हेलो गाइ वेलकम बैक टू अवर को हम एक-एक करके कवर करने वाले हैं वन शॉट रिवीजन वीडियोस के अंदर पांच वीडियोस आएंगी पांच वीडियोस के अंदर आपकी पांचों यूनिट्स कवर हो जाएंगी तो बिना देर की है शुरू करेंगे हम अपनी आज की वीडियो और देखना स्टार्ट करेंगे आज की रिवीजन को लेकिन उससे पहले अगर आपने अभी तक चैनल को सब्सक्राइब ना करा हो तो चैनल को जरूर सब्सक्राइब कर लें वीडियो को लाइक करना ना भूलें शेयर करना ना भूलें अपने सभी दोस्तों के साथ और चैनल को जरूर सब्सक्राइब कर लें इस टाइप के और कंटेंट
के लिए इनके जो नोट्स हैं वो आपको वाला जो सेक्शन है वहां पर आपको स्टडी है जिसके अंदर हमें क्या मिलता है हमें नॉलेज मिलती है कि एक ऑर्गेनाइजेशन के अंदर लोग काम कैसे करते हैं वह कैसे एक्ट करते हैं तो व चीज कहलाती है आपकी ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर इट इज द स्टडी ऑफ बिहेवियर ऑफ इंडिविजुअल इन आइसोलेशन इन ग्रुप्स एंड एज मेंबर ऑफ एन ऑर्गेनाइजेशन इसके अंदर क्या करा जाता है जो भी लोग ऑर्गेनाइजेशन के अंदर काम करते हैं उनका इंडिविजुअली ग्रुप्स के अंदर और एक एज अ मेंबर ऑफ ऑर्गेनाइजेशन उनके बिहेवियर को एनालाइज करा
जाता है उनके बिहेवियर को समझा जाता है इट इज इलस बाय पर्सनालिटी परसेप्शन लर्निंग एटिट्यूड फैमिली हिस्ट्री एजुकेशन मोटिवेशन जॉब सेटिस्फैक्ट्रिली एंड एथिक्स किसी भी इंडिविजुअल का या ऑर्गेनाइजेशन का बिहेवियर किन-किन चीजों से अफेक्ट होता है उनकी पर्सनैलिटी से परसेप्शन से उनकी लर्निंग्स क्या-क्या है उनका एटीट्यूड कैसा है फैमिली हिस्ट्री कैसी है उन्होंने कैसी एजुकेशन गेन कर रखी है उनका मोटिवेशन का क्या लेवल है जो जॉब सेटिस्फेक्शन का लेवल क्या है परफॉर्मेंस कैसी इवेलुएट हो रही है उनकी लीडरशिप इफेक्टिव कितनी है उनमें उनके नॉर्म्स क्या है उनकी वैल्यू क्या है और उनके एथिक्स क्याक है
इन सारी चीजों की वजह से किसी भी पर्सन या इंडिविजुअल या ऑर्गेनाइजेशन का बिहेवियर इन्फ्लुएंस होता है द एकेडमिक स्टडी ऑफ हाउ इंडिविजुअल इंटरेक्ट इन ग्रुप एंड इट्स गाइडिंग प्रिंसिपल इज कॉल्ड ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर वही सारी ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर की अलग-अलग तरीके से डेफिनेशन बता रखी है कि इससे यह एक स्टडी है जिसके थ्रू हमें क्या पता लगता है कि एक इंडिविजुअल ग्रुप्स में कैसे इंटरेक्ट करता है ओबी इज द स्टडी ऑफ ह्यूमन बिहेवियर इन ऑर्गेनाइजेशनल सेटिंग ऑफ इंटरफेस बिटवीन ह्यूमन बिहेवियर एंड ऑर्गेनाइजेशन एंड द ऑर्गेनाइजेशनल इट सेल्फ वही बोला है कि ह्यूमन बिहेवियर क्या है एक
तरीके की स्टडी है जिसके अंदर हम क्या देखते हैं कि कोई ह्यूमन ऑर्गेनाइजेशन के साथ और एक ऑर्गेनाइजेशन दूसरी ऑर्गेनाइजेशन के साथ कैसे इंटरेक्ट करती है इंटरफेस करती है तो उस चीज को ही ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर कहा जाता है ठीक है अब स्कोप क्याक है ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर का तो नंबर वन है ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर इज स्टडीड बाय कलेक्टिंग डाटा एंड इंटरप्रिटिंग फाइंडिंग टू गाइड बिहेवियर इन डिजायर्ड डायरेक्शन जो ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर है उसका स्टडी कैसे करी जाती है डाटा को कलेक्ट करा जाता है उसको इंटरप्रेट करा जाता है जिससे हमें क्या पता लग सके कि जो हमें किस
डायरेक्शन में वर्क करना है नेक्स्ट है द सक्सेस ऑफ ऑर्गेनाइजेशन इज मेजर्ड बाय हाउ वेल एंप्लॉई परफॉर्मेंस परफॉर्म देयर जॉब एंड आर सेटिस्फाइड विद देयर वर्क किसी भी ऑर्गेनाइजेशन की सक्सेस को कैसे मेजर करा जाता है कि उसके अंदर लोग हैं वह कैसे काम कर रहे हैं और क्या वह अपने काम से सेटिस्फाइड है या नहीं है तो उस चीज में ऑर्गेनाइजेशन बिहेवियर हेल्प करता है नेक्स्ट है फर्म नीड टू फोकस ऑन प्रोडक्टिविटी टू इंश्योर क्वालिटी एंड क्वांटिटी ऑफ गुड गुड्स प्रोड्यूस वाइल मेंटे निंग क्वालिटी विद जीरो एरर नो एब्सेंट जम और टर्नओवर हर फर्म
किस चीज पर फोकस करती है कि उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़े और साथ में क्वालिटी और क्वांटिटी भी सही बनी रहे गुड्स की तो इस जबकि क्वालिटी बनाने के लिए क्या चाहिए होता है जीरो एरर की जरूरत होती है और टर्नओवर नहीं होना चाहिए तो उस चीज में ये ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर हेल्प करता है नेक्स्ट है एंप्लॉयज हु आर कंटेंट इन देयर जॉब आर मोर लाइक टू बी प्रोडक्टिव एंड कंट्रीब्यूट टू डेवलपमेंट ऑफ एन ऑर्गेनाइजेशनल वर्क कल्चर ऐसे एंप्लॉई जो अपनी जॉब को लेकर एक तरीके से डेडिकेटेड होते हैं वो ऑर्गेनाइजेशन के लिए और अच्छे से काम करते
