हजरत मरियम वह पाक बाज और पाकीजा औरत हैं जिनके नाम पर कुरान मजीद में एक पूरी सूरत उतार दी गई और कुरान पाक आपकी पैदाइश परवरिश किफा और आपके हां हजरत ईसा की पैदाइश के वाकत को खोल खोल कर बयान करता है ताकि लोग अल्लाह तबारक ताला की महबूब बंदी के बारे में कोई शको शोबा ना रखें हजरत मरियम अल सलाम हजरत दाऊद अल सलाम की नस्ल से ताल्लुक रखती हैं आपके वालिद मोहतरम उस दौर में बनी इसराइल के इमाम नमाज थे और आपकी वालिदा मोहतरमा भी आबिदा और जाहिदा खातून थी उस दौर में अल्लाह
ताला ने बनी इसराइल पर हजरत जकरिया अल सलाम को मबू फरमाया था जब हजरत मरियम अलहा सलाम के वालिदा के यहां औलाद नहीं थी तो उन्होंने अल्लाह के नाम पर यह नजर मानी कि अगर उनके यहां औलाद हुई तो वह उसे बैतुल मुकद्दस की खिदमत के लिए वक्फ कर देंगी उस वक्त के रिवाज के मुताबिक जो लड़का अल्लाह ताला के नजर कर दिया जाता वह ना तो शादी करता था और ना ही दुनियावी मशाग में दिलचस्पी लेता था सिर्फ इबादत गाह की खिदमत करता और खुद इबादत में मशगूल रहता था हजरत बीबी मरियम की वालिदा
ने भी बेटे के अता करने की दुआ उस लिए की थी कि रिवाज के मुताबिक इबादत का की खिदमत के लिए तो सिर्फ लड़कों को कबूल किया जाता था लड़कियों के लिए यह इजाजत नहीं थी चुनांचे बेटे की जगह जब बेटी पैदा हुई तो मां को यह फिक्र हो कि उसकी नजर कबूल नहीं होगी क्योंकि दस्तूर के मुताबिक लड़की नजर करने की ममा त थी उसी कशमकश में अल्लाह ताला से यह दुआ की कि ए रब मैंने तो लड़के की दरख्वास्त की थी लेकिन जो अल्लाह ताला की जात बा बरकत का इल्म है वहां तक
इंसानी सोच कैसे पहुंच सकती है अल्लाह ताला ने जिस लड़की को पैदा फरमाया था उससे दरअसल मुकद्दस मां बनाना मकसूद था जिसमें से एक अजीम शान मुबारक मसूद बेटे ने पैदा होना था जो पैदाइशी नबी था बहरहाल हजरत मरियम की पैदाइश हो जाती है और मुद्दत रजत खत्म होती है तो आप अल सलाम की वालिदा मोहतरमा आपको बैतुल मुकद्दस ले जाती हैं ताकि मुजावर के सुपरत करके अपनी मन्नत पूरी करें वहां मुजावर झगड़ने लगते हैं हर कोई यह चाह रखता है कि हजरत मरियम की कफा उसके सुपरत की जाए फिर फैसला हुआ कि मुजावर वह
कलम जिससे वह तोरत लिखते थे पानी में छोड़ दें जिसका कलम पानी के बहाव में बहने की बजाय उल्टा बहे वही हजरत मरियम की कफा का हकदार होगा इस मुकाबले में हजरत जकरिया भी शामिल थे उनके कलम को अल्लाह ताला ने पानी में बहाव के उल्टे तरफ बहाया और उनकी परवरिश के हकदार हो गए और बीबी मरियम को अल्लाह की मंशा के मुताबिक हजरत जकरिया की किफा में दे दिया गया हजरत जकरिया की बीवी हजरत मरियम की खाला लगती थी इसलिए उनसे बढ़कर उनकी परवरिश और कौन कर सकता था इसी तरह हजरत मरियम बैतुल मुकद्दस
में रिहाइश पजीर हो गई आपके लिए एक कमरा मकसूस कर दिया गया जहां हजरत जकरिया के अलावा और कोई नहीं जा सकता था आप दिन रात अल्लाह ताला की इबादत में मशगूल रहती थी जब भी हजरत जकरिया आपके पास आते तो वह हैरान होते क् क आपके पास बे मौसम फल मौजूद होते थे गर्मियों के फल सर्दियों के मौसम में और सर्दियों के फल गर्मियों के मौसम में आपके हुजरे में मौजूद होते थे हजरत जकरिया की हैरत बजा थी तभी हजरत मरियम से पूछा कि यह फल कहां से आते हैं कौन देकर जाता है आपको
