दोस्तों अगर आप जिंदगी से मायूस हो, अगर आप परेशान हो, डरपोक हो, हर तरफ नेगेटिविटी से घिरे हुए हो, अगर आप खुद को अंडर कॉन्फिडेंट, इग्नोरर्ड या फिर बिल्कुल लोनली महसूस करते हो तो भाई साहब सुन लो। आपके अंदर दुनिया का सबसे सफल इंसान बनने की सारी क्वालिटीज मौजूद हैं। आप सोच रहे होंगे आज हर जी क्या बोल रहे हैं? यह क्या पोजीशन है? क्या घटना को कहां रिलेट कर रहे हैं? लेकिन दोस्तों, यह बात मैं आपको हवा में नहीं कह रहा हूं। आज जिस इंसान की कहानी मैं आपको सुनाने वाला हूं, उसने अपने नेगेटिव्स
को नेविगेशन सिस्टम बनाया। अपनी लोनलीनेस को उसने लेबोरेटरी में कन्वर्ट कर दिया। अपने डर को उसने डायरेक्शन में कन्वर्ट कर दिया। अपने दर्द को ड्राइव में बदल दिया। ऐसे ऐसे इनोवेशन किए जो ना पहले किसी ने देखे ना किसी ने सुने। जी हां, मैं बात कर रहा हूं दुनिया के सबसे अमीर आदमी एलोन मस्क की जो दुनिया के पहले खरबपति बन गए मेरे भाई पहले ट्रिलिनियर बन गए हैं। अब आप मन ही मन सोच रहे होंगे सर ये बात तो अच्छी लग रही है लेकिन कोई इंसान अपने नेगेटिव्स को स्ट्रेंथ में कैसे बदल सकता है?
लोनलीनेस को लेबोररी में कैसे कन्वर्ट कर सकता है? और डर डायरेक्शन में कैसे बन जाता है? यह कैसे हो सकता है? दोस्तों हर इंसान की जिंदगी में दो तरह के पल आते हैं। एक वो जो हमें पूरी तरीके से तोड़ देते हैं और दूसरा वो जो हमें सही दिशा में मोड़ देता है। अंतर सिर्फ इतना है कि हम उन पलों को देखते कैसे हैं। कुछ लोग अपने दर्द से भागते हैं और कुछ लोग उसी दर्द को पढ़ते हैं। उसे समझते हैं, उसे महसूस करते हैं। फिर पेन से जन्म होता है परपज का। ईलॉन मस्क का
नाम आज दुनिया रिस्पेक्ट से लेती है। लेकिन उसकी शुरुआत कहीं और से नहीं। उन्हीं तकलीफों से, उन्हीं डरों से, उन्हीं उलझनों से हुई जिनसे आप और हम भी गुजरे हैं मेरे भाई। ईलॉन मस्क को समझने के लिए थोड़ा फ्लैशबैक में चलते हैं। ईलॉन की पर्सनालिटी बचपन से ही थोड़ी अलग थी। वो क्लासरूम में सबसे ज्यादा बोलने वाला बच्चा नहीं था। वो शाई किस्म का बच्चा था। लेकिन सबसे ज्यादा सोचने वाला जरूर था। जहां बाकी बच्चे मैदान में भाग रहे होते थे। ईलॉन किसी कोने में बैठकर किताबों में गुम हो जाता था। कई लोग इसे वीकनेस
समझते थे। लेकिन उसे खुद ही नहीं पता था कि यही अकेलापन आगे चलकर उसकी सबसे बड़ी ताकत बनने वाला है। लोनलीनेस ने उसे दुनिया से दूर नहीं किया। लोनलीनेस ने उसे दुनिया को समझने का समय दिया और यहीं से उसका इमेजिनेशन, उसकी क्यूरियोसिटी और उसका प्रॉब्लम सॉल्विंग माइंड विकसित होने लग गया। लेकिन दोस्तों कहानी यहां आसान नहीं है। इलॉन का बचपन सिर्फ किताबों और इमेजिनेशन का नहीं था। उसमें दर्द था। एक कॉन्स्टेंट इनसिक्योरिटी भी थी। घर में एक वयेंट बाप था जो उसे रोज पीटता था। स्कूल में बच्चे उसे वियर्डो बोलकर चिढ़ाते थे और परेशान
