जब भी हम किसी अ बाबा का जिक्र करते हैं कोई या रूहानी डॉक्टर का जिक्र करते हैं ना तो हमारी नजर में ना एक एक हुलिया आता है कि बड़े-बड़े से बाल होंगे एक अलग तरह के कुछ कपड़े पहने होंगे और बड़ी सी दाढ़ी होगी। असल में वजह यह है कि हम उन जाली आमिलों की तरह गेटअप नहीं बना सके और हमारा सिलसिला भी हमें इजाजत नहीं देता इन सब बातों की। दो जिंदगी खुश होता है। इस काम खुद के ऊपर थोड़ा भारीपन नहीं आता होगा तो उसको कैसे आप दूर करते हैं? इस मरीज का
मैं इलाज करके आया था कि आपने ऐसा किया कहने लगे जी वो अभी तो अवेलेबल नहीं था बकरा हम कल सुबह करेंगे। मैंने कहा आपने मेरे साथ बहुत जुल्म कर दिया। मेरी वाइफ की डेथ हो गई। एक मरीज था जो कनाडा में था आपका जिसके ऊपर जिन्नात हावी था। 15 दिन की सख्त मेहनत के बाद 32 जिन्नात थे उस लड़के के ऊपर। वो भी मुस्लिम नहीं थे। अच्छा हां एक बच्चे के ऊपर जो है ना स्कूल से जिन्नात चढ़ गए थे। स्कूल से जिन्नात चढ़ गए थे। मैंने कहा कि आप सवा किलो गोश्त जो है
ना फौरन जो है कब्रिस्तान में रख के आ जाइएगा ऐसीऐसी जगह पे। लेकिन जब मरीज सही हो जाता है तो फिर वो बोलते हैं अब तो हमारा काम सीधा हो गया। हमें क्या तो मेरा चार माह का बेटा था। उस चीज ने आके उस को पकड़ लिया। उन लोगों ने गोश्त नहीं दिया ना रख के आए वहां पर। और वो मेरे लिए बेहद तकलीफ का बायस बना। मेरा छोटा मासूम बच्चा हलाक हो गया। नाउजब्लाह नाउजब्लाह सर मोहल्ले वाले उसको बहुत मानते थे कि भाई बाबा जो है बहुत काम करते हैं बाबा चौराहे में आके नाउज
अस्तकफुल्लाह तो कुरान शरीफ की बेहुरती की उन्होंने जला दिया रात के 3:30 बजे मैं एक काम करके आ रहा था तो वहां छोटे-छोटे जिन्नात के बच्चे खेल रहे थे रात के 3:00 उन साहब को मैं यही बता रहा था कि यार यहां पर जो है ना जिन्नात है आप दुआ पढ़ लें मेरे साथ जा रहे हैं। मैंने उसको देखा। मैंने बोला दफा हो जाओ यहां से। फौरन चले जाओ। क्या बदतमीजी है। मैं एक वजीफा पढ़ रहा था कब्रिस्तान में बैठा। जबान लड़खड़ा गई मेरी। आप यकीन करें उसी लम्हे इतनी जोर का जैसे एक बम मार
दिया हो मेरे आसपास। मैं चौंक गया। मैंने बोला गया आज। छोड़ते नहीं है ये लोग। माफ नहीं करते। माफ नहीं करते। बदला लिए बगैर नहीं रहते। [संगीत] अस्सलाम वालेकुम दोस्तों, उम्मीद करता हूं आप लोग सारे खैरियत से होंगे, ठीक-ठाक होंगे। दर हकीकत के एक और नए एपिसोड में आप सब लोगों को वेलकम। अगर तुम लोगों ने चैनल सब्सक्राइब नहीं किया हुआ सो आई वांट इसी वक्त अभी और इसी वक्त जाकर सब्सक्राइब कर लो बेल आइकन प्रेस कर लो यह बहुत जरूरी होता है और सामने स्क्रीन के ऊपर मेरा Instagram हैंडल आ रहा होगा मुझे फॉलो
कर सकते हो क्योंकि वहां पर मैं ज्यादा एक्टिव होता हूं। यहां तो मैं एव्री मंडे आ रहा हूं और वहां मैं एवरीडे होता हूं। सो यह जरूर कर लीजिएगा। आज की जो हमारी पॉडकास्ट है वो किस स्टार्ट से आई एम श्योर तुम्हें अंदाजा हो गया होगा कि किस नोइयत की और किस तरह से और क्या-क्या बातें होने लगी हैं। मेरे साथ जो गेस्ट हैं इस पॉडकास्ट शुरू होने से पहले अच्छी खासी मेरी इनसे बातचीत हुई है और जब भी हम ये पॉडकास्ट शुरू करने लगे मेरे साथ हैं रशीद साहब सर अस्सलाम वालेकुम वालेकुम खैरियत से
हैं आप ठीक-ठाक हैं बरकात सर मैं जरा अपने ही तरीके से बात करता हूं। जब भी हम किसी अ बाबा का जिक्र करते हैं कोई या रूहानी डॉक्टर का जिक्र करते हैं ना तो हमारी नजर में ना एक एक हुलिया आता है कि बड़े-बड़े से बाल होंगे एक अलग तरह के कुछ कपड़े पहने होंगे और बड़ी सी दाढ़ी होगी। अगर बजाई तौर पर नॉर्मली आपको कोई देखे तो कोई कह नहीं सकता कि आप कोई रूहानी डॉक्टर हैं। जी जी असल में वजह यह है कि हम उन जाली आमिलों की तरह गेट अप नहीं बना सके
और हमारा सिलसिला भी हमें इजाजत नहीं देता इन सब बातों की कि हम स्क्रीन पे आके लोगों को मुतासिर करें रुमाल जलाएं या कोई ऐसा शोभदेबाजी करें। हमारे सिलसिले में कतन सख्ती से ममनून है इस बातों का। लोगों को डराना धमकाना ऐसा कुछ भी नहीं है। हमारा सिलसिला है हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती गरीब नवाज रहमतुल्लाह अलह से सिलसिला है बाबा अब्दुल शूर मलंग हम आपने सुना होगा बड़ा मशहूर कलाम है। चांदी का झूला तेरा सोने का पलंग मेरे बाबा मलंग। सानी बाबा सरकार हैं। हम फिर उसके बाद मुख्तारुल हसन चिश्ती बाबा हैं। हम शरीफाबाद और
मेरे पीरो मुर्शद जो हैं हाजी असलम खान चिश्ती साहब हैं। जिनसे बड़े-बड़े मैं काम करके आता हूं और मेरे सरकार की खास नजरें इनायत होती है मुझ पे के मैं कभी नाकाम नहीं हुआ। अल्हम्दुलिल्लाह। अल्हम्दुलिल्लाह। रजी साहब एक छोटा सा मैं आपसे सवाल पूछूंगा। आपके पास तरह-तरह के केसेस आते होंगे। किसी के ऊपर जिन हाबी हो गया, किसी का कुछ मसला हो गया। [गला साफ़ करने की आवाज़] आप ये सारी चीजें जब काम करते हैं जो सारी तो खुद के ऊपर थोड़ा भारीपन नहीं आता होगा। तो उसको कैसे आप दूर करते हैं? देखिए असल में
मसला यह है कि हम अपने ऊपर से हमारे हमारा कलाम ऐसा है अल्लाह कलाम इलाही से काम कर रहे हैं। ऐसा [नाक से की जाने वाली आवाज़] बोझ जब आता है तो अपनी खुद हम सेफ्टी करते हैं और दूसरा दो जिंदगियां खो चुका हूं मैं इस काम के अंदर। एक मेरी वाइफ थी। हां। मैं एक काम करके आया और मैं जब मरीज सही हो गया तो मैंने कहा कि आप जो है एक बकरा जिबा कर दीजिएगा दहलीज के ऊपर और इसे चार सिमतों में तकसीम करना है। उन लोगों ने लापरवाही की और उसके बाद जो
