बिस्मिल्लाह रहमा रहीम अस्सलाम वालेकुम खातरीन हजरात मैं हूं आपका जुनेद सलीम और आप देख रहे हैं इंसाफ डिजिटल नाजरीन चार साल में पहली बार ऐसे आसार देखने को मिल रहे हैं और बहुत वाज़ तौर पे देखने को मिल रहे हैं कि इस हुकूमत का कड़ा वक्त आ गया है। नून लीग हुक्मरानों के नीचे से जमीन सिरकने का अमल शुरू हो चुका है। मगर सरकारी कैंप में अभी तक इसका कोई वाज़ अदराक या एहसास नहीं पाया जा रहा। ये नाजरीन बोहरान जो है ये दो तरफ है जिसके बारे में इलीट क्लब को या तो पूरी तरह
इल्म नहीं है या फिर उनका ख्याल ये है कि जो पहले उन्हें बोहरानों से निकालते रहे हैं वो अब भी निकाल लेंगे शायद ये सबसे बड़ी गलती है बावसूक जराए जिस तरह की खबरें दे रहे हैं उन्हें सुनकर यकीन नहीं आता और बहुत सारी बातों से मैं इत्तेफाक भी नहीं करता लेकिन इस्लामाबाद के बहुत ही पावरफुल कॉरिडोर में ये खबरें जो है बड़े मुसदका अंदाज में डिस्कस हो रही है। खबर देने वाले ऐसे लोग हैं जिनकी बात को झुठलाना आसान नहीं है। कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में पीपल्स पार्टी और तहरीकसाफ एक
पेज पे या एटलीस्ट एक दूसरे के लिए सॉफ्ट कॉर्नर रखती हुई नजर आएंगी। बस पर्दा जारी इस सारे खेल का वाहिद मुहरिक जो है वो ऑब्वियसली सियासी बका है। पीपल्स पार्टी को लगता है कि 28वीं तरमीम सियासी मंजरनामे से उसका वजूद ही मिटा देगी और पीटीआई का वजूद तो कुछ लोग अपनी नजर में पहले ही मिटा चुके हैं। इसलिए दोनों जमातों का ये मुमकिना एक दूसरे के लिए सॉफ्ट कॉर्नर जो है ये नजरिया जरूरत के तहत है। इस पूरी स्कीम के मोहरिक जो हैं वो महमूद खान अचकजई और मौलाना फजलुर रहमान हैं। जो पिछले कुछ
दिनों से पीछे रहकर एक-एक तिनका इकट्ठा करता हुआ नजर आ रहे हैं। पहले भी अ किया था नाजरीन के महमूद खान अचकजई पर नजर रखें। सियासी कहानी में उनका किरदार बहुत अहमियत का हामिल हो चुका है और आगे मज़द अहमियत का हामिल होने जा रहा है। महमूद खान अचकई ने शानदार पत्ते खेलते हुए मौलाना फजल रहमान को कायदे हज़ब इख्तलाफ बनने की पेशकश की है। कल वज़र आला सोेल अफरीदी भी मौलाना के दौलताखाने पर हाजिरी देने पहुंच गए थे। मौलाना ने जिस तपाक से नौजवान सोहेल अफरीदी का इस्तकबाल किया सारी कहानी बयान करने के लिए
वही काफी है। वज़र आला सोेल अफरीदी गए तो मौलाना बजाहिर तो वो मौलाना इदरीस के इंतकाल पर इज़ारे ताज़ियत के लिए थे। मगर मुलाकात का एजेंडा काफी तवील था। इसलिए मौलाना ने वज़रआला और उनके वफ को इशाया भी दिया। फिर तफसील से सियासी मौजूआत पर भी बात हुई। इस मुलाकात के बाद मुआवने खुसूसी बरा तलात शफीउल्लाह जान ने तो पूरी बात ही कह डाली। उन्होंने कहा कि जी पीपल्स पार्टी और जेयूआई के साथ मिलकर 28वीं तरमीम रोकने में कामयाब हो गए तो फिर हुकूमत की कुर्बानी का वक्त आ जाएगा। अच्छा नाजरीन नून लीग और फिलहाल
