पुरी दुनिया में हर साल हम डेड सो करोड़ इस्तेमाल सदा टायर्स प्रोड्यूस करते हैं अगर इस नंबर का ब्रेकडाउन किया जाए तो हर गुजरते मिनट 2850 गाड़ियों के टायर इस खराब होते हैं कुवैत में मौजूद ये है दुनिया का सबसे बड़ा टायर डंपिंग ग्रेव्यार्ड यहां पर पिछले 20 सालों से दुनिया भर के उसे टायर्स कठे किया जा रहे हैं इसको एरियल फुटेज में देखा जाए तो वो कुछ इस तरह का मंजर पेस करता है हजारों एकड़ पर फैला यह ग्रेव्यार्ड इतना बड़ा है की इसको हैरत एंगे स्टोर पर स्पेस से भी देखा जा सकता है
लेकिन यह ग्रेव्यार्ड किसी थर्ड वर्ल्ड या डेवलपिंग कंट्री में होता तो समझ भी आए कुवैत जिसको दुनिया की अमीर तारीन कंट्रीज में सुमार किया जाता है यहां पर इसका क्या कम है और कुवैत पिछले 20 सालों से इनको मुसलसल इकट्ठा क्यों किया जा रहा है और आखिर उसे टायर्स को किस कम में लाया जाता है 30 से 40 हजार किलोमीटर चलते हैं और उसके बाद यह टायर्स किसी कम के नहीं रहते इनको फेक दिया जाता है या फिर अक्सर हमें ये रोड के किनारे नकारा पड़े दिखाई देते हैं दूसरे रीसाइकिल्ड मटेरियल को तो सिंपली मेल्ट
करके वापस से इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन टायर्स क्योंकि रबर और सल्फर को मिलकर बनते हैं इसी वजह से इस प्रोसेस को रिवर्स नहीं किया जा सकता दूसरा उसे टायर्स को रीसायकल करने से खतरनाक गैसेस प्रोड्यूस होती है और यह प्रोसेस कई कंट्रीज में इलीगल है एवं यूरोप में तो उसे टायर्स को कचरा में रखना भी इलीगल है तो अब ज्यादातर वेस्टर्न कंट्रीज हर साल करोड़ टायर से छुटकारा अपने के लिए इनको कुवैत भेज देती है यहां अरब डेजर्ट के बिशन बीच 1000 स्क्वायर मी पर फैला हुआ ये है स्लैबिया टायर ग्रैबिया यहां टायर
का एक-एक पहाड़ सिंगल लेयर नहीं बल्कि यह 50 फिट के ऐसे खड़े बने हुए हैं जहां पर इनको मुसलमान किया जा रहा है इन उसे टायर्स का 1000 क कुवैत सिर्फ 1 डिनर में खरीदा है और इनको यहां स्टोर कर देता है जब कई सालों से कुवैत यह कम करता रहा तो देखते ही देखते यह एक ग्रेव्यार्ड की शक्ल इख्तियार कर गया जिसको अब स्पेस से भी देखा जान लगा कोई गवर्नमेंट ऑफिशल्स के मुताबिक इस पूरे टायर में करीब 7 करोड़ टायर्स मौजूद है अब कोई एक बहुत ही रिच कंट्री है इतनी रिच के यहां
की ई का एक यूनिट यानी एक कुवैती डिनर 3.3 डॉलर्स के बराबर बंता है तो ये देख कर दुनिया को बहुत तस्वीर थी की आखिर कुवैत को यह स्क्रैप जमा करने की क्या पड़ी है जबकि अभी तक कुवैत सिर्फ इनको जमा ही किया जा रहा है इनमें से एक को भी रीसायकल नहीं किया मैं कुवैत के पास पैसे की कमी तो थी नहीं इसी वजह से वो इनको उने-पोने खरीद रहा था जबकि अल में कोई गवर्नमेंट के पास भी इसका कोई प्लेन नहीं था आखिरकार यहां एक वाक्य हुआ जिसके बाद कोई भी ऑफिशल्स ने इन
टायर्स को सीरियस लेना शुरू कर दिया होगा ये की 2012 से लेकर 2020 के दरमियां कई मर्तबा टायर्स को अपने आप आज ग जाति थी अब क्योंकि यहां सैकड़ो की तादाद में टायर्स पड़े थे तो आज तेजी से फेल जाति थी और उसको कंट्रोल करना भी मुश्किल हो जाता था यही वजह थी की पहले इन्होंने टायर्स को अलग-अलग स्क्वायर्स में डिवाइड किया ताकि आज लगे की सूरत में उसको कंट्रोल किया जा सके लेकिन उसके बाद भी आज लगे का सिलसिला धाम ना सका कल धुएं के बादल ना सिर्फ जान लेवा गैसेस पैदा करते थे बल्कि
इनकी वजह से करीब के शहर अल जरा में भी लोगों को बहुत तकलीफ का सामना करना पड़ता था तबाही का लेवल देखने के लिए इस सैटेलाइट फोटो को देखें यह इतनी हौलनक आज अल में ग्रेव्यार्ड के एक छोटे से स्क्वायर में लगी थी तो अब सोच की अगर यह आज पूरे ग्रेव्यार्ड में फेल जाए तो कितना नुकसान करेगी इन हादसात की वजह से इंटरनेशनल कम्युनिटी का भी कुवैत पर बहुत प्रेशर था यह हार्मफुल गैसेस एटमॉस्फेयर में ही अनफिल्टर रहती है आखिरकार 2021 में कुवैत ने इन टायर्स को ठिकाने लगाने का फैसला कर दिया कंटेनर्स में
