झाल का [संगीत] शो मोर कर दो हुआ है हुआ है [संगीत] कि अ [संगीत] कर दो [संगीत] कर दो [संगीत] इस पर श्री रामचंद्र और शुभ उस हर श्री रम शरीर है शुरू श्री राम शरीर शो लुट में आना व स्थिर स्वभाव स्थितं आना व स्थिति व्यवस्थितम् के महानतम Vivo महात्मा नम महानतम Vivo महात्मा नम ॐ हुं हुं मतवादी विरोध न सोच पति मतवाद सीईओ न तो जल्दी मतवादी ड्रोन अच्छा सोचती हो कि आश्रम सर एक्चुअली अ नवस्ते वाह व्यवस्थित तुम महानतम एक नींबू महात्मा नम मत वह डिसओनर सोचती जो शरीर में शरीर रहित और
अनित्य में नित्य रूप है उस महान सर्वव्यापक आत्मा को जानकर बुद्धिमान शोक नहीं करता था कि यह कठोपनिषद का प्रथम अध्याय है द्वितीय व ली है और इसमें स्लोक आज हम कठोपनिषद विचार करेंगे में नचिकेता एंप्री में गए हैं यमराज ने तीन वरदान दिए हैं पहला वरदान उन्हें स्वीकार किया है पिता के पास जाऊं दूसरा वरदान पंचांग निकाल लिया है तीसरे वरदान में ब्रह्मविद्या मांग नचिकेता ने यमराज ख्याल मत मांग मत मांग मत मांग और लंबा आयुष्मान गले निष्कंटक राज्य में अगले पुत्रपौत्रं मांगलिक ब्रह्मविद्या मत मांगिए दुर्लभ विद्या विद्या है में नचिकेता ने और तमाम
प्रलोभनों में अपनी स्वीकृति बताएं और ब्रह्मविद्या ही पाने की इच्छा बताएं तब यमराज ने उनका अभिवादन किया है प्रशंसा कि युवराज ने प्रशंसा की है नचिकेता दुर्लभ ऐसा विचार जिज्ञासु ने तो छोटी बुद्धि के लोग जिस नियुक्तियों में मानकर उद्देश साधनों को जुटाकर जीवन पूरा करके रवाना हो जाते हैं फिर जैसा ही मिलता है ऐसा आप्शन होता था भटकते-भटकते उनके जन्म का अंत हो जाता है है और शरीर गमछी त्रिशूल दूसरों में होते हुए अछि तैं झुकैगी पर मरने वाले में होते हुए भी जिसको मौत छू नहीं सकती व्यवस्था जॉन व्यवस्था वृद्धत्व और मृत्यु होने
पर नियुक्ति होती है न मृत्यु होता व्यवस्था आदि लोग और आटा पतला ढूंढना मोटा होने पर भी जो मोटा पतला नहीं होता है वह शरीर व सप्तमी विभक्ति बहुवचन सप्तमी विभक्ति बहुवचन चरणों में झुक अच्छी तरह है है और जब तक अपने शरीर स्वभाव को देव जानता नहीं तब तक इसके सिर से दुर्भाग्य का चक्र होता है कि रुपया कम मिलना है यह सत्ता कम मिलना ज्यादा मिलना यह सापेक्ष सौभाग्य या दुर्भाग्य है लेकिन वास्तविक सौभाग्य है कि शरीर में अशरीरी अपने मैं का साक्षात्कार करना शरीर में रहते हुए शरीर व है उस अपने असली
स्वरूप का ज्ञान पाना यह परम सौभाग्य और उस स्वरूप का ज्ञान न पाकर शरीर को मैं मानने यह बड़े में बड़ा दुर्भाग्य है वह सारे दुखों का मूल्य शुकदेवजी महाराज को व्यवस्थित भगवान ने कहा कि पूर्ण चाहिए तो जनक के पास आ में शुकदेवजी जनक के द्वार पर आए हैं द्वारपालों ने जाकर गन्ने को बताया जनक ने देखा कि अब सचमुच में अ शरीर का बोध पाना चाहता है कि शीघ्र ही ढूंढ ले कि कुछ दिन बीते जनक ने पूछा है कि चले गए बोले धूप में भी निश्चिंत थे और में भी निश्चित है को
