मरने के बाद कोई भूत क्यों बन जाता है क्या आपने कभी रात के वीराने में इन्हें महसूस किया है ऐसी भटकती अतृप्त आत्माओं के चुंगल में फसे आदमी का क्या हाल होता है भोका प्यासा बदले की भावना लिए क्रोध द्वेष लोभ वासना आद और भावनाएं मन में लिए मरने वाला शख्स अवश्य ही वह भूत बनकर भटकता है इंसानी दुनिया के परे भी एक अदृश्य दुनिया है लेकिन इंसान अपनी लालच खुदगर्जी और खुद को मडन दिखाने की होड़ में उस दुनिया से टकराने की नासमझी कर ही लेता है गांव के सभी लोगों के मना करने के
बा बावजूद भी उस भूता हवेली के नए-नए मालिक बने प्रभात और नीलिमा अपनी पहली रात गुजार रहे थे और अब सोने की तैयारी कर रहे थे प्रभात इस वक्त नोवल पढ़ने में बिजी था और वैसे भी 21 सेंचुरी में प्रभात जैसा एक मॉडर्न बिजनेसमैन ऐसी भूत प्रेत के लॉजिकल बातों पर कहां यकीन करने वाला था इतनी बड़ी जमीन वो भी इतने सस्ते दामों में हासिल कर लेने और अपनी फैक्ट्री एब्लिश कर लेने के बाद प्रभात को अपनी बिजनेस स्किल्स और कांटेक्ट पर गर्व हो रहा था वीरान गढ़ एक ऐसी श्रापित और मनहूस जगह थी कि
जहां के किसान जी तोड़ मेहनत के बाद भी मुट्ठी बर अनाज में अपना घर चलाने को मजबूर थे अगर फसल अच्छी हो जाती तब भी किसानों के हिस्से में थोड़ा ही आ पाता था बाकी अपने आप सड़ जाता था या उसमें आग लग जाया करती थी उस गांव के राज बाहर की दुनिया में उजागर करने वाला आज तक कोई भी सही सलामत बचा नहीं गांव को लेकर गांव के लोगों का गांव छोड़कर जाने का मतलब भी आमय दर्दनाक मौत को गले लगाना ही था मिस्टर भारद्वाज उस फैक्ट्री की जमीन के साथ-साथ ही अब वरान गढ़
के उस रहस्यमय हवेली के भी मालिक बन चुके थे उस हवेली के हर कमरे में बड़े-बड़े झूमर लगे हुए थे तलवारें और ढाल दीवारों पर जहां तहां टंगी हुई थी उसे बनाने में ज्यादातर काले पत्थर का इस्तेमाल हुआ था और लगता था कि वह कोई पुराना राज महल था वहां के महल में मनहूसियत ही मनहूसियत फैली हुई थी वह शानदार हवेली जो बरसों से बंद प थी किसी शमशान की तरह वीरान लग रही थी 100 से ज्यादा कमरों वाली उस हवेली में सैकड़ों राज दफन थे प्रभात क्या तुम्हे नहीं लगता कि यहां सब कुछ बहुत
अजीब है मैंने गांव वालों के मुंह से भूत प्रेत की बातें सुनी है मुझे बहुत डर लग रहा है नीलिमा ने अपने पति से कहा हंसते हुए प्रभात ने कहा नीलिमा तुम तुम कब से इन दकन सी बातों को सच मानने लगी इस गांव के सभी लोग अजीब हैं उनकी बात छोड़ो वी आर मॉडर्न पीपल हां एंड हाउ कैन वी बिलीव इन सच सुपरस्टिशंस हम इन गांव वालों की तरह कम पढ़े लिखे और पिछड़े हुए नहीं हैं देखो हमारी फैक्ट्री भी बिना किसी प्रॉब्लम के स्टार्ट होने को है हवेली की सफाई भी हो चुकी है
फिर भी तुम क्या बेकार की बातों के पीछे पड़ी हुई हो क्या तुम मुझे यह नोवल पढ़ने दोगी और यह फालतू की बातें सोचना बंद करोगी आई थिंक यू नीड रेस्ट ओके तभी उस बुता हवेली के कई सारे दरवाजे एक साथ जोर जोर से बजने लगे लाइट्स अचानक बंद चालू होने लगे इससे पहले कि वह दोनों कुछ भी समझ पाते अजीब अजीब सी आवाज आने लगी कुत्ते रोने लगे प्रभात ने अपनी पत्नी नीलिमा को समझाते हुए कुछ कहा डरने की कोई बात नहीं डले यहां इस तरह की आंधियां चलती रहती है और जानवरों की आवाजें
आती रहती हैं लेकिन प्रभात के ऐसा कहते ही उनके कमरे में लगी बड़ी सी पेंडुलम क्लॉक की आवाज उस हवेली में गूंजने लगी रात के ठीक 12 बज चुके थे घुंघर की आवाज सुनाई दी और कुछ ही देर बाद नीलिमा ने देखा की लाल जोड़ा पहने हुए एक औरत उसके सामने से बहुत तेजी से गुजरी क्या यह नीलिमा का वाम था या सचमुच उसे वह औरत दिखाई दी थी पता नहीं कहां से नीलिमा के गालों पर खून की बूंदे टपकने लगी अब वह हद से ज्यादा डर चुकी थी जो भी हो नीलिमा ने प्रभात को
उस औरत और खून की बूंदों के बारे में कुछ बताना चाहा लेकिन डर के मारे उसके से आवाज ही नहीं निकल सकी कमरे में अचानक लाल रंग का धुआ फैलने लगा और अजीब सी चंपा के इत्र की माक आने लगी प्रभात मुझे बहुत डर लग रहा है हम दोनों को ही यहां नहीं आना चाहिए था घबराई हुई नीलमा ने अपने पति का हाथ पकड़ते हुए कहा कमरे का टेंपरेचर अचानक से बहुत कम होने लगा यह यह इ तर की खुशबू और यह दुआ सब कहां से आने लगा अचानक इतनी ठंड क्यों लगने लगी है यहां
कुछ तो गड़बड़ है मेरा दिल बैठा जा रहा है नीलिमा ने आगे कहा हवेली में लगी हुई तस्वीरों के आगे रखी कैंडल्स अचानक से जलने लगी और फिर अचानक प्रभात के हाथ में जो नॉवेल था उसम भी आग लग गई ओ गड प्रभात हड़बड़ा आया अब डर का एहसास प्रभात को भी हो रहा था कमरे में अचानक कुछ लोगों की जोर र से हसने और रोने की आवाजें एक साथ आने लगी इससे पहले कि वह दोनों एक्ट कर पाते उनका वकिंग साइज बेड गोल गोल घूमता हुआ ऊपर सीलिंग से जा टकराया और टूट गया जोर
से धड़ाम की आवाज आई मेली मा और प्रभात दोनों ही करीब 20 फीट की ऊंचाई से जमीन पर गिर पड़े थे वह दोनों पूरी तरह करा रहे थे नीली मा की कमर में चोट आई थी और जबान पर दांत टकराने की वज जैसे मुंह से खून निकलने लगा था वहीं प्रभात का हाथ बुरी तरह मुड़ गया था ऐसा लग रहा था जैसे उसके हाथ की कोई हड्डी टूट गई थी उसकी पीठ पर भी चोट आई थी वह भी पूरी तरह तड़प रहा था इसी बीच उनके कमरे में रखे फर्नीचर और बाकी चीजें सब एकएक करके
हवा में उड़ने लगी उन दोनों के दर्द से रोने की आवाज के साथ-साथ कमरे में कई लोगों की हंसने की आवाजें जोर-जोर से गूंजने लगी ये सब देखकर दोनों की रोह काप गई और बिना देर किए वे दोनों लड़खड़ाते हुए कमरे के बाहर भागे और दरवाजा खोलते ही बड़ी से मकड़ी के जाल में दोनों उलझ गए नीलिमा और प्रभात मदद के लिए जोर-जोर से चिल्लाने लगे कोई हमारी मदद करो हेल्प हेल्प प्लीज हेल्प हेल्प अस वो लोग इतनी रात में चिल्लाने के अलावा कर भी क्या सकते थे नान गढ़ में मोबाइल नेटवर्क भी बहुत पुर
था इसलिए वे लोग अपनी आवाज भी बाहर नहीं पहुंचा सकते थे प्रभात अगर हमें कुछ हो गया तो हमारे बच्चे सिद्धार्थ का क्या होगा और हमने तो उसे कुछ बताया भी नहीं है डर से कपकप आती रोती हुई नीलिमा ने अपने पति से कहा यह सारी बातें बाद में करते हैं नीलिमा पहले अपनी जान बचाओ और यहां से भागो प्रभात ने कहा वे लोग जैसे तैसे उस डरावनी हवेली के बाहर निकले वहां पर उन्होंने देखा कि सामने गार्डन में सफेद और उजले कपड़े पहने हुए एक लंबे बालों वाली औरत एक छोटे से बच्चे को गोद
में लिए घूम रही थी वह बच्चा बुरी तरह से रो रहा था अरे अरे कोई हमें बचाओ यहां यहां सचमुच भूत है सबब प्लीज हेल्प अस प्रभात भी जोर-जोर से चिल्लाने लगा इससे पहले कि वो दोनों हवेली छोड़कर बाहर निकल पाते हवेली का चैनल गेट दोबारा से लॉक हो चुका था यह सब देखकर नीलिमा और प्रभात का कलेजा मुह को आ गया था उनका गला सूख चुका था वे पसीने से तर पतर हो चुके थे तभी अचानक से ऐसा लगा जैसे किसी अदृश शक्ति ने उन्हें जोर से अंदर की तरफ घसीटा हो दोनों की दिल
दहलाने वाली आवाज हवेली में गूंज गई और फिर वह आवाज धूमिल होकर शांत हो गई अगले दिन जब सुबह हवेली का दरवाजा सभी को दोबारा से एक बार बंद दिखाई दिया और प्रभात और नीलिमा भारद्वाज बाहर दिखाई नहीं दिए तो गांव वालों को बीती रात वहां क्या हुआ होगा इसे समझने में बिल्कुल देर नहीं लगी उनके मैनेजर मिस्टर बजाज के दिमाग ने तो काम करना ही बंद कर दिया था वह एक लॉयल और डेडिकेटेड पर्सन थे उनकी काबिलियत पैसों की मोहताज नहीं थी उन्होंने प्रभात को मना भी किया था इस हवेली में रहने से पर
प्रभात नहीं माने और अब हश्र यह हुआ कि उनका कोई अदा पता नहीं लग पा रहा था प्रभात और नीलिमा को ढूंढने में गांव में कोई भी उसकी मदद को तैयार नहीं था ऐसे में मिस्टर बजाज ने प्रभात और नीलिमा का इकलौता बेटा सिद्धार्थ को खबर करना मुनासिब समझा सिद्धार्थ एक बिजनेस कॉन्फ्रेंस में पार्टिसिपेट करने के लिए दुबई गया हुआ था और पिछले एक हफ्ते से वो वहीं पर था सिद्धार्थ 23 साल का था बहुत ही स्मार्ट और इंटेलिजेंट था व एक आईआईटी ग्रेजुएट और आईआईएम बेंगलोर से एमपीए होल्डर था बचपन से ही उसके अंदर
साइंटिफिक टेंपरामेंट और क्यूरियोसिटी औरों से काफी ज्यादा थी उसके पेरेंट्स हमेशा से यह चाहते थे कि उनका बेटा अपनी स्टडीज वर्ल्ड के टॉप इंस्टिट्यूशन में कर सके और एक टॉप का बिजनेस टाइकून बन सके सिद्धार्थ लगभग वर्ल्ड की 50 कंट्रीज से उस कॉन्फ्रेंस में आए हुए अपनी उम्र से बड़े लोगों के बीच भी सबसे ज्यादा तारीफ बटोरने वाला शख्स बन गया था उसके रूरल डेवलपमेंट को लेकर प्रेजेंट किए गए इनोवेटिव बिजनेस आइडियाज को बहुत ज्यादा एप्रिशिया जा रहा था सिद्धार्थ की मीटिंग ओवर ही हुई थी कि तभी उसके पास मिस्टर बजाज का फोन आया सिद्धार्थ
ने झट से फोन उठाया हेलो अंकल कैसे हो मॉम डैड कैसे हैं अ वो बेटा मिस्टर बजाज हिचकिचाहट से कुछ साफ बोल नहीं पा रहे थे सिद्धार्थ ने तुरंत समझ लिया कि कुछ गड़बड़ है अंकल सब ठीक तो है ना सिद्धार्थ ने कंसर्न होकर पूछा सिद्धार्थ एक्चुअली मुझे समझ नहीं आ रहा मैं तुमसे कैसे कहूं बेटा तुम यहां लौट आओ इतना कहकर मिस्टर बजाज थोड़ी देर के लिए खामोश हो गए अंकल आप मेरी बेचैनी को बहुत ज्यादा बढ़ा रहे हो आप मुझे साफसाफ बता क्यों नहीं रहे हो सिद्धार्थ ने कहा सिद्धार्थ फोन पर सब कुछ
बता पाना पॉसिबल नहीं है तुम अगर हो सके तो नेक्स्ट फ्लाइट पकड़कर दिल्ली वापस लौट आओ इतना कहकर सिद्धार्थ के मैनेजर मिस्टर बजाज ने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया मिस्टर बजाज के कॉल डिस्कनेक्ट करके बजाज जैसे ही मुड़ा अचानक से उसके आगे एक बूढ़ा बाबा आके खड़ा हो गया वो अजीब गरीब सा दिखने वाला आदमी चेहरे से बहुत गंभीर दिख रहा था जैसे उसने अपने सीने में कई खौफनाक रास छुपा रखे हो एक बार तो बजाज उसे देखकर डर गया पर तभी गांव वाले आपस में बातें करने लगे अरे बाबा आगे बाबा आगे मिस्टर बजाज ने
समझ लिया था कि यह बूढ़ा इस गांव का सबसे जानकार लोगों में है जिसे पूरा गांव देता है इससे पहले कि बजाज कुछ पूछ पाता बूढ़े बाबा ने उसे कहा उसे यहां मत बुलाओ एक बार फिर तबाही की आवाज मत दो सब खत्म हो जाएगा उसे रोक दो बजाज ने हैरान होकर पूछा किसे बाबा ने कहा अपने मालिक के इकलौते बेटे को यह सुनकर बजाज के रोंगटे खड़े हो गए लेकिन ऐसा आप क्यों कह रहे हो बाबा मैनेजर ने पूछा इसका जवाब तुम्हें यहां कोई नहीं दे सकता बस इतना समझ लो कि इस गांव में
जो एक बार आया तो व कभी वापस नहीं जा पाया हवेली का दरवाजा खुलवा करर तुम्हारे मलिक ने उन ताकतों को फिर से जगा दिया है तुम मेरे पीछे आओ मैं तुम्हे कुछ दिखाना चाहता हूं उस बूढ़े बाबा ने कहा उस पेड़ से टंगी हुई उन तीनों लाशों को देखो यह वही लोग है जिन्होंने तुम्हारे मालिक को इस जगह के बारे में बताने की कोशिश की थी उस दात ने आज इनकी भी जान ले ली एक बड़े से बरगद के पेड़ की तरफ इशारा करते हुए उस बूढ़े बाबा ने कहा उन गार्डन से लटकती लाशों
को देखकर बजाज की रूह काप गई मानो उसे यकीन हो गया था कि प्रभात और नीलिमा का भी यही हाल हुआ होगा उसी बीच गांव के एक शख्स ने आकर कहा कि फैक्ट्री में आग लग गई है सभी गांव वाले हैरान रह गए सभी के चेहरे पर मातम छा गया इतने दिनों बाद तो उन्हें रोजगार मिला था दो वक्त की रोटी का इंतजाम हुआ था अब वह भी खत्म हो गया इस खबर ने गांव वालों को अंदर तक तोड़क रख दिया हर तरफ बस उनकी चीख पुकार सुनाई देने लगी हे भगवान हे भगवान हे भगवान
हे भगवान यह तो सचमुच बहुत बड़ी मुसीबत है सब क्या हो रहा है चाहे जो भी हो मुझे सिद्धार्थ को रोकना ही होगा शुशील बजाज ने अपने आप से कहा और तुरंत सिद्धार्थ को फोन किया तभी अचानक से उनका मोबाइल एक स्पाक के साथ बंद पड़ गया बजाजी देखकर डर गया बूढ़े बाबा ने कहा अभिशाप अभिशाप बजाज समझ चुका था अब उसके पास और कोई चारा नहीं है सिद्धार्थ अगली फ्लाइट पकड़कर रात को भी दुबई से जयपुर आ जाएगा और कल सुबह तक गांव भी पहुंच जाएगा और उसके रोकने के लिए बजाज को गांव के
बाहर जाना ही होगा सुबह होते ही मिस्टर बजाज सिद्धार्थ को रोकने के लिए अपनी कार में निकल चुके थे फ्लाइट सुबह 3 बजे जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड करने वाली थी कार के गांव पार करती शमशान के पास सड़क किनारे लगे बरकत के पेड़ के नीचे से गुजरती हुई कार के सामने अचानक से एक पेड़ की बहुत बड़ी डाल गिर गई ब्रेक लगने से पहले ही कार उससे टकरा गई तम जोरों की आवाज हुई मिस्टर बजाज का सिर कार की स्टेरिंग से बहुत जोर से टकराया उनके सिर से खून की धार निकलने लगी कार के
बाहर निकल पाना उनके लिए लगभग नामुमकिन हो गया था उनकी आंखों के आगे अंधेरा जा रहा था तभी अचानक कार के सामने के शीशे पर उन्हे बेहद खौफनाक चेहरा दिखाई दिया और डर और दर्द के मारे जोर से चिल्लाए तभी एक पत्थर आके उनकी कार की खिड़की से टकराया और खिड़की का खाच टूट गया सामने सिद्धार्थ खड़ा है अंकल डोंट वरी मैं आ गया र्थ गांव के अंदर आ चुका था उसे बास देखकर मानो बजज ने स्ट्रगल करना छोड़ दिया और उनकी आंखों के आगे अंधेरा छ गया अब क्या होगा क्या सिद्धार्थ भी उस अनजान
शक्ति का शिकार बन जाएगा जिसने उसके मां-बाप को गायब किया है या फिर सिद्धार्थ अपने मां-बाप को ढूंढने में कामयाब हो पाएगा आखिर कौन है यह शक्ति जिसमें जिसने इतने सालों से गांव वालों का जीना हराम कर दिया है उसके बारे में बातें करने पर लोग मारे क्यों जाते हैं ऐसे अनगिनत सवालों का जवाब जानने के लिए सुनते [प्रशंसा] रहिए वीरान गढ़ पहुंचकर सिद्धार्थ अपने पेरेंट्स का पता लगाने का फैसला करही चुका था सिद्धार्थ के मैनेजर मिस्टर बजाज बुरी तरह जखमी थे कार हादसे में बेहोश हो जाने के बाद सिद्धार्थ ने गांव वालों की मदद
से उन्हें गांव के सरकारी गेस्ट हाउस तक पहुंचाया उनकी हालत को देखकर उस बूढ़े बाबा ने कहा कि अब यहां मौत का तांडव होगा कोई भी जिंदा नहीं बच पाएगा जब तक उस हवेली की भोग नहीं मिटती तब तक यह मौत का सिलसिला नहीं थमेगा सिद्धार्थ जैसे नए जमाने के मॉडर्न और रेशनल थिंकिंग वाले शख्स के लिए इन सब बातों पर यकीन कर पाना बहुत मुश्किल था लेकिन वह यकीन कैसे नहीं करता व खुद अपनों को खो चुका था यहां उसके सामने अभी के मैनेजर अंकल अपनी जिंदगी और मौत के बीच लड़ाई लड़ रहे थे
मिस्टर बजाज की हालत बद से बदतर होती जा रही थी उनका बहुत ज्यादा खून बह चुका था उस गांव की बदकिस्मती यह थी कि वहां पर कोई भी क्वालिफाइड डॉक्टर नहीं था एक अन ट्रेन डॉक्टर उन्हें अटेंड कर रहा था वैसे भी उस भूधा हमले का इलाज भला कोई डॉक्टर कर भी कैसे सकता है इस बीच मिस्टर बजाज की बेटी को गौरी ने अपने डैडी को उनके मोबाइल पर कॉल किया उनके मोबाइल पर गौरी का नंबर माय डॉटर नेम डिस्प्ले कर रहा था जब बार-बार कॉल आने लगा तो सिद्धार्थ ने ही उस कॉल को रिसीव
कर लिया मिस्टर बजाज की बेटी गौरी और सिद्धार्थ दोनों एक दूसरे को बचपन से जानते थे वह दोनों बचपन में साथ-साथ खेलकर बड़े हुए थे लेकिन सिद्धार्थ अपने स्टडीज के लिए विदेश चले जाने के कारण गौरी से काफी सालों से कांटेक्ट में नहीं था जब सिद्धार्थ ने फोन उठाया तो उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह मिस्टर बजज की बेटी से क्या बात करें हेलो डैडी गौरी ने कहा हेलो मैं सिद्धार्थ भारद्वाज बोल रहा हूं आई एम सॉरी मुझे मिस्टर बजाज का फोन नहीं उठाना चाहिए था लेकिन बात ही कुछ ऐसी थी सिद्धार्थ ने
