देखने में तो सिनेमा अच्छा लगता है मजा आता है इन सिनेमा का परिणाम जवानों से पूछो समझदार से व तो यह कहेंगे सीन सीनी सीन और मां जो सत्यानाश करने की जननी हो उसका नाम है सिनेमा सिनेमा से चरित्रहीन होते हैं नेपोलियन बोना पार्ट ने वैद्य की कॉन्फ्रेंस बुलाई और वैद्य से पूछा कि पर स्त्री को देखने से पुरुष को क्या हानि होती है वैद्य ने कहा कि पर स्त्री का चित्र या पर स्त्री देखने से मन में एक प्रकार का आकर्षण उत्पन्न होता है उससे खून में रक्त वाहिनी में गर्मा श आती जो गाढ़ा
धातु है वीर्य व पतला होने लगता है और आदमी का तन से और मन से पतन होने लगता है नेपोलियन ने ऑफिसों में से और बाजार में से स्त्रियों को छुट्टी दिलवाकर घर मेंही रहने की व्यवस्था करा ताकि मेरा आने वाला समाज मजबूत हो और उनके के जो बालक हो तेजस्वी सिनेमा देखने वाले युवान को प्राय खोजो के तो उन विचारों के साथ युवान युवतियों के साथ घोर अन्याय होता है लोग बोलते हैं विकास का युग है लेकिन हम तो यह अनुभव कर रहे हैं कि युवान और युवतियों के साथ घोर अन्याय का युग इस
युग में युवान युवतियों से जो नय होता है ऐसा अन्याय कभी नहीं हुआ वे कितने भी खानदान मां-बाप के हो और स्वयं कितने भी अच्छे चरित्रवान होना चाहते हो फिर भी बाजार में चलचित्र वाले सिनेमा घर में टीवी के द्वारा य सिनेमा जीटीवी आदि के द्वारा या और सिनेमा के द्वारा नट नट हों के नखरे राग रंग अच्छे से अच्छे पवित्र रहना चाहने वाले शरीर का बांधा मजबूत रहे ऐसी इच्छा वाले युवान युति भी अकारण वृद्ध को पा लेते हैं उनकी जीवन शक्ति का बहुत सारा हिस्सा उन हल्के चित्र देखने के कारण मन हल्के विचारों
में गिर पड़ता है उनका तेजस्वी जीवन खिलता हुआ जीवन दिखे उसके पहले ही मुर झान भीतर से शुरू हो जाती और चेहरे पर भी उसके दर्शन हो जाते हैं तो सिनेमा माने व्यसनों को प्रोत्साहन दिया सिनेमा ने विकारों को प्रोत्साहन दिया सिनेमा ने आज के युवान को पड़ोस की बहन को बहन कहने के काबिल नहीं रखा युवान बिचारा भले खानदानी रखे फिर भी चल चित्रों ने हिल चाल ने वातावरण ने युवान के मन को ऐसा दबोच दिया जानामि धर्मम न चमे प्रवृत्ति जानामि अधर्मम न चमे निवृत्ति मैं जानता हूं कि धर्म क्या है ब्रह्मचर्य रखकर
संयम जीवन बनाकर विद्या अध्ययन करना चाहिए तो थोड़ा सा ही पढ़े याद रह जाएगा अगर वीर्य नाश हो रहा है योन की सुरक्षा नहीं है तो बहुत पढ़ो फिर भी याद नहीं रहता राम तीर्थ परीक्षा के दिनों में बच्चों को बुलाते प्रोफेसर थे कह देते कि फलाना फलाना फलाना तुम पास हो जाओगे फलाना फलाना तुम ना पास हो जाओ और जिनके लिए नापास बोलते वो नापास ही होते और जिनके लिए पास बोलते वो पास होते उनका ऐसा गणित था उनके चेहरे देख लेते परीक्षा के दिनों में जिनके चेहरे मुरझाए हुए हैं जिन्होंने चाय कॉफी का
