स्पेन का शहनशाह रडर बहुत जालिम और खुदगर्ज ईसाई हुक्मरान था जब उसको हुक्मरान मिली तो उस वक्त उसकी उम्र 80 साल थी जंगी लिहाज से वह बहुत तजुर्बा का और जहीन आदमी था उमर के आखिरी दिनों में बादशाहत मिलने की वजह से वह निहायत मगरूर और खुदगर्ज हो गया था स्पेन में हुकूमत के अपने रस्मो रिवाज थे जिसके आदाब में शामिल था कि गवर्नर अमीर रईस शहर के हाकिम मुशीर और उन जैसे आहम अफराद अपनी औलाद को जवान होने तक शाही महल में रखते थे जहां शाही आदाब सिखाए जाते थे लड़के बादशाह और लड़कियां मलिका
की खिदमत में रहती थी एक दिन स्पेन का एक ईसाई सरदार काउंट जुलियन अफ्रीका के मुसलमान गवर्नर मूसा बिन नसर के दरबार में आया और रोते हुए इल्तजा की ऐ मुसलमानों के बहादुर हाकिम मेरी मदद करो मुझे मेरे बादशाह ने बर्बाद कर दिया है वह मेरी इज्जत का दुश्मन हो चुका है बराय मेहरबानी मेरी मदद करें मुसा बिन नु सैर ने निहायत इत्मीनान से कहा जोलियन तुम अपने हालात निहायत सुकून से बताओ तुम्हारी हर मुमकिन मदद की जाएगी मुसा बिन नु सैर ने काउंट जोलियन को तसल्ली देते हुए कहा अब तुम हमारी पनाह में हो
और जो शख्स हमारी पना में आ जाता है उसकी हिफाजत करना हमें खूब आता है जोलियन ने फरियाद की ऐ मुसलमानों के गवर्नर आप फौरन स्पेन पर हमला कर दें वहां के लोग आपकी दिल से मुकम्मल हिमायत करेंगे उन लोगों को जालिम हुक्मरान से निजात दिलाए मूसा बिन नसर ने काउंट जूलियन से असल बात पूछी कि रडर इतना जुल्म क्यों करता है और तुमको उससे क्या खौफ है जोलियन ने बताया चूंकि उसके इलाके में तमाम ओहदे दार अपनी औलाद को शाही महल में भेज देते हैं ताकि वह शाही आदाब सीखें उसने बताया कि मेरी बेटी
फ्लोरें ने शाही महल में परवरिश पाई थी उसू तौर पर रडर को उसे अपनी बेटी समझना चाहिए था मगर उस 80 साला बूढ़े ने मेरी बेटी से शादी करने का ऐलान कर दिया है मैं उस ताकतवर हुक्मरान का मुकाबला नहीं कर सकता इसलिए मैंने कामयाब चाल चली और रडर के दरबार में हाजिर होकर दर स्त की कि मेरी बेटी अपनी मां से मिलना चाहती है और मेरी बेटी की मां इसकी जुदाई में सख्त बीमार है वह मरने से पहले अपनी बेटी को एक नजर देखना चाहती है जालिम ने मेरी बात का यकीन कर लिया और
मेरी बेटी को मेरे साथ जाने की इजाजत दे दी मैं अपनी बेटी को उस जालिम बूढ़े हुक्मरान से छुड़ाकर एक महफूज किले में ले आया हूं जहां मेरी बेटी अपने ऊपर होने वाले तमाम मजलि की दास्तान सुनाती है जिसको सुनकर मुझे उस जालिम का वजूद इस जमीन पर बोझ लगने लगा है मैं अपनी बेटी के साथ उस जालिम का शिकार होने वाले तमाम लोगों की मदद करने की नियत से ऐ मुसलमानों के बादशाह आपके पास आया हूं मूसा बिन नसर अपने करीबी साथियों से मशवरा किए बगैर स्पेन पर हमला नहीं करना चाहता था लेकिन उसे
यह भी इल्म था कि अल्लाह ताला की मजलूम मखलूक को तंग करने वाले की क्या सज होनी चाहिए इसलिए मुसा बिन नु सैर ने अपने करीबी साथियों से मशवरा करके दरबार खिलाफत की तरफ एक तेज रफ्तार का सद भेजा ताकि वह जंग की इजाजत लेकर फौरन वापस आ जाए काउंट जोलियन ने मुसा बिन नु सैर को यह भी यकीन दिहानी करवाई कि अगर मुसलमानों ने स्पेन पर हमला किया तो वह किला सप्ता की चाबियां मुसलमानों के हवाले कर देगा किला सबता बहुत अहम किला था इसको रप की चाबी कहा जाता था यह किला इतना मजबूत
था कि इसकी दीवारों को भारी से भारी वजन भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता था मूसा बिन नु सैर ने काउंट जोलियन को हर मुमकिन तावुन की यकीन दिहानी करवाई और दरबारे खिलाफत में रवाना किए हुए कासदन करने लगा नाजरीन उस वक्त वलीद बिन अब्दुल मलिक मुसलमानों के खलीफा थे मुसा बिन नुसरत बंदों को स्पेन के हाल हालात जानने के लिए भी भेजा ताकि काउंट जुलियन की बातों की सच्चाई मालूम हो सके अगर स्पेन के हालात वाकई बहुत खराब हैं तो फिर पूरी तैयारी के साथ स्पेन पर हमला किया जाना चाहिए इस तरह इस्लाम को
