[संगीत] खलीफा हारून राशिद ने एक दफा अपने महल में शराब नुशी की महफिल सजा राखी थी वह अमीर बैठे थे के बहलोल भी वहां ए पहुंच उसने बादशाह की हरकतों को खामोश निगाहें से देखा तो हारून राशिद को उसकी नसीहतें याद ए गई नसे की तरंग में उसने सोचा के उससे पहले के बैलून को ऐसी बात कर दे जिससे मेरा सर झुक जाए वो खुद पहला करें और उसने बहलोल से कहा की बहुल मेरे एक सवाल का जवाब डॉग बैलून ने कहा जी हां हुजूर अरुण यह बताओ की अगर कोई शख्स अंगूर का रहा हो
तो क्या वो हराम है जवाब दिया की बिल्कुल नहीं हारून ने कहा की अगर वो अंगूर खाकर पानी पी ले तो पल्लो ने जवाब दिया की जब कोई हाज नहीं है हारून ने आगे कहा की अब यही शख्स अंगूर खाकर और पानी पीकर उसके बाद धूप में बैठ जाए तो फिर बैलों ने जवाब दिया की मुजरिम कोई मुजाहिद नहीं है जितनी डर चाहे बैठे फिर आगे फरमाया के तो फिर बहलोल तुम खुद ही बताओ की यही अंगूर और पानी को छेड़छाड़ धूप में रख दिए जैन तो हराम की हो जाते हैं तो मैं चंद वाला
आपसे करूं बैलून ने सवाल किया यह बताइए की अगर किसी आदमी के सर पे थोड़ी सी मिट्टी दाल दी जाए तो क्या उसको कोई नुकसान पहुंचेगी खलीफा हारून राशिद ने फौरन जवाब दिया की नहीं उसके बाद अगर उसके सर पे थोड़ा सा पानी दाल दें तो क्या उसे शख्स को कोई तकलीफ होगी फिर मिट्टी और पानी को मिलकर एक ईट बनाई जाए और उसे शख्स के सर पे मेरी जाए तो क्या नुकसान होगा तुम भी अजीब बातें करते हो बैलून हारून हंस और कहा की उसका तो सही फैट जाएगा तो फिर अली मकान मगर अब
गौर फरमाए तो आपको यह मालूम होगा की जी तरह मिट्टी और पानी मिलकर इंसान का सर फोड़ सकते हैं उसे तरह अंगूर और पानी भी मिल कर ऐसी चीज बना देते हैं जो हराम और नापाक है जिसके पीने से इंसान की अकल मेरी जाति है और उसके बुरे और भले की तमीज नहीं रहती इसलिए इस्लाम ने इसके पीने वाले पर सजाव वाजिद की है बगदाद की एक बड़े बाजार में एक फकीर नंबई की दुकान के सामने से गुर्जर रहा था उसने हर तरह के खाने कूल्हों पर चढ़ाई हुए थे जिससे बाग निकाल रही थी उन
खानों की खुशबू उनकी लज्जत का पता दे रही थी और इर्द-गिर्द के गुजरते वालों को अपनी तरफ मुतवज्जा कर रही थी बेचारी फकीर का दिल भी ललचाया लेकिन गरीब के पास माल कहां था जो इन खानों की लज्जत खरीद सकता लेकिन वहां से हटे का भी दिल नहीं जा रहा था खानों में इतनी खुशबू थी की भूख बाढ़ रही थी मालाकार उसने अपने थेली को खोल उसमें से सुखी हुई रोटी निकाल और खाने की देख की आप से उसे नरम करके खाने लगा जिसमें खाने की खुशबू वासी हुई थी नंबई चुपचाप यह तमाशा देख रहा
था जब फकीर की रोटी खत्म हुई और वह चलने लगा तो नंबई ने उसका रास्ता रॉक कर कहा की क्यों भाग रहा है ला मेरे पैसे निकाल कौन से पैसे फकीर ने हैरान होकर पूछा अच्छा कौन से पैसे अभी जो तूने मेरे खाने की आप के साथ रोटी खाई है वह क्या तेरे आप की थी उसकी कीमत कौन चुकाएगा अजीब इंसान हो तुम फकीर ने कहा वो आप तो हवा में उड़ रही थी अगर मैंने उसके साथ रोटी खाकर खुद को बदलते की कोशिश की है तो उसमें तेरा क्या गया जिसकी कीमत अदा करूं बस
