ईद के दिन सुबह मिठाई बनाने के लिए मां फातिमा रद अल्लाह अन्हा बहुत ही मसरूफ थी आटा गूंथने और दीगर तैयारियों में लगी हुई थी क्योंकि सुबह ही सारे काम पूरे करने थे दूसरी तरफ 810 साल के मासूम से दो भाई अपना खेल छोड़कर मां के पास आ गए उनके मासूम लहजे में एक सवाल था अम्मा तुम्हें याद नहीं आज ईद है जरा बाहर आकर देखो तो सही मोहल्ले के लड़के-लड़कियां नए-नए कपड़े पहनकर कितना खुश हो रहे हैं और हम दोनों ने तो अभी तक नए कपड़े भी नहीं पहने क्या इसका मतलब यह है कि
हम आज ईद नहीं मनाएंगे थोड़ी देर बाद वे फिर कहने लगे अम्मा जल्दी से हमारे नए कपड़े पहना दो हम भी उनके साथ खेलते खेलते ईदगाह जाना चाहते हैं जब अब्बू आएंगे तो उन्हें हमारे साथ भेज देना हम उनके साथ वापस लौट आएंगे मां ने बच्चों के सिर पर मोहब्बत भरा हाथ फेरा उनके माथे को चूमा और बोली अभी ईदगाह जाने में काफी वक्त है बेटा तुम लोग बाहर जाकर थोड़ा घूम फिरा हो फिर मैं तुम्हें नए कपड़े पहना दूंगी हो सकता है तब तक तुम्हारे अब्बू भी आ जाएं शायद वोह तुम्हारे लिए नए कपड़े
लेकर आए तब मैं तुम्हें नए कपड़े पहना दूंगी और तुम अपने अब्बू के साथ ईदगाह चले जाना अब जाओ बेटा बाहर जाकर थोड़ा खेलो इस बीच मैं अपने काम निपटा लूं दोनों भाई बोले जी अम्मा फिर छोटा भाई अचानक सवाल करने लगा अम्मा क्या अब्बू हमारे लिए नए कपड़े लेने गए हैं मां ने दोनों बच्चों को अपने गले से लगा लिया उनके माथे पर प्यार से चूमा और अपने दिल के आंसू पोछे हुए हुए हंसकर कहा हां बेटा तुम्हारे लिए नए कपड़े आएंगे तुम्हें जरूर पहनाऊंगी अब तुम लोग बाहर जाकर खेलो सब ठीक हो जाएगा
मां ने अपने रब पर यकीन करके अपने बच्चों को दिलासा दिया दोनों भाई खुशी-खुशी बाहर चले गए मां ने अपने आंचल से आंसू पछे और मजबूरी में अपने काम में दोबारा मशगूल हो गई कुछ देर बाद दोनों भाई फिर रोते हुए घर लौट आए उन्होंने कहा अम्मा वे लोग हमें अपने नए कपड़े दिखाकर चिढ़ा रहे हैं वे कहते हैं देखो तुम्हारे पास हमारे जैसे नए कपड़े नहीं हैं अगर होते तो तुम इन्हें जरूर पहनते वे कहते हैं कि हमारे अब्बू कैसे हैं जो ईद के दिन भी हमारे लिए नए कपड़े नहीं लाए वे हमें ईदगाह
चलने को कह रहे हैं और बोल रहे हैं जल्दी से नए कपड़े पहनकर आओ अगर आना है वे खजूर के पेड़ के नीचे खड़े हैं और तब तक हमारा इंतजार करेंगे जब तक हम नए कपड़े पहनकर उनके साथ ना चले अम्मा अब्बू अभी तक क्यों नहीं आए अम्मी हमें जल्दी से नए कपड़े पहना दो ताकि हम आपके साथ ईदगाह जा सकें मासूम बच्चों की इस गुजारिश को सुनकर अम्मी अपने जज्बातों पर काबू नहीं रख सकी आंसू रोकना उनके लिए बड़ा मुश्किल हो गया लेकिन बच्चे अम्मी को मजबूती से गले लगाकर खामोशी से उनकी ओर देख