है मैं जब घर आ रहा था तो पता चला फोन पे कि आपकी वाइफ का हार्ट अटैक हो गया उन्हें। तो मैंने फौरन फोन किया जिस मरीज का मैं इलाज करके आया था कि आपने ऐसा किया? कहने लगे जी वो अभी तो अवेलेबल नहीं था बकरा। हम कल सुबह करेंगे। मैंने कहा आपने मेरे साथ बहुत जुल्म कर दिया। मेरी वाइफ की डेथ हो गई। फिर उसके बाद जो है सबर करना पड़ा। कोई पैसे कोई कुछ भी ऐसा नहीं है कि जो हम लेते हो हदिया किसी से। फी सब्लीला। क्योंकि हमारा सिलसिला ऐसा है इसमें शर्क
बिदत ऐसे कोई काम नहीं होते। दुआओं से पढ़ाई के जरिए इलाज किया जाता है। बड़े से बड़ा काम। मेरे पीर मुर्शद की एक खासियत है। अगर हाजी असलम खान चिश्ती साहब अगर वो टब्बा हस्पताल के बाहर बैठ जाए ना तो बस हाथ रख के दम करेंगे। दिल के बाल खुल जाएंगे। किसी के गुर्दे में पथरी है बगैर ऑपरेशन के वो बाहर। कैंसर का इलाज जो नामुमकिन है। आमिल हजरात पैसे खूब खाते हैं, खूब खाते हैं लेकिन मर जाते हैं वो मरीज। हमारे यहां शफायाब होते हैं। मुंह का कैंसर कई मरीज आते हैं और ये सब
आप लोग फी सब्ला फी सब्ला करते हैं। अब वो हमारे आस्ताने पे तकरीबन 800 लोग लंगर खाते हैं जिनसे जो के हम किसी मरीज से कोई पैसे नहीं लेते। हां अगर जो मरीज शफायाब हुआ हम उसने अपनी खुशी से कुछ डाल दिया, हिस्सा ले लिया वो उसकी मर्जी है। वरना जबरदस्ती नहीं है। जबरदस्ती नहीं है। ना कोई टोकन सिस्टम है ना कुछ। कुछ ऐसा नहीं है हमारे यहां। क्योंकि अक्सर बेहतर ये होता है ना कि यार टोकन लेना है। अच्छा टोकन के आप जी आप ₹300 रख दीजिए या ₹3000 रख दीजिए। क्योंकि मेरी नजर में
सर मैं मैं बहुत सच्चा और बहुत ऑनेस्ट बात करता हूं क्योंकि मेरी नजर में ना मैंने बहुत सारे ऐसे शोभदेबाजों से मेरा पाला पड़ा है। जो कि कहते हैं आपका काम हो जाएगा। जरा ₹1 लाख दे दीजिए। ₹00 दे दीजिए। हमारे यहां ऐसा नहीं है। या कभी कबभार ऐसा कहते हैं कि जी ऐसी नामुमकिन चीज कहते हैं कि जी शेर की मूछ का तिरछा कटा हुआ बाल चाहिए। अब बंदा बोलेगा भाई मैं कहां से लेकर आऊंगा? आप फिर बोलोगे अच्छा यार एक काम करो पैसे मुझे दो। मैं लेकर आ जाऊंगा। तो ऐसे लोगों से जो
है ना नहीं नहीं हमारे यहां ऐसा कोई बेवकूफ बनाने वाला सिलसिला नहीं है। और प्योर खालिस खालिस खालिस। क्या बात है। अच्छा मैं माज़रत के साथ एक बड़ा सेंसिटिव टॉपिक है। आपने शुरू किया सर अगर कोई मरीज का इलाज कोई करता है फॉर एग्जांपल अगर आपने किसी मरीज का इलाज किया और अगर आपने उसको बोला कि यार एक बकरा सदके में दे देना और अगर वो ना दे तो वो सारी चीजें आपके ऊपर आएंगी। हमारे [गला साफ़ करने की आवाज़] ऊपर उसका वबाल हमारे ऊपर आता है। वो चीजें हम पे हावी होती है। हम तो
यह भी नहीं कहते कि आप हमें पैसे दें। सदका वगैरह जो है वो आप करेंगे। अपनी जेब से अपने आप अब वो बास लोग ऐसे होते हैं कि जी शाह साहब आप कर दें कुछ कर दें हम भरोसा करते हैं वो एक अलग दीगर बात है लेकिन हमें ऐसी चीजों की जरूरत नहीं है। एक मरीज था जो कनाडा में था आपका जिसके ऊपर जिन्नात हावी था पोज़े तकरीबन 32 जिन्नात थे उसके ऊपर और यहां कनाडा से वो खास इलाज के लिए पाकिस्तान आए क्या हुआ था वह किस्सा जरा मुझे बताएंगे आप। वह किस्सा इस तरह
था कि बच्चा जो था कनाडा में अह मुकीम है वह लोग और डॉक्टर के गए मियां बीवी बच्चा बेसमेंट में बैठा था और जब वह आए हैं तो वह डरा हुआ सहमा था। सहमा हुआ था। और जब बच्चे से पूछा क्या हुआ? तो कोई जवाब नहीं। उस टाइम उसकी उम्र 9 साल थी। ठीक है। तो वो बहुत परेशान। कई साल तक उन्होंने डॉक्टरों से दवाएं ली। नफसियाती डॉक्टर्स के पास गए। मस्जिद के पेश इमाम से दम करवाने गए। तो इमाम साहब ने कहा कि आप ऐसा करें पाकिस्तान ले जाए। और ये इंशाल्लाह वहां इलाज हो
जाएगा। तो वो जब पाकिस्तान आए तो यहां के जो वो जाली आमिल जी पैसे लेने वालों ने खूब पैसे लिए। अब उनके जाने में टोटल एक महीना बाकी था। छ महीने वो यहां स्टे किया उन्होंने और खूब पैसे खाने के बाद किसी ने मेरा नंबर दे दिया कि जी इनसे राब्ता कर लें। यह सही कर देंगे। उन लोगों ने मेरा काम देखा हुआ था। तो जब मेरे पास नंबर आया मैं पहुंचा कोरंगी और वहां जाकर मैंने उनको दम किया मरीज को और मैं चला आया रात के 9:00 बजे उनकी वालिदा कहती है जी जो पैसे
खर्च हो जनाब आप ही इलाज करेंगे बहुत फर्क आया है कुछ फर्क आया है इन 10 11 सालों के अंदर तो बहरहाल रेगुलर मैं जाता रहा जाता रहा 15 दिन की सख्त मेहनत के बाद 32 दिन थे उस लड़के के ऊपर वो भी मुस्लिम नहीं थे। अच्छा हां गैर मुस्लिम थे। उनको हटाया और फिर उसके बाद जो है वो चले गए कनाडा वापस नॉर्मल मैंने आपको दिखाया भी था। जी जी इन्होंने मुझे वीडियोस भी दिखाई हैं। उस लड़के की किस तरह से वो क्या कैफियत में था। भाग रहा है। भाग रहा है। एसी छलांगे मार
रहा है। बहुत बुरा हाल किया हुआ था उसने अपनी फैमिली का जहां वो लोग आके रुके थे। तो बहरहाल ऐसे रशीद साहब ये 32 जिन्नात आए कैसे उसके ऊपर बेसमेंट में थे वहां उनके पहले से पहले से थे बेसमेंट में तो बच्चा खेल रहा था। वहां उसने पेशाब कर दिया। उसके बाद उस पे वो हावी हो गए सारे। ओ इस तरह के मामलात है। यह बड़ा एक एक वही वाली बात है जब भी कहते हैं कि भाई पाकी नापाकी का बड़ा जी बहुत ख्याल रखना चाहिए कभी किसी दरख्त के नीचे या किसी सन सुनसान घर