मानने भी निश्चित है तापमान में भी निश्चिंत हैं अ के जनक ने कहा इन्हें खूब दूंगा अनंतपुर में ले आओ 250 युवतियां उनकी चाकरी में लग गई विविध प्रकार के भोग व्यंजन दिए लेकिन जितनी जरुरत हो उतना खा लिया बाकी का फिर रात्रि को जब संगठन में उन ज्योति ने पहुंचा दिया तो रात्रि के प्रथम पहर मे शुकदेवजी महाराज ध्यान मग्न हो गए और आखिरी पर मुड़कर भी संबोधित किया है है रात्रि का प्रथम प्रहर भोजन विनोद और हरिस्मरण में बिताना चाहिए दोपहर आराम करना चाहिए और रात्रि का चौथा और उसमें अ कि शरीर में
रहते हुए अपने शरीर स्वभाव का चिंतन करके ब्रह्मानंद का खजाना पाना चाहिए की जगह है कि इस प्रकार शुकदेवजी महाराज का समय व्यतीत हुआ है के जनक ने पूछा कि वह भोगों में लंपट हुए या भोगों से भाग गये बोले ना भाग गए नहाते हुए धूप से अभियुक्त विलास में फंसे हुए हैं और उन्हें बखूबी ने इनके चित्तौड़ अभूतपूर्व क्षमता गाढ़ा होता है तो उसकी कीमत होती पानी जैसा हो जाता तो वह थोड़े कहा जाता है ऐसी स्थिति में क्षमता होती है तो उसके जीवन की कीमत होती सब्सक्राइब नहीं तो जरा सी ठंडी तो ठहर
गए जरा सी गर्मी तो का यह सामान मिला तो भूल गये जरा जरा जरा जरा सी निर्धनता तो यह तो एक लिए नियुक्ति की कि कोई नहीं थोड़ा जीवन में इस समय तो होना चाहिए स्थिरता होने से है पौष मास की ठंडी से नियुक्त महाराज युधिष्ठिर वीएस संपत रात ठंडी बचाना हो तो दिन कि तुम सफल और आधे वैसा और जेठ की गर्मी नहीं सकते वह महाराज नियुक्त ठंडी भी नहीं सकते तो नहीं सब्सक्राइब टो है इसलिए जीवन में क्षमता अनिवार्य है दुनिया के सब लोग मिलकर भी उतना घाटा नहीं कर सकते और दुनिया के
सब लोग मिलकर भी उतना फायदा नहीं कर सकते जितना यह जीव अपने मन को चैतन्य में स्थिर करने से अपना फायदा करता है और जितना अपना मन जड़ वस्तुओं के आस्था में लगाने से अपना घाटा करता है उतना दुनिया के लोग मिलकर भी अपना घाटा नहीं कर सकते जनक राजा ने कि क्षमता तो बेजोड़ है की जानकारी देने बुलवाया ऊंचे आसन पर बिठाया और शुकदेव जी कहते हैं कि हे वास पुत्र मुनि कैसे आना हुआ उन्होंने कहा कि जगत नंबर कैसे पैदा हुआ है और उसकी विश्रांति कैसे मिले थे है जन्म-जन्मांतर के योग उन पर
के फेरों से आदमी कैसे बच्चे अ कि परमात्मा का स्वभाव क्या है और मोक्ष किसको कहते हैं ए फैन कि शरीर में रहते हुए जो अच्छी तरह बिशप मन के संकल्प-विकल्प होने पर उपभोक्ता सब्सक्राइब ऐसा घृत जो अच्छी तरह अवस्थाएं मन की बदलती है फिर भी मन से परे वृद्धि के निर्णय और बदलती फिर भी उससे जो करें शरीर में रहते हुए यह शरीर में रहते हुए उस समय और सुनील कुमार गुप्ता में तो तुम हो कि युद्ध हुआ मुझ से भगवान दूर घृत और भगवान दोस्तों नहीं हो सकता तुम और प्रभु परमात्मा दोस्त कि
