हेलो गाइ वेलकम बैक टू अवर youtube4 रिवीजन वीडियो जिसके अंदर मैं आपको कंप्लीट यूनिट को एक वीडियो के अंदर एक वन शॉट रिवीजन में कंप्लीट करवा दूंगा सारे कांसेप्ट एक्सप्लेन कर दूंगा सारी चीजें आपकी डिटेल में कवर हो जाएंगी अगर आपने अभी तक अपनी पढ़ाई स्टार्ट नहीं करी है करी है अच्छे से नहीं हुई है तो वो सारी चीजें अब आपकी इस वन शॉट रिवीजन वीडियो से कवर होने वाली है सारी सब्जेक्ट की सारे सेमेस्टर के लिए वन शॉट रिवीजन वीडियो आने वाली है सारे सब्जेक्ट की आपको धीरे-धीरे चैनल पर अपलोड मिल जाएंगी तो चैनल
को जरूर सब्सक्राइब करके रखें वीडियो अगर अच्छी लगे तो वीडियो को लाइक करना ना भूले और अपने सभी दोस्तों के साथ इन वीडियोस को शेयर करना ना भूलें तो धीरे-धीरे करके एक-एक करके आपके पास सारे सब्जेक्ट की वीडियोस आपको अवेलेबल होने वाली हैं तो देखिए आज की वीडियो में हम देखने वाले हैं जो भी सेमेस्टर फोर के बीकॉम प्रोग्राम या ओनर्स के स्टूडेंट हैं उन सभी के पास एक सब्जेक्ट आएगा इंटरनेशनल बिजनेस का उसकी यूनिट नंबर फाइव इंटरनेशनल फाइनेंस की एक वन शॉट रिवीजन वीडियो जिसके अंदर एक ही वीडियो के अंदर आपको कंप्लीट यूनिट कवर
करवा दी जाएगी तो चलिए बिना देर किए शुरू करते हैं हम अपनी आज की वीडियो देखते हैं आपको क्या-क्या कंटेंट कवर करना है जो आपका इसके सिलेबस में गिवन है तो टाइप्स ऑफ एफडीआई ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट मर्जर एंड एक्विजिशन स्ट्रेटेजी अला बेनिफिट एंड ड्र बैक ऑफ एफडीआई ओवरव्यू ऑफ एक्सचेंज रेट सिस्टम कंटेंपरेरी इशू इन इंटरनेशनल बिजनेस आउटसोर्सिंग एंड इट पोटेंशियल फॉर इंडिया इंटरनेशनल बिजनेस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट इतना कंटेंट आपको कवर करना है यह चीज आपके सिलेबस के अंदर दी गई है ठीक है अब देखिए सबसे पहला जो कांसेप्ट है वो आगा हमारा कांसेप्ट ऑफ एफडीआई
की एफडीआई क्या होता है एआई ऑफ फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट एफडीआई की आपकी फुल फॉर्म है फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट रेफर्स टू इन्वेस्टमेंट मेड बाय अ कंपनी और इंडिविजुअल इन वन कंट्री इन बिजनेस इंटरेस्ट इन अनदर कंट्री इन फॉर्म ऑफ स्टेबलाइजिंग बिजनेस ऑपरेशन और एक्वायरिंग बिजनेस एसेट इन दैट फॉरेन कंट्री एफडीआई क्या है यह एक तरीके की इन्वेस्टमेंट का तरीका है जो कि एक कंपनी या एक इंडिविजुअल जो भी किसी भी एक कंट्री में रहता है और वह इंटरेस्टेड हैगा दूसरी कंट्री के अंदर तो वह यह इन्वेस्टमेंट करता है अब वह जो यह इन्वेस्टमेंट करेगा वह किसी
भी तरीके से कर सकता है या तो वह वहां पर अपना बिजनेस स्टेबलाइज कर ले या वहां के जो पहले से बिजनेस है उसके एसेट्स को एक्वायर कर ले मतलब उसके कोई शेयर्स खरीद ले या एसेट में पैसा लगा दे किसी भी तरीके से फॉरन दूसरी कंट्री में तो उस चीज को आपका क्या कहा जाता है फॉरन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट या एफडीआई कहा जाता है ठीक है एफडीआई इवॉल्व लॉन्ग टर्म कमिटमेंट एंड कंट्रोल ओवर फॉरेन बिजनेस एंटिटी बाय द इन्वेस्टर एफडीआई क्या है यह एक तरीके की लॉन्ग टर्म कमिटमेंट होती है और कंट्रोल होता है जिसके
अंदर जो इन्वेस्टर होता है वह फॉरेन बिजनेस एंटिटी को कंट्रोल करता है एफडीआई इ एन इन्वेस्टमेंट फ्रॉम अ पार्टी इन वन कंट्री इनटू अ बिजनेस और कॉर्पोरेशन इन अनदर कंट्री विद द इंटेंशन ऑफ स्टेबलाइजिंग अ लास्टिंग रिलेशनशिप यह आपकी एफडीआई की डेफिनेशन दे रखी है यह एक इन्वेस्टमेंट है जिसके अंदर जो एक कंट्री की पार्टी है वह दूसरी कंट्री के या कॉर्पोरेशन के अंदर पैसा इन्वेस्ट करती है किस इस्ट इंटेंशन से लॉन्ग लास्टिंग इंटरेस्ट के लिए पैसा इन्वेस्ट कर देती है मतलब लॉन्ग टर्म के लिए पैसा इन्वेस्ट करती है तो उस चीज को आपका एफडीआई
कहा जाता है ठीक है की फीचर्स ऑफ एफडीआई जो एफडीआई है फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट इसके क्या-क्या फीचर्स होते हैं आपके तो नंबर वन आता है ओनरशिप एंड कंट्रोल तो एफडीआई इवॉल्व एक्वायरिंग अ सिग्निफिकेंट ओनरशिप स्टेक यूजुअली एटलीस्ट 10 पर इन फॉरेन कंपनी सबसे पहले जो स्टेक होता है मतलब जो ओनरशिप होगी वो सिग्निफिकेंट होनी चाहिए सिग्निफिकेंट ओनरशिप मतलब 10 पर या 10 पर से जदा ज्यादा का स्टेक एक्वायर मतलब जो शेयर्स हैं अगर हम शेयर्स की बात करें तो 10 पर तक शेयर उस कंपनी के एक्वायर किए होने चाहिए तभी वो चीज एफडीआई कहलाए गी
गिविंग द इन्वेस्टर कंट्रोल ओवर ऑपरेशन एंड डिसीजन मेकिंग प्रोसेस ऑफ द बिजनेस जिससे क्या हो जो इन्वेस्टर है उसका बिजनेस के डिसीजन मेकिंग प्रोसेस पर और ऑपरेशंस के ऊपर कंट्रोल आ जाए तो यह उसका पहला फीचर होता है ओनरशिप एंड कंट्रोल में कि 10 पर की ओनरशिप होनी चाहिए और बिजनेस के ऊपर डिसीजन मेकिंग के ऑपरेशन के ऊपर कंट्रोल होना चाहिए नेक्स्ट है लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट है तो एफडीआई इज अ लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट एज इट इवॉल्व स्टेबलाइजिंग अ लास्टिंग प्रेजेंस इन फॉरेन मार्केट ये जो एफडीआई है ये एक लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट है क्योंकि इससे फॉरेन
मार्केट के अंदर एक लॉन्ग लास्टिंग प्रेजेंस रहती है उस इंडिविजुअल या एंटिटी की सच एज सेटिंग अप सब्सिडियरी जॉइंट वेंचर और होली ओंड एंटरप्राइज और ये लॉन्ग ला लास्टिंग रिलेशनशिप किस तरीके से क्रिएट की जाती है या तो सब्सिडरी क्रिएट करके जॉइंट वेंचर क्रिएट करके या फिर होली ंड एंटरप्राइज मतलब किसी कंपनी को पूरे तरीके से परचेस कर लेना खरीद लेना नेक्स्ट हैगा ट्रांसफर ऑफ कैपिटल टेक्नोलॉजी एंड स्किल तो एफडीआई ब्रिंग नॉट ओनली फाइनेंशियल कैपिटल बट आल्सो टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एक्सपर्टीज एंड स्किल टू द होस्ट कंट्री व्हिच कैन हेल्प बूस्ट इकोनॉमी डेवलपमेंट एंड कंपीटेटिव एफडीआई से
हम सिर्फ फाइनल फाइनेंशियल कैपिटल ही इन्वेस्ट नहीं करते हैं बल्कि कि उस कंट्री को टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट की एक्सपर्टीज स्किल्स कुछ भी चीज प्रोवाइड करवाई जा सकती है वो चीज दी जाती है जिसकी मदद से क्या होता है उस कंट्री के इकोनॉमी का डेवलपमेंट होता है और कंपटिंग बढ़ती है नेक्स्ट हैगा पोटेंशियल फॉर ग्रोथ तो एफडीआई कैन स्टिम्युलेट इकोनॉमिक ग्रोथ इन द होस्ट कंट्री बाय क्रिएटिंग अ जॉब इंक्रीजिंग प्रोडक्टिविटी फोस्टरिंग इनोवेशन एंड इंप्रूविंग इंफ्रास्ट्रक्चर एफडीआई क्या करता है इकोनॉमी की ग्रोथ बढ़ाता है होस्ट कंट्री के अंदर क्या करता है है जॉब्स को क्रिएट करता है होस्ट
कंट्री क्या होती है जिस कंट्री के अंदर पैसा इन्वेस्ट करहा है तो होस्ट कंट्री के अंदर जॉब्स क्रिएट करता है प्रोडक्टिविटी इंक्रीज करता है इनोवेशंस को फोस्टर करता है और इंफ्रास्ट्रक्चर को भी इंप्रूव करता है नेक्स्ट है रिस्क एंड रिवर्ड तो एफडीआई इवॉल्व रिस्क सच एज पॉलिटिकल इंस्टेबिलिटी रेगुलेटरी चेंज एंड इकोनॉमिक फ्लक्ट एशन इन द होस्ट कंट्री एफडीआई के अंदर रिस्क और रिवॉर्ड दोनों चीजें होती है रिस्क किस चीज का होता है पॉलिटिकल इंस्टेबिलिटी आ जाए या फिर रेगुलेशंस में चेंज आ जाए इकोनॉमी के अंदर इकोनॉमिक फैक्टर है उनके अंदर फ्लकचुएशन आ जाए तो यह
सारे फस्ट कंट्री के अंदर रिस्क इवॉल्व हो सकते हैं हाउ एवर इट आल्सो ऑफर पोटेंशियल रिवॉर्ड इन टर्म ऑफ प्रॉफिट मार्केट एक्सेस एंड डायवर्सिफिकेशन लेकिन इसके कुछ फायदे भी हैं रिवार्ड्स भी मिलते हैं जैसे कि प्रॉफिट हो गया मार्केट की एक्सेस मिल जाती है उस कंट्री की और डायवर्सिफिकेशन हो जाता है इजली ठीक है नेक्स्ट आता है आपका टॉपिक जो है बेनिफिट ऑफ एफडीआई ये तो हमने पढ़े कि फीचर्स क्या-क्या होते हैं अब एफडीआई से फायदा क्या-क्या होता है कंट्री को तो इकोनॉमिक ग्रोथ तो एफडीआई कैन स्टिम्युलेट इकोनॉमिक ग्रोथ इन द होस्ट कंट्री बाय क्रिएटिंग
जॉब इंक्रीजिंग प्रोडक्टिविटी फोस्टरिंग इनोवेशन एंड इंप्रूविंग इंफ्रास्ट्रक्चर एफडीआई की मदद से क्या होता है जो होस्ट कंट्री होती है उसके अंदर जॉब्स क्रिएट होती हैं प्रोडक्टिविटी बढ़ती है इनोवेशंस बढ़ती हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर में भी इंप्रूवमेंट आती है तो यह बेनिफिट हो गया होस्ट कंट्री के लिए नेक्स्ट है जॉब क्रिएशन तो एफडीआई ऑफ लीड टू क्रिएशन ऑफ न्यू जॉब इन द होस्ट कंट्री बोथ डायरेक्टली थ्रू एंप्लॉयमेंट इन फॉरेन न एंटरप्राइज एंड इनडायरेक्टली थ्रू सप्लाई चन ट सपोर्ट सर्विसेस एफडीआई की मदद से क्या होता है जो होस्ट कंट्री होता है होती है उसके अंदर जॉब भी क्रिएट
होती है अब जॉब दो तरीके से क्रिएट होती है या तो जो एफडीआई की मदद से एंटरप्राइज स्टेबलाइज करी गई है उसके अंदर डायरेक्टली जॉब दे देना या फिर इनडायरेक्टली जॉब देना वो किस तरीके से तो सप्लाई चेन और डिस्ट्रीब्यूशन की सर्विस लेना किसी वहां के इंडिविजुअल से तो वो कहलाता है आपका इनडायरेक्टली जॉब क्रिएट करना ठीक है नेक्स्ट हैगा ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी एंड स्किल्स तो मल्टीनेशनल कॉरपोरेशंस एमएनसी दैट एंगेज इन एफडीआई ब्रिंग विद देम एडवांस टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एक्सपर्टीज एंड बेस्ट प्रैक्टिस दैट कैन बेनिफिट लोकल फर्म एंड इंडस्ट्री अब किसी कंट्री में एफडीआई की इन्वेस्टमेंट
हुई है तो वो जो मल्टीनेशनल कंपनी है जो उस कंट्री में अपना बिजनेस स्टेबलाइज करेगी वो अपने फाइनेंशियल कैपिटल के साथ-साथ वहां पर टेक्नोलॉजी जो एडवांस टेक्नोलॉजी है वो भी लेकर आएगी मैनेजमेंट की एक्सपर्टीज लाएगी सारे बेनिफिट इसके किसे भी मिलेंगे वहां की जो लोकल फर्म और इंडस्ट्री है उन्हें भी इन सार चीजों का बेनिफिट मिलेगा उन सबको भी इसकी एक्सेस मिल पाएगी द ट्रांसफर ऑफ नॉलेज एट स्किल कैन हेल्प इनं द होस्ट कंट्रीज टेक्नोलॉजिकल कैपेबिलिटीज एंड इंप्रूव इट्स ओवरऑल कंपट इससे क्या होगा जो नॉलेज एंड स्किल है उसके ट्रांसफर से जो होस्ट कंट्री आएगी
उसकी भी कैपेबिलिटीज इंप्रूव होंगी और जो ओवरऑल कंपट है वह इंक्रीज हो जाएगी होस्ट कंट्री की तो ये आपके बेनिफिट्स होते हैं एफडीआई के नेक्स्ट है इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट तो एफडीआई कैन कंट्रीब्यूट टू डेवलपमेंट ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर इन द होस्ट कंट्री एज फॉरेन इन्वेस्टर में इन्वेस्ट इन बिल्डिंग और अपग्रेडिंग फैसिलिटी सच एज फैक्ट्रीज ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क यूटिलिटीज एंड टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम एफडीआई क्या करता है जो होस्ट कंट्री है उसके अंदर इंफ्रास्ट्रक्चर को भी डेवलप करता है जो एफडीआई के फॉरेन इन्वेस्टर्स होते हैं वह बिल्डिंग्स क्रिएट करते हैं होस्ट कंट्री के अंदर अपग्रेड करते हैं फैसिलिटी को फैक्ट्रीज स्टेबलाइज करते
