को मिल जाएगी तो इन दोनों के मिलन के ऊपर आपको यहां पे मेक दे टू प्रोजेक्ट आपको देखने को मिल जाएगा ये अभी प्रपोज्ड है ये कहा जा रहा है कि हम इसको करना चाहते हैं अब कर्नाटका इसको करना क्यों चाहता है कर्नाटका इसको इसीलिए करना चाहता है क्योंकि जो बेंगलोर सिटी है उसको अच्छे से पानी पहुंच पाए ये यहां पे इसका फोकस है प्लस साथ ही साथ यहां पर इस प्रोजेक्ट के माध्यम से रिन्यूएबल एनर्जी भी हम यहां पे जनरेट करना चाहते हैं 400 मेगावाट तक की प्लस
एट द सेम टाइम फ्लड्स हो गया ड्रॉट्स हो गया उससे बचाने के अंदर ये मेकल टू प्रोजेक्ट काफी ज्यादा काम में आएगा पर अगर हम बात करते ना तमिलनाडु की तो भाई तमिलनाडु ने तो बिल्कुल मना कर दिया है कि ऐसा प्रोजेक्ट तो होना ही नहीं चाहिए पहले ही पानी कम मिल रहा है काबरी का उनको अगर ये प्रोजेक्ट बन जाएगा तो तो और कम हो जाएगा ये मुद्दा चल रहा है कर्नाटका की पूरी कोशिश है इस प्रोजेक्ट को कंप्लीट करने की कि अच्छे से प्रोजेक्ट ये हो पाए तो यहां पर इन्होंने कर्नाटका की सरकार
ने एक्चुअली या अदरश से कर्नाटका कावेरी नीरा वरी निगल लिमिटेड इन्होंने यहां पर एनवायरमेंट मिनिस्ट्री को यहां पर रिक्वेस्ट करी है कि जो एनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट है ना वो आप जल्दी से जल्दी उसका अप्रूवल दे दीजिए क्योंकि हमें 6 साल हो चुके हैं आपसे अप्रूवल मांगते हुए आपने 6 साल के अंदर अप्रूवल ही नहीं दिया तो ये जो प्रोजेक्ट है ना अपने आप में ठंडे वस्ते में पड़ा हुआ है आज के समय के ऊपर ठीक है बनेगा नहीं बनेगा स्टेट्स कैसे आप से मानेगी नहीं मानेगी ये तो फ्यूचर की बात है पर अभी के लिए
यहां पर आपको इस प्रोजेक्ट का एक बेसिक आईडिया जरूर पता होना चाहिए तो ये एक आपका मल्टी पर्पस प्रोजेक्ट देखने को मिल जाएगा ड्रिंकिंग वाटर एंड पावर भी मैंने आपको बताया प्लस एट द सेम टाइम एक बैलेंसिंग रिजर्वायर आपको कर्नाटका के कन कनकपुरा के अंदर आपको ये देखने को मिल जाएगा साथ ही साथ इसके बेनिफिट्स एग्रीकल्चर सपोर्ट आपको देखने को मिल जाएगी कावेरी बेसिन के अंदर साथ ही साथ वाटर अवेलेबिलिटी होगी फार्मर्स के लिए कर्नाटका और तमिलनाडु के अंदर हालांकि तमिलनाडु एग्री नहीं करता इस बात से क्योंकि उनको पता है कि उनको नहीं मिलेगा साथ-साथ
बेंगलोर जो है ना कर्नाटका कैपिटल सिटी वहां तक ड्रिंकिंग वाटर पहुंच पाएगा एंड मैंने आपको जो और पॉइंट्स बताए वो थे आपके रिन्यूएबल एनर्जी के बारे में 400 मेगावाट तक की हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर हम यहां पे इसके माध्यम से जनरेट करेंगे प्लस एट द सेम टाइम कार्बन मिशंस को भी यहां पर कम करने की यहां पर कोशिश करी जाएगी अगले टॉपिक की तरफ दोस्तों आगे बढ़ते हैं दैट इज प्ली बारगेनिंग इन इंडिया अब यह क्या मुद्दा है देखो होता पता क्या है जैसे मान लेते हैं किसी बंदे ने कोई क्राइम किया राइट अब क्राइम हुआ या
नहीं हुआ ट इ सेपरेट थिंग बट क्राइम हुआ है इन द सेंस की अभी एक्यूज्ड है उस पर्सन के ऊपर तो उसका पूरा का पूरा जो मुद्दा होगा वो ट्रायल वगैरह चलेगा उसका राइट उसकी सुनवाई होगी पूरी मुद्दा पूरा चलेगा ठीक है अब ऐसे के में ना अगर कोई पर्सन जो एक्यूज्ड है वो खुद अपने आप में इस बात को अग्री कर जाए कि हां यार ये जो गुनाह है वो मैंने ही किया है उसने खुद आप अपने आप में गिल्टी उसने खुद प्लीडर दिया राइट तो इस केस में ना क्या होगा उसने खुद अपनी
मर्जी से इसको गिल्टी अपने आप को मान लिया है ना तो उस केस में उसको लेसर पनिशमेंट मिलेगी आर यू अंडरस्टैंडिंग दिस पॉइंट देखो एक तो होता है तरीका कि भाई पूरा का पूरा प्रोसेस चलेगा कई-कई साल उसमें लगेंगे पूरा कोर्ट के के चक्कर लगेंगे फिर जाके जो कोर्ट का फैसला आएगा वो फिर इस बंदे को मानना ही पड़ेगा एक तो यह तरीका है अदर वाइज दूसरा तरीका क्या है कि ये बंदा खुद एक्सेप्ट कर ले कि हां जी सर ये मेरा मेरे से गलती हो गई या मैंने ये क्राइम किया है या मैंने ये
अ ये क्राइम किया है बेसिकली तो उस केस में क्या होगा कोर्ट इस केस में ना यहां पर इस केस को वही क्लोज कर देगा एंड अकॉर्डिंग क्या होगा अकॉर्डिंग इस पर्सन को जो सजा होगी वो थोड़ी सी कम मिलेगी एज कंपेयर टू द एक्चुअल पनिशमेंट क्यों क्योंकि इसने जो जस्टिस सिस्टम था उसके साथ यहां पे एक तरह से उनके साथ यहां पे कोलैबोरेट किया है उस चीज को ऐसा नहीं था कि लंबा खींचने की कोशिश करिए जबकि उसको पता था कि इसने ही क्राइम किया है तो दरअसल में होता क्या है ना कि 2005
के अंदर हमारा जो सीआरपीसी है उसके अंदर ये चीज को इनकॉरपोरेट किया जाता है जिसको हम नाम जानते हैं प्ली बारगेनिंग ठीक है तो बेसिकली क्या हुआ प्ली बर्गे निंग एक ऐसी प्रैक्टिस जहां पर जो एक्यूज्ड होता है वो नॉट गिल्टी का जो राइट होता है ना उसको उसको छोड़ देता है एंड जो फुल ट्रायल होता है फिर फुल ट्रायल उसको नहीं मिलता क्योंकि उसने खुद ही एक्सेप्ट कर लिया कि मैंने ये क्राइम किया है तो फुल ट्रायल उसको यहां पे नहीं डिमांड होगा बट ऑन द अदर हैंड उसको यहां पे बारगेन हो जाता है
यानी कि उसको जो सजा मिलती है वो अपने आप में कम हो जाती है अब ध्यान में रखने वाली बात यह है कि जो प्ली बारगेनिंग है ना ये हर केस में नहीं आप कर सकते ऐसा नहीं है कि आपके ऊपर कुछ आपने किसी का मर्डर कर दिया फिर वहां पर आप जाके प्ली बारगेनिंग करो नहीं यहां पर इस तरह से जो क्राइम अगेंस्ट वुमेन क्राइम अगेंस्ट चिल्ड्रन या सोशल इकोनॉमिक ऑफेंसेस होते हैं वो सब यहां पे नहीं आते बेसिकली जो वो केसेस जहां पर जो सजा होती है ना वो 7 साल या सा साल
से कम की सजा हो होती है सिर्फ उन्हीं के लिए यहां पर ये चीज एप्लीकेबल होती है अब देखो सीआरपीसी में तो थी ही थी अब आप पूछेंगे सर ये तो नया सिस्टम आ चुका है हमारे पास भारतीय न्याय सुरक्षा समिधा राइट इसको जिसने रिप्लेस कर दिया है क्या उसके अंदर भी प्ली बारगेनिंग है द आंसर इज यस यहां पर भी प्ली बारगेनिंग है बस बेसिकली क्या होता है विद इन 30 डेज विदन एक महीने के अंदर-अंदर आपको ये प्ली बारगेनिंग का मतलब आपको अ करना पड़ेगा आपको ये प्रोसेस आपको बताना पड़ेगा कि हां ये
मैंने ही क्राइम किया है तो एक टाइम बाउंड बना दिया गया है अदर वाइज भारतीय न न्याय सुरक्षा समिता के अंदर भी आपको यह प्रोसेस देखने को मिल जाएगा तो ये कुछ बातें थी आपको पता होनी चाहिए थी अभी क्या हुआ है ना एक रिपोर्ट आई है मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस की यहां पर इसने बताया है ना कि इंडिया में ना बहुत ही कम लेवल के ऊपर प्ली बारगेनिंग को यूज किया जाता है सिर्फ और सिर्फ 0.11 पर ऑफ केसेस के अंदर प्ली बारगेनिंग का कांसेप्ट यहां पे इंट्रोड्यूस या इंप्लीमेंट किया गया अब होना
तो टेक्निकली ये चाहिए था क्योंकि ये जो पर्टिकुलर मुद्दा है यह हेल्प करता है हमारे जस्टिस को फास्टर करने के लिए ताकि इतने इतने जो सा लग जाते हैं ककई साल पूरे केसेस के अंदर चलते रहते हैं उसको रोका जाए तो कोशिश तो यही थी पर अपने आप में सिर्फ 0.11 पर केसेस के अंदर दिखाना यह दिखाता है कि अपने आप में काफी लुक्रेटिव नहीं है बहुत ही कम लुक्रेटिव आपको ये चीज देखने को मिल जाएगी लोग इसकी जगह कुछ और तरीके इस्तेमाल कर लेते जैसे फॉर एग्जांपल कॉम्प्रोमाइज कर लेते हैं आपस में जिसको हम
कंपाउंडिंग के नाम से जाते हैं या फिर अ क्श हो गया पूरी क्रिनल प्रोसीडिंग परचा से खत्म हो चुकी है या फिर कई बार क्या होता है कि पार्टीज ने कॉम्प्रोमाइज कर लिया तो उस चक्कर में जो विटनेस होता है वो हॉस्टल ल टर्न हो गया तो ये सब अलग-अलग तरीके लोग अपनाते हैं प्ली बारगेनिंग अपने आप में इंडिया में अभी भी पॉपुलर नहीं है हालांकि अगर हम बात करें ना दूसरे कंट्रीज की यूरोपियन कंट्रीज की यूएसए की बात करें और बाकी कंट्रीज की बात करें वहां पर अपने आप में जो प्ली बारगेनिंग है वो
