कि बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अस्सलाम वालेकुम नाजरीन नगर नियर धमाल यह मस्जिद अल हराम कामाख्या आप नवंबर और दिसंबर 1979 में पेश आया जब बागियों ने मस्जिद अल हराम से आले सऊद की हुकूमत खत्म करने के लिए मुकद्दस तरीन मस्जिद पर हमला किया हज के दौरान हमलावरों ने अपने एक साथी मोहम्मद अब्दुल्ला अल कहतानी को इमाम मेंहदी करार दिया और कहा कि तमाम मुसलमान इस शख्स की पैरवी करें और इसके हाथ पर बात करें आगाज 20 नवंबर को हुआ था जब 400 से 500 विषय तत्व संतों ने यह का मोहर्रम 14 के जरिए एक और नए इस्लामी साल
के आगाज पर खाना-ए-काबा पर हमला करके 1 लाख इबादत को चारों को मस्जिद में मैसूर करके बोध इंतजाम संभाल लिया यह कार्रवाई 2 हफ्तों तक जारी रही मिला फिर दहशतगर्दों की बड़ी तादाद को हलाक कर दिया गया है और फिर यही मानल उत्तर भी और साथियों को फांसी दी गई इस वाक्य के बाद सऊदी हुकूमत ने सख्त इस्लामी कव्वाली नाथ इसकी नगरी में इस हेयर कमाली मस्जिद अल हराम में पाकिस्तान आर्मी का क्या किरदार था और क्या वाकई साबित पाकिस्तानी सदृश जनरल परवेज मुशर्रफ ने खाने काबा को बागियों से आजाद करवाया था और फ्रांस आर्मी
के अफसरान ने कलमाज़ू पड़ा था यह तमाम तब सिला था आज की वीडियो में मुकम्मल हवाई जहाज के साथ पेश की जाएंगी और असल हक आपको बताए जाएंगे वीडियो में आगे बढ़ने से पहले अगर आप हमारे चैनल पर नए हैं तो बराए मेहरबानी सब्सक्राइब करें और बालूमाथ के सफर में हमारे हमसफर बने हैं एक नजर इन इस बात के का आप सेवन जरूर कुछ यूं है कि उस दहशतगर्द गुरु की कयादत दही मानल उत्तर बेनामी एक शख्स कर रहा था यही मान नजत के एक बड़े खानदान से ताल्लुक रखता था उसने अपने एक रिश्तेदार को
इमाम मेंहदी करार दिया यही मानव उससे पहले सऊदी कमी गार्ड का हिस्सा रहा था उसका वाले भी आले सऊद के साथ उठता बैठता था उसने 1434 हिजरी मुहर्रम के महीने में हमला किया यही मान एक वक्त में सऊदी मुफ्ती-ए-आजम का शागिर्द बिरहा और हमारे स्किन हमले का मकसद यह था कि मस्जिद अल हराम पर कब्जा करके नकली इमाम मेंहदी का ऐलान किया जाए ताकि दुनिया भर से मुसलमान उसकी बात के लिए आए और सऊदी अरब पर प्रश्र डालें और इमाम मेंहदी को कुछ न कहा जाए इससे यह होता कि सऊदी अरब का जरिया है मार्श
और दीग़र मूल्यों का इसकी सिक्योरिटी से एतबार उठ जाता अगर यह कब्जा कुछ और अच्छा रहता तो दूसरे मालिक लालच में मस्जिद हराम को आजाद कराने बेचते लेकिन उनके और सऊदी अरब के मां बहन भी जंग शुरू हो जाती है यह एक प्रीप्लांड साजिश थी ताकि मुसलमानों को और कमजोर किया जा सके खिलाफत टूटने के बाद मुसलमान दोबारा किसी जंग लड़ने के काबिल नहीं थे लेकिन अल्लाह रब्बुल इज्जत ने इन तमाम के मंसूबे जाहिर कर दिए और उलेमा इकराम ने फौरी तौर पर होशियारी से काम करते हुए इन हवाई जहाज के खिलाफ फतवा दिया और