सेवन किया है पिक्चर का सेवन किया है उनका वीर्य धातु ओज क्षीण हो गया तो उनकी स्मृति क्षीण हो गी इसलिए पेपर के समय उतना वो नहीं लिख पाएंगे सही और जिनके चेहरे पर संयम की कुछ रेखाएं दिखती है तो उन विद्यार्थियों को भले अभी कच्चा पाए लेकिन परीक्षा के समय जो पढ़ा है उसकी स्मृति आ जाएगी तो पक्के साबित हो जा जैसे सेलड़ों में रगों में धातु वीर्य अगर धातु नष्ट हो जाता है जो शादी सुधे उनको अनुभव होगा अगर पति पत्नी के सहयोग के रात्रि के बाद दूसरा दिन उनका कैसा जाता है उदास
मरियल जैसा कहीं सूर्यम ऐसा कुछ जाता होगा और जो संयम से जीते हैं अथवा उन दिनों के दो चार पांच दिन के बाद उनमें स्वाभाविक खुशी या विचार यह वो उमंग उत्साह चार वेद का जानकार है लेकिन संयमी नहीं तो उसका उतना आदर नहीं अनपढ़ है और अपने वीर्य की रक्षा करना जानता है तो चार वेद जानने वाले विद्वान से भी ब्रह्मचारी का ज्यादा आदर किया गया वेदों में शास्त्रों में जितना संयम होगा उतना वाणी का प्रभाव होगा जितना संयम होगा उतना स्मृति का प्रभाव होगा प्रभावशाली स्मृति जितना संयम होगा उतना संकल्प बल होगा जितना
संयम होगा उतना बुद्धि बल होगा जितना संयम होगा उतनी प्रसन्नता होगी और जितना संयम होगा उतना साधना जल्दी सफल हो जाएगी संयम से साधना सफल होती है और साधना से संयम में सफलता मिलती जैसे उर्जा प्राणायाम है अथवा हर रोज ध्यान है जप है सात्विक खोराक ये प्रोफेसर जो बता रहे थे मेरा दिल बहुत खुश हुआ मूल पाय की बात है सात्विक खोराक भावनगर स्टेट के सामने सामने पड़ा हुआ भावनगर स्टेट जिससे कांपता है ऐसा जोगीदास लुटेरा जोगीदास बार वट एक रात को अपने कमरे में सोया है चांदनी रात है नींद लगी ना लगी 11
11:30 का समय है कोई व्यक्ति आती देखी तो वह तो डाकू था बारिया उसने अपना हथियार संभाला हथियार संभाला देखा कौन आ रहा है तो कोई दो चार शत्रु नहीं थे एक ही व्यक्ति थी और वह पुरुष नहीं था स्त्री की चाल स्त्री का वेश बार बटिया शांत रहा वो स्त्री कमरे तक पहुंची सावधान हो गया वो स्त्री सुंदरी थी यती थी उसने कहा कि अरे जोगड़ा मेरा दिल चुरा के ले गया भले लोग तुझे खूनखार कहते हैं लेकिन मैं तो तुझे अपना पिया ब बना चुकी अपनी बाहु में मुझे ले ले सदा के लिए
रख तो ठीक है नहीं तो एक दिन के लिए तो मुझे तेरे इस कमरे में रहने दे तेरी स्त्री बना क्या बोलती तू मेरे को लूटने आई अरे मैं तेरे को स्नेह करती स्नेह के बहाने मेरा तो सर्वनाश हो जाएगा मेरी कमर कमजोर हो जाएगी मेरी बुद्धि शक्ति मर जाएगी बाहर का लुटारा उतना नहीं लूटता जितना तू लूट जाएगी और जोगीदास से यह आशा करना आसमान के फूल देखने की इच्छा करना जहां से आई वहीं चले जा जोगीदास अपनी कमर तुड़वा करर क्षणिक हर्ष के लिए अपनी कमर तुड़वा करर अपने को लाचार नहीं बनाएगा और
