[संगीत] नमस्कार प्रिय दर्शकों एक बार फिर आपका स्वागत है हमारे में लक्ष्मी का स्वरूप होती है जो भी मनुष्य इस कहानी को एक बार सुन लेगा उसके घर में कभी लड़ाई झगड़ा नहीं होगा प्रिय दर्शकों कहानी में आगे बढ़ने से पहले अगर आप हमारे चैनल पर पहली बार आए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब करें बेल आइकन ऑन करें अच्छे-अच्छे कमेंट किया करें ताकि हर आने वाले वीडियो का नोटिफिकेशन सबसे पहले आपको मिले और प्रिय दर्शकों आप उसका फायदा उठा सके तो शुरू करते हैं आज की यह प्यारी सी कहानी यह प्यारा सा वीडियो प्रिय दर्शकों
कुछ समय पहले की बात है रतनपुर नाम के गांव में एक साहूकार जी रहा करते थे साहूकार जी के घर में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं थी उनके भंडार धनधान्य से भरे हुए थे साहूकार जी का व्यापार बड़े ही अच्छे से चल रहा था गांव के सभी लोग और आस पास के नगर के भी सभी लोग साहूकार जी का बड़ा आदर सम्मान करते थे प्रिय दर्शकों साहूकार जी की जो पत्नी थी वह बड़े ही अच्छे स्वभाव की थी साहूकार जी की बड़ी इज्जत करती थी और उनका बहुत ध्यान रखती थी साहूकार जी अपनी पत्नी
के स्वभाव से बड़े प्रसन्न थे प्रिय दर्शकों उसी गांव में साहूकार जी के घर के पास एक कबूतर और कबूतरी का जोड़ा रहा करता था वह कबूतर और कबूतरी बड़े प्रेम से अपने घोसले में रहा करते थे कबूतर गांव में जाता और अपने लिए दाना पानी खोज करके लाता इधर कबूतरी भी अपने पति का बहुत आदर सम्मान करती थी बहुत प्रेम से बात करती थी प्रिय दर्शकों एक दिन कबूतरी अपने पति कबूतर से पूछती है कि पिया जी यह साहूकार बहुत धनवान है गांव में सबसे ज्यादा धनवान या साहूकार है और पूरा गांव इस साहूकार
का बहुत आदर सम्मान करता है इसके घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं है इसके बच्चे इसकी पत्नी और इसके माता-पिता सभी बहुत प्रसन्न रहते हैं इसका क्या कारण है इसके घर में इतनी सुख शांति क्यों है कभी कोई लड़ाई झगड़ा नहीं होता ऐसा क्यों है स्वामी तब प्रिय दर्शकों कबूतर कहता है कि प्रिय उसकी पत्नी में वह पांच प्रकार के लक्षण हैं जिनके कारण उसकी पत्नी साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप है मैं तुम्हें कहानी एक सुनाता हूं इस कहानी में तुम्हें समझ में आएगा कि जिस स्त्री में यह पांच लक्षण होते हैं वह साक्षात
लक्ष्मी होती है और जिस घर में ऐसी स्त्रियां रहती हैं वहां कभी लड़ आए झगड़ा नहीं होता कभी धन की कमी नहीं आती प्रिय दर्शकों कबूतरी कहती है कि स्वामी मैं आपकी कहानी बहुत मन लगा कर के सुनूंगी आप अपनी कहानी प्रारंभ करिए कबूतर अब अपनी कहानी सुनाना शुरू करता है कबूतर कहता है कि प्रिय प्राचीन समय की बात है किसी नगर में एक गरीब दंपति रहा करते थे वह दोनों पति-पत्नी आपस में खूब लड़ाई झगड़ा किया करते थे उनके घर में कोई सुख शांति नहीं थी वह पति अपनी पत्नी से बहुत परेशान था और
उसके माता-पिता भी अपनी बहू से बहुत परेशान थे वह जो स्त्री थी वह अपने पति और अपने सास ससुर का कोई आदर सम्मान नहीं करती थी हर बात में उन्हें पलट कर जवाब दिया करती थी घर पर कोई सफाई नहीं रखती थी रसोई में कभी खाना समय से नहीं बनाती थी बेचारे बूढ़े माता-पिता अपनी बहू के ऐसे व्यवहार से बहुत दुखी थे सवेरे लेट सोकर उठती उसके बाद अपने श्रृंगार में लग जाती अपने बच्चों का ध्यान नहीं रखती और कोई कुछ कहता तो उसे पलट कर दो जवाब देती इस प्रकार प्रिय दर्श को वह दंपति
