आज के मॉडर्न टाइम के बोरवेल मशीन एयर प्रेशर से ड्रिल करते हैं जो 2500 मीटर की गहराई तक ड्रिल कर सकते हैं यह लगभग 25 किमी होता है और इसके कंप्रेसर का एयर प्रेशर आपको हैरान कर देगा जो 4500 पीएसआई का है क्या आप इमेजिन कर सकते हो कि यह प्रेशर कितना ज्यादा है अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हो कि हमारे गाड़ियों के टायर में सिर्फ 30 से 40 पीएसआई के प्रेशर से हवा भरी जाती है यह जो आप मशीन देख रहे हो इसका नाम डाउन द होल ड्रिलिंग रिग है जिसको शॉर्ट में
डीटीएच बोलते हैं यह बोरवेल मशीन ठीक हमारे घर में छोटी ड्रिल मशीन होती है उसी की तरह काम करती है लेकिन यहां पर जो ड्रिल बीट होता है वह अलग टाइप का होता है जो हाई प्रेशर एयर पर ऑपरेट करता है जो एक बहुत ही बेहतरीन इंजीनियरिंग भी है इस मशीन में बेसिकली दो सेपरेट मैकेनिज्म होते हैं जो मिलकर काम करते हैं एक कंप्रेसर जो हाई प्रेशर एयर को कंप्रेस करने का काम करता है और दूसरा मैकेनिज्म ड्रिलिंग रिग होती है जो बोरवेल को ड्रिल करने का काम करती है कंप्रेसर और ड्रिल रिक कई बार
आपको एक ही ट्रक पर दिख जाएगी लेकिन जो हैवी ड्यूटी मशीन होती है उनके कंप्रेसर की साइज काफी ज्यादा बड़ी होती है तो उनके कंप्रेसर को एक अलग ट्रक पर रखा जाता है एक्चुअल में ज्यादातर हम इस ड्रिलिंग रिग में इंटरेस्टेड होते हैं लेकिन यहां पर मास्टर माइंड कंप्रेसर ही होता है जो साइड में ट्रक पर लोडेड रहता है यहां पर एक हैवी ड्यूटी इंजन लगा रहता है जो लगभग 400 से 500 एचपी की पावर का होता है यह डिपेंड करता है कि मशीन की ड्रिलिंग पावर कितनी है यदि मशीन 1000 मीटर तक ही ड्रिल
कर सकती है तो इसके इंजन की पावर भी कम ही होगी यह इंजन 12 सिलेंडर र का हो सकता है जो ठीक हमारे नॉर्मल गाड़ियों के इंजन की तरह ही काम करता है इंजन का वर्किंग मैकेनिज्म को मैंने इस वीडियो में एक्सप्लेन किया है तो वीडियो कंप्लीट होने के बाद में आप यहां से देख सकते हो डिटेल्स आपको डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगी इंजन की मेन साफ्ट कंप्रेसर से जुड़ी रहती है यह एक रोटरी स्क्रू टाइप कंप्रेसर है इस कंप्रेसर में दो रोटर होते हैं एक मेल रोटर दूसरा फीमेल रोटर सिर्फ मेल रोटर को ही इंजन
से डायरेक्ट पावर मिलती है कंप्रेसर के पहले एयर फिल्टर लगा रहता है जो बाहर से हवा को अंदर की तरफ खींचता है और हवा में अवेलेबल डस्ट पार्टिकल को रिमूव करता है बाद में हवा इन रोटर ब्लेड पर पहुंचती है और यह रोटर कुछ इस टाइप के बने होते हैं कि एक बार जो हवा ट्रैप हो जाती है उसको वापस पीछे नहीं जाने देते और आगे की तरफ एक छोटे एरिया में कंप्रेस करते जाएंगे और यहां पर पहुंचते-पहुंचते एयर का प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा लेकिन साथ में एयर का टेंपरेचर भी काफी ज्यादा बढ़ जाता
