इस कहानी की लेखिका है विनीता मोहता मुंबई में ऑफिस के केबिन में बैठे विजय जी य पर अपने हॉरर चैनल की प्रोग्रेस देख रहे थे प्रोग्रेस वैसे तो काफी अच्छी थी मगर कंपेरटिवली बढ़ने की बजाय थोड़ी कम हो गई थी चिंतित हो उन्होंने अपने चैनल की स्टोरी राइटर विनीता को फोन लगाया विनीता जी वैसे तो स्टोरी बहुत अच्छी है मगर व्यू थोड़े कम आ रहे हैं हमें कुछ सोचना पड़ेगा आपकी बात तो सही है मैं अपनी तरफ से और इंप्रूव करने की कोशिश करती हूं आप बाकी लोगों से बात कर कर देखो उन लोगों का
क्या सजेशन है हम मैंने बात की थी सब लोग बोल रहे हैं नरेशन से ज्यादा डायलॉग बेस स्टोरी होनी चाहिए और [संगीत] पुणे का शनिवार वाड़ा आप शनिवार वाड़ा पर कोई स्टोरी लिखिए ना शनिवार वाड़ा के बारे में कुछ कुछ सुना तो है मगर ज्यादा कुछ नहीं पता है आप ग पर उसकी स्टोरी सर्च कर लीजिए या फिर बेहतर यही रहेगा कि आप खुद शनिवार वाड़ा जाकर देखिए लोगों से मिलिए फिर स्टोरी लिखना स्टोरी काल्पनिक नहीं मुझे रियल चाहिए ठीक है मैं शनिवार वाड़ा के बारे में कुछ प्लान करती हूं इस शनिवार को पूर्णिमा है
कहा जाता है कि पूर्णिमा के दिन वहां पर जाने की मनाई होती है क्यों ना इस वीकेंड आप वहां चले जाओ विजय जी से बात करने के बाद विनीता अपनी स्टोरी की तैयारी करने के लिए लग जाती है सबसे पहले वह गल पर शनिवार वाड़ा के बारे में जानकारी निकालने लगती है शनिवार वाड़ा का निर्माण पेशवा बाजीराव प्रथम ने करवाया था वह मराठा साम्राज्य छत्रपति शाहू महाराज के आधीन एक सेनापति थे गल से और भी सारी जानकारी लेकर विनीता अपने कलीग श्रद्धा के साथ मुंबई से पुणे के लिए निकल गई विनीता मैंने सुनाए शनिवार वाड़ा
बनने के 85 सालों तक पेशवा का अधिकार रहा था मगर उसके बाद फिर अंग्रेजों ने अधिकार जमा लिया हां हां सही सुना है क्या वहां पर सच में कोई आत्मा रहती है हां अगर गल की मानो तो वहां पर 18 वर्षीय नारायण राव की आत्मा है जो हर पूनम को मदद के लिए आवाज लगाती है कई लोगों ने उसकी आवाज सुनने का दावा किया है पूनम वह तो आज ही है इसका मतलब यदि लोगों की कही हुई बात सच होगी तो सच में हमारा सामना नारायण राव की आत्मा से होगा आत्मा से सामना होगा या
नहीं वह तो नहीं पता मगर इतना जरूर पता है कि वह महल अपने अंदर कई सारे रहस्यों को छुपाए हुए हैं कई लोगों ने नारायण राव के आखिरी शब्दों को सुना है आखिरी शब्द सिंहासन की लड़ाई में किसी ने धोखे से नारायण राव को मार दिया था नारायण राव खुद को बचाने के लिए अपने काका को बुला रहे थे उनके आखिरी शब्द थे काका महाला बचाव कहा जाता है आज भी कई लोगों ने पूर्णिमा की रात को नारायण राव की आवाज को सुना है मतलब नारायण राव की आत्मा खुद को मिले धोखे के कारण भटक
रही है हां शायद इस महल के बारे में एक और कहानी है 1828 में इस महल में भयंकर आग लगी थी जो सात दिनों तक जलती रही थी उस आग के कारण महल का बहुत सा हिस्सा प्रभावित हो गया था मगर आज तक उस आग के लगने के बारे में कुछ पता नहीं चला शनिवार वाड़ा के बारे में जितना सुना था यह तो उससे भी ज्यादा रहस्यमय लग रहा है वह तो वहीं जाकर पता लगेगा दोनों बातें करते करते शनिवार वाड़ा तक पहुंच चुकी थी उस महल की खूबसूरती आज भी बरकरार है यह देख दोनों