शत्रुओं के हाथ अपने को पेश नहीं करेगा यह काम तो शत्रुओं को गुलाम बना [प्रशंसा] दे उसने बहुत अनुनय विनय किया सुंदरी नहीं लेकिन लुटेरा आदमी कितना संयमी और तभी वह एक व्यक्ति पूरे स्टेट को नाक में दम कर सकता है इसके पीछे ब्रह्मचर्य का संयम यवन सुरक्षा पुस्तक का आधार है ऐसे [प्रशंसा] वक्ति उसके बाद वोह मटिया कभी अकेला नहीं सोया दो आदमी अपने साथ रखता कहीं फिर मेरी कोई कमर तोड़ने के लिए कोई ललना विचार ना करें एक दिन सुबह वह कहीं जा रहा था चार बजे घोड़े पर बैठ के जाते जाते जाते
सूर्योदय हुआ किसी खेत के तरफ नजर गई 18 साल की युवती अकेली अपना हसिया लेकर दात लेकर खेत में काम कर रही जोगीदास चकित हुआ आसपास देखा तो कोई पुरुष नहीं कोई माणस नहीं अने एकली 18 वर्षनी युवती खेतर में एकली काम करे व परोड़ी जोगीदास ने उधर को घोड़ा चल दौड़ाया जहां काम कर रही थी वहां घोड़ा खड़ा रहा लेकिन लड़की काम में मशगूल थी और सुबह के प्रभात गाए जा रही थी जोगीदास ने कहा बहन तब उसने सिर ऊंचे उठाया कड़क नजर से देखा बोलो सूझे क्या है तू अकेली इस बयाबान में खेत
में काम कर रही है क्या तुझे तेरी शील लूट जाने का तेरी इज्जत लूट जाने का भय नहीं होता तू यती है और अकेली काम कर रही तुझे डर नहीं लगता उसने फिर अपनी आंखें झटका हुए भाई कहा इसलिए वो तो चुप हो गई फिर भी दृढ़ स्वर में कहा कि शील सु बात करो मारी इज्जत सुन लो घोड़े सवार जब तक मेरा भैया जोगीदास जीवित है तब तक आसपास के 50 गांव में किसी महिला की इज्जत लूटने वाला कोई जवान हिम्मत नहीं कर सकता है झुकझुक जिए मेरा जोगी जोगीदास का दिल पानी पानी हो
गया भले मैं बारिया हूं लुटेरा के नाम लुटेरा के लिस्ट में मेरा नाम है फिर भी तियो को कन्याओं की शील को लूटने वाले तो मेरे से डरते उनकी सेवा तो होती जितना पुरुषों और लड़कों की जिम्मेदारी है संयम की सदाचार की उतनी ही महिलाओं की जिम्मेदारी गांधी जी के पास कलकाता में तीन महिलाएं पहुंची आप राज्य की स्वतंत्रता चाहते हो देश की स्वतंत्रता चाहते हो लेकिन नारी स्वतंत्रता हमारे लिए भी कुछ आप सोचिए कुछ करिए गांधी जी ने पैर से सिर तक देखा उनको बो आपके लिए क्या मैं करूं सेवा बोले हम बाजार से
गुजरते हैं तो लोग हमारी मस्करी कर सिटी बजाते हैं कभी साइकिल वाले तो कभी कोई पास से गुजर जाते छेड़ते करते हमारी गांधी जी ने सिर नीचा रख के हाथ जोड़ते हुए कहा कि बहनों मैं तुम्हारी रक्षा करने में असमर्थ हूं क्योंकि तुमने कपड़े ऐसे पहने तुमने वेशभूषा ई ऐसी की कि मेरे जैसे बुड्ढे का मन भी पापी हो जाए तो दूसरों की क्या [प्रशंसा] बात तो युवतियों का वेशभूषा ऐसा सुंदर पवित्र होना चाहिए बहन जी कि कामी आदमी को भी एक घड़ी भर के लिए उस वेशभूषा को देखकर सात्विक भाव आ जाए मैंने सुनी
