यकीन सब्र और आजमाइश यह कहानी है एक ऐसे अल्लाह वाले की जिसका ईमान चट्टानों से ज्यादा मजबूत था और जिसके सब्र की गहराई समंदर से भी ज्यादा थी एक गांव जहां जमीन प्यासी थी और दिल भी वीरान थे जहां दिन की शुरुआत उम्मीद से होती मगर शाम मायूसी की चादर ओढ़ लेती लोग पानी की एक बूंद के लिए तरसते लेकिन असल प्यास किसी और चीज की थी ईमान की यकीन की हिदायत की मगर फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको हिलाकर रख दिया क्या यह किसी का वहम था या वाकई कोई मोजेजा क्या यह आजमाइश का
खात्मा था या किसी और इम्तिहान का आगस यह कहानी आपको एक ऐसी सच्चाई से रूबरू कराएगी जो शायद आपने पहले कभी ना सुनी हो आखिर ऐसा क्या हुआ कि पूरा गांव दंग रह गया जानने के लिए कहानी आखिर तक देखें क्योंकि हकीकत वह नहीं जो नजर आ रही है बगदाद के गांव में जहां पानी की कमी थी चारों तरफ सिर्फ रेगिस्तान था वहां एक ऐसा कबीला आबाद था जिनके दिल सख्त हो चुके थे उनके दिल पत्थर जैसे बन चुके थे ना उनमें एहसास था ना ही दूसरों के लिए कोई रहम लेकिन फिर भी वह एक
ऐसे अजाब का सामना कर रहे थे जिससे उन्हें कभी छुटकारा नहीं मिलने वाला था वह जिस गांव में रहते थे वहां की जमीन बहुत सख्त थी वहां पानी का नाम और निशान नहीं था जहां भी कुआं खोदते वहां सिर्फ कड़वा पानी निकलता उनकी जिंदगी बहुत तकलीफ में गुजर रही थी ऊंटों पर सवार होकर वह मीलों दूर सफर करते तब जाकर उन्हें कहीं से पानी मिलता और फिर उसे अपने गांव लाते लेकिन यह काम उनके लिए बहुत मुश्किल था यह लोग यहूदी थे इस्लाम से बहुत दूर इसके बरक्स पास के एक दूसरे गांव में हर नेमत
मौजूद थी उस गांव में एक बुजुर्ग रहते थे हजरत साहिब हजरत साहिब की उम्र 80 साल हो चुकी थी लेकिन वह अल्लाह के बहुत नेक और पहुंच हुए बुजुर्ग थे उनका चेहरा नूरानी था जब भी वह बोलते ऐसा लगता जैसे उनके लफ्जों से फूल झड़ रहे हो हर कोई उनकी बहुत इज्जत करता था हजरत साहिब पांचों वक्त के नमाजी थे उन्होंने कभी भी कोई नमाज कंजा नहीं की वह तहज्जुद गुजार थे अल्लाह के प्यारे बंदे थे उनके दिल में यकीन बहुत मजबूत था उन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत सफर किए थे वह कहते थे अल्लाह के
दीन की खातिर सफर करो तभी मंजिल मिलती है उन्होंने अल्लाह के दीन की खातिर फिर बहुत दूर-दूर के इलाकों का सफर किया उनकी जिंदगी में बहुत से वाक्यात आए बहुत सी आजमाइश आई लेकिन वह हर हाल में अपने अल्लाह पर यकीन रखते थे जो अपने नौजवानों को बताया करते थे वह हर रोज अपने गांव में एक महफिल लगाते जहां पर लोगों को दीन का दर्स देते और नेक राह पर चलने की अच्छी-अच्छी बातें बताते लोगों के दिल पर इनकी बातें बहुत असर करती थी इसी तरह दोपहर का वक्त था अल्लाह वाले हजरत साहब दरख्त के
नीचे सो रहे थे वह जमीन पर सोने के आदि थे और उनके दिल के अंदर दुनिया की हवस बिल्कुल नहीं थी बहुत सारे उनके शागिर्द थे जो उनसे दीन की तबलीग लेकर अपनी जिंदगी बदल चुके थे और गांव के बहुत सारे नौजवान उनके पास हर रोज दर्स लेने आया करते थे एक दिन हुआ यूं कि असर का वक्त था बुजुर्ग नमाज अदा करके जंगल की तरफ रवाना हो गए क्योंकि वह ज्यादातर तन्हा रहकर अल्लाह की इबादत किया करते एक दिन वह जंगल में जाते हैं तो जल बहुत घना था एक साया दार खूबसूरत दरख्त जिसका
