अगर आपको लगता है कि सिर्फ नौकरी ही पैसा कमाने का रास्ता है तो एक पल रुकिए और खुद से एक सवाल पूछिए। अगर कल आपकी नौकरी चली गई तो क्या होगा? क्या आपके पास ऐसा कोई बैकअप है जो आपके घर का खर्च चला सके? क्या आप अपनी फैमिली की जिम्मेदारियां उठा पाएंगे या फिर सिर्फ एक सैलरी रुकते ही सब कुछ हिल जाएगा। दोस्तों, आज के टाइम में सिर्फ नौकरी पर डिपेंड रहना सबसे बड़ा रिस्क बन चुका है। और यही वजह है कि दुनिया के बड़े इन्वेस्टर्स बार-बार कहते हैं नेवर डिपेंड ऑन अ सिंगल सोर्स ऑफ
इनकम। इसलिए आज की इस वीडियो में मैं आपको बताने वाला हूं ऐसे नौ स्मॉल बिजनेस आइडियाज जो कम निवेश में शुरू हो सकते हैं जिनकी डिमांड कभी खत्म नहीं होगी और जो आने वाले समय में आपको फाइनेंशियल फ्रीडम की तरफ ले जा सकते हैं और सबसे खास बात इनमें से कुछ बिजनेस ऐसे हैं जिन्हें आप अपनी नौकरी या पढ़ाई के साथ-साथ भी शुरू कर सकते हैं। तो वीडियो को आखिर तक जरूर देखिए क्योंकि हो सकता है इन नौ में से सिर्फ एक आईडिया आपकी पूरी जिंदगी बदल दे। पॉइंट एक डेड स्टॉक बिजनेस दोस्तों जरा एक
पल के लिए सोचिए किसी बड़े शोरूम, फैक्ट्री या गोदाम के अंदर कितना ऐसा सामान पड़ा होता है जो कभी बिक ही नहीं पाता। नए मॉडल आने के बाद पुराने डिजाइन के जूते, पिछले सीजन के कपड़े, [संगीत] पुराने पैकेजिंग वाले प्रोडक्ट्स या फिर ऐसा स्टॉक जिसे दुकानदार महीनों तक बेचने की कोशिश करता है, लेकिन कोई खरीदता नहीं। अब ज्यादातर लोग उस सामान को देखकर क्या सोचते हैं? यह बेकार है। इसमें कोई फायदा नहीं। अब इसे कौन खरीदेगा? लेकिन दोस्तों, हर बिजनेस में असली पैसा वहीं छिपा होता है जहां आम लोग मौका नहीं देख पाते। और यही
सोच आपको एक साधारण इंसान से [संगीत] स्मार्ट बिजनेसमैन बनाती है। यही है डेड स्टॉक बिजनेस। जहां दूसरों का फंसा हुआ पैसा आपका कमाई का मौका बन जाता है। डेड स्टॉक का मतलब सिर्फ बेकार सामान नहीं होता बल्कि ऐसा सामान [संगीत] जिसकी वैल्यू अभी भी है लेकिन सही ग्राहक तक वह पहुंच नहीं पाया और इंडिया जैसे बड़े मार्केट में तो इसकी कोई कमी ही नहीं है। हर दिन हजारों फैक्ट्रियां नया माल बनाती हैं। होलसेलर्स नया स्टॉक उठाते हैं। दुकानदार नई डिजाइन लाते हैं लेकिन हर चीज बिक जाए ऐसा कभी नहीं होता। कुछ सामान ट्रेंड बदलने की
वजह से रुक जाता है। कुछ गलत लोकेशन पर होने की वजह से नहीं बिकता। कुछ सिर्फ इसलिए पड़ा रहता है क्योंकि दुकान वाले के पास उसे बेचने का सही तरीका नहीं होता। और यहीं से आपका मौका शुरू होता है। अब जरा सोचिए अगर कोई दुकानदार किसी जूते को ₹2000 में बेच नहीं पा रहा और वही स्टॉक आपको ₹300 या ₹400 में मिल जाए तो क्या आप उसे ₹799 या ₹999 में बेचकर अच्छा प्रॉफिट नहीं कमा सकते? बिल्कुल कमा सकते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] और सबसे दिलचस्प बात यह है कि आज के टाइम में
लोगों को नई चीज से ज्यादा सस्ती और अच्छी चीज चाहिए। लोग Amazon पर घंटों सिर्फ डिस्काउंट ढूंढते रहते हैं। Instagram पर सेल पेज तेजी से ग्रो कर रहे हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] Facebook मार्केट प्लेस पर लोग लगातार सस्ते डील्स खोजते हैं। यानी मार्केट पहले से तैयार है। बस आपको सही प्रोडक्ट और सही प्राइसिंग समझनी है। अब सवाल आता है शुरुआत कैसे करें? सबसे पहले आपको अपने आसपास के मार्केट को समझना होगा। लोकल होलसेल मार्केट जाइए। [संगीत] छोटे-बड़े दुकानदारों से बात कीजिए। पूछिए कि कौन सा सामान महीनों से पड़ा हुआ है। शुरुआत में लोग
शायद आपको सीरियस ना लें। लेकिन जैसे-जैसे आप बातचीत करेंगे आपको खुद समझ आने लगेगा कि मार्केट में कितना माल फंसा हुआ पड़ा है। कई बार दुकानदार खुद परेशान होता है क्योंकि उसका पैसा उसी स्टॉक में अटका रहता है। उसे बस कोई ऐसा आदमी चाहिए जो वह माल उठाकर ले जाए और यही आपकी ताकत बन सकती है। आप शुरुआत में छोटे लेवल पर काम कर सकते हैं। मान लीजिए आपने सिर्फ ₹5,000 या ₹10,000 से शुरुआत की। कुछ पुराने डिजाइन के शूज, कुछ फैशन एक्सेसरीज, कुछ होम डेकोर आइटम्स या छोटे इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स खरीद लिए। अब आपको क्या
करना है? उनकी अच्छी फोटो क्लिक करनी है। Instagram पेज बनाना है। Facebook मार्केट प्लेस पर डालना है। WhatsApp स्टेटस पर लगाना है और [संगीत] धीरे-धीरे लोगों तक पहुंचाना है। दोस्तों, आज के डिजिटल दौर में दुकान से ज्यादा जरूरी मार्केटिंग हो चुकी है। जिस इंसान को प्रोडक्ट दिखाना आता है, वही प्रोडक्ट बेच सकता है और यही वजह है कि कई लोग बिना दुकान के भी हजारों लाखों कमा रहे हैं। अब यहां एक चीज बहुत जरूरी है माइंडसेट। क्योंकि ज्यादातर लोग सिर्फ यही सोचते रहते हैं कि मेरे पास पैसा नहीं है। लेकिन बिजनेस में हमेशा बड़ा पैसा
जरूरी नहीं होता। कई बार बड़ी सोच ज्यादा जरूरी होती है। दुनिया के सबसे बड़े इन्वेस्टर्स में से एक वारेन बफेट ने कहा था बी फियरफुल वैन अदर्स आर ग्रीडी एंड ग्रीडी वैन अदर्स आर [संगीत] फियरफुल। यानी जहां लोग डर रहे हो। जहां लोग नुकसान देखकर पीछे हट रहे हो। अगर वहां आप मौका पहचान लेते हैं तो वहीं असली पैसा बनता है और डेड स्टॉक बिजनेस बिल्कुल उसी सोच पर चलता है जहां लोग कहते हैं यह नहीं बिकेगा वहीं स्मार्ट लोग कहते हैं इसे सही जगह बेचो। अब जरा इसका दूसरा एंगल समझिए। मान लीजिए किसी शहर
में विंटर जैकेट्स नहीं बिक रही। लेकिन वही स्टॉक किसी ठंडे इलाके में तेजी से बिक सकता है। कहीं पुराने डिजाइन के कपड़े नहीं चल रहे लेकिन वही कपड़े गांव या छोटे शहरों में डिमांड में हो सकते हैं। यानी कई बार प्रोडक्ट खराब नहीं होता। बस उसकी मार्केट गलत होती है। और अगर आपने सही मार्केट समझ ली तो वही डेड स्टॉक आपके लिए गोल्ड माइंड बन सकता है। अब एक और बड़ा फायदा समझिए। इस बिजनेस में आप धीरे-धीरे अपना ब्रांड भी बना सकते हैं। लोग आपको डिस्काउंट सेलर के रूप में जानने लगेंगे। [संगीत] आप Telegram चैनल
बना सकते हैं, Instagram स्टोर बना सकते हैं, WhatsApp कम्युनिटी बना सकते हैं। फिर लोग खुद आपके पास डील्स लेने आएंगे। आज कई ऐसे पेज हैं जो सिर्फ क्लीयरेंस सेल और डेड स्टॉक प्रोडक्ट्स बेचकर लाखों कमा रहे हैं। और सबसे खास बात इस बिजनेस में सीखना बहुत आसान है। जैसे-जैसे आप काम करेंगे आपको समझ आने लगेगा कि कौन सा प्रोडक्ट जल्दी बिकता है। किस चीज में ज्यादा मार्जिन है। किस प्लेटफार्म पर ज्यादा कस्टमर्स आते हैं। [संगीत] धीरे-धीरे आपका एक्सपीरियंस ही आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाएगा। लेकिन दोस्तों एक चीज हमेशा याद रखना इस बिजनेस में जल्दी
अमीर बनने की सोच लेकर मत आना। पहले मार्केट समझो छोटे लेवल से स्टार्ट करो। गलतियों से सीखो और कंसिस्टेंसी रखो। क्योंकि हर बड़ा बिजनेस शुरुआत में छोटा ही होता है। आज जो लोग लाखों का कारोबार कर रहे हैं। उन्होंने भी कभी छोटे ऑर्डर्स से शुरुआत की थी। फर्क सिर्फ इतना है कि उन्होंने मौका देखकर एक्शन लिया और बाकी लोग सिर्फ सोचते रह गए। तो अगर आपको भी लगता है कि जिंदगी में सिर्फ नौकरी के भरोसे नहीं रहना। अगर आप भी अपना दूसरा इनकम सोर्स बनाना चाहते हैं तो डेड स्टॉक बिजनेस आपके लिए एक बहुत बड़ा
