ये कहानी एक मासूम लड़की आरजू की दर्दनाक हकीकत को बयान करती है जिसे अपनी ही जिंदगी में सबसे बड़े धोखे का सामना करना पड़ता है वह अपने पिता को अपना रक्षक और हमदर्द समझती थी लेकिन जब सच उसके सामने आया तो उसकी दुनिया ही उजड़ गई एक बाप जिसने अपनी ही बेटी को लालच की आग में झोंक दिया और एक समाज जिसने उसकी चीख को अनसुना कर दिया सर्दियों की सख्त तरीन रात थी साधक हॉस्पिटल में इधर-उधर चक्कर लगा रहा था इतने में नर्स बाहर आई और कहने लगी बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा
है कि हम आपकी बीवी को नहीं बचा सके नर्स के हाथ में एक बच्ची थी उसने वह बच्ची साधक की तरफ बढ़ाई साधक ने जल्दी से बच्ची को पकड़ा और सीने से लगा लिया वह दहाड़े मार मार कर रोने लगा यह बिन मां की बच्ची कैसे पलेग ऐ मेरे खुदाया यह मुझ पर कैसा पहाड़ टूट पड़ा है मैं अपनी बच्ची को संभालूं या मेहनत मजदूरी करूं इतने में उसके रिश्तेदारों ने ने कंधे पर थपकी दी और फिर उसकी बीवी को घर ले जाया गया उसे सुपुर्द खाक कर दिया गया साधक ने अपनी बेटी को अपनी
बहन की गोद में डाल दिया और कहने लगा मैं इस बच्ची को तुम्हारे हवाले करता हूं यह बिन मां की बच्ची है और मैं किसी और पर भरोसा नहीं कर सकता लेकिन उसकी बहन ने फौरन बच्ची को झटक दिया और कहने लगी तुझे नहीं पता यह कितनी मनहूस है पैदा होते ही अपनी मां को खा गई पता नहीं बड़ी होकर क्या गुल खिलाएगी मुझसे इस मनहूस लड़की का साया दूर ही रखो साधक रोता हुआ अपनी बच्ची को गोद में लिए घर लौट आया उसने अपनी बेटी का नाम आरजू रखा इसके बाद बच्ची अपनी नानी के
पास पलने लगी और साधक अपने घर में तन्हा रहने लगा वह एक मेडिकल स्टोर पर काम करता था जब शाम को घर लौटता तो तन्हाई उसे सताने लगती गम में वह नशे का आदि हो गया जब वह नशे में अपने बिस्तर पर लेटता तो उसे यही ख्याल आते कि अगर यह बेटी पैदा ना होती तो मेरी बीवी आज जिंदा होती सच में यह बेटी मनहूस है उसी ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी दिन बदन वह नशे में चूर रहने लगा और काम में लापरवाह हो गया जब आरजू 13 साल की हुई तो उसकी नानी का
इंतकाल हो गया अब आरजू को अपने बाप के पास लौटना पड़ा लेकिन उसने इन 13 सालों में अपने बाप को खुद से नफरत करते ही देखा था एक दिन आरजू ने कहा अब्बा आप मुझसे इतने रूठे हुए क्यों रहते हो साधक ने कोई जवाब नहीं दिया उसके दिमाग में जाने क्या चल रहा था वह पहले ही कामचोर हो चुका था आरजू रोज कह अब्बा तुम काम पर नहीं जाओगे तो हम खाएंगे क्या लेकिन साधक नशे की धुंद में चारपाई पर पड़ा ही रहता एक दिन आरजू का चेहरा लाल हो गया उसकी आंखों में जलन थी
