ओम ओम ओम ओम ओम ओ ओ ओ ओ ओ ओ माओ मा माओ माओ माओ माओ माओ माओ मा मा मा मा मा [संगीत] माओ ओम श्री परमात्मने नमः ओम श्री परमात्मने नमः ओमकार मंत्र मंत्र गायत्री छंद गायत्री छंद परमात्मा ऋषि परमात्मा अंतर्यामी देवता ईश्वर प्रीति अर्थे ईश्वर आनंद अर्थे कृ पार्थ कपा जपे विनियोग जप विग ये हम ओमकार का महामंत्र यह हम ओमकार का महामंत्र ईश्वर की प्रीति कृपा और आनंद के लिए और आनंद प्राप्ति के लिए जप रहे हैं इस महामंत्र के ऋषि भगवान नारायण है छंद गायत्री है इस महामंत्र के देवता भगवान
अंतर्यामी स्वयं है अंतर के देवता भगवान अंतर्यामी स्वयं है ओम श्री परमात्मा ने नमः ओ श्री परमात्मने नम ओम आनंद दाता है नमः ओय नम ओम कृपा दाता है नमः ओम कृपा नम ओम कृपा सिंधव नमः ओम कृपा स नम ॐ ज्ञान दाता है नमः ओम ताय नम ओम बल दाता है नमः ओम बल दय नम [संगीत] ओ ओ [संगीत] [संगीत] ओ ओ मा ओ मा ओओ ओओओ माओ माओ मा मा माओ मा मा मा माओ माओ मा [संगीत] हरि ओम ओ ओ बल भगवत बल ओ ओ ओम ओ ओ ओ ओ ओ सत्य बल
ओम ओम ओ संयम बल ओम ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओम ओम ओ ओ ओ ओ अच्छे रास्ते चलने का बल पापी आदमी का मन नहीं लगेगा उसको पाप लेकर भाग जाएगा पापी आदमी यह नहीं कर सकता और बैठ नहीं सकता जिसके पाप नष्ट हो जाते हैं वही डट के ये कर सकता है हरि ओम ओ ओम ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओम ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओम ओ ओ ओ ओ ओ ओ रम रम रम रम रम रर ओम श्री परमात्मने नमः ओम
श्री परमात्मने नमः ओम सच्चिदानंद नमः ओम सचिदा ओम शांति ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओ [संगीत] ओ पावन होते जाए जिसके पाक नष्ट होते हैं वही अंतर्मुखी श्वर की साधना कर सकता है हर के मंदिरों में जाना उसका सफल हो गया जो हृदय मंदिर में आने को तैयार है अपने अहम को अर्पित करना चाहता है व धन भागी है उसका अष्टदल कमल खिलने लगता है हृदय कमल शांति और आनंद उसके घर की चीज हो जाती है प्रभु का ज्ञान प्रभु का प्रेम उसका अपना हो जाता है ओम श्री परमात्मा ने
नम ओ ओ अंतर्यामी देवता नमः ओम ओम ओ ओ सद बुद्धि दाता है नमः सद बुद्धि देने वाले प्रभु को प्रणाम है ओम ओ ओ सच्चा रस और आनंद देने वाले प्रभु को प्रणाम है ओम ओम ओम मुक्तिदाता मेरे ओम स्वरूप ईश्वर को प्रणाम है ओम ओम ओम ओम ओम आनंद देने वाले आनंद स्वरूप ईश्वर को प्रणाम है ओम आनंद ओम आनंद ओम आनंद ओम आनंद ओम ओम आनंद ओम आनंदम ओम ओम ओम ओम माधुर्य ओम माधुर्य ओम माधुर्य ओम ओम ओम आनंदम ओम आनंदम ओम ओम ओम हृदय कमल खिलता जाए अष्टदल हृदय में अष्ट
दल कमल की नाई नाड़ियों का गुच्छा मुरझाया है इस ओम स्वरूप ईश्वर की उपासना से खिल रहा है अष्टदल कमल और भगवान नारायण ऋषि समाधि है इस पर मेरे हृदय कमल पर भगवान नारायण समाधि के आनंद में आनंदित हो रहे मेरे नारायण मेरे प्रभु ओ आनंद ओ परमात्मा इस ओमकार की महानता को जानते हैं अंतर्यामी देवता इस ओमकार की महानता का रस देने में समर्थ है ओ ओ ओ हरि ओम शांति जो गर्दन झुका के ध्यान करते उनका ध्यान कभी नहीं लग सकता है जो गर्दन दबोच के ध्यान करते हैं वे ध्यान से दूर रह