है तो इसको हमें थोड़ा ठंडा करने की जरूरत है तो यहां पर पावरफुल रेडिएटर लगे रहते हैं जो इस हाई प्रेशर एयर को थोड़ा कूल डाउन कर ने का काम करते हैं एयर का टेंपरेचर रिड्यूस होने के बाद में फ्लेक्सिबल पाइप की हेल्प से एयर को भेजा जाता है ड्रिलिंग रिक के कंट्रोल बोर्ड में इस कंट्रोल बोर्ड से प्रेशर को मैनेज किया जाता है और यहां से हाई प्रेशर ऐड जाती है स्विवल मैकेनिज्म के पास में स्विवल एक बहुत ही इंपोर्टेंट कंपोनेंट होता है जो हाई प्रेशर एयर को ड्रिल स्ट्रिंग से जोड़ता है और यहां
से आगे ड्रिलिंग स्टार्ट हो जाती है लेकिन इस मैकेनिज्म को थोड़ा सा समझना जरूरी है यहां पर साइड में दो एयर मोटर होती है जो पूरी स्ट्रिंग को रोटेट करवाने का काम काम करती है लेकिन इस रोटेशन से ड्रिलिंग नहीं होती है इसके कुछ अलग ही काम है मैं आपको आगे बताऊंगा यह दोनों मोटर भी एयर प्रेशर से ही काम करती है जिनका मैकेनिज्म हमें समझना चाहिए मोटर का रोडर सेंटर में ना होकर थोड़ा सा साइड में होता है जब हाई प्रेशर एयर यहां पर आती है तो इन ब्लेड पर फोर्स लगाएगी जिससे रोटर रोटेट
करने लगेगा जब यह एयर ब्लेड पर फोर्स लगाते हुए यहां पर पहुंचती है तो एरिया काफी ज्यादा बड़ा हो जाता है जिससे एयर का प्रेशर डाउन हो जाता है और यह लो प्रेशर एयर हमारे किसी भी काम की नहीं है तो यहां पर साइड में लगे होल से एयर को बाहर छोड़ दिया जाता है इस तरीके से मोटर कंटीन्यूअस रोटेट करने लगती है यह मोटर देखने में छोटी है लेकिन इसकी पावर काफी ज्यादा हाई होती है कंट्रोल बोर्ड से मेन पाइप को डायरेक्टली इन स्ट्रिंग के पाइप से कनेक्ट किया जाता है जिसमें एक्सट्रीमली हाई प्रेशर
को भेजा जाता है इसलिए यहां पर यह पाइप मजबूत स्टील के बने होते हैं इन पाइप के आगे ड्रिल बीट लगा रहता है जो असल में एक हैमर होता है और यह हैमर कितने ही मजबूत पत्थ को तोड़ सकता है जो अपने आप में एक बेहतरीन इंजीनियरिंग यूज करता है वैसे तो यह पूरा हैमर एक हाई स्ट्रेंथ स्टील का बना होता है लेकिन सिर्फ इसका आगे का पार्ट ही पत्थर के डायरेक्ट कांटेक्ट में आता है जिस पर कुछ ऐसी बॉल लगी रहती है और यह बॉल काफी ज्यादा लंबी होती है जिसको हैमर के हेड में
अच्छे से फिट किया जाता है यह बॉल बनी होती है एक बहुत ही स्ट्रांग मेटल की जिसका नाम है टंगस्टन कार्बाइड जिसकी वजह से यह बॉल पावरफुल स्ट्रोक सहन कर सकती है और इन पर फ्रिक्शन का भी कोई ज्यादा खास फर्क पड़ता है नहीं हैमर को खोलकर देखते हैं इसके अंदर क्या प्रोसेस चलती है यह मेन हैमर होता है इसके आगे बॉल लगी रहती है हैमर के पीछे एक भारी भरकम पिस्टन होता है जो हैमर पर कंटीन्यूअसली स्ट्राइक करता है और पिस्टन के ऊपर लगा रहता है एक खाली सिलेंडर देखो यहां पर कंफ्यूज हो सकते