युद्ध परमात्मा अलग हो जाता है ऐसा लगता है वास्तव में तुम यह है कि ब्राह्मण छोड़ दो देखे वस्त्रों को मैं मानने की भूल छोड़ दो तो तुम्हारा स्वरूप वही है नहीं तो यह का ढक्कन अधीर व पुत्र का त्यौहार का अंत कि युद्ध जिस समय जो मिलेगा साढ़े 5 सब्सक्राइब यह विदेशी मेहमानों की गलती करता अपने से बड़े को देखकर शुक्राना आती है अपने से छोटों को देखकर अहंकार आता है अपने बराबर वाले को देखकर स्पर्धा आती है और यह सब स्कोर मानने की गलती घ्र परिवार और वस्तुओं को रावण की नियुक्त करता है
वह समझो आकाश में आकर कुछ माल है यह देखो मैं मानकर कुटुंबी परिवार और समाज किंतु कुछ वस्तुओं को मेरा मानकर किसी ने आज तक इस बात में सफलता पाई आज तक पृथ्वी पर ऐसा कोई माई का लाल नहीं हुआ जो इन वस्तुओं को पकड़ रखे थे है जो का सामना है उसको जो भूल जाता है है और जिसको बहने देना है उसको जो रखने की कोशिश करता है वह आदमी आत्महत्या रहा है जो घृणा में ले जाना उसने के लिए दिन-रात परिश्रम कर्ताधर्ता और विहिप अध्यक्ष नियुक्त होने का ज्ञान मिलता है उस बयान को
देता है उस विचार को खबरें अपना कितना ही करता है शुकदेवजी महाराज तुम्हारे चित्त की समता है कि खबर देती है कि तुम विदेही आत्मा में विश्रांति पा चुके हो यही ज्ञान है यही क्षमता है के जनक का सत्संग सुनकर शुकदेव जी के संदेह है कि निवृत्ति हो गए और सुखदेव जी ज्ञात किए हुए कि देख छता जेनी दशा वर्ते देहातीत इस ज्ञानीना चरणमां हो वंदन अगणित हुआ झाले होते हुए विधि आत्मा की शांति व्यवस्था को सुखदेव जी महाराज की कि पार्वती जी तप करके भगवान शंकर को संतुष्ट किए शिव जी प्रकट हुए उनके दर्शनों
और जीने दो और पार्वती के साथ विवाह करने का स्वीकार कर लिया है कि शिवाजी अंतर्धान हो गए इतने में थोड़े दूर किसी तलाश में कोई ग्रह अपने बच्चे को पकड़ा और बच्चा चिल्लाता ऐसा आवाज आया पार्वती ने गौर से सुना तो एक बच्चा है हुआ है भी बड़ी दयनीय स्थिति में घर आ गया है मुझे बचाओ मेरा कोई नहीं मुझे बताओ चीख रहा है आक्रांत कर रहा है पार्वती का हृदय दुर्घटना से प्रभावित हो गया पार्वती जी वहां गई थी तो एक बालक है और उसका पैर ग्रहण ने पकड़ रखा है और घाघरा दुनिया
में कोई नहीं मेरा नाम आता है पिघला कोई नहीं मुझे बचाओ बचाओ बचाओ बचाओ पार्वती के आग्रह कि हे मगर देव इस बच्चे को छोड़ दे मगर ने कहा कि दिन के छठे भाग में जो मुझे प्राप्त हो उसको मुझे अपना आहार समझकर स्वीकार करना है ऐसी मेरी नियति नीति है और ब्रह्माजी ने मुझे दिन से छठे भाग में अब मैं इसको छोड़ ओ थे हेग रहा तो उसे छोड़ दें इसके बदले में तुझे जो चाहिए वह ढेर दूं ग्राहक था तुमने जो तप करके वरदान मांगा और शिवजी को प्रसन्न किया वह तब का फल
