वारेन बफेट ने एक बार कहा था कि यदि तुम सोते समय भी पैसे कमाने का तरीका नहीं सीखते तो तुम्हें जिंदगी भर काम करना पड़ेगा। इस एक वाक्य में पूरे धन का विज्ञान छुपा हुआ है जो मैं आज आपको समझाने वाला हूं। अगर मैं आपसे कहूं कि आज के ठीक 10 साल बाद आप आर्थिक रूप से कहां होंगे? आपके बैंक अकाउंट में कितना [संगीत] पैसा होगा? आपके पास कितनी संपत्ति होगी। आप आर्थिक रूप से स्वतंत्र होंगे या फिर आप गरीब रहेंगे। आपके महीने की सैलरी कितनी होगी? यह सब कुछ अभी पता चल सकता है। तो
आप क्या सोचेंगे? और सबसे मजे की बात यह है इसका फैसला आपकी नौकरी नहीं करेगी। ना ही आपकी सैलरी करेगी और ना ही आपकी किस्मत करेगी। यह फैसला उन छोटी-छोटी आदतों का होगा। सच यह है कि दुनिया में बहुत से कम लोग ऐसे होते हैं जो पैसों की कमी की वजह से गरीब रहते हैं। जबकि अधिकतर लोग गलत आर्थिक आदतों की वजह से कभी भी नहीं बन पाते। उनके पास पर्याप्त धन होता है लेकिन वह पैसों का सही से इस्तेमाल नहीं कर पाते और ना ही पैसों का खेल कभी समझ पाते हैं। यही कारण है
कि आपने अक्सर ऐसे लोगों को देखा होगा जो 20 30 साल से अच्छी नौकरी कर रहे हैं। फिर भी वे गरीब हैं। अभी भी वह आर्थिक तंगी में जूझ रहे हैं। दूसरी ओर कुछ ऐसे लोग भी मिल जाते हैं जिनकी शुरुआत बड़ी छोटी थी और वह अभी भी छोटी नौकरी ही करते हैं। फिर भी वह संपन्न है। उनके पास कोई आर्थिक तक [संगीत] ही नहीं है। आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या भगवान ने उनके साथ अलग-अलग न्याय किया या उनकी किस्मत ज्यादा अच्छी लिखी या फिर उन्होंने ऐसा कौन सा रहस्य समझ लिया जो बाकी लोग
नहीं समझ पाए। बस यही रहस्य आज हम आपको समझाने वाले हैं। इसलिए वीडियो थोड़ी लंबी होगी। बस आप ध्यान से मेरी बातों को समझने की कोशिश करें। अगर आप इतिहास उठाकर देखें तो दुनिया के लगभग हर सफल व्यापारी, हर बड़े उद्योगपति, हर करोड़पति, हर सक्सेसफुल इंसान के सोच में एक बात समान मिलती [संगीत] है कि वे कभी भी पैसों के पीछे नहीं भागते बल्कि वे ऐसी आदतें बनाते हैं जो उनके लिए पैसे बनाती चली जाती हैं। अधिकांश लोग पूरी जिंदगी पैसे कमाने में लगा देते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि आज जितना ज्यादा कमा लेंगे,
जितना ज्यादा मेहनत कर लेंगे, उन्हीं से उनका भविष्य बन जाएगा [संगीत] और वही चीजें उन्हें अरबपति बना देगी। लेकिन हकीकत में पैसा कमाने की कभी चीज है ही नहीं और ना ही पैसे कमाने के लिए पूरी उम्र लगाने की जरूरत पड़ती है। बहुत से कम लोग यह भी सीखते हैं कि पैसे से पैसे कैसे कमाया जा सकता है। वे लोग यह नहीं समझ पाते कि सैलरी केवल एक अवसर है। मंजिल नहीं। नौकरी एक शुरुआत है लेकिन संपत्ति का निर्माण आपको आपकी सोच और आपकी आदतें करवाती है। ठीक है? मैं आपको एक कहानी सुनाता हूं। दो
