बेटा बस कुछ भी करके अपना घर कर ले। बेटा अपना घर तो लाजमी है। उसके बगैर कैसे जिंदगी चलेगी? लड़का किराए के घर में रहता है। अपना घर नहीं है? सॉरी। हम यह रिश्ता नहीं कर सकते। ब्रो, किराए के घर में कब तक जिंदगी गुजारेगा?
कहीं से उधार लेके अपना घर बना ले। अपना घर सबक्टिनेंट और स्पेशली पाकिस्तानियों का सबसे कीमती, सबसे जरूरी और सबसे जज्बाती फैसला। लेकिन इस फैसले को जितना जरूरी, जितना फायदेमंद और जितना अच्छा समझा जाता है, क्या यह उतना है भी? आज हम इसी मिथ को बस्ट करने वाले हैं। मैं आपके साथ अपना पर्सनल छ साल का हाउसिंग एक्सपीरियंस शेयर करूंगा और यह भी बताऊंगा कि किस तरह मेरे एक डिसीजन ने मेरी फायर यानी फाइनेंसियल इंडिपेंडेंस रिटायर अर्ली की जर्नी की शुरुआत रखी। इस वीडियो के एंड तक आप इस काबिल हो जाएंगे कि घर खरीदने के सही रीज़ंस को समझ सकें और घर खरीदने का फैसला आप जज्बात की बुनियाद पर नहीं बल्कि इस बुनियाद पर करें कि क्या आपके लिए इस वक्त यह फैसला लेना बेहतर है या नहीं। कुछ दिन पहले मैंने यह ट्वीट किया जिस पे काफी ज्यादा इंगेजमेंट आई। मुझे ऐसी इंगेजमेंट आने का पहला ही एक आईडिया था। लेकिन मुझे समझ आया कि कितने लोग इस एक डिसीजन को बिना सोचे समझे लेते हैं। अब यह वीडियो आपको एक फ्रेमवर्क देने के लिए है कि जब आप अपने घर के बारे में सोें तो वो फैसला जज्बात की बुनियाद पर ना हो। बल्कि वो फैसला आपकी जिंदगी में आप किस मुकाम पर हैं, कहां जाना चाहते हैं, क्या करना चाहते हैं, किस तरह से जीना चाहते हैं, की बुनियाद पे हो। वो फैसला आपके अपने लिए परफेक्टली डिज़ हो। तो इस वीडियो को मैंने दो हिस्सों में बांटा है। द फाइनेंसियल साइड ऑफ द डिसीजन एंड द इमोशनल साइड ऑफ द डिसीजन। क्योंकि यह घर बनाने का फैसला काफी यूनिक है। आई मीन दिस इज यूनिक टू ईच इंडिविजुअल। कुछ लोग घर को एसेट समझ के बनाते हैं और कुछ लोग उसे अपनी जरूरत समझ के बनाते हैं। सुनने में शायद थोड़ा अजीब लगे। लेकिन दोनों तरह के लोगों की थिंकिंग एक ओल्ड पैटर्न और पुश्तों से चलती हुई आ रही सोच से इंस्पायर्ड है। जमाना, हालात और मामलात अब बहुत ज्यादा बदल चुके हैं। और इसीलिए उस सदियों पुरानी सोच को एक नया नजरिया और एक नया जाविया देना जरूरी है। जो आज हम इस वीडियो में करने का इरादा रखते हैं। इस साइट को मैं अपनी पर्सनल रियल लाइफ स्टोरी से एक्सप्लेन करने वाला हूं क्योंकि सीखने के लिए किसी रियल लाइफ इवेंट से क्या ही बेहतर है। तो यह बात है 2019 की। मैं न्यू न्यू बहरिया टाउन में शिफ्ट हो रहा था और मेरे पास ऑलमोस्ट 7 मिलियन की लाइफ सेविंग्स मौजूद थी। जिसके अंदर मेरी अपनी वाइफ का भी कुछ अच्छा खासा कंट्रीब्यूशन था। हमारे पास दो ऑप्शन थे। या तो हम उन सेविंग्स से कोई घर ले लें जो इंपॉसिबल था बिकॉज़ प्राइसेस वर वे टू हाई। आई रिमेंबर कि 125 इयर्स का विला वास ऑलमोस्ट 1. 5 टू 1.
