दोस्तों हर महिला यह चाहती है कि उसका पति उसके वश में रहे और इसके लिए कुछ महिलाएं तो कुछ भी करने को तैयार हो जाती हैं ऐसी एक नई नबली दुल्हन थी जिसके मन में हसरत थी कि वह भी अपने पति को अपने बश में रखे क्योंकि उसका पति बहुत सारे पैसे कमाता था और जितना भी कमाता था अपने घर में दे देता था तो वह सोचती है कि अगर यह मेरे वश में हो जाएगा तो फिर मैं इसके सारे रुपए ऐठ लूंगी अपने पास रखूंगी तो इसके लिए दोस्तों वह एक वशीकरण करने वाले बाबा
का सहारा लेती है तांत्रिक का सहारा लेती है लेकिन वह तांत्रिक इतना शातिर था इतना चालाक था कि उसे बातों में उलझा करर उसकी आबरू लूट लेता है ना सिर्फ उसके साथ ऐसा करता है बल्कि उसके घर की दो और महिलाओं के साथ वह यही काम करता है और अंत में कुछ ऐसा होता है कि जिसको सुनकर आपके पैरों के तले जमीन खिसक जाएगी दोस्तों एक बहुत ही हैरान करने वाली कहानी नी है आइए जानते हैं पूरी कहानी इस वीडियो में लेकिन वीडियो में आगे बढ़ने से पहले बस वही रिक्वेस्ट वीडियो को लाइक कर दीजिए
चैनल को भी सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि मेरा हौसला बढ़ता रहे दोस्तों एक कहानी है पश्चिम बंगाल की एक परिवार होता है और उस परिवार को मैं अगर कोई भी परेशानी होती थी तो सबसे पहले वह तांत्रिक के पास जाते थे झाड़ फूक करने वाले ओझा सोखा के पास जाते थे यहां तक कि कोई बीमार भी हो जाता था तो उसे हॉस्पिटल बाद में ले जाते थे पहले एक दो दिन वो दू भभूत से ही काम चलाते थे तो उसी परिवार में एक लड़की होती है जिसका नाम सविता होता है और उसकी एक छोटी बहन जिसका
नाम अंशिका होता है तो सविता ने भी बचपन से यही सब देखा था उसे भी इन चीजों पर विश्वास हो जाता है कि यह सब चीजें सत्य होती हैं और इसीलिए जब उसकी शादी हुई और जिससे शादी हुई बहुत अच्छे पैसे कमाता था उसका नाम कपिल होता है जब वो अपने घर जाती है तो देखती है कि उसका पति तो पैसे बहुत कमाता है लेकिन सारे पैसे जो है वह अपने पिता को दे देता था यानी कि उसके ससुर को दे देता था और उसके ससुर जो थे वह मनमाने तरीके से पैसा उड़ाते थे पैसों
का दुरुपयोग करते थे उसके हिस्से में कुछ भी नहीं आता था और इस तरीके से जब दो-चार महीने बीतते हैं तो एक दिन अपने जेठानी से कहती है उसकी एक जेठानी भी होती है उसके पति दो भाई थे तो जेठानी से कहती है कि क्या घर में ऐसे ही चलता है कि हमारे पति जो है पैसा कमा कमा कर देते हैं और ससुर जी उनके पैसों को पर जो है करते हैं मित्र मंडली में बैठे रहते हैं उन पर खर्चा करते हैं पैसों का दुरुपयोग करते हैं उसकी जेठानी कहती है कि अब तुम आई हो
तो तुम ही देखो मैं तो 5 साल से ऐसे ही देख रही हूं और इसी तरीके से करते हैं और अगर पति को कुछ बोलो तो पति मानने को दौड़ता है कहता है तुझसे इस बात से क्या मतलब है तुझे खाना कपड़ा मिल रहा है तू घर में रह खुश रह बच्चे को देख यही सब हो रहा है पिछले 5 सालों से मैं तो बहुत परेशान हूं तो वह कहती है कि तुम्हे कुछ करो तुम ही कोई उपाय बताओ तो सविता कहती है कि मेरे पास तो ऐसे ऐसे उपाय हैं कि अगर मैं यह कह
