प्यारे दोस्तों आज हम आपको एक ऐसा दर्दनाक वाकया सुनाने वाले हैं जिस वाकए को सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी यह वाकया है उस जालिम बेहिस बाप का जिसने अपनी बेटी की इफ्तारी में झर मिला दिया लेकिन इससे पहले एक ऐसा मंजर रोनु मा हुआ जिसे देखकर हर चीज सहम गई आखिर उस जालिम ने ऐसा क्यों किया यह वाकया आपको रुला देगा इस वाकए को आखिर तक जरूर देखिएगा भारत का एक गांव था जहां पर एक हिंदू शख्स रहता था वह बहुत ही जालिम और बेरहम था उसके घर के साथ ही मुसलमानों का एक घराना था
वह हिंदू शख्स मुसलमानों से शदीद नफरत करता था उसे पसंद नहीं था कि कोई मुसलमान उसके करीब से भी गुजरे इस गांव में और भी ऐसे बहुत सारे लोग थे जो ऐसी नफरत से गुजर रहे थे उस हिंदू शख्स की एक बेटी थी जिसका नाम पूजा था पूजा बहुत ही खूबसूरत थी लेकिन अब भी वह बच्ची थी हिंदू शख्स जिसका नाम रामू था वह ब बहुत ही सख्त तबीयत का मालिक था मुसलमानों का घराना साथ ही था जिसमें अहमद बख्श अपने खूबसूरत घराने के साथ जिंदगी गुजार रहे थे वह दिल के भी बहुत अच्छे थे
चाहे वह हिंदू शख्स रामू अपने दिल में नफरत रखता था लेकिन अहमद बख्श के दिल में उसके लिए मोहब्बत थी यह बात है उस वक्त की जब पूजा पांचवीं जमात में पढ़ती थी पूजा और अहमद बख्श की बेटी फातिमा एक ही क्लास में पढ़ती थी जिस वजह से वह कभी कभार एक साथ ही स्कूल जाया करती थी लेकिन यह बातें रामू को पता नहीं थी क्योंकि उसे पता था कि अगर रामू को पता चल गया तो वह उसे जिंदा नहीं छोड़ेगा रामू जब अपने काम पर चला जाता तो पूजा फातिमा के घर चली जाती वह
पूरा पूरा दिन खेलती रहती थी इस तरह दोनों में दोस्ती काफी गहरी हो गई थी कभी फातिमा पूजा के घर आती तो कभी पूजा फातिमा के घर जाती लेकिन यह बातें रामू की नजरों से ओझल थी उसने कभी गौर नहीं किया कि कौन उसके घर आ रहा है और कौन जा रहा है क्योंकि उसकी बीवी ने कभी उसे इस तरफ ध्यान देने ही नहीं दिया उसकी बीवी को भी मुसलमानों से काफी मोहब्बत थी क्योंकि अखलाक के अच्छे लोग थे पूजा पूरा पूरा दिन फातिमा के घर रहती थी फातिमा के जब घर वाले नमाज पढ़ते तो
पूजा उनको एक तरफ बैठकर देखती रहती और दिल ही दिल में देखकर खुश होती रहती थी वह डरी और सहमी रहती थी फातिमा उसे कहती कि तुम इतना डरी क्यों रहती हो अब तो तुम्हारे अब्बा नहीं है ना तुम हमारे घर में हो तुम जो चाहे कर सकती हो डरने की कोई जरूरत नहीं लेकिन वालिद का खौफ उसके दिल में था एक दिन पूजा फातिमा से कहने लगी यह तुम्हारी अम्मी अब्बू क्या पढ़ते हैं फातिमा मुस्कुरा कर कहने लगी हम नमाज पढ़ते हैं नमाज हर मुसलमान मर्द औरत पर फर्ज है नमाज पढ़ने से दुआएं कबूल
होती हैं जो चीज अल्लाह से मांगी जाए वह मिल जाती है फातिमा की यह खूबसूरत बातें पूजा के दिल पर असर करती थी वह दिल ही दिल में नमाज के ख्याल सोचती रहती थी एक दिन वो घर आई तो कहने लगी अम्मी आपसे एक बात करनी थी पूजा की मां कहने लगी हां बोलो बेटी क्या बात है अम्मी फातिमा की अम्मी और अब्बू नमाज पढ़ते हैं आप और अब्बू क्यों नहीं पढ़ते जब यह बात पूजा के मुंह से निकली तो उसकी मां ने मुंह पर हाथ रखा और कहा बेटी ऐसा मत करो आइंदा के बाद
ऐसे अल्फाज मत निकालना वरना तुम्हारा और मेरा जीना मुश्किल हो जाएगा तुम्हें अपने बाप का तो पता है कि वह कितना गोसेवा अगर उसको पता चल गया कि तुम उसके घर जाती हो तो वह हमें जिंदा नहीं छोड़ेगा सबसे पहले मेरी ही गर्दन काटेगा बेचारी पूजा और सहम गई अब वह डरी डरी रहने लगी वह फातिमा के घर भी नहीं जाती थी एक दिन फातिमा खुद उसके घर आ गई इस दौरान रामो भी घर में मौजूद था रामो की बीवी ने जब देखा कि फातिमा घर आई है तो वह डर गई कि अब खैर ही
