[संगीत] नमस्कार साथियों स्वागत है आपका बिहार धरोहर प्रोग्राम में मेरा नाम है मनीष प्राचीन और मध्यकालीन बिहार में शिक्षा के महत्व को दो विश्वविद्यालय या महाविहार विशेष रूप से परिलक्षित करते हैं इन विश्वविद्यालयों या महाविहार का नाम है नालंदा महाविहार और विक्रम शलाला महाविहार नालंदा महाविहार की स्थापना जहां पावी शताब्दी में कुमार गुप्त प्रथम द्वारा करवाई गई थी जो गुप्त वंश के महत्त्वपूर्ण शासक थे वहीं विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना आठवीं शताब्दी के उत्तरार्ध या नौवीं शताब्दी के प्रारंभ में पाल शासक द्वारा करवाई गई थी नालंदा महाविहार पर हम पहले बिहार धरोहर प्रोग्राम में चर्चा कर
चुके हैं और आज हमारी चर्चा का विषय होगा विक्रमशिला महाविहार सबसे पहले देखते हैं कि इस पूरे टॉपिक के अंतर्गत हम किन पक्षों पर बात करने वाले हैं सबसे पहले हम विक्रमशिला महाविहार की भौगोलिक अवस्थिति के बारे में जानेंगे फिर इसके इतिहास के सामान्य पक्षों को देखेंगे और फिर देखेंगे इसकी विशिष्टता हों को इसकी विशिष्टता हों को दो चीजों के आधार पर दो स्रोतों के आधार पर निर्धारित किया जा सकता है एक है साहित्यिक स्रोत और दूसरा है अवशेषों के आधार पर जो विक्रम शिला में उत्खनन के बाद अवशेष हमें प्राप्त हुए हैं तो अवशेषों
के आधार पर साहित्यिक स्रोतों के आधार पर जो भी विक्रम शलाला महाविहार की विशिष्टता एं हमें प्राप्त होती हैं उन विशिष्टता हों पर बात करेंगे फिर हाल का भी संदर्भ देखेंगे क्योंकि केंद्र सरकार सरकार विक्रमशिला में केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय ले चुकी है तो उस संदर्भ को भी जानेंगे और अंत में आपके लिए एक अभ्यास प्रश्न होगा जिसका उत्तर आपको कमेंट बॉक्स में कमेंट करके देना होगा हम आगे बढ़े इससे पहले आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब जरूर करिए और बेल आइकन दबाइए ताकि हमारे सभी प्रोग्राम का नोटिफिकेशन आपको मिल सके इन प्रोग्राम से
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भागलपुर में ही अगर आप बड़े नक्शे में देखें तो भागलपुर से लगभग 38 किलोमीटर की दूरी पर एक सब डिवीजन पड़ता है जिस सब डिवीजन का नाम है कहलगांव तो कहलगांव सब डिवीजन में अंती चक अंती चक में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की उपस्थिति है तो यहां पर यह पड़ती है इसकी उपस्थिति यहां पर है और यह इसकी भौगोलिक अवस्थिति के बारे में बात हुई अब हम इसके इतिहास के पक्षों पर बात करें तो सबसे पहले पक्षी यही जानना होता है कि विक्रम शिला महाविहार की स्थापना कब हुई थी और किसके द्वारा की गई थी करवाई गई
थी तो विक्रमशिला महाविद्यालय की स्थापना के अंतर्गत कब करवाई गई थी इसके अंतर्गत थोड़ा सा विवाद है और विवाद इसके कारण है कि आठवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में उत्तरार्ध का मतलब 850 ईसवी के बाद या माफ कीजिएगा 750 ईसवी के बाद या नौवीं शताब्दी के प्रारंभ में यानी 800 से 810 या 815 के आसपास इसकी करवाई गई थी स्थापना तो किसके द्वारा इसकी स्थापना करवाई गई थी पाल शासक धर्मपाल के द्वारा इसकी स्थापना की गई थी कब से कब तक धर्मपाल ने शासन किया था धर्मपाल का जो शासनकाल है वो 770 ईसवी से लेकर के