6 करोड़ एट दैट टाइम। या फिर हम रेंट करें। घर खरीदने के लिए आई वास गेटिंग अ लॉट ऑफ प्रेशर कि कोई लोन ले लिया जाए। लेकिन अल्हम्दुलिल्लाह आई हैड इनफ फाइनेंसियल लिटरेसी एट दैट टाइम टू नॉट टेक एनी स्टूपिड स्टेप। मुझे डेप्ट में नहीं जाना था और मैंने सिंपली रेंट करने पर इनहसार किया। अच्छा उस वक्त मैंने यह फैसला सिर्फ इसलिए लिया कि मेरे पास पैसे नहीं थे। अगर मेरे पास पूरे ₹15 करोड़ होते तो शायद सब लोगों की तरह मैं भी घर ही ले लेता। लेकिन मेरा ये डिसीजन आगे चलके मेरे लिए कितनी बड़ी नेमत बनने वाला है। मुझे इसका कोई आईडिया नहीं था। मेरा यह एक डिसीजन अल्लाह ताला की तरफ से मुझे फाइनेंसियल फ्रीडम की जर्नी पर ले जाएगा। मुझे इसका जर्रा बराबर भी इल्म नहीं था। मैंने वह पैसे हाफ-हाफ करके गोल्ड और अलमज़ान फंड्स में इन्वेस्ट कर दिए। और फिर 2020 के अंदर मैंने सारे पैसों का डीसीआर परचेस कर लिया। आई गेस कोई 5 या 5. 5 लाख के करीब शेयर्स आए थे। और शायद 11 या ₹12 का शेयर था। और अब यह डिसीजन मैंने क्यों लिया? उसकी तरफ चलते हैं। मैंने अपनी इन्वेस्टमेंट्स पे अप्लाई किया कांसेप्ट ऑफ बेस्ट इन्वेस्टमेंट का रूल। इसका मतलब यह है कि आपके पास जो भी सेविंग्स होती हैं उसको आपने इस तरह से इन्वेस्ट करना है कि आपको रिटर्न मैक्सिमम हो और उसके अंदर आपको रिस्क को भी नेगलेक्ट नहीं करना। मैंने सिंपली वो 70 लाख उठा के डॉलमें सिटी रीड में इन्वेस्ट कर दिए। अब जिन लोगों ने यह नाम पहली बार सुना है तो सिंपल लैंग्वेज में टीसीआर मतलब डॉलमें सिटी रीड एक लिस्टेड स्टॉक है ऑन पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज। और यह कोई इंतहाई डिफेंसिव किस्म का स्टॉक है जो कराची का डोलमेन मॉल है और आई एम श्योर कि आप में से बहुत ज्यादातर लोग वहां जा चुके होंगे। तो बेसिकली आप उस मॉल के जो रेंट होता है वहां के शॉपकीपर्स और ऑफिसेस से उसमें पार्टनर बन जाते हैं। इन सिंपल टर्म्स यह ऐसा ही है कि आपने एक कमर्शियल प्रॉपर्टी लेके उसे रेंट कर दिया। हर 3 मंथ बाद मुझे डीसीआर का डिविडेंड मिलता और उसमें से मैं अपने घर का रेंट भर देता था। तो इस तरह से मुझे रेंट की कोई टेंशन नहीं थी और ना ही मुझे कोई लोन लेना पड़ा। लेकिन यह कहानी यहां खत्म नहीं होती। फास्ट फॉरवर्ड सिक्स इयर्स। आज मेरे पास सेम क्वांटिटी ऑफ शेयर्स हैं। जो शेयर ₹11 का था आज वो ₹30 का है। और 6 साल पहले मुझे हर 3 महीने बाद जो ₹1.
5 लाख का डिविडेंड आता था। इमेजिन करो आज वो कितना होगा? तकरीबन ₹. 5 लाख। जी हां, आज वो 70 लाख ऑलमोस्ट 1.