हो रामू ने जब देखा कि फातिमा एक मुसलमान लड़की है तो वह पहले से जानता तो था लेकिन जब उसने उसे अपने घर आते देखा तो कहने लगा ए लड़की क्या काम है मेरे घर क्यों आई हो फातिमा जानती थी कि रामो सख्त तबीयत का है अगर वो यह सारा सच बता देती तो पूजा और उसकी मां की खैर नहीं थी फातिमा कहने लगी हमारा नमक खत्म हो गया है हम आपसे नमक लेने आए हैं इस तरह रामो नजरअंदाज करके घर से चला गया पूजा की मां आई और कहने लगी बेटी फातिमा मैं तो जानती
हूं कि तुम दोनों आपस में सहेलियां हो लेकिन तुम्हें पता है कि पूजा के वालिद बहुत सख्त तबीयत के मालिक हैं अगर उनको यह राज पता चल गया तो वह हमें जिंदा नहीं छोड़ेंगे लिहाजा तुम हमारे घर मत आया करो पूजा को मैं तुम्हारे घर भेज दिया करूंगी क्योंकि यही मुमकिन है फातिमा कहने लगी मुझे इस बात का अंदाजा है आंटी लेकिन आप फिक्र ना करें मैं तो परेशान हो गई थी कि पूजा मेरे घर क्यों नहीं आती अरे बेटी पूजा ने जब नमाज का जिक्र किया तो मेरा तो दिल कांप उठा कि अगर उसके
वालिद ने सुन लिया तो क्या होगा आप फिक्र ना करें मैं अब आपके घर नहीं आऊंगी और पूजा तुम ऐसी बातें घर में मत किया करो यह बातें सिर्फ मेरे घर में ही किया करो क्योंकि वहां तुम महफूज रहती हो पूजा को अब अपने घर से घुटन होने लगी थी वह अब पूरा पूरा वक्त फातिमा के घर गुजारती थी रामो को इस बात का पता चल चुका था रामो कहने लगा ए पूजा की मां तुम्हें कितनी बार मना किया है कि लड़की को उन मुसलमानों के घर मत भेजा करो तुम मेरी बात को क्यों नहीं
समझती कल कुछ ऐसा वैसा हो गया तो मुझ पर गिला मत करना पूजा की मां कहने लगी आप तो ऐसी ही क्या-क्या सोचते रहते हैं वह एक ही क्लास में पढ़ती हैं क्या हो गया अगर बच्चियां आपस में मिलती हैं अरे नहीं तुम्हें पता नहीं कि मुझे मुसलमान एक आंख नहीं भाते तुम क्यों नहीं समझती मेरी बात अरे छोड़िए आप कैसी फिजल बातें लेकर बैठ गए पूजा की मां बड़ी मुश्किल से रामों को इन बातों से दूर करने की कोशिश करती थी लेकिन शायद तकदीर को कुछ और ही मंजूर था एक दिन पूजा फातिमा के
घर गई फातिमा और उसके मां-बाप नमाज पढ़ रहे थे रमजान शरीफ का महीना था नमाज पढ़ने के बाद उन्होंने इफ्तारी की पूजा भी उनके पास बैठी थी इसलिए वह भी उनके साथ मिलकर इफ्तारी करने लगी इफ्तारी करके फातिमा ने मगरिब की नमाज अदा की और पूजा से कहा तुम भी मेरे साथ नमाज पढ़ो पूजा पहले से यही सोच रही थी कि वह भी वही नमाज पढ़े जो फातिमा पढ़ती है पूजा खुशी-खुशी फातिमा के साथ वजू करती है और दोनों नमाज पढ़ने लगती हैं लेकिन यह बात फातिमा के मां-बाप को नहीं पता थी इसी तरह अब
पूजा भी फातिमा के घर आने लगी और नमाज पढ़ने लगी धीरे-धीरे वह बड़ी भी हो रही थी और इस्लाम की तरफ उसकी मोहब्बत बढ़ती जा रही थी जब फातिमा कुरान पढ़ रही होती तो पूजा कहती मुझे भी कुरान पढ़ना है धीरे-धीरे फातिमा ने पूजा को भी कुरान मजीद पढ़ाना शुरू कर दिया पूजा ने कोरान मजीद तर्जुमे के साथ पढ़ना शुरू किया और समझने की कोशिश की अल्लाह ने उसके दिल में अपनी मोहब्बत डाल दी वह इस्लाम की खूबसूरती को समझ चुकी थी वह जान चुकी थी कि यह खूबसूरत और सच्चा दीन है एक दिन पूजा