जो नून लीग है वो फिलहाल सियासत में ऑब्वियसली टू सम एक्सटेंट 12वां खिलाड़ी बन चुकी है। अलबत्ता पसेपर्दा कुतें जो है वो हालात का बड़ी बारीक बीनी से जायजा ले रही हैं। उन्हें अंदाजा है कि सियासी शतरंज पर उनके प्यादे हरकारे सख्त घेरे में है। पीपल्स पार्टी के साथ 28वीं तरमीम का जो मुसवदा शेयर किया गया है वो उसे अपने लिए डेथ वारंट समझती है पीपल्स पार्टी। आसार यही बता रहे हैं कि चार साला आशिकी और मशूकी के इस खेल में पीपल्स पार्टी और पसेपदा कुतें दोनों ही काफी हद तक एक दूसरे से तंग आ
चुकी हैं। शायद दोनों ही एक दूसरे के बारे में हत्मी फैसला करने के मूड में नजर आ रही हैं। अब दोनों ही पीटीआई के साथ मोहब्बत की पींगे बढ़ाने की कोशिश में है। नाजरीन फिर मैं ये वजाहत कर दूं। ये मेरी जाती राय है। जाती इनेशन नहीं है। लेकिन इस्लामाबाद के इंतहाई जो मजबूत और बाला दर्जे के पावर कॉरिडोर हैं उनमें ये बातें डिस्कस हो रही हैं। नाजरीन इन हालात को देखते हुए कल बुशरा बीबी की उनके अहले खाना से मुलाकात करा दी गई है। जो एक दिन के तीन दिन के अंदर दूसरा बड़ा पलटा
है। पीटीआई के हवाले से जो सख्त रवैया है। उसके हवाले से ये तीसरा बड़ा पलटा है। हालांकि ये जेल में मुलाकातों का दिन भी नहीं था। बताया जा रहा है कि सियासी बिसात पर इतनी तेजी से चाले चली जा रही हैं कि मुलाकात कराने के लिए मंगल का इंतजार भी नहीं किया गया। बुशा बीवी की बेटी मुबशरा और उनकी भाभी ने जेल में तकरीबन एक घंटा तक मुलाकात की है। इससे पहले जेल में कभी भी 202 मिनट से ज्यादा मुलाकात नहीं करवाई गई। इस मुलाकात के बाद पहली बार बुरशा बीबी की बहन मरियम रियाज भट्टू
का जो एक्स अकाउंट है वो भी ताहाल खामोश है। जराय का कहना ये है कि इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर कोई तूफान बरपा ना हुआ तो ईद पर इमरान खान से उनकी बहन नरीन खान की मुलाकात भी करा दी जाएगी। मुलाकात के लिए नरीन खान का नाम इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि उनका बेटा हसान नियाजी भी जेल में है। पसपर्दा कुतों का ख्याल है कि अगर उन्होंने इमरान खान के साथ मुलाकात के बाद मीडिया हाइप बनाने की कोशिश की तो उनके बेटे पर कोई थोड़ा सा सख्ती बढ़ा दी जाएगी। इसलिए नरीन खान
से मुलाकात कराने की बात की जा रही है। तीनों बहनों में वो सबसे ज्यादा मुश्किल हालात से दोचार है। बहरहाल एक बात तो तय है नाजरीन के पसेपर्दा कुतें चाहती हैं कि पीपल्स पार्टी और पीटीआई किसी सूरत भी एक दूसरे के करीब ना आए या एक दूसरे के लिए सॉफ्ट कॉर्नर पैदा ना हो। अच्छा नाजरीन अब सवाल ये है कि अगर तहरीकसा पीपल्स पार्टी और जेयूआई एक दूसरे के लिए नरम गोशा पैदा कर लेती है कोई अंडरस्टैंडिंग पैदा हो जाती है इकट्ठे आगे बढ़ने का ऐलान भी कर दिया जाता है तो पपर्दा कुतों के पास