8 सीआर बन चुके हैं। और इस टाइम में जो टोटल डिविडेंड मैंने अर्न किया है, वो ऑलमोस्ट शायद कोई 60 से 65 लाख के करीब है। मतलब समझ लो कि मेरी ओरिजिनल अमाउंट तो मेरे पास ऑलमोस्ट डिविडेंड की सूरत में वापस आ गई है। और जो कैपिटल एप्रिसिएशन हुआ है वो अलग। अब इन नंबर्स पे मुझे पकड़ मत लेना। यह थोड़े आगे पीछे हो सकते हैं। तो बेसिकली इस टाइम मेरे घर के रेंट से लेके मेरी यूटिलिटीज और मेरी ग्रोसरीज का कुछ पोर्शन पैसिव इनकम से ही चलता है। अब प्लीज कल जाके डीसीआर मत परचेस कर लेना। दिस इज नॉट एन इन्वेस्टमेंट एडवाइस। बट माय ओन पर्सनल स्टोरी। समझो उस टाइम के अंदर मैं लोन लेके घर ले लेता। आज तक मैं वो लोन चुका रहा होता। मेरी लायबिलिटीज में इजाफा हो चुका होता। एक टेंशन होती मेरे सर पे और खुदा ना खास्ता अगर इनकम आना बंद हो जाती तो वो मसला अलग। आज मैं अगर चाहूं तो अपने इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो को कैश आउट करके उससे बड़ा घर ले सकता हूं। क्योंकि इस पूरे टाइम में बीटीके की प्रॉपर्टी की वैल्यूस बढ़ने के बजाय बहुत ज्यादा कम हो गई हैं। लेकिन मैं ऐसा हरगिज़ नहीं करने वाला और ना कभी करूंगा क्योंकि उस एक डिसीजन से मैंने बहुत कुछ सीखा और मैं आपको इस वीडियो में वही सीख देने की कोशिश कर रहा हूं। आई एम अ प्रो रेंटर बिकॉज़ बाइंग अ हाउस इन पाकिस्तान डजंट मेक सेंस फॉर मी एंड आई विल टेल यू व्हाई। तो ऐसा हुआ क्यों? अब इसको थोड़ा ना नंबर से समझ लेते हैं और आपको पता है हमें नंबर्स बिल्कुल नहीं पसंद तो हम इसको बिल्कुल ऐसे समझेंगे कि एक 10 साल के बच्चे को भी समझ आ जाए। पाकिस्तान में रेजिडेंशियल एरियाज की मैक्सिमम रेंटल यील्ड होती है 3 टू 5% डिपेंडिंग ऑन लोकेशन एंड स्टफ। बीटीके की रेंटल यील्ड इज इवन लोअर देन 1% बिकॉज़ इट्स अ सबर एंड इट्स फार अवे फ्रॉम सिटी। तो मार भाई यह रेंटल यील्ड का क्या मतलब है? अभी समझाते हैं। रेंटल यील्ड को आप सिंपली समझिए इयरली रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट। मतलब समझ लो कि अगर आपका घर ₹1 करोड़ का है और वो आपने किराए पर दिया हुआ है और हर मंथ आपको ₹00 किराया आता है तो 30000 * 12 मंथ्स बना ₹60000 और अब आपने 1 करोड़ को डिवाइड करना है 3600 से और मल्टीप्लाई करना है 100 से। तो बना 3.
6%। सो इन सिंपल टर्म्स आपकी रेंट ईल्ड बनी 3. 6% पर एनम। अब ज्यादातर डिविडेंड स्टॉक्स में यू शुड बी एबल टू गेट अ डिविडेंड यील्ड दैट इज क्लोज टू इंटरेस्ट रेट। फॉर एग्जांपल आई गेस राइट नाउ इट्स 10 और 11% और समथिंग। सो अगर मेरे पास आज ₹1 करोड़ होते और मुझे उस पर 10% पर एनम मिलता तो ₹1 करोड़ पे 10 लाख माइनस द 15% सीजीटी इट बिकम्स 8. 5 लाखेड बाय 12 = ₹0000 तो अब फर्क समझ में आया?