कहने लगी मुझे कोई डर नहीं तुम मेरे घर आया करो अब हम बड़ी हो चुकी हैं मैं चाहती हूं कि हमारी दोस्ती हमेशा रहे क्योंकि तुमने मेरी जिंदगी बदल दी है तुमने मुझे उन वीरानियां से निकाला है जहां मैं गिरी हुई थी मैं इस अंधेरे कुएं से निकलकर रोशनी की तरफ आ रही हूं अल्लाह की मोहब्बत मुझे हासिल हो चुकी है फातिमा कहने लगी पूजा देखो यह बात तुमने कभी अपने मां-बाप को नहीं बतानी यह बात मेरे मां-बाप को भी नहीं पता क्योंकि वह जानते हैं कि तुम्हारे मां-बाप बहुत सख्त है यह एक राज रहेगा
पूजा मुस्कुराकर कहने लगी तुम फिक्र मत करो मैं किसी के आगे जिक्र नहीं करूंगी फातिमा ने कहा देखो यह बात छुपने वाली तो है नहीं तुम नमाज पढ़ो गी तो वह तो तुम्हें देख ही लेंगे पूजा बोली तुम फिक्र मत करो मैं सब देख लूंगी तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं बस तुम मेरे घर आया करो क्योंकि मैं बोर होती रहती हूं यह बात अभी किसी को पता नहीं थी जो वह मासूम दिल की मालिक लड़कियां कर रही थी उनकी अपनी अलग ही दुनिया थी वह नहीं जानती थी कि दुश्मन सांप की तरह उनके आसपास
मंडरा रहे हैं तूफान का आना एक दिन फातिमा पूजा से मिलने आई तो घर में कोई नहीं था क्योंकि रामू और उसकी बीवी बाजार गए हुए थे फातिमा कहने लगी वैसे भी जोहर का वक्त हो गया है क्यों ना हम नमाज अदा कर ले तो तुम्हारे अम्मी अब्बू घर में है भी नहीं पूजा कहने लगी हां मैं भी यही सोच रही थी फातिमा ने कहा अच्छा जल्दी से जाओ और घर का दरवाजा बंद करके आओ पूजा गई लेकिन दरवाजा बंद करने के बजाय वह दरवाजे के पास खड़ी हो गई और कहने लगी मैं दरवाजा क्यों
बंद करूं मुझे किसी का डर नहीं अल्लाह देख रहा है मुझे सिर्फ अल्लाह का डर है वह वैसे ही वापस आ गई फातिमा उस दौरान नमाज में मसरूफ हो गई और पूजा भी नमाज पढ़ने लगी खुदा का करना ऐसा हुआ कि रामू और उसकी बीवी उसी दौरान घर आ गए जब रामू ने अपनी आंखों से देखा कि फातिमा और पूजा दोनों नमाज पढ़ रही हैं तो उसके अंदर आग लग गई वह गस्से से तिलमिला उठा और कहने लगा अरे पूजा की मां देख रही है तू इसीलिए तुझसे कहता था कि इस लड़की को इस मुसलमान
लड़की से ना मिलने दे आज तो इसने हद ही कर दी वह उसे मारने ही वाला था कि पूजा की मां उसे रोक लेती है और कहती है मत करो ऐसा उसे नमाज मुकम्मल करने दो राम गस्से में आकर अपनी बीवी के मुंह पर जोरदार थप्पड़ मारता है तब तक फातिमा और पूजा ने नमाज पूरी कर ली थी फातिमा तो डर गई लेकिन पूजा कहने लगी तुम जल्दी से यहां से चली जाओ रामू ने फातिमा को रोक करर कहा ए लड़की यह तुम्हारा आखिरी कदम इस घर में है अबके बाद अगर तुम्हारा कदम मेरे घर
में आया तो मैं तुम्हें भी मार दूंगा और यहां से निकल जाओ दोबारा मत आना हमारे घर फातिमा डर कर जल्दी से अपने घर की तरफ चली गई यहां म गस्से से लाल हो चुका था वह पूजा के पास आता है और कहता है इसीलिए मैंने तुम्हें इजाजत दी थी कि तुम उसके साथ उसके घर जाओ तुम यह काम करने लग जाओगी पूजा कहने लगी अब्बा तुम कुछ नहीं कर सकते यह मेरी जिंदगी है मैं जो करूं ऐसा कहते ही रामू उसके मुंह पर जोरदार थप्पड़ मारता है पूजा रोने लगी और कहने लगी अम्मी मैंने
यहां नहीं रहना यहां मैं अपनी मर्जी की जिंदगी जी ही नहीं सकती मैं इस्लाम कबूल कर चुकी हूं और आप लोगों में से मुझे कोई नहीं रोक सकता पूजा का ईमान मजबूत हो चुका था उसके दिल के अंदर खौफ खत्म हो चुका था सिर्फ अल्लाह का खौफ आ चुका था जो एक असल ईमान की निशानी है रामू ने जब यह देखा कि उसकी बेटी उसके सामने आ खड़ी हुई है तो उसने जोरदार थप्पड़ उसके मुंह पर मारा और कहने लगा निकल जाओ इस घर से तुम्हारी कोई जगह नहीं इस घर में जाओ उसी अपनी फातिमा
