[संगीत] आगे चक्र के ध्यान में पूर्व जन्म के सारे वास्ता के पास और यक्ष रक्षा गंधर्व किन्नर अप्सरा उसे योगी के आगे नतमस्तक हो जाते उनके रास्ते में अड़चन नहीं कर सकते पांचो केदो के ध्यान के फल इसी केंद्र में प्राप्त हो जाता है वह रोग योगीराज योगी हो जाता है सारी विद्या में राजा विद्या शास्त्र दल कमल खिलता है वह सारे न्यूरॉन्स अपने अपने महिमा में चमकते झलक जिसको विज्ञानी न्यूरॉन्स बोलते ऋषि बोलते हैं सूक्ष्म कोष उसके दर्शन मात्रा से लोगों को आनंद शांति और sadprerna मिलने लगे की ऐसे योगी के दर्शन पुण्य आत्मा
लोग करने के लिए लालायित होते हैं ऐसा योगी जो मूर्ति या वाट वृक्ष स्थापित कर दे तो वह भी लोगों के manorat पूरे करने में सक्षम हो जाते हैं बड़ी अंबाजी की पूजा होती है गुजरात में नहीं विश्व भर के लोग गुजराती बड़े अंबाजी वास्तव में उनकी मूर्ति नहीं है किसी ऐसी शक्ति के धनी महापुरुष ने वो मूर्ति स्थापित की इसलिए अबू के पास अंबाजी विश्व के सभी अंबाजी की मूर्तियां से ज्यादा पूजनीय हो रही है [संगीत] इस योग से संपन्न किसी महापुरुष ने वो मूर्ति स्थापित की हालांकि अब वह जगह और मंदिर दूसरे रूप
में के पहले बहुत छोटा सा था फिर भी स्थापना करने वाले बड़े पुरुष द इसलिए मोटा अंबाजी अंबाजी में मोटा छोटा नहीं होता लेकिन स्थापना करने वाला रुक मनोरथ मनोकामना करते और मनोरथ पूर्ण पैदल चलते जाते बडौदा से कोई कच्छ से कोई प्रभाव अभी तक vatvrukshon में मूर्तियां में यहां अपने अपने तपस्या स्थान में रहता है उनका शरीर ना होने के बाद भी उनका संकल्प के अनुसार तिरुपति बालाजी में भी ऐसा ही कोई महापुरुष का ही चमत्कार होगा जगन्नाथ पुरी जगतगुरु शंकराचार्य ऐसी बद्रीनाथ की जो महिमा तीर्थ कुर्वांति तीर्थ जैन धर्म में नाम खोज लिया
तीर्थंकर तीर्थ में कर ऐसे पुरुष तीर्थ मेकर हो जाते तीर्थ को निर्माण करने वाले हो जाते ऐसे मैन जहां रहते हैं जिस वस्तु को छूट वो प्रसाद हो जाता है योग वशिष्ठ पढ़ो जिसने आत्म रूपी तीर्थ में स्नान किया है वह अपवित्र को भी पवित्र कर देता है जिस पुरुष ने शरीर में आत्मा का दर्शन किया है उसका शरीर भी परम पवित्र हो जाता है वह पुरुष niraavaran स्थित होते हैं शांत रूप aakashvat और niralam स्थित होते हैं रामजी तुम संकल्पना की ओर मत जाओ क्योंकि चित्त की वृत्ति क्षण क्षण में बदलती है और अनंत
योजन पर्यंत चली जाती है जो उसका अनुभव करने वाली सत्ता मध्य स्वरूप है जब उसमें स्थित होते हैं तब वह अद्भुत पद में स्थित हो जाते हैं ज्ञानवान परम अद्भुत padmshthit रहता है कभी उससे नहीं गिरता उसका परम उदित रूप होता है ऐसे पुरुष जैसी भी इच्छा करते तीनों कल उनको सदा विद्यमान होते हैं साधन कुछ नहीं परंतु ज्ञानी अवश्य किसी कम के लिए यातना नहीं जैसा भी प्राप्त होता है उसी में प्रसन्न रहते वह पुरुष निरुपम हो जाता है और उसको कोई संसार की उपमा नहीं दे सकता ऐसा पुरुष ब्रह्मा आदि का भी पूजनीय
सभी उसका मैन करते हैं सब उसके दर्शन की इच्छा करते हैं और दर्शन करके प्रसन्न होते हैं जैसे सूर्य के उदय होने पर सूर्यमुखी कमल खिल आते हैं और सब खुलासा को प्राप्त होते हैं वैसे ही उनका दर्शन करके सब अलादीन हो जाते हैं वह संघ से दूर होता है सहस्र चंद्रमा कठे हो जाए तो भी हृदय की तपन निवृत्ति नहीं कर सकते ही राम जी सब तीर्थ के स्नान और दूसरे कर्मों से भी मनुष्य ऐसा पवित्र नहीं जैसे ज्ञानवान के वचनों से पवित्र होते हैं ज्ञानवान के दर्शन और ज्ञानवान के वचनों से जितनी पवित्रता