अब उस ₹0000 में से 30,000 रेंट पे करो और बाकी का ₹0000 रीइन्वेस्ट कर दो ताकि अगले साल का डिविडेंड और ज्यादा आए। अब कंसीडर करो इफ यू कीप दिस कंटिन्यूड फॉर 10 इयर्स द कंपाउंडिंग विल बी अमेजिंग। दिस इज एक्सजेक्टली व्हाट योर ब्रो इज डूइंग। तो अगर किसी के पास यह ऑप्शन होता कि या तो अपनी सारी इन्वेस्टमेंट का एक घर ले लो या फिर उसी घर को रेंट कर लो 3. 5% यील्ड पे तो आप बताओ कौन सा डिसीजन बेहतर है? मुझे सीधा-सीधा फायदा है अलोंग विद एप्रिसिएशन चांसेस इन द स्टॉक प्राइस। जैसा कि 2019 से 2025 तक डीसीआर के साथ हुआ। अब कुछ लोग बोलेंगे कि यार अमार प्रॉपर्टी की प्राइस भी तो बढ़ती है। यस यकीनन बढ़ती है। लेकिन वो घर जब 50 लाख का था तब भी आप उसमें रह रहे थे। वो 50 करोड़ का हो जाएगा तब भी आप उसमें रहेंगे। यह एप्रिसिएशन सिर्फ तभी मैटर करेगी जब आप उसे सेल करेंगे। और बेशतर लोग ऐसा नहीं करते क्योंकि आपकी पूरी लाइफ डिजाइन होती है अराउंड दैट हाउस। फ्रॉम फाइनेंसियल पॉइंट ऑफ व्यू अपनी जिंदगी की पहली बड़ी जमा पूंजी से एक घर ले लेना जिसके अंदर आपने रहना ही है। मेरी नजर में अच्छा फैसला नहीं है। आप एक दुकान से 10 घर बना सकते हैं। एक घर से 10 दुकानें नहीं। आपकी कोशिश होनी चाहिए कि अपनी पहली इन्वेस्टमेंट को एक कैश फ्लोइंग एसेट में कन्वर्ट करें। उस कैश से आप रेंट पे करें। बाकी का फर्दर इन्वेस्ट करें और उसे ग्रो करें। मैं आपको पर्सनल एक्सपीरियंस से बता रहा हूं। आप 10 साल बाद एक बहुत अच्छी पोजीशन में होंगे। अगर आपने इस एक डिसीजन को बस थोड़ा सा डिले करा और अपनी इन्वेस्टमेंट को प्रॉपर्ली इन्वेस्ट किया। 2019 में वो एक सही डिसीजन लेने से मेरी फाइनेंशियल सिचुएशन पे इतना पॉजिटिव इंपैक्ट आया है कि मैं शायद आपको कभी सही तरह से एक्सप्लेन भी ना कर पाऊं। उस एक डिसीजन के बाद से ही मेरी फायर यानी फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस रिटायर अर्ली की जर्नी शुरू हुई थी। और फिर 2023 में आकर उस जर्नी को Twitter पे शेयर करना शुरू किया। जहां से शुरू हुआ फायर चेजर। और फिर जब वक्त आया कि अब YouTube पर आके लोगों तक यह बात पहुंचाई जाए तो अमार सिद्दीकी आपके सामने हैं। अब इससे पहले कि हम इमोशनल साइड ऑफ द डिसीजन की तरफ जाएं। अगर आप अभी तक मेरे साथ इस वीडियो में हो तो आई रियली एप्रिशिएट दैट। लॉन्ग फॉर्म देखना हर किसी के बस की बात नहीं है। इट विल हेल्प मी इफ यू प्रेस दैट लाइक एंड सब्सक्राइब बटन ऑन द वीडियो। और हां, वीडियो के एंड में देयर इज अ वेरी स्पेशल अनाउंसमेंट अबाउट समथिंग अमेजिंग आई हैव प्रिपयर्ड फॉर ऑल ऑफ यू। तो यह थी मेरी कहानी। लेकिन यह सब नंबर्स सुनने में जितने अच्छे लग रहे हैं, यह सब कुछ जितना आसान लग रहा है, उतना होता नहीं है। और वह इसलिए क्योंकि इस डिसीजन की दूसरी साइड पहली से ज्यादा हिकमत मांगती है। जिंदगी के तीन बड़े फैसले आपको हमेशा बहुत ज्यादा सोच समझ के लेने चाहिए। हु यू मैरी, वे यू लिव, हु यू वर्क विद। हम बाकी के दो के ऊपर अपनी नेक्स्ट वीडियो हाउ टू डिजाइन योर लाइफ पर बात करेंगे। फिलहाल के लिए वेयर यू लिव पर बात करते हैं। तो पहले अपने आप से सवाल करना जरूरी है। होता क्या है अपना घर?