बस इधर-उधर की बातें मत कर मैं तेरी जान हरगिज़ नहीं छोडूंगा मैं अपना माल वसूल करके रहूंगा नान भाई ने ये कहकर फकीर का गिरेबान पकड़ लिया बेचारा फकीर परेशान हो गया की इस हैट गेट नान भाई से अब किस तरह जान छुड़ाई जाए इतने में बैलून का उधर से गुर्जर हुआ उनके करीब रुक कर उनकी बातें सुनने लगा यह तो बताओ की क्या इस गरीब आदमी ने तुम्हारा खाना खाया है नहीं खाना तो नहीं खाया मगर आप से फायदा तो उठाया है मैंने उसकी कीमत मांगी है लेकिन इसके समझ में यह बात ही नहीं
ए रही नंबई ने कहा बिल्कुल दुरुस्त का रहे हो तुम बिल्कुल सही बैलून ने सर हिलाया और अपनी जब से मुट्ठी भरकर सिक्के निकले और वो एक-एक करके उन सिक्कों को जमीन पर गिरना जाता और कहता की नान बाय यह ले पैसों की आवाज पकड़ ये ले अपने खाने की बात की कीमत इन सिक्कों की खनक में वसूल कर ले यह ले यह सुकून की आवाज तेरे खाने की खुशबू की कीमत है इस गिर्द खड़े लोग हंस-हंस कर पागल हो गए थे नान भाई अपने खपत मित कर बोला की यह पैसे देने का कौन सा
तरीका है बैलून ने जवाब दिया की अगर तू अपने खाने की बात और खुशबू बेचेगा तो उसकी कीमत तुझे सिक्कों की आवाज की सूरत में ही अदा की जा शक्ति है बहलोल दाना हमेशा की तरह एक दिन हारून राशिद को नसीहत करने के लिए शाही महल में आए अगर जो उन्हें मालूम था की इस मगरूर अब्बासी खलीफे के कानों पर जून तक नहीं रहती लेकिन आदत सी हो गई थी की वो कभी बर महल में आकर इशारों से खलीफे को समझाएं की वो गलती पर है अरुण भी बहलोल की बातें सुनने का आदि हो चुका
था अगर जब वो चुभती हुई बातें करते थे और खलीफे के साथ गुस्ताखाना रवैया हथियार करते थे उसके बावजूद भी हारून बहलोल की बटन को संजीत नहीं लेट था लेकिन अब की दफा बेलूर ने भारी महफिल में ऐसी हरकत की जिसे खलीफा बहुत नाराज हुआ तो देखा लोगों की एक बड़ी तादाद हारून के इर्द-गिर्द बैठी हुई है जी तरफ बैलून ने नजर दुदाई कहानी बैठने की जगह ही नजर नहीं आई साथी उसने यह भी एहसास किया की कोई शख्स उन्हें देख कर खुश नहीं हुआ वो थोड़ी डर तक खड़े होकर लोगों को ताकते रहे उसके
बाद मुझमें को चीरते हुए इस सीधे तख्त की तरफ बढ़ और हारून के साथ तख्त पर बैठ गए दरबार में बैठे हुए लोग चखने चिल्लाने लगे की ये कैसी हरकत है यकीनन बहलोल दीवाना हो गया है अभी तक किसी ने खलीफा नहीं थी हारून लोगों की बातें सुनकर बहलोल की तरफ गुस्से से देखने लगा लेकिन बैलून टेस्ट से मिस नहीं हुआ उनके लबों पर एक मुलायम मुस्कुराहट थी गुस्से से हारून की जुबान बैंड थी वो एहसास कर रहा था की बहलोल ने इस हरकत के जारी दूसरों के सामने उसकी तोहीन की है सब लोग हैरान
होकर खलीफा और बैलून की तरफ देख रहे थे हारून गहरी सोच में पद गया लेकिन उसे समझ नहीं ए रहा था की किस तरह बैलून से अपनी [संगीत] मुस्कुराहट के साथ बहलोल की तरफ देख कर बोला अब जब तुम तकलीफ करके हमसे मिलने आए हो तो तुमसे एक सवाल करना चाहते हैं अगर तुम उसका जवाब डॉग है तो हम तुम्हें 1000 डिनर इनाम में देंगे लेकिन अगर तुम उसका जवाब नहीं दे सके तो हम हुकुम देंगे की तुम्हारी मुछे और दाढ़ी मुंडवा कर तुम्हें एक गधे पर स्वर करके गली को जो और बाजरो में फहराया
