सच बोलूं? गरीबी सबसे ज्यादा उस इंसान को पकड़ कर रखती है जो जल्दी अमीर बनना चाहता है। इंटरनेट पर हर कोई चिल्ला रहा है। ट्रेडिंग करो, क्रिप्टो लो, साइड इनकम बनाओ, यूनिवर्स से मांगो। लेकिन वारेन बफेट जैसे लोग इन सब बातों पर हंसते हैं क्योंकि वह जानते हैं अमीर बनने का रास्ता सोच बदलने से नहीं सिस्टम बनाने से बनता है। आज इस वीडियो में मैं तुम्हें कोई सपना नहीं बेचूंगा। मैं तुम्हें बताऊंगा नौ ऐसे काम जो अगर तुमने सच में शुरू कर दिए तो तुम्हारी [संगीत] जिंदगी की डायरेक्शन बदल जाएगी। ना रातों रात ना छ
महीने में लेकिन पक्का बदलेगी। नंबर एक गरीबी पैसे की कमी नहीं डिसिप्लिन की कमी है। सच बोलूं तो गरीबी की शुरुआत तब नहीं होती जब जेब खाली होती है। गरीबी की शुरुआत तब होती है जब दिमाग बिखरा हुआ होता है। ज्यादातर लोग सोचते [संगीत] हैं अगर मेरे पास पैसे होते तो मैं सब ठीक कर लेता। लेकिन हकीकत यह है अगर तुम्हारे पास डिसिप्लिन नहीं है तो पैसे आकर भी ज्यादा देर नहीं टिकते। आज ध्यान से अपने आसपास देखो। कितने लोग ऐसे हैं जो कहते हैं भाई सैलरी कम है। भाई सिस्टम खराब है। भाई मौके नहीं
मिलते। लेकिन वही लोग मोबाइल बदलते रहते हैं। बेवजह खर्च करते हैं। हर महीने एंड में रोते हैं। यही असली गरीबी है। गरीबी कोई एक्सीडेंट नहीं होती। गरीबी एक डेली रूटीन है। हर बार बिना सोचे खर्च करना। हर बार फ्यूचर के लिए कुछ ना बचाना। हर बार अभी जी लेते हैं बोलना। यह सब छोटे-छोटे [संगीत] डिसीजन मिलकर जिंदगी को बड़ा नुकसान देते हैं। अब वारेन बफेट को देखो। वो दुनिया के सबसे अमीर लोगों में हैं। लेकिन उनका लाइफस्ट आज भी एवरेज [संगीत] इंसान से ज्यादा फ्लैशी नहीं है। क्यों? क्योंकि उन्होंने बहुत पहले यह समझ लिया था।
पैसा कमाने से पहले पैसे को कंट्रोल करना सीखना पड़ता है। अगर तुम ₹100 में डिसिप्लिन [संगीत] नहीं रख सकते तो ₹1 लाख तुम्हें डिसिप्लिन नहीं बना देगा। अगर तुम ₹100 बचाने [संगीत] की आदत नहीं डाल सकते तो लाखों भी हाथ से निकल जाएंगे। लोग कहते हैं जब इनकम बढ़ेगी तब सेविंग करेंगे। नहीं यही सोच तुम्हें सालों तक गरीब रखेगी। सच यह है सेविंग इनकम से नहीं कैरेक्टर से आती है। अब एक अनकंफर्टेबल सवाल ईमानदारी से अपने आप से पूछो। क्या तुम्हें पता है पिछले महीने तुम्हारा पैसा कहां-कहां गया? क्या तुम खर्च लिखते हो? या बस
अंदाजे में जीते हो। क्या तुम हर महीने कुछ ना कुछ एक्स्ट्रा खरीद लेते हो? सिर्फ इसीलिए क्योंकि मन कर गया अगर जवाब हां है तो समस्या पैसा नहीं डिसिप्लिन है। गरीबी इसलिए नहीं आती कि लोग कम कमाते हैं। गरीबी इसलिए आती है क्योंकि लोग अपनी इनकम से तेज दौड़ते हैं। आजकल लोग फ्यूचर की चिंता नहीं करते लेकिन ईएमआई की आदत डाल [संगीत] लेते हैं। टीवी ईएमआई, मोबाइल ईएमआई, बाइक ईएमआई धीरे-धीरे पूरी सैलरी पहले ही बिक चुकी होती है। यह मॉडर्न स्लेवरी है और लोग इसे लाइफस्टाइल बोलते हैं। बफेट हमेशा कहते हैं खर्च करने के बाद