किस चीज से बनता है अपना घर? पैसों से, दीवारों से, चीजों से या फिर ताल्लुक से, सुकून से, रिश्तों से, मुस्कुराहटों से? अब अगर आपको अल्लाह ने इन सब चीजों से नवाजा है तो आप किराए के मकान को भी अपना घर बना लेंगे और अगर आपके पास यह सब नेमतें नहीं है और वो इसलिए कि आपने अपने ऊपर काम नहीं किया तो फिर आपका अपना घर भी अपना नहीं होता। मैंने खुद अपनी आंखों से इस अपने घर के चक्कर में कई घरों को टूटते हुए देखा है। घर रह जाता है, अपने चले जाते हैं। दीवारें रह जाती हैं, मुस्कुराहटें चली जाती हैं। और कभी-कभी तो लोग रह जाते हैं, ताल्लुक चला जाता है। तो शायद हमें सोचने की जरूरत है कि इस अपने घर के लफ्ज में ज्यादा अहमियत अपनों की है या घर की। और हमें ज्यादा फिक्र अपनों की करनी चाहिए या घर की। तो अब मैं कुछ मिथ्स को बस करना चाहता हूं जो हमारे दिमागों में बसे हुए हैं। नंबर वन रेंट पे रहने का मतलब यह है कि लड़का फाइनेंशियली स्टेबल नहीं है। नंबर टू रेंट पे रहने से पैसा जाया होता है। नंबर थ्री रेंट के घर में सुकून नहीं आ सकता। नंबर फोर मालिक मकान कभी भी घर से बाहर निकाल के खड़ा कर देगा। ईटीसी ईटीसी ईटीसी अगर आपको ऐसा लगता है ना कि रेंट पर रहने वाले लोग फाइनेंसियली स्टेबल नहीं होते तो यह हकीकत से कौसों दूर बात है। आपको पता है दुनिया के अमीर तरीन लोग अपनी पूरी लाइफ रेंट पर गुजार देते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि वो अपने पैसे का बेहतर इस्तेमाल कहीं और कर सकते हैं। मैं कोई बहुत अमीर तो नहीं हूं लेकिन मैं भी ऐसा ही करता हूं और आगे भी ऐसा ही करूंगा क्योंकि इट मेक्स परफेक्ट सेंस टू डू इट। रेंट पर रहने से पैसा जाया नहीं होता बल्कि पैसा बचता है। हम ऊपर इस बारे में एक पूरी प्रॉपर एग्जांपल देख चुके हैं। आप उसी पैसे को अच्छी जगह इन्वेस्ट करके अपनी पैसिव इनकम से ही रेंट दे सकते हैं। मीनवाइल आपकी इन्वेस्टमेंट जो आपकी घर में लॉक थी आपको फर्दर कैपिटल गेन भी देती रहेगी। और एक टाइम ऐसा आएगा कि आपकी पूरी लाइफ पैसिव इनकम से चलेगी। जैसे मेरी चलती है। अल्हम्दुलिल्लाह एक बड़े आदमी ने कहा था सुकून सिर्फ कब्र में। सुकून का ताल्लुक घर के ओड या रेंटेड होने से नहीं बल्कि ताल्लुक रिश्तों और ट्रस्ट से आता है। जिसके ऊपर काम करना आपकी अवलीन तरजीह होनी चाहिए। अब महान भाई वो सब ठीक है। लेकिन मालिक मकान कल को बाहर निकाल के खड़ा कर देगा तो क्या होगा?