क्या ऑप्शंस है अच्छा नाजरीन इन ऑप्शंस पर बात करने से पहले आपको ये भी बताता चलूं कि महमूद खान अचकजई अभी तक इस कोशिश में है कि नून लीग भी उनके साथ आ जाए और यूं मिसाके जमूरियत की तर्ज पे किसी नए सोशल कॉन्ट्रैक्ट की बुनियाद रखी जा सके। मगर फिलहाल नून लीग के इ्तदार से बाहर किसी चीज के बारे में सोचना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन नजर आ रहा है। क्योंकि शरीफ खान और शरीफ खानदान और नून लीग अच्छी तरह जानते हैं कि वो जो मर्जी कर ले जैसा मर्जी सोशल कॉन्ट्रैक्ट कर ले, सियासी कॉन्ट्रैक्ट
कर ले। उनके लिए आवामी वोट के जरिए इ्तेदार में आना नामुमकिन है। इसलिए महमूद अशकजई की नून लीग को साथ में लाने की कोशिश जो है वो ज्यादा कामयाब होती नजर नहीं आ रही। अब नाजरीन बात करते हैं पसपर्दा कुतों के ऑप्शंस पर। पहला ऑप्शन तो ये है कि इस नाम निहाद जमूरी लिबादे को उतार फेंका जाए और खुद तमाम मामलात अपने हाथ में ले ले लिए जाए। ये मुमकिन तो है अ मगर इसमें कई तरह की पचीदगियां भी है जो मकामी भी हो सकती हैं बैनुल अकवामी भी हो सकती है इसलिए शायद इस जानिब
कदम ना बढ़ाया जाए इस्टैब्लिशमेंट के पास नाजरीन दूसरा बड़ा ऑप्शन ये है कि दोबारा इंतखाबादत करा दिए जाए जिनमें एक तरफ पीपल्स पार्टी पीटीआई और जेयूआई का इत्तहाद हो और दूसरी तरफ मुस्लिम लीग वंडर बॉय की तरह सामने आए और ये नून लीग का अल्ट्रा हाइब्रिड वर्जन होगा और उसमें मुख्तदिर हल्कों का ख्याल यह है कि जब पीपल्स पार्टी और पीटीआई और जेयूआई के दरमियान किसी तरह की एक लूज सी भी बेशक बॉन्डिंग होगी तो वो आवामी हमदर्दी जो है वो लूज़ कर जाएंगे। लोग ताना देंगे जी कल के मुखालिफ आज इकट्ठे हो गए। बहाल
देखें आगे क्या बनता है। जिसमें ये जो नून लीग का अल्ट्रा हाइब्रिड वर्जन की मैं बात कर रहा था। इसमें नाजरीन कहा जा रहा है कि जी टेक्नोक्रेट्स की शक्ल में कई नए चेहरे भी शामिल करा दिए जाएंगे। सिकंदर सुल्तान राजा के इलेक्शन कमीशन के तहत होने वाले इलेक्शन में ही इस मुस्लिम लीग वंडर बॉय को बिल आखिर जिता दिया जाएगा। फिर वही रुके हुए काम कराए जाएंगे जिनके लिए पीपल्स पार्टी फिलहाल नहीं मान रही। पसेपर्दा कुतों के पास ये ऑप्शन तो मौजूद है। मगर एक और धांधली ज्यादा इलेक्शन मुल्क को आगे बढ़ने में बिल्कुल