साया बहुत बड़ा था वह अल्लाह वाले हजरत साहब को बहुत पसंद आता है उनका दिल करता है कि वह उसके नीचे आराम करें वैसे भी गर्मी बहुत थी अल्लाह वाले बुजुर्ग नमाज ए असर अदा करके उसी दरख्त के नीचे आराम फरमाने के लिए बैठ जाते हैं ना जाने कब उनकी आंख लग गई हजरत साहब एक खवाब देखते हैं एक ऐसा गांव है जिसमें चारों तरफ गर्द ही गर्द है वहां पर लोग हैं लेकिन उन के चेहरे वाजे नहीं है कुछ लोग भाग रहे हैं और कुछ लोग जमीन पर गिरे पड़े हैं कोई ऐसी चीज की
तलाश में है जो उनको बहुत अजीज हो लेकिन उनके पास नहीं है पर एक बच्चा जो अल्लाह वाले बुजुर्ग के पास आता है और कहता है क्या आप हमारी मदद करेंगे क्या आप हमारी मदद करेंगे क्या आप हमारी मदद करेंगे यह कहकर वह बच्चा बेहोश हो जाता है इसी दौरान हजरत साहब की आंख खुलती है इस दौरान उनको पसीना आ चुका था वो एकदम से उठे आज से पहले उन्होंने कभी ऐसा ख्वाब नहीं देखा था इस ख्वाब ने उनको बहुत परेशान कर दिया हजरत साहब सोच में पड़ गए कि ऐ अल्लाह तबारक व ताला इस
ख्वाब की ताबीर क्या हो सकती है वह तो अल्लाह के नेक बंदे थे अल्लाह के बहुत करीब थे नमाज पढ़ते थे रोजे रखते और पूरा पूरा दिन कयाम में रहते थे वह समझ चुके थे कि कुछ ऐसा है जिसके पीछे उनको यहां से निकलना पड़ेगा अल्लाह वाले बुजुर्ग बिना कुछ सोचे अपने गांव में वापस आते हैं और सब गांव वालों को आवाज लगाते हैं ऐ मेरे मुसलमान साथियों लगता है मेरे सफर का वक्त आ चुका है मैं अल्लाह की राह में सफर के लिए रवाना हो रहा हूं तुम लोगों ने मेरे दिए गए सबक नहीं
भूलने अपनी इबादत में कोई रुकावट नहीं डालनी ताकि मैं आऊं तो तुम लोग ऐसे ही अल्लाह के जिक्र व सकार में मशगूल रहो हो सकता है कि मैं कभी वापस भी ना आऊं क्योंकि मैं ऐसे सफर पर निकल रहा हूं जिसकी मंजिल का मुझे बिल्कुल पता नहीं है कुछ नौजवान उनके पास आए और कहने लगे हजरत साहब आप कैसी बातें कर रहे हैं कौन सा सफर आप कहां जाएंगे आपकी उम्र बहुत ज्यादा हो चुकी है वैसे भी आप लाठी के सहारे चलते हैं और आप सफर की बात कर रहे हैं हम समझे नहीं क्या आप
हज पर रवाना हो रहे हैं हजरत साहब कहने लगे नहीं मैं हज पर रवाना नहीं हो रहा बस मैं एक ऐसे सफर पर जा रहा हूं जिसकी मंजिल का पता नहीं अगर मंजिल का पता होता तो मैं तुम लोगों को बता देता वोह लोग खामोश हो गए दुआ देने लगे कि आप कामयाब ही वापस लौटे यह हमारी दुआ हुआ है हजरत साहब के पास एक थैला था इस थैले में एक पानी का बर्तन था उनकी लाठी थी और एक लिबास जो इस थैले के अंदर उन्होंने डाला हुआ था इन तीन चीजों के साथ ही वह
अपना सफर शुरू करते हैं गांव वालों को उनके पुख्ता ईमान और बेखौफ दिल का अंदाजा था क्योंकि वह सिर्फ अल्लाह से ही डरते थे उनको किसी चीज का खौफ नहीं था वह तो जानते थे इसीलिए उन्होंने ज्यादा सवाल नहीं किए इस तरह हजरत साहब अपना स्वर शुरू करते हैं गर्मियों का वक्त था पानी की कगल थी सहरा में जा पहुंचे सहरा में कोई आदमी जात दूर-दूर तक नजर नहीं आया वहां इंसानों का नाम और निशान नहीं था अल्लाह वाले बुजुर्ग जोहर की नमाज इस सहरा में अदा करते हैं पानी नहीं था इसीलिए वोह इस मिट्टी
के साथ तममेट खड़ा था वोह ऊंट को देखकर एकदम से हैरान होते हैं कि इस वीरान जगह में यह ऊंट कहां से आया ऊंट के पास उन्हें एक शख्स नजर आता है जो नमाज में मश घुल होता है वह कोई रईस शख्स था तिजारत के लिए निकला था और रास्ता भटक कर यहां आ पहुंचा उसके पास पानी था अल्लाह वाले हजरत साहब को बहुत प्यास लगी थी उन्होंने उससे पानी मांगा तो वह दिल का अच्छा था उसने पानी दे दिया हजरत साहब से सवाल करने लगा बुजुर्ग आप अल्लाह के नेक मालूम होते हैं उम्र भी