सहेली के पास जाओ उसी के घर रह लो जाकर मैं देखता हूं कि वह तुम्हें घर रखते हैं नहीं पूजा की मां हाथ जोड़कर रामू के आगे माफी मांगने लगी ऐसा मत कीजिए गांव में तमाशा हो जाएगा लोग क्या कहेंगे खानदान वाले बातें करेंगे कि रामू की बेटी इस्लाम कबूल कर चुकी है जिसकी वजह से रामू ने उसे घर से निकाल दिया है यह बदनामी आपकी होगी लड़की का क्या जाना है वह तो जो करना था कर चुकी है खानदान वाले आपको ही दुश्मन समझ लेंगे हमारी बेटी है आखिर आप सब्र से काम ले रामू
अपनी बीवी को कहने लगा मुझे पता है यह सारी चालाकी तुम्हारी है तुम्हारा पूरा पूरा हाथ है इसमें पूजा कहने लगी आप अम्मी से इस तरीके में बात मत करें जो किया मैंने खुद किया अपनी मर्जी के साथ मुझे किसी ने कुछ नहीं कहा जो मुझे अच्छा लगा मैंने वही किया रामू ने जब देखा कि उसकी बेटी हद से गुजर गई है तो वह खामोश हो गया वह एक शैतान और मक्कार इंसान था वह इस तरह खामोश रहने वाला नहीं था ना जाने उस वक्त उसने क्या सोचा और वह चुप हो गया कहने ने लगा
ठीक है यहीं रहो तुम मैं भूल जाऊंगा इस बात को पूजा और उसकी मां हैरान थी कि एकदम से रामू को हुआ क्या है पहले वह इतना गुस्से में था लेकिन अचानक उसके अंदाज बदल गए ना जाने उसने क्या सोचा था इसी तरह दिन गुजरते जा रहे थे पूजा को क्या पता था कि वकत उसके सामने एक ऐसा मोड़ ले आएगा जिसको देखकर उसकी अकल खत्म हो जाएगी रामू एक शैतान इंसान था उसने अपनी बीवी से कहा जाओ बेटी पूजा को बुलाकर लाओ मैंने जरूरी बात करनी है और हां फातिमा और उसके घर वालों को
भी बुलाकर लाओ पूजा कहने लगी अब्बा जान क्या बात है आप तो उनको पसंद नहीं करते रामू रोते हुए कहने लगा मुझे माफ कर दो लेकिन इनको बुलाकर लाओ मैंने जरूरी बात करनी है इसी दौरान वहां पर फातिमा और उसके वालिद भी मौजूद थे पूजा भी वहां खड़ी अपने बाप की बातें सुन रही थी पूजा की मां भी हैरान थी कि आखिर इनको हो क्या गया है ममू रोते हुए कहने लगा मैं आप सबसे हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं मैंने आप लोगों के साथ बहुत ही ज्यादा नफरत की है मुझे माफ कर दीजिए पूजा बेटी
ने मेरी आंखें खोल दी हैं मैं भी मुसलमान हो चुका हूं और बहुत खुशी हुई है कि मेरी बेटी ने मेरी आंखें खोली हैं आप सब लोग बहुत अच्छे हो मैं आप सबसे माफी मांगता हूं मेरी गलतियों को माफ कर दो पूजा ने जब अपने वालिद के मुंह से यह बातें सुनी तो व रोने लगी रोते-रोते कहने लगी अब्बा जान क्या वाकई यह हकीकत है जो मैं देख रही हूं आपका दिल तो इतना पत्थर था कि कभी मोम बन नहीं सकता लेकिन एकदम आप बदल गए व नहीं जानती थी कि उसके दिल में तो कुछ
और ही चल रहा है फातिमा और उसके घर वाले भी हैरान थे कि आखिर एकदम ऐसा क्या हुआ जिसने रामू के दिल को बदल दिया फातिमा हैरान थी पूजा से कहने लगी खैर तो है यह क्या देख रही हूं मैं तुम्हारे अब्बा मुसलमान हो चुके हैं मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा पूजा कहने लगी हां बिल्कुल मुझे भी यकीन नहीं हो रहा लेकिन तुम छोड़ो ना इन बातों को अल्लाह ने हमारी दुआएं सुन ली हैं इससे ऊपर हमें क्या चाहिए फातिमा मुस्कुरा कर कहने लगी हां पूजा तुम सही कह रही हो अब तुम्हारी जिंदगी
आसान हो गई है अब तुम खुलकर अल्लाह की इबादत कर सकती हो पूजा कहने लगी मुझे तो पहले भी किसी का डर नहीं था मैं तो अल्लाह से डरती हूं और उसी से डरती रहूंगी इसी तरह दिन गुजरते जा रहे थे रामू अब हर किसी के साथ अच्छा पेश आ रहा था लेकिन एक बात थी जो रामू ने अपने घर वालों को बताई थी कि तुम लोगों ने मेरे खानदान वालों को कभी नहीं बताना कि मैं मुसलमान हो चुका हूं और फातिमा के घर वालों को भी यह ताकीद की थी इसीलिए वह एक राज था