जाएंगे जो प्रभु को प्रेम करते ध्यान करते नहीं अपने को प्रभु के हवाले कर देते हैं आनंद स्वरूप के हवाले कर देते हैं उनका ध्यान और आनंद घर का खजाना हो जाता है ओम आनंद ओम आनंद ध्यान करने वाला कर्ता बना रहेगा तो ध्यान का आनंद नहीं आएगा अपने कर्ता अपने को ईश्वर के चरणों में सौंप दो निर्दोष बालक किनाई जैसे बच्चा मां को प्यार करता है तो मां का हृदय प्यार से उछलता है ऐसे जो प्रभु को प्रीति करता है तो प्रभु का चित्त भी साधक के हृदय में आनंद उभरता है भगवान का वचन
है भजता प्रीति पूर्वक दादा कररी पूर्वक ध्यान नहीं किया जाता मजूरी पूर्वक ध्यान नहीं किया जाता कर्तृत्व पूर्वक ध्यान नहीं किया जाता अपने को ईश्वर में प्रेम में बहाने से ध्यान किया जाता है हो जाता है ध्यान करना नहीं है ध्यान होने लग जाए प्रेम करना नहीं है करता पन रहेगा उसमें आर्टिफिशियल होता रहेगी सेल्समैन प्रेम करता है ग्राहक को लेकिन नहीं उसके पैसे छिनता है प्रेम तो मां बच्चे को करती है बहन भाई को करती प्रेम तो प्रभु जीव को करते हैं और जीव ईश्वर को प्रेम करे क्या कहना प्रभु मेरे आनंद दाता मेरे
ईश्वर मेरे गुरुदेव मारा वालड़ा कृष्ण कन्हैया बंसी [संगीत] बजैया वृंदावन की कुंज गलियों में साधक की दिल की गलियों में तू प्रेम की बंसी बजा दे तू माधुर्य के गीत छेड़ दे मेरे प्रभु मेरे इष्ट देव मेरे साइया जो ध्यान लगाते उनको लगाने दो जो योगा करते उनको करने दो मजूरी हम तो प्रीति में बहते हैं हम तो तेरे द के पागल बच्चे हैं प्रभु जो योगा करते उनको करने दो कसरत हैं जो ध्यान लगाते उनको लगाने दो ध्यान जो उपदेश देते हैं उनको देने दो उपदेश बनने दो वक्ता भक्ता हम तो तेरे प्यार के
दीवाने तेरे प्रेम में बह जाने को आए तैयार है प्रभु हमें तो पागल रहने दो जगत की चतुराई सदके सदके शराब धन की शराब वालों को उसी में डूबने दो सत्ता की शराब वालों को उसी में लगने दो हम तो हरि नाम की शराब में नाम नशे में नान का छका रहे दिन रात ओम आनंद ओम [संगीत] प्रभु ओम ओ माधुर्य ओम ओम सच्चिदानंद रूपाय विश्व उत्पत्ति आदि है त सारे विश्व की उत्पत्ति स्थिति और प्रलय करने वाले परमेश्वर को हम प्रणाम करते हैं हमारे में तेरी प्रीति की उत्पत्ति कर दी जियो दाता तेरी भक्ति
का पोषण कर दीजिए प्रभु और पाप वासना का प्रलय कर दीजिए प्यारे दुलारे देव हमारे बस का नहीं कि हम संयमी बनकर तुझे खोज ले लेकिन तेरी कृपा के आगे हमारे पाप की क्या ताकत है शूद्र से शूद्र तुच्छ से तुच्छ पापी मन चांडाल से चांडाल मन भी इतना पाप नहीं कर सकता जो रे नाम के आगे टिक सके उसके पाप हम तो तेरे नाम की तेरे नाम की चोटी पकड़ी है यारो अब हम ध्यान लगाएंगे नहीं अब तो प्रेम में बहेंगे भाव की मधुर यमुना में गते मारेंगे [प्रशंसा] लाला ओ लाला कला [संगीत] राम
तीर्थ कृष्ण को बोलते तू गोल चंद्र जैसा है मेरे गल्लू मेरे ललू प्रेमा उतार जो न जपे राम वो है धरती के बारे जो ना करे प्रभु को प्रेम व है जीवन के भारे वापस जन्मे वापस मरे वापस जन्मे वापस मरे हम तो अमर भए अब काहे मरे और जन् मेंगे अब तो तुझे मिलेंगे [संगीत] गुल्लू गुरु जी ने रीत बता दी तेरी चोटी मेरे हाथ में धर दी है अब कहां जाएग मेरे लालू मेरे प्रभु मेरे ओम स्वरूपा मेरे आनंद स्वरूपा अब कहां ज हो हे दिलभर देवता हमें छोड़ के अब कहां जायो शरीर
