रुकिए एक पल। [संगीत] आज रात जब घर शांत हो जाए, जब बाहर का शोर थम जाए, तब एक सवाल खुद से पूछिए। दुनिया में 8 अरब लोग हैं। हर गली में अजनबी चेहरे हैं। हर शहर में अनगिनत जिंदगियां हैं। फिर भी आपकी जिंदगी में वही एक इंसान क्यों आया? उसी से मुलाकात क्यों हुई? उसी से प्यार क्यों हुआ? और उसी के साथ आपने सात फेरे क्यों लिए? क्या यह महज एक संयोग था? या कोई पुरानी कहानी थी जो दोबारा शुरू हो रही थी। जब आप शादी के मंडप में बैठे थे, हाथ में हाथ था, आंखों
में सपने थे, तब शायद आपने सोचा हो कि यह मेरी पसंद है, [संगीत] मेरा फैसला है। लेकिन अगर मैं आपसे कहूं कि जिसे आप अपनी मर्जी समझ रहे थे, वह असल में एक लिखी हुई पटकथा थी जो आपके जन्म [संगीत] से भी पहले लिखी जा चुकी थी। गरुड़ पुराण और हमारे प्राचीन कर्मशास्त्र कुछ ऐसा ही कहते हैं। वे कहते हैं कि विवाह कोई इत्तेफाक नहीं है। यह दो आत्माओं का रोमांटिक मिलन नहीं है। यह दो पुराने हिसाब [संगीत] किताबों का टकराव है। दो अधूरे सौदों का पूरा होना है। आज हम उस सच्चाई की तरफ चलेंगे
जो शायद आपको थोड़ी बेचैन करे लेकिन जो आपके बहुत काम आएगी। आज हम जानेंगे कि आपका जीवन साथी सच में आपका जीवन साथी है या पिछले जन्म का कोई लेनदार है जो अपना कर्जा वसूलने आया है। यह वीडियो उन लोगों के लिए है जो अपनी शादी में खुश हैं और खासतौर पर उनके लिए जो घुटन [संगीत] में जी रहे हैं जो रात को तकिए में मुंह छिपा कर रोते हैं और सोचते हैं मैंने क्या किया था जो मेरे साथ यह हो रहा है। सबसे पहले उस झूठ को तोड़ते हैं जिसे हम पसंद कहते हैं। आज
के जमाने में हमारे पास डेटिंग एप्स हैं। मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स हैं। [संगीत] हम तस्वीरें देखते हैं, प्रोफाइल पढ़ते हैं और सोचते हैं कि हम खुद फैसला ले रहे हैं। लेकिन अध्यात्म कहता है यह सब सिर्फ एक नाटक है। पर्दा उठने से पहले ही यह तय हो चुका होता है कि कौन किसके साथ मंच पर [संगीत] खड़ा होगा। गरुड़ पुराण के प्रेत खंड में एक बड़ा रहस्य छुपा है। जब एक जीवात्मा मृत्यु के बाद यमलोक की यात्रा पूरी करके दोबारा धरती पर आती है तो जन्म की छठी रात को विधाता [संगीत] उसके माथे पर कुछ रेखाएं लिख
देते हैं। इसे ललाट रेखा कहते हैं। और इन रेखाओं में तीन चीजें अटल होती हैं जिन्हें बदला नहीं [संगीत] जा सकता। पहली आपकी मृत्यु का समय। दूसरी आपके माता-पिता और तीसरी आपका जीवन [संगीत] साथी। जब आप अभी मां के गर्भ में महज एक छोटी सी जीव कोशिका थे तब भी यह लिखा जा चुका [संगीत] था कि आप किसके साथ जीवन बिताएंगे। लेकिन यह लिखता कौन है? क्या ईश्वर ऊपर बैठकर लॉटरी निकालते हैं? नहीं। ईश्वर बहुत न्यायप्रिय है। वे पक्षपात नहीं करते। यह जोड़ा ईश्वर नहीं बनाता। यह जोड़ा बनाता है आपका खुद का ऋणानुबंध। यह शब्द