मददगार साबित नहीं हो सकता। ये बात मु्तदर हल्कों को भी मालूम है। इसलिए वो इस ऑप्शन को अवॉयड करना चाहेंगे। अच्छा नाजरीन जराय बता रहे हैं कि पीपल्स पार्टी पर दूसरी सूरत में किसी भी वक्त हाथ डाला जा सकता है। बजट मंजूर होते ही खैबर पख्तून खान में पीपल्स पार्टी की पहली बड़ी विकेट जो है वो गिरा दी जाएगी। जहां कहा जा रहा है कि गवर्नर फैसल करीम कुंडी की छुट्टी का फैसला करा लिया गया है या कर लिया गया है। जराय का कहना यह है कि कुंडी साहब की जगह बैस्टर सैफ को केपी का
गवर्नर बनाने का फैसला किया गया है। बैस्टर सैफ नाजरीन अली अमीन गंडापुर की हुकूमत में सुबाई तर्जुमान थे और वो ऑब्वियसली मु्तदरा हल्कों के बहुत करीब समझे जाते हैं। बताया जा रहा है कि उसके बाद पंजाब के गवर्नर को भी तब्दील किया जाएगा। पंजाब में भी इस्टैब्लिशमेंट की किसी नुमाइंदा शख्सियत को लाया जा सकता है। नाजरीन ये सारी वो बातें हैं जिनसे मेरा जाती तौर पर मुतफिक होना जरूरी नहीं है। आप इसको पिटिकल गसिप भी कह सकते हैं। लेकिन मैं दोबारा अर्ज कर रहा हूं कि बहुत संजीदा हलकों में ये सारी बातें डिस्कस हो रही
है। अब ये कोई शक्ल इख्तियार करती है या नहीं इसके बारे में मैं ह तौर पे कोई राय देने के काबिल नहीं हूं। पपर्दा कुतों से रास रखने वाले कुछ जराय ये भी दावा कर रहे हैं कि पीपल्स पार्टी में तब्दीली का अमल इसके बाद सिंध का रुख करेगा। जहां सदर जरदारी को बड़े सरप्राइज मिलेंगे। बताया यह जा रहा है नाजरीन कि पीपल्स पार्टी के लिए अपनी सुबाई हुकूमत बचाना भी मुश्किल हो जाएगा। पता नहीं क्या होता है। मगर फिलहाल ऐसी खबरों से ही पीपल्स पार्टी की कयादत को डराया जा रहा है ताकि आईनी तरमीम
के हवाले से मनमर्जी के नताज हासिल किए जा सके। अच्छा नाजरीन मौजूदा हुकूमत अपना सबसे बड़ा कारनामा जो है वो सफारती कामयाबियों को बताती है। मगर सफारती नाकामियों का कोई जिक्र नहीं करता। मुतदा अरब अमरात जैसा दोस्त पूरी तरह इसराइली या भारतीय कैंप में चला गया है। जब इस जानब हुकूमत की तवज्जो मजूल कराई जाती है तो कहा जाता है कि अरब अमरात को अपनी गलती का एहसास हो गया है और दोनों मुल्कों में दोबारा राबते हुए हैं जिनमें गलतफहमियों को दूर करने के अज्म का इज़हार किया जा रहा है। नाजरीन मगर इसके बरक्स मुत्तहदा
अरब अमरात से पाकिस्तानियों को डीपोट किए जाने की खबरों में कोई कमी वाक नहीं हो रही। अब एक सेनेटर के साथ जो वाकया हुआ है, उसने अरब अमरात के साथ ताल्लुकात के बारे में खतरे की घंटी बजा दी है या लाल झंडी लहरा दी है। हुआ यूं है कि एमक्यूएम के सेनेटर फैसल सबजवारी अरब अमरात जाना चाहते थे। वो वीजा लिए बगैर ही अबू धाबी की फ्लाइट पर सवार होने लगे क्योंकि उनके पास ऑफिशियल पासपोर्ट है जिसके लिए वीज़ की जरूरत नहीं थी। मगर उन्हें फ्लाइट पर सवार होने से पहले कहा गया कि आप थोड़ा