जो बचे उसे मत बचाओ। [संगीत] बचाने के बाद जो बचे उसे खर्च करो। इसका मतलब समझो। पहले अपने फ्यूचर को पैसा दो फिर प्रेजेंट में जियो। लेकिन ज्यादातर लोग प्रेजेंट को सब कुछ दे देते [संगीत] हैं और फ्यूचर से कहते हैं देख लेंगे यही देख लेंगे। 30-40 साल में पछतावे में बदल जाता है। अगर तुम सच में गरीबी से बाहर निकलना चाहते हो तो पहला काम कोई बिजनेस नहीं। कोई ट्रेडिंग नहीं। कोई स्कीम नहीं है। पहला काम है खुद पर कंट्रोल। खर्च से पहले सोचो। जरूरत और चाहत में फर्क करो। डिसिप्लिन को हैबिट बनाओ। जब
तक यह नहीं आएगा तब तक कोई पैसा तुम्हारा दोस्त नहीं बनेगा। नंबर एक का फाइनल ट्रथ। गरीबी कोई हालात नहीं। गरीबी एक आदत है और अमीरी कोई लक नहीं। अमीरी भी एक आदत [संगीत] है। फर्क सिर्फ इतना है। कौन सी आदत? तुम रोज प्रैक्टिस कर रहे। नंबर दो। इनकम नहीं वैल्यू बढ़ाओ। पैसा अपने आप पीछे आएगा। सच बोलूं तो ज्यादातर लोग पूरी जिंदगी एक ही गलती करते रहते हैं। वह पैसा बढ़ाने की सोचते हैं खुद को बढ़ाने की नहीं। लोग रोज पूछते हैं भाई एक्स्ट्रा इनकम कैसे बने? भाई साइड इनकम बता दो। भाई जल्दी पैसे
कैसे आएंगे? लेकिन कोई यह नहीं पूछता। मैं ऐसा क्या सीखूं कि लोग मुझे पैसे देने को मजबूर हो जाए। यही फर्क है। गरीब सोच और अमीर सोच में। [संगीत] अब एक कड़वा सच सुनो। पैसा इंसान को नहीं देखता। पैसा वैल्यू को देखता है। अगर तुम्हारी वैल्यू कम है तो दुनिया तुम्हें सस्ता खरीदेगी। अगर तुम्हारी वैल्यू ज्यादा है तो दुनिया तुम्हें अफोर्ड करने की कोशिश करेगी। आज तुम ₹15,000 कमाते हो, ₹25,000 कमाते हो, ₹500 कमाते हो। यह तुम्हारी औकात नहीं है। यह तुम्हारी वैल्यू का प्राइस [संगीत] टैग है। अब सवाल आता है, वैल्यू होती क्या है?
वैल्यू मतलब तुम कौन सी प्रॉब्लम [संगीत] सॉल्व कर सकते हो? तुम कितनी मुश्किल प्रॉब्लम सॉल्व कर सकते हो? और कितने कम लोग वह काम कर सकते हैं? अगर तुम्हारा काम हर कोई कर सकता है तो तुम्हारी इनकम हमेशा एवरेज रहेगी। आज जरा ईमानदारी से सोचो। अगर तुम कल जॉब छोड़ दो तो तुम्हारी जगह कितने दिन में कोई और आ जाएगा? अगर जवाब है एक हफ्ते में या एक महीने में तो समझ लो तुम रिप्लेसेबल हो और रिप्लेसेबल लोग कभी रिच नहीं बनते। हार्ड रियलिटी यह है। स्कूल और कॉलेज हमें सिर्फ एंप्लॉय बनना सिखाते हैं। वैल्यूुएबल
बनना नहीं। हमें बताया जाता है डिग्री लो, मार्क्स लाओ, जॉब पकड़ो। लेकिन यह नहीं बताया जाता रेयर कैसे बनते हैं। बहुत पहले समझ लिया गया था। पैसा उन्हीं के पास जाता है जो अलग सोचते हैं और अलग वैल्यू क्रिएट करते हैं। अब ध्यान से सुनो। अगर तुम दिन भर सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हो तो तुम्हारी वैल्यू वही रहेगी जो हर स्क्रॉल करने वाले की है। अगर तुम दिन में एक घंटा भी किसी स्किल पर लगाते हो तो एक साल बाद तुम भीड़ से अलग [संगीत] दिखने लगते हो। प्रॉब्लम यह है लोग मेहनत से नहीं डरते।