ध्यान से समझिए। ऋण यानी कर्ज। अनुबंध यानी बंधन। यानी वो पुराना हिसाब जो कई जन्मों से अधूरा पड़ा है। जरा एक पल के लिए आंखें बंद करके सोचिए। पिछले किसी जन्म में आपका किसी के साथ कोई गहरा लेनदेन था। शायद आपने उसे धोखा दिया था। शायद उसका पैसा हड़प लिया था। शायद उसकी भावनाओं से खेला था या हो सकता है उसने आपकी बहुत सेवा की। बहुत प्यार दिया और आपने उसे कुछ नहीं लौटाया। जब आप मरे शरीर यहीं राख बन गया। लेकिन वो इमोशनल अकाउंट वो अधूरा लेनदेन वो [संगीत] आत्मा के साथ चिपक कर रह
गया। प्रकृति का नियम है हर कर्ज चुकाना पड़ता है। [संगीत] तो अगले जन्म में प्रकृति उन दोनों आत्माओं को एक ऐसी जगह लाकर खड़ा कर देती है जहां से भागा नहीं जा सके। जहां दोनों एक [संगीत] ही छत के नीचे एक ही थाली में खाएं। एक ही बिस्तर पर सोएं। और वह जगह है विवाह। क्योंकि कर्ज चुकाने के लिए इससे बेहतर मंच [संगीत] और कोई नहीं। अब बात करते हैं उस सवाल की जो शायद बहुत से लोग पूछते हैं। शादी में अग्नि के फेरे क्यों? पानी क्यों नहीं? हवा क्यों नहीं? क्योंकि अग्नि को हमारे वेदों
में सबसे बड़ा साक्षी माना गया है। अग्नि वह माध्यम है जो हमारी बात देवताओं तक पहुंचाती है। लेकिन इसका एक और गहरा अर्थ है। अग्नि कर्ज की प्रतीक भी है। [संगीत] जब आप उन सात फेरों में उस आग के चारों ओर घूमते हैं तो आप उस ब्रह्मांडीय ऊर्जा के सामने एक वचन दे रहे होते हैं। यह वचन है हम अपने पिछले जन्मों के सारे अधूरे कर्मों को इस जन्म में मिलकर पूरा करेंगे। वे सात फेरे कोई रस्म नहीं है। वे एक रूहानी हथकड़ी है [संगीत] जो आप अपनी मर्जी से पहनते हैं। लेकिन जिसकी चाबी आपके
पास नहीं होती। चाबी होती है समय के पास। अब गरुड़ पुराण और कर्म सिद्धांत के [संगीत] अनुसार तीन तरह के विवाह होते हैं। और आप अपनी शादी को देखिए। आपको खुद पता चल जाएगा कि आप किस [संगीत] कैटेगरी में हैं। पहला शत्रु विवाह। क्या आपने ऐसे जुड़े देखे हैं जहां पतिप के [संगीत] बीच कोई प्रेम नहीं। जहां हर दिन एक युद्ध है जहां एक दूसरे को नीचा दिखाना जैसे रोज की आदत हो गई हो। अगर आप खुद इस दौर में हैं तो शायद यह सोचते होंगे कि मैंने क्या किया जो मुझे ऐसा साथी मिला। सच
यह है यह व्यक्ति इस [संगीत] जन्म में आपका पति या पत्नी बना है। लेकिन पिछले जन्म में यह आपका जानी दुश्मन था या आपने [संगीत] इसके साथ ऐसा अन्याय किया था जिसे यह भूल नहीं पाया। उस वक्त यह कमजोर था [संगीत] कुछ कर नहीं पाया। लेकिन मरते वक्त इसके मन में आपके लिए बदले की आग थी। वही आग इसे [संगीत] इस जन्म में आपके बेडरूम तक खींच लाई है। अब यह रुलाएगा, तड़पाएगा और यह सिलसिला तब तक चलेगा जब तक मन की वह पुरानी [संगीत] गांठ नहीं खुल जाती। लोग इसे घरेलू हिंसा कहते हैं। अध्यात्म
