लेबन में एक मंदिर के स्ट्रक्चर पर कुछ ऐसे पत्थर लगाए गए हैं जिनको देखकर इंसानी दिमाग दंग रह जाता है एक-एक पत्थर का वजन तीन ब्लू वेल्स जितना वजनी है और हैरत अंगेज तौर पर इनको बड़ी महारत से वन पीस में ना सिर्फ काटा गया बल्कि डेढ़ किलोमीटर दूर से ट्रांसपोर्ट भी किया गया वह भी हजारों साल पहले लेकिन मिस्ट्री यह है कि आज तक इंसानों की कोई ऐसी सिविलाइजेशन नहीं गुजरी जो इतने बड़े पत्थर काटने के लिए मशहूर हो क्या इतिहास में कोई ऐसी सिविलाइजेशन भी गुजरी है जिनके पास वो नॉलेज थी जो आज
हमारे पास नहीं इन पत्थरों की जांच पताल के लिए जर्मन आर्कियोलॉजिस्ट की एक टीम ने पत्थर की उस कान पर एक्सक वेश करना शुरू की जहां से यह पत्थर लाए गए थे वहां आज भी एक इनकंप्लीट पत्थर मौजूद है जिसका वजन 1200 टन बताया जाता है यानी करीब चार बोइंग 74 सेन जितना यहां खुदाई करने के बाद आर्कियोलॉजिस्ट को जमीन के अंदर कुछ ऐसे सबूत मिले जिन पर यकीन लाना काफी मुश्किल है जम टीवी की वीडियोस में एक बार फिर से खुशामदीद नाजरीन लेबन की बिका वैली के ईस्ट में बालबेक नामी शहर है जहां रोमन
एंपायर के कुछ खंडराया भर से लोग देखने आते हैं पर मजे की बात यह है कि ऊपर से दिखने वाले यह खंडराया के दौर में थे लेकिन इसके नीचे आर्कियोलॉजी जिसको कुछ ऐसे सबूत मिले हैं जिनका रोमन एंपायर के साथ कोई कनेक्शन नहीं है कम से कम अभी तक तो नहीं यहां एशियंट रोमंस का बनाया गया एक मंदिर है जिसे टेंपल ऑफ जुपिटर कहा जाता है यह मंदिर आज भी रोमन एंपायर के आर्किटेक्चर और उनके हुनर की आला तरीन मिसाल है पर इस मंदिर की कंस्ट्रक्शन के नीचे बहुत बड़े पत्थरों की फाउंडेशन पाई गई है
पहले तो यह समझा जाता था कि शायद यह वन पीस में नहीं है बल्कि छोटे छोटे पत्थरों को बड़ी महारत से ऐसे जोड़ा गया कि यह एक ही लगे लेकिन मुख्तलिफ टेस्टस करने के बाद यह बात कंफर्म हो गई कि यह कुछ और नहीं बल्कि एक ही जाइंट पत्थर है यह पत्थर जिन्हें बाद में ट्रिलिथियम उसको 30 फीट ऊपर उठाकर रखना इंसानी इतिहास में शायद पहली बार किया गया था इन पत्थरों की साइज और वजन का अंदाजा लगाना हो तो एक-एक पत्थर 9 लाख केजी का है यानी दुनिया के सबसे भारी जहाज एंटोनोव ए 225
मिरिया से भी डेढ़ गुना ज्यादा भारी और पिरामिड ऑफ गीजा की कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाले सबसे बड़े पत्थरों से भी 10 टाइम्स बड़ा इनके इतने बड़े साइज के बावजूद इन पत्थरों को किसी ना किसी तरह कान से यहां तक ट्रांसपोर्ट किया गया जो यहां से करीब ढ किलोमीटर दूर है और फिर हीलियो पोलिस कॉम्प्लेक्शन के ब्लॉक्स के ऊपर रखा गया जिसके ऊपर बाद में कॉम्प्लेक्टेड ब्लॉक्स रखकर खड़ा किया गया जिस एक्यूरेसी से इन पत्थरों को काट कर जोड़ा गया वह वाकई काफी गैर मामूली काम है खास तौर पर उस दौर के लिए जब मॉडर्न