कर दूं तो यह एक चवन्नी भी किसी को नहीं देगा हमारे जो पति हैं वह हम ही को ही देंगे वह कहती है ऐसी कौन सी तरकीब है तुम्हारे पास कहती है ठीक है मुझे बस माइके जाने दो फिर मैं कुछ करती हूं बस तुम भी उसमें मेरा साथ देना वह कहती है ठीक है अगर तुम ऐसा कुछ करोगे तो मेरा साथ तो हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा अब दोस्तों उसके बाद अपने माइ के जा ती है और अपनी मां से सारी कहानी बताती है अब सविता की मां जो थी उसका इन सब पर अटूट विश्वास
था क्योंकि वही यह सब ज्यादा करती थी वह कहती है कि ठीक है कोई बात नहीं एक बाबा है उनके पास चलते हैं दोस्तों उस बाबा का नाम ज्ञान लाल होता है उर्फ ज्ञानी बाबा लोग उसे बाबा ज्ञानी बाबा ज्ञानी कहकर व अपना बोर्ड भी लगा रखा था और उसी नाम से जाना जाता था तो वह उसके पास लेकर जाती है अपनी समस्याएं वो दोनों कहती हैं दोस्तों जो ज्ञानी था वह सबिता को ऊपर से नीचे तक देखता है उसे निहारता है उसके बाद कहता है कि यह बताओ समस्या किसकी है तो सविता कहती है
कि मेरी है तो कहता है ठीक है फिर जो ये तुम्हारी मां है इनको बाहर भेज दो क्योंकि मैं जो भी उपाय बताऊंगा अकेले में ही बताऊंगा यह ऐसी बातें हैं कि जो कि तुम्हारी मां के सामने नहीं कर सकते उसकी मां खुशी-खुशी वहां से चली जाती है क्योंकि उसका बाबा के ऊपर अटूट विश्वास था जब वोह चली जाती है तो तो फिर वो कहता है कि ऐसा है कि अभी तुम्हारी मां यहां पर है तुम कल आना और फिर मैं तुम्हें कल बताऊंगा अभी यहां पर इतने सारे लोग हैं मैं तुम्हें क्या ऐसे बता
दूं इसमें टाइम लगेगा क्योंकि तुम्हारी समस्या गंभीर है उसने कहा ठीक है अब दोस्तों फिर वो अगले दिन जब जाती है और उसके बाद फिर उसके सामने बैठती है कमरे में तो बाबा उससे कहता है कि देखो ऐसा है कि तन मन धन सभी चीजें इसमें लगेंगी और तुम्हें पूर्ण विश्वास है तभी कुछ हो पाएगा वरना बहुत सारे ऐसे भी लोग आते हैं कि जिनको मेरे ऊपर विश्वास नहीं रहता तो उनका उल्टा और नुकसान हो जाता है तो इसीलिए अभी वक्त है तो तुम हां या ना कहो फिर मैं कुछ करता हूं तो वो बोली
बाबा मुझे पूरा विश्वास है और मेरी मां को आपके ऊपर विश्वास है तो आप जैसा कहेंगे मैं वैसा करूंगी कहता है ठीक है अब दोस्तों उसके बाद एक गिलास पानी उसको पीने के लिए देता है कहता है इसको पी लो इससे जो है अंतरात्मा जो है वो दुरुस्त हो जाएगा और तुम्हारी जो है मन की शुद्धि हो जाएगी अब जैसे ही वह पानी पीती है दोस्तों पानी पीने के बाद दो ही मिनट बाद उसे नशा छाने लगता है और उसके बाद उसे समझ में नहीं आ रहा कि उसके साथ क्या हो रहा है वह जो
है जब नशे में हो जाती है तो जो ज्ञानी बाबा था वह उसके साथ उल्टी सीधी हरकतें करने लगता है तो वह उसका विरोध करती है कहते है बाबा यह क्या है आप यह क्या कर रहे हैं वह कहता है कि कुछ भी मत बोलो मैं मैंने तुम्हें बोला था तुम्हारी समस्या जो है गंभीर है और अगर तुम कुछ करोगी तो फिर ऐसा कुछ हो नहीं पाएगा उल्टा तुम्हारा बहुत नुकसान होगा वह जो है उसे बातों में उलझा देता है और क्योंकि उसका विश्वास था बचपन से यही सब वो जानती थी कि बाबाओ में बड़ी