810 ईस्वी तक है तो इसी दौरान माना जाता है कि 775 से लेकर के 800 ईसवी के बीच कहीं पर इन्होंने विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना करवाई थी यानी आठवीं शताब्दी के उत्तरार्ध और नौवीं शताब्दी के प्रारंभ में विक्रम शिला विश्वविद्यालय की स्थापना का सबसे ज्यादा प्रमाण हमें प्राप्त होता है चीनी यात्री आप जानते हैं चीनी यात्री नसांग ने सातवीं शताब्दी में भारत की यात्रा की थी और किस समय भारत की यात्रा की थी जो सबसे अधिक प्रमाण प्राप्त होते हैं वो प्राप्त होते हैं कि 6293 से लगभग 644 45 तक क्योंकि ये 15 वर्ष भारत
में रहे थे तो 629 30 से 644 45 तक इन्होंने भारत की यात्रा की थी अपने यात्रा वृतांत में वन सांग ने कहीं भी विक्रमशिला विश्वविद्यालय का जिक्र नहीं किया है उसका वर्णन नहीं किया है जो इस बात का प्रमाण देता है कि उस समय तक इस महाविहार की विक्रमशिला महाविहार की स्थापना नहीं हुई थी धर्मपाल के जो उत्तराधिकारी थे उन्होंने ही 13वीं शताब्दी तक विक्रमशिला विश्वविद्यालय को महाविहार को संरक्षण प्रदान किया यानी लगातार उसको समर्थन देते रहे ताकि यह विश्वविद्यालय पढ़ाई का शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र बना रहे इस विश्वविद्यालय को तुर्क सेनापति बख्तियार
खल जीी द्वारा 1193 ईसवी में नष्ट किया गया था और यहां पर स्थित एक बहुत बड़ी लाइब्रेरी पुस्तकालय को भी आग लगा दी गई थी एक और प्रमाण यह भी प्राप्त होता है कि बख्तियार खल जीी द्वारा 1193 में नहीं बल्कि 1203 में यहां पर इसको विक्रमशिला विश्वविद्यालय को नष्ट किया गया था यानी दो तिथियां हमें प्राप्त होती है लेकिन जो सबसे अधिक मान्य तिथि है वह 1193 ईसवी की तिथि मानी जाती है जब बख्तियार खल जीी द्वारा विक्रम शलाला विश्वविद्यालय को नष्ट किया गया विक्रमशिला विश् विद्यालय को विक्रम शलाला क्यों नाम दिया गया इसका
कारण यह है कि जो राजा धर्मपाल थे उनकी उपाधि थी विक्रम शल और विक्रम शल के आधार पर ही विक्रमशिला विश्वविद्यालय इसका नाम रखा गया था विक्रमशिला महाविहार इसका नाम रखा गया था यहां पर कुछ प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान शैक्षणिक कार्य भी करते थे यानी पढ़ाते थे और उसमें एक प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान थे प्रसिद्ध बौद्ध पंडित थे अतीश दीपांकर अतीश दीपांकर ने यहां पर शैक्षणिक कार्य किया था और जो तिब्बत में बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व्यक्ति थे इन्होंने तिब्बत में बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी इस
महाविहार की जो सर्वेक्षण किया गया जो खुदाई की गई वह 1960 के दशक में पटना विश्वविद्यालय द्वारा शुरू की गई थी लेकिन इसकी जो समाप्ति की गई वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा की गई इसकी खुदाई को पूरा किया गया भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा कब से कब तक पूरा किया गया 1978 से 1900 82 के दौरान इस पूरे सर्वेक्षण को पूरा किया गया और यहां के अवशेषों से हमें तरह-तरह की जानकारी प्राप्त होती है इसी के आधार पर विक्रमशिला महाविहार की हम विशिष्टता हों को जान सकते हैं साहित्यिक स्रोतों के साथ-साथ अवशेषों के आधार पर इस