कहा सिद्धार्थ आप पर मेरी डैडी कहां है और उनका फोन आपके पास क्यों गौरी ने हैरान होते हुए पूछा वो वो वो एक्चुअली बात कुछ सीरियस है मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं आपसे क्या कहूं आपके डैडी का वीरान गढ़ में खतरनाक कार एक्सीडेंट हो गया है और अगर उन्हें जल्द से जल्द ब्लड क्लॉट वाली मेडिसिन मिल जाती है तो उनकी जान बचाई जा सकती लेकिन इस गांव में कोई भी केमिस्ट नहीं है और रास्ते पर पेड़ गिर जाने की वजह से वहां से गाड़ियां नहीं गुजर सकती हैं इसके अलावा इस जगह से निकल
पाना हमारे लिए पॉसिबल भी नहीं है सिद्धार्थ ने कहा क्या मेरे मना करने के बावजूद भी डैडी विरान गढ़ राजस्थान गए थे वोह एक भूता जगह है लेकिन वह अपने बॉस के लिए किसी चीज की परवाह नहीं करते तुमने शायद मुझे पहचाना नहीं खैर मिस्टर बजाज मेरे डैडी है मुझे साफसाफ बताओ अब उनकी हालत कैसी है गौरी ने सिद्धार्थ से कहा अंकल को उन दवाओं की बहुत ज्यादा जरूरत है मैं खुद भी यहां पर अपने मम्मी डैडी को तलाश करने के लिए आया हूं वे दोनों भी वीरान गढ़ की भूता हवेली से गायब हो गए
अभी मैं तुम्हें बस इतना ही बता सकता हूं सॉरी मुझे कॉल डिस्कनेक्ट करना पड़ेगा सिद्धार्थ ने गौरी से कहा सिद्धार्थ ने फोन रखा तभी गांव के लोग सिद्धार्थ के पास आए पहले से ही भुखमरी के शिकार वे लोग रोते हुए सिद्धार्थ की आगे गिड़गिड़ा हुए कहने लगे भगवान को हम पर रहम कब आएगा यह कहते हुए वोह लोग सिद्धार्थ के सा साने रोने ही लगते हैं वे कहते हैं कि गांव के पास फैक्ट्री खुलने से कई सालों बाद उन्हें नया रोजगार मिलने वाला था लेकिन वहां की उन बुरी ताकतों की वजह से फैक्ट्री में भी
आग लग गई आप लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है मैं उस फैक्ट्री को दोबारा शुरू करवा दूंगा और जल्दी मेरी मम्मी डैडी को भी ढूंढ निकालू जब से मैं इस जगह आया हूं किसी ने मुझसे ठीक से कोई बात तक नहीं की आप लोग इतने अजीब कैसे हो सकते हो मेरे डैडी आप सबके लिए जहां वह फैक्ट्री शुरू करने का सोच रहे थे क्या कोई मुझे बताएगा कि यहां दरअसल यह सब कुछ हो क्या रहा है सिद्धार्थ ने गांव वालों से कहा बेटा इस गांव में तुम्हारा कोई साथ नहीं देने वाला इस गांव
के लोग बहुत डरे सहमी और मुर्दे के समान हो चुके हैं इस गांव के लोगों ने बहुत कुछ छेला है यहां हर वक्त लोग मौत के साय में जीने को मजबूर हैं गांव वालों के बीच में खड़े बूढ़े बाबा ने कहा लेकिन बाबा यहां पर कोई भी खुलकर कुछ भी नहीं कहता सिद्धार्थ ने पूछा मैंने तुम्हारे पिता को भी लाख समझाया था कि वह यहां आ तो गए हैं लेकिन उन्हें उस हवेली के बारे में सोचना बंद कर देना चाहिए लेकिन उन पर तो न जमाने की सोच हावी थी इस जगह के नियमों को तोड़कर
उन्होंने तबाही को नता दिया है बूढ़े बाबा ने कहा लेकिन बाबा मेरे पिता का मकसद तो नेक था फिर भगवान ने उनके साथ ऐसा क्यों किया सिद्धार्थ ने पूछा तुम्हारे पिता तुम्हारे पिता के साथ जो कुछ हुआ वो भगवान ने नहीं शैतान ने किया है क्योंकि जिसने भी यहां की उस भूता हवेली और उस गांव के रहस्य के बारे में कुछ भी कहने की हिम्मत की उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा तुम्हारे पिता तो उस हवेली को तुड़वाने का सोच रहे थे और फिर वहां रहने चले गए थे जवाब में बूढ़े बाबा ने कहा
बाबा यहां की वह बुरी आत्माएं आखिर चाहती क्या है क्या मेरे माता-पिता को ढूंढने का कोई उपाय नहीं है क्या यहां लोग ऐसे ही मरते रहेंगे यह अभिशाप कब खत्म होगा सिद्धार्थ ने पूछा यहां की आत्माओं के बारे में तो मैं तुम्हें कुछ भी नहीं बता सकता लेकिन बस इतना कह सकता हूं कि यहां की उस मनोज हवेली में कई रहस्य छुपे हुए हैं अगर कोई उन रहस्यों को समझ लेगा और उन्हें सुलझा लेगा तो हो सकता है यह अभिशाप खत्म हो जाए बूढ़े बाबा ने सिद्धार्थ को बताया सिद्धार्थ ने फैसला किया कि चाहे जो
भी हो वह उस हवेली में जरूर जाएगा अपनी जान पर खेलकर अपने मम्मी डैडी का पता लगाएगा बाबा मैं इस काम के लिए तैयार हूं सिद्धार्थ ने कहा अगर ऐसा है तो ठीक है बेटा मैं भी तुम्हारे साथ वहां चलूंगा मुझे मौत का बिल्कुल डर नहीं है मैं भी उन आत्माओं का सताया हूं बूढ़े बाबा ने सिद्धार्थ से कहा जब सिद्धार्थ ने उस भयानक हवेली को देखा तो उसके भी दिल में खौफ घर करने लगा उस हवेली का सन्नाटा और मनहूसियत भरा माहौल सिद्धार्थ ने अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखा था हवेली में दोबारा से
सब तरफ घास और झाड़ियां उक चुकी थी जमीन पर पेड़ों के अनगिनत सूखे हुए पत्ते बिखरे पड़े थे वह हवेली अब एक फिर से मकड़ी के जालों से ढक चुकी थी उसे देखकर कोई नहीं कह सकता था कि कि उसकी अभी-अभी कुछ दिन पहले ही उसकी सफाई करवाई गई थी हवेली के बाहर लगे पुतले बहुत अजीब और डरावने थे ऐसा लग रहा था वह बेजन नहीं है उनके हाथों में तलवारें थी सिद्धार्थ को ऐसा लग रहा था जैसे वो उसे घूर कर देख रहे थे और कभी भी उस पर हमला कर सकते थे कुछ पुतले
टूटे हुए भी थे और उनकी जंग लगी हुई तलवारें जमीन पर पड़ी हुई थी जैसे तैसे चैनल गेट खोलकर अंदर पहुंचे सिद्धार्थ की नजर हवेली के उस बड़े से बंद दरवाजे पर पड़ी उस दरवाजे पर बहुत शानदार नक्काशी की गई थी लेकिन धूल के कारण कुछ भी साफसाफ दिखाई नहीं दे रहा था हवेली के सारे दूसरे दरवाजे भी बंद दिखाई दे रहे थे जब तक इस हवेली के सारे दरवाजे नहीं खुल जाते तुम अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सकते हो और शायद ऐसा होने के बाद ही गांव वालों को इस अभिशाप से मुक्ति मिल
सकती है सिद्धार्थ के साथ वहां आए उस बूढ़े बाबा ने कहा बाबा हवेली के अंदर जाने के लिए उन दरवाजों को खोलने का उपाय तो मैं जरूर ढूंढी निकालू सिद्धार्थ ने बूढ़े बाबा से कहा बूढ़े बाबा ने सिद्धार्थ को एक और बात बताई थी कि उसे इस काम को रात होने से पहले ही करना होगा रात के अंधेरे में वे बुरी शक्तियां बहुत घातक हो जाया करती थी सिद्धार्थ ने बारीकी से चारों तरफ से हवेली का मुआयना करना शुरू कर दिया चैनल गेट के पास हल्दी कुमकुम ल हुए सूखे नींबू पड़े हुए थे और अजीब
सा छोटे-छोटे पुतले चैनल गेट पर लगे हुए थे उनमें कुछ कीले गड़े हुए थे उस हवेली के बनावट बहुत शानदार लेकिन अजीब थी पीछे की तरफ जानवरों की कुछ हड्डियां पड़ी हुई थी कहीं कहीं सूखे खून के धब्बे दिखाई दे रहे थे हवेली के सबसे बड़े दरवाजे पर गौर से देखने के बाद उसे यह महसूस हुआ कि उस दरवाजे पर कुछ लिखा हुआ था लेकिन यहां पर यह अक्षर कैसे आ गए यह यहां किसने लिखा होगा इनका क्या मतलब हो सकता है सिद्धार्थ उन अक्षरों को देखकर हैरान हो गया उसने एक पत्थर उठाकर उन अक्षरों
को ठीक से कुरेदना शुरू कर दिया उस पर एंट संस्कृत लैंग्वेज में एक सेंटेंस लिखा हुआ था सिद्धार्थ को एंट संस्कृत की इतनी समझ नहीं थी इसलिए उसने उस ग ट्रांसलेटर के जरिए उसे हिंदी में ट्रांसलेट करने की कोशिश की लेकिन ना तो उसे ग ट्रांसलेट कर सकता था और ना ही ठीक तरह से इंटरनेट कनेक्टिविटी थी लेकिन उसे कुछ शब्दों का मतलब थोड़ा-थोड़ा समझ आ रहा था जैसे दरवाजा पेड़ जड़ सिद्धार्थ कन्फ्यूज्ड हो गया था उसे समझ नहीं आ रहा था कि ऐसे में उसे क्या करना चाहिए वह अंदाजा लगाता कि उसे किसी पेड़
को अंधेरा होने से पहले ही जड़ से काटना होगा लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यह था कि वहां आसपास तो बहुत सारे पेड़ थे इतने सारे पेड़ों में से सेंटेंस के अकॉर्डिंग मुझे किस पेड़ को काटना चाहिए सिद्धार्थ ने अपने आप से पूछा उसके ऐसा कहते ही उसके दाहिने तरफ लगा हुआ एक मोटा सा पेड़ अजीब तरह से हिलने लगा वहां अचानक जोर से हवा चलने लगी और हवा के साथ किसी के गुजरने की आवाज आने लगी यह सब क्या होने लगा था इससे पहले कि सिद्धार्थ उस हलचल के पीछे की वजह को समझ पाता
उस पेड़ की एक डाली जोर से हिली और उसने सिद्धार्थ को बहुत जोर से हिट किया सिद्धार्थ बहुत दूर जाकर गिरा गिरने की वजह से सिद्धार्थ के सिर पर चोट लग गई थी उसका माथा घूमने लगा था वो बूढ़ा आदमी वहां से भागा और सिद्धार्थ से कहा खुद को बचाओ खुद को बचाओ वह कोई आम दरख्त नहीं था वह सिद्धार्थ के खून का प्यासा था अचानक इस बदले माहौल की वजह से सिद्धार्थ का दिमाग काम नहीं कर पा रहा था वह एक पुराना बरगद का पेड़ था अपनी डाल से हमला करने के बाद उसने सिद्धार्थ
को संभलने का मौका तक नहीं दिया और उसकी चड़ों ने सिद्धार्थ के पैर को जकड़ लिया सिद्धार्थ ने जैसे तैसे वहां पड़ी एक जंग लगी तलवार से उसकी जड़ों को काटना शुरू कर दिया लेकिन घायल होने की वजह से अब उसमें ताकत नहीं रह गई थी और दर्द के मारे उसका बुरा हाल था एक बार तो उस पेड़ की जड़ों ने उसके गले को ऐसा कस कर जकड़ लिया कि मानो उसकी जान लेने के बाद ही उसे छोड़ेगी लेकिन सिद्धार्थ ने हिम्मत नहीं आर उस तलवार की एक ही वार से उसने एक बार फिर उस
जड़ को काट दिया जब वो जड़ों से लड़ाई कर रहा था ठीक उसी वक्त उस पेड़ से एक बहुत मोटी डाल टूटकर उसके ऊपर गिरने लगी सिद्धार्थ इस बात से अनजान था और ठीक उसी वक्त किसी लड़की ने उसे पकड़ कर खींच लिया वह लड़की कौन थी किसने न मौके पर सिद्धार्थ की जान बचा ली कोई लड़की इतनी खौफनाक जगह पर कैसे आ सकती है और क्या सिद्धार्थ उस जंग लगी तलवार से उस पेड़ का मुकाबला कर पाएगा वह इतने मोटे पेड़ को कैसे काटेगा ऐसी हालत में सिद्धार्थ अपने पेरेंट्स को कैसे बचा पाएगा या
फिर यह सिद्धांत की जिंदगी का आखिरी दिन होगा जानने के लिए सुनते रहिए [संगीत] सिद्धार्थ ने जब अपनी मदद करने वाली उस लड़की को देखा तो वो बस उसे देखता ही रह गया एक रेंजर की कॉस्ट्यूम में वो लड़की गजब की लग रही थी वो जितनी ज्यादा खूबसूरत थी उसमें उतनी ही गजब की फूर्ति थी वो उतनी ही स्मार्ट थी उसके पास एक टूल बैग था उसने सिद्धार्थ को बचाया और उससे कहा उस पेड़ का ध्यान अपनी तरफ ही बनाए रखना मैं खुश करती हूं मैं तुमसे मुकाबला करने के लिए तैयार हूं तुम जो भी
हो अब मेरा सामना करने के लिए तैयार हो जाओ सिद्धार्थ ने उस पेड़ से कहा और तभी उस लड़की ने टूल बैग से एक बोतल निकाली और उसमें से पेट्रोल उस पेड़ की जड़ पर छिड़क दिया इसके बाद उसने बिना दे के मा निकालकर उस पेड़ में आग लगा दी पेट्रोल की वजह से आग तेजी से बढ़ने लगी और कुछ ही देर बाद वो पेड़ चलकर धीरे-धीरे राख होने लगा इस तरह से उस पेड़ से सिद्धार्थ की जान बच गई क्या मैं इस पेड़ से मेरी जान बचाने वाली इस बहादुर और खूबसूरत लड़की का नाम
जान सकता हूं सिद्धार्थ ने उस लड़की से पूछा मैं हैरान हूं कि अब तक तुमने मुझे नहीं पहचाना मैं तुम्हारी बचपन की दोस्त गौरी उस लड़की ने कहा सिद्धार्थ गौरी को देखकर बिल्कुल चौक गया था बचपन की दोस्त अब जवान हो चुकी थी सिद्धार्थ इस बात को नहीं जानता था कि उनके मैनेजर मिस्टर बजाज की बेटी उसकी बचपन की फ्रेंड गौरी ही है जब गौरी को पता चला कि उसके डैडी का एक्सीडेंट हो गया है तो उससे राह नहीं किया उसने अपने डैडी के लिए जरूरी मेडिसिन खरीदी और उसने वीरान गढ़ जाने का मन बना
लिया गौरी पहले ही अपने कॉलेज के रिसर्च वर्क के लिए राजस्थान के पुराने महलों के प्रोजेक्ट पर वर्क कर रही थी इन दिनों वह जयपुर में ही थी जब उसे पता चला कि वीरान गढ़ का रास्ता बंद है तो उसने बिना देर किए एक बाइक हायर की और वीरान गढ़ की तरफ निकल गई क्योंकि गौरी एक आर्कियोलॉजी स्टूडेंट थी उसके लिए वीरान गढ़ की लोकेशन का पता लगाना बड़ी बात नहीं थी वीरान गढ़ पहुंचने के बाद जब उसे पता चला कि सिद्धार्थ उसे भूता हवेली में उसके पेरेंट्स की खोज में गया हुआ था तो उससे
रहा नहीं गया और वह भी वहां चली आई सिद्धार्थ गोरी से 15 साल बाद मिल रहा था उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि गौरी अभी भी उसके सामने थी उस डरावनी हवेली में इतनी खूबसूरत लड़की का मिल जाना यह एक खूबसूरत इत्तफाक ही कहा जा सकता था सिद्धार्थ को गौरी बहुत पसंद आई उससे मिलने के बाद वो खुद को उसकी तरफ अट्रैक्ट होने से नहीं रोक पाया लेकिन एक बात जिसने सिद्धार्थ को बहुत हैरान कर दिया था वह थी कि गौरी को उस पेड़ के बारे में कैसे पता चला और वह उसे
बचाने के लिए यहां कैसे आ गई जब उसने गौरी से इस बारे में पूछा तो गौरी ने उसे बताया कि उसने दरवाजे पर संस्कृत में लिखा हुआ सेंटेंस पढ़ लिया था गौरी से आगे बात करने पर सिद्धार्थ को पता चला कि वो देश के सबसे बड़े आर्कोलॉजी कॉलेज से जी की पढ़ाई कर रही थी यही कारण था कि उसे एंट संस्कृत की इतनी बढ़िया जानकारी थी कि उसने दरवाजे पर लिखी चीजों को इतनी जल्दी समझ लिया गौरी ने सिद्धार्थ से कहा कि वह उसके उस हवेली में गायब हुए पेरेंट्स को ढूंढने में उसकी मदद करना
चाहती थी गौरी तो मेरी दोस्त होने के नाते मेरी मदद करना चाहती हो यह तो बिल्कुल सही है लेकिन यह जगह बेहद खतरनाक है यहां मुकाबला इंसानों से नहीं बल्कि भूतों और आत्माओं से है यहां की अतृप्त आत्माएं खून की प्यासी है सिद्धार्थ ने गौरी से कहा सिद्धार्थ के इस मिशन पर उसका मुकाबला अभी-अभी सामने आए उस भूता पेड़ से भी ज्यादा खतरनाक कई चीजों से होने वाला था उस हवेली पर काली शक्तियों का कब्जा था चाहे जो हो मैं हर हाल में तुम्हारा साथ देने के लिए तैयार हूं आफ्टर ऑल मैं आर्कियोलॉजिस्ट हू और
इस भूता हवेली के तमाम रहस्यों को मैं भी जानना चाहती हूं जवाब में गौरी ने सिद्धार्थ से कहा उस मोटे पेड़ के जल जाने के बाद हवेली के पहले बड़े दरवाजे की पहेली सुलझ चुकी थी इसके बाद धक्का देने पर वह दरवाजा खुल गया उस पुराने दरवाजे के खुलने पर एक अजीब सी डरावनी आवाज ी गौरी और सिद्धार्थ के साथ उस बूढ़े बाबा ने भी उस हवेली के अंदर कदम रखा हवेली के बारे में एक सच यह भी था कि वहां दिन के वक्त गए लोगों की जान तो नहीं गई थी लेकिन या तो वो
लोग पागल हो चुके थे या मौत से बदतर जिंदगी जी रहे थे सिद्धार्थ और गौरी दोनों को ही इस बात की परवाह नहीं थी क्योंकि वो लोग इस बात से अनजान थे लेकिन यह सच्चाई वह पड़ा बाबा जानता था जैसे ही वे लोग अंदर पहुंचे उन्होंने देखा कि उस हवेली में बहुत सारे दरवाजे हैं और वह भी सभी बंद पड़े हैं वह हवेली अंदर से किसी महल की तरह जगमगा रही थी अंदर से सब कुछ बिल्कुल साफ सुथरा और खूबसूरत दिखाई दे रहा था अंदर बहुत ज्यादा सन्नाटा था यह सब देखकर उन तीनों की हैरानी
का ठिकाना नहीं था उन्हें महसूस हुआ कि शायद हर एक दरवाजे के खुलने के बाद अंदर का नजारा ऐसे ही खूबसूरत नजारे में तब्दील हो जाता होगा लेकिन उन्होंने महसूस किया कि उस वक्त वह अंदर की खामोशी बहुत अजीब थी वे तीनों अपने दिल की धड़कन को भी सुन सकते थे ऐसा कैसे हो सकता है जिस हवेले के बाहर इतना ज्यादा मनहूसियत हो वह अंदर से इतनी शांति और सुंदर कैसे हो सकती है गौरी ने कहा गौरी के ऐसा कहते ही उसकी आवाज वहां जोर जोर से गूंजने लगी हवेली में ल तमाम शीशे जोरदार आवाज
के साथ टूटने लगे खुद को बचाओ नीचे बैठ जाओ सिद्धार्थ ने चिल्लाकर कहा कोई नहीं बचेगा तुम सब मरोगे यह कहते हुए एक औरत की आवाज वहां गूंजने लगी यह कैसी आवाज है सिद्धार्थ अब हमारा क्या होगा गौरी ने सहमी हुई आवाज में सिद्धार्थ से कहा गौरी मैंने तुम्हें पहले ही बताया था कि यहां पर बहुत खतरा है थ ने कहा डरो मत हमारे डरने से इन काली ताकतों को बढ़ावा मिलता है उस बूढ़े बाबा ने कहा इसके बाद वहां पर जोर जोर से किसी औरत की हसने की आवाजें सुनाई देने लगी तभी उस बूढ़े
