अगर आज भी मछली पकड़ कर ना लाए तो बेहतर होगा कि घर वापस ना आना यह उस लड़की के अल्फाज थे जिसका बदकिस्मत शौहर जो कि एक मछे था कई हफ्तों से एक भी मछली पकड़ ना पाया था इसी वजह से उसके घर के हालात भी खराब होते जा रहे थे और अब तो उसकी बीवी उसे छोड़ देने का भी सोच रही थी मछे आज भी अपनी कस्मत आजमाने समंदर पर जाने वाला था क्या आज वह कोई मछली पकड़ पाएगा आज समंदर पर उसके साथ क्या होगा क्या आज वह अपना घर बचा पाएगा और क्या
समंदर की म मछलियां उसकी मदद करने आएंगी क्या मछलियां उसे समंदर से सोना निकाल कर देंगी अगर ऐसा होगा तो क्यों कहानी सुनते हैं सूरज की आखिरी किरणें एक ऐसे लकड़ी के पुराने घर पर पड़ रही थी जो समंदर के किनारे बना हुआ था वह घर उस गरीब मछे का था जिसका नाम हारून था वह समंदर से मछलियां पकड़ता था तो तब उसका घर चलता था लेकिन पिछले कई हफ्तों से वह अपने घर एक भी मछली पकड़ कर ना ला पाया था वो इतना गरीब था कि समंदर पर जब मौसम खराब होता और तेज हवाएं
चलती तो उसका लकड़ी का घर हवा से हिलने लगता उसकी बीवी का नाम सबा था वो अपने शौहर की गुरबत से तंग आ चुकी थी और दिल ही दिल में अब उसे छोड़ने का सोचती थी लेकिन यह बात उसने अभी अपने शौहर से नहीं कही थी आज वह अपने घर से निकलकर समंदर के किनारे आ बैठी और समंदर की लहरों को देखकर कहने लगी किस इंसान के साथ मैंने शादी कर ली है गरीब कंगाल और नालायक यह कहते हुए वह खामोश हुई और समंदर को देखकर फिर सोचने लगी अगर आज भी वह मछली पकड़ कर
ना लाया तो तो मैं उसका घर छोड़कर चली जाऊंगी वैसे भी अब उस घर में बचा ही क्या है अभी वह यह सोच ही रही थी कि उसे समंदर से अपनी तरफ आती हुई वह कश्ती नजर आई जिस पर उसका शौहर बैठा हुआ था और साहिल की तरफ आ रहा था जैसे ही वह अपनी कश्ती को लेकर साहिल पर पहुंचा तो उसकी बीवी सबा ने इस उम्मीद से उसकी कश्ती की तरफ देखा कि शायद वह आज कोई मछली पकड़ लाया हो लेकिन आज भी उसकी कश्ती में कोई मछली नहीं थी मछे हारून का उतरा हुआ
चेहरा भी यही कहानी सुना रहा था कि आज भी वह समंदर से खाली हाथ आया है उसकी आंखों में शर्मिंदगी थी वह अपनी बीवी से नजरें ना मिला पाया और खामोशी से अपने घर की तरफ चल पड़ा उसकी बीवी सबा उसे गुस्से से देखती रही हारून जैसे ही अपने घर का दरवाजा खोलकर अंदर दाखिल हुआ तो सबा भी साहिल से उठकर उसके पीछे चली आई सबा बदतमीजी से बोली आज भी बस्ती के सब मछे औरों के जाल मछलियों से भरे हुए थे और तुम इतने मनहूस हो के 20 दिनों से एक भी मछली नहीं पकड़
पाए हारून जो अपने घर की दीवार के साथ आंखें बंद करके बैठ था उसने हारे हुए लहजे में कहा सबा मैं कोशिश तो कर रहा हूं लेकिन क्या करूं किस्मत साथ नहीं दे रही लेकिन तुम फिकर ना करो तुम देखना कल सुबह सब ठीक हो जाएगा सबा ने उसे धमकी देते हुए कहा तुम मेरी बात कान खोलकर सुनो अगर कल भी तुम कोई मछली ना पकड़ पाए तो मैं हमेशा हमेशा के लिए तुम्हें छोड़कर अपने मां-बाप के घर चली जाऊंगी यह कहकर वह बुरा सा मुंह बनाकर बर्तनों के पास आ बैठी शायद वह अपने शौहर