हैं ट्रांसपोर्टेशन को इंप्रूव करते हैं नेटवर्क यूटिलिटीज करते हैं टेलीकम्युनिकेशन के सिस्टम को स्टेबलाइज करते हैं तो इससे क्या होता है इंफ्रास्ट्रक्चर का भी डेवलपमेंट होता है होस्ट कंट्री के अंदर नेक्स्ट हैगा एक्सेस टू ग्लोबल मार्केट तो एफडीआई प्रोवाइड लोकल फार्म इन द होस्ट कंट्री विद एक्सेस टू ग्लोबल मार्केट थ्रो लिंकेज टू एमएनसी एफडीआई क्या करता है जो लोकल फार्म होती है होस्ट कंट्री की उनकी भी लिंकेज क्रिएट करवा देता है ग्लोबल मार्केट के साथ एमएनसी की मदद से दिस कैन हेल्प लोकल बिजनेस एक्सपें देयर मार्केट रीच इंक्रीज एक्सपोर्ट एंड इंटीग्रेट इनटू वैल्यू चैन इससे
क्या होता है जो लोकल बिजनेस होते हैं उनकी मार्केट रीच एक्सपेंड हो जाती है बढ़ जाती है उनका जो एक्सपोर्ट हैगा वह इंक्रीज हो जाता है और ग्लोबल वैल्यू चेन के अंदर वह इंटीग्रेट हो जाते हैं ठीक है नेक्स्ट आता है हमारा इंक्रीजड टैक्स रेवेन्यू तो एफडीआई के जनरेट एडिशनल टैक्स रेवेन्यू फॉर द होस्ट कंट्री थ्रो कॉर्पोरेट टैक्स एफडीआई क्या करते हैं एडिशनल टैक्स रेवेन्यू जनरेट करते हैं होस्ट कंट्री के अंदर किसकी मदद से कॉरपोरेट टैक्स प्रोवाइड करवा के एंप्लॉयमेंट टैक्स प्रोवाइड करवा के और कई सारे इनडायरेक्ट टैक्स अब जब एफडीआई हुआ है मतलब इन्वेस्टमेंट
हुई है तो रेवेन्यू भी जनरेट होगा रेवेन्यू जनरेट होगा तो उन फॉरेन इन्वेस्टर्स को उसी कंट्री के अंदर उस रेवेन्यू के ऊपर टैक्स देना पड़ेगा दिस कैन हेल्प फंड पब्लिक सर्विस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट एंड सोशल प्रोग्राम तो इससे क्या होता है गवर्नमेंट का रेवेन्यू इंक्रीज हो जाता है जो टैक्स से आता है और उन्हें वो पब्लिक सर्विसेस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और सोशल प्रोग्राम्स में इन्वेस्ट कर पाती है फिर गवर्नमेंट अच्छे से ठीक है नेक्स्ट हैगा डावर्स ऑफ इकोनॉमी तो एफडीआई कैन हेल्प डायवर्सिफाई द होस्ट कंट्रीज इकोनॉमी बाय इंट्रोड्यूजिंग न्यू इंडस्ट्री टेक्नोलॉजी एंड प्रोडक्ट एफडीआई की मदद से
क्या होता है जो होस्ट कंट्री होती है उसकी जो इकोनॉमी होती है वह डायवर्सिफाई हो पाती है ग्लोबल मार्केट के अंदर नई टेक्नोलॉजी और नए-नए प्रोडक्ट की मदद से दिस डायवर्सिफिकेशन कैन रिड्यूस डिपेंडेंस ऑन फ्यू सेक्टर्स और मार्केट मेकिंग द इकोनॉमी मोर रिलायंट रिजलट टू एक्सटर्नल शॉक इससे क्या होता है डायवर्सिफिकेशन से जो पहले डिपेंडेंस हुआ करती थी कुछ सेक्टर या मार्केट के ऊपर लोकल जो इंडस्ट्रीज होती है उनकी वो डिपेंडेंस खत्म हो जाती है क्योंकि अब उनके पास एक्सटर्नल अल्टरनेटिव होते हैं उन सारी चीजों के जिनकी वजह से उन्हें पहले डिपेंडेंस रहना पड़ता था
ठीक है तो यह आपके बेनिफिट हो गए कि एफडीआई के क्या क्या बेनिफिट हो जाते हैं होस्ट कंट्री के लिए फिर आता है आपका ड्रॉ बैक्स क्या-क्या होते हैं एफडीआई के कि फॉरन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के क्या-क्या नुकसान होते हैं तो डिपेंडेंस ऑन फॉरेन इन्वेस्टर तो होस्ट कंट्री दैट हैवली रिलाई ऑन एफडीआई में बिकम डिपेंडेंट ऑन फॉरेन इन्वेस्टर फॉर कैपिटल टेक्नोलॉजी एक्सपर्टीज एंड मार्केट एक्सेस होस्ट कंट्री ऐसी होस्ट कंट्री जो कि बहुत ज्यादा एफडीआई के ऊपर डिपेंड करती हैं इससे क्या होता है उनकी डिपेंडेंस बढ़ जाती है फॉरेन इन्वेस्टर के ऊपर कि इस चीज से रिलेटेड
कि हां अब यह जो फॉरेन इन्वेस्टर है वो हमें कैपिटल प्रोवाइड करेंगे टेक्नोलॉजी प्रोवाइड करेंगे एक्सपर्टीज प्रोवाइड करेंगे और मार्केट एक्सेस प्रोवाइड करेंगे तो ये डिपेंडेंस बढा देता है उन कंट्रीज में जहां पर वो कंट्रीज सिर्फ एफडीआई के ऊपर डिपेंड रिलाई करती हो तो वच कैन लीड टू वल्नरेबल इफ द इन्वेस्टर डिसाइडेड टू विथड्रावल फ्रॉम द कंट्री तो इससे क्या होता है फिर वल्नरेबल बढ़ जाती है कि अगर इन्वेस्टर ने यह डिसीजन ले लिया कि वो इस चीज से विड्रॉ करेगा या उस कंट्री से अपनी एफडीआई को खत्म करेगा तो फिर वो उस कंट्री के
लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक हो जाता है फिर गा लॉस्ट ऑफ सोवर निटी तो एफडीआई में रेज कंसर्न अबाउट लॉज ऑफ सोवर निटी एंड कंट्रोल ओवर की इंडस्ट्री रिसोर्स इंफ्रास्ट्रक्चर और स्ट्रेटेजिक सेक्टर एज फॉरेन इन्वेस्टर में इन्फ्लुएंस गवर्नमेंट पॉलिसी रेगुलेशन और डिसीजन मेकिंग प्रोसेस टू प्रोटेक्ट देयर इंटरेस्ट एफडीआई से क्या होता है जो सोवर निटी होती है कंट्री की वो लॉस्ट होने का डर रहता है और जो ऐसी इंडस्ट्रीज हैं जिनके ऊपर उस कंट्री का कंट्रोल होना चाहिए उसके ऊपर फॉरेन इन्वेस्टर का कंट्रोल हो जाता है इंडस्ट्रीज रिसोर्सेस इंफ्रास्ट्रक्चर और स्ट्रेटेजिक सेक्टर्स के ऊपर इससे क्या
होता है फिर वोह जो फॉरेन इन्वेस्टर है वह गवर्नमेंट की पॉलिसी रेगुलेशन और डिसीजन मेकिंग को भी इन्फ्लुएंस कर सकता है तो यह इसका सेकंड ड्रॉबैक हो जाता है नेक्स्ट है अनइक्वल डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ बेनिफिट्स तो एफडीआई में रिजल्ट इन अनइक्वल डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ बेनिफिट विद इन द होस्ट कंट्री विथ सर्टेन रिलीजन इंडस्ट्री और सेगमेंट ऑफ द पॉपुलेशन बेनिफिटिंग मोर देन लीडिंग टू इनकम इनक्व सोशल डिस्पैरेज इंबैलेंस क्या बोला है जो एफडीआई है उससे क्या होता है अनइक्वल डिस्ट्रीब्यूशन होता है होस्ट कंट्री के अंदर कुछ ही रीजंस में कुछ ही इंडस्ट्रीज और कुछ ही पॉपुलेशन की सेगमेंट्स
को उसका बेनिफिट मिल पाता है इसका आपका एफडीआई का सभी को इसका बेनिफिट नहीं मिल पाता है जिससे क्या हो है फिर इ इनकम इनक्व क्रिएट हो जाती है डिस्पैरेज आ जाती हैं और रीजनल इंबैलेंस क्रिएट हो जाता है कंट्री के अंदर ठीक है अब नेक्स्ट हैगा कंपटीशन विद लोकल बिजनेस तो फॉरेन कंपनी इन्वेस्टिंग इन होस्ट कंट्री थ्रू एफडीआई में कंपीट विद लोकल बिजनेस पोटेंशियली लीडिंग टू मार्केट डोमिनेंस प्राइस व डिस्प्लेसमेंट ऑफ डोमेस्टिक फर्म लॉस ऑफ मार्केट शेयर और इरोजन ऑफ लोकल इंडस्ट्री अब जब फॉरेन कंपनी होस्ट कंट्री के अंदर इन्वेस्ट करती है तो इससे
क्या होता है एफडीआई की वजह से कंपटीशन बढ़ जाता है लोकल बिजनेसेस का जिसकी वजह से फॉरेन कंपनी क्या कर पाती है मार्केट को डोमिनेंट कर लेती हैं प्राइस वर कर पाती है जो डोमेस्टिक फर्म है उन्हें डिस्प्लेस कर देती हैं मार्केट शेयर खत्म कर देती हैं और जो लोकल इंडस्ट्री है उनको इरोड कर देती हैं ठीक है नेक्स्ट हैगा एनवायरमेंटल एंड सोशल इंपैक्ट तो एफडीआई प्रोजेक्ट कैन हैव एनवायरमेंटल एंड सोशल इंपैक्ट सच एज पोल्यूशन डिफॉरेस्टेशन डिस्प्लेसमेंट ऑफ कम्युनिटीज लेबर लाइट वॉल्यूशन वायलेशंस ऑफ नेचुरल रिसोर्सेस रेजिंग कंसर्न अबाउट सस्टेनेबिलिटी एंड कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फिर क्या
बोला है कि जो एनवायरमेंटल जो एफडीआई प्रोजेक्ट स्टेबलाइज होते हैं कंट्रीज होस्ट कंट्री के अंदर उससे क्या होता है एनवायरमेंटल एंड सोशल इंपैक्ट बढ़ जाते हैं डिफॉरेस्टेशन होता है पोलूशन बढ़ता है कम्युनिटीज को डिस्प्लेस कर कर दिया जाता है प्रोजेक्ट्स लगाने के लिए लेबर राइट्स का वायलेशन होता है नेचुरल रिसोर्सेस का एक्सप्लोइटेशन होता है जिसकी वजह से क्या-क्या होता है फिर आपकी सस्टेनेबिलिटी और कॉरपोरेट सोशल रिपस बिलिटी के खतरे बढ़ जाते हैं नेक्स्ट हैगा टेक्नोलॉजिकल डिपेंडेंस तो होस्ट कंट्री दैट रिलाई ऑन एफडीआई फॉर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मे बिकम डिपेंडेंट ऑन फॉरेन टेक्नोलॉजी पेटेंट ऑन नो हाउ
लिमिटिंग देयर एबिलिटी टू डेवलप इंडिजिनियस कैपेबिलिटीज इनोवेट और कंपीट इन ग्लोबल मार्केट क्या बोला है जो होस्ट कंट्री होती है जो एफडीआई के ऊपर ज्यादा रिलाई कर जाती है वह डिपेंडेंट हो जाती है फॉरेन इन्वेस्टर्स के ऊपर कि जो फॉरेन टेक्नोलॉजी है पेटेंट है नो हाउ है वो फॉरेन के ऊपर हो जाती है यह अपनी खुद की सारी चीजें इसके वाली भूल जाते हैं जिसकी वजह से क्या होता है फिर यह अपनी कोई इंडिजन अस कैपेबिलिटीज इनोवेशन से डेवलप नहीं कर पाते हैं और यह ग्लोबल मार्केट के अंदर भी कंपीट नहीं कर पाते हैं आपके
नेक्स्ट हैगा पॉलिटिकल रेस तो एसडीआई कैन एक्सपोज टू पॉलिटिकल रिस्क सच एज चेंज इन गवर्नमेंट पॉलिसी रेगुलेशन टैक्सेशन ट्रेड एग्रीमेंट और जिओल पॉलिटिकल टेंशंस व्हिच मे अफेक्ट द स्टेबिलिटी प्रॉफिटेबिलिटी और कंटिन्यूटी ऑफ फॉरेन इन्वेस्टमेंट इन द होस्ट कंट्री एफडीआई क्या है एफडीआई क्या करती है पॉलिटिकल रिस्क भी होता है एफडीआई को क्योंकि जोब गवर्नमेंट की पॉलिसीज में चेंजेज आता है रेगुलेशंस में चेंजेज होते हैं टैक्सेशन ट्रेड एग्रीमेंट इन सारी चीजों में चेंजेज होते हैं तो इससे क्या होता है जो होस्ट कंट्री हैगी उसमें जो फॉरेन इन्वेस्टमेंट हो रखी होती है उसकी स्टेबिलिटी प्रॉफिटेबिलिटी और कंटिन्यूटी
इन तीनों चीजों पर इंपैक्ट पड़ता है और अगर नेगेटिव इंपैक्ट ज्यादा हो जाता है तो फिर इन्हें एग्जिट भी करना पड़ता है किससे होस्ट कंट्री से तो यह भी इसका एक ड्रॉबैक हो जाता है आपका ठीक है तो यह हमने बात कर लि आपके बेनिफिट और ड्रॉबैक्स के बारे में कि जो फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट होती है उनके क्या-क्या बेनिफिट क्या-क्या ड्रॉबैक्स होते हैं अब आता है हमारा नेक्स्ट कांसेप्ट की जो फॉरेन इन्वेस्टमेंट होती है उसके क्या-क्या टाइप्स होते हैं मतलब किन-किन तरीकों से दूसरी कंट्रीज के अंदर इन्वेस्टमेंट आपकी की जा सकती है तो सबसे पहली
आती है आपकी ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट तो ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट रेफर्स टू एस्टेब्लिशमेंट ऑफ न्यू बिजनेस और फैसिलिटी इन फॉरेन कंट्री बाय अ फॉरेन इन्वेस्टर यह क्या है एक तरीका आएगा न्यू बिजनेस फैसिलिटी स्टेबलाइज करने का फॉरेन कंट्री के अंदर फॉरेन इन्वेस्ट इन्वेस्टर के द्वारा तो वो चीज कहलाती है आपकी ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट दिस टाइप ऑफ एफडीआई इवॉल्व बिल्डिंग न्यू इंफ्रास्ट्रक्चर सेटिंग अप प्रोडक्शन फैसिलिटी एंड हायरिंग लोकल एंप्लॉई फ्रॉम स्क्रैच इसके अंदर क्या होता है जो इन्वेस्टर होता है वोह अपना बिजनेस स्ट्रक्चर स्टेबलाइज करता है फॉरेन कंट्री के अंदर नई प्रोडक्शन फैसिलिटी सेट करता है और