अगर देती है तो मैं बच्चे को छोड़ सकता है अन्यथा नहीं पार्वती ने का यह क्या बात करते हो उसी जन्म का तपन अध्ययन करने को तैयार इस बच्चे को छोड़ दो कि केवल इस अरण्य में बैठकर तब गया वह नहीं लेकिन इस जीवन में जो भी कुछ किया और अगले जीवन का भी जो कुछ तप है पुण्य में सब तेरे को देने को तैयार हैं कुछ लोग ने विषाक्त मत करो बुलेट है लुट पार्वती सित मैं तप दान का संकल्प करवा दिया पार्वती जी ने अपनी तपस्या का दान कर दिया ग्रह के लिए तपस्या
का दान होते ही ग्राहक का तन तेजस्विता से चमक उठा बच्चे को छोड़कर हुआ था पार्वती देखते रह तप के प्रभाव से मेरा शरीर कितना सुंदर हो गया है एक तेज पूर्ण हो गया नियुक्त अभियुक्त कमाई तो एक छोटे से बालक को बचाने में लगा पार्वती ने कहां है है तब तो मैं फिर कर सकती हूं लेकिन बालक को तू निकल जाता तो ऐसा निर्दोष बालक फिर कैसे आता है को देखते देखते हो बालक अंतर्धान हो गया ग्रह अंतर्धान हो गया पार्वती ने सोचा मिले तब का दान कर दिया अब फिर से तब का आश्रम
करो फोन करो फिर तप करने को बैठे हैं है जो थोड़ा सा ध्यान करते तो भगवान शिव व सदाशिव ऊपर प्रगट होते पार्वती क्यों तब करती है बोले प्रभु मैंने तब का दान कर दिया पार्वती ग्रह के रूप में यथावत के रूप में है 2013 चित्र प्राणी मात्र में अपनी आत्मीयता का एहसास करता है या नहीं यह परीक्षा लेने को यह मैंने लीला की अनेक रूपों में मैं दिखने वाला एक का एक हूं अनेक शहरों में शरीर से निहारा और शरीर आत्मा को हुआ है में एक किसान ए फीलिंग आफ पहुंचने पटाखे पटाखे पटाखे हुए
दें इससे भी गुड़ कुछ मिठाई रोटियां रखी थीं कि में चला गया बच्चों को स्कूल से आ जाओ नाश्ता करने लगे तब किसान तो खेत में चला गया उसकी पत्नी नियुक्त है कि बच्चे जब स्कूल से आए तो उसके पहले तो बड़ा घुस गया घोटाले में फंसने तो मिठाई और घर का खूब भंडारा करके रोटियों को साफ करके और ठंडी हवा लड़कियां और लंबा हुआ था लेकिन भूख सब्सक्राइब करें बढ़ा दो हुआ है है ऐसे करते करते खत्म हो गई बच्चे बेचारे भूख-प्यास से व्याकुल फिर दादू माया इस बच्चे जरा सा हाथ डाले हो कि
उन्हें डो तयार घर देखता है कि बच्चे भूखे और प्यास के मारे लोगों को थोड़े बच्चों से पूछ ले वह बता रहे हैं बिलाड़ा घुस गया है बिल ने मिठाई मिठाई खाते में मोटा ढ़क्कन सब्सक्राइब लुट-लुट मोह-ममता रूपी गीर अवतार ममतारूपी मिठाइयां और तीर्व बैठ जाता हुं हुं हुं हुं हुं हुं हुं हुं पता है जब किसान रुपया गुरुदेव आता है और साधक रूपी बच्चों से पूछता है क्या हाल है कि बोले आत्मानंद की भूख है संसार के थकान ने थका दिया है गुरुदेव उठाता है कृपया ब्रह्माज्ञान कर आत्मदृष्टि का चोट मारता है तब वह
पटाखे से भीलवाड़ा भासता है हो करके जब तक डरा रहा था और डराने वाला बिलाड़ा रवाना हो जाता है इसी क्वेश्चन अध्यात्म विज्ञान अध्ययन फिर जहां जाता है वह उसके चित्त में समाधि का एहसास होता एक बार संत तुलसीदासजी की इच्छा युद्ध के संत रविदास आदि थे यह बड़े भक्त है उनको पता नहीं कि रोहित दास समा जाती उन्होंने सुना था विदेश शीघ्र भगवान के भक्त अपने भक्त मंडली के साथ कि रोहिदास महाराज के दर्शन करने को निकले थे में चलते चलते हुए जब काशी पहुंचे रोहिदास के निवास स्थान के कुछ दूर उनका एक भक्त