बहुत ज्यादा यूज किया जाता है एज कंपेयर्ड टू इंडिया तो बेसिकली मुद्दा यही है प्ली बारगेनिंग का कि बिना ट्रायल में केस को गए हुए हम क्या चाहते हैं टाइम हो गया रिसोर्सेस हो गया ये सेव हो जाए और बदले में जो पर्सन है उसको यहां पर कुछ ना कुछ बारगेन कर दिया जाए उसकी जो पनिशमेंट थी उसके अंदर दैट इज द कांसेप्ट ऑफ फ्ली बारगेनिंग अगला दोस्तों हमारा टॉपिक है राइट टू डिस्कनेक्ट का अब यह बहुत ही इजी सा कांसेप्ट है बस डायरेक्टली क्वेश्चन आ सकता है कि राइट टू डिस्कनेक्ट का मीनिंग क्या है
देखो कई बार क्या होता है ना इंडिया में अगर मैं बात करूं जैसे फॉर एग्जांपल मान लो एक कोई पर्सन है ये 925 या 926 मान लो ऑफिस जाता है फिर जैसे ही ये घर पहुंचता है ना तो घर में ऑफिस वाले फिर कॉल करने लग जाते हैं कि भाई यह वाली पीपीटी सेंड कर दो यह वाली एक्सेल शीट भेज दो राइट यह वाली मीटिंग लगा देते हैं उसके बाद रात को तो इस चक्कर में यह जो है ना ये बड़ा ही कंफ्यूज रहता है कि भाई मैं ऑफिस में भी काम कर रहा हूं 9:00
से 6:00 बजे तक और फिर सुबह रात दिन हर समय में ऑफिस का ही काम करे जा रहा हूं तो इस केस में हो क्या रहा है इस केस में ना जो इंसान है भाई उसकी वर्क लाइफ बैलेंस पूरी तरह से उसकी बहुत बुरी हालत हो चुकी है वर्क लाइफ बैलेंस की तो यहां पर ऑस्ट्रेलिया ने क्या किया है ना ऑस्ट्रेलिया ने यहां अपने जो मिलियंस ऑफ वर्कर्स हैं उनको एक लीगल राइट टू डिस्कनेक्ट दे दिया है क्या मतलब इस चीज का इस मतलब इस चीज का मतलब ये है कि अगर मान लो कोई पर्सन
जब उसके वर्किंग आवर्स खत्म हो चुके हैं उसके बाद अगर वह ऑफिस के कॉल्स नहीं उठाना चाहता अगर वह अपने लाइफ के लिए पर्सनल टाइम अपनी फैमिली के लिए पर्सनल टाइम देना चाहता है तो वो दे सकता है इसमें कोई इशू वाली बात नहीं है ध्यान में यह रखना ऐसा नहीं है कि मान लो यह कंपनी वाला बंदा है और यह है जो घर पर है बंदा मतलब जो एंप्लॉई था अब कंपनी वाले इसको कॉल कर सकते हैं इसमें कोई दिक्कत वाली बात नहीं है यह पर्सन उस कॉल को उठाए ना उठाए ये इस पर्सन
की मर्जी होगी आर यू गेटिंग द पॉइंट तो ये नहीं है कि यहां पे आपके अ कि कॉल करना ही बंद कर दिया एंप्लॉयर को बैन नहीं किया गया कि आप कांटेक्ट नहीं कर सकते ऐसा नहीं है यहां पर बस स्टाफ को राइट दिया गया है कि अगर आप चाहते हो कि आप रिप्लाई नहीं करना तो ठीक है कुछ केसेस में डेफिनेटली एक्सेप्शनल सरकम चांसेस के अंदर ये चीज करी जा सकती है पर कोशिश ये होनी चाहिए कि यार ये जो लोग है ना जो एंप्लॉयज है उनको बर्नआउट से बचाया जा पाए उनके स्ट्रेस को
कम किया जाए दैट इज द फोकस यहां पे ऑस्ट्रेलिया की कोशिश यही है कि दोनों को बैलेंस किया जाए यहां पर जैसे फॉर एग्जांपल इमरजेंसी हो तो उस केस में डेफिनेटली एंप्लॉयज को करना चाहिए या फिर कुछ ऐसी जगह के ऊपर जहां पर मान लो जो जॉब ही इरेगुलर आवर्स के ऊपर होती है वहां पर डेफिनेटली कांटेक्ट किया जा सकता है तो कोशिश ये करी गई है कि लॉ को प्रैक्टिकल बनाया जाए ऐसा ना हो कि बिजनेस ऑपरेशंस हिंडरलैंड किया था 2017 के अंदर उसके बाद भी बहुत सारे यूरोपियन और लैटिन अमेरिकन कंट्रीज में ये
इंप्लीमेंट हो चुका है अब यहां पर ऑस्ट्रेलिया ने भी उस पर्टिकुलर लिस्ट को जवाइन कर लिया है 23 लॉ कमिशन के बारे में थोड़ा सा हमें यहां पे पढ़ना है देखो दरअसल में हुआ क्या है कि सरकार के द्वारा 23 लॉ कमिशन को सेट अप किया गया है 3 साल के लिए जिसका टेनर स्टार्ट हुआ है 1 सितंबर 20224 को एंड ये वर्क करेगा 31 अगस्त 2027 तक अब लॉ कमीशन के बारे में हमें जो कुछ पॉइंट्स जानने हैं सबसे पहले तो इंपॉर्टेंट बात यह है कि आखिर इसके अंदर मेंबर्स कौन-कौन होंगे देखो दरअसल में
जब लॉ कमिशन के मेंबर्स की बात होती है ना तो यहां पर इसके जो मेंबर्स के अंदर आपके जो सर्विंग सुप्रीम कोर्ट एंड हाई कोर्ट जजेस आपको देखने को मिल जाते हैं ठीक है ना इन्हीं में से ही आपका कोई चेयर पर्सन यहां पे पॉइंट कर दिया जाता है साथ ही साथ जो मैंने बताया फोर फुल टाइम मेंबर्स इसमें देखने को मिल जाएंगे एंड सेक्रेटरी ऑफ लीगल अफेयर्स एंड लेजिसलेटिव डिपार्टमेंट ये एज एक्स ऑफिश मेंबर्स की तरह यहां पे अपॉइंटेड होते हैं एक्चुअली बाय द वर्च्यू ऑफ़ देयर पोजीशन एंड साथ ही साथ यहां पर अप
टू फाइव पार्ट टाइम मेंबर्स यहां पे हो सकते हैं तो यह बात आपको पता होनी चाहिए ठीक है यहां पर ना ये एडवाइजरी बॉडी की तरह काम करती है वेरी वेरी इंपोर्टेंट पॉइंट देखो होता पता क्या है ये 3 साल के अंदर ना ये अपनी रिपोर्ट्स देंगे उन रिपोर्ट के अंदर क्या मेंशन होगा उनके अंदर ना ये बताएंगे कि कौन से ऐसे लॉज हैं जो अब रेलीवेंट नहीं रहे उनको हटाया जा सकता है उनको रिपील किया जा सकता है प्लस जो भी लॉज जैसे पुर को इफेक्ट करते हैं उनको ऑडिट करना हो गया अपने व्यूज
वगैरह देंगे एंड अकॉर्डिंग लॉ एंड जस्टिस मिनिस्ट्री को उनको बताएंगे कि हमारे व्यूज इन लॉस के ऊपर ये हैं आप ये ये बदलाव कर सकते हो इंपॉर्टेंट बात ध्यान में क्या रखनी है कि ये सिर्फ और सिर्फ एडवाइजरी है ठीक है ये बात बोल देंगे इनकी बात सुनी जाए मानी जाए ना मानी जाए दैट इज अ सेपरेट थिंग जरूरी नहीं है कि इनकी बात हर एग्री ही करी जाए ये अपनी एडवाइस देंगे यहां पे ठीक है ना तो एजिस्टिफाई पे इंप्रूवमेंट की रिक्वायरमेंट होगी जैसे अगर हम बात करना डीपीएसपी की डीपीएसपी डेफिनेटली एक तरह की
डायरेक्टिव्स है जो हमारे कांस्टीट्यूशन मेकर्स ने बताए थे उन्होंने बताया था कि आने वाले टाइम के ऊपर जब सही समय आएगा तो इनको भी इंप्लीमेंट किया जा सकता है तो क्या वो सही समय आ चुका है क्या हम इस चीज को इंप्लीमेंट कर सकते हैं तो थोड़ा सा उनको एग्जामिन किया जाता है प्लस जो भी प्रिंबल के अंदर आपके ऑब्जेक्टिव्स बताए गए हैं उनको कैसे हम बेहतर ढंग से अटन कर सकते हैं ग्लोबलाइजेशन का क्या इंपैक्ट है फूड सिक्योरिटी अनइंप्लॉयमेंट इन चीजों के ऊपर एंड कैसे हम जो पूरेस्ट ऑफ द पुअर है उनके हम इंटरेस्ट
को कैसे प्रोटेक्ट कर सकते हैं एंड साथ ही साथ जुडिशियस एडमिनिस्ट्रेशन सिस्टम को कैसे रिव्यू करते रहे ये सारी चीजें इनके द्वारा देखी जाती हैं इसके अलावा जो डिलेज होते हैं या फिर हाई कोर्ट के रूल्स वगैरह होते हैं इनको कैसे सिंपलीफाई किया जा सकता है ये सब बातें लॉ कमीशन के द्वारा बताई जाती हैं वन मोर वेरी इंपॉर्टेंट पॉइंट इज कि यहां पर लॉ कमीशन क्या है एक एग्जैक्ट बॉडी है ना इसका यहां पर संविधान के अंदर जिक्र है ना ही किसी आपके एक्ट के अंदर भी कोई जिक्र नहीं है इस वजह से ये
क्या बन जाती है आपकी एक स्टैचूट बॉडी बन जाती है क्योंकि ये किसी एक्ट से नहीं बनी दिस इज एन एग्जैक्ट बॉडी कंसीट बाय गवर्नमेंट ऑफ इंडिया पहले लॉ कमिशन की बात करें ना तो दरअसल में ब्रिटिश एरा के समय बना था 1833 के चार्टर एक्ट के माध्यम से जिसको प्रिसा इड किया गया था लॉर्ड मकने के द्वारा ये बात आपको पता होगी पर अगर हम बात करें इंडिपेंडेंट इंडिया की तो वो था 1955 के अंदर जहां हां पर एमसी सीतलवान थे उनके अध्यक्षता के अंदर यह कमीशन बना था टाइम फ्रेम इसका 3 साल होता
है जैसे मैंने आपके साथ डिस्कस करा है अी एंड मैंडेट भी आप समझ गए होंगे कि लीगल रिफॉर्म्स को यहां पे ये सजेस्ट करता है ठीक है तो ये बातें थी आपकी लॉ कमीशन के बारे में जो आपको पता होनी चाहिए जीरो एफआईआर एक्चुअली अभी थोड़ा मुद्दा ये न्यूज़ में है ठीक है ना तो थोड़ा सा हमें एफआईआर क्या होता है जीरो एफआईआर क्या होता है हमें पता होना चाहिए देखो एफआईआर एफआईआर क्या स्टैंड करता है आपका फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट के बारे में है ना इसी के लिए स्टैंड होता है अब एक्चुअली पता क्या होता
है कि मान लो किसी एक जगह के ऊपर कोई हादसा हो गया ठीक है अब जब आपको एफआईआर उसकी दर्ज करानी होती है ना तो यह जो आपका हादसे वाली जगह है यह कौन से पुलिस स्टेशन के जूरिस जिक्स में आ रही है आप वहीं पर जाके अपना केस दर्ज करा सकते हो और कहीं नहीं करा सकते ठीक है नॉर्मली यही होता है कि ये देखा जाता है कि पुलिस स्टेशन का क्या जूरिस शक्श है ओके तो होता पता क्या है जब यहां प आप पुलिस थाने जाओगे वहां पर अपना सारा बात बताओगे कि मेरे