दोस्त एक ही कंपनी में काम करते हैं। दोनों की उम्र लगभग समान है। दोनों एक ही शहर में रहते हैं। दोनों की सैलरी भी लगभग बराबर है। लेकिन 10 साल बाद उनमें से एक व्यक्ति के पास अपना घर है, अच्छा पोर्टफोलियो है, गाड़ी है, सब कुछ है। और उसे नौकरी छूट जाने का डर भी नहीं है। जबकि दूसरा व्यक्ति अभी भी हर महीने ईएमआई, क्रेडिट कार्ड और आर्थिक तंगी से जूझता है। अब बताइए इन दोनों में कहां गलती हुई? जबकि दोनों की शुरुआत एक जैसी थी। मंजिल इतनी अलग-अलग आखिर कैसे हो गई? इसका उत्तर सिर्फ
एक शब्द में छुपा है। वह हैबिट। जिस हैबिट के बारे में आज हम आपको बताने वाले हैं। एक बात हमेशा जिंदगी में याद रखें कि इंसान कभी भी एक दिन में अमीर नहीं बनता। वह हर दिन गए छोटे-छोटे आर्थिक फैसलों की वजह से धीरे-धीरे अपने आने वाली भविष्य का निर्माण करता [संगीत] है। अब सीधे मुद्दे की शुरुआत करते हैं। अब जरा आप मुझे बताइए। अगर आप जॉब करते हैं, अगर आपको सैलरी मिलती है, तो आप मुझे बताइए। आपके [संगीत] खर्चों में से कितने खर्चे आपके अपने ऊपर थे और कितने खर्चे उसमें से उन चीजों में
आपने करे जो बहुत जरूरी थे। हो सकता है मोबाइल इंटरनेट, रिचार्ज, ऑनलाइन शॉपिंग, वेबसाइट, घूमना फिरना, महंगे गैजेट्स इन सब में आपने उन पैसों को लगाए हो या फिर नहीं लगाए हो। लेकिन मजे की बात यह है कि ज्यादातर लोग हमेशा खुद को सबसे अंत में रखते हैं। वे महीने की शुरुआत हमेशा उन खर्चों के लिए करते हैं जो उनके लिए पहले से निर्धारित है। उन्होंने ईएमआई पर चीजें ले रखी होती हैं। जिनके अमाउंट आते ही उनके अकाउंट से वो माइनस हो जाते हैं। फिर उनके लिए कुछ नहीं बचता। जो बचता है उसमें बिल भर
दिया जाता है। शायद फीस चली जाती है। ईएमआई कट जाती है। मैंने पहले ही कहा सब कुछ खत्म होने के बाद उनके पास कुछ भी नहीं बचता। और रोज जब अगले महीने की शुरुआत करता है तो अगले महीने भी यही सर्कल चलता रहता है और हर बार-बार बस यही चीजें होती रहती हैं। लेकिन धनवान लोग इस खेल को बिल्कुल उल्टा खेलते हैं। वे सबसे पहले खुद को भुगतान करते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि वे अपने ऊपर खर्च करते हैं। वे सबसे पहले अपने भविष्य को पैसा देते हैं। जैसे ही उनकी आय होती है,
एक निश्चित हिस्सा उसमें सीधे इन्वेस्ट करते हैं। उसके बाद जो भी पैसा बचता है, उसमें पूरा महीना चलाया जाता है। उसी के हिसाब से चीजें मैनेज करी जाती है। शुरुआत में बड़ा कठिन लगता है। शायद आप सोचेंगे कि क्या इत्तेफाक है। जो खर्चे पहले से ही तय हैं उन्हें भला हम कैसे बंद कर सकते हैं। लेकिन खर्चे आपने ही बनाए हैं। उसकी जिम्मेवारी आपकी ही है। खर्चों की शुरुआत आपने करे थे। बेवजह [संगीत] उन चीजों की जिनकी खास आपको जरूरत भी नहीं थी। आपने उन्हें लिया। आपके पास पैसे नहीं थे। आपने ईएमआई पे ली और