हैं प्रोडक्टिव होते हैं ऑर्गेनाइजेशन के लिए और वो ऑर्गेनाइजेशन के वक के कल्चर को डेवलप करने में भी हेल्प करते हैं नेक्स्ट है इंडिविजुअल कैन कंट्रीब्यूट टू सक्सेस ऑफ ऑर्गेनाइजेशन बाय वर्किंग ऑन देयर न और जॉइनिंग फोर्स टू फॉर्म अ टीम कोई भी इंडिविजुअल है वो ऑर्गेनाइजेशन की सक्सेस में किस तरीके से कंट्रीब्यूट कर सकता है कि अपने आप में से मतलब जो उनका काम है वोह अच्छे से करें या फिर वो एक टीम फॉर्म कर ले और टीम के साथ मिल मिलकर अच्छे से काम करें बट डिपार्टमेंट मस्ट वर्क टुगेदर इन कोऑर्डिनेटेड मैनर टू
अचीव द कॉर्पोरेट गोल इंडिविजुअल अगर कोई पर्सन काम कर रहा है तो उसे इन चीजों का भी ध्यान रखना चाहिए कि जो जिस डिपार्टमेंट में वह काम कर रहा है उसके साथ काम कोऑर्डिनेट होना चाहिए जिससे क्या हो कॉरपोरेट गोल को अचीव किया जा सके नेक्स्ट है मैनेजर मस्ट स्टेबलाइज एन एप्रोप्राइटिंग लीडरशिप जो मैनेजर होते हैं उन्हें क्या करना चाहिए एक एप्रोप्रियेट वर्क प्लेस के अंदर मतलब ऑर्गेनाइजेशन के अंदर जिससे क्या हो कोई भी पर्सन और जो मैनेजर है वो अपनी अथॉरिटी का अच्छे से यूज कर सके अपनी पावर्स को ट्रांसफर कर सके वर्क को
डिवाइड कर सके और एक इफेक्टिव कम्युनिकेशन स्टेबलाइज कर सके ऑर्गेनाइजेशन के अंदर तो ये सारे आपका स्कोप हैगा ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर का इन इन चीजों के लिए ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर की जरूरत पड़ती है अब आता है आपका किसी भी ऑर्गेनाइजेशन में कितने तरीकों का ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर होता है तो नंबर वन आता है इंडिविजुअल लेवल पर तो द मोस्ट इंपोर्टेंट आइडिया इज दैट इंडिविजुअल नोशंस आर यूनिक टू द इंडिविजुअल लेवल विद परसेप्शन पर्सनालिटी लर्निंग मोटिवेशन एंड एटिट्यूड बीइंग द फाउंडेशन ऑफ एन इंडिविजुअल बिलीफ इंडिविजुअल लेवल में क्या होता है कोई भी एक इंडिविजुअल किस तरीके का बिहेव कर
रहा है ऑर्गेनाइजेशन के अंदर उसका परसेप्शन क्या है क्या पर्सनालिटी है क्या उसकी लर्निंग्स है क्या उसका मोटिवेशन है उसका एटीट्यूड क्या है यह सारी चीजें आपकी आती है इंडिविजुअल लेवल के ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर के अंदर नेक्स्ट होता है ग्रुप लेवल का तो ग्रुप लेवल कांसेप्ट एट द ग्रुप लेवल फोकस ऑन हाउ टू क्रिएट इफेक्टिव टीम एंड एनहांस ग्रुप एक्टिविटी ग्रुप लेवल का ऑर्गेनाइजेशन बिहेवियर क्या करता है यह इस चीज पर फोकस करता है कि एक इफेक्टिव टीम कैसे क्रिएट की जा सके जिससे जो ग्रुप की एक्टिविटी हो वो बढ़ जाए और ऑर्गेनाइजेशन का गोल अचीव
किया जा सके एंड मोटिवेट एंप्लॉयज दिस कांसेप्ट इंक्लूड टीम कंफ्लेक्स दिस इंक्लूड टीम कंफ्लेक्स पावर एंड पॉलिटिक्स इसके अंदर क्या-क्या चीज आती है टीम कैसे फॉर्म करी जाए अगर कंफ्लेक्स हो रहे हैं उनको कैसे सॉल्व करा जाए लीडरशिप किस तरीके से की जाए पावर किसको कितनी दी जाए और पॉलिटिक्स इसमें इवॉल्व होती है ठीक है नेक्स्ट होता है आपका ऑर्गेनाइजेशनल लेवल तो एट ऑर्गेनाइजेशनल लेवल चेंजेज मैनेजमेंट एंड ऑर्गेनाइजेशनल कल्चर आर टू इंपोर्टेंट टॉपिक टू डिस्कस जब ऑर्गेनाइजेशनल लेवल की बात होती है तो हम दो चीजें देखते हैं कि मैनेजमेंट में क्या चेंज है और ऑर्गेनाइजेशन
का कल्चर में क्या चेंज है एज दे एक्सप्लोर द कांसेप्ट ऑफ ऑर्गेनाइजेशन इट इफेक्ट्स एंड एग्जीक्यूशन एंड द वर्किंग सरकमस्टेंस एंड स्ट्रेस मैनेजमेंट क्योंकि इन्हीं दो चीजों की वजह से पता लगता है कि ऑर्गेनाइजेशन क्या है उसका क्या इफेक्ट पड़ेगा इन सारी चीजों का चेंज होने पर उसको एग्जीक्यूट कैसे करा जाएगा वर्किंग सरकमस्टेंसस कैसे और स्ट्रेस को कैसे मैनेज करा जाएगा तो यह आपके तीन लेवल बताए गए हैं ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर के नेक्स्ट आता है आपका मॉडल्स ऑफ ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर के कुछ मॉडल्स बताए गए हैं तो पहला आएगा अथ अथॉरिटेरियन जम तो अथॉरिटेरियन इज