के पास पेशाब नहीं करना चाहिए बड़ी एहतियात करनी चाहिए क्योंकि नहीं पता होता है क्या बैठा क्या मामलात हैं यहां के ये है मामला अच्छा एक और बताएं ऐसा ही एक एक मरीज का इलाज किया ज्यादा सदका नहीं दिया। ये मेरे ख्याल वही वाली बात है जब ये वाइफ आपने दो जाने गई थी। एक एक आज से चार साल पहले हां एक बच्चे के ऊपर जो है ना स्कूल से जिन्नात चढ़ गए थे। स्कूल से जिन्नात चढ़ गए थे। हां वो दरख्तों पे खेल रहा था बीड़ी के दरख्त [गला साफ़ करने की आवाज़] पे। वो
जब घर आया तकरीबन 8आ फीट ऊपर छलांगे मारने लगा था वो लड़का। तो उसको मैं पर उस पर पढ़ाई की उसको सही किया और नॉर्मल कंडीशन में आ गया। मैंने कहा कि आप सवा किलो गोश्त जो है ना फौरन जो है कब्रिस्तान में रख के आ जाइएगा ऐसीऐसी जगह पे। लेकिन जब मरीज सही हो जाता है तो फिर वो बोलते हैं अब तो हमारा काम सीधा हो गया। हमें क्या तो मेरा चार माह का बेटा था। हम उस चीज ने आके उस को पकड़ लिया। उन लोगों ने गोश्त नहीं दिया ना रख के आए वहां
पर और वह मेरे लिए बेहद तकलीफ का बायस बना। मेरा छोटा मासूम बच्चा हलाक हो गया तो लोगों कोई बीमारी नहीं थी। कुछ नहीं कुछ भी नहीं था। तो दो जाने मैंने मेरे घर से गई और मैं बहुत तकलीफ में आ जाता हूं याद करके। नहीं नहीं मैं बहुत माज़रत चाहता हूं। मैंने ये आपसे बात भी की। लेकिन कब्रिस्तान में गोश्त रखकर आना ये ऐसा क्यों किया? एक्सरसाइज क्यों होती है? इसलिए रखा जाता है कि वो चीजें एक आम मुकाम पे नहीं आती जिन चीजों को हटाया जाता है। उनको उनसे तय किया जाता है आप
यह ले लें। ठीक है? आप इस बच्चे को छोड़ते हैं। हम आपकी जो खुराक है रखवा देते हैं। ठीक है? वो राजी होते हैं और हम कब्रिस्तान भेज देते हैं। कब्रिस्तान में रख के और आके बस नमक से हाथ धोने से। इतना सा काम था जो वो नहीं कर सके और हमें तकलीफ में डाल दिया था उन्होंने। तो ऐसे मामले आपने कभी सोचा नहीं क्या ये काम नहीं करना मुझे मैं छोड़ देता हूं ये काम। देखिए असल में मसला यह है कि एहसास तकलीफें लोगों की देखता था। मैंने कभी पतंग नहीं उड़ाई और मैंने कभी
क्रिकेट भी नहीं खेला। 21 साल की उम्र में मैं मैट्रिक में था। तो औलिया अल्लाह की खिदमत में रहता था मैं। हम तो उसके बाद चलतेचलते मेरे पीरो मुर्शद बाबा अब्दुल शकुर मलंग उनकी तालीमात मैंने पढ़ी और उनसे जुड़े हुए मुरीदैन को देखा तो मैं बहुत मुतासिर हुआ। मैंने ऐसे ही एक दुआ मांग ली थी हम कि अगर यह मेरा मसला सॉल्व हो गया तो मैं मुरीद हो जाऊंगा। लेकिन बाबा अब्दुल शकूर मलंग तो पर्दा फरमा गए पेशावर में मजार है उनका हम फिर वो उनके साहबजादे हैं सानी बाबा हुजूर मैं उनके दरबार में गया
और मैंने हाजिरी दी मैं वहां मुरीद होके आ गया मैंने बहुत फैज पाया उस दरबार से भी तो मुझे हुकुम हुआ कि जाए ये हाजी असलम खान चिश्ती साहब हैं इनसे जाके जुड़ जाइए जब मैं जुड़ा तो अल्हम्दुलिल्लाह मैंने वो फैज पाया जितने भी आस्ताने में आते थे बोलते थे कि सबसे ज्यादा इन्हें फैज मिला है इस दरबार से। अच्छा और हाजी साहब हाजी असलम खान चिश्ती साहब की खास नजरें इनायत रही। मैं बड़े-बड़े काम करके आ जाता हूं और मामलात मेरे बिल्कुल परफेक्ट होते हैं। बैक मेरी बड़ी मजबूत है। ये बात है। अब अक्सर
ये होता है कि कुछ घरों में जिन्नात होते हैं। लोग समझते हैं कि ऐसे पढ़ाई के जरिए फ्री में हो जाए। देखिए इनको जो है हाजिर करना पड़ता है। इनसे पूछना पड़ता है कि आप चाहते क्या हैं? जगह छोड़ने का क्या मुहदा है आपका? तो उस सूरत में वो मांगते तो बोलते हैं कि जी 10 बैल चाहिए हमें 10 गाय 10 भैंस लेकिन हम उनको लाते ललाते एक आध बकरे के ऊपर उनको बोल देते हैं सामने वाले को जी बकरा ज़बा कर दीजिएगा ये तो हम नहीं ले रहे ना कोई पैसे हां एक वो दीगर
बात है काम कर दिया किसी का और वो खुशी से हदिया दे रहा है तो वो उसमें भी मना नहीं है वो उठा के हम लंगर में डाल देते हैं जो 800 अफराद खा रहे हैं लंगर अच्छा साहब बहुत सारे ऐसे लोग होते हैं जैसे मुझे एक बंदा मिला वो बड़ा पैशनेट था और उसको उसको एक अलग जोश किस्म का जोश चढ़ा हुआ है। भाई क्या मुझे जिन ताबे करना है। मैं चाहता हूं कि मेरे जो हाथ में जो हो वो मैं जिन पकड़ूं और मैं उससे काम लूं। देखिए मामलात ऐसे हैं काबू तो आप
कर लेंगे। ठीक है? लेकिन उसको ले चलना बड़ा दुश्वार है। कहीं ना कहीं मुजे असरात होते हैं इन चीजों को काबू करने के बाद। लोग बहुत आसान समझते हैं। आपने अक्सर देखा होगा कि पता चलता है कि वो इस तरह का आमिल है और वो हलाकत में आ गया। किसी ने दिल पकड़ लिया उसका। हम तो यह वही चीजें हैं। यह गैर मरई कुतें हैं। इनसे बहुत मोहब्बत प्यार से काम लिया जाता है। एक ऐसे ही किस्सा था एक शोबदेबाज था। अ न्यू कराची की तरफ या कोरंगी की तरफ मैं छोटा था उस टाइम पे
तो उनका था वो मलंग थे। बड़े बाल उनके बड़े हुए बड़ी दाढ़ी बड़ी वो ऑपरेशन करते थे। अच्छा जी क्या ऑपरेशन करते थे कि किसी का कोई भी मसला हो तो वह एक छुरा निकालते थे। उसकी जो नोक थी वो थोड़ी सी घिसी हुई होती थी। अब वो छुरा यूं चुबाते थे और कुछ करते थे और अचानक से ना गुड़िया निकलती थी यहां से कीले निकलती थी और वो दूसरा जो भी मरीज को लेकर आया हुआ होता था उसका रिश्तेदार उसका भाई जो भी उसकी मां तो प्लास्टर पकड़ के खींच रही होती थी और बाबा