इसे कार्मिक सेटलमेंट कहता है। दूसरा कर्जदार विवाह। एक बहुत मेहनती इंसान दिन रात खटता है, पैसा कमाता है। लेकिन सारा पैसा पार्टनर की बीमारी [संगीत] में, उसके खर्चों में, उसकी गलतियों को सुधारने में चला जाता है। यह संयोग नहीं है। पिछले जन्म [संगीत] में आपने उसका धन हड़पा था। आर्थिक नुकसान पहुंचाया था। अब वह ब्याज समेत एक-एक पाई वापस ले रहा है। और जिस दिन वह हिसाब जीरो हो जाएगा, उस दिन या तो वह सुधर जाएगा या शांतिपूर्वक चला जाएगा क्योंकि सौदा पूरा हो गया। तीसरा उदासीन विवाह ना प्यार [संगीत] ना नफरत पति अपने काम
में मस्त पत्नी अपनी दुनिया में दोनों एक साथ रहते हैं जैसे एक ट्रेन के डिब्ब्रे में दो अजनबी यात्री यह तब होता है जब पिछले जन्म में आपका उस आत्मा के साथ बस थोड़ा सा लेनदेन बाकी था कोई गहरा कर्ज नहीं बस छोटी-मोटी रस्म बाकी थी प्रकृति ने मिला दिया ताकि वह औपचारिकता पूरी [संगीत] हो जाए और एक चौथी कैटेगरी भी है जो बहुत दुर्लभ है पुण्य अनुबंध जब दो बहुत सुलझी हुई आत्माएं जिन्होंने पिछले जन्म में एक दूसरे की मदद की थी, भक्ति में साथ दिया [संगीत] था, वे दोबारा मिलती हैं। ऐसा साथी आपको
कभी गिरने नहीं देता। वह ढाल बनकर खड़ा रहता है। लेकिन कलयुग में [संगीत] ऐसे रिश्ते हजार में एक होते हैं। अब एक बहुत संवेदनशील सवाल। विवाह के बाहर के संबंध एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स। अगर शादी सात जन्मों का बंधन है तो कोई तीसरा बीच में कैसे आ जाता है? [संगीत] शास्त्र कहते हैं कभी-कभी हमारा ऋणानुबंध सिर्फ एक व्यक्ति के साथ नहीं होता। पिछले जन्म में आपका किसी और के साथ भी गहरा भावनात्मक जुड़ाव था जो अधूरा टूट गया था। वो आत्मा भी अपना हिस्सा मांगने के लिए भटक रही है। इस जन्म में शादी तो किसी और
से हो गई। लेकिन जब वह पुरानी आत्मा दोबारा जीवन में दस्तक देती है, आप खुद को रोक नहीं पाते। यह जो तीव्र खिंचाव होता है, यह प्रेम नहीं है। यह उस अधूरे कर्ज की पुकार है। और गरुड़ पुराण कहता है, यह एक परीक्षा है। प्रकृति उस पुरानी आत्मा से आपको मिलवाएगी जरूर, लेकिन आपके पास विवेक है, धर्म है। अगर आप उस आकर्षण में बह गए और अपने जीवन साथी को धोखा दिया, तो आप एक और नया और जटिल [संगीत] कर्म बुन लेते हैं। एक सुलझे हुए धागे को और बुरी तरह उलझा देते हैं। और जो
लोग सोच रहे हैं, "मेरी शादी क्यों नहीं हो रही? क्या मुझ पर कोई श्राप है? नहीं। गरुड़ पुराण कहता है जिन आत्माओं का कोई भारी कर्म कर्जा बाकी नहीं होता, प्रकृति उन्हें शादी के बंधन में नहीं [संगीत] बांधती। शादी ना होना कभी-कभी दुर्भाग्य नहीं होता। यह उस आत्मा की आजादी होती [संगीत] है जिसे अब किसी एक के साथ नहीं पूरी मानवता के साथ जीना है। लेकिन हम सामाजिक दबाव में इतने दुखी [संगीत] होते हैं कि जबरदस्ती उस पिंजरे में घुसने की कोशिश करते हैं जिससे ईश्वर हमें बचाना चाहता था। अब आप पूछेंगे [संगीत] अगर सब