छूट जाएगा तो छूट जाएगा लेकिन तुम नहीं छूट सकते हो हां महाराज कुटुंब छूट जाए तो छूट जाए लेकिन प्रभु तुम नहीं छूट सकते हो हम समझ गए गुरु ने एड्रेस बता दिया है तुम्हारे वचनों ने भी एड्रेस बता दिया मम वांस जीव भूलो के जीव भूत सनातना हम तेरे सनातन अंश है हम ना मर मरी हमार शरीर हम काहे मरी मरेगा तो शरीर मरेगा निगुड़कर बीमार होता है तो शरीर होता है स्वस्थ होता है तो शरीर होता है हम तो आत्मा है परमात्मा के अविभाज्य यारो गलो जो ध्यान लगाते हैं उन्हें लगाने दो जो
योगा करते हैं उन्हें करने दो जो धन में खप उनको खप नहीं दो जो भोग में खपत हैं उनको खप नहीं दो हमें तो ईश्वर में खप जाने दो यार ईश्वर के रस में एक रस हो जाने दो भोगी खोब भोग में खपत खप खप ही रहे योगी योगेश्वर में आ हाहा एकाकार होकर अमर हो गए यह प्रेम योग है भक्ति योग है प्रभु योग है ओम ओम ओम परमात्मने नमः इस पावन मंत्र के ऋषि परमात्मा नारायण तुम ही हो ना इसके देवता अंतर्यामी देव तुम ही हो मेरे लाला मेरे गोल्लू मेरे गीता गायक मेरे
गुरु मेरे प्रभु क्या क्या कहूं तुम्हें सर्वर रूपा सुख रूपा ओम नमो भगवते वासुदेवाय हे बसने वाले वासु वासु देवा आनंद देवा माधुर्य देवा ज्ञान देवा प्रेम देवा प्रभु जी मेरे अवगुण च ना धरो समदर्शी है नाम तिहारो चाहे तो पल में पार करो वो मेरे प्रभु लेकिन तू भी बड़ा चतुर है तुरंत पार हो जाएंगे तो ये प्रेम का मजा कैसे आएगा भक्त को विरह की वेदना का रस कैसे आएगा इसलिए तू कभी मिलता है कभी छुपता है दिल के देवता [संगीत] लिका छिप्पी खेलने वाले [संगीत] लालू लाला का भी तू लाला लाला की
कन्हैया की आकृति में तो लिका छिपी खेलता और हमारे दिल में भी लिका छिपी खेलता मेरे [संगीत] लाला लिकल कोटी में मजा आ रहा है े तमाम दुनिया है खेल तेरा तू खेल सबको खिला रहा है कहीं तो आंसू बहाने का कहीं तो दिल से प्यासे बिछड़ने का तो कभी मिलने का [संगीत] मजा कहीं मीठा तो कहीं चपरा भी तू ही चता है वा रे वाह लल्लू गुल्लू मेरे प्रभु अंतर्यामी देवता [संगीत] गुरु ने तो तेरे नाम की चोटी पकड़ा दी अब तू कहीं जाई हो अब तुम कहे जा हो कहां जा हो बोतल का
जाम तो नशा उतर जाता है और फिर प्यारिया भरो और अपने को तबाह करो यहां तो दिल की प्याल में लाला का है दिल भर दाता का भक्ति रस मिलता है नाम नशे में नान का छका रहे दिनरात पी पी के पी हरि नाम की प्यारिया ओम नाम की पलिया गुनगुना कर पी चुप होकर पी ऐसे वैसे पी मीरा ने नाचते पी कबीर ने ताना बुनते हुए पी महावीर ने चुप होकर प लीला श साई ने परोपकार करते करते पी हरि नाम की प्यारिया तू घोल घोल कर पी फिर फिर से पी गहरी गहरी पी
चाहे री चरी प पी ले य होय मान होय सबंध आ जाएंगे तो पागल हो जाएंगे कि पागल हो गए सारे के सारे रिश्तेदार आ जाए निगरे कोई रिश्तेदार तो देखेंगे ये क्या है पागल बन गए [संगीत] सब मंसूरी मस्ती को लोग बिचारे क्या जाने साधक की हस्ती को लोक बिचारे क्या जाने साधक की भीतर की हस्ती होती है और बाहर से सिंपल सादा होता है संसारी बाहर से सजा धजा और भीतर खोखला होता है भीतर से खोखले क्या जाने के बाहर बाहर के सज धज में कोई मजा नहीं आए है भीतर के तृप्त साधक
