हमारे यूनिवर्स में कुछ डॉ ऐसे हैं जिसकी वजह से हम एक दूसरे से और इस यूनिवर्स से जुड़े हुए हैं डॉ ऑफ अट्रैक्शंस ये उन्हें में से एक है और ये लो आज से नहीं है लेकिन तब से है जब से इस यूनिवर्स की उत्पत्ति हुई है डी सीक्रेट बुक में बताया गया है की आप जैसा सोचोगे वैसा पाओगे लेकिन इसमें कहानी गई ये बात कोई नई चीज नहीं है ये बात आपको मानव इतिहास के हर धार्मिक ग्रंथ और उनकी फिलासफी में देखने को मिलती है लेकिन हम उसे किस तरीके से समझते हैं वो हमारी
सोच पर निर्भर करता है डॉ ऑफ अट्रैक्शंस में कहीं गई साड़ी बटन का उल्लेख आपको हमारे वेदों और पुराने में भी मिलता है हमारे गुरु और ऋषि मुनियों द्वारा लिखे इन ग्रंथों में आपको कहानी ना कहानी डॉ ऑफ अट्रैक्शंस की नव जरूर देखने को मिलती है भले ही उनके समझने का तरीका थोड़ा अलग हो लेकिन समझने का जो में कॉन्सेप्ट है वो तो एक ही है और आज के इस वीडियो में मैं आपको बताऊंगा की डॉ ऑफ अट्रैक्शंस का यह सिद्धांत किस तरह से श्रीमद् भागवत गीता से जुड़ा हुआ है [संगीत] इस ड्राइविंग राज [संगीत]
भगवत गीता एक पवित्र हिंदू ग्रंथ है लेकिन अगर मैं बात करूं वन ऑफ डी बेस्ट इंस्पिरेशनल बुक की तो यह मेरी लिस्ट में सबसे ऊपर आता है जैसे की आपको पता है की इस पुस्तक में श्री कृष्णा और उनके प्रिया मित्र अर्जुन के बीच हुआ एक वार्तालाप है ये पुस्तक मानव जीवन का सर है मनुष्य के जीवन से जुड़े हर सवाल का जवाब आपको इसमें मिलता है अगर इस पुस्तक को आप एक बार भी पढ़ने हैं तो आपका जीवन जीने का नजरिया बादल जाएगा अगर हम डॉ ऑफ अट्रैक्शंस की बात करें तो वो हमें कहता
है की आप जैसा सोचते हो वैसा आप पाते हो लेकिन यही बात हजारों साल पहले लिखे इस पुस्तक में भी देखने को मिलेगी ठीक इसी से मिलता-जुलता वाक्य आपको इसमें मिल जाएगा यथादृष्टि तथा सृष्टि इसका अर्थ है हम जी नजर या सोच के साथ दुनिया को देखते हैं हमें दुनिया वैसी ही नजर आई है खाने का तात्पर्य यह है की मनुष्य की जैसी दृष्टि होगी वैसी ही उसकी सोच बनेगी और जैसी उसकी सोच होगी उसे हर चीज वैसी ही नजर आएगी इंसान जैसा समझना है जैसा सोचता है उसे वैसा ही सामने वाला नजर आता है
श्रीमद् भागवत गीता में लिखी यह बात हमको सीधे डॉ ऑफ अट्रैक्शंस की तरफ इशारा करती है यह हमें बताता है की हमारे विचार और हमारी सोच ही वह चीज है जिसकी ऊपर हमारा भविष्य निर्धारित होता है यह दुनिया हर तरह की चीजों से भारी हुई है अच्छी चीज बुरी चीज सही चीज गलत चीज खुशी दर्द पीड़ा प्यार नफरत और हम सभी इन चीजों से होकर गुजरते हैं लेकिन यह आप पर निर्भर करता है की आप किस दृष्टिकोण से इस दुनिया को देखना चाहते हैं आपके जीवन का वो कौन सा विजन है जो आप चाहते हैं
यदि आप सभी अच्छी चीजों पर अपना नजरिया रखते हैं अच्छी चीजों को प्राप्त करने के लिए एक सकारात्मक सोच रखते हैं तो यही सोच आपके जीवन में एक रियलिटी बन जाति है लेकिन अगर आपका दृष्टिकोण इस दुनिया की नकारात्मकता दर्द पीड़ा ईर्ष्या जैसी चीजों से जुड़ा हुआ है तो वही चीज आपके जीवन में वास्तविकता बन जाति हैं बहुत से लोग हैं जो अपनी लाइफ से ज्यादा दूसरों की लाइफ पर ज्यादा ध्यान देते हैं भले ही उनके जीवन में कोई भी समस्या ना हो लेकिन जब वो दूसरे लोगों के दुख दर्द और पीड़ा को देखते हैं