बाबा ने उसके कुर्ते में से कुछ सरसों के ाने निकालकर कुछ मंत्र पढ़ने के बाद उन्हें वहां आसपास फेंक दिया उनके ऐसा करते ही सब कुछ दोबारा वापस शांत हो गया इसके बाद उनकी नजर ठीक सामने वाले दरवाजे पर पड़ी उस दरवाजे पर हल्दी कुमकुम के बने पंजों के निशान दिखाई दे रहे थे पहले ही की तरह इस दरवाजे पर भी कुछ लिखा हुआ था जो कि अभी साफ नहीं दिख रहा था वे लोग उस दरवाजे की तरफ बढ़ने लगे दरवाजे के पास पहुंचने के बाद गौरी ने अपने टूल बैग में से एक ब्रश और
एक लिक्विड निकाला उस लिक्विड को छिड़कने के बाद उसने उस ब्रश से दरवाजे को साफ करना शुरू किया गौरी के उस दरवाजे को छूते ही वह दरवाजा सोर सोर से हिलने लगा ऐसा लगने लगा जैसे उस दरवाजे को पीछे से कोई जोर-जोर से ठोक रहा हो उसके पीछे से एक दर्द भरी चीख सुनाई दीी और दरवाजे के पीछे से खून निकलता हुआ दिखाई देने लगा इसे देखकर उन तीनों ने डर कर अपने कदम पीछे हटा लिए इसके बाद जब वहां कुछ देर कुछ भी नहीं हुआ तो हिम्मत करके वह तीनों दोबारा आगे बढ़े गौरी ने
जब उस दरवाजे को साफ किया तो उन्हे वहां दोबारा संस्कृत भाषा में लिखे हुए कुछ शब्द दिखाई दिए वहां पर लिखे उस सेंटेंस को उसने सिद्धार्थ और बूढ़े बाबा को समझाना शुरू किया दरवाजे के ऊपर की पेंटिंग अभी है अधूरी तोड़कर मिट्टी जलाकर छत कर दो उसको पूरी यह कैसी अजीब पहेली है कोई भला मिट्टी को कैसे तोड़ सकता है दरवाजा भी कांप ही रहा था उस पर लटका ताला जोर सोर से बज रहा था जैसे ही उसे पढ़ने के बाद गौरी ने ऊपर की तरफ देखा एक बड़ी सी पेंटिंग ऊपर से उसके सर पर
गिरी लेकिन खुशकिस्मती से वह गौरी के सर पर ना गिर के गौरी के पैरों पर गिरी वो एक पतले काले पत्थर पर बनी हुई पेंटिंग जिस पर लड़की की खूबसूरत फ्रेम लगी हुई थी ओ गॉड बहुत दर्द हो रहा है कोई जल्दी से इसे मेरे पैर से हटाओ दर्द से कराते हुए गौरी ने कहा गौरी मैंने पहले ही बोला था लेकिन तुमने मेरी एक नहीं सुनी सिद्धार्थ ने उस पेंटिंग को हटाते हुए कहा हालांकि गौरी को दाहिने पैर के अंगूठे पर थोड़ी चोट आई थी लेकिन अचानक को इस हाद से से गौरी को घबराहट और
दर्द की वजह से चक्कर आने लगा और वह धड़ाम से नीचे गिर गई सिद्धार्थ और बूढ़ा बाबा दोनों भी घबरा गए सिद्धार्थ ने गौरी को सहारा दिया तो गौरी ने उसे बताया कि उन्हें आगे क्या करना है गौरी ने बताया कि उस सेंटेंस में क्लू दिया गया है उसमें एक टूटी हुई पेंटिंग का जिक्र है मुझे लगता है शायद यह वही पेंटिंग है यह हमारे लिए एक हिंट है गौरी ने कहा गौरी के पैर में अभी भी दर्द हो रहा था लेकिन वे तीनों मिलकर इस पेंटिंग को ध्यान से देखने लगे गौरी तुम्हारी बात सही
है लगता है यही वो पेंटिंग है जिसका कोना टूटा हुआ है मतलब वो अधूरी ही है और काले पत्थर से बनी है सिद्धार्थ ने कहा लेकिन उस पहेली में लिखी बाकी बातें बहुत अजीब है क्या तुम्हें कुछ समझ आ रहा है तोड़कर मिट्टी जलाकर छत घर तो उसको पूरी आखिर कोई छत को कैसे जला सकता है और मिट्टी को कैसे तोड़ा जा सकता है सिद्धार्थ ने गौरी से पूछा सिद्धार्थ मुझे लगता है कि हमें सबसे पहले इस पेंटिंग में दिखाई दे रही जगह को तलाश करना होगा शायद वही हमें कोई क्लू मिल जाए उस पेंटिंग
में एक पहाड़ था और उसके नीचे फैला हुआ सूखे घास का मैदान जब उन लोगों ने ने उस पेंटिंग के बारे में सच का पता लगाया और वे उसे गौर से देख ही रहे थे तभी उस पेंटिंग में से एकदम से बहुत सारे चमगादड़ बाहर आने लगे वो चमगादड़ उन तीनों लोगों पर अपने पंजे और चोंच से हमला करने लगे गौरी अपने आप को बचाओ सिद्धार्थ ने कहा बूढ़े बाबा ने कहा अरे जल्दी अरे जल्दी यहां से भागो नहीं तो यह चमकात हमें नोच खाएंगे जल्दी से दीवार पर लगी वो मशाल उठाओ और उनमें आग
लगाओ यह रोशनी बदाश नहीं कर पाते और आग से हम इनका मुकाबला भी कर सकते हैं बूढ़े बाबा ने कहा इससे पहले कि सिद्धार्थ वहां रखी मसालों को जला पाता वे चमगादड़ मेन डोर के सामने इकट्ठा होने लगे वहीं हॉल में एक बहुत बड़ा घंटा टंगा हुआ था जिसकी रस्सी नीचे लटक रही थी सिद्धार्थ को लगा कि शायद इससे काम बन जाए और बिना देर किए वो उस घंटे को जोर-जोर से बजाने लगा घंटे के जोर से बजते ही सारे चमका दर हवेली के ऊपर की एक खिड़की से ना जाने कहां गायब हो गए बाबा
क्या आप इस पहाड़ के बारे में कुछ जानते हो सिद्धार्थ ने पूछा हां गांव के बाहर दक्षिण की तरफ लगभग 3 किलोमीटर दूर ऐसा ही एक पहाड़ मौजूद है और वहां ऐसा ही घास का मैदान भी है मुझे लगता है हमें बिना देर किए वहां पर पहुंचना चाहिए बाबा ने सिद्धार्थ से कहा वे तीनों ही उस क्लू को लेकर बहुत हैरान परेशान थे उस पहाड़ की तरफ बढ़ते वक्त वे लोग मनी मन सोच रहे थे कि उस पहेली में लिखी हुई वह सारी बातें कैसे संभव हो सकती है जैसे कि वे लोग उस पहाड़ पर
पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वहां पर एक किसान की झोपड़ी के अलावा और कुछ भी नहीं है बस सूखी हुई घास ही फैली हुई थी उस किसान की झोपड़ी बांस और घास की बनी हुई थी वे लोग हैरान थे कि क्या उन्हें वह पूरा का पूरा पहाड़ खोदना पड़ेगा यह कैसे हो सकता था वहां तो कहीं मिट्टी का नामो निशान भी नहीं था तो फिर वह लोग मिट्टी को तोड़ते कैसे उस पहाड़ पर तो पत्थर की चट्टा नहीं थी अब कैसे करेंगे वे तीनों इस मिशन को पूरा और अगर मिशन पूरा नहीं हो पाया तो
क्या होगा सिद्धार्थ के मम्मी डैडी का मिशन को पूरा करने में उनके सामने और कौन-कौन सी परेशानी आएगी क्या बिना किसी नुकसान के वे तीनों यह काम पूरा कर पाएंगे आप सुनते रहिए वे तीनों रात होने से पहले उस पहाड़ पर पहुंच गए थे लेकिन उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था वे क्लूलेस थे जब कुछ समझ नहीं आया तो वे लोग वहां बनी झोपड़ी के पास जाने लगे तुम दोनों इन बातों को बहुत अच्छे से समझ लो कि यहां पर कदम कदम पर खतरा है रात होने को है बुरी शक्तियां और भी बलवान हो
जाएंगी वीरान गढ़ में अपने राज कभी किसी से नहीं कहना यहां काली शक्तियां कभी इंसान बनकर तो कभी पक्षी या जानवर का रूप बदलकर हमारे इर्दगिर्द मंडराती रहती हैं पहले भी लोगों के साथ यहां ऐसे कई खतरनाक हादसे हो चुके हैं रात का सन्नाटा इनके लिए वरदान होता है और सबसे ज्यादा अजीब बात तो यह है कि इनका ज्यादातर शरीर वही शख्स होता है जो या तो इनके बारे में हमेशा सोचते रहता है या जिसे इनसे डर लगता है उस बूढ़े बाबा ने सिद्धार्थ और गौरी से कहा लगता है उस झोपड़ी में कोई रहता है
वहां रोशनी है अगर ऐसा है तो हो सकता है कि वह हमारी कुछ मदद कर दे गौरी ने कहा एक और बात गांठ बांध लो किसी भी अनजान चीज को मुझसे पूछे बिना हाथ नहीं लगाना और चाहे जो हो जब तक मैं इशारा ना करूं किसी का भी दिया हुआ कुछ मत खाना वीरान गढ़ की बुरी आत्माएं तुम्हें अपने वश में करने की कोशिश भी कर सकती हैं बूढ़े बाबा ने आगे बताया शाम ढलने को थी और रात होने वाली थी वीरान गढ़ के लिहाज से यह वक्त बेहद खतरनाक था वे तीनों समझ नहीं पा
रहे थे कि पहाड़ पर अपनी पहेली को कैसे सुलझाए मुझे लगता है रात होने से पहले हमारे लिए अच्छा यही होगा कि हम इस जगह से जल्दी लौट जाएं हम अपना काम कल सुबह आकर भी कर सकते हैं बूढ़े बाबा ने कहा इसी बीच वहां का माहौल अचानक से बदलने लगा तेज आंधियां जलने लगी रेत के बवंडर उठने लगे एक तो वीरान गढ़ की वीरानी उस पर से यह जोरदार आंधियां वे तीनों एक दूसरे का हाथ पकड़कर एक दूसरे को सहारा देते हुए पहाड़ पर आके बढ़ने लगे आंखों में कुछ भी साफसाफ दिखाई नहीं दे
रहा था रेत उड़कर आंखों में आ रही थी उस किसान की झोपड़ी से उन लोगों की दूरी 200 मीटर से ज्यादा नहीं रह गई थी लेकिन उन पर वह 200 मीटर दो किलोमीटर से भी ज्यादा भारी पड़ रहे थे तभी बारिश भी होने लगी अब तक उनके हाथ कुछ भी नहीं लगा था बाबा इससे पहले की बारिश हमें भिगो दे हमें उस झोपड़ी तक पहुंच जाना चाहिए सिद्धार्थ ने कहा वे लोग जाकर उस झोपड़ी के मुंडेर के बाहर खड़े हो गए यह देखकर कि उसकी झोपड़ी के बाहर कोई आया है और झोपड़ी का मालिक बाहर
निकला बाबा आप लोग यहां कैसे आपको तो पता होगा कि वीरान गढ़ में रात में घूमना मौत को दावत देने जैसा वैसे आपके साथ यह दोनों बच्चे कौन हैं उस किसान ने बूढ़े बाबा से कहा वह किसान एक अधेड़ उम्र का शख्स था उसकी झोपड़ी में एक घाट बिची हुई थी उसके बोरी बिस्तर और खाने पीने के सामान के अलावा वहां और कुछ भी नहीं था भाई क्या तुम मुझे पहचानते हो मैंने तुम्हें पहचाना नहीं तुम्हारा नाम क्या है बूढ़े बाबा ने पूछा बाबा विरान गढ़ में ऐसा कौन होगा जो आपको नहीं पहचानता होगा दरअसल
मैं यहां कुछ साल पहले ही आया था मेरा नाम रतन सिंह है उस किसान ने बूढ़े बाबा को जवाब देते हुए कहा अंकल आप यहां गांव से इतनी दूर अकेले कैसे रह लेते हो क्या आपको डर नहीं लगता यहां तो दूर दूर तक पत्थर ही पत्थर है मिट का नामो निशान तक नहीं है फिर आप खेती करते कहां हो सिद्धार्थ ने पूछा बारिश में भीग क्यों रहे हैं पहले अंदर आ जाओ उस किसान ने कहा बेटा मेरा खेत यहां से साफ दिखाई देता है और जिसने अपनी जिंदगी खौफ के साय में बिताई हो उसे डर
और कितना सताएगा आप लोग यहां क्यों आए हो आपने अब तक जवाब नहीं दिया उस किसान ने पूछा वीरान गढ़ में किसी का भी यकीन कर लेना इतना आसान नहीं था लेकिन बाबा के इशारे को समझकर वे लोग अंदर चले गए बाबा हम लोग यहां पर अपनी कुछ पढ़ाई के काम से आए थे क्योंकि इस जगह पर खतरा बहुत है इसलिए बूढ़े बाबा हमारे साथ यहां हमें पहाड़ दिखाने लाए थे और फिर अचानक बारिश होने लगी सिद्धार्थ ने कहा देखिए अब काफी रात हो चुकी है बाबा आपको तो कुछ बताने की भी जरूरत नहीं है
लगता है यह दोनों बच्चे इस वीरान गढ़ से अनजान है मैं चाहता हूं कि आप तीनों मेरी छोटी सी झोपड़ी में ही आज रात गुजार ले उस किसान रतन सिंह ने उन लोगों से कहा सिद्धार्थ इनका कहना सही है रात के वक्त वीरान गढ़ में सिर्फ मौत ही बाहर निकलती है बूढ़े बाबा ने कहा बाबा आप क्या एक मिनट मेरे साथ आएंगे मुझे आपसे कुछ बात करनी है सिद्धार्थ ने कहा हां बेटा कहो क्या बात है बूढ़े बाबा ने सिद्धार्थ के साथ उस जगह से थोड़ी दूर जाते हुए पूछा बाबा क्या आपको यह किसान कुछ
अजीब नहीं लग रहा है य तो दूर दूर तक कोई खेत भी नहीं दिखाई दे रहा है फिर इसने अपनी झोपड़ी यहां क्यों बना रखी है यहां दूर दूर तक पानी का कोई जरिया भी नहीं है और गांव भी यहां से काफी दूर है आखिर यह यहां रह क्यों रहा होगा सिद्धार्थ ने बाबा से पूछा तुम्हारी बात तो सही है मैं खुद इस इलाके में इतने सालों से आता रहा हूं कई बार मैं इस पहाड़ पर भी चढ़ाऊ लेकिन पहले तो यहां पर ऐसी कोई झोपड़ी नहीं हुआ करती थी और इससे भी अजीब बात तो
यह है कि यह आदमी मुझे पहचानता है लेकिन मैंने इसे पहले कभी नहीं देखा था और यह नाम भी नहीं सुना हमें बहुत ज्यादा सावधान रहना होगा बूढ़े बाबा ने उस किसान पर शक जताते हुए कहा जब सिद्धार्थ और बूढ़े बाबा दोनों गौरी और उस किसान से दूर हटकर बात कर रहे थे उस दौरान वह किसान गौरी से बातें कर रहा था बेटी तुम दोनों को पहले तो यहां कभी नहीं देखा फिर बूढ़े बाबा के साथ तुम लोग इस वक्त यहां इस पहाड़ पर क्यों भटक रहे हो उस किसान ने गौरी से पूछ गौरी बस
जवाब देने ही वाली थी कि उसे बूढ़े बाबा की बताई गई बात याद आ गई कि उन्हें पहले अपने राज किसी को नहीं बताने हैं कुछ नहीं अंकल हम दोनों तो कॉलेज स्टूडेंट हैं बस यहां पर सैर सपाटे के लिए आए थे तो मन में ख्याल आया तो पूछ लिया गौरी ने उस आदमी को चालाकी से जवाब दिया लेकिन क्या आप लोगों को नहीं लगता कि घूमने फिरने के लिए यह अच्छी जगह नहीं है लोग कहते हैं कि यह वीरान गढ़ एक मनहूस जगह है यहां भूत प्रेत रहते हैं रतन सिंह ने कहा नहीं ऐसा
नहीं है कि हमें इस बारे में कुछ पता नहीं लेकिन हम लोग नए जमाने के लोग हैं हम इन सारी चीजों पर इतना ज्यादा मानते नहीं है गौरी ने जवाब में कहा लेकिन तुम्हें सब चीजों को मानना चाहिए अगर संसार में भगवान है तो शैतान भी है अच्छी शक्तियां है तो बुरी ताकतें भी हैं क्या तुम लोगों को डर नहीं लगता यह वीरान गढ़ का अंधेरा ना जाने कितने लोगों की जिंदगी निकल चुका है उस आदमी ने गौरी से कहा हां यह सब कुछ सही भी हो सकता है पर हमें डर नहीं लगता गौरी ने
अपने चेहरे पर एक झूठी मुस्कुराहट लाते हुए जवाब दिया गौरी को उस किसान का बर्ताव कुछ अजीब लग रहा था और उसकी आंखों का रंग बहुत अजीब था उसके चेहरे पर बहुत सारे गड्ढे थे उसकी आवाज बहुत हार्श थी उस झोपड़ी में हिरण के सिंह और कुछ जानवरों की स्किन लटकी हुई थी वहां बिजली नहीं थी और दो लालटेन लटके हुए थे गौरी मन ही मन सोच रही थी यह इंसान नहीं लगता है यह पक्का कोई भूत है सिद्धार्थ मुझे लगता है कि हमें जल्दी वापस उस झोपड़ी में चलना चाहिए गौरी वहां पर उस आदमी
के साथ अकेली है बूढ़े बाबा ने कहा जिस वक्त वे दोनों वहां पर पहुंचे उन्होंने देखा कि वह किसान गौरी को अपनी बातों में लगाकर उससे उनके वहां आने का रा उ गलवा चाह रहा था चलो बच्चों अब तुम लोग बूढ़े बाबा के साथ यहां पर आए हो और जब रात यहीं गुजारने वाले हो तो मैं तुम्हारे लिए कुछ खा का इंतजाम कर देता हूं उस किसान ने कहा लेकिन हमें तो भूख नहीं लगी है बस रात भर यहां रुक जाए फिर सुबह होते ही हम लोग निकल जाएंगे गौरी ने थोड़ा घबराते हुए कहा यह
भी ठीक है बेटा आप बड़े लोग हो और मेरे जैसे गरीब किसान के यहां पर भला कुछ क्यों खाने लगे उस किसान ने उदास होते हुए कहा बूढ़े बाबा उस जगह के जानकार थे उन्हें पता था कि कब कहां और कैसे किसके साथ बर्ताव करना है नहीं नहीं भाई ऐसी बात नहीं है हमें सचमुच ज्यादा भोग नहीं है बूढ़े बाबा ने कहा ज्यादा नहीं तो थोड़ा ही खा लेना रतन सिंह ने कहा चलो ठीक है जाओ भाई जो है पका कर ले आओ हम मिल बैठकर खा लेंगे बूढ़े बाबा ने उस किसान से कहा जब
वो किसान खाना पकाने के लिए अंदर गया तो बूढ़े बाबा ने गौरी और सिद्धार्थ को कहा कि वे थाली में परोसा हुआ पूरा खाना ना खाए थोड़ा खाना थाली में ही छोड़ दे जिससे उन पर काली शक्तियों का असर नहीं हो पाएगा किसान रतन सिंह ने उन तीनों को खाना परोसा और खुद भी खाने लगा उसे खाना खाते देख बाबा को उसके भूत होने पर यकीन होने लगा बाबा ने धीरे से से अपने कुर्ते से सरसों के दाने निकाले और उस झोपड़ी में इधर-उधर फेंक दिए रतन सिंह ने आगे कहा यह लीजिए आप लोगों का
बिस्तर और एक दूसरी खाट भी भीतर है आप उसे भी ले लीजिए मैं आज नीचे ही सो जाऊंगा आज की रात उन तीनों पर फिर से बहुत भारी पड़ने वाली थी हवेली में भूत का होना तो उन्हें पता था लेकिन अभी वह जिस झोपड़ी में थे वहां मौजूद वह शख्स कौन था उन्हें अभी भी नहीं पता था डर के मारे तीनों रात भर सो नहीं सके जब सुबह तक उनके साथ कोई भी हादसा पेश नहीं आया तो वह समझ गए कि वह किसान एक आम इंसान था वह तीनों ने चैन की सांस ली बाबा लगता
है हम लोग उस पहेली को अभी नहीं सुलझा पाएंगे चलिए हम गांव में वापस चलते गौरी ने कहा सुबह होते ही वे तीनों वहां से वापस लौटने ही वाले थे ये किसान रतन सिंह ने उनसे कहा देखिए बुरा ना माने तो मुझे लगता है कि आप लोग किसी चीज को ढूंढते हुए यहां आए थे और आपको शायद नहीं मिली है मैं हूं तो बहुत गरीब लेकिन हो सके तो मुझे बताइएगा अगर मैं आपके कोई काम आ सकूं अब उन लोगों को उस किसान पर यकीन होने लगा था वो दरअसल बात ऐसी है कि हमें मिट्टी