रह रहे थे कबूतर आगे कहता है कि हे प्रिय एक दिन की बात है वह दोनों पति-पत्नी किसी बात पर झगड़ा करने लग हैं कई देर तक उनका झगड़ा चलता है वह आदमी कहता है कि तुम हमारे घर का कोई ध्यान नहीं रखती हो हमारे माता-पिता की सेवा नहीं करती हो सारा दिन बस अपने कमरे में पड़ी रहती हो बच्चों का ध्यान नहीं रखती हो इस प्रकार नहीं चलेगा रिय दर्श को पति की ऐसी बातें सुनकर उसकी पत्नी को बहुत क्रोध आता है क्रोध में वह भी बहुत जवाब देती है कहती है कि अगर अपने
माता-पिता की इतनी ही चिंता है तो नौकर लगा लो मुझसे इतना काम नहीं बनता है कोई तुम किसी नगर के राजा नहीं हो जो तुम मुझे सुख दे रहे हो गरीबी में मुझे तुम्हारे साथ रहना पड़ता है मैं तुम्हारे साथ एक घर में रह रही हूं इतना ही बहुत है प्रिय दर्शकों धीरे-धीरे पति-पत्नी की बहस इतनी बढ़ जाती है कि वह पत्नी अपने पति को बेलन फेंक करके मार देती है रसोई में से बेलन लेकर आती है और अपने पति को फेंक के मारती है बेलन लगने के कारण अब उसके पति के सर से खून
आने लगता है अपनी पत्नी की ऐसी हरकत को देखकर वह बेचारा आदमी क्या करता क्रोध में उसके पास जाता है और उसे एक चाटा मार देता है अब क्या था पति के हाथ उठाते ही उसकी पत्नी को बहुत क्रोध आता है वह तुरंत अपने दोनों बच्चों को लेती है अपना कुछ सामान बांधती है और अपने पिहर के लिए निकल पड़ती है प्रिय दर्शकों रात का समय था माता-पिता सो रहे थे अपने दोनों बच्चों को लेकर वह निकल पड़ती है उसका पति उसे रोकने की बहुत कोशिश करता है कहता है कि मेरी बात सुनो घर छोड़कर
ना जाओ रात का समय है अकेले कहां जाओगी परंतु प्रिय दर्शकों वह पत्नी बहुत गुस्से में थी अपने पति की एक नहीं सुनती है अपने दोनों छोटे-छोटे बच्चों को लेकर अपने पीहर के लिए चल देती है रात के अंधेरे में चलने में उसे बहुत डर लग रहा था परंतु क्रोध मनुष्य से अक्सर गलत काम करवाता है क्रोध में वह चलती जा रही थी कुछ देर बाद जंगल का रास्ता आ जाता है अब जंगल के रास्ते वह बेचारी स्त्री अपने दोनों बच्चों को लेकर जा रही थी कुछ देर आगे चलने पर एक साधु महाराज की कुटिया
थी कुटिया में साधु महाराज अभी जाग रहे थे वह देखते हैं कि एक जवान स्त्री अपने छोटे बच्चों को लेकर जा रही है साधु महाराज सोचते हैं कि आगे तो जंगल बहुत घना है जंगली जानवर घूमते हैं ऐसे में स्त्री का ऐसे अकेले जाना सही नहीं है साधु महाराज स्त्री को आवाज लगाते हैं परंतु वह सोचते हैं कि अगर किसी ने देख लिया कि मैं आधी रात में एक स्त्री से बात कर रहा हूं तो ना जाने मेरे बारे में लोग क्या सोचेंगे प्रिय दर्शकों अब वह उस स्त्री के पास जाते हैं और उसे अपनी
कुटिया के पास लेकर आते हैं और कहते हैं कि पुत्री तुम अपने छोटे छोटे बच्चों को लेकर इतनी रात में जंगल से कहां जा रही हो प्रिय दर्शक को तब वह स्त्री साधु महाराज को सारी घटना सुनाती है वह पूरी बात बताती है कि किस प्रकार हमारे पति से हमारा झगड़ा हो गया और हमने उन्हें बेलन फेक कर दिया इसके बदले में उन्होंने हमें एक चाटा मारा और हम घर छोड़कर आ गए सारा घटनाक्रम सुनने के बाद साधु महाराज अपने धीमे स्वर में कहते हैं कि पुत्री इस प्रकार अपने घर को छोड़कर नहीं जाना चाहिए
अगर तुम्हें पीहर जाना ही है तो तुम्हें सूर्यास्त के बाद नहीं निकलना था सुबह चली जाती रास्ते में आगे जंगल बहुत घना है और तुम्हारे साथ छोटे बच्चे हैं इस प्रकार तुम्हारा अकेले जाना सुरक्षित नहीं है एक काम करो तुम वापस लौट जाओ परंतु प्रिय दर्शकों वह स्त्री तो बहुत गुस्से में थी वह वापस कहां लौटने वाली थी वह कहती है कि साधु महाराज चाहे मेरे प्राण निकल जाएं लेकिन मैं वापस तो नहीं लौटूंगा तब साधु महाराज कहते हैं कि ठीक है पुत्री आज रात तुम मेरी कुटिया में अंदर सो जाओ और मैं बाहर सो