करते थे। एक बार तो उसे कंक्रीट की सीढ़ियों से बच्चों ने नीचे धक्का दे दिया। इतना घायल हुआ कि कई दिनों तक हॉस्पिटल में एडमिट रहना पड़ा। इस इंसिडेंट के बाद उसे एक बीमारी हो गई। पोस्ट ट्रोमेटिक स्ट्रेच डिसऑर्डर, पीटीएचडी जब इंसान लगातार बुरे एक्सपीरियंसेस से गुजरता है तो डर दिमाग में जमने लग जाता है। फ्लैशबैक्स आते हैं। एंजायटी बढ़ जाती है और इंसान खुद को नॉर्मल महसूस नहीं कर पाता। लेकिन एलॉन ने अपने डर को दबाया नहीं मेरे भाई। उस डर को ऑब्जर्व किया। उसे समझा और धीरे-धीरे उसे बाहर निकालने का रास्ता भी ढूंढ
लिया। पेन ने उसे रोका नहीं। पेन ने उसे सोचने पर मजबूर किया। हॉस्पिटल से लौटने के बाद वो पहले से भी ज्यादा चुप हो गया। लेकिन पहले से ज्यादा और सोचने लग गया। बुक्स उसका एस्केप रूट नहीं थी। बुक्स उसका एजुकेशन, उसका प्रोटेक्शन और उसका इमेजिनेशन का इंजन बन गई। वो एनसाइक्लोपीडिया पढ़ता था। साइंस के फिक्शन पढ़ता था। ऐसे कांसेप्ट्स पढ़ता था जो उसकी ऐज के बच्चों को समझ में नहीं आते थे। लेकिन एलोन को लगता था अगर ये आइडियाज किसी किताब में एकिस्ट कर सकते हैं तो रियल दुनिया में भी हो सकते हैं। यहीं
से उसकी सबसे डेंजरस हैबिट शुरू हुई। सवाल करना सवाल पूछना। हर चीज के ऊपर सवाल करना। व्हाई नॉट? व्हाई नॉट? 12 साल की उम्र में उसने खुद से प्रोग्रामिंग सीख ली। खुद ने 12 साल की उम्र में घर पर बेकार सी मशीनों को खोलकर पार्ट्स को समझना चालू किया। सर्किट्स को जोड़ना तोड़ना चालू किया। फिर उसने एक छोटा सा वीडियो गेम बना दिया ब्लास्टर। और दोस्तों उस ऐज में जहां बच्चे कैंडीज खरीदने के लिए पैसे मांगते थे। ईलॉन ने अपनी पहली क्रिएशन बेच दी। सिर्फ 12 साल की उम्र में $500 कमा लिए। लोनलीनेस ने लर्निंग्स
को जन्म दिया। पेन ने एक्शन को जन्म दिया और फिर एक समय आया जब उसे साफ दिखने लग गया कि जिंदगी अगर बदलनी है तो जगह बदलनी पड़ेगी। जिंदगी बदलनी है तो जगह बदलनी पड़ती है मेरे भाई। घर में वलेंस थी, स्कूल में बोलिंग थी, हर तरफ नेगेटिविटी थी। कुछ लोग ऐसे माहौल में अपनी किस्मत को मानकर उस माहौल को अडॉप्ट कर लेते हैं। लेकिन एलोन जानता था एनवायरमेंट शेप्स डेस्टिनी। 17 साल की उम्र में उसने साउथ अफ्रीका छोड़ने का फैसला कर लिया। ना बैंक बैलेंस था ना स्ट्रांग सपोर्ट सिस्टम था। लेकिन उसके पास एक
चीज थी ओठ से लड़ने की एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी पावर थी। वो अकेला कनाडा चला गया। अरे अकेला बच्चा कनाडा चला गया भाई। सिर्फ एक बैक पैक और कुछ सपनों के साथ यह कदम करियर से ज्यादा उसकी आइडेंटिटी को बदलने वाला फैसला था। कनाडा की जिंदगी आसान नहीं थी। हॉस्टल के फ्लोर्स को साफ करना, छोटे-मोटे जॉब करना क्योंकि सर्वाइवल ही प्रायोरिटी थी। जिंदगी जीना था पहले तो लेकिन यही सर्वाइवल उसकी सबसे बड़ी ट्रेनिंग बन गया। नए देश में अकेले इंसान को दो चीजें तेजी से सीखनी पड़ती है। एक है रिस्पांसिबिलिटी, एक है एडप्टेबिलिटी। इलोन समझने लग गया
