[संगीत] मैं मर ही जाती तो बेहतर था। मेरी वजह से सबकी जिंदगी अज़ाब बनके रह गई। ऐसा क्यों बोल रही हो तुम? भाई है वो तुम्हारा। सुना तुमने? कुछ नहीं कहेगा तुम्हें। वो गुस्से का बुरा है लेकिन उसके दिल में तुम्हारे लिए मोहब्बत है। और जिनसे वो मोहब्बत करता है वो उनको कभी नुकसान नहीं पहुंचाता। चुप हो जाओ। सुना और इस तरह से सर झुका कर मत बैठो। मगर वो तो मुझसे नफरत करते हैं। आसिल तुम यह कैसे कह सकती हो कि वो तुमसे नफरत करता है। उसकी जगह कोई भी भाई होता तो वो ऐसे
ही करता। और देखा तुमने? आबिद ने भी उससे बात की। अभी फरहद गुस्से में है लेकिन अगर तुम दोनों अपने हक के लिए खड़े हो जाओगे तो कुछ नहीं होगा। आबिद ने तो बहादुरी का मुजाहरा कर दिया है। लेकिन अब तुम भी अपने दिल से यह डर निकाल दो। फरहद और हाजरा साहिबा कोई भी तुम दोनों के इरादों को नहीं तोड़ सकेगा। तुम देख लेना सब कुछ बिल्कुल नॉर्मल हो जाएगा। सुना तुमने? अब चुप हो जाओ। कुछ नहीं होगा। सब ठीक हो जाएगा। आप दोनों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। खुदा के लिए अब यहां पर
खड़े होकर मत लड़े। आप अंदर चलें। जाकर गुलशन का ख्याल रखें। मैं इससे बात करती हूं। आसिल आप अंदर जाएं प्लीज। बगैर सोचे समझे तुम क्या कर रहे हो? क्या मैंने कुछ गलत कहा? जो हो रहा है तुम भी जानती हो? तुमने देखा आबिद ने क्या किया मेरे साथ? आबिद तुम्हारा अपना है कोई गैर। सिर्फ इसी वजह से मैंने उसे जिंदा छोड़ दिया है। और फिर उसने कोई ऐसा गलत काम भी तो नहीं किया। डॉक्टर उसने मेरे एतमाद को ठेस पहुंचाई। भरोसा तोड़ा है उसने मेरा। बस इसी तरह ही बोलते रहना। कभी किसी की मत
सुनना। तो तुम क्या चाहती हो? मैं चुपचाप देखता रहूं। अगर आबिद मेरा कजन ना होता और गुलशन मेरी बहन ना होती तो कब का मार देता। आखिर ये सब करके क्या साबित करना चाहते हो? बताओ मुझे फरा। तुम तो सब जानती थी ना? जानती थी ना तुम हां। तो क्या तुम उन दोनों को मारना चाहोगे? जरूरत पड़ी तो मार भी दूंगा। चलो आओ मेरे साथ। तुम जो भी करना चाहते हो मुझे साफ-साफ बताओ। हां। और एक बात मेरी भी सुन लो। तुम ऐसा कोई कदम नहीं उठाओगे जिससे उन दोनों का नुकसान हो। अब मैं तुम्हें
कोई भी गलत काम नहीं करने दूंगी। आओ। आओ ना [संगीत] तुम अपनी बेटी की हिफाजत नहीं कर सकी और मुझे यह हरगिज़ बर्दाश्त नहीं कि हमारे खानदान की बेइज्जती हो। कोई लड़का देखकर इसको यहां से चलता करो। अब तुम्हारी बेटी के यहां रहने की कोई गुंजाइश नहीं। समझी तुम? मुझे आपकी यह बात बहुत अच्छी लगी। [संगीत] गुलशन चलो अपना सामान बांधो। हमें जाना है। अब मैं तुम्हें यहां नहीं रहने दूंगी। अम्मी मैंने आपका दिल दुखाया ना। जो भी हुआ उसे छोड़ो। तुम मेरी बेटी हो। मेरे साथ ही चलोगी। [संगीत] आप ठीक है ना? मैं ठीक
