रोहित जी राधे राधे गु राधे राधे महाराज जी महाराज जी आज के युग में असली सफलता किसे कहते हैं और उसे प्राप्त कैसे करें सफलता हर युग में एक ही जैसी होती है वह होती है भगवत प्राप्ति नहीं सब असफल है तुम चाहे जितने बड़े पद में पहुंच गए चाहे जितने अरब रुपया जमा कर लि चाहे जितना सुंदर परिवार हो चाहे जितना सुंदर महल हो चाहे जितनी सुंदर गाड़िया है मरोगे तो इनमें से क्या जाएगा तो असफल हो गए ना भाई कमाने यहां आए थे 70 वर्ष 80 वर्ष 100 वर्ष 120 वर्ष इसके आगे तो
आयु है नहीं मनुष्य की इतने में जो कुछ कमाया उसमें से पाच रुपए भी नहीं ले जा सके तो असफल रहे कि सफल अफल रहे ना तो सफलता है भगवान की प्राप्ति हर युग में चौ जुग चौ श्रुति नाम प्रभाव लोक वेदना आनु पाव यदि हर समय मधुर मधुर भगवान का नाम ज कर रहे इससे बड़ा कोई योग नहीं तेशाम सतत युक्ता नाम भजता प्रीति पूर्व कम ददा बुद्धि योगम तम न माम पया दते जो प्रेम पूर्वक नाम जप करता रहता उससे बड़ा कोई योगी नहीं इसलिए यही सफलता है हर समय हर सेकंड भगवान का
विस्मरण ना होने पावे हर समय स्मरण करो यही परम योग है यही परम सफलता है यही परम लाभ है समझ पाए म जी इस सफलता को प्राप्त करने के लिए क्या करना पड़ेगा भगवान से प्रार्थना करें सबसे पहले साधु संगति प्रथम भगति संतन कर संगा सबसे पहली भक्ति भगवान के प्रेमी महात्माओं का संत प्रेमी महात्माओं का प्रपंच हों का नहीं प्रपंच हों का नहीं अगर प्रपंच हों को तो प्रपंच भरा रहेगा हंसी मजाक यह रुपया पैसा लेन देन सब प्रपंच है शुद्ध बात त्रिगुणा त बात केवल भगवान से मतलब जिनको ऐसे भक्तों का संग हो
मा संगस दुर्लभ अगम्य अमो महापुरुषों का संग दुर्लभ है अगर मिल जाए तो निर्वाह करना कठिन हो निर्वाह कर ले जाए तो परम पद निश्चित मिल जाएगा तो भगवान से पहले प्रार्थना करें प्रथम भगति संतन कर संगा और दूसरी रति मम कथा प्रसंगा द श्री भगवान के चरित्रों का खूब स्वाध्याय करें खूब श्रवण करें खूब मनन करें गुरुपद पंकज सेवाती सरी भक्ति अमान श्री गुरुदेव भगवान के चरणों का आश्रय ले और मान रहित होकर गुरुदेव के चरणों की सेवा करें चौथी भगत मम गुण गन करई कपट तज गान चौथी भक्ति भगवान की लीला गुणों का
कपट तज करके गान करे कपट तज लीला गुण भगवान के गा रहे रुपैया चार है चौथी भगत मम गुण करे कपट तज गान मंत्र जाप मम दृढ़ विश्वासा पांचवी भक्ति है मेरे मंत्र का निरंतर जाप हो और उस उसमें दृढ़ विश्वास हो पंचम भजन सुवेद प्रकाशा छठ दम शील विरत बहु कर्मा निरत निरंतर सज्जन धर्मा छठवीं भक्ति है शीलवान बने सहनशील बने चाहे जितना मान हो या अपमान हो दुख हो या सुख हो निंदा हो या स्थिति हो समान भाव रहकर छट दम शल और बहुत से उन कर्मों का त्याग कर दे जो भक्ति विरोधी