स्पेन तक फैलाया जा सकता है और जालिम के जुल्म का शिकार मजबूर लोग भी निजात पा लेंगे स्पेन पर कई स साल तक किसी ने हमला नहीं किया था स्पेन के हुक्मरान समझते थे कि उनके पास ऐसी ताकत है जिसकी वजह से कोई भी उन पर हमला नहीं कर सकता फिर वहां की आबोहवा भी कुछ ऐसी थी कि गैर मुल्किया को रास नहीं आती थी इसलिए स्पेन पर हमला करने की किसी को जरूरत नहीं थी लिहाजा स्पेन के लोग खुद को गैर मुल्की हमले से महफूज समझते थे और दिफाई इंतजा मात पर कोई खास तवज्जो
नहीं देते थे मूसा बिन नसर ने खलीफा इस्लाम को स्पेन पर हमले की इजाजत देने की दरख्वास्त तो कर दी थी मगर उन्हें हालात स्पेन पर हमला करने की इजाजत नहीं दे रहे थे क्योंकि सिंध में राजा दाहिर ने मुसलमानों को कैद कर लिया था और खलीफा इस्लाम के लिए आने वाले तहाय से भरे बहरी जहाज भी लूट लिए थे राजा दाहिर से मुकाबला करने के लिए उन दिनों मोहम्मद इब्ने कासिम की सरब में इस्लामी फौज दमिश्क से सिंध की तरफ रवाना हो चुकी थी इसलिए मुसा बिन नसर के दिल में खल खल आया कि
खलीफा इस्लाम स्पेन पर हमला करने की इजाजत नहीं देंगे मगर जब खलीफा इस्लाम को सारी सूरते हाल का इल्म हुआ तो उन्होंने जवाब दिया कि मजलूम की हिमायत करना हमारा दीनी फरीजा है काउंट जुलियन ने हमसे मदद तलब की है इसलिए काउंट जुलियन की मदद की जाए खलीफा इस्लाम वलीद इब्ने अब्दुल मलिक ने उस मोहिम के लिए मूसा इब्ने नसर को फौजी मुहिम का मुकम्मल इख्तियार दे दिया मूसा बिन नसर की सोच के बरक्स खलीफा इस्लाम के जवाब ने उन्हें हैरान कर दिया इजाजत मिलते ही उन्होंने स्पेन पर हमला करने की तैयारी शुरू कर दी
हर सिपाही उस मार्का पर जाने के लिए तैयार हो गया और उनका सीना जोश से भर गया हर सिपाही स्पेन के खिलाफ लड़ने पर खुशी से राजी हो गया सबका ख्याल था कि उस मार्का के लिए कोई बड़ा लश्कर भेजा जाएगा मगर स्पेन के ताकतवर बादशाह का मुकाबला करने के लिए सिर्फ 7000 सिपाही भेजने का फैसला किया गया ताकतवर और अजनबी मुल्क के मुकाबले में सिर्फ 7000 सिपाही बजहर बहुत कम थे मगर मुसा बिन नुसरत चुने थे जो बहादुरी और वफादारी में अपनी मिसाल आप थे अब सवाल यह पैदा हुआ कि 7000 सिपाहियों की कयादत
कौन करेगा इस्लामी फौज में सैकड़ों तजुर्बा का और दलेर सिपा सालार मौजूद थे जिन्होंने मूसा बिन नुसरत भी की कि उनको सिपा सालार बनाया जाए खुद मूसा बिन नुसरत बेटा उस मौका पर सालार का उम्मीदवार था मगर मूसा बिन नुसरत पर ऐसा फैसला किया जो तारीख में अनोखा फैसला था उन्होंने स्पेन को फतह करने के लिए 7000 सिपाहियों के लश्कर का कायद एक ऐसे शख्स को बनाया जो नौ मुस्लिम बर्बर और आजाद करदा गुलाम था वो गुलाम खुद उस फैसले पर हैरान था उस खुशनसीब इंसान का नाम तारिक बिन जियाद था सब लोग उस फैसले
पर हैरान थे क्योंकि मूसा बिन नु सैर ने अपने सगे बेटे पर उस नौ मुस्लिम आजाद करदा गुलाम को तरजीह दी थी बेशक इस्लाम में इंसानी वकार की यह लाजवाब मिसाल थी मूसा बिन नुसरत तारिक बिन जियाद के नायब का ओहदा मुगी स रूमी को दिया जो उम्र में तारिक बिन जियाद से बड़े और खानदानी मुसलमान थे उन्हें अंदाजा था कि तारिक बिन जियाद की नजर बहुत बुलंद और मुस्तकिल मिजाज है तारिक बिन जियाद ने सिपा सालार मिलने पर अल्लाह रब्बुल इज्जत की बारगाह में दुआ की ऐ मालिक दो जहां मुझे हिम्मत और तौफीक अता
फरमा जो जिम्मेदारी मुझे दी गई है उसको पूरा करने की हिम्मत दे आमीन तारिक बिन जियाद को स्पेन पहुंचने के लिए समंदर पार करना था तमाम सिपाही अपने सिपा सालार की कयादत में समंदर का सीना चीरते हुए मंजिल की तरफ रवाना हो गए स्पेन के साहिल पर जहां लश्कर ने पड़ाव किया उस पहाड़ी का नाम जबल तारिक पड़ गया जिसको अंग्रेजी में जबरासर कहते हैं स्पेन की तरफ सफर करने से पहले तारिक बिन जियाद को एक मुबारिक ख्वाब दिखाई दिया जिसमें नबीए करीम रऊफ उर रहीम सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम ने स्पेन को फतह करने की