हूं। गुलशन ठीक हूं। सब ठीक है। आबिद आप थोड़ी देर बैठे मैं अभी आती हूं। नहीं इसकी जरूरत नहीं गुलशन जो मैंने सुना सच है जी हां आंटी कोई वजह [संगीत] मैंने भरत को बताया है। अब पता नहीं वो समझा या नहीं। लेकिन मेरे पास और कोई हल नहीं था। प्लीज मेरी तरफ इस तरह मत देखिए आंटी। ऐसा लगता है जैसे मैंने कोई बहुत बड़ा गुनाह कर दिया जिसकी माफी मुझे मिलने में ही नहीं आ रही। ऐसा नहीं करना चाहिए था। [संगीत] गलती गुलशन की भी नहीं आंटी। उस बेचारी ने भी कोई गुनाह नहीं किया।
बदकिस्मत थी वो। उसने बस गलत आदमी पर भरोसा कर लिया था। किसी और के बोले झूठ का बोझ उसे उठाना पड़ा। लेकिन उसके यहां बच्चा होने के बाद वो बेबस लड़की है जिसे एक साहिबान चाहिए आंटी। रहने दो इसे गुलशन। अगर यह खता है या यह गुनाह है तो भी यह नाकाबिले माफी तो नहीं है ना। इस जहान में किस इंसान से गलती नहीं होती? आंटी बताएं। हम सब से खताएं होती है, गलतियां होती है। शायद आपसे भी कोई बहुत बड़ी गलती हुई होगी। कोई मासूम नहीं। और कई बार गलती करना इंसान के बस में
नहीं होता। पर उसे माफ करना बस में होता है। [संगीत] आबिद ने मुझे कायल कर लिया। इसके साथ हमें जाना होगा। बच्चे को उठाओ और आ जाओ। [संगीत] हो सकता है यह हमारा आखिरी सफर हो। मैं तुमसे जुदा तो नहीं होना चाहती। अगर तुम ऐसा चाहते हो तो मुझे मंजूर है। [संगीत] जिंदगी बहुत ही अजीब चीज है। उन रास्तों पर ले जाती है जहां कभी सोचा भी ना हो और कुछ रास्ते बहुत दुश्वार गुजार होते हैं। ज़ैनब बच्चे को कमरे में ले जाओ। मेरा हाथ मत छोड़ना प्लीज। [संगीत] हौसला रखो गुलशन। कुछ नहीं होगा। [संगीत]
लगता है तुम्हें घर आने का वक्त मिल गया है आबिद अली शाम बखैर सब लोगों को मुझे आप सबको कुछ बताना है। क्या बात है? मैं गुलशन से शादी कर रहा हूं। क्या? क्या? क्या बकवास है ये? ये क्या कह रहे हो आबिद? [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] गो ठंड लग रही है क्या? नहीं मैं बिल्कुल ठीक हूं। तुम्हारा शुक्रिया तुमने मुझसे इतना तो पूछा। मैंने सोचा कहीं तुम फिर से बीमार ना हो जाओ। तुम मेरी फिक्र मत करो। अब तुम्हें मुझे सब कुछ बताना होगा। कुछ भी छुपाने की जरूरत नहीं है। और इस बार
तुम्हें सवाल जवाब करने की जरूरत नहीं। हंसने वाली क्या बात है? मजाक लग रहा है क्या? हां बताओ। फिर हम दोनों मिलकर हंसेंगे उस बात पे। मैं तुम पे नहीं हंस रही हूं बल्कि खुद पे हंस रही हूं। वैसे भी अगर कोई बात हंसने लायक हो तो तुम्हें कौन सा उस पर हंसी आएगी? तुम्हें तो हंसी आती ही नहीं है। सही कहा। वैसे भी मुझे हंसने की जरूरत नहीं। अब यह फिजूल बातें छोड़ो और जवाब दो मेरी बात का। यह फिजूल बात है। अगर तुम आबिद और गुलशन की कहानी सुनना चाह रहे हो तो मैं