है घटना एलिजाबेथ के पास एक महिला गई उसकी 19 साल की पोती को साथ में लेकर गई थी एलिजाबेथ ने उस युवती को देखा दादी के साथ आई लड़की को देखते ही उसने कहा इसकी शादी क्यों नहीं करा देती इतनी खूबसूरत है लड़की को इतना गुस्सा आया कि क्या मैं गई कि मैं इतनी कामिनी हूं कि मेरे को देखकर ही एलिजाबेथ में शादी की बात याद आई इसके मन में यह क्यों नहीं आया कि इसको नन्न क्यों नहीं बना देती साधवी क्यों नहीं बना देती उम्र लायक हुए भगवान के रास्ते क्यों नहीं लगा मेरी शादी
उसको सूझी क्या मैं इतनी कामी नहीं हूं क्या मैं इतनी हल्की हूं क्या कि मेरे को देखकर इनको शादी की ही बात याद आती है क्या मेरे में इतना काम है क्या मेरे में इतने दोष है क्या मैं इतनी सेक्सी हूं क्या उसको अपने ऊपर गलानी आई जैसे कैसे उसने अपने को थामा दादी मां ने जो बात की एलिजाबेथ से की व जल्दी से दादी मां के साथ घर गई उठाई कैची बाल काट दिए कर दिया मुंडन बाद में सलून में जाकर व्यवस्थित मुंडन किया किसी लेडीज के थू फिर उसने साधवी वेश धारण कर दिया
दो दिन के बाद अपने दादी मां को कहती कि चलो एलिजाबेथ के पास दादी मां के साथ व 19 साल की यूरोपियन लड़की एलिजाबेथ के पास जाती एलिजाबेथ कुर्सी पर से उठ खड़ी हो और उसको वेलकम करती बड़ा आदर करती लड़की बोलती क्यों करती कि तुम तो पृष्ठ हो तुम तो नन्न हो तुम तो साध भी हो बोले तीन दिन पहले जिसको देखकर तुमको सादी याद आई थी मैं वही लड़की हूं एलिजाबेथ उसकी दादी को कहते नहीं नहीं आई एम वेरी सॉरी मेरी गलती हो गई इसको तो ये वेश जजता है ये तो साधवी हो
तो बहुत अच्छा है बहुत अच्छा है [प्रशंसा] बहु खानपान का असर होता है ऐसे वेशभूषा का भी असर होता है अब मेरा साधु दय का वेश है केश है वेश है अगर मैं सिनेमा थिएटर पर खड़ा र तो कैसा लगेगा मेरे को अपने आप में कैसा लगेगा और लोगों को कैसा लगेगा अगर पेंट शर्ट बैठते तो सब पेंट वाले देख रहे तो अपन भी घुस के देख सकते लेकिन इस वेश में घुसना चाहे तो भी य वेश तो रोक देगा हालांकि हमें जाने की कोई जरूरत नहीं हमको य चीज कचरा पसंद नहीं तो कभी कभार
वेश और कोई नियम रक्षा कर लेता है महात्मा गांधी यूरोप में पढ़ने गए मां ने कहा बेटा विलासी देश में जाता है चार पैसे कमाने की विद्या सीखने जाता लेकिन वहां सर्वनाश होने की संभावना है मैं तेरे को आज्ञा तब दूंगी जब तू मेरे को वचन देगा मा क्या वचन दू ये शराब कबाब अने स्त्री गमन ये तीन चीजें अगर तू नहीं करेगा उस देश में इन तीज तीनों चीजों की भरमार छूट है और मनकी छाप बेटे पैदा होते कोई ब्रह्मज्ञानी या कोई महावीर या कोई बुद्ध या कोई कृष्ण या कोई राम यहा कोई लीला
शया एकनाथ ज्ञानेश्वर या मीरा उन देशों से हमने नहीं सु बेटा वो भोगी देश है उन देशों से तो विद्या सीखने जाता है लेकिन अपना क पतन ना हो जाए मेरे को वचन दे शराब कबाब और परस्त्री मां को वचन दिया पढ़ाई लिखाई करते करते शेख महताब के साथ उनकी दोस्ती हो गई जैसा संग ऐसा रंग हलकट संग हल्की जगह ले जाएगा अच्छा संग सत्संग में ले आए शेख मेहता के संग की ऐसी असर हुई कि मोहनलाल कर्मचंद गांधी वैश्या के घर पहुंच गए शरीर से तो वहां पहुंच गए लेकिन याद आई मन में खटक