से खाने की चीजें छुपाना चाहती थी मछे हारून बोला सबा मुझे पता है तुम मुझे छोड़कर कभी नहीं नहीं जाओगी सबा ने कोई जवाब ना दिया तो हारून फिर बोला मुझे बहुत भूख लगी है मैंने सुबह से कुछ भी नहीं खाया मुझे खाने के लिए कुछ दे दो सभा गुस्से से बोली कहां से दूं तुम्हें खाना कुछ कमा कर लाए होते तो आज मिल भी जाता मैं तो खुद तुम्हारी वजह से भूखी हूं और वो भी सुबह से तुम्हारे साथ रहने से बेहतर है मैं अपने घर वापस चली जाऊं या फिर समंदर में कूदकर अपनी
जान दे दूं हारून ने फौरन सबाबा की तरफ देखा और फिर उसके लिए किसी हमसाय से रोटी मांगने घर से बाहर निकल आया बाहर अब रात थी समंदर की तेज हवा हारून से यूं टकरा रही थी जैसे गुरबत उसके घर के दरवाजे से टकरा रही थी हारून के घर से निकलने की देर थी कि सबा ने मिट्टी के बर्तन में छुपाया हुआ सालन और रोटियां निकाली और जल्दी-जल्दी उन्हें खाने लगी हारून अपनी बस्ती के एक मछे शिराज के घर के दरवाजे पर पहुंचा और उसका दरवाजा खटखटाने लगा शिराज बाहर आया तो हारून कहने लगा शिराज
भाई वह आज घर में खाने के लिए कुछ नहीं है क्या आप खाने के लिए कुछ दे सकते हैं बस्ती के तमाम मछे जा मानते थे कि हारून की कस्मत खराब चल रही है उसके जाल में कोई मछली नहीं आती सब उससे दूर रहने लगे थे इसी वजह से शिराज भी अब उससे मिलना नहीं चाहता था शिराज नफरत से कहने लगा घर पर कुछ नहीं है और हां अगली बार यहां पर मत आना हारून को शिराज के घर में पड़ी हुई वह ढेर सारी मछलियां नजर आ रही थी जिन्हें वह सुबह बाजार में बेचने वाला
था हारून ने उन्हीं मछलियों की तरफ इशारा करते हुए शिराज से कहा अल्लाह ने आपको आज बहुत सारी मछलियां दी हैं क्या उनमें से आप मुझे कोई एक मछली दे सकते हैं यह मैं भीख नहीं मांग रहा मेरा आपसे यह उधार रहा मैं जब भी समंदर से कोई मछली पकडा तो आपको एक की बजाय दो मछलियां वापस करूंगा शिराज गुस्से से बोला एक मछली पकड़ नहीं सकता तू मुझे दो मछलियां वापस करेगा चल हट हारून शर्मिंदा होते हुए मछे परों की बस्ती के एक और घर की तरफ गया लेकिन वहां से भी उसे जलील करके
निकाल दिया गया हारून बेबसी के आलम में चलता हुआ समंदर की लहरों के पास आया और लहरों के पास बैठ गया उसकी आंखों में आंसू थे उसने रोते हुए आसमान की तरफ देखा तो आसमान के सितारे भी उसे आज धुंधले दिखा दिखाई दे रहे थे वो रोते हुए अल्लाह से कहने लगा ए अल्लाह अपने इस बंदे की मदद कर मुझे रिजक दे ए अल्लाह सबके जाल में मछलियां आ रही हैं मेरे जाल में क्यों नहीं मेरी मदद कर अल्लाह मेरी मदद कर आंसुओं ने हारून के चेहरे को और समंदर ने उसके कपड़ों को गीला कर
दिया था भूख से उसकी हिम्मत जवाब दे रही थी उसे लग रहा था कि सब खत्म हो गया है उसकी हिम्मत भी रिजक भी और उसके लिए मछलियां भी समंदर की लहरें उसे भिगोकर वापस समंदर में जा रही थी और फिर वापस आ रही थी समंदर के इसी खेल में एक बूढ़ा शख्स जिसका नाम आतिफ बाबा था उसकी नजर हारून पर पड़ी वह हारून से कहने लगा बेटा अभी समंदर का पानी और आगे तक आ जाएगा यहां बैठना खतरनाक हो सकता है उठ जाओ हारून सर झुकाए बैठा अपनी सोचो में इतना घूम हो चुका था