आपकी ज्यादा है आप इस वीराने में क्या कर रहे हैं हजरत साहब मुस्कुराने ने लगे और कहने लगे अगर मैं तुमसे यही सवाल पूछूं तो तुम क्या जवाब दोगे वह कहने लगा हजरत साहब मैं तो एक सौदागर हूं तिजारत के सिलसिले में दूसरे शहर जा रहा था रास्ता भटक कर यहां पहुंचा हूं मुझे नहीं पता कि मेरी मंजिल किस तरफ है हजरत साहब मुस्कुराने लगे और कहने लगे बस ऐसे ही समझो कि मैं भी तुम्हारी ही तरह हूं कि मुझे भी मंजिल का पता नहीं मेरा सफर ऐसा है जिसकी मंजिल का मुझे इल्म नहीं लेकिन
मैं तुम्हें रास्ता दिखा सकता हूं जहां से पीछे चले जाओ जहां से मैं आया हूं वहां तुम एक गांव में पहुंच जाओगे वहां से तुम अपनी मंजिल पर पहुंच सकते हो वो शख्स कहने लगा हजरत साहब बहुत-बहुत शुक्रिया आपने मुझे रास्ता बताया मैं तो बहुत परेशान हो चुका था लेकिन आप कहां जाएंगे यह इतना बड़ा वीरान सहरा है आप कहां जाएंगे भूखे प्यासे हजरत साहब मुस्कुराने लगे और कहने लगे तुम मेरी फिक्र छोड़ो मेरी फिक्र करने वाला ऊपर खड़ा है और वह हर वक्त मेरे साथ है उनकी बातें ऐसी थी जो भी सुनता उनसे बहुत
मुतासिर होता क्योंकि यह सिर्फ उनकी बातें नहीं थी उनका यकीन था उनके यकीन ने बहुत सारे लोगों का दिल बदला था वह शख्स उनका शुक्रिया अदा करके पानी का एक मटका उनको देकर वहां से रवाना हो गया अल्लाह वाले बुजुर्ग रात उसी सहरा में गुजारते हैं अल्लाह की इबादत करते हैं वह एक ख्वाब देखते हैं कि एक तारा आसमान से टूटकर उनकी गोद में आ जाता है सुबह जब वह बेदार होते हैं तो उनको इस खवाब की समझ आ जाती है यकीनन वह अपनी मंजिल के करीब हैं वह अपना सफर फिर से शुरू करते हैं
चलते चलते उनकी टांगों में दर्द होने लगा था क्योंकि वह पहले से बुजुर्ग थे और सफर बहुत लंबा करके आ रहे थे प्यास भी उनको लगी थी लेकिन उनके पास जो पानी था उन्होंने वह पीकर प्यास बुझा ली लेकिन अब उनसे मजीद चला नहीं जा रहा था दुआ करने लगे ऐ मेरे अल्लाह तूने ही मेरी मदद करनी है मुझे हिम्मत तूने देनी है मंजिल तक पहुंचने में मेरी मदद करो क्योंकि इस मंजिल को सिर्फ आप ही जानते हैं मुझे कुछ पता नहीं हजरत साहब के जिस्म में कुछ ताकत आई तो वह दोबारा अपना सफर शुरू
करते हैं इस बार उनको थकावट बिल्कुल नहीं हुई वह चलते-चलते एक जंगल से गुजरते हैं वहां के जंगली जानवरों की खौफनाक आवाजें इस जंगल से आ रही थी लेकिन किसी की मजाल नहीं थी कि वह उनको नुकसान पहुंचाए वह चलते जा रहे थे रास्ते खुद बखुदा जहां उनके सामने एक ऐसा दिल दहला देने वाला मंजर था कि हजरत साहब कांप उठे वहां पर लोगों की शक्लेशा थी उनकी चमड़ी सूख चुकी थी चेहरे पर कोई रौनक नहीं थी दरअसल जैसे उनके चेहरे स्याह थे वैसे ही उनके दिल भी स्याह हो चुके थे वो जमीन बंजर थी
वहां एक भी हरा भरा दरख्त नहीं था हजरत साहब को एक झोपड़ी नजर आती है जो उस गांव में मौजूद थी वहां पर एक गरीब औरत थी जिसकी हालत बहुत बिगड़ चुकी थी हजरत साहब उसके पास जाते हैं और उसे सलाम करते हैं वह औरत मुसलमान थी रोने लगी और कहने लगी आप कौन हैं और आप यहां कैसे आ गए क्या अल्लाह ने आपको हमारे पास भेजा है मगर आप भी उनका सामना नहीं कर पाएंगे वह बहुत जालिम है उनके अंदर दिल नहीं है आप उनके सामने कैसे टिक पाएंगे वह किसी की नहीं सुनते उनके