ताकत होती है झाव सोखा में बड़ी ताकत होती है तो इसीलिए ज्यादा कुछ विरोध करती नहीं है और उसके बाद व अपनी आंखें बंद कर लेती है और निढाल से उसके सामने पड़ जाती है अपने आप को उसके हवाले कर देती है उसके बाद बाबा ज्ञानी जो है उसकी आबरू लूटता है और उसके बाद जो है जब फिर एक पुड़िया बनाता है पुड़िया में कुछ दवा देता है कहता है पहले जाकर इसको तुम अपने घर पर खा लेना और जो मैं तुम्हें दूंगा तुम्हारे पति को खिलाने के लिए तो उसके लिए किसी कुंवारी लड़की का
होना जरूरी है अगर वह आएगी वह अपने हाथ से खिलाएगी तो ही फायदा होगा वरना नहीं हो पाएगा अब सविता जो है वह सोचती है मैं क्या करूं कुछ उसके समझ में नहीं आता वो तो लुट पिट चुकी थी उसके बाद वो पुड़िया उठाती है और उसके बाद कहती है मुझे कब आना होगा वो कहता है कि अगले हफ्ते आ जाना उसके बाद वहां से चली जाती है अपने घर पर चली जाती है और उसकी मां कहती है क्या हुआ बाबा ने क्या कहा तो उसने कहा कि उन्होंने बोला है कि ऐसे-ऐसे किसी को लेकर
आना और उसके बाद फिर वोह दवा देंगे तो वो कहती है ठीक है और करना क्या है अंशिका को लेकर जाना अगले हफ्ते जब भी जाना और बाबा बहुत अच्छे हैं काम कर देंगे जरूर काम कर देंगे वह कहती है ठीक है अब दोस्तों उसके बाद फिर जब अगला हफ्ता आया तो अंशिका को लेकर वो अपने साथ गई और उसके बाद वह दोनों जब बाबा के सामने गई वहां पर बैठी तो बाबा ने सविता से कहा कि ऐसा है तुम बाहर चली जाओ जो भी बातें मैं इसी को बताऊंगा अब दोस्तों जो सविता थी व
बाबा की हरकतों को जानती थी वह जो है उसके साथ जैसी हरकत कर चुके थे वह सोचती है कि कहीं इसके साथ भी ऐसा ना यह करे कहती है बाबा इसमें क्या परेशानी मेरे पति को ही तो खिलाना है आप बता दो जो भी जैसे भी करके खिलाना है तो कहता है कि नहीं ऐसी बात नहीं है तुम्हारे सामने नहीं बता सकता तो व कहती है ठीक है आप फोन पर बता देना इसको घर पर यह जाएगी फोन पर बता देना आप अभी जो देना है वह दे दीजिए तो बाबा भी समझ जाता है कि
यह इतने आसानी से मानेगी नहीं और इसके मन में जो चल रहा है व समझ जाता है फिर वो कहता है ठीक है जाओ मैं फोन पर ही बता दूंगा वो उन दोनों को भेज देता है उसके बाद शाम को जब सविता से बात होती है और सविता अंशिका से बाबा की बात करवाती है अब चूंकि अंशिका की भी शादी होने वाली थी किसी लड़के से बात चल रही थी चार छ महीने बाद उसकी शादी होने वाली थी तो वह जो है अंशिका से कहता है कि तुम्हारी बहन ही नहीं चाहती कि तुम्हारा भला हो
तुम्हारी बहन ही तुम्हारी दुश्मन है अब अंशिका बात सुनती हैरान हो जाती है कहती बाबा आप कैसी बात कर रहे हैं मेरी बहन कैसे मेरी दुश्मन हो गई तो वो बोला क्योंकि जो जिससे तुम्हारी शादी होने वाली है वह उसे अपने बस में करना चाहती है इसीलिए यह जो है इसको कम मत समझना और अगर तुम्हें पूरी बात जाननी है तो तुम इससे बिना बताए मेरे पास कभी अकेले में आना फिर मैं तुम्हें बताऊंगा अंशिका के मन में यह बातें बैठ जाती हैं क्योंकि अक्सर उसने सुन रखा था कि पड़ोसी ने पड़ोसी को के ऊपर
