[संगीत] हेलो अस्सलाम वालेकुम एंड आदाब टू एवरीवन। आप सब देख रहे हैं टीटीएस। आओ बात करें। मैं हूं समर अब्बास। हम हर सैटरडे को लाइव आते हैं। आपसे गुफ्तगू करने के लिए, आपसे बातचीत करने के लिए, अकायद पर, आपके बिलीफ सिस्टम पर। हम आपसे यह जानना चाहते हैं, यह समझना चाहते हैं कि जब हमारे पास इस्लाम जैसी एक खूबसूरत नेमत मौजूद है, जिसके अकायद भी अकली है, जिसके फैसले भी अकली हैं, तो फिर हम सब आखिर मुसलमान क्यों नहीं हो जाते? या फिर आपके ज़हनों में कोई इस तरह के सवालात है, एतराजात हैं जिसके अगर
जवाब आपको मिल जाए तो इंशा्लाह फिर आप हो जाएंगे। तो अगर ऐसी कोई बात है तो आए हमसे बात करें। हम आपको सुनना चाहते हैं और इंशा्लाह ताला आपसे सुनकर आपके सवालात को आपके एतराजात को हम एड्रेस करने की कोशिश करेंगे और इंशा्लाह ताला अगर परवरदिगार ने चाहा तो इंशा्लाह आप इसके फायदे देखेंगे और इंशा्लाह आप खुद मुसलमान हो जाएंगे या फिर अगर आपके बिलीफ सिस्टम इतने ही स्ट्रांग है और आपको लगता है कि भाई नहीं यार आपके तो बिलीफ सिस्टम माशा्लाह से बहुत ही स्ट्रांग पायदार हैं और इस्लाम से ज्यादा मजबूत है जबरदस्त तो
इससे अच्छी और क्या बात हो सकती है? आए आप हमारे साथ शेयर करें। आप हमें बताएं और इंशा्लाह ताला हम आपसे सीखेंगे, समझेंगे और जानेंगे हम आपसे। अगर आपको कोई डर है, कोई खौफ है कि यार हम कोई इस तरह का आपसे सवाल कर लेंगे कि जिसका जवाब आपसे नहीं बन पाएगा तो फिर क्या होगा? अगर इस तरह की कोई बात है तो कोई परेशानी की बात नहीं है यार। हम आपसे सवाल ही नहीं करते। कोई बात नहीं। हम आपसे नहीं करेंगे सवाल। मगर यार हिम्मत करो आ जाओ सिर्फ बात ही तो करनी है। आओ
बात करते हैं। ठीक है? बात करने में तो कोई परेशानी नहीं है ना। तो इंशा्लाह ताला मुझे इंतजार है देखें कि कौन आता है हमसे कौन गुफ्तगू करता है। वह क्या कहता है वो क्या समझना चाहता है या क्या हमें समझाना चाहता है। क्योंकि देखें हम इस हकीकत को बहुत अच्छे से जानते हैं कि जब हमारे कमेंट सेक्शन के अंदर बात आती है तो हमारे कमेंट सेक्शन के अंदर माशा्लाह से भरपूर तरह से कमेंट्स किए जाते हैं। इस्लाम पे एतराजात किए जाते हैं और जो कुछ कर सकते हैं वो सब कुछ करते हैं। मगर जब
वहीं पर हम यह बात करते हैं कि यार आ जाओ बात करते हैं तो बात करने के लिए कोई नहीं आता। तो जब आप इतना करज दिखा रहे हैं कि इस्लाम पर आप ऐतराज कर सकते हो कमेंट सेक्शन में तो आके बात भी करो। बात करने में क्या हर्ज है? हम बात तो कर ही सकते हैं। मगर खैर किसी पे जोर जबरदस्ती तो है ही नहीं। हर बंदा जो है वो अपनी जात में अपनी फितरत में आजाद है। तो अगर कोई हमें ज्वाइन करना चाहता है तो सर मोर दन वेलकम। में से अच्छी क्या बात
हो सकती है? अगर आप हमें जॉइ नहीं करना चाहते हैं तो भी कोई मसला नहीं है। हम आपको कोई प्रेशराइज तो कर ही नहीं रहे हैं। कोई जोर जबरदस्ती तो है ही नहीं। तो इंशा्लाह ताला हमारी जो बात है हम अपनी बात जो है वो आपके सामने रखेंगे। मगर देखें जो चीज अंडरस्टैंड करने वाली है वो ये है। वालेकुम अस्सलाम हमारे प्यारे-प्यारे भाई। देखिए जो चीज़ समझने वाली है वह यह है कि अगर वाकई में कोई खुदा ही नहीं है अगर कोई खुदा नहीं है तो मेरे मुसलमान होने से फिर आपको इतनी तकलीफ क्यों है
आप इस बात को भी तो समझिए ना मेरे दोस्त अगर खुदा है ही नहीं कोई अल्लाह अगर है ही नहीं तो फिर आपको तकलीफ नहीं होनी चाहिए पर जब आपको इतनी तकलीफ है आप जब इतना आके प्रचार करते हैं कि अल्लाह नहीं है या अल्लाह की जात पे ऐतराज आपात करते हैं आप आप यह कहते हो कि कयामत नहीं है तो भाई आप आओ हमें समझाओ फिर आप इतना बात करने से खौफजदा क्यों होते हो? यह बात समझ में नहीं आती ना यार। अब कोई अगर यह मेरा भाई मुझसे कहने की कोशिश करें नहीं यार
हम तो खुदा को मानते हैं पर हम पॉलिथीस्ट हैं। हम मानते हैं कि यार एक से ज्यादा खुदा है। फिर इसमें क्या परेशानी है आपको? मैं कहूंगा नहीं दोस्त मुझे इसमें कोई परेशानी नहीं है। मगर परेशानी वाली बात यह है कि पॉलिथीज्म के अंदर भी कहीं पर भी हिसाबो किताब के दिन का कोई जिक्र मौजूद नहीं है। ये बात समझने वाली है। अगर आप ये कहते हो कि हम खुदा को तो मानते हैं और हम पॉलिथीस्ट हैं। हमें आपसे बात करने की जरूरत नहीं है। हमें इस्लाम को कबूल करने की जरूरत नहीं है। तो मेरे
दोस्त मेरे भाई फिर भी जो बात समझने वाली है वो यह है कि इस्लाम के अलावा जितने भी मज़ाहिब है जितने भी खुदा के कांसेप्ट है वहां पर हिसाबो किताब के दिन की बात ही नहीं है। असलन ना सिर्फ वहां पर बात नहीं है बल्कि वहां पर कांसेप्ट भी नहीं है। दिस मींस ये कि अगर आप इस्लाम के अलावा किसी और मजहब पे मर जाते हो और अगर आपका मजहब सच्चा है तो आप और मैं हम बराबर हो जाएंगे। क्योंकि हिसाबो किताब वाला तो कोई दीन ही नहीं है। तो अगर आप कहते हो कि यार
आप एथिस्ट हो, आप एग्नोस्टिक हो, स्केप्टिक हो या आप पॉलीथीस्ट हो, हिसाबो किताब तो होना ही नहीं है। तो जब हिसाबो किताब होना ही नहीं है तो आपका मरना मेरा मरना क्या हो गया दोस्त? खुद बताओ ना क्या हो गया? बराबर हो जाता है। पर अगर खुदा है और फिर जो खुदा है वो एक से ज्यादा भी नहीं है। एक ही है और वो इस्लाम वाला ही खुदा है। इस सूरत में क्या हो जाता है? इस सूरत में आपका और मेरा मरना एक जैसा नहीं रहता। दोस्तों, हम यह बात आपको समझाना चाह रहे हैं। यहां
पर आपका और मेरा मरना जो है वह एक जैसा नहीं रहता। बल्कि यहां पर बात ये हो जाती है कि फिर अगर मेरा ईमान जालिम है और हकीकी ईमान है मैं कामयाब हो जाऊंगा। आप फंस जाओगे। और मुझे आपसे मोहब्बत है। मैं आपसे ये नहीं कहता कि आप आओ और हम कोई बदतमीजी आपके साथ करना शुरू कर दें। नहीं नहीं नहीं हम ये नहीं कह रहे। हम कह रहे हैं भाई हौसला दिखाएं। आप जज्बा दिखाएं इंशा्लाह आप आए हम मिलकर गुफ्तगू करते हैं। हु नोस गॉड नोस क्या पता आप पर अस्र हो जाए। आप कबूल
कर लें इस्लाम को। चलो इस्लाम को कबूल नहीं भी करते तो कम से कम आप हमारी बात तो सुनिए। या फिर अगर आपको लगता है कि आपके बात में इतना ही वजन है इंशा्लाह तो आप आ जाओ। आप हमें जॉइ करो। हमने स्ट्रीम का लिंक दे रखा है। वो चैट बॉक्स के अंदर मौजूद है। आप आओ और आप अपना बिलीफ सिस्टम हमें बताओ। पर ना आने की वजूहात भी हमें समझ में आती है। क्योंकि हमने देखा है हमारे इन्हीं लाइव्स के अंदर कि जब हमारा कोई भाई आया है चाहे वो स्टेप्टिक बन के आया हो,
इग्नोस्टिक बन के आया हो। जब उन्होंने हमसे गुफ्तगू की है तो आपने खुद उनकी यह परेशानी देखी कि वह जातेजाते इस चीज को मान के चले गए कि इस्लाम जो क्रिएटर का कांसेप्ट देता है वो अकल ही है। वो इतना मान के गए। कभी हमने यह भी देखा कि हमारे भाइयों ने ये तक आके कह दिया कि यार तुम्हें तो पता ही नहीं है। हम तुम्हें बताएंगे तुम्हारे कुरान में क्या है और जो एतराजात उन्होंने किए वो सब कुछ कुरान में मौजूद ही नहीं थे। और वो सारी चीजें कुरान में क्यों मौजूद नहीं थी? उसकी
एक ही वजह थी। वो कुरान में इसलिए मौजूद नहीं थे क्योंकि उन्होंने किसी नॉन मुस्लिम से, किसी एक्स मुस्लिम से एक झूठी बात सुनी और इस खुशफहमी का शिकार होकर वो आ गए कि नहीं भाई अब हम तो बताएंगे कि कुरान में क्या लिखा है और अफसोस की बात तो यह है कि कुछ निकला ही नहीं। तो यह सारी शर्मिंदगियां उठानी पड़ती है। अब मैं अपने उन भाइयों को उन दोस्तों को एड्रेस करना चाह रहा हूं कि जो माशा्लाह से बहुत ही ज्यादा पुरवकार तौर पर और अपने जज्बात में डूब कर वो हमसे कहते हैं
कि भाई इस्लाम में तो पता नहीं खुदा ना खास्ता कितनी बुराइयां हैं। कितनी कमियां और खामियां मौजूद है। और जब हम कहते हैं कि अच्छा दोस्त अगर ऐसा है तो लाइव आ जाओ। वो लाइव आने के लिए तैयार नहीं होते। मगर माशा्लाह फिर उनके जो कमेंट्स हैं वह भी खत्म नहीं होते। तो हमने सोचा कि चलो यार ठीक है। हम एक दफा फिर कमेंट्स वगैरह कुछ दिखा देते हैं कि शायद हमारे किसी भाई को गैरत आ जाए। गैरत मतलब इन टर्म्स ऑफ़ पॉजिटिवली मैं कह रहा हूं कि यार आप जब इस तरह के मैसेजेस कर
रहे हैं तो आप इतना भी तो हौसला दिखाएं कि आप आ जाए पर अगर आप नहीं आना चाहते तो हम उस पे भी कुछ नहीं कर सकते। सरकार क्या कर सकते हैं? आप आजाद हम आजाद बंदा आपका गुलाम हम चलिए स्क्रीन पे ले आते हैं एक दफा फिर से भाई हमारे ये भाई थे इन्होंने दावा किया था कि कुरान उन्होंने नौ से ज्यादा दफा पढ़ रखा है नौ से ज्यादा दफा और उन्होंने ये कहा कि भाई इसमें 17 साइंटिफिक मिस्टेक्स हैं तो जब आपको साइंटिफिकल एरर्स मिल चुके हैं तो फिर आप आए ना भाई हमें
दिखाएं ना हमें ईमेल आती है ना आप लाइव आते हैं। आप सब कमेंट्स में आते हैं और फिर आप एतराज करके चले जाते हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] यानी ऐसे तो नहीं चलेगा ना यार। कुछ ना कुछ तो करना होगा। हिसाब तो मुसल मुस्लिम के साथ है। बाकी जो इस्लाम को नहीं मानते वो बगैर हिसाब के जहन्नुम के दरवाजे में दाखिल होंगे। जी बिल्कुल ऐसा ही है मेरे भाई। ऐसा ही है। मगर हमारी जिम्मेदारी यह है कि हम इनको मोहब्बत के साथ हम इनको कन्विंस करने की कोशिश करें। हम इनको कहें कि यार
आ जाओ। आ जाओ। हम मोहब्बत से आपसे बात करने की कोशिश कर रहे हैं। आप आ जाओ। हम आपसे बात करते हैं। जो बात समझ में नहीं आती वो ये समझ में नहीं आती कि यार ये इतने खफ क्यों होते हैं? ये इतने परेशान क्यों होते हैं? ये इतना डरते क्यों हैं हमसे गुफ्तगू करते हुए? जबकि कमेंट्स में आ रहे हैं। मैं उनकी बात नहीं कर रहा हूं जो पहली दफा सुन रहे हैं। मैं तो उनकी बात कर रहा हूं जो रेगुलरली हमारे कमेंट सेक्शन में आते हैं। हमसे बात करते हैं। एतराज करते हैं। जब
हम उनको कहते हैं कि यार आप आ जाओ तो वो आने से भाग जाते हैं। फिर ठीक है? हमारे सुल्तान भाई हैं। एक कितनी दफा इनके हमने मैसेजेस दिखाए हैं। आते हैं एतराजात करते हैं कि इस्लाम झूठा है। मैं साबित कर दूंगा। आ जाओ ना भाई। क्यों नहीं आते? आप यहां पर देखिए इन्होंने यहां पर इस बात को कहा है। मुझसे कहा है इन्होंने डायरेक्टली कि अगर मैं इस्लाम को झूठा साबित कर दूं तो क्या इस्लाम छोड़ दोगे? अब हम कह रहे हैं कि आ जाओ। हम तो मान रहे हैं ना। और देखिए हमने आपका
चैलेंज भी एक्सेप्ट किया था कि भाई चैलेंज एक्सेप्टेड मैंने कहा कि यार आप मुझे ईमेल कर दो हम आपके लिए टाइम वगैरह डिसाइड कर लेते हैं। हम डिबेट कर लेंगे आप आ जाओ। हमें कोई मसला नहीं है। मगर आप आने वाले तो बनिए ना। बंदे गायब हैं। तो यार ऐसे नहीं चलता। इसमें मजा नहीं आता। आप आए आप हमसे बात करें। आप हमें समझाएं कि क्यों आप इस हकीकत को कबूल करने से कासिर हैं कि कोई खुदा हो सकता है। आप आए आप हमें यह बात समझाएं कि भाई क्यों आपको प्रॉब्लम है कि जब आप
जानते हो कि क्रिएटर है तो उस क्रिएटर के पीछे आप तहकीक क्यों नहीं करते? क्यों नहीं करते आप? तो जब तक कोई भाई इतनी हिम्मत करता है कि हमसे आए बात करें। हम कास्टेंटली एक बात कह रहे थे तो आज हमने सोचा कि चलो क्यों ना कि हम आज हदीस भी कुछ आपको दिखाई दे इस हवाले से और इंशा्लाह अगर परवरदिगार ने चाहा तो आपको इससे बहुत फायदा भी होगा। हमने एक जिक्र किया था हमने कहा कि देखो दोस्त सिर्फ मुसलमान नहीं जाएंगे जन्नत के अंदर। नॉन बिलीवर्स भी जाएंगे जन्नत के अंदर। और इस पे
एतराजात मुझ पे काफी ज्यादा हुए कि यार ये आप कैसे कह रहे हो? और एक भाई ने तो कहा यार आप मुझे रेफरेंसेस दो ताकि मैं दूसरों को भी जाकर वो रेफरेंसेस शो करूं। ठीक है? मैंने वहां पर यह बात की कि भाई नॉन बिलीवर्स जा सकते हैं बट देयर इज़ अ कंडीशन। एक कंडीशन है एक एग्जाम होगा उसके बाद जाएंगे वो। ऐसे ही कोई फ्रीली नहीं चला जाएगा। अब यहां पर बहुत सारी चीजें हैं समझने वाली। मगर मैं पहले आपको हदीस दिखा देता हूं। [गला साफ़ करने की आवाज़] इस वक्त हम हैं तफसीर इबने
कसीर में। यह सूर असरा है। सूर असरा चैप्टर नंबर 17। जिस भाई को देखना हो वो इंशाल्लाह जाके देख ले। मैं अभी उर्दू में शो कर रहा हूं। अभी मुझे इंग्लिश का लिंक मिला नहीं है। अगर मुझे इंग्लिश का लिंक मिल जाता है या मुझे इंग्लिश बाद में मिल जाती है तो इंशा्लाह ताला आई वुड डेफिनेटली शेयर इट। वालेकुम अस्सलाम। हमारे फहीम भाई जो है वो भी माशा्लाह से कमेंट्स के अंदर आए हैं। तो अगर कोई ज्वाइन करना चाहता है वो हमें ज्वाइन कर सकता है। हमने लिंक जो है वो पिन कर रखा है। तो
