प्यारे दोस्तों आज हम आपके लिए बहुत ही अनोखी कहानी लेकर आए हैं इस कहानी में शुरू से लेकर आखिर तक बहुत कुछ सीखने वाली बातें हैं कि कैसे एक खूबसूरत और मगरूर शहजादी थी जिसकी सवारी निकलने पर रास्ता खाली हो जाता था और जो भी शहजादी को देख लेता था उसकी आंखें निकाल दी जाती थी प्यारे दोस्तों कहानी को आखिर तक सुनिए बहुत ही मजेदार कहानी है तो चलिए अब कहानी को शुरू करते हैं मुल्क शाम की एक शहजादी जिसका नाम शहजादी गुलनार था शहजादी गुलनार बहुत हसीन और जमील थी मगर बहुत मगरूर और संगदिल
थी उसकी सवारी जिस वक्त शहर के बाजारों से गुजरती तो मकानों की खिड़कियां और दरवाजे बंद कर दिए जाते दुकानदार दुकानों के पर्दे गिरा देते राहगीर रास्ते से हटकर गली कचों में चले जाते और अगर इत्तेफाक से कोई रह जाता तो उसके लिए हुक्म था कि वह जमीन पर औंधे मुंह लेट जाए और इस हुक्म की खिलाफत करने वाले शख्स के लिए यह सजा मुकर्रर थी कि उसे चौराहे पर बने हुए चबूतरे पर खड़ा करके उसकी दोनों आंखों में तपती हुई सलाखों से चोट दी जाए एक रोज शहजादी गुलनार की सवारी बाजार से ऐसे ही
गुजर रही थी कि एक बूढ़ा राहगीर दूसरे रास्ते से इस बाजार में दाखिल हुआ सवारी तेजी से आ रही थी इसलिए राहगीर को इतना मौका ना मिल सका कि वह दौड़कर वापस उसी गली में चला जाए जब वह इस बाजार में आया था सर पर मछलियों से भरा हुआ टोकरा रखा था जिसे वह किसी के सहारे के बगैर सर से उतार भी नहीं सकता था अगर जमीन पर औंधे मुंह लेटने के लिए उसे फेंकता तो सड़क पर मछलियां फैल जाती गरीब मछुआरा घबराकर इधर-उधर देखने लगा कि अब कहां जाएं और क्या करें लेकिन कोई सूरत
नजर ना आई और संग दिल शहजादी के के संगदिल सिपाहियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया शहजादी ने उसे देखकर गुलामों को हुक्म दिया कि दस्तूर के मुताबिक दिन के बाद इसकी आंखें लोहे की गर्म सलाखों से फोड़ दी जाए इस हुक्म को सुनकर शहजादी के सिपाही ने सर झुकाकर कहा जो हुक्म शहजादी साहिबा मगर इस सजा को सुनकर बूढ़ा राहगीर थरथर कांपने लगा और हाथ जोड़कर शहजादी से कहने लगा ए मालिक ए शम शहजादी मुझ गरीब पर रहम करें मैंने आपको जानबूझकर हरगिज नहीं देखा ए शहजादी मेरी उम्र का तो ख्याल कीजिए और मुझ पर
रहम कीजिए शहजादी ने अपने सिपाहियों से कहा इस क बख्त की आंखें फोड़ दी जाए और फिर शहजादी की सवारी रवाना हो गई गरीब राहगीर रोता रह गया शहजादी और सिपाहियों से माफी की भीख मांगता रहा और उसके कांपते हुए हाथ टोकर को ना संभाल सके और टोकरा सर से गिर पड़ा सिपाही ने उसकी पीठ पर एक थप्पड़ मारते हुए कहा जंगली बूढ़े यह तूने क्या किया साफ सुथरी सड़क को गंदा कर दिया उठाओ मछलियों को गरीब मछुआरे की आंखों से आंसू बह रहे थे वह सजा की खौफ से जमीन पर बैठकर कांपते हुए हाथों
से मछलियां उठा उठाकर टोकरे में भरने लगा लेकिन हालत यह थी कि मछलियों को डालता टोकरी में था और वह नीचे गिरती थी जालिम सिपाही उसे गालियां दे रहे थे कि बूढ़े आदमी जल्दी कर जल्दी तुम्हें सजा देनी है तुम्हारे पास वक्त बहुत कम है मगर उसी वक्त एक लड़का जिसकी उम्र तकरीबन 18 बरस होगी उसकी तरफ से गुजरा और उस बूढ़े मछुआरे राहगीर पर तरस खाकर मछलियां टोकरे में भरने लगा सिपाहियों को यह बात बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा और उन्होंने लड़के को धकेल हुए कहा अरे ओ नालायक तुझे किसने कहा था कि तुम
मछलियां उठाकर टोकरी में रख दो लड़के ने उठते हुए कहा किसी गरीब बूढ़े इंसान का म मदद करना क्या जुर्म है इतनी सी बात को सुनकर एक सिपाही ने आगे बढ़कर उसके गाल पर एक जोरदार थप्पड़ मार दिया शहजादी की बेरहम सिपाहियों ने कहा खुद के होश और हवास का तो पता नहीं और हमें कानून बताता है चल अपना रास्ता ले फिर उस लड़के ने जाते-जाते मगरूर शहजादी के सिपाहियों को कहा कि जितना जुल्म करना है कर लो मरना तो है ही एक दिन और यह बात शहजादी को भी जाकर बता देना यह सुनकर सिपाहियों
का तो गुस्सा और सर पर चढ़ गया उस लड़के के मुंह से यह बात सुनकर वह बूढ़ा मछुआरा उठकर उस लड़के के पास आया और कहने लगा बेटा तुम्हारा यह दुआ जरूर कबूल होगा यह मगरूर शहजादी एक दिन जरूर तबाह और बर्बाद हो जाएगी उसके बाद फिर वह बूढ़ा मछुआरा जल्दी-जल्दी सारी मछलियां टोकरे में भर दी और सिपाही उस बूढ़े को महल में सजा देने के लिए लेकर गए इतने में शहजादी गुलनार बाजारों की सैर करने के बाद वापस अपने महल में पहुंची तब बादशाह के खास वजीर ने कहा शहजादी साहिबा मुझे तो इस बूढ़े
राहगीर पर तरस आ रहा है आप अपना हुक्म वापस ले लीजिए और इस गरीब फकीर को माफ कर दीजिए शहजादी बोली हरगिज नहीं जैसे तीर कमान से निकलने के बाद बाद कभी वापस नहीं आता उसी तरह हम अपना दिया हुआ हुक्म वापस नहीं ले सकते वजीर खामोश हो गया क्योंकि वह जानता था अगर शहजादी से ज्यादा बहस की तो अपने लिए भी किसी सजा का हुक्म हो जाएगा मगर वह वजीर दिल में यही कहता रहा कि खुदा करे कोई सूरत निकल आए और राहगीर की आंखें सलामत रह जाएं वरना वह बेचारा अपाहिज होकर रह जाएगा