तोड़नी है और छत जलानी है इसके पीछे की वजह तो हम आपको नहीं बता सकते लेकिन बस ऐसा समझ लीजिए कि इससे विरान गढ़ का भला होगा आप हमारी मदद जरूर कर सकते हो सिद्धार्थ ने कहा इसमें भला मैं आपकी कैसे मदद कर सकता हूं मेरे पास तो मिट्टी के नाम पर बस एक घड़ा है और छत के नाम पर बस मेरी झोपड़ी आप चाहो तो इस घड़ी को तोड़ दो और इस झोपड़ी को आग लगा दो उस किसान ने कहा नहीं भाई हम आपकी चीजों के साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं बूढ़े बाबा ने
कहा देखिए पहली बार मेरे सामने किसी ने कहा है कि वो वीरान गढ़ का भला कर सकता है अगर ऐसा हो सकता है तो आप बेशक मेरी झोपड़ी जला सकते हैं किसान रतन सिंह ने कहा आपका दिल बहुत बड़ा है जब हमारी फैक्ट्री का काम दोबारा से शुरू होगा तो मैं आपको वहां पर अच्छी नौकरी दूंगा और आपकी झोपड़ी के बदले में आप हमारी फैक्ट्री के कॉटेज में हमेशा के लिए रह सकते हो आप आज ही हमारे साथ चलिए सिद्धार्थ ने किसान रतन सिंह से कहा अब तक तो वहां पर कोई भी अनहोनी नहीं हुई
थी लेकिन क्या आगे भी ऐसा ही होने वाला था क्या सब कुछ अच्छा ही अच्छा होने वाला था या नियती ने कुछ और भी लिख रखा था सिद्धार्थ अब हमें देर नहीं करनी चाहिए तुम जल्दी से झोपड़ी में आग लगा दो और उस घड़े को तोड़ दो बूढ़े बाबा ने कहा सिद्धार्थ ने तुरंत उस झोपड़ी में आग लगाकर उस मटके को भी तोड़ दिया पहली सुरजने बाकी थी उस तस्वीर को पूरा करने के लिए वहां से एक पत्थर के टुकड़े को भी उठाकर ले जाना था इससे पहले कि वह कुछ भी कर पाते अचानक से
आसमान काला होने लगा और जोर-जोर से एक अजीब से जानवर की आवाजें आने लगी सिद्धार्थ ने बिना देर किए वहां से एक काले पत्थर के टुकड़े को उठाया लेकिन जैसे ही सिद्धार्थ ने उस पत्थर को हाथ लगाया उस पत्थर के नीचे से एक छोटी सी खतरनाक छिपकली निकली जो कि उनके देखते ही देखते बड़ी होने लगी अचानक कुछ सेकंड्स में वह चिपकली मगरमच के बराबर हो गई और उन लोगों पर हमला करने लगी यहां यहां से जल्दी भागो यह वही शैतान है बूढ़े बाबा ने कहा वे लोग भागने लगे लेकिन वह किसान उस चिपकली के
हमले से नहीं बच पाया और उसने उस किसान को जिंदा ही चबा लिया सिद्धार्थ ने गौरी का हाथ पकड़ा और वो तीनों वहा से भागने लगे वे लोग वहां से हवेली की तरफ दौड़ने लगे लेकिन उस चिपकली ने उनका पीछा नहीं छोड़ा वे लोग घबराए हुए थे और पसीने से तर बतर होते जा रहे थे एक बार तो बूढ़े बाबा उस चिपकली का निवाला बनते बनते बचे आखिरकार वे लोग हवेली के अंदर पहुंच ही गए थे लेकिन उन सबके दिल की धड़कन बहुत ज्यादा बढ़ गई थी सिद्धार्थ तस्वीर में जहां पहाड़ टूटा है जल्दी से
उस पत्थर को लगाओ हाते हुए गौरी ने सिद्धार्थ से कहा सिद्धार्थ की उस तस्वीर के टूटे हुए हिस्से पर वह काला पत्थर का टुकड़ा लगाया उस तस्वीर में एक जबरदस्त रोशनी दिखाई दी रोशनी के शांत होते ही वे चमगादड़ जो पहले गायब हो गए थे दोबारा आकर तस्वीर में समाने लगे और लोगों के देखते ही देखते वो तस्वीर उड़कर वापस उसी जगह पर टंग गई पहली पूरी हो चुकी थी और अगले दरवाजा का ताला खुद बखत खुल चुका था बिना देर किए सिद्धार्थ ने उस दरवाजे को धक्का दिया और वे लोग उस कमरे के अंदर
गए अंदर का माहौल देखते ही वे तीनों हक्के पक्के रह गए तो आखिर उस दूसरे दरवाजे के पीछे ऐसा क्या था क्या सिद्धार्थ के मम्मी डैडी उसे दिखाई दिए थे क्या अंदर का नजारा बहुत खौफनाक था या अंदर कोई भूत था या कोई नया खतरा उन लोगों का इंतजार कर रहा था जानने के लिए सुनते रहिए उस कमरे को अंदर से देखते ही उन सबकी आंखें जगमगा गई इतनी पुरानी हवेली होने के बावजूद भी उस हवेली का वह कमरा किसी राज महल के दरबार खास की तरह लग रहा था वहां अंदर से बहुत कुछ आलीशान
था कमरे में चारों तरफ लगे हुए खंभों पर सोने की परत चढ़ी हुई थी शानदार नीले रंग का मखमली कालीन बिछा हुआ था जिस पर धूल का नामो निशान नहीं था छत पर वैसा ही बड़ा सा झूमर लटका हुआ था उसमें मोमबत्तियां जल रही थी कमरे के सारे लाइट्स जगमगा रहे थे वहां पर लगी तस्वीरों में कुछ तस्वीरें जानवरों की थी कुछ इंसानों की लेकिन जिस तरीके से वह तस्वीरें लगाई गई थी उनमें खास बात थी यह भयानक से दिख रहे बड़ी मूछों वाले आदमी की तस्वीर के बाजू में शेर और भालू की तस्वीरें लगी
हुई थी और उस कमरे में एक खूबसूरत औरत की भी तस्वीर थी उसके आसपास हिरन और मोर की तस्वीरें लगी हुई थी लेकिन इससे भी अजीब बात यह थी कि उस औरत की तस्वीर में वह शादी के लाल जोड़े में थी पुराने जमाने में थ्रीडी स्टाइल में बनी वह एक जीती चागती औरत लग रही थी उसने बहुत सारे खूबसूरत कहने पहने हुए थे और 16 श्रृंगार किया हुआ था उसके माथे पर सुर्ख लाल बिंदी और मांग में सिंदूर लगा हुआ था गले में बड़ा सा मंगलसूत्र और सोने का हार था हाथों में मेहंदी लगी हुई
थी पैरों में घुंगरू वाली पायल अलता और घुटनों के नीचे तक लंबे काले बालों में खूबसूरत गजरा पहनी हुई वो औरत किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी उसकी तस्वीर पर लाल फूलों की एक बड़ी और लंबी सी माला लटक रही थी उसके हाथों में एक मिट्टी का बर्तन था जिसमें लोबान जलती हुई दिखाई दे रही थी और सबसे अजीब बात यह थी कि उस कमरे में भी लोबान की ही खुशबू आ रही थी सिद्धार्थ और बूढ़े बाबा का तो ध्यान इस तरफ नहीं गया लेकिन उस तस्वीर के इस अजीब पहलू पर गौरी ने
जरूर ध्यान दिया था वह बस टकटकी लगाकर उस तस्वीर को ही घूरती जा रही थी ऐसा लग रहा था जैसे वह उस तस्वीर में ही समा जाएगी वह कमरा भी हवेली के बाकी कमरों की तरह बहुत बड़ा था जब वे तीनों आगे बढ़ने लगे तो उनके कदमों की आहट उस कमरे में गूंज ने लगी इस बात पर उन तीनों ने गौर किया और वे लोग एक साथ उसी जगह पर खड़े हो गए जहां वे लोग इस वक्त थे लेकिन उनके रुक जाने के बाद भी कदमों की आहट उस कमरे में बंद नहीं हुई थी तो
क्या वहां पर उन तीनों के अलावा कोई और भी उनके साथ चल रहा था क्या हवेली का कोई भूत वहां पर भी मौजूद था शक की कोई गुंजाइश नहीं थी वह पूरी की पूरी हवेली ही बताती ना जाने कितनी भटकती आत्माएं वहां पर कैद थी अचानक हवेली में एक मदहोश कर देने वाला रोमांटिक म्यूजिक बजने लगा उसे सुनकर सिद्धार्थ और गौरी अपना होश खोने लगे सिद्धार्थ टकटकी लगाकर सिर्फ गौरी को ही देखने लगा उस बैकग्राउंड म्यूजिक की वजह से सिद्धार्थ को गौरी और भी खूबसूरत लग रही थी सिद्धार्थ को लग रहा था कि उसने आज
तक गौरी की जितनी खूबसूरत लड़की कभी देखी ही नहीं थी उसका दिल जोर जोर से धड़कने लगा और उसके कदम खुद [संगीत] बखुदा के मन में इच्छा इतनी प्रबल कैसी हो गई इससे पहले कि उन्हें कुछ दिखाई देता गौरी उस तस्वीर की तरफ आगे बढ़ने लगी बाबा लगता है गौरी को उस तस्वीर में कुछ ज्यादा ही इंटरेस्ट आने लगा है सिद्धार्थ ने बूढ़े बाबा से कहा सिद्धार्थ उसे जल्दी रोको उसे उस तस्वीर की तरफ नहीं जाना चाहिए मैंने तुम दोनों से कहा था कि जब तक मैं ना कहूं तब तक तुम्हें किसी भी अनजान चीज
को छूने की कोशिश नहीं करनी चाहिए यह खतरनाक हो सकता है बूढ़े बाबा ने सि को कहा सिद्धार्थ दौड़कर आगे बढ़ा और उसने गौरी को रोकने की कोशिश की लेकिन उस तस्वीर ने गौरी को ऑलरेडी अपनी तरफ खींच लिया था और सिद्धार्थ ने बस अपने दो ही कदम आगे बढ़ाए थे कि वह अचानक हवा में उड़ गया और बहुत जोर से अपने पीछे की दीवार पर टकरा गया ऐसा लगा जैसे उसे किसी ने उठाकर उस दीवार पर द मारा हो सिद्धार्थ के सिर से खून आने लगा और उसकी कलाई भी मुड़ गई थी दर्द से
तड़पने लगा उसके बाद वहां किसी औरत की जोर-जोर से हंसने की आवाजें आने लगी लेकिन उस आवाज से जहां सिद्धार्थ और बूढ़े बाबा की धड़कने पढ़ गई थी वहीं गौरी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था बूढ़े बाबा दौड़कर सिद्धार्थ के पास गए लेकिन गौरी को देखकर लग रहा था जैसे वह किसी मैग्नेटिक इफेक्ट की वजह से खिंची जा रही थी और जैसे ही गौरी ने उस तस्वीर के गले में लटके लाल फूलों की माला को हाथ लगाया ऐसा लगा जैसे गौरी को कोई इलेक्ट्रिक शॉक लग गया हो उससे पहले कि कोई कुछ कर पाता
उस झटके की वजह से कपकप कर गौरी वहीं नीचे गिरकर बेहोश हो गई बूढ़े बाबा की मदद से जैसे तैसे सिद्धार्थ उठा और गौरी के पास पहुंचा बाबा गौरी को क्या हो गया और उस तस्वीर की माला छूते ही ऐसा क्यों हुआ सिद्धार्थ इन सब बातों को करने का अभी कोई फायदा नहीं है हमें जल्दी से जल्दी इस अभिमंत्रित पानी का गौरी पर छिड़काव करना होगा नहीं तो उसकी जान भी जा सकती है बाबा ने कहा लेकिन बाबा इतना कहकर सिद्धार्थ रुक गया सिद्धार्थ लेकिन वे किन कुछ नहीं चलो जल्दी इस पानी का छिड़काव करते
हैं और गौरी को लेकर इस जगह से निकलते हैं बूढ़े बाबा ने कहा बाबा की गौरी के ऊपर पानी का छिड़काव करते ही एक झटके से गौरी उठकर बैठ गई वो उस झटके की वजह से बहुत कमजोर हो गई थी बाबा यह क्या आपने मेरे ऊपर पानी क्यों डाला मैं जमीन पर क्या कर रही हूं और मुझे इतना चक्कर क्यों आ रहा है गौरी ने हैरान होते हुए पूछा कुछ नहीं गौरी चलो हमें गांव में वापस लौटना है सिद्धार्थ ने कहा लेकिन सिद्धार्थ हम ऐसे नहीं जा सकते हमें अंकल और आंटी के बारे में पता
लगाना है हमें उन्हें जल्द से जल्द ढूंढ निकालना वे लोग ना जाने किस हाल में होंगे गौरी ने कहा सिद्धार्थ गौरी बिल्कुल सही कह रही है हम यहां से खाली हाथ नहीं जा सकते हैं हमें तुम्हारे माता-पिता के बारे में कुछ तो पता लगाना ही होगा हम सब यहां अपनी जान की बाजी लगाकर इसीलिए आए हैं बूढ़े बाबा ने कहा आप दोनों बिल्कुल सही कह रहे हो लेकिन पिछले दो दिनों में गौरी के साथ दो बार हाद से हो चुके मैं अपने स्वार्थ के लिए गौरी की जान ौ पर नहीं लगा सकता सिद्धार्थ ने कहा
जब वह तीनों लोग वहां से जाने या रुकने के बारे में बात कर रहे थे उसी बीच वहां पर एक उल्लू उड़कर अंदर आ गया रोशनी की वजह से उल्लू को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था और वह इधर उधर टकराने लगा वे तीनों लोग उस उल्लू की हरकत को गौर से देखने लगे और तभी वो उल्लू आवाज करता हुआ जाकर एक टेबल पर बैठ गया और वहां बैठते ही वो थोड़ा तड़पने लगा और खुद बखुदा मर गया यह देखकर सिद्धार्थ दौड़कर टेबल के पास पहुंचा तो वो उल्लू उन सबके सामने एक ही पल में
राख हो चुका था लेकिन सिद्धार्थ को उसी टेबल पर उसके डैडी की फेवरेट रोलेक्स वच दिखाई दी बाबा यह देखिए यह मेरे डैडी की ही घड़ी है इसका मतलब वे लोग यहीं कहीं पास में है सिद्धार्थ ने कहा उन लोगों के पास सिद्धार्थ के पेरेंट्स के गायब होने के बाद यह पहली बार था जब उन लोगों को कोई क्लू मिला था सूखे कुएं की राख में जब हो चांद का उजरा फूल को करके धूल मिलेगा आगे गलियारा गौरी ने टेबल पर लिखी बात को पढ़ा सिद्धार्थ देखो इस टेबल पर हमारे लिए अगली पहेली लिखी है
मैं इस पहेली को समझ चुकी हूं तुम उसे कागज पर लिख लो या इमेज क्लिक कर लो हो सकता है यह हमें अंकल आंटी तक पहुंचा दे गौरी ने कहा सिद्धार्थ गौरी की इंटेलिजेंस का भी कायल होती जा रहा था वह तो उसे बचपन से ही पसंद करता था लेकिन उसके मम्मी डैडी के ढूंढने के लिए जिस तरह से गौरी अपनी जान की बाजी लगा रही थी उससे वह सचमुच उसका दीवाना होते जा रहा था इन हाल तों में सिद्धार्थ अपने प्यार का इजहार करता भी तो कैसे जैसे सथ की हवेली में आने की खबर
को सुनकर किसी भी बात की परवाह किए बिना गौरी वहां दौड़ी चली आई थी उससे सिद्धार्थ को समझ नहीं आ रहा था क्या आखिर गौरी के दिल में उसके लिए क्या फीलिंग थी सिद्धार्थ ने इस बारे में गौरी से सवाल भी किया था लेकिन गौरी ने बारबार उसके वहां आने और सिद्धार्थ की जान बचाने को लेकर एक ही वजह बताई थी कि वो एक आर्कियोलॉजिस्ट है और वो बस अपना फर्ज निभाने की कोशिश कर रही थी हमें अब और ज्यादा देर यहां नहीं रुकना चाहिए हमने बिना सोचे समझे आज ही यहां पर आने की बहुत
बड़ी गलती कर दी है अच्छा यही होगा कि हम जल्दी से यहां से गांव में वापस चले जाए बूढ़े बाबा ने कहा सिद्धार्थ बाबा सही कह रहे हैं हमें यहां से जल्दी निकलना चाहिए मेरी तबीयत भी ठीक नहीं लग रही है मेरे पैर पर लगी चोट से और ज्यादा दर्द हो रहा है गौरी ने कहा सिद्धार्थ ने भी इस बात को समझा और वे तीनों हवेली से बाहर निकले हवेली के बाहर एक बड़ा अजीब सा माहौल था चारों तरफ अजीब सा धुआ फैला हुआ था लेकिन उन लोगों को इन छोटी मोटी परेशानियों की कोई परवाह
नहीं थी उन्हें तो जल्द से जल्द बस वहां से बाहर निकलना था वे तीनों जब सर्किट हाउस पहुंचे तो उन्होंने देखा कि मिस्टर बजाज को होश आ चुका है हालांकि वो अभी भी बिस्तर पर ही लेटे हुए थे लेकिन अब वो पहले से बेहतर थे गौरी तुम यहां कब आई तुम्हें यहां किसने बुलाया और अगर तुम यहां पहले ही आ गई थी तो अभी तुम कहां से आ रही हो मिस्टर बजाज ने सवालों की बारिश करते हुए गौरी से पूछा डैडी एक्चुअली मैंने आपके मोबाइल पर कॉल किया था मुझे जब से आप वीरान गढ़ आए
थे तब से आपकी चिंता हो रही थी आप तो जानते ही हैं कि मैं एक आर्कियोलॉजिस्ट स्टूडेंट हूं मैंने इस जगह के बारे में थोड़ा बहुत सुना और पढ़ा भी था लेकिन उन किताबों में सिर्फ इतना ही लिखा था कि यह एक रहस्यमय जगह है एक ऐसी जगह जिसके बारे में पता लगाने की हिम्मत गवर्नमेंट एजेंसीज में तय नहीं है गौरी ने कहा लेकिन गौरी मेरे पास तो तुम्हारा फोन आया ही नहीं मिस्टर बजाज ने कहा डैडी मैंने जब फोन किया था तब तो उस वक्त आप पहले ही उस एक्सीडेंट का शिकार हो चुके थे
और मेरे बारबार करने पर सिद्धार्थ ने फोन को पिक किया था गौरी ने अपनी डैडी को बताया सिद्धार्थ बेटा मैं जानता हूं कि आपके पेरेंट्स के हमारे परिवार पर बहुत सारे एहसान है लेकिन फिर भी गौरी मेरी इकलौती बेटी है तुम्हे गौरी को यहां नहीं बुलाना चाहिए था मिस्टर बजाज ने कहा डैडी सिद्धार्थ ने मुझे यहां आने के लिए बिल्कुल नहीं कहा था उसने तो मुझे आपकी हालत के बारे में बताया ही नहीं था उसने तो मुझे यह भी कहा था कि उस वक्त उस पेड़ के गिरने की वजह से वीरान गढ़ का रास्ता बंद
हो चुका था मैं आपको इस कंडीशन में अकेला नहीं छोड़ सकती थी इसलिए मैं चली आई गौरी ने कहा गौरी बेटा यह जगह श्रापित है यहां एक बार जो आ गया वह दोबारा जिंदा वापस नहीं लौट सकता यहां सचमुच इतना खतरा होगा मैं भी इससे अनजान था अब हम तीनों एक बहुत बड़ी मुसीबत में फस चुके हैं भगवान जाने आगे क्या होगा बजाज ने गौरी से कहा डडी मुझे यहां आकर पता चला कि यहां की भूता हवेली में सिद्धार्थ के पेरेंट्स कहीं लापता हो गए हैं और सिद्धार्थ उन्हें ढूंढने गया है मैं सिद्धार्थ को वहां
अकेले कैसे छोड़ सकती थी आखिर वह मेरे बचपन का दोस्त है तुम यहां आ गई हो य एक सच्चाई है लेकिन मैं तुम्हें उस हवेली में दोबारा जाने की इजाजत नहीं दे सकता तुम यही मेरे पास रहोगी हम कोशिश करेंगे कि हमें बाहर से कोई मदद मिल जाए मिस्टर बजाज ने कहा डैडी जितनी जल्दी आप हकीकत को समझ ले उतना ही अच्छा होगा कि इस वीरान गढ़ में बाहर से कोई हमारी मदद करने नहीं आएगा इस जगह से पहले ही बहुत से लोग अपनी जान गवा चुके सिद्धार्थ ने भी अपने पेरेंट्स के खोने की खबर
इस एरिया के पुलिस सुपरिंटेंडेंट को पहले ही दे दी थी लेकिन अब तक यहां कोई नहीं आया है यहां से निकलने का रास्ता उस हवेली से होकर ही गुजरता है हम वैसे भी यहां पर पूरी जिंदगी नहीं गुजार सकते मुझे सिद्धार्थ के साथ यहां से बाहर निकलने का रास्ता खोजना ही होगा गौरी ने कहा लेकिन इतना कहकर मिस्टर बजाज रुक गए क्या मिस्टर बजाज वीरान गढ़ के बारे में कुछ खुलासा करना चाहते थे क्या उन्हें उस रात कुछ और पता चला था क्या वह गौरी को सिद्धार्थ का साथ देने की परमिशन दे देंगे क्या बाहर