हजरत मरियम पुर सुकून होकर फरमा हैं कि अल्लाह के पास से तभी हजरत जकरिया ने अल्लाह तबारक ताला से वारिस के लिए दुआ फरमाई आपकी बीवी के बांझ होने के बावजूद मोजा खुदा वंदी से आपके यहां हजरत यया की विलादत हुई हजरत मरियम की अजमत और फजीलत को रब्बे करीम ने बार-बार कुरान मजीद में फरमाया है और अपनी मोमना बंदी की पाकीजा मनी का ऐलान किया है हजरत बीबी मरियम की उम्र जब तकरीबन 15 साल हुई तो एक फरिश्ता खूबसूरत नौजवान मर्द की शक्ल में नमूद हुआ जिसे अलह दिगी में देखकर हजरत मरियम खौफ जदा
हुई और वो अपनी असमत की हिफाजत के लिए फिक्र मंद हो गई गो कि फरिश्ते के चेहरे पर तकवा के आसार नुमाया थे ताहम बीवी ने अपनी असमत की हिफाजत के लिए खुद को अल्लाह की पनाह में दे दिया यह एक इफत और पाक बाजी का एक तरह का इम्तिहान था जो अल्लाह के खास बंदों पर अक्सर होता है आपने उस शख्स से कहा कि वो वहां से चला जाए उनकी परेशानी देखकर नौजवान ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं मैं इंसान नहीं हूं अल्लाह ताला की तरफ से भेजा हुआ एक फरिश्ता हूं आने की
वजह बताते हुए फरिश्ते ने कहा कि आपको एक पाकीजा और मुबारक मसूद बच्चे की विलादत की खुशखबरी देने आया हूं हजरत मरियम को इंतहा ताज्जुब हुआ वह बोली कि यह कैसे मुमकिन है क्योंकि वह शादीशुदा नहीं थी फरिश्ते ने कहा कि उससे पहले अल्लाह ताला हजरत आदम अल सलाम को मां और बाप दोनों के बगैर पैदा फरमा चुका है और हजरत हवा सलाम को सिर्फ मर्द के वजूद से पैदा फरमाया गया हजरत मरियम जब हाम हुई तो एक दूर जगह चली गई इस बारे में एक किस्सा कई बुजुर्गों ने जिक्र किया है कि जब आपका
हमल जाहिर हुआ तो सबसे पहले बनी इसराइल के आबिद और जाहिद शख्स वाहब बिन मुनवा जो आपके खाला जाद भाई थे इंतहा ताज्जुब में पूछा कि ऐ मरियम क्या बीच के बगैर खेती उग सकती है फरमाया जी हां बताओ किसने पहली मर्तबा खेती को पैदा किया फिर पूछा कि क्या बगैर मर्द के औलाद हो सकती है फरमाया कि जी हां अल्लाह ताला ने हजरत आदम को बगैर मां-बाप के पैदा फरमाया फिर कहा कि अच्छा अपनी खबर दो हजरत मरियम ने फरमाया कि अल्लाह ताला ने मुझे खुशखबरी दी है अपनी तरफ से एक निशानी जिसका नाम
मसीह ईसा बिन मरियम होगा दुनिया और आखिरत में साहिबे मर्तबा होगा और लोगों से बचपन और बुढ़ापे में कलाम करेगा मोहम्मद बिन इक फरमाते हैं कि जब हजरत मरियम के हाम होने की खबर बनी इसराइल में आम हो गई तो बहुत से अफराद ने हजरत जकरिया के घर आना जाना बंद कर दिया और आप पर इल्जा मात और बतान लगाने लगे हजरत मरियम ने लोगों से अलह की इख्तियार कर ली और दूर तन्हाई में चली गई जब हमल का दर्द शुरू हुआ तो आपने एक दरख्त का सहारा लिया और उनके नीचे बैठ गई दर्द से
बेचैन और बदनामी का ख्याल आखिर घबरा कर कहने लगी कि कि काश मैं पहले ही मर गई होती और भूली बिसरी हो गई होती बे सरो सामान के इस मुश्किल वक्त में अल्लाह ताला ने हजरत मरियम के कदमों के करीब एक नहर जारी कर दी और निदा आई कि पानी पियो और खजूर खाओ ताकि जिस्म को कुवत पहुंचे और फिर अपनी औलाद को देखकर आंखों को ठंडक पहुंचाओ इस्लाम आने से पहले बोलने का रोजा रखना इबादत में दाखिल होता था यानी सुबह से रात तक किसी से बात ना करते बाद में यह हुकम मंसू हो