वहीं के जो लोकल एंप्लॉई हैं उन्हें जॉब्स प्रोवाइड करवाता है ग्रीनफील्ड इन्वेस्टमेंट टिपिकली इवॉल्व अ सिग्निफिकेंट कैपिटल आउट ले एन लॉन्ग टर्म कमिटमेंट बाय द फॉरेन इन्वेस्टर टू स्टेबलाइज द प्रेजेंस इन न्यू मार्केट इसके अंदर जो कैपिटल आउटलेट ज्यादा एक हाई अमाउंट में होता है सिग्निफिकेंट अमाउंट में होता है और जो फॉरेन इन्वेस्टर होते हैं उनकी लॉन्ग टर्म कमिटमेंट होती है मार्केट में बने रहने की तो यह कहलाती है आपकी ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट इसकी इंपॉर्टेंस क्या है तो सबसे पहले आती है आपकी मार्केट शेयर ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट अलाउ कंपनीज टू एंटर न्यू मार्केट एंड एक्सपेंड
देयर ग्लोबल फुटप्रिंट ग्रीनफील्ड इन्वेस्टमेंट क्या अलाव करती है कंपनी की कि न्यू मार्केट में एंटर कर सके और अपने कदम वहां पर भी फैला सके ग्लोबल मार्केट में बाय स्टेबलाइजिंग अ न्यू बिजनेस इन फॉरेन कंट्री और किसकी मदद से फॉरेन कंट्री के अंदर न्यू बिजनेस स्टेबलाइज करके कंपनी कैन टैप इनटू लोकल रिसोर्सेस एक्सेस कस्टमर सेगमेंट एंड डायवर्सिफाई देयर रेवेन्यू क्या कर पाती हैं जो फॉरेन कंपनी होती है फॉरेन कंट्री में बिजनेस स्टेबलाइज करके एक तो लोकल रिसोर्सेस की उन्हें एक्सेस मिल जाती है उस कंट्री के नए कस्टमर सेगमेंट मिल जाता है और अपने रेवेन्यू को
भी वह डायवर्सिफाई अच्छे से कर पाते हैं नेक्स्ट हैगा आपका कंट्रोल एंड फ्लेक्सिबल तो ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट प्रोवाइड फॉरेन इन्वेस्टर विद फुल कंट्रोल ओवर द ऑपरेशन मैनेजमेंट एंड डिसीजन मेकिंग प्रोसेस ऑफ न्यू बिजनेस ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट के अंदर जो फॉरेन इन्वेस्टर होते हैं उनका जो ऑपरेशन मैनेजमेंट और डिसीजन मेकिंग का प्रोसेस होता है उसके ऊपर पूरा कंट्रोल उन्हीं का होता है किसी की भी उसके अंदर इंवॉल्वमेंट नहीं होती है नेक्स्ट हैगा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर तो ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट इनेबल द ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी नॉलेज एंड बेस्ट प्रैक्टिस फ्रॉम इन्वेस्टमेंट इन कंपनी टू होस्ट कंट्री ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट
क्या अलाव करती है इनेबल करती है कि टेक्नोलॉजी का नॉलेज का और जो प्रैक्टिस हैगी उसका ट्रांसफर हो सके होस्ट कंट्री के अंदर किसके द्वारा जो कंपनी या जो इंडिविजुअल बिजनेस को स्टेबलाइज कर रहा है होस्ट कंट्री के अंदर उसकी मदद से दिस कैन हेल्प इंस द लोकल कैपेबिलिटी इंप्रूव प्रोडक्टिविटी एंड स्टिमुलेशन इनोवेशन इन द इकोनॉमी इससे क्या होता है जो होस्ट कंट्री हैगी उसकी लोकल कैपेबिलिटीज बढ़ जाती हैं प्रोडक्टिविटी इंप्रूव हो जाती है और जो उसकी इकोनॉमी है उसके अंदर भी इनोवेशन आ जाता है नेक्स्ट हैगा जॉब क्रिएशन तो ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट क्रिएट एंप्लॉयमेंट
अपॉर्चुनिटी फॉर लोकल रेजिडेंट बाय हायरिंग वर्क फोर्स एंड सपोर्ट इंसलर इंडस्ट्री सच एज सप्लायर सर्विस प्रोवाइडर एंड डिस्ट्रीब्यूटर जो ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट है उसकी मदद से क्या होता है जॉब्स भी भी क्रिएट होती हैं उस कंट्री के अंदर जॉब्स कैसे क्रिएट होती है अब बिजनेस स्टेबलाइज कराया तो वहां के लोकल पीपल्स को ही उस बिजनेस में एंप्लॉई बनाया जाता है उस एंटरप्राइज में रखा जाता है काम करने के लिए यह तो हो गया डायरेक्ट तरीका जॉब क्रिएट करने का इनडायरेक्ट तरीके किस तरीके से जॉब क्रिएट करी जाती है तो वहां के सप्लायर्स की मदद ली
जाती है डिस्ट्रीब्यूटर्स की मदद ली जाती है तो इनकी मदद से उन्हें इनडायरेक्ट जॉब भी क्रिएट करी जाती है नेक्स्ट हैगा लॉन्ग टर्म ग्रोथ तो ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट आर टिपिकली सस्टेनेबल मेड विद लॉन्ग टर्म पर्सपेक्टिव एमिंग टू बिल्ड सस्टेनेबल ऑपरेशन एंड स्टेबलाइज द स्ट्रांग प्रेजेंस इन द मार्केट ओवर टाइम जो ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट करी जाती है वह किस व्यू के साथ करी जाती है एक लॉन्ग टर्म पर्सपेक्टिव के साथ करी जाती है जिसके अंदर क्या होता है एक सस्टेनेबल ऑपरेशन को डेवलप करना और स्टेबलाइज करना और अपनी प्रेजेंस बनाकर रखना मार्केट के अंदर इसका एम
होता है दिस कैन लीड टू स्टेडी रेवेन्यू ग्रोथ इंक्रीजड मार्केट शेयर एंड इनं कंपट फॉर द इन्वेस्टिंग कंपनी यह इससे क्या होता है जो रेवेन्यू होता है वह बढ़ जाता है मार्केट का शेयर इंक्रीज हो जाता है और कप कंपट वने बन जाती है इन्वेस्टिंग कंट्री की यह तो हमने देख लिया कि आपके इसके फीचर्स क्या-क्या होते हैं या बेनिफिट एक तरीके से हम बोल सकते हैं लेकिन डिसएडवांटेज क्या-क्या इसके नुकसान भी होते हैं तो नंबर वन हैगा हाई इनिशियल कॉस्ट तो ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट रिक्वायर सिग्निफिकेंट कैपिटल इन्वेस्टमेंट टू बिल्ड अ न्यू इंफ्रास्ट्रक्चर एक्वायर लैंड
परचेस इक्विपमेंट एंड हायर एंप्लॉई ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट के अंदर जो इनिशियल कॉस्ट होती है बिजनेस को स्टेबलाइज करने की वह बहुत ज्यादा हाई होती है क्योंकि पूरा इ स्ट्रक्चर डेवलप करना होता है लैंड को एक्वायर करना होता है नए इक्विपमेंट खरीदने होते हैं नए-नए एंप्लॉयज को हायर करना होता है तो यह सारी बहुत ज्यादा कॉस्टली होते हैं द अपफ्रंट कॉस्ट कैन बी सब्सटेंशियल एंड मेक टाइम टू जनरेट रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट और इसमें जो यह कॉस्ट होती है इनिशियल कॉस्ट वो बहुत ज्यादा हाई होती है और वहीं इसका रिटर्न होता है वह हमें अभी जल्दी से
नहीं मिलता एक लॉन्ग टर्म में हमें इसका अच्छा रिटर्न मिलना शुरू होता है नेक्स्ट डिसएडवांटेज है आपका रिस्क एंड अनसर्टेनटीज तो ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट इवॉल्व रिस्क रिलेटेड टू मार्केट कंडीशन रेगुलेटरी चेंजेज पॉलिटिकल इंस्टेबिलिटी करेंसी फ्लकचुएशन एंड ऑपरेशनल चैलेंज इन न्यू एनवायरमेंट ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट के अंदर रिस्क भी इवॉल्व होता है किस चीज से रिलेटेड मार्केट की कंडीशन से रिलेटेड रेगुलेशन रेगुलेटरी चेंजेज की से रिलेटेड पॉलि पॉलिटिकल इंस्टेबिलिटी से रिलेटेड करेंसी में फ्लक्ट एशन से रिलेटेड और ऑपरेशन चैलेंज से रिलेटेड रिस्क इवॉल्व होता है फॉरेन इन्वेस्टर में फेस अनसर्टेनटीज एंड ऑब्स्ट कल दैट कुड इंपैक्ट द
सक्सेस ऑफ देयर इन्वेस्टमेंट जो फॉरेन इन्वेस्टर होते हैं वो अनसर्टेनटीज फेस करते हैं ऑब्स्ट कल फेस करते हैं जिससे क्या होता है उनकी इन्वेस्टमेंट पर इंपैक्ट पड़ सकता है इन सारे रिस्क की वजह से नेक्स्ट हैगा टाइम एंड एफर्ट तो स्टेबलाइजिंग अ न्यू बिजनेस फ्रॉम स्क्रैच थ्रू ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट कैन बी टाइम कंजूमिंग एंड रिसोर्स इंटेंसिव अब बिल्कुल स्क्रैच से एक नया बिजनेस स्टेबलाइज करना किसी भी कंट्री के अंदर एक बहुत ज्यादा टाइम कंजूमिंग और रिसोर्स एक् प्रोसेस होता है आपका इट रिक्वायर केयरफुल प्लानिंग कोऑर्डिनेशन एंड एग्जीक्यूशन ऑफ वेरियस एक्टिविटीज सच एज परमिट सिक्योरिंग लाइसेंस
एंड बिल्डिंग रिलेशनशिप विद लोकल स्टेकहोल्डर इसके अंदर क्या होता है जो यह सारी चीजें करनी होती हैं वह सारी चीजें एक अच्छी प्लानिंग कोऑर्डिनेशन एंड एग्जीक्यूशन के बाद ही परफॉर्म करनी होती है कोई भी एक्टिविटी अगर करनी है जैसे कि अगर परमिट्स जो लेने हैं क्या-क्या लाइसेंस लेने पड़ेंगे क्या-क्या रिलेशनशिप डेवलप करनी पड़ेगी लोकल स्टेकहोल्डर्स के साथ इन सारी चीजों से रिलेटेड प्लानिंग कोऑर्डिनेशन सारी चीजें आपको परफॉर्म करनी होती हैं नेक्स्ट हैगा लोकल कंपटीशन तो फॉरेन इन्वेस्टर एंटरिंग अ न्यू मार्केट थ्रू गीन ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट मे मे फेस कंपटीशन फ्रॉम स्टेबलाइज्ड लोकल कंपनी विद स्ट्रांग
प्रेजेंस ब्रांड रिकॉग्निशन एंड कस्टमर लॉयल्टी अब जरूरी नहीं है सभी कंट्रीज में छोटी छोटी इंडस्ट्रीज हो कुछ कंट्रीज होती हैं होस्ट कंट्रीज भी जिनके अंदर पहले से ही उस इंडस्ट्री में एक अच्छी जानी हुई कंपनी जिसका ब्रांड नेम होता है वह पहले से ही उस कंट्री के अंदर रन हो रही होती है तो जो फॉरेन इन्वेस्टर होते हैं जो अपनी बिजनेस को स्टेबलाइज करना चाहते हैं उनके सामने भी एक कंपटीशन क्रिएट हो जाता है उस एजिस्टिफाई लोकल नॉम रेगुलेशन एंड बिजनेस प्रैक्टिस क्या बोला है अब एक न्यू कंट्री में जाकर आप अपना बिजनेस स्टेबलाइज करना
चाहते हैं तो आपको कल्चरल डिफरेंस भी फेस करना पड़ेगा लैंग्वेज बैरियर्स भी होंगे वहां पर लीगल कॉम्प्लेक्टेड करना पड़ेगा लोकल नॉर्म्स के साथ रेगुलेशंस के साथ और बिजनेस प्रैक्टिस के साथ जो कि काफी ज्यादा डिफिकल्ट चीजें होती हैं तो यह आपके ड्रॉबैक्स हो जाते हैं फॉरेन डायरेक्ट वो ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट के किसी कंट्री के अंदर ठीक है जो नेक्स्ट तरीका आएगा आपका फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट का वह आता है आपका मर्जर या फिर एक्विजिशन तो मर्जर क्या होता है सबसे पहले सबसे पहले मर्जर को समझेंगे अ मर्जर इज अ स्ट्रेटेजिक बिजनेस कॉमिनेशन वेयर टू और मोर
कंपनी कम टुगेदर टू फॉर्म अ न्यू एंटिटी मर्जर और एक्विजिशन दोनों का मतलब एक ही होता है इसके अंदर दो या दो से ज्यादा कंपनी कंबाइन होती है और एक न्यू एंटिटी फॉर्म करती है इन मर्जर द कंपनी इवॉल्व टिपिकली एग्री टू कंबाइन देयर ऑपरेशन एसेट एंड ो टू क्रिएट अ स्ट्रांग और मोर कॉम्पिटेटिव एंटिटी मर्जर के अंदर जो एंटिटीज कंबाइन होती हैं वह किस ऑब्जेक्टिव से होती हैं कि हां हम एक बहुत ज्यादा स्ट्रांग एंटिटी क्रिएट कर लेंगे मिलकर जो कि अभी हम अलग-अलग हैं तो क्रिएट करना पॉसिबल नहीं है तो इसलिए वह मर्ज
होती हैं मर्जर कैन क्लासिफाइड एज आदर हॉरिजॉन्टल मर्जर वर्टिकल मर्जर और कंग्लोमरेशन मर्जर मर्जर को हम तीन कैटेगरी में क्लासिफाई करते हैं हॉरिजॉन्टल मर्जर वर्टिकल मर्जर या फिर कंग्लोमरेशन मर्जर हॉरिज मर्जर क्या होता है सेम इंडस्ट्री के अंदर दो कंपीटीटर ंगे वो आपस में कंबाइन हो जाते हैं तो उस चीज को कहा जाता है हॉरिजॉन्टल मर्जर वर्टिकल मर्जर क्या होता है दो कंपनी जो अलग-अलग स्टेज पर है सप्लाई चेन में वह आपस में कंबाइन हो जाती है तो वो कहलाता है आपका वर्टिकल मर्जर और कंग्लोमरेशन मर्जर क्या होता है ऐसा मर्जर जिसके अंदर जो दो