रहा था कि मां को वचन दिया शराब कबाब मास मदिरा अने परस्ती अपनी स्त्री हो तब भी संयम जरूरी है अपनी स्त्री इसका मतलब य थोड़ी कि स्त्री की जिंदगी जल्दी नाश हो जाए जल्दी बीमार हो जाए जल्दी मर जाए और अपन भी मर जाए इसलिए थोड़े शादी शद शाद आबाद हो एक दूसरे का संयम सदाचार बढ़ के एक दो बच्चे तेजस्वी बच्चों को जन्म देने के लिए शादी ऐसा थोड़ कि एक दूसरे की सत्यानाश करने के लिए शादी तो मां को वचन दिया था माने में वचन आछ कि मां मदिरा अने काम विकार मा
नहीं पड़ अने आज हमारा थी भूल थई रही छ आज में वैशा के आंगन तक पहुंच गया मां पूछेगी तो मैं क्या जवाब दूंगा दिल धड़कने लगा मनही मन पुकारा मेरे राम बस अंतर्यामी राम ने उनकी आवाज सुन ली वैशा के हृदय में ऐसा कुछ तूफान जगा कि मोहनलाल को देखकर वैशा को चीड़ चढ़ी और ऐसा मोहनलाल को डांटा की कुछड़ी दबाई पाच शरीर से तो अपवित्र जगह पर काम की जगह पर गया था लेकिन अभी पूरा गलती नहीं गलती तो है सज्जन है गांधी जी ते गलती तो है लेकिन भगवान राम ने मेरी गलती
की एकदम नजिक होने पर भी गलती को बदल दिया और ऐसी गलती फिर मैंने की वैशा के द्वार फिर ऐसा हुआ दूसरी बार कुल मिलाकर तीन बार मैं पतन की खाई के बिल्कुल किनारे था पतन अब हो ही रहा है जैसे पनघट पर खड़ा हो जाए हवे कूद हवे मर ए भी दशा ऐसी दशा थी लेकिन मां को वचन दिया था और राम का स्मरण किया मैं बच [प्रशंसा] गया तो अपने जीवन में विद्यार्थी जीवन में गुरु को माता पिता को या श बंधुओ को ऐसा वचन दे दो कि पतन की खाई में हम नहीं
गिरेंगे एक लड़का आया मैं बड़ा खुश हुआ 12 1 साल का लड़का होगा शायद बापू हमको जरदा खाने की आदत पड़ गई वो बोला मेरे आगे व्यथा उसने व्यक्ति आदत नहीं छूटती खाता है वह तो उसकी बेवकूफी है बुरा करता है लेकिन वो छोड़ने के लिए आ गया तो मैं खुश हुआ अब इस उम्र में नशीली चीजें खाएगा तो ज्ञान तन त तो ठप हो जाए मेरा लुनावाड़ा में कार्यक्रम था उन दिनों में गोधरा की अखबारों में एक लेख मेरे पास कोई लाया एक छोकरो तो जरदा खाता खाता नी नसो पड़ी थ अने ने गन
कैंसर ने मो बंद थ विद्यार्थी छोकरा ने हॉस्पिटल मा खस जवा आ आ केसने सीरियस बतावे जरदा खाता खाता भी दशा शराब हो चाहे तंबाकू हो एक आदमी बेड़िया सिगरेट पीता है उसके आसपास रहने वाले छह आदमी को निकोटिन पॉइजन के असर होती त तो बया चकला मूर्खा छोकरा अध्या जल्दी फेफड़ा खवाई ज जल्दी डोस थ ज अने बीड़ी पीवा कैंसर बीमारी थाने पाछ मटती भी न पंचा केस तो फैल जाए पांच केस सा जा तो पाच वर्ष में पाछ लो को मरी जाए ले बीड़ी पीवा चिकनी लेवा दारू पीवा एक एक आदमी ने दारू