मौका हो सकता है। क्योंकि सच यही है इस दुनिया में पैसा हमेशा नई चीजों से नहीं बनता। कई बार दूसरों के छोड़े हुए मौके ही सबसे ज्यादा कमाई करवाते हैं। पॉइंट दो डिजिटल प्रोडक्ट बिजनेस। दोस्तों जरा एक पल के लिए सोचिए। अगर आपको सिर्फ एक बार मेहनत करनी पड़े और उसके बाद वही काम आपको बार-बार पैसा कमा कर देता रहे तो क्या यह किसी नौकरी से ज्यादा पावरफुल नहीं होगा? यही है डिजिटल प्रोडक्ट बिजनेस। एक ऐसा बिजनेस मॉडल जो आने वाले समय में सबसे तेजी से बढ़ने वाला है। आज दुनिया बदल चुकी है। पहले लोग
सिर्फ दुकान खोलकर पैसा कमाते थे। फिर ऑनलाइन सेलिंग का दौर आया। लेकिन अब सबसे ज्यादा ग्रोथ उस चीज में हो रही है जिसे आप बिना स्टॉक, बिना दुकान और बिना बार-बार मेहनत के बेच सकते हैं। और वही है डिजिटल प्रोडक्ट्स। अब सवाल आता है डिजिटल प्रोडक्ट आखिर होता क्या है? बहुत सिंपल। ऐसी कोई भी चीज जिसे आप एक बार बनाकर इंटरनेट के जरिए [संगीत] हजारों लोगों तक पहुंचा सकें। जैसे ई-बुक ऑनलाइन कोर्स cवा, टेंपलेट्स Instagram, रील्स पैक फोटो, प्रीसेट्स, स्टडी [संगीत] नोट्स, रिज्यूुमे टेंपलेट्स, एआई प्र्प पैक्स, वीडियो एडिटिंग, एलयूटीस, एक्सेल शीट्स, बिजनेस [संगीत] गाइड्स, पीडीएफ
नोट्स, वॉइस ओवर पैक्स, म्यूजिक बीट्स और बहुत कुछ। अब यहां सबसे बड़ी बात समझिए। इस बिजनेस में आपकी सबसे बड़ी ताकत आपका नॉलेज होता है। अगर आपको कोई भी स्किल आती है तो आप उससे पैसा बना सकते हैं। [संगीत] जरूरी नहीं कि आप बहुत बड़े एक्सपर्ट हो। जरूरी सिर्फ इतना है कि जो चीज आपको आती है वह किसी दूसरे इंसान से थोड़ी ज्यादा आती हो। मान लीजिए आपको वीडियो एडिटिंग आती है। आप capkat या वी एन एप से रील्स एडिट करना जानते हैं। अब आप क्या कर सकते हैं? आप एक बिगिनर एडिटिंग कोर्स बना सकते
हैं। ट्रांजिशन पैक बेच सकते हैं। रेडीमेड रियल टेंपलेट्स बना सकते हैं। और आज लाखों लोग ऐसी चीजें खरीद भी रहे हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] अगर आपको Instagram ग्रोथ की समझ है तो आप कंटेंट कैलेंडर बना सकते हैं। हैशटग गाइड भेज सकते हैं। वायरल कैप्शन पैक बना सकते हैं। अगर आप पढ़ाई में अच्छे हैं तो नोट्स बनाकर भेज सकते हैं। एग्जाम प्रिपरेशन पीडीएफ बना सकते हैं। शॉर्ट ट्रिक्स ई-बुक बना सकते हैं। दोस्तों आज इंटरनेट पर इंफॉर्मेशन ही सबसे बड़ा प्रोडक्ट बन चुका है और सबसे खास बात यह है कि इस बिजनेस में आपको बार-बार
मेहनत नहीं करनी पड़ती। एक बार प्रोडक्ट बन गया बस उसके बाद वही प्रोडक्ट बार-बार बिकता रहता है। यही डिजिटल बिजनेस की असली ताकत है। मान लीजिए आपने एक ई-बुक बनाई उसे बनाने में आपको 7 दिन लगे। लेकिन अगर वही ई-बुक अगले 2 साल तक बिकती रही, तो सोचिए एक बार की मेहनत आपको कितनी बार पैसा कमा कर देगी। यही फर्क है एक्टिव इनकम और पैसिव इनकम में। [संगीत] नौकरी में क्या होता है? जब तक आप काम करते हैं तब तक पैसा आता है। काम बंद, पैसा बंद। लेकिन डिजिटल प्रोडक्ट बिजनेस में आपका बनाया हुआ प्रोडक्ट
सोते समय भी बिक सकता है। और यही चीज इस बिजनेस को इतना पावरफुल बनाती है। अब जरा इसका सबसे बड़ा फायदा समझिए। इसमें ना दुकान चाहिए, ना स्टॉक रखना पड़ता है, ना डिलीवरी की टेंशन, ना गोदाम, ना बार-बार सामान खरीदना। बस आपका फोन, इंटरनेट और आपकी स्किल। आज Instagram, YouTube और Telegram जैसे प्लेटफार्म हर इंसान को मौका दे रहे हैं। अगर आप कंसिस्टेंट होकर कंटेंट डालते हैं, तो धीरे-धीरे लोग आपको पहचानने लगते हैं। ट्रस्ट बनने लगता है और इंटरनेट की दुनिया में ट्रस्ट ही सबसे बड़ी करेंसी है। जब लोग आप पर भरोसा करने लगते हैं,
तब वही लोग आपके [गला साफ़ करने की आवाज़] प्रोडक्ट्स खरीदते हैं। आज हजारों लोग सिर्फ डिजिटल प्रोडक्ट्स बेचकर घर बैठे लाखों कमा रहे हैं। कई लोग सिर्फ cवा टेंपलेट्स बेच रहे हैं। कई लोग सिर्फ स्टडी नोट्स बेच रहे हैं। कई लोग सिर्फ एi प्र्प्स बेचकर पैसा बना रहे हैं। और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से बहुत से लोगों के पास कोई बड़ी डिग्री भी नहीं है। उन्होंने बस एक चीज समझ ली। इंटरनेट पर अटेंशन ही पैसा है। अब सवाल आता है, शुरुआत कैसे करें? सबसे पहले अपनी स्किल पहचानिए। खुद से पूछिए
मुझे क्या आता है? मैं किस चीज में दूसरों की मदद कर सकता हूं? फिर उस स्किल को सिंपल फॉर्मेट में बदल दीजिए। अगर आप कुछ सिखा सकते हैं तो कोर्स बनाइए। अगर आप डिजाइन बना सकते हैं तो टेंपलेट्स बेचिए। अगर आप जानकारी दे सकते हैं तो ई-बुक [संगीत] बनाइए। और सबसे अच्छी बात आज टूल्स इतने आसान हो चुके हैं कि कोई भी इंसान शुरुआत कर सकता है। cवा से डिजाइन बन सकता है। चैट जीपीटी से आइडियाज मिल सकते हैं। कैपकट से वीडियो बन सकती है। Google डॉक्स से ई-बुक तैयार हो सकती है। यानी टेक्नोलॉजी ने
गेम पूरी तरह बदल [संगीत] दिया है। पहले बिजनेस शुरू करने के लिए लाखों रुपए चाहिए होते थे। आज सिर्फ स्किल और स्मार्टफोन [संगीत] से शुरुआत हो सकती है। लेकिन दोस्तों यहां एक चीज बहुत जरूरी है पेशेंस। क्योंकि शुरुआत में शायद कोई प्रोडक्ट ना खरीदे। शायद आपके वीडियो पर व्यूज ना आए। शायद लोग इग्नोर करें। लेकिन यही वो समय होता है जहां ज्यादातर लोग हार मान लेते हैं और जो लोग लगातार सीखते रहते हैं, कंसिस्टेंट रहते हैं। वही आगे जाकर बड़ा ब्रांड बनाते हैं। दुनिया के सबसे बड़े इन्वेस्टर्स में से एक वारेन बफेट ने कहा था,
द बेस्ट इन्वेस्टमेंट यू कैन मेक इज इन योरसेल्फ। यानी सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट आपकी खुद की स्किल होती है क्योंकि पैसा खत्म हो सकता है। लेकिन स्किल आपको बार-बार पैसा कमा कर दे सकती है और डिजिटल प्रोडक्ट बिजनेस पूरी तरह स्किल पर चलता है। यहां आपकी नॉलेज ही आपका एसेट बन जाती है। अब जरा भविष्य के बारे में सोचिए। [संगीत] आने वाले समय में एआई और इंटरनेट पूरी दुनिया को बदलने वाले हैं। जो लोग सिर्फ ट्रेडिशनल जॉब्स पर डिपेंड रहेंगे उन्हें हमेशा डर रहेगा। लेकिन जिन लोगों के पास अपनी ऑडियंस होगी, अपनी स्किल होगी और अपने
डिजिटल प्रोडक्ट्स होंगे, उनके पास हमेशा इनकम के नए मौके रहेंगे। [संगीत] और यही वजह है कि आज स्मार्ट लोग सिर्फ नौकरी नहीं डिजिटल एसेट्स बनाने पर फोकस कर रहे हैं। क्योंकि नौकरी आपको हर महीने सैलरी देती है। लेकिन डिजिटल प्रोडक्ट्स आपको फ्रीडम दे सकते हैं। फ्रीडम ऑफ टाइम, [संगीत] फ्रीडम ऑफ लोकेशन और फ्रीडम ऑफ इनकम। तो अगर आप भी ऐसा बिजनेस चाहते हैं जिसे कम पैसों में शुरू किया जा सके जो भविष्य में और तेजी से ग्रो होने वाला हो और जिसमें आपकी मेहनत बार-बार पैसा बनकर वापस आए तो डिजिटल प्रोडक्ट बिजनेस आपके लिए सबसे
पावरफुल अपॉर्चुनिटीज में से एक हो सकता है। क्योंकि सच [संगीत] यही है आने वाले समय में सबसे ज्यादा पैसा उसी इंसान के पास होगा जो अपनी स्किल को डिजिटल रूप में बेच पाना सीख जाएगा। [संगीत] पॉइंट तीन कार वाशिंग एंड डिटेलिंग बिजनेस। दोस्तों जरा अपने आसपास नजर घुमाइए। हर सड़क पर, हर गली में, हर सोसाइटी में आपको गाड़ियां ही गाड़ियां दिखाई देंगी। कुछ साल पहले कार रखना एक सपना माना जाता था। लेकिन आज बढ़ती इनकम, आसान ईएमआई और बदलती लाइफस्टाइल की वजह से लगभग हर परिवार अपनी खुद की गाड़ी लेना चाहता है। और जैसे-जैसे गाड़ियां
बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे एक ऐसी जरूरत भी बढ़ रही है जो कभी खत्म नहीं होने वाली। कार वाशिंग और डिटेलिंग। क्योंकि दोस्तों आज लोग कार को सिर्फ एक व्हीकल नहीं मानते। वो उसे अपनी पर्सनालिटी, अपना स्टेटस और अपनी इमेज का हिस्सा मानते हैं। जब कोई इंसान अपनी चमचमाती हुई कार लेकर सड़क पर निकलता है तो उसे सिर्फ सफर नहीं करना होता। उसे अच्छा महसूस भी करना होता है। और यही वजह है कि लोग अपनी गाड़ी की साफ सफाई पर पैसा खर्च करने से पीछे नहीं हटते। अब जरा रियलिटी समझिए। [संगीत] आज ज्यादातर कार ओनर्स बिजी
लाइफ जी रहे हैं। सुबह जॉब, दिन भर काम, शाम को थकान। ऐसे में उनके पास अपनी गाड़ी खुद साफ करने का ना टाइम होता है ना एनर्जी। [संगीत] ऊपर से बड़े शहरों में स्पेस की भी बहुत समस्या है। हर किसी के पास इतनी जगह नहीं होती कि वो आराम से अपनी कार धो सके। और यही प्रॉब्लम आपके लिए एक बड़ा बिजनेस अपॉर्चुनिटी बन जाती है। कार वाशिंग और डिटेलिंग बिजनेस की सबसे बड़ी ताकत यही है कि इसकी डिमांड कभी खत्म नहीं होगी [संगीत] क्योंकि जब तक सड़क पर गाड़ियां रहेंगी तब तक उनकी सफाई और मेंटेनेंस
की जरूरत भी रहेगी। अब सवाल आता है शुरुआत कैसे करें? सबसे अच्छी बात यह है कि इस बिजनेस को बहुत कम इन्वेस्टमेंट में शुरू किया जा सकता है। शुरुआत में आपको चाहिए पानी की सुविधा। कुछ बेसिक क्लीनिंग प्रोडक्ट्स, माइक्रो फाइबर कपड़ा, फोम शैंपू, टायर पॉलिश और एक प्रेशर वॉशर। बस इतनी चीजों से आप अपना काम शुरू कर सकते हैं। शुरुआत में अगर बजट कम है तो आप खुद भी काम कर सकते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] यही सबसे स्मार्ट तरीका होता है क्योंकि शुरुआत में आपकी मेहनत ही आपका सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट होती है। अब
जरा इसकी कमाई समझिए। एक बेसिक कार वॉश के लिए ₹300 से ₹500 तक आसानी से चार्ज किया जाता है। और अगर आप सिर्फ वाशिंग तक सीमित ना रहकर डिटेलिंग सर्विज भी जोड़ दें तो आपकी कमाई कई गुना बढ़ सकती है। जैसे इंटीरियर क्लीनिंग डैशबोर्ड, पॉलिशिंग वैक्स कोटिंग टायर, ड्रेसिंग इंजन क्लीनिंग सीट, शैंपू सिरामिक कोटिंग एंड सर्विज के लिए लोग ₹1000 से ₹3000 तक आराम से पे करते हैं। अब जरा इसका सिंपल मैप देखिए। अगर आप सिर्फ दिन की 10 कार्स भी वॉश करते हैं और हर कार से एवरेज ₹400 कमाते हैं तो ₹4000 रोज के
बन गए। यानी महीने के लगभग ₹1200 का टर्नओवर और इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि खर्च बहुत ज्यादा नहीं होता। थोड़ा पानी, कुछ क्लीनिंग मटेरियल और थोड़ी बिजली। [संगीत] बाकी ज्यादातर पैसा आपका प्रॉफिट होता है और जैसे-जैसे कस्टमर्स बढ़ते जाएंगे, आप हेल्पर्स रख सकते हैं। फिर आप एक दिन में 20 से 25 कार्स भी हैंडल कर सकते हैं। यही छोटा बिजनेस धीरे-धीरे बड़ा सेटअप बन सकता है। लेकिन दोस्तों, यहां सिर्फ मेहनत काफी नहीं होती। [संगीत] स्मार्टनेस भी जरूरी होती है क्योंकि इस बिजनेस में सबसे बड़ा फर्क सर्विस क्वालिटी डालती है। अगर आपकी वाशिंग एवरेज
है तो कस्टमर शायद दोबारा ना आए लेकिन अगर आपकी सर्विस देखकर कस्टमर इंप्रेस हो गया तो वही कस्टमर आपकी फ्री मार्केटिंग बन जाता है। वो अपने दोस्तों को बताएगा, फैमिली को बताएगा और धीरे-धीरे आपका नाम फैलने लगेगा। याद रखिए इस बिजनेस में ट्रस्ट ही सबसे बड़ी ब्रांडिंग है। अब एक और पावरफुल चीज समझिए। आप इस बिजनेस को कई अलग-अलग तरीकों से ग्रो कर सकते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] जैसे डोर स्टेप सर्विस जहां आप कस्टमर्स के घर जाकर कार वॉश करें। [संगीत] आज बिजी लोग यही चाहते हैं। उन्हें कन्वीनियंस चाहिए। अगर आप टाइम पर
पहुंचते हैं, प्रोफेशनल तरीके से काम करते हैं तो लोग मंथली सर्विस लेने लगते हैं। और यही सबसे बड़ा गेम चेंजर होता है। मंथली सब्सक्रिप्शन मॉडल। मान लीजिए आप किसी कस्टमर से ₹1,500 या ₹2000 महीने की डील कर लेते हैं जिसमें आप उसकी कार रेगुलर साफ करेंगे। अब सोचिए अगर आपके पास सिर्फ 50 रेगुलर कस्टमर्स भी आ गए तो हर महीने आपकी फिक्स्ड इनकम शुरू हो जाएगी। यानी अब आपको रोज नए कस्टमर्स ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यही स्मार्ट बिजनेस का असली मतलब होता है रिकरिंग इनकम। अब जरा एक और चीज नोटिस कीजिए। आज सोशल मीडिया
ने लोकल बिजनेस को भी पावरफुल बना दिया है। अगर आप अपनी वाशिंग वीडियो Instagram रील्स पर डालते हैं, बिफोर आफ्टर रिजल्ट्स दिखाते हैं, तो लोग जल्दी आकर्षित होते हैं क्योंकि [गला साफ़ करने की आवाज़] लोगों को ट्रांसफॉर्मेशन देखना पसंद होता है। एक गंदी कार को चमकती हुई कार में बदलते देखना अपने आप में सेटिस्फेक्शन देता है और यही चीज आपके बिजनेस की मार्केटिंग बन सकती है। धीरे-धीरे लोग आपको प्रोफेशनल समझने लगेंगे। और दोस्तों आज के टाइम में प्रोफेशनल दिखना भी बहुत जरूरी है। अगर आपके पास प्रॉपर यूनिफार्म हो, साफ सेटअप हो और काम करने का
तरीका अच्छा हो, तो लोग ज्यादा भरोसा करते हैं। यही छोटी-छोटी चीजें आपको दूसरों से अलग बनाती हैं। अब यहां एक माइंडसेट बहुत जरूरी है। बहुत से लोग ऐसे बिजनेस को छोटा समझते हैं। लेकिन वही लोग पूरी जिंदगी सैलरी के पीछे भागते रहते हैं। सच्चाई यह है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। छोटी सिर्फ सोच होती है। दुनिया के सबसे बड़े इन्वेस्टर्स में से एक वारेन बफेट ने कहा था, [संगीत] प्राइस इज यू पे। वैल्यू इज यू गेट। यानी असली चीज कीमत नहीं वैल्यू [संगीत] होती है। और कार वाशिंग बिजनेस लोगों को सिर्फ सफाई नहीं
देता। उन्हें सेटिस्फेक्शन देता है, कॉन्फिडेंस देता है और उनकी कार की वैल्यू मेंटेन रखता है। इसीलिए लोग इसके लिए पैसे खर्च करते हैं। अब सबसे जरूरी बात इस बिजनेस में ग्रोथ की लिमिट नहीं है। शुरुआत में आप अकेले काम कर सकते हैं। फिर छोटा सेटअप खोल सकते हैं। फिर डिटेलिंग स्टूडियो बना सकते हैं। फिर [गला साफ़ करने की आवाज़] मल्टीपल ब्रांचेस भी खोल सकते हैं। आज कई बड़े कार डिटेलिंग ब्रांड्स इसी तरह छोटे सेटअप से शुरू हुए थे। फर्क सिर्फ इतना था कि उन्होंने शुरुआत कर दी। जबकि बाकी लोग सिर्फ सोचते रहे। तो अगर आप
कम इन्वेस्टमेंट में एक ऐसा बिजनेस शुरू करना चाहते हैं जिसकी डिमांड हमेशा बनी रहे जिसमें कैश फ्लो जल्दी शुरू हो जाए और जिसे धीरे-धीरे बड़ा बनाया जा सके। तो कार वाशिंग और डिटेलिंग बिजनेस आपके लिए एक बहुत पावरफुल अपॉर्चुनिटी हो सकता है। क्योंकि सच यही है जहां लोग सिर्फ गाड़ियां देखते हैं वहीं स्मार्ट लोग एक चलता हुआ बिजनेस देख लेते हैं। पॉइंट चार कंटेंट बिजनेस। दोस्तों अगर आज के समय में कोई एक ऐसा बिजनेस है जो सबसे तेजी से लोगों की जिंदगी बदल रहा है तो वो है कंटेंट बिजनेस। जरा सोचिए कुछ साल पहले तक
टीवी पर आने वाले लोगों को ही फेमस माना जाता था। लेकिन आज एक नॉर्मल इंसान अपने छोटे से कमरे में बैठकर सिर्फ एक फोन से वीडियो बनाकर लाखों लोगों तक पहुंच रहा है और सिर्फ पहुंच ही नहीं रहा। बल्कि उसी कंटेंट से लाखों करोड़ों रुपए भी कमा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आज इंटरनेट ने हर इंसान को बराबर का मौका दे दिया है। अब फर्क इस बात से नहीं पड़ता कि आप किस शहर से हो। आपके पास कितनी डिग्री है या आपकी फैमिली बैकग्राउंड क्या है। फर्क सिर्फ एक चीज से