कर्म है छट दम शल विरत बहु कर्मा और निरत निरंतर सज्जन धर्मा जो संत महापुरुषों ने धर्मशास्त्रों में क्रियाएं कही है वही कर्म करना चाहिए अन्यथा उन कर्मों का त्याग कर देना चाहिए जो भक्ति वि कर्म है बहुत प्रकार से जो प्रपंच में उलझा देते हैं उन कर्मों का त्याग कर देना चाहिए नहीं तो मंत्र जाप होगा ही नहीं भजन होगा ही नहीं इतना उलझा रहेगा कार्यों में छठ दम शल विरत बहु कर्मा निरत निरंतर सज्जन धर्मा सातो सब मोहिम जग देखा मोते अधिक संत कर लेखा सातवी भक्ति है सारे संसार को भगवान का स्वरूप
देखना और भगवान से भी अधिक बढ़कर संतों को मानना सातो सम महिम जग देखा मो अधिक संत कर लेखा आठों जथा लाभ संतोषा सपने नहीं देखे पर दोषा आठवी कि ऐसी स्थिति बना ले कि जथा लाभ संतोष सदा काह सो कछु न चाह किसी से कोई मांग नहीं जैसे हमें भगवान रख रहे हैं ब उसी स्थिति में हम राजी रहेंगे जि ज राख हो त्य त्य रहित हो हरि जोई जोई प्यारो करे सोई मोही भावे ये स्थिति आठों जथा लाभ संतोषा सपन नहीं देख पर दोषा स्वप्न में भी किसी के दोष ना देखे नवम सरल
सब सन छल हीना नवी भक्ति है पूर्णता है नवी भक्ति नवम सरल सब सल छल हीना सरल स्वभाव न मन कुटिला ये संतो का स्वभाव होता है जो वाणी में वही हृदय में वही क्रिया में इसे ठीक आचरण कहते हैं वाणी में कुछ है मन में कुछ चल रहा है क्रियाएं कुछ हो र है यह कपटी पुरुष है सरलता य कि जो बोल रहा है वही आचरण कर रहा है वही उसके मन में है नवम सरल सबस छल ना किसी से छल भरा व्यवहार ना करें और मम भरोस ही हरस न देना दृढ़ मेरे पर
विश्वास हो ना हर्ष हो ना शोक हो ना कभी किसी के सामने अपनी दैन्य प्रकट करे भागवती दैन्य अलग है गरीबी वाली दनता ना प्रकट करे कि बाबू जी कुछ सहयोग कर दो नहीं मम भरोस ही हरस न दीना व ऐसी दैन्य ना करे किसी के सामने हाथ ना पसारे तो भगवान सबको देने वाला है जब देगा तो निहाल कर देगा नौ मा एक को जिनके होई अगर नौ भक्ति में एक भी भक्ति किसी को हो तो उसका कल्याण हो जाएगा उसका मंगल म जी आपने प्रथम पढ़ा संत संग बताया इसमें महाराज जी जो संसार
में एकदम अभी भक्ति प्रारंभ ही नहीं हुई उनको संत संतों के बारे ही पता नहीं विशुद्ध संत कैसे होंगे कहां भगवान से इसीलिए हम सबसे पहले कहा भगवान से प्रार्थना करें कि हमें संत संग दिलाए भगवान तो सब जानते हैं ना तो भगवान से प्रार्थना करें तो ऐसे संतों के पास पहुंचा देंगे जिनके संग से परमार्थ पुष्ट होता है ऐसा तो है ही नहीं कि असली संत है ही नहीं अगर नकली नोट है तो असली उसका होगा कहीं खोजो अगर नकली कोई वस्तु है तो असली तो होगी ही ना उसको खोजो जिन खोजा तिन पाइया
गहरे पानी पैठ तो तुम नहीं खोज पा रहे हो तो भगवान से प्रार्थना करो तो भगवान जब द्रव दीन दयालु राग हो तो साधु संगति पाइए तो संतों का संग करा देंगे और संत संग हो गया तो फिर नौ भक्ति आ जाएगी अपने आप जी