रहे थे सब्र खो चुकी अम्मी अपने बच्चों को अपने सीने से लगाकर सिसक सिसक कर रोने लगी कुछ ही पल में खुद को संभालते हुए अम्मी ने आंसू पछे और चेहरे पर जबरन एक हल्की मुस्कान लाते हुए बोली अभी ईदगाह जाने का वक्त नहीं हुआ है बेटा तुम लोग इतनी जल्दी क्यों कर रहे हो नमाज के लिए अभी काफी वक्त है इस दौरान बाहर जाकर थोड़ा घूम फिरा हो और देखो तुम्हारे अब्बू कहां है उन्हें ढूंढ कर ले आओ तब तक मैं अपना बाकी काम निपटा लेती हूं थोड़ा सा ही काम बचा है अगर तुम्हारे
अब्बू नए कपड़े लाते हैं तो मैं तुम्हें बहुत खूबसूरती से तैयार कर दूंगी फिर तुम मिठाई खाकर अपने अब्बू के साथ ईदगाह जाओगे ठीक है दोनों भाइयों ने कहा जी अम्मी अम्मी ने अपने दिल को मजबूत करते हुए बच्चों को तसल्ली दी लेकिन जैसे ही उन्होंने बच्चों के मासूम चेहरों की तरफ देखा उनकी आंखों में आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा बच्चों को अपनी हालत का अंदाजा ना हो इस डर से अम्मी एक कमरे से दूसरे कमरे में जाती रही इधर दोनों मासूम भाई परेशान होकर अम्मी अम्मी कहते हुए अम्मी के पास आए उन्होंने कहा अम्मी
हम अब्बू को ढूंढने जा रहे हैं अम्मी ने रंधे गले से कहा हां जाओ उनकी आवाज में छुपा दर्द बच्चे समझ नहीं सके बड़े भाई ने अफसोस जताते हुए कहा अब्बू कहां होंगे छोटे भाई ने बड़े भाई से पूछा अब्बू कहां गए बड़े भाई ने जवाब दिया पता नहीं चलो इधर-उधर ढूंढते हैं छोटे भाई के कंधे पर हाथ रखते हुए दोनों भाई अब्बू की तलाश में निकल पड़े इधर अम्मी अपने दिल का दर्द कम करने का कोई रास्ता नहीं पा रही थी उनकी बेचैनी और बढ़ गई वह सोचने लगी मैं अपने मासूम बच्चों को कैसे
बताऊं कि आज उन्हें नए कपड़े पहनाने की सामर्थ्य हमारे पास नहीं है फिर भी उन्हें कैसे तसल्ली दूं और आज तो ईद का दिन है वे मेरी बात क्यों मानेंगे या अल्लाह तुम्हारे अलावा कोई सहारा नहीं ईद के लिए जो मिठाई बनाई है वह भी कई दिनों तक थोड़ा-थोड़ा गेहूं बचाकर तैयार की है उसी से हलवा और रोटी बनाई है लेकिन नए कपड़े कहां से लाऊं या अल्लाह ये बोझ क्यों डाल दिया इस अम्मी के सिर पर तुम तो सबकी हालत जानते हो मैं इन मासूम बच्चों को कैसे समझाऊं या अल्लाह तुम रहम दिल और
सर्वशक्तिमान हो झूठ बोलना गुनाह है यह जानते हुए भी मैं अपने बच्चों को झूठे दिलासे और उम्मीद देकर बहला रही हूं लेकिन अब मैं क्या करूं यह तो बता दो हे अल्लाह तुम मुझे रास्ता दिखाओ तुम मेरे गरीब पति की हालत जानते हो तुम गरीबों के हालात से वाकिफ हो हे रहमान हे रहीम यह कहते-कहते मां रसोई में चली गई और जोर-जोर से चक्की चलाने लगी चक्की के घुर घुर की आवाज के साथ उनके दिल का दर्द भी बाहर आने लगा आंसू पहुंचते हुए भले ही मिठाई बनाने का काम तेजी से चल रहा था लेकिन