आप अब उनकी ईएमआई भरते हैं। एक बात हमेशा याद रखें सैलरी कभी भी दौलत नहीं होती। सैलरी केवल दौलत बनाने का अवसर होती है। अगर आप हर महीने खुद को सबसे पहले भुगतान नहीं कर रहे हैं तो आप अनजाने में पूरी दुनिया को अमीर बना रहे हैं और आप अपने भविष्य को गरीब छोड़ रहे हैं। यह सबसे पहली आदत है जिसे हर बड़ा इन्वेस्टर अवॉइड करता है। दूसरी सबसे जरूरी आदत है टालने की आदत। जब भी आपके पास पैसा आता है तो आपके पास बहुत सारी इच्छाएं हो जाती हैं। आप सब कुछ खरीदना चाहते हैं।
आप अपनी सभी जरूरतों को तुरंत पूरी कर देना चाहते हैं। लेकिन नियम यह कहता है कि जब भी कुछ आपको खरीदना हो तो उसके पहले आप उसे टाल दीजिए। अगर आप तुरंत खरीदने वाले हैं तो आप उसे कल पर टाल दीजिए। आप अपने आप से कहिए कि इसे आज नहीं कल देखता हूं। हो सके शायद आपको कोई वॉच पसंद आई हो या हो सके कोई गैजेट। आप उसको अपने कार्ड में डाल के सुबह के लिए छोड़ दीजिए। आप कहिए कि मैं इसे कल शाम को देखूंगा। क्योंकि ज्यादातर केस में जब आप किसी को कल पर
टाल देते हैं तो वास्तव में उसकीेंस उतनी खत्म हो जाती है। फिर आप ऑटोमेटिक देखेंगे कि आप उसको उस आम को खरीदने का मन नहीं कर रहा। आप बोलेंगे नहीं अब यह जरूरी नहीं है। इसीलिए जोश में फैसले लेने से पहले उसे टाल देना बेहतर होता है। अगर आपको सच में अमीर बनना है तो सबसे पहले अपने मन पे कंट्रोल करना सीखिए। दुनिया चाहती है कि आप हर चीज तुरंत खरीदें। तुरंत खर्च करें। तुरंत खुशी महसूस करें। लेकिन सच यह है कि तुरंत मिलने वाली खुशी कुछ दिनों की होती है। जबकि सही जगह लगाया गया
पैसा वर्षों [संगीत] तक आपके लिए संपत्ति बनाता रहता है। वर्न बफेट ने कहा था अगर तुम उन चीजों को खरीदते रहोगे जिनकी आपको जरूरत नहीं है तो एक दिन तुम्हें उन चीजों को बेचना पड़ेगा जिनकी तुम्हें सच में जरूरत है। इसीलिए खरीदारी से पहले आप खुद से सवाल करिए कि आपको सच में इसकी जरूरत है या सिर्फ मैं इसे खरीदना चाहता हूं। तीसरी सबसे जरूरी आदत है हमेशा इमरजेंसी फंड बनाकर रखिए। जिंदगी में [संगीत] कभी भी पहले से मुसीबतें आपको बताकर नहीं आती। कभी नौकरी चली जाती है, कभी कोई अचानक बीमार पड़ सकता है। कभी
बिजनेस में नुकसान भी हो सकता है। ऐसे समय में ज्यादातर लोग कर्ज ले लेते हैं। अपने क्रेडिट कार्ड का सहारा लेते हैं या दोस्तों से उधार पैसे मांगने लग जाते हैं। लेकिन यह सबसे बड़ी उनके लिए आर्थिक परेशानियां शुरू कर जाती हैं। अगर आपके पास आज पैसा नहीं है तो कल भी उसके लिए पैसे आएंगे। यह संभवत लगभग इंपॉसिबल है। इसीलिए हर व्यक्ति के पास कम से कम आपके 3 महीने के बराबर इमरजेंसी फंड जरूर होना चाहिए। आपके हर महीने खर्च लगभग 10,000 है। तो आपके पास कम से कम उसका 1/3 हिस्सा आपके पास होना
चाहिए। आपको [संगीत] अमीर बनाने के लिए नहीं बल्कि आपको मुश्किल समय में आपको आर्थिक रूप से सुरक्षित करने के लिए होना चाहिए। याद रखिए इमरजेंसी फंड सिर्फ पैसा नहीं होता बल्कि आपके द्वारा खरीदा गया एक समय होता है और जब आप मजबूरी में गलत फैसले ले लेंगे, उधार ले लेंगे, कर्ज ले लेंगे, उसकी भरपाई और ज्यादा मुश्किल हो जाती है जो आपको और गरीब बना देता है। नंबर चार, हमेशा एसेट्स और लायबिलिटी का अंतर समझिए। अगर आप सच में अमीर बनना चाहते हैं, तो आपको एक बात हमेशा याद रखनी होगी कि अमीर लोग पैसे से