बेस्ड ऑन द कांसेप्ट ऑफ पावर एंड मैनेजरियल व्यू ऑफ अथॉरिटी वाइल एंप्लॉई आर फोकस्ड ऑन सबमिशन एंड डिपेंडेंस ऑन सुपरवाइजर रिजल्टिंग इन पुर परफॉर्मेंस अथो अथॉरिटेरियन जम क्या कहता है कि ये एक कांसेप्ट है जिसके अंदर पता लगता है कि किस पर्सन के पास कितनी पावर है उनका मैनेजरियल व्यू क्या है मतलब उनको कितनी पावर डेलीगेट कर सकते हैं वह कितनी पावर को अपने पास रख सकते हैं यह सारी चीजें इससे पता लगती है जबकि एक एंप्लॉई किस चीज पर सिर्फ फोकस करता है कि उसे वो अपने सुपरवाइजर्स के ऊपर डिपेंड है उनको किन-किन को
अपने जो काम है वह सबमिट करना है यह सारी चीजें इसके अंदर पता लगती हैं नेक्स्ट हैगा सुपरवाइजरी मॉडल तो इट इज अ मॉडल दैट फोकस ऑन मैनेजमेंट ऑफ मॉनेटरी रिसोर्सेस प्रायोरिटी इजिंग एंप्लॉई सेफ्टी एंड बेनिफिट यह मॉडल यह किस चीज पर फोकस करता है जितने भी मॉनेटरी रिसोर्सेस होते हैं मतलब पैसों से रिलेटेड जो भी काम होते हैं उनको फोकस करता है एंप्लॉई की सेफ्टी को देखता है और उनको क्या-क्या बेनिफिट देने हैं वो सुपरवाइजरी मॉडल का काम होता है इट इंश्योर दैट स्टाफ मेंबर आर सेटिस्फाइड एंड द परफॉर्मेंस ऑफ ऑर्गेनाइजेशन इज रिवर्ड विद
कोऑपरेटिव पॉजिटिविटी ये क्या चीज ध्यान रखता है कि जो भी स्टाफ के मेंबर है मतलब ऑर्गेनाइजेशन के अंदर जो भी लोग काम कर रहे हैं वो सेटिस्फाइड रहे उनकी परफॉर्मेंस अच्छी रहे जिससे ऑर्गेनाइजेशन का गोल अचीव हो और उनको रिवर्ड ड दिया किया जा सके नेक्स्ट होता है सपोर्टिव मॉडल तो द मोस्ट इंपोर्टेंट डिटेल ऑफ दिस मॉडल ऑफ लीडरशिप आर दैट इट एमफसा इज मैनेजरियल सपोर्ट एंड परफॉर्मेंस एंड दैट एंप्लॉई आर फोकस्ड ऑन देर परफॉर्मेंस एंड पार्टिसिपेशन इन जॉब जो ये वाला मॉडल है यह सबसे एक तरीके से इंपॉर्टेंट मॉडल होता है क्योंकि यह किस
चीज पर ध्यान रखता है कि अगर किसी को किसी भी तरीके की सपोर्ट की जरूरत पड़ रही है अपनी वक परफॉर्म करने के लिए तो उसे वो सपोर्ट प्रोवाइड की जा सके जिससे एंप्लॉई और अच्छे से अपनी परफॉर्मेंस कर सके और जॉब के अंदर अपना पार्टिसिपेशन दिखा दिखा सके दिस लीड टू इंप्रूव परफॉर्मेंस प्रोवाइड एंप्लॉई विद स्टेटस एंड रिकग्निशन वाइल आल्सो रिजल्टिंग इन इंक्रीज ड्राइवर तो यह क्या करता है परफॉर्मेंस को इंक्रीज करता है एंप्लॉई के स्टेटस को रिकॉग्नाइज करता है उनको एक तरीके से रिकॉग्निशन दिलाता है ऑर्गेनाइजेशन के अंदर नेक्स्ट लास्ट मॉडल होता है
आपका कोऑपरेटिव मॉडल तो टीम वर्क इज द की टू अ कोऑपरेटिव मॉडल वेर एंप्लॉयर थॉट टू रिस्प रिस्पांसिबल एंड एक्सरसाइज सेल्फ डिसिप्लिन कोऑपरेटिव मॉडल क्या है तो तो कोऑपरेटिव मॉडल के अंदर टीम वर्क होता है इसको डेवलप करा जाता है एंप्लॉयज के अंदर द सेल्फ एक्चुलाइजेशन ऑफ द वर्कर इज द नीड दैट इट सेटिस्फाई एंड द एंड रिजल्ट शो ओनली अ फ्यू एंथेसिस से जो वर्कर की सेल्फ एक्चुलाइजेशन नीड है उसको सेटिस्फाई करने के लिए वर्क करा जाता है और एंड रिजल्ट से उन्हें सेटिस्फाई करा जाता है तो यह आपके चार मॉडल बताए गए हैं
ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर के नेक्स्ट आता है आपका एलिमेंट्स ऑफ ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर किसी भी ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर के क्या-क्या एलिमेंट्स होते हैं तो नंबर वन एलिमेंट आता है पीपल पीपल आर एसेंशियल फॉर एनी ऑर्गेनाइजेशन इंटरेक्ट एंड बिहेवियरल पैटर्न किसी भी ऑर्गेनाइजेशन में इंटरेक्ट करना है या कोई भी वर्क करना है तो उसके लिए लोगों की जरूरत पड़ती ही पड़ती है एंड देयर रोल एंड बिहेवियर हेल्प आइडेंटिफिकेशन के बिहेवियर को समझा जा सकता है नेक्स्ट एलिमेंट होता है प्रोसेस डिजाइन तो ऑर्गेनाइजेशन आर डिटरमाइंड बाय फॉर्मल रिलेशनशिप बिटवीन मेंबर विद मैनेजरियल एंड ऑर्गेनाइजेशनल लेवल बीइंग डिफर टेड बाय जॉब एंड
रिस्पांसिबिलिटी प्रोसेस डिजाइन क्या होता है इसके अंदर क्या बताया गया है कि जो एक ऑर्गेनाइजेशन होती है वह एक फॉर्मल रिलेशनशिप होती है किन-किन लोगों के बीच में मेंबर्स के बीच में मैनेजरियल पावर है उनके बीच में और ऑर्गेनाइजेशन के जो भी लेवल ंगे उनके बीच में तो इस प्रोसेस डिजाइन में एक प्रोसेस के थ्रू सभी को काम करना होता है नेक्स्ट एलिमेंट है टेक्नोलॉजी तो टेक्नोलॉजी रेफर्स टू द रिसोर्सेस यूज्ड एंड हाउ दे अफेक्ट परफॉर्मेंस विद डायरेक्ट कोलेशन विद डिग्री ऑफ इंप्रूवमेंट टेक्नोलॉजी का मतलब क्या है जो भी रिसोर्सेस ऑर्गेनाइजेशन यूज करती है किस