जाऊंगा प्रिय दर्शकों कबूतर आगे कहता है कि हे प्रिय अब साधु महाराज उस स्त्री और उसके बच्चों को अपनी कुटिया के अंदर सुला देते हैं और खुद कुटिया के बाहर आकर सो जाते हैं अब अगला दिन होता है दिन होते ही वह स्त्री जाग जाती है और अपने बच्चों को लेकर कुटिया से बाहर आती है साधु महाराज अपनी कुटिया के बाहर साफ सफाई कर रहे थे तब वह स्त्री कुटिया से बाहर आकर और साधु महाराज से कहती है कि स्वामी आपने रात में अपनी कुटिया में हमें सोने दिया मेरे बच्चों को और मुझे सहारा दिया
उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद परंतु अब दिन निकल चुका है और अब हमें किसी जानवर से कोई खतरा नहीं है बहुत से लोग इस रास तेसे होकर गुजर रहे हैं अब आप हमें इजाजत दीजिए हम अपने पिहर के लिए निकलना चाहते हैं स्त्री की बात सुनकर साधु महाराज कहते हैं कि पुत्री जैसा तुम चाहो संभाल कर जाना दर्श को साधु महाराज को प्रणाम करके वह स्त्री अपने पिहर के लिए आगे बढ़ती है कुछ देर चलने के बाद उसका पीहर आ जाता है अब वह अपने पिता के घर पहुंचती है पिता और उसकी मां देखते हैं
कि अपने दोनों बच्चों को लेकर हमारी पुत्री आ रही है पुत्री को देखकर माता-पिता समझ जाते हैं कि हमारी बेटी अकेली आई है इसका मतलब है हमारे दामाद और हमारी पुत्री के बीच में जरूर लड़ाई झगड़ा हुआ है प्रिय दर्शकों अब उस स्त्री का भाई अपनी बहन को अंदर लेकर जाता है उसका सामान लेकर जाता है और पूछता है कि बहन तुम्हें छोड़ने जीजा जी नहीं आए तुम अकेली क्यों आई हो स्त्री के पिताजी भी पूछते हैं कि बेटा तुम्हारी आंखें इतनी लाल क्यों हो रही है ऐसा लग रहा है कि तुम बहुत परेशान हो
भ ला इतनी दूर तुम अपने दोनों बच्चों को लेकर ऐसे अकेले क्यों आई हो तब वह स्त्री कहती है कि पिता जी मैं बहुत परेशान हूं मेरे पति से मेरा झगड़ा हुआ है और उसने मुझे थप्पड़ मारा है इसीलिए मैं उसे छोड़कर चली आई अब मैं किसी भी हालत में उस घर में लौटकर नहीं जाऊंगी मुझे उस घर में बिल्कुल अच्छा नहीं लगता है हर दिन मेरा मेरे पति के साथ झगड़ा होता है इसीलिए मैं अपने बच्चों को लेकर और यहां चली आई अब मैं अपनी पूरी जिंदगी यहीं बिताऊ गी प्रिय दर्शकों कबूतर आगे कहता
है कि हे प्रिय अपनी पुत्री की ऐसी बातें सुनकर उसके पिता जी हैरान रह जाते हैं उसका भाई पूछता है कि बहन जीजा जी ने तुम्हें थप्पड़ कैसे मारा मैं उन्हें छोडूंगा नहीं तब उसके पिता समझाते हैं कि बेटा तुम शांत यह बहुत दूर से चलकर आ रही है इस वक्त बहुत क्रोध में है इस समय इससे बात करना सही नहीं है जब किसी पति-पत्नी के बीच में लड़ाई झगड़ा होता है तो दोनों ही अपनी गलती को छुपाते हैं और सामने वाले पर सारे आरोप लगाते हैं इस तरह की स्थिति में हमें दोनों की बातें
सुनना चाहिए किसी एक की बात पर सुनने के बाद भरोसा नहीं करना चाहिए तुम अपनी बहन को अंदर ले जाओ और उसे थोड़ा आराम करने दो प्रिय दर्शकों अपने पिता की बात सुनकर वह भाई अपनी बहन को और अंदर लेकर जाता है और कहता है कि बहन अब तुम थोड़ा आराम करो बहुत दूर से पैदल चलकर आ रही हो तुम थक गई होगी दर्शकों इधर उस स्त्री के ससुराल में जब उसके सास ससुर सुबह जागते हैं तो वह आवाज लगाते हैं कि बहू कहां गई और कोई बच्चा भी नहीं दिख रहा है पूरे घर में