साथ ये ये हादसा हुआ है अकॉर्डिंग पता पुलिस स्टेशन वाले क्या करेंगे वो आपकी एफआईआर लिख लेंगे एंड एक आपको एफआईआर का नंबर दे देंगे लेट्स से जस्ट एग्जांपल के लिए मैं आपको बता रहा हूं कि लेट्स से दैट नंबर इज 105 2024 इसका मीनिंग क्या होगा कि 2024 साल के अंदर ये 105 व नंबर की एफआईआर है जो वहां पर उसने दर्ज करी है ठीक है यह होता है नॉर्मल एफआईआर का प्रोसीजर जहां पर आपका एक पर्टिकुलर पुलिस स्टेशन की जूरिस क्शन के अंदर ही जो हुआ है वहीं पर आप दर्ज करा सकते हो
पर एक्चुअल में ना इसमें थोड़ी गड़बड़ बहुत है मैं आपको एक एग्जांप देता हूं जैसे ना 2012 के अंदर एक बहुत ही हॉरिफाइंग इंसिडेंट हमें देखने को मिला था जो निर्भया का जो केस हुआ था राइट अब मुझे आप लोग एक चीज बताओ जस्ट टेक एन एग्जांपल मान लेते हैं कि एक कोई पर्सन है उसके साथ कोई घटना हुई वो एक एरिया के अंदर हुई एंड किसी पर्सन ने फिर इसको क्या किया इस पर्सन ने मतलब इस पर्सन को 100 किलोमीटर दूर ले जाकर किसी और जगह प इस बंदे को फेंक दिया अब यह जो
पर्सन है इसकी घटना तो यहां पर हुई थी पर को फेंका यहां पे गया तो क्या ये बंदा वापस जाएगा यहां पे इस वाले पुलिस स्टेशन वाले जूरिस इक्स के अंदर वहां जाके बताएगा कि भाई मेरे साथ ये दिक्कत हुई है मेरे साथ इन लोगों ने यहां पे ये चीज करी है ऐसे तो बहुत मुश्किल हो जाएगी है कि नहीं तो एक तरह से ना स्पीडी रिड्रेसल के लिए एंड प्लस आपका जो पर्सन है इसके ऊपर मतलब इतना बर्डन ना आए तो एक प्रावधान बनाया गया दैट इज विद रिगार्ड्स टू जीरो एफआईआर का जीरो एफआईआर
का मतलब क्या होता है जीरो एफआईआर का मीनिंग बहुत सिंपल है कि आपके नजदीकी जो भी आपके आसपास आपके थाना है ना पुलिस है अब वहां जाओ वहां जाकर ना आप एफआईआर लिखवा दो इस चीज को क्या बोला जाएगा जीरो एफआईआर जीरो क्यों बोला जाएगा क्योंकि ये जो मैंने आपको नंबर बताया था ना एफआईआर का नंबर यहां पर कोई नंबर नहीं दिया जाता यहां पर नंबर जीरो ही दिया जाता है फिर ये पुलिस स्टेशन वाले ने आपकी दर्ज कर ली आपकी कंप्लेंट दर्ज कर ली अब ये पता क्या करेगा ये जो एक्चुअल में थाना होगा
जिसमें आपकी जूरिस सक्शन बनती है जिस पुलिस स्टेशन की जूरिडिक्शन बनती है उस पर्टिकुलर थाने को यहां पे आपकी जो कंप्लेंट होगी जो एफआईआर होगी वो भेज दी जाएगी फिर वहां पर जाके आपका नंबर अलॉट होगा आपको एफआईआर का आर यू अंडरस्टैंडिंग दिस पॉइंट तो ये जो निर्भया वाला केस हुआ था ना उसमें भी दिक्कत यही आई थी कि बहुत सारे पुलिस स्टेशन वाले तो यही सोचते रहे कि भाई ये मामला तो मेरे जूरिस जिक्स का नहीं है ये तो इस वाले जूरिस जिक्स का है ये उसके जूरिस जिक्स का है एंड उस चक्कर में
क्या हुआ उस चक्कर में किसी वाले पुलिस स्टेशन वालों ने इन्वेस्टिगेट करनी स्टार्ट नहीं गई देर से स्टार्ट करी तो ये दिक्कतें ना आनी चाहिए थी ना तो इस वजह से यहां पे जो जस्टिस वर्मा कमेटी बनी थी 2012 के जो निर्भया इंसीडेंट के बाद तो वहां पर उन्होंने रिकमेंड किया था फिर अकॉर्डिंग्ली जीरो एफआईआर को यहां पे उसकी को एस्टेब्लिश कर दिया गया था ठीक है ना तो ये वही एफआईआर होती है जिसको आप किसी भी पुलिस स्टेशन के अंदर रजिस्टर कर सकते हो इर रिस्पेक्टिव ऑफ जूरिस क्शन ऑफ द एरिया वेयर द क्राइम
वास कमिटेड इन केस ऑफ कॉग्निजेबल ऑफेंस अब आप कॉग्निजेबल ऑफेंस आप जानते होंगे ये हर ऑफेंस के लिए ट्रू नहीं है जीरो एफआईआर वाला मुद्दा ये कॉग्निजेबल फ फेंस के लिए है कॉग्निजेबल फेंस वो वाले फेंसेस होते हैं जहां पर आपका जो पुलिस ऑफिसर है वो अरेस्ट कर सकता है बिना किसी वारंट के उस चीज को बोलते हैं हम यहां पर क्या कॉग्निजेबल फेंस तो उस केस में ये चीज ऐसी हो सकती ठीक है ना तो अगर हम बात करें जो भारतीय राय सॉरी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता है जिसने आपके सीआरपीसी को रिप्लेस किया है
तो पुलिस अब बाउंड है टू रजिस्टर अ जीरो एफआईआर ये बात आपको पता होना चाहिए एंड अकॉर्डिंग इससे किस तरह से स्पीड ड्रेसल मिल जाएगा आई होप दैट इज आल्सो क्लियर टू यू अब एक्चुअल में ना अगर आपको मेंस का इसके ऊपर कुछ क्वेश्चन आता है तो आपको एक केस के बारे में मेंशन करना पड़ेगा दैट इज ललिता कुमारी केस ठीक है दरअसल में इस केस के अंदर ललिता कुमारी केस के अंदर यहां पर बोला गया ये गया था कोर्ट के द्वारा कि आपको ना मैंडेटरी यह चीज करनी चाहिए एंड अकॉर्डिंग यहां पर साथ ही
साथ अगर मान लो जो भी पुलिस वाला है अगर वो मना करता है इस तरह की एफआईआर को रजिस्टर करने से तो उसके ऊपर स्ट्रिक्ट एक्शन भी लिया जा सकता है अगर एक बेसिकली एक इंफॉर्मेशन रिसीव हो जाती है एंड उसके हिसाब से अगर हमें पता लग जाता है कि एक हमें जो कॉब सेंसी है तो वहां पर उस पर्टिकुलर जो पुलिस ऑफिसर है उसको यहां पे अकॉर्डिंग कार्रवाई शुरू कर देनी चाहिए तो यह बात भी आप यहां के ध्यान में रख सकते हो तो अभी क्या हुआ है मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ना एक्चुअली यूनियन
टेरिटरीज को डायरेक्ट किया है कि इंश्योर किया जा पाए कि लेट्स से अगर कोई जीरो एफआईआर रिकॉर्ड हुई है लोकल लैंग्वेज के अंदर तो उसके साथ-साथ जब वो दूसरे थाने को यहां पे अपनी कॉपी भेजेंगे ना तो वहां पे ट्रांसलेटेड कॉपी उसकी होनी चाहिए ताकि लैंग्वेज के बीच में यहां पे दिक्कत ना आए लैंग्वेज बैरियर यहां पे ना बने पीएसी के बारे में दैट इज पब्लिक अकाउंट्स कमेटी के बारे में देखो पहले एक बार पीएसी को रिवाइज कर लेते हैं फिर आएंगे कि करंट मुद्दा क्या था अगर हम बात करें ना पब्लिक अकाउंट कमेटी की
तो आप लोग जानते होंगे तीन बहुत ही पॉपुलर आपको फाइनेंशियल कमिटीज देखने को मिलती हैं जिसके अंदर आपका एक तो आ गया पीएससी पब्लिक अकाउंट कमेटी एक आपका एस्टीमेट कमेटी और आपका जो कमेटी ऑन पब्लिक अंडरटेकिंग्स इन तीनों कमिटीज के बारे में जानते होंगे आज हम चर्चा करेंगे पीएससी के बारे में यूपीएससी के मेंस के अंदर भी पीएससी के ऊपर ऑलरेडी क्वेश्चन आ चुका है पीएसी ओल्डेस्ट पार्लियामेंट्री कमेटी है जिसको 1921 में एस्टेब्लिश किया गया था आप जानते हैं 1919 के अंदर मोंटेग्यू चेम्सफोर्ड रिफॉर्म्स आते हैं उसके बाद यहां पे पीएससी का गठन हमें देखने
को मिल जाता है यहां पर पब्लिक अकाउंट कमेटी का कांस्टीट्यूशन हर साल होता है इट इज कांस्टीट्यूटेड एवरी ईयर अंडर रूल 308 ऑफ रूल्स ऑफ प्रोसीजर एंड कंडक्ट ऑफ बिजनेस इन लोकसभा एक्चुअल में अगर मैं बात करूं ना यहां पे पीएससी की तो यहां पर टोटल आपको 22 मेंबर देखने को मिल जाएंगे जिसमें से 15 मेंबर आपके लोकसभा से आते हैं एंड सात मेंबर्स आते हैं आपके राज्यसभा से एस्टीमेट कमेटी के अंदर तो आप नोटिस करते होंगे ना कि सिर्फ और सिर्फ मेंबर लोकसभा से होते हैं पर पीएससी के अंदर दोनों से मेंबर हमें देखने
को मिल जाते हैं इंपॉर्टेंट बात आपको जो ध्यान में रखनी है अ मिनिस्टर इज नॉट एलिजिबल टू बी इलेक्टेड एज अ मेंबर ऑफ कमिटी पीएसी का मिनिस्ट कोई मेंबर जो होगा वो मिनिस्टर नहीं हो सकता यहां पर आपके दिमाग में एक सवाल आएगा कि लेट्स से सर एक कोई पर्सन था बेसिकली मैं एमपी था इसको हमने पीएसी का मेंबर बना दिया फिर आगे जाकर सरकार ने मान लो इसको मिनिस्टर बना दिया फिर क्या होगा देखो जैसे ही ये बंदा मिनिस्टर बन जाएगा ना अकॉर्डिंग वो पीएसी का सदस्य अब नहीं रहे दिस इज समथिंग यू मस्ट
रिमेंबर ठीक है अब पीएससी के जो टर्म ऑफ ऑफिस होती है ना वो एक साल की होती है एक्चुअल में क्या होता है जो मेंबर्स होते हैं वो हर साल इलेक्ट किए जाते हैं बाय द मींस ऑफ प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन का अर्थ आप समझते होंगे जहां पर क्या होता है जहां पर जो भी पार्टी होती है उनको उसी कांटेक्ट में सीट्स मिलती हैं जितने उनके नंबर ऑफ वोट्स उनको मिले होते हैं और यहां पर हमें जो सिस्टम यूज करते हैं दैट इज सिंगल ट्रांसफरेबल वोट इसके अलावा अगर मैं बात करूं पीएसी को मदर ऑफ
ल ऑल पार्लियामेंट्री कमिटीज के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि एग्जिब का अकाउंटेबल होल्ड करने के अंदर इनका रोल बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट बन जाता है यहां पर अगर आप नोटिस करोगे तो डब्ल्यू एम हेली जी थे ये इसके पहले चेयर पर्सन थे अगर हम बात करें इंडियन चेयर पर्सन की तो आपको भूपेंद्रनाथ मित्रा जी देखने को मिल जाते हैं जो चेयर पर्सन होते हैं उनको स्पीकर के द्वारा पॉइंट किया जाता है एक इंपॉर्टेंट बात आपको ध्यान में ये रखनी है कि हमारे यहां पे ना एक कन्वेंशन या एक प्रथा चल रही है जहां पर