बशारत दी थी यह 5 रजब 92 हिजरी का दिन था जब इस्लामी फौज स्पेन के साहिल पर उतरी उस वक्त बहरी जहाज नहीं होते थे सिर्फ बहरी कश्तियां हुआ करती थी जब इस्लामी लश्कर स्पेन के साहिल पर उतरा तो तारिक बिन जियाद ने ईमान अफरोज खिताब किया और कहा अभी वक्त है मैं तुम लोगों को अच्छी तरह गौर और फिक्र करने का मौका देता हूं मैं तुम सबको बता दूं कि यह मामूली मुहिम नहीं हम यहां अजनबी हैं यहां के रास्तों का हमें इल्म नहीं है हर तरफ मुख्तलिफ मुश्किलात पेश आ सकती हैं हम तादाद
में बहुत कम है जबकि ईसाइयों के पास भारी जंगी सामान है मैं तुम पर सख्ती नहीं करता अच्छी तरह सोच लो और फैसला कर लो अभी वक्त है मैं तुम में से जो वापस जाना चाहता है उसे जाने की इजाजत देता हूं इस्लामी लश्कर ईमान जज्बे से भरपूर था इरादे मजबूत थे तारिक बिन जियाद ने अपने सिपाहियों का हौसला बुलंद देखा तो उसने शुजात और हिकमत अमली की अनमोल मिसाल कायम की लश्कर इस्लामी के सिपा सालार ने निहायत हौसले से हुक्म दिया कि जिन कश्तियों पर सवार होकर हम यहां आए हैं उन सबको आग लगा
दी जाए इस्लामी लश्कर ने अपने सिपा सालार के हुक्म पर किसी भी किस्म का ऐतराज ना किया और फौरन तमाम कश्तियों को जला डाला देखते ही देखते तमाम कश्तियां जलकर राख बनकर समंदर के पानी में डूब गई तारिक बिन जियाद ने अपने सिपाहियों को वापस जाने का मौका तो दिया था मगर तमाम लोग जिहाद के जज्बे से यहां आए थे इसलिए उन्होंने वापस जाने की बजाय लड़ने को तरजीह दी तारिक बिन जियाद ने अपने सिपाहियों से कहा हम इस अजनबी सरजमीन पर फता का मकसद लेकर आए हैं हमें फता जरूर मिलेगी हमें किसी भी मौका
पर हौसला नहीं हारना बल्कि इन जालिम ईसाइयों के खिलाफ जिहाद करना है जिन्होंने इंसानियत पर जुल्म की इंतिहा कर दी है मजलूम पर जुल्म के पहाड़ तोड़े हैं इंशा अल्लाह हम यहां फत हासिल करने में अल्लाह ताला की मदद के साथ आए हैं और हमें फत हासिल होगी हमने वापसी के तमाम रास्ते और जरिए बंद कर दिए हैं अपने सिपा सालार का खिताब सुनकर इस्लामी लश्कर के सिपाहियों को एक नया वलव और जज्बा मिला कश्तियां जलाने का फैसला तारिक बिन जियाद की शुजात की अकासी के साथ-साथ उनकी जहान का भी सुबूत था क्योंकि वह जानते
थे कि उनके लश्कर की तादाद बहुत कम है कहीं वह ईसाई फौज की भारी तादाद देखकर घबरा ना जाए इसलिए उन्होंने वापसी के लिए कोई रास्ता ना छोड़ा ताकि शहादत का जज्बा लेकर आने वाले सिपाही अपने नेक मकसद में कामयाब हो सके फिर तारिक बिन जियाद को व भी याद था जिसमें रसूल कायनात इमाम उल अंबिया जनाबे मोहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम ने उन्हें यकीन दिलाया था कि स्पेन की फता जरूर होगी इसलिए उनके दिल में किसी किस्म का कोई खौफ नहीं था वह पुर उम्मीद थे फिर इस्लामी लश्कर का हर सिपाही यह जान
चुका था कि हमने स्पेन को हर हाल में फतह करना है अब हमारा एक ही मकसद है फत या शहादत अभी तारिक बिन जियाद इर्दगिर्द के माहौल और खूबसूरत मनाजिर को देख रहे थे जिससे इस्लामी लश्कर के दिलों में उस खि की खूबसूरती बस चुकी थी इस्लामी लश्कर पहाड़ों के दामन में उतरने लगा तो एक आदमी जर्द रंग का रेशमी लिबास पहने उनके सामने आ गया उसका चेहरा बेचैनी और परेशानी की वजह से मुरझाया हुआ था उसको देखकर इस्लामी लश्कर के सालार आजम तारिक इब्ने जियाद चलते चलते रुक गए उन्होंने अपने करीबी साथी और मुशीर
मुस अरूमी जो ईसाई से मुसलमान हो चुका था उससे कहा मुगी यह आदमी ईसाई लगता है मुगी अरूमी ने आने वाले आदमी को गौर से देखा और हां का इशारा कर दिया तारिक बिन जियाद ने उससे कहा कि वह आदमी के पास जाए और उसके आने का मकसद पूछे मुस अरूमी आने वाले शख्स की जानिब बढ़ा और उससे थोड़ी देर बातचीत करके उसको अपने साथ लेकर अपने सालार तारिक इब्ने जियाद के पास आया तारिक ने सवालिया नजरों से उस आदमी की तरफ देखा तो उसने हाथ जोड़कर कहा मैं एक दरखास्त लाया हूं अगर आप मेरी