कंपनीज है वोह आपस में किसी तरीके से रिलेट नहीं करती हैं लेकिन कंबाइन हो जाती हैं तो उस चीज को आपका क्या कहा जाता है उस चीज को आपका कंगलो रेट मर्जर कहा जाता है ठीक है वहीं दूसरी साइड में आपका आएगा एक्विजिशन एक्विजिशन क्या होता है इट ऑकर व्हेन वन कंपनी परचेज अनदर कंपनी आइर थ्रो बाइंग अ मेजोरिटी स्टेक और एक्वायरिंग ऑल इट्स एसेट एक्विजिशन क्या होता है यह एक तरीका है जिसके अंदर एक कंपनी दूसरी कंपनी को परचेज कर लेती है या तो उसका मेजॉरिटी स्टेक एक्वायर करके या फिर पूरा ही उसका स्टेक
एक्वायर करके एक्विजिशन कैन बी फ्रेंडली वे वेयर बोथ पार्टी एग्री टू डील और हॉस्टाइल्स कंपनी रेजिस्ट द एक्विजिशन जो यह एक्विजिशन हो सकता है यह दोनों तरीके का हो सकता है फ्रेंडली भी हो सकता है हॉस्टाइल्स भी हो सकता है अगर जिस कंपनी जो मतलब जो बड़ी कंपनी है वहस दूसरी कंपनी को एक्वायर करना चाहती है तो वह जो दूसरी कंपनी है वह एक्वायर होने में उसे कोई प्रॉब्लम नहीं है वह पर सेल होना चाहती है तो तो यह हो जाएगा फ्रेंडली टर्म है लेकिन वहीं अगर एक्विजिशन जबरदस्ती करा जाता है तो उसे कहा जाता
है हॉस्टाइल्स एक्विजिशन कैन हेल्प कंपनी एक् एंड देयर मार्केट प्रेजेंस डायवर्सिफाई देयर प्रोडक्ट ऑफर एंड गेन एक्सेस टू न्यू टेक्नोलॉजी और कैपेबिलिटीज एक्विजिशन से क्या होता है जो कंपनीज हैं उनका मार्केट शेयर बढ़ जाता है डायवर्सिफाई कर पाते हैं वह अपने प्रोडक्ट ऑफि को नई टेक्नोलॉजी और कैपेबिलिटी की उन्हें एक्सेस मिल जाती है ठीक है तो यह होता है आपका एक्विजिशन फर्स्ट टाइप का मर्जर है हॉरिजॉन्टल मर्जर तो अ हॉरिजॉन्टल मर्जर ऑकर व्हेन टू कंपनीज ऑपरेटिंग इन सेम इंडस्ट्री एंड ऑफि सेम और सिमिलर प्रोडक्ट और सर्विस कंबाइन देयर ऑपरेशन हॉरिजॉन्टल मर्जर क्या होता है ऐसी
दो कंपनियां जो सेम इंडस्ट्री में है और सिमिलर प्रोडक्ट ऑफर कर रही है या सिमिलर सर्विस प्रोवाइड कर रही हैं वो आपस में एक हो जाती हैं कंबाइन हो जाती हैं तो उस चीज को कहा जाता है आपका हॉरिजॉन्टल मर्जर नेक्स्ट आता है वर्टिकल मर्जर तो अब वर्टिकल मर्जर इंवॉल्व द कॉमिनेशन ऑफ कंपनी ऑपरेटिंग ए डिफरेंट स्टेज ऑफ सप्लाई चेन ऐसी दो कंपनियां दो जो सप्लाई चेन में दो लेवल्स पर है वो आपस में कंबाइन हो जाती हैं या तो आप अपने डिस्ट्रीब्यूटर को अपने साथ मिला लेते हैं या अपने रॉ मटेरियल सप्लायर को अपने
साथ मिला लेते हैं तो वो कहलाता है आपका वर्टिकल मर्जर नेक्स्ट आता है कंग्लोमरेशन मर्जर तो अ कंग्लोमरेशन मर्जर ओकर वन टू कंपनीज फ्रॉम अनरिलेटेड इंडस्ट्री मर्ज टू डायवर्सिफाई देयर बिजनेस इंटरेस्ट एंड रिड्यूस रिस्क ऐसी दो कंपनियां जो आपस में किसी तरीके से रिलेटेड नहीं थी ना बिजनेस से ना टेक्नोलॉजी से ना किसी चीज से वो आपस में कंबाइन हो जाती है किसलिए अपने बिजनेस को डायवर्सिफाई करने के लिए और अपने रिस्क को रिड्यूस करने के लिए तो उस चीज को कहा जाता है कंग्लोमरेशन मर्जर नेक्स्ट आता है प्रोडक्ट एक्सटेंशन मर्जर तो अ प्रोडक्ट एक्सटेंशन
मर्जर इज आल्सो नोन एज को जनरिक मर्जर हेयर टू कंपनीज दैट प्रोवाइड सेपरेट सर्विसेस टू द सेम कस्टमर बेस लाइक वाईफाई प्रोवाइडर एंड अ कंप्यूटर मैन्युफैक्चरर वर्क टुगेदर प्रोडक्ट एक्सटेंशन मर्जर क्या होता है ऐसा मर्जर इसे हम को जनरिक मर्जर भी कहते हैं इसके अंदर दो कंपनियां जो सेम कस्टमर को दो अलग-अलग सर्विसेस प्रोवाइड करवाती हैं वो आपस में कंबाइन हो जाए तो उन्हें कहा जाता है प्रोडक्ट एक्सटेंशन मर्जर जैसे कि एक वाईफाई सर्विस प्रोवाइडर और जो क क्यूटर मैन्युफैक्चरर है उनके जो कस्टमर है वो दोनों के सेम ही हैं तो वो दोनों अगर आपस
में कंबाइन होते हैं तो वो कहलाएगा आपका प्रोडक्ट एक्सटेंशन मर्जर नेक्स्ट आता है मार्केट एक्सटेंशन मर्जर तो कंपनीज दैट सेल द सेम आइटम बट कंप्लीट इन सेपरेट मार्केट ऑफर मर्ज टुगेदर अंडर दिस टाइप ऑफ मर्जर मार्केट एक्सटेंशन मर्जर क्या होता है ऐसी दो कंपनियां जो सेम आइटम सेल करती हैं लेकिन दो अलग-अलग मार्केट में सेल करती हैं उसे कहा जाता है अगर वो दोनों कंपनियां कंबाइन होती हैं तो वो कहलाएगा आपका मार्केट एक्सटेंशन मर्जर कंपनीज दैट मर्ज इन मार्केट एक्सटेंशन ट्रांजैक्शन वांट टू एक्सपेंड देयर क्लाइंट बाय गेनिंग एक्सेस टू अ लार्ज मार्केट जो यह कंपनीज
होती हैं वह किस लिए मर्ज होती हैं ताकि उन्हें एक लार्ज मार्केट का गेन मिल सके और वह अपने बिजनेस को ट्रांजैक्शंस को एक्सपेंड कर सके ठीक है नेक्स्ट आता है हमारा टॉपिक एडवांटेजेस ऑफ मर्जर एंड एक्विजिशन यह जो मर्जर एंड एक्विजिशन है उसके एडवांटेजेस क्या-क्या होते हैं तो नंबर वन पहला एडवांटेज होता है इकोनॉमी ऑफ स्केल तो मर्जर एंड एक्विजिशन कैन टू कॉस्ट सेविंग थ्रू इकोनॉमी ऑफ स्केल एज कंबाइंड ऑपरेशन मे रिजल्ट इन रिड्यूस डुप्लीकेशन ऑफ रिसोर्सेस स्ट्रीमलाइन प्रोसेस एंड इंक्रीज एफिशिएंसी मर्जर एंड एक्विजिशन से क्या होता है कॉस्ट की सेविंग होती है क्योंकि
जो ऑपरेशंस है वो कंबाइंड होकर चलते हैं जिससे रिसोर्सेस का डुप्लीकेशन कम होता है प्रोसेस स्ट्रीमलाइन रहते हैं और एफिशिएंसी बढ़ जाती है नेक्स्ट है इंक्रीजड मार्केट शेयर तो मर्जर एंड एक्विजिशन कैन हेल्प कंपनी एक्सपेंड देयर मार्केट प्रेजेंस एंड इंक्रीज मार्केट शेयर अलांग देम टू कंपीट मोर इफेक्टिवली एंड कैप्चर अ ल मार्केट बेस मर्जर एंड एक्विजिशन की मदद से कंपनी क्या कर पाती है अपनी प्रेजेंस को अपने मार्केट शेयर को बढ़ा पाती है एक्सपेंड कर पाती हैं और वह और ज्यादा इफेक्टिवली तरीके से कंपीट कर पाती हैं ग्लोबल मार्केट में और एक लार्ज कस्टमर बेस
को कैप्चर कर पाती हैं नेक्स्ट हैगा डायवर्सिफिकेशन तो मर्जर एंड एक्विजिशन कैन इनेबल कंपनी टू डायवर्सिफाई देयर प्रोडक्ट ऑफि कस्टमर सेगमेंट जियोग्राफिक रीच इंडस्ट्री एक्सपोजर रिड्यूजिंग रिस्क एंड एसिंग ग्रोथ अपॉर्चुनिटी मर्जर एंड एक्विजिशन से क्या होता है जो कंपनीज होती हैं वो अपने प्रोडक्ट जो जो ऑफर करती हैं उन्हें डायवर्सिफाई कर सकती हैं जो कस्टमर सेगमेंट है उनका उसे डायवर्सिफाई कर सकती हैं जो उनका ज्योग्राफिकल रीच है उसे डायवर्सिफाई कर सकती है अपनी इंडस्ट्री का जो एक्सपोजर है उसे बढ़ा सकती है अपने रिस्क को रिड्यूस कर सकती है और बहुत सारी जो ग्रोथ अपॉर्चुनिटी है
उन्हें गेन कर सकती हैं नेक्स्ट हैगा साइनर्स तो मर्जर एंड एक्विजिशन कैन क्रिएट सिनर्जी दैट रिजल्ट इन इंक्रीजड रेवेन्यू कॉस्ट सेविंग ऑपरेशनल एफिशिएंसी स्ट्रेटेजिक एडवांटेज दैट बेनिफिट द मर्ड एंटिटी एंड इट्स स्टेकहोल्डर साइनर्स का बेनिफिट मिलता है मतलब जब मर्जर एंड एक्विजिशन होता है तो साइनर्स क्रिएट होती हैं जो उनका म्यूचुअल वर्किंग होती है उससे क्या होता है उनका रेवेन्यू बढ़ जाता है कॉस्ट की सेविंग होती है ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ जाती है और उनको स्ट्रेटेजिक एडवांटेज मिल जाता है नेक्स्ट है एक्सेस टू न्यू टेक्नोलॉजी और कैपेबिलिटीज तो मर्जर एंड एक्विजिशन कैन प्रोवाइड कंपनीज विद एक्सेस
टू न्यू टेक्नोलॉजी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी एक्सपर्टीज और कैपेबिलिटीज दैट एनहांस देयर कंपीटेटिव पोजीशन एंड इनोवेशन पोटेंशियल मर्जर एंड एक्विजिशन से क्या होता है जो कंपनीज होती हैं उन्हें नई टेक्नोलॉजी की एक्सेस मिल जाती है इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की एक्सेस मिल जाती है एक्सपर्टीज आ जाती है जो उनकी कैपेबिलिटी है कंपट पोजीशन है वह बढ़ जाती है तो यह सारे आपके बेनिफिट हो जाते हैं न्यू मर्जर एंड एक्विजिशन से कि उनकी जो कैपेबिलिटीज है और न्यू टेक्नोलॉजी है वह बढ़ जाती है नेक्स्ट है इनाइट फाइनेंशियल परफॉर्मेंस तो मर्जर एंड एक्विजिशन कैन इंप्रूव फाइनेंशियल परफॉर्मेंस थ्रो इंक्रीजड रेवेन्यू जनरेशन
कॉस्ट रिडक्शन इंप्रूव्ड प्रॉफिटेबिलिटी एंड स्टेटन बैलेंस शीट मर्जर एंड एक्विजिशन से क्या होता है जो फाइनेंशियल परफॉर्मेंस होती है या पोजीशन होती है एक कंपनी की वो एनहांस हो जाती है इंप्रूव हो जाती है किस तरीके से क्योंकि उनका जो रेवेन्यू होता है वो बढ़ जाता है उनकी कॉस्ट होती है वो सेव होने लगती है रिड्यूस हो जाती है प्रॉफिटेबिलिटी इंप्रूव होती है और उनकी बैलेंस शीट स्ट्रेंथ एंड मजबूत हो जाती है ठीक है तो ये आपके एडवांटेजेस थे कि मर्जर एंड एक्विजिशन के आपके क्या-क्या एडवांटेजेस होते हैं नेक्स्ट टॉपिक हैगा डिसएडवांटेजेस क्या-क्या हैं एडवांटेजेस
तो हमने देख लिया क्या-क्या फायदे हैं लेकिन कुछ नुकसान भी होते हैं मर्जर एंड एक्विजिशन के जैसे कि इंटीग्रेशन चैलेंज तो मर्जर एंड एक्विजिशन ऑफ फेस इंटीग्रेशन चैलेंज इंक्लूडिंग कल्चरल डिफरेंस ऑर्गेनाइजेशनल कंफ्लेक्स डिसर पशन एंड मैनेजमेंट कॉम्प्लेक्शन दैट कैन इंपैक्ट द सक्सेस ऑफ कंबाइंड एंटिटी इंटीग्रेशन चैलेंज में क्या आता है मर्जर एंड एक्विजिशन की वजह से कई सारे चैलेंज फेस करने पड़ते हैं जैसे कि कल्चर का डिफरेंस आ जाता है ऑर्गेनाइजेशंस के अंदर आपस में ऑर्गेनाइजेशन के अंदर कंफ्लेक्स हो जाते हैं वर्क करने में डिसर पशन होती है मैनेजमेंट कॉम्प्लेक्शन की उस पर भी इंपैक्ट
पड़ने लगता है तो ये चीज आती है आपकी इंटीग्रेशन चैलेंज के अंदर नेक्स्ट होता है फाइनेंशियल रिस्क का डिसएडवांटेज तो मर्जर एंड एक्विजिशन इंवॉल्व फाइनेंशियल रिस्क सच एज ओवर पेइंग फॉर द टारगेट कंपनी टेकिंग एन एक्सेसिव डेट फेसिंग अनएक्सपेक्टेड लायबिलिटी और कॉस्ट और एक्सपीरियंसिंग फाइनेंशियल इंस्टेबिलिटी ड्यू टू ट्रांजैक्शन क्या होता है जो मर्जर एंड एक्विजिशन की वजह से अब अगर बिजनेस बढ़ रहा है तो उसपे रिस्क भी बढ़ जाता है जो फाइनेंशियल रिस्क होता है वो बढ़ जाता है और किस वजह से होता है फाइनेंशियल रिस्क बढ़ जाता है क्योंकि कंपनी डेट ज्यादा ले लेती
है अन एक्सपेक्ट लायबिलिटी बढ़ जाती है या कोई कॉस्ट इनकर हो जाती है या फिर कोई फाइनेंशियल इंस्टेबिलिटी है ट्रांजैक्शन की वजह से यह सारी चीजों की वजह से फाइनेंशियल रिस्क इंक्रीज हो जाता है नेक्स्ट हैगा रेगुलेटरी हर्डल्स तो मर्जर एंड एक्विजिशन आर सब्जेक्ट टू रेगुलेटरी स्क्रन एंड अप्रूवल प्रोसेस दैट कैन डिले और प्रिवेंट द कंपटीशन ऑफ ट्रांजैक्शन पार्टिकुलरली इन केस व्हेन एंटी ट्रस्ट और कंपटीशन कंसर्न अराइज क्या बोला है कई सारी रेगुलेटरी हर्डल्स आती है मतलब जब मर्जर एंड एक्विजिशन होता है तो उनको रेगुलेशन से रिलेटेड क सारी प्रॉब्लम आती हैं जैसे कि रेगुलेटरी
स्क्रीनिंग आ जाती है अप्रूवल का प्रोसेस होता है उसमें डिले होने लगती है ट्रांजैक्शन कंप्लीट होने से कंप्लीट नहीं हो पाती है कोई ट्रांजैक्शन यह सारी चीजें कई सारे हर्डल्स आते हैं कोई सारी रुकावटें आती हैं उनके मर्जर और एक्यूजन के प्रोसेस में भी नेक्स्ट हैगा एंप्लॉई कंसर्न तो मर्जर एंड एक्विजिशन कैन क्रिएट अनसर्टेनटीज एंजाइटी अमंग एंप्लॉई ऑफ बोथ द एक्वायरिंग एंड टारगेट कंपनी लीडिंग टू मोरल इशू टारगेट टैलेंट रिटेंशन चैलेंज वर्क फॉर रिडंडेंसी एंड रेजिस्टेंस टू चेंज एंप्लॉई कंसर्न क्या होता है जब मर्जर एंड एक्विजिशन होता है तो जो कंपनीज होती हैं दोनों ही