वह अपनी बहू और अपने पोते पोती को ढूंढते हैं परंतु पूरे घर में उन्हें कोई भी नहीं दिखता पूरा घर शांत था किसी की आवाज नहीं आ रही थी तब वह अपने बेटे से पूछते हैं कि बेटा बहू और पोते कहां गए हैं हमने सुबह से उठकर उन्हें बहुत ढूंढा परंतु वह तीनों कहीं नहीं मिले क्या वह कहीं बाहर गए हैं तब उनका बेटा कहता है कि पिताजी रात के समय हमारा हमारी पत्नी के साथ झगड़ा हुआ था जिसके बाद वह इस घर को छोड़कर जा चुकी है तब उसके पिताजी कहते हैं कि पुत्र क्या
इतना बड़ा झगड़ा हो गया कि बहू घर छोड़कर चली गई सच-सच बताओ पूरी बात क्या है तब वह बताता है कि पिताजी हमने हमारी पत्नी को थप्पड़ मार दिया था जिसके कारण क्रोध में आकर वह घर छोड़कर चली गई अब उसके पिताजी कहते हैं कि मूर्ख क्या तुम्हें इतना नहीं पता कि पत्नी एक स्त्री घर की लक्ष्मी होती है और लक्ष्मी को कभी थप्पड़ नहीं मारा जाता स्त्री अगर घर छोड़कर चली जाए तो वह घर नरक बन जाता है हर घर में एक स्त्री होना अनिवार्य होता है जिस घर में स्त्री नहीं होती उस घर
में कोई सुखी नहीं रहता है किसी को भोजन नहीं मिलता है अब हमारा बुढ़ापा है हमें इस बुढ़ापे में हमारे पोते पोती की जरूरत है उनके बिना घर में हमारा मन नहीं लगता और अब तो बहू भी चली गई है घर का काम कौन करेगा हमारा ध्यान कौन रखेगा अब हम किसके साथ बैठेंगे किससे बातें करेंगे क्या तुमने हमारे बारे में एक बार भी नहीं सोचा तुमने अपनी पत्नी को थप्पड़ मारकर बिल्कुल सही नहीं किया है तब वह पुत्र कहता है कि पिताजी [संगीत] आपको पूरी बात नहीं पता है क्या आप जानते हैं उसने हमें
बेलन फेंक कर मारा हमें गाली दी क्या इतना होने के बाद भी हमें चुपचाप खड़े रहना था तब उसके पिताजी कहते हैं कि पुत्र अगर कोई स्त्री गलती करती है गाली देती है तुम्हें मारती है इसका यह मतलब है कि कि उसमें ज्ञान नहीं है उसे ज्ञान की जरूरत है उसे सत्य मार्ग दिखाना अनिवार्य होता है परंतु तुमने उस पर हाथ उठाया उसे मारकर भगा दिया अगर इस प्रकार तुम अपनी पत्नी का अपमान करोगे तो तुम कभी सुखी नहीं रहोगे पत्नी अगर गलती करती है तो पति को उसे समझना चाहिए उसकी गलती का उसे एहसास
कराना चाहिए परंतु तुमने उसे थप्पड़ मार दिया जिस री को तुमने अपनी पत्नी बनाकर अपने घर में लाए हो उसे प्यार से रखना उसका सम्मान करना उससे प्रेम से बातें करना यह एक पति का कर्तव्य होता है उसे अपने ससुराल में किसी प्रकार का कोई दुख नहीं होना चाहिए यह हमारा कर्तव्य है अगर वह तुम्हें छोड़कर जा रही थी तो तुम्हें उसे रोकना चाहिए था उसके पैरों में गिरना चाहिए था और उससे माफी मांगना चाहिए था परंतु तुमने क्या किया उसे भगा दिया वह रात में अकेली दोनों बच्चों को लेकर चली गई हमारे पोते और
पोती कैसे होंगे क्या तुम्हें इस बात की भी चिंता नहीं तुम कैसे पिता हो जो अपनी संतान को आधी रात में अकेले जाने दिया क्या तुम जानते नहीं कि तुम्हारे ससुराल के रास्ते में जंगल पड़ता है जंगल के रास्ते तुम्हारी पत्नी आधी रात को जा रही थी और तुमने कुछ नहीं किया अब अगर तुम अपने पिता और अपनी मां को जीवित देखना चाहते हो तो तुरंत अपने ससुराल जाओ और अपनी पत्नी को पूरे सम्मान के साथ वापस लेकर आओ अगर तुमने ऐसा नहीं किया तो हम दोनों तुम्हें छोड़कर चले जाएंगे उसके बाद सारा जीवन अकेले
ही बिताना प्रिय दर्शकों कबूतर आगे कहता है कि हे प्रिय अब वह बेचारा आदमी क्या करता अपने माता-पिता की बातें सुनने के बाद उसे अपनी गलती का पछतावा होता है वह कहता है कि पिताजी आप चिंता ना करें मैं तुरंत जाता हूं और अपनी पत्नी को और अपने बच्चों को वापस लेकर आता हूं प्रिय दर्शकों वह आदमी अपने घर से निकल पड़ता है उसी रास्ते से वह होता हुआ अपने ससुराल जा रहा था इधर उसकी पत्नी अपने पिहर में आराम से बैठी हुई थी कुछ देर आराम करने के बाद जब उसके पिता पूछते हैं कि