कुछ करा दिया उसके बच्चे को कुछ करके खिला दिया यह सब उसने बचपन से ही सुनी थी तो उस भी विश्वास पड़ जाता है कि क्या पता जो सविता है उसने जरूर कोई चाल वो चल रही होगी अंदर-अंदर इसीलिए वो कहती है ठीक है बाबा मैं आपके पास आऊंगी यह ससुराल जाने वाली है जब यह चली जाएगी तब मैं आपके पास आऊंगी अब दोस्तों उसके बाद क्या होता है कि सविता जो है अपने पति को अपने घर पर बुलाती है माय के बुलाती है और उसके बाद किसी तरीके से दवा क्या था वो पुड़िया में
कुछ काजू बादाम वगैरह थे वही जो है उसे खिलवा देती है और उस उसके बाद फिर अपने पति के साथ अपने ससुराल चली जाती है अब इधर अंशिका के मन में जो तूफान उठ रहा था जो हलचल मची हुई थी वह सोचती है कब मैं बाबा के पास पहुंच जाऊं और जाकर उनसे पूछूं कि आखिर क्या य इसने मेरे साथ किया है और कैसे मेरी दुश्मन है वह जो है उनसे बात करती है नंबर अपना ले लेती है सविता से और उसके बाद एक दिन वह बाबा के पास पहुंच जाती है उसके बाद कहती है
कि बताइए बाबा वह कहते हैं कि जो तेरी बहन है वह तेरे पति को अपने वश में करना चाहती थी बताओ कितनी वह शातिर थी इसीलिए व जो है दवाई लेकर गई है तेरे हाथों से अपने पति को खिलवा के लिए अब वो चौक जाती है कहती है मुझे क्या करना चाहिए तो कहता है कि कुछ ऐसा करता हूं कि तू जिस भी चीज पर हाथ रखेगी वह चीज समझ ले तेरी हो जाएगी इसीलिए अब तू अपने पति को भी अपने बस में कर सकती है जिसको मर्जी उसको अपने बस में कर सकती है इसीलिए
जो है मेरे पास उपाय है तुझे जो है जैसा मैं कहूंगा वैसा करना पड़ेगा अंशिका कहती है ठीक है अब दोस्तों उसे भी व उसी तरीके से गिलास पानी देता है वह पीती है उसके बाद वह भी डगमगाने लगती है और उसके बाद फिर उसके साथ वही हरकत करता है अंशिका भी विरोध करती है बाबा आप यह क्या कर रहे हैं वह कहता है कि तुम्हारी भलाई के लिए कर रहा हूं अगर तुम मुझे रोको गी तो फिर इससे भी तुम्हारा बुरा हाल हो जाएगा जो है अपनी आंखें लाल लाल कर लेता है उसके बाद
वह डर जाती है और उसके बाद वह भी वैसे ही सविता की तरह अपनी आंखें बंद कर लेती है जो बाबा था उसको भी अपने तरीके से लूटता है और उसके बाद व अंशिका से कहता है कि तुम्हें जिसको भी अपने बस में करना है सास को करना है क्योंकि उसकी अभी शादी होने वाली नहीं थी वह सोचती है कि अगर मैं सबको अपने बस में कर लूंगी तो वहां जाकर रानी की तरह रहूंगी कहता है कि सास को करना है तो एक दिन आना पड़ेगा ससुर को करना है तो एक दिन आना पड़ेगा इसीलिए
लिए तुम्हें आना पड़ेगा अंशिका ने सोचा कि चलो जो भी हुआ अब बाबा जो कह रहे हैं सही कह रहे हैं दोस्तों उसके बाद और व एक दो बार उसके पास जाती है उसी तरीके से वह उसके साथ करता है जैसा कि पहली बार किया था जैसा कि सविता के साथ किया था और उसके बाद वही एक एक पुड़िया उसको पकड़ा देता था अब दोस्तों पढ़ी लिखी थी नहीं और वहां पर जादू टोना यही सब चलता था तो वह ज्यादा कुछ सोचती नहीं है इसके बारे में कि उसके साथ हो क्या गया और उसका क्या