वह अपने अब्बा के पास आई और कहने लगी अब्बा मुझे बहुत ज्यादा बुखार है मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही साधक ने नजरें उठाकर जब अपनी बेटी को देखा तो उसके दिल में रहम आ गया वह किसी गहरी सोच में पड़ गया और फिर कहने लगा बेटी तुम फिक्र मत करो मैं तुम्हारे लिए दवाई लाता हूं वह जल्दी से उसी मेडिकल स्टोर पर गया जहां वह काम करता था उसने वहां से एक इंजेक्शन खरीदा और आकर अपनी बेटी को लगा दिया इंजेक्शन लगाते ही आरजू मदहोश हो गई वह आड़ी तिरछी लेट गई और उसे खुद
की होश भी नहीं रही साधक कमरे के एक कोने में जाकर खिलखिला करर हंसने लगा बार-बार उस इंजेक्शन को देखे जा रहा था शाम को जब आरजू की आंख खुली तो उसे बुखार महसूस नहीं हो रहा था फिर यह सिलसिला यूं ही चलने लगा पहले तो साधक अपनी बेटी को ऐसी दवाखाने में मिलाकर देता जिससे उसे बुखार हो जाता फिर वही इंजेक्शन लगाकर कहता फिक्र मत करो तुम जल्द ठीक हो जाओगी आज साधक ने अपनी बेटी को आवाज लगाई ओ आरजू बेटी आज खाने में कुछ अच्छा बना लेना मेरा दोस्त हमारे घर आ रहा है
आरजू ने पूछा अब्बा कौन सा दोस्त साधक बोला तुझे उसने बचपन में देखा था तुझे बहुत खिलाया पिलाया करता था वह आज इस्लामाबाद से सीधा हमारे घर आ है इसलिए कह रहा हूं खाने का अच्छा इंतजाम कर लो सर्दियों की सख्त रात थी अचानक दरवाजा बजा साधक ने दरवाजा खोला तो सामने उसका दोस्त खड़ा था दोनों गले मिले दोनों हम उम्र थे तकरीबन 50-50 साल के साधक का दोस्त बोला अरे भाई इधर ही खड़े रहोगे या घर के अंदर भी बुलाओगे साधक ने जल्दी से उसे अंदर बिठाया और अपनी बेटी को आवाज दी ओ बेटी
आरजू जल्दी से खाना ले आ मेरे दोस्त को भूख लगी होगी इतने में कमरे का दरवाजा खुला आरजू के हाथ में खाने की थाली थी लेकिन साधक का दोस्त खाने को नहीं बल्कि आरजू को देख रहा था वह पलक झपका तक भूल गया इतनी खूबसूरत लड़की इतना कद काठी और जवानी से भरपूर जावेद अपने होठों पर जुबान फेरने लगा साधक ने फौरन उंगली चटकाई और कहा किस ध्यान में गुम हो गए हो यह मेरी बेटी आरजू है जावेद मुस्कुरा कर बोला यह वही बच्ची है ना जिसे मैं अपने हाथ से खिलाया करता था लेकिन समझ
में नहीं आ रहा कि कुछ ही सालों में यह इतनी जवान कैसे हो गई अभी तो इसकी उम्र ही नहीं थी यह उम्र से पहले ही बड़ी कैसे हो गई साधक ने फौरन उसका ध्यान भटका हुए कहा खाना ठंडा हो रहा है जल्दी से खा लो खाने के बाद जावेद बोला आज रात तो मैं यहीं रुकूंगा बस वह ललचा हुई नजरों से आरजू को देख रहा था साधक को सब कुछ समझ में आ गया लेकिन उसने झूठ बोला आज रात मुझे बहुत जरूरी काम है इसलिए मैं घर पर नहीं रहूंगा मेरी बेटी अकेली है लिहाजा