जी बाबा बाबा ने क्या जबरदस्त कर दिया है। उनका बेटा भी था उनके हते हम चढ़ गए थे। फिर उन्होंने बताया कि जी हमें बंदर चाहिए, हमें तोता चाहिए, हमें जो है डिजिटल कैमरा चाहिए। उनकी ख्वाहिशात बढ़ना शुरू हुई। तो हमारे रडार में आ गया कि यार यह जो है ना ये चीटर आदमी है। अब उसने कुछ की होगी कोशिश कोई या तो कोई इलाज कर रहा होगा या क्या कर रहा होगा। उसका दिमाग पलट गया। नाउज्लाह नाउजब्लाह सर मोहल्ले वाले उसको बहुत मानते थे कि भाई बाबा जो है बहुत काम करते हैं। बाबा भी
चौराहे में आके नाउज्लाह अस्तकफुल्लाह उसने कुरान शरीफ की बेहुरमती की। उन्होंने जला दिया। वो शैतान आ गया उसके साथ। वो आज भी बंदा जिंदा है। जेल में है वो क्योंकि जो उसने हरकत की थी और जो उसका बेटा था अब जब उसको जो पकड़ा तो उसने बोला ये तो मेरा बाप ही नहीं था भाई। मैं तो उसके पास काम करता था। हम शोबदेबाज थे। इसने ये जिन्नात पकड़ने की कोशिश की थी कि कुछ करे और उसका दिमाग ऐसे पलटा था। देखिए जिन्नात को काबू करना इतना आसान नहीं है। लोगों ने समझ लिया। जो लोग इस
तरह की कोशिश करते हैं वो या तो पागल हो जाते हैं जी या अपनी जान से चले जाते हैं। ये गैर मरई कुतें बेहद ताकतवर होती हैं। हमारी आपकी सोच से भी ज्यादा तो क्यों किया जाए ऐसा गलत काम? हम जिससे खराबियां पैदा हो। अच्छा जैसे माज़रत मैं आपकी बात काट रहा हूं। जैसे आपने बोला ये जो जो कुवत है ये बड़ी ताकतवर होती है। ताकतवर होती है। तो एक देव का किस्सा था। एक शख्स पे देव आ गए तो वो क्या कहानी थी? देखिए वो हुआ ये था आज से तकरीबन तीन साल पहले हम
मैं गया था यहां पर औरंगी टाउन में ठीक है [नाक से की जाने वाली आवाज़] मैं दम बम करके घर को हिसार बांध के मैं आ गया हम और मैंने यह उनको कहा कि भाई देखिए इस मरीज को जाने नहीं दीजिएगा 12 14 घंटे घर में रखिएगा ठीक है ना और इसका सदका देना है आपने। ठीक है? 3 दिन सदका देना है। सवा5 किलो गोश्त का। आप किसी जाली आमिल के पास जाएंगे ₹00 देंगे। यहां तो आप 5 ₹6000 में आजाद हो रहे थे। उन्होंने नहीं किया। सदकावत काका कुछ भी नहीं किया। मरीज सही हो
गया। जी हमारा घर सेट हो गया। उनके घर के अंदर मामलात ऐसे थे के बर्तन उठाउ उठा के फेंकते थे जब वो रात को सोते थे अलमारियां खुल रही हैं। दरवाजे पटक रहे हैं। अच्छा इस तरह के मामलात थे। तो बहरहाल वो कहने लगे जी हमारी इतनी गुंजाइश नहीं थी और हम इसलिए कुछ नहीं कर सके। लेकिन मैंने बोला देखिए ये गलत है ना। अब वो उस देव ने मुझे आके पकड़ लिया। यकीन करें मैं घर में आया हूं। आधा घंटा आराम किया। उसके बाद जो मेरी हालत बुरी हुई है। बस वो मुझसे कह रहा
था कि मैं तुम्हें लेके जाऊंगा। अल्लाह सलामत रखे। मेरे पीरो मुर्शद का जिक्र बुलंद करे। आमीन। हाजी असलम चिश्ती खान साहब के जब इल्म में आई ये बात उन्होंने फौरन अपनी गाड़ी भेजी मेरे लिए और मेरे ऊपर दम किया और जो चीजें थी वो हटाई उस देव का हटाया [नाक से की जाने वाली आवाज़] और फिर मैं नॉर्मल तीन दिन के अंदर मैं हॉस्पिटल रह के फिर आया हूं वापस जिंदा। वरना एक्सपायर हो जाना था मैंने भी। तो लोग गफलत ना करें। जब कोई बताए रूहानी डॉक्टर कि आप इस चीज को कर लें तो वो
कर लें। आपका कौन सा सबसे मुश्किल एक पार्ट था जिन जिन्नात की भी किस्में होती है ना। एक एक कोई लंबा होता है। एक कोई छोटे कद का होता है। एक वो इंसान की शक्ल इख्तियार कर लेता है। तो आप मुझे बताइए कभी आपका ऐसे जिन से पाला पड़ा जो कि बहुत जिद्दी हो। देखें अभी परसों की बात है हम यह मेमन फाउंडेशन के पीछे एक रोड जा रहा है। सही है। हां वहां एक कुत्ता ब्लैक कलर का आके और बिल्कुल मेरे सामने आ गया और भौंकने लगा। मैंने उसको देखा। मैंने बोला दफा हो जाओ
यहां से। फौरन चले जाओ। क्या बदतमीजी है? असल में मेरे साथ जो साहब थे ना तो उनको मैंने बताया था कि ये एक ग्राउंड बना हुआ है वहां पे। हम हम रात के 3:30 बजे मैं एक काम करके आ रहा था तो वहां छोटे-छोटे जिन्नात के बच्चे खेल रहे थे रात के 3:00 बजे। अच्छा तो उन साहब को मैं यही बता रहा था कि यार यहां पर जो है ना जिन्नात हैं। आप दुआ पढ़ लें मेरे साथ जा रहे हैं। मैं इतना बताया वो कुत्ता जो है ना थोड़ा सा आगे गया हूं। सामने फ्रंट पे
आ गया मेरे ब्लैक कलर का। मैं समझ गया कि यह मामला क्या है? क्यों बता रहे हैं आप? बहरहाल उसको मैंने डांटा। मैंने बोला चले जाओ यहां से फौरन वो फौरन अंदर की तरफ ग्राउंड में चला गया तो ये इन लोगों को भी बुरा लगता है कि इनके राज अब अपशा हो रहे होते हैं तो ये फिर सामना करते हैं लाजमी हम तो हर एक के बस की बात नहीं है जिन्नात का सामना करना जिन्नात बहुत अच्छे भी होते हैं हम और गुस्सा बहुत गुस्सा आता है इनको बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा बड़े नाजुक मिसाज होते
जरा सा आपकी बात लग गई या उनको जरा सी जरूर पहुंची वो बदला लिए बगैर नहीं छोड़ते इस तरह अच्छा बहुत सारे अब आजकल के दिनों में ना बहुत सारे कंटेंट क्रिएटर मतलब जिस वीडियोस वगैरह YouTube पर जो लोग बनाते हैं लड़के वगैरह उन्होंने अच्छा इस इस हरकत में मैं भी शामिल हूं। मैंने भी ये चीज की थी कि मैंने तो सोचा था कि मैं इसको बहुत झूठ बनाऊंगा, फेक करूंगा कि हां भाई यहां कुछ है, वहां कुछ है। लेकिन जब असल में होने लगा तो मुझे फिर मजा आ गया। छेड़ना नहीं चाहिए इन चीजों