तरीके से उनकी परफॉर्मेंस अफेक्ट होती है और उनका इंप्रूव उनको किस तरीके से इंप्रूव करना है क्या-क्या चीजें यूज करनी है टेक्नोलॉजी में क्या-क्या चीजें नहीं यूज करनी है वो चीज आती है आपकी इस एलिमेंट के अंदर नेक्स्ट हैगा रिलेशनशिप तो ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर इ शेप्ड बाय इंटरेक्शन बिटवीन इंडिविजुअल एंड ग्रुप फॉर्मल एंड इनफॉर्मल वेज ऑफ रिलेटिंग एंड द आइडेंटिफिकेशन एक्जिस्टेंस एंड इंटरेक्ट रोल ऑफ पीपल इन एनी ऑर्गेनाइजेशन रिलेशनशिप एलिमेंट क्या है कि जो ऑर्गेनाइजेशन बिहेवियर है वो क्या होता है लोगों के बीच में और इंडिविजुअल लोगों के बीच में और ग्रुप्स के बीच में एक
तरीके का रिलेशनशिप होती है इंटरेक्शन होती है तो इसी चीज को ये रिलेशनशिप का एलिमेंट क्रिएट करता है नेक्स्ट है सराउंडिंग तो ऑर्गेनाइजेशन आर वेल अफेक्टेड ऑल अफेक्टेड बाय इंटरनल एंड एक्सटर्नल एनवायरमेंट फैक्टर इंक्लूडिंग स्ट्रक्चरल डिजाइन वर्क परफॉर्मेंस म्यूचुअल रिलेशन एंड बिहेवियरल पैटर्न कोई भी ऑर्गेनाइजेशन होती है उसका ऑर्गेनाइजेशन बिहेवियर उन सभी चीजों से अफेक्ट होता है जिसके अंदर वो ऑपरेट कर रही होती है जिसके अंदर आपके इंटरनल और एक्सटर्नल सारे फैक्टर आ जाते हैं जैसे कि स्ट्रक्चर डिजाइन वर्क परफॉर्मेंस म्यूचुअल रिलेशन एंड बिहेवियरल पैटर्न ठीक है अब नेक्स्ट टॉपिक हैगा आपका कंट्रीब्यूटिंग डिसिप्लिन टू
ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर कौन-कौन सी चीजें हैं जो ऑर्गेनाइजेशन बिहेवियर को इंप्रूव करने में हेल्प करती हैं तो नंबर वन आता है साइकोलॉजी बिकॉज साइकोलॉजी इज अ साइंस ऑफ बिहेवियर इट मे हैड द ग्रेट इन्फ्लुएंस ऑन द फील्ड इन ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर साइकोलॉजी में क्या होता है किसी भी इंडिविजुअल के बिहेवियर को ह्यूमन बिहेवियर को समझा जाता है तो इससे क्या होता है ऑर्गेनाइजेशन बिहेवियर को समझने में भी हेल्प होती है उसे प्रमोशन मिलता है एक तरीके का साइकोलॉजी फोकस ऑन रिसर्चिंग ह्यूमन बिहेवियर विद गोल ऑफ एक्सप्लेनिंग एंड ओकेज अल्टरिंग द बिहेवियर ऑफ पीपल एंड अदर एनिमल साइकोलॉजी
किस चीज पर फोकस करती है यह पहचान समझती है ह्यूमंस के बिहेवियर को और यह एक्सप्लेन करती है कि किन-किन टाइमों पर लोगों का बिहेवियर चेंज होता है जिससे ऑर्गेनाइजेशन बिहेवियर को समझने में और ज्यादा हेल्प मिलती है नेक्स्ट है सोशियोलॉजी तो सोशियोलॉजिस्ट स्पेंड मोस्ट ऑफ देयर टाइम रिसर्चिंग द सोशल स्ट्रक्चर इन व्हिच पीपल फंक्शन सोशियोलॉजिस्ट क्या करते हैं अपना ज्यादा टाइम किस चीज में स्पेंड करते हैं कि उस सोशल स्ट्रक्चर को समझने के लिए जिसके अंदर पीपल लीव करते हैं ग्रुप डायनामिक इज कंसीडर्ड टू बी द मेन फोकस अंडर सोशियोलॉजी सोशियोलॉजी के अंदर ग्रुप
डायनेमिक मतलब ग्रुप्स में क्या चेंजेज हो रहे हैं उन चीजों को समझा जाता है एवरी ऑर्गेनाइजेशन इज अ ग्रुप ऑफ पीपल कमिंग फ्रॉम डिफरेंट सोशल बैकग्राउंड देयर फॉर द डिसिप्लिन इज अट मोस्ट इंपोर्टेंट अंडर ओबी सभी ऑर्गेनाइजेशन में क्या होता है ए एक तरीके के ग्रुप्स होते हैं जिसमें अलग-अलग जगहों से लोग आते हैं और यहां पर इकट्ठा होते हैं तो यह क्या करता है यह सबसे ज्यादा इंपोर्टेंट डिसिप्लिन हो जाता है ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर को समझने के लिए नेक्स्ट है एंथ्रोपोलॉजी तो अंडरस्टैंडिंग द इंटरेक्शन बिटवीन पीपल एंड देयर ए एनवायरमेंट इज एंथ्रोपोलॉजी एंथ्रोपोलॉजी क्या होती
है लोगों के और एनवायरमेंट के बीच का जो इंटरेक्शन होता होता है उसे एंथ्रोपोलॉजी कहा जाता है मेजर गोल एंथ्रोपोलॉजी यूज द वर्ल्ड एज देयर क्लासरूम एंड पीपल नीड टू स्टडीड इन देयर नेचुरल सेटिंग एंथ्रोपोलॉजी क्या करते हैं वर्ल्ड को एज अ पूरे वर्ल्ड को एज अ क्लासरूम समझते हैं और जो पढ़ाया जाता है वह क्या चीज होती है नेचुरल सेटिंग वन कैन एप्रिशिया मेंट यह भी ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर के लिए इंपोर्टेंट है क्योंकि इससे क्या पता लगता है कि समय के साथ-साथ मतलब नेचुरल एनवायरमेंट में चेंज होने के साथ-साथ ह्यूमंस ने अपने आप को किस