दिल स्याह हो चुके हैं चले जाइए चले जाइए मैं कहती हूं आप यहां से वापस मत आइएगा अगर उनको मालूम हुआ तो वह आपको नहीं छोड़ेंगे आप उनसे वाकिफ नहीं है जाइए वो औरत रो रही थी और हाथ जोड़ने लगी हजरत साहब से कहने लगी आप यहां से चले जाइए हजरत साहब कहने लगे ए माई क्यों रो रही हो किसकी बात कर रही हो कौन मुझे नहीं छोड़ेगा क्या तुम मुझे इत्मीनान से सब कुछ बता सकती हो वो औरत कहने लगी आप जानते होंगे कि यह गांव गैर मुसलमानों का है और अगर उन्होंने आपको यहां
देख लिया तो वह आपको जिंदा नहीं छोड़ेंगे पहले भी वह हम पर बहुत जुल्म कर चुके हैं वह यही कहेंगे कि हमने आपको बुलाया है और आप हमारी मदद के लिए आए हैं पहले भी उन्होंने हमारा जीना हराम कर रखा है हजरत साहब कहने लगे मैं कुछ भी नहीं जानता कौन है वह किसकी बात कर रही हो और वह आपके साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं वह औरत कहने लगी हजरत साहब इस गांव में हम चंद लोग ही मुसलमान हैं बाकी सारे यहूदी हैं उनको हमसे बहुत जलन होती है इस पूरे गांव में खत पड़ा
हुआ है कहीं पानी नहीं मिलता जहां कुआ खोदा जाए वहां पर कड़वा पानी निकलता है और एक यहूदी जो बहुत रईस है उसकी जमीन पर एक कुआ है जिसका पानी मीठा है सारे यहूदी वहां से पानी मुफ्त में हासिल करते हैं लेकिन मसला हमारे लिए है क्योंकि हम मुसलमान हैं वह हमें पानी नहीं लेने देते हमारे बच्चे प्यास से मर रहे हैं कितने इस दुनिया से जा चुके हैं बच्चों की बात तो दूर वो हमारे जानवरों को भी पानी नहीं पीने देते हमारे जानवर भी कमजोर हो चुके हैं यहां बारिश सालों साल नहीं होती लेकिन
उनके अंदर रहम नहीं है अगर कोई भी उनके खिलाफ आवाज उठाता है तो मौत के सिवा उसका कोई अंजाम नहीं होता इसीलिए आपसे कह रही हूं कि आप चले जाइए अगर उन्होंने आपको यहां देख लिया तो वह यही कहेंगे कि हमने आपको बुलाया है और फिर वह आपको भी मार डालेंगे बुजुर्ग कहने लगे माई तुम डरो नहीं जब तुम ईमान लाए हो अल्लाह पर तो तुमको उस पर यकीन भी होना चाहिए हजरत साहब कहने लगे लेकिन तुम लोग जिदा कैसे हो अगर वह पानी नहीं देते तो अरे हजरत साहब क्या पूछते हैं आप वह एक
शर्त पर राजी होते हैं क्या अगर कोई उनकी तरह उनके मजहब में आ जाए तो वह उसको पानी मुफ्त में दे देंगे बहुत सारे ऐसे लोग झूठ बोलकर कहते हैं कि हम आपके मजहब में आ चुके हैं और बेचार को पानी मिलता है वह चोरी छुपे मुंह तक भी पानी पहुंचा देते हैं क्योंकि मैं बहुत बूढ़ी हो चुकी हूं मुझसे चला नहीं जाता हजरत साहब कहने लगे लेकिन यह बात तो गलत है वह ऐसा नहीं कर सकते पानी अल्लाह की दी हुई नियामत है वह उसे रोक नहीं सकते तुम मुझे उनका पता बताओ कहां रहते
हैं वह अभी वह यह बातें कर ही रहे थे कि वहां पर कुछ लोग आ गए जिनकी शक्ल स्याह थी उनके हाथों में डंडे थे सकीना बीवी हम जान चुके हैं कि तुम हमारे खिलाफ क्या-क्या कह रही हो कौन है यह बूढ़ा शख्स क्या यह तुम लोगों की मदद करेगा क्या यह तुम लोगों को पानी दिलवाए वह हंसने लगे मजाक उड़ाने लगे खुद इससे चला नहीं जाता यह क्या मदद करेगा वह अल्लाह वाले बुजुर्ग को पकड़कर अपने रईस के पास ले जाते हैं वह बुढ़िया औरत रो रही थी बेचारी वहां पहुंचकर हजरत साहब देखते हैं
कि बहुत सारे लोग इकट्ठे थे हुजूर यह देखिए यह कौन है बुरा शख्स यह हमारे खिलाफ इस सकीना बीवी के पास खड़ा होकर बातें कर रहा था लगता है यह मदद के लिए आया है वो रईस कहने लगा ऐ बुजुर्ग कौन हो तुम यहां क्यों आए हो तुम नहीं जानते कि यह हमारा गांव है और जो हम कहते हैं वही होता है हजरत साहब कहने लगे मैं खुद नहीं जानता कि मेरी मंजिल कहां है मेरा जवाब यही है चाहे मुझे सजा दो या जो तुम्हारी मर्जी मुझे अपनी मंजिल का पता नहीं क्या तुम मुसलमान हो