कि उसने बूढ़े की आवाज नहीं सुनी बूढ़ा फिर बोला बेटा सब ठीक है इस बार भी जब हारून कुछ ना बोला तो बूढ़े ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा बेटा कोई परेशानी है तो मुझे बताओ हारून ने भीगी आंखों से बूढ़े की तरफ देखा लेकिन कुछ ना बोला बूढ़े ने फिर कहा इंसान हालात से घबराया नहीं करता कभी हार नहीं मानता बोलो क्या हुआ है हारून ने लरज की रोती आवाज में कहा खाने के लिए कुछ मिलेगा बूढ़े ने मुस्कुराते हुए कहा बस इतनी सी बात मैं अभी आया यह कहकर बूढ़ा अपने घर
चला गया और हारून साहिल की रेत पर बैठा उसका इंतजार करने लगा थोड़ी ही देर में बूढ़ा अपने हाथ में खाने की चीजें लिए हारून के पास आ गया यह लो यह तुम्हारे लिए बूढ़े ने हारून से कहा हारून ने बूढ़े की दी चीजें देखी तो उनमें सब्जी दाल और तीन रोटियां थी खाना देखकर हारून की आंखों में फिर से आंसू आ गए उसने बूढ़े का शुक्रिया अदा किया और तेज तेज कदमों के साथ चलता हुआ अपने घर आया और अपनी बीवी से कहने लगा स ये देखो खाना मैं ले आया सबा जो कि पहले
ही खाना खा चुकी थी उसने तीन में से दो रोटियां और आधे से भी ज्यादा सालन अपने लिए रख लिया और एक रोटी के साथ थोड़ी सी दाल और सब्जी हारून को दे दी हारून उसमें भी खुश था खाने के बाद आज वह जल्दी ही सो गया क्योंकि सुबह सूरज निकलते ही उसने एक बार फिर से मछलियां पकड़ने समंदर पर जाने का सोचा लहरें ऐसे किनारे से टकरा रही थी जैसे एक पुराना गीत गा रही हो आसमान हल्के गुलाबी रंगों में रंग रहा था जैसे किसी ने बारिश से पहले का एक खूबसूरत मंजर तस्वीर में
कैद कर दिया हो हारून अपना घर बचाने अपनी कस्मत आजमाने सुबह सवेरे ही अपनी कश्ती लेकर निकल गया आज व कश्ती को समंदर के गहरे पानियों पर वहां ले गया जहां वह आने से डरता था उसकी कश्ती की हालत ऐसी नहीं थी कि वो उस समुंदरी इलाके में आता लेकिन आज उसने अपनी बीवी सबा की खातिर यह भी कर लिया उसने सबा की खातिर अपनी जिंदगी खतरे में डाल दी हारून ने अपना जाल समंदर में फेंका आज उसे लग रहा था कि या तो आज वह कोई ना कोई मछली पकड़ लेगा या फिर उसकी कश्ती
यहीं डूब जाएगी और शार्क मछलियां समंदर में उसे पकड़ लेंगी और खा लेंगी आज हारून के दिल पर एक अजीब सा बोझ था कल रात की सभा की बातें उसे बार-बार याद आ रही थी तुम्हारे साथ रहने से बेहतर है मैं अपने घर वापस चली जाऊं या फिर समंदर में कूद करर अपनी जान दे दू उसे सबा की वह बात भी याद आ रही थी जब उसने उससे कहा था तुम मेरी बात कान खोलकर सुनो अगर कल भी तुम कोई मछली ना पकड़ पाए तो मैं हमेशा हमेशा के लिए तुम्हें छोड़कर अपने मां-बाप के घर