कुछ पहले से तय है तो मेरे हाथ में क्या है? क्या मैं बस चुपचाप पिटता रहूं? नहीं। गरुड़ पुराण आपको लाचार नहीं बनाना चाहता। वह आपको समझदार बनाना चाहता है। जब आपको पता चलता है कि सामने वाला इंसान बुरा नहीं है बल्कि वह उस पुराने कर्ज पर वसूली कर रहा है जो आपका ही बनाया हुआ है। तो नजरिया बदल जाता है। आप खुद को [संगीत] पीड़ित समझना बंद करते हैं। आप समझते हैं यह थप्पड़ जो मुझे पड़ा, यह मेरी ही फेंकी हुई गेंद थी जो दीवार से टकरा कर वापस आई है। और तलाक भी? क्या
वह समाधान है? कर्म का कानून कहता है अगर आप पाठ सीखे बिना क्लास छोड़ दें तो परीक्षा माफ नहीं होती। वह कर्ज आगे कैरी फॉरवर्ड हो जाता है। आप दूसरी शादी करेंगे नया चेहरा मिलेगा लेकिन वही पैटर्न मिलेगा। आपने देखा होगा कुछ लोग दो-तीन शादियां करते हैं लेकिन हर बार वही धोखा वही दर्द। क्योंकि चेहरा बदला कर्म नहीं बदला। जब तक क्लास पास नहीं [संगीत] होगी स्कूल बदलने से क्या फायदा? अब बात करते हैं तलाक के उस दर्द की जो शरीर के किसी भी घाव से गहरा क्यों होता है? विज्ञान कहता है डोपामाइन और ऑक्सीटोसिन
हॉर्मोंस की कमी। आध्यात्म कहता है विवाह के समय दो लोगों के सूक्ष्म शरीर आपस में जुड़ जाते हैं। [संगीत] उनकी ऊर्जा की नाड़ियां एक हो जाती हैं। जब अलगाव होता है तो वह ऐसा है जैसे दो जुड़ी हुई चीजों को जबरदस्ती फाड़ा जाए। वह जो दर्द होता है वह आत्मा का घाव है जिसे भरने में कभी-कभी पूरा जीवन लग जाता है। तो इस कार्मिक चक्र को तोड़ने का तरीका क्या है? हमारे ऋषियों ने एक बहुत गुप्त लेकिन [संगीत] शक्तिशाली उपाय बताया है। वो है साक्षी भाव और क्षमा। सुनने में साधारण लगता है। लेकिन यह सबसे
मुश्किल [संगीत] काम है। उस पति को माफ करना जिसने जीवन बर्बाद कर दिया। उस पत्नी को दुआ देना जिसने समाज में जलील कर दिया। हमारा अहंकार तुरंत [संगीत] कहता है नहीं मैं बदला लूंगा। लेकिन याद रखिए बदला लेने का मतलब है एक और नई चेंज शुरू करना। एक और नया जन्म, एक और नया दर्द। अगर आप वाकई इस बंधन से मुक्त होना चाहते हैं तो डोर काटनी होगी। और यह डोर नफरत से नहीं कटती। नफरत से [संगीत] और मजबूत होती है। डोर कटती है उपेक्षा से, क्षमा से। आज रात एक काम करके देखिए। जब आपका