जाए बेलूर समझ गए थे की खलीफा इंतकाम पर उतार आया है इसलिए उसकी तोहीन करते हुए बोले मुझे तेरे दीदारों की तो जरूर नहीं है अलविदा एक शर्ट के साथ तेरी पहेली बुझने के लिए तैयार हूं और उन्हें पूछा की कैसी शर्ट बालू ने कहा की इस शर्ट पे की तुम मक्खियों को हुकुम करो की वो मुझे ना सत्ता है हारून सर झुका कर सोने लगा उसके बाद दूसरी तरफ देखा ऐसा ग रहा था की वह त्वक को कर रहा था की मज से कोई शक्स बैलून को जवाब दे दे लेकिन सब दंड र गए
मजबूर हारून खाने लगे यह नामुमकिन है इसलिए की मक्खियों तो मेरा हुकुम नहीं मानती से हारून को देखते हुए बोला की तुम कैसे बादशाह हो जो इन ना चीज मक्खियों के सामने आज हो इस बात तमाम दरबारी कहते लगाकर हंसने लगे अरुण गुस्से की आलम में ऐसी नजरों से दरबारी की तरफ देखने लगा की उसके रॉब से सबके लबों की हंसी और मुस्कुराहट दूर हो गई और उनकी सांस रुक गई बैलून ने अंदाज़ लगाया की उन्होंने हारून को हद से ज्यादा दूसरों के सामने रुसवा किया है उसके बाद बहलोल ने ये राधा किया की हारून
की दिलजई करें और उसके गुस्से को ठंडा करें उन्होंने हारून से कहा की अब अपनी पहले पूछो मैं किसी शर्ट के बगैर उसको पूछने के लिए तैयार हूं अरुण ने कहा की अगर तुम नहीं बता सके तो वही सजा दूंगा जो मैंने पहले कहीं थी अब यह बताओ की वो कौन सा तारख है जिसकी उम्र एक साल है और उसकी 12 शाह हैं उनमें से हर एक शेख पर 30 पेट हैं उन पत्तों का एक रॉक रोशन है और दूसरा कल है बैलून सोच में पद गए उन्होंने बस लोगों को यह कहते हुए सुना की
यह कैसा अजीब सवाल है बैलून तो उसका जवाब नहीं दे पाएगा इसे तो सजा मिलेगी खलीफा हारून राशिद फटना अंदाज में मुस्कुराते हुए बोले की अगर पहले का जवाब नहीं दे सकते हो तो डर मत करो और सजा के लिए तैयार हो जो उसने करिंदो को हुकुम दिया की बहस की मूंछ और दाढ़ी मुंडवा कर गली को चोर बाजरो में बहराइच बालू खलीफा की बात काटते हुए बोला की ये दरख्त साल है 12 टहनियां उसके 12 महीने हैं और 30-30 पेट महीने के दिन हैं जिनका उजाला रुख दिन का और कल रुख का है जवाब
सुनकर मज में शाबाश शाबाश की आवाज से गूंजते लगी सब खुश होकर बोल को दादा देने लगे लेकिन हारून खामोश रहा उनका मुंह लटक गया था और उसके चेहरे पर शिकस्त के असर नया हो गए थे उन्होंने अपने महल में राखी हुई थी जो कुरान की हाफिज में लगी हुई थी जो उनके महल से 24 घंटे उन बछिया के कुरान पढ़ने की आवाज ए रही होती थी उनका महल कुरान का गुलशन महसूस होता था एक दिन हारून राशिद अपनी बीबी के साथ दरिया के किनारे टहल रहा था की एक जगह बहलोल दाना को बैठे हुए
देखा उसने कहा अस्सलाम वालेकुम बोल दाना ने जवाब में वालेकुम अस्सलाम कहा अरुण राशिद कहा की बैलून आप यहां क्या कर रहे हैं उन्होंने कहा की रेट पे घर बना रहा हूं पूछा की किस लिए बना रहे हो जवाब दिया की जो आदमी इसको खरीदेगा मैं उसके लिए दुआ करूंगा की अल्लाह रबल इज्जत उनके बदले उनको जन्नत में घर आता फार्मा दे बादशाह ने कहा की बैलून इस घर की क्या कीमत है उन्होंने कहा की सिर्फ एक डिनर अरुण राशि ने समझा की यह दीवाने की कोई बेवकूफी है लिहाजा वो आगे चला गया उनके पीछे