उस मगरूर शहजादी का महल बादशाह के महल से बिल्कुल अलग था और इसके चारों तरफ बहुत सख्त पहरा था इंसान तो इंसान कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता था इसीलिए शहजादी अपने आलीशान म म कान में तन्हा सोती थी और खिड़कियां खुली रख देती ताकि बाहर की ताजी हवा अंदर आ जाए उस मगरूर शहजादी को अपनी जान की इतनी डर रहती थी कि वह रात को सोते वक्त भी अपने चारों तरफ नौकरों को पहरा देने के लिए रखती थी मगर एक रात कुछ ऐसा हुआ कि वह शहजादी ने नौकरों को कहा कि आज तुम
लोग मेरे पास मत रहो आज मैं अकेली ही सोऊंगीएस लड़के ने सिपाहियों को होशियार रहने की धमकी दी थी जिसने उस बूढ़े मछुआरे की मछली उठा कर दिए थे जिसके बारे में हमने आपको शुरू में बताया था वहीं लड़का जैसे-तैसे करके खिड़की के रास्ते अंदर दाखिल हुआ और एक कोने में खड़े होकर हर चीज को गौर से देखने लगा उसने देखा कमरे के दरमिया में एक खूबसूरत गुलदान रखा हुआ है जिसमें हर रंग और हर तरह के फूल लगे हुए हैं और उन्हीं फूलों पर सुर्ख रंग का एक हीरा रखा हुआ है और उसकी चमक
से सारा कमरा रोशन है कमरे में यूं तो हर चीज कीमती और निराली थी लेकिन जो बात उस हीरे में थी जो चमक उस लाल हीरे में थी वह किसी भी चीज में ना थी यह देखते हुए लड़के ने आगे बढ़कर हीरे को उठाया और अपनी माथे की पगड़ी में रख लिया उसी वक्त कमरे में अंधेरा हो गया और वह जीस रास्ते से आया था उसी रास्ते वापस चला गया रात के आखिरी पहर में जब शहजादी गुलनार की आंख खुली तो उसे कमरे में अंधेरा नजर आया वह घबराकर बिस्तर से उठ खड़ी हुई और एक-एक
चीज को टटोल हुई बड़ी मुश्किल से उस जंजीर तक पहुंची जिसे खींचने से महल की छत पर लटका हुआ घड़ियाल अर्थात घंटा बजने लगता था उसने जंजीर को जोर-जोर से खींचा और घंटा की आवाज दूर-दूर तक फैल गई गुलाम कनीज बांया और तमाम पहरेदार घबराकर शहज जादी के कमरे की तरफ भागे इधर बादशाह की आंख भी खुल गई और मल्लिका भी कलेजा पकड़कर बिस्तर से उठ खड़ी हुई और कहने लगी हाय हाय मेरी बच्ची को क्या हादसा पेश आ गया बादशाह की बीवी बादशाह से जोर-जोर से कहने लगी चलिए जल्दी कीजिए मेरे शहजादी गुलनार बेटी
को क्या हो गया फिर दोनों जल्दी-जल्दी बाहर निकले और तेज तेज कदम उठाते हुए शहजादी गुलनार के महल में पहुंचे शहजादी के कमरे में कोहराम मचा हुआ था शहजादी बहुत गुस्से में थी और तमाम नौकर हाथ जोड़कर कह रहे थे कि हमने महल में किसी को दाखिल होते नहीं देखा बादशाह ने आगे बढ़कर शहजादी से मालूम किया कि यहां कौन आया था और मेरी शहजादी आपको क्या नुकसान पहुंचाया है तब शहजादी ने कहा अब्बा हुजूर मेरे कमरे से हीरा गायब है और यह सब लोग कहते हैं यहां कोई नहीं आया बादशाह ने पहरेदार की तरफ
गुस्से की निगाह से देखा तो नौकरों ने कांपते कांपते कहा जहां पना हम एक पल के लिए भी गाफिल नहीं हुए और हमने किसी को यहां आते हुए नहीं देखा बादशाह ने कुछ सोचकर कहा ठीक है जाओ तुम सब सो जाओ और कल शाम तक चोर को तलाश करो अगर वह ना मिल सका तो तुम में से हर एक को सख्त सजा दी जाएगी नौकरों के जाने के बाद मल्लिका ने बादशाह से कहा मुझे यकीन है कि इनमें से एक भी आदमी चोर नहीं है जरूर बाहर से कोई आया है इसीलिए सुबह होते ही ऐलान
कर दीजिए कि चोर को गिरफ्तार करने वाले को बहुत बड़ा इनाम दिया जाएगा मगर बादशाह हैरान भी था और परेशान भी क्योंकि यह पहली चोरी थी जो उसके महल में हुई थी इसीलिए वह गर्दन लटकाए खामोश अपने महल की तरफ चल दिया और सुबह होते ही उसने ऐलान कर दिया कि जो भी शख्स शहजादी का गुमशुदा हीरा त तलाश करके बादशाह को पेश करेगा उसे मुंह मांगा इनाम दिया जाएगा दूसरे दिन बादशाह दरबार में बैठा हुआ फरियाद सुन रहा था कि एक खूबसूरत नौजवान लड़का सर पर पगड़ी पहने दरबार में दाखिल हुआ और तख्त के
सामने निहायत अदब से हाथ बांधे खड़े होकर सलाम किया बादशाह ने कहा तुम कौन हो और क्या चाहते हो वह कहने लगा बादशाह सलामत मैं शहजादी का अनमोल हीरा पेश करने आया हूं और ऐलान के मुताबिक मुंह मांगा इनाम हासिल करने के लिए यहां हाजिर हुआ हूं बादशाह ने कहा शाबाश कहां है वह हीरा उसने अपनी पगड़ी में से हीरा निकालकर निहायत अदब से बादशाह को दे दिया बादशाह उसे देखकर बहुत खुश हुआ और कहने लगा अब कहो इनाम में क्या चाहिए लड़के ने कहा बादशाह सलामत परसों शहजादी साहिबा ने एक गरीब और बूढ़े राहगीर
की आंखें फोड़ने का हुक्म दिया था उसे वापस लिया जाए और इन पांचों सिपाहियों की पीठ पर 100-100 कोंडे लगवाए जाए जिन्होंने राहगीर को गिरफ्तार किया और मुझे गालियां दी बादशाह ने कहा तुम्हारा इस राहगीर से क्या रिश्ता है लड़के ने जवाब दिया कुछ भी नहीं मुझे इसकी गरीबी और मजबूरी देखकर इसकी हालत पर रहम आता है उसने अगर शहजादी साहिबा को देख भी लिया था तो उस बेचारे के देखने से कौन सा असर पड़ सकता था बादशाह ने वजीर से कहा हमने इस राहगीर का कसूर माफ किया अब उसे आजाद कर दो और पांचों