जैसे ही यह काम पूरा होने को आया एक और मुश्किल सामने खड़ी हो गई तभी अम्मा अम्मा कहते हुए दो मासूम बच्चे हाफ हांफ पे मां के पास आकर खड़े हो गए मां ने कहा बोलो बेटा क्या बात है मां ने अपनी इच्छाओं और आराम को हमेशा पति की गरीबी ब को देखकर दबा कर रखा था वह थोड़े में ही खुश रहती थी लेकिन आज मासूम बच्चों की छोटी सी ख्वाहिश ने उनके धैर्य को तोड़ दिया उन्होंने खुद को संभालते हुए बच्चों को गोद में उठा लिया मुस्कुराने की कोशिश की उनके माथे पर चुंबन किया
और कहा बोलो बेटा क्या कहना है दोनों बच्चों ने हाथों से अपनी आंखें मसल शुरू कर दिया यह देखकर छोटे भाई ने भी बड़े भाई की नकल कर ली मां ने कहा देखो बेटा तुम्हारे अब्बा सही समय पर आ जाएंगे मैं देखो यहां तुम्हारे लिए मिठाई बना रही हूं तुम मिठाई खाकर ईदगाह जाना थोड़ा सब्र करो बस थोड़ी ही देर और उन्होंने बच्चों को सीने से लगा लिया उन्हें प्यार से समझाया और कहा थोड़ा इंतजार करो बेटा मिठाई अभी तैयार हो जाएगी छोटे भाई ने आंखें मसलते हुए अचानक पूछा लेकिन हमारे नए कपड़े अम्मा यह
सुनते ही मां चौक गई जल्दी से बोली अरे बेटा ऐसा करते हैं तुम लोग जाकर पहले नहाओ अभी तक नहाए भी नहीं हो दोनों भाइयों ने एक साथ कहा नहीं अम्मा अभी तक नहीं नहाए मां के लिए मासूम बच्चों से छल करना बहुत दर्दनाक था उनका दिल अंदर ही अंदर जल रहा था लेकिन उन्होंने हंसते हुए कहा बेटा बिना नहाए क्या कोई ईदगाह जाता है जाओ जल्दी से नहाओ फिर सब तैयार हो जाएगा दोनों भाइयों ने कहा ठीक है अम्मा हम अभी जाकर नहा ले ते हैं आप सब कुछ तैयार रखना हम जल्दी से आ
जाते हैं दोनों खुशी-खुशी नाचते हुए बाहर निकल गए मां ने दुआ की जाओ बेटा अल्लाह हाफिज बच्चे तो चले गए लेकिन मां के दिल में चिंता और गहरी हो गई उनका दिल जैसे एक अथाह सागर में डूब रहा था मां सोचने लगी जब वे वापस आएंगे और कहेंगे हमें नए कपड़े पहनाओ हम ईदगाह जाएंगे तब मैं क्या करूंगी मां का मन अब और नहीं संभल सका उनकी आंखों से आंसू फूट पड़े उन्होंने सजदे में गिरकर अल्लाह से दुआ की हे अल्लाह तुम ही मेरा सहारा हो तुम इस बेबस मां की मदद करो तुम मुझे इस
स्थिति से बाहर निकालो लो हे अल्लाह तुम्हारे अलावा मेरा कोई नहीं है मुझे राहत दो इस स्थिति से मुक्ति दो इसके बाद मां किसी उन्मादी की तरह बोलने लगी हे अल्लाह तुम तो बच्चों की मां का दिल समझते हो तीन बार इन मासूम नासमझ बच्चों को बहला फुसलाकर मैंने किसी तरह संभाल लिया लेकिन अब क्या करूं अब क्या कहूं तुम ही मुझे रास्ता दिखाओ हे अल्लाह तुम ही मुझे सहारा दो तुम सर्वशक्तिमान हो तुम सब कर सकते हो फिर उन्होंने जोर से चिल्लाते हुए कहा तुम सब कर सकते हो अल्लाह तुम सब कर सकते हो