तुम जा सकते हो जावेद अपने होठों पर जुबान फेरता हुआ ललचा नजरों के साथ चला गया साधक उसे खुद गाड़ी में बैठाकर आया था लेकिन जब वह घर वापस आया तो देखा कि आरजू का चेहरा सुर्ख हो रहा था अब्बा मैंने आपसे कहा था ना कि मुझे बहुत तेज बुखार हो रहा है क्या आप मेरी दवाई लेकर आए हैं टूटे हुए लहजे में आरजू ने बड़ी मुश्किल से यह कहा साधक मुस्कुरा दिया और बोला हां हां बेटी तुम्हें तो पता है कि मैं तुम्हारी दवाई लाने में कभी देर नहीं करता मैं यह इंजेक्शन ले आया
हूं चलो तुम्हें इंजेक्शन लगा दूं सुबह तक तुम्हारा बुखार बिल्कुल ठीक हो जाएगा वह मक्कारी से मुस्कुरा रहा था आरजू खामोशी से अंदर जाकर बैठ गई साधक ने उसकी बाजू का कपड़ा ऊपर किया और महारत से इंजेक्शन लगा दिया आरजू कुछ देर तक बाजू मलते हुए बैठी रही फिर धीरे-धीरे उस पर सुस्ती तारी होने लगी बुखार की वजह से पहले ही वह बहुत निढ़ाल महसूस कर रही थी वह जहां बैठी थी वहीं धीरे-धीरे बेहोशी में डूबने लगी वहीं आड़ी तिरछी होकर लेट गई साधक बेताबी से कमरे के बाहर घूम रहा था धप की आवाज से
जैसे ही आरजू बिस्तर पर गिरी साधक लपक कर कमरे के अंदर गया उसने एक निगाह आरजू पर डाली और बुदबुदा आया आज जावेद की बातों ने साबित कर दिया कि पिछले दो सालों से जो मैं कोशिश कर रहा हूं वह जाया नहीं गई मेरा काम हो गया उसने पुर असरार अंदाज में मुस्कुराते हुए जेब में हाथ डालकर वो इंजेक्शन निकाल लिया जो उसने कुछ देर पहले आरजू को लगाया था उसकी निगाहें इंजेक्शन पर फिसल रही थी यह कोई आम इंजेक्शन नहीं था कई साल पहले जब वह फार्मेसी में हेल्पर के तौर पर काम करता था
उसी दौरान उसे पता चला था कि दुनिया में कुछ ऐसे अजीब किस्म के इंजेक्शन मौजूद हैं जो किसी लड़की के जिस्म में लगाए जाएं तो वह वक्त से पहले जवान और खूबसूरत हो जाती है दो साल पहले ही उसने यही इंजेक्शन अपनी बेटी आरजू पर इस्तेमाल करने शुरू कर दिए थे हर हफ्ते वह चुपके से उसे ऐसी दवा खिला देता जिससे उसे बुखार हो जाता वह बेचारी दर्द और बुखार की शिद्दत से पूरा दिन तड़पती रहती और जब वह दवा लाने के लिए कहती तो साधक मुस्कुराता हुआ वही इंजेक्शन खरीद लाता और उसे लगा देता
सुबह तक उसका बुखार भी उतर जाता लेकिन उसके जिस्म में अजीब तब्दीलियां आने लगी थी वह खुद हैरान थी कि इतनी जल्दी जिस्मानी बदलाव क्यों हो रहे हैं साध ने एहतियात के साथ इंजेक्शन को नष्ट कर दिया अगली सुबह आरजू जागी तो उसके जिस्म में अजीब सा दर्द हो रहा था वह नाश्ता बनाने लगी इतने में पास वाली खाला बल्की की आवाज आई ओ आरजू बिटिया जरा थोड़ी सी चीनी दे देना हमारा राशन खत्म हो चुका है शाम को ही ला पाऊंगी आरजू ने खामोशी से चीनी का डिब्बा खोला और उनके लिए चीनी डालने लगी
खाला बल की गहरी निगाहों से उसे देख रही थी हाय आरजू तू तो दिन बदन खूबसूरत होती जा जरा अपना कद काठी तो देख तेरा बाप तुझे खिलाता भी कुछ नहीं लेकिन तेरा जिस्म तो रोज बरोज खूबसूरत होता जा रहा है एक मेरी मलीहा है वह तेरी हमउम्र है दोनों एक ही दिन पैदा हुई थी लेकिन वह तो अब भी छोटी सी बच्ची लगती है हालांकि तुम दोनों 14 साल की हो ना जाने तू वकत से पहले कैसे जवान हो गई खला बल्कि तज सस जिज्ञासा भरे अंदाज में पूछे जा रही थी आरजू चिड़ने लगी