मदद करें तो आपका मुझ समेत पूरी इंसानियत पर एहसान होगा तारिक बिन जियाद ने मुस्कुराते हुए उससे कहा अपनी सारी बात खुलकर बताओ क्योंकि मजलूम की मदद ही के लिए हम यहां आए हैं आने वाले आदमी ने अपना नाम अमाम बताया और निहायत गमना आवाज में मैं ईसाई हूं हमारे जालिम बादशाह रडर के साथियों ने मेरी सारी दौलत छीन ली है उन्होंने मेरी दौलत लूटने के बाद मेरी इकलौती बेटी को भी अगवा कर लिया है यह कहकर अमाम की आवाज भर गई और उसकी आंखों से आंसू जारी हो गए तारिक बिन जियाद अपनी जगह से
उठा और आगे बढ़कर अमाम के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा अमाम तुम गम मत करो हम तुम्हारी बेटी को जालिमों से जरूर आजाद करवाएंगे मगर इससे पहले मुझे अपने बादशाह रडर के किरदार और रवैए के मुतालिक कुछ बताओ अमाम ने तारिक बिन जियाद की तसल्ली आमज गुफ्तगू सुनकर कहा ऐ नेक मुसलमान जब से इस जालिम बूढ़े ने इस मुल्क की बादशाहत संभाली है तब से किसी की जानो माल और इज्जत महफूज नहीं रही इसने जुल्म और सितम का बाजार सजा रखा है और जवान लड़कियों को अगवा करवाता है तारिक बिन जियाद ने अमाम की
बात सुनी और बोला राडार की उम्र कितनी है अमाम ने कहा 80 साल के करीब का होगा कब्र में टांगे हैं मगर जुल्म की इंतिहा कर रहा है तारिक इब्ने जियाद ने अमाम की पूरी बात सुनी और कुछ सोचते हुए बोला क्या तुम्हारी बेटी को रडर के साथी वरगला कर ले गए हैं या उसको जबरदस्ती ले गए हैं अमाम ने हाथ जोड़कर रोते हुए कहा ऐ नेक दिल सिपाही मेरी मासूम बेटी मुझे पुकारती रही मगर वो गुंडे उस को जबरदस्ती साथ ले गए मैंने अपनी बेटी को उनके चुंगल से छुड़वाने की कोशिश की तो उन्होंने
मुझे इस जोर से धक्का दिया कि मैं दीवार से टकराया और गिर कर बेहोश हो गया उन जालिमों ने मेरे घर में सारा माल लूट लिया और मेरी बेटी को अपने साथ ले गए मुझे अपनी बेटी की फिक्र खाए जा रही है मैं इस गम में जहनी तवाजू खो रहा हूं आपको अपने प्यारों का वास्ता मेरी जरूर मदद करें यह कहकर अ मामन जोर से रोने लगा तारिक बिन जियाद ने आगे बढ़कर उसे गले लगा लिया और तसल्ली देते हुए कहा इंशाल्लाह बहुत जल्द तुम्हारी बेटी तुम्हें मिल जाएगी अमाम ने यह अल्फाज सुने तो चेहरे
पर मुस्कुराहट लाते हुए बोला हुजूर मैं उस दिन जब बेहोश हो गया तो मुझे ख्वाब में एक बुजुर्ग नजर आए थे जिनकी सुफैद दाढ़ी थी उन्होंने मेरे सर पर हाथ फेरा और कहा अमाम तुम गम ना करो तुम्हारी मासूम बेटी को आजाद करवाने वाले अब तुम्हारे मुल्क में आ चुके हैं तुम सब्र करो वह बहुत जल्द तुम्हारी मदद करेंगे मैंने खुशी से उन बुजुर्ग के पांव पकड़ लिए और दरख्वास्त की कि मुझे मेरे मोहसिन इंसान का हुलिया बता दें ताकि मैं पहचान लूं उन्होंने कहा कि उन नेक इंसानों के सर पर पकड़िया अमामा और चेहरे
पर दाढ़ी होगी उन्होंने लंबा लिबास पहना होगा और उन्हें मुसलमान कहते हैं फिर उन्होंने मेरी फरमाइश पर इस मकाम का पता भी मुझे बताया जहां पर आप लोग इस वक्त खड़े हैं उन बुजुर्ग ने जो हुलिया मुझे बताया था वो हुबहू आप सबका है यह कहकर अमाम हाथ जोड़कर तारिक इब्ने जियाद के कदमों में गिर गया और कहा ऐ मुसलमान सिपाही मेरी मदद करें वरना वो जालिम मेरी आंखों की ठंडक मेरी बेटी को पता नहीं कहां ले जाएंगे तारिक बिन जियाद ने अमाम को बाजुओं से पकड़कर अपने कदमों से उठाया और पूछा तुम्हारी बेटी का
नाम क्या है अमाम ने कहा बिल्कीस तारिक बिन जियाद ने मुस्कुराते हुए कहा यह तो हजरत सुलेमान अलैहि सलाम की बीवी का नाम था तुम लोग तो ऐसे नाम नहीं रखते फिर तुमने किस तरह यह नाम अपनी बेटी के लिए चुना है अमाम ने तारिक बिन जियाद का शीरी लहजा देखकर कहा यह बात तो सबको मालूम है कि बिल्कीस एक खूबसूरत खातून थी मेरी बेटी भी बहुत खूबसूरत है इसलिए मैंने अपनी बेटी का नाम बिल्कीस रखा है तारिक बिन जियाद ने नर लहजे से कहा क्या तुमको इल्म है कि बिल्कीस को कहां ले जाया गया