को। तो मैं कब्रिस्तानों में जाता था। रात के 2-3 मुझे वीडियोस वगैरह बनाता था। चीजें होती थी, आंखें नजर आती थी, चीजें नजर आती थी। अब जब मामला जब हद से ज्यादा आगे निकलने लगे तो मैंने वहीं स्टॉप लगा दिया कि भाई यह मेरे लिए एक फाइनल वार्निंग आ गई है। वार्निंग पहले कर देते हैं। वार्न करते हैं। हां मुझे दो तीन बार मुझे जब वार्निंग मिल गई तो मैं रुक गया। लेकिन अब मैं देखता हूं कि सोशल मीडिया पे बहुत सारे ऐसे यंग बच्चे हैं जो पैसे बनाने के लिए, कंटेंट बनाने के लिए, मशहूरी
हासिल करने के लिए बहुत सारी ऐसी जगहों पर रातों में जाते हैं। कुछ तो कब्रों के अंदर भी बैठ रहे हैं। कुछ इस किस्म की चीजें कर रहे हैं। तो क्या ऐसी चीजें करने से नुकसानात क्या-क्या हो सकते हैं और फायदे क्या-क्या देखिए नुकसानात बहुत तरह-तरह के हो सकते हैं। इंसान को कोई बीमारी भी नहीं है। वह बिस्तर पे पड़ा है। हम वजह क्या है कि आप छेड़छाड़ करके आ रहे हैं। किसी आराम से बैठे हुए को आप जब छेड़ेंगे तो वो आपको नुकसान पहुंचाएगा। आप आग में हाथ डालेंगे तो हाथ तो जलना ही जलना
है। हम तो लिहाजा एहतियात बहुत अच्छी चीज है। ये लोग जो कर रहे हैं लड़के ये गलत कर रहे हैं। ये अपने लिए मुश्किलात पैदा कर रहे हैं। आज नहीं तो कल मिलेगा इनको। बिल्कुल बदला लेंगे। छोड़ते नहीं है ये लोग। माफ नहीं करते। माफ नहीं करते। माफ़ बदला लिए बगैर नहीं रहते ये लोग। तो हम भी काम करते हैं तो हमारा अंदाज ही और है। अपनी बात मनवाते हैं हम इनसे। प्यार मोहब्बत या डांट के जी जी कहीं डांट की भी जरूरत होती है। लेकिन ये कहना मैं जला दूंगा। मैं आपको मार दूंगा और
लोगों से पैसे लेना शोभदेबाजी दिखाना ये सब अच्छा है। जलाने वाला जो भी बोलता है ना मैं इसको जला दूंगा। मैं इसको जो है वो झूठ होता है वो। फ्रॉड ऐसे वो तो कोई ऐसी शैतानी कुत है जो बाज ना आ रही हो नहीं मान रही हो हदों को पार करने लगे तो वो आखिरी हरबा यही होता है उनको जला दिया जाए या उनको बंद कर दिया जाए तो ऐसा होता है लोगों ने तो तमाशा समझ लिया इन सब बातों को अच्छा एक छोटी सी बात मैं आपसे करना चाहूंगा कहते हैं कि अगर किसी के
ऊपर जादू हो [गला साफ़ करने की आवाज़] या जिन्नात हो मेरे ख्याल जादू वाली बात कह तो उसको समंदर के पानी से नहला दो। ये मैंने सुना है कि भाई समंदर जादू हो या जिन्नात उसको समंदर के पानी से नहला दो। सही हो जाएगा। देखिए ये कहा जाता है कि घर में अगर असरात हैं आसीब है। हम फर्ज धोया जाता है और जिक्र इलाही पढ़ा जाए। ठीक है? और किसी रूहानी आलिम से रूहानी डॉक्टरानी से राब्ता किया जाए ताकि आपकी तकलीफ को दूर किया जाए। सबसे बड़ी चीज ये है कि लोग नमाज नहीं पढ़ते। हम
बावजू नहीं रहते नापाकी के हालत में रहते हैं तो उसके तो मुज़र असरात हैं। शयातीन हावी रहते हैं। आप किसी जगह से ऐसे गुजर रहे हैं जहां नापाक चीजें हैं वो आपको मुतासिर कर सकती हैं। तो लिहाजा नमाज की पाबंदी की जाए और किसी रूहानी डॉक्टर से राब्ता किया जाए ताकि आपके मसलों को हल कर सके। अच्छा रशीद साहब एक और बात मुझे पूछनी है। ये तो चले हमारी जेनेरिक बातें चल रही हैं। बहुत सारे ऐसे केसेस पंजाब साइड के पंजाब साइड के बहुत निकले हैं के लड़की के ऊपर कुछ मामलात थे और जो भी
किसी जाली बाबा के पास वो जाते तो गलत तरीके से उनको हाथ लगाना इस किस्म की चीजें बहुत जो है ना कुछ पकड़े भी गए हैं। पुलिस ने पकड़ा कि भ किस किस्म की तुम ये हरकतें कर रहे हो। तो जो औरतें होती हैं जाहिर सी बात है लेडीज लोग का आप नहीं देख सकते नहीं टच करते तो उनका इलाज कैसे किया जाता है? देखिए आप ये समझ लें कि यहां बैठ के पावर किसे कहते हैं? रूहानी कुत ताकत क्या चीज है जो हमें हमारे बड़ों से ट्रांसफर हुई है। जी जी तो लेडीज का सामना
नहीं हां अक्सर कोई ऐसा संगीन मरीज है तो धागा होता है हमारे पास। ठीक है। पर्दे के पीछे धागा दे दिया, पकड़ा, उसको दम किया। ठीक है? और उस धागे को जला दिया ताकि तबियत संभल जाए मरीज की। बाकी ये शोभदेबाजी कि जी वो आप बकरा ले आ उसको हम ज़बा करेंगे। हम टोटल अल्लाह की रजा के लिए काम कर रहे हैं। जो हमारे औलिया अल्लाह का सिलसिला है। हमारा कोई इसमें इंटरेस्ट नहीं है। पैसे वरना पता नहीं अल्लाह माफ़ करे। ऐसेसे चीटर आते हैं कि भ एक तो थे शलवार वाले बाबा अस्तक वो उनके
आस्ताने के बाद दरख्त के पास जो है ना सारी शलवारे लटक रही है कि भ वो शलवार वाले बाबा हैं। बहुत सारे बहुत सारे अल्लाह माफ करे वो नाड़े वाले अजीब अजीब सी चीजें आती हैं। कोई रेलवे ट्रैक के पास भी बहुत सारे कुछ बैठे हुए हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] ये सब फेक है। सब फेक है ना? ये पागल बना रहे हैं लोगों से। खूब नजराने ले रहे हैं। और यह भेड़िए बने हुए हैं। दूसरे की मां बहन बेटी हमारी बहन बेटी होती है। हमारे यहां हमारे आस्ताने में महफिल होती है। यकीन
कीजिएगा इस तरह के पर्दे लगे हुए हैं कि मजाल नहीं है कि कोई मर्द उस तरफ देख ले या लेडीज इस तरफ हम बहुत शरई निजाम सिस्टम बनाया हुआ है हमारे आसानों में। हम तो हम हम तो इन सब बातों से बहुत दूर हैं। हमें जरूरत नहीं है। नहीं जरूरत नहीं है। बिल्कुल आपका कोई ऐसा किस्सा है जिसमें आपको लगे कि बॉस ये जरा इसने तंग किया है। देखें मैं एक वजीफा पढ़ रहा था कब्रिस्तान में बैठा हुआ। अच्छा। तो आखिर के दो दिन बाकी थे। मैं थोड़ा सहम गया और मेरा तलफुज पढ़ाई के अंदर