अल्हम्दुलिल्लाह मैं मुसलमान हूं यह बात जब हजरत साहब के मुंह से निकली तो वह और जलने लगे कहने लगे तुम्हारी इतनी हिम्मत तुम यहां पर आए हो हमारे पूछे बिना हजरत साहब को इस दौरान गुस्सा आया वह कहने लगे खामोश हो जाओ तुम लोग तुम्हें क्या हो गया है क्यों इन बेगुनाह लोगों पर जुल्म कर रहे हो इनके बच्चे प्यासे मर रहे हैं इनके जानवर मर रहे हैं इन्हें पानी क्यों नहीं दे रहे मैं जानता हूं कि यहां पानी नहीं है एक ही कुआ है जो तुम्हारा है लेकिन तुम्हें पानी देना होगा उन्हें गुस्सा आया
वह कहने लगे तुम कौन होते हो हमें कहने वाले आज तक किसी की इतनी हिम्मत नहीं हुई कि हमारे आगे इस तरह जबान लड़ाए जान प्यारी है तो अभी यहां से चले जाओ वरना हमसे बुरा कोई नहीं होगा अल्लाह वाले बुजुर्ग मुस्कुराने लगे और कहने लगे तुम लोगों की यह भूल है कि मैं यहां से जाऊंगा मैं हरगिज नहीं जाऊंगा चाहे तुम लोग जो कर लो जब मैं यहां पहुंच ही गया हूं तो ऐसे नहीं जाऊंगा तुम लोगों को यह जुल्म रोकना होगा कितने मासूम बच्चे जो प्यासे तड़प रहे हैं अल्लाह वाले के सामने वह
मुसलमानों पर जुल्म का मंजर था यहूदियों के इस गिरोह में से एक बुजुर्ग आदमी बाहर आता है और कहता है ऐ शख्स अगर तुम चाहते हो कि हम इन लोगों को पानी दें तो इनको और तुम्हें हमारी बात माननी होगी तुम लोग हमारे मजहब में आ जाओ फिर तुम्हें मुफ्त में पानी दिया जाएगा इसके अलावा अगर तुम हमारी बात नहीं मानोगे तो तुम्हें सजा दी जाएगी और यह लोग ऐसे ही प्यासे मरते रहेंगे बुजुर्ग कहने लगे क्या कह रहे हो तुम लोग ऐसा तो कभी नहीं होगा चाहे तुम लोग मुझे जो सजा दो मैं अपने
र रब के साथ धोखा कभी नहीं कर सकता मरूंगा तो उसका नाम लेकर ही मरूंगा जब उन्होंने देखा कि बुजुर्ग के अंदर तो ईमान ताकत है और खौफ बिल्कुल नहीं है हालांकि लोग इनसे डर जाया करते थे और उनकी बात मानने पर मजबूर हो जाते थे तो उन लोगों को हजरत साहब की बहादुरी और ईमान जज्बा देखकर जलन होने लगी वह कहने लगे यह देखो यह कौन है जो हमसे नहीं डर रहा वरना यहां के मुसलमान हमारी हर बात मानने पर मजबूर हो जाते थे उनमें से एक शख्स कहने लगा अरे रोको तो सही इसे
इसे पता नहीं कि हम क्या-क्या तकलीफ देते हैं जब पानी का एक घूंट इसके मुंह में नहीं जाएगा ना तब इसे पता चल जाएगा यह एक-एक खतरे के लिए तरसेगा तड़पेगा क्योंकि जो हमारी बात नहीं मानता वह ऐसे ही करता है और यह बात यह भूल जाए कि हम इसे यहां से जाने देंगे हम इसे यहीं कैद करके रखेंगे यह पल-पल अजियत में रहेगा वो इस तरह हजरत साहब को कैद कर लेते हैं वो औरत जब ये मंजर देखती है तो रोने लगती है और कहती है मैंने आपसे कहा था ना कि यहां से चले
जाइए यह स्याह चेहरे वाले स्याह दिल के लोग आपको कभी चैन से नहीं जीने देंगे इनके चेहरों की तरह इनके दिल भी स्याह हैं इनके दिलों में कोई एहसास नहीं है एक कभी किसी की फरियाद नहीं सुनते बस इनके अंदर एक गरूर है इसी गरूर ने इनको अंधा किया हुआ है कितने मासूम बच्चे कितने जानवर कितनी औरतें कितने मर्द प्यास की वजह से मर चुके हैं वही सलामत बचा है जो इनकी बात मानता है मुझे इन्होंने इसीलिए जिंदा छोड़ा हुआ है क्योंकि मैं बूढ़ी हो चुकी हूं और इनका मानना है कि मेरी उम्र ज्यादा है