होगा अमाम ने कहा मुझे एक ईसाई सवार मिला था जो इत्तेफाक से उन सिपाहियों में से एक था जो मेरी बेटी को अगवा करके ले गए थे उसने मेरे पूछने पर बताया था कि मेरी बेटी को जालिम बादशाह रडर की फौज के सिपा सालार जिसका नाम तद मीर था उसके सपुत कर दिया गया है तारिक बिन जियाद ने तलवार पर ग्रिफ्ट मजबूत करते हुए कहा तद मर इस वक्त का होगा अमाम ने मुसलमान सेप सालार का अजम और जज्बा देखा तो कहा वह यहां से 5 मील के फासले पर अपने सिपाहियों के साथ रुका हुआ
है तारिक बिन जियाद ने अपने साथियों की तरफ देखा और कहा मेरे ख्याल में आज हम यहां रुक जाते हैं और सुब सवेरे नमाज पढ़कर तद मर के लश्कर पर हमला करके इस मजलूम को इंसाफ दिलाते हैं और इसकी अगवा शुदा बेटी को रिहा करवाकर इसके हवाले करेंगे अपने सिप सालार की की बात सुनकर तमाम मुसलमान फौजी अफसरों ने भी इस तजवीज को मान लिया फिर इस्लामी लश्कर ने साहिल पर रात गुजारी मुसलमान लश्कर अपने साथ खैम नहीं लाया था इसलिए खुले आसमान तले सोने से पहले सिपाहियों ने खाना तैयार किया जो पूरी फौज को
इकट्ठे पेश किया अमाम भी उन सिपाहियों में बैठा खाना खाते हुए हैरान था कि यह कैसी कौम है जिसके बादशाह और गुलाम में कोई फर्क नहीं है बल्कि सब लोग एक दस्तरखान पर मिलकर खाना खा रहे थे तहज्जुद और फजर की नमाज ब जमात पढ़ते देखकर अमाम को मुसलमानों का रात को जागकर इबादत करना और मिलकर नमाज पढ़ना बहुत अच्छा लगा था इकट्ठे रात गुजारने के बाद उसको इस बात की बहुत खुशी हुई कि तमाम मुसलमान अपनी रात का ज्यादा वक्त अल्लाह ताला की इबादत में गुजारते हैं और फजूल बातचीत नहीं करते जो बुराइयां दूसरे
मजहब में थी उनका नामो निशान भी उसको वहां नजर नहीं आया नमाज से होकर सब सिपाहियों ने खजूरों का नाश्ता किया और अपने सालार का हुक्म मिलते ही इस्लामी लश्कर तद मीर से अमाम की बेटी को आजाद करवाने के लिए चल पड़ा तद मीर वाकई 5 मील के फासले पर मौजूद था और वह किसी भी हमले से बेखबर अपनी मस्ती में मगन था तद मर का शुमार स्पेन की फौज के तजुर्बा का और मशहूर जनलो में होता था जिसने कई जंगो में अपनी बहादुरी और जहान का मुजाहि किया था उसको इस्लामी लश्कर की आमद का
इल्म भी हो गया था इसलिए उसने जंगी हिकमत अमली अपनाते हुए फौरन इस्लामी लश्कर पर हमला करने का इरादा कर लिया और मुसलमान फौजी अभी ठीक तरह से मुनज्जा नहीं हो पाए थे कि उन पर अचानक हमला कर दिया गया मगर उन्होंने निहायत दलेरी और जज्बा ईमान से तद मर की फौज का मुकाबला किया स्पेनी फौज के मुकाबले में इस्लामी लश्कर की तादाद बहुत कम थी स्पेनी फौज की भारी तादाद घुर सवारों की थी जबकि मुसलमानों के पास कोई घोड़ा नहीं था वह सब पैदल थे तद मर का हर सिपाही लोहे का जंगी लिबास पहने
हुए था और वह सब जंगी हथियारों से लेस थे इधर इस्लामी लश्कर के पास जंगी लिबास तो क्या पूरे हथियार भी नहीं थे मगर इनके दिल में जज्बा जिहाद था शहादत के शौक में वह दुश्मन की फौज पर टूट पड़े जब दुश्मन उनके सामने आया तो यह शौक मजीद बढ़ गया हस्मा भी फौज के सालार के हुक पर तबले जंग बजाया गया तो उनमें भी एक जोश आ गया मगर उस तबल जंग के जवाब में इस्लामी लश्कर ने बक जुबान कहा नारा तकबीर अल्लाह अकबर ईसाई जरनल तद मर ने बहुत हक कात और तंजिया नजरों
से इस्लामी लश्कर को देखा जो पैदल और कम हथियारों के साथ उसकी बहुत बड़ी फौज के मुकाबले पर खड़ा था तद मर ने सोचा कि इस लश्कर को खत्म करना तो बहुत आसान है क्योंकि मेरी फौज इस इस छोटी सी फौज को अपने घोड़ों तले रद कर रख देगी इनकी लाशों से मैदान भर जाएगा मगर तद मर की तमाम तदबीरें बहुत जल्द गलत साबित हो गई जब मुसलमान तीरंदाज और नेजा बाज सिपाहियों ने हसपा भी फौज के घोड़ों और सिपाहियों को निशाना बना लिया वह फुर्ती से उन घुर सवारों को जमीन पर गिराते और उनके