यह बात वह अक्सर ही कहती रहती थी लेकिन आरजू को खुद भी नहीं पता था कि यह सब उसके साथ क्यों हो रहा है क्यों वह वकत से पहले एक जवान औरत के रूप में ढलती जा रही है उसने चीनी की प्याली खाला बल्की के हाथ में थमा दी कुछ देर इधर-उधर की बातें करने के बाद खला बल्कि अपने घर चली गई अंदर साधक अभी तक खर्राटे मारते हुए सो रहा था अरजु थोड़ी देर इधर-उधर फिरती रही किचन में सारा राशन खत्म हो चुका था उसके पास पैसे भी नहीं थे वरना बाहर जाकर कोई सामान
खरीद लाती अब्बा को बताना जरूरी था वह थोड़ी देर सोचती रही फिर हारकर साधक के पास चली आई और उसके कंधे को हिलाया साधक यूं हड़बड़ा करर उठा जैसे कोई कयामत आ गई हो क्या हुआ क्यों उठा रही हो सुबह-सुबह कितनी बार कहां है जब मैं कच्ची नींद से जागता हूं तो मेरी तबीयत खराब हो जाती है मुझे जल्दी मत उठाया करो बिल्कुल अपनी मां की तरह हो उसे भी बस यही पड़ा रहता था कि मैं सुबह सवेरे उठकर किसी का पर निकल जाऊ लेकिन अब्बा अगर आप इसी तरह घर में सोते रहे तो पैसे
कहां से आएंगे एक महीना हो गया आपने मजदूरी का काम भी छोड़ दिया है अगर सुबह सवेरे उठकर काम पर नहीं जाओगे तो घर कैसे चलेगा साधक एकदम आंखें खोलकर उसे देखने लगा और बोला मुझसे नहीं होती यह मजदूरी मैं अपना कारोबार करूंगा सारा दिन मजदूरी करो और रात में सिर्फ 300 से 400 मिलते हैं इससे तो ठीक से खाना भी नहीं खाया जाता वह गुस्से से चिल्ला उठा आरजू खामोश हो गई सारी जिंदगी अम्मा और अब्बा की यही लड़ाई चलती रही थी तो इसका पेट भी तो नहीं भरेगा थोड़ी देर बाद वह घर से
बाहर निकल गया उसका रुख रमजान के घर की जानिब था जैसे ही वह घर में दाखिल हुआ सामने ही मोहल्ले के सारे छड़े छाट लोगों की महफिल जमी हुई थी वह भी उनके बीच शामिल हो गया वे सब पक्के ज्वारी थे और साधक भी उन्हीं का हिस्सा था हड्डी और जुए की लत इसके पुराने मसाइल थे आज तो बड़ी बाजी लगाऊंगा पूरे महीने का राशन आ जाएगा ताकि कहीं काम ना करना पड़े वह दिल ही दिल में सोचते हुए बाजी लगाने लगा जेब में कुछ ना था बस उसने अपनी कलाई की घड़ी दांव पर लगा
दी लेकिन फिर भी वह जुए में हार चुका था सामने बैठे शमशीर ज्वारी ने हंसते हुए कहा अब तो ठीक है अब तो तुम्हारी बेटी को उठाकर अपने घर ले जा सकता हूं साधक ने जल्दी से हां में सिर हिला दिया फिर शमशीर जुवारी जो नशे में लथपथ साधक के घर पहुंचा उसने कंधे पर बेहोश पड़ी हुई आरजू को उठाया और घर से बाहर निकल गया बाहर उसकी शानदार गाड़ी खड़ी हुई थी गाड़ी में आरजू को डालते ही उसने गाड़ी स्टार्ट की और 9 दो 11 हो गया साधक के चेहरे पर एक पुर असरार मुस्कान