इंतजार करें। इस इस बारे में अबूजबी से हिदायात का इंतजार है। थोड़ी देर बाद उन्हें बताया गया कि आप अबू ज़बी नहीं जा सकते जिस पर वो एयरपोर्ट से वापस आ गए। यह निहायत तशनाक बात है कि अब हमारे सेनेटर्स और हुकूमती ओदेदारों को भी अरब अमरात आने की इजाजत नहीं मिल रही। अच्छा नाजरीन इस्लामाबाद जहां कुछ अरसे से जरायम की शरा खतरनाक हद तक बढ़ी हुई नजर आ रही है। उसकी बड़ी वजह अदालतों से इंसाफ ना मिलना है। कोई लाख इधर-उधर की बातें करें। लेकिन मैटर ऑफ़ द फैक्ट यही है। बुनियादी वजह यही है।
अदालतों में हजारों नहीं लाखों मुकदमात ज़रे इल्तवा है। मगर इस दौरान इस्लामाबाद हाई कोर्ट से एक बड़ी खबर आई। अदालत आलिया ने आवारा कुत्तों से मुालिक बड़ा फैसला दे दिया है। जी हां, आवारा कुत्तों से। अदालत ने आवारा कुत्तों को जहर देने, गोली मारने या बेजा तरीके से मारने पर मुस्तकिल पाबंदी आयद कर दी है। अदालत ने हुक्म दिया है कि आवारा कुत्तों की आबादी कंट्रोल करने के लिए साइंसी तरीका इख्तियार किया जाए। अगर किसी सूरत में पागल कुत्तों को मारने की जरूरत पेश आए तो उसके लिए ऐसे तरीके इख्तियार किए जाए जिनमें मौत बेदर्दी
से ना हो और ये सारा अमल किसी काबिल वेटनरी डॉक्टर की मौजूदगी में किया जाए। इस्लामाबाद हाई कोर्ट की जानवरों और आवारा कुत्तों से इस दर्जा हमदर्दी की ऑब्वियसली सताइश की जानी चाहिए। तारीफ की जानी चाहिए। लेकिन अगर अदालत आलिया अपने जैसे हमारे जैसे इंसानों को भी इंसाफ फराहम कर दे तो इनका इकबाल और रुतबा मज़द बुलंद हो। इसी इस्लामाबाद हाई कोर्ट के पांच जजेस इंसाफ के लिए चीखते रहे मगर उनकी किसी ने बात नहीं सुनी। अब इन जजेस को निशाने इबरत बनाकर पूरे मुल्क के हाई कोर्ट्स में फैलाया जा रहा है। ताकि हर सूबे
की हाई कोर्ट में मौजूदा जजेस इन जजों को अपने साथ देखकर इबरत हासिल करें। आवारा कुत्तों का दर्द महसूस करने वाली अदालत अपने साथी जजेस के करब का भी अजाला कर देती या उनके साथ खड़ी हो जाती तो उनकी तौकीर में और भी इजाफा हो जाता। अच्छा नाजरीन दुनिया किस तरह बदल चुकी है। अब छोटी सी गलती कुछ नामुनासब अल्फाज किस तरह मामलात को यक्सर बदल के रख देते हैं उसका अंदाजा आप पड़ोसी मुल्क भारत से लगा लें। जहां भारतीय चीफ जस्टिस के एक तौहीन अमेज लफ्ज ने मुल्की सियासत में एक भचाल बरपा कर दी
है। हलचल मचा के रख दी है। हुआ यूं कि आपने सुन ही लिया होगा कि भारतीय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने नौजवानों को कॉकरोच कह डाला। ये हुकूमत मुखालिफ बयानात को सोशल मीडिया पर फरोख देना शुरू हो जाते हैं। इस पर बंबई के एक नौजवान ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि आओ तमाम कॉकरोच एक प्लेटफार्म पर इकट्ठे हो जाए। उसने मुल्क के बेरोजगार सिस्टम के सताए हुए नौजवानों को साथ देने के लिए कहा और नाजरीन देखते ही देखते कॉकरोच जनता पार्टी बन गई। पहले चंद घंटों में रजिस्टर होने वाले नौजवानों की तादाद हजारों