ऐसी चीजें खरीदते हैं जो उन्हें सच में पैसे कमा कर दे। बल्कि एक नॉर्मल इंसान वो चीजें खरीदता है जो हर महीने उसके जेब से पैसा निकालती रहे और यही सोच धीरे-धीरे इंसान की जिंदगी को दोनों अलग तरीके से पूरी जिंदगी से अलग बना देता है। बहुत से लोग जैसे ही उनकी इनकम बढ़ती है महंगी गाड़ी, महंगा मोबाइल, महंगी चीजें लोगों को दिखाने के लिए खरीद लेते हैं। ईएमआई पे लेंगे, मेंटेनेंस का खर्चा हमेशा बढ़ाते रहेंगे। शुरुआत में सब बड़ा अच्छा लगता है। लेकिन कुछ वर्षों बाद यही चीजें उनके आर्थिक आजादी में सबसे बड़ी रुकावट
बन जाती हैं। और दूसरी ओर समझदार लोग अपनी आय का सबसे बड़ा हिस्सा म्यूच्यूल फंड, इंडेक्स फंड, अच्छे शेयर्स या बिजनेस को किराया देने प्रॉपर्टी जैसे एसेट्स में लगा देते हैं। क्योंकि यह समय के साथ चलके उनके लिए पैसे बनाती रहती है। एक बात और हमेशा याद रखिए। मिडिल क्लास व्यक्ति पूछता है क्या मैं इसकी ईएमआई भर सकता हूं? जबकि अमीर व्यक्ति पूछता है क्या यह चीज भविष्य में मेरे लिए पैसे लाकर देगी या नहीं? बस यही सोच का फर्क है कि पैसे के लिए कभी मत भागो। पैसे का एक सिस्टम बनाओ कि पैसा [संगीत]
आपके लिए काम करे। हम में से अधिकांश लोगों को बचपन से यही सिखाया जाता है कि अच्छी पढ़ाई करो, अच्छी नौकरी करो। सब कुछ आपको मिल जाएगा और फिर जिंदगी आप में सुरक्षित हो जाएगी। [संगीत] लेकिन यह किताब आपको सिखाती है। सच ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। हकीकत इससे अलग है। नौकरी आपको सिर्फ जीने का सहारा बन जाती है। लेकिन अमीर बनने के लिए नौकरी कभी आपके लिए पर्याप्त नहीं होगी। और यह बात आप जितना जल्दी समझ जाए आपके लिए उतना ही बेहतर है। जब तक आप हर महीने काम करेंगे तब तक पैसा आएगा। लेकिन
जिस दिन आप काम करना बंद कर देंगे उस दिन [संगीत] आपकी आमदनी भी रुक जाएगी। यह बात अभी लोग बहुत जल्दी समझ जाते हैं। इसीलिए वह अपनी कमाई का 1/3 हिस्सा इन्वेस्ट करते हैं ताकि वह बिना काम किए भी उनकी इनकम कभी बंद ना हो। चाहे वो म्यूच्यूल फंड हो, चाहे शेयर मार्केट हो, वो हमेशा पैसों को इन्वेस्ट करने के बारे में सोचते हैं। लेकिन एक गरीब इंसान हमेशा पैसे कमाने पर फोकस करता है। गरीब इंसान के मन में हमेशा यही चलता है कि कैसे करके वो ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाए। लेकिन अमीर लोग इसके
ठीक विपरीत सोचते हैं। किराए वाली प्रॉपर्टी हो या कोई बिजनेस [संगीत] उनका लक्ष्य कभी भी पैसा कमाना नहीं होता बल्कि एक ऐसा सिस्टम बनाना होता है जो भविष्य में उनके लिए चलके लगातार [संगीत] पैसा कमाते रह। और यही कारण है कि वर्न बफेट ने कहा था यदि तुम सोते समय भी [संगीत] पैसे कमाने का तरीका नहीं सीखते तो तुम्हें जिंदगी भर काम करना पड़ेगा। इसीलिए आज से आप यह सवाल खुद से पूछना शुरू करिए कि यह जो आपकी सैलरी है जो आप जॉब कर रहे हैं क्या आप ऐसी संपत्ति बना रहे हैं जो आपके लिए