जो कुछ दिन तक तो कायम रहा इसी तरह दिन गुजरते जा रहे थे वक्त का पहिया तेजी से घूम रहा था अब रमजान शरीफ का वक्त आ चुका था अब तक तो सब ठीक ही चल रहा था रामू का रवैया बीवी और बेटी से अच्छा था व वैसे ही मुसलमानों की तरह नमाज पढ़ता और नेक काम करता रहता ना जाने उसका दिखावा था या हकीकत लेकिन तकदीर ने एक ऐसा पलटा खाया जिसने सबको हिलाकर रख दिया रमजान शरीफ का महीना आ चुका था हर तरफ सहरी और इफ्तारी की खुशबुओं महक रही थी नूरी महीना लोग
बहुत खुश थे फातिमा के घर में रौनक लग गई थी और पूजा के घर में भी रामू तबीयत खराब का बहाना बनाकर रोजे नहीं रख रहा था लेकिन पूजा की मां और पूजा रोजे रख रही थी एक दिन व पूजा से कहने लगा बेटी पूजा मैं चाहता हूं कि हम इफ्तारी करें जहां पर हम आसपास के मुसलमानों को दावत दें इससे सवाब भी मिलेगा और खुशी भी होगी पूजा मुस्कुरा करर कहने लगी यह तो बहुत अच्छा मशवरा है मुझे बहुत खुशी हुई कि आपने इतनी अच्छी सोच रखी रामू मुस्कुरा कर कहने लगा हम और तो
किसी को दावत नहीं देंगे बस फातिमा और उसके घर वालों को दावत देंगे ताकि वो इफ्तारी में शामिल हूं तुम ऐसा करो तुम आज ही जाओ और उनको कह कर आओ कि कल की इफ्तारी वह हमारे घर ही करें पूजा बहुत खुश हुई कहने लगी अब्बा जान बहुत शुक्रिया आपका आपका दिल बदल गया है इससे मुझे और खुशी और क्या हो सकती है पूजा इन्हीं कदमों पर दौड़ती हुई फातिमा के घर गई और खुशी-खुशी कहने लगी अस्सलाम वालेकुम आज मैं आप सब लोगों को कल के रोजे की इफ्तारी की दावत देने आई हूं क्योंकि मेरे
अब्बा जान ने कहा है कि आप लोगों को को दावत दे आऊं क्योंकि कल की इफ्तारी आप लोग हमारे घर करेंगे फातिमा और उसके घर वाले बहुत खुश हुए पूजा बेटी हम बहुत खुश हैं अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं लेकिन मैं एक बात करना चाहती हूं तुम अपना नाम बदल लो इस्लामिक नाम रख लो और अपने घर वालों को भी कहो कि वह भी अपना नाम बदल ले क्योंकि तुम लोगों को इस्लाम जैसी दौलत हासिल हुई है जी आंटी आप ठीक कह रही हैं मैं इस बारे में अपने वालिद से बात करूंगी शुक्र है
बेटी तेरे बाप का दिल नरम हुआ और उसकी आंखें खुली गलत और सही की पहचान हुई जी आंटी अल्लाह ताला मदद फरमाते हैं यह कहकर पूजा घर वापस आ गई रामू कहने लगा बेटी पूजा तुम और तुम्हारी मां घर में रहो मैं बाजार जा रहा हूं इफ्तारी का सामान लेने पूजा कहने लगी अब्बा जान आप अकेले कैसे जाएंगे मैं आपके साथ चलती हूं नहीं नहीं बेटी मैंने कहा ना तुम घर रुको मैं खुद अकेला चला जाऊंगा यह कहकर राम घर से निकल आया था लेकिन रास्ते में उसके चेहरे पर शैतानी मुस्कुराहट थी ना जाने वह
क्या सोच रहा था ना जाने उसके दिल के अंदर क्या बात थी वह हंसने लगा कहने लगा अब आएगा मजा मैं देखूंगा कि अब वक्त कैसा होता है वह अभी मुझसे वाकिफ नहीं वह समझे कि मैं बदल चुका हूं लेकिन यह एक मंसूबा था मैं इसी वक्त का इंतजार कर रहा था और वह वक्त आखिर आ गया ना जाने वह क्या जुल्म करने वाला था ना जाने वह बेरहम इंसान अपने दिल में क्या शैतानी मंसूबा बनाए बैठा था वह बाजार गया और उसने इफ्तारी के लिए कुछ फल फ्रूट और खाने के लिए जरूरी चीजें ली
और वापसी में वह एक ऐसी दुकान पर गया जहां से उसने एक शीशी में एक दवा लेकर आया उस शीशी को हाथ में पकड़कर मुस्कुरा कर कहने लगा अब आएगा मजा असल खेल तो अब शुरू होगा जो मैं करने वाला हूं हर किसी का पता चल जाएगा हर किसी की बहादुरी हर किसी का ईमान सब नजर आ जाएगा आज आखिरी इफ्तारी होगी उनकी मौत की इफ्तारी वह यह कहकर उस शीशी को अपनी जेब में डालता है और घर आ जाता है घर आकर देखता है तो पूजा और उसकी मां घर की सफाई में लगी थी