ये बताया है कि 1967 ऑनवर्ड हमें नोटिस करने को मिलता है कि जो चेयर पर्सन होता है इस कमेटी का वो अपोजिशन से सिलेक्ट होता है देखो ये कहीं पर लिखा नहीं हुआ ये बेसिकली एक प्रथा है दिस इज जस्ट अ कन्वेंशन इसके अलावा अगर हम बात करें ठीक है गवर्नमेंट को यहां पर ये काउंटर करने की कोशिश करती है ठीक है किसी भी पर्सन को ये कॉल कर सकती है इन्वेस्टिगेशन वगैरह करने के लिए प्लस एट द सेम टाइम जो हमारे पास डीआरएससी होती हैं डिपार्टमेंट रिलेटेड स्टैंड एंड कमिटीज उनसे काफी ज्यादा पावर्स हमें
इनके पास देखने को मिल जाती है क्योंकि अपने आप में नाना अलग-अलग रिपोर्ट्स को यहां पे कर सकते हैं और कंसेंसस से यहां पे डिसीजंस लिए जाते हैं इनका काम क्या आता है काम यही रहता है कि सरकार का जो एक्सपेंडिचर है उसको एग्जामिन करते रहना यह देखना कि पार्लियामेंट जो है पैसा कैसे स्पेंड कर रही है राइट एंड अकॉर्डिंग ली कैसे उसका पैसा स्पेंड होगा तो गवर्नमेंट के फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस हो गया एक्चुअल एक्सपेंडिचर को यहां पे देखना आप लोग सीएजी का काम समझते होंगे कंट्रोलर ऑडिटर जनरल का तो सीएजी एक्ट्स एज अ फ्रेंड फिलोसोफर
एंड गाइड टू व्हिच कमेटी द आंसर इज टू पीएसी यह बात भी आपको पता होनी चाहिए तो आपकी जो कैक की रिपोर्ट्स होती है ना उनको रिव्यू करना भी पीएससी का काम रहता है इस तरह से फिस्कल मिस मैनेजमेंट कहीं पे हो रही है तो उनको आइडेंटिफिकेशन मेजर्स हम ला सकते हैं एंड अकॉर्डिंग ये पार्लियामेंट को इस तरह से रिपोर्ट यहां पे सबमिट करी जाती है तो ये बातें थी पीएससी के बारे में अब पीएससी न्यूज़ में इसलिए है क्योंकि दरअसल में ना पीएसी यहां पर परफॉर्मेंस रिव्यू करेगी आपकी अलग-अलग रेग रेगुलेटरी बॉडीज की जैसे
आपका सेबी हो गया आपका टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया हो गया इन सबको यहां पे ये रिव्यू किया जाएगा बाय पीएससी यहां पर रिव्यू के अंतर्गत और बाकी हो गया ऑडिट ऑफ फीज टैरिफ यूजर चार्जेस अलग-अलग आपके एयरपोर्ट्स वगैरह पे होते हैं उनको भी यहां पे रिव्यू करेंगे इस तरह से टोटल इसने 160 सब्जेक्ट्स को पिक किया हुआ है तो इस वजह से ये न्यूज़ में थी बाकी देखो रेगुलेटरी बॉडी भी आप समझते होंगे जैसे आपका आरबीआई है रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आपके बैंकिंग सेक्टर का रेगुलेटर की तरह काम करता है
सेबी भी आपका रेगुलेटर हो गया ट्राई हो गया इस तरह से आपके बहुत सारे रेगुलेटर्स हमें देखने को मिल जाते हैं दरअसल में आपके जो रेगुलेटर्स होते हैं ना वो आपको लेवल प्लेइंग फील्ड एस्टेब्लिश करने के अंदर मदद करते हैं जैसे अगर मैं बात करूं आपका स्टेट बैंक ऑफ इंडिया है और उसी तरह से आपका एचडीएफसी या आईसीआईसी हमें देखने को मिलता है एक तो सरकारी संस्था है एक आपकी प्राइवेट संस्था हमें देखने को मिल जाती है तो इस केस में अगर सरकार ही सारे रूल्स बनाएगी तो कहीं ना कहीं हो सकता है कि वो
फेवर यहां पे आपकी सरकारी संस्थाओं को करें तो रेगुलेटर का रोल ना एक लेवल प्लेइंग फील्ड एस्टेब्लिश करने के अंदर बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट हो जाता है और जो भी लॉज है स्टैंडर्ड उनको कंप्ला करना इंश्योर करवाना कि सब लोग उसको फॉलो करें तो डेफिनेटली रेगुलेटरी बॉडीज वहां पे काम करती है बहुत अच्छे से रिव्यू असेसमेंट हो गया लाइसेंसिंग हो गया इंस्पेक्शन हो गया आप देखते हो ना बैंकिंग लाइसेंस कौन देता है आरबीआई देता है रेगुलेशंस बताना हो गया जैसे उसके अलावा आपके करेक्टिव एक्शन जैसे पीसीए फ्रेमवर्क आप जानते होंगे राइट तो ये सारी चीजें हमें
देखने को मिल जाती है रेगुलेटरी बडी के फंक्शंस के तौर के ऊपर नेक्स्ट दोस्तों हमारा जो टॉपिक है दैट इज विद रिगार्ड्स टू एनिमी प्रॉपर्टी एक्ट अब ये क्या मुद्दा है आखिर एनिमी प्रॉपर्टी एक्ट का देखो आप लोग जानते होंगे कि इंडिया की ना दो देशों के साथ लड़ाई हुई है इन द पास्ट वी हैव फॉट वर्स एक आपका पाकिस्तान के साथ है और एक चाइना के साथ है बिल्कुल ठीक बात है अब मान लेते हैं कोई पर्सन था लेट्स से वो इंडिया में रहता था आगे जाकर उसने पता क्या गया जब लड़ाई हुई उस
समय या तो वह पाकिस्तान चला गया नागरिकता वहां की ले ली या चाइना की नागरिकता ले ली राइट तो एक्चुअल में क्या होता है ना यह दरअसल में इन देशों के नागरिक हैं जिनके साथ इंडिया ने युद्ध किया हुआ है तो यह एक तरह के हमारे एनीमीज हुए हालांकि हम बोलते नहीं है किसी को एनिमी एस सच ठीक है बट हमारे साथ इनका युद्ध हो चुका है तो दरअसल में यह जो लोग थे जो इन देशों के नागरिक बन गए हैं यहां पर ना हम इनकी जो भी प्रॉपर्टी है जो भी इनकी संपत्ति है चाहे
इनकी जमीन हो गया इनके शेयर्स हो गया या कुछ और कंपनीज वगैरह में ये हिस्सेदार थे एनीथिंग लाइक दैट वो सारी की सारी प्रॉपर्टी क्या बन जाएगी वो सारी प्रॉपर्टी बन जाएगी एनिमी प्रॉपर्टी डू यू अंडरस्टैंड दिस थिंग यहां पर क्या होता है ना इस चीज को हमने यहां पे एक एक्ट के अंदर ये चीजें डिफाइन कर रखी है कि यहां पर जो भी कोई ऐसा पर्सन था जो कहीं ना कहीं एनिमी सब्जेक्ट या एनिमी देखने को मिलता है मतलब एनिमी कंट्री के रिगार्डिंग हमें देखने को मिलता है उस चीज को हम यहां पे एनवी
प्रॉपर्टी में इंक्लूड कर लेते हैं कि वो प्रॉपर्टी जो उन इंडिविजुअल्स के द्वारा छोड़ी गई है या उन इंडिविजुअल्स की है प्रॉपर्टी जो कहीं ना कहीं चाइना या पाकिस्तान में माइग्रेट करके आफ्टर दीज वॉर्स जो हमें यहां पर देखने को मिली उस देश की उन्होने सिटीजनशिप ले ली कई बार ऐसा भी हो सकता है लेट्स से कोई पर्सन था जस्ट मैं आपको एग्जांपल देता हूं जैसे मान लो एक पर्सन था वो चाइना की सिटीजनशिप ले ली उसने पर बाद में जाके उसने आगे फ्यूचर में मान लो यूएसए की सिटीजनशिप ले ली तो क्या वो एनिमी
प्रॉपर्टी रहेगी द आंसर इज यस बिल्कुल रहेगी हमने ना पिछले 20177 में एक अमेंडमेंट किया था अमेंडमेंट के अंदर हमने एक बार बोल दिया कि मान लो कोई प्रॉपर्टी एक बार एनिमी प्रॉपर्टी बन गई ना अब वो एनिमी प्रॉपर्टी रहेगी ही रहेगी अदर वाइज पहले पता क्या होता था बड़ी दिक्कतें आती थी जब वो चाइना का सिटीजन था तब वो एनिमी प्रॉपर्टी बन गई फिर वो किसी दूसरे देश की सिटीजनशिप ले लेता था फिर कोर्ट कचहरी के चक्कर चलते थे कि नहीं ये प्रॉपर्टी मेरी है या आप अब तुम एनवी रहा ही नहीं ठीक है
ना तो ये सब चलता था पर हमने कहा नहीं हमने 2017 में एक एक्ट पास किया एंड उसके हिसाब से हमने बोल दिया कि वंस हमने एक बार किसी प्रॉपर्टी को एनवी प्रॉपर्टी डिक्लेयर कर दिया तो कोई फर्क नहीं पड़ता वो बंदा मर गया वो बंदा दूसरी सिटीजनशिप ले ली वो बंदा जो फर्म थी वो एजिस्ट करनी बंद कर दी नहीं व्हाट एवर जो मर्जी होए वो एक बार एनिमी प्रॉपर्टी बन गई है तो एनिमी प्रॉपर्टी यहां पे रहेगी अब यहां पर जो मुद्दा है दरअसल में वो पाकिस्तान के जो फॉर्मर पाकिस्तान प्रेसिडेंट है परवेज
मुशर्रफ जी उनकी भी यहां पे ना मतलब कुछ जमीन होगी उत्तर प्रदेश के अंदर अंदर ठीक है ना तो उसको भी अभी ऑक्शन किया जाएगा अंडर द एनिमी प्रॉपर्टी एक्ट इस वजह से ये न्यूज़ में आ चुका है मैंने आपको मीनिंग समझा दिया इस चीज का यहां पर ना पहले हमारे पास ना डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट 1962 हुआ करता था जिसके माध्यम से जो हमारे पाकिस्तान जो पाकिस्तान नेशनल्स थे उनकी प्रॉपर्टीज और उनकी कंपनीज को हमने टेक ओवर किया था बाद में सेम चीज चाइना के साथ भी हुई फिर बाद में हमने एक एक्ट ही