पाकिस्तान ने अपनी बहादुर और बेहतरीन महारत वाली फौज भेज कर दूसरों को बोलने का मौका न दिया वक्त यह अलग-अलग शानू क्रासक्रम था ना के दूसरे मुल्कों से शुरू हुआ ना ही मुसलमान मूल्यों की आपस में लड़ाई हुई कि दादरी नगर हमले की तैयारी की बात करें तो हमला करने से पहले तमाम बागियों को बड़ी अच्छी तरह तैयार किया गया था और चुके बागियों का गाय यही मान था वह पहले ही सऊदी फौज में रह चुका था और उसको अक्सर जगह का पता था असलहा भी सऊदी अब्बास के गोदामों से चुराया गया आप और मस्जिदुल
हराम के नीचे कमरों में रखा गया फिर जब परीक्षण में जंग छिड़ी तो असली यह को इस्तेमाल किया गया 2 हफ्तों पर मोहित वाशरी की वजह से हजारों अफ़राद हलाक और तकरीबन एक लाख लोग मस्जिद अल हराम में मैसूर हो गए थे एक नजर इन मस्जिद अल हराम को बागियों से छुड़ाने ने सऊदी अब्बास को फ्रांस की आर्मी का तापमान हासिल रहा और बाद लोगों के मुताबिक फ्रेंड्स आर्मी को कलमा पढ़ाकर उस ऑपरेशन में शामिल किया गया जो कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का फरमान या निशान है कि जो लोग ईमान नहीं लाये यानी जो लोग
को पार है वह मस्जिद अल हराम में दाखिल नहीं हो सकते इसलिए उस वक्त तो लंबा ने यह फतवा जारी किया कि फ्रेंड्स आर्मी के अफसरान को कलमा पढ़ाकर उस वक्त आरजी तौर पर मुसलमान किया जाए और ऑपरेशन शुरू किया जाए फ्रांसीसी आर्मी ने फौरी हंगामी बुनियादों पर एक्शन का मंसूबा बना कर सऊदी आर्मी को ट्रेनिंग दी और सऊदी फौज को हमले के लिए कमेंट किया 2016 के दौरान इस किस्म की तिलावत गर्दिश में आ गई कि पाकिस्तानी कमांडो ने ऑपरेशन में हिस्सा लिया था जब जनरल मुशर्रफ एक कतार में आए तो यह भी कहा
जाने लगा कि उन कमांडो उसमें वह भी शामिल थे अ अग्रिम 2016 में एक निजी चैनल के एक-एक करके प्रोग्राम में पाकिस्तानी सेना शदान अहमद रजा कसूरी ने भी इसी किस्म का दावा किया कि मेजर परवेज मुशर्रफ ने काबा शरीफ से दहशतगर्दों को फ्लश आउट किया लेकिन उस दावे की तकदीर में देर नहीं लगी चंद मिनटों के अंदर-अंदर उसी प्रोग्राम के दौरान ब्रिगेडियर जावेद हुसैन ने फोन करके कहा कि बात बिल्कुल गलत है और पाकिस्तानी कमांडो फोर्स उस कार्यवाही में शामिल नहीं थे जबकि कुछ लोगों का यह कहना है कि उस ऑपरेशन की कमान जनरल
परवेज मुशर्रफ जो कि उस वक्त मेजर परवेज मुशर्रफ थे यह बात सरासर गलत है चुके जनरल परवेज मुशर्रफ अपनी किताब में तहरीर करते हैं कि 1978 में यह तरक्की पाकर लेफ्टिनेंट कर्नल के ओहदे पर फायज हो चुके थे और तांबा पर हमला 1979 में हुआ तो यह कैसे मुमकिन है कि एक ही साल में मुशर्रफ मंजूरी के 212 मैनेजर बन गए और प्रवे गौरतलब है कि उस तरफ जूली का ना ही कोई दस्तावेजी सुबूत मौजूद है और ना ही उस ऑपरेशन की कोई कमेंट करने का और परवेज मुशर्रफ ने उस ऑपरेशन का अपनी किताब में
भी कहीं जिक्र नहीं किया लेकिन पाकिस्तान की तरफ से उच्च ऑपरेशन को मेजर सैयद प्रकार कमांड कर रहे थे बाद जरा यह भी कहते हैं कि उस दो हफ्ते जारी रहने वाले मुसलसल ऑपरेशन बिलआख़िर मस्जिद हराम को बागियों से छुड़ा लिया गया यह विमान नलों से भी और साथियों को चे जुर्मों के प्रकार पर सउदी अधिकारियों ने सजा-ए-मौत कि वह जुर्म यह थे मस्जिद हराम का तकदूं इस्तमाल करना नाहक मुसलमानों का कत्ल हाथ में वक्त की नाफरमानी मस्जिद अल हराम में नमाजियों की अदायगी को रोकना इमाम मेंहदी की पहचान के मुतालिक झूठ मासूम मुसलमानों को