तलफुज बदला। जबान लड़खड़ा गई मेरी। आप यकीन करें उसी लम्हे इतनी जोर का जैसे एक बम मार दिया हो मेरे आसपास। मैं चौंक गया। मैंने बोला गया आज मैं। लेकिन पीरो मुर्शद का तसवुर मैंने किया। अल्हम्दुलिल्लाह। अल्हम्दुलिल्लाह मैं सेफ रहा। वो नाकाम हो गया मेरा चिल्ला जो था। अच्छा। लेकिन मैं सेफ रहा। यह बड़ी खुशनसीबी थी मेरी। लेकिन वो दिन मेरा बड़ा भयानक था। तो बस धमाका हुआ था। धमाका हुआ था। जैसे किसी ने जोर से धमाका किया। वो गैर मराई कुतें थी जो मुझे डरा रही थी कि उठ जाए और पागल कर दें या
मार दें। या आखिर के दिनों में जो है ना ऐसे मामलात होते हैं। डरावने चेहरे, डरावनी शक्लें नजर आएंगी। धमाके की आवाज आएगी। कोई किसी रूप में दोस्त के रूप में आ जाएगा। इधर आ बात सुन। तो अगर आप इन मामलात में आ गए उनके बहकावे में तो आप गए। वो मैंने सुना था कि कोई जो है वो चिल्ला काट रहा था और उसके शुरू के दिन बिल्कुल सही गए। बट लेकिन आखिरी के दिनों में क्या हुआ कि उसकी बीवी आई और उसका बच्चा आया और उसकी बीवी जो है बच्चे का गला काटना शुरू हो
गई। बिल्कुल ऐसे ही ये गैर मरी होते हैं। और वो बंदा देख रहा था कि यह मेरे बच्चे का गला काट रही है। लेकिन कहा यह जाता है कि वो सब आंखों का धोखा होता है। धोखा होता है। ये सब धोखा होता है। ये सच बात है। ये सच बात है। ओए होए होए होए होए होए। और चिल्ला काटना इतना आसान नहीं है। लोगों आसान नहीं है। असल में इजाजत ली जाती है अपने बड़ों से। फिर उसके बाद ये होता है। और गफलत ये हो गई कि वो राब्ता मैंने किया नहीं। हां अपने पीर मुर्शद
से और वो नाकामी का मुंह इसलिए मैंने देखा वो लेकिन उसके बाद जो है बहुत नसीहत हुई कि आइंदा मैंने कभी बगैर इजाजत कोई काम नहीं करना। मैं बहुत बड़े-बड़े काम करके आ जाता हूं। तो हाजी साहब मुस्कुराते हैं और दुआओं में याद रखते हैं। अल्लाह ताला तुम्हें और इज्जत दे। आमीन। तो ये सब अल्लाह की तरफ से है। जो होता है अल्लाह के हुकुम से होता है। और हम तो एक कोशिश करने वाले लोग हैं। हम हमारे पीरो मुर्शद की तालीमात में से है कि लोगों से पैसे नहीं लेने आपने। हम और किसी को
डराना धमकाना नहीं है। अक्सर चोरी के केसेस होते हैं। हमें पता है कि ये चोर है। लेकिन क्या उसमें जाने चली जाती हैं। तो हम मना कर देते हैं कि जी ये चोरी का कोई काम नहीं लेते। अच्छा अक्सर बेशतर ऐसा होता है किसी के ऊपर जादू हो तो वो आपके पास आए कि भाई इनके ऊपर जादू है लेकिन लोगों को यह बड़ा एक हुड़क होती है कि किसने किया जादू हां हम हमें इजाजत नहीं है नहीं बताते हम बिल्कुल नहीं बताएंगे हां मरीज को सही करना हमारा काम है वो हम कर देते हैं लेकिन
होता नहीं है जरा हिंट तो दें लेकिन उसमें उसमें हम करते हैं कि देखिए वो बीमार हो जाएगा जो भी होगा और होता है वो बीमार बाद में क्योंकि जब हम कार्ड स्टार्ट करते हैं और वो मामलात खत्म करते हैं उसके तो रिवर्स हो जाता है। रिवर्स हो जाता है। वो बीमार हो जाते हैं और वो नजर आ जाते हैं। लेकिन हम उनसे यह वादा लेते हैं कि आप उनको एक लफ्ज भी नहीं कहेंगे ना लड़ेंगे बाउंड करके और फिर बता दिया जाता है कि देख ले जी बीमार हो जाएंगे वो नजर आ जाता है।
अभी ऐसे मामलात हैं कि जाली आमिल है। खूब तस्बीहात पहनी हुई है। कड़े पहने हुए हैं। लेकिन हमारे पीर मुर्शद को आप देखें बिल्कुल सादा रहते हैं। माशा्लाह सुभान अल्लाह। तो बड़ा फैज मिला और अक्सर लोग कहते हैं कि भाई शाह साहब आप ले गए बाजी यहां पे [नाक से की जाने वाली आवाज़] आस्ताने। क्या बात है। क्या बात है। मोहब्बत लगाना और अदब बा अदब ब नसीब और बेबद बदनसीब। ऐसे ही एक किस्सा हुआ था। एक साहब थे वो है ना फोन पे दम करते थे। तो उनका यह किस्सा था कि भाई आप हमारे
इजी पैसा में या जो भी जायज कैश में जो इतने पैसे डाल दें आपका जो भी मसला था वो हल हो जाएगा। अच्छा हम तफरी के मूड में थे। हमने कहा चलो देखते हैं बाबा कितने पानी में। तो हमने कहानी बनाई। अब कहानी ये बनाई कि भाई हमें एक लड़की से मोहब्बत है और हमारी फप्पो चाहती हैं कि हमारी शादी उनसे हो जाए और मैं फप्पो की बेटी से शादी करना नहीं चाहता और उस लड़की के जो वालिद साहब हैं वो चाहते हैं कि यह मामलात खत्म हो जाए सारे। अब बड़ी बंदिशें आ रही है।
बड़ा मसला हो रहा है कि तो उस बाबा ने अच्छा अच्छा आप जरा ये पैसे भेजें मैं आपको बताता हूं। मजे की बात यह है ना मेरी कोई फप्पो ना मेरा ऐसा कोई सीन मैंने ऐसी कोई फेक कहानी बना के उनसे पूछा उसने बोला देखिए आप परया हुआ है जादू बंदिश हुई है सिफली है और यह बड़ा सख्त हुआ है और आपके ऊपर हांडी वाला जादू भी करवाया जा रहा है और अच्छा कौन करवा रहा है ये उसके लिए आपको थोड़े ₹15000 भेजने पड़ेंगे जी हां ऐसा हो रहा है सर ले लें ₹15000 कौन आपकी
फपो आपकी फपो आपके ऊपर जो है काला किया है। लड़ाई करवाती है। बहुत दुख की बात है। दिल तो मेरा चाह रहा था कि नई-नई गालियां दूं उसको। लेकिन अब मैं वो सारी चीजें रिकॉर्ड कर रहा था, सुन रहा था। फिर मैंने बोला सर एक बात बोलूं महाराज सर मेरी पापा कोई है ही नहीं बस। तो आप है चीटर। तो ऐसे अब इनका ना माइंड गेम बड़ा होता है सर। अब जैसे वो आपसे बैठेंगे। अच्छा क्या नाम है आपका? अच्छा वालिद साहब का क्या नाम है? घर में कितने अफराद हैं? अब वो ना अगर नेचुरली