हम तफसीर इब्न कसीर से दिखा रहे हैं। और ये है सूर असरा। सूर असरा में हम क्या दिखाना चाह रहे हैं? चलिए हम पहले आपको आयत भी दिखा ही देते हैं यार। कोई मसला नहीं है। पहले हम आयत दिखा देते हैं। फिर हम तफसीर में जाके दिखाएंगे कि तफसीर में दर हकीकत बात हो क्या रही है। तो यहां से हम इंग्लिश और उर्दू दोनों खोल लेते हैं। गालिबन नंबर 15 ही है। तो हम यहां से खोल लेते हैं। चल बिल्कुल यही है। यही है। हम इसको ज़ूम कर देते हैं भाइयों के लिए। ठीक है। अपना
नाम अमल पढ़ आज अपना हिसाब लेने के लिए तू ही काफी है। यानी ये रोज़ कयामत की बात हो रही है। तो अभी हमारा जो सरोकार है वो आयत नंबर 15 से है। मनदा यहां से हमारी बात हो रही है। मनदा इनदी नफ़्स बिस्मिल्लाह रहमा रहीम। मनदा इनदी नफ़्स। ठीक है? बात क्या हो रही है कि भाई जो सीधे रास्ते पे चला है तो वो अपने ही लिए चला है और जो भटक चुका है वो अपने ही लिए भटका है और उसने खुद नुकसान ना उठाना है। कोई किसी और का बोझ नहीं उठाएगा। यानी रोज़
कयामत। ठीक है? हमारे जो भाई हैं, प्यारे-प्यारे जो भाई हैं, उन्होंने कहा कि भाई वो क्यों नहीं आते? ये बात समझ से बाहर है। दो तरह की कैटेगरीज हैं। एक वो हैं बेचारे कि जो ये सोचते हैं कि यार हम अगर जाएंगे तो हमारे पास तो दलाइल है ही नहीं। जब हमारे पास दलाइ है ही नहीं तो हम जाके क्या गुफ्तगू करेंगे? तो वो बेचारे इसलिए नहीं आते। दूसरे वह लोग हैं कि जिनको पता है कि अगर वह आ जाएंगे तो यहां बदतमीजी करेंगे या उनको यह पता है कि यार जो सामने वाला बंदा है
वो हमें बोलने नहीं देगा। अगर हम झूठ बोलेंगे हमारी गलतियां पकड़ी जाएंगी। ठीक है? तो दोनों तरफ से खौफ ही है। खौफ की वजह से नहीं आते। मगर हम परवरदिगार से बस दुआ कर सकते हैं कि वो अपने अंदर करिश पैदा करे और आ जाए। पर खैर हम जिस आयत की बात कर रहे हैं तो परवरदिगार ये कह रहा है कि रोजे कयामत कोई किसी का बोझ नहीं उठाएगा। तो अगर आप इस खाम खयाली में बैठे हुए हैं कि भाई कोई मुफ्ती मौलवी मेरा बोझ उठा लेगा मैं उसके पीछे चलना शुरू कर दूं या कोई
पंडित या कोई चर्च का पादरी वो मेरा बार उठा लेगा ऐसा नहीं होगा आपको यह लगता है कि भाई मैं तो एथलीिस्ट हो गया हूं या एक्स मुस्लिम हो चुका हूं किसी और को सुन के अवस इकबाल और ये पता नहीं डॉक्टर फराज और इस तरह के सर्वा साहब जैसे कुछ अहमों की बातें सुनके कि जो अपना चैनल चला के हमसे पैसा ले रहे हैं और वो हमें झूठी-छूठी कहानियां सुना रहे हैं। जैसे फिक्शन मूवीस वगैरह होती है ना तो कोई ये नहीं कहता कि अगर आप हॉलीवुड या बॉलीवुड की मूवीस देखोगे तो ये देखने
से आप कामयाब हो जाओगे। तो इसी तरह से अगर आप इनके चैनल्स वगैरह इनकी बातों को सुनते आप इनको पैसा देते हैं तो आप कामयाब हो जाओगे। ये तो कहीं पे नहीं लिखा ना। तो परवरदिगार इसी बात को एड्रेस कर रहा है। और जो हमारे लिए जो काम की बात है कि जो अभी हमने तफसीर कसीर से दिखानी है वो ये है कि कोई किसी का बोझ नहीं उठाएगा और हम सजा नहीं देते। ये कीप एड्रेस है। यहां पे जो बात एड्रेस होनी चाहिए। ठीक है? हम सजा नहीं देते जब तक कि किसी रसूल को
नहीं भेज लेते। ठीक है? वी नेवर वुड बी पनिश अंटिल वी सेंड अ मैसेंजर। एंड नेवर वुड बी पनिश अंटिल वी सेंड अ मैसेंजर। परवरदिगार क्या फरमा रहा है? वमा कुबी हत्ता नब रसूला के हम किसी भी यहां पे देखें किसी खास एक रसूल की बात नहीं हो रही है अलिफ लाम मारफा नहीं है यहां पे ला मारफा मौजूद नहीं है ठीक है परवरदिगार कह रहा है कि जब तक हम तुम तक खबर पहुंचाने वाला पहुंचा ना दें हम अज़ाब नहीं करेंगे ये परवरदिगार का अदल है मगर हम आपको क्या दिखाना चाह रहे हैं इब्न
कसीर से इसी सूर असरा की आयत नंबर 15 की तफसीर के अंदर अगर आप देखें तो मैं आपको डायरेक्ट अब हदीस दिखा रहा हूं हदीस और फिर हम इस पे इंशा्लाह ताला गुफ्तगू करेंगे और जिस भाई को अगर हिदायत चाहिए हो तो इंशा्लाह परवरदिगार से तलब करें कोशिश करें। मुसन अहमद में है कि चार किस्म के लोग कयामत के दिन अल्लाह ताला से गुफ्तगू करेंगे। अब यहां पर इब्न कसीर जिस हदीस का सहारा ले रहे हैं वहां पर चार लोगों की बात हो रही है। ठीक है दोस्त? वरना अहादी बहुत है और उससे ज्यादा नंबर
मौजूद हैं। पर अभी हम सिर्फ इसको प्रेजेंट कर रहे हैं आपके सामने। [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो चार किस्म के लोग ऐसे हैं जो अल्लाह ताला से गुफ्तगू करेंगे। अच्छा भाई क्या गुफ्तगू करेंगे? एक तो बिल्कुल बहरा आदमी जो कुछ भी नहीं सुनता। यानी एक वो शख्स है ठीक। अच्छा यार एक भाई का भी एक कमेंट आया है कि भाई नेथन याू जो है तो भाई आपने बहुत तारीफ की उनकी शुक्रिया सरकार। यह लाइव आके समझा दो ना भाई। लिंक तो मौजूद है। ऐसा नहीं है कि लिंक मौजूद नहीं है। तो दोस्त लिंक
तो मौजूद है। आप आ जाओ। अगर आपको यह है ना ऐतराज कि यार मुझसे सवाल मत करना। फिर मैं आकर आपको सारी बातें कह सकता हूं। तो कोई बात नहीं है। हमने लिंक फिर से दे भी दिया है। आप आके कह दो यार मुझसे सवाल कुछ नहीं करना। मैंने बेबुनियाद बातें करनी है। चलो ठीक है। हम उससे सवाल भी नहीं करेंगे। आप आ जाओ कोई मसला नहीं है। पर हिम्मत करके आ तो जाओ ना दोस्त। ऐसे मजा नहीं आता। पर खैर तो पहला वो शख्स है कि जो बहरा है यानी जो सुन सुन नहीं सकता।
दूसरा वो है जो बिल्कुल अहमक है। दूसरा पागल हो गया यहां पर जो कुछ भी नहीं जानता। तीसरा ऐसा आदमी है यानी जो इतना जईफ हो चुका है कि अब वो उसके हवास जो है वो बरकरार रहे नहीं है। ठीक है? और चौथा वो शख्स है जो ऐसे जमाने में गुजरा है कि कोई नबी या कोई पैगंबर जो है या तो उसका जमाना उसको नहीं मिला या फिर उसकी तालीम मौजूद ना थी। ठीक है? तो चार तरह के लोग हो गए। हदीस के अंदर किन चार तरह के लोगों की बात हो रही है कि पहला
वो है जो बिल्कुल बहरा है। सुन नहीं सकता कुछ भी। दूसरा बिल्कुल अहमक आदमी की बात हो रही है। पागल मजनून दीवाने की बात हो रही है। तीसरे उसकी बात हो रही है जो इतना जईफ हो चुका है कि अगर उस तक कोई बात पहुंच भी जाए तो पहुंचना ही बेहकार है। क्योंकि हवास उसके काम ही नहीं कर रहे सही तरह से। और चौथा वो है ये की पॉइंट है। चौथा वो शख्स की यहां पे गुफ्तगू हो रही है कि जिसके पास या तो कोई नबी नहीं पहुंचा। कोई पैगंबर पहुंचा ही नहीं है। या फिर
उसकी तालीमात नहीं पहुंची। अब आपको समझ में आ गया? यानी आज जो बहुत सारे रहने वाले लोग हैं उसमें से जो सुन नहीं सकता वह भी कवर हो गए। इसमें वह भी कवर हो गया जो अहमद पागल जो पागल किस्म के लोग हैं जो अक्सर ये सवाल भी होता है ना कि यार भाई पागल किस्म के लोगों का दीवाने किस्म के लोगों का क्या हिसाबो किताब होगा भाई ये है जवाब उसका आप यहां पे जवाब देख और ऐसे लोग कि जिन तक कोई पैगाम पहुंचा ही नहीं है। आप उनका भी जवाब ले लें। ठीक है?
इब्ने कसीर क्या फरमा रहे हैं? मुसनद अहमद से हदीस लेकर आए। तो बहरा यह कहेगा कि भाई इस्लाम तो आया लेकिन मेरे कान में कोई आवाज ही नहीं पहुंची। तो जब कोई आवाज ही नहीं पहुंची तो मैंने क्या करना है भाई? दीवाना कहेगा कि इस्लाम आया लेकिन मेरी हालत ही ऐसी ना थी कि भाई मैं कुछ समझ सकता बल्कि बच्चे मेरा मजाक उड़ाते थे। फिर क्या हुआ? जो जईफ उमरी में होगा वो ये कहेगा कि भाई इस्लाम आया लेकिन मेरे होशो हवास ही दुरुस्त ना थे। अब आप समझ रहे हैं कि खुदा कितना आदिल है
और यह भी लोग समझ रहे हैं कि खुदा आदिल है। इसलिए वो वो क्लेम लेकर आ रहे हैं जो वैलिड है। जस्टिफाइड है कि भाई अगर इस्लाम आया तो हम होशो हवास में नहीं थे तो हम उसको समझते कैसे? ये उस ऐतराज का भी जवाब है जो कहते हैं ना कि ईमान जो होता है वो ब्लाइंड होता है। भाई बिल्कुल होता होगा। ठीक है। आप जितने भी पॉलिथीस्ट की अगर आप बात कर रहे हैं हां बिल्कुल आप ठीक कह रहे हैं। आप एथिस्ट एग्नोस्टिक स्केप्टिक की बात कर रहे हैं जो एक दूसरे की बात सुन
के अंधा बिलीव करते हैं। ये सब बिल्कुल ठीक कह रहे हैं। इस्लाम के अंदर अंधे बिलीफ की कोई जगह नहीं है। इसीलिए ये क्लेम कह रहे कर रहे हैं के भाई हमारे होशो हवास नहीं थे बरकरार। हम कैसे प्रोसेस करते जो तालीमात आई थी इसको। ठीक है? तो होशो हवास दुरुस्त ना थे। मैं समझ सकता रसूलों के जमाने का और उनके तालीम को मौजूद है ना पाने वालों का कॉल होगा ना रसूल आए और ना मैंने हक को पाया फिर मैं कैसे अमल करता ठीक है तो यहां पे होशो हवास दुरुस्त ना थे जो मैं
समझ सकता रसूलों के जमाने जमानों का और उनकी तालीम को मौजूद ना पाने वालों का कॉल अब जिन तक पैगंबर नहीं पहुंचा या जिन तक तालीमात नहीं पहुंची उनका कॉल क्या होगा भाई के ना रसूल आए ना मैंने हक पाया फिर मैं कैसे अमल ठीक है? अगर आज मेरे पास इस्लाम की तालीम नहीं पहुंची तो क्या मेरा कसूर है? मेरा कसूर ही नहीं है। यह बात हो रही है इस हदीस के अंदर। और यहां पर मुसलमानों के ऊपर भी एक जिम्मेदारी आती है। बिल्कुल बिल्कुल आप सही कह रहे हैं। बिल्कुल बिल्कुल आप दुरुस्त कह रहे
हैं। बिल्कुल हकीकत ऐसी है। ठीक है। हर कौम के लिए एक हादी है। ठीक है। मगर यहां पे मुसलमानों पे भी जिम्मेदारी है। भाई हम अगर ये चैनल बना के बैठे हैं। कोई हमसे ये सवाल कर सकता है। भाई हम जब कहते हैं एथिस्ट को एग्नोस्टिक को कि यार तुम ये काम क्यों कर रहे हो? क्योंकि तुम्हारे हिसाब से तो इस्लाम गलत है। तुम्हारे हिसाब से तो नाउजब्लाह कुरान जो है वो खुदा की किताब ही नहीं है। उसमें गलतियां है या जात रसूल के अंदर आदीस में तुमको गलतियां नजर आती है। तो तुम ये चैनल
बना के टाइम क्यों जाया कर रहे हो? तो वो कह रहे हैं नहीं नहीं नहीं हम लोगों को बचाना चाहते हैं इस्लाम से? इस्लाम से बचाना चाहते हो या पैसा कमाना चाहते हो? तुम पैसा कमाने के लिए कर रहे हो। ठीक? क्योंकि तुम्हारे पास कोई पर्पस ही नहीं है ना। अगर इफ यू से कि देयर इज़ ओनली वन लाइफ और हम जो चाहे कर लें [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो फिर आप जो चाहे कर लें कोई मसला नहीं है। ठीक ठीक है। फिर हमें भी करने थे। हमें जो करना है। फिर हमारे करने
से आपको क्या प्रॉब्लम है? बट इफ यू आर अ मुस्लिम। अब आपके ऊपर रिस्पांसिबिलिटी है। जो अभी व्यू कर रहे हैं जो बाद में व्यू करेंगे जो इस हिस्से को सुनेंगे या किसी मुफ्ती साहब से आलिम दीन से सुनते हैं। देखिए हम सब पे ये रिस्पांसिबिलिटी है। हम सब पे ये बाइंडिंग है कि अगर हमारे पास हक है तो हम इन लोगों को पहुंचाएं। क्योंकि ये वहां पे क्या क्लेम कर रहे हैं। ये कह रहे हैं कि भाई हम तक तो कुछ पहुंचा ही नहीं था। तो जब हम तक कुछ पहुंचाई ना रसूल आए ना
मैंने हक पाया फिर मैं कैसे अमल करता तो अगर इस जुमले के तहत खुदा ने हमें और आपको खड़ा कर दिया वहां पर तो फिर हम क्या करेंगे ये सोचिए ये समझने वाली बात है ये इतनी आसान और सादा बात नहीं है तो अगर आपके पास कुरान और हदीस की तालीमात है और आज आप देख रहे हो कि आपके पास फ्री रिसोर्सेज मौजूद है तो उसको यूटिलाइज कीजिए आए मैदान में और लोगों तक हक पहुंचाए मगर एसन तरीके से जोर जबरदस्ती गाली गलौज कुफ्र के फतवे ये नहीं जो दीन में हराम है वो हराम है।
हम उसको अडॉप्ट करके हम किसी को मुसलमान नहीं कर सकते। तो अल्लाह ताला उनकी तरफ पैगाम भेजेगा। नाउ दिस इज द की डूड ये है बात। अब अल्लाह क्या पैगाम भेज रहा है भाई उनकी तरफ। अच्छा जाओ जहन्नुम में कूद जाओ। अरे यार भाई ये क्लेम कर रहे हैं कि ऐ मेरे खुदा हमारे पास तो उज़्र है। इसलिए हम ईमान नहीं लाए। दिस मींस कि वो अभी ईमान ला चुके हैं। वो कह रहे हैं कि दुनिया में हमारे पास उज़्र था। असलेला में ईमान नहीं लाए। हम अमल नहीं कर सकते थे। अब अल्लाह से क्या
कह रहा है? जाओ जहन्नुम में। अल्लाह की कसम जिसके हाथ में मेरी जान है कि अगर वो फरमाबरदारी कर लेंगे और जहन्नुम में कूद पड़ेंगे तो जहन्नुम की आग उन पर ठंडी और सलामती वाली हो जाएगी। नाउ यू सी नाउ यू सी परवरदिगार कितना रहमान है। कितना रहीम है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] यह क्या लिखा है मेरे भाई ने? सवाहा खुजरा तकवाहा। ठीक है भाई अगर आप कुरान की आयत लिख रहे हैं तो इट्स बेटर के फिर आप अरबी ही लिख दें ताकि हम उसको सीधा पढ़ लें। मगर डेफिनेटली आपने कोई अच्छी बात
ही लिखी होगी यहां पर। सो नाउ द की इज़ द की। भाई परवरदिगार कितना आदिल है। यह भी नहीं कि आपने वहां पर उज़ूर पेश किया और खुदा ने बोला अच्छा भाई चलो अब सब जन्नत में जाओ। तो मैं जो इतने इम्तिहानात से गुजरा उसका क्या? परवरदिगार ने एक इम्तिहान रखा। कहा जहन्नुम में जहन्नुम में जाओ। अगर अब तुम ईमान रखते हो खुदा पर भाई अगर मैं एक जात को मान चुका हूं। दिस मींस व्हाट? मैं अगर एक जात को सच्चा मान चुका हूं और जो भी बात कहेगी वो सच्ची ही कहेगी ना। और कुछ