से कोई उन लोगों की मदद करने के लिए वहां आएगा जानने के लिए सुनिए आगे की [संगीत] कहानी जब गौरी ने कहा कि वह सिद्धार्थ के साथ वीरान गढ़ से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ कर ही रहेगी तो यह सुनकर मिस्टर बजाज का दिल दहल गया लेकिन इतना कहकर मिस्टर बजाज रुक गए पहले ही मिस्टर बजाज उस मनहूस जगह पर आना नहीं चाहते थे लेकिन व अपने फर्ज के हा तो मजबूर थे बात दरअसल यह थी कि जब वहां फैक्ट्री इस्टैब्लिशमेंट की बात हुई थी तब भी मिस्टर बजाज ने कोशिश की थी कि वह अपने
बॉस को उस जगह के खतरे के बारे में बता सके लेकिन उनके कहने से भी कुछ भी नहीं हुआ इसके बाद जब वह उस जगह पर आने से सिद्धार्थ को रोकने की कोशिश कर रहे थे तब मौत से उनका खुद का सामना हुआ गौरी मैंने मौत को अपनी आंखों से देखा है उस रात में पूरे होश और हवाज में कार ड्राइव कर रहा था मौसम भी बिल्कुल बढ़िया था मैं किसी भी कीम पर सिद्धार्थ को रोकना चाहता था लेकिन इससे पहले कि मैं गांव की बॉर्डर क्रॉस कर पाता अचानक से वहां बड़ा सा पेड़ ठीक
मेरी कार के आगे गिर गया और उसके बाद मुझे व खौफनाक चेहरा दिखाई दिया जिसकी दहशत अभी तक मेरे जहन में ताजा है मैं तुम्हें मौत के मुंह में नहीं जाने दे सकता मैं तुम्हें सिद्धार्थ के साथ वहां नहीं जाने दूंगा मिस्टर बजाज ने कहा डडी अभी आप बहुत ज्यादा गुस्से में हो आपकी हालत भी ठीक नहीं है मुझे भी आराम की सख्त जरूरत है हम इसके बारे में बाद में बात करते हैं गौरी ने अपनी डैडी से कहा तुम्हारे पैर पर चोट है वह भी मुझसे छुपी नहीं है गौरी अगर तुम्हें कुछ हो गया
तो मैं तुम्हारी मां को क्या जवाब दूंगा तुम्हें उस हवेली से दूर रहना होगा और सिद्धार्थ से भी मिस्टर बजाज ने आगे कहा अपने डैडी की यह बात सुनकर गौरी को अचानक बहुत ज्यादा गुस्सा आ गया डैडी मैंने आपसे कहा ना कि मुझे आराम की जरू जरूरत है मैं अभी सोने जा रही हूं गुस्से में यह कहते हुए गौरी उस कमरे से अपने कमरे में चली गई कमरे में जाते ही उसने दरवाजे को धड़ाम से पटक कर बंद कर दिया गांव का वह सर्किट हाउस अंग्रेजों के जमाने का था हालांकि वह पुराना हो चुका था
लेकिन उसका रख रखाव बढ़िया तरीके से किया जा रहा था ठहरने के लिहाज से वहां फैसिलिटी अवेलेबल थी वहां लगभग 10 कमरे किचन टॉयलेट बाथरूम सभी चीजें थी लेकिन कभी क बार वहां पर ठहरने वालों को कुछ परेशानियां हो जाया करती थी उस जगह की देखभाल का जिम्मा दयाल नाम के एक बूढ़े आदमी का था गांव के दूसरे अजीब लोगों की तरह वह भी बहुत अजीब था दयाल लोगों से सिर्फ उतनी ही बातें किया करता था जितनी की जरूरत होती उसे उस गांव के बारे में कुछ भी जान पाना बिल्कुल नामुमकिन था वह एक एवरेज
हाइट का दुबला पतला शख्स था और कई सालों से उस गांव में रहते आया था सिद्धार्थ और बाकी लोग लोगों को भी उसके बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था लेकिन सबसे अजीब बात तो यह थी कि आखिर यह बूढ़ा बाबा जो हर वक्त सिद्धार्थ और बाकी लोगों की मदद करने के लिए आगे आया जा रहा था वह कौन था गांव में उसका घर कहां था और आखिर क्यों वह अपनी जान को भी खतरे में डालने को हर वक्त तैयार रहता था उस वक्त गौरी की इस हरकत से मिस्टर बजाज के होश उड़ गए थे
उन्होंने गौरी को इस तरह से बदतमीजी करते और इतना गुस्सा कर कभी नहीं देखा था उन्होंने सोचा कि हो सकता है सिद्धार्थ के साथ उस हवेली के चक्कर में इधर उधर घूमने के कारण गौरी चिचड़ी हो गई है रात हो चुकी थी और ल ने भी सभी के लिए खाने का इंतजाम कर दिया था जिस दौरान गौरी और मिस्टर बजाज के बीच वह घटना हुई उस वक्त सिद्धार्थ और बूढ़े बाबा दोनों हवेली से मिली आगे की पहेली को सुलझाने के बारे में सोच रहे थे सूखे कुए की राख में जब वो चांद का उरा फूल
को करके धूल मिलेगा आगे का गलियारा बाबा यह पहेली तो मुझे आसान लगती है मेरा मानना है कि हम इसे जल्द ही सुलझा लेंगे और अगर ऐसा हुआ तो हवेली का तीसरा दरवाजा भी खुल जाएगा सिद्धार्थ ने बाबा से कहा बेटा इस जगह पर रहते हुए तुम्हें एक बात समझ लेनी चाहिए यहां जैसा दिखता है वैसा हो नहीं हो सकता है आसान लगने वाली यह पहेली बहुत ज्यादा मुश्किल हो बाबा ने सिद्धार्थ से कहा बाबा सूखे हुए तो यहां पर बहुत सारे कुए हमें बस उस कुए को खोजना है जिसमें सूखे होने के बावजूद भी
हमें फूल दिखाई दे चांद की रोशनी का मतलब पूर्णमासी के चांद से हो सकता है तो फिर हमें इस काम को अगले तीन दिनों में आने वाली पूर्ण मासी को ही पूरा करना होगा उससे पहले हमें उस कुए का पता कर करना होगा सिद्धार्थ ने कहा तुम ठीक कहते हो चलो अब खाने का वक्त हो गया है हम कुछ खा लेते हैं फिर मुझे गांव में और भी काम है बाबा ने सिद्धार्थ से कहा बाबा आपने कभी अपने परिवार और गांव में अपने घर के बारे में कुछ भी नहीं बताया सिद्धार्थ ने पूछा सिद्धार्थ मैं
तुम्हें जो कुछ बता सकता हूं सब कुछ वक्त आने पर बता दूंगा तुम्हारे और बाकी लोगों के लिए अच्छा यही है कि मैं तुम्हें जैसा कहूं इस गांव में जिंदा रहने के लिए तुम लोग वैसा ही करो पहले भी मेरी बात ना मानकर तुम्हारे माता पिता उस हवेली में गए थे और नतीजा क्या हुआ तुम्हारे मैनेजर को भी मैंने यहां के खतरे से आगाह किया था नतीजा तुम्हारे सामने है आगे तुम्हारी मर्जी मिस्टर बजाज पहले से ही डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए सबका इंतजार कर रहे थे सिद्धार्थ और बूढ़े बाबा भी खाने के लिए वहां
पर आ गए दयाल जाकर गौरी को खाना खाने के लिए बुला लाओ मिस्टर बजाज ने कहा दयाल ने जाकर गौरी के कमरे में दरवाजा खटखटाया लेकिन गौरी ने दरवाजा नहीं खोला दयाल ने यह बात आकर उन लोगों से कही सिद्धार्थ मुझे सच सच बताओ हवेली में आखिर हुआ क्या था गौरी के पैर पर चोट कैसे लगी और तुम कैसे जख्मी हुए वहां से आने के बाद गौरी का बर्ताव बहुत बदला बदला सा लग रहा है वो बहुत ज्यादा गुस्से में लग रही थी क्या तुम लोग मुझसे कुछ छुपा रहे हो मिस्टर बजाज ने सिद्धार्थ से
कहा लेकिन गौरी तो बिल्कुल ठीक थी हां हवेली में उसके पैर पर एक तस्वीर गिर गई थी जिससे उसे चोट आई थी इससे ज्यादा वहां पर और कुछ नहीं हुआ था और मैं और बूढ़े बाबा हर वक्त उसके साथ मौजूद थे हमें तो गौरी के बर्ताव में कुछ भी अजीब नहीं लगा लेकिन वह अभी खाना खाने क्यों नहीं आ रही चलिए चलकर देखते हैं सिद्धार्थ ने कहा गौरी दरवाजा खोलो तुम खाना खाने क्यों नहीं आ रही हो चलो बेटा खाना लग चुका है सब लोग तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं अगर तुम डैडी से गुस्सा हो
तो उस गुस्से को खाने पर तो मत निकालो चलो जिद छोड़ो और जल्दी बाहर आ जाओ मिस्टर बजाज ने कहा कमरे के अंदर से कोई भी आवाज सुनाई नहीं दी गौरी दरवाजा खोलो सभी को बहुत भूख लगी है और तुम्हें भी तो लगी होगी सिद्धार्थ ने कहा सिद्धार्थ के कहने के बावजूद भी अंदर से कोई जवाब नहीं आ रहा था इसी बीच अंदर से अचानक जोर जोर से फूट फूट कर रोने की आवाज आने लगी मुझे लगता है गौरी मुझसे नाराज है लेकिन चाहे जो हो मैं उसे अपनी जान का खतरा मोल नहीं लेने दूंगा
मिस्टर बजाज ने कहा अंकल क्या यह सारी बातें हम बाद में कर सकते हैं पहले हमें गौरी से पूछना है कि आखिर वो रो क्यों रही है और रात बहुत हो रही है हमें खाना खाकर सोना है सिद्धार्थ ने कहा रात के लगभग 10 बजने को थी वीरान गढ़ जैसे गांव में जहां शाम होते ही झिंगुर की आवाज के अलावा कोई दूसरी आवाज तक सुनाई नहीं देती थी वहां पर यह शहरी लोग अभी तक सोए नहीं थे अंकल सॉरी बट हमें दरवाजा खोलकर अंदर देखना चाहिए कि गौरी आखिर बाहर क्यों नहीं आ रही है सिद्धार्थ
ने कहा ठीक है चलो देखते हैं तुम धक्का देकर दरवाजा खोल सकते हो मैं भी देखना चाहता हूं कि आखिर गौरी रो क्यों रही है मिस्टर बजाज ने कहा सिद्धार्थ ने गौरी के कमरे के दरवाजे को जोर से धक्का दिया दरवाजे के खुलते ही अंदर का नजारा देखकर सभी लोग हक्के पक्के रह गए गौरी लाल साड़ी पहने हु खुले बाल के साथ घुटने पर अपना सर टिका करर पलंग पर बैठी हुई थी और रो रही थी कमरे में कहीं भी धुआ नहीं था लेकिन फिर भी वही हवेली वाली लुबान की मां खा रही थी गौरी
को देखकर सिद्धार्थ को तुरंत हवेली की लाल साड़ी पहनी हुई उस तस्वीर की याद आ गई गौरी तुमने यह क्या हाल बना रखा है कैसे कपड़े पहन रखे हैं तुम रो क्यों रही हो और हम सब कब से तुम्हें आवाज लगा रहे हैं चलो खाना खाने चलो गौरी की डैडी ने उसे कहा चले जाओ यहां से चले जाओ गौरी ने गुर्रा हुए कहा गौरी तुम ये किस तरह से बात कर रही हो सिद्धार्थ गौरी के पास गया और उसने गौरी का हाथ पकड़कर उसे उठाने की कोशिश की गुस्से से गौरी ने ऊपर देखा उसकी आंखें
बिल्कुल लाल थी माथे पर पर एक बड़ी लाल बिंदी लगी हुई थी इससे पहले कि सिद्धार्थ संभल पाता गौरी ने उसे जोर से सीने पर एक लात मारी और सिद्धार सामने के दीवार से जा टकराया धराम से नीचे गिरते ही दर्द से वो कराने लगा मिस्टर बजाज और बाबा दोनों दौड़कर सिद्धार्थ के पास गए और उसे सहारा दिया सिद्धार्थ तुम ठीक तो हो ना बेटा तुम्हे ज्यादा चोट तो नहीं आई मिस्टर बजाज ने कहा अंकल आप मेरी चिंता छोड़िए बाबा आप जल्दी कुछ कीजिए मुझे लगता है गौरी पर हवेली की उस तस्वीर वाली औरत का
भूत हावी हो गया है सिद्धार्थ ने कहा बाबा ने अपने पास रखा अभिमंत्रित जल गौरी पर छिड़क दिया जैसे ही गौरी के ऊपर वह पानी की बूंदे पड़ी गौरी गुस्से से चीखने लगी और पलंग पर खड़ी हो गए गौरी की इस चीख को सुनकर उन सभी के दिल की धड़कने बढ़ गई ऐसा लग रहा था जैसे गौरी उन सबको जान से मार डालना चाहती हो फिर अचानक गौरी राम से पल नीचे गिर गई कौन सी तस्वीर वाली औरत सिद्धार्थ सिद्धार्थ कौन सा भूत क्या तुम जानते हो गौरी को क्या हुआ है मिस्टर बजाज ने पूछा
मैं आपको सब कुछ बताता हूं मुझे लगता है अभी कुछ देर के लिए हमें गौरी को आराम करने देना चाहिए सिद्धार्थ ने कहा हां ठीक है हम लोग भी कुछ देर यही बैठ जाते हैं खाना हम थोड़ी देर बाद खा लेंगे पहले हमें इस बात को शोर करना पड़ेगा कि गौरी ठीक हो जाए मिस्टर बजाज ने कहा जी अंकल आप ठीक कह रहे हैं सिद्धार्थ ने कहा सिद्धार्थ यह तुमने ठीक नहीं किया तुम्हें गौरी को अपने साथ इन सब में नहीं घसीटना चाहिए था मैं जानता हूं मुझे तुमसे इस तरह बात नहीं करना चाहिए तुम
मेरे बॉस के इकलौते बेटे हो लेकिन गौरी भी तो मेरी इकलौती बेटी है और आज तुम्हारी वजह से वो इतनी बड़ी मुसीबत में पड़ गई है मिस्टर बजाज ने कहा अंकल मैं आपके गुस्से को समझ सकता हूं लेकिन इन सब में मेरी कोई गलती नहीं है मुझे तो यह तक नहीं पता था कि गौरी यहां पर आ चुकी थी उस दिन अचानक पहली बार गौरी से मेरी मुलाकात कई सालों बाद हवेली में ही हुई थी उस दिन हवेली में मेरे ऊपर अचानक से एक पेड़ गिरने लगा था और न पे पर गौरी ने आकर मुझे
खींच लिया इतने साल बाद गौरी को देखकर तो मैं यह भी नहीं पहचान पाया था कि वो मेरी बचपन की दोस्त गौरी ही थी सिद्धार्थ ने अपनी सफाई देते हुए कहा माना कि उस दिन तुम्हें कुछ नहीं पता था लेकिन उसके बाद तुमने अपने पेरेंट्स को ढूंढने के लिए गौरी को अपने साथ रख लिया था और यह सब कुछ उसी का नतीजा है मिस्टर बजज ने कहा अंकल आप फिर से मुझे गलत समझ रहे हैं मैंने गौरी को अपने साथ चलने के लिए नहीं कहा था बल्कि उसी ने कहा था कि वह एक आर्कोलॉजी स्टूडेंट
है और राजस्थान की पुरानी हवेलियों और महलों पर रिसर्च कर रही है वह खुद ही चाहती थी कि वह इस भूता हवेली के बारे में तमाम राज दुनिया के सामने ला सके सिद्धार्थ ने कहा इन सब बातों का वक्त अभी नहीं है सिद्धार्थ तुम भी जानते हो कि बस तीन दिन बाद पूर्णमासी है पूर्णमासी की रात इन बुढी आत्माओं की ताकत कई गुना बढ़ जा है हमें हवेली वाले पहेली को तो सुलझाना ही है साथ ही उसके पहले गौरी का ठीक होना भी जरूरी है आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि उस हवेली के भूतों
ने किसी को जकड़ा हो और यूं ही छोड़ दिया हो वहां के भूत हमेशा कोई ना कोई पहेली जरूर छोड़ते हैं और मुझे लगता है गौरी को बचाने के लिए भी हमें गौरी पर हावी हुई उस आत्मा की दी हुई पहेली को सुलझाना पड़ेगा अगर ऐसा नहीं हुआ तो पूर्णमासी की रात गौरी की जिंदगी की आखरी रात होगी बूढ़े बाबा ने कहा ज गौरी पर सचमुच उस तस्वीर वाली भूतनी का साया क्या पूर्णमासी की रात सचमुच गौरी के जिंदगी की आखिरी रात होगी क्या सिद्धार्थ को वह दूसरी पहेली वही कहीं मिल जाएगी क्या सिद्धार्थ एक
के बाद एक दो पहेलियों को सुलझाने में कामयाब हो पाएगा कहानी में आगे क्या होने वाला है सुनिए आगे की कहानी अंकल आई थिंक बेहतर यही होगा कि हम लोग गौरी को इसी कमरे में आराम करने दें सिद्धार्थ ने कहा मुझसे गौरी की हालत देखी नहीं जा रही है लेकिन इस जगह पर कुछ किया भी नहीं जा सकता है मिस्टर बजाज ने कहा वे तीनों खाना खाने के लिए डाइनिंग टेबल पर पहुंचे वहां भी हालात कुछ अच्छे नहीं थे जैसे ही उन लोगों ने खाना खाने की कोशिश की तो देखा कि खाना खराब हो चुका
था अभी-अभी बना खाना इतनी जल्दी आखिर खराब कैसे हो सकता था बाबा क्या इस खाने के खराब होने के पीछे भी गौरी के शरीर में मौजूद वह बुरी आत्मा ही कारण हो सकती है सिद्धार्थ ने पूछा तुमने बिल्कुल सही कहा लेकिन यह बिल्कुल भी अच्छा संकेत नहीं है इसका मतलब यह कि गौरी ही नहीं बल्कि हम सबकी भी जान मुसीबत में है ना जाने वह आत्मा गौरी से कब क्या करवा ले हम सब को सावधान रहना होगा बूढ़े बाबा ने कहा इतना कहकर बूढ़े बाबा सर्किट हाउस से बाहर निकल गए सिद्धार्थ और मिस्टर बजाज कुछ
भी समझ नहीं पा रहे थे अंकल मुझे लगता है रात बहुत हो चुकी है और हमें सो जाना चाहिए गौरी की फिक्र मुझे भी बहुत है लेकिन हमारी चिंता करने से कुछ भी नहीं होगा सिद्धार्थ ने कहा बेटा कहना बहुत आसान है जब तुम किसी बच्चे के बा बनोगे तब तुम्हें पता चलेगा कि अगर बच्चा तकलीफ में हो तो कोई बाप कैसे सो सकता है मेरी बेटी की जान खतरे में है वैसे तुम अपने कमरे में जाकर सो सकते हो मिस्टर बजाज ने कहा सिद्धार्थ और मिस्टर बजाज अपने अपने कमरे में चले गए रात का
अंधेरा और भी गना हो चुका था सोने की कोशिश तो वोह दोनों कर ही रहे थे लेकिन बेचैनी की वजह से दोनों को ही नींद नहीं आ रही थी सिद्धार्थ को पहले सिर पर चोट लगी थी और जिस तरह से गौरी ने उस पर हमला किया था उसकी वजह से उसकी पीठ और हाथ में बहुत दर्द था फिर भी इससे बढ़कर उसे भी गौरी की बहुत चिंता हो रही थी सिद्धार्थ ने अभी-अभी अपने मम्मी डैडी को उस हवेली में खो दिया था वह गौरी के साथ ऐसी कोई भी अनहोनी नहीं होने देना चाहता था बस
यही ख्याल उसे सोने नहीं दे रहा था बाहर तेज मा चलने की आवाज आने लगी वक्त रात के 12:1 मिट का था अचानक गौरी के कमरे से दरवाजा खोलने की आवाज सुनाई दी सिद्धार्थ बिना देर की गौरी के कमरे की तरफ गया उसने देखा कि गौरी के कमरे का दरवाजा सचमुच खुल गया था गौरी बिल्कुल उस तस्वीर वाली औरत की ही तरह सजधज कर बाहर निकल रही थी उसके चेहरे पर अजीब सी हंसी थी उसके बा हवा में लहरा रहे थे उसकी आंखें बहुत खतरनाक और लाल दिखाई दे रही थी गोरी धीरे-धीरे करके सर्किट हाउस