नहीं लाखों में पहुंच गई। कॉकरोच जनता पार्टी के Instagram पर फॉलोअर्स की तादाद 2 करोड़ से तजावज कर गई। जी नाजरीन दो करोड़ से ज्यादा जो हुक्मरान भारतीय जनता जनता पार्टी से दुगने हैं जबकि एक्स पर फॉलोअर्स भी करोड़ों में जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी का भारत में अकाउंट जो है वो ब्लॉक कर दिया गया। कॉकरोच जनता पार्टी देखते ही देखते हुक्मरान बीजेपी के लिए एक बड़ा चैलेंज बन गई। कॉकरोच जनता पार्टी बनने के बाद भारत के चीफ जस्टिस अपने बयान की वजहातें देते रहे कि उन्होंने सब नौजवानों को कॉकरोच नहीं कहा। मगर अब कोई
वजाहत किसी काम नहीं आ रही। तीर कमान से निकल चुका। हकीकत यही है नाजरीन के नौजवान अपनी ज़िद पर आ जाए तो फिर किसी की नहीं सुनते। अपने मुल्क को वतने अजीज पाकिस्तान को ही ले लें। यहां भी नौजवानों की गालिब अक्सरियत को एक गाली से निकले हुए लफज़ से बुलाया जाता है। आप समझ गए होंगे मेरा इशारा किस तरफ है। फिर जब ये नौजवान सोशल मीडिया पर अपनी आईग पे आ जाते हैं तो फिर वो बहुतसों को बर्दाश्त नहीं होता। इसलिए इन कहानियों में सबक यही है कि नौजवानों को बिला जवाज ना तंग किया
जाए ना छेड़ा जाए। उन्हें आगे बढ़ने के मवाके दिए जाए। ये नौजवान मुल्की मशत के लिए रीड की हड्डी साबित हो सकते हैं। ये वने अजीज के लिए हमारे सोशल फैब्रिक का एक बैकबोन हो साबित हो सकते हैं। रीड की हड्डी साबित हो सकते हैं। अगर इनके इनके रास्ते में रोड़े अटकाए गए तो फिर इनको भी आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। वैसे एक सवाल है कि कुछ अरसा पहले पाकिस्तान में भी नौजवानों के नाम पर एक जमात बनी थी। पता करें कि उस जमात के कितने फॉलोअर्स हैं। अभी चंद हफ्ते पहले ही इस
जमात ने तसा में जलसा किया था जिसमें नौजवानों के लीडर्स लीडर को खाली कुर्सियों से खिताब करना पड़ा था। बहाल नाजरीन आखिर में राकिब मुख्तार के चंद अशार आपकी खिदमत में पेश किए देता हूं। अमीर शहर के हालात जब खराब हुए, अमीर शहर के हालात जब खराब हुए, बड़ी खराबी हुई और सब खराब हुए। हमारे चेहरों की उलझन बता रही है कि हम हमारे चेहरों की उलझन बता रही है कि हम बिला जवाज बने बेसब खराब हुए यही तो दुख है कि मौजूदगा की गफलत से यही तो दुख है कि मौजूदगाह की गफलत से गुजिश्तगाह
के नामो नसब खराब हुए जो रात दिन मुझे जीना सिखाया करता था जो रात दिन मुझे जीना सिखाया करता था चला गया तो मेरे रोजो शब खराब हुए ब कदरे शौक यहां हर किसी ने प्यार किया ब कदरे शौक यहां हर किसी ने प्यार किया बफज़ले इश्क यहां सब के सब खराब हुए नाजरीन खुश रहें खुश रखें आपसे मुलाकात होगी इंशा्लाह अगले वॉग में अल्लाह हाफिज