तो कहेगी नहीं वो। ठीक है? तो यही बात यहां पे हो रही है कि भाई अब तुमने मान लिया ना मुझे। चलो अब जाओ जो मानेगा इस बात को कूद जाएगा उसके लिए आग क्या बन जाएगी ठंडी हो जाएगी और इंशा्लाह ताला ठीक है वो दूसरी जबान है ठीक है तो वो क्या होगा फिर उसके लिए जन्नत बन जाएगी ठीक है और जो रुके रहेंगे उन्हें हुक्म अधूली के बास घसीट कर जहन्नुम में डाल दिया जाएगा जो नहीं मानेंगे इस बात पे डटे रहेंगे कि नहीं नहीं हम तो उजर लेकर हम आप यह देखते हो
ना यार लोग कितनी एक्टिंग करते हमारे साथ स्क्रिप्ट सैयद भाई आए कितनी एक्टिंग कर रहे थे वो कि भाई बस वो कुरान में लिखा है इसलिए मैं मानता हूं। वरना हो ना करना तो है ही नहीं। बस अंधा बिलीव है। अरे भाई सीधा-सीधा बोल दो भाई आप मुसलमान नहीं हो। आप बिला वजह शर्त फैलाने के लिए आए हुए हो। लोगों का दिमाग खराब करने के लिए आए हो। आप सीधे-सीधे बात करो ना यार। आपके सामने कितनी बहानेबाजियां कर रहे थे। हम कह रहे थे कि इनफिनिट बीइंग खुदा के अलावा कोई और हो ही नहीं सकता।
अरे नंबर्स इनफिनिट होते हैं। जब वहां पे जवाब दे नंबर तो तुम्हारे दिमाग के अंदर होते हैं। हम तो प्रैक्टिकल वर्ड की बात कर रहे हैं भाई। यहां पर जवाब दो। कोई बना था जवाब? नहीं हुआ था। अच्छा अब कोई भाई यह मुझसे कह दे कि यार उन्होंने हकीकत कबूल कर ली? नहीं की। आज भी जाके कोई पूछेगा ना वो नंबर्स को इनफिनिटी ही बोल रहे होंगे। क्यों? हकीकत को कबूल नहीं करना। फाई की वैल्यू की बात की। वो हमने Google से दिखा दिया, डॉक्यूमेंट दिखा दिए, एक्सप्लेन कर दिया कि भाई फाई की वैल्यू जो
है इनफिनिट नहीं होती है। क्योंकि फाई की वैल्यू सर्कल की होती है। वो सर्कल खुद में फाइनाइट होता है। अगर आप कहते हो कि फाई की वैल्यू जो है वो इनफिनिट है। दिस मींस ये कि अब जितने भी नंबर आपका सॉरी जो सर्कल हो जाएगा अगर फाई की वैल्यू इनफिनिट हो जाएगी। वो सर्कल कभी भी कंप्लीट ही नहीं हो सकता। यानी सर्कल अपनी शेप में आ ही नहीं सकता। उसके दो पॉइंट्स आपस में मिलेंगे ही नहीं। वो हमेशा ओपन रहेगा। तो वो सर्कल बन ही नहीं पाएगा कभी भी। क्या भाई ने मान लिया? नहीं माना।
अब आप देख रहे हैं जैसे इनको जवाब मिलता है, जैसे ही इनको जवाब मिलता है कि भाई अरे हमारी तो दलील गलत है। फिर क्या करते हैं? हकीकत को कबूल करते हैं। नहीं करते। फिर क्या करते हैं? यार अब तो हम आएंगे ही नहीं। अब तो हम आएंगे नहीं। ये वो लोग हैं। परवरदिगार इनके बारे में बता रहा है कि अच्छा तुमने मान लिया। अब मेरी बात मान लो। तो क्या बात मानेंगे? नहीं मानेंगे। फिर इनको जहन्नुम में घसीट के डाला जाएगा। क्यों? क्योंकि बात ही नहीं मान रहे इसकी। ठीक है? और फिर यहां पे
इन्होंने लिखा भी है यहां पे दो नंबर वन एंड नंबर टू करके। दोनों ने फुटनोट दिए हैं। हसन रेफरेंसेस आपके सामने हैं। दोस्त आप खोल लीजिए। हमने इब्ने कसीर का आपको हवाला ही इसीलिए दिया है कि यहां से फिर आप खोलते चले जाए। मुसरद अहमद के अंदर देख लें। भाई तबरी के अंदर देख ले सही इब्न हब्बान को देख लें। आप फिर वाफिल महमूद आप देखते जाए भाई। आप बहकी को आप देख लें। अब बज़ार को देख लें। आपको हर जगह ये मिलती चली जाएगी। ठीक है? हसन है यहां पर। सही है। फिर तबरानी ने
उसको सही कहा है। फिर अहमद इब्न हम तो चलो आ गए। शेख अलबानी ने इसे सही कहा है। आपको सारी चीजें मिलती चली गई है। एक हदीस मैंने आपको दिखाई। क्या सिर्फ एक है? दो तीन फिर सबके ऊपर कलाम। उनकी सेहत के ऊपर कलाम। आप अगले सफे पे जाएं। फिर चौथी फिर पांचवी फिर सबके ऊपर कलाम है। आप नीचे देख लें भाई। छठी हदीस, सातवीं हदीस, आठवीं हदीस। ठीक है? हर किसी के ऊपर कलाम है। ठीक है? जिसको जईफ माना है वो भी बताया है। जिसको सही माना है वो भी बताया है। जिसको हसन माना
है वो भी बताया है। जईफ का मतलब झूठा नहीं होता। वो मौजू होती है। ठीक है? यहां पे सिर्फ जोफ पाया गया है वो बताया है। मगर आप उसको मैं कह रहा हूं कि बेदरक आप छोड़ दीजिए इसको। एक हदीस नहीं है भाई। ठीक है? एक से ज्यादा हदीसे हैं। नौवीं हदीस दसवीं हदीस भाई आ गया। क्या करना है? मानना है या दीन इस्लाम को अब भी नहीं मानना। आप अदलो इंसाफ को आप देख रहे हैं। अपनी आंखों से आप देख रहे हैं। हम यह बात करते हैं मेरे दोस्त। हम यह बात कहते हैं कि
इस्लाम से ज्यादा खूबसूरत दीन और कोई भी नहीं है। अगर आपके पास कोई उज्र है खुदा कबूल करेगा। ये जो बार-बार कहा जाता है ना कि खुदा को ज़िद है सबको जहन्नुम में डालने की या जो इबादत नहीं करेगा खुदा उसको जहन्नुम में डाल देगा। ये सारी बकवासियात है। ये सारे के सारे झूठ हैं। और यह झूठ क्यों फैलाए जाते हैं? ये सारे के सारे झूठ इसलिए फैलाए जाते हैं ताकि लोग इस्लाम को कबूल ना करें। क्योंकि अगर लोग इस्लाम को कबूल कर लेंगे तो भाई फिर तो मसला है ना यार अगर ये भाई खुद
सोचो अगर लोग इस्लाम को कबूल कर लेंगे तो फिर इनकी दुकानें कैसे चलने वाली है? इनको पैसा कैसे मिलेगा? इनके कमाई का जरिया तो आप बंद ही कर दोगे ना यार। तो भाई सीधी-सीधी सी बात है कि भाई अब हम आपको एक और हदीस भी दिखा देते हैं इंशाल्लाह। क्योंकि मैंने आपको कहा ना कि नंबर्स जो है वो इससे ज्यादा है। मैं इंशा्लाह आपको एक और हदीस दिखाता हूं। ठीक है? फिर इसके बाद जिसको ऐतराज करना है वो एतराज करें। जिसको ऐतराज नहीं करना है, हकीकत को कबूल करना है वो इंशाल्लाह हकीकत को कबूल कर
ले। हमारे साथ कोई अली भाई मौजूद है। जी अली भाई आवाज आ रही है? सलाम वालेकुम। वालेकुम अस्सलाम। जी अली भाई। जी भाई आ रही है मेरी आवाज। जी बिल्कुल आपकी आवाज आ रही है भाई। जी भाई क्या बात करें? क्या बात करें? आप बताइए भाई अल्लाह को मानते हैं नहीं मानते। सलाम किया है तो डेफिनेटली मुसलमान है। अल्लाह को मानते हैं। अगर आपके पास कोई ऐसी बात है करने वाली आप जरूर कीजिए। कोई सवाल हो सवाल कीजिए। जी भाई डेफिनेटली अल्लाह ताला को मानते हैं और बेशक इस दुनिया को चलाने वाली कोई जात है
और वो अल्लाह ताला की जात है। आपको क्या लगता है लोग क्यों अल्लाह को कबूल नहीं कर रहे? भाई उसकी जो मेन रीजन है वो आज का जो नॉलेज है जिस तरह साइंस हमें नॉलेज दे रही है बिग बैंग थ्योरी का और इस यूनिवर्स के बनने का और ये जो चीजें हैं और दूसरी जो मेन रीजन है वो आज YouTube पे बहुत से इस तरह के चैनल है जो आपको लॉजिकल चीजें सोचने पर मजबूर करते हैं। और ये जो लॉजिक है ना यहां पे कुछ ऐसे क्वेश्चन पैदा हो जाते हैं जो यंग जनरेशन है। तो
इस वजह से जो लोग हैं वो इस्लाम से दूरी इख्तियार कर लेते हैं। ऐसा मुझे लगता है। ठीक है? तो डेफिनेटली वो चैनल्स वगैरह आपने भी देखे होंगे। तो अगर वो इतनी लॉजिकल बात कर रहे हैं तो आप क्यों नहीं छोड़ रहे फिर? [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्योंकि भाई मुझे ऐसा लगता है बात तो वो लॉजिकल करते हैं। मुझे लगता है कि उनको जवाब नहीं मिल रहे उन क्वेश्चन के उन सवालात के तो वो दूर चले जाते हैं। अगर मेरी बात करें तो मेरा ये जो माइंड है वो मानने को तैयार नहीं है
कि ये ये जो दुनिया है ये बगैर किसी वजह के बनी हो और बगैर किसी जात के बनी हो। तो यह रीजन है मेरी इस्लाम को मानने की, अल्लाह ताला को मानने की। नहीं तो आप मान नहीं सकते इसलिए या आपके पास दलाइल ऐसे हैं इसलिए क्योंकि दोनों में फर्क है ना। या तो आप ब्लाइंड फेथ को मान रहे हैं या आप बिलीफ जो रख रहे हैं वो आपके पास एविडेंसेस के तहत है। भाई जो इस्लाम का जो बुनियादी जो बेस है वो तो फेथ ही है ना। वो ईमान है। तो ऐसे कोई दलाइल मेरे
पास तो नहीं है जो मैं बता सकूं। क्योंकि जिस तरह बिग बैंग थ्योरी की बात करें या ओरिजिन ऑफ लाइफ की बात करें तो अब इसको इसके लॉजिकल आंसर तो मेरे ख्याल में नहीं है ना हमारे पास। चलिए कोई बात नहीं। पर आई वुड जस्ट रिक्वेस्ट इफ आई डोंट हैव एनीथिंग इफ मैं बस एक रिक्वेस्ट कर दूं इफ आई डोंट हैव एनीथिंग डजंट मीन नोबडी हैस इट मेरे पास अगर दलील नहीं है तो मुझे ये कहना चाहिए कि मेरे पास नहीं है इसकी दलील मुझे ये नहीं कहना चाहिए कि हमारे पास नहीं है इसकी दलील
ठीक है चलिए कोई बात नहीं ये आई वुड अप्रिशिएट यू और यही वो बात है कि अगर आपके पास नहीं है दलाईल आपको सुकूक है तो आप जाए किसी से पूछ ले आप किसी से बात कर ले वो आपको सारे एविडेंसेस दे देंगे। आपको किस बात पे डाउट होते हैं? भाई मैंने हमारा इसलिए क्या कहा है क्योंकि मैं किसी से भी क्वेश्चन करूं ओरिजिन ऑफ लाइफ का या इस यूनिवर्स के बनने का तो वो लॉजिकल आंसर नहीं देता। वो वो फेथ के ही बारे में वो जो जवाब देगा वो फेथ के इर्दगिर्द ही घूमेगा। तो
इसलिए मैंने हमारे कहा। [नाक से की जाने वाली आवाज़] ठीक है? तो एक काम करते हैं ना आप मुझ पर यह एक्सपेरिमेंट करके देख लें। अगर इंशा्लाह यही बात होती है तो ठीक है। आप सही कह रहे हैं और अगर ऐसी बात नहीं होती है और परवरदिगार ने चाहा तो शायद हो सकता है कि हम आप तक कोई दलाइल वगैरह पहुंचा दें। हाउ इज इट? भाई आपकी आपकी आपकी आवाज कट रही है। मैं यह कह रहा हूं कि आप मुझसे सवाल कर लें और हम देख लेते हैं के वाकई में ऐसा ही है कि हमारे
पास कोई दलील नहीं है ऑन द क्रिएटर ऑन द गॉड या फिर है और आप तक पहुंची नहीं तो वो पता चल जाएगा। तो भाई आप बताएं कि वैसे मैं एक बात कंफर्म कर दूं मैं मुसलमान हूं। ठीक है? और ये जो चैनल डिफरेंट किस्म के चलते हैं YouTube के इनका मुझ पे कोई असर नहीं हो रहा। डिफरेंट तरह के इनकी बात कर मुसलमानों आवाज आ रही है? ये जी आवाज आ रही है? ये जो ये जो ये जो एथियस्ट है जो ये जो लोग एथियस्ट है या जो स्पेक्टिक है या इग्नोस्टिक है जो किसी
भी क्रिएटर पर यकीन नहीं रखते मैं उनकी बात कर रहा हूं। ठीक ठीक है। कोई बात नहीं। ठीक है। हां जी। कहां से शुरू करें? जो आपको लगता है कि यहां से शुरू होना चाहिए। भाई हम शुरू करते हैं कि जो मेन वजह क्या थी हमको बनाने की? यहां से स्टार्ट करते हैं। सही है। तो यानी आपके पास इस बात के तो सबूत है पुख्ता तौर पे कि देयर इज क्रिएटेड। यहां पर तो आपके पास 1% एविडेंसेस मौजूद है। ठीक है। वो जो है ठीक है। आप मुझे उसमें से एक अपना सॉलिड एविडेंस दे सकते
हैं क्रिएटर के ऊपर। भैया आपकी आपकी आवाज कट रही। मैं कह रहा हूं कि अपने क्रिएटर के ऊपर आपके पास जितने भी एविडेंसेस है उसमें द सॉलिड वन जो आपका सबसे ज्यादा स्ट्रांगेस्ट एविडेंस हो वो आप रख सकते हैं टू प्रेजेंट द केस ऑफ देयर इज ए क्रिएटर। भाई वो सबसे बड़ा जो वो जो सबसे बड़ा एविडेंस है वो ये यूनिवर्स ही है के कि ये जो यूनिवर्स है इतनी वसी अगर हम देखें सूरज चांद हमारे ये जमीन ब्लैक होल ये जो मुकम्मल यूनिवर्स है ना ये सबसे बड़ा एविडेंस है कि इस दुनिया को बनाने
वाली कोई जात है। ठीक है बट देन व्हाट अबाउट द बिग बैंग? आप बिग बैंग के बारे में क्या कहेंगे? वहां पर किस उसको कैसे रिजेक्ट करेंगे? भाई जो बिग बैंग है वो वो ना बात तो करती है के एक सिंगुलरिटी थी सिंगुलरिटी से एक एक्सप्लोजन होता है जिसकी वजह से टाइम के साथ जैसेजैसे टाइम गुजरता गया वैसेवैसे ये सिस्टम प्रिसाइज्ड होता गया तो बिग बैंग ये कहती पर बिग बैंग ये नहीं बताती कि इस सिंगुलरिटी से परे क्या था? तो ये जो ये जो चीज है ये मुझ पे ये मुझे यकीन करवाती है कि
वो जो परे जात थी वो अल्लाह ताला की ठीक है। पर मेरा सवाल आपसे ये है कि अगर आप कह रहे हो कि पीछे कोई क्रिएटर था और वह क्रिएटर अल्लाह ही था तो आपको यह कैसे पता चल गया कि वह अल्लाह ही था। कोई ब्रह्मा भी तो हो सकता था। वह कोई और भी तो गॉड हो सकता था। यूनिवर्स इटसेल्फ वो क्यों नहीं हो सकती अपनी क्रिएटर? तो भाई यूनिवर्स कहीं ना कहीं से तो आएगी ना तो आ गई ना डेंस पॉइंट से डेंस पॉइंट के अंदर थी। भाई देखो अंडे के अंदर जो चूजा
होता है वो क्या करता है? [नाक से की जाने वाली आवाज़] वो उसको जब पता चल जाता है कि यार नाउ दिस इज अ टाइम टू गो आउटसाइड। अंदर मैं रहूंगा तो मैं मर जाऊंगा। वो क्या करता है? एस्केप करता है। वो खुद से फाड़ता है उस अंडे को बाहर आता है। खत्म हो गई बात। यूनिवर्स ने भी यही किया। द मोमेंट यूनिवर्स रियलाइजेस कि भाई ये अब टाइम है। मुझे अब अपने डेंस पॉइंट से बाहर आना है। वो बाहर आ गई। अच्छा भाई मेरा आपसे एक क्वेश्चन है कि आप मुसलमान हैं। अल्हम्दुलिल्लाह। ठीक है।