सिपाही और इस लड़के को कैद खाने में डाल दो लड़के ने कहा बादशाह सलाम मेरा कसूर क्या है बादशाह ने कहा तुम चोर हो तुमने हीरा चुराया था लड़का कहने लगा मैंने तो राहगीर को आजाद कराने के लिए चोरी की थी बादशाह बोला अब सफाई की जरूरत नहीं लड़के ने कहा अगर मुझे कैद किया गया तो याद रखिएगा मैं आपके ताज की चोरी करूंगा और आप मुझे ना पकड़ सकेंगे बादशाह बोला नादान लड़के बेवकूफ ना बनो फिर उसने सिपाहियों को इशारा किया और वह उसे पकड़ कर ले गए वजीर ने जाकर राहगीर को आजाद किया
और पांचों सिपाहियों को 100-100 कोड़े लगवाए शहजादी हीरे को देखकर बहुत खुश हुई और बादशाह के गले में बाहें डालकर कहने लगी अब्बा जान इस चोर को सख्त से सख्त सजा दी जाए बादशाह ने कहा हमने उसे कैद खाने में भेज दिया है और अब सोच रहे हैं कल सुबह सबके सामने उसके दोनों हाथ कटवा दे ताकि देखने वालों को पता चले कि चोरी की सजा क्या है शहजादी कहने लगी अब्बा जान आपका फैसला बिल्कुल दुरुस्त है उसने आपका ताज चुराने की धमकी भी दी है बादशाह ने कहा मगर हमारे कमरे तक पहुंचने से पहले
ही उसके दोनों हाथ कटवा दिए जाएंगे फिर बादशाह ने वजीर को बुलाकर कहा आज शाम तक सारे शहर में ऐलान कर दो कि शहजादी का हीरा चुराने वाले चोर के दोनों हाथ कल सुबह कलम किए जाएंगे लिहाजा सब लोग जमा होकर यह तमाशा देखें वजीर ने कहा बहुत बेहतर है वाकई अगर इस लड़के को यह सजा ना दी गई तो वह बहुत बड़ा डाकू बन जाएगा फिर उसने जाकर इलाके में ऐलान करा दिया फिर वजीर कैद खाने में जाता है और चोर लड़के को बादशाह का फैसला सुनाते हुए कहा अगर तुम चोरी ना करते तो
इस कम उम्र में ऐसी सख्त सजा से बच जाते लड़के ने जोर-जोर से हंसते हुए कहा लगता है कि तुम सब लोग पागल हो गए हो भला मेरे हाथ कौन काट सकता है मैं तो सूरज निकलने से पहले ही इस कैद से आजाद हो जाऊंगा वजीर ने बाहर आकर जेल के दरोगा से कहा आज रात सख्त पहरा लगा देना और अंदर बिल्कुल अंधेरा रखना ताकि यह कैदी लड़का किसी चीज को ना दे देख सके दरोगा ने कहा बहुत बेहतर है आप बेफिक्र हो जाएं मेरे होते हुए यह कैदी तो क्या एक चींटी भी बाहर नहीं
आ सकता है फिर वहां से वजीर चला गया और दरोगा कैद खाने के चारों तरफ सिपाहियों को मुकर्रर कर दिया रात गुजर गई और सुबह वजीर आजम लड़का देखने के लिए आया लेकिन वह यह देखकर हैरान रह गया हथकड़ियां और बेड़ियां जेल के अंदर ही जमीन पर पड़ी हुई हैं दरवाजे और रोशन दान बंद है लेकिन वह चोर लड़का गायब है वजीर ने घबराकर दारोगा को बुलाकर सख्त आवाज में पूछा अगर तमाम सिपाही जाग रहे थे तो लड़का कैसे गायब हो गया दरोगा ने डरते डरते कहा वजीर साहब आज की रात तो मैं खुद भी
यहां पर था और थोड़ी-थोड़ी देर के बाद यहां आकर मुआयना करता रहा समझ में नहीं आता कि वह कैसे निकला और कहां चला गया वजीर को बहुत गुस्सा आया और उसने जाकर बादशाह से शिकायत की बादशाह भी गुस्से से आग बबूला हो गया और बादशाह ने हुक्म दिया जितने भी लोग आज रात पहरे पर मुकर्रर किए गए थे सबको कैद खाने में डाल दो और सबको सुबह शाम 50 कोड़े लगाओ बादशाह का सारा दिन परेशानी और गुस्से की हालत में गुजर गया बादशाह ने उस दिन किसी से भी बातचीत नहीं की मल्लिका और शहजादी दोनों
मां बेटी को भी नहीं देखा और रात को भी वक्त से पहले ही बिस्तर पर लेट गया शहजादी गुलनार सुबह हुई तो बादशाह के पास आई उसने देखा कि वह बहुत ही उदास है और सर पकड़े हुए खिड़की से झांक रहा है शहजादी ने उसके करीब जाकर उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा अब्बा जान आपकी उदासी का सबब क्या है बादशाह ने जवाब दिया कल रात वह चोर लड़का भागने में कामयाब कैसे हो गया और आज रात मेरा ताज चुरा कर ले गया यह बहुत ही अजीब बात है कि वह सबकी आंखों में धूल
झोंक कर महल में दाखिल हो जाता है और जो चीज चाहता है उठाकर ले जाता है शहजादी कहने लगी मेरा ख्याल है वह यहां के नौकरों से मिला हुआ है वरना उसने महल में दाखिल होने की जरूरत भी कैसे की बादशाह ने कहा मुझे यकीन है उस बूढ़े राहगीर से उस लड़के का जरूर कोई ताल्लुक है लिहाजा उस बूढ़े राहगीर को बुलवाकर यहां रखा जाए और किसी को सख्त सजा का ना किया जाए फिर जैसे ही वह इसकी मदद के लिए आए उसे गिरफ्तार कर लिया जाए शहजादी गुलजार ने कहा यह बहुत अच्छी बात थे
बादशाह ने उसी वक्त वजीर को बुलवाकर उसे अपने फैसले से आगाह किया वजीर ने सोचकर जवाब दिया उस लड़के से ताज हासिल करने के बाद उसे अपनी निगरानी में रखना चाहिए शहजादी गुलनार बोली उसे रस्सियों में जकड़ करर मैं अपने कमरे में रखूंगी फिर देखती हूं कि यह कैसे भागता है वजीर ने जाकर सिपाहियों को हुक्म दिया कि वह राहगीर को पकड़ कर ले आए हुक्म की देर थी कि सिपाही घोड़े पर सवार होकर गए और एक घंटे में बूढ़े को लेकर आ गए बादशाह ने उसे तो शाही मेहमान खाने में भेज दिया और शहर