पड़ता है। आप लोगों को कितना वैल्यू दे सकते हो। और यही चीज कंटेंट बिजनेस को इतना पावरफुल बनाती है। आज लोग सिर्फ एंटरटेनमेंट देखने नहीं आते। वो सीखना चाहते हैं, मोटिवेशन चाहते हैं, इंफॉर्मेशन चाहते हैं और [गला साफ़ करने की आवाज़] किसी ऐसे इंसान को फॉलो करना चाहते हैं जिससे वह खुद को कनेक्ट कर सकें। यही वजह है कि आज YouTube, Instagram और Facebook जैसे प्लेटफार्म सिर्फ सोशल मीडिया एप्स नहीं रहे बल्कि पूरी की पूरी इकॉनमी बन चुके हैं। अब जरा एक चीज समझिए। बहुत से लोगों को लगता है कि कंटेंट क्रिएशन मतलब सिर्फ YouTube
एड्स से पैसा कमाना। लेकिन असली गेम वहां शुरू होता है जहां आपकी ऑडियंस बनती है। क्योंकि असली पैसा सिर्फ व्यूज में नहीं ट्रस्ट में होता है। जब लोग आपको पहचानने लगते हैं, आपकी बात सुनने लगते हैं, आपके कंटेंट का इंतजार करने लगते हैं, तब आपका कंटेंट एक बिजनेस बनना शुरू हो जाता है। और फिर इनकम के कई रास्ते खुलते हैं। जैसे ब्रांड डील्स जहां कंपनियां आपको अपने प्रोडक्ट्स प्रमोट करने के पैसे देती हैं। स्पोंसरशिप्स [संगीत] जहां ब्रांड्स आपकी ऑडियंस तक पहुंचने के लिए पे करते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] एफिलिएट मार्केटिंग जहां आप किसी
प्रोडक्ट को रिकमेंड करते हैं और हर सेल पर कमीशन कमाते हैं। डिजिटल प्रोडक्ट्स जहां आप अपनी नॉलेज बेचते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] कोर्सेज जहां लोग आपसे सीखने के लिए पे करते हैं। सर्विसेज जैसे वीडियो एडिटिंग, कंसल्टिंग, डिजाइनिंग, कोचिंग और बहुत कुछ। यानी एक बार अगर आपने ऑडियंस बना ली तो आपका कंटेंट सिर्फ वीडियो नहीं रहता। वो इनकम मशीन बन जाता है। और यही वजह है कि आज छोटे-छोटे क्रिएटर्स भी लाखों कमा रहे हैं। कई [गला साफ़ करने की आवाज़] लोगों के सिर्फ 500 या 1 लाख फॉलोअर्स होते हैं। लेकिन उनकी इनकम कई नौकरी
करने वालों से ज्यादा होती है। क्यों? क्योंकि उन्होंने अटेंशन को एसेट बना लिया। आज इंटरनेट की दुनिया में जिसके पास अटेंशन है, उसके पास अपॉर्चुनिटी है। अब सबसे अच्छी बात समझिए। इस बिजनेस को शुरू करने के लिए ना बड़ी डिग्री चाहिए, ना ऑफिस, ना लाखों का इन्वेस्टमेंट। बस चाहिए एक स्मार्टफोन, इंटरनेट और कंसिस्टेंसी। [संगीत] आज बहुत से लोग इसलिए शुरू ही नहीं करते क्योंकि उन्हें लगता है कि मेरे पास प्रोफेशनल कैमरा नहीं है। मेरी इंग्लिश अच्छी नहीं है। मैं अच्छा नहीं दिखता। लोग क्या कहेंगे? लेकिन सच यह है कि इंटरनेट पर परफेक्ट लोग नहीं रियल
लोग जीतते हैं। लोग उस इंसान से कनेक्ट करते हैं जो असली लगता है। अगर आपके पास नॉलेज है, एक्सपीरियंस है या लोगों की मदद करने की इच्छा है तो आप कंटेंट बना सकते हैं। शुरुआत में शायद आपके वीडियो पर 10 व्यूज आए। शायद कोई लाइक ना करें। शायद लोग मजाक उड़ाएं। लेकिन हर बड़ा क्रिएटर कभी ना कभी इसी स्टेज से गुजरा है। कोई भी पहले दिन वायरल नहीं होता। हर सक्सेसफुल क्रिएटर के पीछे सैकड़ों फेल्ड वीडियो छिपी होती हैं। [संगीत] लेकिन फर्क सिर्फ इतना होता है कि कुछ लोग हार मान लेते हैं और कुछ लोग
सीखते रहते हैं। कंटेंट बिजनेस में कंसिस्टेंसी ही सबसे बड़ी ताकत होती है। अगर आप रोज थोड़ा-थोड़ा बेहतर बनने की कोशिश करते हैं तो धीरे-धीरे आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है। आपकी स्किल भी बढ़ती है [संगीत] और आपकी ऑडियंस भी बढ़ने लगती है। अब जरा सबसे पावरफुल चीज समझिए। कंटेंट एक ऐसा एसेट है जो समय के साथ और वैल्यूुएबल होता जाता है। मान लीजिए आपने आज एक वीडियो बनाई वो वीडियो अगले 2 साल तक भी व्यूज ला सकती है। नए लोग आपको डिस्कवर कर सकते हैं और वही पुराना कंटेंट आपको नया पैसा कमा कर दे सकता है।
यानी आपने एक बार मेहनत की लेकिन उसका फायदा लंबे समय तक मिलता रहा। यही वजह है कि स्मार्ट लोग आज कंटेंट को सिर्फ हॉबी नहीं बिजनेस की तरह देखते हैं। अब एक और बड़ी चीज समझिए। कंटेंट सिर्फ पैसा कमाने का तरीका नहीं है। यह पर्सनल ब्रांड बनाने का तरीका भी है। जब लोग आपको जानने लगते हैं, तो आपके लिए अपॉर्चुनिटीज अपने आप बढ़ने लगती हैं। आपको कोलैबोरेशंस मिलते हैं। ब्रांड्स खुद कांटेक्ट करते हैं। लोग आपकी स्किल्स के लिए पे करने लगते हैं और धीरे-धीरे आपका नाम ही आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता है। दुनिया के
सबसे बड़े इन्वेस्टर्स में से एक वारेन बफेट ने कहा था, द मोर यू लर्न, द मोर यू अर्न। यानी [संगीत] जितना आप सीखते हैं उतना ज्यादा कमाने की क्षमता बढ़ाते हैं। और [गला साफ़ करने की आवाज़] कंटेंट बिजनेस पूरी तरह इसी सिद्धांत पर चलता है। जितना आप सीखते हैं उतना बेहतर कंटेंट बनाते हैं और जितना बेहतर कंटेंट बनाते हैं उतनी ज्यादा आपकी वैल्यू बढ़ती है। आज के समय में लोग सिर्फ डिग्री से नहीं नॉलेज और कम्युनिकेशन से आगे बढ़ रहे हैं और कंटेंट आपको यही पावर देता है। लेकिन दोस्तों एक चीज हमेशा याद रखना कंटेंट
क्रिएशन कोई जल्दी अमीर बनने वाला शॉर्टकट नहीं है। यह लॉन्ग टर्म गेम है। इसमें पेशेंस चाहिए, डिसिप्लिन चाहिए और लगातार सीखते रहने की आदत चाहिए। कई बार मोटिवेशन खत्म होगा। कई बार लगेगा कि कुछ नहीं हो रहा। लेकिन यही वह समय होता है जहां फ्यूचर क्रिएटर्स और क्विट करने वाले लोगों के बीच फर्क बनता है। अगर आप लगातार बने रहते हैं तो धीरे-धीरे यही कंटेंट आपकी पहचान बन जाता है। और एक दिन वही वीडियो जो कभी 100 व्यूज के लिए संघर्ष कर रही थी लाखों लोगों तक पहुंचने लगती हैं। तो अगर आप ऐसा बिजनेस चाहते
हैं जिसे कम पैसों में शुरू किया जा सके जो भविष्य में और तेजी से बढ़ने वाला हो और जो आपको सिर्फ इनकम ही नहीं बल्कि [गला साफ़ करने की आवाज़] फ्रीडम और आइडेंटिटी भी दे सके। तो कंटेंट बिजनेस आज के समय की सबसे बड़ी अपॉर्चुनिटीज में से एक है। क्योंकि सच यही है आने वाले समय में सबसे ज्यादा ग्रो वही लोग करेंगे जो सिर्फ कंटेंट कंज्यूम नहीं बल्कि कंटेंट क्रिएट करना सीख जाएंगे। पॉइंट पांच रेंटल बिजनेस। दोस्तों जरा एक सवाल खुद से पूछिए। क्या सच में हर चीज खरीदना जरूरी होता है? क्या हम कैमरा रोज
इस्तेमाल करते हैं? क्या गेमिंग कंसोल हर दिन चलता है? क्या शादी के कपड़े हर महीने पहने जाते हैं? क्या हर इंसान को हमेशा के लिए स्पीकर या फर्नीचर चाहिए होता है? नहीं। [गला साफ़ करने की आवाज़] और यही बदलती सोच आज एक बहुत बड़े बिजनेस अपॉर्चुनिटी में बदल चुकी है। रेंटल बिजनेस। एक ऐसा बिजनेस जहां लोग चीजों के मालिक बनने से ज्यादा जरूरत के समय उन्हें इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं। आज दुनिया धीरे-धीरे ओनरशिप से एक्सेस की तरफ बढ़ रही है। पहले लोग सोचते थे हर चीज अपनी होनी चाहिए। लेकिन अब लोग सोचते हैं
जब जरूरत हो तब इस्तेमाल कर लो और यही सोच रेंटल इंडस्ट्री को तेजी [संगीत] से ग्रो कर रही है। आज लोग पैसे बचाना चाहते हैं, स्मार्ट तरीके से खर्च करना चाहते हैं और ऐसी चीजों पर ज्यादा पैसा नहीं लगाना चाहते जिन्हें वह कभी कभार ही इस्तेमाल करेंगे। यही वजह है कि रेंटल बिजनेस आने वाले समय में सबसे तेजी से बढ़ने वाले बिजनेस मॉडल्स में से एक माना जा रहा है। अब इसकी सबसे बड़ी ताकत समझिए। इस बिजनेस में आपको बार-बार नया प्रोडक्ट नहीं बनाना पड़ता। आप सिर्फ एक बार एसेट खरीदते हैं [संगीत] और फिर वही