मैं इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि आप वो क्वेश्चन कर रहे हैं जो मुझे फिर सोचने पर मजबूर करेंगे। तो हम तो इसलिए मैंने ये क्वेश्चन किया। माय माय जॉब इज माय जॉब इज जो मुझे फील होता है जो मैं हदीस में दिखा भी रहा था। जो मुझे अपनी जिम्मेदारी महसूस होती है वो ये कि मेरे पास अल्हम्दुलिल्लाह अल्हम्दुलिल्लाह अल्हम्दुलिल्लाह इतने कवी एविडेंसेस हैं इतने स्ट्रांग एविडेंसेस है के जिसको तोड़ा नहीं जा सकता इन सपोर्ट ऑफ वी हैव ए क्रिएटर एक क्रिएटर इज़ अल्लाह सुभाना ताला इंशा्लाह ताला कयामत लाजमन होनी है रसूल खुदा सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम
इज द लास्ट मैसेंजर कुरान इज द बुक ऑफ गॉड मेरे पास हर चीज के लिए एविडेंसेस है माय बिलीफ इज नॉट द ब्लाइंड फथ मैं अंधों की तरह यकीन नहीं कर रहा हूं। मेरे पास एविडेंसेस हैं। मुझे यह चीज चुभती है कि जब मेरा कोई मुसलमान भाई, बच्चा, दोस्त जाके किसी एथस्ट मुलहद के चैनल पर जाके यह कह देता है कि इस्लाम में तो भाई आपको बस यकीन करना ही करना है। यकीन से मुराद क्या है? बिना एविडेंसेस के बात को मानना है। एंड दिस इज व्हाट द ईमान इज। मुझे ये चीज चुभती है। बिकॉज़
इस्लाम कहीं पे ये नहीं कहता कि ईमान मींस यू शुड नॉट हैव एनी एविडेंस। नो। बल्कि इस्लाम तो यह कहता है कि तुम्हारे पास हर चीज के लिए दलील होनी चाहिए। हा बुरहान तुम सौदिक अगर तुम सच्चे हो तो बुरहान लेकर आओ। दलील लेकर आओ। तो मुझे ये चीज छुपती है। इसलिए मैं आपसे सवाल कर रहा हूं। मैं आपको सिर्फ जगाना चाह रहा हूं कि दोस्त एविडेंसेस आपके पास भी हैं। आप सोचो तो आपको नजर आएंगे इंशा्लाह। तो भाई आप मुझे एविडेंस बताएं ताकि जो मेरे दोस्त हैं जो मुझसे क्वेश्चन करते हैं और आपको मैं
एक और बात बताना चाहता हूं इन चैनल्स की वजह से हमारे जो मुसलमान है वो इस्लाम से दूर जा रहे हैं। ठीक है। बहुत ज्यादा नंबर जा रहा होगा दूर। इज इट भाई आपकी यहां से आवाज कटी है। पहले आपने क्या बोला कोई समझ नहीं आई। मैंने आपसे ये पूछा कि बहुत ज्यादा नंबर में मुसलमान जो है वो इस्लाम छोड़ छोड़ के जा रहे हैं। जी भाई मैं मेरे कुछ दोस्त ऐसे हैं जो कि मुझसे क्वेश्चन करते हैं। मेरे पास उनका कोई लॉजिकल आंसर नहीं होता। मैं अकॉर्डिंग टू साइंस तो आंसर कर सकता हूं पर
अकॉर्डिंग टू इस्लाम मेरे पास वो आंसर्स नहीं होते। तो ये उनकी ये उनकी रीजन है जो ये जो एथिस्ट बैठे हुए हैं YouTube पे तो बहुत से जो मेरे दोस्त हैं वो इस्लाम से दूर जाते हुए मैंने देखे हैं। चल अच्छी बात है। अगर आपने ऐसे दोस्तों को देखा है तो आप उनको हम तक लेकर आए। इंशा्लाह हो सकता है कि शायद आप या आपके वो जो दोस्त हैं हमें भी इस्लाम से दूर ले जाने में कामयाब हो जाए तो प्लीज उन्हें जरूर कहिएगा हम बात करने के लिए तैयार हैं उनसे इंशा्लाह अगर वो हमें
भी अच्छी और सीधी राह दिखाना चाहते हैं तो अलबत्ता थेरेपी भाई कोई है उन्होंने कहा एक मिनट सरकार एक मिनट जब वो कह रहा है कि मैं अल्लाह को मान रहा हूं तो आप उसको गुमराह करने में क्यों लग गए हो भाई हमारे अली भाई जो है ना वो अल्लाह को मानते हैं। मगर अभी इनके पास ऐसे एविडेंसेस नहीं है कि जिस पर वो यह कह सके कि यह अल्लाह को सिर्फ मानते नहीं है बल्कि वो विद एविडेंस यकीनी तौर पे कतई तौर पे अल्लाह को मानते हैं। और इनका अब अल्लाह पे ऐसा ईमान है
कि कोई शैतान कोई खबीस चाहकर भी इनको गुमराह नहीं कर सकता इंशा्लाह। तो मैं अली भाई को सिर्फ वहां तक लेके जाने की कोशिश करूंगा। बेशक। तो हमारे थेरेपी भाई को है ना प्रॉब्लम हो रही है इस चीज से कि यार वो ऐसा क्यों कह रहे हैं भाई देखें हमारे पास ऐसे बहुत सारे कांसेप्ट्स हैं थ्योरीज हैं साइंस के अंदर भाई मैं ये जो ये जो भाई हैं मैं मैं ये जो भाई हैं मैं इनको ये कहना चाहता हूं जी जी बोले मैं भाई को ये कहना चाहता हूं कि अल्हम्दुलिल्लाह मैं मुसलमान हूं और मुसलमान
ही रहूंगा मैं ये कहना चाह रहा हूं कि बहुत से जो जैसेजैसे नॉलेज बढ़ेगा तो वैसे वैसे जो सवालात है वो बढ़ेंगे। तो मैं ये चाहता हूं मैं ये चाहता हूं कि हमें चाहिए कि हमारे पास फेथ के अलावा एविडेंस भी होने चाहिए। 1% ट्रू 1% ट्रू। मगर अली भाई सिर्फ एक इस्लाह कर लें। एक इस्लाह कर ले इस्लाम के फेथ में और दूसरे मज़ाहिब यानी दूसरे बिलीफ सिस्टम के फेथ में जमीन आसमान का फर्क है। मुसलमान के अलावा या इस्लाम के अलावा जब कोई फेथ की बात करता है इट मींस कि ब्लाइंड फेथ। जब
इस्लाम फेथ की बात करता है। दिस मींस द बिलीफ वि एविडेंसेस। और एविडेंसेस भी इतने सॉलिड कि कोई उसको तोड़ ना सके। उसकी बात हो रही है। उन एविडेंसेस की बात नहीं हो रही कि दो सवाल में आप का ग्राउंड जो है वो शेक करना शुरू हो जाए। ठीक है? तो इंशा्लाह इंशा्लाह जो मेरी जो अप्रोच है आज आपके साथ इंशाल्लाह वो यही है कि चाहे एक ही सही पर मैं आपको ऐसी दलील दे दूं इंशा्लाह के उसके बाद जितने भी इस तरह के ऐतराजात आए आप आसानी से उसको एड्रेस कर सकें। आप बोले यार
अब तो कोई मसला ही नहीं रहा यार सारे मसले हल हो गए। इंशा्लाह मेरी ये कोशिश है आपके साथ। मैंने स्क्रीन पर एक चीज शेयर कर रखी है। आपको नजर आ रही है सर? अगर नजर आ रही है तो बताएं। अली भाई नजर आ रहा है कुछ? अली भाई आपकी आवाज नहीं आ रही है मुझे। अली भाई आपकी आवाज नहीं आ रही है मुझे। आई डोंट नो व्हाई पर मुझे आपकी आवाज नहीं आ रही है। चलिए जब आप अगर फिर से ज्वाइन कर सकते हैं तो फिर से ज्वाइन कीजिए। थेरेपी भाई आपने कहा कि एविडेंस
का होना ना होना जरूरी नहीं है। मान लेना जरूरी है। नहीं सरकार ये कहां से लेकर आए हो? थेरेपी भाई आप कौन हो यार? आप आके भाई मुझे बता दो अपने बारे में यार। हु आर यू? आप हो कौन? जो ऐसी बात कर रहे हो यार? ये किसने आपको बोला कि भाई बस मान लेना जरूरी है। अगर आप किसी और मजहब में मौजूद हो और अगर फिर आप इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं तो फिर एक अलग बात है। अलबत्ता अगर आप मुसलमान होकर ये बात कर रहे हैं तो यह बात आपकी गलत
है। सर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि बस मान लेना जरूरी है। आपके पास एविडेंसेस का होना जरूरी है। अभी हम जिस हदीस की तरफ इशारा कर रहे थे वह भी यही कह रही थी और अली भाई फिर से जुड़ चुके हैं। अली भाई अली भाई आपको आवाज आ रही है? जी भाई अभी आइए पहले डिस्कनेक्ट हो गया। कोई बात नहीं। मैंने एक स्क्रीन पर एक तस्वीर बल्कि जीआईएफ जो है गिफ्ट फाइल जो है वो मैंने शेयर कर रखी है। आपको नजर आ रही है सर। अली भाई आई है क्या? आपके इंटरनेट में अली भाई
माज़रत के साथ कोई प्रॉब्लम है जिसकी वजह से या तो आपको मेरी आवाज नहीं आ रही है या आपकी आवाज हम तक नहीं पहुंच पा रही है। अली भाई अली भाई आई गेस कि आपके इंटरनेट में मसला इंटरनेट का इशू लग रहा है मुझे। मैं मैं आपसे गुजारिश कर सकता हूं क्योंकि मैं चाह रहा हूं कि हम आप तक चीजों को पहुंचाएं तो या तो आप YouTube पर आ जाए और YouTube पर आप सुन लें और आपके जो सवाल है वो आप कमेंट्स में करें तो मैं आपके सवाल वहां पर सुनकर फिर मैं आपको जवाब
देने की कोशिश करता हूं। ठीक है? इंशा्लाह वरना आप अगर चाहते हैं तो मुझसे ईमेल पर राब्ता कर लीजिए और इंशाल्लाह ताला फिर कभी आपसे गुफ्तगू कर लेंगे। जब आपके पास बेस्ट टाइम होगा हम उस पर बात कर लेंगे। इंशाल्लाह मैं जो अभी बात कहना चाह रहा था मैं इस बात को यहां पर कंटिन्यू करता हूं जो मैं अली भाई को चीज समझाना चाह रहा था। देखिए साइंस में थ्योरीज बहुत हैं और यह कयामत के सुबह तक रहेंगी क्योंकि साइंस ऑपरेट ही ऐसे करता है कि वो एक नई से नई थ्योरी लेकर आता है और
हम इंसान डेली लाइफ में यही करते हैं कि भाई हमारे थेरेपी भाई को बहुत प्रॉब्लम हो रही है कि यार भाई क्यों किसी बेचारे हमारे मोमिन भाई को आप एविडेंसेस देने की कोशिश कर रहे हो ना दो उनको एविडेंसेस बस यहां से वहां छलांगे लगाते रहो नहीं थेरेपी भाई ये नहीं होगा हम एविडेंसेस देंगे अगर आपको भी चाहिए तो आप आ जाओ लाइव में बात कर लो। चैट में लिंक जो है वह मौजूद है। आप आ जाए सर पर हम एविडेंसेस देंगे। देखें ये है बिग बाउंस की तस्वीर। ये एक थ्योरी है साइंस की। वो
क्या स्टेट करती है? वो ये कहती है कि जो यूनिवर्स है उसमें क्या होता है? देखो ये है बिग बैंग पॉइंट। बिग बैंग हुआ। यूनिवर्स बनी एक सर्टेन पॉइंट पे जाती है। फिर क्रंच हो जाती है। और फिर क्या होता है? यूनिवर्स खत्म हो जाती है। फिर उसी डांस पॉइंट पे वापस चली जाती है। फिर जब उस डेंस पॉइंट पे चली जाती है तो उसके बाद फिर से एक बिग बैंग होता है। फिर से यूनिवर्स बनती है। और फिर उसके बाद क्या होता है? एक सर्टेन पॉइंट पे जाने के बाद वो फिर से क्रंच की
तरफ चली जाती है और फिर इस तरह से होना शुरू हो जाता है। यानी तीन थ्योरीज़ हैं बेसिकली। एक है बिग बैंग की थ्योरी। एक है बिग क्रंच की कि जब यूनिवर्स अपने सर्टेन पॉइंट को टच कर लेगी। उसके बाद अह वो फिर से अपने डेंस पॉइंट की तरफ चली जाएगी। तो ये दो थ्योरीज़ हो गई। और इन दोनों को मर्ज करके यह चीज बनाई गई है कि भाई यह प्रोसेस जो है वो चलता रहता है और यह कभी प्रोसेस जो है वो एंड नहीं होगा। ठीक है? इस तीसरी थ्योरी को कहते हैं बिग बाउंस
की थ्योरी। अगर ऐसी थ्योरीज आपकी तरफ आती हैं। हाउ यू आर गोइंग टू एड्रेस इट? आप इसको कैसे एड्रेस करोगे? क्योंकि आपके लिए तो भाई परेशानी हो जाएगी कि यार भाई हमारे पास तो अल्लाह के होने के लिए तो एविडेंसेस ही नहीं थे। हम तो बस मान रहे थे। फिर हम क्या करेंगे इसका? या अगर लेट्स सपोज मेरा कोई भाई जो अली भाई फिर हमें ज्वाइन कर गए इंशा्लाह अली भाई आप हमें सुन पा रहे हैं? चल अली भाई मैं आपकी बात को कंटिन्यू कर रहा हूं। इंशा्लाह मैंने प्राइवेट में अपना ईमेल भी आपको दे
दिया है। इंशा्लाह जी भाई जी भाई मुझे आपकी अब आवाज आ रही है। चलिए इंशा्लाह मैंने स्क्रीन पर एक चीज शेयर कर रखी है जिसको बिग बाउंस कहते हैं। और ये एक थ्योरी है साइंस की जो ये कहती है कि बिग बैंग होता है। यानी एक डेंस पॉइंट है। उसमें बिग बैंग होता है। वह फैलती है। फिर एक सर्टेन पॉइंट पे जाने के बाद उसमें क्रंच आता है और वह फिर से डेंस पॉइंट की तरफ पलट जाती है। और ये प्रोसेस चलता रहता है। तो ये बेसिकली जो थ्योरी है बिग बाउंस की ये दो थ्योरीज
पर मुश्तमिल है। तो इन टोटल अब ये तीन थ्योरीज हो गई है। तो बिग बाउंस जो है वो ये कहता है कि यह प्रोसेस होता जा रहा है और ये इनफिनिट है पॉइंट। अगर कोई भाई यह कहता है कि हम कॉज और अफेक्ट से हम समझते हैं कि हमारा कोई क्रिएटर है। यूनिवर्स है तो कोई बनाने वाला होना चाहिए। तो भाई यह तो कॉज ऑफ अफेक्ट के कानून को तोड़ देती है। क्योंकि यहां पर तो बताया जा रहा है कि यार यही जो कॉज है यही चलता रहता है। कॉज और अफेक्ट का सिलसिला चलता रहता
है। ये तो यहां पर तो क्रिएटर की जरूरत हमें महसूस ही नहीं होती है। देन हाउ यू आर गोइंग टू एड्रेस इट? अली भाई अगर आप सवाल समझ पाए हैं तो कोशिश कीजिए आप इसको कैसे एड्रेस करेंगे? भाई मैं आपका क्वेश्चन नहीं समझ पाया क्योंकि इंटरनेट की इशू की वजह से डिस्कनेक्ट हो जाता है। आवाज कट जाती है बीच में से। चलिए फिर फिर अली भाई आप मैंने आपको चैट में अपना ईमेल एड्रेस दे दिया प्राइवेट चैट में और इंशा्लाह ताला फिर आप जाइन कीजिएगा। इंशा्लाह YouTube पे आप देख लें और मैंने वहां पे बातों
को कुछ अर्ज कर दिया है। मेरा सवाल भी आप वहां पे सुन मैं मजीद बात भी वहीं पेश भाई मैं मैं इस तरह इस तरह डिस्कशन हम कर लेते हैं। भाई हम इस तरह कर लेते हैं ना मैं आपसे क्वेश्चन कर लूंगा। आप आंसर आंसर कर दीजिएगा मैं स्ट्रीम में बाद में देख लूंगा जवाबात। जी जी बिल्कुल ठीक है बिल्कुल ठीक है तो आप सवाल कैसे करेंगे अगर आपका इंटरनेट बार-बार डिस्कनेक्ट हो रहा है आपकी आवाज हमें नहीं आ रही सही तरह से तो आप एक काम करें आप YouTube पे जाके कमेंट कर लें हमारे
साथ सैयद फराज भाई भी जुड़े हुए हैं अस्सलाम वालेकुम फराज भाई वालेकुम अस्सलाम कैसे हैं समर भाई खैरियत से हैं अल्लाह करम ठीकठाक आप सुनाएं आप हमारे मोहसिनों में से सर इतमा से दुआ सर दुआओं में याद रखा करें। माशा्लाह बहुत प्यारी महफिल आपने सजाई है। अभी मैं बस ड्यूटी से वापस आया तो जैसे ही आप पे नजर पड़ी मैंने कहा चले हाजिरी लगा लेते हैं समर भाई के पास। हमें दुआएं चाहिए। परवरदिगार बस हमें इस लायक समझे कि अपनी दीन की खिदमत के लिए हमें इस्तेमाल कर ले। इससे बरकर हमारे लिए और क्या हो