भविष्य में काम करेगी या सिर्फ आप उतना ही कर रहे हैं जितने में आप अपनी जिंदगी को गुजारा बसर कर सकें। दूसरा नियम कमाई से भी सबसे ज्यादा जरूरी है कि आपका पैसा कहां जा रहा है। बहुत से लोग सोचते हैं कि उनकी सैलरी बढ़ जाएगी तो आर्थिक समस्याएं धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगी। थोड़े समय बाद वह कुछ अच्छा शुरुआत कर लेंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि जैसे-जैसे इनकम बढ़ती है, वैसे-वैसे खर्चे भी बढ़ जाते हैं। नई कार, नई मोबाइल, महंगे कपड़े, बड़ी छुट्टियां [संगीत] आपके सपने, आपके एंबिशंस कभी खत्म नहीं होते। आप हमेशा अपनी लाइफ
स्टाइल को बेहतर बनाने के बारे में सोचते रहते हो और धीरे-धीरे आपकी कमाई उनमें लगती जाती है। आपको लग रहा है कि खर्चे हैं तो होंगे। जो जरूरी चीज है वह करनी पड़ेगी लेकिन हकीकत में पैसा ऐसे काम नहीं करता और पैसे की ग्रोथ ऐसे कभी नहीं होती। अमीर लोग कभी भी अपनी आय बढ़ाने से पहले अपनी इन्वेस्टमेंट को बढ़ाते हैं। वे हर महीने अपने भविष्य को पैसा देते हैं। उसके बाद ही वह बाकी खर्चे करते हैं। याद रखिए आपकी सैलरी आपको अमीर नहीं बनाती बल्कि आपकी बचत और आपकी निवेश की आदत ही आपको अमीर
बनाती है। तीसरा नियम है हमेशा एसेट्स खरीदो। लायबिलिटी नहीं। अगर आप सिर्फ एक नियम बना लें कि आप वही चीजें खरीदेंगे जो आपके लिए अच्छी हो तो हो सकता है शायद 10 सालों में आपकी आर्थिक स्थिति पूरी तरीके से बदल जाए। वह नियम यह है कि हर खरीदारी करने से पहले आप अपने आप से एक सवाल पूछिए। क्या यह चीज आपके भविष्य में आपकी जेब में पैसे डालेगी या [संगीत] हर महीने आपकी जेब से पैसे निकालेगी? यह सवाल बड़ा दिलचस्प है क्योंकि लोगों को यह लगता है कि जो जरूरत की चीजें हैं, वह खरीदनी [संगीत]
पड़ेगी। हमेशा सुविधाओं से दूर भागा जाना भी तो ठीक नहीं है। जो काम की चीज है वह तो लेनी ही पड़ेगी। [संगीत] यदि यह सवाल है तो अमीर इंसान थोड़ा सा अलग सोचता है जो उन्हें सामान्य इंसान से बिल्कुल अलग कर देता है। ज्यादातर लोग जैसे ही उनकी आमदनी बढ़ती है वो सबसे पहले अपनी जीवन शैली बदलते हैं। उनको जो भी जरूरत की चीजें लगती हैं वे उन्हें खरीदते हैं। चाहे नया फोन, बड़ा घर, [संगीत] बड़ी गाड़ी, ब्रांडेड कपड़े या जो कुछ भी उनकी डिमांड है, वह सब कुछ उसे खरीदने के बारे में सोचने लगते
हैं। उन्हें लगता है कि यह मेरी है। लेकिन सच्चाई इसमें से अधिकांश लोग जानते ही [संगीत] नहीं है। यह सब चीजें उनकी जेब पर धीरे-धीरे असर डालती हैं। क्योंकि जब आपके पास पर्याप्त पैसे नहीं होते तो फिर आपको ईएमआई का लालच दिया जाता है। ईएमआई [संगीत] एक ट्रैप है। जैसे आप ईएमआई से चीज खरीदते हैं आप कुछ सालों के लिए बंध [संगीत] जाते हैं। यानी आपकी आमदनी पहले से ही तय हो रखी है कि सारे पैसे खर्च होने वाले हैं। दूसरी तरफ अमीर लोग ऐसी संपत्तियां खरीदते हैं जो भविष्य में उनकी आय का स्रोत बन