को संसार विचार में फसा व्यक्ति क्या जाने मीरा की मस्ती को राणा क्या जाने पहलाज की हस्ती को रणा कश्यप क्या जाने विभीषण की भक्ति को रावण क्या जाने नाम नशे में नानका छका रहे दिन रात ओम नमो भगवते वासुदेवाय ओम नमो भगवते वासुदेवाय वासुदेवाय इष्ट देवाय शांति देवाय आनंद देवाय माधुर्य देवाय मम देवाय [संगीत] मम देवाया तू पराया देव नहीं तू मेरा देव है ना प्रभु हमारा साथ छोड़ नहीं सकते यह भी प्रभु की मजबूरी हम तुम्हारी मजबूरी को पहचान गए तुम मरने के बाद भी हमारा साथ नहीं छोड़ सकते हो महाराज चाहे हम
नरक में हो तो उसका ज्ञान उसकी चेतना तो तुम ही तुम ही हो चाहे स्वर्ग में होंगे तभी भी उसका ज्ञान और चेतना तो तुम ही हो अब हम हम निश्चिंत भए अब हम तुम्हें ना छोड़ सकते तो तुम हमें भी नहीं छोड़ सकते लाला तू अंतर्यामी देवता है पापी का भी तो अंतर्यामी देवता है पाप करता है तो थथ थथ कम पाता है और पुण्यात्मा का भी तो अंतर्यामी देव होता है पुण्य करता है तो बल भरता है आनंद भरता है भोगी का भी तू अंतर्यामी देवता है और योगी का भी तू अंतर्यामी देवता
है तू हमें छोड़ नहीं सकता मेरे श्यामा मेरे रामा मेरे टा हम संसार को रख नहीं सकते और तुझे छोड़ नहीं सकते और तू भी संसार को एक जैसा नहीं रखता और हमें छोड़ नहीं सकता तेरी मेरी दोस्ती पुरानी य हो तेरा मेरा संबंध पुराना संसार और संसार के संबंध को रख नहीं सकते और जीवात्मा परमात्मा के संबंध को कोई तोड़ नहीं सकता चाहे कितना भी पापी पाप करे लेकिन ईश्वर के साथ का संबंध तोड़ नहीं सकता भूल सकता है बेहोश हो सकता है लेकिन ईश्वर के साथ का संबंध तोड़ नहीं सकता अगर है किसी
में ताकत तो अपने साथ ईश्वर के संबंध को तोड़ के दिखा दे मैं उसका चेला बन जाऊंगा और मेरे सारे आश्रम और सारे शिष्य भी उसको समर्पित कर दूंगा कोई ईश्वर के साथ का संबंध तोड़ के दिखा दे और संसार के साथ का संबंध सदा रख के दिखा दे बचपन के साथ संबंध नहीं रख सके कई दुख आए उनके साथ संबंध सदा नहीं रहा कई सुख आए उनके साथ संबंध नहीं रहा तो अभी जो आ जाएंगे तो क्या कर लेंगे इतने दुख आए वह सदा नहीं रहे तो अभी आ जाएंगे तो क्या कर लेंगे इतनी
निंदा आई अपमान आया तो नहीं रहे इतनी वाहवाही आई तो नहीं रही तो अभी क्या दे देगी वाहवा और निंदा अरे अब तो हम जान गए लाला जीवन जीने का ढंग जान गए पिया को पहचान रहे हैं बलमा की बात जान गए रे जो तुझे प्रीति पूर्वक भजता है वो तेरे ज्ञान को तेरे आनंद को तेरे माधुर्य को तेरे सामर्थ्य को तेरी मस्ती को और तेरी हस्ती को अपनी मस्ती समझता है देवम भूतवा देवम यजे तो देवता बनकर देवता की पूजा करता है भगवान बनकर भगवान को प्यार करता है यह दे दे वो दे दे