सकता है। आमीन। बस हमारे हमारे मुसलमान भाइयों को कुछ कमी पेशी है इसी चीज में कि उनके पास यहां तो एविडेंसेस नहीं है या अगर है उनके पास एविडेंसेस तो फिर जो हमारे मुलहिद दोस्तान है वो इस तरह के शकूक पैदा करते हैं कि बेचारे उनको ये लगता है कि हम खुदा को मानते हैं या रसूल को मानते हैं तो बस महज मान रहे हैं। हमारे पास कोई दलील नहीं है। तो बस कोशिश कर रहे हैं कि उन तक दलीलों को पहुंचा दें। बाकी खुदा हिदायत देने वाला है इंशाल्लाह। बेशक ऐसा ही है। जी भाई
हमारे की जानब से लगाई हुई ड्यूटी होती है। जी जी बिल्कुल बिल्कुल नहीं मैं कह रहा हूं कि थेरेपी भाई जो है हमारे उनको पेट में बहुत ज्यादा मरोर उठ रही है। वो कह रहे हैं कि ये दलाइ वगैरह ना दो। बस ये बता दो कि हमें पैदा क्यों किया है। तो फराज भाई इसका जवाब आप देना कि क्यों पैदा किया? थेरेपी भाई को बहुत प्रॉब्लम हो रही है। तकलीफ हो रही है चीज। वैसे अगर वो लाइव आ जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। इस तरह से कमेंट कमेंट हम उनके साथ क्या खेले नहीं आते हुए
सब दिया हुआ है। जैसे आप आए लिंक दिया हुआ है। सब कुछ दिया हुआ है। आप यकीन जाने माशा्लाह से मेरी फैन फॉलोइंग इतनी अच्छी है। कमेंट्स के अंदर मैं कमेंट्स की बात कर रहा हूं। कमेंट्स में माशा्लाह से मेरी फैन फॉलोइंग इतनी अच्छी है कि सब आते हैं कमेंट्स में दावे करते हैं चैलेंज करते हैं सब कुछ करते हैं हम कबूल भी करते हैं पर लाइव कोई नहीं आता सब कहते हैं हम बस कमेंट्स में आके शेर बन के चले जाएंगे लाइव कोई नहीं आता अल्हम्दुलिल्लाह ये एक्सपीरियसेस खैर मुताद मर्तबा हो चुके हैं हमें
के इधर उधर जाकर बातें करनी आसान होती है और जब लाइव में हमने लोगों को बुलाया तो फिर नादार सर चलिए फराज भाई एक और तकलीफ तकलीफ नहीं है सवाल है भाई सवाल है तो फिर लाइव आके करें हिम्मत पैदा करें ताकि हम भी आपसे इस्तफादा कर सकें दूसरा ये है कि जो मौजू समर भाई ने रखा है वो बिल्कुल ओपन है कि भाई आप क्या समझते हैं आए हमारे साथ डिस्कशन करें अपनी आईडियोलॉजी भी यहां पर शेयर करें ना कि हम कोई आपको यहां पे बैठ के खुतबा सुना रहे हैं कि भाई हमारी बात
माने। आप आए अपने लॉजिक्स यहां पे पेश करें। हमें कायल करें और हम आपसे इस्तफादा करेंगे। भाई फराज भाई आप यकीन जानिए कि एक हमारे है ना भाई हैं बहुत अच्छे इंडिया से। उनका ताल्लुक है और ये थेरेपी भाई आपके लिए भी है। उनका नाम है शिवा। वो चार साल पहले जो है वो एथिस्ट हो गए थे। ठीक है? फिर उसके बाद वो स्केप्टिक हो गए। अल्हम्दुलिल्लाह वो तीन हफ्ते से हमारे लाइफ में आ रहे हैं। इस हफ्ते वो शायद मशरूफ है। इसलिए उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। पहले दो हफ्ते आए स्केप्टिक थे। पिछले हफ्ते जब
वो आए थे जो उनका थर्ड वीक था उसमें उन्होंने इस चीज का इकरार कर लिया कि देयर इज अ गॉड। वो क्रिएटर को मान गए। वो बोला मैं क्रिएटर को मानता हूं। अल्हम्दुलिल्लाह। अब अगर इंशा्लाह आगे वो जुड़े रहेंगे इंशा्लाह तो हम उनको अल्लाह तक भी लेकर आएंगे इंशाल्लाह। बट द पॉइंट इज कि जो हमारे थेरेपी भाई भी समझ रहे हैं इस चीज को कि इसीलिए वो लाइफ में नहीं आते कि अगर वो बात करेंगे आके तो फिर मान जाएंगे यार देयर इज अ गॉड वो अल्लाह ही है पर मानना नहीं है सिर्फ एतराज करना
है तो फिर कमेंट जिंदाबाद है और यही हमारे फराज भाई भी कह रहे हैं ऐसा ही है ना फराज भाई बिल्कुल ऐसा ही है जी देखिए यहां पे आने में एक चीज ये है कि हमें भी फायदा होगा ना कि जो इल्म आपके पास है आप समझते हैं नहीं है तो हमें उससे इस्तफादा करवाएं कि भाई इन दलाइल की बेस पे हमें लगता है कि वो मौजूद नहीं है। कोई क्रिएटर नहीं है। कायनात हादसे का जो है वो जरिया है या उसके सबब से बनी है। उसका बनाने वाला कोई नहीं है। तो जो चीज हमारे
ज़हनों में नहीं आ रही हमारे जो माइंड है वो इसको एक्सेप्ट नहीं कर पा रहे। अगर आप लोग समझते हैं कि आपके पास अच्छे मजबूत दलाइल मौजूद है इस पे तो फिर क्या हेजिटेशन है? आप आए यहां पे। थेरेपी भाई माशा्लाह से जैसे फराज भाई यह कह रहे हैं जैसे मैं भी गुजारिश कर रहा हूं यहां अभी आपने अली भाई को देखा अली भाई ने क्या कहा अली भाई ने कहा कि भाई मैं मुसलमान हूं अल्हम्दुलिल्लाह यकीन भी है ना मुलहिदों का एतराज एतराज का कोई असर मुझ पे हो रहा है मगर दलाइल इतने मोहकम
नहीं है तो हम जैसे इनसे अभी यही गुफ्तगू कर रहे थे ताकि इनके दलाईल को हम मोहकम कर सके मुस्तहकम कर सके इसी तरह से माशा्लाह आप कह रहे हैं कमेंट्स के अंदर कि आप अल्लाह पे भी ईमान रखते हैं रसूल खुदा सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम पर भी आपका ईमान माशा्लाह बहुत अच्छी चीज है ये। आपने कहा कि आप बदतमीजी नहीं कर रहे। मैंने भी नहीं कहा कि आप बदतमीजी कर रहे हैं। हम यह कह रहे हैं कि आप आए लाइफ में जब आप बात करेंगे हमसे तो इंशा्लाह जब हम बातचीत एक दूसरे से करेंगे तो
हम आपको जवाब दे भी पाएंगे और जो आपके ज़हनों के अंदर जो सुकूक है हम उसको भी एड्रेस कर पाएंगे। अब एक कमेंट से किस तरह से हम आपको जवाब दे। अब ऊपर भाई ने इसका जवाब दे रखा है। आपने कहा कि भाई हमें क्यों पैदा किया? भाई ने आपको चैट में जवाब दे रखा है। बंदगी के लिए पैदा किया। तो आपको जवाब तो मिल गया। तो आप इसके ऊपर मजीद सवाल पर सवाल आप क्यों कर रहे हैं? अब यह सोचिए क्या आप सवाल पे सवाल क्यों कर रहे हैं? आपको जवाब तो मिल चुका है।
आपका सवाल करना यह बता रहा है कि आप सेटिस्फाई नहीं हो रहे। और जब आप सेटिस्फाई नहीं हो रहे हो तो हम आपको कह रहे हैं कि आप आ जाओ लाइफ में। हम आपसे बात करते हैं और इंशाल्लाह ताला हम आपको जवाब देते हैं। मैंने यह जवाब कई दफा अपने दोस्तों को दिया है। अपने भाइयों को दिया है कि खुदा ने क्यों हमें क्रिएट किया बंदगी के लिए कि जैसे हमारे भाई ने यहां पर बताया है। खुदा ने जिसको भी बनाया है चाहे इंसान हो, जिन हो, फरिश्ते हो, पत्थर हो, दुनिया की कोई भी चीज
हो, सब बंदगी के लिए बने। फर्क सिर्फ यह है कि जिनों को इंसानों को यह आजादी है विद द फ्री विल। कि आप अपनी फ्री विल से डिसीजन मेक कर सकते हो। चाहो तो आप खुदा की बंदगी करो। चाहो तो खुदा की बंदगी ना करो। क्योंकि यह फ्री सिस्टम वाला जो मैकेनिज्म है या सिस्टम जो है यह सिर्फ जिनो इंसानों के लिए है। इसीलिए हिसाबो किताब भी जिनों इंसानों के लिए है। और इसीलिए इंशा्लाह के फिर जो भी शख्स जो है अच्छे काम करेगा तो वो जन्नत में जाएगा। जो बुरे काम करेगा तो वो जहन्नुम
में जाएगा। यह है सीधा सा मसला। यार हमारे शिवा भाई शिवा भाई आज ज्वाइन नहीं करेंगे आप। आज आप कमेंट में आए हो यार अहलन वलन आप कमेंट में क्या हो खुदा खुशामद पसंद है? ठीक है यार शिवा भाई आ जाओ यार आपसे बात करके बहुत मजा आता है। आज फराज भाई भी मौजूद है। फराज भाई मैं जिनके बारे में आपको कह रहा था ये वही शिवा भाई है हमारे। अच्छा अच्छा माशा्लाह देखिए वो जो थेरेपी भाई है उन्हें मैं ये कहूंगा जैसे कि आपने जवाब तो वैसे दे दिया है कि खुदा ने आपको इसलिए
क्रिएट किया ताकि वो अपनी जो उसकी कुदरत है उसको अशकार कर सके कि हम जिसको क्रिएटर कहते हैं उसने क्रिएट करके बता दिया कि वो क्रिएटर है। उसने थेरेपी को क्रिएट किया है। तो उसकी जो कुदरत है एक बनाने वाली उसका उसने इजहार किया है आपको बना के। उसका एक मकसद यह भी था आपको खल्क करने का कि दुनिया को बता सके कि मैं एक इंसान जैसी मखलूक को खल्क कर सकता हूं। ठीक है? जिसको और कोई भी नहीं बना सकता। इंसान की एक एक चीज अगर उस पर गौर किया जाए। यानी इंसान अपने नर्व्स
के ऊपर ही गौर करे। उसमें पाई जाने वाली जो चीजें हैं एक एक चीज अपने सेंट्रल नर्वस सिस्टम को देखे। अपने हार्ट के जो सर्कुलेशन है उसको देखे। एक एक चीज इतनी पैचीदा है। तो वो बेसाख्ता कह उठता है कि भाई ये सारा जो सिस्टम है ये खुद ब खुद नहीं बन सकता। कहते हैं डीएनए इतना कॉम्प्लेक्स सिस्टम है कि अगर उसको खोला जाए तो जमीन से ले आसमान तक बिछाया जा सकता है उसका नेट। तो ये कौन है जो इतनी कॉम्प्लेक्स कोडिंग उसकी कर रहा है? तो यह सारे अपनी कुदरत का शाकार हमें दिखाने
के लिए खुदा ने आपको ख् किया है कि वो जब आपको खेगा तो पता चलेगा कि वाकई वो खल कर सकता है। वो क्रिएटर है। जबरदस्त जबरदस्त। अच्छा किसी ने ये कहा है कि हर कोई जो है वो नहीं आ सकता लाइफ में। इतनी कॉन्फिडेंस मतलब इतना कॉन्फिडेंट हर कोई नहीं होता। यस वी टोटली एग्री। हम इस चीज को मानते हैं। तो अगर किसी का यह उजर है, हम किसी को फोर्स नहीं कर रहे। बट एक जवाब मिलने के बाद कमेंट में दूसरे भाइयों ने भी जवाब दे दिया। अगर जवाब मिल चुका है, इसके बाद
भी अगर सवाल पर सवाल किया जाए, तो फिर हम कहते हैं कि यार लाइव आ जाओ। और अच्छा यहां पर मैं यह भी कह दूं कि मैं हर अपने लाइव सेशन में ये कहता हूं कि मैं यह नहीं कहता कि आप लाइव आके मुझसे बात करो। बल्कि मैं सिर्फ एक सैटरडे में लाइव आता हूं। बाकी तो मैं प्राइवेट सेशन कर रहा होता हूं और बहुत सारे दोस्तों के साथ ये चीज मेरी चलती रहती है। तो अगर आपको ऐसा कोई मसला है कि आप लाइव नहीं आ सकते। आप प्राइवेटली बात करना चाहते हैं सर ईमेल एड्रेस
तो मौजूद है। आप आ जाए इंशाल्लाह ताला हम प्राइवेटली आपसे बात कर लेंगे। ऐसा कोई भी मसला नहीं है। शिवा भाई खुदा को कोई फर्क नहीं पड़ता है कि कोई उसकी खुशामद करे या ना करे वो तो है ही बुलंद। ठीक है। अभी हमारे शिवा भाई जो है ना वो ज्वाइन कर नहीं रहे। वरना शिवा भाई को जवाब इसका खुद मालूम भी है। शिवा भाई जानते हैं कि क्रिएटर जो है वह इटरर्नल है। और इटरर्नल होने का मतलब यह होता है कि उसमें कोई ना चेंज आ सकता है ना कोई चीज उस पे इफेक्ट पैदा
कर सकती है। और यह बात शिवा भाई जानते हैं। तो जब ना उसमें कोई चेंज आ सकता है ना कोई उस अफेक्ट प्रोड्यूस कर सकती है। दिस मींस ये कि आप उसकी खुशामत करो या ना करो वो उस पे कोई असर नहीं पैदा करने वाली। वो बेकार है उसके लिए। आपका जितना भी खुशामद करना वो सारा का सारा बेकार है। कोई फर्क नहीं पड़ता। दिस इज व्हाई कि आप जितनी भी इबादत कर रहे होते जितने भी अच्छे काम कर रहे होते परवरदिगार यह कहता है तुम्हारे लिए भाई ना खुदा को उसका कोई फायदा होने वाला
है ना तुम्हारे ना करने से खुदा को कोई नुकसान हो जाएगा तो ये इटरर्नल की डेफिनेशन है ये हमारे शिवा भाई खुद जानते हैं ये सवाल करते हो कि हमें क्यों पैदा किया ने शादी क्यों की तो जवाब ये है कि तुम्हारे वालदेन ने आपस में शादी क्यों की आपका हां ये ये ये अच्छा जवाब है ये अच्छा जवाब है कि भाई तुम्हारे वालदेन ने शादी क्यों की वो ना शादी बेसिकली तुम्हें तुम्हें पैदा ही ना करते। ठीक है। पैदा मां-बाप ने किया है। सवाल खुदा नहीं मुनासिब नहीं पर नहीं बात लॉजिकल है। अ इफ
यू आर हैविंग आप अगर कह रहे हो अरे थेरेपी भाई आ गए। थेरेपी भाई आ गए यहां पे थेरेपी भाई को ले लो। [नाक से की जाने वाली आवाज़] अस्सलाम वालेकुम थेरेपी भाई। वालेकुम अस्सलाम। कैसे हैं आप? ठीक हैं। अल्लाह का शुक्र यार। ये आवाज तो मुझे जानी पहचानी लग रही है। नहीं मैं पहली दफा आया हूं आपके चैनल पे। अच्छा चलो कोई बात नहीं जी सरकार अब बताएं मुद्दा क्या है? [नाक से की जाने वाली आवाज़] जी आप कह रहे थे कि वो सवाल भाई ये कर रहे थे कि हमें क्यों क्रिएट किया गया
है? हमें क्यों पैदा किया गया? तो मैं आपको ये कह रहा था कि आप इसको एड्रेस कर लें। यार आप एसएन भाई हैं। नहीं नहीं। अच्छा नहीं भाई एसन भाई नहीं है ये। मुझे भी लगा एसन भाई है। ठीक है। भाई खुदा ने क्यों बनाया? खुदा ने हर चीज को बनाया बंदगी के लिए। व्हाट नेक्स्ट? क्यों? बंदगी के लिए। क्यों? उनको बंदगी की जरूरत है? नहीं। नहीं। तो फिर ओके। आप जिस खुदा को मानते हैं यानी आप अल्लाह को मानते हैं वो आपका जो अल्लाह है वो जात के ऐतबार से वो महदूद है लाहदूद है
लामहदूद है तो अगर कोई जात अपनी जात में लामहदूद हो तो उसके जितने भी फैसले हैं क्या आप उसको समझ सकते हो नहीं समझ सकते नहीं समझ सकते तो आपका ये जो सवाल है वो इसी कैपेसिटी में आता है तो इसका मतलब हमारे पास इसका मतलब हमारे पास कोई एविड ेंस नहीं है किस चीज का? कि हमें क्यों पैदा किया गया? अभी हमने समझने की बात की है। हमने एविडेंस की बात नहीं की है। क्योंकि बात हो रही थी। बात हो रही थी एविडेंस पे कि एविडेंस हमारे पास होना जरूरी है। क्योंकि क्रिएटर है तो