मशीनरी का तसव्वुर करना भी मु मुल था क्योंकि इनके बीच में कागज जितना फासला भी नहीं है रोमन स्ट्रक्चर्स में देखा जाए तो उनका फोकस खूबसूरती पे होता था वो अपनी कंस्ट्रक्शन स्किल्स दुनिया को दिखाना चाहते थे लेकिन इसके बरक्स ट्रिलिथियम के अंदर दफन था यह देखने के बाद जहन में एक सवाल आता है कि कोई सिविलाइजेशन अगर इतना बड़ा कारनामा अंजाम देती है तो वह उसको छुपाए गी ही क्यों एशियंट रोमंस जो अपनी हर स्किल का रिकॉर्ड रखने के लिए मशहूर जाने जाते हैं इन ट्रिलिथियम ने नहीं की बल्कि इन्होंने बनी बनाई फाउंडेशन के
ऊपर अपना मंदिर खड़ा किया इसके अलावा हिस्टोरियंस के मुताबिक रोमंस के पास जो जो सबसे बड़ी क्रेन मौजूद थी वह सिर्फ 60 टन का वजन उठा सकती थी जिसकी वजह से यह इंतहा नामुमकिन है कि वह इन 900 टन वजनी पत्थर को उठा सके और रोमंस जिन पत्थरों को भी क्रेन से उठाते उसके बीच में वह एक खास शक्ल का सुराख करते थे जिसे लुईस होल्स कहते हैं पर ऐसे कोई सुराख हमें ट्रिलिथियम का कोई रिकॉर्ड ट्रिलिथियम टने उठाने और यहां तक लाने के बारे में मौजूद नहीं तो फिर इतनी महारत से यह काम किसने
अंजाम दिया टेंपल ऑफ जुपिटर की असल फाउंडेशन आखिर बनाई किसने टेंपल ऑफ जुपिटर के दूसरे पत्थर फिनिशिंग के साथ लगे हैं जबकि ट्रिलिथियम का ख्याल है कि इन सब चीजों को नजर में रखते हुए ट्रिलिथियम पुराने हैं यानी रोमन एंपायर से भी 10000 साल पहले जो काम आज के मॉडर्न दौर में करना भी नामुमकिन समझा जाता है वह उस वक्त आखिर किस सिविलाइजेशन ने और कैसे किया यह एक ऐसा राज है जिसके बारे में आर्कियोलॉजिस्ट अभी तक कुछ नहीं बता सके बालबैक में सिर्फ यही ट्रिलिथियम कर रख दें टेंपल ऑफ जुपिटर के कंपाउंड में कई
मकामा पर इस तरह के बड़े-बड़े पत्थर देखे जा सकते हैं स्टेयर्स के बराबर में 800 टन के इस पत्थर को देखें इसको हिलाना तक भी कोई मामूली बात नहीं है इसके बाद आ जाते हैं साउथ वॉल पे जहां 400 से लेकर 800 टन के बेशुमार ब्लॉक्स पाए जाते हैं कुछ जमीन के ऊपर हैं तो कई जमीन के नीचे पर किसी को भी मालूम नहीं कि यह जमीन में कितना डीप है इसके की फिटिंग पड़ी सफाई के साथ की गई है और बॉर्डर पर बनी यह लाइन 1 मिलीमीटर से भी छोटी है यह देखने के बाद