इनके बड़ों को देख चुकी हूं इसीलिए शायद मुझे कुछ नहीं कहते लेकिन अब आपको यह नहीं छोड़ेंगे हजरत साहब कहने लगे आप कैसी बातें करती हो अल्लाह से मदद मांगो वह मदद करेगा इनकी क्या मजाल यह तो पागल है इन्हें तो राह दिखाने वाला यहां कोई नहीं आया बल्कि जो राह देख चुके हैं वह भी भट रहे हैं एक बार अपने अल्लाह से मांग कर तो देखो मेरी बात याद रखना एक दिन आएगा जब यह जमीन पानी से सेराब हो जाएगी यहां हर प्यासा चीज पानी से भर जाएगी जो एक कतरे के लिए तरस रहे
हैं उन्हें समंदर मिल जाएगा हजरत साहब के मुंह से यह बातें निकल रही थी और वहां वह शैतान लोग हंस रहे थे मजाक उड़ा रहे थे कहने लगे अरे पागल तो नहीं हो गए तुम लगता है पानी ना होने की वजह से यह अपना दिमागी तवाजो बैठे हैं कैसी अजीबो बातें कर रहे हैं यह जगह सेराब होगी खैर तो है यहां बारिश सालों साल नहीं होती एक दरख्त तक नहीं बचा यहां कैसे बाहर आएगी हजरत साहब कहने लगे तुम लोग हो ही नादान तुम्हें क्या पता कि जिस रब ने यह कायनात बनाई है उसके क
कहने की देर है और यहां पानी के चश्मे फूट जाने हैं यह बात तुम लोग जान लो बुजुर्ग की यह बात सुनकर उन लोगों को और गुस्सा आ रहा था एक शख्स आया और कहने लगा ऐ बूढ़े शख्स बहुत बत हो गया तेरा यह ड्रामा अब एक और झूठी बात कही तो हमसे बुरा कोई नहीं होगा व इनसे ऐसी बात कर ही रहा था कि उस औरत को गुस्सा आया और वह बूढ़ी औरत उस शख्स के मुंह पर थप्पड़ मारती है और कहती है बस करो रुक जाओ खबरदार अगर तुमने इनके आगे इस तरीके से
बात की उन्हें बहुत गुस्सा आ रहा था वह कहने लगे अरे वह देखो यह वही औरत है जिसको हम पानी देते हैं क्योंकि यह बूढ़ी है हमारे पूर्वजों को इसने देखा हुआ है इसीलिए इसकी इज्जत करते हैं और आज इतनी शेर हो गई कि इसने हमारे मुंह पर थप्पड़ मारा वहां खड़ा बुरा आदमी कहने लगा यह सब इस बूढ़े की वजह से हुआ है अब यह औरत हमारे सामने आई है तो कल तक पूरा गांव आ जाएगा यह फसाद की जड़ यही बूढ़ा है वह आदमी कहने लगा इस औरत को कैदी बना दो इसी बूढ़ी
के सामने इसे तड़पा तड़पा कर मारेंगे यह बड़ी-बड़ी बातें करता है ना हम देखेंगे कि यह इसे पानी कैसे देता है यह प्यास से मर जाएगी यह बचाने आया है ना इनको हम देखेंगे कि यह कैसे बचाता है वहां बहुत सारे मुसलमान लोग इकट्ठे हो चुके थे जो पहले ही दर्द और तकलीफ के मारे हुए थे जिनके मुंह के अंदर पानी का एक कतरा तक नहीं गया था प्यास से वह हल्कान थे वह यह मंजर देखकर डर गए कहने लगे ऐ बंदे खुदा यहां से चले जाओ यह लोग तुम्हें नहीं जीने देंगे हमें हमारे हाल
पर छोड़ दो हमारे साथ जो हो रहा है वो होने दो तुम तो इस तकलीफ में ना आओ हजरत साहब कहने लगे तुम लोग अल्लाह का नाम लेते ही अल्लाह से दूर हो यह तो वैसे भी गुमराह है तुम लोग तो अपने रब को याद करते हो फिर मायूसी यह बुजदिली किस बात की इसी वजह से तो तुम लोगों की मदद नहीं की जा रही वरना कब तक यह कुए पानी से भर जाते ऐसा मुमकिन नहीं था कि अल्लाह से मांगो और अल्लाह अता ना करे उसकी शान नहीं है वह तो कतरा मांगने पर समंदर
अता करता है बुजुर्ग की बातों ने उन लोगों के दिलों पर असर किया उनके दिल शायद खौफ तले आ चुके थे मायूस हो चुके थे ईमान की दौलत होने के बावजूद वह बुजदिल हो चुके थे यह सब उनकी ईमान की कमजोरी थी वरना अल्लाह की बरकत उनके साथ थी जिसको वह पहचान नहीं रहे थे उन मुनाफिक ने जब देखा कि लोग उनके सामने आने की कोशिश कर रहे हैं तो उन्होंने फौरन हजरत साहब को कैद कर लिया लोगों के अंदर दोबारा से दहशत बैठ गई अब हम क्या करेंगे यह तो हमें जिंदा नहीं छोड़ेंगे हालांकि