और सोचते हैं की उसे इंसान के साथ आखिर इतना बड़ा क्यों हुआ यह दुनिया कितनी बुरी है लेकिन दूसरे लोगों के प्रति का यही दृष्टिकोण और सोच को आप अपनी तरफ अट्रैक्ट करते हैं और आपका यही दृष्टिकोण फिर आपकी रियलिटी बन जाता है इसका सीधा मतलब यही है की आप जैसा सोचोगे आपको इस दुनिया से वैसा ही मिलेगा जैसे डॉ ऑफ अट्रैक्शंस में हमें बताया गया है की हम अपने मां की शक्ति की मदद से कैसे किसी भी चीज को का सकते हैं और कैसे हम अपने अवचेतन मां को रिप्रोग्राम करने में सफलता का सकते
हैं यही बात का उल्लेख आपको श्रीमद् भागवत गीता में भी देखने को मिलता है गीता के चाटे अध्याय में 35वें श्लोक में अर्जुन श्री कृष्णा से कहते हैं है कृष्णा क्योंकि मां अति चंचल अशांत खाती और बलवान है मुझे व्यू की अपेक्षा मां को वाश में करना अत्यंत कठिन लगता है तो इसके जवाब में श्रीकृष्ण कहते पुत्र जो तुमने कहा वह सत्य है मां को नियंत्रित करना वास्तव में कठिन है किंतु अभ्यास और व्यक्ति द्वारा इसे नियंत्रित किया जा सकता है श्रीकृष्ण कहते हैं आपका दिमाग ही आपका सबसे बड़ा नौकर हो सकता है या यही
आपका सबसे बड़ा दोस्त हो सकता है या फिर यही आपका सबसे बड़ा दुश्मन हो सकता है यह केवल आप पर निर्भर है की आप इसका उपयोग किस तरीके से करते हैं उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा की आपके विचार और भावनाएं आपके इरादों की उत्पत्ति है आपके थॉट्स और आपकी फीलिंग आपके इरादों का निर्माण करती हैं आपका मजबूत इरादा आपके एक्शन यानी के कार्य को संचालित करता है और आपका एक्शन आपको रिजल्ट देता है और इसी तरह आप अपने भाग्य का अपने भविष्य का निर्माण करते हैं उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है की एक बार जब
आप इस दुनिया में जन्म लेते हैं तो किसी का कोई पूर्व लिखित भाग्य नहीं होता आपने मनुष्य अवतार में जन्म लिया है और आप अपनी को किस तरीके से क्रिएट करना चाहते हैं वह पुरी तरह से आपके थॉट्स और फीलींगस के ऊपर निर्भर है आप अपने पूरे जीवन कल में अपने मां और अपने विचारों किस तरीके से इस्तेमाल करते हैं वो पुरी तरह से आपके ऊपर निर्भर करता है आप किस जगह से आते हो आपके आसपास रहने वाले लोग कैसे हैं आपके आसपास किस तरह का एनवायरनमेंट है इसी चीजों से पता चला है की आपके
विचार और आपकी सोच कैसी है आपके विचार और आपके इरादे ही आपका भविष्य निश्चित करते हैं श्री कृष्णा स्पष्ट रूप से कहते हैं की मनुष्य स्वयं अपने भाग्य का निर्माता है भागवत गीता में बिलीव यानी के विश्वास के बड़े में बहुत ही सुंदर तरीके से बताया गया है श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं की आपको खुद पर विश्वास करना होगा की आप इसे कर सकते हैं और दूसरी बात आपको ये विश्वास करना होगा की भगवान हमेशा आपकी मदद करने और आपका मार्गदर्शन करने के लिए हमेशा आपके साथ हैं यदि आपका परपज पॉजिटिव और सही है तो
भगवान यानी को वो सुप्रीम पावर हमेशा आपकी मदद कर रही है और आपको मार्गदर्शन दे रही है इसीलिए आपको खुद पर विश्वास करना होगा और साथ ही साथ आपको भगवान यानी की उसे सुप्रीम पावर पर भी विश्वास करना होगा जो हमेशा आपकी मदद करने के लिए मौजूद है जब भी आप कोई कम करने जा रहे हो या फिर कोई बड़ा डिसीजन लेने जा रहे हो और आपको खुद पर विश्वास तो हमेशा आपके पीछे जो सुप्रीम पावर है उसे पर विश्वास रखो जो भगवान या फिर ये यूनिवर्स है देखिए जब आप कोई कार्य करने की शुरुआत