चाहे एक्वायरिंग कंपनी हो चाहे टारगेट कंपनी हो वो उनके जो एंप्लॉई होते हैं उनका मोराल होता है वह कम हो जाता है क्योंकि अब उन्हें पता नहीं होता कि उनको जॉब पर रखा जाएगा किन्हें रिटेन करा जाएगा किन्हे रिटेन नहीं करा जाएगा क्याक उनको चेंजेज के साथ अडॉप्ट करना पड़ेगा तो इसकी वजह से वर्कफोर्स रिडंडेंसी होती है और जो रेजिस्टेंस टू चेंज की प्रॉब्लम अराइज हो जाती है आपकी नेक्स्ट हैगा रेपुटेशन रिस्क तो मर्जर एंड सशन कैन इंपैक्ट द रेपुटेशन ऑफ द कंपनी इंवॉल्वड एज स्टेकहोल्डर कस्टमर इन्वेस्टर एंड पब्लिक मे पर्सीव द ट्रांजैक्शन नेगेटिवली ड्यू
टू कंसर्न अबाउट ट्रस्ट एथिक एंड कॉर्पोरेट गवर्नेंस क्या बोला है रेपुटेशन को भी रिस्क आ जाता है मर्जर एंड एक्विजिशन की वजह से जो स्टेकहोल्डर होते हैं कस्टमर होते हैं इन्वेस्टर होते हैं जनरल पब्लिक होती है वो कई सारी ऐसी ट्रांजैक्शन कर लेती है नेगेटिव ट्रांजैक्शन कर लेती है मतलब जो अपना इंटरेस्ट हैगा उसे कंपनी के अंदर से कम कर लेती है क्योंकि या तो दूसरी कंपनी के के ऊपर उन्हें ट्रस्ट एथिक ये सारी प्रॉब्लम आ जाती हैं कॉरपोरेट गवर्नेंस की प्रॉब्लम यह सारे उन्हें इशू दिखने लगते हैं जिसकी वजह से व अपने इंटरेस्ट को
कम कर लेती हैं और इसकी वजह से कंपनी की रेपुटेशन भी खराब फिर हो जाती है ठीक है नेक्स्ट हैगा स्ट्रेटेजिक मिस अलाइन मेंट तो मर्जर एंड एक्विजिशन में फेल टू अचीव देयर इंटेंडेड स्ट्रेटेजिक ऑब्जेक्टिव इफ देयर इज अ लैक ऑफ अलाइन मेंट बिटवीन द कंपनीज कल्चर बिजनेस मॉडल गोल्स एग्जीक्यूशन प्लान रिजल्टिंग इन सब ऑप्टिमल परफॉर्मेंस और वैल्यू क्रिएशन क्या बोला है स्ट्रेटेजिक मिस अलाइन मेंट का डिसएडवांटेज है कि अगर मर्जर एंड एक्विजिशन फेल हो जाता है तो इससे क्या होगा जो कंपनीज आंगी दोनों वो अपना स्ट्रेटेजिक ऑब्जेक्टिव अचीव नहीं कर पाएंगी और अलाइन मेंट
किसलिए नहीं हो पाता है कंपनी के कल्चर की वजह से बिजनेस मॉडल की वजह से गोल्स एग्जीक्यूशन प्लान और सब ऑप्टिमल परफॉर्मेंस इससे कंपनी की हो जाती है जिसकी वजह से उनका जो स्ट्रेटेजिक ऑब्जेक्टिव है वह अचीव नहीं हो पाता है और यह एक डिसएडवांटेज क्रिएट कर देता है कंपनी के लिए ठीक है यह था आपका मर्जर एंड एक्विजिशन का कांसेप्ट अब जो नेक्स्ट कांसेप्ट हैगा वो आएगा आपका स्ट्रेटेजिक अलायंस का स्ट्रेटेजिक अलायंस क्या होती है तो अ स्ट्रेटेजिक अलायंस इज अ कोऑपरेटिव एग्रीमेंट बिटवीन टू और मोर ऑर्गेनाइजेशन टू पसू म्यूचुअल गोल्स शेयर रिसोर्स कैपेबिलिटी
एंड रिस्क एंड क्रिएट सिनर्जी दैट बेनिफिट ऑल पार्टीज इंवॉल्वड स्ट्रेटेजिक अलायंस क्या होती है ये एक एग्रीमेंट होता है दो या दो से ज्यादा कंपनीज के बीच में जिसके अंदर वोह अपने म्यूचुअल गोल्स जो जो उन कंपनीज के गोल है उन्हें पसू करते हैं अपने रिसोर्सेस को शेयर करते हैं अपनी कैपेबिलिटीज को शेयर करते हैं अपने रिस्क को शेयर करते हैं और आपस में मिलकर सारे साइनर्स क्रिएट करते हैं जिसकी वजह से जितनी भी पार्टी उस स्ट्रेटेजिक अलायंस में इवॉल्व होती हैं उन सभी को इसका बेनिफिट मिलता है तो वो कहलाता है आपका स्ट्रेटेजिक अलायंस
स्ट्रेटेजिक अलायंस कैन टेक वेरियस फॉर्म रेंजिन फ्रॉम जॉइंट वेंचर एंड पार्टनरशिप टू कोलबेन एंड कंसोटिया एंड आर टिपिकली फॉर्म टू लिवरेज कंप्लीमेंट्री स्ट्रेंथ एक्सेस न्यू मार्केट टेक्नोलॉजी और एक्सपर्टीज एंड एंस कंपट एडवांटेज इन अ रेपिडली चेंजिंग बिजनेस एनवायरमेंट स्ट्रेटेजिक एलायंस कई सारे तरीकों से हो सकता है जॉइंट वेंचर की मदद से पार्टनरशिप की मदद से कलेब की कंसोर्सिया की मदद से और यह करा किस लिए जाता है जिससे न्यू मार्केट की एक्सेस मिल सके न्यू टेक्नोलॉजी की एक्सेस मिल सके न्यू एक्सपर्टीज की एक्सेस मिल सके और कंपट एडवांटेज क्रिएट किया जा सके यह सारे आपके
बेनिफिट्स होते हैं स्ट्रेटेजिक अलायंस के ठीक है नेक्स्ट हैगा आपका टाइप्स ऑफ स्ट्रेटेजिक अलायंस की जो स्ट्रेटेजिक अलायंस होता है वह किस-किस टाइप का होता है तो टाइप्स ऑफ स्ट्रेटेजिक अलायंस में हमारे पास पहला आएगा जॉइंट वेंचर अ जॉइंट वेंचर इज अ सेपरेट लीगल एंटिटी फॉर्म्ड बाय टू और मोर कंपनी टू पसू अ स्पेसिफिक प्रोजेक्ट वेंचर और बिजनेस अपॉर्चुनिटी टुगेदर शेयरिंग रिसोर्सेस मैनेजमेंट रिस्पांसिबिलिटीज एंड प्रॉफिट एंड लॉस बेस्ड ऑन टर्म्स ऑफ एग्रीमेंट जॉइंट वेंचर क्या होता है यह एक तरीके की सेपरेट लीगल एंटिटी होती है जिसके अंदर दो या दो से ज्यादा कंपनी आपस में
आती है किसी एक प्रोजेक्ट को कंप्लीट करने के लिए एक वेंचर बनाने के लिए या किसी बिजनेस अपॉर्चुनिटी को टुगेदर एक्वायर करने के लिए जिसके अंदर वह अपने रिसोर्सेस को शेयर करती हैं अपने मैनेजमेंट रिस्पांसिबिलिटीज को शेयर कर हैं प्रॉफिट एंड लॉस को शेयर करती हैं जैसा भी उन्होंने एग्रीमेंट में डिसाइड करा होता है नेक्स्ट होता है हमारा इक्विटी अलायंस तो इन एन इक्विटी अलायंस पार्टनर इन्वेस्ट इन ईच अदर बिजनेस बाय एक्वायरिंग ओनरशिप स्टेक शेयर और इक्विटी पोजीशन अलाइन देम टू अलाइन देयर इंटरेस्ट शेयर रिस्क एंड रिवॉर्ड एंड कोलबेट ऑन स्ट्रेटेजिक इनिशिएटिव इक्विटी अलायंस क्या
होता है इसके अंदर जो कंपनीज आपस में पार्टनरशिप करती हैं वह एक दूसरे के बिजनेस के अंदर पैसा इन्वेस्ट करती हैं उनके स्टेक ओनरशिप को एक्वायर करके उसके बाद उनकी एक इक्विटी पोजीशन हो जाती है कंपनी के अंदर उनका इंटरेस्ट हो जाता है रिस्क और रिवर्ड वो दोनों चीजें शेयर करती है और स्ट्रेटेजिक इनिशिएटिव में कोलबो करती हैं नेक्स्ट होता है हमारा नॉन इक्विटी स्ट्रेटेजिक अलायंस तो अ नॉन इक्विटी स्ट्रेटेजिक अलायंस इ क्रिएटेडटेड नॉन इक्विटी स्ट्रेटेजिक अलायंस क्या होता है एक अलायंस जिसके अंदर जो पार्टनर्स होते हैं वह अपना क्या करते हैं एक एग्रीमेंट के
थ्रू रिसोर्सेस और कैपेबिलिटीज को शेयर करते हैं ठीक है अब नेक्स्ट हैगा हमारा एडवांटेजेस क्या-क्या होते हैं स्ट्रेटेजिक अलायंस के तो नंबर वन आता है हमारा एक्सेस टू न्यू मार्केट तो स्ट्रेटेजिक अलायंस इनेबल कंपनी टू एंटर न्यू मार्केट जियोग्राफी और कस्टमर सेगमेंट बाय लेवरेजिंग देयर पार्टनर्स डिस्ट्रीब्यूशन चैनल नेटवर्क रिलेशनशिप एंड मार्केट नॉलेज सबसे पहला एडवांटेज यही आता है न्यू मार्केट की एक्सेस मिल जाती है जो भी पार्टनर्स होते हैं स्ट्रेटेजिक अलायंस के अंदर वो एक दूसरे पार्टनर्स की ज्योग्राफिकल मार्केट कस्टमर सेगमेंट के अंदर अपना प्रोडक्ट को सेल कर सकते हैं अपनी न्यू मार्केट के अंदर
वह एंटर कर पाते हैं इजली न्यू डिस्ट्रीब्यूशन चैनल मिल जाता है उन्हें न्यू नेटवर्क मिल जाता है अपने पार्टनर का जिसकी वजह से उनके मार्केट एक्सेस बढ़ जाती है नेक्स्ट एडवांटेज होता है रिसोर्स शेयरिंग तो स्ट्रेटेजिक अलायंस अलाउ कंपनी टू पूल रिसोर्स कैपेबिलिटी एक्सपर्टीज एंड एसेट्स टू अचीव इकोनॉमी ऑफ स्केल रिड्यूस कॉस्ट मिटिगेट रिस्क एंड एक्सलरेट इनोवेशन और ग्रोथ इनिशिएटिव रिसोर्स शेयरिंग के अंदर क्या होता है जो स्ट्रेटेजिक अलायंस कंपनीज होती हैं वो अपने रिसोर्सेस को पूल करती हैं मतलब एक साथ लाती हैं अपनी कैपेबिलिटीज एक्सपर्टीज एसेट सारी चीजों को इकट्ठा करती हैं जिससे क्या
होता है इकोनॉमी ऑफ स्केल अचीव होता है साथ में एक्सपर्टीज मिलती है कैपेबिलिटीज आ जाती हैं कॉस्ट रिड्यूस हो जाती है रिस्क मिटिगेट हो पाता है और इनोवेशन और ग्रोथ हो पाती है ऑर्गेनाइजेशंस की ठीक है नेक्स्ट एडवांटेज होता है रिस्क शेयरिंग का तो स्ट्रेटेजिक अलायंस हेल्प कंपनी शेयर रिस्क एसोसिएटेड विद इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट और वेंचर बाय स्प्रेडिंग फाइ एक्सपोजर ऑपरेशनल चैलेंज मार्केट अनसर्टेनटीज कॉम्प्लेक्शन अमंग पार्टनर इसके अंदर क्या होता है स्ट्रेटेजिक अलायंस की मदद से जो पार्टनर्स होते हैं वो आपस में एक दूसरे का रिस्क को भी शेयर करते हैं जो भी वो इन्वेस्टमेंट करते
हैं प्रोजेक्ट के अंदर उसमें अगर कोई भी रिस्क इवॉल्व होता है तो उस चीज को वो आपस में शेयर करते हैं नेक्स्ट आता है कॉम्प्लीयंट तो स्ट्रेटेजिक अलायंस ब्रिंग टुगेदर पार्टनर विद कंप्लीमेंट्री स्ट्रेंथ स्किल टेक्नोलॉजी और रिसोर्स दैट इनं देयर कंपीटेटिव पोजीशन वैल्यू प्रपोजिशन प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और सर्विस ऑफि और क्या होता है कंप्लीमेंट्री स्ट्रेंथ मिलती है मतलब एक पार्टनर के पास जो स्ट्रेंथ नहीं है वह दूसरे पार्टनर के पास है अगर तो उसका बेनिफिट सारे पार्टनर्स को मिलता है तो इस तरीके से वह एक कंप्लीमेंट्री स्ट्रेंथ बना देता है जिससे उनकी पोजीशन वैल्यू प्रपोजिशन प्रोडक्ट
पोर्टफोलियो और सर्विस ऑफ सारी चीजें इंप्रूव हो जाती है ठीक है नेक्स्ट हैगा लर्निंग एंड नॉलेज ट्रांसफर ट स्ट्रेटेजिक अलायंस फैसिलिटेट लर्निंग पोर्टी अपॉर्चुनिटी नॉलेज एक्सचेंज बेस्ट प्रैक्टिस विद बेस्ट प्रैक्टिस शेयरिंग एंड स्किल डेवलपमेंट थ्रू कोलबेन विद पार्टनर हु ब्रिंग डायवर्सिफाई पर्सपेक्टिव एक्सपीरियंस एंड एक्सपर्टीज टू द टेबल और क्या होता है स्ट्रेटेजिक अलायंस की मदद से लर्निंग एंड नॉलेज का ट्रांसफर होता है अपॉर्चुनिटी जो भी अपॉर्चुनिटी होती है नॉलेज का एक्सचेंज होता है प्रैक्टिस शेयरिंग होती है मतलब जो भी स्किल्स एंगी उनके पास पार्टनर्स के पास वो आपस में शेयर करते हैं जिससे एक डायवर्सिफाई
पर्सपेक्टिव मिलता है एक्सपीरियंस मिलता है और एक्सपीरियंस मिलता है सारी जो भी उसमें पार्टनर्स कंपनीज होती हैं उन्हें नेक्स्ट होता है साइनर्स एंड इनोवेशन तो स्ट्रेटेजिक अलायंस फोस्टर साइनर्स दैट ड्राइव इनोवेशन क्रिएटिविटी प्रॉब्लम सॉल्विंग एंड वैल्यू क्रिएशन बाय कंबाइनिंग यूनिक कैपेबिलिटी पर्सपेक्टिव एंड आइडिया फ्रॉम डिफरेंट ऑर्गेनाइजेशन टू अचीव कॉमन गोल और क्या बोला है कि स्ट्रेटेजिक अलायंस की मदद से जो सिनर्जी का बेनिफिट मिलता है वो भी मिलता है जिसकी मदह से क्रिएटिविटी आती है इनोवेशन आती है प्रॉब्लम सॉल्विंग जल्दी होने लगती है वैल्यू क्रिएशन होता है ऑर्गेनाइजेशन को सारी चीजों का बेनिफिट मिलता है
तो ये आपके एडवांटेजेस हो गए कि स्ट्रेटज अलायंस करने के क्या-क्या आपके एडवांटेज होते हैं तो देखिए यहां पर आपका यह स्ट्रेटेजिक अलायंस वालाला कांसेप्ट भी फिनिश हो जाता है अब नेक्स्ट हैगा आपका कांसेप्ट ऑफ एक्सचेंज रेट कि एक्सचेंज रेट क्या होता है तो एन एक्सचेंज रेट इज द वैल्यू ऑफ वन करेंसी इन टर्म ऑफ अनदर करेंसी इट रिप्रेजेंट द प्राइस एट व्हिच वन करेंसी कैन बी एक्सचेंज फॉर अनदर एक्सचेंज रेट क्या होता है वो वैल्यू जिसमें एक करेंसी को हम दूसरी करेंसी के साथ कंपेयर करते हैं और उसकी एक करेंसी की वैल्यू दूसरी करेंसी