और खुशी-खुशी घर को साफ कर रही थी वह नहीं जानती थी कि वह जालिम बेरहम इंसान क्या मंसूबा बना चुका है उसकी नियत खराब हो चुकी थी उसका दिखावा जाहिर हो चुका था लेकिन वह मां बेटी इस बात से बेखबर थी पूजा कहने लगी अब्बा जान देखिए हमने घर को कितना प्यारा सजा आया है इफ्तारी है ना हमारे घर में पहली तो इसी वजह से अरे बेटी आहिस्ता बोलो किसी ने सुन लिया तो हम क्या करेंगे क्या कह रहे हैं आप कौन सुनेगा और हम जो कहे हमारी मर्जी हम किसी को गाली तो निकाल नहीं
रहे बस करो लड़की बस करो तुम्हें मेरे खानदान वालों का पता नहीं चुप रहो तुम और जल्दी से यह सामान पकड़ो और खाने की तैयारी करो सहरी के लिए भी चीजें तैयार रखो सुबह का सूरज एक बहुत भयानक दर्द के साथ तुल हुआ फातिमा के पूरे घर को रोजा था और पूजा और उसकी मां को भी सिवाय रामू के लेकिन रामू ने दिखावे के लिए रोजा रख लिया हालांकि उसे रोजा था नहीं वह बहुत खुश था आज के दिन वह खुशी से झूम रहा था पूजा कहने लगी अब्बा जान खैरियत तो है आज बहुत खुश
लग रहे हैं लगता है इफ्तारी की खुशी है हां बेटी आज इफ्तारी की खुशी है आज का दिन मेरे लिए बड़ी जीत का दिन है क्योंकि मैंने इस दिन के लिए बहुत इंतज किया है बड़ी मुश्किल के बाद आज मुझे यह दिन मिला है क्या सच में अब्बा जान यह तो बहुत अच्छी बात है नहीं जानती थी वह बेचारी कि यह जालिम इंसान नहीं यह शैतान है जो इंसान के रूप में लिबाज उड़े बैठा है रामू बहुत खुश था वह वक्त आ चुका था जब इफ्तारी होनी थी फातिमा और उसके घर वाले पूजा के घर
आ चुके थे पूजा ने इफ्तारी मजेदार बनाई उसकी मां ने भी उसकी मदद की मजेदार खाने बनाए इफ्तारी का दस्तरख्वान सजाया जिस पर लजीज खाने की डिशे रखी गई और फल फ्रूट और मशरू बात हर तरफ खुशबू ही खुशबू थी रौनक लग गई थी पूजा यह देखकर बहुत खुश हुई और आसमान की तरफ देखकर कहने लगी ऐ मेरे अल्लाह यह दिन मुझे ख्वाब की तरह लग रहा है हमारे इस हिंदू घराने में यह बरकत नाजिल होंगी मैं कभी सोच नहीं सकती थी इस घर को हमेशा आबाद रखना मेरे अल्लाह मेरे घर की खुशियों को सलामत
रखना किसी श शैतान की नजर ना लग जाए यह दुआ मांगती है उसे पता नहीं था कि शैतान तो उसके घर में मौजूद है उसके बाप की सूरत में रामू जल्दी से कमरे से बाहर आया और कहने लगा फातिमा और उसके वालिद पूजा और पूजा की मां जल्दी आओ इस कमरे में बैठो और शुकराने के नवाफिल अदा करो क्योंकि यह मैंने मन्नत मानी थी कि जिस दिन हमारे घर में पहली इफ्तारी होगी तमाम लोग शुकराने के नवाफिल अदा करेंगे वो सब शुकराने के नवाफिल अदा करने के लिए कमरे में चले जाते हैं रामो इस मौके
का फायदा उठाता है और जल्दी से वझर वाली शीशी निकालता है और मुस्कुरा कर कहता है अब बाए का मजा अब वह होगा जिसे सब देखकर कांप जाएंगे सबके दिल कमजोर हो जाएंगे क्योंकि मेरी जनत बहुत तेज है उसे पता नहीं था कि अल्लाह की जात उसके नापाक इरादे देख रही थी वह एक पत्थर दिल इंसान था जिसका दिल पत्थर से भी मजबूत था जो कभी पिघल नहीं सकता था उसने जल्दी से सारे खाने में जर मिला दी मशरू बात में भी पानी में भी अब उसने अपना काम मुकम्मल कर लिया था वह जल्दी से