चली जाऊंगी हारून कश्ती में बैठा जाल में किसी मछली के आने का इंतजार करता हुआ सोचने लगा अगर आज भी मैं खाली हाथ घर गया तो सब कुछ खत्म हो जाएगा सबा चली जाएगी इस सोच ने उस खतरनाक समुंद्री इलाके में उससे मौत का खौफ भी खत्म कर दिया अब उसे इस बात का कोई डर नहीं था कि उसकी कश्ती यहां सम समंदर में डूब सकती है वह बस किसी ना किसी तरह बस मछलियां पकड़ना चाहता था चाहे वह समंदर में ही क्यों ना मर जाए यह उसकी अपनी बीवी से सच्ची मोहब्बत थी जिसे वह
चंद पैसों की खातिर समझ ना पा रही थी शायद अगर वह उसकी हिम्मत बनती तो हारून पर ऐसे दिन ही ना आते शायद कुदरत हारून को उसकी बीवी का असल चेहरा दिखाना चाहती थी यही वजह थी कि कई घंटे गुजर जाने के बाद भी हारून अब तक कोई मछली ना पकड़ पाया था दोपहर हो गई गर्मियों का सूरज आग बरसाने लगा लेकिन उसका जाल अब भी खाली ही था 3:00 बजे के करीब उसकी नजर एक ऐसी कश्ती पर पड़ी जहां पर खड़े शख्स का चेहरा कुछ जाना पहचाना था वह कोई और नहीं बल्कि शिराज था
वही शिराज जिसने कल रात हारून को जलील करके अपने घर के दरवाजे से वापस भेज दिया था वह अपनी कल वाली मछलियां बाजार में बेच देने के बाद अब फिर से और मछलियां पकड़ने गहरे समंदर पर आ चुका था उसकी कश्ती हारून की कश्ती से कहीं बड़ी और मजबूत थी और मछली पकड़ने का सामान भी उसके पास हारून से कहीं ज्यादा बेहतर था हारून उसकी कश्ती के करीब आया तो उसने देखा कि शिराज की कश्ती मछलियों से भरी हुई थी और उसके जाल में अब भी और मछलियां आ रही थी जिन्हें वह समंदर से निकालकर
वापस जा रहा था वापस जाते हुए उसने हारून को शर्मिंदा करने के लिए अपनी कश्ती में पड़ी वह सबसे बड़ी मछली दिखाई जिसकी कीमत इतनी थी कि उसे बेचकर उसका एक महीना आराम से गुजर सकता था यह मंजर देखकर हारून को अपनी बदनसीबी पर अफसोस होने लगा उसे यकीन हो गया कि आज भी वह खाली हाथ ही घर जाएगा और हुआ भी ऐसा ही रात के अंधेरे में जब वह वापस अपने घर आया तो उसने डरते हुए घर का दरवाजा खोला कि कहीं सबा घर छोड़कर ना चली गई हो लेकिन उसे तब इत्मीनान हुआ जब
उसने सबा को अपने घर में देखा हारून सबा से झूठ बोलते हुए कहने लगा आज एक बहुत बड़ी मछली मेरे हाथ लग गई थी मैं उसे कश्ती पर लाने ही वाला था कि वह मेरे हाथ से निकलकर समंदर में गिर गई मैं कल उसे पकड़ ही लूंगा सभा अपने बिस्तर पर लेटी उसकी बात सुनती रही लेकिन कुछ ना बोली हारून ने एक गिलास में पानी भरा और उसे पीने से पहले सब सबा की तरफ देखा और आहिस्ता से कहने लगा सबा मुझे पता था तुम मुझे छोड़कर नहीं जाओगी मैं हिम्मत नहीं हारू देखना अच्छे दिन
जल्द आएंगे सबा को उसकी बातों में अब कोई दिलचस्पी ना रही वो उसे छोड़ने का फैसला कर चुकी थी उसने अपने सारे कपड़े एक संदूक में बंद कर ली थे वो रात का अंधेरा खत्म होने का इंतजार कर रही थी और सुबह की किसी ट्रेन से अपने मां-बाप के घर जाने वाली थी लेकिन हारून अभी यह बात नहीं जानता था हारून चाहे आज कोई मछली ना पकड़ पाया था लेकिन अपनी बीवी को अपने साथ पाकर उसे जिंदगी में कुछ उम्मीद नजर आने लगी उसे लगने लगा कि वह उसके बुरे वक्त में उसके साथ खड़ी है