गया लिहाजा हजरत मरियम की परेशानी दूर करने के लिए कहा गया था कि तुमसे कोई शख्स इस बच्चे के बारे में पूछे तो इशारे से कह देना कि मैंने चुप का रोजा रखा है जब हजरत मरियम को कुछ तसल्ली हुई और हजरत ईसा अल सलाम पैदा हुए फिर आप अपने बेटे को कौम के पास ले आई कौम के लोग आपकी गोद में बच्चा देखकर गजब नाक हो गए और आपकी इबादत गुजार और पाकीजा खानदान का हवाला देते हुए आपसे बद गुमान हुए और इल्जाम लगाना शुरू कर दिया जब हालात बहुत तंग हो गए और सोच
समझ के दरवाजे भी बंद हो गए सिर्फ तवक का मदार अल्लाह की जात ही रह गई तब हजरत मरियम ने बच्चे की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इस बच्चे से बात कर लो तुम्हारे सारे सवाल के जवाब यह बच्चा देगा सरकश लोगों ने कहा कि भला यह दूध पीता बच्चा हमारे सवालों के जवाब कैसे देगा हम क्यों करें इससे गुफ्तगू कौम का यह कलाम सुनकर हजरत ईसा ने तकरीर शुरू कर दी इसका जिक्र अल्लाह ताला ने कुरान मजीद में यूं फरमाया है और जब बच्चे ने फरमाया मैं हूं अल्लाह का बंदा उसने मुझे किताब
दी और मुझे नबी किया उसने मुझे मुबारक किया मैं कहीं हूं मुझे नमाज और तकवा की ताकीद फरमाई जब तक मैं जिऊं अपनी मां से अच्छा सुलूक करने वाला और मुझे जबरदस्त बदबख्त नहीं बनाया और सलामती है मुझ पर जिस दिन मैं पैदा हुआ और जिस दिन मैं मरू और जिस दिन जिंदा उठाया जाऊंगा हजरत ईसा अल सलाम की जिंदगी के मुतालिक इसराइली रवाया में बेशुमार वाकत मौजूद हैं उनमें से एक इंजील में है जो हजरत वाहब बिन मुनवा से मकतूल है हजरत ईसा की विलादत की शब फारिस के बादशाह ने आसमान पर एक नेक
सितारा रोशन देखा नजूमि हों से दरयाफ्त किया तो बताया गया कि इस सितारे का तुलू किसी अजीम शन हस्ती की पैदाइश की खबर देता है जो मुल्क शाम में पैदा हुई है बादशाह ने खुशबुओं के उदा देकर एक वफद को मुल्के शाम रवाना किया मुल्क शाम पहुंचकर वफद ने यहूदियों के बादशाह से तमाम हालात दरयाफ्त करना चाहे वफद के जुबानी वाकया सुनकर बादशाह घबराया और फिर वफद को इजाजत दे दी कि वह बच्चे के मुतालिक मालूमात हासिल कर ले बारियों के इस वफद ने बैतुल मुकद्दस पहुंचकर हजरत ईसा को देखा रू सजदा तजीम किया और
चंद रोज वहां कयाम किया उसी दौरान उस वफद के बाज आदमियों ने ख्वाब में अपने बादशाह को इस बच्चे का दुश्मन देखा उन लोगों ने हजरत मरियम को अपना ख्वाब सुनाया और मशवरा दिया कि इस बच्चे को किसी महफूज जगह ले जाए उसके बाद हजरत मरियम हजरत ईसा को लेकर मिस्र चली गई जब हजरत ईसा की उम्र मुबारक 13 साल हुई तो बैतुल मुकद्दस वापस आ गई बुखारी शरीफ में हजरत उदा बिन सामत रजि अल्लाह ताला अन्हो से मरब है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अल वा वसल्लम ने फरमाया कि जिसने गवाही दी कि अल्लाह के सिवा
कोई माबूद नहीं वह अकेला है उसका कोई शरीक नहीं और मोहम्मद सल्लल्लाहु अल वालि वसल्लम अल्लाह के बंदे और उसके रसूल हैं और ईसा अल्लाह के बंदे और रसूल हैं जिनको अल्लाह ने मरियम की गोद में डाला और उसकी रूह है और जन्नत हक और जहन्नुम हक है तो अल्लाह ताला उसको जन्नत में जरूर दाखिल फरमाएंगे चाहे वह जैसे भी अमल लेकर आए अल्लाह ताला हम सबको कल्बे सलीम अता फरमाए और कुरान और हदीस पर चलने की तौफीक अता फरमाए आमीन