चीज बार-बार आपके लिए पैसा कमाती रहती है। यही अमीर लोगों का असली गेम होता है। वो सिर्फ मेहनत करके पैसा नहीं कमाते बल्कि ऐसे एसेट्स बनाते हैं जो उनके लिए लगातार काम करते रहे। मान लीजिए आपने ₹500 का एक कैमरा खरीदा। अब अगर आप उसे ₹1000 प्रतिदिन के हिसाब से रेंट पर देना शुरू करते हैं और महीने में सिर्फ 15 दिन भी वह रेंट पर चला गया तो ₹15,000 की इनकम हो सकती है। यानी कुछ ही महीनों में आपकी पूरी लागत निकल सकती है और उसके बाद वही कैमरा आपके लिए प्योर प्रॉफिट बन जाता है।
अब सोचिए अगर एक कैमरा इतना कमा सकता है तो कई एसेट्स मिलकर कितना पैसा बना सकते हैं? यही रेंटल बिजनेस की सबसे बड़ी ताकत है। रिकरिंग इनकम। अब सवाल आता है कौन-कौन सी चीजें रेंट पर दी जा सकती हैं? दोस्तों, आज लगभग हर चीज का रेंटल मार्केट मौजूद है। कैमरा और फोटोग्राफी इक्विपमेंट, बाइक और कार रेंटल, [संगीत] स्पीकर और साउंड सिस्टम, प्रोजेक्टर, गेमिंग कंसोल, फर्नीचर, वेडिंग डेकोरेशन आइटम्स, [संगीत] पार्टी लाइट्स, टेंट्स, कॉस्ट्यूम्स, लग्जरी ड्रेसेस, लैपटॉप्स, बेबी प्रोडक्ट्स, स्पोर्ट्स इक्विपमेंट और यहां तक कि [संगीत] ट्रैवल बैग्स भी। अब जरा लोगों की साइकोलॉजी समझिए। अगर किसी इंसान
को सिर्फ 2 दिन के लिए डी इस एलआर कैमरा चाहिए तो वह ₹80,000 खर्च करके कैमरा क्यों खरीदेगा? वो रेंट पर लेना ज्यादा बेहतर समझेगा। अगर किसी को सिर्फ शादी के लिए डिजाइनर ड्रेस चाहिए तो वह लाखों खर्च करने के बजाय रेंटल ऑप्शन चुनेगा। यानी लोगों की जरूरतें हमेशा रहेंगी लेकिन हर कोई हर चीज खरीदना नहीं चाहेगा। और यही आपके बिजनेस की अपॉर्चुनिटी [संगीत] है। तो अगर आप ऐसा बिजनेस चाहते हैं जो कम इन्वेस्टमेंट में शुरू हो सके जिसमें लॉन्ग टर्म इनकम की पोटेंशियल हो और जहां एक बार खरीदी गई चीज बार-बार आपके लिए पैसा
कमाए तो रेंटल बिजनेस आपके लिए एक बहुत पावरफुल अपॉर्चुनिटी हो सकता है। [संगीत] क्योंकि सच यही है। अमीर लोग सिर्फ पैसा खर्च नहीं करते। वो ऐसे एसेट्स बनाते हैं जो जिंदगी भर उनके लिए काम करते रहें। पॉइंट छह लोकल सर्विस एजेंसी बिजनेस। दोस्तों जरा अपने आसपास की एक आम प्रॉब्लम को याद कीजिए। घर में अचानक पानी की पाइप खराब हो जाए, बिजली चली जाए, पंखा बंद हो जाए, दीवार पेंट करवानी हो या घर की सफाई के लिए कोई चाहिए हो तो सबसे बड़ी परेशानी क्या होती है? काम करवाना नहीं बल्कि [गला साफ़ करने की आवाज़]
सही और भरोसेमंद आदमी ढूंढना। क्योंकि आज के समय में लोगों के पास पैसे से ज्यादा कमी है। ट्रस्ट की। लोग डरते हैं कि कहीं गलत आदमी ना आ जाए, काम खराब ना कर दे, ज्यादा पैसे ना ले ले या फिर समय पर आए ही ना। [संगीत] और दोस्तों, यही प्रॉब्लम आपके लिए एक बहुत बड़ा बिजनेस अपॉर्चुनिटी बन सकती है। यहीं से शुरू होता है लोकल सर्विस एजेंसी बिजनेस। एक ऐसा बिजनेस जिसमें आपको खुद प्लंबर बनने की जरूरत नहीं, इलेक्ट्रिशियन बनने की जरूरत नहीं, क्लीनर या कारपेंटर बनने की जरूरत नहीं। आपको सिर्फ एक काम करना है
सही लोगों को सही कस्टमर्स से जोड़ना। [संगीत] यानी आप एक ब्रिज बनते हैं उन लोगों के बीच जिन्हें सर्विस चाहिए और जो सर्विस देना जानते हैं। अब जरा सोचिए आज हर शहर, हर मोहल्ले, हर सोसाइटी में ऐसे हजारों लोग हैं जिन्हें रोज किसी ना किसी लोकल सर्विस की जरूरत पड़ती है। लेकिन उन्हें भरोसेमंद आदमी नहीं मिलता। अगर आप यह प्रॉब्लम सॉल्व कर देते हैं तो लोग खुद आपके पास आएंगे और यही इस बिजनेस की सबसे बड़ी ताकत है। अब सवाल आता है शुरुआत कैसे करें? सबसे पहले आपको अपने आसपास के स्किल्ड वर्कर्स का नेटवर्क बनाना
होगा। जैसे प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, क्लीनर, पेंटर, कारपेंटर, एसी टेक्नशियन, [संगीत] मैकेनिक, एयप्लायंस रिपेयर वर्कर और बाकी लोकल वर्कर्स। आप उनसे मिलिए। उनका काम देखिए। उनका व्यवहार समझिए और सिर्फ उन्हीं लोगों को चुनिए जिन पर आप खुद भरोसा कर सकें। [संगीत] क्योंकि इस बिजनेस में आपका सबसे बड़ा एसेट होता है रेपुटेशन। अगर आपने गलत आदमी भेज दिया तो कस्टमर दोबारा आपके पास नहीं आएगा। लेकिन अगर आपकी सर्विस अच्छी हुई तो वही कस्टमर आपकी फ्री मार्केटिंग बन जाएगा। याद रखिए लोग सर्विस से ज्यादा भरोसा खरीदते हैं। अब इसके बाद आपको अपनी ऑनलाइन प्रेजेंस बनानी होगी। आज के टाइम
में बिजनेस शुरू करने के लिए बड़ा ऑफिस जरूरी नहीं है। आप सिर्फ एक स्मार्टफोन से भी शुरुआत कर सकते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] Instagram पेज बनाइए, WhatsApp बिजनेस अकाउंट बनाइए। Facebook लोकल ग्रुप्स में एक्टिव रहिए। फिर वहां अपनी सर्विज की जानकारी डालिए। जैसे ट्रस्टेड इलेक्ट्रिशियन अवेलेबल, सेम डे प्लंबिंग सर्विस, होम क्लीनिंग सर्विस। [संगीत] धीरे-धीरे लोग आपको कांटेक्ट करना शुरू करेंगे। अब जब किसी कस्टमर को सर्विस चाहिए होगी तो वह आपको कॉल करेगा। आप अपने नेटवर्क से सही वर्कर को भेज देंगे और हर काम पर अपना कमीशन लेंगे। मान लीजिए किसी इलेक्ट्रिशियन का काम
[संगीत] ₹1000 में हुआ तो आप उसमें ₹200 से ₹300 अपना कमीशन रख सकते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] अब सोचिए अगर आप दिन के सिर्फ 5 से छह जॉब्स भी क्लोज करते हैं तो ₹1000 से ₹3000 तक की डेली इनकम हो सकती है। यानी महीने के ₹00 से ₹900 तक। और सबसे खास बात इसमें ना दुकान चाहिए ना लाखों का इन्वेस्टमेंट ना कोई बड़ा सेटअप। [संगीत] बस चाहिए नेटवर्क, ट्रस्ट और कंसिस्टेंसी। अब जरा इसकी सबसे पावरफुल चीज समझिए। यह बिजनेस सिर्फ मेहनत पर नहीं सिस्टम पर चलता है। जितना आपका नेटवर्क बड़ा होगा, उतनी आपकी
अर्निंग पोटेंशियल बढ़ेगी। क्योंकि यहां आप अकेले काम नहीं कर रहे, आप एक पूरा सर्विस इको सिस्टम बना रहे हैं। और यही चीज इस बिजनेस को स्केलेबल बनाती है। शुरुआत में आपके पास सिर्फ दो से तीन वर्कर्स होंगे। फिर धीरे-धीरे 10, फिर 20 और एक समय ऐसा भी आ सकता है जब पूरा एरिया आपकी एजेंसी से सर्विस लेने लगे। अब जरा रियलिटी समझिए। आज अर्बन एरियाज में लोग बिजी लाइफ जी रहे हैं। उनके पास टाइम नहीं होता कि वह अलग-अलग लोगों को ढूंढते रहें। उन्हें कन्वीनियंस चाहिए। अगर आप एक ही जगह से ट्रस्टेड सर्विज दिला देते
हैं तो लोग एक्स्ट्रा पैसे देने के लिए भी तैयार रहते हैं। [संगीत] यही वजह है कि आज लोकल सर्विस प्लेटफॉर्म्स तेजी से ग्रो कर रहे हैं। लेकिन दोस्तों बड़ी कंपनियां जहां टेक्नोलॉजी पर फोकस करती हैं, वहीं आपका सबसे बड़ा एडवांटेज होगा पर्सनल ट्रस्ट। क्योंकि लोकल लेवल पर लोग उसी इंसान को प्रेफर करते हैं जिसे वह जानते हो जिससे सीधे बात कर सकें और जो जरूरत के समय तुरंत मदद कर सके। यही आपकी ताकत बन सकती है। अब एक और बहुत जरूरी बात समझिए। इस बिजनेस में शुरुआत छोटी हो सकती है लेकिन ग्रोथ बहुत बड़ी हो
सकती है। आज आप सिर्फ प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल सर्विज से शुरू कर सकते हैं। कल होम क्लीनिंग जोड़ सकते हैं। फिर ऐसी रिपेयर फिर पेंटिंग, फिर फुल होम मेंटेनेंस सर्विज। धीरे-धीरे आपकी एजेंसी एक कंप्लीट लोकल ब्रांड बन सकती है। [संगीत] और दोस्तों, आज ब्रांड सिर्फ बड़े बिजनेस नहीं बनाते। जो इंसान लोगों की प्रॉब्लम सॉल्व करता है वही [संगीत] ब्रांड बन जाता है। अब यहां एक माइंडसेट समझना बहुत जरूरी है। ज्यादातर लोग सिर्फ नौकरी ढूंढते रहते हैं लेकिन स्मार्ट लोग सिस्टम्स बनाते हैं। नौकरी में आपकी इनकम लिमिटेड होती है। लेकिन सिस्टम में आपकी ग्रोथ की लिमिट नहीं