में ऐलान कर दिया कि बूढ़े राहगीर की आंखें निकालकर चील कवो को खिलाई जाएगी और वह इस वक्त शहजादी के महल में कैद है इस ऐलान को सुनकर वह लड़का बहुत गुस्से में आया और कहने लगा मुझ पर जोर नहीं चला तो फिर गरीब बूढ़े को निशाना बना लिया मगर बादशाह और शहजादी की इस मकसद में कामयाब हो पाना मुश्किल है फिर क्या था रात हुई और रात के वक्त शहजादी के महल पर बहुत सख्त पहरा था बादशाह भी भेष बदले हुए नीचे गश्त लगा रहा था शाम के करीब एक अजीब मामला पेश आया शहजादी
के कमरे से एक अजीब चीख निकली और सारा मह गूंज उठा बादशाह वजीर और सिपाही घबराकर बेतहाशा दौड़े और जल्दी-जल्दी कमरे में दाखिल हुए उन्होंने देखा कि शहजादी फर्श पर पड़ी हुई है बादशाह ने नीचे बैठकर उसका सर जांघों पर रख लिया और फौरन ही शाही तबीब को बुलाया शाही तबीब ने काफी देर तक इलाज किया मगर फिर कांपते लहजे में कहने लगा बादशाह सलामत अफसोस शहजादी साहिबा हमसे बिछड़ गई है उन्हें किसी जहरीले सांप ने डंस लिया है बादशाह की आंखों से आंसू बहने लगे और वह सिसकियां लेने लगा और गिड़गिड़ा करर कहने लगा
या खुदा ये तूने क्या कर दियारी जिंदगी का सहारा एक यही तो थी और उसे भी तूने छीन लिया बादशाह काफी देर तक शहजादी को देखकर रोता रहा फिर सबने बादशाह को तसल्ली दी और शहजादी को उठाकर पलंग पर लिटा दिया उसी वक्त वजीर की नजर बादशाह के ताज पर पड़ी और वह कहने लगा यह देखिए आपका ताज यहां शाही कुर्सी पर रखा हुआ है ऐसा मालूम होता है कि चोर रात में यहां आया था फिर वजीर ने कुछ सोच कर कहा कहीं वही बदमाश तो सांप को यहां नहीं छोड़ गया बादशाह ने उसकी बात
पर तवज्जो ना दी क्योंकि इस वक्त उसका कलेजा अपनी इकलौती बेटी के गम से फटा जा रहा था फिर रात भर बादशाह आंसू बहाता रहा और महल में एक गम का लहर छाया हुआ था फिर सुबह हुई तो सबने पास के कब्रिस्तान में शहजादी गुलनार को दफना दिया इस अफसोस नाख ब से सारे मुल्क पर गम छा गया घर-घर अफसोस किया जा रहा था दुकान मदरसे अदालतें हर कारोबार बंद कर दिया गया मस्जिदों और दरगा हों में शहजादी के लिए दुआएं मांगी जा रही थी दूसरी सुबह बादशाह अपने वजीर और दरबारियों के साथ अपनी चहती
बेटी की कब्र पर फातिहा पढ़ने और फूल चढ़ाने के लिए गया तो उसने देखा कि कब्र खुली हुई है इधर-उधर मिट्टी के ढेर लगे हुए हैं और कब्र में से मयत गायब है यह हाल देखकर बादशाह के दिल को ऐसा सदमा पहुंचा वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा लोगों ने पानी लाकर बादशाह के चेहरे पर छींटे मारे फिर उसे होश आया मगर उसके होश हवास कायम ना थे बादशाह सब की सूरत इस तरह देख रहा था जैसे वह सब इसके लिए अजनबी थे वजीर ने आपस में मशवरा करके बादशाह को उठाया और घोड़ा गाड़ी
में लिटा करर महल की जानिब रवाना हो गए शाही तबीब ने बादशाह का इलाज किया और चार रोज के बाद उसके हवास कायम हो गए उसे बेटी के मरने का इतना गम ना था जितना उसकी मयत के गायब हो जाने का मलाल था इसलिए उसने जासूसों को मुकर्रर कर दिया कि वह मैयत चुराने वाले का सुराग निकाले जासूस शहर में एक बड़ी फौज को फैलाकर चोर को तलाश करने लगे लेकिन उन्हें क्या मालूम था मयत का चोर शहर से निकलकर मुल्क शाम की सरहद भी पार कर चुका था वह अपने तेज रफ्तार सफेद घोड़े पर
मुर्दा शहजादी को रखे हुए निहायत तेजी से शहर बगदाद की जानिब चला जा रहा था क्योंकि उस लड़के को यकीन था बगदाद में उसे पनाह मिल जाएगी वह निहायत तेजी से रास्ता तय करता चला जा रहा था लेकिन यह फिक्र उसे बुरी तरह सता रही थी शहर पनाह के दरवाजे पर उसे लाश को किस तरह छुपाए मंजिल तय करने के बाद जब एक छोटी सी बस्ती के करीब पहुंचा तो उसने लाश को घनी झाड़ियों में छुपा दिया और बस्ती में जाकर लकड़ी का एक संदूक खरीद लाया और उसमें लाश को बंद करके बगदाद की तरफ
चल दिया रात का वक्त था था शहरी पनाह का दरवाजा बंद किया जाने वाला था चोर संदूक लिए हुए उसमें दाखिल हुए हुआ वहां एक सौदागर खड़ा था उसने उसे रोक लिया और कहा तुमको मेरे यहां तीन रोज मेहमान बनकर रहना होगा क्योंकि मैं हर जुम्मे की रात को यहां आता हूं और सबसे आखिर में आने वाले शख्स को अपना मेहमान ठहरा हूं आज इत्तेफाक से शहर पनाह में दाखिल होने वाले तुम आखिरी शख्स हो चोर जो इस वक्त एक लाश लिए हुए था सोचने लगा कि अब मुझे क्या करना चाहिए अगर मैं इसके यहां
मेहमान ठहर गया तो इसे लाश का हाल जरूर मालूम हो जाएगा लेकिन फिर उसे ख्याल आया अगर मैं किसी सराय में गया तो वहां भी यह राज खुले बगर र नहीं रहेगा इससे तो बेहतर है मैं इसी सौदागर के साथ चला जाऊं यह सोचकर वह कहने लगा आप जैसे इंसान के यहां मेहमान ठहरना मेरे लिए खुशकिस्मती की बात है सौदागर ने मुस्कुराते हुए कहा यह मेरी नसीबी है तुमने खुशी से मेरी दावत को कबूल कर लिया फिर वह उसे अपनी आलीशान हवेली में ले गया वहां उसका घोड़ा तो बाहर वाले झोपड़ी में भेज दिया और