लोग स्लो रिजल्ट्स से डरते हैं। लोग चाहते हैं आज सीखा कल पैसा लेकिन वैल्यू ऐसे नहीं बनती। वैल्यू बनती है जब तुम बिना पैसे के भी सीखने को तैयार रहते हो। शुरुआत में वैल्यू फ्री में बनती है। तभी बाद में महंगे दाम मिलते हैं। अब एक अनकंफर्टेबल सवाल तुम आखिरी बार कब अपने आप पर इन्वेस्ट किया था? कोई स्किल सीखी? कोई बुक पढ़ी? कोई रियल नॉलेज ली या फिर पूरा दिन यही सोचा यार टाइम नहीं मिलता। सच यह है टाइम नहीं प्रायोरिटी नहीं मिलती। जो लोग कहते हैं मेरे पास सीखने का टाइम नहीं मैं वही
लोग 3 घंटे मोबाइल पर वेस्ट कर देते हैं। वैल्यू बनाने के लिए एक्स्ट्रा टाइम नहीं चाहिए। [संगीत] डिफरेंट चॉइस चाहिए। अब एक और हार्ड ट्रुथ। अगर तुम्हारी इनकम सालों से सेम लेवल पर है तो इसका मतलब है तुम वही इंसान बने हुए हो जो तुम तीन-चार साल पहले थे। ग्रोथ बाहर नहीं रुकी। [संगीत] ग्रोथ तुम्हारे अंदर रुकी है। लॉन गटर्म खेलने वाले लोग ऐसी चीज सीखते हैं जो सालों तक काम आए। वो ट्रेंड नहीं पकड़ते। वो प्रिंसिपल पकड़ते हैं और यही वजह है कि उनका पैसा समय के साथ [संगीत] बढ़ता चला जाता है। नंबर दो
का फाइनल ट्रुथ। पैसा गोल नहीं है। पैसा रिवॉर्ड [संगीत] है। रिवॉर्ड उन्हें मिलता है जो खुद को इतना वैल्यूुएबल बना लेते हैं कि दुनिया इग्नोर नहीं कर पाती। अगर तुम आज अपनी वैल्यू बढ़ाने का फैसला नहीं करोगे तो कल तुम्हारी इनकम। नंबर तीन जल्दी अमीर बनने की सोच सबसे खतरनाक गरीबी की [संगीत] आदत। सच बोलूं तो अगर कोई एक सोच है जो इंसान को जिंदगी भर गरीब रखती है तो वह है जल्दी अमीर बनना है। यह सोच बाहर से इनोसेंट लगती है लेकिन अंदर से यह पूरी जिंदगी को खोखला [संगीत] कर देती है। आज हर
दूसरा इंसान एक ही सवाल पूछ रहा है। भाई जल्दी पैसा [संगीत] कैसे आए? भाई 6 महीने में लाइफ सेट कैसे हो? भाई कौन सा शॉर्टकट है? और यही सवाल उसे गलत जगह ले जाता है। जरा ध्यान से सोचो। अगर जल्दी अमीर बनना इतना आसान होता तो सबसे पहले गरीब लोग अमीर होते। लेकिन रियलिटी यह है सबसे ज्यादा जल्दी अमीर बनने की कोशिश गरीब ही करते हैं और सबसे ज्यादा पैसा वही लोग खोते हैं। क्यों? क्योंकि जल्दी अमीर बनने की सोच पेशेंस को मार देती है। अब ट्रेडिंग, क्रिप्टो वेटिंग की बात करें। [संगीत] यह सब टूल्स
हैं। लेकिन जब इन्हें शॉर्टकट समझ लिया जाता है तो यह ट्रैप बन जाते हैं। लोग मार्केट को नहीं सीखते। लोग बस रिजल्ट चाहते हैं और मार्केट रिजल्ट नहीं देती। मार्केट डिसिप्लिन देती है। जो डिसिप्लिन नहीं सीखता उसका पैसा डिसिप्लिन सिखाकर चला जाता है। वारेन बफेट को देखो। उन्होंने कभी कहा मैं जल्दी अमीर बनूंगा। नहीं। उन्होंने कहा मैं अच्छे बिजनेस खरीदूंगा और उन्हें टाइम दूंगा। उनकी सबसे बड़ी [संगीत] ताकत उनकी इंटेलिजेंस नहीं उनकी पेशेंस है। अब एक हार्ड सवाल तुम कब तक आज नहीं तो कल जैकपॉट लगेगा। इस भरोसे जीते रहोगे। कब तक अगला ट्रेड कवर