होती। दुनिया के सबसे बड़े इन्वेस्टर्स में से एक वारेन बफेट ने कहा था, समवन इज सिंग इन द [संगीत] शेडर्ड टुडे बिकॉज़ समवन प्लांटेड ए ट्री अ लॉन्ग टाइम एगो। यानी आज जो लोग स्टेबल इनकम एंजॉय कर रहे हैं, उन्होंने कभी ना कभी कोई सिस्टम बिल्ड किया था। और लोकल सर्विस एजेंसी भी बिल्कुल ऐसा ही सिस्टम है। शुरुआत में मेहनत लगती है, नेटवर्क बनाना पड़ता है, ट्रस्ट कमाना पड़ता है। लेकिन एक बार लोग आपको पहचानने लगे तो यही बिजनेस धीरे-धीरे अपने आप ग्रो होने लगता है। अब सबसे जरूरी चीज कंसिस्टेंसी। कई लोग शुरुआत तो कर
लेते हैं लेकिन 10 से 15 दिन बाद छोड़ देते हैं। याद रखिए ट्रस्ट रातोंरात नहीं बनता। लोगों को समय लगता है आपकी सर्विस को समझने में। लेकिन अगर आप लगातार अच्छा काम करते रहे तो वही लोग आगे चलकर आपके रेगुलर कस्टमर्स बन जाएंगे। और यही रिपीट कस्टमर्स आपके बिजनेस की असली ताकत बनते हैं। तो अगर आप ऐसा बिजनेस चाहते हैं जिसे कम इन्वेस्टमेंट में शुरू किया जा सके जिसकी डिमांड हमेशा बनी रहे और जिसमें आप बिना खुद मेहनत वाला काम किए भी इनकम बना सकें। तो लोकल सर्विस एजेंसी बिजनेस आपके लिए एक बहुत पावरफुल अपॉर्चुनिटी
हो सकती है। क्योंकि सच यही है जहां लोग सिर्फ प्रॉब्लम्स देखते हैं वहीं स्मार्ट लोग बिजनेस अपॉर्चुनिटीज ढूंढ लेते हैं। पॉइंट सात ठेला मैनेजमेंट बिजनेस। दोस्तों जरा एक सीन अपने दिमाग में इमेजिन कीजिए। शाम का समय है। सड़क किनारे एक पानी पूरी का ठेला लगा हुआ है। लोगों की भीड़ लगी हुई है। कोई गोलगप्पे खा रहा है। कोई चाट, कोई मोमो तो कोई चाय और स्नैक्स। अब ज्यादातर लोग इस सीन को देखकर क्या सोचते हैं? बस एक छोटा सा ठेला है। इसमें क्या रखा है? यह कोई बड़ा काम थोड़ी है, लेकिन दोस्तों, सच्चाई इससे बिल्कुल
अलग है। जिस काम को लोग छोटा समझकर इग्नोर कर देते हैं, वही काम कई लोगों को लाखों की कमाई दे रहा होता है। और यही है ठेला मैनेजमेंट बिजनेस। एक ऐसा बिजनेस जो बाहर से छोटा दिखता जरूर है, लेकिन सही तरीके से किया जाए तो कई नौकरियों से ज्यादा पैसा दे सकता है। अब जरा रियलिटी समझिए। आज भारत में स्ट्रीट फूड इंडस्ट्री [संगीत] बहुत तेजी से बढ़ रही है। लोग बड़े रेस्टोरेंट्स में हमेशा नहीं जाते लेकिन सड़क किनारे मिलने वाला स्वाद वो बार-बार जरूर ढूंढते हैं। पानी पूरी, मोमो, चाट, [संगीत] वड़ा पाव, चाय, रोल्स, सैंडविच
यह सिर्फ खाने की चीजें नहीं है। यह रोज चलने वाला कैश फ्लो है। और सबसे बड़ी बात इनकी डिमांड कभी खत्म नहीं होगी। क्योंकि खाना पीना कभी बंद नहीं होता। अब जरा एक पानी पूरी वाले का सिंपल मैथ समझिए। अगर एक ठेला दिन का सिर्फ ₹4000 से ₹5,000 की सेल करता है तो महीने का टर्नओवर ₹1 लाख से 1.5 लाख तक हो सकता है। अब इसमें रॉ मटेरियल, सैलरी और बाकी खर्च निकालने के बाद भी अच्छा खासा प्रॉफिट बच जाता है। और यही वो चीज है जो ज्यादातर लोग समझ ही नहीं पाते। वे सिर्फ ठेला
देखते हैं लेकिन उसके पीछे चल रहा बिजनेस नहीं देखते। अब यहां सबसे पावरफुल ट्विस्ट आता है। [संगीत] आपको खुद ठेला लगाने की भी जरूरत नहीं। यानी आपको खुद खड़े होकर पानी पूरी बेचने की जरूरत नहीं है। आप सिर्फ मैनेजमेंट कर सकते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] यही इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। आप ओनर बन सकते हैं। आपका काम होगा सही लोकेशन ढूंढना, सही वर्कर रखना, क्वालिटी मेंटेन करना और पूरे सिस्टम को मैनेज करना। बस [संगीत] बाकी काम आपका स्टाफ करेगा। अब सोचिए अगर एक ठेला प्रॉफिट दे सकता है तो चार से पांच
ठेले कितना पैसा बना सकते हैं? यही सोच स्मॉल बिजनेस को बिग सिस्टम में [संगीत] बदलती है। अब सवाल आता है शुरुआत कैसे करें? दोस्तों शुरुआत बहुत सिंपल हो सकती है। आप एक छोटा फूड गार्ड तैयार कर सकते हैं। जैसे पानी पूरी, मोमो, चाट, टी स्टॉल या फास्ट फूड गार्ड। शुरुआत में बहुत बड़ा इन्वेस्टमेंट जरूरी नहीं होता। एक बेसिक सेटअप, कुछ रॉ मटेरियल और एक मेहनती वर्कर। बस इतनी चीजों से शुरुआत हो सकती है। अब यहां सबसे जरूरी चीज है [संगीत] लोकेशन। क्योंकि इस बिजनेस में लोकेशन ही आपकी असली मार्केटिंग होती है। अगर आपका ठेला ऐसी
जगह लगा है जहां लोगों की भीड़ रहती है जैसे स्कूल के पास, कॉलेज एरिया, मार्केट, [संगीत] बस स्टैंड, ऑफिस एरिया या रेजिडेंशियल सोसाइटी के आसपास तो आपका बिजनेस तेजी से ग्रो कर सकता है। अब दूसरी सबसे जरूरी चीज टेस्ट और क्वालिटी। अगर आपका खाना स्वादिष्ट है, साफ सफाई अच्छी है और लोग अच्छा एक्सपीरियंस महसूस करते हैं, तो कस्टमर खुद वापस आएगा और यही रिपीट कस्टमर्स आपके बिजनेस की असली ताकत बनते हैं। अब तीसरी चीज [संगीत] वर्कर मैनेजमेंट। क्योंकि आपका वर्कर ही आपके बिजनेस का चेहरा होता है। अगर उसका व्यवहार अच्छा है, काम साफ सुथरा है
और कस्टमर से सही तरीके से बात करता है, तो लोग ज्यादा ट्रस्ट करते हैं। धीरे-धीरे आपका एक रेगुलर कस्टमर बेस बनना शुरू हो जाता है। अब जरा इसका सबसे पावरफुल हिस्सा समझिए। यह बिजनेस बहुत आसानी से स्केल किया जा सकता है। मान लीजिए आपका पहला ठेला अच्छा चलने लगा। अब आप वही मॉडल दूसरे लोकेशन पर कॉपी कर सकते हैं। फिर तीसरा, फिर चौथा और धीरे-धीरे आपका एक छोटा स्ट्रीट फूड नेटवर्क बन सकता है। यही असली बिजनेस माइंडसेट होता है। एक सिस्टम बनाओ फिर उसे बार-बार रिपीट करो। अब यहां एक चीज बहुत जरूरी है ईगो छोड़ना।
[संगीत] क्योंकि भारत में बहुत से लोग छोटे बिजनेस को छोटा समझते हैं। उन्हें लगता है कि ठेले का काम इज्जत वाला नहीं है। लेकिन वही लोग सालों तक ₹1,000 से ₹00 की नौकरी के लिए संघर्ष करते रहते हैं। जबकि दूसरी तरफ कई स्ट्रीट फूड ओनर्स [संगीत] हर महीने उनसे ज्यादा कमा रहे होते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] सच्चाई यह है कि बिजनेस में काम छोटा या बड़ा नहीं होता। कमाई और ग्रोथ मायने रखती है। दुनिया के सबसे बड़े इन्वेस्टर्स में से एक वारेन बफेट ने कहा था डू नॉट सेव वहाड इज लेफ्ट आफ्टर स्पेंडिंग
बट स्पेंड वहाड इज लेफ्ट आफ्टर सेविंग। इसका मतलब सिर्फ पैसे बचाना नहीं बल्कि स्मार्ट तरीके से पैसा लगाना भी है। और ठेला मैनेजमेंट बिजनेस एक ऐसा मॉडल है जहां कम इन्वेस्टमेंट में कैश फ्लो शुरू हो सकता है। अब जरा फ्यूचर के बारे में सोचिए। आज लोग सिर्फ खाने के लिए नहीं एक्सपीरियंस के लिए भी बाहर जाते हैं। अगर आपका सेटअप थोड़ा यूनिक हो, प्रेजेंटेशन अच्छी हो और हाइजीन मेंटेन हो, तो छोटा सा ठेला भी ब्रांड बन सकता है। आज कई बड़े फूड ब्रांड्स कभी छोटे स्ट्रीट स्टॉल्स से ही शुरू हुए थे। फर्क सिर्फ इतना था
कि उन्होंने अपने काम को छोटा नहीं समझा। उन्होंने उसे बिजनेस की तरह ट्रीट किया। अब सबसे जरूरी चीज कंसिस्टेंसी क्योंकि शुरुआत में हर दिन प्रॉफिट नहीं होगा। कभी सेल कम होगी, कभी बारिश की वजह से प्रॉब्लम होगी, कभी वर्कर छोड़कर चला जाएगा। लेकिन यही वह समय होता है जहां असली एंटरप्रेन्योर और हार मानने वाले लोगों के बीच फर्क बनता [संगीत] है। अगर आप लगातार सीखते रहे, सिस्टम इंप्रूव करते रहे और क्वालिटी मेंटेन करते रहे तो धीरे-धीरे यही छोटा सेटअप एक स्ट्रांग इनकम सोर्स बन सकता है। तो अगर आप ऐसा बिजनेस चाहते हैं [संगीत] जिसमें कम