रहता था अ कि उस भक्तों से तुलसीदास ने पूछा कि रोहित दास नाम के हुआ था कि यह कोई वैष्णव रहते हैं कोई भक्तों को इस संत है भटक भक्तों ने कहा रोहित दास नाम के को इस तरह नहीं रहते हैं यहां कोई व्यक्ति संत रविदास नियुक्त चमार चमार चमार थोड़ी संघ के नाम सुनते ही संत तुलसीदास जी के चित्र थोड़ी सी कि इन सोचा कि अब निकल पड़े हैं दर्शन करने को खाली वापस जाएं तो ठीक नहीं है बहुत दिनों से सुना है हैं और भक्तों को छोड़कर एक भक्त को बुद्धू मुर्ख भक्त हरिदास
पुलिस को साथ ले गए के साथ ले गए और वहीं दास के घर आ में जो प्रवेश किया तो उस समय रोहिदास अ ए मुंह में राम राम का पवित्रतम था और हाथ से काम करता था और काम भी हो कर रहा था कि एक बैल का चमड़ा उतारा था सिर्फ दो और बैल के शव का चमड़ा चित्तौड़ रहा था है और उसके हाथ रक्त से खड़े हुए थे कि उन्होंने की सुंदर खाता के तुलसीदास जी एक महान संत है और देखा के तुलसीदासजी आ रहे हैं रोहित दास इतना प्रेम आवेश में अभाव में धन्यवाद
में आ गया कि उसे पता ही नहीं कि रक्त के फव्वारे कपड़ों को लगे हैं हाथ में रखता है हथियार है वह तुलसीदास जी को देखकर वह भावविभोर हो गए और दिल जाकर दौड़ते-दौड़ते तुलसीदास जी से भेंट पढ़ जो तुलसीदास जी के करीब है तो तुलसीदास चार कदम पीछे पीछे हट गए रोशनी समझ गए हों लेकिन राष्ट्रप्रेम की भावना आ है कि रोहित दास ने आपसे आलिंगन कर लिया है की रोशनी समझ गए यह हटे तो है लेकिन रविदास अपने प्यार को अपनी सहित लाखों आम नहीं सकते हैं कि थोड़ी देर वार्तालाप हुआ था कि
अ तुलसीदास की रवाना हो को देखा कि उनके रक्त भरे हाथों ने आलिंगन किया तो वस्त्र को रक्त लग गया मरे हुए बैल का है कि तुलसीदासजी ने आकर स्नान किया और वस्त्र उतार कर फैंक अब रोहिदास के स्पर्श वाले अपने शिक्षकों कहा के वस्त्र दो देना है और सिस्टर ने वस्त्र दो है लेकिन दाग उतरे ने जो धोइए ट्यून तक चमक से लाइफ में आ रहा है थोड़ा देखा के गुरुजी की जरा सी सेवा सौंपा काम नहीं करुंगा तो फिर शिष्य कहलाने का अधिकार है कर दो मैं जो बात मानता है उसको चेला कहा
जाता है और जो बात नहीं माना जाता हूं सुशीला कहा जाता है चिला मन लकड़ी जलाने योग्य हो जाता है एक बड़े वशीकरण के जय श्री कृष्ण ओं कि चला जी ना कुछ होता रम 13 खेलने उसका चित्र तो गुरु ने जो काम दिया वह नहीं करूंगा का या तो फिर मैं तो चला जाऊंगा जिला के बदले चला जाऊंगा तो कि उसने खूब कोशिश की आंखें वह दाग नहीं मिल रहे थे कुछ चमत्कार था उसने सोचा नहीं मिल रहा है तो चूज कर निकालो फस जो उस रक्त के दाग उसने मूर्ख शिष्य थे कि त्यों