जख्मी फौजियों को उनके अपने जख्मी घोड़े रोने लगते इस्लामी लश्कर ने निहायत बहादुरी से लड़ रहा था दुश्मन के कदम बुरी तरह उखड़ गए थे इस्लामी लश्कर के सिपा सालार तारिक इब्ने जियाद निहायत दलेरी और बेखौफ से दुश्मन की फौज में घुस जाते और रास्ते में आने वाले हर दुश्मन को तलवार के वार से हलाक कर देते दुश्मन ने कई मर्तबा उन्हें गरे में लिया मगर वह फुर्ती से उनके नरग से निकल आते और दुश्मन पर टूट पड़ते जब तारिक इब्ने जियाद और इस्लामी लश्कर निहायत जाबाजी से लड़ते हुए ईसाई जरनल तद मर तक पहुंच
गया तो वह तद मर जो जंग से पहले इस्लामी लश्कर को हकीर जानकर खुश हो रहा था वही अब अपनी जान बचाने के लिए भाग गया जब हसपा भी सिपाहियों ने अपने जरनल को मैदान से भागते देखा तो वह भी उसके पीछे भागने लगे इस्लामी लश्कर ने दूर तक उनका पीछा किया और मजीद कई सिपाहियों को खत्म कर दिया इस लड़ाई में 1100 से ज्यादा ईसाई मारे गए और सिर्फ 19 मुसलमान शहीद हुए अब अमाम मुसलमानों का जज्बा वादा और रात भर जाग कर इबादत करना देख चुका था जब तद मीर को बुरी तरह शिकस्त
हो गई तो वह एक मुसलमान सिपाही इस्माइल को साथ लेकर अपनी बेटी बिल्कीस को ढूंढने चल पड़ा इस्लामी लश्कर से इबरत नाक शिकस्त के बाद ईसाई सिपाही तिनकों की तरह बिखर चुके थे उनके खाली खेमों में से एक के अंदर बिल्कीस रस्सियों में जकड़ी नजर आ गई इस्माइल ने आगे बढ़कर तेज धार खंजर से उसकी रसियां काट दी और उसे आजाद करके खेमे से बाहर ले आया बिल्कीस ने जब अपने वालिद अमाम को देखा तो रोती हुई उसकी तरफ भागी अमाम भी अपनी इकलौती बेटी को आजाद देखकर खुश हो गया मगर इससे पहले कि इस्माइल
और अमाम बिल्कीस को लेकर तारिक बिन जियाद के पास जाते अचानक खेमों में से तद मर उनकी तरफ बढ़ा और बिल्कीस को दबोच कर घोड़े पर सवार होकर खेमों की तरफ भागने लगा चूंकि इस्माइल और अमाम पैदल थे और वह जहनी तौर पर तद मर के अचानक हमले के लिए तैयार भी नहीं थे इसलिए वह तद मर का पीछा ना कर सके और तद मर बिल्कीस को लेकर अपने बादशाह राड की तरफ चला गया इस लड़ाई के बाद ईसाई फौज के दिल में मुसलमानों का खौफ बैठ चुका था वह सोचने लगे यह इंसान नहीं बल्कि
कोई और मखलूक है जिसने एक ताकतवर लश्कर से लड़कर उन्हें शिकस्त दे दी है उससे पहले के तद मर बादशाह के पास पास पहुंचता उसने अपने बादशाह रडर को कासदन की आमद की खबर दी कासदन की तरह बादशाह के पास पहुंचा और तद मर का पैगाम दिया मुसलमानों की बहादुरी स्पेन पर हमला और उनका बेखौफ लड़ना स्पेन के रहने वालों के लिए हैरान कुन था स्पेन के रहने वालों को मुसलमानों के बारे में कुछ इल्म नहीं था यह मुसलमान कौन हैं कहां के रहने वाले हैं यहां कैसे पहुंचे हैं वह सब इस्लामी लश्कर को पुर
सरार मखलूक समझ रहे थे उनको मजहब इस्लाम के मुतालिक कुछ इल्म नहीं था उनका जज्बा ए जिहाद भी उनके लिए बिल्कुल नया था बादशाह राड करक और उसकी फौज लफ्ज शिकस्त को जानते नहीं थे इसलिए जब उसको तद मीर की शिकस्त का पता चला तो वह शदीद गुस्से में आ गया उसने इस्लामी लश्कर का मुकाबला करने के लिए अपने मुल्क से 90 हज से ज्यादा जंगी तजुर्बा रखने वाले सिपाहियों को इकट्ठा किया और मुख्तसर से इस्लामी लश्कर के मुकाब में ले [संगीत] आया मुसा बिन नसर ने इस्लामी लश्कर की मदद के लिए जो 5000 नए
जवान रवाना किए थे वह जिहाद के जज्बे से सरशर तो थे मगर उनके पास भी मुकम्मल जंगी हथियार नहीं थे अक्सर जवानों के पास तलवारें और ढाले नहीं थी बल्कि अक्सर सिपाही तो आम लकड़ी की लाठियां लिए हुए थे जबकि दूसरी तरफ रडर की फौज जो 1 लाख से ज्यादा हो चुकी थी उसका सारा लश्कर तमाम जंगी हथियारों से से लेज था लेकिन एक चीज इस्लामी लश्कर में उसके लश्कर से ज्यादा थी वो यह कि इस्लामी लश्कर जिहाद के जज्बे और शहादत के शौक से सरशर था जब दोनों लश्कर मैदान में आमने-सामने हुए तो तारिक