पुत्री अब तुम हमें सच-सच बताओ कि तुम अपने पति का घर छोड़कर क्यों आई हो इतनी छोटी बात पर दामाद जी तुम्हें थप्पड़ नहीं मार सकते जरूर तुमने भी कुछ गलती करी होगी तब वह पुत्री कहती है कि पिताजी आपको तो हमेशा मेरी ही गलती दिखाई देती है मुझे थप्पड़ मारा गया मेरी कोई गलती नहीं थी मैं पूरा दिन घर में काम करती हूं अपने सास ससुर की सेवा करती हूं बच्चों का ध्यान रखती हूं अपने पति के लिए भोजन बनाती हूं परंतु उसके बाद भी मुझे थप्पड़ मार के घर से निकाल दिया गया क्या
इसके बाद भी आपको मेरी गलती दिखाई देती है अगर ऐसा है तो मैं आपका घर भी छोड़कर चली जाती हूं लगता है आपको मेरे यहां रहने से बहुत परेशानी है मैं जाकर कहीं आत्महत्या कर लूंगी तब उसके पिता कहते हैं कि पुत्री ऐसी बातें क्यों करती हो भला किसी पुत्री से किसी पिता को परेशानी होती है मैं तो बस यह चाहता हूं कि तुम्हारा घर बसा रहे तुम अपने घर में अपने ससुराल में सुखी रहो तुम्हारे बच्चे खुश रहे परंतु इस प्रकार अपने पिता के घर पर जाकर रहना किसी स्त्री को शोभा नहीं देता है
जब तक हम हैं तब तक तो तुम रह लोगी परंतु उसके बाद तुम्हारा भाई और तुम्हारी भाभी क्या तुम्हें प्रेम से रखेंगे क्या यह समाज तुम्हें सुख से रहने देगा जरा इस बात पर सोचो प्रिय दर्शकों इधर वह आदमी अपनी पत्नी को लेने के लिए ससुराल के लिए चल रहा था तभी वह जंगल के रास्ते गुजरता है जंगल में उसे दिखाई देता है कि उसकी छोटी सी पुत्री की पायल रास्ते में पड़ी हुई है अपनी पुत्री की पायल को देखकर वह बहुत घबरा जाता है सोचता है कि कहीं मेरे बच्चों के साथ कुछ गलत तो
नहीं हुआ कहीं कोई जंगली जानवर ने मेरे बच्चों को नुकसान तो नहीं पहुंचा दिया प्रिय दर्शकों तब वह साधु महाराज आते हैं और कहते हैं कि पुत्र तुम क्यों रो रहे हो तुम बहुत परेशानी में नजर आते हो क्या समस्या है हमें बताओ तब वह आदमी बताता है कि गुरुजी यह मेरी पुत्री की पायल है रात्रि में मेरी पत्नी मेरे बच्चों को लेकर और अपने पिहर के लिए निकली थी मुझे लगता है कि किसी जंगली जानवर ने मेरे बच्चों को नुकसान पहुंचाया है मुझे उनकी बहुत चिंता हो रही है तब वह साधु महाराज बताते हैं
कि पुत्र तुम चिंता करो तुम्हारी पत्नी और तुम्हारे बच्चों को मैंने जाते हुए देखा था मैंने उन्हें रात्रि के समय अपनी कुटिया में रोक लिया था और सुबह होने पर ही उन्हें जाने दिया तुम्हारी पत्नी और तुम्हारे बच्चों को कोई नुकसान नहीं हुआ है तुम अपने ससुराल जाओ और अपनी पत्नी को वापस लेकर आओ प्रिय दर्शकों कबूतर आगे कहता है कि हे प्रिय गुरु जी की ऐसी बातें सुनकर वह आदमी बहुत प्रसन्न होता है उसे अब अपनी गलती का एहसास भी हो चुका था अब वह भागता हुआ अपने ससुराल जाता है ससुराल में अपने पति
को आया हुआ देख वह स्त्री अपने बच्चों से कहती है कि जाओ तुम्हारे पिता आ गए उनसे मिल लो इतना कहकर वह स्त्री अंदर अपने कमरे में चली जाती है अपने दामाद को आया हुआ देख स्त्री के माता-पिता उसका स्वागत करते हैं और कहते हैं कि बेटा आओ बैठो बड़े दिनों बाद आना हुआ इस प्रकार की बातें करने के बाद प्रिय दर्श को रात्रि का समय हो जाता है वह दोनों सोचते हैं कि हमारे दामाद बहुत चलकर आए हैं अब हमें रात्रि में कोई बात नहीं करनी चाहिए सुबह उठने के बाद आराम से बात करेंगे