इन्वेस्टमेंट हो, डिमांड हमेशा बनी रहे और जिसे धीरे-धीरे बड़ा किया जा सके। तो ठेला मैनेजमेंट बिजनेस आपके लिए एक बहुत पावरफुल अपॉर्चुनिटी हो सकता है। क्योंकि सच यही है जहां लोग सिर्फ एक ठेला देखते हैं वहीं स्मार्ट लोग एक पूरा बिजनेस सिस्टम देख लेते हैं। पॉइंट आठ पैकेजिंग बिजनेस। दोस्तों, आज के समय में मार्केट में प्रोडक्ट्स की कमी नहीं है। हर दिन हजारों नए प्रोडक्ट्स ल्च हो रहे हैं। हर गली में कोई ना कोई बिजनेस चल रहा है। कोई मिठाई बेच रहा है। कोई कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स, कोई क्लोथ्स, कोई हैंडमेड गिफ्ट्स, तो कोई Instagram पर अपना
छोटा ब्रांड चला रहा है। [संगीत] लेकिन जरा एक चीज नोटिस कीजिए। कई बार दो प्रोडक्ट्स की क्वालिटी लगभग एक जैसी होती है। फिर भी लोग एक प्रोडक्ट को ज्यादा पसंद करते हैं। क्यों? क्योंकि असली फर्क सिर्फ प्रोडक्ट में नहीं पैकेजिंग में होता है। आज के टाइम में लोग सिर्फ सामान नहीं खरीदते [संगीत] एक्सपीरियंस खरीदते हैं। अगर कोई प्रोडक्ट शानदार पैकेजिंग में आता है तो उसकी वैल्यू अपने आप बढ़ जाती है। एक सिंपल प्रोडक्ट भी प्रीमियम लगने लगता है। यही वजह है कि आज पैकेजिंग सिर्फ कवर नहीं रही बल्कि पूरा मार्केटिंग टूल बन [संगीत] चुकी है
और यही चीज पैकेजिंग बिजनेस को एक बहुत बड़ा अपॉर्चुनिटी बनाती है। अब जरा रियलिटी समझिए। आज हर छोटा बड़ा बिजनेस पैकेजिंग पर डिपेंड है। स्वीट शॉप्स को बॉक्सेस चाहिए। क्लोथिंग ब्रांड्स को कैरी बैग्स चाहिए। कॉस्मेटिक सेलर्स को लेबल्स चाहिए। गिफ्ट स्टोर्स को अट्रैक्टिव रैपिंग चाहिए। Instagram बिजनेस को प्रीमियम पैकेजिंग चाहिए। यानी प्रोडक्ट चाहे कोई भी हो पैकेजिंग हर किसी को चाहिए। और सबसे खास बात जैसे-जैसे ऑनलाइन बिजनेस बढ़ेंगे, वैसे-वैसे पैकेजिंग की डिमांड भी बढ़ती जाएगी। अब जरा एक सिंपल एग्जांपल सोचिए। अगर कोई इंसान Instagram से कोई प्रोडक्ट ऑर्डर करता है और प्रोडक्ट एक साधारण पॉलिथीन
में पहुंचता है तो उसका एक्सपीरियंस कैसा होगा? एवरेज। लेकिन अगर वही प्रोडक्ट एक सुंदर बॉक्स, कस्टम स्टिककर, थैंक यू कार्ड और अच्छी रैपिंग के साथ पहुंचे तो कस्टमर को लगेगा कि उसने कुछ स्पेशल खरीदा है। यही साइकोलॉजी ब्रांडिंग बनाती है और बिजनेस इस साइकोलॉजी को समझते हैं। इसलिए आज छोटे ब्रांड्स भी पैकेजिंग पर पैसा खर्च कर रहे हैं। क्योंकि उन्हें पता है पहला इंप्रेशन बहुत मायने रखता है। अब सवाल आता है इस बिजनेस को शुरू कैसे करें? दोस्तों, सबसे अच्छी बात यह है कि पैकेजिंग बिजनेस को छोटे लेवल से भी शुरू किया जा सकता है।
जरूरी नहीं कि शुरुआत में बड़ी फैक्ट्री लगाई जाए। [संगीत] आप शुरुआत कर सकते हैं कस्टम बॉक्सेस, पेपर बैग्स, स्टीकर लेबल्स, गिफ्ट रैपिंग, थैंक यू कार्ड्स, प्रोडक्ट टैग्स, पैकेजिंग टेप [संगीत] प्रिंटिंग या स्मॉल ब्रांडिंग मटेरियल्स से। शुरुआत में आप लोकल बिजनेस से कांटेक्ट कर सकते हैं। अपने आसपास की स्वीट शॉप्स, बुटीक, गिफ्ट स्टोर्स, कॉस्मेटिक सेलर्स और Instagram बिजनेस से बात कीजिए। उनसे पूछिए कि उन्हें किस तरह की पैकेजिंग चाहिए। धीरे-धीरे आपको मार्केट की समझ आने लगेगी। किस डिजाइन की ज्यादा डिमांड है, किस मटेरियल में ज्यादा प्रॉफिट है और कौन से बिजनेस रेगुलर ऑर्डर्स देते हैं। यही
एक्सपीरियंस धीरे-धीरे आपके बिजनेस को ग्रो करेगा। अब जरा इसकी सबसे बड़ी ताकत समझिए। पैकेजिंग बिजनेस रिपीट ऑर्डर्स पर चलता है। अगर किसी बिजनेस को आपकी पैकेजिंग पसंद आ गई तो वह बार-बार आपसे ही ऑर्डर करेगा क्योंकि हर प्रोडक्ट के साथ उसे पैकेजिंग भी चाहिए। [संगीत] यानी एक बार कस्टमर मिला तो वह लॉन्ग टर्म इनकम सोर्स बन सकता है और यही स्मार्ट बिजनेस की पहचान होती है। अब जरा Instagram बिजनेस की ग्रोथ को समझिए। आज हजारों लोग घर बैठे छोटे ब्रांड्स चला रहे हैं। [संगीत] कोई हैंडमेड कैंडल्स बेच रहा है, कोई ज्वेलरी, कोई स्किन केयर प्रोडक्ट्स,
कोई चॉकलेट्स, तो कोई क्लोथ्स। लेकिन एक चीज सभी को कॉमन चाहिए पैकेजिंग। [संगीत] क्योंकि आज सोशल मीडिया के दौर में लोग प्रोडक्ट से पहले उसकी प्रेजेंटेशन देखते हैं। अगर पैकेजिंग अट्रैक्टिव है, तो लोग उसे ज्यादा प्रोफेशनल मानते हैं। और यही वजह है कि पैकेजिंग इंडस्ट्री आने वाले समय में और तेजी से ग्रो करने वाली है। अब एक और पावरफुल चीज समझिए। इस बिजनेस में क्रिएटिविटी बहुत बड़ा एडवांटेज बन सकती है। अगर आपके डिजाइन अलग हैं, पैकेजिंग यूनिक है और आपकी प्रेजेंटेशन अच्छी है तो लोग ज्यादा पे करने के लिए भी तैयार रहते हैं। [संगीत] यानी
यहां सिर्फ प्रोडक्ट नहीं बिकता, क्रिएटिविटी भी बिकती है। अब जरा प्रॉफिट की बात करें। पैकेजिंग मटेरियल्स का कॉस्ट अक्सर कम होता है। लेकिन ब्रांडिंग और डिजाइन की वजह से उनकी सेलिंग प्राइस बढ़ जाती है। [संगीत] यानी सही तरीके से काम किया जाए तो इसमें अच्छा मार्जिन बन सकता है। और जैसे-जैसे ऑर्डर्स बढ़ेंगे आप बल्क प्रोडक्शन शुरू कर सकते हैं। प्रिंटिंग मशीनंस जोड़ सकते हैं और धीरे-धीरे अपना खुद का पैकेजिंग ब्रांड बना सकते हैं। लेकिन दोस्तों, यहां एक चीज बहुत जरूरी है क्वालिटी और कंसिस्टेंसी। अगर आपकी पैकेजिंग कमजोर है, प्रिंट खराब है या डिलीवरी लेट होती
है तो कस्टमर जल्दी स्विच कर सकता है। लेकिन अगर आपका काम प्रोफेशनल है तो लोग लॉन्ग टर्म तक आपके साथ काम करेंगे। याद रखिए बिजनेस सिर्फ प्रोडक्ट से नहीं चलता ट्रस्ट से चलता है। दुनिया के सबसे बड़े इन्वेस्टर्स में से एक वारेन बफेट ने कहा था, इट टेक्स 20 इयर्स टू बिल्ड अ रेपुटेशन एंड 5 मिनट्स टू रन इट। यानी रेपुटेशन बनाने में सालों लगते हैं। लेकिन खराब करने में कुछ मिनट और [संगीत] पैकेजिंग बिजनेस में रेपुटेशन ही सबसे बड़ी ताकत होती है। अगर लोग आपको रिलायबल मानते हैं तो ऑर्डर्स अपने आप आने लगते हैं।
अब जरा फ्यूचर के बारे में सोचिए। ई-कॉमर्स लगातार बढ़ रहा है। [संगीत] Instagram स्टोर्स बढ़ रहे हैं। स्मॉल ब्रांड्स तेजी से मार्केट में आ रहे हैं और हर ब्रांड चाहता है कि उसका [संगीत] प्रोडक्ट अलग दिखे। यानी आने वाले समय में पैकेजिंग सिर्फ जरूरत नहीं। कंपटीशन का हिस्सा बन जाएगी [संगीत] और जो लोग आज से इस इंडस्ट्री को समझना शुरू करेंगे वही आगे चलकर बड़ा फायदा उठा पाएंगे। अब सबसे जरूरी चीज शुरुआत। कई लोग सिर्फ इसलिए कुछ नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें लगता है कि मेरे पास बड़ा सेटअप नहीं है। लेकिन हर बड़ा बिजनेस कभी
छोटे लेवल से ही शुरू हुआ था। शुरुआत में आप सिर्फ स्टिकर्स बना सकते हैं। फिर बॉक्सेस जोड़ सकते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] फिर कस्टम पैकेजिंग, फिर कंप्लीट ब्रांडिंग सॉलशंस। धीरे-धीरे यही छोटा काम एक बड़ा बिजनेस बन सकता है। तो अगर आप ऐसा बिजनेस चाहते हैं जिसकी डिमांड लगातार बढ़ती रहे जो कम इन्वेस्टमेंट में शुरू हो सके और जिसे क्रिएटिविटी और स्मार्टनेस से बड़ा बनाया जा सके तो पैकेजिंग बिजनेस आपके लिए एक बहुत पावरफुल अपॉर्चुनिटी हो सकता है। क्योंकि सच यही है आज के समय में सिर्फ प्रोडक्ट नहीं बिकता उसकी प्रेजेंटेशन भी बिकती है।