के बाहर की तरफ चलने लगी उसकी गर्दन सीधी थी और वह सिर्फ सामने की तरफ देख रही थी सिद्धार्थ के उसके करीब पहुंचने पर भी उसने सिद्धार्थ की तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दिया और वह सीधे आगे बढ़ने लगी इतनी रात में गौरी हवेली की तरफ जाने वाले रास्ते पर आगे बढ़ने लगी हालांकि कुछ देर पहले हुई दुर्घटना से सिद्धार्थ थोड़ा डरा हुआ था लेकिन वह गौरी को इस हालत में दोबारा उस हवेली में नहीं जाने दे सकता था सुनसान सड़क पर सिर्फ कुत्ते के रोने की आवाज आ रही थी और सिद्धार्थ बस गौरी को रोकने
जाने ही वाला था कि अचानक किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा सिद्धार्थ की धड़कन मानो रुकी गई थी कि उसने देखा कि उसके कंधे पर मिस्टर बजाज का हाथ लगता है उसे हम दोनों को मिलकर रोकना होगा मिस्टर बजाज ने कहा गौरी रुक जाओ हम तुम्हें आगे नहीं जाने देंगे सिद्धार्थ ने कहा गौरी सिद्धार्थ की बात सुनकर उनकी तरफ मुड़ी और जोर जोर से हंसने लगी मुझे रोकोगे आओ आकर कर दिखाओ गौरी ने कहा हालाकि सिद्धार्थ और मिस्टर बजाज दोनों को ही गौरी की हंसी को देखकर डर लगने लगा था लेकिन फिर भी वह
आगे बढ़े जैसे ही सिद्धार्थ ने गौरी का हाथ पकड़ा गौरी ने सिद्धार्थ का गला पकड़ लिया मिस्टर बजाज ने गौरी से सिद्धार्थ को छुड़ाने की कोशिश की तो गौरी ने उन्हे भी बहुत जोर से धक्का दे दिया गरी के नुकीले नाखून सिद्धार्थ के गर्दन में चुपने लगे थे व खुद को छड़ा की हर मुमकिन कोशिश करने लगा गरी अभी भी जोर-जोर से हंस रही थी अचानक मिस्टर बजाज के मन में कुछ ख्याल आया वो दौड़कर सर्किट हाउस के अंदर चले गए अरी गरी मुझे छोड़ो मुझे छोड़ो मेरा मेरा दम घुट रहा है सिद्धार्थ ने दबी
हुई आवाज में कहा तुम मुझे पकड़ने आए और अब मुझसे कह रहे हो कि मुझे छोड़ दो लो पकड़ लो मुझे गौरी ने राते हुए कहा जब सिद्धार्थ खुद को गौरी से छुड़ाने की कोशिश कर रहा था उसी बीच मिस्टर बजाज दौड़कर वहां पर दोबारा आ गए इससे पहले कि गौरी मिस्टर बजाज को देखकर कुछ कर पाती मिस्टर बजाज ने गौरी को एक इंजेक्शन लगा दिया दरअसल मिस्टर बजाज के एक्सीडेंट के वक्त मंगाई गई दवाओं में एक बेहोशी की दवा थी क्योंकि मिस्टर बजाज पहले से ही बेहोश थे इसलिए वहां के लोकल डॉक्टर ने उन्हें
वह इंजेक्शन नहीं लगाया था इंजेक्शन लगाते ही गौरी बेहोश होने लगी उसकी पकड़ सिद्धार्थ पर ढली पड़ने लगी और सिद्धार्थ और मिस्टर बजाज ने गौरी को संभालकर सर्किट हाउस में दोबारा पहुंचा दिया अगली सुबह सूरज निकलते ही बूढ़े बाबा सर्किट हाउस पहुंच गए थने बूढ़े बाबा को रात की उस घटना के बारे में बताया कि कैसे गौरी ने उस पर हमला किया था और वह उस हवेली के रास्ते पर आगे बढ़ने लगी थी बूढ़े बाबा ने कहा कि मैं एक बार गौरी के कमरे को अंदर से देखना चाहता हूं मुझे लगता है वहां पर ऐसा
कुछ ना कुछ जरूर होगा जिससे हमें गौरी को उस आत्मा से मुक्त कराने का रास्ता मिल जाए बाबा हमें गौरी के कमरे में जाते वक्त सावधान रहना होगा बहुत ज्यादा हमलावर हो गई है वह मुझ पर पहले भी दो बार हमला कर चुकी है सिद्धार्थ ने कहा इस बार जब गौरी का कमरा खुला तो उसके बेट के ऊपरी हिस्से पर खून से कुछ लिखा हुआ था सिद्धार्थ ने उस पहेली को पढ़ा जब हो अंधेरा ंगो गुड़िया सी सजा के मुझ अर्धी मेरी सजाना मेरी मांग सजाना लाल रंग की साड़ी में दुल्हन मुझे बनाना बाबा मुझे
लगता है हमें पहले इस पहली को सुलझाना होगा गौरी की हालत खराब होती जा रही है आज रात होने से पहले हमें जैसा इसमें लिखा है वैसे इंतजाम करने होंगे सिद्धार्थ ने कहा गौरी की इतनी खतरनाक हालत देखकर तो बूढ़े बाबा के दिमाग ने काम करना ही बंद कर दिया था बाबा मैंने एक प्राचीन ग्रंथ में पढ़ा है कि अगर किसी कुंवारी लड़की की आका मृत्यु हो जाए मतलब उसकी शादी से पहले अगर उसकी हत्या कर दी गई हो या समय से पहले किसी हादसे में उसकी मौत हो गई हो तो उसकी आत्मा को तृप्त
करने के लिए सबसे पहले हमें उसकी आत्मा का आवाहन करना पड़ेगा क्योंकि वह तृप्त आत्मा पहले से ही गौरी के अंदर है इसलिए हमें उसका आवाहन करने की तो जरूरत नहीं है इसके बाद हमें जैसा उस पहेली में लिखा है वैसे ही एक गुड़िया बनानी है गुड़िया मैं अपने हाथों से बना लूंगा मैंने इस बारे में सब कुछ पढ़ रखा है हमें बुरी शक्तियों से बचकर ही यह काम करना होगा यह सब कुछ आसान नहीं होने वाला है लेकिन जो भी हो आज रात ही हमें यह करना होगा शादी के लाल जोड़े मेहंदी सिंदूर लाल
चूड़ियां मंगलसूत्र बाजे वाले और बाकी चीजों की जरूरत पड़ेगी और बा बा इसके साथ-साथ हमें अर्धी के सामान और चिता की भी तो जरूरत पड़ेगी सिद्धार्थ ने कहा हां सिद्धार्थ सिद्धार्थ और हमें यह सारी चीजें जल्द से जल्द इकट्ठा करनी होगी लेकिन एक और जरूरी बात जो मैं तुम्हें बताना भूल गया यह कि मैंने उस तीसरे दरवाजे के लिए मिली पहेली में जिस कोए का जिक्र किया गया था उसका पता लगा लिया है अभी मैं उस जगह पर गया नहीं हूं पर हम दोनों को उस कुए को देखने पर चलना है अब तुम्हें यह सोचना
है कि पहले हमें क्या करना है एक तरफ बात यह है कि उस पहेली को सुलझाने से तुम्हारे माता-पिता का पता लगेगा और दूसरी तरफ यहां बात गौरी की जान का सवाल है अभी यहां आरती के लिए चार हरे बांस लाल शाल गुलाल छोटी मटकी थोड़ी घास और सब सामान भी हमें मिल जाएगा हमें इस काम को आधी रात होने से पहले खत्म कर लेना होगा बाबा ने सिद्धार्थ से कहा सिद्धार्थ ने फैसला लेने में ज्यादा वक्त नहीं लगाया उसके मम्मी डैडी के बारे में अब तक कुछ भी साफसाफ पता नहीं चल पाया था लेकिन
गौरी के पास बस एक और दिन का वक्त बचा हुआ था बाबा हमें गौरी को बचाना होगा बाकी सब बाद में सिद्धार्थ ने कहा सिद्धार्थ और बूढ़े बाबा उन तमाम सामानों को इकट्ठा करने के लिए गांव में निकल गए गौरी अभी भी अपने कमरे में सो रही थी बेहोशी की दवाई का असर अभी भी खत्म नहीं हुआ था सिद्धार्थ मैंने कुछ गांव वालों से भी बात करने की कोशिश की है मुझे लगता है कि वो लोग उस हवेली की पहेलियों को सुलझाने में हमारी मदद करने के लिए तैयार हो जाएंगे बाबा ने कहा गांव में
इधर उधर घूमकर सारा सामान इकट्ठा कर लेने के बाद शाम होने से पहले ही सिद्धार्थ और बूढ़े बाबा सर्किट हाउस पहुंच गए उधर कमरे में बंद गौरी को भी होश आने लगा था मिस्टर बजाज गौरी के कमरे के बाहर बैठे हुए थे वह अभी भी अपने मन ही मन इस परेशानी के लिए सिद्धार्थ को ही जिम्मेदार ठहरा रहे थे इस बार जब गौरी नींद से जगी तो वह पहले की तरह नॉर्मल बिहेव करने लगी थी उसने खुद ने अपने डैडी को आवाज दी डैडी बाहर से दरवाजा क्यों लगा हुआ है और मुझे यह साड़ी किसने
पहना दी दरवाजा खोलिए डैडी मुझे बहुत भूख लगी है मिस्टर बजाज ने तुरंत दरवाजा खोल दिया खाना लेकर गौरी के पास गए और और गौरी ने खाना खा खाना शुरू किया डैडी आपने मेरी बातों का जवाब नहीं दिया खाना खाते खाते गौरी ने कहा मेरी यह हालत कैसे हुई मुझे कुछ याद क्यों नहीं आ रहा है सिद्धार्थ कहां है गौरी ने पूछा गौरी कुछ नहीं गौरी तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है तुम्हें आराम की जरूरत है बेहतर होगा तुम खाना खाकर सो जाओ और सिद्धार्थ किसी काम से गांव में गया है बाकी बातें हम बाद में
करते हैं मिस्टर बजाज ने कहा सिद्धार्थ और बढ़े बाबा सर्किट हाउस पहुंच चुके थे सिद्धार्थ को देखते ही गौरी उसके पास आई सिद्धार्थ तुम कहां चले गए थे यह देखो मैंने कैसे कपड़े पहन रखे हैं डैडी बोल रहे थे कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है और मुझे आराम की जरूरत है क्या तुम मुझे बताओगी कि मुझे एटली क्या हुआ है गौरी ने सिद्धार्थ से पूछा गौरी अंकल जो कह रहे हैं वही सही है तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है और मैं भी तुम्हें यही कहूंगा कि अभी तुम्हें आराम की जरूरत है तुम अपने कमरे में जाकर
सो जाओ मुझे को जरूरी काम है हम कल सुबह बात करते हैं सिद्धार्थ ने गौरी से कहा गौरी को सचमुच बहुत थकान भी महसूस हो रही थी सिद्धार्थ की बात मानकर गौरी अपने कमरे में सोने के लिए चली गई बाहर बरामदे में बाबा और सिद्धार्थ दोनों ने सारी तैयारियां शुरू कर दी सिद्धार्थ ने सबसे पहले आटे की एक गुड़िया बनाई उस के जोड़े वाली साड़ी का एक छोटा सा टुकड़ा काटकर उस गुड़िया को पहना दिया गया उसके पास ही चूड़ियां मंगलसूत्र और बाकी सब सामान गुड़िया के पास ही रख दिया सिद्धार्थ की बनाई गई वह
गुड़िया किसी असली गुड़िया के सामान लग रही थी लाल रंग से उसके होठों पर लाली लगाई गई थी उस गुड़िया को नाक की नथनी और कान में बाली पहनाई गई थी उसके बाद सिद्धार्थ ने उस गुड़िया में कुछ छोटे छोटे कीले चुभोना शुरू किया सिद्धार्थ के ऐसा करते ही वह आटे की बनी गुड़िया मानो जिंदा हो गई उससे खून निकलने लगा वह चीखने लगी उसकी नकली आंखें हिलने लगी जैसे वह असली आंखें हो सिद्धार्थ के ऐसा करने से गौरी के शरीर में भी हलचल होने लगी थी बाबा मैं यह काम करता हूं आप तब तक
अथ और चिता का इंतजाम करिए सिद्धार्थ ने बाबा से कहा सिद्धार्थ ये तुम ये तुम लोग क्या कर रहे हो गौरी तो ठीक हो चुकी है उसने मुझसे बात भी की और खाना भी खाया है यह भाजी की आवाज से वह फिर जग जाएगी मिस्टर बजाज ने कहा अंकल आप गौरी के पास जाइए हम लोगों को अपना यह काम जल्दी पूरा करना होगा यह सब करना जरूरी है अगर पहेली में लिखी शर्त वक्त पर पूरी नहीं हो पाई तो गौरी की जान को बहुत बड़ा खतरा हो सकता है सिद्धार्थ ने मिस्टर बजाज से कहा इससे
पहले कि मिस्टर बजाज गौरी के पास वापस पहुंच पाते गौरी खुद उस जगह पर आ गई थी इस वक्त गौरी बहुत खतरनाक दिख रही थी वह बहुत ज्यादा गुस्से में थी फिर उसने भारी भर कम आवाज में कहा तो तुमने अपनी मौत का सामान तैयार कर लिया है तुम लोगों को क्या लगता है कि तुम लोग इस लड़की को मुझसे बचा सकते हो ये मेरा शरीर है मैं जब तक जाऊंगी इसका शरीर मेरा रहेगा और पूर्णमासी का चांद देखते ही इसकी जिंदगी भी शाम हो जाएगी गौरी ने डरावनी आवाज में कहा अचानक बाहर का मौसम
बदला और तेज हवाएं चल लगी आसपास लगे पेड़ों की डालिया टूटने लगी गौरी जोर जोर से हसने लगी आसमान में चमगादर उड़ने लगे गौरी के खड़ काले बाल हवा में उड़ते हुए बहुत खतरनाक लग रहे थे अचानक वहां लगे बल्ब बंद चालू होने लगे क्या होगा आगे क्या सिद्धार्थ गौरी को बचा पाएगा या उनकी खुद की जान खतरे में आ जाएगी जानने के लिए सुनते रहिए इस वहां का माहौल सचमुच बहुत खौफनाक लगने लगा था एक साथ शादी का मंडप और शमशान का मंजर ऐसा होते जो भी देख लेता उसकी रूह काप जाती लेकिन यहां
तो एक रोह खुही इसके पीछे की बजाती है अचानक वहां रखा सामान एक एक करके हवा में उने लगा बाबा चीजों को संभालिए सिद्धार्थ ने कहा सिद्धार्थ चिंता मत करो हमारा काम बस पूरा होने ही वाला है बूढ़े बाबा ने कहा जैसे बूढ़े बाबा ने ऐसा कहा वहां रखी हुई लाल फूलों की माला अचानक से बाबा के गले में आ गई तुम तुम मेरी अर्थी सजाने का सोच रहे थे अब देखते हैं ये अरथी का सामान किसके काम आता है गौरी ने भारी आवाज में राते हुए कहा बाबा हम जब तक हम गौरी को काबू
ना कर ले तब तक मुझे नहीं लगता कि हम लोग इस काम को पूरा कर पाएंगे यह पहेली ऐसे में पूरी कैसे होगी सिद्धार्थ ने कहा बाबा ने अपने पास रखे हुए सरसों के दाने अपने और सामान के चारों ओर बिखेर दिए गौरी जोर जोर से चीखने लगी इससे पहले कि गौरी और कुछ कर पाती सिद्धार्थ ने पहले से जलाकर रखी हुई मशाल से उस पुतले को चिता पर रखकर उसमें आग लगा दी उस चिता में आग लगते ही गौरी के शरीर में बहुत हलचल होने लगी ऐसा लग रहा था जैसे आग की तपिश गौरी
को जला रही हो गौरी जोर जोर से चीख रही थी उसका चेहरा टेढ़ा मेड़ा होने लगा उसके हाथ पैर मुड़ने लगे थे और वो तड़प रही थी यह देखकर मिस्टर बजाज का दिल खून के आंसू हो रहा था लेकिन इन हालातों में वे कुछ भी नहीं कर सकते थे बस कुछ ही पलों में गौरी धड़ाम से जमीन पर गिर गई मिस्टर बजाज जल्दी से दौड़े और उन्होंने गौरी को सहारा दिया सिद्धार्थ भी तुरंत उठकर गौरी के पास गया और उन लोगों ने गौरी को वापस कमरे में ले जाकर लिटा दिया बाबा हमारी यह पहली पूरी
हुई मुझे लगता है अब गौरी पर कोई खतरा नहीं है सिद्धार्थ ने कहा सुबह हो चुकी थी थोड़ी देर आराम करने के बाद चाय पीते वक्त सिद्धार्थ और बूढ़े बाबा तीसरे दरवाजे की पहेली को सुलझाने को लेकर बात करने लगे अंकल आप गौरी का ख्याल रखिए हम लोगों को कहीं जाना है गौरी से कहिए कि वह आराम करें गौरी को लेकर अब हमें और ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है वह अब ठीक है उस कुए की तलाश में सिद्धार्थ और बाबा दोनों निकल चुके थे गांव में कुल मिलाकर भग 15 कुए थे जिनमें से
मोस्टली सब पूरी तरह सूखे हुए थे लेकिन सूखे हुए कुए इतने सूखे थे कि उनमें घास तक का उक पाना भी मुमकिन नहीं था बाबा ने सुना था कि गांव की दक्षिण दिशा में एक ऐसा भी सूखा कुआ था जिसमें शायद कोई पेड़ उगा हुआ है करीब 4 किलोमीटर का फासला तय करके वह दोनों उस जगह तक पहुंचे लेकिन वहां जाकर देखने पर पता चला कि इस कुए में लगा पेड़ सूखा हुआ था गांव में और गांव के आसपास ऐसे बहुत से कुए थे जहां पर सूखे पेड़ थे लेकिन ऐसा सूखा हुआ कुआ जिसके किसी
पेड़ या पौधे में फूल नहीं उगा हो उसे खोज पाना बहुत मुश्किल था बाबा मैं आज किसी भी हालत में उस कुए को ढूंढ कर ही रहूंगा पहेली के हिसाब से हमें आज रात ही उस फूल को जलाना होगा स ने कहा यह बात तो मैं भी जानता हूं मैं भी चाहता हूं कि हमें वह कुआं जल्द से जल्द मिल जाए तो चलो चलो चलकर कहीं और देखते हैं बूढ़े बाबा ने कहा बाबा मुझे लगता है कि सूखे कुएं में पेड़ और उसमें फूल तभी लग सकता है जब आसपास कहीं कोई तो पानी का जरिया
हो बिना पानी के ज्यादा दिन तक कोई पौधा जिंदा नहीं रह सकता हमें कोई ऐसा कुआ देखना चाहिए जो सूखा हो लेकिन उसकी कुछ दूरी पर पानी मौजूद हो सिद्धार्थ ने कहा तुम ठीक कहते हो सिद्धार्थ मैं जानता हूं एक कुआ एक पुरानी बावड़ी के सामने हो सकता है उसमें ही हमें वह फूल वाला पौधा मिल जाए लेकिन एक और बात वह बावड़ी भी उस मनहूस हवेली से बहुत ज्यादा दूरी नहीं है बूढ़े बाबा ने कहा दोनों बिना देर किए उस बावड़ी के पास वाले कुएं के पास पहुंचते हैं उस बावड़ी के आसपास बबूल की
झाड़ियां थी राजा महाराजाओं के जमाने की बनी वह बावड़ी बहुत पुरानी थी देखकर लगता था कि पहले वह बावड़ी बहुत खूबसूरत रही होगी उसे भी किसी महल के बरामदे की तरह नक्काशी करके बनाया गया था लेकिन उस जगह पर भी वैसा ही सन्नाटा था मनोस थी मकड़ी के जाल थे जो कि बबूल की झाड़ियों पर तक लगे हुए थे वे लोग थोड़ी दूर पर मौजूद कुए के पास गए उस कुए में भी ऊपर से तो कोई भी ऐसा पौधा दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन क्योंकि इसमें कुछ सूखे और कुछ हरे बबूल की झाड़ियां दिख
रही थी इसका मतलब हो सकता था कि वह पौधा वही मिल जाए लेकिन पहले उन्हें इन झाड़ियों को सा करना होगा बाबा यहां की कांटेदार झाड़ियों को साफ करने के लिए हमें कुल्हाड़ी की जरूरत होगी और साथ ही हमें मशाल भी लानी पड़ेगी जिससे हम एक बार उस पौधे के मिलते ही उस फूल को जलाकर राख कर सके क्योंकि उस फूल को हमें चांद की रोशनी में जलाना है इसलिए बेहतर होगा कि हम दोबारा यहां पर शाम के वक्त आए सिद्धार्थ ने कहा वे दोनों वापस गांव की तरफ जाने लगे सर ट हाउस पहुंचने से