जीवन साथी सो जाए तो उसके चेहरे को देखिए। उस वक्त वो शांत होगा। अहंकार सोया होगा। मन ही मन [संगीत] उससे कहिए, "मुझे नहीं पता हमारा पिछला हिसाब क्या था। हो सकता है मैंने [संगीत] तुम्हें बहुत तकलीफ दी हो। उसके लिए माफ करना। और इस जन्म में तुमने जो भी दिया, उसके लिए मैं तुम्हें माफ करता हूं। हमारा लेना देना पूरा हुआ, [संगीत] मैं तुम्हें आजाद करता हूं और खुद को भी। जब आप यह भावना रोज भेजते हैं तो एक चमत्कार होता है। सामने वाले की [संगीत] आत्मा जो अब तक बदले की प्यास में झटपटा
रही थी उसे शांति मिलने लगती है। बिना एक शब्द बोले बिना लड़ाई किए आप देखेंगे कि या तो उसके व्यवहार में बदलाव आएगा या वह शांतिपूर्वक आपके जीवन से दूर हो जाएगा। लेकिन इस बार कड़वाहट के साथ नहीं मुक्ति के साथ। गरुड़ पुराण में एक और गहरा रहस्य है गर्भ संस्कार का। जो लोग अभी विवाह से पहले हैं उनके लिए यह बहुत जरूरी बात है। शास्त्र कहते हैं जिस तरह की ऊर्जा जिस तरह के विचार पति-पत्नी के बीच होते हैं वैसी ही आत्मा उनके गर्भ में खींची चली आती है। अगर आपके बीच रोज झगड़े हैं,
गुस्सा है, नफरत है, तो आप एक निम्न कोटि की आत्मा को आमंत्रित कर रहे हैं। फिर वह बच्चा बड़ा होकर आपको दुख देगा और आप पूछेंगे मेरा बेटा श्रवण कुमार क्यों नहीं बना? वो कैसे बनता? आपने बुलाते वक्त जो फ्रीक्वेंसी रखी थी उसी हिसाब से आत्मा आई। इसीलिए शादी को संस्कार कहा गया है। कॉन्ट्रैक्ट नहीं। और वो जो तीव्र आकर्षण होता है जिसे हम प्यार समझ बैठते हैं। [संगीत] एक समझदार लड़की किसी आवारे के पीछे पागल हो जाती है। एक अच्छा लड़का किसी धोखेबाज के लिए सब कुछ छोड़ देता है। घरवाले समझाते हैं। दोस्त चेताते
हैं, लेकिन वह कुछ नहीं सुनता। यह प्रेम नहीं है। यह उस पुराने कर्म की चुंबक है। सच्चा प्रेम कभी अंधा नहीं करता। सच्चा प्रेम शांत करता है, स्पष्टता देता है। अगर किसी रिश्ते में पड़ते ही आपकी नींद [संगीत] उड़ जाए, परिवार से झूठ बोलने पड़े, करियर छूटने लगे, तो समझ लीजिए यह आने वाले तूफान की आवाज है। और एक बहुत सुंदर उपाय जो हमारे पूर्वजों ने दिया है, दान और सेवा। अगर आपके वैवाहिक जीवन में क्लेश [संगीत] है, किसी कन्या का विवाह कराइए, किसी गरीब जोड़े की मदद करिए। जब आप दूसरों के घर बसाने में
मदद करते हैं, प्रकृति आपका घर बचाने में लग जाती है। यह कोई अंधविश्वास नहीं, यह ब्रह्मांडीय नियम है। जो आप देते हैं, वही वापस मिलता है। क्या प्रारब्ध को बदला जा सकता है? पूरी तरह नहीं। लेकिन हल्का जरूर किया जा सकता है। जैसे किस्मत में लिखा हो कि पत्थर से चोट लगेगी तो आप उसे टाल नहीं सकते। लेकिन अगर संभल कर चल, जूते पहन लें तो वह पत्थर चुभेगा नहीं। गृहस्थ जीवन हमारे शास्त्रों में सबसे बड़ा तप है। जंगल में भाग जाना आसान है। [संगीत] वहां कोई टोकता नहीं। लेकिन घर में रहकर रोज की तकरार