सुनाती हूं। तो गौर से सुनो। आबिद तुम्हारी इज्जत की हिफाजत कर रहा है। क्या तुम्हें पहले ही मालूम था? नहीं मालूम था मुझे। अब जान चुकी हूं। झूठ बोल रही हो तुम। सच बोल रही हूं। और तुम अच्छी तरह से जानते हो कि मैं तुम्हारे साथ कभी भी झूठ नहीं बोलती। फरहद अगर आबिद गुलशन को इज्जत देना ही चाहता है तो बताओ इसमें हर्ज क्या है? कोई गलत काम तो नहीं है ना? [संगीत] मेरी इजाजत के बगैर तुम इतना बड़ा कदम कैसे उठा सकते हो? इसके बच्चे के बाप बनोगे? शर्म करो कुछ। अम्मी बस भी
करें। खामोश रहो। निर्मत कुछ बोलो ना। अम्मी ये हमारा हत्मी फैसला है। मैं तो बहुत ही हैरान हूं। तुमने हमसे छुपाकर जो कुछ भी किया बहुत गलत किया। गुलशन ने एक बच्चे को जन्म दिया। ये खता थी उसकी। लेकिन क्या? हम क्या करें अब उसका? क्या उसे इस घर से निकाल के बेसहारा कर दें? जो मैं चाहूंगी वही होगा इस घर में। मैं ऐसी किसी चीज की इजाजत नहीं दूंगा अम्मी। जिस बच्चे को मैं अपना बेटा समझा था वो मेरा नहीं था। मेरा खून नहीं था वो। ना तो सफिया इस बच्चे की मां थी और
ना मैं इसका बाप। ये कामिल जिसे गुलशन नासिर कह के पुकारती है। मेरा बेटा नहीं तो क्या हुआ? क्या फर्क पड़ता है इससे? क्योंकि मैं इसे अपना बेटा मान चुका हूं। यह बाप के बगैर बड़ा नहीं होगा। इसीलिए मैंने सोचा है कि ये शादी हो और गुलशन ने हां कह दिया। तुम समझ नहीं रहे हो। तुम्हें इन मां बेटी ने मिलकर बेवकूफ बनाया है। मैं किसी भी कीमत पर तुम्हें बर्बाद नहीं होने दूंगी और मेरी ये बात सब सुन ले। मेरा फैसला पुख्ता है अम्मी। आप ये आंटी गुलशन से कुछ भी नहीं कहेंगी। गुलशन मेरी
बीवी बनेगी। चाहे ये मियां बीवी का रिश्ता सिर्फ कागजी हो। इतना अकलमंद बंदा यह गलती कैसे कर सकता है? मुझे तो यकीन ही नहीं आ रहा। मैं ऐसा करने की इजाजत कभी ना देता। मैंने किसी से इजाजत मांगी भी नहीं। अंकल। तुम अपनी मां से बदतमीजी कर रहे हो। तुम तो अपनी बेटी को संभाल नहीं सकी। अब मेरे बेटे की जिंदगी बर्बाद करना चाहती हो। यह सब देख रहे हो ना नेमत? तुम यशवा से क्यों नहीं पूछते? क्या तुम पहले से जानती थी यशवा? सब कुछ पता था इसे। इसने हमसे छुपाया। अपनी बेटी का गुनाह
छुपाने के लिए सबको बेवकूफ बनाया। तुम अपनी हरकतों से बाज नहीं आओगी। ये ऐसे नहीं समझेगी। इस मां बेटी को पकड़ कर घर से बाहर निकालो। बस कीजिए। बस कीजिए। मैं आबिद अली बकलम खुद गुलशन अरसलान को अपनी बीवी बनाने का ऐलान करता हूं। मैं इसे अपनी जिंदगी का साथी चुन चुका हूं। आज से यही इस घर की मालिका है। इसका बेटा मेरा बेटा और इसकी हर खुशी मेरी जिंदगी से ज्यादा कीमती होगी। हम इकट्ठे रहेंगे। चाहे हालात जैसे भी हो अच्छे या बुरे। हर किसी का सामना करने के लिए हम तैयार हैं। जो हमारे