हजरत साहब बूढ़े हो चुके थे लेकिन उनका रब नौजवान की तरह था गांव के लोग जो पहले पानी के कतरे के लिए तरस रहे थे अब उन पर और भी जुल्म होने लगा हजरत साहब कैद हो चुके थे रात का वक्त था वह बूढ़ी औरत प्यास से निढ़ाल हो चुकी थी पानी का एक घूंट उसके हलक में नहीं गया था जिस वजह से वह बेहोश हो रही थी हजरत साहब की आंखों से आंसू रवा थे उन्हें खुद अपनी परवाह नहीं थी बल्कि वहां रहने वाले मजलूम मुसलमानों की परवाह थी वह आसमान की तरफ देखते हैं
और कहते हैं ऐ मेरे परवरदिगार तू हमारे हालात से वाकिफ है हम पर रहम कर इन जालिमों को सबक सिखा यह दुआ मांगकर वह खामोश हो जाते हैं अचानक अलाह की गहमागहमी मच जाती है मृद बाबा का कुआं कड़वा हो गया है मिलत बाबा का कुआं कड़वा हो गया है यह बात पूरे गांव में फैल चुकी थी वो कुआम जो इस रईस यहूदी का कुआ था जो मीठा था और जिसकी वजह से वो गुरूर में थे अब कड़वा हो चुका था क्योंकि इस कुएं के सिवा उनके पास और कोई रास्ता नहीं था जिससे पानी हासिल
किया जाए और जमीन भी बंजर थी जहां पानी बिल्कुल नहीं था लोग डर गए वह यहूदी कहने लगे यह कैसे हो सकता है यह कुआ तो सदियों से चलता आ रहा है आज तक कड़वा नहीं हुआ अचानक कैसे हो गया एक औरत कहने लगी तुम लोगों ने हमें तो सता सता कर मार ही दिया लेकिन इस अल्लाह के प्यारे बंदे को सता रहे हो तो ऐसा अजाब तो आना ही था अब देखना तुम लोग किस तरह तबाह होगे यहूदियों की गिरोह में से एक बूढ़ा आदमी कहने लगा यह औरत ठीक कह रही है हमने इस
बूढ़े शख्स को कैद किया है लगता है इसी वजह से हमारा पानी कड़वा हो गया है क्योंकि मैंने एक किताब में पढ़ा है कि एक बूढ़ा शख्स आएगा और हमारा कुआं कड़वा कर देगा और यहां की जमीन सेराब हो जाएगी पानी की जगह दूध निकलेगा पानी बहुत आम हो जाएगा और दूध भी आम हो जाएगा वहां वह लोग रोने लगे कि अब क्या होगा अब हम पानी कहां से लाएंगे क्योंकि वह कुआ बहुत कड़वा हो चुका था हजरत साहब कहने लगे क्या मैं आप लोगों की मदद करूं वह सब हंसने लगे कैसी बातें करते हो
तुम हमारी मदद करोगे खुद तुमसे चला नहीं जाता और हमारी मदद कैसे करोगे तुम भी हमारे साथ यहां पर तड़पोले गे लेकिन उनका बूढ़ा आदमी कहने लगा पानी का बंदोबस्त नहीं हो सकता गांव बहुत दूर है और पानी हमें आसानी से नहीं मिलेगा अब वो यहूदी डर गए थे कि यकीनन कुछ बुरा होने वाला है इस दौरान वह कहने लगे क्या वाकई तुम मदद कर सकते हो अब अल्लाह ने इन्हीं दुश्मनों को इतना लाचार कर दिया कि वह अल्लाह वाले हजरत साहब से मदद मांग रहे थे वह कहने लगे अगर आप हमारी मदद करेंगे तो
हम यह सारी बातें भूल जाएंगे हम सबसे मोहब्बत करेंगे हम आपकी तरह इस्लाम कबूल कर लेंगे बस आप हमारी मदद करें वह रो-रोकर उनसे माफिया मांग रहे थे क्या हमने कोई ऐसी खता की जिससे हमें यह सज्जा मिली हमें माफ कीजिए हजरत साहब कहने लगे मैं कुछ नहीं कर सकता उन्हें गस्सा आया अब कहने लगे आप कैसी बातें कर रहे हो पहले तो बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे अब क्या हुआ कहां गई तुम्हारी वह बातें हजरत साहब कहने लगे मैं तो हकीकत में कोई चीज नहीं हूं जो करना है मेरे अल्लाह ने करना है बस