बिन जियाद ने अल्लाह करीम के हुजूर कामयाबी के लिए दुआ की और अपने सिपाहियों को मुखातिब करते हुए बोला अल्लाह के सिपाहियों तुम्हारी दलेरी और जिहाद का जज्बा देखकर हर एक हैरान है मेरी यह बात याद रखना कि तुम सब अपने वतन से दूर एक एक अजनबी सरजमीन पर आए हुए हो खोराक और जंगी हथियार ना होने के बराबर हैं मगर याद रखो हम यहां के रहने वालों को इनके जालिम बादशाह से निजात दिलाने आए हैं ना कि हम यहां माल और दौलत इकट्ठा करने या खोराक जमा करने आए हैं हमने अल्लाह ताला और नबीए
करीम के हुक्म को मानते हुए यह सफर किया है तुम सबको याद होगा कि मैंने आप सबको पहले भी बताया था कि यहां आने से पहले मुझे सरव कायनात मोहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अल आलि वसल्लम की जियारत नसीब हुई थी जिसमें उन्होंने इस इलाके को फतह करने की बशारत दी थी तारिक बिन जियाद ने अपनी तकरीर में कुरानी आयात का कई मर्तबा हवाला दिया बल्कि एक आयत का हवाला देते हुए कहा कि अल्लाह करीम ने अपने सिपाहियों के लिए फरमाया है मुसलमानों की मदद करना अल्लाह ताला पर फर्ज है अजीम कौम के अजीम सिपाहियों तुम एक
ऐसी कौम की औलाद हो जिन्होंने गजवा बद्र और हुनैन में अल्लाह ताला की मदद से फतह हासिल की थी इसलिए ऐ अल्लाह के शेरों दुश्मन पर टूट पड़ो क्योंकि शहीद होना या गाजी बनना तुम्हारे मुकद्दर में लिख दिया गया है इस्लामी लश्कर ने अपने सिप सालार का ईमान अफरोज और जज्बा जिहाद से भरपूर खिताब सुना तो उन्होंने पुरजोश होकर नारा तकबीर बुलंद किया और ईसाई लश्कर की तरफ बढ़ने लगे इतनी देर में उन्होंने देखा कि बादशाह राड एक खूबसूरत बग्गी जिस पर हीरे जवाहरात और सोने से बनी छतरी लगी हुई थी बड़े गु र के
साथ रेशमी नर्म गद्दे पर बैठा हुआ था तारिक बिन जियाद ने अपने सिपाहियों की तरफ देखा कि कहीं कोई इसकी शानो शौकत के रोब में तो नहीं आ गया मगर उसे यह देखकर खुशी हुई कि सारा लश्कर नफरत से भरी नजरों से उसको देख रहा था इतनी देर में ईसाई लश्कर इस्लामी लश्कर पर हमलावर हो गया उनमें घोड़ों की लंबी कतार थी बजायर ऐसा लग रहा था कि ईसाई लश्कर चंद लम्हों में इस्लामी लश्कर को कुचल कर रख देगा एक लाख से ज्यादा दुश्मन का मुकाबला करने के लिए सिर्फ सात या 8000 मुसलमान आटे में
नमक के बराबर थे ईसाई लश्कर की सफे दूर तक बिची हुई थी अगर हिसाब लगाया जाता तो दोनों लश्कर में एक और 10 का फर्क था यानी 10 ईसाइयों का मुकाबला करने के लिए एक मुसलमान था जब जंग शुरू करने का ऐलान हुआ तो तारिक बिन जियाद ने एक बार फिर अल्लाह ताला के हुजूर सजद रेज होकर कामयाबी की दुआ की और मदद करने की दरख्वास्त की फिर सजदे से सर उठाकर उसने तीन बार नारा तकबीर बुलंद किया इस्लामी लश्कर भी अल्लाह अकबर की सदा बुलंद करके आगे बढ़ा तारिक बिन जियाद ने ईसाई लश्कर का
मुकाबला करने के लिए अपनी फौज को मजीद आगे बढ़ने का हुक्म दिया ईसाई बादशाह रडर अफराद कुवत और भारी असलहा रखने के गुरूर से मुसलमानों पर हमलावर हो गया दोनों तरफ से खूब जोश से जंग जारी थी जंग में दोनों तरफ से भरपूर हमले किए जा रहे थे और उन हमलों का मु मुकाबला किया जा रहा था मैदान जंग खूबसूरत नजारा पेश कर रहा था हुआ यूं कि जब एक मुसलमान सिपाही दुश्मन के सिपाही पर तलवार जनी करता तो उसके वार से छह सात ईसाई फौजी मारे जाते बजायर देखने में ईसाई फौज मुसलमानों के मुकाबले
में बहुत ज्यादा थी मगर ऐसा लग रहा था जैसे अल्लाह ने अपने सिपाहियों की मदद के लिए फरिश्ते जमीन पर भेज दिए हो जो मुसलमान सिपाहियों का साथ दे रहे थे शाम तक मैदान जंग का नक्शा बदल चुका था गजवा ए बदर की तरह इस जंग में भी मुसलमानों ने फरिश्तों का साथ मिलने से कुफर को बुरी तरह शिकस्त दे दी अल्लाह ताला का शेर काफिर गीदड़ को इबरत नाक शिकस्त दे चुका था जालिम बादशाह राड मैदान जंग से भाग चुका था इस्लामी लश्कर ने भागते हुए ईसाई लश्कर का पीछा किया कुफ्र के खिलाफ तारिक