तरीके से चेंज कराया है पीपल्स में क्या-क्या चेंजेज आए हैं तो वह चीज आपकी एक तरीके से ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर को और ज्यादा इंप्रूवमेंट करती है नेक्स्ट है पॉलिटिकल साइंस तो पॉलिटिकल साइंस इस्ट रिसर्च हाउ पीपल एंड ग्रुप बिहेव इन पॉलिटिकल एनवायरमेंट पॉलिटिकल साइंस का जो डिसिप्लिन है वो किस चीज में हेल्प करता है कि लोग पॉलिटिकल एनवायरमेंट में कैसा बिहेव करते हैं कैसे इंटरेक्ट करते हैं दे एड इन अंडरस्टैंडिंग पावर डायनेमिक कॉन्फ्लेट स्ट्रक्चर एंड रेजोल्यूशन स्ट्रेटेजी पावर डिस्ट्रीब्यूशन एंड हाउ पीपल यूज पावर फॉर देयर ओन पर्सनल गेन यह किस चीज में हेल्प करता है यह
समझने में हेल्प करता है कि पावर किस तरीके से बटी हुई है क्या कंफ्लेक्स ंगे उनको सॉल्व कैसे करा जाएगा पावर को कैसे डिस्ट्रीब्यूटर रखा है और लोग पावर का यूज अपना फायदा करने के लिए कैसे करते हैं तो इस चीज से ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर को और अच्छे तरीके से समझा जाएगा नेक्स्ट है इकोनॉमी तो व्हेन क्रिएटिंग द ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर इकोनॉमी हैव सिग्निफिकेंट रोल ऑन ऑर्गेनाइजेशन बिहेवियर द ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर इन इफ्लू बाय वेरियस ट्रांजैक्शन मनी कॉस्ट इकोनॉमिक्स कभी भी ऑर्गेनाइजेशन का स्ट्रक्चर डिजाइन करते समय उसकी इकोनॉमी को जरूर देखा जाता है क्योंकि कोई भी ऑर्गेनाइजेशन का
स्ट्रक्चर होता है या बिहेवियर होता है वो इकोनॉमी चीजें मतलब मनी कॉस्ट इन सारी चीजों से बहुत ज्यादा अफेक्ट होती है तो यह आपका पांच डिसिप्लिन हो गए जो कि ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर को प्रमोट करने में एक बहुत अच्छा रोल प्ले करते हैं अब नेक्स्ट हैगा हमारा रिलेशनशिप बिटवीन मैनेजमेंट एंड ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर और मैनेजमेंट के बीच में क्या रिलेशन होती है तो बोथ इन द मैनेजमेंट ऑफ अ कंपनी एंड इन सेटिंग अप ऑफ न्यू बिजनेस ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर प्ले अ क्रुशल रोल चाहे कंपनी को मैनेज करना हो या एक नया बिजनेस सेटअप करना उसमें ऑर्गेनाइजेशनल
बिहेवियर का एक बहुत अच्छा रोल होता है ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर स्टडी हाउ डिफरेंट बिहेवियर इन ऑर्गेनाइजेशन अफेक्ट एंड आर इन्फ्लुएंस बाय ग्रुप इंडिविजुअल एंड ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर क्योंकि ये क्या करता है यह हमें बताता है कि कैसे अलग-अलग तरीके के बिहेवियर से ऑर्गेनाइजेशन अफेक्ट होगी और इससे जो लोग हैं ऑर्गेनाइजेशन के अंदर वो किस तरीके से इन्फ्लुएंस होंगे तो ये एक रिलेशन होती है ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर और मैनेजमेंट के बीच में तो सबसे पहले हमें मैनेजमेंट की जरूरत पड़ती क्यों है तो मैनेजमेंट इज नेसेसरी फॉर बिजनेस एंड अदर टाइप ऑफ ऑर्गेनाइजेशन सिंस इट एंटेल्स टू प्लानिंग ऑर्गेनाइजिंग टेकिंग
इनिशिएटिव एंड सिलेक्टिंग द बेस्ट ऑप्शन मैनेजमेंट की जरूरत पड़ती है क्योंकि कि ये हमें बताता है कि हमें प्लानिंग किस तरीके से करनी है ऑर्गेनाइजिंग किस तरीके से करनी है किस चीज को सिलेक्ट करना है और किस चीज को सिलेक्ट नहीं करना है आल्सो इट इज वाइटल फॉर लीव्स ऑफ ईच वन ऑफ अस इंडिविजुअली और यह हमारी एक इंडिविजुअली लाइव्स के लिए भी बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट हो जाता है मैनेजमेंट इज एसेंशियल फॉर ऑल टाइप ऑफ ऑर्गेनाइजेशन इंक्लूडिंग बिजनेस बिकॉज़ इट इंटल प्लानिंग ऑर्गेनाइजिंग टेकिंग लीडिंग मेकिंग डिसीजन अबाउट व्हाट ऑप्शंस आर बेस्ट मैनेजमेंट हर टाइप की
ऑर्गेनाइजेशन उ के लिए जरूरी होता है चाहे कोई बिजनेस हो चाहे कुछ भी हो क्योंकि इसी से प्लानिंग ऑर्गेनाइजिंग वगैरह सारी चीजें होती हैं इट इज आल्सो नेसेसरी फॉर ईच ऑफ आवर इंडिविजुअल लीव्स टू हैव मल्टीपल लेवल ऑफ मैनेजमेंट स्प्लिट द रिस्पांसिबिलिटी अमंग देम एंड एक्सपेंड द नंबर ऑफ पीपल वर्किंग फॉर अस तो यह हमारे लिए जरूरी हो जाता है कि हम अपनी इंडिविजुअल लाइफ को मल्टीपल लेवल्स पर मैनेज करें और अपनी रिस्पांसिबिलिटीज को एक तरीके से डिवाइड करके रखें इस चीज में भी मैनेजमेंट हेल्प करता है किसी इंडिविजुअल की पर्सनल लाइफ को मैनेज करने
में तो दिस कंट्रीब्यूट टू डेवलपमेंट ऑफ स्ट्रीमलाइन अप्रूवल प्रोसीजर एंड हेल्प टू इंश्योर दैट लेवल ऑफ मैनेजमेंट ू इच अदर वर्क प्रायर टू रिवर्स रिलीज ऑफ अ प्रोडक्ट तो इसी की वजह से क्या होता है यह एक इंटरेक्शन बना के रखा जाता है कि अगर कोई प्रोडक्ट रिलीज करने वाले हैं या क ऑर्गेनाइजेशन कोई एक नई बिजनेस में एंटर होने वाली है तो उससे पहले उसको अच्छे से मैनेज कर लिया जाए उसकी सारी प्लानिंग वगैरह कर ली जाए तो इसलिए हमें मैनेजमेंट की जरूरत पड़ती है ठीक है तो नेक्स्ट टॉपिक जो पढ़ना है वो है