बना दिया एनिमी प्रॉपर्टी एक्ट 1968 का और मैंने आपको बताया यहां पर अमेंडमेंट हुआ 2017 के अंदर जहां पर हमने इस चीज को ये कह दिया कि एक बार एनवी प्रॉपर्टी डिक्लेयर हो चुकी है तो इट विल ऑलवेज स्टे एज एनिमी प्रॉपर्टी अब यहां पर ना हमारे पास एक संस्था है इस संस्था का आपको नाम ध्यान में रखना है कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया दरअसल में ये आपको एक डिपार्टमेंट देखने को मिलेगा अंडर मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स तो दरअसल में ना ग्रह मंत्रालय है ग्रह मंत्रालय के अंदर अगर हम नोटिस करें सी ईपीआई करके
जो संस्था है इसको एस्टेब्लिश किया गया है ताकि ये प्रॉपर्टीज को अकॉर्डिंग एडमिनिस्टर कर पाए अगर हम देश की बात करें तो उत्तर प्रदेश के अंदर सबसे ज्यादा नंबर ऑफ़ एनिमी प्रॉपर्टीज देखने को मिल जाती है उसके बाद दूसरा नंबर आपका वेस्ट बंगाल का देखने को मिल जाएगा इंपॉर्टेंट बात आप ध्यान में यह रखो कि सिर्फ जमीन की बात नहीं हो रही प्रॉपर्टी का मतलब सिर्फ जमीन नहीं है इसके अलावा आपका जो भी बैंक अकाउंट है शेयर्स गोल्ड या और भी जो कोई एसेट होंगे ना वो सारे के सारे आपके एनवी प्रॉपर्टी के अंतर्गत आते
हैं दिस इज समथिंग यू शुड नो अब यह मत कहना कि सर हमारे तो कई देशों के साथ और भी संबंध अच्छे नहीं है हमें सिर्फ यह देखना है हमारा युद्ध किसके साथ हुआ है तो सिर्फ सिर्फ पाकिस्तान और चाइना दैट इज इट ये दो कंट्रीज की ही बात होगी यहां पर यह मत कहना कि सर उस देश के साथ भी हमारा संबंध अच्छे नहीं है तो क्या वो भी एनिमी प्रॉपर्टी है नहीं यहां पर हमने दो ही कंट्रीज को यहां बोला हुआ है दैट इज पाकिस्तान एंड चाइना क्योंकि इन्हीं के साथ हमने अभी तक
युद्ध लड़ा है पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ये थोड़ा देखो जो मुद्दा है ये थोड़ा स्टैटिक के साथ ज्यादा लिंक्ड है ठीक है पर थोड़ा सा मैं आपको एक्सप्लेन करने की कोशिश करता हूं एक्चुअल में जैसे अब नई पार्लियामेंट फॉर्म हुई है डेफिनेटली तो हमारी यहां पे कोशिश है कि फाइनलाइज कर पाए डिपार्टमेंट रिलेटेड स्टैंडिंग कमिटीज पार्लियामेंट की उसके ऊपर काम किया जा रहा है कि उनको अंदर कौन-कौन मेंबर्स होंगे उनको फाइनलाइज करने का जो पूरा प्रोसेस है ना वो चल रहा है देखो एक्चुअल में अगर मैं बात करूं ना पार्लियामेंट्री कमेटी की तो पार्लियामेंट्री कमेटी होती
क्या है यह दरअसल में एक कमेटी होती है एमपीज की इस एमपीज की कमेटी के अंदर आपके लोकसभा के भी राज्यसभा के भी मेंबर हो सकते हैं एंड इनको या तो हाउस के द्वारा अपॉइंटमेंट है आपके राज्यसभा के वो यहां पर उनको नॉमिनेट करते हैं दरअसल में अगर हम बात करें ना तो आपको संविधान के अंदर आर्ट आर्टिकल 105 देखने को मिलता है अगर आप इस आर्टिकल को पढ़ोगे तो यहां पर बात की जाती है कि क्या पार्लियामेंट की क्या पावर्स हैं क्या पार्लियामेंट की क्या प्रिविलेजेस है राइट और साथ ही साथ इन मेंबर्स के
साथ-साथ जो कमिटीज बनेगी उनकी क्या पावस और प्रिविलेज होंगी ऐसा यहां पर आर्टिकल 105 में लिखा गया है साथ ही साथ अगर हम बात करें आर्टिकल 118 की 118 की अगर हम बात करें तो यहां पर बात करता है कि हर हाउस यानी कि लोकसभा और राज्यसभा उसके पास पावर्स है कि व अपने रेगुलेशंस के लिए जो भी उनको कांस्टीट्यूट करना है उनको कांस्टीट्यूट कर सकते हैं उनके प्रोसीजर्स के लिए और उनके बिजनेस कंडक्ट के लिए वो जो भी है दे कैन मेक देयर रूल्स तो ये आर्टिकल 118 और आर्टिकल 105 यहां से पावर होती
है इंपॉर्टेंट बात आपको ध्यान में रखनी है कि पार्लियामेंट्री कमिटीज का जो आपका पूरा का पूरा चीज है ना यह दरअसल में ब्रिटिश पार्लियामेंट से ओरिजनेट हुआ था वहीं से हमने इस चीज को पिक किया है अब यहां पर अगर हम डिस्कस करें कमिटीज को दो तरह से क्लासिफाई किया जा सकता है एक है आपकी स्टैंडिंग कमिटीज एंड दूसरी आपकी एड हॉक कमिटीज स्टैंडिंग कमिटीज क्या होती हैं स्टैंडिंग कमिटीज आपकी परमानेंट कमिटीज हमें देखने को मिल जाती हैं जो कि आपकी आपकी संवि आपके पार्लियामेंट के द्वारा जिनको कांस्टीट्यूट किया जाता है जैसे फॉर एग्जांपल अगर
मैं आपके सामने बात करूं आप एस्टीमेट कमेटी की बात कर सकते हो कल भी हमने इसका डिस्कशन किया था थोड़ा सा यहां पर आपको 30 मेंबर्स देखने को मिलते हैं जो पोरली लोकसभा से इलेक्ट किए जाते हैं जिनका टेनोर एक साल का होता है उसके अलावा आपके साथ जब हमने पैक डिस्कशन किया था हमने देखा था यहां पर टोटल 22 मेंबर होते हैं जिनमें से 15 लोकसभा से और सात राज्यसभा से मेंबर देखने को मिलते हैं जिनका टेनर आपको 1 साल का देखने को मिल जाएगा उसी तरह से अगर मैं बात करूं आपके पब्लिक अंडरटेकिंग
कमेटी की यहां पर भी 22 मेंबर ही होते हैं और 15 + 7 वाला कॉमिनेशन यहां भी हमें देखने को मिल जाता है तो ये सारी चीजें होती हैं स्टैंडिंग कमिटीज जिनमें से कुछ एग्जांपल फाइनेंशियल कमिटीज के मैंने आपको यहां पे दिए इसके अलावा भी बहुत सारी स्टैंडिंग कमिटीज होती हैं जैसे कमिटीज टू अ हाउसकीपिंग कमेटी हो गया आपका एथिक्स कमेटी हो गया कमेटी ऑन पिटीशन एंड प्रिविलेज हो गया इससे ब्रा से बहुत सारी कमिटीज होती हैं पर जब मैं बात करता हूं एडक कमिटीज की तो एड हॉक का तो मीनिंग ही एक पर्टिकुलर पर्पस
के लिए होता है तो यानी कि एड हॉक कमेटी अपने आप में क्या हो जाती है यह बन जाती है आपकी टेंपरेरी कमिटीज हमें देखने को मिल जाती हैं जो किसी स्पेसिफिक बिल को रिव्यू करने के अंदर मदद करती है जैसे अगर मैं आपको एग्जांपल दूं मान लेते हैं कि जैसे एमपी लड्स है य एमपी लड स्कीम्स को किसी पर्टिकुलर कमेटी ने रिव्यू करना होगा ना तो उस पर्टिकुलर पर्पस के लिए कमेटी बना दी जाएगी अलग से ठीक है इस तरह से आपकी रेलवे कन्वेंशन के ऊपर कमेटी तो यानी कि ना वो पर्टिकुलर परपस के
लिए बनी जैसे ही वो पर्पस खत्म हो गया वो अकॉर्डिंग उनको डिजॉल्वेशन कमेटी हमें देखने को मिलती है शेड्यूल का शेड्यूल ट्राइब ओबीसी के वेलफेयर के लिए कोशिश यही होती है कि एक तरह से ना यहां पर अच्छे से हम बिल्स को डिटेल में एग्जामिन कर पाए क्योंकि देखो इतने सारे बिल्स आते हैं तो हर किसी को पार्लियामेंट के अंदर उतनी डिटेल से शायद डिस्कस करना पॉसिबल नहीं रहता प्लस हर पर्टिकुलर पॉइंट को निटी ग्रीटी में आके डिस्कशन करना आपस में मिलजुलकर उनके ऊपर सहमति बनाना यह थोड़ा सा आसान बन जाता है व्हेन इट कम्स
टू पार्लियामेंट्री कमेटी प्लस रिकमेंडेशंस ये देती है एंड कहीं ना कहीं मिनिस्टर्स को ऑफिशल्स को समन किया जा सकता है एंड एक तरह से ना जो सरकार का काम है उसको रिव्यू करना उसको स्क्रुटनाइज करने में बहुत ज्यादा मदद कर देता है आपका जो पार्लियामेंट्री कमेटी होती है एंड प्लस अगर हम नोटिस करें यहां पर पब्लिक एंगेजमेंट का भी ऑप्शन एक रहता है क्योंकि जो कमिटीज के माध्यम से जो लोगों का सुझाव है ना उनको भी हम यहां पर इनकॉरपोरेट कर सकते हैं एंड जो लॉज हम बना रहे हैं वो और भी स्ट्रेंथ होंगे प्लस
एट द सेम टाइम आपकी जो पार्लियामेंट्री कमेटी है वह चेक्स एंड बैलेंस का भी काम करती है क्योंकि यहां पर सरकारी पॉलिसीज एंड साथ-साथ सरकार को अकाउंटेबल रखने के अंदर इन सभी पार्लियामेंट्री कमेटी का बहुत इंपोर्टेंट रोल रहता है स्टैंडिंग की बात कर दी तो परमानेंट बात कर दी अड की बात करूंगा तो व टेंपरेरी कमिटी को आप जिक्र कर सकते हो एडिशनल सॉलिसिटर जनरल आप लोगों ने अटॉर्नी जनरल के बारे में सुना होगा बिल्कुल अब एक्चुअल में क्या होता है ना कि कई बार सेंट्रल गवर्नमेंट केस लड़ती है सुप्रीम कोर्ट या बाकी कोर्ट्स के
अंदर तो सरकार की तरफ से लॉयर कौन होता है द आंसर इ अटॉर्नी जनरल पर अटॉर्नी जनरल अकेले थोड़ी होते हैं अटॉर्नी जनरल के अलावा आपको सॉलिसिटर जनरल देखने को मिलते हैं और साथ ही साथ हमें यहां पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल्स भी देखने को मिल जाते हैं राइट सरकार का कोई केस होता है जहां पर सरकार को रिप्रेजेंट करना होता है कोर्ट के अंदर तो वो इनके द्वारा ही यहां पर रिप्रेजेंट किया जाता है अब आपको इंपॉर्टेंट बात जो पता होनी चाहिए वो यह है कि जब हम बात करते हैं ना अटॉर्नी जनरल की यह