प्रिय दर्शकों अब अगला दिन होता है और अगले दिन वह ससुर अपने दामाद से कहते हैं कि पुत्र हमारी पुत्री बता रही थी कि आपने उसे थप्पड़ मारा और घर से निकाल दिया तब वह दामाद कहता है कि पिताजी भला मैं अपनी पत्नी को बिना बात के थप्पड़ क्यों मारूंगा लगता है उसने आपको सारी बात नहीं बताई गलती तो उसी की थी तब ससुर कहते हैं कि बेटा परंतु वह तो कह रही थी कि उसकी कोई गलती नहीं थी आपने बिना बात के उसे थप्पड़ मार के घर से निकाल दिया उसने तो हमें उसकी कोई
गलती नहीं बताई आप पूरी बात बताइए तब वह दामाद कहता है कि पिताजी आपकी बेटी घर का कोई कार्य नहीं करती है सारा दिन आराम करती रहती है मेरे माता-पिता से पूरे दिन लड़ाई झगड़ा करती है बच्चों का ध्यान नहीं रखती है इन्हीं सारी बातों को लेकर उस रात्रि हमारा झगड़ा हुआ मैंने आपकी बेटी से कहा कि तुम्हें सबका ध्यान रखना चाहिए घर का कार्य करना चाहिए इस बात पर उसे क्रोध आ गया और उसने बेलन फेंक कर मेरे सर में मार दिया आप मेरी चोट का निशान देख सकते हैं इस बात पर मुझे बहुत
बुरा लगा ऐसी हरकत को देखकर मुझे भी क्रोध आ गया और मैंने एक थप्पड़ मार दिया अब आप बताइए पिताजी इसमें मेरी क्या ती है मैंने इसे रोकने का भी प्रयास किया परंतु यह घर छोड़कर आधी रात को चली आई प्रिय दर्शकों अब वह पिता अपनी पुत्री से कहता है कि बेटा क्या दामाद जी सत्य बोल रहे हैं परंतु वह स्त्री कुछ नहीं कहती है चुपचाप खड़ी रहती है तब उसके पिताजी समझ जाते हैं कि गलती हमारी पुत्री की है अब उसके पिताजी कहते हैं कि बेटा आपने पति को मारा है गाली दी है यह
बिल्कुल भी सही बात नहीं है एक स्त्री तो घर की लक्ष्मी होती है और भला लक्ष्मी अपने पति को मारेगी तो किस प्रकार चलेगा तुम्हें अपने पति की इज्जत करनी चाहिए उसका सम्मान करना चाहिए अपने सास ससुर की सेवा करनी चाहिए घर को साफ रखना चाहिए भोजन में स्वादिष्ट पकवान बनाकर अपने पति को खिलाना चाहिए अपने बच्चों की परवरिश बहुत अच्छे से करनी चाहिए अगर तुम इस प्रकार घर का ध्यान रखो गी भगवान की पूजा करोगी अपने ससुराल में सभी को प्रसन्न रखो गी तो तुम्हारा जीवन भी बड़ा सुखी रहेगा बुढ़ापे में तुम्हें कोई कष्ट
नहीं मिलेगा तुम्हारे पति तुमसे बहुत प्रेम करते हैं तुम्हारे सास ससुर ने तुम्हें लेने के लिए इन्हें भेजा है तो भला बताओ तुम्हारे सास ससुर तुमसे कितना प्रेम करते होंगे तुम्हारे बच्चे इतने सुंदर हैं इन्हें अच्छी परवरिश दो अपने घर में जाकर सुख से रहो हमें और क्या चाहिए हमने तुम्हारा विवाह कर दिया परंतु उस विवाह में सुखी रहना अपने ससुराल वालों के साथ मिलकर रहना यह तुम्हारा काम है अगर तुम इस प्रकार लड़ाई झगड़ा करोगी तो तुम्हें दुख के अलावा कुछ नहीं मिलेगा प्रिय दर्शकों अपने पिता की बात सुनकर वह पुत्री रोने लगती है
उसे अपनी गलती का एहसास हो चुका था उसके पिता कहते हैं कि बेटा अपने पति के साथ अपने ससुराल जाओ प्रेम से रहो उनकी इज्जत करो ऐसी बातें सुनकर प्रिय दर्शकों वह स्त्री अपने पति से माफी मांगती है और अपने बच्चों को लेकर अपने पति के साथ चल पड़ती है अपनी बेटी को खुश देखकर उसके पिता उसकी मां और उसके भाई भी बहुत प्रसन्न होते हैं अब वह दोनों पति-पत्नी अपने बच्चों को लेकर अपने घर के लिए निकल पड़ते हैं कुछ दूर आगे चलने पर जंगल शुरू हो जाता है जंगल में वह स्त्री अपने पति
से कहती है कि स्वामी आपने बहुत अच्छा किया जो आप मुझे लेने आ गए मुझे भी आपके बिना अच्छा नहीं लग रहा था इस प्रकार की बातें करते हुए वह दोनों चलते जा रहे थे कुछ देर चलने के बाद प्रिय दर्शकों उन्हें एक कुटिया दिखाई देती है उस कुटिया में एक पति-पत्नी रहा करते थे अंदर से लड़ाई झगड़े की आवाज आ रही थी वह दोनों पति-पत्नी आपस में बहुत झगड़ा कर रहे थे उनके पास खाने के लिए भी कुछ नहीं था पत्नी अपने पति को गाली दे रही थी पति अपने पत्नी को मार रहा था
