कि जब मराठा एंपायर स्टडी आइक्यू मैं आपका स्वागत है मेरा नाम है आदि सिंह दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं मराठा अंपायर की जिसमें सेवेंटीन सेंचुरी में मौजूद एंपायर जैसे कि निगम के रोमांस को चैलेंज करने का काम किया 1658 में में मुगल एंपरर औरंगज़ेब ने रैपिड एक्सपेंशन और तेजी से चालू किया और उनके दौर में मुगल एंपायर अपने चरम पर पहुंच गया औरंगजेब की एक प्ले लिस्ट में सबसे इंपोर्टेंट एयर डेक्कन माना जाता है लेकिन यहां मराठा करें और की पॉलिसी के लिए सबसे बड़ा चैलेंज यहां एक राज्य के रूप में मराठों के
कारण में ज्योग्राफिकल डोंट लाइक और सबस्क्राइब पर मराठा का इस्तेमाल सल्तनत का कमज़ोर होना कुंजी की एंटी हिंदू पॉलिसीज और कुछ हद तक भक्ति मूवमेंट और मराठा सींस जैसे संत तुकाराम संत रामदास और संत एकनाथ के सोशल रिलिजियस यूनिटी के प्रयास भी इनकी राइस का कारण बने मराठा अंपायर इस्टैबलिश्ड करने का असली क्रेडिट जाता है 4G भोंसले और उनके पुत्र छत्रपति शिवाजी महाराज को छत्रपति शिवाजी महाराज का महाराष्ट्र की यूनिटी एंपायर बिल्डिंग और सिटीजन वेलफेयर में जो इन थिस रूल था उसकी चलते आज भी महाराष्ट्र में उनकी कृत्य की कहानियां वहां के संगीत और फेस्टिवल्स
में सुनी जा सकती हैं इस वीडियो में हम देखेंगे मराठा एंपायर के वैल्यूएशन को और बात करेंगे कि कैसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने रेवल्यूशनरी नेशन बिल्डिंग एक्टिविटीज के साथ एक नया इतिहास रच दिया और दोस्तों सेवंथ सेंचरी के बीगिनिंग में मुगल्स नॉर्दर्न डेक हाउ टो तक एक्सटेंड कर चुके थे इसी के साथ डेक्कन सल्तनत पांच सल्तनत में डिवाइड अट हिम्मतनगर अंडर मलिक निशान विरार अंडर पतला इमादपुर मूर्ख बीरवास इबारत बीजापुर अंडर-17 और अंडर-19 मराठा मराठी भाषा बोलने वाले पेशंट को कहा जाता था जो वेस्टर्न में मराठा कमांडर-इन-चीफ और मनसबदार के रूप में बीजापुर और अहमदनगर
सल्तनत में सब करते थे में सबसे इंपोर्टेंट लेंथ भोसले जिनके बारे में अब हम बात करेंगे आइए जानते हैं कहानी शाहजी भोंसले था शाहजी भोंसले फ्रॉम 15902 16160 शाहजी भोंसले का जन्म फिफ्टीन हंड्रेड 94 में अहमदनगर सल्तनत के जैन आज मालू जी भोंसले के यहां हुआ था मालू जी को अहमदनगर गूलर ने पुणे और सुपर डिस्ट्रिक्ट की जागीर सौंपी थी जैसे शाहजी भोंसले ने इनहेरिट किया शाहजी भोंसले भी अहमदनगर में मिलिट्री चीज बने लेकिन अहमदनगर मुगल्स और बाकी डेक्कन सल्तनत के बीच परपेचुअल कंफर्ट्स के चलते 4G भोंसले ने सिचुएशन के हिसाब से स्मार्टली साइड चेंज