उसे एक सजे हुए कमरे में ले गया और कहने लगा तुम्हारे लिए यह कमरा है यहां जरूरत की हर चीज मौजूद है तुम्हें किसी किस्म की तकलीफ नहीं होगी इस कमरे में खिड़कियां और रोशनदान नहीं है और दरवाजा भी ऐसा है कि तुम्हें बाहर का शोर सुनाई नहीं देगा चोर बोला यह मेज पर रखा हुआ मोर बहुत मुझे पसंद आया सौदागर बोला इस मोर में बहुत से पुर्जे लगे हुए हैं वजस वक्त हरकत में आते हैं तो यह मोर नाचने लगता है चोर कहने लगा क्या इस वक्त इसका मैं नाच देख सकता हूं उसने कहा
इसके नाचने का वक्त मुकर्रर है जब वक्त आएगा तो यह खुद बखुदा रखना जिस वक्त यह नाच रहा हो तो इसके करीब हरगिज ना जाना चोर ने मोर को गौर से देखते हुए कहा यह बहुत कीमती मालूम होता है आपने इसे कहां से हास हासिल किया सौदागर बोला यह मुझे तोहफा मिला था फिर उसने ताली बजाकर एक गुलाम को बुलाया तो उससे कहा अगर खाना तैयार हो गया हो तो फौरन दस्तरख्वान पर लगा दिया जाए गुलाम ने अर्ज किया कि दस्तरख्वान पर खाना चुन लिया गया है सौदागर ने चोर का हाथ पकड़ा और एक दूसरे
कमरे में ले गया और उसे अपने साथ खाना खिलाया खाने के बाद सौदागर ने कहा अब तुम आराम करो कल शाम फिर मुलाकात होगी चोर बोला कि आप दिन में यहां नहीं होंगे सौदागर ने कहा नहीं मैं सुबह सवेरे ही चला जाता हूं और शाम को वापस आता हूं चोर ने खुदा हाफिज कहा और अपने कमरे में जाकर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया उसने थोड़ी देर आराम करने के बाद संदूक खोला और उसमें से शहजादी की लाश निकाली फिर जेब से सफेद रूमाल निकालकर अपने चेहरे पर हवा दी हवा लगते ही वह फर्श पर
गिर पड़ा और इंसान से एक काला नाग बन गया फिर उसने शहजादी की पिंडली पर एक निशान देखा और उस पर मुंह रखकर जहर चूसने लगा मुंह में जो जहर था उसे एक प्याले में ठूक देता इसी तरह जहर चूसते चूसते जब खून निकलने लगा तो उसने चूसना छोड़ दिया और एक कोने में जाकर मिट्टी चाटने लगा मिट्टी चाटते ही वह फिर अपनी असली शक्ल में आ गया इधर शहजादी ने भी आंखें खोल दी और चोर को देखकर कहने लगी मेरे हलक में कांटे से चुभ रहे हैं जल्दी से पानी दो उसने सुराही में से
पानी गिलास में उड़ेल करर शहजादी को पिलाया और उसे सहारा देकर पलंग पर लिटा दिया फिर मेज पर रखा हुआ मेवा उठाकर उसे खिलाया मेवा खाने के बाद शहजादी के जिस्म में कुछ कुवत पहुंची तो उसने कहा मैं इस वक्त कहां हूं और तुम कौन हो उसने जवाब दिया मेरा नाम आसिफ जमाल है और मैं दमिश्क का रहने वाला हूं लेकिन इस वक्त शहर बगदाद में हूं शहजादी ने कुछ सोचते हुए कहा आंख खुलने से पहले मैं एक ख्वाब देख रही थी बहुत ही भयानक ख्वाब था मगर जो कुछ मैं ख्वाब के अंदर देख रही
थी आंख खुलने के बाद भी वही नजर आ रहा है यह क्या राज है आसिफ बोला ख्वाब में क्या देखा था शहजादी कहने लगी मैं देख रही थी कि मैं मर गई हूं और मुझे दरिया के किनारे शाही कब्रिस्तान में दफना दिया गया है फिर अचानक कब्र खुली और तुमने मुझे बाहर निकालकर सफेद घोड़े पर डाल दिया और उसे बहुत तेजी से दौड़ाने लगे बहुत दूर जाने के बाद तुमने मुझे झाड़ियों में छुपाया फिर एक संदूक लाकर उसमें बंद कर दिया बहुत देर के बाद तुमने संदूक में से मुझे निकाला और स्याह नाग बनकर जहर
चूसने लगे आसिफ हैरानी से उसकी सूरत देखने लगा यह अपने होशो हवास में तो नहीं थी फिर इसे सब कुछ कैसे मालूम हो गया वह इसी परेशानी में था कि शहजादी बोली तुम क्या सोच रहे हो मुझे बताओ मैं अपने महल में हूं या कहीं और हूं आसिफ बोला जो तुमने ख्वाब में देखा वह बिल्कुल हकीकत है तुम अपने महल में सो रही थी एक सांप ने तुम्हें डंस लिया और तुम्हारे वालिद ने तुम्हें दफना दिया लेकिन मुझे यह बात मालूम थी कि सांप जिसे डंस लेता है वह तीन दिन तक जिंदा रहता है इसलिए
मैं कब्र खोदकर तुम्हें यहां ले आया शहजादी ने कहा तुम मुझे कैसे जानते हो आसिफ बोला मैं दमिश्क का चोर हूं एक मर्तबा तुम्हारे महल में हीरा चुराने गया था उस वक्त तुम्हारी सूरत देखी थी शहजादी ने कहा तुम सांप कैसे बन गए थे क्या तुम कोई जादूगर हो आसिफ बोला मैं जादूगर तो नहीं हूं लेकिन मेरे पास एक रुमाल है जो मुझे मेरे वालिद साहब ने मरते वक्त दिया था उसकी हवा से मैं सांप बन जाता हूं और मिट्टी चाट करर दोबारा अपनी असली शक्ल में आ जाता हूं शहजादी ने आंखें बंद कर ली
और कुछ सोचने लगी आसिफ ने कहा क्या सोच रही हो वह कहने लगी मैं यह सोच रही हूं कि सांप के डंस नहीं के बाद मेरी सैलानी रूह जो कुछ देख रही थी वह मुझे ख्वाब की सूरत में नजर आ रहा था आसिफ बोला मुझे भी ऐसा ही मालूम होता है अब इस ख्याल को दिल से निकाल दो और सो जाओ शहजादी ने कहा सुबह होते ही मुझे मेरे अब्बा जान के पास ले चलो वह मेरी जुदाई के गम में निढ़ाल हो रहे होंगे आसिफ कहने लगा अब तुम उन्हें भूल जाओ मैं तुम्हें अपने लिए