करते हो तो आपको खुद पर विश्वास नहीं होता है आपको उसे कार्य को लेकर कई अजीबो गरीब और नेगेटिव विचार आने लगता हैं लेकिन आपको उसे कार्य को करने में अगर किसी का सपोर्ट मिल जाए तो आपका कॉन्फिडेंस लेवल कई गुना तक बाढ़ जाता है और उसे कार्य को लेकर आपके सारे नेगेटिव विचार दूर होने लगता हैं या हो ही जाते हैं क्योंकि आपके अंदर एक विश्वास बैठ चुका होता है की मेरे पीछे कोई खड़ा है और वो हमेशा मेरी मदद करेगा डॉ ऑफ अट्रैक्शंस और भगवत गीता हमें यही बताता है की किसी भी कार्य
को करने से पहले आपको ये बात हमेशा याद रखती है की ईश्वर या फिर ये यूनिवर्स हमेशा आपके पीछे खड़ा है और वो हमेशा आपकी मदद करने के लिए तैयार है आपको ये विश्वास हमेशा अपने अंदर रखना है जैसे डॉ ऑफ अट्रैक्शंस हमें बताता है की यूनिवर्स पर हमेशा विश्वास रखें ठीक इस तरह भागवत गीता में हमें श्री कृष्णा भगवान यानी की वो खुद उनकी ऊपर विश्वास करने को बोल रहे हैं श्रीकृष्ण खुद को ही एक पूरा ब्रह्मांड एक यूनिवर्स बताते हैं जैसे आकर्षण का नियम हमें बताता है की कैसे हम अपने थॉट्स और इंटेंशन
यानी की विचारों और इरादों से हम अपने किसी भी इच्छा को रियलिटी में बादल सकते हैं ठीक इस तरह भागवत गीता में डॉ ऑफ कर्म भी हमें यही बताता है डॉ ऑफ कर्म हमें बताता है की आपके द्वारा लिए गए एक्शन यानी की आपके द्वारा किया गए कर्म ही आपका भविष्य निश्चित करते हैं डॉ ऑफ अट्रैक्शंस में हमें थॉट्स फीलिंग और इंटेंशन के बड़े में बताया गया है जबकि डॉ ऑफ कर्म में एक्शन यानी की गम थॉट्स और इंटेंशन यानी की हमारे इरादों के बड़े में बताया गया है आकर्षण का नियम सकारात्मक सोच और कल्पना
को महत्व देता है जबकि कर्म का सिद्धांत सकारात्मक कार्य और इरादों को महत्व देता है लेकिन दोनों कॉन्सेप्ट हमें एक ही सुझाव देते हैं की आप अपने थॉट्स बिलीव और एक्शन की मदद से अपना खुद का भविष्य निर्माण कर सकते दोस्तों आप कोई भी पुस्तक पढ़ो चाहे वह डी सीक्रेट हो चाहे वो भागवत गीता हो लेकिन वो जो हमें बताना यह समझना चाहते हैं उनका समझने का जो में कॉन्सेप्ट है वो तो एक ही है हमारी प्राचीन फिलासफी या आज की मॉडर्न फिलासफी में हमें एक बात आम देखने को मिलती है और वो है हमारे
विचार हमारी सोच भविष्य में आप क्या पन चाहते हैं यह क्या बन्ना चाहते हैं वो इस बात पर निर्भर करता है की उसके प्रति आप अभी क्या सोचते हो उसके प्रति आप अभी किस प्रकार से एक्शन लेते हो आपके विचारों और लिए गए एक्शन का प्रभाव सिर्फ आपके भविष्य के ऊपर नहीं बल्कि आपके परिवार पर भी पड़ता है और आपकी आने वाली पीढ़ी में भी इसका प्रभाव आपको देखने को मिलता है इसीलिए हमेशा सोच समझकर सोचिए मुझे उम्मीद है की आप यह वीडियो पसंद आया होगा अगर आपको वीडियो पसंद आया हो तो इसे लाइक और
शेर जरूर करें और ऐसे ही और भी वीडियो के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें मिलते हैं आपसे अगले वीडियो में तब तक के लिए जय हिंद [संगीत]