किए कभी मॉडल्स के साथ कभी अहमदनगर तो कभी भी जयपुर के साथ यह शाहजी भोंसले का अपनी ऑटोनॉमी सेंड करने का एक तरीका भी था मुगल एंपरर शाह जहां टेकन प्लेस टो कैप्चर करना चाहते थे जिसके लिए उन्होंने शाहजी भोंसले के साथ लाइंस कर जोनार और संगमनेर कैप्चर किया लेकिन 1632 में बुगल्स में उनकी जागीर छीन ली और शाहजी भोंसले ने बीजापुर सल्तनत जॉइंट कर पुणे और सुपर डिस्ट्रिक्ट को फिर से अपने कंट्रोल में लिया इससे नाराज होकर से इन 34k बैटल आफ परिंडा में मुगल सैनिक शाहजी भोंसले लेट बीजापुर आर्मी को टिकिट किया इसी
के बाद 1636 में मुगल बीजापुर पीस प्रिटी साइन कोई जिसके तहत शाहजी भोंसले को मामुली जुनार क्षेत्रों को muscles को देना पड़ा और वह खुद बीजापुर के साथ में भेज दिए गए वह पुणे की जागीर कलेक्ट कर सकते थे और बाहर रह नहीं सकते थे नतीजतन उन्होंने पुणे की जागीर अपनी पत्नी राजमाता जीजाबाई और बेटे छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम करती छत्रपति शिवाजी महाराज इन फैक्ट थे इसलिए उनके विकास में दादाजी कोणदेव जागीर कलेक्ट करते थे यहीं से हम देख सकते हैं कि किस तरह छत्रपति शिवाजी महाराज के पिता ने उनका मार्गदर्शन किया और उन्हें
डेक्कन प्लाटों की पॉलिटिक्स में इन्वॉल्व रखा तो आइए अब हम छत्रपति शिवाजी महाराज के राइस को समझते हैं राइज अप छत्रपति शिवा बहराइच कि 1632 1618 छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म पुणे के पास शिव ने लिफ्ट में 1953 1632 हुआ था उनके गार्जियन और टीचर दादाजी कोंडदेव और समर्थ गुरु रामदास थी 1627 में दादाजी कोणदेव के देहांत होने पर पुणे की जागीर का एक्चुअल कंट्रोल उनके पास आया छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने राज्य के एक्सप्लेनेशन की शुरुआत 16 साल की उम्र में भी तोड़ना फूड को कैप्चर करके की है तो फिर उन्होंने 1656 में रायगढ़
फोर्ट जीता जो 1674 में ऐवेंंचुअली मराठा अंपायर की राजधानी बना 1656 में उन्होंने मराठा चीफ विजेंद्र राहुल मौर्य को डिफ़ाल्ट कर जाणी को कैप्चर किया इस विकी इंपोर्टेंट यह है कि इसमें उन्हें मामला रीजन का अनडिस्प्यूटेड मास्टर बना दिया बाद में सतारा और कुंभकर्ण स्ट्रिप को कैप्चर करते हुए उन्होंने अपने एंपायर को और भी एक्सपेंड किया और बीजापुर के कई इलाकों पर भी कब्जा कर लिया इसी एक्सपेंशनिस्ट पॉलिसी के चलते उनका सामना हुआ बीजापुर के आदिलशाह द सेकंड के साथ ए बैटल आफ प्रतापगढ़ इन 1659 बैटल आफ प्रतापगढ़ है तू बीजापुर के सुल्तान आदिलशाह 10
सेकंट छत्रपति शिवाजी महाराज की एक्सपेंशंस पॉलिसी से काफी परेशान थे और उनके इनफ्लुएंस को रोकने के लिए और हनी सरदार अफ़ज़ल ख़ान को भेजा अफजल खान 10000रुपए को ऐड करने वाले बीजापुरी नोबल थे और केवल धैर्य के साथ कनिंग स्ट्रैटेजिस्ट भी थे अफ़ज़ल ख़ान और छत्रपति शिवाजी महाराज की मीटिंग में एक्जेक्टली किया हुआ उस पर कई नए डिटेल्स है कहते हैं कि अफजल खान मैसेज स्वामी के साथ प्रतापगढ़ पहुंचे और उन्होंने छत्रपति को पर्सनल मीटिंग के लिए बुलाया और प्रॉमिस किया कि बीजापुर फ्रोजन के लिए उन्हें माफ किया जाएगा लेकिन छत्रपति कन्वेंस थे कि यह