उधर नहाने के बाद दोनों भाई खुशी-खुशी हाथ में हाथ डाले घर की ओर चल पड़े कुछ ही देर में दोनों दोनों भाई हंसते खेलते घर पहुंचे और जोर से आवाज देने लगे अम्मा अम्मा हम आ गए अम्मा लेकिन मां की ओर से कोई जवाब नहीं आया छोटा भाई बड़ी मासूमियत से अपने बड़े भाई की ओर देखने लगा और पूछा भैया मां बोल क्यों नहीं रही है क्या मां सो रही है बड़ा भाई छोटे भाई को अपनी बांहों में लेकर उसे दिलासा देने लगा रुको मैं देखता हूं जैसे ही बड़ा भाई मां को जगाने के लिए
हाथ बढ़ाने वाला था उसी समय दरवाजे पर जोर से खटखटाने की आवाज आई बड़े भाई ने डरते हुए पूछा कौन है बाहर बाहर से कोई जवाब नहीं आया दोनों भाई चकित होकर एक दूसरे की ओर देखने लगे छोटा भाई डर के मारे बड़े भाई से चिपक गया तभी फिर से दरवाजे पर जोर से खटखटाने की आवाज हुई डर और घबराहट से दोनों भाई चिल्ला पड़े अम्मा अम्मा बाहर कौन है लेकिन मां की ओर से कोई आवाज नहीं आई फिर दरवाजे पर खटखटाने की आवाज के साथ कुछ भारी खड़खड़ की आवाज सुनाई दी दोनों भाई डर
गए उन्हें पता था कि अगर कोई रिश्तेदार परिवार का सदस्य या पड़ोसी घर पर आता है तो वह हमेशा सलाम करता है लेकिन यह सब कुछ उल्टा हो रहा था बड़े भाई ने छोटे भाई को और कसकर गले लगाते हुए कहा मुझे समझ नहीं आ रहा यह क्या हो रहा है मां भी कुछ बोल नहीं रही है डरते डरते दोनों भाई दरवाजे के पास गए जैसे ही वे वहां पहुंचे बाहर से फिर से खटखटाने की आवाज आई दोनों भाई थोड़ा पीछे हटे और जोर से चिल्लाकर पूछा कौन है दरवाजे पर बाहर से आवाज आई मैं
दर्जी हूं दरवाजा खोलो दोनों भाई हैरान रह गए उन्होंने पूछा दर्जी आप यहां क्यों बाहर से आवाज आई हां मैं दर्जी हूं दरवाजा खोलो मैं तुम्हारे लिए नए कपड़े लेकर आया हूं इन्हें ले लो जैसे ही यह बात सुनी दोनों भाइयों ने जल्दी से दरवाजे की कुंडी खोली सामने एक व्यक्ति नए कपड़ों के गट्ठर के साथ खड़ा था दोनों भाई एक पल के लिए हैरान रह गए दर्जी ने कपड़े उनकी ओर बढ़ाए बड़े भाई ने झटपट सारे कपड़े अपने हाथों में ले लिए और छोटे भाई का हाथ पकड़कर तेजी से दौड़ते हुए मां के पास
पहुंचा उस समय मां अब भी संभल नहीं पाई थी वह गुपचुप आंसू बहा रही थी दोनों भाई बोले अम्मा अम्मा देखो दर्जी हमारे लिए कितने सुंदर-सुंदर नए कपड़े लेकर आया है जल्दी से हमें कपड़े पहनाओ हम ईदगाह जाएंगे बड़े भाई की बात सुनते ही छोटा भाई भी चहक हुए बोला हां अम्मा जल्दी करो अगर देर हो गई तो हमें नमाज का समय नहीं मिलेगा मां यह सुनकर हैरान रह गई कुछ पल के लिए बच्चों की ओर देखा और उन्हें गले लगाकर फूट फूटकर रोने लगी इसके तुरंत बाद उन्होंने बच्चों को छोड़ दिया और सीधे सजदे