फंक्शंस ऑफ मैनेजमेंट वैसे तो हमने ये फंक्शंस कर रखे हैं पहले लेकिन फिर भी एक बार कर लेते हैं द बेसिक फंक्शन ऑफ मैनेजमेंट गिवन बिलो नंबर वन पर आता है आपका प्लानिंग प्लानिंग इज अ सिस्टेमेटाइज्ड द फ्यूचर ऑफ एन ऑर्गेनाइजेशन कंसीडरिंग एक्सटर्नल एंड इंटरनल फैक्टर एक्सटर्नल और इंटरनल फैक्टर के बारे में को ध्यान में रखकर जो स्टेप्स लिए जाए डिसीजंस लिए जाए जिससे आगे ऑर्गेनाइजेशन के गोल्स को एक तरीके से जाना जाए ऑर्गेनाइजेशन क्या करना चाहती है ये सारी चीजें जब देखी जाती है तो उस चीज को प्लानिंग कहा जाता है नेक्स्ट हैगा ऑर्गेनाइजिंग
तो ऑर्गेनाइजिंग इज अ प्रोसेस ऑफ डिफाइनिंग अरेंजिंग एंड कोऑर्डिनेटिंग वर्क सबडिवीजन टू अचीव कंपनी गोल ऑर्गेनाइजिंग का मतलब होता है जो भी हमारा वर्क है उसे अरेंज करना इस वे में जिससे ऑर्गेनाइजेशन का गोल को अचीव किया जा सके वो कहलाता है ऑर्गेनाइजिंग स्टाफिंग होता है रिक्रूटिंग ट्रेनिंग डेवलपिंग कंपनसेटिंग एंड इवेलुएटिंग एंप्लॉई एसेंशियल फॉर मोटिवेटिवेशनल जो भी एंप्लॉई है उन्हें रिक्रूट करना उनको ट्रेनिंग प्रोवाइड करना उनका डेवलपमेंट करना उन्हें मोटिवेट करके रखना कंपनसेटर उनकी परफॉर्मेंस को इवेलुएट करना यह सारी चीजें होती है आपकी स्टाफिंग के अंदर नेक्स्ट है डायरेक्टिंग द डायरेक्टिंग फंक्शन इज रिस्पांसिबल फॉर
लीडिंग कम्युनिकेशन मोटिवेशन एंड सुपरविजन टू इंश्योर एंप्लॉई परफॉर्मेंस देयर टास्क एफिशिएंटली एंड रिसीव डिजायर्ड गोल डायरेक्टिंग का मतलब क्या होता है जो एंप्लॉयज वर्क कर रहे हैं उन ऑर्गेनाइजेशन के अंदर उनके साथ कम्युनिकेट करना उनको मोटिवेट करके रखना जिससे वह ऑर्गेनाइजेशन के काम को और अच्छे से परफॉर्म करें उन्हें डायरेक्ट करना जिससे ऑर्गेनाइजेशन के गोल को अचीव किया जा सके नेक्स्ट है कंट्रोलिंग तो कंट्रोलिंग का मतलब होता है सेटिंग स्टैंडर्ड मेजरिंग परफॉर्मेंस कंपेयरिंग परफॉर्मेंस आइडेंटिफिकेशन मेंस को कंपेयर करना और अगर उनमें कोई डिफरेंस है तो उसे के लिए करेक्टिव एक्शन लेना यह सारी चीजें आती
है हमारी कंट्रोलिंग के अंदर यह किस लिए की जाती है ऑर्गेनाइजेशन का ऑब्जेक्टिव मीट आउट हो जाए इसलिए यह सारी चीजें करी जाती हैं ठीक है अब नेक्स्ट है वई ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर इज एन इंटीग्रल पार्ट ऑफ मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन का बिहेवियर होता है वो मैनेजमेंट का इंटी इंटी इट इंटरनल पार्ट क्यों होता है तो नंबर वन है अंडरस्टैंडिंग द रिलेशनशिप बिटवीन एन ऑर्गेनाइजेशन एंड इट्स एंप्लॉई तो द स्टडी ऑफ ऑर्गेनाइजेशन बिहेवियर कंट्रीब्यूट टू डीपर कंप्रीहेंशन दिस रिलेशनशिप व्हिच एड इन द डेवलपमेंट ऑफ़ बेटर ह्यूमन रिसोर्स स्ट्रेटेजी फॉर इंप्रूविंग वर्क प्लेस मोराल फोस्टरिंग एंप्लॉई लॉयल्टी रेजिंग द
वैल्यू ऑफ़ ऑर्गेनाइजेशन ह्यूमन कैपिटल ओवरऑल तो ऑर्गेनाइजेशन बिहेवियर किस चीज में हेल्प करता है ऑर्गेनाइजेशन की और उसके एंप्लॉई के बीच में क्या रिलेशनशिप है उस चीज को अच्छे से समझने में हेल्प करता है जिसकी वजह से अच्छी ह्यूमन रिसोर्स स्ट्रेटेजी बनाई जाती हैं मोराल बढ़ता है एंप्लॉयज का एंप्लॉयज की लॉयल्टी बढ़ती है और जो ऑर्गेनाइजेशन की वैल्यू है वो भी इंक्रीज होती है नेक्स्ट है मोटिवेटिवेशनल टैक्टिक्स अकॉर्डिंग टू इंडिविजुअल नीड्स मैनेजर कैन बेटर अंडरस्टैंड देयर स्टाफ मेंबर एंड मोटिवेट देम बाय स्टडिंग ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर और क्या ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर हेल्प करता है तो यह मोटिवेशनल टेक्निक्स
टैक्टिक्स मतलब ऐसे तरीके डेवलप करने में हेल्प करता है जिससे एंप्लॉयज की नीड्स को पूरा किया जा सके और उनको मोटिवेट किया जा सके तो इस तरीके से ये आपकी मैनेजमेंट में ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर एंप्लॉई को मोटिवेट करके हेल्प करता है नेक्स्ट है इंप्रूविंग इंडस्ट्रियल रिलेशन तो इन ऑर्डर टू आइडेंटिफिकेशन एंड मैनेजिंग इट्स इफेक्ट ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर कैन बी यूज्ड टू इंप्रूव इंडस्ट्रियल लेबर रिलेशन और क्या हेल्प करता है ऑर्गेनाइजेशन बिहेवियर ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर किसी प्रॉब्लम का कारण जानने में हेल्प करता है उसके फ्यूचर में कैस किस डायरेक्शन में ऑर्गेनाइजेशन को जाना है इस चीज में हेल्प करता