वह उसे छोड़कर नहीं जाएगी इसी वजह से आज वह कल की तरह परेशान नहीं था आज वह फिर से अपनी बीवी के लिए खाना लेने उसी साहिल किनारे जा बैठा जहां वह बूढ़ा कल उसके लिए खाना लेकर आया था लेकिन आज बूढ़ा कहीं नजर नहीं आ रहा था हारून की बेचैनी बढ़ने लगी हारून ने इधर-उधर देखकर खुद से सवाल पूछा अगर आज वह बूढ़ा ना आया तो मैं सबा के लिए घर खाना कैसे लेकर जाऊंगा व कख्त गुजरता गया रात गहरी सितारे और रोशन हवा मजीद सर्द और लहरें और भी तेज होने लगी अब साहिल
किनारे बैठकर बूढ़े का इंतजार करना फजल था आज वह नहीं आने वाला था हारून मायूस होकर अपने घर चला आया आज जिंदगी में वह पहला मौका था जब वह अपनी बीवी के लिए खाने की कोई चीज ना ला पाया था सबा रात का खाना खाकर सुबह के इंतजार में सो चुकी थी जबकि हारून भीगी पलकें लिए उन बर्तनों को देख रहा था जिनमें सबा खाना रखा करती थी उसने घर के बर्तनों को इस उम्मीद से देखना शुरू किया कि शायद उनमें से खाने की कोई चीज मिल ही जाए उसकी नजर एक पते पर पड़ी जिसे
देखकर लगता था कि शायद उसे छुपा कर रखा गया है हारून ने उसे खोला तो उसकी आंखें खुली की खुली रह गई वो पथली पके हुए चावलों से भरी हुई थी वो खुशी से बोला सबा देखो चावल यह कहते ही वो रुक गया और आगे की बात ना कह पाया क्योंकि वह समझ गया था कि यह चावल सबा ने उससे छुपा कर रखे हुए थे लेकिन घर में जब कुछ था ही नहीं तो यह चावल सबा के पास आए कहां से जब उसने सोचा तो उसे याद आया कि एक महीना पहले जब उसने मछली पकड़ी
थी तो वो उस से बेचकर चावल लेकर आया था और तब से उसके घर में एक बार भी चावल नहीं पके थे वह समझ गया था कि उन चावलों को सभा ने अपने लिए संभाल कर रख लिया था और उन्हें आज पकाया है उसे इस बात का इतना दुख नहीं था कि सबा ने सिर्फ अपने बारे में सोचा बल्कि उसे तो इस बात की खुशी थी कि वह आज भी भूखी नहीं सोई हारून ने अपना पेट भरने के लिए वही चावल खाए जो सबा छुपाकर सोई थी आधी रात को समंदर का पानी और आगे आ
जाता था पानी उस घर के करीब तक पहुंच जाता था जहां हारून और सबा रहते थे आज भी समंदर का पानी उनके घर के करीब आ चुका था जिससे उनके घर में सर्दियों जैसी ठंड हो गई थी हारून ने चादर ली और बिस्तर पर लेटकर घर की खिड़की से बाहर समंदर की लहरों को आता जाता देखकर यही सोचने लगा कि आज वह सुबह से भूखा था और सबा ने फिर उससे चावल छुपा करर रखे इन्हीं सोच में वह सो गया और समंदर पर सुबह हो गई आज वह सुबह हुई थी जो हारून को सबा का
असल चेहरा दिखाने वाली थी आज वो सुबह थी जो सब कुछ बदल देने वाली थी आज वो ऐसी सुबह थी जो उन बीवियों के लिए एक एक सबक बनने वाली थी जो अपने शौहर के मुश्किल वक्त में उनका साथ नहीं देती उनकी हिम्मत नहीं बनती उन्हें तन्हा छोड़ देती हैं सुबह की पहली किरण के साथ ही हारून फिर से मेहनत करने के लिए उठ गया सबा अब भी सो रही थी हारून सबा को अपनी बीवी के रूप में जिंदगी में आखिरी बार देख रहा था लेकिन इस बात से बेखबर वह सबा के लिए मेहनत करने