कोई किसी से कोई प्रॉब्लम होगा ना यार मेरी ना शादी का बड़ा मसला है। आपके आई एम श्योर आपके पास भी ऐसे किस्से आते होंगे कि मैं चाहता हूं मेरी महबूब जो है मेरे कदमों में आ जाए। तो ये मैटर है फलाना मैटर है। अब आधे से ज्यादा इंफॉर्मेशन मैंने आपको दे दी। अब जो शोभदेबाज होगा जो वो होगा ना उसी में से कैलकुलेट करके निकालेगा। अच्छा इसका ये आशिकाना मसला है। उसका लड़की का बाप भी मां भी है। ये बहन भाई है वो वो कहानी ऐसे घुमा के बताएगा मैं सोल्ड हो जाऊंगा। और अगर
मैं वही वाली बात जो डूबने वाले को तिनके का सहारा चाहिए। हां जी हां वो पैसे देना शुरू हो जाएगा। ये कर दो वो कर दो कुछ कर दो। बिल्कुल ऐसे ही हो रहा है। लेकिन हम तो सीधी एक राह दिखाते हैं कि आपको अगर मोहब्बत है ना आप सबसे पहले पांच वक्त नमाज पढ़ना शुरू करें और जो हम आपको वजीफा दे रहे हैं आप वो पढ़े। ठीक है? और आपको बहुत जल्दी है तो आस्ताने पे आइएगा। है ना हमारे बड़ों से। अच्छा तो ये वाला ऑप्शन है महबूबा के कदमों में। बहुत सारे आते हैं।
बहुत सारे [हंसी] अक्सर मीडिया वालों ने मुझे चेक किया। हां। मैंने बोला बेटा देखो बात ये है मजाक नहीं करते बुजुर्गों से। है ना? आप नमाज पढ़ा करो। आपका जो भी मसला आप बोल रहे हो ना पहले इधर इस तरफ तो आओ। इस तरफ आओ। देखें अल्लाह ताला के यहां खजानों में कोई कमी नहीं है। बेशक। बिलीव मी आप जो मांगेंगे अल्लाह देगा। लेकिन शर्त क्या है कि अल्लाह को तो राजी करना है हमें। अल्लाह को राजी करेंगे। बड़ों का अदब करेंगे। सबसे पहले मां-बाप की खिदमत, मां-बाप की दुआएं लेनी है। हम है ना? जब
आप नमाज़ नहीं पढ़ेंगे और अपने वालदैन का खिदमत में नहीं आएंगे तो आप कामयाब कैसे होंगे? कामयाबी चाहिए। वालदैन की खिदमत और जो आपके बड़े बुजुर्ग हैं उनका अदब एहतराम ये बहुत जरूरी है। और कुछ नहीं है। दुनिया की जिंदगी महज धोखा है। हम सब मुसाफिर हैं। आज हैं कल चले जाएंगे। कल चले जाएंगे। इस दो रोटी के लिए इंसान इतना अपने आप अपने जमीर को बेच देता है। ये तो गलत है। अच्छा मेरी पडकास्ट के नीचे ना बहुत सारे लोग जो भी सुनते हैं किसी ना किसी हर किसी का कोई ना कोई मसला जरूर
रहा है। अब आप रूहानी डॉक्टर हैं। 10 किस्म के मसले आपकी नजरों के सामने गुजरे होंगे। आप हर वक्त जिक्र में भी रहते हैं अल्लाह ताला के। मेरी पडकास्ट जो जो इस वक्त सुन रहा है उसका कोई ना कोई मसला जरूर रहा होगा। तो रिज़्क की बरकती के लिए रिज़्क में बरकत के लिए और सेहतयाबी के लिए अगर कोई वजीफा बता सके अल्लाह अल्लाह अल्लाह का कलाम ही है। जाहिर सी बात है आप क्या बताएंगे जो आप इजाजत दे सके [गला साफ़ करने की आवाज़] कि आप ये पढ़ जी देखें सबसे पहली चीज है फजर
की नमाज आप पढ़ना शुरू कर दें। ठीक है? और दूद इब्राहिम की कसरत करनी है। चलते फिरते उठते बैठते इंशााल्लाह गैब से अल्लाह ताला रिज़्क की परवानी करेंगे। रिज़्क के दरवाजे रोजी के दरवाजे तमाम चीजें खुलने लगेंगी। हम और एक वजीफा है चलते फिरते ला इलाहा इल्लल्लाह मलिकुल हकुल मुबीन जो बेहद कर्जे में आ गया हो हम और जो बेहद परेशानियों में हो तो वो इस वजीफे को जारी रखे और जब एंड करे तो दद शरीफ तीन बार पढ़ के उसको स्टॉप कर दे तो इंशा्लाह कामयाबी कामयाबी है अल्लाह के हुक्म से इंशाल्लाह और अगर
किसी को लगता है कि उसके ऊपर जादू के असरात हैं जादू है तो उसके लिए जो है हम दरबार में बुलाते हैं हम वहां आए ठीक है ना और नमाज़ जरूर पढ़नी हमारे नमाज़ की पाबंदी अगर हमसे किसी को फैज लेना है पहले नमाज़ की पाबंदी है और फिर उसके बाद जो हम हो सकेगा उसके लिए फला आपका आपका थाना कहां है आप आपका हॉस्पिटल कहां है मतलब हॉस्पिटल देखिए बात ये है हम तो अपने बड़ों के अभी कालीब इल्मी के दौर में लेकिन काम तो करते हैं हम लेकिन जिसको बुलाते हैं हम यहां अलादम
स्क्वायर लालू के 10 नंबर पे रुकनुद्दीन फ्लैट है हम तो वहां पर है सैयद मुख्तारुल हसन चिश्ती सरकार का दरबार है मजार उसी में मस्जिद है अभी हमारे हाजी साहब ने हाजी असलम खान चिश्ती साहब ने अपने पैसों से किसी से कोई एक परचेस पैसे नहीं नहीं लिए और अपने पैसों से उन्होंने मस्जिद तामीर की माशा्लाह सुभान अल्लाह और वहां बड़े लोग फैज पाने आते हैं और नमाज के पाबंद हो गए, दीन से जुड़ गए। है ना? जो शरई अहकामात हैं, वह हमारे यहां बताए जाते हैं। अब वो लोग यह सोचे कि एक-ए घंटा बैठ
के हाजी साहब सुनेंगे। हमारे पीरो मुर्शिद ऐसे साहिब नजर हैं कि मैं यहां बैठा हूं तो मेरे पीर मुर्शद को मालूम है कि मैं क्या कर रहा हूं। मैं आपके साथ बैठा हूं। तो साहिब नजर हैं। बस वो एक निगाह डालते हैं और मामलात जांच लेते हैं और दम करते हैं। फरमाते हैं कि भाई यह आप अल्लाह का इस्म मुबारक है। ये आप पढ़ें और जाएं आपके हालात बेहतर हो जाएंगे। ना कि हमारे यहां ऐसा नहीं होता कि जी बकरा लेते आना या डब्बे में टोकन डालना। देखें जब आप सेहतियाब हो जाए वहां अल्हम्दुलिल्लाह 500