तरह की इसकी विशिष्टता स्थापित होती है जैसे पता लगता है कि विक्रमशिला महाविहार में कुल 160 विहार थे विहार कौन सा स्थान होता था जहां पर बध भिक्षु रहा करते थे उनका निवास स्थान हुआ करता था तो 160 वि हारों की यहां पर पहचान की गई है विक्रम शलाला महाविहार के अंतर्गत और साथ ही व्याख्यान के लिए भी यहां कई कक्ष हुआ करते थे किन-किन विषयों पर यहां पढ़ाई करवाई जाती थी अध्यात्म और दर्शन के साथ-साथ तंत्र विद्या की भी यहां पर पढ़ाई करवाई जाती थी इसके अलावा मेटा फिजिक्स तत्व ज्ञान तर्कशास्त्र और व्याकरण का
भी यहां पर अध्ययन करवाया जाता था तंत्र विद्या पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि इस विक्रम शलाला महाविहार को महायान बौद्ध धर्म की एक उप श्रेणी वज्रयान का केंद्र माना जाता है वज्रयान को कई जगह पर आप देखेंगे कि तंत्र यान भी कहा जाता है क्योंकि यह तंत्र विद्या पर भी बल देता है और इसलिए विक्रम शिला महाविहार में तंत्र विद्या की भी शिक्षा दी जाती थी महाविहार में बुद्ध की मूर्ति रखने के लिए एक पेडेस्टल भी था जो कि वर्तमान में पटना विश्वविद्यालय में मूर्ति को पेडेस्टल नहीं जहां पर बुद्ध की मूर्ति
पहले एक पेडेस्टल पर स्थित थी विक्रमशिला महाविहार में और यह मूर्ति वर्तमान में पटना विश्वविद्यालय में स्थित है इस महाविहार में प्रवेश के लिए एक कठिन परीक्षा से भी विद्यार्थियों को गुजरना पड़ता था और महाविहार के द्वार पर ही द्वार पंडितों द्वारा विद्यार्थियों की कठिन परीक्षा ली जाती थी और उसी के बाद विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता था इस विक्रमशिला महाविहार में एक समय में यह माना जाता है कि यहां पर 100 प्राध्यापक और 1000 विद्यार्थी हुआ करते थे इसके आंकड़े में हमें कई बदलाव भी देखने को मिलते हैं अलग-अलग जगह पर अलग-अलग आंकड़े देखने
को मिलते हैं कई जगह पर कहा गया है कि स विद प्राध्यापकों के साथ-साथ यहां पर 3000 से 10000 तक विद्यार्थी हुआ करते थे तो यह भी आंकड़ा हमें प्राप्त होता है साथ ही एक आंकड़ा हमें यह प्राप्त होता है कि इस महाविहार में चार छात्रावास स्थित थे और एक छात्रावास में 52 कमरे हुआ करते थे यह बताता है कि कितने बड़े स्तर पर यहां पर बाहर से आने वाले छात्रों के रहने की व्यवस्था भी की गई थी विक्रम शलाला विश्वविद्यालय का जो प्रबंधन था वह नालंदा विश्वविद्यालय के कामकाज का भी प्रबंधन किया करता था
यानी दोनों विश्वविद्यालय में आपस में नालंदा महाविहार और विक्रमशिला महाविहार में काफी सहयोग था और साथ ही इनके प्राध्यापक एक दूसरे के यहां पढ़ाया भी करते थे दोनों विश्वविद्यालयों के शिक्षक आपस में पढ़ाया भी करते थे कुछ और महत्त्वपूर्ण जानकारी हम प्राप्त करते हैं अवशेषों के माध्यम से और साहित्यिक स्रोतों के माध्यम से एक महत्त्वपूर्ण जानकारी हमें प्राप्त होती है कि विश्वविद्यालय का जो प्रबंधन थे व यहां के कुलपति छह भिक्षुओं के मंडल की सहायता से निभाते थे छह भिक्षुओं के मंडल की सहायता से यहां के पूरे प्रबंधन को चलाया जाता था कुलपति द्वारा और