कमरे में गया और नफिल अदा करने लगा यह नफिल सिर्फ दिखावा थे जब इफ्तारी का वक्त करीब आया तो सब दस्तरख्वान पर मौजूद थे बिलखिरिया रोजा खोलने की दुआ मांगी और सबने इफ्तारी शुरू की लेकिन रामो के चेहरे पर अजीब ही मुस्कुराहट थी पूजा कहने लगी अब्बा जान आप लीजिए खाइए ना आप ऐसे क्यों बैठे हैं रामू मुस्कुरा करर कहने लगा मुझे खुशी से भूख भी नहीं लगी मुझे भूख का एहसास भी नहीं हुआ क्योंकि आज की खुशी मेरी सोच से बाला तर है सब इफ्तारी करने लगे आहिस्ता आहिस्ता इफ्तारी का सारा खाना खत्म हो
चुका था जैसे ही खाना खत्म होता जा रहा था रामो के चेहरे के रंग बदलते जा रहे थे उसके चेहरे के ऊपर अजीब सी नाहूसत आती जा रही थी जब सबने इफ्तारी कर ली तो शुक्र की दुआ मांगी काफी वक्त गुजर चुका था अब मगरिब का वक्त हो चुका था सब दस्तरख्वान पर मौजूद थे रामो तो एकदम से कांप उठा और उसका रंग पीला जर्द हो गया उसे समझ नहीं आ रही थी कि झर का असर अभी तक किसी पर नहीं हुआ पूजा कहने लगी अब्बा जान आपकी तबीयत तो ठीक है आपको पसीना आ रहा
है इस दौरान रामो की हालत खराब हो रही थी उसके पैरों तले जमीन निकल गई कि यह मुमकिन नहीं लेकिन वह फिर भी हिम्मत करके बैठा रहा और उस वक्त का इंतजार करता रहा कि कब इनकी मौत होगी लेकिन यह उसकी सबसे बड़ी भूल थी वह नहीं जानता था कि उसने अपनी तरफ से तो पूरी कोशिश की है लेकिन बचाने वाली जात अल्लाह के ऊपर खड़ी है और वह देख रही है हर किसी की चालाकी जो किसी अच्छे इंसान के साथ धोखा करता है वह खुद उसी गड्ढे में गिरता है जो उसने दूसरों के लिए
खोदा होता है इस दौरान रामू बेहोश होने लगा अजीब अजीब आवाज निकलने लगी उसके पसीने छूट चुके थे वहां हर कोई परेशान हो गया पूजा रोने लगी और बाप के मुंह पर पानी छिड़कने लगी फातिमा के घर वाले भी परेशान हो गए कि ना जाने उसको हो क्या गया है सब बहुत परेशान हो गए उसकी हालत देखने लगे पूजा रोकर कहने लगी अंकल जल्दी जाइए डॉक्टर को बुलाकर लाइए लगता है अब्बा जान की तबीयत बहुत खराब है जैसे ही फातिमा का वालिद घर से जा रहा था तो रामू ने हाथ का किया मत जाओ इस
दौरान उसने अपने आप को संभाला लेकिन उसकी जुबान पर कलि मा जारी था वह अल्लाहू अकबर का वृत कर रहा था उसने इसी दौरान कहा मुझे पानी चाहिए मैंने वजू करना है किसी को समझ नहीं आ रही थी कि आखिर हो क्या रहा है जल्दी से उसने कांपते जिस्म के साथ वजू किया और जाय नमाज पर खड़ा होकर नफिल अदा करने लगा इसी दौरान वह सजदे में गिरा और रोने लगा उसके दर्दनाक आवाज सुनकर वहां मौजूद लोग भी रोने लगे क्योंकि उसकी आवाज में बहुत दर्द था वह चीखें मार मार कर रो रहा था और
सजदे में अल्लाह से माफी मांग रहा था किसी को अभी तक कुछ मालूम नहीं था कि हुआ क्या है हर किसी के चेहरे पर खामोशी छाई हुई थी हर कोई बेखबर था कि आखिर हो क्या गया है जब उसने नफिल अदा करके दुआ मांगी तो सबने पूछा आपको अचानक हो क्या गया है आपने इफ्तारी भी नहीं की क्या हुआ है आखिर आपको एकदम से क्या हो गया आपने नफल अदा किए अच्छा आपकी हालत इतनी खराब हो गई थी और एकदम से अब आप ठीक हो चुके हैं लेकिन वह सिर्फ रो रहा था उसकी आंखों से
आंसू गिर रहे थे वह कहने लगा मैं तुम लोगों को एक ऐसी बात बताने जा रहा हूं मैं चाहता हूं कि यह बात मेरे पूरे खानदान वाले बल्कि पूरा गांव सुने जाओ तुम पूरे गांव को बुलाकर लाओ सब हैरान थे कि आखिर ऐसी क्या बात है जो सबके सामने करनी है लेकिन फिर भी पूरे गांव को इकट्ठा करके ले आए जिसमें हिंदू और मुसलमान सब थे इस दौरान उनके घर में लोगों का हुजूम था घर वाले तो बेसब्री से इंतजार कर रहे थे कि आखिर रामो कहने वाला है रामो रोते हुए कांपते हुए जिस्म के