गलत काम के लिए इस्तेमाल करना यह से जो रहे थे जिनकी बिना पर यही मानवता भी और उसके साथियों को लाइव मोदी गई मैं नागिन सा बेसब्री पाकिस्तान जनरल परवेज मुशर्रफ के हवाले से जोधावत किया जाता है उसकी हकीकत यह है कि सऊदी हुकूमत ने उन दहशतगर्दों से खाना ए काबा को छुड़ाने के लिए मुद्दत कोशिशें की पुलिस भेजी फौजी दस्ते भेजे कमांडो एक्शन करने की कोशिश की लेकिन जजमान ने मस्जिद अल हराम के मीनारों पर मशीन गन इन सब कर रखी थी इसलिए जो भी करीब आता था उसे गोलियों से भून दिया जाता था
आखिर सऊदी हुकूमत ने फ्रांस से रात तक किया और वहां से तीन खुसूसी कमांडो सऊदी अरब पहुंच गए उन्होंने पहले खाने काबा की दीवारों में बारूद से सौराष्ट्र की यह फिर बेहोशी की गैस छोड़ी और उसी दौरान हल्ला बोलकर दहशतगर्दों को काबू कर लिया इस वाक्य के कुछ ऐसे के बाद इस किस्म की तिलावत गर्दिश में आ गई कि पाकिस्तानी कमांडों ने ऑपरेशन में हिस्सा लिया था जब जनरल परवेज मुशर्रफ एक किरदार में आए तो यह भी कहा जाने लगा कि उन कमांडो उसमें जनरल परवेज मुशर्रफ भी शामिल थे डे मैं नागिन वैसे भी अगर
परवेज मुशर्रफ ने उस कार्यवाही में हिस्सा लिया होता तो वह इसका जिक्र अपनी आपबीती इन द लाइन आफ फायर में जरूर करते इस किताब में उन्होंने 1979 के मुताबिक वाक्या तो लिखिए है लेकिन मत का में होने वाले किसी ऑपरेशन कार्य नहीं किया बल्कि किताब के सफर नंबर 65 पर लिखते हैं कि 1978 में वह लेफ्टिनेंट कर्नल बन गए थे यह बात कि 1979 को हुआ मेजर परवेज मुशर्रफ वाली चीनी बिल्कुल गलत है इसी सफर आगे चलकर वह लिखते हैं कि 1979 में उनकी पोस्टिंग कमांड एंड स्टाफ कॉलेज में बतौर इंस्पेक्टर हो गई थी जाहिर
है ऐसी सूरत हाल में उनकी बटोरे मेजर कमांडो मक्का में तैनात थी खारिज बहस हो जाती है वह 1979 के बाद क्या बात का जिक्र करते हुए यह तक बताते हैं कि उन्होंने स्टाफ कॉलेज पर बगैर पर्ची के तकरीर करने का हुनर कैसे सीखा और कैसे 15 मुख्तलिफ इलाकों से आए हुए फौजियों के साथ उड़ा यादगार भक्तों को जरा आप अगर कोई जिक्र नहीं तो खाने का पर हमले और उसे Jelly मेंहदी के हमलों से छुड़वाने के कारनामे का और वैसे भी आप और हम जिस परवेज मुशर्रफ को जानते हैं वह अपने सैयद होने पर
नाश करते हैं और असद फक्र जी कहते हैं कि मेरे लिए खाना काबा का दरवाजा खोला गया हमारा तैयार है कि अगर उन्होंने खाने काबा को छुड़वाने में कोई किरदार अदा किया होता तो उसका कहीं ना कहीं जिक्र जरूर करते कि नसरीन इसी उम्मीद के साथ इजाजत दीजिए कि आपको हमारी वीडियो पसंद आई होगी मिलते हैं बहुत जल्द एक नई तारीख तय की और मालूम थी वीडियो के साथ देखते रहिए इन फॉरेस्ट आदिल अलार्म पुलिस जब आपका हम यू नासिर हो