कि लाइफ की सबसे बड़ी स्ट्रेंथ मसल में नहीं है। माइंडसेट में होती है। और चाइल्डहुड ने उसे सोचने की आदत दे दी। तो यह फेज उसे लड़ने की आदत दे रहा था। अभिलोन केवल नॉलेज अब्सॉर्ब नहीं कर रहा था। वह दुनिया से क्वेश्चन कर रहा था। वो पूछ रहा था और सिर्फ ऊपर ऊपर से नहीं सबसे मूल स्तर तक। कारें ऐसी क्यों है रे? एनर्जी ऐसी क्यों है? स्पेस एक्सप्लोरेशन इतनी धीमी क्यों है? वो किसी समस्या को वैसे नहीं देखता था जैसे बाकी लोग देखते थे। दुनिया कहती है रॉकेट बनाना बहुत महंगा है। एलोन पूछता
रॉकेट किन चीजों से बना हुआ है? एलुमिनियम से, टाइटेनियम से, कॉपर से उसने मटेरियल की कीमत को कैलकुलेट किया और पाया कि रॉ कंपोनेंट्स की जो कॉस्ट है पूरी रॉकेट कॉस्ट का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है। मतलब रॉकेट बनाना महंगा इसलिए था क्योंकि ऐसे ही बनाया जा रहा था। ऐसे ही गाढ़ा चल रहा था। इलॉन की सोच अलग थी। क्या चीज फंडामेंटली पॉसिबल है? वो वहीं से शुरुआत करता। इसे कहते हैं फर्स्ट प्रिंसिपल्स थिंकिंग। और यहीं से ईलॉन मस्क दुनिया से अलग होने लग गया। उसके अंदर डेवलप हो रहा था डिसटिस्फेक्शन वि ऑर्डिनरी। वो
पैसा कमाने नहीं आया था। वो प्रॉब्लम को सॉल्व करने आया था। ईलॉन मस्क कभी बिजनेस में नहीं रहा। वो हमेशा से एक प्रॉब्लम सॉल्व था। जिसका दिमाग पूछता था व्हाई नॉट? और यही सवाल इंसान को दुनिया बदलने लायक बनाता है मेरे भाई। दोस्तों ईलोन की पहली बड़ी सफलता थी ऑनलाइन पेमेंट्स का प्लेटफार्म PayP लेकिन दिलचस्प बात यह है कि PayP से एलोन को पैसे से ज्यादा स्पीड मिली थी। PayP ने उसे सिखाया आइडियाज नहीं एग्जीक्यूशन दुनिया बदलता है। वो कहता है इफ समथिंग इजेंट इनफ यू डू इट इवन इफ द ओट्स आर अगेंस्ट यू। PayPal
बेचने के बाद उसके पास काफी पैसा था। कोई और होता तो लाइफ सेटल कर लेता मेरे भाई। लेकिन एलोन सेटलमेंट के खिलाफ था। पेपोल उसका डेस्टिनेशन नहीं था। उसका टेक ऑफ उसका रनवे था मेरे भाई। फिर आया वो फैसला जो दुनिया ने उसे पागल कहा। पूरी दुनिया उसे पागल कह रही थी। स्पेस ट्रेवल इंप्रूव करना। स्पेस ट्रेवल इंप्रूव करना अपने आप में कितना बड़ा फैसला होता है। रॉकेट बनाऊंगा। रेल रॉकेट बनाऊंगा। प्राइवेट कंपनी से नासा जैसा काम कराना चालू किया। एक्सपर्ट्स ने कहा इंपॉसिबल इन्वेस्टर्स ने कहा वेरी रिस्की ओ रिस्की मीडिया ने कहा दिस स्काई
हैज़ लॉस्ट इट लेकिन दोस्तों जिस इंसान ने अपनी लोनलीनेस को लेबोरेटरी बनाया हो उसके लिए दुनिया की हंसी से बैकग्राउंड नॉइज़ होती है। स्पेस एक्स के तीन लॉन्च फेल हो गए। कंपनी ऑलमोस्ट दिवालिया हो गई। एक और फेलर और एक और कहानी खत्म हो गई। लेकिन एलोन नहीं रुका क्योंकि spcex उसके लिए बिजनेस नहीं पपस था। फोर्थ लॉन्च सक्सेसफुल हो गया। हिस्ट्री बदल गई। कभी-कभी दुनिया को गलत साबित करने के लिए एक सक्सेस ही काफी होती है मेरे मित्र। स्पेस एक सर्वाइव हुआ। लेकिन एलोन यहां नहीं रुका। उसने दुनिया की सबसे बड़ी समस्या पकड़ी। क्लाइमेट