और बच्चे बेचारे डरे सहमे हुए रो रहे थे यह देखते हुए वह दोनों पति-पत्नी और आगे चलते हैं आगे चलने के बाद उन्हें एक बहुत अच्छा मकान दिखाई देता है बहुत सुंदर मकान बना हुआ था उसके अंदर जो दंपति थे वह बहुत खुश थे वह दोनों दंपति बड़े प्रेम से बातें कर रहे थे अपने बच्चों को ज्ञान की बातें बता रहे थे उनके जीवन में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी गाड़ी मकान अन्य धन सब के भंडार उनके घर में भरे हुए थे उस घर को देखकर वह स्त्री बहुत प्रसन्न होती है अब कुछ
देर आगे चलने के बाद वहीं साधु महाराज का आश्रम आ जाता है साधु महाराज को देखकर वह दोनों निर्णय लेते हैं कि चलो प्रिय कुछ देर साधु महाराज से मिल लेते हैं इन्होंने तुम्हारी बहुत सहायता करी थी प्रिय दर्शकों साधु महाराज अपनी कुटिया के बाहर ध्यान अवस्था में बैठे हुए थे कुछ देर बाद वह अपनी आंखें खोलते हैं तो देखते हैं कि यह तो वही स्त्री है जो उस रात अपने बच्चों को लेकर जा रही थी साधु महाराज कहते हैं कि बेटा कैसे हो तब वह स्त्री कहती है कि साधु महाराज आपने उस दिन भी
मुझे समझाया था परंतु मुझे समझ में नहीं आया अब मैं अपने पति के साथ अपने घर जा रही हूं हमें आशीर्वाद दीजिए साधु महाराज उस स्त्री को आशीर्वाद देते हैं वह स्त्री आगे पूछती है कि साधु महाराज जब हम जंगल से चलते हुए आ रहे थे तब हमें एक कुटिया दिखाई दी जिसमें पति-पत्नी झगड़ा कर रहे थे उनके पास खाने के लिए अन्य भी नहीं था बहुत ही गरीब थे उनके बच्चे रो रहे थे और उसके बाद हमने एक बहुत ही अच्छा सुंदर मकान देखा जिसमें वह दोनों पति-पत्नी बहुत प्रेम से बातें कर रहे थे
उनके बच्चे बहुत प्रसन्न थे और वह स्वादिष्ट पकवान खा रहे थे उनके घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी साधु महाराज मैं यह जानना चाहती हूं कि भला दोनों दंपति अपना जीवन इस प्रकार कैसे बिता रहे हैं एक तरफ तो दंपति लड़ाई झगड़ा कर रहे हैं उन उनके घर में बहुत गरीबी है और दूसरी ओर वह दंपति बहुत धनवान है उनके घर में कोई कमी नहीं है बड़े प्रेम से वह दोनों रह रहे हैं इसका क्या कारण है अब प्रिय दर्शकों उसे स्त्री की बातें सुनकर साधु महाराज कहते हैं कि बेटा वह कुटिया
और वह मकान तुम्हें ज्ञान देने के लिए मैंने ही अपने मंत्रों से उत्पन्न किए हैं मैं तुम्हें बताना चाहता था कि किस प्रकार एक स्त्री अपने घर को नर्क बना सकती है और किस प्रकार एक स्त्री अपने घर को स्वर्ग बना सकती है स्त्री घर की लक्ष्मी होती है घर को किस मार्ग पर लेकर जाना है यह एक स्त्री के हाथ में होता है जो तुमने कुटिया देखी उसमें जो स्त्री रहती है वह दिन रात लड़ाई झगड़ा करती है अपने पति का आदर सम्मान नहीं करती है उसे गाली देती है अपने बच्चों का ध्यान नहीं
रखती है जिसके कारण उसके घर में गरीबी है लड़ाई झगड़े होते हैं और वह बहुत ही दुखी है दूसरी ओर जो तुमने मकान देखा उसमें जो स्त्री रहती है वह अपने पति का बहुत आदर सम्मान करती है अपने बच्चों का ध्यान रखती है घर में पूजा पाठ करती है घर की सफाई करती है सुबह जल्दी उठकर सभी के लिए स्वादिष्ट पकवान बनाती है इस कारण उसके घर में सुख शांति है धन दौलत है उनके घर में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है जिस स्त्री में यह पांच लक्षण होते हैं वह स्त्री घर को स्वर्ग