साथ कहने लगा मेरे घर वालों और फातिमा के घर वालों मुझे माफ कर दो ऐ गांव वालों तुम सब लोग मेरी बात सुन लो मैंने आज वह काम किया जो इंसानियत के दायरे से बाहर है मैं एक पत्थर दिल इंसान हूं बेरहम इंसान वह अपना सारा वाकया खोलकर सामने रख देता है मैंने इस्लाम कबूल सिर्फ दिखावे के लिए किया ताकि मैं अपनी नफरत को जाहिर कर सकूं और उनको झूठा साबित कर सकूं लेकिन यह मेरी बड़ी भूल थी मैंने बहुत बार मंसूबा बनाया कि मैं अपनी बीवी और बेटी को झर दे दूं लेकिन हर बार
मेरे दिल में ख्याल आया कि इन दोनों को मारकर मुझे कुछ हासिल तो नहीं होगा मैंने फिर एक दिल में शैतानी मंसूबा यह बनाया कि मैं फातिमा के पूरे घर को भी इसके साथ शामिल करूंगा और सबको झड़ दूंगा और मैं कहूंगा कि उन्होंने रोजा रखा और इफ्तारी में झर मिली थी लेकिन इनकी मदद किसी ने नहीं की मेरे दिल में यह ख्याल था लेकिन आज जब मैंने इफ्तारी में झर मिलाई कि यह सब इफ्तारी करके मर जाएंगे मैंने रमजान का इंतजार किया कि कब रमजान शरीफ आएगा पूजा अपने वालिद के मुंह से यह बातें
सुनकर उसके आंसू नहीं रुक रहे थे क्या वाकई यह मेरा बाप है जिसने अपने घर की खुशियों के साथ-साथ अपने हमसाय की खुशी को भी जलाने की कोशिश की लेकिन वह तो अल्लाह की जात थी जिसने मदद की वरना उसने तो अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी कि यह मर जाए इस दौरान फातिमा और उसके घर वालों की आंखों से आंसू गिर रहे थे हर कोई रो रहा था वहां खड़े लोग भी रो रहे थे सबके रोंगटे खड़े हो गए वहां खड़े हिंदू कलि मा पढ़ने लगे रामो ने कुछ ऐसे अल्फाज कहे जिसने सबके
पैरों तले जमीन निकाल दी सब कांप उठे उनके रोंगटे खड़े हो गए यह मंजर परिंदों ने भी महसूस किया लेकिन जैसे ही मैंने झर मिलाई तो सबने इफ्तारी की लेकिन उनको कुछ नहीं हुआ हालांकि वह जहर बहुत जहरीली थी उस वक्त मुझे एहसास हुआ कि मैं नादान हूं अल्लाह ताला जिसकी खातिर जिसकी रजा के लिए उन्होंने रोजा रखा वही उनकी मदद करेगा और उसने मदद ऐसी की कि मेरे जैसे पत्थर दिल को भी मुंह पर मारा मुझे माफ कर दो तुम लोग चाहो तो मुझे सजा दो मैं सजा का हकदार हूं फातिमा रोती हुई आई
कहने लगी पूजा के वालिद अल्लाह ने आज दिखा दिया है कि जो उस पर यकीन रखते हैं उनके साथ कोई भी बुरा नहीं कर सकता क्योंकि जिसके साथ अल्लाह हो जिसकी हिफाजत अल्लाह ताला खुद कर रहे हो उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता तो यह जहर क्या चीज थी ईमान की ताकत सबसे बड़ी होनी चाहिए अल्लाह का खौफ दिल में होना चाहिए ना कि मौत का और इंसानों का हम आपको सजा नहीं देते आपका दिल बदल चुका है हमारे लिए यह बहुत बड़ी खुशी की बात है सिर्फ आपका नहीं बल्कि आपके इस अमल
से बहुत सारे ऐसे गैर मुस्लिम भी नेक हो चुके हैं और बहुत सारे लोगों के जो पत्थर दिल थे वो साफ और फूल की तरह नरम हो चुके हैं हमें बहुत खुशी हुई है आप अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगे हम तो आपको माफ कर देंगे बस आप यह बात याद रखना जिनके साथ अल्लाह हो उनको कभी कुछ नहीं होता कोई भी उनको नुकसान नहीं पहुंचा सकता और जो उनके लिए बुरा सोचता है तो वह खुद ही गड्ढे में गिरता है इस तरह अल्लाह ताला इन सब मुनाफिक के दिल में मोहब्बत डाल देता है
पूजा की दुआएं कबूल हो चुकी थी सब नेक राह पर आ चुके थे और वह रमजान शरीफ उनके लिए बाबकॉक मेरे समेत तमाम मुसलमानों के लिए खुशी का बायस हो और खुशियां उनके मुकद्दर में हो आमीन सुम्मा आमीन यह कहानी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ सदका ए जारियागीदे स्टोरीज आपको मिलती रहे हमारा मकसद है आपको एक अच्छा पैगाम देना ना कि आपको तकलीफ देना कमेंट्स में आमीन जरूर लिखिए जजाकल्लाह