जुबैदा खातून को सलाम किया और फिर पूछा के बैलून तुम यहां क्या कर रहे हो उन्होंने कहा की मैं रेट पर घर बना रहा हूं पूछा की किस लिए बना रहे हैं बैलून ने जवाब दिया की जो आदमी इस घर को खरीदेगा मैं उसके लिए दुआ करूंगा की अल्लाह ताला उसके बदले उनको जन्नत में घर आता फरमाए इस घर की क्या कीमत है उनको दे दिया और कहा की मेरे लिए दुआ करना वो दुआ लेकर चली गई रात को जब हारून राशिद सोया तो उसने ख्वाब में जन्नत के मानसीर देखें फूल वगैरा देखने के अलावा
बड़े ऊंचे ऊंचे खूबसूरत महिलग भी थे एक सुर्ख या कूद के बने हुए महल पर उसने सूबेदार का नाम लिखा हुआ देखा और उन नसी ने सोचा की मैं देखूं तो सही की ये मेरी बीबी का ही घर है वो महल में दाखिल होने के लिए जैसे ही दरवाजे पर पहुंच तो एक दरबार ने उनको रॉक दिया और उन राशिद खाने लगा की इस पर तो मेरी बीबी का नाम लिखा हुआ है लिहाजा मुझे अंदर जान दीजिए दरबार ने कहा की नहीं यहां का दस्तूर अलग है जिसका नाम होता है इस को अंदर जान की
इजाजत होती है किसी और को इजाजत नहीं होती लिहाजा तुमको दाखिल होने की इजाजत नहीं है जब दरबार ने हारून राशिद को पीछे हटाए तो उसकी आंख खुला गई बदर होने पर फौरन ख्याल में अल्लाह ताला ने काबुल कर दी है फिर उसे खुद पर अफसोस हुआ की मैं भी अपने लिए एक घर खरीद लेट तो कितना अच्छा होता वो साड़ी रात इसी अफसोस में करवटें बदलते रहा सुबह हुई तो उसके दिल में ख्याल आया की आज फिर मैं उसे जरिया के किनारे जाऊंगा अगर आज मुझे बहलोल मिल गया तो मैं भी एक घर खरीद
लूंगा चुनाव चाहे वो शाम को फिर अपनी बीबी को लेकर चल पड़ा वो बहलोल को तलाश करते हुए इधर-उधर देख रहा था की अचानक उसने देखा की बैलून एक जगह बैठकर इस तरह मकान बना रहे हैं अरुण राशिद ने सलाम वालेकुम कहा बैलून ने कहा वालेकुम अस्सलाम अरुण जी ने पूछा की क्या कर रहे हो बैलून ने कहा की मैं घर बना रहा हूं राशिद ने पूछा की किसलिए बैलून ने कहा की जो आदमी यह घर खरीदेगा मैं उसकी हक में यह दुआ करूंगा की अल्लाह ताला उसके बदले उसे जन्नत में घर आता फरमाए और
राशिद ने पूछा की बहुल इस घर की क्या कीमत है बैलून ने कहा की इसकी कीमत पुरी दुनिया की बच्ची है की इतनी हिम्मत तो मैं नहीं दे सकता कल तो आप एक दिन आपके बदले दे रहे थे और आज पुरी दुनिया की बात रहे हो अच्छा सलामत कल बिन देखें का मामला था और आज देखा हुआ मामला है कल बिन देखेगा सौदा था इसलिए सस्ता मिल रहा था आज क्योंकि देख के आए हैं इसलिए अब उसकी कीमत भी ज्यादा देनी पड़ेगी बैलून दाना एक मर्तबा कब्रिस्तान में बैठे हुए थे की किसी ने पूछा की
बहलोल यहां क्या कर रहे हो खाने लगे की ऐसे लोगों के पास हूं की उनकी सोबत मुझे तकलीफ नहीं देती और अगर इसे दूर रहूं तो यह मेरी फीबत नहीं करते पूछने वाले ने दोबारा कहा के महंगाई बहुत बाढ़ गई है इसमें कमी की दुआ करें खाने लगे की अल्लाह की कसम मुझे तो कोई परवाह नहीं चाहे गंदम की एक डेन की कीमत एक दिन ए रही क्यों ना हो जाए इसलिए की अल्लाह पाक का हम पर हक है की हम उसके हुकुम के मुताबिक उसकी इबादत करें और अल्लाह पर हमारा यह हक है वो