खेल रही थी इतनी आसानी से नहीं शमशीर खान मेरी बरसों की मेहनत है सिर्फ एक करोड़ रुपए में नहीं जाने दूंगा उसका रुख बैंक की तरफ था शाम तक उसने चेक कैश करवा कर सारा रुपया कैश की सूरत में जमा कर लिया दूसरी जानिब आरजू की आंख खुली तो उसने खुद को एक शानदार बेडरूम में पाया वह बेतिया हड़बड़ा करर उठ बैठी यह क्या है मेरा घर तो टूटा फूटा और पुराना था यह कहां आ गई मैं अचानक उसे याद आया बेहोश होने से पहले क्या हुआ था साधक और शमशीर ने उसे पकड़ा था फिर
साधक ने उसे इंजेक्शन लगाया था एकदम से उसकी रूह कांप गई मुझे अपने ही बाप से उम्मीद नहीं थी उसका दिल चाहा कि वह फूट फूट कर रोने लगे अब्बा ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया अब्बा ने मुझे किसी और के हाथों क्यों बेच दिया वह बार-बार यही सोच रही थी तभी अचानक कमरे का दरवाजा खुला शमशीर ज्वारी अंदर दाखिल हुआ आते ही उसने दरवाजा लॉक किया और कुंडी भी लगा दी अब वह भूखी निगाहों से आरजू को देख रहा था और उसकी तरफ बढ़ रहा था आरजू खौफ से थरथर कांपने लगी नहीं मुझे जाने
दो मुझे अब्बा के पास वापस जाना है शमशीर ने एक जोरदार ठहाका लगाया और हंसते हुए बोला तुम्हारा अब्बा खुद तुम्हें मेरे हाथों फरोख्त कर चुका है पूरे एक करोड़ रुपए में अब तुम्हें कोई बचाने नहीं आएगा आरजू का दिल चाहा कि जमीन फट जाए और वह उसमें समा जाए शमशीर उसके और करीब आ रहा था लेकिन तभी अचानक दरवाजा बजा शमशीर झुंझला गया अब इस वक्त कौन आ गया उसने दरवाजा खोला बाहर मुलाजिम खड़ा था साब नीचे जरा इमरजेंसी है आपको आना पड़ेगा शमशीर झुलाया व खा जाने वाली निगाहों से आरजू को घूरते हुए
बाहर निकल गया आरजू फिर अकेली रह गई वह शदीद खौफ अजदा थी तभी अचानक खिड़की पर दस्तक हुई आरजू ने घबरा कर देखा यह खिड़की घर के पीछे की तरफ खुलती थी दस्तक के साथ अगली बार आवाज भी आई आरजू दरवाजा खोलो मैं हूं तुम्हारा अब्बा आरजू चौक गई उसने आगे बढ़कर खिड़की खोली वाकई वह साधक था वह उसे खामोश रहने का इशारा कर रहा था आरजू को एक जोरदार झटका लगा जल्दी बाहर आओ मैं तुम्हें यहां से निकालने के लिए आया हूं साधक ने उसका हाथ पकड़कर उसे खिड़की से बाहर निकालने की कोशिश की
आरजू खौफ जदा तो थी लेकिन फिलहाल वह किसी भी तरह शमशीर से बचना चाहती थी यहां उसे बेहद डर महसूस हो रहा था साधक ने उसे बाहर निकाला वहां एक छोटी सी गाड़ी खड़ी थी आप मुझे कहां ले जा रहे हैं अब्बा आरजू को अब तक यकीन नहीं हो रहा था कि साधक उसे शमशीर के हाथ बेज सकता है साधक उसे गाड़ी में बिठाते हुए धीमे लहजे में बोला शमशीर मेरा दोस्त है गलती से मेरे हाथों उसका कोई नुकसान हो गया था जिसकी वजह से उसने तुम्हें हासिल करने की शर्त रख दी मैंने वकती तौर