जाए। अच्छे शेयर्स, किराया देने वाली प्रॉपर्टी, बिजनेस [संगीत] खरीदते हैं। अब आप यहां देखें तो यहां पर दो रास्ते अलग-अलग हो रहे हैं। पहला इंसान अपने पैसों को उन चीजों के लिए खरीद रहा है जो खरीदने के दूसरे दिन ही उसकी वैल्यू कम हो जाती है। लेकिन अमीर इंसान धीरे-धीरे सही उन चीजों में पैसे लगाता है जो उसके पास आने के बाद भी उसके लिए हर महीने आमदनी का स्रोत बन जाए। जिंदगी में एक बात हमेशा याद रखिए। अमीर बनने का रास्ता कभी भी महंगी चीज खरीदने से नहीं होता बल्कि उन चीजों को खरीदने से
होता है जो आपके लिए कमाई करके दे। चौथा नियम फाइनेंशियल एजुकेशन सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट [संगीत] है। आज हकीकत यह है दुनिया में ज्यादातर लोगों को फाइनेंसियल नॉलेज के बारे में कुछ खास पता नहीं है। वो सिर्फ वही समझते हैं जितना उन्हें बताया गया है। लेकिन कभी फाइनेंशियल चीजों को समझने की कोशिश नहीं करते और ना ही सीखने की कोशिश करते हैं। दुनिया का सबसे बड़ा अंतर इस बात से नहीं पड़ता कि आपके अकाउंट में कितना पैसा है बल्कि इस बात से पड़ता है कि आपके दिमाग में पैसों को लेकर कितनी समझ है। [संगीत] बहुत से
लोग लाखों रुपए कमाते हैं। लेकिन उनके पास निवेश, टैक्स, कंपाउंडिंग, धन प्रतिबंधन की कोई जानकारी नहीं होती। इसलिए कुछ वर्षों बाद भी उनके पास कुछ नहीं बचता। दूसरी ओर कुछ लोग कम आय से शुरुआत करके भी लगातार सीखते रहते हैं। किताबें पढ़ते हैं, सफल निवेशकों को चुनते हैं। अपनी गलतियों से सीखते हैं और हर साल अपना पैसे के समझ को बेहतर बनाते हैं। और यही कारण है कि रॉबर्ट किसकी बार-बार कहते हैं गरीब और मध्यम वर्ग [संगीत] पैसे के लिए काम करते हैं। जबकि अमीर लोग पैसों को समझने में समय लगाते हैं। इसीलिए आपको यह
भी तय करना है कि 5,000 किसी भी महंगी चीज पर खर्च करें। अच्छी किताब, अच्छे कोर्स, [संगीत] अच्छी स्किल्स या फिर उन चीजों में लगा दें जो किसी काम के नहीं है। हमेशा दूसरी चीज आप चुनिए क्योंकि अच्छी स्किल्स आपको बार-बार कमा कर दे सकती है। लेकिन एक महंगी वस्तु कुछ समय बाद अपनी कीमत खो देगी। पांचवा नियम डर और लालच दोनों पर नियंत्रण रखना सीखिए। शेयर मार्केट हो, बिजनेस हो, जिंदगी का कोई बहुत बड़ा फैसला ही क्यों ना हो। सबसे ज्यादा नुकसान इंसान की उसकी भावनाएं पहुंचाती है। जब बाजार गिरता है तो लोग डर
कर बेच देते हैं। जैसे कोई वित्तीय संपत्ति आती है, लोग सबसे पहले अपना पैसा बचाने की कोशिश [संगीत] करते हैं। लेकिन लालच में आकर बिना सोचे समझे पैसे लगाने और शेयर बेच देना उन्हें नुकसान पहुंचा देती है। समय हमेशा इंसान को सब्र रखने को सिखाता है। जब आपके अंदर पेशेंस नहीं, सब्र [संगीत] नहीं, फिर आप जिंदगी में कभी अमीर बन ही नहीं सकते। अमीरी कोई शॉर्ट टर्म का गेम नहीं, यह कोई भावनात्मक खेल नहीं। यह खेल है समझ का। सफल निवेशक हमेशा ध्याय रखते हैं। वे जानते हैं कि बाजार हर दिन ऊपर नहीं जाएगा और