अपने वादे के मुताबिक हमें रिस्क दे जब रिस्की जिम्मेदारी अल्लाह पाक ने ली है तो मुझे फिक्र करने की कोई जरूर नहीं है कहते हैं एक बार शेख जुनैद बागड़ी रहमतुल्लाह अलह सफर [संगीत] निकाला और शेख को अपने साथ लेकर वहां पहुंचे चेक जुनैद बागड़ी जब बहलोल के सामने गए तो देखा की हजरत बहल सर के नीचे ईट रखकर लेते हुए हैं चखना सलाम किया तो बहलोल ने जवाब देकर पूछा की तुम कौन हो जैसे जवाब दिया की मैं जुनैद बगदादी हूं तो वह अब्बू कासिम तुम ही वो शेख बागड़ी हो जो लोगों को बुजुर्गों
की बातें सीखना है जी हां कोशिश जरूर करता हूं शेफ ने जवाब दिया बैलून ने पूछा की अच्छा तो तुम अपने खाने का तरीका तो जानते होंगे बिस्मिल्लाह पढ़ना हूं और अपने सामने की चीज खाता हूं छोटा वाला बनाता हूं आहिस्ता आहिस्ता चपटा हूं दूसरे के नवले पर नजर नहीं डालता और खाना खाता वक्त अल्लाह की याद से काफी नहीं होता फिर दोबारा कहा की जो लोकमान भी खाता हूं अल्हम्दुलिल्लाह कहता हूं खाना शुरू करने से पहले हाथ होता हूं और सारे होते ही हाथ होता हूं यह सुनकर बैलून उठकर खड़े हुए और अपना दमन
शेख की तरफ झड़क दिया फिर उनसे कहा की तुम तो इंसानों के प्रो बन्ना चाहते हो और यह हाल है की अब तक खाने पीने का तरीका भी नहीं जानते यह का कर भले ने अपना रास्ता ले लिया शेख के मुरीदन ने कहा की यह हजरत यह शख्स तो दीवाना है हां दीवाना तो है मगर अपने कम के लिए होशियारों के भी कान कटता है इससे सच्ची बात सुना चाहिए और उसके पीछे चले पहलू एक विरानी तक पहुंचकर एक जगह बैठ गया शेख बागड़ी उसके पास पहुंचे तो उन्होंने शेख से फिर वही सवाल किया की
कौन हो आपने कहा की मैं हूं शेख बागड़ी जो खाना खाने का तरीका नहीं जानता बैलून ने कहा की खैर तुम खाना खाने के आदाब से तो ना वाकिफ हो लेकिन गुफ्तगू का तरीका तो जानते ही होंगे जवाब दिया की जी हां जानता तो हूं हर एक बात एक अंदाज़ के मुताबिक करता हूं बी मौके और बेहद साफ नहीं बोलना सुनने वालों की समझ का अंदाज़ करके हल्के खुदा को अल्लाह और रसूल के अहकम के बड़े में बताता हूं यह ख्याल रखना हूं की इतनी बातें ना कहूं की लोग मुझे बजार हो जाए बात नहीं
और गहरी उलूम के नुक्ते नजर में रखना हूं उसके साथ गुफ्तगू के आदाब से मुतल्लिक कुछ और बातें भी बयान की तो बैलून ने कहा की खाना खाने के आदाब तो एक तरफ तुम्हें तो बात करने का भी ढंग नहीं आता फिर शेक से मुंह फ़िर कर एक तरफ चल दिए मुरीदन से खामोश ना रहा गया और उन्होंने कहा की यह हजरत यह शख्स तो दीवाना है आप दीवाने से भला क्या त्वक के रखते जुनैद बगदादी ने कहा की मुझे तो इससे अभी और कम है तुम लोग नहीं समझ सकते उसके बाद चेक ने फिर