रास्ते में आएगा जिम्मेदार खुद होगा। गुलशन मुझे हाथ दो अपना। [संगीत] अंकल आप चाहे तो गोली मार सकते हैं मुझे। फरत ऐसा नहीं कर पाया। ये कुर्बानी शायद आपको ही देनी पड़े लेकिन पीठ पे गोली चलाइएगा क्योंकि मैं आपकी आंखों में नहीं देखना चाहूंगा। [संगीत] जल्दी कीजिए अंकल। चलाइए गोली। [संगीत] मैं आबिद अली हूं। और अपने प्यारों की इज्जत नफ्स है मुझे। [संगीत] अम्मी अम्मी आप उठिए होश करें अम्मी [संगीत] ओम [संगीत] ठीक हो ना? दर्द तो होता है मगर अब सब ठीक हो चुका है। मेरी वजह से सब हुआ। आज मुझे आसिल ने फरद
भाई से बचा लिया। अगर वहां आसिल ना होती तो फरद भाई मुझे मार देते। गुलशन तुम्हारा भाई तुमसे बहुत प्यार करता है। वो तुम्हें नहीं छोड़ सकता। वो तुम्हें कभी दुख नहीं पहुंचाएगा। आपको भी मेरी वजह से कितनी तकलीफ उठानी पड़ी। सब ठीक हो जाएगा गुलशन। ये सब जख्म ये सब बुरे दिन जल्द ही खत्म होने वाले हैं। [संगीत] मगर फिलहाल हमें फौरन कुछ करना होगा। ये काम इसी वक्त होने में बेहतरी है। कहां? हम यासिर की तरफ जा रहे हैं फौरन। वहां। मैंने तुमसे जो कहना था कह दिया। अगर तुम कुछ कहना चाहते हो
तो कहो। मुझे उसके बारे में सब जानना है। आखिर वो लड़की तुम्हारी बहन है। और सिर्फ इतना ही सोच लो फरहद कि उसके मुस्तकबिल की जिम्मेदारी तुम पर भी आती है। और मुझे लगता है कि तुम अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हो। आबिद और गुलशन की शादी अगर हो जाती है तो मेरी नजर में इसमें कोई बुराई नहीं है। तो क्या अब तुम मुझे यह सब बताओगी? हां। अच्छाई और बुराई का फर्क। अब क्या तुम बताओगी मुझे? मगर तुम नहीं समझ सकती। मैं अच्छी तरह से समझ सकती हूं। मैं तुम्हारी बात सुनूंगी। मुझे बताओ तो
सही। तुम्हारा दर्द बांटूंगी। मगर तुम भी मेरी बात को तो समझो। सब लोग तुमसे बहुत प्यार करते हैं। तुम ये बात जानते क्यों नहीं? तुम्हारे दिमाग में तो हर वक्त यही चल रहा होता है कि सब तुमसे नफरत करते हैं। हालांकि कुछ भी ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। तुम्हारे सोचने का अंदाज मुख्तलिफ है। ठंडे दिमाग से सोचो। जो लोग तुमसे मोहब्बत करते हैं, तुम्हारी कदर करते हैं, तुमसे अच्छे की तवकको रखते हैं। अगर तुम उन लोगों के बारे में कुछ गलत सोचोगे, तो क्या तुम्हारा जमीर तुम्हें मलामत नहीं करेगा? गुलशन और आबिद को तुम्हारे प्यार
की जरूरत है। क्या तुम अपना फर्ज निभा सकते हो? तुम्हें फर्ज निभाना चाहिए। मैंने कुछ गलत तो नहीं कहा ना? सही कहा। अपने आप को एक अच्छा भाई साबित नहीं कर सका मैं। और यही सच है। बिल्कुल यही। मैं तो यह चाहती हूं कि तुम्हारी जिंदगी में भी खुशियां आए जो तुम खो चुके हो और मैं समझती हूं कि जैसे बाकी सबको खुश रहने का हक है तो तुम्हें भी यह हक हासिल होना चाहिए। आबिद ने मेरे साथ अच्छा नहीं किया। जानती हो ना तुम। आबिद ने मेरे साथ अच्छा नहीं किया और इसकी सजा उसे