है और इन चीज को मैनेज करने में भी हेल्प करता है जिससे क्या करा जाता है एक जो लेबर और इंडस्ट्रियल रिलेशन होती है वह इंप्रूव होती है नेक्स्ट है इफेक्टिव यूज ऑफ ह्यूमन रिसोर्स ऑ मैनेजर हु हैव सॉलिड अंडरस्टैंडिंग ऑफ ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर आर बेटर एबल टू इंस्पायर एंड मोटिवेट देयर स्टाफ मेंबर टू वर्क जिन मैनेजर्स के पास एक अच्छी ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर की अंडरस्टैंडिंग होती है वह अपने स्टाफ मेंबर को मोटिवेट करके रख पाते हैं इंस्पायर करके रख पाते हैं जिससे वह और प्रोडक्टिवली वर्क करते हैं ऑर्गेनाइजेशन की ग्रोथ में हेल्प करते हैं नेक्स्ट हैगा
प्रिडिक्टिंग ह्यूमन बिहेवियर तो द मोस्ट एसेंशियल रीजन फॉर रिसर्चिंग ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर इन मैनेजमेंट इज रग्र बली इट्स एबिलिटी टू प्रिडिक्ट ह्यूमन बिहेवियर और क्या हेल्प करता है ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर ह्यूमंस के बिहेवियर को प्रेडिक्शन बिहेवियर फ्रॉम मैनेजमेंट पर्सपेक्टिव इंडिविजुअल हु हैव नॉलेज ऑफ ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर आर बेटर प्रिपेयर टू बिकम मैनेजर हु कैन इंक्रीज प्रोडक्टिविटी एंड प्रॉफिटेबिलिटी विद इन देयर ऑर्गेनाइजेशन और इसकी मदद से क्या क्या होता है प्रॉफिटेबिलिटी और प्रोडक्टिविटी दोनों चीजें इंक्रीज हो जाती है ऑर्गेनाइजेशन की ठीक है नेक्स्ट कंसेप्ट जो इसका इंपॉर्टेंट है वो है हाथन स्टडी तो यह क्या है द हाथन स्टडीज
वाज अ सीरीज ऑफ वर अ सीरीज ऑफ एक्सपेरिमेंट कंडक्टेड एट वेस्टर्न इलेक्ट्रिकल कंपनी यूएसए बिटवीन 1927 एंड 1932 दैट प्रोवाइड न्यू इनसाइट्स टू इंडिविजुअल्स एंड ग्रुप्स बिहेवियर थ्रोन स्टडी एक तरीके की एक्सपेरिमेंट थे जो कहां किए गए थे वेस्टर्न इलेक्ट्रिक कंपनी यूएसए की एक कंपनी में 1927 से 1932 के बीच में किए गए थे जिसका मेन मोटिव क्या था इंडिविजुअल और ग्रुप के बिहेवियर को एक नए तरीके से समझना ये इसका मेन मोटिव था दिस द स्टडीज फोकस ऑन बिहेवियर एट वर्क प्लेस वर्क प्लेस पर लोगों का ह्यूमंस का बिहेवियर किस टाइप का रहना चाहिए
इस चीज पर यह स्टडी फोकस करती है द थन स्टडी वर अमंग द अर्लीस्ट अटम टू यूज साइंटिफिक टेक्निक टू एग्जामिन ह्यूमन बिहेवियर एट वर्क यह एक पुरानी तरीके से बनाई गई अर्लीस्ट टाइप की एक स्टडी थी टेक्नीक थी जिसके अंदर ह्यूमन के बिहेवियर को की काम पर जब कोई इंडिविजुअल वर्क प्लेस पर होता है तो उसका बिहेवियर किस टाइप का होता है इस चीज को समझने के लिए यह टेक्निक्स अपनाई गई थी द थ्रोन एक्सपेरिमेंट मे बी क्लासिफाइड इनटू फोर स्टेजेस को हमने चार स्टेज में डिवाइड कर रखा था इलुमिनाटी रिले असेंबली टेस्ट रूम
एक्सपेरिमेंट मास इंटरव्यूइंग प्रोग्रामिंग बैंक वायरिंग ऑब्जर्वेशन रूम स्टडी इन स्टेजेस में हमने इसे डिवाइड कर रखा था तो अब इन्हीं को पढ़ना समझ रहे एक एक बार नंबर वन स्टेज नंबर वन है लुमिनेशन एक्सपेरिमेंट ये कता है दिस वाज कंडक्टेड टू स्टेबलाइज रिलेशनशिप बिटवीन आउटपुट एंड इलुमिनाटी बलाइज करी गई द आउटपुट टेंडेड टू इंक्रीज एवरी टाइम एज इंटेंसिटी ऑफ लाइट वाज इंप्रूव्ड क्या बोला है जितनी ज्यादा लाइट इंक्रीज करी जाती थी उतना ज्यादा आउटपुट बनता था बट द आउटपुट अगेन शड एन अवर ट्रेंड व्हेन द एलिमिनेशन वाज ब्रोट डाउन ग्रैजुअली फ्रॉम नॉर्मल लेवल और आउटपुट
तब भी बढ़ता था जब जो इलुमिनाटी थी उसे हम नॉर्मल लेवल से बहुत ज्यादा कम कर देते थे तो भी आउटपुट इंक्रीज होता था दस इट वास फाउंड दैट देयर इज नो कंसिस्टेंट रिलेशनशिप बिटवीन आउटपुट ऑफ वर्कर एंड लुमिनेशन इन द फैक्ट्री तो इससे क्या पता लगा कि वर्कर का आउटपुट और जो ऑर्गेनाइजेशन के मतलब फैक्ट्री के अंदर लाइट है उसकी कोई भी एक रिलेशनशिप नहीं है देयर वास सम अदर फैक्टर विच इनफ्लुएंस द प्रोडक्टिविटी ऑफ वर्कर और वर्कर की प्रोडक्टिविटी को जो इन्फ्लुएंस कर रहे हैं फैक्टर वो कोई और चीज है नेक्स्ट स्टेप स्टेज