आती है उतनी taptirthon से भी पवित्रता नहीं आती क्योंकि वहां करता बना रहता है पुण्य आत्मा सुखी दुखी बना बना रहता ज्ञानवान के संपर्क से एक ऐसा माहौल बन जाता है उनकी जहां तक नजर पड़ती उतने में करती तो लोगों का उसे समय बातचीत हो जाता और ज्ञानवान के आत्मिक तरंगों में उनका मैन लैला इसलिए ज्ञान मानो के चरणों में बैठे हुए साधक कितना भी तप करके आए तीर्थ करके अभी इनको याद बना रहता है गुरु जी के संग में बापूजी के महापुरुष वहां जो अच्छा लगा वो यात्रा करने में नहीं वहां जो उन्नति का
एहसास होता है वो यात्रा में नहीं होगा इतना तप करने में वो नहीं होगा इतना व्रत उपवास करने में वो नहीं आया जो महापुरुषों के साथ अष्टावक्र कहते हैं जनक तट से तुलना के एन जाए ढेरो ने दृष्टि संसार की किसी परिस्थिति से वह द्वेष नहीं करता आत्मा नमन दिक्षती महात्मा परमात्मा को चाहता नहीं परमात्मा को ना जाना अष्ट सिद्धियां थी हनुमान जी के पास फिर भी वो परमात्मा को चाहते द रामजी मिले फिर भी वो परमात्मा को चाहते द जब श्री राम जी ने परमात्मा तत्व को उपदेश दिया तब हनुमानजी वहां पहुंचे द्रोण दृष्टि
संस्कार आत्माराम दीक्षित हनुमान जी ने राम जी ने कहा क्या चाहिए [संगीत] पूर्ण गुरु का ज्ञान तत्व को राम जी ने गले लगाया इधर-उधर का भर देते हैं इसलिए वंचित रहे रुपए पैसे डॉलर को नौकरों को नौकरी को धंधे कोई इज्जत को शरीर को भविष्य को महत्व देते इसलिए वर्तमान में परमात्मा का आना दरवाजा हो जाता है और भविष्य कभी आता ही होता ही नहीं जब होता है तो वर्तमान भी नहीं है स्वास्थ्य में भविष्य भी नहीं है वर्तमान ही होता है पीछे का चिंतन करो तो भूतकाल हो गया आगे की कल्पना करो तो भविष्य
हो गया कल हमेशा एक ही पीछे और आगे की मैन मृत्यु के कारण प्रियंका हो जाते भूत भविष्य प्रेजेंट काली होता है उसे कल में टिकना समझो अकाल पुरुष हो गया [संगीत] सिद्ध अवस्था में साक्षी हो भी नहीं रहता इसलिए वो ऊंची बात फिर वाणी का विषय नहीं होता गुरु की दृष्टि और वचन करते-करते टिक जाता है साथ यहां तक आते-आते तो कई विचारे गुमराह हो जाते हैं जैसे इस होते-होते कई बच्चे छठ जाते और इस के बाद भी पढ़ लाख बच्चे हर साल एडमिट होते आए इसके लिए होते-होते कसरत करते हजारों हजारों नहीं तो
कई हजार छठ जाते छोटे-छोटे कोई ब्रह्मा साक्षात्कार तो दूसरे जो चलते तो वह क्या अनपढ़ रहते नहीं योग्यता तो उन में आती है लेकिन आखिरी मंजिल जूनियर सीनियर आईएएस ऑफिसर इस ऑफिसर का पद तो बहुत अच्छे छोटा है प्रधानमंत्री का पद भी छोटा है इंदिरा का पद भी छोटा है आत्मसात करके भगवान के सरकार दर्शन का पद भी छोटा है सरकार भगवान तो शकुनी को भी दिखे द मिले द राम जी का दर्शन तो हनुमान जी ने किया था फिर भी राम तत्व का दर्शन के लिए हनुमान जी सेवा में लगे रहते इतनी ऊंची चीज