यह काम और ज्यादा पेचीदा दिखाई देता है इन पत्थरों के सरफेस पे कुछ अजीबोगरीब निशानाथ मौजूद हैं जैसे आजकल की मॉडर्न माइनिंग मशीनरी की वजह से पत्थरों पर बनते हैं इन निशानाथ की लंबाई करीब 10 फीट तक है और यह एक दूसरे से बिल्कुल पैरेलल है पुराने कदीम दौर के टूल्स की बात की जाए तो इनमें से कोई नहीं है जो इस किस्म के निशानाथ बना सके कम से कम हिस्टोरियंस के रिकॉर्ड पर तो ऐसा कोई टूल नहीं है इस तरह के टूल मार्क्स चाइना में यान शन कोरी के पत्थरों पर भी देखे गए हैं
यहां पर एक 16000 टन वजनी पत्थर का ब्लॉक मौजूद है जिस पर ठीक उसी तर्ज पर वैसे ही निशानाथ हैं जैसे बालबैक के पत्थरों पर है इसी तरह जॉर्डन के कदीम शहर पेट्रा में भी ऐसे ही निशानाथ देखे गए हैं पहाड़ के पत्थरों को काटकर यह शहर भी कम से कम 2300 साल पहले बनाया गया था कंपैरिजन किया जाए तो यह निशानाथ आजकल की मॉडर्न मशीनरी जैसे ही हैं यानी जमाना कदीम में भी ऐसी टेक्नोलॉजी थी जो मॉडर्न मशीनरी की तरह पत्थरों को काट सकती थी पर जाहिर है इसका कोई ठोस सबूत अभी तक हिस्टोरियंस
के पास नहीं है अब आ जाते हैं उस कान पर जहां से असल में यह बालबैक के पत्थर लाए गए थे जिनमें ट्रिलिथियम टेंपल ऑफ जुपिटर से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है और यह एक लाइम स्टोन की कान है यहां पर कुछ आधे कटे हुए पत्थर अभी तक मौजूद हैं यह ज्यादा हैरान कुन है क्योंकि यह टेंपल ऑफ जुपिटर और कॉम्प्लेक्टेड वुमेन के नाम से जाना जाता है इसका यह नाम कैसे पड़ा इसके बारे में कई कहानियां मशहूर हैं 68 फीट लंबा 14 फीट ऊंचा और 14 फीट मोटा एरिया के हिसाब से इसका वजन 1200
टन कैलकुलेट किया गया है यह पत्थर एक एंगल पर पड़ा हुआ है जबकि इसका निचला हिस्सा अभी भी कान के पत्थर से जुड़ा हुआ है जिन्होंने भी इसको इस शेप में काटा है उनको इसका निचला हिस्सा अलग करने का मौका नहीं मिला और शायद बीच में ही उनको यह काम छोड़ना पड़ गया वरना शायद यह पत्थर भी आज हमें टेंपल ऑफ जुपिटर की साइड पर ही नजर आता इस पत्थर के बॉटम पर आज भी उसी तर्ज के निशानाथ मौजूद हैं जो टेंपल ऑफ जुपिटर के दूसरे पत्थरों पर देखे गए हैं स्विटजरलैंड के यंग फ्राव पार्क
में प्रेग्नेंट वुमेन स्टोन का एक मॉडल रखा गया है जिसके गिर्द कुछ मॉडर्न क्रेंस के मॉडल्स खड़े किए गए हैं दिखाने का मकसद सिर्फ इतना है कि प्रेग्नेंट वुमेन स्टोन को अगर आज के दौर में भी उठाना हो तो करीब 20 क्रेंस मिलकर यह काम कर सकती हैं वह भी सिर्फ तब जब पत्थर के आस पास 50-60 फीट तक क्रेंस खड़े करने की जगह हो पहले प्रेग्नेंट वुमेन स्टोन आधा जमीन के अंदर धंसा हुआ था लेकिन 2014 में आर्कियोलॉजिस्ट की एक टीम ने यहां एक्सक वेशन की तो मालूम पड़ा कि जमीन के अंदर भी यह