चेंज। इलेक्ट्रिक कार्स, बैटरी टेक, चार्जिंग नेटवर्क। आज नॉर्मल लगती है ये सारी बातें। लेकिन टेस्ला जब शुरू हुई लोग हंसते थे मेरे भाई एलोन ने रिस्क नहीं लिया रिस्क को रूटीन ही बना दिया रूटीन में रिस्क लेना लग गया उसने अपनी पूरी पर्सनल वेल्थ को टेस्ला में लगा दिया इतना कि रेंट तक के लिए पैसे नहीं बचे दोस्तों असली कहानी यहां शुरू होती है। Tes्ला सिर्फ पैसे की कमी से नहीं जूझ रही थी। Tes्ला टाइम और ट्रस्ट दोनों खो रही थी। प्रोडक्शन लाइन बार-बार रुक जाती थी। मशीन काम नहीं करती थी और एक्सपर्ट कहते थे
यह कंपनी सर्वाइव नहीं करेगी। ईलॉन मस्क क्या करता? ऑफिस में बैठकर ऑर्डर देता नहीं नहीं। वो प्रोडक्शन फ्लोर पर ही सो गया रे। मशीनों के बीच ही सो गया। वहीं जहां वर्कर्स खड़े थे। वो कहता इफ द टीम इज वर्किंग हार्ड। आई हैव नो राइट टू स्लीप कंफर्टेबली। यह इंसिडेंट बताता है कि इलोन कंपनी नहीं चलाता था। वो कंपनी के लिए हर हद तक चलने को तैयार था। वो नहीं डरा भाई क्योंकि अब उसका डायरेक्शन बन चुका था। अगर प्लनेट खतरे में है तो काम जरूरी है और अगर काम जरूरी है तो रिस्क ऑप्शनल नहीं
है। दोस्तों ईलॉन मस्क की स्टोरी में एक पैटर्न है। हर सेटबैक उसे रोकता नहीं था। हर सेटबैक उसे सिखाता था। फेलर्स उसके लिए फुल स्टॉप नहीं था। फीडबैक था। spcex रॉकेट फटा तो इंजीनियरिंग इंप्रूव कर दिया। Tes्ला का प्रोडक्शन रुका तो प्रोसेस को इंप्रूव कर दिया। स्ट्रेस बढ़ा तो अपने फोकस को और डायवर्ट कर दिया। और बढ़ा दिया। एलोन हर फॉल को अपनी फार्मूला शीट बना लेता था। उसके लिए फॉल का मतलब था अब अगला स्टेप और साफ दिखेगा। यही फर्क है सक्सेसफुल और एवरेज इंसान में। एवरेज इंसान फौ्ट से डरता है। सक्सेसफुल इंसान फोल्ड
से डायरेक्शन ढूंढता है। दोस्तों ईलॉन मस्क आज दुनिया का सबसे अमीर आदमी पैसों से नहीं है। वो अमीर है हिम्मत से। उसने जिंदगी से भागना नहीं सीखा। उसने जिंदगी को रिबिल्ड करना सीखा। और आप आपके अंदर भी वही डर है। वही कमजोरी, वही कंफ्यूजन जिसने ईलॉन को भी जिंदगी से सिखाया है। डिफरेंस सिर्फ इतना है। उसने अपनी स्टोरी शुरू कर दी। और आपने अभी तक शुरू नहीं की। याद रखिए दुनिया बदलने से पहले इंसान को खुद बदलना होता है। और जो इंसान खुद को बदल लेता है दुनिया उसके लिए रास्ता बना देती है। और अब
चॉइस आपकी है। डर की सुनोगे या डायरेक्शन की सुनोगे? जिंदगी पुकार रही है आपको संभावनाओं की ओर। कमेंट्स बॉक्स में लिखो ईलॉन मस्क की जिंदगी से क्या सीखा और अब जिंदगी में क्या बदलाव करोगे। विश यू द बेस्ट। जय हिंद जय भारत।