के मतलब दूसरी कंट्री की की करेंसी के टर्म्स में उसकी वैल्यू डिटरमाइंड करते हैं इट रिप्रेजेंट ये क्या रिप्रेजेंट करता है कि एक कंट्री की करेंसी का दूसरी कंट्री की करेंसी में क्या प्राइस है मतलब इंडिया का अगर रप है तो वह अमेरिका के कितने रुपीज के बराबर होता है इस चीज को हम कहते हैं एक्सचेंज रेट एक्सचेंज रेट प्ले अ क्रुशल रोल इन इंटरनेशनल ट्रेड इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन एज दे डिटरमाइंड द रिलेटिव वैल्यू ऑफ डिफरेंट करेंसी एंड इंपैक्ट द कंपिटिशन ऑफ कंट्रीज एक्सपोर्ट एंड इंपोर्ट जो एक्सचेंज रेट होते हैं उनका एक बहुत क्रूश
रोल होता है इंटरनेशनल ट्रेड के अंदर इन्वेस्टमेंट के अंदर और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के अंदर जो अलग-अलग करेंसी होती हैं वो कंट्रीज के एक्सपोर्ट एंड इंपोर्ट की कंपट को भी इंपैक्ट करती है एक तरीके से ठीक है अब बात आती है आपकी एक्सचेंज रेट होते कितने टाइप के हैं तो पहला टाइप होता है आपका फिक्स्ड एक्सचेंज रेट तो इन अ फिक्स्ड एक्सचेंज रेट सिस्टम द वैल्यू ऑफ कंट्रीज करेंसी इज पैक्ड और फिक्स टू द वैल्यू ऑफ अनदर करेंसी या बास्केट ऑफ करेंसी और अ कमोडिटी लाइक गोल्ड स गोल्ड क्या बोला है फिक्स्ड एक्सचेंज रेट के अंदर
जो कंट्रीज होती हैं उनका जो एक्सचेंज रेट होता है वो फिक्स्ड होता है कि एक कर कंट्री की करेंसी दूसरी कंट्री की करेंसी में उसकी क्या वैल्यू मानी जाएगी इसे हम गोल्ड जैसी कमोडिटी के बेसिस पर फिक्स कर देते हैं सेंट्रल बैंक और मॉनेटरी अथॉरिटी इंटरवेनर एक्सचेंज मार्केट टू मेंटेन द एक्सचेंज रेट एट प्री डिटरमाइंड ले लेवल फिक्स्ड एक्सचेंज रेट करेंसी जहां पर होती है व एक्सचेंज रेट होता है जहां पर वहां पर क्या होता है जो सेंट्रल बैंक होती है या जो भी मॉनेटरी अथॉरिटी होती है वो एक्सचेंज रेट को डिटरमाइंड करने में इंटरवेनर
है इसके मार्केट के बीच में एग्जांपल हैगा ऐसी कंट्री का जहां पर फिक्स्ड एक्सचेंज रेट सिस्टम होता है जैसे कि सऊदी अरेबिया और चाइना ठीक है नेक्स्ट होता है हमारा फ्लोटिंग एक्सचेंज रेट तो इन अ फ्लोटिंग एक्सचेंज रेट सिस्टम द वैल्यू ऑफ करेंसी इज डिटरमाइंड बाय मार्केट फोर्सेस ऑफ सप्लाई एंड डिमांड ऑफ द फॉरेन एक्सचेंज मार्केट फ्लोटिंग एक्सचेंज रेट के अंदर क्या होता है जो एक्सचेंज रेट होता है उसमें क्या होता है जो करेंसी का प्राइस डिटरमाइंड होता है वो किसकी मदद से होता है जो मार्केट के सप्लाई एंड डिमांड के फोर्सेस होते हैं उनकी
मदद से एक्सचेंज रेट डिटरमाइंड होता है द एक्सचेंज रेट फ्लक्ट बेस्ड ऑन वेरियस फैक्टर सच एज इकोनॉमिक इंडिकेटर इंटरेस्ट रेट इंफ्लेशन रेट पॉलिटिकल स्टेबिलिटी एंड मार्केट स्पेक्युलेटिव कौन-कौन से फैक्टर आ जाते हैं आपका इंटरेस्ट रेट हो गया इकोनॉमिक इंडिकेटर जैसे कि इंफ्लेशन रेट पॉलिटिकल स्टेबिलिटी मार्केट स्पेक्युलेटिंग यूएस डॉलर यूरो एंड ज जन ऑपरेट अंडर फ्लोटिंग एक्सचेंज रेट सिस्टम तो यूएस डॉलर जो हो गया यूरो हो गया जपनीज न हो गया ये सारे कौन से हैं जो कि फ्लोटिंग एक्सचेंज रेट फॉलो करते हैं फ्लोटिंग एक्सचेंज रेट के अंदर वर्क करते हैं ठीक है यह दो तरीके
के आपके एक्सचेंज रेट होते हैं अब वही आपको फैक्टर डिस्कस करके बता रखे हैं कि फैक्टर इनफ्लुएंसिंग एक्सचेंज रेट इंक्लूड ऐसे कौन-कौन से फैक्टर हैं जो एक्सचेंज रेट को एक तरीके से इन्फ्लुएंस करते हैं तो पहला फैक्टर वही आया आपका इंटरेस्ट रेट हाईयर इंटरेस्ट रेट इन अ कंट्री अट्रैक्ट फॉरेन इन्वेस्टमेंट लीडिंग टू एन एप्रिसिएशन ऑफ इट्स करेंसी अगर किसी कंट्री के अंदर इंटरेस्ट रेट ज्यादा है तो जो बाहर के इन्वेस्टर होंगे वो उस कंट्री में अपना पैसा ज्यादा लगाने को मतलब ज्यादा पैसा इन्वेस्ट करेंगे ताकि उन्हें ज्यादा इंटरेस्ट मिल सके तो इसकी वजह से क्या
होगा जो उस कंट्री की करेंसी है वो एप्रिसिएशंस लोअर इंटरेस्ट रेट कैन रिजल्ट इन डेप्रिसिएशन ऑफ द करेंसी वही अगर इंटरेस्ट रेट कम होगा तो जो करेंसी है उसका डेप्रिसिएशन आपका होगा ठीक है नेक्स्ट आता है आपका इंफ्लेशन रेट्स तो कंट्रीज विद लो इंफ्लेशन रेट्स जनरली हैव स्ट्रांग करेंसी एज देयर परचेसिंग पावर इज हाई ऐसी कंट्री जिनका लो इंफ्लेशन रेट होता है मतलब जहां पर ज्यादा महंगाई नहीं होती है वो स्ट्रांग पर करेंसी होती है उनकी परचेसिंग पावर हाई होती है वहां की जो करेंसी होती है वह स्ट्रांग रहती है हाई इंफ्लेशन रेट कैन इरोड
द वैल्यू ऑफ करेंसी वहीं अगर कोई कंट्री ऐसी है जहां पर इंफ्लेशन रेट ज्यादा है तो उसकी करेंसी की वैल्यू कम होती है नेक्स्ट हैगा इकोनॉमिक इंडिकेटर तो फैक्टर जीडीपी ग्रोथ एंप्लॉयमेंट ट्रेड बैलेंस इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन कैन इन्फ्लुएंस एक्सचेंज रेट बाय रिफ्लेक्टिंग ओवरऑल हेल्थ ऑफ एन इकोनॉमी इकोनॉमिक इंडिकेटर में जैसे कि जीडीपी ग्रोथ हो गई एंप्लॉयमेंट रेट लेवल आ गया ट्रेड बैलेंस आ गया इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन आ गया यह सारी चीजों का भी एक्सचेंज रेट पर एक इंपैक्ट पड़ता है नेक्स्ट फैक्टर रहेगा पॉलिटिकल स्टेबिलिटी तो पॉलिटिकल स्टेबिलिटी गवर्नेंस इशू इज एन कंट्री कैन इंपैक्ट इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस एंड
लीड टू फ्लक्ट एशन इन एक्सचेंज रेट उसके अलावा जो पॉलिटिकल स्टेबिलिटी होती है गवर्नमेंट का कितने इंटरवेंशन है यह सारी चीजों पर भी एक्सचेंज रेट डिपेंड करता है इन्वेस्टर उन्हीं के अकॉर्डिंग पॉलिटिकल स्टेबिलिटी के अकॉर्डिंग इन्वेस्ट करते हैं उसकी वजह से फिर एक्सचेंज रेट डिटरमाइंड होता है नेक्स्ट है मार्केट स्पेक्युलेटिंग इन स्पेकल इन फॉरेन एक्सचेंज मार्केट कैन कॉज शॉर्ट टर्म फ्लकचुएशन इन एक्सचेंज रेट बेस्ड ऑन एक्सपेक्टेशन अबाउट फ्यूचर इकोनॉमी कंडीशन उसके अलावा मार्केट स्पेक्युलेटिव होते हैं वो भी इस स्पेक्युलेटिव शॉर्ट टर्म के लिए फ्लकचुएशन देते हैं जिसके बेसिस पर एक्सचेंज रेट डिटरमाइंड हो जाता है
उतने टाइम के लिए ठीक है तो ये आपके पांच फैक्टर थे जो डिटरमाइंड करते हैं आपके एक्सचेंज रेट को तो देखिए अब आगे है हमारे पास थ्योरी ऑफ एक्सचेंज रेट की एक्सचेंज रेट की आपकी क्या-क्या थ्योरी होती है पहली हैग परचेज पावर पैरि थ्योरी तो द परचेसिंग पावर पैरि थ्योरी सजेस्ट दैट इन द लॉन्ग रन एक्सचेंज रेट बिटवीन टू करेंसी शुड एडजस्ट टू इक्विलाइज द प्राइस लेवल ऑफ अ बास्केट ऑफ गुड्स एंड सर्विस इन ईच कंट्री परचेसिंग पावर पैरि थ्योरी के अकॉर्डिंग क्या कहा जाता है कि लॉन्ग रन में हमें क्या करना चाहिए जो दो
कंट्रीज की करेंसी है उनके बीच का जो एक्सचेंज रेट है उसे इस तरीके से इक्वल करना चाहिए कि जो गुड्स एंड सर्विस हो एक बास्केट के वह दोनों की वैल्यू इक्लाइम्स है कि जो एक जैसे गुड देंगे उनके दोनों कंट्री में प्राइस [संगीत] इक्लाइम्स लेवल है उसमें टाइम के अकॉर्डिंग रिलेटिवली चेंज आना चाहिए ये कहती है रिलेटिव पीपीपी थ्योरी पीपीपी इंप्लाइज दैट एक्सचेंज रेट चेंजेज आर ड्राइव बाय इंफ्लेशन डिफरेंशिया उसमें जो एक्सचेंज रेट है वो कैसे डिटरमाइंड होता है इंफ्लेशन की मदद से जो एक्सचेंज रेट है वह डिटरमाइंड होता है इसका आपका ठीक है नेक्स्ट
इंटरेस्ट रेट पैटी थ्योरी तो द इंटरेस्ट रेट पैटी थ्योरी पोस्ट ट द डिफरेंस इन इंटरेस्ट रेट बिटवीन टू कंट्रीज बिटवीन टू कंट्री शुड बी इक्वल टू एक्सपेक्टेड चेंज इन एक्सचेंज रेट ओवर स्पेसिफाइड पीरियड क्या बोला है इंटरेस्ट रेट पैटी थ्योरी के अकॉर्डिंग जो दो कंट्रीज है उनके बीच में जो इंटरेस्ट रेट का डिफरेंस हैगा वह कैसा होना चाहिए के इक्वल होना चाहिए जो उनके एक्सचेंज रेट के बीच में जो चेंज आ रहा है उसके इक्वल होना चाहिए अकॉर्डिंग टू आईआरपी इन्वेस्टर विल सीक हायर रिटर्न इन कंट्री विद हायर इंटरेस्ट रेट जो इन्वेस्टर होते हैं वो
उस कंट्री में पैसा लगाना इन्वेस्ट करते हैं जिसमें इंटरेस्ट रेट हाईयर होता है लीडिंग टू कैपिटल फ्लो दैट विल एडजस्ट द एक्सचेंज रेट टू मेंटेन इंटरेस्ट रेट डिफरेंशियल और इससे फिर क्या होता है उस कंट्री में कैपिटल का फ्लो होता है उससे एक्सचेंज रेट एडजस्ट होता है और इंटरेस्ट रेट डिफरेंशियल मेंटेन रहता है कंट्री के अंदर ठीक है तो यह दो थ्योरी आपको कवर करनी है सिर्फ इतना ही कवर करना थ्योरी और इससे ज्यादा इसमें ज्यादा डीप में जाने की जरूरत नहीं है आपको ठीक है नेक्स्ट टॉपिक आगा हमारा आउटसोर्सिंग तो आउटसोर्सिंग इज अ प्रैक्टिस
ऑफ कांट्रैक्टिंग आउट सर्टेन बिजनेस फंक्शन और प्रोसेस टू एक्सटर्नल सर्विस प्रोवाइडर रदर देन हैंडलिंग देम इन आउस आउटसोर्सिंग क्या है ये एक तरीका है जिसमें हम जो हमारे बिजनेस फंक्शन है उसे किसी बाहर की एंटिटी को या बाहर के इंडिविजुअल को दे देते हैं परफॉर्म करने के लिए रदर देन कि उन्हें हम खुद परफॉर्म करें हम किसी और से परफॉर्म करवा लेते हैं और उसके लिए हम उन्हें पे करते हैं तो यह प्रोसेस जो कहलाता है वो कहलाता है आउटसोर्सिंग दिस स्ट्रेटेजिक डिसीजन अलाउ कंपनी टू फोकस ऑन देयर कोर कंपट इससे क्या होता है जो
कंपनीज होती हैं वो उनकी जो कोर कंपट है उस पर फोकस कर पाते हैं जो एक्स्ट्रा की एक्टिविटीज होती है वो आउटसोर्स कर देते हैं वाइल लेवरेजिंग द स्पेशलाइज्ड एक्सपर्टीज रिसोर्स एंड कॉस्ट एफिशिएंसी ऑफ थर्ड पार्टी वेंडर और यह किससे लेते हैं जो ये आउटसोर्सिंग की सर्विस है जो थर्ड पार्टी होती है जो उस चीज में एक्सपर्टीज होती है जिसके पास उससे रिलेटेड रिसोर्स होते हैं कॉस्ट एफिशिएंसी जो मेंटेन कर सकते हैं उनसे यह सर्विस लेते हैं आउट आउटसोर्सिंग कैन इनकंपासेस अ वाइड रेंज ऑफ एक्टिविटी इंक्लूडिंग इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सर्विस कस्टमर सपोर्ट मैन्युफैक्चरिंग ह्यूमन रिसोर्स अकाउंटिंग
मार्केटिंग एंड मोर आउटसोर्सिंग के अंदर कई सारी तरीके की एक्टिविटीज आ जाती हैं जैसे हम इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी है उसको आउटसोर्स कर दें कस्टमर सपोर्ट की सर्विस होती है उसे आउटसोर्स कर दें मैन्युफैक्चरिंग ह्यूमन रिसोर्स की सर्विस होती है वह आउटसोर्स कर दें अकाउंटिंग की सर्विस मार्केटिंग की और कई जितनी भी सर्विसेस होती हैं उन सभी को हम आउटसोर्स कर सकते हैं अब आता है एडवांटेज ऑफ आउटसोर्सिंग आउटसोर्सिंग कंपनी करती क्यों है तो नंबर वन आता है कॉस्ट सेविंग है तो वन ऑफ द प्राइमरी रीजन कंपनी ऑ फॉर आउटसोर्सिंग टू रिड्यूस ऑपरेशनल कॉस्ट जिन कंपनी की