कान से अलग था सिर्फ इस ब्लॉक का बॉटम आज भी कान से जुड़ा हुआ है यानी हजारों सालों तक ऐसे ही पड़े रहने की वजह से मिट्टी की लेर ने इसे जमीन के अंदर दिया था साइंस दानों का मानना है कि ् की लेयर का सिर्फ 1 इंच तकरीबन 80 से 100 सालों के दरमियान जमा होता है प्रेग्नेंट वुमेन स्टोन की पुरानी पिक्चर्स में देखा जाए तो तकरीबन यह 10 फीट तक अंदर धंसा हुआ है यानी 120 इंच लिहाजा अगर 1 इंच 80 साल के बराबर है तो 120 इंच जमा होने में 9600 साल लगेंगे
लगभग 10000 साल इतना पहले स्टोन एज में इंसान इतने चैलेंजिंग टास्क करने के काबिल थे यह सोचना और समझना काफी मुश्किल है 2014 में जब इस पत्थर के लिए एक्सक वेश की गई तो एक और हैरान कुन चीज सामने आ गई एक और छुपा हुआ पत्थर यह पत्थर प्रेग्नेंट वुमेन के बिल्कुल बराबर में जमीन के अंदर धंसा हुआ है जो एस्टिमेट्स के मुताबिक 1650 टन वजनी है फॉरगॉटेन स्टोन के नाम से पहचाना जाने वाला किसी भी कान से निकाला हुआ यह दुनिया का सबसे बड़ा पत्थर का ब्लॉक है यह तो सिर्फ ब्लॉक का वह हिस्सा
है जो ऊपर ऊपर से ही नजर आ गया कान के अंदर कितना डीप और क्या-क्या छुपा है इसके बारे में फिलहाल कुछ भी नहीं कहा जा सकता यह पत्थर आज के साइंटिस्ट जिनमें इंजीनियर्स और आर्कियोलॉजिस्ट भी शामिल हैं के लिए एक मिस्ट्री बना हुआ है इसकी वजह यह है कि जो तरीके उन्हें काटने ट्रांसपोर्ट करने और बिल्कुल सही जगह पर रखने के लिए इस्तेमाल किए गए वो किसी भी मशहूर कदीम सिविलाइजेशन या हता के आज के बिल्डर्स के लिए भी मुमकिन नहीं लगते इसके अलावा इस कान से बालबेक तक का सफर पहाड़ की वजह से
ना सिर्फ ऊपर की तरफ है बल्कि काफी खुरदरा भी है ऐसा कोई सबूत भी नहीं मिला कि कदीम दौर में इन पत्थरों की ट्रांसपोर्ट के लिए कोई सीधा रास्ता बनाया गया हो जिससे पत्थरों को खींचना आसान होता हो ना सिर्फ इतना बालबैक की साइड पर यह बोझल पत्थर पहुंचाने के बाद इनको इतनी बारीकी से कैसे उठाया गया होगा मान भी लिया जाए कि एंसटिटाइट का इशारा देते हैं वह दौर जब इंसानों का कद काफी बड़ा था और इनका जिस्म किसी देव की तरह ताकतवर मुख्तलिफ रिलीजियस बुक्स जैसा कि बाइबल कुरान और हिंदी स्क्रिप र्स में
भी ऐसे इंसानों का जिक्र है जो काफी लंबे और ताकतवर थे इनके पास ऐसी पावर्स थी जो किसी फिक्शन मूवीज में सुपर ह्यूमंस के पास होती हैं मुख्तलिफ बुक्स में इनको अलग-अलग नाम दिए गए हैं जैसा कि बाइबल में इनको ने फिलिम कहा गया है कहीं पर इनका कद 450 फीट्स बताया गया है तो कहीं पर 100 फीट्स तक और उन सिविलाइजेशन के लिए शायद बालबैक के पत्थरों को उठाना इतना मुश्किल काम नहीं था उम्मीद है जम टीवी की यह वीडियो भी आप लोग भरपूर लाइक और शेयर करेंगे आप लोगों के प्यार भरे कमेंट्स का
बेहद शुक्रिया मिलते हैं अगली शानदार वीडियो में