उसका एविडेंस होना हमारे लिए जरूरी है। अभी आपने यह बात की। तो जब वह बात आपने एविडेंस के ऊपर रखी कि हमारे पास एविडेंस का होना जरूरी है तो फिर मेरे पास इस बात का एविडेंस होना भी जरूरी है कि मुझे क्यों पैदा किया गया। मैं मुसलमान हूं। मैं कोई एथियस्ट वगैरह नहीं हूं। मैं अल्लाह को मानता हूं। मैं मोहम्मद ससल्लम को मानता हूं। उस भाई ने सवाल किया मेरा सिर्फ ये था कि आप इस सवाल को एड्रेस कर लें। ठीक है? वेरी गुड। अ एविडेंस में और समझ में टू अंडरस्टैंड समथिंग एंड टू हैव
द एविडेंस फॉर समथिंग। इसमें जमीन आसमान का फर्क होता है। राइट? जी जी। ठीक है। समझने का मतलब ये होता है कि कोई भी एविडेंस है या कोई भी काम है मुझे समझ में आना चाहिए कि अच्छा ये क्यों हो रहा है, कैसे हो रहा है। पर एविडेंस का मतलब ये होता है कि भाई ये किसने किया? किसकी तरफ से हुआ या नहीं हुआ। इसके ऊपर कोई दलील दलील का समझ में आने से ताल्लुक नहीं होता। एग्री जी एग्री ठीक है हमें बनाया किसने है अल्लाह ने अल्लाह ने बनाया है तो अल्लाह ने क्यों बनाया
ये मैं बताऊंगा या अल्लाह बताएगा अल्लाह ने बताया होगा हमें नहीं नहीं मैं ये पूछ रहा हूं कि जिसने बनाया है ये वो बताएगा कि उसने क्यों बनाया या मैं बताऊंगा कि उसने क्यों बनाया ये वो बताएगा ठीक है तो जब मैं एविडेंस की बात कर रहा हूं कि उसने क्यों बनाया और अगर मैं आपको यह बता दूं कि उसने यह बताया है कि देखो उसने क्यों बनाया तो इसके बाद भी आप कहोगे कि एविडेंस नहीं मिला या इसके बाद आप ये कहोगे मुझे बात समझ में नहीं आई जो क्रिएटर ने कही है जो रीजन
उसने दिया है मुझे समझ में नहीं आई है मगर मुझे एविडेंस मिल चुका है नहीं क्रिएटर ने क्या कही है बात मुझे वो आप बताएं मुझे समझ आएगी मैं मान लूंगा नहीं नहीं अभी हम समझ में आने की बात नहीं कर रहे जब मैंने आपको बात समझाई तो आपने कहा कि एविडेंस नहीं है तो इसलिए इसीलिए मैंने इतनी लंबी बात की आपसे नहीं आपने जिसने बनाया है जिसने मैं मैं रिफ्रेश करता हूं जिसने बनाया है वो बताएगा कि क्यों बनाया है राइट जी जी जी ऐसा ही है ठीक है तो यानी क्यों बना बनाया है
इसका जो आप एविडेंस मांग रहे हैं मुझसे दर हकीकत आप मुझसे ये तकाजा कर रहे हो कि बनाने वाले का मैं आपको कॉल दिखाऊं कि उसने क्यों बनाया है तो आपके पास एविडेंस आ जाएगा एग्री जी अब आपको समझ में आए या ना आए मुझे आपको सिर्फ इतना दिखाना है ठीक है वो क्या कह रहा है जी ठीक है ठीक है कुरान के अंदर बिस्मिल्लाह रहमान रहीम खल जिन्ना व इंसा इल्बद आई डिड नॉट क्रिएट द जिन एंड द मैनकाइंड एक्सेप्ट वरशिप मैंने जिन और इंसान को बनाया है तो सिर्फ अपनी बंदगी के लिए बनाया
है। कौन कह रहा है यह? यह क्रिएटर है। अल्लाह कह रहा है। जी। एविडेंस आ गया सर। लेकिन अल्लाह यह भी तो कहता है कि मुझे आप लोगों की बंदगी की जरूरत है। एक मिनट। एविडेंस आ गया सर। क्यों बनाया? ठीक। हां जी। अब एविडेंस आ गया। अब आपको समझ में आए या समझ में ना आए वो आपका सवाल ही नहीं था। आपका सवाल था कि हमारे पास एविडेंस नहीं है। अल्हम्दुलिल्लाह देखिए आप लाइव आए। आपको एविडेंस मिल गया। नहीं नहीं नहीं नहीं आप मेरी बात को नहीं समझे। आपने कहा कि अल्लाह ने हमें इबादत
के लिए बनाया। लेकिन अल्लाह इसी कुरान में फरमाता है कि मुझे आपकी इबादत की जरूरत नहीं है। ठीक है? तो जब जरूरत नहीं है, जरूरत नहीं है तो हमें क्यों पैदा किया गया? अगर हमें सिर्फ वरशिप के लिए पैदा किया गया। देखिए मैं आपको कहता हूं समर मुझे आपकी इस चीज की जरूरत है। ठीक है? या जरूरत को छोड़ दें। मैं कहता हूं कि मैंने आपको आपसे दोस्ती की इस मकसद के लिए और फिर मैं आपसे कहता हूं कि मुझे इस मकसद की जरूरत भी नहीं। तो इस बात के लिए क्या एविडेंस है? मतलब इस
एविडेंस को मैं कैसे मान लूं कि हां जिस चीज के लिए मुझे पैदा किया गया उसी चीज की जरूरत भी नहीं। नहीं आप इबादत किसको समझते हैं? इराद समझते हैं। आप बताएं आप किस को समझते हैं? 24 घंटे खुदा ताल की बताई हुई अहकामात पे मेन अमल करने को इबादत कहते हैं। मिसाल के तौर पे झूठ ना बोलना इबादत है। ठीक है? नाल में कमी ना करना इबादत है। ठीक है? किसी इंसान को नुकसान ना पहुंचाना इबादत है। या बहुत सारी ऐसी अच्छाइयां जो तमामतर आपके फायदे में ना कि खुदा के फायदे में। जब आप
इंसानियत की फलाह और बैबूद के लिए काम कर रहे हैं तो ये सारी चीजें इबादत है और ये आपके फायदे के लिए इस को तो इससे कोई फायदा भी नहीं है। जैसे वो कुरान में आप कह रहे हैं ना कुरान में वो ये फरमाता है अगर तुम शुक्र करोगे तो तुम्हारे लिए ही इसमें फायदा है। ठीक है? हर चीज जितनी भी इबादत है वो इंसान के लिए इंसान के अपने के लिए उसमें है। खुदा को तो इसको इससे कोई तकियत नहीं पहुंचती। फिर आवाज मेरी आ रही है प्लीज कंफर्म कीजिएगा। जी जी भाई आपकी आवाज
आ रही है। कोई भी एक ऐसी इबादत बता देंगे जिस जो आप समझते हो कि उससे उससे जो फायदा है वो खुदा को पहुंच रहा है। मिसाल के तौर पे हम आ जाते हैं जो जिनको टिपिकली आप इबादत समझते हैं। नमाज रोजा जकात नमाज [गला साफ़ करने की आवाज़] है। जब आप पढ़ेंगे तो उसके जितने वो फ़द खुदा बता रहा है कि जी इसके रिवार्ड में तुम्हें ये मिलेगा। ये सारी चीजें मिलेंग। इट्स मीन कि वो आपको फायदा दे रही है। रोजा है वो खुदा बताता है कि आपके नफ्स को कंट्रोल करता है और इसका
अजर मैं आपको अता करूंगा। ठीक है? इसके अजर में फिर वो सारी हदीस के जब एक रोजेदार रोजा रखता है तो उसको ये ये चीजें मिलती है। इसी तरह से जकात है। माशती इंसाफ पैदा कर रही है। इंसानों को ही उसका फायदा हो रहा है। कोई भी इबादत है उसकी उठा के दे। जी। दूसरा आपका सवाल है ना? दूसरा जो आपने कहा कि क्यों पैदा किया जाए तो खुदा मुताल की एक सि है खलकियत ठीक है कि वो खालिक है आवाज आ रही है मेरी जी जी आवाज आ रही है माज़रत नेट का थोड़ा सा
इशू है मेरा जरा कंफर्म कीजिएगा जी आवाज आ रही है हां तो मैं बता रहा था परवरदिगार की एक सिफ है खालकियत और हिकमत तो उसका इजहार वो उसी सूरत में होगा कि जब वो कोई चीज तल्क करेगा तभी आपको पता चलेगा थेरेपी भाई को कि हां भाई वो खालिक है। मिसाल के तौर पे एक मुसाफिर है। जरूरत नहीं है उसको कि वो तस्वीर बनाए वो उसके लिए किसी किस्म की जरूरी नहीं है। लेकिन जब वो तस्वीर बनाता है तो आप कहते हैं कि हां भाई ये वाकई मुसावर है। इसका इजहार हो जाता है। तो
अपनी उस सिर्फ का इजहार करने के लिए परवरदिगार आलम ने हल किया आपको। जी बहुत बहुत [गला साफ़ करने की आवाज़] अच्छा जवाब दिया आपने। समर भाई ने भी अच्छा एक्सप्लेन किया। मेरा जो मुकदमा था वो ये नहीं था कि मतलब मुझे कोई यहां पर बहस करनी थी। मेरा मुकदमा सिर्फ इतना था कि जो भाई आए थे अली उन्होंने कहा कि हमें क्यों पैदा किया गया? तो मेरा मुकदमा यह था कि उनको उनके सवाल का जवाब दे दें। और जहां पर बात है क्रिएटर की कि क्रिएटर है नहीं है वह एक इंसान मान रहा है
तो उसके ऊपर उसको कंफ्यूज ना किया जाए फिलहाल किस तरह से कंफ्यूज किया गया जरा आप खोल के बात करें ब्रदर जी भाई मुझे ही नहीं आ रही नहीं इनकी आवाज नहीं आ रही है भाई फराज भाई आपसे कह रहे हैं कि किस तरह से कंफ्यूज किया गया अली भाई को आप वो भी तो बताएं क्योंकि अली भाई हमारे साथ मौजूद है अभी अली भाई आप तस्दीक कर दे हमने आपको कंफ्यूज किया अगर अली भाई आपको आवाज आ रही है जी भाई जी बिल्कुल भी नहीं भाई कह रहे कि भाई अली भाई तो कह रहे
है कि हमने इनको बिल्कुल भी कंफ्यूज नहीं किया कन्फ्यूजन वाली बात नहीं है ये मेरा क्वेश्चन था तो पिछली स्ट्रीम तो मैंने नहीं सुनी क्योंकि नेट कनेक्शन की वजह से बाकी कन्फ्यूजन तो नहीं है हम ओपन डिस्कशन कर रहे हैं कोई इशू नहीं थेरेपी भाई अल्लाह जाने आपको आवाज आ रही है कि नहीं आ रही है पर कन्फ्यूजन नहीं है आप ये कह सकते हो कि हमने इस सवाल को एड्रेस नहीं किया और इसके ना करने की वजह यह है कि हम यह चीज समझ गए थे कि हमारे भाई के पास अभी क्रिएटर के ऊपर
ही कतई तौर पर सॉलिड ग्राउंड पर उनके पास एविडेंसेस मौजूद नहीं है और हम यह चाह रहे हैं कि पहले उस ग्राउंड को कवर करें तो फिर जब इंशा्लाह क्रिएटर के बाद हम अल्लाह पर आएंगे और जब अल्लाह से होते हुए जब हम इस्लाम की वादी में जब हम आएंगे तो खुद ब खुद इनके पास जवाब आना शुरू हो जाएंगे। फिर इनको कहीं पे भी परेशानी नहीं होगी। यानी आप कभी भी ऐसा नहीं करते हो कि एक बच्चा अभी आया है फर्स्ट ग्रेड के अंदर। आप उसको कहते हैं यार पहले ग्रेड में क्यों जा रहा
है भाई? आओ तुम्हें मास्टर्स करवाते हैं। आओ तुमसे थीसिस करवाते हैं। ये नहीं होता है। आप ग्रेड वन टू थ्री वहां से लेके चलते हैं। तो फिर इंशाल्लाह ताला बात समझ में भी आती है। उसमें वजन भी आता है और मजीद समझने में आसानी भी होती है। जैसे अभी हम अली भाई को दिखा रहे थे कि भाई अगर आपका सिर्फ पूरा का पूरा फोकस इसी चीज पर है कॉज एंड इफेक्ट के ऊपर [नाक से की जाने वाली आवाज़] कि कोई भी चीज खुद से नहीं हो सकती। इट रिक्वायर द क्रिएटर। तो इस प्रिंसिपल की बुनियाद
के ऊपर मसला यहां पर यह क्रिएट होता है कि फिर आप बिग बाउंस को कैसे रिजेक्ट करोगे? मैं अली भाई को ये चीज समझाना चाह रहा था। जी अली भाई कोशिश करेंगे आप इस थ्योरी को कैसे रिचे करेंगे? बिग बैंग को बिग बैंग को नहीं बिग बाउंस को मैं फिर से आपके लिए एक्सप्लेन कर दूं। बिग बाउंस क्या होती है? मुझे बिग बिग बाउंस का नहीं पता। नहीं पता मुझे। ठीक है। जी जी। तीन थ्योरीज होती है। एंड अगेन आई एम सेइंग कि मेरा मकसद सिर्फ यह है कि अपने मुसलमान भाइयों को इतना मजबूत कर
दूं कि जब वो सोसाइटी में जाए तो कोई भी मुलहिद उनके दिलों में बेकार किस्म बेकार किस्म के सुकूक को जगह ना दे सके। ठीक है? सो व्हाट द बिग बाउंस इज? हमारे पास तीन थ्योरीज है। पहली है बिग बैंग की। बिग बैंग ये कहती है एक डेंस पॉइंट था उसमें एक्सप्लोजन हुआ और ये यूनिवर्स बन गई। दूसरी थ्योरी है बिग क्रंच की। बिग क्रंच ये कहती है कि यूनिवर्स जो फैलती जा रही है एक सर्टेन पॉइंट के बाद ये फैलने के बजाय ये सुकरना शुरू हो जाएगी। इसमें क्रंच आएगा और ये डेंस पॉइंट में
बदल जाएगी। ये दो थ्यरीज़ हैं। फिर इन दोनों थ्यरीज़ को मिलाया गया और मिला के बनाया बिग बाउंस जो आप अपने सामने इस वक्त देख रहे हैं स्क्रीन के ऊपर। बिग बाउंस ये कहती है कि ये प्रोसेस जो है ये इनफिनिटली चलता जा रहा है। क्या? यानी कि एक डेंस पॉइंट है। उसमें एक एक्सप्लोजन होता है। यूनिवर्स बनती है। एक सर्टेन एक्सपेंशन पे जाने के बाद उसमें क्रंच आता है। जब क्रंच आता है तो वो डेंस पॉइंट की तरफ पलट जाती है। लौट जाती है। जैसे ही वो डेंस पॉइंट बनता है तो फिर से उसके
अंदर एक्सप्लोजन होता है और वो यूनिवर्स बनती है। और यह प्रोसेस चलता रहता है। इस प्रोसेस में तो आपके क्रिएटर की जगह ही नहीं है। सर इसको कैसे फिर एड्रेस करेंगे? अली भाई आवाज आ रही है? जी भाई जी अली भाई आप सुन पा रहे हैं? जी भाई आ रही है आवाज। जी तो इस थ्योरी को आप कैसे कहेंगे कि नहीं यार ये थ्योरी तो कभी पॉसिबल हो ही नहीं सकती है। कैसे? या यह थ्योरी जो है यह तो आपके क्रिएटर को ही साइड डाइन कर देती है। अब क्या करेंगे आप? [नाक से की जाने
वाली आवाज़] भैया आपकी आवाज कट रही है पर फिर इंटरनेट का ही प्रॉब्लम है आपके एंड पर। फिर अली भाई तो फराज भाई ये देखिए ये एक सीरियस एक इशू है क्योंकि हम यहां पे वेस्ट में होते हैं और हम इस चीज को बहुत ज्यादा देखते हैं कि बच्चे फिर ऐसे साइंसी थ्योरीज को जब सुनते हैं तो वो परेशान हो जाते हैं। तो यह तो वाकई में बच्चों को हिला देगी। अगर हम कॉज एंड अफेक्ट के ही सिर्फ एक पॉइंट को या प्रिंसिपल को ले चलेंगे तो लगता है सिर्फ एक मेरा ही इंटरनेट सही है।
बाकी किसी का नहीं चल रहा आज। नहीं नहीं मेरी तरफ ठीक है। मेरी आवाज आ रही है। जी जी बिल्कुल बिल्कुल आ रही है। जी अच्छा सॉरी मैं हां मैं एसन बात कर रहा हूं। एक्चुअली मैं अली भाई का जो क्वेश्चन था मुझे पता था आप आंसर कर सकते हो। मैं वो एड्रेस करवाने की कोशिश कर रहा था। तो मैं दूसरे फोन से बैठा हुआ था तो मैं उधर से ही आपको सुन रहा था। तो एस सच कोई नहीं था कि मेरा कोई इख्तलाफ था। मैं सिर्फ वो मुझे पता था कि आप एड्रेस कर सकते