घर से बाहर निकल आया वह समंदर किनारे पड़ी अपनी कश्ती का जायजा लेने लगा आज वह और भी बड़ा खतरा मोल लेने वाला था आज वह समंदर में और आगे निकल जाने वाला था इसी लिए वो अपनी कश्ती का जायजा ले रहा था कि क्या उसकी हालत ऐसी है कि वह समंदर में और आगे जाने का रिस्क ले सके इतनी देर में सबा भी उठ चुकी थी उधर हारून कश्ती लेकर समंदर पर रवाना हुआ इधर सभा रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुई वह अपना घर और अपना शौहर छोड़कर हमेशा-हमेशा के लिए वहां से चली गई
सूरज अब थोड़ा और ऊपर आ चुका था हारून ने अपना जाल उठाया और समंदर में फेंक दिया उसके हाथ ठीक जाल की रस्सी पर थे हर बार की तरह एक उम्मीद और मछली का इंतजार लेकिन फिर अचानक उसका जाल हिलने लगा जाल भारी लगर रहा था हारून अपने हाथों से जाल खींचने लगा और फिर जब जाल पानी से बाहर आया तो हारून की आंखों में चमक आ गई जाल के अंदर एक बड़ी सी मछली थी लेकिन सिर्फ वो नहीं उसके छोटे-छोटे बच्चे भी थे मछली जैसे उसे देख रही थी हारून ने जिंदगी में पहली बार
ऐसी आंखें देखी गहरी बेचैन और मदद तलब उसके मासूम छोटे बच्चे जाल में फंसे हुए थे बेचैन और बेबस हारून का दिल पिघल गया उसने आहिस्ता से जाल खोला और मछली के छोटे-छोटे बच्चों को निकालकर पानी में छोड़ दिया वह फौरन तैरती हुई अपनी मां के गिर्द घूमने लगी लेकिन उनकी मां अब भी जाल में थी मछली के बच्चे चाहते थे कि किसी तरह वह अपनी मां को जाल से आजाद करवा लें वह चाहते थे कि समंदर में अपनी जिंदगी वह अपनी मां के साथ ही गुजारे हारून ने जब यह मंजर देखा तो वह सारी
कहानी समझ गया पर वह मजबूर था वह अपना घर बचाने और उसे चलाने के लिए हर हाल में कोई ना कोई मछली पकड़कर ही आज अपने घर जाना चाहता था लिहाजा उसने जाल को पूरा कश्ती के अंदर खींच लिया और मछली कश्ती में आकर तड़पने लगी कश्ती से बाहर मछली के बच्चों की आंखें ऐसी लग रही थी जैसे वो रो रहे हो मछली चाहे कश्ती में आ गई थी लेकिन उसके बच्चे अब भी कश्ती के साथ तैर रहे थे हारून की नजर फिर से मछली के बच्चों पर पड़ी उनकी हालत देखकर हारून को उन पर
तरस आ रहा था लेकिन अगर आज वह मछली को छोड़ देता तो आज उसके घर में खाने को कुछ भी नहीं था और शायद कल वह भूख से हिम्मत हारकर फिर मछली पकड़ने समंदर पर ना आ पाता और शायद उसकी कहानी ही खत्म हो जाती यानी हारून को लग रहा था कि आज उसके पास जिंदगी का आखिरी मौका है आज उसे किसी भी हाल में उस मछली को मंदर में वापस नहीं छोड़ना हारून ने जो मछली पकड़ी थी वह इतनी बड़ी थी कि अगला एक महीना उसका आराम से गुजर सकता था मछली कश्ती में तड़प
रही थी और उसके बच्चे कश्ती से बाहर पानी में हारून ने एक नजर कश्ती में पड़ी मछली पर डाली और दूसरी नजर समंदर में उसके बच्चों पर अब वक्त ज्यादा नहीं था कश्ती में पड़ी मछली बस मरने ही वाली थी हारून ने एक गहरी सांस ली और कश्ती में तड़पती मछली उठाकर समंदर में फेंक दी वह रोता हुआ उस मछली को देखकर कहने लगा जा चली जा आज प पहली बार उसे लगा कि वह सिर्फ एक मछे नहीं बल्कि एक इंसान भी है बड़ी मछली ने समंदर की गहराइयों में जाने से पहले एक पल के