जरूर दूंगा। सुना तुमने? देखा ना? वही बात। जिस बात से भी मैं तुम्हें मना करती हूं, तुम मुझे वही करके दिखाते हो। कितनी बातें की मैंने और तुम पर एक का भी असर नहीं हुआ। ह किस मिट्टी के बने हो तुम? तुम ही बताओ मुझे। बताओ कि क्या करूं मैं? क्या चाहती हो तुम? मैं तो चाहती हूं कि तुम हकीकत को जानो। मुझे तुमसे कुछ नहीं चाहिए। यह सुन लो। समझे तुम? इस तरह से मत मुझे पकड़ो। मैं मैं तुमसे डरती नहीं हूं। सुन लिया? [संगीत] क्या कहा उन्होंने? किसने? क्या करते हो यासिर? तुम्हारी अम्मी
की बात कर रही हूं। जोया तुम उन्हें उनके हाल पर छोड़ दो। उन्हें कॉल तो कर सकते हो ना? यासिर यह तुम्हारी रूटीन है। तुम मुख्तलिफ फैमिली के केस डील करते रहते हो। इसलिए तुम्हें चाहिए कि अपनी फैमिली के मसाइल को भी अच्छे से हल करो। तुम्हारे लिए मुश्किल नहीं है। मैं भी इंसान हूं। तुम्हारे जज्बात को समझ सकती हूं मैं। तुमने बताया था कि एक लड़की का केस तुमने लड़ा। बताया था। उस लड़की के बारे में जो घर से भाग गई। और वो तकरीबन 17 साल की थी। वो अपने बच्चे को गोद लिए घर
से बाहर भाग रही थी और उसके सामने उसके भाई को कत्ल कर दिया गया था और वो अपने और अपने बच्चे के बचाव के लिए तुम्हारे पास आई थी याद है तुमने उसे बचाया था ना उस लड़की का नाम जानते हो ना तुम नरगिस हम उसके बेटे का नाम उमर था। ये देखो। उसने तुम्हारे लिए कुछ भेजा है। नरगिस ने? हम्म। [संगीत] [संगीत] उमर स्कूल जाने लगा है। बहुत अच्छी रिपोर्ट है उसकी। देखो यासिर नरगिस तुम्हें अपने भाई की तरह समझती है। उसे और उसके बेटे को तुमने बचाया था। यासिर गुलशन भी तुम्हारी बहन है।
तुम्हारी जिम्मेदारी है। उसके लिए तुम ही ने सोचना है। [संगीत] हम [संगीत] हेलो यशफा कैसी हो कौन है आप नहीं पहचाना पहले भी आपने कॉल की बताते नहीं कौन है आप बहुत जल्द पता चल जाएगा लेकिन तुम परेशान मत होना मैं तुम्हारा अपना ही हूं बस मैं तुम्हारी खैरियत माल मालूम करना चाहता था। आप होटल में तो नहीं थे। गुड नाइट। [संगीत] आप यहां बैठी हैं। आपा आपको इस तरह से परेशान देखकर यकीन करें। मेरा दिल डूब रहा है। कैसी अजीब औरत है वो। शर्म नाम की चीज तो उसमें है ही नहीं। लेकिन आप इस
बारे में फिक्र ना करें आपा। हम सब आपके साथ हैं। जो आप चाहेंगी वही होगा। यशवा ने तो सफिया के साथ मिलकर बहुत ड्रामा किया। लेकिन अब सब कुछ खुल के सामने आ गया है। [संगीत] परेशान ना हो सब ठीक हो जाएगा। [संगीत] तुम अच्छी तरह जानते हो। मैंने तुम्हारा हर जुल्म बर्दाश्त किया है। मुझे कैद रखा। जबरदस्ती शादी की। मेरे भाई से नफरत की। कुछ और कहना है और भी बोलूंगी मैं और तुम्हें सुनना पड़ेगा। तुम सबको डरा सकते हो लेकिन मुझे नहीं क्योंकि मैं तुम्हारी बीवी हूं फरहत जानती हूं मैं तुम्हें। अगर तुम्हारे
साथ जिंदगी में नाइंसाफियां हुई है तो तुम्हें यह हक नहीं पहुंचता कि तुम दूसरों के साथ भी ऐसा करो। कब बदलोगे तुम अपने आप को? मैंने हमेशा तुम्हारा साथ दिया है और मेरा यह तुम पर कोई एहसान नहीं। हम दोनों एक दूसरे के साथी हैं। अंधेरे से निकलने की कोशिश करो। यह रास्ता तुमने नहीं चुना था। जानते हो? ये जो रास्ता है, मजीद अंधेरों की तरफ ले जाएगा तुम्हें। और मैं यह चाहती हूं कि तुम उन भयानक अंधेरों से बच जाओ। क्या तुम नहीं चाहते कि तुम्हारी जिंदगी में भी रोशनी हो? हालांकि इस वक्त तुम्हें
अपनों की ज्यादा जरूरत है। सुना तुमने? तुम अपनी परवाह करना सीखो और दूसरों की भी परवाह करो ताकि वो तुम्हारी भी करें। तुम्हें बुरा तो लग रहा होगा। लेकिन याद रखो मैं अगर दूर चली गई तो तुम्हें मेरी बातें याद आएंगी। तुम्हें किसी की भी परवाह नहीं। और तुम मेरे बगैर भी रह लोगे मैं यह जानती हूं। जो शख्स अपनी मां, बहन और भाई का ख्याल नहीं रख सकता वो मेरा क्या रखेगा। जानते हो तुम रिश्ते नातों की पहचान क्या है? अगर तुम किसी को तहफुज नहीं दे सकते तो उसकी जिंदगी में से खुशियां छीनने
का भी हक नहीं है तुम्हें। तुम मुझे छोड़ना चाहते हो तो छोड़ दो। मुझे कोई परवाह नहीं इसकी। लेकिन खुदा के लिए अपनी फैमिली को इस तरह से जलील मत करो तुम। इसका तुम्हें कोई हक नहीं। जिन लोगों ने सारी जिंदगी तुम्हारी वजह से दुख झेले हैं। आज तुम्हें चाहिए कि उनके उन दुखों का मदावा करो। तो फरहद ऐसा कर सकते हो क्या? क्या तुम्हारे अंदर इतनी हिम्मत है कि ऐसा करो? बताओ बताओ मुझे। है तुम्हारे पास कोई जवाब? मुझे जवाब दो। मुझे जवाब दो मेरी बात का है। [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] छोड़ दो मुझे। छोड़
दो मुझे। [संगीत] छोड़ो कहा ना छोड़ो मुझे [संगीत] यहां पर क्यों आई हो? बात करनी है मैंने तुमसे। अभी मैं तुमसे बात नहीं करना चाहती। चली जाऊं। तुम समझती हो कि सब तुमसे डर गए हैं। तुम्हें मेरी बात समझ नहीं आई? मारोगे मुझे? मैं डरने वालों में से नहीं हूं। अपनी बेटी के गुनाह को छुपाने के लिए आबिद को कुर्बानी का बकरा बना दिया। बहुत सी औरतें देखी पर तेरे जैसी बगैरत नहीं देखी। अफसोस तुम्हारे अंदर थोड़ी सी भी शर्म नहीं है। तुमने नेमत को मारने की कोशिश की लेकिन उसने तुम्हें बचा लिया। मुझे तो
यकीन है लेकिन नेमत ने मेरे मुंह पे ताला लगा दिया। अभी तो तुम बच गई हो। अगर इस घर से नहीं जाओगी तो सारे पोल खोल दूंगी और यह भी सुन लो कि मैं तुमसे डरती नहीं। तुम्हें मैंने बहुत समझाया लेकिन तुम्हें समझ नहीं आती। मुझसे और मेरी बेटी से दूर रहो। तुम जानती नहीं कि मैं क्या कुछ कर सकती हूं। सारे घर वालों के सामने घसीट घसीट के मारूंगी। निकल जाओ मेरे कमरे से। सब ठीक हो जाएगा। मेरा यकीन करो। [संगीत] यशवा क्या कर रही हो तुम यशवा मैं गिर जाऊंगी यशवा [संगीत]