प्रवेश परीक्षा के लिए चार द्वार पंडितों की भी परिषद थी जैसा कि अभी आपको बताया गया कि विद्यालय में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों का द्वार पर ही परीक्षा ली जाती थी द्वार पंडितों के द्वारा और उसके लिए चार द्वार पंडितों की एक परिषद थी यहां पर एक समृद्ध पुस्तकालय भी स्थित था बहुत बड़ी लाइब्रेरी थी जहां पर विद्यार्थियों के द्वारा शिक्षा ग्रहण की जाती थी पढ़ अध्ययन किया जाता था इस पुस्तकालय को भी यह माना जाता है कि बख्तियार खल जीी द्वारा जलाकर नष्ट कर दिया गया था तिब्बत के विद्वानों के लिए विशेष अतिथि साला
थी विक्रम शीला विश्वविद्यालय में इसके अलावा कई विद्वानों ने तिब्बती भाषा में यहां पर ग्रंथों का अनुवाद भी किया है और जैसा कि अभी आपको बताया कि महायान बौद्ध धर्म की एक विशिष्ट उप श्रेणी वज्रयान का की शाखा का यह एक प्रमुख केंद्र हुआ करता था विक्रम शीला महाविहार तो ये इसके बारे में प्रमुख जानकारी हुई अब हम हाल का संदर्भ जानते हैं हाल का संदर्भ यह है कि केंद्र सरकार विक्रमशिला में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय ले चुकी है और हाल ही में जानकारी प्राप्त हुई है कि बिहार कैबिनेट ने उस वि
विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए जो फंड की आवश्यकता थी उसको एक मंजूरी प्रदान कर दी है इसलिए भूमि अधिग्रहण कार्य शीघ्र आरंभ किया जाएगा क्योंकि बिहार कैबिनेट ने भूमि अधिग्रहण के लिए आवश्यक राशि को स्वीकृति प्रदान कर दी है और जिला प्रशासन ने इस दिशा में कार्य करना शुरू कर दिया है भूमि अधिग्रहण की क्रिया में जो सबसे पहले काम किया जाता है वह क्या किया जाता है सामाजिक मूल्यांकन किया जाता है और सामाजिक मूल्यांकन के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है सामाजिक मूल्यांकन का मतलब क्या है सामाजिक मूल्यांकन का
मतलब यह है कि यहां पर जमीन की स्थिति के साथ-साथ य इस बात की भी जांच की जाएगी कि स्थानीय लोगों के लिए अगर यहां पर विश्वविद्यालय बना दिया जाता है तो स्थानीय लोगों के लिए वह कितना लाभकारी होगा इस बात का आकलन करेगी यह विशिष्ट टीम विश्वविद्यालय का निर्माण कहां पर करवाया जाएगा विश्वविद्यालय का निर्माण कहलगांव चल सब डिवीजन के अंती चक और मलकपुर मौजा में कुल 200 एकड़ जमीन पर करवाया जाएगा इस जमीन को चिन्हित कर लिया गया है मोजा का मतलब क्या होता है मोजा का मतलब है राजस्व गांव इसमें सामान्यत एक
गांव भी हो सकता है गांव का समूह भी हो सकता है तो यह विक्रम शलाला महाविहार का हाल का संदर्भ है अब हम इसके संबंध में एक प्रश्न देखते हैं प्रश्न क्या है विक्रमशिला महाविहार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए आपके कथन कौन से हैं पहला कथन है इसका निर्माण पाल शासक देव पाल द्वारा करवाया गया था और दूसरा कथन है यह बौद्ध धर्म की वज्रयान शाखा का प्रमुख केंद्र था उपर्युक्त में से कौन सा या से कथन सही है या है आपके ऑप्शंस है ऑप्शन ए केवल एक ऑप्शन बी केवल दो ऑप्शन
सी एक और दो दोनों ऑप्शन डी ना तो एक और ना ही दो इस प्रश्न का उत्तर आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर दीजिए साथ ही हमारे चैनल को भी सब्सक्राइब करिए और बेल आइकन दबाइए ताकि प्रोग्राम से आप जुड़ सके इनका लाभ उठा सके फिर से एक नए सेशन में आपसे मुलाकात होगी धन्यवाद डियर व्यूवर्स अपने एग्जाम की तैयारी को और बेहतर करने के लिए हमारे चैनल को लाइक शेयर और सब्सक्राइब करना ना भूले