मुझे तन्हा छोड़ दो इस तरह रात गुजर गई लेकिन उन लोगों को पानी नहीं मिला उनका सारा गुरूर खाक में मिल चुका था लेकिन उनके दिलों पर अभी भी वह स्याही बाकी थी वह नफरत बाकी थी मुसलमान तो पहले से ही बेचारे वहां तड़प रहे थे प्यास से मर रहे थे लेकिन अब वह जालिम भी उसी तकलीफ से गुजर रहे थे जो वह दूसरों को दिया करते थे लेकिन उनको एहसास नहीं था इस तरह सुबह हो जाती है पूरा दिन गुजर चुका था लेकिन प्यास से वह हल्कान हो रहे थे कुछ तो बेहोश हो चुके
थे अल्लाह वाले बुजुर्ग तो रोजे में थे और बरकत से उन्हें कोई प्यास नहीं लगी लेकिन अल्लाह वाले बुजुर्ग रोने लगे और दुआ मांगने लगे ऐ अल्लाह ए दुआ सुनने वाले अगर तूने मुझे यहां भेजा है तो मेरी मदद कर दे इस गांव की मदद कर यहां के रहने वाले मुसलमानों की मदद कर हालात तो देख रहा है अगर यह अजाब तूने नाजिल किया है तो ऐ मेरे प्यारे रब इसे खत्म कर दे इन मुसलमानों की खातिर जो तेरे मजलूम बंदे हैं जिन पर यह लोग जुल्म करते हैं उनकी खातिर हमारी मदद कर दुआ मांगते
मांगते रात हो जाती है अब दूसरा दिन शुरू हो चुका था वह गांव पूरा प्यासा था जो पानी उनके पास जमा था वह भी खत्म हो चुका था अब हर कोई एक ही तकलीफ से गुजर रहा था चाहे अमीर था या गरीब रात को अल्लाह वाले बुजुर्ग एक ख्वाब देखते हैं उन्हें बशारत होती है कि अल्लाह की बरकत उनके हाथ में होगी और अगर वह अपनी लाठी जहां मारेंगे वहां पर बरकत आएंगी जैसे ही वह बेदार होते हैं तो आवाज लगाते हैं ऐ लोगों मुझे आजाद करो मुझे आजाद करो व रईस कहता है क्या करोगे
आजाद होकर पानी तो वैसे भी नहीं है हम भी तड़प रहे हैं तुम भी तड़पते रहो यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है तुमने अपना कदम इस गांव में रखा तो हम पर यह अजाब आया पानी हमारा खत्म हो गया यह तुम्हारी वजह से हुआ है हजरत साहब रोने लगे आसमान की तरफ देखने लगे और अपनी लाठी जमीन पर मारी और जमीन पर बैठ गए अचानक वहां पर एक कुआ नमूद हुआ जिसके दो खाने बने थे एक से दूध निकल रहा था और एक से पानी यह अल्लाह ने बरकत अता की उनके हाथ में अब
उस गांव में उनकी इज्जत की जाने लगी जहां के लोग उनसे नफरत करते थे वह लोग जो जरूरत में अंधे थे अब जान चुके थे कि अल्लाह के प्यारे बंदे कैसे होते हैं उन बुजुर्ग की यह करामात देखकर सब कलमा पढ़ उठे बेशक अल्लाह ताला की जात सच्ची है वह देख रहा है और वो जो चाहे कर सकता है वह हर चीज पर कादिर है गांव के लोग हैरत में डूबे खड़े थे वही खुश्क कुआ जिसमें पानी की एक बूंद ना थी अब दूध से लबरेज था कुछ लोग खुशी से चीख रहे थे कुछ सजदे
में गिर चुके थे और कुछ की आंखों में शर्मिंदगी के आंसू थे वह बुजुर्ग जिन्हें लोग दीवाना समझते थे मुस्कुराकर आसमान की तरफ देखने लगे एक नौजवान जो पहले उनका मजाक उड़ाता था आगे बढ़ा और लरज की आवाज में बोला बाबा जी यह कैसे हुआ बुजुर्ग की आंखों में एक रोशनी चमकी वो बोले यह अल्लाह की कदर है पानी तो तुम्हारे कुएं में था मगर तुम्हारे दिल खाली थे जब दिलों में ईमान का नूर आ जाए तो खुश्क जमीन भी बाहर बन जाती है यह सुनकर पूरा गांव खामोश हो गया वो जान चुके थे कि
असल मसला पानी का नहीं बल्कि उनके अपने ईमान का था उस दिन के बाद वो गांव बदल गया नफरत हसद और गुनाह की जगह मोहब्बत भाईचारे और नेकी ने ले ली और यही सबक है इस कहानी का अगर अल्लाह पर सच्चा यकीन हो सब्र हो और दिल को पाक कर लिया जाए तो खुश्क कुएं भी दूध से भर जाते हैं अगर आपको यह कहानी पसंद आई तो इसे दूसरों तक जरूर पहुंचाएं क्योंकि शायद किसी की जिंदगी भी बदल जाए और ऐसी ही और ईमान अफरोज कहानियों के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें