दोस्तों एक लड़का जैसे-जैसे बड़ा हुआ तो उसके बहुत सारे दोस्त बनने लगे वह उनके घर पर जाने लगा दोस्त उसके घर पर आने लगे अब जो परिवार के लोग थे वह बहुत खुश हुए कि चलो उनका बेटा जो है वह सामाजिक हो रहा है उसकी जान पहचान बढ़ रही है क्योंकि जो दोस्त थे वह कभी कभार उस परिवार की मदद भी कर देते थे लेकिन उन लोगों ने जरा सा भी यह नहीं सोचा कि उस घर में जो दो जवान बेटियां थी लड़कियां थी कहीं यह दोस्त उन लड़कियों की वजह से तो नहीं आते हैं
यह उनके दिमाग में आया ही नहीं और वह उन दोस्तों को अपने घर में बिठाने लगे उन्हें कई मौकों पर अपने रात अपने घर पर रात में भी रोकने लगे लेकिन उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि पर्दे के पीछे इस घर के अंदर क्या चल रहा है और फिर एक दिन कुछ ऐसा होता है कि जो उस लड़के के दोस्त थे उन लोगों ने उन लड़कियों के साथ कुछ ऐसा कर दिया कि वह परिवार अपना सर पटक लेता है अपना सर पकड़ लेता है उनके पैरों तले जमीन खिसक जाती है तो दोस्तों एक जमाने
को सीख देने वाली कहानी है आइए जानते हैं पूरी कहानी इस वीडियो में लेकिन वीडियो में आगे बढ़ने से पहले बस ही रिक्वेस्ट वीडियो को लाइक कर दीजिए चैनल को भी सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि मेरा हौसला बढ़ता रहे दोस्तों एक कहानी है हरियाणा के पानीपत की एक परिवार होता है जिसमें एक बेटा दो बेटियां और माता-पिता होते हैं लड़के का नाम अखिलेश होता है जबकि जो बेटियां थी एक का नाम मीना और एक का नाम नाम पिंकी होता है मीना की उम्र 18 साल जबकि पिंकी की उम्र मात्र 16 साल होती है अब जो अखिलेश
था वो घूमता इधर उधर काम नहीं करता था परिवार के लोग उससे बहुत खफा होते थे लेकिन एक दिन जो है क्योंकि परिवार बहुत गरीब था तो उसकी एक जगह पर वो लोग काम लगवा देते हैं एक कंपनी में काम लगवा देते हैं अब जिस कंपनी में व काम पर लगता है उसी कंपनी में एक और लड़का काम कर रहा था जो कि उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले का रहने वाला था उसका नाम ठाकुर होता है वह उसका सीनियर होता है उसके अंडर में अखिलेश जो है व काम करने लगता है धीरे-धीरे दोनों की जान
पहचान बढ़ती है और धीरे-धीरे जान पहचान जो है वह दोस्ती में बदल जाती है दोनों एक ही साथ काम करते धीरे-धीरे जब दोस्ती और गहरी होती गई तो जो अखिलेश था वह अपने घर की सारी बात उसको बताने लगा कि मेरे घर में बहुत गरीबी है मेरी दो बहनें हैं और उनकी शादी करनी है सारी जिम्मे ी मेरे ही ऊपर है अब अखिलेश जो है वह ठाकुर को सारी बात बताने लगा तो इस तरीके से काम चलता रहा और एक दिन अखिलेश ने उससे कहा कि यार मेरे घर पर पूजा है क्या तुम आओगे तो
ठाकुर ने कहा क्यों नहीं आऊंगा यार तो मेरा दोस्त है क्यों नहीं चलेंगे अब दोस्तों जो है वह उसके घर पर गया वहां पर पूजा था दिन भर का प्रोग्राम था तो वहां पर जब वो मीना और पिंकी को देखता है तो अखिलेश से पूछता है कि यार यह कौन है यह लड़की कौन है तो कहता है यार मेरी बहने हैं कहता है यार तेरी बहन मेरी बहन कोई बात नहीं अच्छी है अब दोस्तों उसके बाद जो अखिलेश था ठाकुर को अपने मां-बाप से मिलवा है पूजा का कार्यक्रम शुरू होता है धीरे-धीरे जो है वह
ठाकुर जो था उस परिवार में घुल मिल जाता है और धीरे-धीरे व पिंकी और मीना तक भी पहुंच जाता है वो उसे भैया भैया कहने लगी यह उनको सिस्टर सिस्टर कहने लगा और इस तरीके से पूरा दिन वहां प्रोग्राम चलता रहा अच्छी तरीके से वह उन दोनों लड़कों के साथ घुलमिल जाता है उसके बाद फिर जब पूजा समाप्त हुआ यह अपने रूम पर गया जहां पर रहता था अगले दिन जब काम पर गया अखिलेश तो ठाकुर जो है उसे और अपनापन दिखाने लगा कहने लगा यार तेरा परिवार बहुत अच्छा है आंटी बहुत अच्छे हैं अंकल
बहुत अच्छे हैं और जो सिस्टर है तेरी वह भी बहुत अच्छी है तो इससे जो है अखिलेश बहुत खुश होता है कि चलो एक सच्चा दोस्त मिल गया लेकिन उसने जरा भी नहीं सोचा कि इसके दिमाग में चल क्या रहा है फिर उससे ठाकुर कहता है कि यार अब जब भी कोई त्यौहार होगा तो मैं तेरे घर आ आ जाया करूंगा क्योंकि मैं अपने घर तो जा नहीं पाता हूं यहां से दूर है तो अखलेश कहता है यार कोई बात नहीं तेरा ही घर है जब मर्जी आ जाना तेरे ही परिवार है अब दोस्तों वो
हर हफ्ते उसके घर पर जाने लगा किसी ना किसी बहाने से और जब भी वो जाता था तो मीना और पिंकी के लिए कुछ कुछ ना कुछ लेकर जाता था और इस तरीके से बार-बार आने और जाने से वह जो है मीना जिसकी उम्र मात्र 18 साल की थी अभी उसकी नई नई उम्र थी वह जो है ठाकुर के बातों में आ जाती है और फिर वह जो है उससे चुपके से बातें करने लगती है उसका नंबर ले लेती है घर के किसी मोबाइल से फिर जब भी मौका मिलता उससे बातें करने लगती है अब
इधर सारे लोग समझ रहे थे कि यह जो है सच्चा दो है और रक्षाबंधन के मौके पर भी पिंकी और मीना उसे भाई समझकर राखी बांधती थी लेकिन दोस्तों जो ठाकुर था उसके मन में कुछ और ही चल रहा था अब मीना को अपनी जाल में फंसा लेता है उससे बातें करने लगता है धीरे-धीरे बात पिंकी को पता चल जाती है तो पिंकी जो है मीना से कहती है कि जो भी तुम्हारे और ठाकुर के बीच में चल रहा है सब मुझे पता है तो वो कहती है चुप रहना बता तुझे क्या चाहिए तो दोस्तों
वह खाने पीने में 16 साल उसकी उम्र थी खाने पीने की चीजें उसको चाहिए थी तो बस वह खाने पीने की फरमाइश करती है वह जो है ठाकुर को फोन लगाती है कि पिंकी को सब पता चल गया है इसके लिए भाई कुछ करना पड़ेगा तो वह जो है उसके लिए खाने पीने की ची चीजें लाकर देने लगा और इस तरीके से अब उसका काम और आसान हो गया क्योंकि दोनों बहनें अक्सर साथ रहती थी तो इसीलिए जो है यह दोनों डरते थे जो मीना थी और ठाकुर था दोनों डरते थे कि कहीं इसको कुछ
पता ना चल जाए लेकिन अब उसको पता ही चल गया था तो इनका डर खत्म हो जाता है अब क्या होता है कि जब भी उनको मिलना होता था तो जो पिंकी थी वह घर के बाहर पहरेदारी देती अगर घर में कोई नहीं होता और जो मीना थी वह ठाकुर के साथ घर में होती इस तरीके से उनकी मुलाकातें चलने लगी ऐसे-ऐसे दोस्तों जब काफी दिन बीत गया तो पिंकी के भी मन में ख्याल आने लगा कि नहीं जो दीरी के साथ हो रहा है वो मुझे भी मेरे साथ भी होना चाहिए जो यह ऐस
कर रही है मुझे भी करना चाहिए तो वह जो है अ ठाकुर से बोलती है कि तुम्हारे जो मजे हैं वह मैं कह दूंगी घर में अब जो है वह कहती है वरना मुझसे भी बातें करो तो इस तरीके से दोस्तों वह उससे भी बातें करने लगता है लेकिन अब वो दोनों से कैसे बातें करता और यह भी डर था कि कहीं ये किसी से कुछ कह ना दे तो इसीलिए अपने एक और दोस्त को वह गोंडा से बुलाता है जिसका नाम सोनू होता है कि भाई काम पर आजा यहां पर काम है और ऐसी
ऐसी मेरी कहानी चल रही है यार तेरे भी लाइफ में कुछ इंटरेस्टिंग हो जाएगा वह दोस्तों फौरन वहां से निकल लेता है पानीपत आता है और उसके साथ काम करने लगता है और फिर जो है पिंकी से सोनू की बातचीत करा देता है यह दोनों आपस में बातें करने लगते हैं धीरे-धीरे जो है सोनू की दोस्ती अखिलेश से हो जाती है फिर यह दोनों उसके घर पर आने लगते हैं अब परिवार गरीब था तो किसी भी चीज की मदद होती थी तो ठाकुर जो था वह अच्छे पैसे कमाता था वह जो है उनकी मदद भी
कर दिया करता था इस तरीके से चल रहा था लेकिन अभी तक इन चारों लोगों के अलावा किसी को भी नहीं पता था कि आखिर घर में चल क्या रहा है अब दोस्तों एक दिन क्या होता है कि अखिलेश के गांव में किसी की बारात आनी थी तो उस शादी में रंगारंग ऑर्केस्ट्रा का प्रोग्राम था तो अखिलेश ठाकुर से बताता है सोनू से बताता है कि यार मेरे गांव में ऐसी ऐसी शादी है वीआईपी शादी है बहुत अच्छा प्रोग्राम है दिल्ली से आर्केस्ट्रा की पार्टी आई है इतनी सारी लड़कियां डांसर हैं तो एक काम करना
यार तुम लोग भी आना देखने ठाकुर कहता यार क्यों नहीं आएंगे अब वह तो इसी मौके के इंतजार में रहता था तो वह कहता है कि सोनू को भी ले आना कहता है ठीक है उसको भी लेकर आऊंगा अब ये लोग जाते हैं दोस्तों अच्छा खासा प्रोग्राम था ऑर्केस्ट्रा देखते हैं लेकिन 2 बजे जब प्रोग्राम बंद हो जाता है तो उसके बाद यह हुआ कि चलो अब घर पर चलते हैं सोते हैं घर पर वह जाता है सोनू और ठाकुर को भी लेकर जाता है उसके बाद उन दोनों को एक जगह सुला देता है और
एक जगह जो कमरे में पिंकी और मीना यह दोनों सो जाती हैं लेकिन अब इन लोगों को तो अपनी अपनी जगह पर नींद आ नहीं रही थी पूरा परिवार जो था गहरी नींद में सोया था अब दोस्तों आधी रात को कुछ ऐसा हुआ कि जो ठाकुर था और जो सोनू था ये दोनों जो है अपने-अपने पार्टनर के साथ जहां उनको मौका मिला मीना इधर आ गई और इधर से जो सोनू था वह चला गया पिंकी के पास अब इस तरीके से वो दोनों अपना जो भी प्यार मोहब्बत था व करने लगे लेकिन तभी जो है
अखिलेश के पिता की आंख खुलती है तो देखते हैं कि यह क्या हो रहा है कुछ अजीब सी हरकतें हो रही हैं फिर दोस्तों रात को बवाल मचता है वह देख लेते हैं रंगे हाथ पकड़ लेते हैं शोर मचता है और फिर उसके बाद वह कहते हैं कि नहीं ऐसी कोई बात नहीं है फिर वो अपने अपने जगह पर चले जाते हैं अब जो अखिलेश था और उसकी मां थी वो उन्हीं को ही डांटने लगते हैं यह लोग कि तुम ऐसे फुआ उड़ाते हो अपनी ही बेटियों का फुआ उड़ाते हो तुम्हें कुछ पता नहीं रहता
तुम्हें कुछ सूझता नहीं तुम सठिया गए हो तुम्हारी बुद्धि काम नहीं कर रही है इस तरीके से दोस्तों जो कि आंखों से वो देख लेते हैं पकड़ भी लेते हैं लेकिन अब रात के अंधेरे का फायदा उठाकर वो जो है अपने अपने जगह पर चले जाते हैं अब उन्हीं को ही झूठा बना देते हैं यह सारे लोग मिलकर लेकिन अब वह सोचते हैं मैं क्या करूं अब यही लोग जो कह रहे हैं शायद यही सही कह रहे हैं शायद मुझे ही कोई भ्रम हुआ हो इस तरीके से जो है उन्हें वह लोग चुप करा देते
हैं उन्हें झूठा साबित कर देते हैं लेकिन अब जो पानी था वह सर से ऊपर जा चुका था अब यह लोग जो है इस तरीके से अलग-अलग र हरहना इनका मुश्किल हो जाता है एक दिन क्या होता है कि पिंकी और मीना घर से गायब हो जाती हैं जब घर से गायब हो जाती हैं एक घंटा बीतता है दो घंटा बीतता है तो परिवार सोचता है कि वह लोग कहां गई कहां गई होंगी फिर जो है अखिलेश ठाकुर को फोन लगाता है कि भाई ऐसी ऐसी बात है यार मीना और पिंकी पता नहीं कहां गायब
हो गई हैं सोचता है कि अखिलेश से ठाकुर से बता दूं और वो आकर ढूंढने में हमारी मदद करेगा लेकिन जब उसे फोन लगाता है तो ठाकुर का नंबर बंद आ रहा था उसे समझ में नहीं आता कि उसका नंबर क्यों बंद आ रहा है अब वो उस दिन तो काम पर जाता नहीं है क्योंकि यहां पर घर में अलग ही विपत्ति पड़ी थी दोनों बहनें गायब थी वह भी एक 18 साल की एक 16 साल की तो वह जो है जब शाम बीत हो जाती है वह दोनों नहीं लौट कर आती हैं तो जाते
हैं पास के पुलिस स्टेशन पर वहां में वहां पर रिपोर्ट दर्ज कराते हैं कि ऐसी ऐसी बात है मेरी दो बहनें जो है वो गा है अब पुलिस जो है अपने अस्तर से छानबीन करती है लड़कियों का मामला था वो भी इस जिसमें एक नाबालिक थी तो वह जो है इधर-उधर ढूंढती है और फिर सीसीटीवी कैमरा जब चेक करती है तो एक जगह एक शख्स जो है वो उन दोनों को बाइक पर बिठाकर ले जाते हुए दिखता है जब पुलिस उसको देखती है गौर से परिवार को दिखाती है कि ये बंदा कौन है तो दोस्तों
उनके पैरों तले जमीन खिसक जाती है क्योंकि वो जो शख्स था वो ठाकुर ही होता है अब उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि वह ऐसा काम कर सकता है वह तो उनसे राखी बंधवा आता था उन्हें बहन कहता था वह भी उसे भाई कहती थी वह ऐसा क्यों ले जाएगा पुलिस भी हैरान थी क्योंकि भागने वाले अक्सर दो ही लोग होते हैं एक लड़का एक लड़की यहां तो दो लड़की एक ही के साथ भाग गई थी वह जो है अब पूरे तरीके से उनके पीछे लग जाती है कि कहीं ऐसा ना हो कोई क्राइम
हो जाए तो फिर जब काफी धर पकड़ करती है और वह उन उन दोनों को लेकर अपने ननिहाल लेकर चला जाता है लेकिन जब उसे पता चलता है कि पुलिस जो है इसमें काफी सक्रिय हो चुकी है तो 15 दिन बाद वह पिंकी और मीना को उसी थाने के गेट पर लाकर छोड़ जाता है और उसके बाद पुलिस जो है उनकी बरामदगी करती है जब परिवार को फोन करके बुलाती है कि भाई तुम्हारी जो बेटियां हैं पिंकी और मीना मिल गई हैं आप आकर इन्हें देख सकते हैं ले जा सकते हैं अब वह लोग जब
आते हैं तो देखते हैं जैसे ही तो उनके पैरों तले जमीन खिसक जाती है क्योंकि उन दोनों की मांग सिंदूर से भरी हुई थी उन्होंने शादी कर ली थी वह जो है किसी तरीके से वहां से शांति पूर्वक उनको घर लेकर जाते हैं मारते हैं पीटते हैं डांटते हैं पूछते हैं यह सब क्या है तो मीना बताती है कि मैंने जो है ठाकुर से शादी कर ली है जो पिंकी है उसने जो है वह सोनू से शादी कर ली है अब पर वार कोय रिश्ता मंजूर नहीं था इधर इनकी काफी बदनामी हो चुकी थी तो
वह जो है उनके मांग के जो सिंदूर थे उनको धोते हैं उसके बाद कहते हैं कि आज के बाद ऐसी हरकत मत करना उनको काफी डांटा जाता है अपने स्तर से जो भी कुछ किया गया हो वह जो है डर जाती हैं उसके बाद कहती हैं ठीक है जो भी हो गया जो गलती हो गई हो गई अब हम ऐसी गलती नहीं करेंगे लेकिन दोस्तों जैसे ही दो-तीन महीने बीतता है इधर जो ठाकुर था सोनू था यह दोनों वहां से काम छोड़ चुके थे क्योंकि अब उन्हें भी डर था कि हम यहां पर परदेश में
आकर हमने ऐसा काम कर दिया तो हमें लोग आकर घेर भी सकते हैं मार भी सकते हैं तो इसीलिए उन्होंने काम छोड़ दिया लेकिन जब तीन महीने बीते अभी यह 31 जनवरी की बात है तो दोस्तों फिर एक बार वह दोनों दोबारा गायब हो जाती हैं दोबारा यह लोग पुलिस में जाते हैं और उसके बाद फिर सीसीटीवी चेक किया जाता है तो उसमें दिखाई देता है कि ठाकुर जो है इन दोनों को बिठाकर अपने साथ फिर उसी तरीके से लेकर जाता है अब परिवार अपना सर पीट लेता है कि एक बार हमने माफ कर दिया
उसको लेकिन अबकी बार वो लोग एफआईआर दर्ज करवाते हैं पुलिस अभी तक उनको ढूंढ ही रही है उम्मीद है कि वो लोग जल्दी मिल जाएंगे लेकिन दोस्तों अगर कोई आपका लड़का हो आपका भाई हो अगर आप वो कहीं दोस्ती कर रहे हो इस तरीके से तो और दोस्तों को घर पर लेकर आ रहे हो तो कई एंगल से जरूर सोचिए कि क्या माजरा हो सकता है और बेहतर होगा कि उनको बता दें कि जो उनकी यारी दोस्ती है वह घर के बाहर ही करें क्योंकि आजकल जो जमाना है वह भरोसे के लायक है ही नहीं
तो दोस्तों यह रही कहानी आपको कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएं और अच्छी लगी हो तो वीडियो को लाइक नहीं किया तो लाइक कर दीजिए चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए इसी प्रकार की कहानियों के लिए फिर मिलेंगे अगले वीडियो में तब तक के लिए जय हिंद