क्रश था उन्होंने यह कंडीशन रखी कि दोनों के पास कोई आम और सूरज नहीं होंगे साथ में सिर्फ एक अंगरक्षक होगा उन्होंने प्रोटेक्टिव शिल्ड पहना और राइट हैंड में एक वेपन छुपा लिया कुछ ही दिनों में उनकी मुलाकात हुई और गर्ल अपने के बहाने अफजल ने उन पर कटार से हमला किया पर शील्ड के कारण छत्रपति शिवाजी महाराज बच गई फिर छत्रपति ने अपने वतन से अफजल को मार गिराया और उनके सोल्जर्स को टिकिट कर आम ऐडमिशंस लुक लिए इस लड़ाई को बैटल आफ प्रतापगढ़ कहा जाता है आइए जानते हैं छत्रपति शिवाजी महाराज की राय
व रीड विद मुगल्स दूर राइवल्री विद मोकलसर है लेकिन में दिल्ली के रूलर्स का इंटरेस्ट काफी पहले से रहा है इसमें सबसे इंट्रस्टिंग एग्जांपल था दिल्ली सल्तनत के मोहम्मद बिन तुगलक का जिन्होंने अपनी कैपिटल डेक्कन के दौलताबाद में शिफ्ट की थी औरंगजेब भी डेक्कन में अपना कंट्रोल बढ़ाना चाहते थे और छत्रपति शिवाजी महाराज की बढ़ती शक्ति से घबराकर उन्होने शाइस्ता खान को डेक्कन का गवर्नर नियुक्त किया 1660 में शाइस्ता खान ने पुणे को कैप्चर कर लिया और उसे अपना हेडक्वार्टर बना दिया मराठा आज के पुणे एंट्री पर बैन लगा दिया गया पर मुगल्स लोकल के
साथ कभी अच्छी रिलेशन नहीं बना पाए इसका फायदा छत्रपति शिवाजी महाराज ने उठाया एक रिकॉर्ड के हिसाब से फिफ्थ एप्पल 1663 को एक वेडिंग प्रोसेशन के लिए मॉडल्स ने परमिशन दिया था जिसमें छत्रपति और उनके 400 की ट्रिक्स डिसगाइज्ड रूप में बाराती बनकर पूना घुस गए और शाइस्ता खान को हरा दिया था कहते हैं कि इस इवेंट में शाइस्ता खान की तीन फिंगर्स को छत्रपति शिवाजी महाराज में कट कर दिया और यह दिन आज भी शिवतेज दिन के नाम से सेलिब्रेट किया जाता है हार से हताश औरंगजेब ने शाइस्ता को बंगाल ट्रांसफर कर दिया 1665
में अंबेर के राजा जय सिंह के नेतृत्व में मुगलों ने मराठाओं पर फिर अटैक किया और पुरंदर फोर्ट कैप्चर कर लिया यहां ट्विटियर पुरंदर साइन किया गया जिसके तहत छत्रपति शिवाजी महाराज को अपनी 35 में से तें स्पोर्ट्स सेंटर करने पड़े लेकिन मुगल कि यह डिक्रीज ज्यादा दिन चलने वाली नहीं थी चार साल के मिलिट्री ऑपरेशन के बाद 1617 में छत्रपति शिवाजी महाराज ने मुगलों को फिर से डिफीट कर अपने फॉर इट्स रीकैप्चर किए और मुगल टैलेंट हुई सूरत को भी अटैक की 1617 4 में जाकर छत्रपति शिवाजी महाराज में रायगढ़ फोर्ट में छत्रपति टाइटल
के साथ अपना राज्य अभिषेक करवाया इसके बाद थोड़ी अप्रूव 1680 को इंजीनियर स्ट्रीट बिल्डर छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु हो गई लेकिन उनकी प्रेग्नेंसी रहिए और आज भी है आइए जानते हैं मराठा की एडमिनिस्ट्रेशन के बारे में मराठा एडमिनिस्ट्रेशन ओं कि चत्रपति शिवाजी महाराज चे गोल एडमिनिस्ट्रेटर थी राजा को असिस्ट करने के लिए काउंसिल आफ मिनिस्टर्स या अष्टप्रधान का निर्माण हुआ था जो डाइरैक्टली राजा के प्रति रिस्पांसिबल थे अष्टप्रधान का कंपोजिशन इस प्रकार था पेशवा है और काउंसिल आफ मिनिस्टर्स थीं जिन्हें प्रधानमंत्री की उपाधि दी जाती थी सारे नौबत या सेनापति मिलिट्री कमांडर थे अमात्य
अकाउंटेंट जनरल वाकी नवीस इंटेलिजंस पोस्ट और हाउसहोल्डर्स सचिव कॉरिस्पोंडेंस मास्टर आफ सेरेमनीज न्यायाधीश मुख्य न्यायाधीश की भूमिका निभाते थे और पंडितराव चैरिटी और जिस एडमिनिस्ट्रेशन के इंचार्ज इसके अलावा छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपनी को 2 पार्ट्स में डिवाइड की जो छत्रपति द्वारा नियुक्त से जिन पीठ मेंटेन करती थी और सिद्धार्थ इंडिपेंडेंट सोल्जर्स थे जिन्हें नोबल्स मेंटेन करते थे इसके अलावा उन्होंने देवी की भी स्थापना की और इसीलिए उन्हें फादर ऑफ इंडियन में भी कहा जाता है छत्रपति का रेवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन मानिक अंबर से इंस्पायर था जिसमें लैंड को मेजर करने के लिए रोड का इस्तेमाल होता
था जिसे का ठीक कहते थे रेवेन्यू कलेक्शन के लिए स्पेशल ऑफिशल्स होते थे जिन्हें कार कुंज कहा जाता था चौथ और सरदेशमुखी इंपोर्टेंट एक्सिस थे जो मराठा किंगडम में नहीं बल्कि नेबरिंग टेरिटरी से कलेक्ट किया जाता था चौथा यानि 143 लैंड रेवेन्यू और सरदेशमुखी यानि एडिशनल one-tenth आफ थे लैंड रेवेन्यू जदुनाथ सरकार के अनुसार यह टेक्स इस मराठा आक्रमण से बचने के बदले में दूसरी स्टेट्स जैसे मुगलों के लिए दिए जाते थे सक्सेसर्स और छत्रपति शिवाजी महाराज हुआ था छत्रपति शिवाजी महाराज के बाद मराठा एंपायर शिक्षण डिस्प्यूट्स में उलझ गया उनके दो पुत्र संभाजी महाराज
और राजाराम के बीज सकसेशन के लिए संघर्ष हुआ जिसमें संभाजी महाराज विक्टोरियस हुए लेकिन 1618 वे औरंगजेब ने शंभा जी महाराज की हत्या कर दी और मराठा कैपिटल रायगढ़ को कैप्चर कर लिया है औरंगजेब ने शंभा जी महाराज के पुत्र साधु महाराज को शेयर डिक्लेयर कर उन्हें बंदी बना लिया साधु महाराज के कार्यकाल में ही पेशवाज जो पहले मराठा अंपायर के प्रधानमंत्री थे वह पावरफुल बने जिनकी बाद अब हम आगे करेंगे पेज वास ए को विश्वास में सबसे पहला नाम है बालाजी विश्वनाथ का 1731 में शाहू महाराज ने बालाजी विश्वनाथ को पेशवा पॉइंट किया जिन्होंने
पेज वास सो स्ट्रांग बनाया इन्होंने गूगल कैपिटल में अपनी आर्मी भेज सैयद ब्रदर्स की सहायता भी की थी इसी लिए मुगल इतिहास में वह किंग मेकर्स भी कह गए बालाजी विश्वनाथ में एक बार फिर से मराठा उसके इनफ्लुएंस और पॉवर को इनक्रीज किया इसके बाद जाते हैं इनके बेटे बाजीराव द फर्स्ट पर बाजीराव फर्स्ट 1722 1740 पेश वर्ष में सबसे पावरफुल लगे जिन्होंने 1720 में अपने पिता बालाजी विश्वनाथ घोषित किया इनके दौर में मराठा अंपायर अपने चरम पर पहुंचा जहां मराठस one-third आफ इंडियन सबकॉन्टिनेंट को कंट्रोल कर रहे थे बाजीराव उन्हें डिप्लोमेटिक स्किल्स यूज कर
अपना कंट्रोल मालवा और गुजरात में भी एक्सपेंड किया है कि दौड़ तक मुगल्स काफी कमजोर भी हो गए थे इसीलिए उतरी मुगल टेरिस पर भी इन्होने अपना टैक्सेशन सिस्टम में पेश किया इसके अलावा उन्हें 1728 में निजाम आफ हैदराबाद को डिफीट करने का भी क्रेडिट दिया जाता है बाजीराव फर्स्ट में एक सिस्टम ऑफ कनफेडरेसी इस्टैबलिश्ड किया जिसके अंदर मराठा अंपायर फाइव कंट्रीज में डिवाइड हुआ है बरोड़ा में गायकवाड नागपुर में भोंसले इंदौर में होलकर ग्वालियर में सेमी व्यास और पुणे में पेशवास हर कनफेडरेसी को एक चीज के अंदर प्लीज किया गया जो उन्हें और चार
मछली रूल कर सकते थे इसके बाद जाते हैं बालाजी बाजीराव बालाजी बाजीराव ने बाजीराव फर्स्ट को सख्त किया इनके रूल में मराठा किंग्डम पेशवास की हुकूमत में आ गया और छत्रपति नॉमिनल हेड बने 1752 में पेश हुआ और मुस्लिमों के बीच कि एक एग्रीमेंट के तहत पेशवा मुगलों की इंटरनल ओर एक्सटर्नल थ्रेट्स में मदद करने वाले थे north-western प्रोविंसेस में चौथ और आगरा अजमेर में रेवेन्यू कलेक्शन की परमिशन के बदले यह एक बड़ा अचीवमेंट था इसी कारण से जब अहमद शाह अब्दाली ने बिलों पर अटैक किया तो मराठाइज़ उन्हें प्रोटेक्ट करने गए थर्ड बैटल आफ
पानीपत में अब्दाली ने अफगानी रोहिल्लास और अवध के नवाब शुजाउद्दौला की हेल्प 1761 को मराठा इसको थर्ड बैटल आफ पानीपत में पराजित किया ऐसा कहते हैं कि इस हार की खबर सुनते ही बालाजी बाजीराव का देहांत हो गया खैर हर बड़े अंपायर की तरह मराठा उसका भी डिक्लाइन हुआ जिसकी कहानी अब हम देखेंगे कि गिलानी ने मराठा एंपायर मराठा इसके डिक्लाइन का सबसे पहला रीजन था मराठा लाइट इन्फेंट्री चीज में इंटरनल कनफ्लिक्ट्स और बीन सक्सेस जैसे माधवराव 361 टू 1772 और नारायण राव 1772 1770 फिर जो एंपायर को इंटैक्ट नहीं रख पाए 1773 में पेशवर