उसके बुद्धि में दिव्य ज्ञान का प्रकाश होने लगा और दाम भी कम होने लगे कि उसके चित्त में प्रसन्नता शांति और आनंद का साम्राज्य बढ़ता गया और चोले के जो दाग मेहनत रखें वह भी गायब हो गए थे है बट तथा हो गए उधर दे गुरु के चरणों में रात की विश्रांति हुई की दिनचर्या 40 दिन की शाम को कई भक्त थे संत तुलसीदास जी के निवास स्थान पर उनका दर्शन करते थे और अ चैत्र सुन कर अपना जीवन धन्य करते वक्त आखिर और तुलसीदास ने रामकथा शुरू कि हर चर्चा करते तुलसीदास जी ने भी
मैं बुद्धू आदमी कैसे होते उस विषय पर प्रकाश डालने की कोशिश की थी कि इतने में वह जो मूर्ख शिष्य हरिदास वो उठ खड़ा हुआ पुलिस ने कहा कि गुरुदेव आप रोचक प्रसंगों पर प्रकाश डालें तो बहुत अच्छा होगा कि मेरी आपको विनती है कि उस प्रश्न को आप यहीं रख दीजिए तुलसीदास ने कहा कि मेरे मन में वह प्रसंग विचार आया था और मैं विचार करके बोलने का 2068 कर रहा था तुझे पता कैसे चला कि युवक बूंद लगे थे कपड़े को नई नियुक्ति आप क्या करने वाले हो कि युवा सीरवी है आ जाती
से रोहित चमार दिख रहे थे लेकिन भगवान के भजन के बिना रूह को मरने वाले सब हम लोग सवार हैं तुलसी दास जी ने कहा कि घड़ी चतुराई सूवै पढ़ी लुटा चार आचार-विचार में ब्राह्मणों में यह यह चतुरई चूल्हे बड़ी नदी का पूरा-पूरा चार तुलसी हरि की भक्ति बिन अधिक चतुर ज़ुलुट्रेड तुलसी हरिद्रा व्यक्ति चारों वर्ण चमार इस देश में रहते हुए ही आत्मा की स्थिति है तो यह वाला चमड़ी और हड्डियों और मांस और मज्जा से लुट साढ़े तीन अधुम लिए पांच फीट लंबी चौड़ी बात कि अगर मैं मान कर जी रहे हैं तो
फिर चमार और हमे क्या फर्क तो आज अश्लोक है और शरम शुरू कठोलिक कठोपनिषद ताबिश लोग है द्वितीय शरीर वे अपना आपा उसका ज्ञान नचिकेता को यमराज से अब हकीकत में शरीर और तुम एक हो नहीं सकते लेकिन अपने को भूलकर शरीर को ऐसे ही मैं मानने की गलती हुई कि दिन-रात शरीर की सुरक्षा का खिलाना-पिलाना हनुमान लखनऊ इसी के लिए सर्वस्व करना और देखो मैं मानता है इंद्रिय ज्ञान को सच्चा मानता है संसार को सच मानता हुं फट् चोरा चोरी हुई एक आयल दुराचार अनाचार शोषण पर दुख पर पीर वो आदमी सुखी रहता है
उसको पता ही नहीं कि सूखी रहने वाला पुतला मर्द का यह शरीर की सुंदरता को सुंदरता सुंदरता का दिल पिघला सुंदर तन की सुंदरता को विशेष महत्व रखती है कि और की सुंदरता ही वास्तव में सुंदरता है जिसके जीवन में बीती हुई बात की स्मृति नहीं ज्यादा जो बीत गई सो बात गई स्वप्न संसार बीती हुई बातों को याद करके खूब झुक को याद करके अपने रिड्यूस करता हु की नियुक्ति पवित्र हो जाएगा लेकिन रिबन होगा तो पानी से वह पवित्र होता है को मलिन करने से बचाना चाहिए अ है तो चित्र की मलिनता है
90 हैरत अशुद्ध रखे और चरित्र कितना भी पवित्र रखेंगे तो कोई पवित्रता नहीं तनवीर पवित्र और भी पधारें आतंकी पवित्रता-अपवित्रता नियुक्त ब्राह्मण है यह शुद्ध है यह चमार है यह अपना है यह पर आया है इच्छाएं व महत्वाकांक्षाएं हमारे चित्र को मलिन करने की इच्छा से और क्वेश्चन होता भूतकाल के चिंतन से चित मन होता है भविष्य के भय से चित मन होता है हकीकत में भूतकाल वास्तव में नवम भविष्यकाल वास्तविक में और वास्तविक समय वर्तमान पीछे की वृद्धि होती है तो घृत कि भविष्य व्यक्ति हमेशा वर्तमान स्थिति वर्तमान स्थिति में का ज्ञान पहले तो