पिया दारू पीते पीते ड्राइविंग कि हम से डरा गाड़ी में हो गया पंच लाम नवीर पंचर वाला पैया बदलने के लिए नशे नशे में गाड़ी के नट बोल्ट खोलता जाता है रखता जाता है पीछे गटर बहती थी खुली नाली थी ढाल वाली जो रखे त लुड़क जाए जो र लड़क जाए चार के चार बोल्ट लुड़क गए स्टॉपर भील लगाया स्पेयर भील लगाया देखा कि अरे तो बल्ट सब पानी में गिर गए नगरपालिका के लोग यह ग्राम पंचायत के लोग बड़े नालायक हैं वैसे खा जाते हैं गटर पाइट सिस्टम नहीं करते मैं कैसे घर जाऊंगा रोर
है पार्षदों को कॉरपोरेटर को गालियां दे रहा है चेयरमैन को गालियां सुना रहा है कार्यकर्ताओं को और रोड के पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट वालों को गालियां दे रहा है कि नालायक पगार खाते और रोड पर ऐसी नालिया रखते हैं खुदा उनका खाना खराब करे जन्नत में जाए दोजख में पड़ेंगे ये जलाए जाएंगे पकाए जाएंगे अरे लेकिन मैं घर कैसे पहुंच रो रहा है सामने एक पागल खाना था वहां एक पागल शाम का टाइम था आराम कुर्सी पर बैठा बैठा सब खेल देख रहा था अब वो गुलाम भी चिल्लाता रहा रोता रहा तो उस पागल को दयाई वो
आया उसके नजी कि नगरपालिका को या कॉरपोरेटर को या ऑफिसर को गालियां देने से तू घर तो नहीं पहुंचेगा बोले उनकी सत्यानाश हो जाए उन्होंने गटर रखिया तभी तो हम इधर ही पड़े रहे ले तेरे अब घर पहुंचना है कि रोना है बोले घर कैसे पहुंचे घर पहुंचेंगे एक बताऊ आईडिया तुम्हारे जो तीन व्हील है ना मोटर के तीन पया है ना बाकी के उसमें से एक एक बोल्ट निकाल के चौथे पहिए पर लगा दे घर पहुंच जाएगा बोले इतना बड़ा कल तुम कहां र तो साब बोले मेंटल हॉस्पिटल का दर्दी वो बोलता है तुम
पागल खाने सामने अस्पताल में रते हा इलाज कराने आ बोले इतनी सारी अकल बोले मैं पागल तो जरूर हूं लेकिन तेरे जैसा दारुड़िया नहीं [संगीत] हूं तेरे जैसा शराबी नहीं तो बोतल की शराब अल्कोहल होता है और अल्कोहल एक प्रकार का जहर होता है जो शराब पीता है उसके खून में अल्कोहल आ जाता है ज दारू पिए ने ना लोही मा अल्कोहल दार असरा पछ ना छोकरा ने आंखन कैंसर थाय दारुड़िया ना छोकरा ने आंखन कैंसर थाय बाप दारू पीता तो छोकरा ने कैंसर न रोग था है आंखन बाप दारू पीता है खब तो छोरे
को आंख का कैंसर हो सकता है अगर उस छोरे को नहीं हुआ तो छोरे के छोरे को होगा उसको नहीं हुआ तो उसके बेटे के बेटे को होगा उसको नहीं हुआ तो उसके बेटे को होगा उसको नहीं हुआ तो उसके बेटे को होगा उसको नहीं होगा तो उसके बेटे को होगा उसको नहीं हुआ तो उसके बेटे के बेटे को होगा 10 पीढ़ी तक अल्कोहल ब्लड में आया हुआ अल्कोहल 10 पीढ़ियों की सत्यानाश कर सकता है ऐसा विज्ञानी बोल दारू तो हम पिए लेकिन हमारी 10 पीढ़ी के बच्चों को किसी ना किसी को आंख का कैंसर
हो और फिर उसका वारसागत चले हे सारू केवा है जाम पर जाम पीने से क्या फायदा रात बीती सुबह को उतर जाएगी तू हरि नाम की प्यारिया पी ले तेरी सारी जिंदगी सुधर [संगीत] [प्रशंसा] जाएगी ार पिवाय बीड़ी फुका उतावले खवाए नहीं उताव खवाए नहीं दारू पिवाय सत्संग मा जवा [प्रशंसा] जूठ बोला झगड़ो करा सेवा करा हरि ओम [संगीत] [संगीत] हरे और