निकाल कर लाया तुम्हें मेरे साथ रहना होगा शहजादी ने कहा मैं शहजादी होकर एक मामूली चोर के साथ नहीं रह सकती आसिफ बोला मगर अब रहना तो है ही और अब तो वैसे भी तुम शहजादी नहीं हो और तुम इस ख्याल को तुम दिल से निकाल दो अगर तुमने भागने की कोशिश की या किसी की मदद हासिल की तो याद रखना मैं तुम्हें जिंदा नहीं छोडूंगा शहजादी ने अभी जवाब नहीं दिया था कि उसी वक्त मेज पर रखे हुए मोर ने अपने पंख फैलाए और नाचने लगा साथ ही मुख्तलिफ साजों की आवाजें भी सुनाई देने
लगी मोर के में मुख्तलिफ रंगों के मोती लगे हुए थे और उन मोतियों की चमक से सारा कमरा जगमगा उठा शहजादी और आसिफ दोनों मोर का नाच बड़ी हैरानी से देख रहे थे शहजादी ने यह कहकर रोक दिया कि पराई चीज है इसे हाथ ना लगाना आसिफ बोला मैं इसे चुराना तो नहीं चाहता शहजादी ने कहा कुछ भी हो इसे हाथ ना लगाओ आसिफ ने उसके कहने पर मोती को पड़ा रहने दिया फिर थोड़ी देर के बाद शहजादी सो गई लेकिन आसिफ जागता रहा बैठे-बैठे उसने सोचा सांप बनकर देखना तो चाहिए कि सौदागर की हवेली
में कैसा-कैसा सामान है और इसमें कौन कौन-कौन रहता है यह सोचकर उसने रुमाल निकाला और चेहरे पर हवा देकर सांप बन गया और रेंगता हुआ कमरे से बाहर निकल गया उस हवेली में 152 कमरे थे हर कमरा कीमती और अनमोल चीजों से सजा हुआ था उन्हें देखने के बाद वह छत पर बने हुए कमरे में गया यह कमरा नीचे के 152 कमरों से बिल्कुल मुख्तलिफ था इसमें सजावट की हर एक चीज ना थी हर तरफ मुर्दों की खोपड़ यां और हड्डियां नजर आ रही थी सामने दीवार पर एक शीशा लटका हुआ था और उसके करीब
एक मेज रखी हुई थी जीस पर तेज रोशनी था सौदागर लंबा को पहने हुए लैंप की चिमनी उठा रहा था और उसने जैसे ही चिमनी उठाई लैंप में से धुआं निकलने लगा और शीशे में वह सुर्ख मोती जो मोर की धूम से निकल करर गिरा था साफ चमकता हुआ नजर आने लगा सौदागर ने मोती को देखकर चिमनी को लैंप पर रख दिया और कुछ सोचने लगा आसिफ ने यह तमाशा देखा तो समझ गया कि यह शख्स सौदागर नहीं बल्कि जादूगर है और इस सूरत में जरूर कोई राज है फिर वह सोचने लगा यह बेहतर ही
हुआ जो मैंने इसे हाथ नहीं लगाया यह सोचकर वह रेंगता हुआ वापस अपने कमरे में चला गया और मिट्टी चाट करर अपनी असली शक्ल में आ गया और दरवाजा अंदर से बंद करके शहजादी के पलंग के पास ही नीचे बिछे हुए कालीन पर सो गया सुबह जब उसकी आंख खुली तो शहजादी भी जाग रही थी उसने शहजादी को सारा हाल सुनाया और कहा अब हम यहां से निकलना चाहिए वरना यह जादूगर हमें नुकसान पहुंचाएगा शहजादी कहने लगी मैं तो खुद भी यहां रहना नहीं चाहती हमें फौरन यहां से रवाना हो जाना चाहिए आसिफ ने अभी
तक कोई जवाब नहीं दिया था कि जादूगर मौजूद हुआ और शहजादी को देखकर आसिफ से कहने लगा यह कौन है और यहां कब आई उसने जवाब दिया ये मेरी बीवी है और डाकुओं के खौफ से मैं इसे संदूक में लिटा करर लाया था जादूगर खामोश हो गया फिर उसने वहां पर पड़ा हुआ मोती उठाकर मोर के पैरों में लगा दिया शहजादी बोली अब आप हमें इजाजत दीजिए हम यहां से जाना चाहते हैं जादूगर ने कहा अभी नहीं मैं अपने मेहमान को तीन दिन के बाद रुखसत करता हूं अगर तबीयत घबरा रहा है तो नाश्ता करने
के बाद मेरे बाग की सैर करना वहां बहुत ही अजीबोगरीब चीजें हैं उन्हें देखकर तुम हैरान रह जाओगी यह कहकर जादूगर चला गया और थोड़ी देर के बाद उसने दोनों के लिए नाश्ता भेज दिया नाश्ते में कोरमा सेब का मुरब्बा मैदे के परांठे शाही टुकड़े और शहद था शहजादी कहने लगी इनमें से कोई ऐसी चीज ना हो जिस पर उसने जादू ना किया हो आसिफ बोला मैं भी यही सोच रहा था लेकिन अब क्या करना चाहिए शहजादी ने कहा हम इसमें से कुछ नहीं खाएंगे भूखा रहना ही बेहतर है और बाग की सैर के बहाने
यहां से भाग जाएंगे आसिफ ने इस तजवीज को पसंद किया और सारा नाश्ता काले संदूक में डालकर प्लेटों खाली कर दी फिर जादूगर आया और दोनों को अपने हमराह बाग में ले गया और कहने लगा मैं तो बाजार जा रहा हूं तुम दोनों यहां की सैर करो लेकिन इस बाग की किसी चीज को हाथ ना लगाना जादूगर चला गया और दोनों सैर करने लगे वह दोनों यह देखकर हैरान थे जिस शाख में फूल लगे हुए थे उसमें एक पत्ती भी नहीं थी दोनों सैर करते-करते एक बगीचे में पहुंचे जहां बेशुमार पिंजरे लटके हुए थे और
हर पिंजरे में एक खूबसूरत परिंदा बंद था शहजादी ने कहा मैंने ऐसे परिंदे आज तक नहीं देखे आसिफ बोला उन्हें हासिल करना जादूगर के लिए क्या मुश्किल है उसी वक्त एक सफेद परिंदे ने कहा क्या तुम हमारी मदद करोगे शहजादी बोली तुम इंसानों की तरह बोलना भी जानते हो कहो क्या मदद चाहिए परिंदे ने कहा हम सब जानवर नहीं इंसान है जालिम जादूगर ने हमें जानवर बनाकर पिंजर में कैद कर रखा है अगर तुम किसी सूरत से हवेली की छत पर जाकर लैंप रोशन करो और धुआं निकलते उसकी चिमनी को तोड़ दो तो हम फिर