भर भर कर इन टायर्स को पुरी दुनिया में रीसाइक्लिंग के लिए भेजो जान लगा पर आखिर इन उसे टायर्स को किस कम में लाया जाता है एक नॉर्मल टायर में तीन चीज होती हैं रबर कार्बन और स्टील वायरस परोलोसिस प्लांट की मदद से इन टायर्स को पहले मेल्ट किया जाता है रबर मेल्ट होकर गैस बन जाता है जिसको ठंडा करके फ्यूल के तोर पे इस्तेमाल किया जाता है उसके बाद पीछे बचत है कार्बन और स्टील वायरस कार्बन को हटाकर इन स्टील वायरस को ठंडा करके रीसाइक्लिंग फैसिलिटी में भेज दिया जाता है इसके अलावा टायर्स को
रीसायकल करने के और भी कई तरीके ए चुके हैं एक तो है जिससे कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाले रबर टाइल्स बनाए जाते हैं चंद सालों पहले इस तरह दिखने वाला सूलेबिया टायर ग्रेव्यार्ड 2021 में पुरी तरह से खाली कर दिया गया जो अब सैटेलाइट इमेज में ऐसा दिखता है लेकिन आज भी कर अब टायर्स दुनिया की मुख्तलिफ कंट्रीज में डंप हो रखें हैं यह तो हमने बात की टायर्स के ग्रेव्यार्ड की पर इस फोटो में जो आप देख रहे हैं ये किस चीज का ग्रेव्यार्ड है रंग-बरंगी दिखने वाला यह कोई फूलों का बगीचा नहीं बल्कि
यह चीन में मौजूद दुनिया का सबसे बड़ा साइकिल ग्रेव्यार्ड है जी हां जान साल पहले चीन में बाइक शेयरिंग का बहुत उरूज चला था 2014 में बाइक शेयरिंग के प्रॉपर प्रोग्राम्स भी लॉन्च किया गए जिसमें लोग एक स्टेशन से साइकिल रेंट पर लेते थे और दूसरे स्टेशन पर जाकर साइकिल को ऑटोमेटिक डॉग्स पर पार्क कर देते थे आहिस्ता आहिस्ता यह सर्विस एडवांस होती गई और एक मोबाइल एप्लीकेशन की मदद से करीबी बाइक की लोकेशन भी मालूम करना बहुत आसन हो चुका था लोगों को यह सर्विस बहुत सूटेबल लगती थी लेकिन अक्सर औकात जब बाइक्स की
जरूर होती थी तो कारी भी लोकेशन पर कोई साइकिल अवेलेबल ही नहीं होती थी मार्केट की डिमांड को पूरा करने के लिए नई साइकल्स की बहुत जरूर थी ये मिडिल क्लास के लिए ट्रैवल करने का सबसे अच्छा और सस्ता तारीन तरीका माना जाता है आखिरकार इस मार्केट गैप को पूरा करने के लिए कई मल्टी बिलियन डॉलर कंपनी खड़ी हो गई एक-एक शहर में कई 100 साइकिल बूट्स बनाए गए जिसमें हजारों लाखों साइकल्स पार्क होती थी जब ये कम अपनी पीठ पे था तो चीन में 70 बाइक शेयरिंग कंपनी ऑपरेट करती थी और 2017 के एक
सर्वे के मुताबिक चीन की यह मार्केट दुनिया में पहले नंबर पर ए चुकी थी ऐस्टीमेटेड चीन में एक वक्त में 1 करोड़ 60 लाख साइकल्स रोड पे होती थी फिर एक वक्त ऐसा आया की इस बिजनेस में बहुत ज्यादा सैचुरेशन हो चुकी थी लिहाजा अब ये कम प्रॉफिटेबल नहीं रहा और इन्वेस्टर्स ने इस बिजनेस मॉडल में माजिद इन्वेस्टमेंट करना बैंड कर दिया है और यही से शुरू हुआ चीन में बाइक शेयरिंग का सवाल बात यहां तक पहुंच गई की जहां बीजिंग की सड़क एक वक्त में 1 करोड़ 20 लाख साइकल्स को सपोर्ट कर शक्ति थी
वहीं बाइक शेयरिंग कंपनी ने 2 करोड़ 30 लाख साइकल्स डिस्ट्रीब्यूशन कर राखी थी यानी बीजिंग की कैपेसिटी से भी डबल लिहाजा अब इतनी ज्यादा साइकल्स को पर करने का मसाला गले पद चुका था लोगों ने रोड्स के किनारे ही बाइक्स पर करना शुरू कर दिए और देखते ही देखते हर गली के कोनी में साइकल्स का अंबर खड़ा होता गया 2018 में आदि से भी ज्यादा बाइक शेयरिंग कंपनी का दिवालिया निकाल गया और उनकी बाइक्स लावारिसों की तरह पड़ी रही ये देखते हुए गवर्नमेंट ने शेरों को साफ करने के लिए डंपिंग यार्ड में इनको जमा करना
शुरू कर दिया हर गली हर कोनी से साइकल्स उठाकर डंपिंग यार्ड मिलाई जान लगी जो देखते ही देखते आज कुछ ऐसा मंजर पेस करती है एक एक डंपिंग यार्ड में करीब 200 000 के करीब साइकल्स पड़ी हैं और ऐसे पता नहीं कितने छोटे बड़े डंपिंग यार्ड चीन में मौजूद हैं जिनको आज बाइसिकल ग्रेव्यार्ड के नाम से याद किया जाता है आज भी चीन में बाइक शेयरिंग का बहुत फ्रेंड है लेकिन अब यह मार्केट बाढ़ नहीं रही जैसे 2017 में हुआ था उम्मीद है इस ईटीवी की यह वीडियो भी आप लोग भरपूर लाइक और शेर करेंगे
आप लोगों के प्यार भरे कमेंट्स का बेहद शुक्रिया मिलते हैं अगली शानदार वीडियो में