चला गया वह ज्यादा कुछ सोचती नहीं है सोचती है भगवान है और इनको सब कुछ पता है इनके करने से क्या होता है उसके बाद अपने घर आ जाती है और अपने मां से कहती है कि मां ऐसी ऐसी बात है हालांकि सारी बात नहीं बताती कि उन्होंने पानी पिलाया उसके साथ क्या किया तो उसकी मां कहती है चल ठीक है तेरा भी काम हो गया अब जब सविता उधर अपने ससुराल गई तो उसकी जेठानी ने पूछा अरे क्या हुआ बाबा ने कुछ बताया क्या बताया कुछ मुझे भी बताओ तो उसने बोला कि हां बताया
है और उन्होंने जो कुछ दिया था जैसे जैसे बोला था वैसे-वैसे तो खिला दिया है अब देखो क्या होता है जेठानी कहती है मुझे भी उनके पास लेकर चलो और मुझे भी बता दो मैं भी उनसे कुछ उपाय करवा दूं अपने पति के लिए वह कहती है कि अरे पहले मैंने जो खिलाई है उसका तो कुछ असर होने दो कुछ असर दिखे तो फिर जाना लेकिन वो अब सोचती है कि शायद यह मेरा भला नहीं चाहती है इसीलिए उसने कहा कि नहीं नहीं मुझे बता दो मैं जाऊंगी और मेरा जाना बहुत जरूरी है मैं तो
काफी दिनों से परेशान हूं तो व उसे मना करती है लेकिन अब वो जित पर अड़ जाती है तो यह सोचती है कि कहीं यह ना सोचे कि मैं इसका भला नहीं चाहती हूं और वह यही सोचती भी थी उसकी जठा नहीं सविता के बारे में कहती है ठीक है अब दोस्तों चूंकि सविता का और उसके जेठानी का माय का पासपास में ही था दोनों के घर से जो तांत्रिक था व 4-6 किलोमीटर की दूरी पर था कहती है ठीक है मायके जाना तब आप वहां पर चली जाना यहां से तो जाना पॉसिबल नहीं है
और वहां पर जाने के बाद लेकिन एक काम करना कि अगर वह कोई पानी वगैरह देंगे तो उसको पीना मत अब उसकी जेठानी ने कहा क्यों ऐसी क्या बात है उसमें तो बोली कि पता नहीं पीने के बाद कुछ खराब सा लगता है और क्या हो रहा है साथ में कुछ पता नहीं चलता वह कहती है कि ठीक है अब वहां से तो व चली जाती है लेकिन जब वह बाबा के पास जाती है और बाबा जो है उसको फिर उससे वही बातें पूछ है कि तन मन धन सबसे लगना पड़ेगा वह कहती है ठीक
है बाबा मैं तो लगूंगा करूंगी तो फिर वह कहता है ठीक है ये लो एक गिलास पानी पियो अब वो सविता की बातें उसे याद आ जाती है वह कहती है नहीं बाबा इसको पीना जरूरी है क्या डॉक्टर ने मुझे मना कर रखा है मेरी दवा चल रही है उन्होंने कहा है कि एक ही नल का पानी पीना तो इसीलिए मैं या तो अपने मायके का पीती हूं या फिर ससुराल का पीती हूं और उसके अलावा में कहीं का पानी नहीं पीती अब इस पर जो बाबा था वह समझ जाता है कि इसकी देवरानी ने
जरूर इसे कुछ ना कुछ पट्टी पढ़ाया है तो फिर बाबा उससे कहता है कि तुम्हें डॉक्टर ने नहीं मना किया है तुम्हें जिसने भेजा है उसने मना किया है क्योंकि व तुम्हारा भला नहीं चाहती और अभी तुम्हें पता नहीं है कि तुम्हारे साथ क्या-क्या हो रहा है वो बोलती है अब वो सुनती है तो सही बात है सविता ने उसको मना कर दिया था वह कहती है बाबा क्या हो रहा है वह बोलता है तुम्हारा जो पति है मुंबई में कमाता है वह किसी और के बश में है वह आधे पैसे उसको देता है आधे
पैसे तुम्हारे घर पर भेजता है और कुछ दिन में ऐसा होगा कि वह तुम्हें और तुम्हारे बच्चे को बिल्कुल भूल जाएगा तुम कहीं की नहीं रहोगी अब जैसे यह बात सुनती है उसकी जठा नहीं हैरान हो जाती है कहती है बाबा मुझे कुछ नहीं पता तो बोलता है कि हां तो इसीलिए तुम्हें नहीं पता है ना तुम गवार हो और जिसने तुम्हें भेजा है व भी नहीं चाहती कि तुम्हारा भला हो मैंने उसको बताया था कि तुम्हारे घर में एक और औरत है और उसके भी साथ यही दिक्कत है उसका पति तो किसी और के