हैरान थी इस महल को बनाने वाले कारीगरों का जवाब नहीं आज भी कितना खूबसूरत लग रहा है श्रद्धा अपना कैमरा रेडी रखो कुछ लोगों के इंटरव्यू लेंगे और पूरे महल की रिकॉर्डिंग करेंगे ताकि ब्लॉक बनाने में कोई भी दिक्कत ना हो और हां एक बात का विशेष ध्यान रखना हम लोगों को रात होने के पहले यहां से निकलना है दोनों बातें करती हुई शनिवार वाड़ा महल के भीतर दाखिल हो श्रद्धा महल को रिकॉर्ड कर रही थी और विनीता लोगों से बातें करते हुए जरूरी बातें अपनी डायरी में नोट करती जा रही थी श्रद्धा रिकॉर्डिंग करते
हुए महल के पुराने हिस्से में आ गई थी जो जलने के बाद थोड़ा सा नष्ट हो गया था वहां पर श्रद्धा को कोई परछाई नजर आ रही थी श्रद्धा सम्मोहित हो रिकॉर्डिंग करते हुए उस परछाई के पीछे पीछे जाने लगी वहां पर उस समय कोई भी नहीं था श्रद्धा को अपना होश नहीं था तभी उसे अपने कंधे पर किसी के हाथ के होने का एहसास हुआ जो बहुत गर्म था वह तेजी से चीखती हुई पलटी तो सामने विनीता खड़ी थी क्या हुआ यहां अकेले क्या कर रही हो वो वो वहां पर देखो वहां पर क्या
वहां पर अभी कोई था श्रद्धा वह कोई टूरिस्ट होगा मगर तुम यहां अकेले मत घूमो यहां के बारे में हमें जितनी जानकारी इकट्ठा हो सकती है इकट्ठा कर कर के यहां से जल्दी निकल जाएंगे वैसे भी बहुत बड़ा महल है घूमते हुए टाइम लग जाएगा इसीलिए नो नेगेटिव थॉट्स ओके और हां मुझसे ज्यादा दूर मत जाना मेरे आसपास ही रहना हम दोनों साथ में रहेंगे तो ठीक रहेंगे ओके बोलते हुए श्रद्धा कुछ फोटोज लेने लगी अचानक उसे कैमरे में से एक दीवार पर खून के धब्बे ताजे नजर आ रहे थे खून बह रहा था कैमरा
हटाकर जैसे ही उसने दीवार की तरफ देखने लगी तो वहां पर कोई धब्बा नहीं था श्रद्धा को लगा कि यह उसके मन का वहम होगा मगर फिर भी वह तुरंत विनीता के पास जाकर खड़ी हो गई विनीता किसी से बात कर रही थी तभी श्रद्धा को विनीता के पीछे एक मराठा सैनिक नजर आने लगा वह अपनी लाल आंखों से श्रद्धा की तरफ ही घोर रहा था श्रद्धा डर के मारे पीछे की तरफ हटने लगी और वह पीछे हटते हुए एक दीवार से जाकर टकरा गई दीवार एक गुप्त कमरे का दरवाजा था श्रद्धा उस दीवार से
कमरे के भीतर दाखिल हो गई कमरे में चारों और अंधेरा था उसे बाहर निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था वह वहीं से विनीता को आवाज देने लगी विनीता कहां हो तुम प्लीज हेल्प मी विनीता इस तरफ कुछ देर बाद विनीता को श्रद्धा का ध्यान आया तो वह वहां पर नहीं थी विनीता उसका फोन ट्राई करने लगी मगर फोन नॉट रीबल था अब यह श्रद्धा कहां चली गई कहां ढूंढूं उसे फोन भी नहीं लग रहा है शाम का वक्त भी हो गया है हमें यहां से निकलना भी है श्रद्धा कहां हो तुम प्लीज
मजाक मत करो विनीता को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करें डर के कारण उसके शरीर से पसीना निकल रहा था टूरिस्ट अब उस महल को छोड़कर जाने लगे थे कुछ ही लोग बचे थे जिन्हें गार्ड महल के बाहर निकाल रहा था मैडम जी बाहर चलिए अब इसे बंद करने का समय हो गया इसलिए सभी को महल से बाहर निकलना है मेरी कलीग नजर नहीं आ रही है प्लीज इसे ढूंढने में मेरी मदद करो देखिए वो भी दूसरे लोगों के साथ बाहर निकल गई होंगी आपको बाहर मिल जाएंगी प्लीज अभी महल खाली करो
बोलते हुए गार्ड दूसरे लोगों को निकालने के लिए चला गया श्रद्धा मुझे बिना बताए कहीं नहीं जा सकती वो इसी महल में है मगर कहां मुझे उसे ढूंढना होगा एक तरफ विनीता श्रद्धा को ढूंढ रही थी दूसरी तरफ श्रद्धा कमरे से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रही थी मगर अंधेरे में उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था वह चलते हुए दूसरे कमरे में पहुंच गई जहां पर लगभग 18 वर्षीय बालक मराठा सैनिकों की वेशभूषा में खड़ा था पास एक बुजुर्ग राघव बा खड़े थे काका इतनी कम उम्र में लोगों ने मुझे पेशवा घोषित
कर दिया मैं अभी राज काल संभालने के लायक नहीं हूं नारायण राव वो तो आने वाला वक्त बताएगा कि तुम कितने काबिल हो अभी जरूरी काम से रात के वक्त एक विशेष सभा का आयोजन किया गया है तुम सभा में चलने की तैयारी करो राघव बा के कहने पर नारायण राव सभा में जाने के लिए तैयार हो रहा था मगर अभी उसके कमरे में कुछ सैनिक घुस आए और उन्होंने धोखे से नारायण राव को मार दिया काका मला बचाओ हां नारायण मैं आता हूं कहकर वह आगे बढ़े और अपनी कमर से एक कटारी निकालकर उन्होंने
नारायण राव के पेट में डाल दी भाई साहब के मरने के बाद पेशवाई मुझे मिलनी थी मगर उनके छोटे बेटे को मिल गई मगर अभी खानदान में कोई नहीं ब है आज से मराठा साम्राज्य का पेशवा मैं हूं राघोबा नारायण जो दर्द के कारण बेसो था राघू बाग की बात सुनकर गुस्से में बोला आपने इस महल इस पेशवाई के लिए मुझे मारा है मगर मेरे बाद अब सिंहासन पर कोई नहीं बैठेगा कहते हुए नारायण राव की मौत हो गई आज पूर्णिमा की रात पूरा इतिहास खुद को दोहरा रहा है उस इतिहास की साक्षी बनी श्रद्धा
की हालत खराब थी तभी उसे अपने कंधे पर किसी के हाथ का एहसास हुआ उसे लगा विनीता होगी विनीता देखा तुमने जो कुछ भी अभी यहां पर हुआ हा कहते हुए व जैसे ही पलटी सामने नारायण राव खड़ा था मैंने कहा था ना इस महल में कोई नहीं रुक सकता मगर अब तुम सब सारी सच्चाई जान चुकी हो तुम सारी सच्चाई लोगों को बतानी होगी कहते हुए नारायण रा से अदृश्य हो गया महल के बाहर खड़ी विनीता सुबह होने का इंतजार कर रही थी ताकि श्रद्धा को ढूंढ सके सुबह सिक्योरिटी के बार-बार मना करने के
बावजूद विनीता पूरे महल में श्रद्धा को ढूंढ रही थी महल के आखिरी कोने में उसे श्रद्धा बेहोश मिली थैंक गॉड श्रद्धा तुम सही सलामत हो मैं डर गई थी कहते हुए वो श्रद्धा को होश में लाने की कोशिश करने लगी होश में आने के बाद श्रद्धा के चेहरे पर डर साफ नजर आ रहा था श्रद्धा तुम अचानक से कहां चली गई थी मैं सारी रात शनिवार वाड़ा के बाहर खड़े होकर तुम्हारा इंतजार कर रही थी श्रद्धा ने विनीता को कल रात का अपना पूरा एक्सपीरियंस सुनाया यह सुनकर विनीता की आंखें फटी की फटी रह गई
श्रद्धा के अनुभव पर विनीता ने पूरी कहानी लिखी और विजय जी ने उस पर एनिमेटेड स्टोरी बनाई तो उस स्टोरी ने [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