तो दरअसल में क्या है यह तो एक संवैधानिक बॉडी है यानी कि कांस्टीट्यूशनल पोस्ट हमें देखने को मिल जाती है अगर आपने आर्टिकल 76 पढ़ा हुआ होगा ना तो उसमें मेंशन है अटॉर्नी जनरल के बारे में बिल्कुल ठीक बात है तो अटॉर्नी जनरल तो डेफिनेटली आपके कांस्टीट्यूशनल पोस्ट अ देखने को मिल जाएगी पर जब मैं बात करता हूं ना सॉलिसिटर जनरल की या आपके एडिशनल सॉलिसिटर जनरल की अब आपको ध्यान में ये रखना है ये संविधान के अंदर दिस इज नॉट अ कांस्टीट्यूशनल बॉडी फिर ये दरअसल में क्या है ये आपकी एक स्टैचूट पोस्ट है
स्टैचुअरी का मतलब होता है लॉ से बनी हुई पोस्ट बेसिकली एक एक्ट से बनी हुई पोस्ट कौन सा एक्ट है यहां पे यहां पे हमारे सामने एक एक्ट देखने को मिलता है लॉ ऑफिसर्स एक्ट 1968 ये एक्ट के माध्यम से ये स्टेट्यूटरी के माध्यम से सॉलिसिटर जनरल और एडिशनल सस्टर जनरल की यहां पे पोस्ट को क्रिएट किया गया है तो ये बातें आपको पता होनी चाहिए तो अभी क्या हुआ है अभी सरकार के द्वारा छह सीनियर एडवोकेट्स को एडिशनल सस्टर जनरल अपॉइंटमेंट करेंगे सुप्रीम कोर्ट के अर अर ठीक है यह एडिशनल सोस्टर जनरल ही है
जो आपके सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया और साथ ही साथ आपके जो अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया है उनको असिस्ट करते हैं सरकार को एडवाइस करते हैं एंड अकॉर्डिंग यूनियन ऑफ इंडिया को रिप्रेजेंट करते हैं लीगल मैटर्स अब इंपॉर्टेंट बात जो ध्यान में रखनी है कि इनको अपॉइंटमेंट सेक्रेटरी हैं या फिर जो लॉ सेक्रेटरी है इन द डिपार्टमेंट ऑफ लीगल अफेयर्स वो यहां पर ना कुछ नामों का प्रपोजल भेजते हैं किसको भेजते हैं आपकी जो कैबिनेट कमेटी ऑन अपॉइंटमेंट होती है आप लोग जानते होंगे कि इस कैबिनेट कमेटी को ना हमारे जो प्रधानमंत्री जी हैं वो हेड
करते हैं तो जो इनके पास अकॉर्डिंग रिकमेंडेशन आती है अकॉर्डिंग उसको देखते हुए सलिर जनरल ऑफ इंडिया एंड एडिशनल सलिर जनरल्स को यहां पे अपॉइंटमेंट बाकी बात मैंने आपको बताई दी किस तरह से इनको गवर्न किया जाता है तो देयर इज अ लॉ ऑफिसर रूल्स 1987 और इसी लॉ ऑफिसर एक्ट के माध्यम से ही ये जो स्टैचूट पोर्ट्स हैं सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया एंड एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया इनको यहां पे क्रिएट किया गया है बाकी आप नोटिस करोगे सोलेस जनल ऑफ इंडिया दरअसल में आपके एक सबोर्डिनेट ऑफिस आता है टू द आपका अटनी जनरल
ऑफ इंडिया दरअसल में एजे आपका ऊपर आ जाएंगे एंड अकॉर्डिंग उसका जो सबोर्डिनेट ऑफिस है दैट इज सस्टर जनरल ऑफ इंडिया ये सेकेंडरी लॉ ऑफिसर होते हैं प्राइमरी लॉ ऑफिसर कौन है जीजीआई सेकेंडरी लॉ ऑफिसर कौन हुआ आपका एसजीआई राइट इस तरह से आप यहां पर चीजें पढ़ सकते हो यह मैंने आपको एक्सप्लेन कर ही दिया है अगला दोस्तों हमारा जो टॉपिक जैसे मैं आपको स्टार्टिंग में भी रहा था राइट टू प्रोटेस्ट के बारे में एक्चुअल में हमारे जो चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया है डी वाई चंद्रचूड़ जी उन्होंने बोला था कि डॉक्टर्स को काम रिज्यूम
करना चाहिए पर अभी तक वो चीज नहीं हुई है तो थोड़ा सा हम समझते हैं कि राइट टू प्रोटेक्स कहां पे हमें पॉलिटी के कॉन्टेक्स्ट में देखने को मिलता है अगर हम बात करें ना राइट टू प्रोटेक्ट की तो आप ध्यान में रखोगे यह कोई अलग से फंडामेंटल राइट हमें नहीं देखने को मिलता अलग से मेंशन कहीं नहीं है पर अगर हम नोटिस करें आर्टिकल 191 ए की तो आपके पास फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन है इसी फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन के अंतर्गत आ जाता है कि आप कहीं ना कहीं अपनी आवाज बता सकते
हो एक प्रोटेस्ट के माध्यम से मैंने जैसा कहा ना एक्सप्लीसिटली मेंशन नहीं है बट इनडायरेक्टली जरूर है उसी तरह से 191 बी बात करता है राइट टू असेंबल पीसफुली एंड विदाउट आर्म्स ठीक है ना तो ये असेंबली पीसफुली क्या है ये भी एक तरह से प्रोटेस्ट की तरफ यहां पे हाईलाइट कर रही है उसके अलावा 191 सी की बात करें यह फ्रीडम टू फॉर्म एसोसिएशन या यूनियंस डेफिनेटली उसके रिगार्डिंग ये चीज आ जाती है उसके अलावा अगर हम बात करें आर्टिकल 21 की जो बात करता है राइट टू लाइफ विद डिग्निटी की तो डेफ उसका
भी एक इंपोर्टेंट पार्ट ये बन जाता है पर यहां पर आप नोटिस करोगे ना आर्टिकल 192 के अंतर्गत यहां पर हमारे पास कुछ रिस्ट्रिक्शन भी मेंशन है जिनको हम रीजनेबल रिस्ट्रिक्शन के नाम से जानते हैं जैसे यहां पर आपका इंटरेस्ट ऑफ सॉवरेन एंड इंटीग्रिटी ऑफ इंडिया सिक्योरिटी ऑफ द स्टेट फ्रेंडली रिलेशन हो गया वायलेशन ऑफ पब्लिक ऑर्डर हो गया ठीक है ना आपका डीसेंसी और मोरालिटी हो गया कंटेम ऑफ कोर्ट हो गया डिफॉर्मेशन हो गया इनसाइटमेंट ऑफ इन फेंस हो गया यह सारे रिस्ट्रिक्शंस है इस चीज के ऊपर यानी कि आपका यह जो फंडामेंटल राइट्स
होते हैं ये एब्सलूट तो होते नहीं इनके ऊपर कुछ रीजनेबल सेक्शंस हैं एंड वो रीजनेबल सेक्शन यहां पे हमने डिस्कस करी है और क्या पॉइंट है हमें जाने चाहिए जो राइट टू स्ट्राइक है ना ये भी अपने आप में कहीं कांस्टिट्यूशन में मेंशन नहीं है पर आप नोटिस करोगे ये अपने आप में एक लीगल राइट बन जाता है क्योंकि एक्चुअल में हमारे सामने ना इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट है पहले इंडिपेंडेंस से पहले ट्रिब्यूट सॉरी जो ट्रेड डिस्प्यूट एक्ट था 1929 का वो देखने को मिलता था पर अकॉर्डिंग इंडिपेंडेंस के बाद हमारे सामने जो एक्ट आता है
दैट इज इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट 19 47 एंड डेफिनेटली इस एक्ट के माध्यम से अगर ये चीज अलाउड है तो इसके ऊपर कुछ रिस्ट्रिक्शंस भी यहां पे मेंशन है तो ये बात आपको पता होनी चाहिए अब देखो कुछ इंपोर्टेंट कोर्ट जजमेंट्स है इसी के रिगार्डिंग जैसे वन ऑफ द इंपोर्टेंट कोर्ट जजमेंट हैपेंस टू बी रामलीला मैदान इंसिडेंट वर्सेस होम सेक्रेटरी यूनियन ऑफ इंडिया 2012 अब इस पर्टिकुलर केस के अंदर सुप्रीम कोर्ट ने ये बोला था कि सिटीजंस के पास फंडामेंटल राइट है असेंबली का एंड पीसफुल प्रोटेस्ट का जो कि कहीं ना कहीं आर्बिट्रेरी या एग्जेक्युटल ऑर्डर
के द्वारा यहां पे नहीं लिया जा सकता छीना नहीं जा सकता यानी कि प्लस एट द सेम टाइम अगर हम बात करें शाहीन बाग प्रोटेस्ट की तो शाहीन बाग प्रोटेस्ट 2019 के अंदर सुप्रीम कोर्ट ने ये बोला कि डेफिनेटली आपके पास राइट टू पीसफुल प्रोटेस्ट है अगेंस्ट द लॉ पर यह भी बोल दिया कि आप पब्लिक वेज को पब्लिक स्पेसेस को ऑक्यूपाइड दैट टू इंडेफिनटली तो बिल्कुल भी नहीं तो यह बात भी आपको शाहीन बाग प्रोटेस्ट के कॉन्टेक्स्ट में पता होनी चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट ने क्या बोला था चेयरमैन ऑफ द पार्लियामेंट्री कमेटी ऑन ऑफिशियल
लैंग्वेज देखो अभी हमारे जो होम मिनिस्टर हैं अमित शाह जी इनको री इलेक्ट किया गया है एज द चेयर पर्सन ऑफ पार्लियामेंट्री कमेटी ऑन ऑफिशियल लैंग्वेज अब आप पूछेंगे ये आखिर मुद्दा क्या है क्यों इनको इलेक्ट किया गया देखो अगर हम बात करते हैं ना भारत की तो भारत के अंदर जब मैं बात करता हूं ऑफिशियल लैंग्वेज की तो दरअसल में देश के अंदर हमें दो ऑफिशियल लैंग्वेज देखने को मिलती हैं एक है आपकी हिंदी और दूसरा है आपकी इंग्लिश मैं थोड़ा इसको एक्सप्लेन कर देता हूं कि क्यों ये मैं दो कह रहा हूं एक्चुअल
में अगर हम बात करें ना ऑफिशियल लैंग्वेज एक्ट की तो उसके अंदर यह लिखा गया है कि जो यूनियन गवर्नमेंट होगी वह यहां पर क्या करेगी हिंद हिंदी को प्रमोट करेगी राइट प्रमोट हम हिंदी को करेंगे पर अगर हम बात करें आपके जो भी एडमिनिस्ट्रेटिव ड डॉक्युमेंट्स हो गया वहां पर दोनों को यूज किया जाएगा हिंदी और इंग्लिश को तो है दोनों आपकी ऑफिशियल लैंग्वेज पर कहीं ना कहीं हिंदी को यहां पर ज्यादा फोकस किया जाता है ताकि उसको हम यहां पे और प्रमोट कर पाए ये ऑफिशियल लैंग्वेजेस की बात करता हूं तो दो लैंग्वेजेस