बस में है उसने तुमसे नहीं बताया वोह बोली बाबा उसने तो नहीं बताया तो बोला कि हां तो तुम्हारा भला चाहती तो बता देती ना अब उसके बातों में व आ जाती है इस तरीके से बातें करता है वह दोस्तों व पानी पी लेती है उसके बाद उसके साथ भी वही सब होने लगता है वो ज्यादा कुछ विरोध नहीं नहीं करती निढाल सी व भी पड़ जाती है अपने आप को उस बाबा के हवाले कर देती है और उसके बाद फिर वह भी उसे जी भर के लूटता है और जब उसका मन भर जाता है
फिर उसे वह पुड़िया देता है बाद कहता है जाओ अपने घर जाओ जब बुलाऊंगा तब आ जाना अब दोस्तों जो उसकी जठा नहीं थी उसके साथ जो कुछ बाबा ने किया था कहीं ना कहीं उसको अच्छा भी लग जाता है अब जब वो अपने घर जाती है तो फिर वह बाबा से बातें करने लगती है और फिर वो अपने बच्चे को छोड़कर सविता के हवाले करके क्योंकि करीब तीन चार साल का उसका बेटा था तो उसको उसके हवाले करके वो खुद ही बाबा के पास अपनी मर्जी से जाने लगती है सविता जब उसे रोकती है
टोक है क्योंकि वो समझ जाती है कि इन दोनों का अब तो चक्कर चलने लगा ये तो उसके प्यार में ही पड़ गई है उसने उससे पूछा भी था कि क्या बाबा ने पानी दिया था पिया था आपने उसने बोला नहीं मैंने नहीं पिया था तुमने जब मना कर दिया तो मैं क्यों पिऊंगी लेकिन जब दोनों की बातें होने लगी और अक्सर फोन पर काफी देर तक बातें होती थी सविता समझ जाती है कि मामला गड़बड़ है फिर एक दिन सविता उसे मना करती है कि यह सब गलत है कहां चली गई उसके बातों में
फंस गई क्योंकि उसने जो भी कुछ दिया था हमारे पति तो मेरे बस में है नहीं अभी भी वो पैसा वैसा नहीं देता है तो उसकी जेठानी कहती है कि तुम चुप ही रहो और जो भी कुछ किया था पहले तुमने ही किया था तो इसीलिए तुम्हारे बारे में मुझे सब पता है और अगर तुमने मेरे बीच में टांग अड़ने की कोशिश की हम दोनों के बीच में तो फिर मैं अगर मैं इस घर से जाऊंगी मेरी बातें फैलेंग तो तुम्हारी भी बात मैं जो है तुम्हारे पति से बोल दूंगी कि तुम भी वहां पर
गई थी और तुम्हारे साथ भी उसने ऐसा ही किया था अब वह खुलकर सब कुछ बता देती है कि मुझे वह अच्छा लगने लगा है मैं तो उसके पास जाऊंगी करीब 40 45 साल ज्ञानी बाबा की उम्र होती है ज्ञान लाल की उम्र होती है और यह भी करीब 30 साल की थी तो इसीलिए जो है अब वह उसके पास जाने लगती है उसका मुंबई पति जो है मुंबई से सात आठ महीने पर एक बार आता था और इधर सविता का जो पति था वह तो हर महीने में ही आ जाता था क्योंकि वह कोलकाता
में ही काम कर रहा था तो व कहती है कि मैं जैसा कर रही हूं मुझे करने दो तुम अपने काम से मतलब रखो अब सविता जो है वह दुखी हो जाती है कि एक तो मेरा पति मेरे बस में नहीं हुआ ऊपर से इसको जो है उसने फंसा लिया और फिर अपनी मां से जब उस वो बात कर रही थी तो उसे यह भी पता चला कि अंशिका भी जाती रहती है उसके पास तो उसका तो सब कुछ बर्बाद हो चुका था लूट चुका था वो सोचती है कि कैसे भी करके इस बाबा को