हो। तो मैं वो एड्रेस करवाने की कोशिश कर रहा था। गलत था ठीक था आई डोंट नो कि मतलब मैंने ठीक किया गलत किया बट आई वांटेड कि आप उसको एड्रेस कर लो दैट्स इट चलिए आपकी मोहब्बतों का शुक्रिया थ भाई आप मुझे बताएं ना कि आप आप इसका रिसोंड कर दें या फराज भाई रिसोंड कर दें या आप रिसोंड कर दें अगर बिग बाउंस सही है तो फिर अल्लाह की तो जरूरत ही नहीं है हमें नहीं बिग बाउंस तो ये तो एक क्रॉस है उसका बिग बैंग का एक अल्टरनेटिव उसका एक वो है लेकिन
बिग बाउंस इज़ नॉट पॉसिबल ये अगर इसी तरह चलता रहा तो फिर मतलब ना स्टार्टिंग होनी है और ये तो फिर एक इनफाइनाइट पे चली जाएगी बात बस चलती जा रही है चलती जा रही है चलती जा रही है और इसमें तो इवन दो फिर ह्यूमन की क्रिएशन भी खत्म हो जाएगी पॉसिबल नहीं है वो पॉसिबल हो या नहीं हो यहां पे तो खुदा की जगह नहीं बनती ना हां मैं वही मैं बात कर रहा हूं ना कि जब वो ये इस प्रोसेस पे शुरू हो जाएगा तो एक तो इसमें क्रिएशन की पॉसिबिलिटी खत्म हो
जाएगी और एक तो फिर ये कि जो यूनिवर्स है वो इटरर्नल में चला जाएगा तो वो जो खुदा का कांसेप्ट है वो तो ऑटोमेटिकली फिर इस पोजीशन पे माइनस हो जाएगा। तो क्या फर्क पड़ता है इससे? कोई [हंसी] फर्क पड़ता है? फर्क पड़ता है ना? फर्क इसलिए पड़ता है कि कायनात की शुरुआत है और दूसरा यह कि हमारे लिए अ स्टार्टिंग पॉइंट का होना जरूरी है किसी भी चीज के लिए जो हमारी फिजिकल यूनिवर्स है इसका एक स्टार्टिंग पॉइंट का होना जरूरी है। क्यों ऐसा कह रहे हैं? स्टार्टिंग पॉइंट होना जरूरी है। यहां पर है
ना स्टार्टिंग पॉइंट। बिग बैंग से स्टार्ट होता है और फिर जाकर क्रंच पर खत्म हो जाता है। हम तो हां तो वहां से ठीक है ना जहां से बिग बैंग की बात बताई जा रही है स्टार्ट से कि मतलब एक एक्सपेंशन स्टार्ट हुई दैट इज द बिगिनिंग पॉइंट दैट इज द बिगिनिंग ऑफ द यूनिवर्स फिजिकल यूनिवर्स वहां से आगे फिर हमारे लिए जाहिर सी बात है एक खुदा का कांसेप्ट हमारे सामने सही से आता है कि हां अगर स्टार्टिंग है तो देयर इज समवन जिसने इसको खलकत की जिसने बनाया है इस पूरी कायनात को सही
सही और अगर तो अगर तो ये इस तरह चलता रहा कि बैक बाउंस चलता रहा और एक आयन से दूसरे आयन में हम एंट्री करते रहे हैं तो उसमें हमारी पॉसिबिलिटी नहीं है पॉसिबल कि हम बन सकते हैं वो मतलब हम यूनिवर्स के अंदर बन जाएंगे इटरनल चल जाएगा ना तो फिर ये जो लाइफ का स्पैम है ये इटरनल चलना शुरू हो जाएगा और जब इटरनल चलना शुरू हो जाएगा तो फिर इटरनल में हमारी बारी जो है वो कब आती है, किस तरह आती है? इसका कोई मतलब वो एक बहुत लंबा प्रोसेस बन जाता है।
फिर और फिर जिस तरह से जिस तरह से देखिए ये कंट्राडिक्ट करती है उसको भी कि जहां पर जब हम जब अगर हम ये साइंटिफिक पॉइंट ऑफ से अगर हम बात कर रहे हैं तो साइंस फिर ये भी कहती है कि जो इवोल्यूशन हुई है दैट इज फ्रॉम ल्यूका। ठीक है? लास्ट यूनिवर्सल कॉमन एनसेेस्टर तो वो भी एक बिगिनिंग आ रहा है वहां से फिर लिविंग्स का। ठीक है? तो फिर वो भी नहीं आए फिर वो भी खत्म हो जाएगा फिर एवोल्यूशन भी खत्म हो जाएगी फिर वो भी मतलब उसका भी कोई स्टार्टिंग नहीं होगा
मतलब उसका कोई अता पता फिर नहीं होगा कि क्या हो रहा है किधर से हो रहा है कब से हो रहा है कुछ कुछ नहीं पता होगा फिर मैं आपको एक सिंपल सी एग्जांपल दे रहा हूं कि जो वो थ्योरी है थ्योरी ऑफ़ एवोल्यूशन वो भी खत्म हो जाएगी नहीं कोई मसला नहीं है। हमें थ्योरी ऑफ़ एवोल्यूशन से कुछ लेना देना नहीं है। मसला सिर्फ ये है कि भाई अगर बिग बाउंस सही है तो खुदा की जगह नहीं बनती है। ठीक है? तो खुदा यहां से फारग हो जाता है। अब हम जितनी भी बात कर
ले इसके ऊपर जो नुक्ता बनता है वो तो यही बनता है ना कि हमें खुदा की जरूरत नहीं है। फिर ठीक है? ऐसा ही है। आपने आपने आपने एक बात कही थी जिस पे आपको स्ट्रेस डालना चाहिए था और ये अली भाई के लिए भी है कि अगर हम इस थ्योरी को या इस तरह की जितनी भी थ्योरीज है अगर हम उनको मान लेते हैं तो यहां पर जो मसला क्रिएट होता है वो है इंफिनिटी रिग्रेस का। ये है यहां पे प्रॉब्लम। मैंने मैंने आपसे वही कहा ना कि तो फिर इटरर्नल चलना शुरू हो जाएगा
और उसी एग्जांपल में मैंने आपको ये कहा कि जो इवोल्यूशन बताई जा रही है साइंटिफिक की जो सेकंड थ्योरी है इवोल्यूशन के बारे में वो भी खत्म हो जाएगी क्योंकि वो भी जो हमारा ल्यूका है लास्ट यूनिवर्सल कॉमन एनस्टर जो वहां से एक मतलब एक हमें एक पॉइंट दिया जा रहा है रेफरेंस पॉइंट वो भी खत्म हो जाएगी तो अगर हम इस थ्योरी को मानेंगे तो हम बहुत सारी थ्योरी को खत्म कर देंगे तो अगर लिविंग लिविंग्स की ही थ्योरी खत्म हो गई तो जाहिर सी बात है फिर वो बात इटनल और इनफिनिटी में चली
गई तो वो बात खत्म हो जाएगी। हमारी जो लिविंग बीइंग का मैंने आपसे कहा कि हम लिविंग बीइंग्स भी नहीं रहेंगे। तो उसका एग्जांपल यहीं से बनता है कि हम लिविंग बीइंग्स नहीं रहेंगे क्योंकि लिविंग बीइंग्स का जो स्टार्टिंग या एक रेफरेंस पॉइंट है वो भी खत्म हो जाएगा। नहीं बिल्कुल सही कह रहे हैं आप। पर क्योंकि अभी मैं चाह रहा हूं कि अली भाई यहां पर सीखे तो मैं अली भाई के लिए नुक्ता कहूंगा कि यही हमारे जो थेरेपी भाई थे इन्होंने जब नुक्ता कहा था तो मैंने वहां पे इस नुक्त को इनको एड्रेस
मजीद नहीं करने दिया था और मैंने क्या किया मैंने क्रॉस क्वेश्चन किया और मैं वहां से बात को अलग जगह डायरेक्शन पे लेके गया। मैंने वहां से ये साबित कर दिया खुदा की तो जगह ही नहीं बन रही है। आप मुझे क्या समझा रहे हो कि ये लूका ना पोका ना मुझे इन सारी चीजों की जरूरत ही नहीं है। खुदा तो साबित ही नहीं हो रहा। सो अली भाई होता यह है कि इस तरह की जितनी भी थ्योरीज होती है हमें इनको समझने की जरूरत नहीं है। हमें इसमें टाइम लगाने की जरूरत नहीं है। आप
सिर्फ ये देखो कि यार अगर कोई प्रोसेस है और अगर वो प्रोसेस जो है वो इनफिनिटली वो चलता जा रहा है वो इनफिनिट रिग्रेस के अंदर आता है। और इनफिनिट रिग्रेस जो है ये लॉजिकली पॉसिबल ही नहीं है। ये आप याद रख लें कि इनफिनिट रिग्रेस जो है वो अकली तौर पर मुमकिन ही नहीं है। हो ही नहीं सकता। कोई अकलमंद कोई अकलमंद जिसके पास अकल मौजूद हो अकल इस्तेमाल उसको करने आती हो वो इनफिनिटी इग्रेस को मान ही नहीं सकता। आपको पता है अली भाई इनफिनिटी इग्रेस होता क्या है? जी भाई कोई चीज चलती
रहे वो खत्म ही ना हो। मतलब उसका कोई एंड ही ना हो। वो तो खुदा भी है। खुदा भी इनफिनिट है। तो खुदा इनफिनिटी एग्रेस में आएगा। इसके बारे में मुझे नहीं पता। इनफिनिटी रिग्रेस प्रोसेससेस को कहा जाता है। यानी इनफिनिटली कोई भी चीज चाहे प्रोसेस हो, इवेंट्स हो, मैकेनिज्म हो ऐसी चीज को कहा जाता है। जब हम खुदा की बात करते हैं तो खुदा इनफिनिट तो है। दैट्स ट्रू कि अल्लाह जो है वो इनफिनिट है। पर वो इनफिनिट रिग्रेस नहीं है। वो सिर्फ इनफिनिट है। इनफिनिट रिग्रेस नहीं है उसके अंदर। यानी खुदा किसी इवेंट
का नाम नहीं है। कोई ऐसा इवेंट नहीं है कि जो होता जा रहा है। या खुदा कोई ऐसे प्रोसेस का नाम नहीं है जो चलता जा रहा है। खुदा कोई ऐसे मैकेनिज्म का नाम नहीं है जो चलता जा रहा है। कोई फैक्ट्री नहीं है खुदा कि वो चलती जा रही है। अगर हम खुदा को वैसे तसवुर करेंगे तो वो इनफिनिटी अग्रस में चला जाएगा जो गलत हो जाएगा। इसके अंदर बहुत सारी चीजें आ जाती है। जैसे जो करंट जो बिलीफ सिस्टम है हमारे क्रिश्चियनिटी का के खुदा जो है वो कलाम करता है और कलाम जो
है क्यों कलाम जो है वो इटर्नल है तो इसीलिए हजरत ईसा भी इटरर्नल हो जाएंगे। ये इनफिनिट एग्रेस के अंदर आता है। तो अगर आप ये बुनियादी चीजें समझ ले ना सिर्फ ये सिर्फ चार चीजें अगर आप समझ ले इंशा्लाह आप कभी ये नहीं कहोगे कि हमारे पास खुदा के वजूद के लिए कोई मोहकम दलील नहीं है। आपसे कोई भी भाई अगर बात करेगा ना जो अभी आप कह रहे थे कि कुछ भाई ऐतराज करते हैं साइंस की थ्योरीज लेकर आते हैं। हमारे पास जवाब नहीं बन पाते। वो इस्लाम छोड़ के जा रहे हैं। अगर
उनको ये चार चीजें समझ में आ जाए वो कभी इस्लाम छोड़ के नहीं जाएंगे। मैं आपसे एक सवाल करता हूं के क्या खुदा हरकत करता है? जी भाई करते हैं। खुदा हरकत करते हैं? मैं फिर से रिपीट कर रहा हूं। हरकत करने के लिए यानी एक जगह से दूसरी जगह पर जाने के लिए आपको विद इन स्पेस होने की जरूरत है या आउट ऑफ स्पेस होने की जरूरत है? भाई स्पेस होने की जरूरत है विदाउट स्पेस तो पॉसिबल तो आप ये कह रहे हो कि किसी जगह अल्लाह है और किसी जगह अल्लाह नहीं है और
फिर अल्लाह एक जगह से दूसरी जगह पर ट्रेवल करता है। राइट भाई हरकत की बात करें तो मैंने इस तरह इसका आंसर किया है जैसे अल्लाह ताला ने ये दुनिया बनाई है तो मतलब हरकत की होगी तो बनेगी इस वजह से मैंने कहा कि अल्लाह ताला हरकत करते हैं। मैं आपकी बात समझा नहीं इसको फिर से रिपीट करेंगे क्योंकि आपकी आवाज मुझ तक काफी हल्की आ रही है। भाई मैं ये कह रहा हूं कि अल्लाह ताला ने ये कायनात बनाई है तो हरकत की होगी तो बनी होगी मतलब कुन कहना उन कहने में भी हरकत
है तो मैंने इस वजह से कहा कि हरकत करते होंगे अल्लाह चल जबरदस्त जबरदस्त इसका मतलब ये है कि अभी तक आप अल्लाह के वजूद को अभी आप समझे ही नहीं हो अभी आपने बात की है ना मैं ये नहीं कह रहा कि आपने जो बात की है वो आपने खुद से कोई बात घर ली है। आई नो वो आपने कहीं और से ली है। मगर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। जिस तरह से आपने एड्रेस किया है। क्योंकि अगर अल्लाह हरकत करता है पॉइंट ए से पॉइंट बी पे जाता है या अल्लाह कुफ याक कुन
कहता है जिस तरह से हम कहते हैं। अगर इस तरह से कुछ भी होता है तो अल्लाह जो है वो इटरनल बीइंग नहीं रहता। मेक इट वेरी क्लियर। फिर अल्लाह जो है वो इटरनल बीइंग रहता ही नहीं है। तो भाई आप क्या कहना चाह रहे हैं कि अल्लाह ताला हरकत नहीं करते। इंपॉसिबल है कि अल्लाह ताला हरकत करे। इंपॉसिबल है। लॉजिकली पॉसिबल ही नहीं है। कोई अगर ऐसी बात करता है तो वो अपनी अक्ल इस्तेमाल नहीं कर रहा। या उसमें अकल नहीं है या वो इस्तेमाल नहीं कर रहा। या बहुत सादा अकल है उसकी। तो
आपका मानना है कि अल्लाह ताला मेटाफिजिकल है या फिजिकल है? ना अल्लाह फिजिकल है ना अल्लाह मेटाफिजिकल है। लसा का मिस श उसके जैसा कोई है ही नहीं। तो जब आप उसको मेटाफिजिकल भी कहते हो तो आप उसको मेटाफिजिकल की सफ पे लाके खड़ा करते हो। कोई भी कोई आलिम दीन भी अल्लाह को ना मेटाफिजिकल मानता है ना फिजिकल मानता है। हां हम कहते उसको जरूर है मेटाफिजिकल। हम क्यों कहते हैं? नहीं मैं यह नुक्ता एड्रेस कर दूं क्योंकि यह बहुत सारे भाइयों की तरफ से आता है। इसलिए मैं इस बात को यहां पर एड्रेस
कर दूं। इस चीज को समझिए। जब फिलॉसफर्स ने फलसफा जो बयान करते हैं स्पेशली अंग्रेजी जबान के अंदर या यूनानी जबान के अंदर जब वहां पर उन्होंने गुफ्तगू की तो उन्होंने कहा एक तो ये फिजिकल वर्ल्ड है हमारे सामने जिसको हम देख रहे हैं फिजिकल चीजें जिस पे फिजिक्स के कानून अप्लाई होते हैं। वो चीजें कि जिस पे फिजिक्स के कानून अप्लाई ही नहीं होते। उनको हम कह देते हैं मेटाफिजिकल। तो हर वो चीज जिसमें आपके इमोशंस आते हैं, आपकी रूह आ जाती है, जिसमें आपकी सोच आ जाती है, जिसमें आपका दर्द आ जाता है।
इस तरह की जितनी भी चीजें हैं कि जिनका फिजिक्स से कोई ताल्लुक नहीं है, उन सबको उन्होंने लाके खड़ा कर दिया मेटाफिजिकल में। तो हम सिर्फ इस ऐतबार से कहते जब हम अल्लाह को कहते हैं कि वो मेटाफिजिकल है तो सिर्फ हम यह कहना चाह रहे होते कि वो फिजिकल नहीं है। हम यह नहीं कहते कि खुदा मेटाफिजिकल है। ना खुदा मेटाफिजिकल है ना खुदा फिजिकल है। जी जी भाई बिल्कुल ऐसे बिल्कुल ऐसे [संगीत] भाई सबसे बड़ी जी आपकी आवाज आ रही है। एक मिनट मैं कमेंट पढ़ने की कोशिश कर रहा हूं। सबसे बड़ी दलील
आपने खुद अपने खुद है अपने है जने वाला हां अच्छा अच्छा ठीक है ये बिल्कुल सही बात कह रहे हैं कि सबसे जो बड़ी दलील है वो यही है कि आप एक्सिस्ट करते हो दिस मींस कि आपको कोई बनाने वाला है एक्सीलेंट तो देखिए जो पॉइंट समझने वाली है ना अगर मेरा कोई मुसलमान जी भाई जी अली भाई आपने आपने मुझसे एक क्वेश्चन किया था कि अगर इस यूनिवर्स को बनाने वाला कोई क्रिएटर है तो अल्लाह ताला ही क्यों है? तो इस इस क्वेश्चन का भी आंसर मुझे नहीं पता। तो आप बताएं कि वो अल्लाह
ताला ही क्यों है? कोई और जो जिस तरह और रिलजन के खुदा है वो क्यों नहीं है? बहुत आसान है। बहुत है आसान। इसका जवाब मेरा कोई भी मुसलमान भाई कोई भी मुसलमान भाई अगर वो चाहता है ना कि वो सिर्फ 20 मिनट के अंदर ज्यादा मेहनत ना करे। सिर्फ 20 मिनट के अंदर वो अल्लामा दहर बन जाए। वो चाहता है कि खुदा के ऊपर उसका ऐसा यकीन हो जाए कि टूट नहीं सकता। वो सिर्फ इन चार चीजों को समझ ले। वो इन चार चीजों को समझ ले। वह क्रिएटर को भी साबित कर देगा। वो