ऑपरेशनल कॉस्ट ज्यादा होती है वह अपनी कॉस्ट को कम करने के लिए सर्विसेस को आउटसोर्स कर देते हैं बाय आउटसोर्सिंग नॉन कोर फंक्शन टू कंट्रीज विल विद लोअर लेबर कॉस्ट कंपनीज कैन अचीव सिग्निफिकेंट सेविंग न इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रेनिंग एंड ओवरहेड एक्सपेंस आउटसोर्सिंग से क्या होता है जो नॉन कोर फंक्शन हैगा कंपनीज का जिसमें उनकी ज्यादा लेबर लोअर लेबर कॉस्ट होती है कंपनीज की जिन कंट्रीज में वहां पर आउटसोर्स कर देते हैं जिससे जो हमारी कंट्री में जो हमारी कॉस्ट होती हैगी वेज की इंफ्रास्ट्रक्चर की ट्रेनिंग की ओवरहेड की वह सारी कॉस्ट सेव हो जाती है नेक्स्ट
है एक्सेस टू स्पेशलाइज स्किल्स तो आउटसोर्सिंग इनेबल बिजनेस टू एक्सेस अ पूल ऑफ स्पेशलाइज टैलेंट एंड एक्सपर्ट दैट मे नॉट बी अवेलेबल इंटरनली आउटसोर्सिंग से क्या होता है जो हमारे पास स्पेशलाइज एक्सपर्टाइज्ड करते हैं तो किसी एक्सपर्टीज कंपनी को या एक्सपर्ट इंडिविजुअल को अपना वर्क आउटसोर्स करते हैं उससे हमारे वर्क की एफिशिएंसी इंक्रीज हो जाती है सर्विस प्रोवाइडर ऑन हैज हैव डेडिकेटेड टीम विद स्पेसिफिक स्किल एंड एक्सपीरियंस इन एरिया सच एज आईटी डेवलपमेंट डिजिटल मार्केटिंग डाटा एनालिटिक एंड मोर इसमें क्या होता है जो सर्विस प्रोवाइड होता है उसके पास उससे रिलेटेड सारी स्किल्स होती हैं
सारी एक्सपर्टीज होती है सारा एक्सपीरियंस होता है और सारी रिसोर्सेस होते हैं जिसकी मदद से वह हमारे वर्क को अच्छे से परफॉर्म कर पाता है नेक्स्ट हैगा हमारा एडवांटेज फोकस ऑन कोर एक्टिविटीज तो आउटसोर्सिंग अलाउ कंपनी टू कंसंट्रेट ऑन देर कोर बिजनेस एक्टिविटी एंड स्ट्रेटेजिक प्रायोरिटी आउटसोर्सिंग क्या अला करती है कंपनी को अपनी कोर बिजनेस एक्टिविटी और स्ट्रेटेजिक प्रायोरिटी पर कंसंट्रेट करने मेंक हेल्प करती है बाय डेलीगेटिंग रूटीन और नोन टा टू एक्सटर्नल पार्टनर ऑर्गेनाइजेशन कैन स्ट्रीमलाइन ऑपरेशन अपने नॉन रूटीन और डेली जो रूटीन और नॉन एसेंशियल टास्क है उसे अपने आउटसोर्स प्रोवाइडर को मतलब
सर्विस प्रोवाइडर को आउटसोर्स करके क्या करती हैं जो उनका ऑपरेशन है उसे स्ट्रीम लाइन करते हैं मतलब स्मूथली रन करती है इंप्रूव एफिशिएंसी एफिशिएंसी इंक्रीज हो जाती है और एंड एलोकेट रिसोर्स मोर इफेक्टिवली और व अपने रिसोर्सेस को अच्छे से एलोकेट कर पाती हैं नेक्स्ट है स्केलेबिलिटी एंड फले लिटी तो आउटसोर्सिंग प्रोवाइड स्केलेबिलिटी एंड फ्लेक्सिबल टू मीट फ्लक्ट एशन डिमांड ऑन सीजनल रिक्वायरमेंट इससे क्या होता है आउटसोर्सिंग से स्केलेबिलिटी बढ़ती है फ्लेक्सिबल बढ़ती है डिमांड और जो डिमांड में फ्लक्ट एशन की वजह से आती है कंपनीज कैन इजली एडजस्ट द लेवल ऑफ आउटसोर्स सर्विस बेस्ड
ऑन बिजनेस इट विदाउट द कांस्टेंट ऑफ हायरिंग एंड मैनेजिंग एडिशनल स्टाफ इंटरनली कंपनी जो है वो आउटसोर्सिंग का लेवल को एडजस्ट कर सकती है जब जैसी डिमांड है उसके अकॉर्डिंग उतनी एक्टिविटी को आउटसोर्स कर सकती है इससे कंपनीज की की जो एक कॉस्ट होती है कांस्टेंट होता था कि हां अगर हमारी एक्टिविटीज बिजनेस की एक्टिविटीज बढ़ती है तो हमें स्टाफ को हायर करना पड़ेगा वो परफॉर्म करने के लिए ऐसा नहीं होता है उन्हें सिर्फ आउटसोर्स प्रोवाइडर को बताना होता है अब वो देखेगा उसे कैसे परफॉर्म करना है कंपनीज का इसमें कोई भी इवॉल्वमेंट या कांस्टेंट
नहीं होता है आपका ठीक है नेक्स्ट हैगा एनहांस प्रोडक्टिविटी तो आउटसोर्सिंग कैन एनहांस प्रोडक्टिविटी बाय एलोइंग एंप्लॉई टू फोकस ऑन हाई वैल्यू टास्क दैट कंट्रीब्यूट डायरेक्टली टू बिजनेस ग्रोथ आउटसोर्सिंग के से क्या होता है प्रोडक्टिविटी बढ़ती है क्योंकि एंप्लॉई अपनी जो हाई वैल्यू टास्क है उनके ऊपर फोकस कर पाते हैं जो कि डायरेक्टली बिजनेस की ग्रोथ में और इनोवेशन में हेल्प करता है बाय लोडिंग रिपीट और टाइम कंजूमिंग फंक्शन टू एक्सटर्नल प्रोवाइडर ऑर्गेनाइजेशन कैन इंप्रूव ओवरऑल एफिशिएंसी एंड परफॉर्मेंस कंपनीज अपना ऐसा फंक्शन जो कि टाइम कंजूमिंग या रिपिटेटिव फंक्शन है उसे एक्सटर्नल प्रोवाइडर को आउटसोर्स
करके क्या कर पाती है अपनी एफिशिएंसी और परफॉर्मेंस को इंप्रूव कर पाते हैं नेक्स्ट हैगा हमारा रिस्क मिटिगेशन तो आउटसोर्सिंग कैन हेल्प मिटिगेट रिस्क एसोसिएटेड विद सर्टेन बिजनेस फंक्शन आउटसोर्सिंग से क्या होता है जो हमारा रिस्क होता है कुछ बिजनेस फंक्शन के साथ जैसे कि कंप्लायंस वगैरह साइबर सिक्योरिटी हो गई आपकी रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट हो गई सर्विस प्रोवाइडर ऑफ हैव स्टेबलाइज प्रोसेस बेस्ट प्रैक्टिस एंड सिक्योरिटी मेजर इन प्लेस टू इंश्योर डाटा प्रोटेक्शन एंड रेगुलेटरी कंप्लायंस तो यह सारी जो रिस्क होते हैं वो सारे कौन देखता है आउटसोर्स सर्विस प्रोवाइडर के होते हैं इसमें कंपनी का कोई
भी रिस्क नहीं होता है उन्हें सिर्फ आउटसोर्सड एक्टिविटी के लिए पेमेंट करनी होती है उसी में उनका रिस्क कवर हो जाता है नेक्स्ट हैगा ग्लोबल एक्सपेंशन तो आउटसोर्सिंग कैन फैसिलिटेट ग्लोबल एक्सपेंशन बाय प्रोवाइड एक्सेस टू इंटरनेशनल मार्केट लोकल एक्सपर्टीज एंड कल्चरल इनसाइट्स कंपनी कैन लिवरेज आउटसोर्सिंग पैटर्न इन डिफरेंट रीजन टू सपोर्ट मार्केट एंट्री लोकलाइजेशन एक्सपर्ट एंड एफर्ट्स एंड क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशन इससे क्या होता है कंपनीज का ग्लोबली एक्सपेंशन होता है क्योंकि आउटसोर्सिंग की मदद से क्या होता है उन्हें इंटरनेशनल मार्केट की एक्सेस मिल जाती है कंपनीज को लोकल एक्सपर्टीज भी मिलती है उन्हें और कल्चरल
इनसाइट्स भी मिलती है जिसकी वजह से उनका ग्लोबल लेवल पर एक्सपेंशन हो पाता है ठीक है तो देखिए आउटसोर्सिंग एंड इट्स पोटेंशियल फॉर इंडिया कि इंडिया के अंदर आउटसोर्सिंग की क्या पोटेंशियल है तो रीजन वई आईटी आउटसोर्सिंग इन इंडिया इज बेस्ट डिसीजन इंडिया के अंदर जो आईटी का आउटसोर्स करा जाता है वो बेस्ट डिसीजन क्यों है तो नंबर वन है द लार्जेस्ट टैलेंट पूल ऑफ प्रोफेशनल तो वन ऑफ द मेन बेनिफिट ऑफ आउटसोर्सिंग आईटी सर्विस फ्रॉम इंडिया इज हैविंग टू एक्सेस द एक्सटेंसिव पल स्किल्ड प्रोफेशनल इन अ वैरायटी ऑफ टेक्नोलॉजी इंडिया के अंदर जो आईटी
सर्विस हैगी उसका सबसे ज्यादा आउटसोर्स किया जाता है मतलब बाहर के लोग इंडिया से लोगों को बुलाते हैं आईटी सर्विस प्रोवाइड करवाने के लिए या उन आईटी सर्विस लेते हैं ऐसा इसलिए है क्योंकि इंडिया के अंदर स्किल्ड प्रोफेशनल का पूल है जो कि आईटी टेक्नोलॉजी के बारे में नॉलेज रखते हैं एस पर मोस्ट रिसेंट डाटा रिलीजड बाय स्टेटस् देयर आर 27.7 मिलियन डेवलपर ग्लोबली विद 5.4 मिलियन ऑफ देम बीइंग इंडियन पूरे वर्ल्ड में 27.7 मिलियन डेवलपर है आईटी वाले जिसमें से 5.4 मिलियन कहां के हैं इंडिया के इंडिया नाउ हैज मोर सॉफ्टवेयर इंजीनियर इंडिया में
90 पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर है पूरे वर्ल्ड में से सुपर पासिंग द यूनाइटेड स्टेट 4.4 मिलियन यूनाइटेड स्टेट को भी सुपरवाइज करते हैं जहां पर 4.4 मिलियन है सिर्फ ठीक है तो यह सबसे पहला रीजन है फिर है कॉस्ट इफेक्टिव रिसोर्सेस अवेलेबल एट फ्लेक्सिबल प्राइसिंग तो कॉस्ट इफेक्टिव नेस रिमन वन ऑफ द मेन बेनिफिट ऑफ आउटसोर्सिंग टू इंडिया इवन आफ्टर 30 ईयर अकॉर्डिंग टू मोस्ट रिसेंट डाटा ऑन सॉफ्टवेयर इंजीनियर अर्ली वेज प्रोवाइडेड बाय ग्लासडोर हायरिंग अ फुल टाइम प्रोग्रामर इन यूनाइटेड स्टेट कॉस्ट 91156 पर ईयर व्हिच इज 10 टाइम मोर एज द कॉस्ट ऑफ हायरिंग फॉर
सेम जॉब रोल वुड कॉस्ट 9751 पर एनम इन इंडिया कॉस्ट इफेक्टिव भी होता है कि जो इंडिया के आउटसोर्स करते हैं आईटी सर्विस की वह बहुत ज्यादा कॉस्ट इफेक्टिव होते हैं फ्लेक्सिबल प्राइसिंग होती है एक डाटा दिया है कि अगर यूनाइटेड स्टेट में एक साल की कॉस्ट आती है आउटसोर्स करने की आईटी सर्विस की 91156 तो इंडिया में वही काम सिर्फ एक साल का 9751 में करके दिया जा सकता है नेक्स्ट हैगा हाई क्वालिटी सर्विस तो इंडिया प्रोवाइड एक्सीलेंट सर्विस डिलीवरी इन ए टू हाली स्ल्ड वर्कर्स इट सॉफ्टवेयर डेवलपर आर कटिंग एज टेक्नोलॉजी सॉफ्टवेयर एंड
इंफ्रास्ट्रक्चर टू प्रोवाइड अ कंपीटेटिव एज इंडिया के जो सॉफ्टवेयर डेवलपर है वह हाईली स्किल्ड वर्कफोर्स हैगा जो कि एक एक्सीलेंट सर्विस प्रोवाइड करवाते हैं द बेस्ट इंटरनेशनल स्टैंडर्ड आर फॉलो बाय आउटसोर्सिंग कंपनीज इन इंडिया इंक्लूडिंग कैपेबिलिटी मैचरिंग ले मॉडल टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट कस्टमर ऑपरेशन परफॉर्मेंस सेंटर एक्सेट्रा जो इंडिया के अंदर ंगे वो इंडिया इंटरनेशनल स्टैंडर्ड में से जो भी बेस्ट फॉलो आउटसोर्सिंग कंपनी हैगी उनके स्टैंडर्ड्स को फॉलो करते हैं जैसे कि कैपेबिलिटी मैचरिंग मॉडल हो गया टॉप क्वालिटी मैनेजमेंट की पॉलिसी कस्टमर ऑपरेशन परफॉर्मेंस सेंटर यह सारी चीजें फॉलो करके हाई क्वालिटी की सर्विसेस प्रोवाइड करवाते
हैं नेक्स्ट हैगा फेवरेबल गवर्नमेंट पॉलिसी टुवर्ड आईटी इंडस्ट्री तो द डेवलपमेंट ऑफ नेशन इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इनेबल्ड सर्विस सेक्टर हैज बीन इनकरेज बाय अ नंबर ऑफ एक्शन मेड बाय द इंडियन गवर्नमेंट और क्या फिट हैगी कि जो ये आईटी सेक्टर हैगा इंडिया के अंदर उसे गवर्नमेंट से प्रमोशन मिल रहा है गवर्नमेंट एंकरेज कर रही है उस चीज को तो इसका भी बेनिफिट उन्हें मिल जाता है सम ऑफ द एक्शन दैट हैव बीन इंप्लीमेंटेड इंक्लूडिंग द बजट एलोकेशन फॉर आईटी एंड टेलीकॉम सेक्टर इन यूनियन बजट 2023 24 कुछ स्टेप्स लिए हैं जो बताए हैं
गवर्नमेंट ने जिसके अंदर उन्होंने आईटी सेक्टर को अलग से बजट भी एलोकेट करा है यूनियन बजट 2023 24 के अंदर कितने रुपीज का 97 5790 करोड़ यूएस डॉलर में 11.7 बिलियन डॉलर जो होते हैं इतने का बजट आईटी सेक्टर और टेलीकॉम सेक्टर को एलोकेट करा था गवर्नमेंट ने द सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क स्कीम एक्सट्रा और क्या करा है गवर्नमेंट ने सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क वगैरह भी सेट अप करके इस स्कीम का बेनिफिट आईटी सेक्टर्स को दिया है ठीक है नेक्स्ट हैगा मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर तो मॉडर्न टेक्नोलॉजी इ इनकॉरपोरेटेड इन टू एवरी एस्पेक्ट्स ऑफ इंडिया मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर क्या बोला