रहा है पवित्र हो जाता है सुंदर हो जाता है यदि दिव्या हो जाता दिव्य महलों में रहने से धुंध नहीं होता बढ़िया गाड़ी नियुक्त कपड़े पर नियुक्तियां नहीं होता है घृत कि युद्ध लगा है जिसका दिलबाग ने अपने जीवन अधीर वीरवती थलग सब्सक्राइब वाले शरीर में काला और न धीर व बनता है और जनक राजा दशरथ लेकर अपना भाग्य बनाते भारत की संस्कृति की गरिमा को के बाहर के बड़े महलों से यहां सुंदर शरीर से बड़प्पन मापना यह तो व्यक्ति लेकिन अंदर के आचार-विचार से अंदर की दृष्टि से अंदर की प्रवृति से जो बड़प्पन है
वह वास्तव में बड़प्पन सब्सक्राइब लगते थे तुलसीदास जी को संख्या चार प्रमुख नियुक्त करने आ रहे थे तो चार कदम पीछे चले गए लेकिन जब स्किन रक्त वाले हाथ में लगे और नियुक्त और उसको दिव्य ज्ञान प्राप्त किया स्कूल के चतुर्वेदी डी लुटा 4000 बिन अधिकार है तुलसी दास जी महाराज ने कहा फिर तुलसीदास जी की इच्छुक है ए परम वैष्णव को परम भक्त को मिलने जाना चाहिए अब तो वह क्या उनको चाहिए वीरवर आए काम में लगे हुए लेकिन अब जाकर उसे तुलसीदास फिर से मिलने को तुलसीदास ने कहा कि युवाओं को कि रोहित
दास कहते हैं कि आप वह मजा गई पहले स्वभाविक था मगर मिलूंगा तो मैं मिलूंगा का या पहले मैं नहीं था वह इसलिए मजा आता है को बिलाड़ा में करता ना खर्चा लगता है तब वह छोटा है ऐसे जान का अथवा प्रेम झाला ढक कि मैं मिट्टी अभियुक्त पर चिंतामणि है तो अपने शुद्ध में का साक्षात्कारकर्ता जुओं को ज्ञान होता है यह का ग्राफ कम होता जाता है जितना प्रसिद्ध हैं का आग्रह है उतना वह मूर्ख और जितना शुद्ध में का ग्रैजुएशन जितना शुएब निर्विघ्नं है पवित्र है जितना शुद्ध मे शांति और जितना प्रसिद्ध में
स्थिति है चाहे कितना सुंदर कितना रूप में नियुक्त पुत्र पिक्चर अवतार थपेड़े लगते रहेंगे इस कि अगर की लहरें चालू ही रहती है ऐसे ही उसके चित्र कि चिंताएं भय शोक घणा आदि देश उसके चित्र में रहेंगे दिनभर अंजाने में कई बार कितने तरह के होते हैं क्यों कि चित्र में उस चैतन्य का ज्ञान नही आंच उस चैतन्य के लिए प्यार की आंख उस चेतन नियुक्ति दिलाने वाले संतों का सहवास नियुक्त विचारों को जिंदगी भर मजदूरी करने के बाद भी अंधे को तो कुछ नहीं लगता है इस वड़े को पानी पिलाया और मांस मदिरा खिलाफ
रात कि युक्त अभियुक्त दादा राघवा श्रावण क्यों करता है अगर सच्चा आनंद जरिए तस्वीर वाली और मुलाकात करली आनंद का खजाना दिल में दिलबर का माल पड़ा है उधर तो देख एक बोतल की शराब पिलाने वाले बोतल की शराब धन की शराब सत्ता की शराब रूप से शराब लावणी की तरफ कपड़ों की शराब पर चूंकि शराबी यह सारी शराबे जीव को गुमराह करती है अब यह शराब पीने की आदत है तो एक बार राम नाम की शराब पी लेते रहे बेड़ा पार हो जायेगा जाम पर जाम पीने से क्या फायदा रात बीती सुबह को उतर