में गिर गई उन्होंने कहा है अल्लाह तुम्हारी महानता को कौन समझ सकता है उन्हें तुरंत समझ में आ गया कि जो व्यक्ति नए कपड़े लेकर दर्जी बनकर आया था वह वास्तव में दर्जी नहीं था निश्चित ही वह अल्लाह के भेजे हुए फरिश्तों में से एक था मां सजदे से उठी और जल्दी से बच्चों से बोली जाओ बेटा जाओ उसे मेरा सलाम कह देना और कहना कि वह आज हमारे घर से विदा हो जाए लेकिन बच्चों को यह बात याद ही नहीं रही दोनों भाई नए कपड़े पाकर इतने खुश थे कि उनकी खुशी का ठिकाना नहीं
रहा मां ने ब बच्चों को देख उनके सिर और पीठ पर हाथ फेर करर उन्हें गोद में लेकर प्यार किया और माथे पर चूमा फिर हल्के से डांटते हुए कहा बेटा क्या तुम अभी तक नहीं गए दर्जी साहब को क्या लगेगा वे सोचेंगे कि इस घर के लोग कितने बदतमीज हैं मेहमान बाहर दरवाजे पर खड़ा है और तुम यहां मस्ती कर रहे हो तुमने उसे भूल ही गए यह तो बहुत बड़ा गलत व्यवहार है तुरंत जाओ उसे मेरा सलाम पहुंचाओ और कहना कि वह आज हमारे मेहमान बने जाओ बेटा उन्हें बैठक में आराम से बैठने
के लिए कहो बिना देरी किए दोनों भाई दरवाजे की ओर भागे लेकिन तब तक दर्जी घोड़े पर सवार होकर घर से बहुत दूर निकल चुका था दोनों भाई जोर से चिल्लाने लगे दर्जी साहब ओ दर्जी साहब अम्मा ने आपको सलाम कहा है जल्दी वापस आइए आज आप हमारे घर दावत पर आइए हम बैठक का दरवाजा खोल रहे हैं लेकिन दूर से हवा के साथ जवाब आया अपनी अम्मा और अब्बा को मेरा सलाम देना किसी और समय मिलने आऊंगा अस्सलाम वालेकुम दोनों भाई दौड़ते हुए मां के पास आए और सब कुछ बता दिया बोले दर्जी साहब
ने तुम्हें और अब्बा को सलाम कहा है वह घोड़े पर सवार होकर उस तरफ जा रहे हैं जल्दी आओ मां उन्हें देखोगी देखोगी ना जल्दी करो और खिड़की से देख लो जल्दी आओ मां अगर देर करोगी तो उन्हें फिर नहीं देख पाओगी दर्जी साहब कितने खूबसूरत लगते हैं आओ ना मां मां ने बच्चों की बात सुनकर खिड़की के पास आकर खड़ी हुई और बाहर की ओर देखा उन्होंने देखा एक तेजस्वी पुरुष नजर आया वह आकाश की ओर उड़ते जा रहे थे और उनके शरीर की चमक चारों ओर फैली हुई थी उनकी रोशनी सूर्य की किरणों
को भी फीका कर रही थी मां तन्मय होकर यह सब देख रही थी अचानक वह पुरुष घोड़े सहित कहीं अदृश्य हो गए उन्हें अब और नहीं देखा जा सकता था इतने में दोनों भाई जोर से चिल्लाकर बोले अम्मा अम्मा देखो वो रहे अब्बा दूर से आ रहे हैं वह मां ने बच्चों को लेकर अंदर कमरे में ले गई और उनके शरीर पर नए कपड़े पहनाने लगी उसकी आंखों से खुशी के आंसू बह रहे थे दोनों भाइयों ने हैरानी से पूछा अम्मा अम्मा तुम क्यों रो रही हो मां ने कहा बेटा मैं क्यों रो रही हूं
