[संगीत] जी हां इस किरदार का नाम है सरदार अब्दुल रहमान बलोच अल मरूफ रहमान डके जो अफशान गली वाले दादर बलोच का बेटा था और इसके बाप का कातिल इकबाल उर्फ बाबू डकेट था आपको यह बात सुनकर हैरानगोइथॉन्ग रहमान ने जुर्म की दुनिया में कदम रखा 13 साल की उम्र में रहमान ने अपने पड़ोसी को जो है वह मामूली से झगड़े की बिना पर छुरी मारी और छुरी मारकर जो है वह फरार हो गया पहला जुर्म इसका यह था इसके अलावा इसके ऊपर अनगिनत एफआईआर पुलिस के मुताबिक जो है वोह दर्ज है जिसमें कतल डके
ती भत्ता खोरी पुलिस मुकाबला यह शामिल है और इसके सर की कीमत जो है वह पुलिस ने 50 लाख रप रखी थी जब दादर बाबू डकेट के हाथों मारा गया तो कुछ ही अरसे के बाद रहमान बलोज को हाजी लालू ने अपनी सरपरस्ती में ले लिया यह शायद ऐसे ही था जैसे किसी फिल्म में विलन मजलूम के जज्बात के साथ खेल रहा हो मगर एक बात इस ख्याल को बदल भी देती है वो यह है कि रहमान और हाजी लालू का ताल्लुक इस कदर गहरा था कि हाजी लालू के बेटे यासिर अराफात और रहमान ब्लोज
दोनों की शादी गोली मार के सेठ यूसुफ की बेटियों से हुई थी यह वही मौका था जब रहमान डकेट खतरों का खिलाड़ी बनकर सामने आया हाजी लालू के ग्रोह में रहमान बलोच और हाजी लालू के बेटे अरशद पप्पू और यासीर अरफात ने मिलकर जुर्म की दुनिया में ऐसे कारनामे सर अंजाम दिए जिसकी कोई मिसाल नहीं मिलती तो उसके बाद रहमान और ये सब मिलके यासिर अरफात पप्पू मिलके ये सब इस कारोबार को देख रहे थे और इनका जो मतम नजर था वो यह था कि हम जॉइंट वेंचर के तौर पर इसको एक कुवत में होकर
चलाएं ताकि बाकी ग्रुप्स के साथ हम लड़ सके कुछ अर्से तक तो ये पार्टनरशिप चली मगर फिर एक ऐसा वाकया हुआ जिसके बाद दोनों ने हमेशा के लिए राह जुदा कर ली जब हाजी लालू के पास अब्दुल रहमान बलोच के कुछ पैसे जमा हो गए जो तकरीबन एक करोड़ रुपए थे तो हाजी लालू से उसने तकाजा किया रहमान ने कि मुझे मेरे पैसे दिए जाए तो जरा यह बताते हैं कि हाजी लालू ने जो है वो रहमान को गिरफ्तार करा दिया जब वो गिरफ्तार हुआ तो फिर उसके बाद रहमान को जो है वो पेशी पर
ले जाया गया पेशी पर जाने के दौरान उसको बी क्लास दी गई और रहमान को जो है वो फिर वहां से उसने सिटी कोर्ट से फरार हो गया कराची की एक नामवर हस्ती लरी की थी अनवर भाईजान अनवर भाईजान जो है वो अरशद पप्पू की बीवी का मामू था सगा मामू तो इस पर जो है वो रहमान ने एक तीर्थ से दो शिकार किए एक तो वोह हर्षद पप्पू को जो है वो ठेस पहुंचाना चाहता था बदला लेना चाहता था दूसरा अनवर भाईजान सरगरम थे तो उन्हें हटाना चाहता था तो इसने जो है वो उस
वक्त अनवर भाईजान को मारा जब वह किसी जनाजे से वापस आ रहे थे इसी खून रेजी में अरशद पप्पू ने भी ईंट का जवाब पत्थर से दिया पप्पू ने हब चौकी के पास रहमान के चचा को कत्ल करने से पहले फोन पर रहमान को बताया कि सुन मेरी बात सुन फिर उसने रहमान के चाचा को गोलियों से भू दिया अरशद पप्पू के ो ने चुन-चुन कर रहमान के कारोबारी मफा दत को भी निशाना बनाना शुरू किया बेबस रहमान डकेट को अब लरी छोड़कर बलोच स्तान भागना पड़ गया मारामारी की इस जंग ने कहानी का ऐसा
रुख बदला कि लिरी ने आलमी तवज्जो हासिल कर ली और लिरी इंटरनेशनल मीडिया के रडार पर आ गया चाकी वाड़ा के इलाके संगलन की झटपट मार्केट के करीब बलूचिस्तान जाने वाली पब्लिक ट्रांसपोर्ट के एक बस अड्डे का ट्रांसपोर्टर और टाइम कीपर फैजू एक नया किरदार फैजू कौन था और आखिर व रहमान डकेट के लिए इतना अहम क्यों था यह जानने के बाद आप एक बार जरूर चौक जाएंगे चले अब आपको इस किरदार फैजू की कहानी सुनाते हैं फैजू बस अड्डे और इर्दगिर्द के इलाके से भता वसूली करता था जो इसका कुछ हिस्सा पुलिस को और