सबक सिखाना है अब दोस्तों कुछ दिन बाद जो है जो उसका जेठ था उसके जेठानी पति था वो मुंबई से घर पर आ जाता है कुछ दिनों के लिए आ जाता है अब इधर जो उसकी जेठानी थी वो महीने में एक दो बार जरूर जाती थी ज्ञानी के पास लेकिन जब इधर पिछले एक महीने में नहीं गई तो वो बार-बार फोन करने लगा कि एक बार आ जाओ तुम कहां रहती हो वह कहती है कि कुछ दिन सबर करो अभी मेरा पति आया हुआ है जब वह चला जाएगा तब मैं आया करूंगी लेकिन दोस्तों वह
बाबा इतना बेचैन हो जाता है कि उसका जो है उसके बिना रहना मुश्किल हो जाता है वह कहता है ठीक है अगर तुम नहीं आ सकती तो किसी दिन मौका निकालो मैं ही तुम्हारे घर आ जाता हूं तो वह कहती है ठीक है मैं सोचूंगी अब वो इतना मजबूर कर देता है कि एक दिन जो है मौका लग ही जाता है जो उसका था वह किसी शादी में उसको जाना था बारात जाना था और उसी समय उसको फोन करती है कि एक काम करना तुम घर पर आज आ जाना और वह जो है घर पर
नहीं रहेंगे अब दोस्तों इधर वह बाबा खुश हो जाता है वह उसके घर के लिए निकलता है रात को 9:00 बजे रात को उसके कमरे में घुस जाता है इधर जो सविता थी इन सब चीजों पर नजर रखी हुई थी और वह जो है फिर अपने जेठ को फोन लगा देती है कि तुम कहां पर हो आकर देख लो तुम्हारे घर में क्या हो रहा है तुम्हारे कमरे में क्या हो रहा है अब दोस्तों सारी बातें उसको बता देती है फौरन वो रास्ते से ही लौट आता है और आकर जो है दरवाजा पीटने लगता है
कुछ देर में दरवाजा भी टूट जाता है और फिर उसके बाद अंदर से जो ज्ञानी बाबा था उसको जो है वह पकड़ता है पहले तो उसकी खूब धुलाई करता है उसके बाद पुलिस बुलाई जाती है पुलिस आती उसे पकड़ कर ले जाती है और उससे जब पूछताछ करती है तो दोस्तों कहता है कि मुझे याद ही नहीं है मैंने कितनी महिलाओं के साथ ऐसा किया है और मैं ऐसे ही करता था अब दोस्तों फिलहाल वह तो जेल में चला जाता है लेकिन अंधविश्वास के चक्कर में और पति को वश में करने के चक्कर में दोस्तों
व किसी और के बस में हो जाती हैं अपना सब कुछ चौपट कर लेती हैं सारा कुछ लुटा देती हैं उनका घर बर्बाद हो जाता है दोस्तों हर किसी को पता होता है किन बाबाओं का अधिकतर बाबाओं का काम क्या है हालांकि सारे लोग ऐसे नहीं सबको नहीं कह सकते लेकिन 90 पर से ऊपर मान लीजिए कि ऐसे ही तांत्रिक और ओझा सोखा जो है वह ऐसे ही करते हैं हर कोई जानता है लेकिन उसके बावजूद जो है वह लोग उनके चक्कर में फंस जाते हैं और महिलाएं तो अक्सर उनके चक्कर में फंस जाती हैं
दोस्तों फिलहाल बहुत बबाल होता है किसी तरीके से वह लोग अपने घर को बचा पाती हैं और अपने पति से उनका समझौता होता है लेकिन दोस्तों इस तरीके की घटनाएं समाज में होती रहती हैं लाल जैसे लोग इस देश में भरे पड़े हैं और जिन पर लोग यकीन कर लेते हैं लेकिन दोस्तों क्या सारी गलती उस बाबा की ही थी क्या सविता की गलती नहीं थी क्या उसकी मां की गलती नहीं थी क्या अंशिका की गलती नहीं थी क्या सविता के जेठानी की गलती नहीं थी आप कमेंट करके जरूर बताएं और अगर यह वीडियो अच्छी
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