पॉइंट नौ टी एंड फास्ट फूड मिनी कैफे बिजनेस। दोस्तों अगर दुनिया में कोई ऐसी चीज है जिसकी डिमांड कभी खत्म नहीं होने वाली तो वो है खाना और चाय। समय बदल सकता है, टेक्नोलॉजी बदल सकती है। लोगों की लाइफस्टाइल बदल सकती है। लेकिन एक चीज हमेशा रहेगी [संगीत] लोगों की खाने और चाय की आदत। सुबह की शुरुआत चाय से दोस्तों के साथ टी ब्रेक, शाम की स्नैक्स क्रेविंग या रात में फास्ट फूड खाने का मूड। यही छोटी-छोटी चीजें आज एक बहुत बड़े बिजनेस अपॉर्चुनिटी में बदल चुकी हैं। और यही वजह है कि आज छोटे-छोटे टी
कैफे और फास्ट फूड कॉर्नर्स बहुत तेजी से ग्रो कर रहे हैं। अब जरा एक चीज नोटिस कीजिए। कुछ साल पहले तक लोग सिर्फ बड़े रेस्टोरेंट्स को ही बिजनेस मानते थे। लेकिन आज छोटे कैफे, [संगीत] टी स्टॉल्स और फास्ट फूड आउटलेट्स भी लाखों की कमाई कर रहे हैं। क्यों? क्योंकि आज लोग सिर्फ खाना खाने नहीं जाते। वो [संगीत] एक्सपीरियंस लेने जाते हैं। लोग ऐसी जगह पसंद करते हैं जहां बैठकर अच्छा महसूस हो, [संगीत] जहां टेस्ट अच्छा हो, जहां माहौल अलग लगे और जहां वो अपने दोस्तों के साथ समय बिता सकें। यानी आज सिर्फ प्रोडक्ट नहीं बिकता,
पूरा एक्सपीरियंस बिकता है। और यही चीज [संगीत] टी एंड फास्ट फूड मिनी कैफे बिजनेस को इतना पावरफुल बनाती है। अब जरा रियलिटी समझिए। भारत में टी कल्चर बहुत बड़ा है। हर गली, हर शहर, हर ऑफिस एरिया, हर कॉलेज के आसपास आपको चाय पीने वाले लोग मिल जाएंगे। क्योंकि चाय सिर्फ ड्रिंक नहीं है, एक हैबिट है, एक इमोशन है। और जब इस हैबिट को थोड़ा मॉडर्न टच मिल जाता है, तो वही साधारण टी स्टॉल, एक ट्रेंडिंग कैफे बन सकता है। अब सवाल आता है, शुरुआत कैसे करें? दोस्तों, इस बिजनेस की सबसे अच्छी बात यह है कि
इसे बहुत कम इन्वेस्टमेंट में शुरू किया जा सकता है। जरूरी नहीं कि शुरुआत में बड़ा रेस्टोरेंट खोला जाए। आप एक छोटे टी स्टॉल या मिनी कैफे से भी शुरुआत कर सकते हैं। बस कुछ चीजें सही होनी चाहिए। अच्छी लोकेशन, टेस्ट, क्लीनलीनेस [संगीत] और स्मार्ट मार्केटिंग। यही चार चीजें इस बिजनेस की असली ताकत होती हैं। अब सबसे पहले बात करते हैं लोकेशन की। क्योंकि इस बिजनेस में लोकेशन बहुत बड़ा रोल निभाती है। अगर आपका कैफे ऐसी जगह पर है जहां लोगों की भीड़ रहती है जैसे [संगीत] कॉलेज एरिया, ऑफिस ज़ोन, मार्केट, बस स्टैंड, रेजिडेंशियल एरिया या
कोचिंग सेंटर्स के आसपास तो कस्टमर्स मिलने के चांसेस [संगीत] बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं। अब दूसरी सबसे जरूरी चीज टेस्ट। लोग एक बार क्यूरियोसिटी में आ सकते हैं। लेकिन बार-बार वही कस्टमर वापस तभी आएगा जब टेस्ट अच्छा होगा। [संगीत] याद रखिए फूड बिजनेस में असली मार्केटिंग कस्टमर की सेटिस्फेक्शन होती है। [संगीत] अगर टेस्ट अच्छा है तो लोग खुद आपके बारे में दूसरों को बताएंगे और यही वर्ड ऑफ माउथ आपके बिजनेस को तेजी से ग्रो कर सकता है। अब तीसरी चीज क्लीनलीनेस। आज लोग हाइजीन को पहले से ज्यादाेंस देते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] अगर
आपकी जगह साफ सुथरी है, सर्विंग अच्छी है और आपका काम प्रोफेशनल लगता है तो लोग ज्यादा ट्रस्ट करते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] कई बार एवरेज टेस्ट वाला कैफे भी सिर्फ क्लीन एनवायरमेंट की वजह से चल जाता है। अब सबसे पावरफुल चीज थीम और एक्सपीरियंस। आज लोग सिर्फ चाय पीने नहीं जाते। वो फोटोस क्लिक करना चाहते हैं। रील्स बनाना चाहते हैं और ऐसी जगह ढूंढते हैं जो यूनिक लगे। अगर आपका मिनी कैफे थोड़ा अलग दिखता है, थोड़ी क्रिएटिव डेकोरेशन है, इंटरेस्टिंग मेन्यू नेम्स हैं या कोई यूनिक थीम है, तो लोग उसे जल्दी नोटिस करते
हैं। [संगीत] यही चीज छोटे कैफे को ब्रांड में बदल सकती है। अब जरा कमाई का सिंपल मैथ समझिए। एक कप टी की कॉस्ट अक्सर बहुत कम होती है। लेकिन सेलिंग प्राइस उससे कई गुना ज्यादा हो सकती है। इसी तरह फास्ट फूड आइटम्स जैसे मोमोज, सैंडविच, मैगी, बर्गर, रोल्स, पास्ता, कोल्ड कॉफी, फ्र्राइ इन सब में भी अच्छा मार्जिन होता है। अब सोचिए अगर दिन भर में आपके कैफे पर 100 से 150 कस्टमर्स भी आते हैं, तो धीरे-धीरे अच्छी इनकम बन सकती है। और जैसे-जैसे आपका ब्रांड ग्रो करेगा, वैसे-वैसे आपकी सेल्स भी बढ़ती जाएंगी। अब एक और
बहुत जरूरी चीज समझिए। आज सोशल मीडिया ने फूड बिजनेस को बहुत पावरफुल बना दिया है। अगर आपका फूड अच्छा दिखता है, कैफे का लुक आकर्षक है और आप Instagram रील्स डालते हैं, तो लोग जल्दी आकर्षित होते हैं। कई छोटे कैफे सिर्फ सोशल मीडिया की वजह से वायरल हुए हैं। क्योंकि आज लोग खाने से पहले उसकी फोटो देखते हैं। [संगीत] यानी स्मार्ट मार्केटिंग इस बिजनेस को और तेजी से ग्रो कर सकती है। अब दोस्तों, यहां एक माइंडसेट समझना बहुत जरूरी है। बहुत से लोग छोटे कैफे या टी स्टॉल को छोटा काम समझते हैं। लेकिन सच्चाई यह
है कि कई छोटे फूड बिजनेस कई बड़ी नौकरियों से ज्यादा कमाई कर रहे होते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ लोग सिर्फ जॉब सिक्योरिटी ढूंढते रहते हैं और कुछ लोग कस्टमर डिमांड समझकर बिजनेस बना लेते हैं। दुनिया के सबसे बड़े इन्वेस्टर्स में से एक वारेन बफेट ने कहा था रिस्क कम्स फ्रॉम नॉट नोइंग व्हाट यू आर डूइंग। यानी असली रिस्क बिजनेस में नहीं [संगीत] नॉलेज की कमी में होता है। अगर आप मार्केट समझते हैं, कस्टमर्स की जरूरत समझते हैं और कंसिस्टेंसी रखते हैं, तो छोटा बिजनेस भी बहुत बड़ा बन सकता है। अब जरा फ्यूचर
के बारे में सोचिए। आज कैफे कल्चर लगातार बढ़ रहा है। लोग बाहर बैठकर समय बिताना पसंद करते हैं। फास्ट फूड की डिमांड बढ़ रही है और छोटे यूनिक कैफे तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं। यानी आने वाले समय में यह इंडस्ट्री और तेजी से ग्रो करने वाली है। लेकिन दोस्तों, यहां एक चीज हमेशा याद रखना। फूड बिजनेस सिर्फ खाना बेचने का काम नहीं है। यह लोगों को अच्छा महसूस कराने का बिजनेस है। अगर कस्टमर आपके कैफे से खुश होकर जाता है, तो वही कस्टमर आपके लिए सबसे बड़ी मार्केटिंग बन जाता है और यही चीज धीरे-धीरे
ब्रांड बनाती है। आज कई बड़े कैफे ब्रांड्स कभी छोटे टी स्टॉल्स से ही शुरू हुए थे। फर्क सिर्फ इतना था कि उन्होंने अपने छोटे सेटअप को सीरियस लिया और धीरे-धीरे उसे बड़ा बनाया। तो अगर आप ऐसा बिजनेस चाहते हैं जिसकी डिमांड कभी खत्म ना हो जो कम इन्वेस्टमेंट में शुरू हो सके और जिसे [संगीत] टेस्ट, क्रिएटिविटी और स्मार्टनेस से बड़ा बनाया जा सके। तो टी एंड फास्ट फूड मिनी कैफे बिजनेस आपके लिए एक बहुत पावरफुल अपॉर्चुनिटी हो सकता है। क्योंकि सच यही है। लोग सिर्फ चाय और खाना नहीं खरीदते। वो एक्सपीरियंस खरीदते हैं। तो दोस्तों,
अब फैसला आपके हाथ में है। पूरी जिंदगी सिर्फ नौकरी के भरोसे रहना है या फिर अपने लिए एक दूसरा इनकम सोर्स बनाना है। [संगीत] याद रखिए स्मॉल बिगिनिंग्स क्रिएट बिग सक्सेस। शुरुआत छोटी हो सकती है। लेकिन अगर आपका माइंडसेट बड़ा है तो यही छोटे बिजनेस कल आपकी फाइनेंशियल फ्रीडम बन सकते हैं। अगर वीडियो पसंद आया हो तो वीडियो को लाइक जरूर करें और कमेंट करके बताइए इन नौ में से कौन सा बिजनेस आईडिया आपको सबसे ज्यादा पसंद आया और ऐसे ही पावरफुल बिजनेस और मनी माइंडसेट वीडियोस के लिए चैनल लीजेंड ऑफ finance को सब्सक्राइब जरूर
कर लीजिए [संगीत] क्योंकि यहां हम सिर्फ मोटिवेशन नहीं रियल अपॉर्चुनिटीज की बात करते हैं। मिलते हैं अगले वीडियो में [संगीत] धन्यवाद।