हैं अगर मैं बात करता हूं आपके शेड्यूल लैंग्वेजेस की जो कि आपके एथ शेड्यूल के अंदर देखने को मिलती है तो वहां पर टोटल आपको 22 लैंग्वेज देखने को मिल जाती हैं ये कंफ्यूज मत होना कि शेड्यूल लैंग्वेज क्या है और ऑफिशियल लैंग्वेज क्या है ऑफिशियल लैंग्वेज दो ही है शेड्यूल लैंग्वेज 22 है जो आपके एट शेड्यूल के अंदर है एंड कोई आपसे पूछे कि देश की नेशनल लैंग्वेज कौन सी है राष्ट्रीय भाषा देश की कौन सी है द आंसर इज देश की कोई राष्ट्रीय भाषा नहीं है वेरी वेरी इंपोर्टेंट पॉइंट जो आपको ये ध्यान
में रखना है ऑफिशियल लैंग्वेज दो है ठीक है अब यहां पर क्या होगा यहां पर इस पर्टिकुलर ऑफिशियल लैंग्वेज के जो आपकी जो पार्लियामेंट्री कमेटी थी इसका क्या परपस रहता है इसका पर्पस देखो यही रहता है पार्लियामेंट्री कमेटी मैंने आपको समझाया हुआ है इसका मीनिंग क्या होता है अब ये कमेटी का पर्पस ये होगा कि हिंदी का जो हम ना यूसेज है वो इंक्रीज करवाए ठीक है ना ऑफिशियल पर्पसस के लिए इसके साथ ही साथ हिंदी को ना एक तरह से आपकी जो रीजनल लैंग्वेज होती हैं उनका एक दोस्त बनाए इसको कंपीटर की तरह ना
देखा जाए कि हिंदी आ जाएगा तो बाकी रीजनल लैंग्वेज चले जाएंगे नहीं हिंदी के साथ-साथ बाकी रीजनल लैंग्वेजेस भी चले हमें कोई दिक्कत थोड़ी है उस चीज के साथ राइट इसके अलावा अगर हम बात करें ऑफिशियल कम्युनिकेशंस के साथ यहां पे हिंदी का प्रमोशन हमें यहां पे करना चाहिए तो ये यहां पे इसका काम रहता है एंड अकॉर्डिंग यहां पे ये रिपोर्ट बनाते हैं फिर अकॉर्डिंग रिपोर्ट प्रेसिडेंट जी को सबमिट करी जाती है एंड प्रेसिडेंट जी के द्वारा वो दोनों हाउसेस के सामने यहां पे रखी जाती है एंड साथ-साथ आपकी जो स्टेट गवर्नमेंट्स होती है
उनके साथ भी ये रिपोर्ट शेयर करी जाती है ये काम होता है आपकी पार्लियामेंट्री कमेटी ऑन ऑफिशियल लैंग्वेज का इसको चेयर कौन करते हैं हमारे जो होम मिनिस्टर जी तो 1976 के अंदर इसको बनाया गया था अंडर द सेक्शन फोर ऑफ ऑफिशियल लैंग्वेज एक्ट 1963 तो ये बात आप ध्यान में रखोगे ये सेक्शन फोर ही है इस ऑफिशियल लैंग्वेज का जो बात करता है इसकी कमेटी की एंड अकॉर्डिंग जो जो काम होते हैं उसके रिगार्डिंग यहां पर आपको टोटल 30 मेंबर देखने को मिलते हैं जिसमें 20 लोकसभा से होते हैं एंड 10 होते हैं राज्यसभा
से तो यह पॉइंट आपको बिल्कुल ध्यान में रखना चाहिए पार्लियामेंट्री कमेटी ऑन ऑफिशियल लैंग्वेज अगला दोस्तों हमारा टॉपिक है नालसा के बारे में नालसा की जब मैं बात करता हूं तो नालसा लोक अदालत सेटल्स ओवर 1 करोड़ केसेस देखो 1 करोड़ से भी ज्यादा केसेस यहां पे हुए हैं जिनको सेटल किया गया है अंडर नालसा इसी साल जो तीसरा हमें इस तरह का नालसा का इवेंट यह देखने को मिलता है दरअसल में जो दो थे वह रेडी इसी साल हुए थे तो तीसरा हमें इस साल में जो देखने को मिला वहां पर लगभग 1 करोड़
केसेस को सेटल किया गया एक्चुअल में अगर हम नोटिस करेंगे नालसा का पर्पस क्या है नालसा का पर्पस ये है कि फ्री लीगल सर्विस प्रोवाइड करी जा पा है टू द वीकर सेक्शन अब आप पूछेंगे यहां पे वीकर सेक्शन का मतलब क्या है देखो वीकर सेक्शन के अंदर ना यहां पे डिफरेंट डिफरेंट एंटिटीज आ जाती हैं जैसे अगर मैं बात करूं वुमन एंड चिल्ड्रन हो गया शेड्यूल का शेड्यूल ट्राइब के मेंबर्स हो गया इंडस्ट्रियल वर्कमैन हो गया कोई मास डिजास्टर के विक्टिम हो गया वायलेंस फ्लड ड्रॉट इनसे कोई इफेक्टेड पर्सन है अब हम डेफिनेटली चाहेंगे
ना सारी जो कैटेगरी हैं इनको अच्छे से क्या मिल पाए इनसे अच्छे से इंसाफ मिल पाए फ्री लीगल सर्विसेस वजह से इनको यहां पे प्रोवाइड कर जाए हैं नालसा के द्वारा डिसेबल्ड पर्सन हो गया पर्सन इन कस्टडी हो गया ये सब चीजें इसके साथ ही अगर मैं बात करूं ना यहां पर अगर मान लो कोई मुद्दा है जो आपका सुप्रीम कोर्ट में नहीं है मतलब या तो हाई कोर्ट में है या किसी लोअर कोर्ट में है तो उस केस में ना वहां की जो स्टेट गवर्नमेंट होती है वो बताती है कि कौन से बंदे को
कितना इनकम के नीचे यहां पे बेनिफिट मिल सकता है कि मान लो कोई पर्सन है वो ₹1 लाख से कम कमाता है तो किसी स्टेट में ये लिमिट 1 लाख हो सकती है किसी जगह पे और लिमिट चेंज हो सकती है तो दिस मैटर्स फ्रॉम स्टेट टू स्टेट पर अगर कोई मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के अंदर है तो वहां पर ये जो नंबर आ जाता है वो 5 लाख से कम की वैल्यू आ जाती है उस केस में आप अपना जो मुद्दा है वो यहां पर ली फ्री लीगल सर्विसेस के माध्यम से उसके रिगार्डिंग आप एलिजिबल
हो जाते हो तो यहां पर बात करें नालसा की कोशिश यही है कि एक तरह से जुडिशरी के ऊपर जो बर्डन है उसको कम किया जा पाए प्लस एट द सेम टाइम जो आपके केसेस हैं उनका निपटारा हम जल्दी से जल्दी कर पाएं तो अलग-अलग लेवल के ऊपर देखने को मिलती है जैसे फॉर एग्जांपल नेशनल लेवल के ऊपर है आपका स्टेट लेवल डिस्ट्रिक्ट लेवल तालुका लेवल एंड इसके साथ-साथ हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट लेवल के ऊपर आपको ये देखने को मिल जाती हैं नेशनल लेवल के ऊपर जो पैट्रोल इन चीफ है वो आपको चीफ जस्टिस ऑफ
इंडिया देखने को मिल जाते हैं एंड उसके जो चेयरमैन होते हैं वो आपके सुप्रीम कोर्ट के रिटायरिंग या आपके रिटायर्ड या सर्विंग जज हमें देखने को मिलते हैं उसके अलावा स्टेट लेवल प बात करूं तो यहां पर आपके पास जैसे यहां पे नालसा थी नेशनल लेवल के ऊपर यहां पे स्टेट लेवल के ऊपर आपको स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी देखने को मिल जाती है जिसके पेट्रोन इन चीफ वहां के चीफ जस्टिस ऑफ स्टेट हाई कोर्ट होते हैं इसके साथ ही डिस्ट्रिक्ट लेवल के ऊपर भी है एंड बाकी लेवल्स के ऊपर भी देखने को मिल जाती है
देखो नालसा दरअसल में करता क्या है ना नालसा हेल्प्स अस इन आपके जो कांस्टिट्यूशन के अलग-अलग आर्टिकल्स हैं उनको अच्छे से इंप्लीमेंट करने में मदद करता है जैसे आर्टिकल 221 की अगर हम बात करें तो वहां पे डेफिनेटली लिखा हुआ है कि आप अपने मनपसंद लीगल प्रैक्टिशनर के पास जाके उसको डिफेंड करने की मतलब डिफेंड करवा सकते हो उससे आर्टिकल 39a जिसको यहां पे ऐड बाद में किया गया था 1976 के अमेंडमेंट के अंदर 42 कांस्टिट्यूशन अमेंडमेंट के अंदर वो यही बात करता है कि आपके जो पूरा और वीकर सेक्शन है ना उनको फ्री लीगल
एड मिले ठीक है इसके अलावा आर्टिकल 14 जो आपका इक्वलिटी बिफोर लॉ की बात करता है आर्टिकल 21 राइट टू लाइफ की बात करता है तो इस सारी चीजों को आपके इंप्लीमेंट करने के अंदर नालसा मदद करता है बाकी इसके साथ ही बात करें लोक अदालत की तो डेफिनेटली लोक अदालत्स क्या है एक तरह से नालसा के लोक अदालत ने तो सेटल किए हैं तो लोक अदालत्स कुछ नहीं आपके अल्टरनेटिव डिस्प्यूट रेजोल्यूशन मैकेनिज्म है ठीक है ना कि कोर्ट कचहरी के अंदर कई सालों साल लग जाते हैं हमारी कोशिश है कि आसानी से हम उन
चीजों को टैकल कर पाएं आसानी से उन चीजों को हैंडल कर पाएं जैसे फॉर एग्जांपल कोई मुद्दा है जो कोर्ट ऑफ लॉ के अंदर पेंडिंग है या फिर प्री डिकेशन स्टेज के ऊपर है वहां उनके ना आपस में मिलकर आप उनको आराम से सॉल्व कर लो नहीं तो कई साल लगेंगे पैसा लगेगा डिले होगा ठीक है ना तो इस वजह से यहां पर जो एक्ट था 1987 का लीगल सर्विस अथॉरिटी एक्ट उसके माध्यम से इसको यहां पे स्टैचूट स्टेटस यहां पे मिला हुआ है जो भी ये फैसला देते हैं जो भी अवार्ड देते हैं वो
अपने आप में बाइंडिंग होता है एंड फाइनल होता है एंड यहां पे कोई अपील उसके अगेंस्ट नहीं होती बाकी मैंने आपको बता दिया डिस्ट्रिक्ट स्टेट और नेशनल लेवल के ऊपर यहां पर अकॉर्डिंग ऑर्गेनाइज किया जाता है वोट ऑन अकाउंट वर्सेस इंटरम बजट के बारे में देखो जब मैं बात करता हूं ना किस चीज की जब हम बात करते हैं आपके वोट ऑन अकाउंट की तो आपको ध्यान में ये रखना है कि यहां पर क्या होता है ना यहां पर सिर्फ और सिर्फ एक्सपेंडिचर की बात होती है किसकी बात होती है सिर्फ सरकार के खर्चे की
बात होती है एक्चुअल में क्या होता है ना कई बार ऐसा होता है कि मान लो बहुत ही शॉर्ट पीरियड है राइट तो उस शॉर्ट पीरियड के लिए जो भी सरकार को खर्चा करना है तो वो खर्चे को अकॉर्डिंग ली देखा जा स सकता है वोट ऑन अकाउंट के अंतर्गत अब यह जो आपका खर्चा होता है यह आपका वोट ऑन अकाउंट आपका इलेक्शंस के समय भी हो सकता है या कोई नॉर्मल ईयर है जहां पर इलेक्शन नहीं आने वाले वहां पर भी ये चीज हो सकती है बस पॉइंट इसका ये होता है कि कि अकॉर्डिंग