यह डायलॉग मैंने हजार बार सुना है। भाई कुछ नहीं होगा। जब इन्वेस्टमेंट में ₹2 करोड़ पड़े होंगे और हर क्वार्टर ढाई 33 लाख का पैसिव इनकम आ रही होगी कुछ नहीं होगा। विद मनी कम्स द एबिलिटी टू वॉक आउट ऑफ सिचुएशंस दैट यू डोंट वांट टू बी इन। और वैसे भी यहां एक बार बंदा रेंट पे घर दे दे, तो लोग किराया ना देने के बावजूद नहीं निकलते हैं। और मजे की बात बताऊं हमारा दिमाग जब भी हम कोई ऐसा डिसीजन लेने वाले होते हैं तो खामखाही के सिनेरियोस बनाता है। कोई माली मकान नहीं चाहता बार-बार टैलेंट चेंज करना। मैं छ साल से रैंड पर रह रहा हूं। आज तक किसी लैंड लॉर्ड ने ऐसा नहीं किया। एस फार एस यू कीप द कमिटमेंट एंड योर एंड ऑफ द कॉन्ट्रैक्ट। ये जो ज्यादातर मिथ्स है ना यह पुराने टाइम में हमारे अबबाऊ वाजिदात जिस तरीके से जिंदगी गुजारते थे उसकी वजह से बने हुए हैं। पहले एक आदमी कमाता था। पांच बंदे खाते थे। अच्छी इन्वेस्टमेंट घर को ही समझा जाता था। क्योंकि आपका पूरा खानदान वहीं रहता था। आपकी नौकरी वहीं कहीं आसपास में होती थी। एक-एक गली में खानदान के 10-10 घर होते थे। फूफो, खाला सब के सब एक ही इलाके में रहते थे। तो हमारे जहन इस चीज के लिए ट्रेन हो गए कि हमारा जीना मरना अब इसी मोहल्ले, इसी इलाके, इसी गली और इसी घर में होगा। अभी भी कुछ ऐसे लोग मौजूद हैं जो अपने बच्चों से ताल्लुक तोड़ने को तैयार हैं। लेकिन कसम से अपना घर छोड़ने को तैयार नहीं। आज भी घर के नाम पर बहनों और भाइयों में लड़ाईयां होती हैं और बाज औकात तो बात जान लेने और देने तक आ जाती है। तो सवाल यह पैदा होता है कि कहीं हमारे दिमागों में अपने घर की डेफिनेशन गलत तो नहीं है। अब मैं आपको एक नया नजरिया देना चाहता हूं। वो नजरिया जिस पर मैं खुद अमल करता हूं। यह मेरी डिज़ योर ओन लाइफ की फिलॉसफी का एक पार्ट है। हो सकता है कि आप में से बहुत सारे लोग इससे कनेक्ट करें और हो सकता है कि बहुत सारे ना कर पाएं। एंड दैट इज टोटली फाइन। मेरे पास एक अच्छा घर खरीदने की हैसियत होने के बावजूद मैं रेंट पर रहता हूं। और यह फैसला मैंने बहुत सारी चीजों को सोच समझ के लिया है। मैं वह सब चीजें आपके साथ शेयर करता हूं ताकि आपको एक आईडिया हो सके। मेरे लिए यह बात बहुत इंपॉर्टेंट है कि जिस सोसाइटी में मेरे बच्चे बड़े हो रहे हैं वो कैसी है। विद रेंट आई हैव द एबिलिटी टू डिसाइड वेयरवर आई वांट टू रेज माय किड्स। आई एम नॉट टाइड टू माय हाउस। तो इफ फॉर सम रीज़न देयर इज एन इशू विथ द सोसाइटी मेरे पास कहीं और शिफ्ट होने का ऑप्शन हमेशा ओपन है। मेरे लिए यह बात जरूरी है कि मेरी जिंदगी की जमा पूंजी स्टील और सीमेंट में ना लगी हो बल्कि काम कर रही हो और मुझे कुछ कमा के दे रही हो। इसीलिए आई पुट माय मनी टू वर्क वेयर आई थिंक इट कैन डू द बेस्ट ऑफ वर्क। वैसे टेक्निकली मेरी जमा पूंजी लगी हुई सीमेंट और स्टील में ही है। लेकिन उन कंपनीज़ के शेयर्स में आई रेदर बी एन इन्वेस्टर देन अ कंज्यूमर। मेरे लिए यह बात बहुत इंपॉर्टेंट है कि मैं फ्लैक्सिबल रहूं, लिक्विड रहूं। मेरी फैमिली मेरे साथ रहे। कल को अगर मेरे बच्चे या मेरे मां-बाप बोले कि हमें यहां वहां जाना है तो मैं नहीं चाहता कि वो सिर्फ इस वजह से अपना डिसीजन ना ले