पहले ही गांव में उन्हें एक घर के सामने बहुत भीड़ नजर आई करीब 4 बज रहे थे शाम होने में अभी वक्त बाकी था और सर्किट हाउस की दूरी वहां से बहुत ज्यादा भी नहीं थी उन दोनों ने सोचा कि पहले देखते हैं कि वहां पर इतनी भीड़ क्यों इकट्ठा हुई थी उस घर के अंदर से लोगों की रोने की आवाज आ रही थी घर के सामने अरथी बनाई जा रही थी वहां जाकर देखने पर उन्हें पता चला कि किसी जवान लड़के की मौत हो गई है लोगों की बात सुनकर उन्हें कुछ यूं पता चला
दरअसल हुआ यह था कि कल शाम जब वह लड़का हवेली के सामने से गुजर रहा था अचानक उसे एक लाल साड़ी वाली लड़की दिखाई दी थी लड़की बेहद खूबसूरत दिखाई दे रही थी ना चाहते हुए भी वह लड़का उस लड़की के पीछे खींचा चला गया वह लड़का वहां अकेला नहीं गया था वह अपने दोस्त के साथ हवेली से कुछ ही दूर पर मौजूद अपने खेत से लौट रहा था उसे उसके दोस्त ने बहुत समझाया लेकिन वह नहीं माना वह लड़की अकेली थी और गांव की तरफ जा रही थी वह एक पतली गली से होकर गुजरने
लगी सुनसान सड़क पर शाम के वक्त अकेली लड़की को देखकर उस लड़की की नियत खराब हो गई उसका दोस्त उस लड़के को जब समझाकर हार गया तो वह उसे छोड़कर गांव में चला गया सुबह लोगों को पता चला कि उसकी बहुत दर्दनाक मौत हो गई थी और उसके हाथ पैर मुड़े हुए थे और चेहरे पर नोचे जाने के निशान थे लोग बहुत ज्यादा डरे हुए थे जिस दिन से उस हवेली का गेट दोबारा खोला गया था उसके बाद से शायद ही कोई दिन ऐसा गया हो जब वीरान गढ़ में किसी के साथ कोई हादसा पेश
ना आया हो वह जगह श्रापित थी इसमें तो कोई शक नहीं था लेकिन वहां हाद से उस वक्त और बढ़ जाया करते थे जब कोई उस हवेली से छेड़छाड़ करता था लाल साड़ी वाली औरत आखिर कौन हो सकती थी गौरी तो उस वक्त सर्किट हाउज में अपने कमरे में बंद थी तो क्या यह काम उस तस्वीर वाली भूतनी का था सिद्धार्थ और बूढ़े बाबा दोनों इसी बात को सोचने में लगे हुए थे सिद्धार्थ जो तुम सोच रहे हो वही मैं भी सोच रहा हूं लेकिन अब इस चीज को सोचने से कोई फायदा नहीं जो होना
था हो चुका हमें आज रात की उस पहेली को सुलझाना है जिससे हमें तुम्हारे माता-पिता को ढूंढने में मदद मिल सके बूढ़े बाबा ने कहा वह लोग जब आगे बढ़ने लगे तो कुछ गांव वाले उनके सामने आ गए देखिए यह सब कुछ आपके पिता की वजह से हुआ है उन्हें लोगों ने समझाने की कोशिश की थी लेकिन वह नहीं माने अब यहां मौत का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा गांव के एक उम्रदराज शख्स ने कहा देखिए मेरे पिता ने जो कुछ भी किया वह गांव के भले के लिए किया था हां उनसे एक
गलती जरूर हुई थी कि वे उस मनहूस हवेली में चले गए थे उन्हें भी अपनी इस गलती की सजा मिली है उस दिन से वे भी लापता है उनका सपना था कि अगर गांव में फैक्ट्री शुरू हो जाएगी तो गांव की गरीबी कम होगी और बेरोजगारी दूर हो जाएगी अब तक जिस गांव की तरफ सरकार ने ध्यान नहीं दिया था फैक्ट्री शुरू हो जाने से उसकी तरफ सरकार भी ध्यान देने लगती मुझे इस हादसे का बहुत दुख है लेकिन आगे से आप लोगों के साथ ऐसा ना हो मैं इसी के लिए कोशिश कर रहा हूं
सिद्धार्थ ने गांव वालों को कहा अभी हम लोगों को कुछ काम है इसलिए हम यहां रुक नहीं सकते लेकिन इतना समझ लो कि यह लड़का गांव वालो को अभिशाप से आजाद कराने के लिए अपनी जान की बाजी लगाने को तैयार है यह कहने के बाद बूढ़े बाबा सिद्धार्थ को लेकर सर्किट हाउस की तरफ आगे बढ़ गए सर्किट हाउस पहुंचकर उन लोगों ने वहां के स्टोर रूम से अपनी जरूरी सामान इकट्ठा किया लगभग शाम के 5:00 बज रहे थे सिद्धार्थ ने सोचा कि यह वक्त सही है जब उन्हें उस कुएं के पास पहुंच जाना चाहिए क्योंकि
वहां पर बबूल की कांटेदार झाड़िया थी उन्हें काटा भी जाना था एक बार वहां केलिए निकलने से पहले सिद्धार्थ ने सोचा कि गौरी के हालचाल जान लिए जाए वह दो मिनट के लिए मिस्टर बजाज से बात करने के लिए उनके कमरे में गया मिस्टर बजाज उस वक्त अपने कमरे में नहीं थे वे गौरी के पास बैठे हुए थे गौरी गहरी नींद में थी अंकल अब गौरी की तबीयत कैसी है सिद्धार्थ ने पूछा पहले से बेहतर है लेकिन नींद में बड़बड़ा रही है शायद व डरी हुई है उसे थोड़ा बुखार भी आ गया है मुझे लगता
है कि अब वह प्रॉपर रेस्ट करेगी तो जल्दी ठीक हो जाएगी मिस्टर बचाजी कहा व दोनों जल्दी वहां पहुंच गए उस पूरे इलाके में बाबूल की झाड़ियां उग गई थी ऐसी जगह में सांप बिच्छू और जहरीले कीड़ों के होने का भी डर रहता है लेकिन सिद्धार्थ को इन सारी चीजों की बिल्कुल परवाह नहीं थी वो आज किसी भी हालत में उस पहेली को सुलझाना चाहता था सिद्धार्थ ने पहले कुए के आसपास की झाड़ियों को साफ करना शुरू किया लेकिन वीरान गढ़ में ऐसा कुछ भी करना इतना आसान नहीं था जिसका डर था वही हुआ अचानक
वहां पर बहुत सारे सांप निकल आए सिद्धार्थ और बूढ़े बाबा दोनों वहां से तुरंत भागते हुए बावड़ी के पास गए बाबा जब तक सांप कहीं चले नहीं जाते उस कुए में उतर पाना इतना आसान नहीं होने वाला है सिद्धार्थ ने कहा तुम सही कह रहे हो लेकिन यहां पर परेशानियां इतनी आसानी से खत्म नहीं होने वाली उस हवेली की कोई भी गुथ सुलझा पाना इतना आसान नहीं है चलो थोड़ी देर बाद हम दूसरी तरफ से कोशिश करते हैं बाबा ने कहा थोड़ी देर बाद आसमान में चमगादड़ ने उड़ान भरना श शुरू कर दिया बावड़ी कीसी
जगह पर जाकर वो लोग खड़े हुए थे अचानक वहां के खंभे और छत के हिस्से टूटकर गिरने लगे अजीब अजीब आवाजें आने लगी वक्त बीतने लगा और अंधेरा गहरा होने लगा सिद्धार्थ जानता था कि रात के अंधेरे में अपने मकसद को हासिल करना उसके लिए बहुत मुश्किल होने वाला था लेकिन पहली की शर्त भी यही थी अब वहां वो साप नजर नहीं आ रहे थे पर अंधेरा बढ़ते जा रहा था सिद्धार्थ ने दूसरी तरफ से कुएं के आसपास की झाड़ियों को काटना शुरू किया अब तक भी वह दोनों इस बात को नहीं जानते थे कि
उस कुएं में वह फूल वाला पौधा मौजूद था भी या नहीं उनके पास कोई दूसरा चारा भी नहीं था क्योंकि पहेली में सिर्फ एक फूल को जलाने की बात कही गई थी इसीलिए ऐसा भी नहीं हो सकता था कि वह पूरी कुए में आग लगा दें झाड़ियां साफ करके वे लोग आगे बढ़ने लगे वहां पर अचानक छोटे बच्चों की एक दूसरे के पीछे दौड़ते हुए एक चीखने चिल्लाने की आवाजें आने लगी सिद्धार्थ जानता था कि यह सब कुछ बुरी शक्तियां करवा रही है लेकिन उसे आगे बढ़ना था तभी अचानक बूढ़े बाबा की आवाज आई सिद्धार्थ
मुझे बचाओ मेरे पैर जमीन में धसे जा रहे हैं सिद्धार्थ ने पीछे देखा तो तो जहां पर उस वक्त बूढ़े बाबा खड़े थे वहां से 100 मीटर के दारे में एक दलदल थी जो कि ऊपर से देखने पर बिल्कुल समझ नहीं आ रही थी क्या यह सिद्धार्थ का ध्यान हटाने की कोशिश थी या बूढ़े बाबा की जान सचमुच खतरे में थी अचानक वहां पर जोर-जोर से हंसने की आवाज आने लगी सिद्धार्थ ने कुएं में उतरने से पहले अपनी कमर के आसपास एक बेल्ट और रस्सी बांधी थी और उस रस्सी को पासी के एक बबूल की
पेड़ से बांध दिया था तो सिद्धार्थ का अगला कदम क्या होगा दलदल में फसे बूढ़े बाबा को वह कैसे निकाल पाएगा क्या होगा उस पहेली का प्रभाव क्या बूढ़े बाबा का सफर यही खत्म हो जाएगा जानने के लिए सुनते रहिए एक और नई परेशानी आ गई थी सिद्धार्थ जो पहले कुए में उतर कर उस फूल को खोजने वाला था अब उसके सामने बूढ़े बाबा को बचाने की चुनौती थी सिद्धार्थ ने बिना देर किए अपनी कमर से उस रस्सी को खोला और तुरंत उसे दलदल में फेंका सिद्धार्थ ने बूढ़े बाबा की तरफ रस्सी फेंकी लेकिन बूढ़े
बाबा के हाथ भी दलदल में फसने को थे और वे रस्सी भी नहीं पकड़ पा रहे थे धीरे-धीरे करके बूढ़े बाबा दलदल में धसने लगे अंधेरा होने की वजह से कुछ सास साफ दिखाई भी नहीं दे रहा था सिर्फ मशाल के उजाले में बूढ़े बाबा को बचा पाना सिद्धार्थ के लिए बहुत मुश्किल हो रहा था सिद्धार्थ को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें तभी अचानक वहां पर एक साया दिखाई दिया उस साय की आंखें चमक रही थी और वह सफेद कपड़ों में लिपटा था ऐसा लग रहा था जैसे सफेद चादर उड़े
हुए हो बहुत बदसूरत जला हुआ सा और बड़ा सा चेहरा जो कि आसमान में मंडरा रहा था डर के मारे सिद्धार्थ पसीना पसीना हुए जा रहा था और बूढ़े बाबा दलदल में और भी ज्यादा फसती जा रहे थे सिद्धार्थ तुम उधर ध्यान मत दो मेरे पास रस्सी फेंको बूढ़े बाबा ने चिल्लाते हुए कहा बस थोड़ी ही देर बाद आसमान में चांद निकल आया अब सिद्धार्थ को बूढ़े बाबा दिखाई देने लगे थे उस भूत का चेहरा बड़ा ही भयानक लग रहा था उसकी आंखों की जगह आर पार दिखाई दे रहा था आज तुम दोनों की जिंदगी
का आखिरी दिन है यह पूर्ण मासी तुम्हारी जिंदगी की आखिरी रात है यह कहते हुए वह साया जोर-जोर से हंसने लगा अभी तक वह साया ऊपर मंडरा रहा था और उसने किसी पर भी हमला नहीं किया था तो क्या सिद्धार्थ जल्दी बूढ़े बाबा को बाहर निकालकर अपने काम में जुट जाने वाला था क्या वहां मौजूद वो भूत यह सब कुछ इतनी आसानी से होने देने वाला था क्या वह अभी भी कोई हमला नहीं करने वाला था या वहां कुछ बहुत खौफनाक होने वाला था सिद्धार्थ तुम बस मुझे निकालने की कोशिश करो हमें जल्दी उस पहेली
को पूरा करना है मुझे बचाओ मैं इस दलदल में डूबता जा रहा हूं बूढ़े बाबा ने सिद्धार्थ को दोबारा आवाज दी बाबा अब सीने तक उस दलदल के अंदर धसने लगे थे तभी अचानक जिस पेड़ में सिद्धार्थ ने रस्सी बांधी थी उस पेड़ में आग लग गई आग लगते ही रस्सी टूटकर नीचे गिर गई सिद्धार्थ ने कूदकर उस रस्सी को पकड़ लिया वही पास में लगे दूसरे पेड़ के सहारे से सिद्धार्थ ने उस रस्सी को लपेटा और बड़ी बाबा को खींचना शुरू किया वो साया अब सिद्धार्थ के पास पहुंच चुका था तभी बूढ़े बाबा ने
उस साया के ऊपर कुछ फेंका और अगले ही पल वो साया यब हो गया सिद्धार्थ ने अब और भी हिम्मत जुटाई और बाबा को खींचना शुरू किया व पसीना पसीना हो चुका था दलदल से बाबा को बाहर खींच निकालना आसान नहीं था लेकिन धीरे धीरे करके उमीद जागने लगी लगभग 20 मिनट की मशक्कत के बाद सिद्धार्थ ने बाबा को दलदल से बाहर निकाल लिया था दलदल से बाहर आने के बाद बुढ़े बाबा के शरीर में बहुत ज्यादा खुजली होने लगी उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे हजारों चीटियां एक साथ उन्हें काट रही हो लेकिन बर्दाश्त
करने के अलावा वहां और कुछ किया भी नहीं जा सकता था थोड़ी देर तक जोर जोर से सांस लेने के बाद बाबा ने अपने हाथों में मशाल पकड़ी और सिद्धार्थ धीरे-धीरे रस्सी के सहारे कुए में उतरने लगा सिद्धार्थ अपने साथ एक बोतल में केरोसिन एक कुल्हाड़ी और माचिस की डिब्बी लेकर झाड़ियों को साफ करते हुए नीचे बढ़ने लगा झाड़ियों के साफ होने से मशाल की रोशनी अंदर तक दिखाई देने लगी थी अब चांद धीरे-धीरे सिर के ऊपर आने लगा था अब तक सिद्धार्थ को वह फूल वाला पौधा नहीं दिखाई दिया था वो कुएं की एक
तरफ से लगातार झाड़ियों को काटते हुए नीचे बढ़ते जा रहा अचानक उस पुराने और झरझर हो चुके कुए के पत्थर खिसकने शुरू हो गए जोरदार आवाज के साथ अचानक बहुत से पत्थर खिसके और सिद्धार्थ पत्थरों के साथ नीचे कटीली झाड़ियों पर गिर गया सिद्धार्थ को उस वक्त जितना खतरनाक दर्द हुआ था उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता था उसके पैर पर पत्थर गिर गया था और पूरे शरीर में बबूल के लंबे और नुकीले कांटे चुप गए थे दर्द सिद्धार्थ की बर्दाश्त के बाहर हो रहा था उसने खुद के आसपास की उन कटीली झाड़ियों
को साफ किया और अपने शरीर पर लगे हुए कांटों को बाहर निकाला वह दर्द से चीख रहा था सिद्धार्थ मैं जानता हूं तुम्हें बहुत दर्द हो रहा है लेकिन एक बार कोई में उतर जाने के बाद उस फूल को बिना राग किए तुम्हारा बा हर आना हमारी पूरी मेहनत पर पानी फेज देगा बूढ़े बाबा ने कहा मैं बाहर आने की कोशिश नहीं कर रहा हूं बाबा मुझे वो पौधा दिख गया है इसमें एक लाल रंग का बड़ा सा फूल है मैं बस उसे जलाने ही वाला हूं सिद्धार्थ ने दर्द से कराते हुए जवाब दिया सिद्धार्थ
ने अपने साथ लेकर गया केरोसिन उस फूल वाले पौधे पर उड़ेल दिया और माचिस घिसने लगा उसके हाथ से माचिस नीचे गिर गई झाड़ियों में से उस माचिस को वापस निकाल पाना इतना आसान नहीं था बाबा मेरी माचिस नीचे गिर गई है मुझे मशाल की जरूरत होगी सिद्धार्थ ने बूढ़े बाबा से कहा बूढ़े बाबा ने रस्सी को ऊपर खींचा और उस रस्सी में मशाल को बांधकर सिद्धार्थ को वो मशाल नीचे दे दी उस पौधे में अचानक जगमगाहट होने लगी उस पौधे से बच्चे की आवाज में चीख निकलने लगी ऐसा लगा जैसे कोई बच्चा चीख कर
कह रहा हो मुझे मत जलाओ बुरी ताकतें मेरे दिमाग से खेल रही है लेकिन मैं ऐसा नहीं होने दूंगा सिद्धार्थ ने अपने मन में कहा उसने बिना देर किए उस पौधे में आग लगा दी और कुछ ही पल में वो पौधा जलकर राख हो गया सिद्धारथ जानता था कि पौधे की जलते ही हवेली के तीसरे दरवाजे का ताला भी खुल चुका होगा लेकिन उसके सामने एक बड़ी चुनौती थी कि इतने दर्द के बीच वह वापस उस कुए से बाहर कैसे निकलेगा अच्छी बात यह थी कि सिद्धार्थ ने उस रस्सी में बहुत सारी नोट्स बांध रखी
थी जिन्हे पकड़कर वह ऊपर चढ़ सकता था दर्द से आह भरते हुए कराते हुए खून से लत पत सिद्धार्थ कुएं की मुंडेर पर पहुंच चुका था रात काफी हो चुकी थी और गांव वालों से मदद लेना अब मुमकिन नहीं था उसके शरीर में बचे हुए कांटों को जहां तहां से जैसे तैसे निकालने के बाद बूढ़े बाबा की मदद से सिद्धार्थ कुछ दूर तक चलते आया और फिर अचानक लड़खड़ा करर जमीन पर गिर गया बूढ़े बाबा ने सिद्धार्थ को वहीं छोड़ते हुए मैनेजर साहब की हेल्प लेनी की सोची और भागकर उसके पास पहुंचे बूढ़े बाबा वह
मशाल सिद्धार्थ के हाथों में ही देकर सर्किट हस के लिए निकल गए मैनेजर साहब जल्दी कीजिए सिद्धार्थ की हालत ठीक नहीं है कुए में गिर जाने की वजह से उसे बहुत चोट आई है वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा है गांव के किसी भी शख्स से रात में मदद ले पाना आसान नहीं है बाबा ने वहां पहुंचकर मिस्टर बजाज से कहा इस दौरान जब सिद्धार्थ वहां अकेले चट्टान पर बैठा हुआ था तब अचानक से वहां पर कुछ साय दिखाई देने लगे परंपरागत राजस्थानी पोशाक पहने हुए वे तमाम साय बहुत खतरनाक दिख रहे थे
उसमें से बड़ी सी रंगबिरंगी पगड़ी लगाए बड़ी-बड़ी मूछों वाले लंबे कत काठी वाले कुछ आदमी अपने हाथों में तलवार लिए हुए थे किसी का भी चेहरा साफ नहीं दिखाई दे रहा था राजस्थानी लाल और पीली घाघरा चोली पहने औरत बड़ा सा घूंघट ली हुई थी सिद्धार्थ को जितना दर्द हो रहा था उसमें वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या उसे वह परछाइयां सचमुच दिखाई दे रही थी या यह उसका कोई भ्रम था पूर्णमासी के चांद के होते हुए भी अंधेरा इतना गहरा था कि दूर से किसी का चेहरा साफ दिखाई देना मुमकिन नहीं था
तो फिर यह क्या हो रहा था धीरे-धीरे करके वह बेहोश होने लगा बूढ़े बाबा और मिस्टर बजाज जब वहां पर पहुंचे तो सिद्धार्थ की हालत बहुत खराब हो गई थी उन्होंने बड़ी मुश्किल से सिद्धार्थ को सहारा देते हुए सर्किट हाउस तक पहुंचाया जैसे तैसे उसके शरीर पर चुभे और छोटे काटे बाहर निकाले गए उधर दूसरी तरफ गौरी की भी तबीयत अब तक बिल्कुल ठीक नहीं हुई थी रात काफी हो गई थी इसलिए गौरी को जगाया नहीं गया था उसे सिद्धा के साथ हुए इस हादसे की कुछ खबर भी नहीं थी बूढ़े बाबा और मिस्टर बजाज