के बीच जबान पर लगाम रखना, गुस्से को पीना और सामने वाले का भला सोचना यह हिमालय पर तपस्या से भी कठिन है। अगर आपकी शादी किसी मुश्किल इंसान से हुई [संगीत] है तो इसे सजा मत समझिए। इसे परीक्षा समझिए। ईश्वर ने आपको यह कठिन प्रश्न पत्र इसलिए दिया है क्योंकि वह जानते हैं आप में उसे हल [संगीत] करने की काबिलियत है। जो अभी विवाह करने वाले हैं उनसे एक बात सिर्फ चेहरा देखकर बैंक बैलेंस देखकर फैसला मत लीजिए। यह देखिए क्या उस इंसान के साथ आप शांत महसूस करते हैं? क्या उसकी मौजूदगी आपको [संगीत] बेहतर
इंसान बनाती है? और ईश्वर से एक प्रार्थना जरूर करिए। हे प्रभु मेरे जीवन में उसी इंसान को भेजना [संगीत] जो मेरी आत्मा की यात्रा में साथी बने। पैरों की बेड़ी नहीं। आखिर में यही समझना जरूरी है। कोई भी रिश्ता हमेशा के लिए नहीं होता। हम सब मुसाफिर हैं। एक सराए में मिले हैं। कुछ वक्त साथ रहेंगे फिर [संगीत] अपनी-अपनी यात्रा पर निकल जाएंगे। आपका जीवन साथी चाहे वह जैसा भी हो। वह आपके अपने कर्मों [संगीत] का आईना है। अगर आईने में चेहरा गंदा दिख रहा है तो आईना तोड़ने से कुछ नहीं होगा। अपना चेहरा साफ
करना होगा। सेवा करिए, दान करिए, नाम जप करिए। जब पुण्य [संगीत] बढ़ते हैं तो बुरे कर्मों की आग अपने आप धीमी पड़ने लगती है। याद रखिए सुहाग रात सिर्फ शरीर का मिलन नहीं है। प्राचीन काल में यह एक संस्कार की शुरुआत थी। उस रात जो विचार जो ऊर्जा आप दोनों के मन में होती है [संगीत] वही आपके आने वाले कल को लिखती है। शादी कोई परियों की कहानी नहीं है। यह आग का दरिया है जिसमें डूब कर जाना है। लेकिन जो इस आग में [संगीत] अपने प्रेम और धैर्य को बचाकर ले जाता है वही असली
सोना बनकर निकलता है। अगर आज की इस बात ने आपके मन को छुआ हो तो निराश मत होइए। खुश होइए क्योंकि अब आप अंधेरे में नहीं हैं। अब आप जानते हैं कि यह सब क्यों हो रहा है और जब कारण पता हो तो रास्ता खुद मिल जाता है। तो आज रात अपने सारे गिले शिकवे एक किनारे रखिए। अपने पार्टनर को चाहे वह पास हो या दूर जिंदा हो या जा चुका हो मन ही मन माफ कर दीजिए। जिस पिंजरे में आपने उसे कैद किया है, उसमें आप भी कैद हैं। उसे आजाद करिए और खुद भी
आजाद हो जाइए। कमेंट में बताइए क्या आप मानते हैं कि जोड़े ऊपर से बनते हैं या हमारे [संगीत] कर्म बनाते हैं और अगर यह बात आपके किसी दोस्त या रिश्तेदार के काम आ सकती है तो उन तक जरूर पहुंचाइए। शायद यह नजरिया किसी टूटती हुई उम्मीद को थोड़ा सहारा दे दे। जीवन बहुत सुंदर है जब इसे कर्मों के चश्मे से देखा जाए। शिकायतें खत्म हो जाती हैं। सिर्फ स्वीकार भाव रह जाता है [संगीत] और जहां स्वीकार है वहीं ईश्वर है। अगले वीडियो में फिर मिलेंगे [संगीत] एक और ऐसे ही गहरे रहस्य के साथ। तब तक
अपना ख्याल रखिए। अपने रिश्तों का ख्याल रखिए। नारायण नारायण।