पाए कि अब्बू अम्मी मूव नहीं करेंगे या मेरा बेटा मूव नहीं करेगा। पाकिस्तान में सोसाइटीज का कुछ भरोसा नहीं है। कहीं पर डुप्लीकेट फाइल्स, कहीं पर बारिश का पानी और कहीं कुछ और। मैं अपना जहनी सुकून इस चीज में महसूस करता हूं कि मैं लिक्विड रहूं। अगर कहीं भी कोई मसला आया उठा के दूसरी जगह मूव हो गए। जिन लोगों ने अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी बीटीके में लगाई थी, आप उनसे जाकर पूछें वो किस हाल में हैं। मैं एक रिमोट वर्कर हूं। मेरे बच्चे स्कूल नहीं जाते, मेरे वालदेन रिटायर्ड हैं तो मुझे किसी जगह पर बंध के रहने की जरूरत ही क्या है? आप सोच नहीं सकते कि एक अनचेंड लाइफ जीने का क्या मजा होता है जब आपको किसी भी चीज ने बांध के ना रखा हो। पिछले छ सालों में मैं बहरिया के अंदर ही दो बार घर चेंज कर चुका हूं। इसलिए नहीं कि लैंड लॉर्ड ने कहा। इसलिए कि मेरे बेटे बड़े हो रहे थे। अम्मी को और बेगम को गार्डनिंग का शौक था तो मैंने सोचा कि एक ऐसा घर हो जहां पर गार्डन थोड़ा बड़ा हो ताकि बच्चे भी खेल पाएं और अम्मी के शौक भी पूरा होता रहे। मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग मेरे घर आए और बोले हाय कितना बड़ा घर है आपका। मुझे यह सुनने का कोई शौक नहीं है। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई क्या समझता है। इसलिए मैं लोगों की फिक्र से आजाद हूं क्योंकि मेरी फैमिली मेरे साथ है। मैं अपने अम्मी अब्बू का अच्छा बेटा, अपने लाइफ पार्टनर का एक अच्छा शरीका हयात, अपनी बहनों का एक बेहतरीन भाई और सबसे बढ़के अपने बच्चों का सुपर हीरो हूं। और सच बताऊं? बस वही मैटर करता है। तो यह सब सुन के आपको कुछ समझ आ रहा है?
आपको समझना यह है कि मैंने अपनी पूरी सिचुएशन को पहले असेस किया है। मुझे क्या चाहिए, मुझे क्या नहीं चाहिए। और उसके बाद मैंने एक बहुत ही कैलकुलेटेड बी स्पोक नॉलेज बेस्ड डिसीजन लिया है जो मेरी लाइफ को सपोर्ट करता है। जो मेरी जिंदगी गुजारने के तरीके को सपोर्ट करता है। जो मेरी प्रायोरिटीज को सपोर्ट करता है। मेरे गोल्स को सपोर्ट करता है। अपना पैसा एक जगह फंसाने और डेप्ट में जाने के बजाय मैंने उसे इन्वेस्ट करा हुआ है। वो मेरे लिए काम कर रहा है और मेरे रेंट से लेके मेरी ग्रोसरीज तक वही पे करता है। अब अगर मैं इसे 5 से 10 साल और ग्रो होने दूं तो शायद वो मुझे इस काबिल भी कर देगा कि मैं दो घर ले सकूं। तो क्या मार भाई आप कभी भी अपना घर नहीं लेंगे? नहीं लूंगा एक दिन जरूर लूंगा। लेकिन यह डिपेंड करेगा कि मैं लाइफ के किस स्टेज में हूं। मेरे पास कितने पैसे हैं और मैं आगे क्या चाहता हूं। जिस दिन मेरे पास इतने पैसे हुए कि मैं उस घर जैसे पांच घर और ले सकूं। शायद मैं घर ले लूं। जिस दिन मेरी फैमिली ने मुझे कहा कि अमार हमें यह मुल्क, यह शहर, यह सोसाइटी और यहां के लोग बहुत अच्छे लगते हैं। हमें इनके साथ रहने में, जिंदगी गुजारने में, शेयर करने में बहुत मजा आता है। शायद मैं घर ले लूं। जिस दिन मुझे लगेगा कि अब मैं रिटायर हो जाना चाहता हूं। एक हरीभरी जमीन और साफ सुथरी हवा में। शायद मैं घर ले लूं। जिस दिन मुझे लगा कि घर ले भी मेरी फाइनेंशियल सिचुएशन पे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। शायद