यह तुम अभी नहीं समझोगे तुम्हारी उम्र अभी इतनी नहीं हुई है लेकिन आज से यह बात याद रखना एक पल के लिए भी अल्लाह ताला को भूलना मत अल्लाह को हमेशा याद रखना जो हमेशा अल्लाह को याद रखता है वह कभी भी मुसीबत में नहीं पड़ेगा अगर तुम इस छोटी सी बात को हमेशा अपने दिल में बसा लोगे और जिंदगी भर अल्लाह को नहीं भूलोगे तो देखोगे कि अल्लाह हमेशा तुम्हारी मदद करेगा वादव कभी तुम्हें कठिनाइयों में नहीं डालेगा मां अपने बच्चों को यही नसीहत दे रही थी और साथ ही उन्हें नए कपड़े पहना रही
थी जब बच्चों को सजाने का काम पूरा हो गया तो मां ने सुरमे का डिब्बा लाकर छोटे बेटे की आंखों में सुरमा लगाया बड़े बेटे की आंखों में सुरमा लगाते ही दरवाजे के बाहर से आवाज आई अस्सलाम अलेकुम या फातिमा जहरा अंदर से हजरत फातिमा रजि अल्लाह ताला अन्हा ने जवाब दिया वालेकुम अस्सलाम या अली करीम उल्लाह छोटा बेटा दौड़कर बाहर गया और चिल्लाने लगा अब्बा आ गए अब्बा आ गए बड़ा बेटा बाहर जाने ही वाला था लेकिन मां ने उसे रोक लिया क्योंकि उसकी आंखों में सुरमा लगाना बाकी था मां थोड़ी गुस्से में बोली
बैठो बैठो पहले सुरमा लग जाने दो इस बीच छोटा भाई अपने अब्बा का हाथ पकड़कर अंदर ले आया तब तक बड़े भाई की आंखों में सुरमा लगाया जा चुका था दोनों बेटों को देखकर अब्बा हैरान हो गए और बोले यह क्या इतने सुंदर कपड़े ये कहां से आए फिर दोनों भाइयों ने अपनी मां और अब्बा को गले लगाकर खुशी जताई हजरत फातिमा रजि अल्लाह ताला अन्हा ने बच्चों की आवाज शांत कराते हुए हजरत अली रजि अल्लाह ताला अनहुक सारी घटना सुनाई हजरत अली रजि अल्लाह ताला अनहुई यह बात सुनी सजदे में गिर गए और बोले
हे अल्लाह तुम्हारे लिए कुछ भी असंभव नहीं है तुम महान हो असीम हो तुम दयालु और सर्वशक्तिमान हो सजदे से उठकर उन्होंने हजरत फातिमा रजि अल्लाह ताला अन्हा से कहा जो दर्जी बनकर बच्चों के लिए कपड़े लाए क्या तुम उन्हें पहचानती हो क्या तुमने जान लिया कि वह कौन थे हजरत फातिमा रजि अल्लाह ताला अन्हा ने कहा नहीं लेकिन इतना निश्चित है कि वह अल्लाह के किसी भेजे हुए फरिश्ते थे इसमें कोई शक नहीं हालांकि यह मेरी अपनी धारणा है हजरत अली रजि अल्लाह ताला अन्हो ने कहा हां तुमने सही कहा यह अल्लाह की महिमा
है वह हजरत जिब्राईल अलैहि सलाम थे हजरत फातिमा रजि अल्लाह ताला अन्हा की जुबान से अचानक जोर से निकला अल्लाह हू अकबर यह कहते हुए वह भी सजदे में गिर गई उन्हें देखकर हजरत हसन और हजरत हुसैन रजि अल्लाह ताला अनहुई और उनका हुबहू अनुसरण करते हुए सजदे में गिर गए प्रिय दर्शकों आशा है कि आपको यह वीडियो पसंद आया होगा अगर अच्छा लगा हो तो इसे लाइक और शेयर करें ताकि अन्य मुस्लिम भाई बहन भी इसे जान सके और इस तरह की और वीडियो पाने के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें अस्सलाम वालेकुम