लिए हारून को देखा जैसे वो हारून का शुक्रिया अदा करना चाहती हो मछली के बच्चे अपनी मां से मोहब्बत का इजहार कर रहे थे इसके बाद मछली अपने बच्चे लेकर समंदर की गहराइयों में कहीं चली गई हारून अपना सर पकड़कर कश्ती में बैठ गया और कहने लगा ये मैंने क्या कर दिया थोड़ी देर खामोशी के बाद वो फिर बोला अगर आज मैं खुश नहीं हूं तो क्या हुआ आज वो मछली और उसके बच्चे तो खुश हैं ना यह कहते ही वो आंखें बंद करके अपनी कश्ती से टेक लगाकर बैठ गया और खुद में ही कहीं
गुम हो गया लेकिन फिर उसे अपनी कश्ती से किसी चीज के टकराने की आवाज सुनाई दी हारून ने कश्ती से झुककर नीचे पानी की तरफ देखा उसे पानी में कुछ चमकता हुआ दिखाई दिया सोना एक छोटा सा सोने का टुकड़ा वही मछली पानी से बाहर आई थी उसके मुंह में सोने का एक छोटा टुकड़ा हारून ने सोना पकड़ा तो एक पल के लिए लहरें फिर से उठी और मछली समंदर में चली गई हारून को अब मछली पकड़ने की जरूरत नहीं थी वो सोने को बेचकर अपनी कई हफ्तों की जरूरतें पूरी कर सकता था वो खुशी-खुशी
अपने घर वापस आया तो घर में सिर्फ खामोशी थी उसने आवाज दी सबा मगर कोई जवाब ना आया उसके दिल में एक अजीब सा खौफ जागा और अचानक उसे सबा की कही हुई यह बात याद आई अगर कल भी तुम कोई मछली ना पकड़ पाए तो मैं चली जाऊंगी कहीं सबा सच में तो नहीं चली गई हारून ने अपना सर पकड़ लिया नहीं ऐसा नहीं हो सकता हारून के दिल में बेचैनी बढ़ने लगी वो तेजी से बाहर निकला इधर-उधर देखा मगर सभा कहीं ना थी फिर उसे याद आया कि उसके पास सबा के बाप का
नंबर है लेकिन हारून के पास ना मोबाइल था और ना ही उसे फोन करने के पैसे उसने करीबी बाजार में जाकर सोना बेचा और सबा के बाप को फोन किया दूसरी तरफ से एक सख्त आवाज सुनाई दी सबा के बाप की आवाज सुनाई दी जिसने उसे बताया कि सबा उसी के घर पर है और अब वह उसके साथ रहना तो दूर उसकी शक्ल भी नहीं देखना चाहती उसने आइंदा उसे फोन ना करने का कहा दिन गुजरते गए हारून की सारी कोशिशें नाकाम रही हारून और सबा का रिश्ता हमेशा के लिए खत्म हो गया उस दिन
उन दोनों का रिश्ता कानूनी तौर पर खत्म हो गया था उस रात हारून समंदर किनारे आ बैठा आज उसके पास पैसा था सभा नहीं थी सभा उसके लिए नहीं सिर्फ पैसों के लिए उसके साथ थी जैसे ही पैसा खत्म हुआ वह चली गई जो साथ छोड़ने वाले होते हैं वह किसी भी हाल में छोड़ जाते हैं जो असल में अपने होते हैं वह अच्छे बुरे वक्त में साथ निभाते हैं यह कहानी हमें एक नहीं कई सबक देती है जिंदगी में अच्छा बुरा वक्त आता रहता है मगर मुश्किल वक्त ही हमें बताता है कि हमारे अपने
कौन हैं और गैर कौन जो मुश्किल में साथ देते हैं वही हमारे असल साथी होते हैं अच्छे वकं में तो गैर भी साथ दे देते हैं अगर आप इस कहानी का अगला हिस्सा देखना चाहें जहां हारून की जिंदगी में मजीद अजीब वाक्यात होंगे तो कमेंट्स में बताएं वो एपिसोड और ज्यादा अच्छी होगी जिसके बाद आप तीसरी एपिसोड भी देखना चाहेंगे और हां बेल आइकॉन दबाएं ताकि स्टोरी नाइट की अगली कहानी आप तक फौरन पहुंच जाए