पर हामी तो भर ली थी लेकिन जैसे ही मुझे मौका मिला मैं तुम्हें छुड़ाने के लिए आ गया गाड़ी तेज तेज चलाते हुए वह यह कहे जा रहा था आरजू की आंखों से आंसू बहने लगे वह अपने बाप के बारे में गलत थी वह तो अभी भी उससे उतना ही प्यार करता था जितना पहले करता था फिर साधक गाड़ी चलाते हुए अपने उस छोटे से कस्बे से कहीं दूर निकल आया वरना की जगह वह रेगिस्तान जैसा इलाका आ गया दूर-दूर तक सिवाय टीलों मैदान और झाड़ियों के कुछ भी नहीं था आरजू अपनी चादर को खुद
पर लपेटे सहमी हुई बैठी थी साधक एक लफ्ज बोले बिना गाड़ी चलाता गया गाड़ी रुकी तो आरजू चौक गई यह किसका घर है अब्बा आरजू ने बाहर झांकते हुए कहा मगर साधक अब खामोश था अपनी तरफ का दरवाजा खोलकर वह नीचे उतरा और उसने हाथ पकड़कर आरजू को बाहर निकाल लिया आरजू ने सामने का मंजर देखा तो उसके पैरों तले से जमीन निकल गई वह अच्छी तरह पहचान सकती थी कि उसका बाप उसे कहां ले आया है छोटे-छोटे कतार में बने हुए घर थे जो दो दो तीन-तीन मंजिला थे नीचे हर घर का दरवाजा चौपट
खुला हुआ था दूसरी और तीसरी मल पर बालकनी में कई लड़कियां खड़ी हुई थी और नीचे झांक रही थी साधक को गाड़ी रोककर खड़ा होते हुए देखकर कई लड़कियों ने उसे देखकर आवाजें लगाना शुरू कर दिया कई लड़कियों की बातें और नारे इतने शर्मनाक थे कि आरजू को अपना वजूद पानी पानी होता महसूस होने लगा उनके कपड़े भी अधूरे थे अंदर से म्यूजिक की तेज आवाजें आ रही थी और मर्दों के ठहा कों की गूंज मिल रही थी आरजू के कानों से यह सब टकरा रहा था और वह कांप कर रह गई अब्बा यहां से
वापस चलिए वह घबरा गई थी मगर साधक ने एक सर्द निगाह उस पर डाली और आगे बढ़कर उसका बाजू पकड़ लिया यहां से वापस क्यों जाऊं सालों से तुझ पर जो खर्चा किया है अब उसे वसूल करने का वक्त आ गया है चल अंदर वह उसे घसीटते हुए अंदर की तरफ ले जाने लगा आरजू सन्न रह गई तो क्या अब्बा ने जानबूझकर पहले मुझे शमशीर के हाथ बेचा और अब यहां ले आया उसके लबों से चीख निकली और उसने खुद को छुड़ा की कोशिश की मगर साधक अब एक बेरहम सौदागर बन चुका था वह उसे
घसीटते हुए एक कमरे में ले गया वहां एक मोटी सी औरत बैठी थी जिसने साड़ी पहनी हुई थी जैसे ही उसने आरजू को देखा वह सीधी होकर बैठ गई साधक ने आरजू को उसी के सामने धक्का दे दिया वाह क्या कमाल की चीज लाया है साधक कहां से मिला तुझे यह हीरा औरत ने आरजू के गाल पर हाथ फेरा वह झुर जोरी लेकर रह गई साधक मुस्कुरा दिया देखकर लग है सिर्फ 14 साल की है लेकिन यह खूबसूरत जिस्म तो मेरी मेहनत का ही नतीजा है यह तुम्हारे कोठे पर ऐसी रौनक लगाएगी कि तुम मालामाल