से दोबारा इंसान बन जाएंगे एक और परिंदा बोला तुम दोनों इस जादूगर के कौन हो आसिफ ने कहा हम उसके मेहमान हैं परिंदा बोला क्या तुमने मोर का नाच देखा था शाहिद ने कहा हां ने नाच देखा था उसके पैरों में से एक मोती गिरा था उसे हमने नहीं उठाया आज सुबह नाश्ता आया तो हमने नहीं किया तो परिंदा कहने लगा इसलिए तुम दोनों बच गए वरना मोती उठाते ही तुम जानवर बन जाते और नाश्ता करते ही तुम जादूगर के गुलाम हो जाते और जो वह कहता सो करते अब उसके हाथ की कोई चीज ना
खाना दोनों वापस अपने कमरे में आ गए शहजादी तो पलंग पर लेट गई और आसिफ छत पर चला गया वहां उस वक्त कोई ना था इसलिए उसने लैंप रोशन करके चिमनी उठा ली उसी वक्त धुआं निकलने लगा फिर उसने चिमनी को जमीन पर जोर से मारा उसके टुक टुकड़े टुकड़े हो गए और वह भागता हुआ नीचे उतर आया अपने कमरे में गया तो देखा शहजादी एक बहुत ही खूबसूरत लड़के से बातें कर रही थी उसने आसिफ को देखकर सलाम किया फिर शहजादी बोली मेज पर रखा हुआ मोर तो गायब हो गया और यह लड़का नजर
आने लगा और यह कहता है कि जादूगर ने इसे भी जादू से मोर बना रखा था आसिफ ने कहा चिमनी तोड़ने से जादू का असर जाता रहा अब वह तमाम आम परिंदे भी इंसान बन गए होंगे मैं जाकर देखता हूं यह कहकर आसिफ बाग में गया वहां पीले फूल अब मुख्तलिफ रंगों के हो गए थे और सामने ने से लोगों का एक गिरोह चला आ रहा था करीब पहुंचकर हर शख्स ने आसिफ का शुक्रिया अदा किया और उससे कहा जादूगर की वापसी से पहले-पहले हम सबको यहां से चले जाना चाहिए आसिफ ने उन सबके हालात
दरयाफ्त किए और उसे मालूम हुआ उनमें से ज्यादा लोग सौदागर थे जो अपना माल असबाब बेचने के बाद बगदाद आए थे बाकी लोगों में से कोई शहजादा था कोई बादशाह जो भैंस बदलकर बगदाद की सैर करने और यहां के हालात दरयाफ्त करने आया था और उन सबका कीमती सामान जादूगर ने अपने कब्जे में कर लिया आसिफ ने उन सब से कहा हवेली में चलकर सब अपना-अपना माल समेट ले ताकि किसी को नुकसान ना हो यह सब लोग हवेली में गए और अपना सामान तलाश करने लगे लेकिन थोड़े-थोड़े सामान के सिवा कुछ ना मिला और उन्होंने
अपना नुकसान पूरा करने के लिए वहां रखा हुआ दूसरा सामान भी समेट लिया आसिफ ने भी कीमती कीमती चीज उठाकर अपने संदूक को भर दिया और फिर सबको साथ लेकर हवेली से बाहर निकल गया दबान चीखते चिल्लाते रहे लेकिन किसी ने उनकी ना सुनी यह सब लोग शहर पनाह से बाहर निकले और उन्होंने एक जगह खेमा गाड़ करर अपने ठहरने के लिए जगह बना ली फिर उनमें से दो-दो चार-चार सौदागर अपना सामान ले जाकर शहर में बेचने लगे आसिफ ने भी कई हजार अशरफिया का माल फरोख्त किया और एक ही दिन में खूब मालदार हो
गया इधर जादूगर वापस हवेली पहुंचा तो दरबान ने कहा हुजूर आज सुबह आपके तमाम मेहमान अपना माल और सामान लेकर चले गए हमने उन्हें बहुत रोका लेकिन उन्होंने हमारी एक ना सुनी जादूगर के पांव तले से जमीन निकल गई वह घबराकर सीधा बाग में गया वहां पीले फूलों की जगह अनेक रंगों के फूलों को खिले हुए देखा और बगीचे के सारे पिंजरे गायब थे यह हाल देखकर उसका बदन पसीने से शरब बोर हो गया और वह भागता हुआ छत पर बने हुए कमरे में गया जहां चिमनी टूटी हुई पड़ी थी उसे देखकर उसकी आंखों तले
अंधेरा छा गया और वह सिर पकड़कर रोने लगा हाय वह चिमनी जीस को मैंने सात साल की मेहनत के बाद हासिल किया था यह टूट गई फिर वह उठकर उस कमरे में गया जहां आसिफ और शहजादी मेहमान थे वहां से मोर गायब था और नाश्ता की चीजें फर्श पर पड़ी हुई थी अब वह समझ गया यह तबाही उसी लड़के की वजह से हुई है फिर उसने दिल में कहा मगर यह कमबख्त नाश्ता कर लेता तो मेरे हुक्म के बगैर एक कदम भी ना उठा सकता मगर इस चालाक और होशियार लड़के ने ना तो मोती उठाया
और नाश्ता किया खैर यह मेरे हाथ से बचकर नहीं जा सकता फिर उसने अपने कमरे में जाकर नजूमी भेज बदलकर घर से निकला और लोगों से पूछता हुआ शहर से बाहर चला गया थोड़े ही फासले पर खेमे थे वह उनके करीब जाकर सेंध लगाने लगा उसकी आवाज सुनकर शहजादी को शक हुआ उसने नजूम को अपने खेमे में बुलाया जादूगर उसकी सूरत देखते ही दांत पीसने लगा यही मेरे दुश्मन की बीवी है मैं इसे हरगिज ना छोडूंगा इस कमबख्त ने मुझे तबाह कर दिया है फिर वह शहजादी का हाथ चंद लम्हों तक देखता रहा फिर इसके
बाद जेब से एक बोतल निकाली और इसका ढक्कन थोड़ा सा खोलकर शहजादी से कहने लगा इस बोतल को आंखों के करीब रखो और दिल में सवाल सोच लो इसका जवाब इस बोतल के लगे हुए शीशे में नजर आ जाएगा शहजादी बोतल को जैसे ही आंखों के पास ले गई उसमें रखी हुई बेहोशी की दवा सांस के साथ अंदर चली गई और वह बेहोश हो गई जादूगर ने खेमे से सर निकालकर बाहर देखा कि इर्द-गिर्द कोई है तो नहीं फिर शहजादी को पिछली तरफ से बाहर लेकर निकल गया और जंगल की तरफ चल दिया इत्तफाक से