ना ही हर दिन नीचे रहेगा। इसीलिए वह इमोशन में नहीं बल्कि जानकारी, योजना और इन सब के आधार पर डिसीजन लेते हैं। जीवन में यह नियम लागू होता है कि जब तक आप फैसला लालच में आकर करोगे, इमोशनल होकर बातें करोगे, तब तक आपके पास कभी बड़ी संपत्ति नहीं बन पाएगी। धनवान बनने के लिए दिमाग से ज्यादा शांत होने की जरूरत है। छठा नियम और सबसे जरूरी है कभी भी एक [संगीत] इनकम पर डिपेंड मत रहो। अगर आपकी जिंदगी में सिर्फ अगर आपका जीवन सिर्फ एक सैलरी पर टिकी हुई है तो यह बात आपको समझ
लेनी चाहिए कि आपका भविष्य पूरी तरीके से किसी और के फैसले पर निर्भर है। अगर नौकरी चली गई, कंपनी बंद हो गई तो आपकी आमदनी वहीं रुक [संगीत] जाएगी। फिर आपकी पूरी आर्थिक व्यवस्था हिल सकती है। इसीलिए समझदार लोग और अमीर लोग हमेशा मल्टीपल इनकम रिसोर्स बनाने की कोशिश करते हैं। नौकरी के साथ-साथ इन्वेस्टमेंट, डिविडेंड, डिजिटल बिटनेस, किराया, ऑनलाइन या किसी भी तरीके की चीजें जो वो कर सकते हैं, वह हमेशा कोशिश करते हैं कि मल्टीपल इनकम रिसोर्स होने ही चाहिए। कम से कम आपके पास तीन मल्टीपल रिसोर्सेज होनी चाहिए कि अगर [संगीत] एक बंद
भी हो जाए तो आपके लिए दूसरा अल्टरनेटिव हमेशा आपके पास रहे। वे हमेशा ऐसा सिस्टम बनाते हैं कि अगर आमदनी रुक भी जाए तो हमेशा उनका काम चलता रहे और यह आपकी आर्थिक सुरक्षा की सबसे बड़ी प्लानिंग में से एक है कि आप अपने लिए [संगीत] कितने इनकम रिसोर्सेज बना सकते हैं। सातवां नियम सबसे पहले खुद को बदलो। पैसा अपने आप बदल जाएगा। बहुत से लोग सोचते हैं कि उनके पास ज्यादा पैसा आ जाए तो उनकी जिंदगी बदल जाएगी। लेकिन हकीकत इसका उल्टा है। अगर आपके पास ज्यादा पैसा आ भी जाए तो आप थोड़े टाइम
बाद फिर से गरीब बन जाएंगे। पहले इंसान की सोच बदलती है। फिर उसकी आदतें बदलती हैं। उसके बाद उसके फैसले बदलते हैं। और अंत में उसकी आर्थिक स्थिति बदल जाती है। मान लो अगर आज आपके पास ₹10 करोड़ दे भी दिए जाए। लेकिन आपकी आदतें वहीं पुरानी रहे [संगीत] तो आप कुछ सालों बाद फिर से वैसे गरीब हो जाएंगे। आपका सारा पैसा खत्म हो जाएगा। लेकिन अगर [संगीत] आपकी आदतें सही हैं तो आप शून्य से शुरुआत करें। फिर भी एक बहुत बड़ी संपत्ति बना सकते हैं। इसलिए सबसे पहले अपने दिमाग को अमीर बनाइए क्योंकि हर
बड़ी संपत्ति आने [संगीत] से पहले इंसान के सोच में वह संपत्ति आती है। उसके बाद उसके बैंक अकाउंट में दिखाई देती है। सारा खेल बस सोच का है। सारा खेल आपके मेहनत का है। सारा खेल आपके सीखने का है। इसीलिए जितना सीख सकते हैं सीखिए। जितना समझ सकते हैं समझिए। और पैसा एक खेल नहीं है। पैसा एक [संगीत] आदत है। इसीलिए अपनी आदत को पैसे में जिस तरीके से लगाएंगे, आपको रिजल्ट वैसा ही दिखेगा। बाकी यह वीडियो आपको कैसी लगी आप कमेंट में जरूर बताएं और आप भारत के किस राज्य से वीडियो देख रहे हैं,
यह भी हमें बताएं। ॐ