टू क्या थी रिले असेंबली रूम एक्सपेरिमेंट यह क्या था तो हेयर अ स्मॉल होमोजेनियस ग्रुप वर्क ग्रुप ऑफ गर्ल्स वाज कांस्टिट्यूशन वर इंट्रोड्यूस्ड इन द वर्क एटमॉस्फियर ऑफ दिस ग्रुप क्या करा गया इसके अंदर कुछ ग्रुप्स का गर्ल्स का एक ग्रुप बनाया गया और उन्हें नए-नए एलिमेंट इंट्रोड्यूस कराए गए दज इंक्लूड इसके अंदर क्या-क्या करा गया उनकी जॉब को सिंपलीफाई करा गया वर्क आवर को शॉर्ट करा गया रेस्ट दिए गए फ्रेंडली सुपरविजन रखा गया फिजिकल कंडीशन को इंप्रूव करा गया फ्री सोशल इंटरेक्शन दिया गया एंड चेंज इंसेंटिव पे मतलब उनकी सैलरी में भी चेंज करा
गया यह सारी चीजें चेंज करके इस ग्रुप के लिए एक एक्सपेरिमेंट करा गया द रिसर्चस कंक्लूजन फैक्टर सच एज फीलिंग ऑफ बीइंग इंपोर्टेंट रिकॉग्निशन अटेंशन पार्टिसिपेशन कोज वर्क ग्रुप एंड नॉन डायरेक्टिव सुपरविजन हेड द की ऑफ हायर प्रोडक्टिविटी तो यह कंक्लूजन सोश सोशो साइकोलॉजिकल फैक्टर्स होते हैं जैसे कि फीलिंग ऑफ बीइंग इंपॉर्टेंट रिकग्निशन अटेंशन पार्टिसिपेशन कोस ग्रुप एंड नॉन डायरेक्टिव सुपरविजन यह सारी चीजें हायर प्रोडक्टिविटी में हेल्प करती हैं नेक्स्ट हैगा स्टेज नंबर थ्री मास इंटरव्यू प्रोग्राम यह क्या है तो अनदर सिग्निफिकेंट फेज ऑफ एक्सपेरिमेंट वाज द इंटरव्यू प्रोग्राम एक यह थर्ड तरीके का एक
तरीके का एक्सपेरिमेंट था इन एन अटेंप्ट टू फाइंड आउट मोर अबाउट वर्कर फीलिंग टुवर्ड देयर सुपरवाइजर एंड देयर जनरल कंडीशन ऑफ वर्क अ लार्ज इंटरव्यूइंग प्रोग्राम वाज इंट्रोड्यूस्ड यह जानने के लिए कि वर्कर क्या फील कर रहे हैं अपने सुपरवाइजर के लिए और उनकी जनरल कंडीशन पर कैसी है यह सारी चीजें जानने के लिए यह इंटरव्यू प्रोग्राम लच करा गया यूजिंग दिस अप्रोच द इंटरव्यूअर फाउंड फार अवे अबाउट द वर्कर ट्रू फीलिंग एंड एटीट्यूड इसकी मदद से जो इंटरव्यूअर है वो वर्कर्स की फीलिंग को समझ पाया उनके एटीट्यूड को समझ पाया दे गेन इंफॉर्मेशन अबाउट
जस्ट सुपरविजन एंड वर्किंग कंडीशन बट आल्सो अबाउट कंपनी इट सेल्फ इससे सिर्फ उनके वर्किंग कंडीशन और सुपरविजन के बारे में ही इंफॉर्मेशन नहीं मिली बल्कि कंपनी को अपने बारे में भी कई सारी चीजें जानने को मिली मैनेजमेंट वर्क ग्रुप रिलेशन मैटर आउटसाइड द वर्क सच एज फली व्यूज ऑन सोसाइटी इन जनरल इन सारी चीजों के बारे में भी जानने में मदद मिली द इंटरव्यू प्रोग्राम वास सिग्निफिकेंट इन गिविंग एन इंपोस टू रिप्रेजेंट द ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट एंड द यूज ऑफ काउंसलिंग इंटरव्यू एंड हाईलाइट द नीड फॉर मैनेजमेंट टू लिसन वर्कर फीलिंग एंड प्रॉब्लम और इसी
एक्सपेरिमेंट को ध्यान में रखते हुए आज के टाइम पर जो यह आपको काउंसलिंग वगैरह इंटरव्यू वगैरह दिए जाते हैं वह इसी चीज को ध्यान में रखकर दिए जाते हैं नेक्स्ट था जो स्टेज नंबर फोर थी वो थी बैंक वायरिंग ऑब्जर्वेशन रूम एक्सपेरिमेंट तो दिस एक्सपेरिमेंट वाज कंडक्टेड ऑन अ ग्रुप ऑफ वर्कर एंड द कंडीशन व्हिच वाज क्लोज एज पॉसिबल टू नॉर्मल यह भी एक स्पेसिफिक ग्रुप पर किया गया था एक्सपेरिमेंट दिस ग्रुप कंप्रा 14 वर्कर उस ग्रुप के अंदर 14 वर्कर थे आफ्टर द एक्सपेरिमेंट द प्रोडक्शन रिकॉर्ड ऑफ़ दिस ग्रुप वाज कंपेयर्ड विद अर्लिया प्रोडक्शन
रिकॉर्ड और जब यह एक्सपेरिमेंट खत्म हो गया तो इस ग्रुप का जो प्रोडक्शन रिकॉर्ड था उसको हमने कंपेयर करा पहले के प्रोडक्शन रिकॉर्ड के साथ तो द होथ रन एक्सपेरिमेंट क्लीयरली शड दैट अ मैन एट वर्क इज मोटिवेटेड मोर देन सेटिस्फैक्ट्रिली न का एक्सपेरिमेंट किया गया था इससे क्या सामने आया कि कोई भी इंसान किस चीज से ज्यादा सेटिस्फाई होता है जब उसकी इकोनॉमिक नीड्स को पूरा किया जाता है तो मैनेजमेंट शुड रिकॉग्नाइज दैट देयर आर एसेंशियली सोशली बीइंग एंड नॉट मेयर इकोनॉमिक बीइंग एज अ सोशल बीइंग दे आर मेंबर ऑफ अ ग्रुप एंड द
मैनेजमेंट शुड ट्राई टू अंडरस्टैंड ग्रुप एटीट्यूड एंड ग्रुप साइकोलॉजी क्या जो एंप्लॉई होते हैं वह क्या सोचते हैं सोशल बीइंग के अकॉर्डिंग वो यह सोचते हैं कि हम एक ग्रुप का हिस्सा हैं तो मैनेजमेंट को भी ऐसा ही करना चाहिए उन्हें उनके एटीट्यूड और को ना समझकर एक ग्रुप के बिहेवियर और ग्रुप के एटीट्यूड का एनालिसिस करना चाहिए और उस चीज पर ध्यान देना चाहिए ठीक है तो देखिए दोस्तों यहां पर हमारी यह यूनिट नंबर वन कंप्लीट हो जाती है मे भी आज की यह वीडियो आप लोगों के लिए यूजफुल रही होगी आप लोगों को
पसंद आई होगी वीडियो अच्छी लगी हो तो वीडियो को लाइक करना ना भूले चैनल को जरूर सब्सक्राइब कर ले इस टाइप की और वीडियोस के लिए अब हम मिलते हैं इस वीडियो के पार्ट टू में जिसमें हम करेंगे यूनिट नंबर टू थैंक यू