700 800 ऐसे गरीब गुरबा आते हैं उम्मीद करके कि यहां लंगर मिलता है हम हर हफ्ते वहां लंगर खाते हैं। अब एक मरीज सही हो गया जो डॉक्टरों को आप पैसे दे रहे हैं। अगर अल्लाह के बंदों में आप खाना खिलाते हैं तो वो आप ही को फायदा देगा ना। तो हमारे सिलसिले में ऐसा कुछ भी नहीं है कि टोकन सिस्टम हो या कोई बकरे जिबा करवा अगर हां कोई सदके की जरूरत होती है बकरे की जरूरत है वो हम आपको बता देंगे जाए ऐसासा कर लीजिएगा हमें आपके पैसों की जरूरत नहीं है हम अल्लाह
की रजा के काम करते हैं बिल्कुल और वही वाली बात है देखें इनका काम है तो पढ़ाई देना ये डॉक्टर है रूहानी डॉक्टर है करने वाली जात सिर्फ एक है जो कि ऊपर बैठा है उसी वो अल्लाह जो चाहेगा वही सारी चीजें होंगी अब अक्सर ऐसा होता है घर में है मरीज और वो आ नहीं सकता तो फिर कभी हम चले जाते हैं। सही दम कर दिया उनको पानी दे दिया। ठीक है? यह नहीं है कि हमने वजीफा दे दिया तो हाथ हाथ हमने हटा लिया। ऐसा कुछ भी नहीं। उसका नाम वगैरह लेके उसके लिए
हम रात में बैठ के मेहनत करते हैं। अल्लाह सिफारिश करते हैं। अल्लाह इस मरीज को सेहतियाबी अता फरमा। जो हमसे हो सकता है बिल्कुल करके बंदे को क्लियर कर देते हैं। सर पता है क्या रशीद साहब मैं जो पडकास्ट करता हूं ना माशा्लाह से करम है अल्लाह पाक का मुझे बहुत सारे लोग सुनते हैं बहुत सारे लोग प्यार करते हैं बहुत सारे लोग देखते हैं और मैं मेरी जिम्मेदारी जो है ना बहुत बड़ी है तो अगर मैं किसी का पॉडकास्ट कर रहा हूं ना तो मेरे कंधों पर इतनी बड़ी जिम्मेदारी होती है कि कभी कबार
इंसान से गलती हो जाती है। जैसे मैंने कुछ माज़ में कुछ ऐसी पॉडकास्ट कुछ ऐसे लोगों के साथ की थी जो बजाहरी तौर पर बिल्कुल सही थे। लेकिन पडकास्ट रिलीज होने के बाद जब उनके पास बहुत सारे लोगों ने उनको अप्रोच किया तो फिर उनके असल रंग निकलना शुरू हुए पैसे मांगना शुरू हुए। वो बहुत बहुत एक बहुत ही मुझे फिर बुरा लगने लगा कि जब बच्चियों के मुझे मैसेज आना शुरू हुए कि आपने फलाने फलाने का पॉडकास्ट किया था। वो हमसे इतने लाखों रुपए मांग रहा है। आपने फलाने का पडकास्ट किया था। वो तो
इस किस्म की बातें कर रहा है। तो मुझे मुझे बहुत डर है। मुझे बहुत डर रहता है कि यार अल्लाह खैर करे। बस मुझसे कोई वो ना हो जाए। तो बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है जो जो भी मैं कर रहा हूं। देखिए आज भी ऐसे ही हैं। 10 साल बाद भी ऐसे ही रहेगा मामला। क्योंकि हम सिलसिले वाले लोग हैं। हमारे यहां जो है ना पकड़ बहुत सख्त है। पकड़ बहुत सख्त है सर। और वैसे भी आज क्या कर रहे थे भाई रशीद भाई? बस सरकार का इतना कहना ही हमारे लिए जो है ना जान
निकाल देगा क्योंकि उन्हें पता है कि क्या कर रहे हैं रशीद भाई। ठीक है ना? एक ने मुझे ऐसे ही दे दिए पैसे कि ले जी आप इतनी दूर से आए हैं। बैठो यहां रशीद भाई अच्छी बात तो नहीं है ना। मैं डर गया। मैंने कहा सरकार गलती हो गई। मैंने [हंसी] मैंने मांगे तो नहीं थे। जरा ख्याल करें। अगर कोई खुशी से आपको कर रहा है सपोर्ट के। ठीक है आप दूर वो आप मुंह से नहीं मांगना है आपने मैंने बस गलती हो गई ना मैंने यह कह दिया कि भाई देखिए मैं इतनी दूर
से आया हूं वहां ये लफ्ज़ था इशारा था पेट्रोल जलता है सही है ये बात है लेकिन फिर तंब पकड़ हो गई सरकार फरमाते हैं कि देखो भाई रशीद भाई अगर आपने कोई ऐसी गलती की जो कुछ है आपके पास आप खाली होके बैठ जाएंगे है ना लोग चप्पल मारने लगेंगे आप तो यह खौफ भी जिल्लत का बहुत बड़ा होता बहुत बहुत बहुत चलिए रशी साहब थैंक यू सो मच आपने वक्त निकाला आप आए अब एक आखरी ज्यादा छोटी सी बात आपने आने से पहले आपको मेरे बारे में भाई ने बताया था जी आपका नाम
लिया था और मैंने इनको बताया कि अल्हम्दुलिल्लाह अल्हम्दुलिल्लाह आपके वालदैन की दुआएं आपके साथ हैं। हैं और इंशाल्लाह हमेशा कामयाबी से हम किनार रहेंगे आप। कोई आपको नुकसान पहुंचाने आएगा भी ना वो अपना नुकसान कर लेगा। ओए होए लिख लें ये मेरी बात अल्लाह के हुक्म से ऐसे ही हो रहा है। कोई आपका बुरा नहीं कर सकता अल्लाह के हुकुम से। भाई जो उन्होंने बात बोली ना कि मेरे साथ मेरी वालदैन की दुआएं तो इस बात से यह बात आती है कि अगर तुम्हारे पेरेंट्स तुम्हारे साथ हैं हयात हैं तुम्हारी अम्मी तुम्हारे अब्बू जितना ख्याल
रख सकते हो बेशक वो तुम्हें डांटते हो मारते हो गालियां देते हो वो जल्लाद हो वो कुछ भी हो तुम्हारा सर हमें हमेशा झुका रहना चाहिए क्योंकि तुम्हें अंदाजा नहीं है तुम्हारे बाप की दुआ कितनी जरूरी है। तुम्हारी मां की दुआ तुम्हारे लिए कितनी जरूरी है। अगर तुम्हारे मां-बाप की दुआ तुम्हारे साथ होगी, जंग भी हो रही होगी ना, गोलियां भी आगे पीछे चल रही होंगी तो उसमें से सीधे-सीधे निकल जाओगे। तुम्हें कुछ नहीं होगा। तुम्हारे पेरेंट्स की दुआ तुम्हारे साथ होगी। तो अपने मां-बाप की इज्जत करो यार। उनकी सुनो। बिल्कुल भी गलत नहीं चाहेंगे
वो तुम्हारा। हां, आई नो थोड़ा ओल्ड स्कूल बिल्कुल हो गए होंगे। आई नो उनका थॉट प्रोसेस पुराना वाला होगा। तुम्हें बहुत कुछ पता है। तुम आगे की जनरेशन हो। लेकिन तुम उनको भी समझो। उनका दिमाग भी बच्चों की तरह है और वो तुमसे प्यार करते हैं और बहुत प्यार करते हैं। यह थी आज की पॉडकास्ट। खवातीन और हजरात लेट मी नो इन द कमेंट सेक्शन कि आपको आज का टॉपिक, आज के गेस्ट और आज की पडकास्ट कैसी लगी। मेरा नाम है अजलान शाह। अपना बहुत सारा ख्याल रखिएगा। पाकिस्तान जिंदाबाद। अल्लाह हाफिज।