ली ना जब तक सारा पूरा प्रोसेस हो रहा है उस तब तक के लिए यहां पर थोड़ा एक्सपेंडिचर मीट ऑन करने के लिए ये चीजों को यूज किया जा पाए वेरस जब मैं बात करता हूं ना आपके इंटरम बजट की अब टेक्निकली देखा जाए ना इंटरम बजट को भी आप कभी भी ला सकते हो चाहे आपका वो फाइनें आपका जो इलेक्शन वाला साल है उस समय भी या फिर रेगुलर साल है राइट तो उसमें फर्क नहीं पड़ता आप ला सकते हो पर कहीं ना कहीं जो इंटरम बजट होता है ये तब तक आपका फोर्स में
रहता है जब तक आपका कंप्लीट बजट या फुल बजट आपका नहीं आ जाता ठीक है तो उस केस में ये चीज देखी जाती है तो अगर हम बात करें ना यहां पे पहली स्टेटमेंट की यहां पर कह रहा है कि जो वोट ऑन अकाउंट है उसको आपकी रेगुलर गवर्नमेंट इस्तेमाल करती है जब कि इंटरम बजट को यहां पर इस्तेमाल किया जाता है आपकी केयर टेकर गवर्नमेंट के द्वारा ये अपने आप में गलत है मैंने जैसे आपको बताया ना कि इंटरम बजट भी आपका चाहे केयर टेकर सरकार हो या रेगुलर सरकार हो वो यहां पे ला
सकती है उस चीज को कोई दिक्कत वाली बात नहीं है तो ये स्टेटमेंट आपनी पहली इसलिए गलत हो जाएगी दूसरे स्टेटमेंट की बात करें यहां पे कह रहा है वोट ऑन अकाउंट जो होता है वो आपके सरकार के खर्चे के साथ डील करता है एक्सपेंडिचर के साथ यस दैट इज करेक्ट और जो इंटरम बजट होता है उसके आपका खर्चा और एट्स दोनों के दोनों होते हैं तो दूसरा आपका यहां पे करेक्ट हो जाएगा तो ऑप्शन नंबर बी टू ओनली इज द राइट आंसर इसके अलावा मैंने आपको होमवर्क दिया था डीलिमिटेशन कमीशन के बारे में देखो
डीलिमिटेशन कमीशन का मीनिंग क्या होता है यहां पर यह देखना कि कितने नंबर ऑफ आपकी कंसीट एसीज होंगी उनकी बाउंड्रीज को ड्रॉ करना हो गया वह सारा काम देखा जाता है डी लिमिटेशन कमीशन के द्वारा इवन आपके ना जो शेड्यूल का शेड्यूल ट्राइब के लिए जो सीट्स रिजर्व करनी होती है वो काम भी आपका डी लिमिटेशन कमीशन के द्वारा ही किया जाता है दरअसल में अभी तक चार डी लिमिटे क्शन यहां पे बनाए गए हैं 1952 1962 1973 एंड 2002 तो चार डीसी अब तक यहां पे फॉर्म हो चुके हैं जब हम बात करते हैं
एक डीलिमिटेशन कमीशन की तो यहां पर आपके सुप्रीम कोर्ट के आपके जज एक देखने को मिल जाएंगे चाहे वो सर्विंग हो या रिटायर्ड हो इनके अलावा आपके एक चीफ इलेक्शन कमिश्नर या फिर आपके जो एक इलेक्शन कमिश्नर हो सकते हैं इसके अलावा जिस स्टेट में ये चीज कर जा रही है ना तो स्टेट के जो आपके इलेक्शन कमिशनर होंगे तो ये तीन मिलके यहां पे अकॉर्डिंग डीसी का यहां पे पार्ट बनते हैं तो पहला जो स्टेटमेंट बात कर रहा है कि आपके डील इशन कमीशन के जो ऑर्डर होते हैं उनको कोर्ट ऑफ लॉ के अंदर
चैलेंज नहीं कर सकते यस दैट इज करेक्ट ये अपने आप में बहुत ज्यादा पावरफुल बॉडी होती है है दूसरी बात यहां पे कह रहा है कि अगर मान लो यह लोकसभा या स्टेट लेजिसलेटिव असेंबली के सामने रखे जाते हैं तो वहां पर उनमें कोई मॉडिफिकेशन नहीं किया जा सकता यह बात भी अपने आप में बिल्कुल ठीक है तो ऑप्शन नंबर सी बोथ वन एंड टू आर करेक्ट आंसर यहां पर एक जो स्टेटमेंट पहली कह रही है कि जो शेड्यूल कास्ट की लिस्ट है ना वो प्रेसिडेंट स्पेसिफाई करते हैं कैन ओनली बी एल्ड बाय अ सबसीक्वेंट
नोटिफिकेशन फ्रॉम द प्रेसिडेंट देखो बात इसको समझो होता क्या है ना कि जो प्रेसिडेंट जी हैं वो डेफिनेटली क्या करते हैं वो शेड्यूल कास्ट के लिस्ट को नोटिफाई करते हैं पर उसके अंदर अगर बाद में कुछ भी चेंजेज लाने होते हैं कुछ अल्टरेशन लानी होती है वो केवल और केवल आपका पार्लियामेंट लेकर आ सकता है बाय अ लॉ आर यू अंडरस्टैंडिंग दिस थिंग तो ये बात लिखी गई ना कि सबसीक्वेंट नोटिफिकेशन प्रेसिडेंट नहीं यहां पर पार्लियामेंट का एक लॉ आएगा उसके माध्यम से ये चीज करी जा सकती है तो फर्स्ट इसलिए इनकरेक्ट हो गया सेकंड
स्टेटमेंट कह रहा है कि पार्लियामेंट पास अथॉरिटी है किसी कास्ट को किसी रेस किसी ट्राइब को इंक्लूड या एक्सक्लूड करना इसके अंदर से आपका यह स्टेटमेंट बिल्कुल करेक्ट है कि पार्लियामेंट लॉ के साथ ये चीज कर सकता है तीसरा स्टेटमेंट यहां पे क्या है कि सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट लेजिसलेशन को परमिट किया है कि वो यहां पे सब क्लासिफिकेशन भी कर सकते हैं एससी कैटेगरी के अंदर ये करंट अफेयर्स का कॉन्टेक्स्ट था यस सुप्रीम कोर्ट ने यहां पे ये अलाव किया है पर हालांकि बहुत सारी स्टेट लेचर इससे अग्री नहीं कर पा रही ठीक है
वो एक अलग मुद्दा है पर सुप्रीम कोर्ट ने डेफिनेटली इनको परमिट कर दिया है तो इसका आंसर जो सही रहेगा ना वो होगा ऑप्शन नंबर सी टू एंड थ्री ओनली विल बी द करेक्ट आंसर दूसरा मैंने आपको जो होमवर्क दिया था वो था आईपी ईएफ के बारे में इंडो पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क के बारे में देखो पहला स्टेटमेंट जो कह रहा है ना कि 2012 में लॉच हुआ ये बिल्कुल गलत है ये बहुत ही रिसेंट इनिशिएटिव है जो कि 2022 में लांच हुआ था और ये यूएन के अंतर्गत नहीं है इसको तो आपके जो यूएस प्रेसिडेंट
है ना जो बाइड जी उनके द्वारा यहां पे लांच किया गया था तो ये फर्स्ट आपका इनकरेक्ट हो जाएगा दूसरा यहां पे कह रहा है इसके कुछ ऑब्जेक्टिव्स हैं रेजिल अ सस्टेनेबल एंड इंक्लूसिव इकोनॉमिक ग्रोथ यस ये बात बिल्कुल करेक्ट है तीसरा स्टेटमेंट कह रहा है कि ये सारी कंट्रीज को ओपन है जो इंडियन या पैसिफिक ओशन के अंदर है नहीं एक्चुअल में आज के समय इसके आपको लगभग टोटल 14 मेंबर्स देखने को मिल जाएंगे जिनमें डेफिनेटली इंडिया भी एक इंपोर्टेंट रोल रोल प्ले करता है बाकी ऑस्ट्रेलिया और यहां पे आप बाकी कंट्रीज यहां पे
नोट कर पाओगे ध्यान ये रखना इसके चार पिलर्स हैं ट्रेड सप्लाई चेन क्लीन इकॉनमी एंड फेयर इकॉनमी तो ये बातें थी विद रिगार्ड्स टू आईपीएफ जो आपको पता होनी चाहिए हाई कोर्ट जजेस के रिगार्डिंग देखो ये क्वेश्चन तो बहुत-बहुत आसान है पर यूपीएससी आजकल भी ऐसे क्वेश्चन पूछ रहा है 24 में भी ऐसे बहुत सारे क्वेश्चंस आए तो हाई कोर्ट जजेस को पॉइंट और कोई नहीं बल्कि आपके प्रेसिडेंट जी करते हैं तो ये पहली बात आपकी इनकरेक्ट है कि सीजीआई नहीं करते प्रेसिडेंट जी के द्वारा किया जाता है सेकंड कह रहा है कि प्रेसिडेंट ऑफ
इंडिया ऑफ रिस्पेक्टिव स्टेट को कंसल्ट किया जाता है देखो जब अपॉइंटमेंट जी कर रहे हैं तो प्रेसिडेंट जी तो अपॉइंट्स ऑफ इंडिया हो गए उसके साथ ही साथ जिस स्टेट के अंदर किया जाना है मान लो हाई कोर्ट है तो उस हाई कोर्ट के जो चीफ जस्टिस होंगे वो प्लस एट द सेम टाइम जो उस स्टेट के गवर्नर होंगे उनको समझ गए अपॉइंटमेंट कंसल्ट किसको किया जाएगा चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया कंसर्न हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और आपके जो नर होंगे उनको यहां पे कंसल्ट किया जाएगा तो सेकंड भी आपका इनकरेक्ट हो जाएगा तो इसका
सही जवाब बनेगा ऑप्शन नंबर डी नीदर वन नॉर टू दूसरा मैंने होमवर्क दिया था सीडब्ल्यूसी के बारे में अब ये सवाल तो आप बड़े आराम से कर लोगे पहला तो बिल्कुल ठीक है 1945 के अंदर एस्टेब्लिश किया गया था ऑन द एडवाइस ऑफ डॉक्टर बी आर अंबेडकर सेकंड स्टेटमेंट जो कह रहा है ना मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरमेंट फॉरेस्ट नहीं ये मिनिस्ट्री ऑफ जल शक्ति के अंतर्गत आती है तो ये सेकंड इनकरेक्ट है तीसरे स्टेटमेंट की बात क रहे हैं कि यहां पे दोनों को मर्ज कर दिया गया देखो ऐसा नहीं है मर्ज यहां पे किसी को
नहीं किया गया एक्चुअली ना क्या हुआ था रिकमेंडेशन आई थी कई बार मैंने आप लोगों के साथ ना मेहर शाह कमेटी के बारे में डिस्कशन किया है तो मेहर शाह कमेटी ने रिकमेंडेशन दी थी 2016 के अंदर कि ऐसा होना चाहिए कि दोनों को ना मर्ज कर देना चाहिए सीडब्ल्यूसी और सीजीडब्ल्यूबी पर अभी तक ऐसा नहीं किया गया है तो इसलिए तीसरा आपका इनकरेक्ट हो जाएगा तो पहला करेक्ट है दूसरा तीसरा इनकरेक्ट है यह बातें आपको यहां पर पता होनी चाहिए