बख मंगा कर होकर वो बजता नहीं है तो तो जो संसार के भिखारी हैं वह तुझे सताते हैं यह दे दे वो दे दे तूने टुकड़ा देकर परे कर देता है लेकिन जो तेरे प्यारे हैं उनके पीछे पीछे तू घूमता है भगवान तू प्रेम का भूखा है तू माधुर्य का भूखा है है ना ओम आनंद आनंद दाता प्रेम दाता सद बुद्धि दाता क्या हालचाल है कभी पूछ लिया कर हमसे हम तो तुमसे ही पूछ लेते हैं तुम भी तो पूछोगे उत्तर में आया कि हां जरूर पूछूंगा और पूछता ही रहता हूं तुम भूलते रहते मैं
पूछता रहता हूं वही उत्तर आएगा देर सबेर वाह प्रभु तेरी करुणा वाह प्रभु तेरी कृपा वाह प्रभु तेरी उदारता वाह प्रभु तेरी दया वाह प्रभु तेरी सामर्थ ओ प्रभु ओम श्री परमात्मने नमः ओमकार मंत्र सब मंत्रों के सेतु स्वरूप गायत्री छंद परमात्मा नारायण इसके ऋषि और अंतर्यामी परमेश्वर ही इसके देवता है जो पाप ताप को हर ले और हमें ओमकार जपने की योग्यता हमारे चित में भर ले वह हरियो हरिती अक्षरमनामलाई की बड़ी पुराने घस भगवन नाम का आश्रय ले और दोबारा वह पाप ना करें तो शिप प्रम भवती धर्मात्मा व जल्दी धर्मात्मा हो जाता
है शाश्वत शांति मनि गच्छति वह शाश्वत शांति को शाश्वत सुख को मेरे शाश्वत प्रसाद ज्ञान को पा लेता है संसार का ज्ञान ज्ञान नहीं है वो तो नाए है कल्पना वास्तविक परमात्मा तत्व का ज्ञान ही ज्ञान है बाकी सब अज्ञान में कल्पना के सारे ढोल पीटे जा रहे हैं इसलिए मत बदलते हैं मतिया बदलती है पंथ बदलते लेकिन जो नहीं बदलता सृष्टि के पहले था अब भी है बाद में रहेगा हम उस सत्य स्वरूप ओमकार स्वरूप सर्वेश्वर की उपासना कर जो सच्चिदानंद है विश्व की उत्पत्ति स्थिति और प्रलय का हेतु है जो विश्व में व्याप
है जैसे मिठाई में शक्कर व्याप्त है जैसे तेल में चिकनाई व्याप्त है जैसे घरों में और व्यक्तियों में आकाश व्याप्त है ऐसे जो आकाश में और व्यक्तियों में व्याप है उस सच्चिदानंद की हम उपासना सच्चिदानंद रूपाय विश्व उत्पत्ति आदि तवे ताप प्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयम नमः जो यशोदा के घर आए व कृष्ण तो अवतार लेकर आए लेकिन उसके पहले जो सभी के हृदयं को कर्ष करता है आकर्षित करता है आनंदित करता है सत प्रेरणा देता है गलती करने पर टोकता सत मार्ग देता है उस परमेश्वर को हम प्रणाम करते हैं ओम श्री परमात्मने नमः
ओम रक्षकानू [संगीत] अत आत्मा हो तो फिर काहे डरना जब पोषक तुम हो तो फिर काहे डरना तेरी मार में भी प्यार है तेरे दुख और विघ्न बाधाओं में भी हमारा विकास छुपा है हम गलती करते थे कि सोचते थे कि हम परेशान है जो सोचता है परेशान हूं परेशान हूं उसको परेशानी घरती रहेगी जो सोचता है मैं दुखी हूं दुखी हूं उसको दुख छोड़ेंगे नहीं लेकिन जो सोचता है कि मैं चैतन्य हूं प्रभु का हूं आनंद स्वरूप का हूं उसके आगे दुख और शोक और परेशानिया टिक नहीं सकती ओम ओम ओम जो बीत गई
सो बीत गई तकदीर का शिकवा कौन करे मैं दुखी हो गया इसने ऐसा कहा उसने ऐसा कहा किसी के दोषों को विचारो नहीं और अपने दुखों की आवृत्ति मत करो दुख बढ़ जाएगी चिंता की आवृति मत करो दुखों की आवृति मत करो भोगों की आवृति मत करो भगवन नाम की आवृति करो भगवत ध्यान की आवृति करो भगवत ज्ञान की आवृति करो भगवत प्रेम की आवृति करो आपके सारे दुख छ सारे परेशानी छ सारे कष्ट छू सारे पाप नमो भगवते वासुदेवाय ओम शांति ओम शांति ओम शांति