कर लेगा? सोचते रहोगे यह सोच कैसीनो की सोच है। इन्वेस्टमेंट की नहीं जल्दी अमीर बनने वाला इंसान प्रोसेस से नफरत करता है। उसे रोज का काम बोरिंग लगता है। उसे स्लो ग्रोथ बेकार लगती है। लेकिन सच यह है बोरिंग काम सबसे ज्यादा पैसा बनाता है। रिच लोग बोरिंग चीजों में कंसिस्टेंसी रखते हैं। गरीब लोग एक्साइटिंग [संगीत] चीजों में पैसा जलाते हैं। अब यह भी समझ लो जल्दी अमीर बनने की सोच रिस्क नहीं सिखाती लालच सिखाती है। रिस्क कैलकुलेटिव होता है। लालच अंधा होता है। रिस्क प्लान के साथ लिया जाता है। लालच इमोशन में और इमोशन
से लगाया गया पैसा इमोशन के साथ चला जाता है। आज सोशल मीडिया पर देखो कोई एक ट्रेड दिखा देता है। कोई एक प्रॉफिट दिखा देता है। कोई कार की रील डाल देता है। लेकिन कोई यह नहीं दिखाता कितने साल लगे। कितनी बार लॉस हुआ। कितनी बार पेशेंस टूटा। लोग हाईलाइट देखते हैं। जर्नी नहीं। बफेट का एक रूल है। नेवर लूज मनी। और दूसरा नेवर फॉरगेट रूल नंबर वन। इसका मतलब कि लॉस कभी होगा ही नहीं। इसका मतलब है वो ऐसे शॉर्टकट नहीं लेते जहां लॉस ऑलमोस्ट गारंटीड हो। नंबर तीन का फाइनल ट्रुथ जल्दी अमीर बनने
की सोच अक्सर जल्दी गरीब बना देती है। जो इंसान टाइम को रिस्पेक्ट नहीं करता पैसा उसे [संगीत] कभी रिस्पेक्ट नहीं करता। अगर तुम सच में गरीबी से बाहर निकलना चाहते हो तो शॉर्टकट छोड़ो। प्रोसेस पकड़ो। नंबर चार पैसा शोर पसंद नहीं करता। शौफ गरीबों की आदत है। एक बात ध्यान से सुनो। पैसा कभी शोर मचाकर नहीं आता। लेकिन शोर मचाने वालों से पैसा सबसे पहले भागता है। [संगीत] आज की दुनिया में सबसे बड़ा इल्लुजन यही है। दिखना, होना। अगर कोई महंगी गाड़ी में है, महंगे कपड़े पहने हैं, महंगे कैफे में बैठा है तो लोग मान
लेते हैं भाई अमीर है। लेकिन रियलिटी बिल्कुल उलटी है। असली अमीर लोग दिखने में सिंपल होते हैं और फेक अमीर दिखने में एक्सपेंसिव। [संगीत] क्यों? क्योंकि असली अमीर फ्यूचर के लिए पैसा बचाता है और फेक अमीर प्रेजेंट दिखाने में पैसा जला देता है। अब अपने आसपास देखो कितने लोग हैं जो सैलरी आते ही नया फोन नए कपड़े का ईएमआई पर चीजें ले लेते हैं और फिर कहते हैं भाई पैसा टिकता ही नहीं। पैसा इसलिए नहीं टिकता क्योंकि तुम उसे रिस्पेक्ट नहीं देते। शो ऑफ क्या है? शो ऑफ है उन चीजों पर पैसा खर्च करना जो
तुम्हें इंप्रेस नहीं करती लेकिन दूसरों को दिखानी होती हैं। शो ऑफ तुम्हें दो दिन की तारीफ देता है। लेकिन 20 साल की ईएमआई वारेन बफेट को देखो। दुनिया के टॉप रिचेस्ट लोगों में है। फिर भी वही पुराना घर वही सिंपल लाइफस्ट। क्यों? क्योंकि उन्हें लोगों को नहीं नंबर्स को इंप्रेस करना है। हार्ड रियलिटी यह है। मिडिल क्लास को सबसे ज्यादा डैमेज स्टेटस सिंबल ने किया है। लोग फ्यूचर सैक्रिफाइस करके प्रेजेंट का ड्रामा करते हैं और फिर कहते हैं यार लक साथ नहीं देता। लक नहीं बजट साथ नहीं देता। एक और कड़वा सच। शो ऑफ हमेशा