रहमान डकेट को पहुंचाता था अर्शत पप्पू ने फैजू से कहा क्या अब भत्ता रहमान को नहीं हमें देना होगा इसके बाद क्या हुआ एक मौके पर एक ट्रांसपोर्टर का अगवा होता है और उस ट्रांसपोर्टर को अवा के बाद कत्ल कर दिया जाता है यहां से गैंग में एक टूट फूट शुरू होती है और यह जो शख्स था जिसको कत्ल किया गया यह रहमान डकेट के लिए बहुत इंपॉर्टेंट था और रहमान डकेट ने उसके लिए अरशद पप्पू से कहा कि तुम यह ना करो अशद पप्पू ने उसकी बात नहीं सुनी और व ट्रांसपोर्टर जो है तावा
ना देने की पादास में मारा गया यह ट्रांसपोर्टर उजर बलोच का बाप था उसके बाद हमने यह देखा कि अश पप्पू और रहमान डकेट ये दोनों एक दूसरे के सख्त मुखालिफ और बदतर दुश्मन बन गए और उसके बाद कराची के लोगों ने जो मनाजिर देखे हैं वोह बहुत ही खौफनाक थे जी हां उज़ैर बलज उसी ट्रांसपोर्टर फैजू का बेटा है और रहमान डकेट के बचपन का दोस्त भी बाप के कत्ल से पहले उज़ैर ब्ल जुर्म की दुनिया से बिल्कुल दूर था वो लरी जनरल अस्पताल में वार्ड बॉय की मुलाजमत करता था अरशद पप्पू के हाथों
उज़ैर के बाप के कत्ल के बाद रहमान ने उज़ैर को बिल्कुल वैसे ही अपनी सरपरस्ती में ले लिया जैसे कभी हाजी लालू ने खुद रहमान की सरपरस्ती की थी रहमान डकेट की ताकत में इजाफा हो रहा था उसकी बड़ी वजह रहमान को मिलने वाली सियासी सरपरस्ती थी रहमान के बारे में यह कहा जाता है कि जब 18 अक्टूबर को बेनजीर भुट्टो साहिबा वतन वापसी आई जिला वत नहीं खत्म करके तो एयरपोर्ट के रास्ते में जब उन पर हमला हुआ तो तो उस हमले में जो है वह तकरीबन 150 अफराद शहीद हुए उस वक्त रहमान डके
जो है वो बेनजीर भुट्टो का सिक्योरिटी अफसर था और उसने जो है बेनजीर भुट्टो की गाड़ी से उन्हें निकाला और अपनी गाड़ी में बिठाकर बा हिफाजत जो है वो बिलावल हाउस पहुंचाया था और सिर्फ यही नहीं बल्कि ये चीजें भी ऑन रिकॉर्ड है कि रहमान के जरिए बिलावल हाउस की एक्सटेंशन का काम लिया गया जो ब लावल हाउस के इर्दगिर्द के मकाना थे वह कैसे खाली कराए गए यह भी किसी हद तक लोगों को पता है यह वही वक्त था जब लरी पर रहमान की ग्रिफ्ट मजबूत से मजबूत तर हो रही थी फिर वो वक्त
भी आया कि रहमान डकेट ने लरी की सियासी वारिस समझी जाने वाली जमात पाकिस्तान पीपल्स पार्टी को भी रगड़ना शुरू कर दिया कौन काउंसलर बनेगा और कौन जिलाई नाजम यह फैसले भी रहमान ब्लोज की मर्जी के बगैर नहीं होते थे एक वक्त ये भी आया कि पीपल्स पार्टी ने टिकट दिए बल्दिया इलेक्शन में अपने उम्मीदवार खड़े किए मगर पीपल्स पार्टी हार गई और रहमान के हिमायत याफ्ता वह तमाम उम्मीदवार जीत गए जिनकी वाबस्ता कीी तो किसी जमाने में पीपल्स पार्टी से रही थी मगर इस बात में कोई शक नहीं के नुमाइंदे वह इलेक्शन रहमान की
मदद और हिमायत से जीते रहमान डकेट और उज़ैर बलज मिलकर तमाम मैदान मार रहे थे मगर फिर पीपल्स पार्टी को भी अंदाजा हुआ कि रहमान डकेट की मौजूदगी में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी का सियासी किला उनके हाथों से निकल जा जाएगा अब पीपल्स पार्टी ने सोच लिया कि रहमान डकेट को हर हाल में रास्ते से हटाना है और अब एंट्री होती है ऐसे पुलिस ऑफिसर की जिसकी दहशत से लिरी समेत शहर के बड़े-बड़े बदमाश कांपते थे और वोह करैक्टर था एसएसपी चौधरी असलम 2005 में एसएसपी चौधरी असलम जिन्हें जो है वो एक खुसूसी टास्क फोर्स बनाई