उसी वक्त आसिफ वापस लौट आया वहां देखा तो खेमा खाली था उसने बराबर वाले लोगों से दरयाफ्त किया तो उन लोगों ने कहा थोड़ी देर हुई एक नजूमी शहजादी के पास आया था इसके बाद हमने किसी को आते जाते नहीं देखा आसिफ को यकीन हो गया कि वही नजूमी उसे बहका कर कहीं ले गया है फिर उसे ख्याल आया कि कहीं यह दोनों पिछली तरफ से तो नहीं निकल गए इस ख्याल के आते ही वह पिछली तरफ गया वहां जमीन को गौर से देखा तो पैरों के निशान नजर आए बस फिर क्या था वह तेज
तेज कदमों से चलता गया तो उसे जादूगर नजर आया जो कंधे पर शहजादी को डाले हुए ले जा रहा था आसिफ ने फौरन ही रुमाल निकाल लिया लेकिन फिर कुछ सोचकर जेब में डाल लिया और दौड़ने लगा आसिफ जैसे ही जादूगर के करीब पहुंचा उसने पलट कर देखा और कहा खबरदार मुझसे दूर रहना वरना जलाकर राग कर दूंगा आसिफ बोला धूर्त मक्कार दगाबाज बदमाश इसे नीचे उतार दे वरना तुझे खाक में मिला दूंगा जादूगर ने शहजादी को नीचे फेंक दिया और जेब से किसी मुर्दे का पंजा निकाल कर बोला अगर अपनी जान की खैर चाहता
है तो वापस चला जा वरना मैं तुझे इंसान से हैवान बना दूंगा आसिफ ने कहा बेहतर है मैं जा रहा हूं यह कहकर वह एक तरफ चला गया और झाड़ी में छुपकर रुमाल के जरिए सांप बन गया और घास में रेंगता हुआ जादूगर के पीछे पहुंच गया वह शहजादी को उठाने के लिए जैसे ही झुका उसने उसकी पीठ पर डंक मार दिया उसे डंस लिया वह हाय कहकर नीचे गिर पड़ा थोड़ी देर तड़पता रहा फिर ठंडा हो गया आसिफ मिट्टी चाट करर अपनी असली शक्ल में आ गया फिर उसने शहजादी को हवा दी चश्मे से
पानी लाकर छींटे दिए तो उ से भी होश आ गया उसने कहा अगर मैं वक्त पर ना पहुंचता तो यह मक्कार ना जाने तुम्हारे साथ क्या सलूक करता शहजादी ने जो गौर से उसकी तरफ देखा तो वह जालिम जादूगर था वह घबराकर उठ खड़ी हुई और कहने लगी मुझे क्या खबर थी वह कम वक्त नजूमी बनकर आया था आसिफ ने बोला खैर मैंने उसे ठिकाने लगा दिया है चलो वापस चले दोनों जब वापस पहुंचे तो सब लोग अपना सामान बांध रहे थे आसिफ ने जब पूछा तब उन लोगों ने बताया कि उनका सारा सामान फरोख्त
हो गया है और वह सब वापस जाने की तैयारी कर रहे हैं आसिफ ने कहा जाने से पहले मैं चाहता हूं कि चलकर यहां के बादशाह से सारे हालात बयान कर दिए जाएं सब ने इस नसीहत को पसंद किया और सामान बांधकर आसिफ के साथ चल दिए बादशाह के महल में पहुंचने के बाद उन्हें ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ा जल्दी ही मुलाकात हो गई बादशाह ने इत्मीनान से बैठकर सारे हालात सुने फिर आसिफ को शाबाशी दी और वजीर को हुक्म दिया वह जंगल से जादूगर की लाश को मंगवा ले वजीर हुक्म बजा लाने के
लिए रवाना हो गए दूसरे दिन बादशाह के हुक्म से जादूगर की हवेली आसिफ को दे दी गई और वह उसका मालिक बन गया फिर बादशाह ने उसे और भी जागीर बख्शी और इसके लिए खास वजीफा मुकर्रर कर दिया क्योंकि उसने बगदाद को बदनामी से और यहां आने वाले सौदागरों को जादूगर से बचाया था इसी खुशी के मौके पर सौदागरों ने और मुल्कों के शहजाद और बादशाहों ने भी बहुत कुछ इनाम दिया क्योंकि आसिफ चोर था लेकिन उसकी हमदर्दी बहादुरी और होशियारी के सबब से शहजादी गुलनार को उससे मोहब्बत हो गई और अब उसके साथ जिंदगी
बसर करना चाहती थी आसिफ ने तो उसे इस ख्याल से उसे डसा था कि कि शहजादी को ले जाकर परेशान करूंगा दुख पहुंचा हंगा ताकि गरीबों को सख्त सजा देने और उन्हें तकलीफ पहुंचाने का नतीजा इसे मिल जाए लेकिन साथ रहने से उसे भी मोहब्बत हो गई और वह भी इसके हमराह जिंदगी बसर करना चाहता था 10 दिन तक बगदाद में रहने के बाद आसिफ ने शहजादी गुलनार से कहा तुम्हारे वालिद साहब बहुत परेशान होंगे चलकर उन्हें तसल्ली देना चाहिए शहजादी इस बात को सुनकर बहुत खुश हुई और उसी रोज दोनों अपने मुल्क रवाना हो
गए बादशाह अपनी इकलौती बेटी के गम में निढ़ाल हो रहा था सेहत गिर चुकी थी आंखों से हर वक्त पानी बहने के कारण सबब बिनाई कम हो गई थी रातों की नींद उड़ चुकी थी उसकी बेटी अचानक जो उसके पास पहुंची तो उसके जिस्म में एक नई रूह और ताजा कुवत आ गई उसने शहजादी को सीने से लगाया फिर उसे ख्याल आया कि बेटी तो मर चुकी है उस ख्याल के आते ही वह घबरा गया और कहने लगा तू कौन है मेरी बेटी तो मर चुकी है शहजादी ने हंसकर कहा अब्बा जान मुझे सांप ने
डंस लिया था और सांप का डसा हुआ तीन दिन तक जिंदा रहता है बस दूसरे दिन यह साहब मुझे कब्र से निकाल करर बगदाद ले गए और मेरा जहर चूस कर मुझे होश में ले आए फिर उसने सारा वाकया बयान किया जिसे सुनकर बादशाह ने शहजादी गुलनार को सीने से लगा लिया और उससे इतना खुश हुआ कि दो हफ्ते के बाद उसने शहजादी की शादी उससे कर दी और अपने तख्त का वारिस बना दिया प्यारे दोस्तों ऐसी ही कहानियों को सुनने के लिए हमारे