हो तो थोड़ा सही से समझना पिस्टन के ऊपर और नीचे दो चेंबर है और हमें अच्छे से पता है कि यदि पिस्टन के एक साइड में हाई प्रेशर होगा और एक साइड में लो प्रेशर होगा तो पिस्टन हाई प्रेशर से लो प्रेशर वाली साइड में जाएगा फिलहाल पिस्टन के नीचे के चेंबर को देखो यह पूरा खाली पड़ा है अब सबसे पहले कंप्रेसर का हाई प्रेशर आएगा चेक वॉल के पास में चेक वॉल ओपन होगा और यहां से हाई प्रेशर आएगा एयर डिस्ट्रीब्यूटर के पास में एयर डिस्ट्रीब्यूटर एयर को चारों तरफ फैला देगा अब यह जो
सिलेंडर है इसके ऊपर की तरफ जो होल बने हुए हैं इनसे एयर बाहर निकलती है और इस सिलेंडर के पास में से होते हुए वापस इस नीचे के होल से एयर सिलेंडर में एंटर कर जाएगी अब सिलेंडर के अंदर से ही हवा या तो ऊपर जाएग या नीचे क्योंकि बाहर से सिलेंडर हवा को जाने नहीं देगा यहां से ब्लॉक कर रखा है अब हवा नीचे जाना चाहती है फिर पिस्टन ने यहां से भी हवा को ब्लॉक कर रखा है तो फिर हवा ऊपर जाने लगती है इस सिलेंडर में से यहां पर देखो चेंबर बने रहते
हैं तो फिलहाल हवा इस चेंबर में से होते हुए पिस्टन के ऊपर भरने लग जाएगी और पिस्टन को ऊपर से नीचे की तरफ फोर्स लगाएगी अब पिस्टन के ऊपर की तरफ हाई प्रेशर है और नीचे की तरफ लो प्रेशर तो पिस्टन स्पीड में नीचे आएगा और हैमर से स्ट्राइक करेगा हैमर से स्ट्राइक करते ही पिस्टन के जो ऊपर का चेंबर है उसमें जो भी हवा होगी वह पिस्टन के अंदर की तरफ एक होल होता है उससे होते हुए हैमर के नीचे की साइड से बाहर निकल जाएगी अब ऊपर का चेंबर खाली हो गया है जिसका
मतलब है पिस्टन वापस ऊपर की तरफ आ सकता है अब पिस्टन के नीचे के चेंबर में यह जो गैप बना हुआ है इससे हवा नीचे की तरफ भरने लगेगी जिससे पिस्टन वापस ऊपर उठने लगेगा और इस पोजीशन पर पिस्टन आएगा तो पिस्टन के नीचे के चेंबर में जितनी भी हवा थी वह हैमर के अंदर से होते हुए पूरी बाहर निकल जाएगी और फिर से वापस ऊपर के चेंबर में हवा भरने लगेगी और फिर से पिस्टन हैमर पर जाकर स्ट्राइक करेगा और यही प्रोसेस ऑटोमेटिक चलती रहती है और यह काम इतना फास्ट होता है कि यह
पिस्टन 1 मिनट में 1500 से लेकर 2500 टाइम्स स्ट्राइक करता है जिसको ब्लोज पर मिनट बोलते हैं और जब यह मशीन चलती है तो आपको घंटा बजने जैसी आवाज सुनाई देगी एकदम हाई स्पीड में एक्चुअल में वह साउंड इस हैमर की ही होती है अब हेमर इतनी हाई स्पीड में फथ पर स्ट्राइक करेगा तो फथ की एकदम बारीक कटिंग होने लगेगी लेकिन फथ के इस कचरे को बाहर लाना जरूरी है अदर वाइज तो हैमर फंस जाएगा तो जो एयर का प्रेशर हैमर को स्ट्राइक करने के बाद में बाहर निकलता है हैमर से उसका प्रेशर काफी
ज्यादा हाई होता है तो यह अपने साथ में पत्थर के टुकड़े मिट्टी पानी जो कुछ मिलता है उसको साथ में ऊपर लेकर आ जाता है जब बोरवेल पूरा ड्रिल हो जाता है तो बोर को क्लीन करने की जरूरत होती है तो इस कंडीशन में हैमर को रोक दिया जाता है और हैमर पूरी की पूरी हवा साइड में से पास करेगा जिसका प्रेशर काफी ज्यादा हाई होता है और यह हवा ऊपर आते टाइम अपने साथ में सब कुछ कचरा पट्टी ले आती है अब यहां पर एक सबसे बड़ा चैलेंज आता है इस हैमर की बहुत ज्यादा