बना देती है और उनके घर में कभी किसी प्रकार की कोई कमी नहीं आती तब वह स्त्री पूछती है कि साधु महाराज वह पांच लक्षण कौन से हैं मुझे बताइए प्रिय दर्शकों अब साधु महाराज उस स्त्री को पांच ल लक्षणों के बारे में बताते हैं साधु महाराज कहते हैं कि बेटा सबसे पहला लक्षण यह होना चाहिए कि वह स्त्री सुबह जल्दी उठे और भगवान की पूजन करें घर की सफाई करें अपने बच्चों का ध्यान रखें जो स्त्री देर से उठती है अपने बच्चों का ध्यान नहीं रखती है घर की सफाई नहीं करती ऐसी स्त्री के
घर में दरिद्रता आती है और कभी लक्ष्मी नहीं आती परंतु जो स्त्री जल्दी उठकर अपने बच्चों को नहला है उनका ध्यान रखती है घर की सफाई करती है भगवान की पूजन करती है और स्वादिष्ट पकवान बनाती है उसके घर में सब सुखी रहते हैं माता लक्ष्मी का वास सदा उसके घर में रहता है दूसरा लक्षण यह होना चाहिए कि वह स्त्री अपने पति का अपने सास ससुर का आदर करें सम्मान करें उनसे प्रेम से बात करें जो स्त्री अपने पति का सम्मान नहीं करती है उसके घर में कभी सुख शांति नहीं आती हमेशा लड़ाई झगड़े
होते रहते हैं और जो स्त्री अपने पति का सम्मान करती है उसके घर में हमेशा सुख शांति रहती है हमेशा प्रेम बना रहता है तीसरा लक्षण है कि अपने घर आए मेहमान का और गरीब का सम्मान करना जो स्त्री अपने घर आए गरीब का सम्मान करती है उसे दान दक्षिणा देती है उसके घर में हमेशा लक्ष्मी का वास रहता है उसके घर के अन्य धन के भंडार कभी खाली नहीं रहते जो स्त्री अपने घर आए अतिथि का स्वागत करती है उसे बैठा कर चाय नाश्ता देती है उसके घर में सदैव मां लक्ष्मी का वास रहता
है चौथा लक्षण है भगवान की पूजा करना जो स्त्री अपने घर में भगवान की आराधना करती है भगवान की पूजा करती है तो भगवान सदैव उसके घर में सुख शांति बनाए रखते हैं और जो स्त्री अपने घर में कभी कोई भगवान की पूजा नहीं करती उसके घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास हो जाता है पांचवा लक्षण होता है अपने सास ससुर को इज्जत देना उनका सम्मान करना और उनकी सेवा करना घर के बुजुर्ग साक्षात भगवान का स्वरूप होते हैं जो स्त्री अपने घर के बर्ग का आदर सम्मान करती है उनकी सेवा करती है ऐसी स्त्री
के घर में सदैव लक्ष्मी का वास होता है और जो स्त्री अपने सास और ससुर को अपने घर के बुजुर्गों को गाली देती है उन्हें तड़पाती है उन्हें समय से भोजन नहीं देती ऐसी स्त्रियों के घर में हमेशा लड़ाई झगड़े होते हैं वह सदैव गरीब रहते हैं साधु महाराज की बातें सुनकर वह स्त्री बहुत प्रसन्न होती है और कहती है कि साधु महाराज यह पांच लक्षण मैं अपने अंदर अवश्य लेकर आऊंगी आपने जैसा बताया है मैं वैसा ही करूंगी साधु महाराज का आशीर्वाद लेने के बाद अब वह पति-पत्नी अपने बच्चों को लेकर और अपने घर
आ जाते हैं प्रिय दर्शकों अब घर पर आकर वह स्त्री अपने सास ससुर को प्रणाम करती है माफी मांगती है अपने प से माफी मांगती है और उसी पल से उसका स्वभाव बदल जाता है अब वह अपने घर को साफ करती अपने सास और ससुर की सेवा करती समय से भोजन देती पति से प्रेम से बात करती और बच्चों को बहुत अच्छे संस्कार देती धीरे-धीरे उसके घर में लक्ष्मी का वास होने लगा उसका पति बहुत तरक्की करने लगा और वह बहुत धनवान हो गए प्रिय दर्शको इतनी कहानी कबूतर अपनी पत्नी कबूतरी को सुनाता है और
कबूतरी को सारी बात समझ में आ जाती है तो प्रिय दर्शकों हमारी आज की यह कहानी यहां समाप्त होती है हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी आज की यह कहानी पसंद आई होगी और आप इससे ढेर सारी प्रेरणा एं लेंगे मिलते हैं अगली ज्ञान चर्चा के साथ अगले वीडियो में तब तक के लिए नमस्कार धन्यवाद [संगीत]