है मॉडर्न टेक्नोलॉजी की वजह से इंडिया का जो स्ट्रक्चर हो गया है इंफ्रास्ट्रक्चर का वो भी कैसा हो रहा है मॉडर्न हो रहा है वे सपोर्ट कंट्रीज फास्ट एक्सपेंडिंग इकोनॉमी जो कि कंट्री को क्या बना रहा है एक बहुत ज्यादा फास्ट एक्सपेंडिंग इकोनॉमी बना रहा है विथ जीडीपी ऑफ 3.7 ट्रिलियन इंडिया करेंटली रैंक फिफ्थ इन द वर्ल्ड अहेड ऑफ यूके फ्रांस कनाडा रशिया एंड ऑस्ट्रेलिया इंडिया की जीडीपी आज के टाइम पर 3.7 ट्रिलियन डॉलर की हैगी जो कि पांचवें नंबर पर आती है यूके फ्रांस कनाडा रशिया एंड ऑस्ट्रेलिया के बाद ठीक है तो यह था
आपका के लिए आउटसोर्सिंग की क्या पोटेंशियल है क्या रीजन होंगे जो आईटी सर्विसेस को इंडिया से आउटसोर्स करा जाता है जो लास्ट कांसेप्ट हैगा आपका इस यूनिट का वो हैगा आपका सस्टेनेबल डेवलपमेंट का तो सस्टेनेबल डेवलपमेंट इज डेवलपमेंट दैट मीट द नीड ऑफ प्रेजेंट विदाउट कंप्रोमाइज द एबिलिटी ऑफ फ्यूचर जनरेशन टू मीट देयर ओन नीड सस्टेनेबल डेवलपमेंट क्या होता है आज के लोगों की नीड्स को इस तरीके से फुलफिल करना कि आगे आने वाली जनरेशन की नीड के साथ कंप्रोमाइज ना हो उस चीज को कहा जाता है सस्टेनेबल डेवलपमेंट थ्री पिलर्स क्या है सस्टेनेबिलिटी के
तीन पिलर्स बताए हैं आपके तो पहला पिलर में आता है एनवायरमेंटल सस्टेनेबिलिटी तो वी मस्ट मेक श्योर दैट वी आर यूजिंग नेचुरल रिसोर्स लाइक मटेरियल एनर्जी फ्यूल लैंड एंड वाटर एज अ सस्टेनेबल रेट इफ वी आर लिव इन अ रियली सस्टेनेबल वे देन इट्स ऑफें टर्म्ड एज एनवायरमेंटल सस्टेनेबिलिटी क्या बोला है हमें ये ध्यान रखना चाहिए कि हम नेचुरल रिसोर्सेस का यूज कर रहे हैं मटेरियल एनर्जी फ्यूल लैंड और वाटर का एक सस्टेनेबल रेट से तो अगर हमें यहां पर जिंदा रहना है धरती के ऊपर तो हमें इसका एनवायरमेंटल सस्टेनेबिलिटी वे में इसका यूज करना
चाहिए जिससे इसका नुकसान किसी को भी ना हो ना तो नेचर को और ना ही हमें खुद बिकॉज सर्टेन रिसोर्सेस आर मोर डली अवेलेबल देन अदर्स वी मस्ट टेक इनटू अकाउंट फैक्टर लाइक मटेरियल स्कार्सिटी एंड हार्म दैट कम फ्रॉम एक्सट्रैक्टिंग दज रिसोर्सेस टू द एनवायरमेंट क्योंकि क्या है कुछ रिसोर्सेस ऐसे हैं जो आसानी से अवेलेबल मिल जाते हैं लेकिन कुछ हैंग बहुत ज्यादा रे रिसोर्सेस है स्कर्स रिसोर्सेस है जो इतनी आसानी से नहीं मिलते हैं तो हमें इनकी मटेरियल स्कार्सिटी इनसे होने वाले हार्म नेचर को इन सारी चीजों का ध्यान रखना चाहिए इनको एक्स्टेक्स्ट करते
समय वेदर और नॉट द रिसोर्स कैन स्टिल बी यूज्ड इन अकॉर्डेंस विद सर्कुलर इकोनॉमी और क्या हम इस रिसोर्स को उसी रेट से यूज कर सकते हैं जिस रेट से करते आए हैं या इसके यूज के रेट में हमें डिक्लाइन करना चाहिए वह सारी चीजों को ध्यान में रखना चाहिए तो उसे कहा जाता है आपका एनवायरमेंटल सस्टेनेबिलिटी ठीक है नेक्स्ट आपका इकोनॉमिक सस्टेनेबिलिटी तो अ कंपनी और नेशन मस्ट यूज इट्स रिसोर्स एथिकली एंड एफिशिएंटली इन ऑर्डर टू एबल टू रन सस्टेनेबली एंड जनरेट एन ऑपरेशनल प्रॉफिट ऑन अ रेगुलर बेसिस एक कंपनी या एक नेशन को
अपने रिसोर्सेस का यूज एथिकली और एफिशिएंटली तरीके से करना चाहिए जिससे वह सस्टेनेबल रहे और एक ऑपरेशनल प्रॉफिट जनरेट कर सके रेगुलर बेसिस पर दिस इज नोन एज इकोनॉमिक सस्टेनेबिलिटी तो इसे क्या कहा जाता है इकोनॉमिक सस्टेनेबिलिटी आपका कहा जाता है एन ऑर्गेनाइजेशन कैन नॉट ऑपरेट और सरवाइव विदाउट अ प्रॉफिट एक ऑर्गेनाइजेशन बिना प्रॉफिट के सरवाइव और ग्रो नहीं कर सकती है इन लॉन्ग रन अ कंपनी कैन नॉट रिमन वायबल इफ डज नॉट ऑपरेट प्रॉपर्ली एंड यूटिलाइज इट्स रिसोर्स इफेक्टिवली और लॉन्ग रन में एक ऑर्गेनाइजेशन रहेगी नहीं अगर वह अपने रिसोर्सेस को प्रॉपर्ली यूज नहीं
करेगी यूटिलाइज अच्छे तरीके से इफेक्टिवली नहीं करेगी तो थर्ड आता है हमारा सोशल सस्टेनेबिलिटी तो सोशल सस्टेनेबिलिटी इज द अवेलेबिलिटी ऑफ सोसाइटी और एनी सोशल टू परसिस्टेंटली अचीव अ गुड सोशल वेल बीइंग सोशल सस्टेनेबिलिटी क्या होती है सोसाइटी की या किसी सोशल सिस्टम की वो एबिलिटी जिससे एक सोशल वेल बीइंग को अचीव किया जा सके उसे कहा जाता है सोशल सस्टेनेबिलिटी अचीविया वेल बीइंग ऑफ अ कंट्री एन ऑर्गेनाइजेशन और कम्युनिटी कैन बी मेंटेन इन लॉन्ग रन सोशल सस्टेनेबिलिटी को कैसे अचीव किया जा सकता है तो यह ध्यान रखना चाहिए कि एक कंट्री की ऑर्गेनाइजेशन की
और कम्युनिटी की लॉन्ग रन में सोशल वेल बीइंग बनी रहे मतलब वो सोशल वेल रहे सारे तो वही चीज कहलाती है आपकी सोशल सस्टेनेबिलिटी ठीक है अब है आपका टू ब्रिंग सस्टेनेबल डेवलपमेंट इन द मेन स्ट्रीम यूनाइटेड नेशन लच द 2030 एजेंडा फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड एसडीजी सस्टेनेबिलिटी डेवलपमेंट मेंटेन करने के लिए यूनाइटेड नेशन ने 2030 एजेंडा स्टेबलाइज करा जिसके अंदर उन्होंने 2030 एजेंडा बताया और एसडीजी के बारे में बताया देयर आर 17 गोल्स एंड 69 टारगेट स्पेसिफिक टारगेट टू बी अचीव्ड बाय 2030 इसके अंदर क्या है 17 गोल्स बताए हैं और 1 69 टारगेट्स
बताए हैं जो कि 2030 तक अचीव करने हैं रिचिंग द गोल रिक्वायर एक्शन ऑन ऑल फ्रंट इवॉल्विंग गवर्नमेंट बिजनेस सिविल सोसाइटी एंड पीपल एवरी वेयर ल हैव अ रोल टू प्ले और इन गोल्स को अचीव करने के लिए गवर्नमेंट का बिजनेस का सिविल सोसाइटी का और लोगों का सभी की इवॉल्वमेंट जरूरी है ठीक है तो एसडीजी 12 अब हमें इनमें कुछ एसडीजी के बारे में पढ़ना है जो य गोल्स बताए हैं सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स इनके कुछ गोल्स के बारे में पढ़ना है तो एसडीजी 12 क्या है रिस्पांसिबल कंजन एंड प्रोडक्शन से रिलेटेड है तो गोल
12 है हमारा रिस्पांसिबल कंजन एंड प्रोडक्शन टॉक्स अबाउट द फॉलोइंग किन-किन चीजों के बारे में यह बताता है नंबर वन है द 10 ईयर फ्रेमवर्क ऑफ प्रोग्राम ऑन सस्टेनेबल कंजन एंड प्रोडक्शन पैटर्न शुड बी इंप्लीमेंटेड 10 ईयर प्रोग्राम इंप्लीमेंट करना चाहिए प्रोडक्शन पैटर्न और कजम के लिए विद इंडस्ट्रीज नेशन लीडिंग द वे वाइल ऑल टेकिंग डेवलपिंग नेशन कैपेसिटीज एंड डेवलपमेंट इनटू कंसीडरेशन जिसमें जो डेवलप्ड नेशन है व वे बनाएंगे और जो डेवलपिंग नेशन है उसे फॉलो करेंगे नेक्स्ट और किस चीज पर बात करी गई है अटन सस्टेनेबल मैनेजमेंट एंड एफिशिएंट यूटिलाइजेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेस बाय
2030 जो सस्टेनेबल और एफिशिएंट तरीके से नेचुरल रिसोर्सेस का यूज करना है 2030 उसके अलावा अटन एनवायरमेंटल रिस्पांसिबल मैनेजमेंट ऑफ केमिकल एंड ऑल फॉर्म ऑफ वेस्ट बाय 2020 फॉलोइंग स्टेबलाइज इंटरनेशनल फ्रेमवर्क और क्या बोला है एक एनवायरमेंटल रिस्पांसिबल मैनेजमेंट होना है जो भी केमिकल और वेस्ट है 2020 तक का उसे मैनेज करना है फ रिड्यूस वेस्ट प्रोडक्शन बाय 2030 बाय इंप्लीमेंटिंग यूज रिसाइकल प्रिवेंशन एंड रिडक्शन प्रोसेस 2030 तक कम से कम वेस्ट जनरेट होने देना है और यूज रि साइकलिंग प्रिवेंशन ए रिडक्शन प्रोसेस का यूज करना है फिर फस्टर द एडॉप्शन ऑफ सस्टेनेबली प्रैक्टिस बाय
कंपनी पर्टिकुलर बाय लार्ज एंड ट्रांजैक्शनल एंटिटी जो कंपनीज है उन्हें भी सस्टेनेबल प्रैक्टिस का यूज करना है लार्ज और जो ट्रांजैक्शनल एंटिटी है पर्टिकुलर उन्हें और बाकी स्मॉल को भी करने है इसके अलावा हमें पढ़ना है एचडीजी 17 के बारे में जो कि है पार्टनरशिप फॉर द गोल तो गोल 17 पार्टनरशिप फॉर द गोल टॉक्स अबाउट द फॉलोइंग टारगेट ये किन किन चीजों के बारे में बात करता है पहला आगा स्टेटन डोमेस्टिक रिसोर्स मोबिलाइजेशन थ्रोस इंटरनेशनल सपोर्ट टू डेवलपिंग कंट्रीज टू इंप्रूव डोमेस्टिक कैपेसिटी फॉर टैक्स एंड अदर रेवेन्यू कलेक्शन इसमें क्या बोला है कि जो
रिसोर्स का मोबिलाइजेशन है उसे स्थन करना है जिससे क्या हो इंटरनेशनल सपोर्ट मिले डेवलपिंग कंट्रीज को और डोमेस्टिक कैपेसिटी में टैक्स से रिलेटेड और रेवेन्यू कलेक्शन से रिलेटेड उन्हें बेनिफिट मिल सके फिर स्टेबलाइज एंड पुट इफेक्ट पॉलिसी दैट इनकरेज इन्वेस्टमेंट इन लीस्ट डेवलप्ड कंट्रीज ऐसी पॉलिसी और प्रोसीजर्स बनाने हैं जिससे जो लीस्ट डेवलप्ड कंट्रीज आंगी उनके अंदर इन्वेस्टमेंट की को इनकरेज किया जा सके फिर इनकरेज द डेवलपमेंट ट्रांसफर डिस्में एंड डिफ्यूजन ऑफ एनवायरमेंटल फ्रेंडली टेक्नोलॉजी टू डेवलपिंग नेशन डेवलपिंग किस चीज को इनकरेज करा जा सके जो डेवलपिंग नेशन है उनके अंदर ट्रांस ट्रांसफर हो डेवलपमेंट
हो डिस्में हो और डिफ्यूजन हो किस चीज का एनवायरमेंटल फ्रेंडली टेक्नोलॉजी का डेवलपिंग नेशन के अंदर वो चीज को इनकरेज करना है फिर स्थन द गोल पार्टनरशिप फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट कंप्लीमेंटेड बाय मल्टी स्टेकहोल्डर पार्टनरशिप दैट मोबिलाइज एंड शेयर नॉलेज एक्सपर्टीज टेक्नोलॉजी एंड फाइनेंशियल रिसोर्स टू सपोर्ट द अचीवमेंट ऑफ सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल इन ऑल कंट्री इन पर्टिकुलर डेवलपिंग कंट्रीज और क्या करना है ग्लोबल पार्टनरशिप को स्थन करना है जिसके अंदर जो डेवलप्ड कंट्रीज आंगी वो अपने रिसोर्सेस कैपेबिलिटीज फाइनेंशियल रिसोर्स सपोर्ट टेक्नोलॉजी इन सारी चीजों की एक्सेस किसे प्रोवाइड करवाएंगे डेवलपिंग कंट्रीज को प्रोवाइड करवाएंगे जिससे वो
भी सस्टेनेबल डेवलपमेंट कर सके तो यह था आपका एचडीजी 17 के टारगेट्स ठीक है नेक्स्ट है आपका बिजनेस एंड सस्टेनेबिलिटी तो बिजनेस सर्व एज अ इंपोर्टेंट सोर्स ऑफ एंप्लॉयमेंट क्रिएटिव थिंकिंग आर एनडी मैन्युफैक्चरिंग कमर्शल एंड इनकम जनरेशन बिजनेस को क्या माना जाता है यह एंप्लॉयमेंट का एक सोर्स है क्रिएटिव थिंकिंग होती है रिसर्च एंड डेवलपमेंट होती है मैन्युफैक्चरिंग होती है कमर्शल होता है और इनकम जनरेशन का एक तरीका है बिजनेस अन डाउट प्ले अ क्रुशल रोल इन अचीविया गए हैं वह किसकी मदद से बिजनेस की मदद से ही अचीव किए जा सकते हैं दिस गोज
बियोंड सिंपली क्रिएटिंग मोर नॉलेज टूल पर्सनल ऑपरेशन एंड प्रैक्टिसेस इट फोकस आल्सो ऑन टे टॉकिंग डिप्रेसिव इंप्रूविंग प्रोपेंसिटी रिड्यूस इक्वलिटी एंड प्रोटेक्टिंग द एक्सटर्नल एनवायरमेंट सिर्फ नॉलेज देने के टूल्स के पर्सनल प्रैक्टिस इन सारी चीजों के अलावा भी बिजनेस किस चीज में हेल्प करता है प्रोपेंसिटी को इंप्रूव करने में इक्वलिटी को रिड्यूस करने में और एक्सटर्नल एनवायरमेंट को प्रमोट करने में भी बिजनेस हेल्प करते हैं तो यह आपका एक रिलेशन क्रिएट हो जाता है इस वजह से बिजनेस एंड सस्टेनेबिलिटी के कि अगर हमें सस्टेनेबिलिटी अचीव करनी है तो उसमें बिजनेस का एक रोल आपका होता
है तो देखिए दोस्तों यहां पर आपकी जो य यूनिट नंबर फाइव है इसकी वन शॉट रिवीजन वीडियो खत्म हो जाती है सारा कंटेंट आपको कवर करवा दिया गया है होप सो आप सभी के लिए वीडियो यूजफुल रही होगी आप लोगों को पसंद आई होगी वीडियो अच्छी लगी हो वीडियो को लाइक करना ना भूलें चैनल को जरूर सब्सक्राइब कर लें और वीडियो को अपने सभी दोस्तों के साथ शेयर जरूर कर दें थैंक यू