मैं घर ले लूं। लेकिन अभी यह डिसीजन लेना बहुत ज्यादा जल्दबाजी होगी। दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है और उसके साथ बदल रही है हमारी सोच, हमारे रहन-सहन, हमारी आदतें, हमारे खाने और कमाने के तरीके और हमारे बच्चों के लिए आने वाली अपॉर्चुनिटीज़। कोई ऐसा फैसला लेना जो आपको कैद कर दे। एक जगह, एक सोच, लिमिटेड अपोरर्चुनिटीज के साथ। मेरे नजदीक ठीक अमल नहीं है। लोग अपनी जिंदगी का सबसे पहला काम घर बनाने का करते हैं और फिर पूरी जिंदगी उसे एक घर के इर्द-गिर्द सारे फैसले लिए जाते हैं। मुझे ऐसा लगता है यह घर बनाने का फैसला यह घर बनाने का काम शायद आपकी लाइफ का सबसे आखिरी काम तो हो सकता है। पहला बिल्कुल नहीं हो सकता। कम से कम मेरे लिए तो नहीं। अब इस वीडियो को बनाने का मकसद यह नहीं था कि मैं आपको डिरेज करना चाहता हूं घर बनाने से। इसका मकसद बस यह था कि आप अगर यह फैसला ले रहे हैं तो सिर्फ इसलिए ना लीजिए कि सब लोग ऐसा ही करते हैं। आप एक यूनिक इंडिविजुअल हैं। आप यह फैसला अपनी जरूरीरियात, अपनी ख्वाहिशात और जिस तरह आप जिंदगी गुजारना चाहते हैं, उसके हिसाब से लें। अगर आपको लगता है कि घर ना लेने की वजह से उसमें रुकावट आ जाएगी तो प्लीज घर जरूर लीजिए। लेकिन अगर आप यह फैसला इसलिए ले रहे हैं कि आपके नजदीक घर खरीदना अच्छी इन्वेस्टमेंट है। आप यह फैसला इसलिए ले रहे हैं कि यह सबसे जरूरी काम है। आप यह फैसला इसलिए ले रहे हैं कि सब ऐसा ही करते हैं। तो प्लीज थोड़ा रोकिए और सोचिए शायद आप एक ज्यादा बेहतर फैसला ले सकें। अब बस मुझे आपके दो मिनट और चाहिए। मैं आपके साथ थोड़ी सी दिल की बात करना चाहता हूं। मेरी पिछली क्रेडिट कार्ड की वीडियो को आप लोगों ने जिस तरह सराहा है, उस पे जो व्यूज, लाइक्स और कमेंट्स आपने किए हैं, मेरे पास अल्फाज़ नहीं है कि मैं किस तरह से बताऊं वो मेरे लिए कितने ज्यादा इंस्पायरिंग थे। आई एम जस्ट ब्लोन अवे बाय द रिस्पांस फ्रॉम कम्युनिटी। उसके लिए आप सबका दिल से सॉरी दिल किस तरह होता है। दिल से बहुत ज्यादा शुक्रिया। मैं आपको बताना चाहता हूं कि मेरी हर वीडियो मेरी लाइफ का एक हिस्सा है जो मैं आप सबके साथ शेयर करता हूं। मेरी हर वीडियो वो रास्ता है जो मैंने खुद लिया और कहीं पहुंच गया। मेरी वीडियोस मेरी कहानी है। मेरी वीडियोस मेरे खुद के ऊपर किए हुए एक्सपेरिमेंट्स हैं। एक-एक स्क्रिप्ट को लिखते वक्त मुझे अपनी पुरानी यादों में जाना बहुत अच्छा लगता है। क्योंकि मेरे ज़हन में वो सिर्फ यादें हैं। लेकिन एक बार वो स्क्रिप्ट की शक्ल में आ जाए तो आपके लिए एक नई वीडियो मेरे लिए शायद सदका जिया और किसी और अमार के लिए शायद फाइनेंसियल फ्रीडम का वो रास्ता जो आज से 10 साल पहले यह अमार ढूंढ रहा था। अगर आप इस रास्ते पे मेरे साथ जुड़ना चाहते हैं तो मेरे इस छोटे से चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं। अब अगर आपको नहीं पता कि आपने फाइनेंशियल स्टेबिलिटी की जर्नी शुरू कहां से करनी है तो आपके भाई ने आपके लिए एक फ्री फोर स्टेप गाइड तैयार की है। यह गाइड आपको स्टेप बाय स्टेप समझाएगी कि फाइनेंसियल स्टेबिलिटी हासिल करने के लिए क्या करना है। आपने सिंपली www. marsi.