[संगीत] [प्रशंसा] आप कल्पना कर सकते हो कि एक महापुरुष जिसको इतना जुल्म सहना पड़ा हो जिसका बचपन अन्याय उपेक्षा और उत्पीड़न से बीता हो जिसने अपनी मां को अपना में अपमानित होते देखा हो मुझे बताइए ऐसे व्यक्ति को मौका मिल जाए तो हिसाब चुकता करेगा कि नहीं करेगा तुम तुम मुझे पानी नहीं भरने देते थे तुम मुझे मंदिर नहीं जाने देते थे तुम मेरे बच्चों को स्कूल में एडमिशन देने से मना करते थे मनुष्य का जो लेवल है ना वहां यह बहुत स्वाभाविक है लेकिन जो मानव से कुछ ऊपर है वह बाबा साहब अंबेडकर थे
कि जब उनके हाथ में कलम थी कोई भी निर्णय करने की ताकत थी लेकिन आप पूरा संविधान देख लीजिए पूरी संविधान सभा की डिबेट देख लीजिए बाबा साहेब अंबेडकर की बातों में वाणी में शब्द में कहीं कटुता नजर नहीं आती है कहीं बद का भाव नजर नहीं आता है उनका भाव यही रहा और वह भाव क्या था मैं अपने शब्दों में कह सकता हूं कि कभी कभार खाना खाते समय दांतों के बीच हमारी जीभ कट जाती है लेकिन हम दांत तोड़ नहीं देते हैं क्यों क्योंकि हमें पता है दांत भी मेरे हैं जीभ भी मेरी
है बाबा साहब अंबेडकर के लिए सवर्ण भी उनके थे और हमारे दलित पीड़ित शोषित भी दोनों ही उनके लिए बराबर थे और इसलिए बदले का नामो निशान नहीं था कटुता का नामो निशान नहीं था बदले के भाव को जन्म देने का और समाज को साथ लेकर चलने की प्रेरणा देने वाला प्रयास बाबा साहेब अंबेडकर की हर बात में झलकता है और ये दे सवा स करोड़ का देश बाबा साहेब आंबेडकर का हमेशा हमेशा रणी रहेगा जिसने देश की एकता के लिए अपने जुल्मों को दबा दिया घड़ दिया भविष्य भारत का देखा और बदले की भावना
के बजा समाज को एक करने की दिशा में प्रयास किया क्या हम सब हमारे राजनीतिक कारण कुछ भी होंगे पराजय को ना बड़ा मुश्किल होता है लेकिन उसके बावजूद भी जय और पराजय से भी समाज का जय बहुत बड़ा होता है राष्ट्र का जय बहुत बड़ा बता होता है और इसलिए उसके लिए समर्पित होना यह हम सबका दायित्व बनता है इस दायित्व को लेकर के बाबा साहेब आंबेडकर ने जो उत्तम भूमिका निभाई है राजनीतिक कारणों से इस महापुरुष के योगदान को अगर सही रूप में उनके जीवन काल से लेकर के अब तक अगर हमने प्रस्तुत
किया होता तो आज भी समाज में कहीं कहीं कहीं तनाव नजर आता है कभी-कभी टकराव नजर आता है कभी-कभी खरोच हो जाती है मैं दावे से कहता हूं अगर बाबा साहेब आंबेडकर को हमने भुला ना दिया होता तो यह हाल ना हुआ होता दोस्तो अगर बाबा साहेब आंबेडकर को फिर से एक बार हम उसी भाव के साथ श्रद्धा के साथ सामान्य तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे तोय जो कमियां है वह कमियां भी दूर हो जाएगी वह ताकत उस नाम में है उस काम में है उस समर्पण में है उस त्याग में है उस तपस्या में
है उस महान चीजें जो हमें दे कर के गए हैं उसके अंदर पड़ा हुआ है और उसकी पूर्ति के लिए हम लोगों का प्रयास होना बहुत आवश्यक है [संगीत] [प्रशंसा]