इनसिक्योरिटी से आता है। जिसे अंदर से कॉन्फिडेंस होता है, उसे बाहर से साबित नहीं करना पड़ता। रिच लोग शांत होते हैं। फेक रिच बहुत लाउड होते हैं। सोशल मीडिया ने इस बीमारी को और बढ़ा दिया है। हर कोई हाईलाइट डाल रहा है। कोई रियलिटी नहीं। लोग कंपटीशन में खुद को बैंकरप्ट कर रहे हैं। अब अपने आप से एक सवाल पूछो। अगर कल सोशल मीडिया बंद हो जाए तो क्या तुम्हारी लाइफस्ट फिर भी वही रहेगी? अगर जवाब नहीं है तो समझ लो। तुम दूसरों के लिए जी रहे हो। बफेट का रूल सिंपल है। पहले एसेट्स बाद
में लग्जरी। गरीब आदमी पहले लग्जरी लेता है। फिर एसेट्स का सपना देखता है। नंबर चार की फाइनल ट्रुथ। शो ऑफ एक स्लो पोइजन है। यह तुम्हें अमीर दिखा सकता है। लेकिन अमीर कभी नहीं बना सकता। अगर तुम्हें पैसा चाहिए तो शोर कम करो। डिसिप्लिन बढ़ाओ। नंबर पांच। एक ही इनकम सोर्स सबसे शांत लेकिन सबसे खतरनाक जाल। सच बोलूं तो एक ही इनकम सोर्स होना आज के जमाने में [संगीत] सेफ नहीं स्लो सुसाइड है। लोग इसे सिक्योरिटी समझते हैं। लेकिन यही सिक्योरिटी एक दिन सबसे बड़ा डर बन जाती है। जरा सोचो अगर कल तुम्हारी जॉब चली
[संगीत] जाए या बिजनेस रुक जाए तो कितने महीने? तुम नॉर्मल रह पाओगे। एक महीना, दो महीने या एक हफ्ता। यही सवाल तुम्हारी फाइनेंशियल रियलिटी दिखाता है। स्कूल हमें सिखाता है। पढ़ो, जॉब लो, सेटल हो जाओ। लेकिन कोई यह नहीं सिखाता। एक जॉब चली भी जा सकती है। कोविड ने लाखों लोगों को यह बात एक [संगीत] झटके में सिखा दी। वारेन बफेट ने कभी एक ही इनकम पर भरोसा नहीं किया। उन्होंने ओनरशिप बनाई। कंपनियों में हिस्सेदारी कार [संगीत] बिजनेस में स्टेक पड़ता है। लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट असर्स। यही वजह है कि उनके पैसे के कई रास्ते हैं।
एक इनकम सोर्स क्यों खतरनाक है? क्योंकि तुम्हारी सारी जिंदगी एक डिसीजन मेकर के हाथ में [संगीत] होती है। बॉस का मूड कंपनी का प्रॉफिट ए मार्केट का स्लो डाउन और तुम्हारी इनकम शून्य भी हो सकती है। मिडिल क्लास ट्रैप यही है। लोग जॉब को भगवान मान लेते हैं। जबकि जॉब [संगीत] सिर्फ एक टूल है। गोल नहीं अब एक हार्ड ट्रुथ। मल्टीपल इनकम का मतलब यह नहीं कि 10 काम एक साथ करो। इसका मतलब है एक इनकम से शुरू करके धीरे-धीरे ओनरशिप बनाओ। साइड इनकम ईगो नहीं। सिक्योरिटी है। [संगीत] लोग कहते हैं टाइम नहीं मिलता। लेकिन
Netflix के लिए टाइम है। स्क्रोलिंग के लिए टाइम है। कंप्लेन के लिए टाइम है। प्रॉब्लम टाइम नहीं प्रायोरिटी है। बफेट पहले इनकम बचाते हैं। फिर उसी इनकम से दूसरी इनकम बनाते हैं। [संगीत] गरीब आदमी पहली इनकम को ही पूरा उड़ा देता है। एक और कड़वा सच। मल्टीपल इनकम ओवरनाइट नहीं बनती। लेकिन जो लोग आज शुरू नहीं करते वो कल मजबूर हो जाते हैं। नंबर पांच की फाइनल ट्रुथ। एक इनकम सोर्स तुम्हें चलने देता है लेकिन मल्टीपल इनकम तुम्हें उड़ने देता है। सिक्योरिटी नौकरी नहीं कंट्रोल है। नंबर छह सेविंग नहीं। स्मार्ट सेविंग पैसा कैसे जिंदा किया
जाता है? सच बोलूं तो ज्यादातर लोग पूरी जिंदगी सेविंग करते रहते हैं लेकिन अमीर नहीं बनते। क्यों? क्योंकि उन्होंने कभी पैसे को काम पर लगाया ही नहीं। लोग गर्व से कहते हैं भाई मैंने पैसे बचा लिए। [संगीत] लेकिन यह नहीं सोचते। क्या मेरा पैसा भी मेरे लिए मेहनत कर रहा है? अगर जवाब नहीं है तो वह पैसा मरा हुआ है। सेविंग और स्मार्ट सेविंग में फर्क समझो। सेविंग पैसा रोक लेना। स्मार्ट सेविंग पैसा बढ़ा देना। सेविंग डर से आती है। स्मार्ट सेविंग समझ से आती है। मिडिल क्लास की सबसे बड़ी गलती। वो पैसा [संगीत] सिर्फ
बैंक अकाउंट में रखते हैं। लेकिन बैंक तुम्हारे पैसे को सिर्फ पार्किंग देता है। ग्रोथ नहीं। वारेन बफेट ने कैश को कभी आइडल नहीं बनाया। उन्होंने कैश को वर्कर बनाया। वह पैसा बैठाकर नहीं रखते। वो पैसा लगाते हैं जहां वैल्यू बढ़े। अब एक हार्ड क्वेश्चन। तुम्हारे पास जो पैसा है वो 5 साल बाद ज्यादा होगा या कम? अगर इनफ्लेशन से कम बढ़ रहा है तो समझ लो। तुम पीछे जा रहे हो। स्मार्ट सेविंग का [संगीत] पहला रूल पहले खुद को पे करो। सैलरी आई सेविंग इन्वेस्टमेंट खर्च लेकिन ज्यादातर लोग करते हैं सैलरी आई खर्च जो बचे
वो सेविंग [संगीत] और अक्सर कुछ बचता ही नहीं। दूसरा रूल रिस्क और गैंबल में फर्क। स्मार्ट सेविंग प्लान के साथ होती है। इमोशन के साथ नहीं। लोग कहते हैं यार पैसा डूब जाएगा। लेकिन पैसा ना लगाने पर भी धीरे-धीरे [संगीत] डूबता है। तीसरा रूल कंसिस्टेंसी अमाउंट से बड़ी होती है। ₹500 हर महीने [संगीत] सही जगह लगाया जाए तो वह ₹1000 एक बार से ज्यादा पावरफुल है। लेकिन लोग कंसिस्टेंसी से डरते हैं। उन्हें एक्साइटमेंट चाहिए। अब एक और कड़वा सच। सेविंग बोरिंग है। इसीलिए ज्यादातर लोग अमीर नहीं बनते। रिच लोग बोरिंग काम लंबे समय तक करते
हैं। बफेट कहते हैं कंपाउंड इंटरेस्ट दुनिया का आठवां अजूबा है। लेकिन कंपाउंड तभी काम करता है जब उसे टाइम दिया जाए। नंबर छह की फाइनल ट्रुथ। पैसा बचाना जरूरी है लेकिन पैसा बढ़ाना और ज्यादा जरूरी है। जो पैसा तुम्हारे लिए काम नहीं करता वो एक दिन तुम्हें काम करने पर मजबूर करेगा। नंबर सात गलत लोगों के साथ रहने की कीमत जो तुम्हें कभी अमीर नहीं बनने देगी। सच बोलूं तो तुम्हारी गरीबी या अमीरी सबसे पहले तुम्हारे बैंक बैलेंस से नहीं तुम्हारी कंपनी से शुरू होती है। लोग कहते हैं भाई मैं स्ट्रांग हूं मुझ पर कोई
असर नहीं पड़ता। यह सबसे बड़ा झूठ है। इंसान चाहे जितना स्ट्रांग हो जिस माहौल में रोज बैठता है, वैसा ही बन जाता है। अब अपने डेली सर्कल को देखो। कौन लोग हैं? क्या बातें करते हैं? किस चीज की चर्चा ज्यादा होती है? अगर वहां सिर्फ शिकायत, सिर्फ मजाक, सिर्फ दूसरों की बुराई है तो समझ लो तुम्हारी ग्रोथ धीरे-धीरे मर रही है। गलत लोग कौन होते हैं? गलत लोग वो नहीं जो गरीब हैं। गलत लोग [संगीत] वो हैं जो गरीबी को नॉर्मल मान चुके हैं। जो कहते हैं इतना तो चलता है। सब ऐसे ही हैं। अमीर
बनना हमारे बस का नहीं। यह बातें स्लो पोइजन है। वारेन बफेट हमेशा कहते हैं, हैंग आउट विद पीपल बेटर देन यू। मतलब उनके साथ रहो जो तुमसे आगे हैं ना कि उनके साथ जो तुम्हें नीचे खींचते हैं। अब एक अनकंफर्टेबल सच। गलत लोग तुम्हें सीधे रोकते नहीं। वो तुम्हें धीमा करते हैं। वो कहते हैं अरे चिलकर इतना सीरियस मत बन। जिंदगी जी [संगीत] भी ले और धीरे-धीरे तुम अपने गोल्स पोस्टपोन करते रहते हो। सबसे डेंजरस लोग कौन हैं? जो तुम्हारे सपनों पर हंसते हैं। जो तुम्हें डराते हैं। जो तुम्हारी ग्रोथ से जलते हैं। यह लोग
दुश्मन नहीं लगते। लेकिन सबसे ज्यादा डैमेज यही करते हैं। अब सोशल मीडिया की बात अगर तुम दिन भर ऐसे लोगों को फॉलो करते हो जो सिर्फ लग्जरी दिखाते हैं प्रोसेस नहीं तो तुम मेंटली गलत सर्कल में हो। रिच लोग हर किसी के साथ कंफर्टेबल नहीं होते। वह सिलेक्टिव होते हैं। गरीब आदमी हर किसी के साथ एडजस्ट [संगीत] करता है। नंबर सात की फाइनल ट्रुथ। तुम्हें मोटिवेट करने वाले लोग कम होंगे लेकिन कंफ्यूज करने वाले बहुत होंगे। अगर तुम्हें आगे जाना है तो अकेला चलना सीखो। गलत लोगों के साथ भीड़ में रहने से बेहतर है। सही
रास्ते पर अकेला रहना। नंबर आठ [संगीत] इमोशन नहीं रूल से पैसा चलता है। सच बोलूं तो पैसा कभी भी तुम्हारी मेहनत से नहीं जाता। पैसा हमेशा तुम्हारे इमोशन से जाता है। लोग कहते हैं भाई किस्मत खराब थी। भाई मार्केट ने धोखा दे दिया। लेकिन सच यह है मार्केट ने नहीं इमोशन ने धोखा दिया। अब जरा खुद को देखो। डर, लालच, जलन, एफओए यह चार इमोशंस पैसे के सबसे बड़े दुश्मन हैं। और मजे की बात यह है यह चारों तुम्हें बहुत इंटेलिजेंट फील कराते हैं। डर क्या करता है? डर तुम्हें जल्दी बाहर निकाल देता है। तुम
प्लान के बिना एग्जिट लेते हो और बाद में रिग्रेट करते हो। लालच क्या करता है? लालच तुम्हें लिमिट तोड़ने पर मजबूर करता है। थोड़ा और रुक जाता हूं। बस एक ट्रेड और और यही सबसे महंगा सेंटेंस बन जाता है। जलन क्या करती है? जलन तुम्हें दूसरों के रिजल्ट से तुलना कराती है। और कंपैरिजन गलत डिसीजन करवाता है। एफओएमओ क्या करता है? एफओ एमओ तुम्हें लेट एंट्री करवाता है और अर्ली लॉस। अब वारेन बफेट [संगीत] को देखो। वो कभी इमोशन में डिसीजन नहीं लेते। उनके पास रूल्स हैं। कब इन्वेस्ट करना है, कब नहीं करना, कब वेट
करना है और सबसे जरूरी कब कुछ नहीं करना। हार्ड रियलिटी यह है पैसा पेशेंस वालों से [संगीत] इंपेशेंट लोगों में जाता है। जो लोग हर रोज कुछ करना चाहते हैं वही लोग सबसे ज्यादा गलती करते हैं। रूल्स बोरिंग होते हैं। लेकिन रूल्स रिच बनाते हैं। इमोशन एक्साइटिंग होते हैं लेकिन इमोशन गरीब बनाते हैं। अब अपने आप से पूछो क्या तुम्हारे पास पैसे के रूल्स लिखे हुए हैं या तुम फील पर चलते हो? अगर तुम फील पर चलते हो तो मार्केट तुम्हें नचाएगी। नंबर आठ की फाइनल ट्रुथ इमोशन इंस्टेंट डिसीजन देता है। रूल लॉन्ग टर्म रिजल्ट
देता है। अगर पैसा कंट्रोल चाहिए तो पहले खुद पर कंट्रोल सीखो। नंबर नौ टाइम को हल्के में लेने वालों के पास पैसा कभी नहीं टिकता। सच बोलूं तो जिंदगी में दो ही चीजें ऐसी हैं [संगीत] जो एक बार चली जाए तो कभी वापस नहीं आती। टाइम और ओपोरर्चुनिटी पैसा वापस आ सकता है। इज्जत वापस आ सकती है। लेकिन जो समय चला गया वो सिर्फ पछतावा छोड़ता है। आज ज्यादातर लोग टाइम को ऐसे ट्रीट करते हैं जैसे अनलिमिटेड हो। अभी नहीं कल से शुरू करेंगे। थोड़ा बाद में और यही तीन वाक्य पूरी जिंदगी बर्बाद कर देते
हैं। हार्ड रियलिटी यह है गरीब लोग [संगीत] टाइम किल करते हैं। अमीर लोग टाइम इन्वेस्ट करते हैं। एक ही 24 घंटे दोनों को मिलते हैं। फर्क सिर्फ यह है कि कौन कैसे इस्तेमाल करता है। अब अपने डेली रूटीन को देखो। कितने घंटे मोबाइल, कितने घंटे सोच विचार, कितने घंटे एक्शन। अगर एक्शन सबसे कम है तो रिजल्ट भी सबसे कम होगा। वारेन बफेट की सबसे बड़ी ताकत उनका पैसा नहीं उनका टाइम पेशेंस है। उन्होंने दशकों तक एक ही चीज डिसिप्लिन के साथ की। जब दुनिया शॉर्ट टर्म में उलझी रही वो लॉन गटर्म बनाते रहे। टाइम का
एक ब्रूटल सच। टाइम स्लो नहीं करता। तुम स्लो करते हो। टाइम किसी का इंतजार नहीं करता लेकिन वह हर किसी को सेम चांस जरूर देता है। लोग कहते हैं मेरे पास रिसोर्सेज नहीं थे। लेकिन सच यह है तुम्हारे पास सबसे कीमती रिसोर्स था। समय और तुमने उसे वेस्ट कर दिया। अब एक और कड़वा सच। टाइम तभी वैल्यूुएबल लगता है जब वह निकल चुका होता है। जब हेल्थ चली जाती है। जब एनर्जी चली जाती है। जब ओपोरर्चुनिटीज निकल जाती हैं, तब लोग समझते हैं कि टाइम कितना इंपॉर्टेंट था। लेकिन स्मार्ट लोग समझ पहले जाते हैं रोते
बाद में नहीं। टाइम रिस्पेक्ट करने का मतलब यह नहीं कि 24 [संगीत] घंटे काम करो। टाइम रिस्पेक्ट करने का मतलब है जो करो जानबूझकर करो। स्क्रॉल भी करो तो कंट्रोल में काम भी करो। तो फोकस [संगीत] में नंबर नौ की फाइनल ट्रुथ जो इंसान आज को हल्के में लेता है कल उसे हल्के में ले लेता है। पैसा उन्हें मिलता है जो समय को सीरियस लेते हैं। बाकी लोग सिर्फ एक्सक्यूज छोड़ जाते हैं। [संगीत] मैंने तुम्हें कोई शॉर्टकट नहीं दिया। मैंने तुम्हें नौ काम बताए जो मुश्किल हैं लेकिन रियल हैं। अगर तुमने इन नौ बातों को
सिर्फ सुना नहीं बल्कि जिया तो आने वाले साल तुम्हें पहचान देंगे। गरीबी कंफर्ट देती है। अमीरी डिसिप्लिन मांगती है। अब चॉइस तुम्हारी है। मिलते हैं अगले वीडियो में। समय देने के लिए धन्यवाद।