हम बहुत चीज की तरह [संगीत] [प्रशंसा] अनु अनु कुछ नहीं लेकिन सपना देखने वाला तोरण है ऐसी जगत को जानने वाला जो बैठा हुआ है मैन भी अपना नहीं बुद्धि भी अपनी न्यू प्रकृति की अपना तो परमात्मा ही है दिल ही तेरी मंजिल है तो अपनी दिल की ओर देख उसे दिल के देवता को देख ज्ञान स्वरूप आनंद स्वरूप सुख स्वरूप माधुरी स्वरूप सदा साथ कहे रे बैंकों जंजै सदा निवासी [संगीत] परम तत्व का साक्षात्कार करना अनंत गुना अच्छा है तो परम तत्व का साक्षात्कार की वे महापुरुष बड़े जैसे स्वर्ग की चिंतामणि सहज नहीं मिलती
कामधेनु सहेज नहीं मिलती कल्पना चीज तो जब जहां वाणी नहीं जाती और नजर नहीं पहुंचती वो आदर्श तत्व का साक्षात्कार करने वाले पुरुष की दुर्लभ होते फिर किसी को कोई कर्मकांड मिल जाता किसी को कोई उपवास रख मिल जाता किसी को कोई योगी मिलता तक पहुंच पाते ब्रह्मज्ञानी गुरु तक किसी को विद्वान ब्रह्म ज्ञानी मिल जाता अनुभवी ब्रह्मा ज्ञानी तो कहीं कभी धरती पर मिल पाते नौकरियां तो सदा मिलती रहे द ब्रह्म ज्ञानी धरती पर कभी-कभी मिलते हैं पटिया बच्चे और पति और तो मिलते रहते और फिर जो फायदा नहीं लेते हैं उनके भाग्य को
कर्मों के मारे ज्ञान के मारे बुद्धि के मारे लोग हैं जो फायदा नहीं उठाते उनके आज्ञा नहीं बाल उनकी पूर्णता तक यात्रा नहीं करते बुद्धि के मारे लोग जो उनके कृपा पत्र होते हुए बढ़ भागी [प्रशंसा] हमें तो योगिता नहीं होगी लेकिन उनकी कृपा ने कृपा पत्र बना शुक्र गुजर की हमें अपना माना और अपना दिल हमें भर दिया अपना ज्ञान हमें भर दिया अपना प्रसाद में भारती जिस पुरुष ने ऐसे अनुभव को नहीं पहचाना जिससे सब कुछ सिद्ध होता है और उसे छिपाया atmahanta है और मा आपदा के समुद्र में जिससे सब कुछ सिद्ध
होता है उसे आत्मा देव को छुपाया वह महंत है इसीलिए तो कितना भी पुण्य करते करते कुछ एन कुछ पाप रह जाते हो जन्म मारन रह जाता है दुख रह जाता है क्योंकि उसे आत्मा देव का tirthnaya तो क्या झक मार दिया [संगीत] आत्मा ज्ञान नहीं पाया तो कई दिक्कत ना है बोलते हो बोलते दिक्कतों में जिंदगी पुरी कर रहे आदत पद गई दिक्कत ना आए कही दिक्कत ना है [संगीत] बोले के दिक्कत ना आए नो प्रॉब्लम नो प्रॉब्लम आदत पद गई भक्ते रहते हैं बड़ा भारी मौत का प्रॉब्लम सामने खड़ा है बोले नो प्रॉब्लम
साक्षात्कार नहीं किया तो कब दिक्कत ए जाए कोई पता नहीं कई दिक्कत नहीं है कोई दिक्कत नहीं कोई दिक्कत नहीं कई लोग बात करते हैं समझे समझे समझे समझे आप क्या समझे मेरे को भी बोल रहे हो गैस है समझे मैं क्या समझ गए तुम समझे अमेरिका शब्द बोल देते हैं कुछ लोगों ने कई दिक्कतें कोई नो प्रॉब्लम समझे समझे मैंने क्या कहा आदत पद जाती का आदत है लेकिन उसको जानने वाला चेतन गए उसमें वृक्ष आदि के जन्मों को पावेगा वृक्ष आदि को पाएगा तो दिक्कत हो जाएगी मरेंगे तो पक्की बात है फिर बनेगा
तो दिक्कत होगी देवता बनेगा तो भी दिक्कत होगी नो प्रॉब्लम नो प्रॉब्लम प्रॉब्लम चारों तरफ प्रॉब्लम है आत्मा ज्ञान के बिना जी जिसको आत्मा में हम प्रत्यय नहीं उसको शांति कदापि प्राप्त नहीं हुआ उसको परम शांति नहीं तो प्रॉब्लम रहित कहां हुआ प्रॉब्लम मिटते मिटा दे जिंदगी मिट जाएगी प्रॉब्लम बचे रह जाएंगे सारे प्रॉब्लम एक साथ मिटाने तो आत्मा देव को जान लो बस नहीं तो प्रॉब्लम नहीं मिटे सब नहीं मिटती जैसे बवंडर में उदा हुआ कभी स्थिर नहीं रहता वैसे ही देह अभिमानी को कभी भी शांति प्राप्त नहीं होती [संगीत] आत्मा को मैं जानता
हूं उसी को परम शांति मिलती है [संगीत] [संगीत]