बलोल का पीछा किया और कहा की तुम्हें खाना खाने और बात करने के आदाब नहीं मालूम सोनी का तरीका तो तुम्हें मालूम ही होगा शेख ने कहा की जी हां मालूम है जो मैं ईशा की नमाज और दारूडो वजाहत से फराक हो जाता हूं तो सोनी के कमरे में चला जाता हूं यह कहकर शेख ने सोनी के वो आदाब बयान किया जो उन्हें बुजुर्ग ने दिन की तालीम से हासिल हुए थे बैलून ने कहा की मालूम ये होता है की तुमको सोनी के आदाब भी नहीं आते ये का कर बैलून ने जाना चाहा तो हजरत
जुनैद बगदादी ने उनका दमन पकड़ लिया और कहा के हजरत मैं नहीं जानता अल्लाह के वेस्ट तुम मुझे शिखा दो कुछ डर बाद बैलून ने कहा की मियां यह जितनी बातें तुमने कहीं सब बात की चीजें हैं अल बात मुझे सुनो खाने का अल तरीका यह है की सबसे पहले हल की रोजी हनी चाहिए अगर हराम चीज है तो जो आदाब तुमने बयान किया हैं उनके बरतने से कोई फायदा नहीं होगा और दिल रोशन होने की बजे और तारीख होता चला जाएगा शेख मजी ने अपने बेटा कहा की जजाकल्लाह फिर बैलों ने बताया की गुफ्तगू
करते वक्त भी सबसे पहले दिल का पाक और नित का साफ होना जरूरी है और उसका भी ख्याल रहे की जो बात कहीं जाए अल्लाह की रजामंदी के लिए हो अगर कोई दुनिया भी लगाओ की फिजूल किम की बात हो तो हाथों में कितनी ही अच्छी अल्फाज में कहो तुम्हारे लिए उबाल बन जाएगी इसलिए ऐसे कलाम से खामोशी बेहतर है इस तरह सोनी के मुताबिक जो तुमने मुझे कहा वो भी अल मकसूद नहीं है असली बात यह है की जब तुम सोनी लगो तो तुम्हारा दिल बहुत की ने और हसाद से खाली हो तुम्हारे दिल
में दुनिया और मां ले दुनिया की मोहब्बत ना हो और नींद आने तक अल्लाह के जिक्र में मशहूर रहो हजरत बहलोल दाना की बात खत्म होती ही हजरत जुनैद बागड़ी ने उनके हाथों को घुसा दिया और उनके लिए दुआ की अगर जुनैद बगदादी के मुरीद यह मंजर देखकर हैरान र गए उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और यह बात उनके समझ में ए गई की हर शख्स को चाहिए की वह जो बात ना जानता हो उसे सीखने में जरा भी ना शर्मा एक बार जनाबे बहानुल दाना किसी नकली स्थान में तशरीफ़ रखते थे एकतजार का
वहां से गुर्जर हुआ वो आपके पास आया सलाम करके सामने बैठ गया और इंतहा यादव से गुजारिश की हुजूर तिजारत की कौन सी ऐसी चीज खरीदूं जिसमें नफलो ने फरमाया के कल कपड़ा खरीद लो तजार ने शुक्रिया अदा किया और उल्टे कदमों वापस चला गया जाकर उसने इलाके में जेस्टेट आप तमाम कल कपड़ा खरीद लिया कुछ दोनों बाद शहर का बहुत बड़ा आदमी इंतकाल कर गया मातमी लवस के लिए सर शहर कल कपड़े की तलाश में निकाला हुआ था अब कपड़ा सर के पास जखीरा था उसने मुंह मांगे डेमन पर फरोक किया औरत नफा कमाया
की जितना साड़ी जिंदगी नहीं कमाया था और बहुत ही अमीरों का वीर हो गया कुछ ऐसे बाद वह घोड़े पर स्वर कहानी से गुजर चुनाव पर बहल वहां तशरीफ़ रखते थे वो वही घोड़े पर बैठे बोला और दीवाने अब की बार क्या लूं ने फरमाया की तरबूज ले लो वो भाग भाग गया और साड़ी दौलत से पूरे मुल्क के जितने तरबूज थे वो करीब के जखीरा कर लिए एक ही हफ्ते में सब खराब हो गए और वो कौड़ी कोड़ी को मोहताज हो गया इस खस्ता हेली में घूमते फिरते फिर उनकी मुलाकात बैलून से हुई तो
उन्होंने कहा की आपने मेरे साथ क्या किया [संगीत]