हो जाओगी बस मुझे मेरा हिस्सा दे दो वह औरत जो कोठे की मालकिन थी इतराते हुए बोली ऐसे माल के लिए तो हम तुझे ना जाने कितने पैसे देने को तैयार हैं आरजू उठकर भागने लगी मगर वहां मौजूद आदमियों ने उसे फिर से पकड़कर उसी औरत के कदमों में डाल दिया वह बुरी तरह रोने लगी और अपने अब्बा की मिन्नतें करने लगी कि वह उसे यहां नाना छोड़े मगर साधक बस मुस्कुराता रहा 14 साल की उम्र है लेकिन यह तो बिल्कुल 22 साल की जवान लड़की लग रही है वह औरत आरजू को घूर रही थी
लेकिन तुमने यह कैसे किया औरत ने सवाल किया साधक ठहाका लगाकर हंस पड़ा लोग समझते हैं कि यह मेरी बेटी है लेकिन ऐसा कुछ नहीं जब यह पैदा होने वाली थी तो इसकी मां कुंवारी थी उसे सहारे की तलाश थी और मैं उसे दिखा तो उसने सोचा कि मैं उसकी जिंदगी संवार दूंगा लेकिन यह उसकी भूल थी साधक ने फिर से ढाका लगाया और औरत की दी हुई रकम गिनने लगा लालच और हवस उसके चेहरे पर फैला हुआ था यह मुझे मजबूर करती थी कि मेहनत मजदूरी करके पैसे कमा कर लाओ इसकी मां के मरने
के बाद यह लड़की और भी मुसीबत बन गई दिन रात सामान मवाती पैसे मेरी जेब में होते ही नहीं थे फिर किसी ने मुझे मशवरा दिया कि अपनी बेटी पर ध्यान देना चाहिए वही मेरी कमाई का जरिया बनेगी मैंने इसे ऐसे इंजेक्शन लगाए जिनसे यह वक्त से पहले जवान हो गई अब यह यहां कमाए गी और मैं हर महीने इसका हिस्सा वसूल लिया करूंगा साधक ने हंसते हुए कहा मेरी तो जिंदगी संवर गई क्यों खानम भाई खानम हंस दी तू तो बड़ा लालची निकला आरजू उनकी बातें सुनकर जैसे पत्थर की हो गई उसकी आंखें फटी
रह गई अब्बा आपने यह सब क्यों किया वह फूट फूट कर रो पड़ी मगर साधक ने उसकी कोई परवाह नहीं की वह पैसे जेब में डाल खड़ा हो गया और कोठे से बाहर निकल आया अंजाम साधक ने सोचा कि अब वह यहां से भाग जाएगा और चैन की जिंदगी जीगा लेकिन शायद उसके किए गए जुल्म का हिसाब होना बाकी था वह सड़क पार कर रहा था मगर अपने लालच में इतना अंधा था कि एक बड़े ट्रक को नहीं देख सका ट्रक ने उसे इतनी जोरदार टक्कर मारी कि वह दूर तक उछल कर गिरा लोगों ने
उसकी चीख सुनी और दौड़कर उसके पास पहुंचे उसकी गर्दन टूट चुकी थी और खून का फव्वारा बह रहा था कुछ ही सेकंड में उसकी रूह उसके जिस्म से निकल गई दूसरी तरफ आरजू आरजू कोठे से भागने की कोशिश में लगी थी जब सबने सोचा कि वह बेहोश हो गई है तो उसे पिछले कमरे में डाल दिया गया मगर वह तो सिर्फ नाटक कर रही थी जैसे ही लोग वहां से गए उसने अपना छुपाया हुआ खंजर निकाला और दरवाजे का लॉक खोलने की कोशिश की किस्मत अच्छी थी लॉक खुल गया आरजू वहां से भाग निकली और
अपनी खाला के घर पहुंची जब खाला ने उसकी हालत देखी और उसकी आपबीती सुनी तो उसे गले से लगा लिया कुछ ही दिनों में खाला ने आरजू की शादी अपने बेटे से कर दी अब वह अपनी जिंदगी में महफूज थी सबक मां की गैर मौजूदगी में औलाद दरदर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाती हैं