पावर होती है यह किसी भी पत्थर को तोड़ सकता है लेकिन कई बार पत्थर इतना ज्यादा मजबूत होता है कि हैमर तो उसको रेगुलरली स्ट्राइक कर रहा है लेकिन ऊपर से यह जो इतने सारे पाइप लगे हुए हैं यह हैमर पर वजन नहीं डाल पाते जिसकी वजह से पत्थर टूटता नहीं है तो फिर यहां पर जो टावर होता है इसके पीछे की तरफ एक हाइड्रोलिक प्रेशर वाला पंप लगा रहता है और यह पंप इस पुली मैकेनिज्म से जुड़ा रहता है और यह पुली ऐसे घूमते हुए स्विवल से जुड़ी रहती है जिसकी वजह से पंप का
डायरेक्ट प्रेशर स्विवल के थ्रू इन पाइप पर लगता है और इन पाइप का प्रेशर हैमर पर लगता है तो जब भी कोई मजबूत पत्थर आता है तो एक्चुअल में यह हाइड्रोलिक प्रेशर हैमर पर और ज्यादा फोर्स लगाता है पत्थ को तोड़ने के लिए और एक्चुअल में यदि मैं आपको बताऊं तो इस स्विवल मैकेनिज्म को ऊपर नीचे नीचे करने के लिए हाइड्रोलिक प्रेशर ही लगा रहता है आज के मॉडर्न डीटीएच में इस मशीन के अंदर कोई भी वह पुराना रोप एंड पुली सिस्टम नहीं होता है स्विवल को ऊपर नीचे करने के लिए या फिर इन पाइप
को बाहर निकालने के लिए क्योंकि यहां पर इन पाइप का बहुत ज्यादा हैवी लोड रहता है तो यदि डायरेक्टली हम किसी इंजन को गियर मैकेनिज्म के थ्रू कनेक्ट करेंगे तो वह फेल हो सकता है इसलिए यहां पर हाइड्रोलिक पंप इंस्टॉल किया जाता है जो स्लो होते हैं पर एक्सट्रीमली पावरफुल होते हैं अब क्या आप बता सकते हो कि यह स्ट्रिंग रोटेट क्यों कर रही है कहीं पर भी जरूरत नहीं है इसके रोटेशन की तो इसके पीछे एक दूसरा रीजन है यदि हम नॉर्मल हैमर से भी फथ को सिर्फ एक ही जगह पर स्ट्राइक करेंगे तो
इसके टूटने के चांस बहुत कम हो जाते हैं तो हैमर जब स्ट्राइक करते हुए रोटेट करेगा तो फथ को अच्छे से कट कर पाएगा और बोरवेल का बोर एकदम राउंड शेप में बनेगा और सबसे इंपॉर्टेंट बात जब ड्रिल काफी ज्यादा गहराई में होती है तो हैमर कहीं पर फंस सकता है तो सेफ्टी के लिए रोटेशन बहुत जरूरी है साइड में रोबोट आम भी लगी रहती है जो ऑटोमेटिक इन पाइप्स को उठाकर वल मैकेनिज्म से कनेक्ट करती है इस रोबोट आर्म में भी कुछ हाइड्रोलिक पंप लगे रहते हैं इसके अलावा भी बहुत सारे हाइड्रोलिक पंप यहां
पर होते हैं तो इन सभी को ऑपरेट करवाने के लिए एक छोटा इंजन भी यहां पर लगा रहता है हाइड्रोलिक सिस्टम कैसे काम करता है इस पर हमने डिटेल वीडियो बनाया है यहां पर क्लिक करके आप इन दोनों वीडियो को जरूर से देखना आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा यदि आप ऐसा 3डी एनिमेशन सीखना चाहते हो तो हमारे बेहतरीन एनिमेशन के कोर्स को जवाइन कर सकते हो जो आपकी बहुत हेल्प करेगा उम्मीद करता हूं आपकी तरफ से इस वीडियो को अ सपोर्ट मिलेगा क्योंकि काफी ज्यादा रिक्वेस्टेड वीडियो था कैसा लगा आपको जरूर से कमेंट बॉक्स
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