जाएगी दो फकीर व जिंदगी सुधर जाएगी सुधर जाएगी और फ़कीरों की प्रणालियों को फकीर का मतलब इसका मतलब हंद्स्फ्री फकीर का मतलब है जिसने अपने स्वभाव के साक्षात्कार में यही स्थिति प्राप्त सब्सक्राइब तरह की बिगनिंग ए का नाम फ़क़ीर नहीं पलायनवादी का नाम फ़क़ीर नहीं बिलासी व्यक्ति का नाम फ़क़ीर नहीं अथवा जो एक दूसरे पर आरोप रखने की कला कुशलता में है उनका नाम फ़क़ीर नहीं या उनका नाम समाज सुधारक नहीं समाज सुधारक वही है जिसने अपने चित्रों पर में सुधार जगह में पहुंचा दिया है फिर उसके होने मात्र से ही समाज का कुछ न
कुछ कल्याण होता रहता है जो समाज सुधारने को निकल पड़ते उन विचारों को नियुक्त को सुधार लो तुम्हारा मन नहीं सुधरा तो तुम्हारे द्वारा संभोग नोबल सूचनाएं मिलेंगी सब्सक्राइब जिन महापुरुषों ने अपने चित्रों को सुधार दिया अपने चित्रों को उस फकीर विघ्न सूकर जो स्वास्थ्य कहीं जाता है वह भी कुछ पुण्याई पैदा कर देता है लेकिन जिस का चित्र यह अभिमान से आक्रांत है जिसका चित्र शोषण से भरा है जीव विज्ञान के ज्ञाताओं रिसर्च करके जाहिर कर दिया कि युद्ध में सब्सक्राइब जरूर ऐसे व्यक्तियों की निगाह पड़ती है तो एक घन मीटर ब्लड 15000 लेकिन
मस्ती में झूमते जिसने जिन्होंने अपना चित्र सुंदर परम सुंदर चाहिए रंग रंग डाला है ऐसे महापुरुष उनकी निगाह पड़ती तो उनकी दृष्टि युति जब हम पढ़ते हैं तो एग्जाम अमीर व तैयार हो जाते हैं जो प्रसन्नता के आरोग्यता कर सकते हैं जैसे कि जब मिलते हैं तो एक तत्व निषद की महिमा का पता चलता है यमराज ने नचिकेता को बोला कि राजमार्ग लेस व्यवस्था राज्य आयुष्मान गोमेज और राज्य पुत्र प्रेग्नेंट पुत्र भी नहीं मरेगा पुत्र प्रेग्नेंट प्रेग्नेंट भी अच्छी मिलेगी लेकिन लड़की को लड़का होगा तब भी वृद्धि होगी कि लोग नियुक्ति होगी महाराज कृपा कर
दीजिए और की चिंता करने की चिंता करनी पड़े तो आत्मज्ञान है उससे बराबर और दुनिया की कृपा करके वह आत्मज्ञान ढ प्रवीण से यमराज ने कहा वह आत्मज्ञान अति दुर्लभ है देवताओं को भी दुर्लभ है उसका इस वक्त आश्चर्यकारक होता है उस वक्त आश्चर्य होता कुछ लोग सकता सब्सक्राइब होता विघ्न अधिक आयोग नियुक्त सुधीर वह आया था खड़े थे धूप में अनधिकृत नियुक्त थोड़ा करो मनन अपमान सहने की मुलाकात हुई तो सस्ता पड़ता है [प्रशंसा] इस दिन द्वारपालों ने अलग-अलग जगह पर रख या फिर भी देवगन कि यहां तो चलो चार्ट लेती आई निपटा देता
है यह गली फरीदाबाद उन साथियों के साथ उठा कर लेती है इस मैटर को देती है अहमदाबाद जाकर आएंगे और अगर आप स्वप्न अस्सलाम बीमार करेंगे प्रोग्राम के बाद भी करेंगे चलो ऐसा नहीं होता है लाला सीरवी सीरवी भगत