ने सिद्धार्थ की मरम पट्टी की और पेन किलर टेबलेट्स जो कि एक्सीडेंट के बाद मिस्टर बजाज को दी गई थी उसी में से सिद्धार्थ को भी दवाइयां दे दी गई सिद्धार्थ को अभी भी होश नहीं था वह बेहोशी की हालत में नींद में करा रहा था उसके पैर में बहुत ज्यादा चोट आई थी देखकर ऐसा लग रहा था कि दो तीन दिन तक तो उसका बिस्तर से भी उठना बहुत मुश्किल था सुबह होते ही जब इस बारे में गौरी को पता चला तो वह भी बेचैन हो गई गौरी की तबीयत पहले से अच्छी थी लेकिन
उसे भी रह रह कर बुखार आ जा रहा था सुबह के 10 बजे तक सिद्धार्थ को होश आया उसे बहुत दर्द हो रहा था उसकी खुशकिस्मती थी कि उसकी हड्डी नहीं टूटी थी लेकिन उसके पैर पर गिरा हुआ वह पत्थर भारी और नुकीला था जिससे उसे गहरी चोट आई थी और उसका काफी खून बह गया था सिद्धार्थ कल रात तुम्हारी हालत बहुत खराब थी अब तुम्हें कैसा लग रहा है तुम्हें प्रॉपर्ली आराम करने की जरूरत है मिस्टर बजाज ने कहा अंकल मुझे दर्द तो बहुत हो रहा है लेकिन अब मेरी तबीयत पहले से अच्छी है
वैसे गौरी की तबीयत कैसी है और वह कहां है सिद्धार्थ ने पूछा उसकी तबीयत पहले से बेहतर है लेकिन उसे बार-बार बुखार आ रहा है तुम अपना ख्याल रखो हम लोग गौरी का ख्याल रख रहे हैं मिस्टर बजाज ने कहा मिस्टर बजाज को इस बात पर हैरानी थी कि खुद को इतनी चोट लगने के बावजूद भी सिद्धार्थ को गौरी की चिंता हो रही थी इससे पहले मिस्टर बजाज ने सिद्धार्थ को बहुत बुरा भला कहा था उन्हें अपनी कही हुई बातों पर अब पछतावा हो रहा था उन्हें लगने लगा था कि सिद्धार्थ को सचमुच गौरी की
परवाह थी बाबा हम लोगों ने उस पहेली को पूरा कर लिया है दरवाजा खुल चुका होगा मुझे लगता है वहां पर जरूर मेरे माता-पिता के बारे में कुछ ना कुछ पता चल ही जाएगा सिद्धार्थ ने कहा बेटा तुम जो कह रहे हो वह सही है दरवाजा जरूर खुल गया होगा और पहेली सुलझ चुकी है तुमने जो कुछ कर देखा व आज तक कोई नहीं कर सका उस हवेली की एक भी पहेली को हल कर पाने में कोई भी कामयाब नहीं हुआ था यह कमाल की बात है कि कुए में गिरने के बावजूद भी तुम्हें मामूली
सी चोट ही आई है अच्छा होगा तुम अभी कुछ दिन आराम कर लो और अपनी तबीयत पर पर ध्यान दो तुम तो जानते ही हो तुम्हारा मुकाबला इंसानों से नहीं है हमें ताकत के साथ-साथ फुर्ती और तेज दिमाग की भी जरूरत पड़ेगी चलो तुम आराम करो मुझे गांव में कुछ काम है मैं चलता हूं बाबा ने सिद्धार्थ से कहा सिद्धार्थ को बूढ़े बाबा की बात सुनकर मन ही मन लगने लगा था कि वह जल्दी उसके मम्मी डैडी के बारे में कोई परफेक्ट इंफॉर्मेशन पता कर लेगा सबसे पहले तो उसे अपनी फास्ट रिकवरी की तरफ ध्यान
देना पड़ेगा इस दौरान बाहर का मौसम बदलने लगा सुबह से ही जहां हमेशा गर्म आंधियां चला करती थी उस वीरान गढ़ में काले बादल छाए हुए थे बस थोड़ी देर में वहां पर बिजली चमकने लगी और तेज हवाएं चलने लगी वीरान गढ़ में बारिश होना कभी कभार ही देखा गया था वहां तो बारिश के मौसम में भी बहुत कम बारिश हुआ करती थी तो क्या इसका कुछ लेना देना सिद्धार्थ के उस पहेली को सुलझाने से भी था थोड़ी देर में वहां झमाझम बारिश होने लगी आज वीरान गढ़ के लोग बहुत खुश थे लोगों के मन
में भी यही बात आ रही थी कि इस बिन मौसम की बारिश के पीछे वजह क्या हो सकती है बूढ़े बाबा ने उन लोगों से पहले भी कहा था कि सिद्धार्थ का मकसद उन लोगों को अभिशाप से मुक्त कराना है उन्होंने गांव वालों से सिद्धार्थ की मदद करने के लिए भी कहा था उस वक्त गांव के कुछ लोग तो राजी भी हो गए थे लेकिन एक बार फिर जब गांव में एक लड़के की मौत हुई तो उन लोगों का भी मन बदल गया था गांव वालों ने सिद्धार्थ को खरी खोटी सुनाई थी लगता है आज
कुदरत वीरान गढ़ पर महबान थी गौरी सिद्धार्थ के कमरे में आई लो गौरी भी आ गई ठीक है सिद्धार्थ गौरी तुम आपस में बातें करो मुझे कुछ काम है मैं अपने कमरे में हूं किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे आवाज दे देना मिस्टर बजज ने कहा सिद्धार्थ अब तुम्हारी इंजरी कैसी है मुझे अभी अभी पता चला कि रात को तुम्हारे साथ बहुत दर्दनाक हादसा हुआ गौरी ने कहा हां गौरी वो हादसा सचमुच खतरनाक था मुझे समझ नहीं आया कि जब उस कुए के पत्थर खिसकने लगे तो एक ही पल में मैं कैसे उन कांटों
के ऊपर गिर गया सिद्धार्थ ने कहा लेकिन तुम्हें अपना ख्याल रखना चाहिए था तुम्हें पता था कि वह कुआ पुराना है तुम्हें थोड़ा सावधान रहना चाहिए था गौरी ने कहा गौरी तुम जानती हो इस जगह हम कितनी भी सावधानी रख ले यह बुरी ताकतें हमें नुकसान पहुंचाए बिना नहीं रहती यह तो मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे फिर भी ज्यादा कुछ नहीं हुआ सिद्धार्थ ने कहा तो आखिर तुमने पजल सॉल्व कर ही ली मैं जानती थी हम जल्दी अंकल आंटी का पता लगा लेंगे तुमने अब तक मुझे बताया नहीं कि मुझे हुआ क्या था गौरी
ने पूछा तो क्या सिद्धार्थ गौरी को उसके साथ पेश आए हादसे के बारे में सच बताएगा और क्या होगा जब सिद्धार्थ को पता चलेगा उस दरवाजे के पीछे का खतरनाक रहस्य जानने के लिए सुनते रहिए तुमने ठीक कहा गौरी जिंदगी की भागदौड़ में हम एक दूसरे से पहले कभी मिल ही नहीं पाए किसी को भी यह बात जानकर हैरानी हो सकती कि मुझे सचमुच नहीं पता था कि हमारी फैक्ट्री के मैनेजर मिस्टर बजाज एक्चुअली तुम्हारे फादर है हम उस वक्त बहुत छोटे थे मुझे ठीक से तो याद नहीं लेकिन तुमने बताया था कि तुम्हारे डैडी
एक बिजनेसमैन हुआ करते थे सच तो यह है कि मुझे लगता था कि तुम अपने मम्मी डैडी के साथ ही रहा करती थी मुझे यह बाद में पता चला कि दिल्ली में तुम अपने मामा के यहां रहकर पढ़ाई कर रही थी अचानक तुम्हारे डैडी भोपाल छोड़कर कैसे चले आए और इतने सालों के बाद भी तुमने मुझे कैसे पहचान लिया मैं तो तुम्हें पहचान ही नहीं सका था सिद्धार्थ ने गौरी से पूछा इसके पीछे एक लंबी कहानी है तुम्हें चोट आई है और मैं चाहती हूं कि तुम अभी आराम करो मैं अपने कमरे में जाती हूं
यह सब मैं तुम्हें बाद में बताऊंगी गौरी ने कहा गौरी बाहर देखो इतनी बारिश हो रही है मुझे इतनी चोट आई हुई है तुम्हारी तबीयत भी ठीक नहीं है यहां तो इंटरनेट कनेक्टिविटी और मोबाइल नेटवर्क भी बड़ी मुश्किल से आता है तो फिर तुम करोगी क्या सिद्धार्थ ने गौरी से कहा सिद्धार्थ चाहता था कि गौरी उससे यूं ही बात करती रहे मुझे कोई काम नहीं है मैं तो बस चाहती हूं कि तुम और थोड़ा आराम कर लो तुम्हें आराम की सख्त जरूरत है गौरी ने कहा मैं अभी भी आराम ही कर रहा हूं तुम अब
मुझे बताओ कि ऐसा क्या हुआ था जिससे तुम्हारे डैडी को दिल्ली आना पड़ा सिद्धार्थ ने गौरी से दोबारा पूछा दरअसल इस सबके पीछे की वजह हमारा फैमिली डिस्प्यूट था डैडी और ताओ जी दोनों ही कपड़ों का बिजनेस किया करते थे डैडी की मार्केट में अच्छी पकड़ थी और उनके कांटेक्ट भी बहुत अच्छे थे इसलिए उन्हें बिजनेस में अच्छा खासा प्रॉफिट होने लगा ताओ जीी का नेचर हमेशा से ही चिड़चिड़ा रहा था उनकी किसी से नहीं बनती थी घर में आए दिन किसी ना किसी बात को लेकर रोज बहस हो ही जाया करती थी डैडी नहीं
चाहते थे कि इन सबका मेरी पढ़ाई पर कोई असर पड़े इसीलिए उन्होंने मुझे मामा जी के यहां भेज दिया था गौरी ने सिद्धार्थ को बताया यह तो ठीक है फिर वह अपना बिजनेस छोड़कर दिल्ली क्यों चले आए और मेरे डैडी से उनका कांटेक्ट कैसे हुआ सिद्धार्थ ने आगे पूछा एक दिन डैडी को पता चला कि उनके बिजनेस में हो रहे प्रॉफिट से उ के बड़े भाई को बहुत परेशानी हो रही थी बात सिर्फ इतनी ही नहीं थी ताओ जी ने यहां तक कि डैडी के बिजनेस को बर्बाद करने की भी कई कोशिश की थी लेकिन
जब पानी सिर से ऊपर बढ़ गया तो दोनों भाइयों में बहुत कहा सुनी हुई डैडी को ऐसी दौलत कबूल नहीं थी जो भाई से झगड़ा करके हासिल की गई हो उन्होंने फैसला किया कि वह अपना बिजनेस बंद करेंगे और दिल्ली में अपने पुराने दोस्त की फैक्ट्री में उसका हाथ बटाए गे फिर एक दिन मम्मी डैडी दि आ गए और उन्होंने तुम्हारे डैडी की फैक्ट्री में मैनेजर की पोस्ट जवाइन कर ली गौरी ने सिद्धार्थ को बताया तो क्या बजाज अंकल और डैडी एक दूसरे के पुराने दोस्त है सिद्धार्थ ने हैरान होकर गौरी से पूछा हां सिद्धार्थ
वह दोनों ही कॉलेज के जमाने से ही एक दूसरे के दोस्त थे फिर जब दोनों की प्रोफेशनल लाइफ शुरू हुई तो मेरे डैडी ने अपना फैमिली बिजनेस संभालना चाहा वहीं तुम्हारे डैडी ने सोचा कि वह अपनी खुद की फैक्ट्री शुरू करेंगे तुम्हारी डैडी ने एक छोटी सी फैक्ट्री से शुरू करके आज इतना बड़ा एंपायर खड़ा किया है गौरी ने सिद्धार्थ को बताया गौरी तुम इतना कुछ कैसे जानती हो मुझे तो इन सब के बारे में कुछ पता ही नहीं था सिद्धार्थ ने कहा सिद्धार्थ तुम्हारे डैडी ने मेरे डैडी की बहुत ज्यादा मदद की है वह
अपना घर परिवार सब छोड़कर दिल्ली आ गए थे वे दोनों ही अपनी दोस्ती को अपने प्रोफेशन में इवॉल्व नहीं करते दोनों ही एक दूसरे को लेकर ऑनेस्ट है जहां तक बात है तुम्हें पहचानने की तो मुझे भी पहले नहीं पता था कि डैडी को जिस फैक्ट्री में जॉब मिली है वह तुम्हारे डैडी की है दरअसल हुआ यह कि एक दिन जब डैडी एक सोशल नेटवर्किंग साइट पर अपने बॉस की फैमिली पिक देख रहे थे तो उसमें मुझे तुम्हारे बचपन की तस्वीर दिखाई दी जब मैंने पापा से पूछा तो उन्होंने मुझे बताया कि तुम उनके बॉस
के बेटे हो फिर मैंने भी तुमसे बात करने के लिए तुम्हारी आईडी सर्च की लेकिन सिद्धार्थ भारद्वाज के नाम से मुझे तुम कहीं दिखाई ही नहीं दिए गोरी ने कहा वह एक्चुअली घर पर मुझे मम्मी डैडी शिवा कहकर पुकारते हैं अगर तुमने शिवा भारद्वाज के नाम से मुझे सर्च किया होता तो तुम्हें मैं भी मिल गया होता सिद्धार्थ ने कहा चलो यह सब तो ठीक है लेकिन मुझे एक बात यह नहीं समझ आई कि इतने सालों में तुम अमेरिका जैसी डेवलप्ड कंट्री में थे तो फिर तुम्हें भूत प्रेतों की बातों पर यकीन कैसे होने लगा
गौरी ने सिद्धार्थ से पूछा तुम्हें किसने कहा कि अमेरिका में भूत प्रेत नहीं होते गौरी मानना या ना मानना हम पर डिपेंड करता है मैंने पढ़ाई जरूर अमेरिका से की है लेकिन मैं जानता हूं कि इस दुनिया को एक शक्ति चलाती है यह बात सारी दुनिया में मानी गई है कि ताकतें अच्छी और बुरी दोनों होती है सिद्धार्थ ने कहा तो क्या वहां भी लोग आत्माओं पर यकीन करते हैं गौरी ने पूछा यकीन करने वाले और यकीन ना करने वाले यह दोनों ही लोग पूरी दुनिया में मिल जाएंगे मेरा इतना मानना है कि यह सारी
शक्तियां हमारे इर्दगिर्द ही घूमती रहती है हम जिसके बारे में ज्यादा सोचते हैं वह शक्ति हम पर अपना असर ज्यादा डालने लगती है सिद्धार्थ ने गौरी से कहा एक दूसरे से इतने दिनों बाद इतनी लंबी बातचीत करके सिद्धार्थ और गौरी दोनों ही बहुत ज्यादा खुश थे वे दोनों एक दूसरे को बचपन से ही पसंद करते थे लेकिन बचपन की दोस्ती और जवानी की पसंद में जमीन और आसमान का फर्क होता है किसने सोचा होगा कि उन दोनों की मुलाकात इतने सालों बाद इस तरह से होगी जो भी हो गौरी सचमुच इतनी खूबसूरत थी कि उससे
बात करते वक्त सिद्धार्थ अपने सारे दर्द भूल गया था गौरी का अपनापन और हमदर्दी सिद्धार्थ को उससे कभी ना अलग होने पर मजबूर कर रही थी गौरी से बात करते करते सिद्धार्थ को अपनी मम्मी डैडी की याद आने लगी और वह थोड़ा इमोशनल हो गया गौरी मैं इतने दिनों से अपनी मम्मी डैडी से दूर रहा हूं वहां अमेरिका में मेरे अंकल ने कभी भी मुझे मम्मी डैडी की कमी महसूस नहीं होने दी लेकिन फिर भी मैं उनको बहुत मिस करता था आज जब मैं मैं उनके पास रह सकता था तब वे लोग ना जाने कहां
चले गए यह कहते वक्त सिद्धार्थ की आंखों से आंसू टपकने लगे गौरी आगे बढ़ी और उसने सिद्धार्थ की आंसू पोछ हुए कहा सिद्धार्थ सब कुछ ठीक हो जाएगा हम जल्दी अंकल अंटी को ढूंढ निकालेंगे तुमने हाल ही में उस हवेली का तीसरा दरवाजा खोलने में भी कामयाबी पाई है यह एक अच्छा साइन है अब बस पहले तुम जल्दी ठीक हो जाओ गौरी ने सिद्धार्थ से कहा मिस्टर बजाज ने गौरी को सिद्धार्थ के साथ रहने से मना किया था इसकी वजह यह नहीं थी कि सिद्धार्थ कोई गलत लड़का था दरअसल मिस्टर बजाज अपने दोस्त को लेकर
बहुत ज्यादा सेंसिटिव थे वह कभी नहीं चाहते थे कि किसी भी वजह दोनों दोस्तों के बीच मिस अंडरस्टैंडिंग क्रिएट हो वह जानते थे कि मिस्टर बजाज उनके अच्छे दोस्त हैं और उन्होंने कभी मिस्टर बजाज को सिर्फ एक एंप्लॉई की तरह ट्रीट नहीं किया था लेकिन इसका मत मतलब यह नहीं कि मिस्टर बजाज अपनी लिमिटेशंस भूल जाए उस दिन जब हवेली में गौरी ने सिद्धार्थ की जान बचाई थी तब सिद्धार्थ यह नहीं जानता था कि उसकी जान बचाने वाली गौरी थी लेकिन गौरी सचमुच इतनी ज्यादा खूबसूरत थी कि जब सिद्धार्थ ने उसे एक बार देखा तो
वह बस उसे देखता ही रह गया जहां सिद्धार्थ गौरी को मन ही मन चाहने लगा था वहीं गौरी को सिर्फ सिथ की परवाह थी वह सिद्धार्थ को अपना एक बहुत अच्छा दोस्त मानती थी उसे पता था कि सिद्धार्थ के पिता के एहसानों का बदला वे लोग शायद ही कभी चुका पाते तो क्या सिद्धार्थ गौरी से अपने दिल की कोई बात कहने वाला था यह सब तो आने वाले वक्त की बात थी वीरान गढ़ में वे लोग जिस नरक को भोग रहे थे वैसा तो उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा अपने मम्मी डैडी के
ना होने से सिद्धार्थ बहुत अकेला हो गया था और उसकी जैसे सारी दुनिया ही उजड़ चुकी थी गौरी मिस्टर बजाज और बूढ़े बाबा की साथ होने की वजह से उसे बहुत ज्यादा हिम्मत मिल गई थी सिद्धार्थ अब बहुत वक्त बीत चुका है अब बाकी बातें बाद में करते हैं तुम आराम करो मैं तुम्हारे लिए गरम गरम चाय लेकर आती हूं गौरी ने सिद्धार्थ से कहा मिस्टर बजाज इस बात को भी जानते थे कि गौरी की तबीयत इन दिनों कुछ ठीक नहीं चल रही थी और वह गौरी पर नजर बनाए हुए थे जब उन्होंने गौरी को
किचन में जाते हुए देखा तो वह हैरान थे ऐसा नहीं था कि गौरी को किचन का काम नहीं आता था लेकिन हवेली में हुए इस हादसे के बाद गौरी कुछ भी कर सकती थी हालांकि अगर बूढ़े बाबा और सिद्धार्थ की बात का यकीन किया जाता तो गौरी के शरीर पर हावी व आत्मा अब मुक्त हो चुकी थी लेकिन कुछ तो अभी भी बाकी था वो क्या था दरअसल इस बात पर किसी ने गौर नहीं किया था कि उस तस्वीर के नीचे ही एक टेबल रखा हुआ था जहां से गौरी ने एक अंगूठी उठा ली थी
गौरी के हाथों में वह रिंग अभी भी मौजूद थी बुरी आत्माओं के बारे में कहा जाता है कि जब वो किसी का पीछा करती है तो बस उसे मिटा कर ही दम लेती है सिद्धार्थ और गौरी उस हवेली के रहस्य से पर्दा उठाने की ठा चुके थे लेकिन उस हवेली की बुरी आत्माएं कभी भी नहीं चाहती थी कि उस हवेली पर किसी का कब्जा हो उस तस्वीर वाली आत्मा से गौरी का आजाद हो जाना झूठ नहीं था लेकिन असल परेशानी तो गौरी अपने साथ लिए फिर रही थी गौरी के हाथों में जो अंगूठी थी दरअसल
उस अंगूठी के पीछे भी एक अजीब कहानी छुपी हुई थी वो अंगूठी उस हवेली में रहने वाले परिवार की पुश्तैनी अंगूठी हुआ करती थी बुरी आत्माएं अपने आप को अपने किसी भी पसंदीदा ऑब्जेक्ट जगह या किसी इंसान से जोड़े रखती है उस हवेली में कोई जिंदा इंसान तो मौजूद नहीं था और वीरान गढ़ पूरा गांव अपने आप में उन भूतों का ही ठिकाना था तो बात आती है ऑब्जेक्ट की और यह तो एक ऐसी अंगूठी थी जिससे ना जाने कितनी आत्माएं जुड़ी हुई थी तो क्या गौरी अभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुई थी क्या
उसकी बीमारी और भी ज्यादा बढ़ने वाली थी क्या गौरी सिद्धार्थ या अपनी खुद की भी जान ले सकती थी क्या गौरी के हाथों में वो जंगठी थी उसके बारे में कोई और भी जानता था क्या सिद्धार्थ गौरी को उस जादुई अंगूठी से बचा पाएगा जानने के लिए सुनते [संगीत] रहिए