लुट नाम नाम ई से बड़ा होता है का नाम है श्री राम ने तो हिला ख़ुदारा शबरी को तारा गिन गिन नेम को सारा इंतजाम के नाम ने तो बहुत मुद्दा रहा है श्री राम न के नाम गायब है का नाम महाराज के कितनी महिमा है वह राम महाराज भी नहीं कह सकते हैं का नाम महाराज की कितनी महिमा है वह राम महाराज ने लगा सकते हैं कि सेतुबंध रामेश्वर का काम हो रहा था तो राम नाम लिख कर पत्थर कराए जाते थे श्री राम जी स्वास्थ्य विभाग के मेरे नैनों से पत्थर पर यह बात
सुन कैसे हैं तो फिर व्हाट्सएप कैसे चलेगा अगर यह कहना है कि वह तो राम जी दरिया किनारे चुपचाप के लाल मिर्च सब अपने-अपने शिविर में थे अपने गांव कि हनुमान जी सतर्कता सेवा के स्वामी की मोड़ बॉडीगार्ड की भी सेवा कर लेता था कहे बिना देखे प्रभु ऐसे हुई अकारण कहीं जाएंगे ने कहां जाते हैं क्या है और अकेले स्वामी को छोड़ना ठीक नहीं है तो धीरे-धीरे छुपके छुपके जाए तो राम की दरिया किनारे गए इधर उधर देखा कोई ऐसा नहीं उठा कर पत्थर या में डाला ट्राइ करते हैं कि कैसे उतरता है पत्थर
डाला तो डूब गए ग्राम जयपुर कहते हैं कि मैंने डूब गया हम भी थोड़े बीच में हुए हैं हनुमान पीछे था बिगाड़ जय श्री राम हनुमान तो यहां से मैं आपकी सेवा में अच्छा अच्छा चलो आप मन के तार की प्रभु जी कि मैं नेहा हनुमान समझ गए प्रभु ने पत्थर फेंका डूब गया प्रभु को वहां के मेरे नाम से पत्थर से बात कैसे हो सका हनुमान जी समझ गए प्रभु क्या आप किस बात की चिंता हनुमान तुम लोग बोलते हो कि आपका नाम लिखकर पत्र देते हुए तक मेरे को देखने को मिले तो इसको
इसको अ [प्रशंसा] कि इस तरह रखेंगे इसको 15 धुंध से इसको राम है उसको तारे राम जिसको लेकर उसको कौन सा है मेघनाद का तात्पर्य तुलसीदास ने राम न सके नाम राम नाम की महिमा का नाम छोटा सा पूरा और लोक नाम और अमिताभ बच्चन और संबंधों से जुड़ा ने से कह दो कि गोविंद अ कि गोविंदा माफ कर दो कि रमेश भाई कह दो तो रमेश तो इतना सनम है पूरा रमेश उससे जुड़ा है कि रमेश का जो भी रिश्ता नाता उससे जुड़ा है रमेश के मिलकर प्रॉपर्टीज उड़ ऐसे ही अगर रमेश ब्रह्म देता
है रमेश ज्ञान है ब्रह्मवेता पूरा ब्रह्मलोक रमेश से जुड़ा है हुआ है [संगीत] क्यों नहीं समय और सुनाओ जरा सा शहर है कि इन नाम की महिमा बात है है और शंकर जी वीर जी कि जपते हैं तो आंवलों पर चढ़ते हैं राम भगत जग चारि प्रकारा सुकृती चारिउ अनघ उदारा सब्सक्रिप्शन अनघ मनापा निष्पाप नाम जपने वाले हैं श्री राम भगत जग चारि प्रकारा सुकृती 9 चारों अनघ उदारा अनघ क्योंकि जब इस समय अपना दे अभिमान अपना टाइटल अपना कौन इसमें सावधान रहना चाहिए समूह कीर्तन में कि इस्त्री का आकर्षण पुरुष की तरह होता है
यह सर की स्वभाविक नीचे के केंद्रों में गिरना यह जीव का स्वभाव गिरना स्वभाव और शांत पानी का नीचे स्वभाव है लेकिन तीसरी मंजिल पर चढ़ना यह पानी का स्वभाव नहीं मोटर की जरूरत है और दूसरी मंजिल पर था तो तुम्हारे मटके तक पहुंचना है पानी का स्वभाव नहीं है नीचे गिरना पानी का स्वभाव है मटके मिलाना है तो तुमको डुबोकर भरना पड़ेगा ना लिखेंगे अब है और बराबर मटके में पानी आएगा तो मटका बढ़ेगा तो तुम यहां पर भाई करोगे तो मटके का थोड़ा समुद्र होगा तो पानी नीचे आ जाए पानी का शाह नीचे
वरना ऐसे ही इंद्रियों का स्वभाव है नीचे की तरफ जाना है मैं तो हर जन्म में ऐसा करते हैं बंदर बने थे तो बंदियों के गुलाम कुत्ते बने थे तो कुत्ते के पीछे पूछे जाते थे एक कुत्ते और चार कुत्ते पीछे होते चित्र उतर जाते हैं उनकी मरम्मत कर और घड़ी भर के बाद तो मुर्दे वह तो पड़ेगा के विचार सुनने फिर भी पूछे जाते पतंग एक मरा दो मना 5मरे फिर भी तड़प-तड़प कर मरने जा रही थी एक तरफ क्योंकि उनको रूप में आ सकती हैं का पतन को देखने के आसक्ति तड़प-तड़प के मर
जाता है हाथी को टच करने की जा सकती विशेष होती है तो हाथ इन मनाई जाती और उसको जाता है स्पर्श करने को हातिम होती है नकवी लाइट को स्विच ऑफ घंटे सेवा थी करने में मदद करता है घास-फूस से ठंडक हुआ होता है उसमें हाथी ने खड़े कर दिए जाते हैं और आखिर देखता कि मैं इस वक्त यह जाता है ना देखाव ढेर छाव निकल नहीं सकता है है तो वहां थी इस वर्ष के सूखे पत्तों रंग-रूप के सूखे से ए बूढ़ा स्वाद के सुख से कमल मुरझा लुट ताकत के मांस को पीछे करके
निकल जाए लफड़े में भी बना देता है काला करता रहता है उसको पता चलता है कि को यहां से जाऊंगा तो चलिए यहां पर आते जंगली पशुओं को पकड़कर कहा तो लक्ष्मण तोड़कर जाने की ताकत और कोमल कमल उससे पार नहीं होता है है उसको तुलसीदास जी के भाषण में अली कहते हैं अली और मछली को कितना भी चतुराई से हाथ से पक जाए तो नहीं लेकिन कुंडली में कुछ खाने का डाल तरफ से चटक चटक चले मटक चिपक जाती है कि यह मशविरा करते हैं कुछ में कुंडियों में रखते हैं वह को खाने को
आती है तो उसके गले में कुंठित आखिरी फसाया तड़प तड़प के प्राण देते हैं तो बड़ी स्वतंत्र थी लेकिन स्वाद के पीछे मरी तो एरर जीरो को एक स्वाद के बदले में अपना सत्यानाश हो का मोल लेना पड़ता है वह एग्जाम में एक पतंग को केवल आकर्षण आर्थिक उस वर्ष के आकर्षण भंवरे को सुगंध का आकर्षण और हिरण को सुनने का आकर्षण महाराज कुछ ऐसा मत दस सांप को सुनने का करता है उसी से हो मदारी के आप पकड़ा जाता जिंदगी भर गुलामी करने में पड़ा रहता है इस बारे में क्या विचार है कि कोई
जीव को हर जन्म में कभी पतंग बने होंगे तो कभी मैं आ रहा है जहां थी बने होंगे तो कभी बकरा बने होंगे तो बकरे को भी सेक्सुअल आकर्षण ज्यादा होता है ढूंढो को भी काम विकार ज्यादा होता है है तो यह जो आकर्षण है यह हमारे चित्र में बहुत पुराने पड़े मनुष्य जन्म है इन आकर्षणों को एकदम अगर नहीं मिटा पाता है तो शादी करके नियंत्रित जीवन बिताते हैं के आकर्षण को मिटाने के लिए शादी का विधान है तो शादी करें तो कैसे के आज अमावस है आज चलाना एक ही दिन बच जाता है
शायद कभी महीने संसार में का और उससे गर्व रहेगा तो जिंदगी भर उसको खिलाओ-पिलाओ और बच्ची बड़ी हो जाए तो जमाई खोजो ना करो करते रहो और लगे इस संसार में कोई सार नहीं पता चले तो यह आकर्षण का बदला चुकाते चुकाते रहेंगे और सब्सक्राइब बुद्धिमान विरक्त हो शादी की तैयारी और घर छोड़कर भागने लगी है मैं तुम्हें हर उसके लिए मेहनत कम हो जाती है तो यह साधन-भजन करते हैं उसमें भी सावधान रहें कि कहीं आप करेक्शन में गिरते तूने जैसे गिदूमल के वह लड़के-लड़कियां कीर्तन ध्यान भजन धुन करते थे और उसमें एक दूसरे
को देख देखकर फंस गए तो लड़की बेचारे गर्भवती हो गई तो लड़का इज्जत कम आरंभ गया तो यह पूरा वह जाकर धूमल को सहना पड़ा और पूरा समाज में भक्ति में यह निशान लग गया है में एक ऐसा ऐसा मत वहां से उनको आश्रम बंद करना पड़ा दूर एक कुंवारी लड़की की इज्जत बचाने के लिए धूमल ने घोषणा किया कि मेरे साथ इसका विवाह हुआ है हम सबमिट करते 17 साल उसके साथ रहे लड़की जो मर रही थी तो अपनी मां खोलेंगे मेरे साथ शादी तो किया इन्होंने मेरी इज्जत बचाने के लिए दो प्राणियों की
रक्षा करने के लिए मेरे पेट में जो बच्चा था उसकी और मेरी रक्षा करने के लिए उन धूमल सेशन जज ने यह बदनामी मोल लेकिन शादी के बाद हम घर में रहे हैं तो पिता और पुत्री के नहीं अब मुझे कैंसर है असाध्य रोग जा रही हूं लेकिन मैं तुझे बोलती हूं कि तेरा जमाई नहीं है तेरा मेरा और सब का पिता है वह तुम कहा तो उसका हाफ समाज में तो अखबारों में इधर-उधर तो भक्ति करने वाले कीर्तन करने वालों का तो ना कट गया कि एक लड़के ने मुझे छुआ था दूसरों के पैरों
साहब बताए अच्छी तरह से अलावा पूरे मुंबई में उन इलाकों में उनके लड़के के साथ और उसमें कोई फल होता है न बूढ़ा हो जाता है तो यह आदमी गलती करता तो पूरे करना पड़ जाता है तो उसमें खास सावधानी रखनी है कि हजारों जन्मों के पुराने संस्कार एक दूसरे की उम्र है तो कहीं राम नाम जपते जपते काम तो नहीं करता है तो इसलिए बहनों का अलग होना चाहिए बच्चों का अलग होना चाहिए उसमें रखे जाने के बाद वह किरण करते-करते मंडल में नजर रखें नहीं ऐसी गलती होने की संभावना तो नहीं हो रही
है एक पाठ पहले आंख से गुस्सा है फिर पानी से पुष्ट होता है फिर बार-बार देखने से और रस्सी मजबूत होती है फिर कि मेरे को कोई वादा नहीं आ कि बड़े-बड़े ऐसे स्पेशल जाते हैं बड़े बड़े अच्छे लगते हैं है इसी लिए कीर्तन बातचीत कर रहे प्रभातफेरी बड़ा मंगलकारी अनु सावधान न रहे और कोई स्पेशल जाए तो उसकी दो बर्बादी होगी जिन दूसरे का नाम भी घट जाता है और भक्ति के ऊपर मट्ठा लगता है और दूसरी बात खतरे की है कि धर्म को जो लोक धंधा बनाते हैं वे लोग धर्म का नाश करते
दर्शन धंधा नहीं है धर्म तो धर्म है धर्म पावडर लेकर गुरु के पांव दिए लेकर गए इसी के घर कीर्तन भजन क्या यहां तक तो अच्छा है उसके द्वारा आमदनी करना अथवा कोई बोले गुरु जी के चरणों में पहुंचाना ताकि हजारों लोगों की सेवा में लग जाए और वहा खंबा पैसा रख देना वह आदमी का तो क्या होगा तो भगवान जाने उस आदमी को बेचारे को कितना सहन करना पड़ेगा धर्म को धंधा बनाते हैं उनकी तो बड़ी दुर्गति होती न्याय है तब तक पता नहीं चलता है जब ऐसा करने से पुण्य क्षीण होने लगती है
तो फिर वह आदमी विचार फिर जाते हैं मैं आपको कोई मान देता है तो समझो भगवान और गुरु की प्रसादी को मानदेय रहा है और उस पर शादी का मिस यूज करते ही वह प्रसादी वापस कहीं चली जाती है फिर जो आपको हजार-हजार आदमी मान देते थे वह हजार में से 500 500 में से 200 200 में से 10 और 10 में से दो जाएंगे और दो भी तुम्हारे अंदर से तो दुश्मन हो जाए तो को अपने हृदय में जितनी इश्वर के प्रति सच्चाई है धर्म के प्रति सच्चाई और वफादार है उतनी ही अपनी उन्नति
होते हैं धर्म के नाम पर यह इश्वर के नाम पर अगर धंधा करते हैं तो इश्वर तो सर्वनियंता है अंतर्यामी है सब देखना है हम किस छुपाएंगे एक पादरी ने कि अ कि थिएटर के मैनेजर को चिट्ठी लिख का प्राइवेट आदमी के हाथ भेजिए कि आप जो क्षेत्र में फिल्म चल रही है उस फिल्म की बड़ी प्रसिद्ध हुई मैं फिल्म देखना चाहता हूं लेकिन उन्हें पादरी होने के नाते हम पब्लिक जिस डोर से आते हुए इस डोर से उस दरवाजे से नहीं आ सकता अगर आप को इस प्राइवेट डोर हो चाहे कितना में उसके बदले
में आपको पेमेंट कर दूंगा इन ऐसा कोई गोपनीय डोर हो जो मैं फिल्म देख सकूं खैर डोर तो होते यह ऊपर से चला गया आदमी के मैनेजर बड़ा बुद्धिमान था और है सच्चा था उसने चिट्ठी लिखा उस प्रसिद्ध पादरी को अब आगे को कि यह समाज में धर्म का लाभ लेने के बैठे और शक्कर फिल्म देखना है इस समय के साथ-साथ अधिक बड़ा इमानदार मैंने जब अ है क्योंकि वह जानता है ईश्वर परमात्मा रोम रोम में राम रहा है राम करते हैं जो रोम रोम में राम रहा है कृष्ण कहते हैं जो आनंद स्वरूप पर
सबको आकर्षित करता है वह तो आत्मा सब के रास्ते में है वह वेदांत का सत्संग सुना हुआ मैनेजर था वह क्यों आता है-हिंदी डेटिंग के चक्कर में मैं तुम्हारा आज अपने तो बच्चे लेकिन कोई अपने द्वारा पीकर आए तो उसको भी कहेंगे भाई मैं लाचार हूं इस बात में सहयोग नहीं कर सकता यह बात छुपा नहीं सकता हूं मैं तो भगवान को प्रार्थना करूंगा कि तेरी बुद्धि सुधरे और विरुद्ध को मैं तो खत लिख लूंगा कि उसकी आंख में गड़बड़ है ऐसा रखे तो एक दूसरे का व हितैषी है गिर जाएं पतन हो जाए फिर
उसको नेता हृदय धकेल दे दी जॉइंट कर दे एक आदमी भागता हुआ आया कि फलाने आदमी ने ऐसा कि आप आ गया फिर उसको सबक सिखाने में क्या नहीं रह सकता है साहब अपुन क्या कुछ मत का यह ऐसा है वैसा है वैसा खूब प्रचार करता है साधकों का हजूम है कि हम उसको ठीक कर देश को सबक सिखा दे दो उसको जरा सजा मिलनी चाहिए मैं क्या उसने अपराध तो भारी क्या है कि तुम लोग सजा मत दो तूने फिर बाबा ऐसे लोग बहुत हो जाएगा नहीं गुरु ने अपने हृदय से निकाल दिया उससे
बड़ी सजा क्या हो सकती गुरु के रवैए को ठेस पहुंची हो उसके आचरण से उसे बड़े क्या सजा हो सकती है और गिरने समझाया समझने के बदले वह और मनमुख हो गया तो गुरु ने जरा अपने रवैए से उसकी जगह हटा दी है तो ऐसा होता क्यों है केवल आकर्षण उसको होश आया मोहम्मद साहब ने कहा कि एक बार स्त्री को तुमने देख लिया तो मैं शमा है दोबारा देखा तो अपराध है और तीसरी बार उसी को देखा है को उस अ तो और फिर सजा है चौथी बार देखा तो हत्या का पाप को इस
तरह से आदमी एक बार अगर अंजाने में चली जाती है जब अच्छा ठीक है फिर बाहर बार अगर उधर नजर जाती है और अपना साक्षी आप है यह हमारी नजर किस हिसाब से जा रही है और जरा सा देखा तो क्या बिगड़ता है बिगड़ता है साहिब महाराज फिर सुधारने वाले थक जाते हैं ऐसा भी बढ़ जाता है है इसलिए नाम संकीर्तन हो या और कोई प्रवृत्ति हो बड़े में बड़ा खतरा है स्त्रियों को पुरुषों के सानिध्य से बड़े में बड़ा खतरा है पुरुषों को स्त्रियों के सानिध्य में है इसलिए स्त्री ईएस स्त्री या पुरुष को
देखें तो फिर उस भाव को या तो जगदंबा का भाव खुला है यह तो फिर 2 उबले हुए हैं और गाड़ी अ सांप भगवत का पसंद है गोकर्ण कहता अपने पिता आत्मदेव ब्राह्मण को मांस परिचय हैं रंगों से बंधे हैं वह ऊपर चमड़ा है नाक में लाभकारी है मुंह में थूक है और पेट में मलमूत्र है फिर भी सारे अच्छा लगता है तो इस प्यारे किया चाहिए वह प्यार तो मेरे हृदय में जो गाते हुए हैं मैं उसका अपमान क्यों कर [प्रशंसा] अगर पुरुष को स्त्री के प्रति आकर्षण होता है तो ऐसा विचार कर लें
और स्त्री को पुरुष के तरफ आकर्षित होता तो फिर उसमें भी वही मसाला भरा है कि दुबई आइडिया और दूसरी आईडी हड्डियां मांस खा लो चेहरों से नसों से नाड़ियों से लिपटा हुआ मां की जगह में विस्तार होगा मल होगा तुमको गिली ढाई कप होगा ऐसा पुरुष का शरीर फिर भी प्यारा लगता है तो उसमें रे चैतन्य परमात्मा की चेतना है मुर्दा हो जाए तो कौन पूछता है कि तुम मूर्ति शरीर में आकर्षण नहीं मुर्दा इशारे को जो चेतना दे रहा है उस चैतन्य परमेश्वर में आकर्षण स्त्री स्त्री को अगर आकर्षण हो तो सीता जी
को याद करके मां सिते जगतंबा तू मेरी रक्षा करें मेरे राम जी राम राम राम सुरक्षा का अब पुरुष को हो तो सीता जी को याद करे राम जी को यह बात करें सीता जी के पास इतने प्रलोभन के भी सीताजी का मन एक दिन खबर पिछला नहीं राम जी के आगे सूर्पनखा क्या-क्या बीच ले आए राम जी का चित्र नहीं निर्मित ऐसे हमारा चित्र बजाय दो सात दिन थोड़ा होगा तो बाहर करने लेकिन का साधन में गिरे नहीं है की साधना थोड़ी हो तो कोई हरकत नहीं बहुत साधना करें और बहुत गलती करें तो
विनाश कर लेगा अपना अ कि थोड़ा सा धन करो गलती न करें तो अपनी रक्षा कर लेगा कि साधन-भजन खूब है कि एक मालवीय खूब लंबा-चौड़ा बगीचा बनाया पूर्व खूब फूल खिलते हैं उसका उत्तर निकालकर नाली में फेंक देता है एक बड़ा बगीचा किस काम का ऐसे आप जो खाते हैं उस अंत में से रस बनता है रश्मि से फिर रक्त धातु ऐसे करते सप्त धातुओं में परिवर्तित होकर उर्जा बनती वीर्य बनता विश्व पुष्प का पुष्प तो है शरीर में स्थित तो है कि अगर 40 दिन आप भोजन करें तो सवा तोला वीर्य बनता है
और ऐसे आकर्षण से स्वप्न दोष के द्वारा और विकारों के द्वारा नष्ट हो जाए और 40 दिन घोड़ा खाता है उससे जो रस बनता है वह कर्मठ होते होते होते यह सवा तोला बनता है जी हां जो मालिश बगीचा सिंह चोर सवा तो लाकर निकले और नाली में डाल दे तो उस मालिक को क्या कहोगे बेवकूफ गधा ऐसी हम खाते पीते हैं [संगीत] 40 डोला मन सवाल सिर्फ बच्चा लगभग सवा 500 ग्राम होता होगा 4016 इतना खुराक रोज खाओ अच्छी तरह से पुष्टि औलाद 40 दिन खाओ तब तवा पुलाव निबंध और आकर्षण के द्वारा वह
नष्ट हो जाता है इसीलिए भक्ति में ज्ञान में बरकत नहीं आते अगर वीर्य मजबूत हो जाए तो मठ और समय अलग-अलग जितने अंश में वीर्य है शरीर में इतने ही नेता भ्रष्ट हैं मैं अच्छे-अच्छे विचार है अविनाश शर्मनाक है कि सीईए जितना आत्मिक ऊपर उठता है उतनी उसकी सुरक्षा की जरूरत पड़ती है आप पैदल चलते-चलते गिर जाएं तो ज्यादा नहीं लगता साइकिल से गिर जाएंगे और ज्यादा लगता है स्कूटर से ठोक एक्सीडेंट हो तो और ज्यादा रखना है और महाराज हेलीकॉप्टर से गिर जाएं तो फिर तो और जेट विमान से गिरे तो फिर तो हड्डियां
एकत्रित करने वाले का दम निकल जाए जेट विमान से जुड़ जाएं तो आप ध्यान रखेंगे तो अंडे अलग-अलग छोटी-छोटी हो जाएगी ऐसी जितना आपका ऊंचा साधन है इश्वर प्राप्ति का अपना कल्याण में रखें उसमें जितना आप लापरवाही करेंगे तो खतरा भी अपना हो सकता है को प्ले खूब सावधान रहना चाहिए 70 करना चाहिए आप तो रहे लेकिन आप इसको प्यार करते ना उस अब उसकी आप निगरानी करो आपकी वह निगरानी का एक दूसरे को बचाओ एक दूसरे की गलती को पोषण मत दो संयोग में तो एक दूसरे की गलती हो निकालने की कोशिश का सच्चा
मित्र व है तो अपने मित्र की गलती उसके मुंह पर करें और उसको गलतियों से बचा है वह सच्चा मित्र है जो गलतियों में साथियों करता है वह तो गुंडा है बदमास है वह तो शरबत के गिलास में नहर डाल कर देने वाला में शकुनी जैसा आदमी है वह तो अ 90 अपने उस अनापत्ति को दे देता है जहर दे देता है कसूर शक नहीं खाना है सेनापति का नहीं है मैं तुम्हें हूं आज है अपने मित्र का धर्म निभाना चाहिए मित्रों कृपया बिगड़ते हो तो कोई बड़ी बात नहीं मित्र का मकान दुकान ज्ञाता हो
तो इतना खतरा नहीं है जितना मित्र का चरित्र करने से मित्र को खतरा होगा कि इस लेख से कि रक्षा करें सहेली सहेलियों की रक्षा करें साधक साधकों की रक्षा करें साथ व्यवसायियों की रक्षा करें इतना काम तुम खा लो बाकी का जो भी प्रॉब्लम होगा हृदयों का आकर्षण दूसरा नियुक्तियों का सुख में अटैक वह सब हम बैठे हैं मैं इतना तुम करो बाकी तुम्हारे जी में जो आए तुम करो गुरु के जिम्मे है वह गुरु ना करें तो ग्रुप को छोड़ देना है कर दो मैं इश्वर के जिम्मे जाता है इस पर ना करें
तो ईश्वर को छोड़ दो लेकिन ईश्वर कभी ऐसा नहीं करते ईश्वर के जिम्मे जो आता है वह बिल्कुल पहले से कर देता है हम लोगों ने जन्म लिया माता के ग्रुप में है तो क्या हमारे बाप ने हमारे दादा नया हमारे दोस्त ने व्यवस्था किया कि मार्क्स थन में दूध आ जाए ईश्वर को जो करना है पहले कर रखा है बाहर में हमारा जन्म हुआ है बिल्कुल सीधी बात है कि परमात्मा को जो करना चाहिए वह आपसे पूछ कर नहीं करेगा आपके आने के पहले तैयार रखिएगा हम घर छोड़कर भागे और हमारे को जब भोजन
की जरूरत पड़ी तो मेरे को भूख लगने वाली उसके पहले तो भोजन लेकर लोगों को रवाना कर दिया और मैंने सोचा कहीं नहीं जाऊंगा यहीं बैठकर खाऊंगा तो आ गए महाराज हम आपकी सेवा में कि किशोर कितनी रक्षा करता है बिल्कुल प्रत्यक्ष अनुभव है ऐसी जगह पर जगह कि जहां कोई परिचय नहीं और मांगना नहीं आप शिवा करने वाले आप ऐसी जगह पर गया किरदार शराबी हो गुंडागर्दी हो तो सब समय मैं हूं तो चलो फिर उसे इलाके में गए है की रोशनी मिले नदी के उस अ बनास नदी के बीच में दारू की भट्टी
चलती थी वह रात के समय गुजरता है बाबा का बच्चा साल थोड़ा इधर आओ हम गए और लंबा बढ़िया धारियां बड़ा एक छोटे आधार अ क्लास चम्मच नष्ट हो शराबी ने धारियां बाबा का बच्चा मेरे कंधे पर रख दिया गर्दन काटने की सेटिंग तेरी उसके साथ दूसरा गाली बकने वाले की गहराई तो दरिया खींचने जरा गलती से खींच लेते तो कम से कम ऐसा बिल्कुल घटित घटना में अज्ञात रहता है है कि नारियल खींचने वाले कुछ सत्ता तो मैं ही दे रहा है मेरा चेतन नहीं देना मुझे तेरी मर्जी तू खींच क्या फर्क पड़ता है
एक हाथ कांपने लगे धरयो हाथ से गिर गया है वो कपड़े उसको जो इश्वर को करना थे वह बिल्कुल कर लेता है हुआ है है उसको खत्म घाटे के भाई साधू ना कर माफी मांगो बीच फ्रॉम करके भावना बच्चा मोटू पतलू खेलने हैं मैं दारु नहीं पियूंगा बुलेट रोशन व खत्म उठाओ से ऐसा करके वह ग्रसित था ये हमको जो करना चाहिए दारू से बचना चाहिए ऐसा हम मानते हैं तो हम तो आदि ग्रह उसको उसको खींचने का विचार व गर्दन हालांकि उसको तुमने कुछ कहा नहीं था उनको ऐसा पता होगा कि साधु बाबा दारू
छुड़ाते दारूडियो को जरा टपकाते साधु बाबा मिल गया तो जरा अपना रोष निकाला किसी साधु ने कहा होगा उसको नहीं कहा भगवान जाने लेकिन उसको साधुओं के प्रति बड़ी नफरत थी शराबी को शराब पीकर होता है उसकी दुनिया अलग होती तो वह नफरत हमारे वर्ष का समय निकालना चाहता हूं मैं ठीक है तो हमें ईश्वर पर भरोसा करना चाहिए हमने कर डाला ईश्वर को हमारी रक्षा करनी हो तो करें न तो अपने पास बुला लेगा क्या फर्क पड़ता है है ऐसे तुम्हारा आज कदम-कदम पर आप कितनी दृष्टांत मांगो कितने साधो तब सत्यों के जीवन में
देखो तो आप को जो करना है वह कर लो इश्वर को जो करना है वह कि अ वाणी का विषय नहीं है इस पर को जो करना है मैं वह बिल्कुल बढ़िया कर देता है