बिन जियाद को एक बड़ी फतह नसीब हो गई थी तारिक बिन जियाद ने रडर के कब्जे से मजलूम लड़कियों को आजाद कर दिया और उस दौरान उसे रडर का जमा किया हुआ बहुत भारी मिकर में खजाना भी मिला जालिम रडर को शिकस्त होने के बाद पूरे अफ्रीका और यूरोप में मुसलमानों ने धूम मचा दी जबकि ईसाइयों के हौसले खत्म हो गए और वह किसी भी मैदान में इस्लामी लश्कर का डटकर मुकाबला ना कर सके फिर वह दिन भी आ गया जब तारिक बिन जियाद को मिलने वाली बशारत हकीकत बन गई और पूरा स्पेन यानी उंस
अहले ईमान के कदमों तले था तारिक बिन जियाद ने अपने जाने सारों के साथ स्पेन फतह करके ना सिर्फ उन दो मजलूम लड़कियों को आजाद कर दिया बल्कि दीगर सैकड़ों मजलूम लड़कियों की दुआएं भी इस्लामी लश्कर के साथ थी इसमें कोई शक नहीं कि जब भी अल्लाह ताला से मदद मांगी जाए वह नेक काम में मदद जरूर करता है स्पेन पर मुसलमानों का कब्जा होने के बाद वहां के तमाम गरीब किसान और आवाम अपनी जमीन के हकीकी वारिस बन गए जिन अमीरों ने गरीबों पर जिंदगी तंग कर रखी थी वह सब इस्लामी हुकूमत आ जाने
से हकदार को उनका हक देने लगे मुल्क में जहां हर वक्त लूटमार और बदमती थी वहां अब अमन और सुकून नजर आने लगा था स्पेन के आवाम ने मुसलमानों की नेक दिली और अच्छा अखलाक देखा तो वह धड़ाधड़ ईमान लाकर मुसलमान होने लगे जो लोग ईमान नहीं लाए उनको भी इस्लामी हुकूमत ने मुकम्मल हुकूक दे रखे थे स्पेन के मशहूर शहर कुर्तबा को दारुल खिलाफा बना दिया गया और वहां एक आलीशान मस्जिद भी बनाई गई तारिक बिन जियाद ने पूरा स्पेन फतह करने के बाद मूसा बिन नुसरत भेजा कि अब उसे पूरा यूरोप फतह करने
की इजाजत दी जाए मूसा बिन नुसरत वलीद बिन अब्दुल मलिक को पैगाम भेज दिया मगर उन्होंने हुक्म फरमाया कि तुम स्पेन के इंतजा मात किसी को सौंप कर तारिक बिन जियाद के साथ अफ्रीका के रास्ते दमिश्क आ जाओ मूसा बिन नुसरत खलीफा के हुक्म के मुताबिक अपने बे बेटे अब्दुल अजज को स्पेन का गवर्नर बनाया और तारिक बिन जियाद के साथ दमिश्क की तरफ चल पड़ा मगर तारिक बिन जियाद और मसा बिन नुसरत दमिश्क पहुंचे तो उस वक्त खलीफा वलीद बिन अब्दुल मलिक फौत हो चुका था इसलिए उन दोनों को यह इल्म ना हो सका
कि खलीफा ने उन दोनों को किस लिए दमिश्क बुलाया था खलीफा वलीद बिन अब्दुल मलिक की वफात के बाद सुलेमान बिन अब्दुल मलिक खलीफा बना तो उसने हर शख्स के साथ दुश्मन पाल ली मुसा बिन नु सैर और तारिक बिन जियाद भी खलीफा के इंतकाम का शिकार हो गए खलीफा ने उन दोनों को गिरफ्तार करके कैद कर लिया सुलेमान बिन अब्दुल मलिक का दौरे हुकूमत अजीम मुस्लिम फतिही के लिए किसी कयामत से कम नहीं था ऐसे मुस्लिम फतिही जिनका नाम तारीख इस्लाम में हमेशा सुनहरी हुरूफ से लिखा जाता है वह सब उस दौर में निहायत
नारवा सुलूक का शिकार हो गए मूसा बिन नु सैर भीख मांगने पर मजबूर हो गए गवर्नर खुरासान फाते है कुतबा और मोहम्मद बिन कासिम जैसे अजीम मुस्लिम फतिही भी खलीफा सुलेमान बिन अब्दुल मलिक के मुजरिम ठहरे और खलीफा ने मूसा बिन नुसरत की गवर्नर से हटा दिया कि कहीं वह अपने बाप का बदला लेने ना आ जाए तारिक बिन जियाद के आखिरी दिनों के हवाले से मोखन खामोश हैं मगर चंद जगह पर तारिक बिन जियाद के इंतकाल की तारीख 11 अप्रैल सन 720 ईसवी दर्ज है स्पेन जिसको उदल भी कहा जाता है इस पर मुसलमानों
ने 800 साल तक हुकूमत की और आखिर निहायत अफसोस तरीके से उन्हें वहां से निकलना पड़ा मगर स्पेन के फाते तारिक बिन जियाद के कारनामों से मुस्लिम फतिही की तारीख हमेशा जगमगाती रहेगी तारिक बिन जियाद को वफात के बाद जबल तारिक जिसे जबरासर भी कहा जाता है उसके करीब सुपुर्द रब्बे जलील किया गया जहां उनका मिजार आज भी मरजा खलाक है नाजरीन इसी उम्मीद के साथ इजाजत दीजिए कि आपको हमारी वीडियो पसंद आई होगी मिलते हैं बहुत जल्द एक नई तारीखी तहकीकी और मालूमात वीडियो के साथ देखते रहिए इफ ट आदिल अल्लाह रब्बुल इज्जत आपका
हामी और नासिर हो