गई लिरी टास्क फोर्स और उन्हें ताय आत किया गया क्योंकि कराची में लरी में खासतौर पर बदमल ज्यादा थी तो उन्हें यह टास्क दिया गया कि रहमान को गिरफ्तार किया जाए उसके लिए उन्होंने अपने मकब का नेटवर्क बिछाया और बिछा के बाद जो है वह एक इत्तला मिली कि रहमान जो है वह हब के इलाके में है 2005 में पुलिस ने भेस तब्दील किया एक ट्रक के अंदर सवार हुए और उस परे घास पूस डाल के जब हब में रात में उस मुकाम पर पहुंचे जहां पर रहमान मौजूद था ट्रक से उतर रहे थे तो
रहमान पुलिस की तमाम जो मूवमेंट वह देख रहा था क्योंकि उसने वहां पर सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क बिछाया हुआ था तो जैसे ही पुलिस चौधरी असलम इरफान बहादुर और दीगर पुलिस की टीम उतरी तो इन्होंने यहां से गोलियों की बारिश शुरू कर दी जिसमें चौधरी असलाम इरफान बहादुर और कई पुलिस वाले जख्मी हुए जिसमें हसास इदार के लोग भी थे उसके लिए फौरी तौर पर मदद की गई हेलीकॉप्टर भेजा गया और रहमान वहां से इन पर हमला करके इन्हें जख्मी कर फरार हो गया रहमान जब फरार हुआ तो फिर चौधरी असलम ने अपनी जिंदगी का
मकसद बना लिया कि रहमान को किसी ना किसी तरह पकड़ना है तो इन्होंने जो है वह अपनी तिजोरिया के ताले भी खोल दिए और मुख बों से कहा कि मुझे किसी ना किसी तरह रहमान चाहिए तो फिर रहमान के लिए 2006 में कोएटा टाउन में जो है वहां पर एक छापा मारा गया बलूचिस्तान के कोइट टाउन में 18 जून 2006 को वहां से रहमान जो है वह चौधरी असलम की टीम ने गिरफ्तार किया जब रहमान को पकड़ा और पकड़ के खुफिया तौर पर कराची लाए तो उसे गार्डन पुलिस हेड क्वार्टर के अंदर जो चौधरी असलम
का सेल था वहां पर रखा गया वहां पर उसकी खूब खातिर मदारत की गई उसको उल्टा लटकाया गया और उसे जिस तरह रिवाय अंदाज में पुलिस तफ्तीश करती है उस दौरान रहमान ने जो है तमाम अपने जरायम के बारे में पुलिस को बताया जो कि वीडियो रिकॉर्ड भी है वह पुलिस के पास है वह अभी तक मंजर आम पर नहीं आया है वह इसलिए नहीं आया है क्योंकि पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी डाली नहीं थी जब जून में पुलिस ने इसको गिरफ्तार कर लिया अगस्त में रहमान जो है वह चौधरी असलम की टीम के एक दो
में मिरान को भारी रकम देकर कहते हैं कि 5 करोड़ रुपए की रिश्वत देकर वहां से भाग गया जब रहमान दूसरी बार फरार हुआ तो फिर जो है वो एक तरह से चौधरी असलम और और इनकी टीम का डी मोरलाइज हुई और इन्होंने जो है वो रहमान की गिरफ्तारी तो डाली नहीं थी इसलिए बच गए कानूनी कारवाई से लेकिन जिन लोगों को पता था और जिन इदार को पता था उनकी तफ्तीश में आ गए और इनसे तफ्तीश शुरू होने लगी तो रहमान दो बार पुलिस की कस्टडी में आया फिर भाग गया फिर जब रहमान भाग
गया तो फिर उसकी गिरफ्तारी के लिए फिर कोशिशें शुरू कर दी गई कि रहमान को हर सूरत में चाहिए तो फिर रहमान की एक इंफॉर्मेशन आई कि वो जो है वो कराची से कराची आ रहा है तो उस पर जो है वो पुलिस ने एक एनकाउंटर किया जिसमें रहमान को और उसके साथियों को मार दिया जब वह कार में आ रहा था वो चौधरी असलम की टीम थी जिसने रहमान को मुकाबले में मान 9 अगस्त 2009 अतौर को रात गए पुलिस मुकाबले में रहमान डकेट और उसके तीन साथियों का चैप्टर हमेशा के लिए क्लोज हो
गया मीडिया रिपोर्ट्स और दीगर शवा हैद के मुताबिक यह पुलिस मुख मुकाबला मुतजेंस की मौत का मुकाम कराची का इलाका गुलिस्तान जोहर जाहिर किया गया [संगीत]