नारायण राव की हत्या के बाद पूरे में सकसेशन के लिए स्ट्रगलर छोड़ गया यहां से निकलकर आया मराठा उसके डिक्लाइन का दूसरा कारण ईस्ट इंडिया कंपनी का राइस ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में प्लासी और बक्सर में जीत हासिल कर अपना दबदबा बढ़ा रही थी पूरे में अश्लील स्ट्रगल और पॉलीटिकल इंस्टेबिलिटी का फायदा उठाते हुए ईस्ट इंडिया कंपनी और पेशवास में भी जंग छिड़ लेकिन मराठा अभी भी पावरफुल के और इसी लिए होस्ट एंग्लो-मराठा वॉर 1770 560 दो में वह पिस्टोरियस हुए और त्रुटि ऑफ साल बाकी के तहत ट्वेंटी ईयर्स पेपर्स मेंटेन किया गया तीसरा कारण
था 1795 में पेशवा बने बाजीराव सेकंड की पॉलिसीज ज़ूम मैं सिर्फ क्लियर साबित कि बाजीराव सेकंड डे रूटीन होरमोन Play Store में ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ पीपीटी ओं बरसाईं द्वारा सब्सिडियरी एलाइंस एक्सेप्ट कर लिया जिसमें इन रियलिटी पेशवा से उनकी सारी ताकत शिवजी सब्सिडियरी एलाइंस के तहत प्रिंसली स्टेट कंपनी के अप्रूवल के बिना किसी स्टेट के साथ रिलेशंस इस्टैबलिश्ड नहीं कर सकते थे और न ही स्टैंडिंग और भी रख सकते थे इसके बाद सेकंड एंग्लो-मराठा वॉर 8285 में ब्रिटिशर्स में सिंधिया और भोंसले को भी पराजित कर अलग-अलग सीटी साइन की और फाइनली 98100 थर्ड
एंग्लो-मराठा वॉर के बाद एंपायर का अंत हो गया जब पेशवा बाजीराव सेकंड सरेंडर कर दिया इन सबके अलावा मराठा उसके डिक्लाइन के कुछ और कारण इतिहासकार बताते हैं जैसे एक इफेक्टिव और ऑर्गनाइज़ टैक्सेशन पॉलिसी का ऑप्शंस ओवर ऑल डिपेंड्स अपऑन गुरु लव अफेयर है और अनसस्टेनेबल कनफेडरेसी सिस्टम जिसके चलते पांच मराठा सरदारों में परपेचुअल अकाउंट वृक्ष होते रहते थे तो दोस्तों यह थी कहानी मराठा अंपायर के राइस और फॉल कि आखिर में हम बात करेंगे उनकी ले किसी की जान किसी और मराठस ई एम पावर का अंत तो हुआ लेकिन मराठा अंपायर की लेकिन ज़िंदा
है छत्रपति शिवाजी महाराज को फादर ऑफ इंडियन नेवी से भी संबोधित किया जाता है डेक्कन में वह पहले रूल 10 में थे जिन्होंने नेवल फोर्स की इंपॉर्टेंट समझ फिजिकली नेवी और एयरफोर्स स्टैब्लिश किए जो कोण हटके डिफरेंस में काफी काम आए मराठा स्पोर्ट्स आज भी महाराष्ट्र में इंपोर्टेंट सेंट्रल सर्वर ट्रैक्शन है छत्रपति शिवाजी महाराज की एक लहर सी उनकी गोरी लव अफेयर टेक्निक जीण जिसका इस्तेमाल कर उन्होंने मुगलों के डेक्कन ने Bigg Boss को काफी नुकसान पहुंचाया इसी टेक्निक का इस्तेमाल मॉडर्न डे ख्यात नवीन ने वियतनाम और में यूएस के खिलाफ किया था और यह
ऐसे को परेशान कर दिया था इसके अलावा स्टैंडर्डाइज्ड टैक्स कलेक्शन सिस्टम का इंट्रोडक्शन पेशवास का सबसे इंपोर्टेंट एग्रीकल्चरल रिफॉर्म्स था मराठा उसने दो फंडामेंटल प्लस रिलिजियस टोलरेंस और सोशल मोबिलिटी से दो में इंटरनल यूनिटी भी इंच और की जो आज भी इंस्पिरेशनल है सूर्य से उठकर घी मैसेज मराठा अंपायर दो सेंचुरी तक चला और इसकी ग्लोरी इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखी गई है