क्रिएटर अल्लाह ही है। वो यह भी साबित कर देगा। सारे मज़ाहिब गलत है। वो ये भी साबित कर देगा। एथिस्ट स्केप्टिक एग्नोस्टिक वो तो भाई अकल से ही उनका कोई वास्ता नहीं। वो सब साबित कर देगा। सिर्फ इन चार चीजों की वजह से। सिर्फ चार चीजों की वजह से। पर मैं अली भाई का ज्यादा टाइम नहीं लूंगा। मैं सिर्फ एक चीज इनको समझाऊंगा अभी। और इनको भी समझाना इसलिए मकसद है मेरा। इनके तवसुल से इंशा्लाह आप सीख जाएंगे। सिर्फ इटरनल बीइंग हम किसको कहते हैं? यह समझ लो। और यह डेफिनेशन जो मैं दे रहा हूं,
यह इस्लाम की डेफिनेशन मैं नहीं दे रहा हूं। यह मैं अकली डेफिनेशन दूंगा। आप अकली तौर पे चाहे आप इसको एआई करके देखें, कुछ और करके देखें आपको यही चीज मिलेगी। हम बात कर रहे हैं एब्सोल्यूट इटरर्नल बीइंग की। हम अकली तौर पे अभी जिस भी चीज को हम समझेंगे इंशा्लाह आपको कुरान में, आपको हदीस में, दीन इस्लाम में ये चीज मनोन ऐसे ही मिलेगी। इंशा्लाह हम जंप करके जाते हैं इटरनल बीइंग की डेफिनेशन के ऊपर। हम नथिंग वथिंग को हम टच ही नहीं करते इन सारी चीजों को। व्हाट इज इटरनल बीइंग? मैंने मैं सिर्फ
सात पॉइंट को एड्रेस करूंगा। इससे ज्यादा हो सकता है। बस समझने के लिए सात पॉइंट को समझो। जब हम एब्सोल्यूट इटरनल बीइंग कह रहे हैं और ये क्रिएटर के होने के लिए लाजिम है कि क्रिएटर एब्सोल्यूट इटरर्नल बीइंग हो। अब वो कैसे हो? अभी हम उसकी बात नहीं कर रहे। पहली चीज जो उसके लिए जरूरी है वह यह जरूरी है कि वह अपने वजूद में किसी पर डिपेंडेंट ना हो। यह उसकी सबसे बड़ी मजबूरी है कि वह सेल्फ एक्सिस्टेंस के तहत होता हो। यानी यह नहीं है कि वो नहीं था और फिर हुआ है। वो
बस है और उसके बस होने के लिए वो किसी पे डिपेंडेंट नहीं है। वो है ही नहीं। और अगर मैं उसको और ज्यादा उसको अगर आसान करूं ना तो सेल्फ एकिस्टेंस जो है यह भी जुमला उसके लिए गलत हो जाएगा। वो बस है। वो अपने होने के लिए खुद पे भी डिपेंडेंट नहीं है। वो बस है। अब ना आए समझ में ज्यादा मेहनत ना कीजिएगा। ठीक है? यह मरहले के तहत चीजें समझ में आती है इंशा्लाह। दूसरी चीज अगर वो एब्सोल्यूट इटरनल बीइंग है उसमें कोई चेंज नहीं आ सकता। जो अभी आप कह रहे थे
ना वो हरकत कर सकता है। वो अभी हरकत वाला पॉइंट आगे भी आएगा। उसमें कोई चेंज नहीं आ सकता। यानी खुदा ना गुस्सा कर सकता है। ना खुदा को कोई गुस्सा दिला सकता है। ना खुदा मोहब्बत कर सकता है। ना खुदा में कोई मोहब्बत पैदा कर सकता है। ये सारी चीजें खुदा में है ही नहीं। रहम करना एक अलग चीज है। ठीक है? एक होता है रहम पैदा करना। हम उसकी हम उसकी बात कर रहे हैं। खुदा में चेंज नहीं आ सकता। आप खुदा की इन जी सवाल करें। सॉरी आपकी आवाज बहुत हल्की आ रही
है तो टाइम लगता है। जी भाई आपने कहा कि अल्लाह ताला गुस्सा नहीं कर सकते। तो हमने कई जगहों पे ऐसा पढ़ा है। अब मेरे पास डायरेक्ट रेफरेंस नहीं है। पर हमने पढ़ा हुआ है कि अल्लाह ताला गुस्सा करते हैं। तो आप ये पॉइंट किस तरह यहां पे रख सकते हैं कि अल्लाह ताला गुस्सा नहीं करते। अभी हम लॉजिकल चीजों के ऊपर है। अब हम लॉजिकली अगर इन सारी चीजों को एड्रेस कर लें और हम समझ ले एटरर्नल बीइंग इसको कहते हैं। तो जब हम कुरान की तरफ जाएंगे या आप कुरान से आप मुझे रेफरेंस
दे रहे हैं। जब हम कुरान की तरफ जाएंगे तो ये चीजें समझ में आ जाएंगी। मगर क्योंकि आपने सवाल पूछ लिया है तो मैं यहां पर जवाब दे देता हूं। ठीक है? समर भाई जो है वह गलत बता रहे हैं। सर अगर मैं गलत कह रहा हूं प्लीज आई डू वेलकम। आप आए और आप मेरी इस्लाह कर लीजिए। मैं नहीं कह रहा कि आप मेरी इस्लाह ना कीजिए। मगर जो मैं चीजें यहां पे बता रहा हूं मैं आपको यह बता रहा हूं कि 1% 1% ये चीज ऐसे ही है। आप मुझे सिर्फ तब गलत साबित
कर सकते हैं कि जिस दिन आप मुझे यह समझा दे 1 + 1 इज थ्री। उस दिन मैं गलत हो सकता। वरना मैं नहीं हो सकता गलत। यह आप जब कुरान से रेफरेंस लेकर आ रहे हैं जो हम भी कुरान से रेफरेंस लेकर आते हैं। परवरदिगार ने कहा कि भाई मुझे गुस्सा आता है या मुझे गजबनाक कर दिया तुम लोगों ने। देखिए कुरान जो है ना ये कलाम खुदा है। ये खुदा का लिटरेचर नहीं है। खुदा ने लिख के नहीं भेजी है किताब। ये कलाम खुदा है। दिस मींस कि खुदा हमसे कलाम करता है। हम
गुफ्तगू में बहुत सारे जुमले ऐसे इस्तेमाल करते हैं कि जो तमसीलन होते हैं, इशारतन होते हैं। उनका लिटरल मायने नहीं लिया जाता। खुदा जब कह रहा है कि भाई इसने मुझे गुस्सा दिला दिया या तुम्हारे इस काम से मुझे गुस्सा आता है। दिस मींस यह कि अगर तुमने यह काम किया तो तुम पे अज़ाब होगा। तुम पे अज़ाब होगा। अब खुदा ने यह क्यों नहीं कहा कि तुमने यह काम किया तो मैं अभी के अभी तुम पे अज़ाब कर रहा हूं। क्योंकि खुदा उस वक्त अज़ाब नहीं कर रहा। खुदा आपको टाइम दे रहा है। के
भाई तुमने गलत काम किया है। अब प्लीज तौबा करो। अपनी इस्लाह करो। डोंट रिपीट इट। तौबा करो। मैं तुम्हें माफ कर दूं। अगर तुम तौबा नहीं करते तुम इस पर बजिद रहते हो। यही काम फिर से करते रहते हो और तुम जालिमों में आ जाते हो तो भी मैं तुम्हें ढील दूंगा। ये कुरान की तमाम आयात ही सब जानते हैं इसको। अब अगर आप अपनी ह्यूमन नेचर देखो ना तो हम क्या करते हैं? जब हमें किसी पे गुस्सा आता है तो हम फौरन उसको मारना शुरू नहीं कर देते। पहले हमें गुस्सा आता है। फिर हम
या तो उसको मारेंगे या हम कुछ देर के बाद उसको पनिश करेंगे। मगर गुस्सा पहले आता है क्योंकि खुदा हमसे कलाम कर रहा है और खुदा सादा इंसान से भी गुफ्तगू कर रहा है और एक आलिम फाजिल इंसान रसूल खुदा जैसी जात से भी गुफ्तगू कर रहा है तो वहां पर खुदा ने ऐसे सादे जुमले इस्तेमाल किए हैं कि हर आदमी को समझ में आ जाए तो खुदा जब ये कह रहा है कि भाई तुम्हारे इस काम की वजह से खुदा गजबनाक होता है। इट डजंट मीन कि अल्लाह को गुस्सा आ रहा है। दिस मींस
कि अल्लाह यह बताना चाह रहा है कि देखो तुम्हारा काम अच्छा नहीं है। मैं तुम्हें पनिश करूंगा। मैं तुम्हें पनिश करूंगा। फौरन पनिश नहीं कर रहा हूं। मैं तुम्हें पनिश करूंगा। तो यह पनिश करना अज़ाब देना बता रहा है इस जुमले के अंदर। ना के खुदा की जात के अंदर कोई चेंज आ रहा है और वहां पे खुदा गजबनाक हो रहा है। ये इसका मायने हो ही नहीं सकता। व्हाई अगर आप ये कहते हो कि खुदा को गजबनाक हम कर सकते हैं या खुदा को गुस्सा आता है। दिस मींस कि खुदा अबदी और अजली नहीं
रहेगा। बाय डेफिनेशन। ये प्रॉब्लम है। आप लॉजिकली इस चीज को प्रूव नहीं कर सकते। जी भाई क्लियर क्लियर है क्लियर है जी तो ये चीज है तो पहला वो अपने वजूद में किसी पे भी डिपेंडेंट नहीं होगा सेल्फ एक्सिस्टेंस है उसकी ठीक है पता नहीं यार आप भाई कुछ लिख रहे हो अजब उसके गजब का है ज़हूर ठीक है शायद कोई शायरी कर रहे हैं आप अल्लाह की रहमत उसके गजब पर भारी है जी बिल्कुल ऐसा ही है बिल्कुल ऐसा ही है मगर इसका मतलब यह नहीं है कि खुदा अपने इमोशंस की बात कर रहा
है कि मेरा एक इमोशन मेरे दूसरे इमोशन पे भारी है खुदा ये बता रहा है कि जो मेरी सिफ्ट रहमत है जो मेरी सिफते रहमत है वो मेरे गजब की सिफ्ट के ऊपर भारी है। यानी खुदा आपकी भी है। खुदा इकाब करता है। खुदा अज़ाब देता है। तो खुदा ये कह रहा है कि देखो मेरी जो रहमत की जो सिफ्त है ये इकाब करने पर ये अदल करने पर ये हर चीज पर हावी है। इसीलिए परवरदिगार ने जब कुरान का आगाज़ भी किया तो बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम से किया ये बताने के लिए कि देखो मेरी बाकी सिफात
भी है। मगर मैं रहमान भी हूं। इट डजंट मीन कि खुदा इमोशनल है। खुदा में इमोशन नाम की कोई चीज नहीं होती है। वो सिंपल है। मैंने इंजीनियर मिर्जा साहब का मैंने एक क्लिप सुना कि खुदा जो है वो कंपोजिट है। बहुत मुश्किल है। कॉम्प्लेक्स है। वो समझ में नहीं आता। किसने बोला? अगर खुदा कंपोजिट हो जाए वो अपनी जात के अंदर कॉम्प्लेक्स अगर हो जाए वो इटरनल नहीं रहता। इटरनल होने के लिए शर्त यह है कि वो दी मोस्ट सिंपलेस्ट थिंग हो। वो दी मोस्ट सिंपलेस्ट बीइंग हो। कॉम्प्लेक्स इंसान है। क्यों इंसान कॉम्प्लेक्स है?
क्योंकि हमारे डिफरेंट बॉडी पार्ट्स हैं। हमारे अंदर फंक्शनंस है। सारी चीजें ना खुदा का कोई बॉडी पार्ट है। ना खुदा के अंदर कोई ऑर्गन्स है। ना खुदा के अंदर कोई फंक्शन चल रहा है। कुछ भी नहीं है। भाई ये कॉम्प्लेक्स ही हो गए ना फिर इस तरह तो कैसे कॉम्प्लेक्स हो जाएगा? जैसे आपने कहा जैसे आपने कहा कि अल्लाह ताला ना फिजिकल है ना मेटाफिजिकल है। तो ये ये बात कॉम्प्लेक्स कॉम्प्लेक्स ही हो रही है ना? नो देखो जब आप बेसिकली कॉम्प्लेक्स कह रहे हो ना किसी चीज को इसका मतलब पता है क्या होता है
इसका मतलब यह होता है कि इसके अंदर फर्दर पार्ट्स मौजूद है इसके अंदर बहुत ज्यादा फंक्शनंस मैकेनिज्म मौजूद है तब आप उस चीज को कॉम्प्लेक्स कहते हो पर अगर कोई चीज अपनी जात के अंदर सिर्फ एक हो यानी आप देखो तो उसके पार्ट्स भी आपको ना मिले उसके अंदर कोई चलता हुआ आपको फंक्शन भी ना मिले कुछ भी ना मिले तो अब वो चीज कॉम्प्लेक्स नहीं रहती वो सिंपल है ही एक कोई परेशानी नहीं है। खुदा कॉम्प्लेक्स नहीं है। खुदा सिंपल है। खुदा एक भी नहीं है। खुदा यूनिक है। खुदा यखता है। खुदा एक भी
नहीं है। क्योंकि जब आप किसी चीज के बारे में एक कहते हो तो एक के बाद दो होता है। और दो के बाद तीन होता है। खुदा अद में एक दो तीन वो वाला एक नहीं है। बिस्मिल्लाह रहमानहीम। कुल हु्लाहु अहद वाहिद नहीं अहद। अहद का मतलब होता है यता। वो एक नहीं है। मैं आपको मिसाल देता हूं। इस चीज को समझे। अ मैं अभी मेरे हाथ में इस वक्त एक गिलास है। ठीक है? हम उसको एक कह रहे हैं। इसके अंदर मेरे पास जूस है। लेट्स सपोज उस जूस को हम एक कहते हैं कभी?
लिक्विड हम कभी उसको एक नहीं। लिक्विड को लिक्विड को हम एक नहीं कह सकते। क्यों नहीं कह सकते उसको एक? क्योंकि भाई वो लिक्विड है वो हम वो काउंटेबल में नहीं आता अनकाउंटेबल में क्यों नहीं आता सवाल ये क्यों नहीं आता क्योंकि भाई लिक्विड को गिना नहीं जा सकता जिस तरह गैस को नहीं गिना जा सकता उस तरह चलिए मैं मैं मैं आपकी मदद करता हूं क्योंकि इसकी कोई शेप नहीं होती कोई शेप होती है? हां बिल्कुल बिल्कुल शेप नहीं होती। जिस चीज पे डालते हैं उसको डाल। एक्सीलेंट एक्सीलेंट मेरे भाई आई लव यू अली
भाई। आई लव यू। आपने बहुत सारे मुसलमान बच्चों की आज जाना मुश्किल हल कर दिए। जिस चीज की कोई शेप नहीं होती आप उस पे एक दो तीन नहीं अप्लाई करते। खुदा की कोई शेप है? नहीं। अगर खुदा की शेप नहीं है। खुदा एक दो तीन नहीं हो सकता। जी भाई बिल्कुल। कितना सिंपल है समझना। खुदा की कोई शेप नहीं है। नंबर वन, नंबर टू। अभी आगे आएगा हमारे पास। ये रहा हमारे पास पॉइंट नंबर सिक्स। बाउंडलेस इंफिनिट इंफिनिटी जिसकी कोई लिमिट ना हो। तो खुदा की कोई शेप नहीं है। पानी की भी शेप नहीं
होती, लिक्विड की शेप नहीं होती, हवा की शेप नहीं होती। मगर हवा की लिक्विड की कोई बाउंड्री होती है। वो लिमिटेड होता है। खुदा लिमिटेड है कि अनलिमिटेड है? अपनी जात के अंदर? अल्लाह ताला अनलिमिटेड है। एक्सीलेंट एक्सीलेंट अनलिमिटेड है। अभी हमारे पास कमेंट में सवाल आया है कि जब किसी ने देखा ही नहीं है तो अ तो साफ है या नहीं है? ये किसने बताया? यार ये एससीएफ क्या लिखा है आपने? मुझे ये नहीं पता। लिखने वाले ने जो लिखा है एसएफ का मतलब क्या मुझे नहीं पता भाई साफ है मतलब क्लियर है यह
मेरे ख्याल में यह कहना चाह रहे हैं हां ठीक है शायद यही कहना चाह रहे होंगे भाई देखो पहली बात तो ये है कि खुदा नजर नहीं आ सकता तो खुदा पे देखे जाने वाला तो कांसेप्ट ही अप्लाई नहीं होता है ठीक है अभी ये हम चीज डिस्कस कर लेंगे हां जी तो खुदा इनफिनिट है अभी आपने ये बात कही ठीक है ना उसकी शेप है और वो इनफिनिट है इनफिनिट होने का मतलब क्या होता है कि कोई ऐसी जगह हो सकती है कि जहां पे ना हो या हर जगह पे वो चीज होगी क्योंकि
वो इनफिनिट है। हर जगह होगा भाई हर जगह पे एक्सीलेंट। तो आप मानते हो आपका यकीन है कि अल्लाह इनफिनिट है। जी भाई बेशक। अभी थोड़ी देर पहले आप कह रहे थे कि खुदा हरकत करता है पॉइंट ए से पॉइंट बी पर। तो अगर वो हर जगह है तो वो हरकत कैसे कर रहा है? यानी कि अल्लाह ताला हर जगह है पर वो हरकत नहीं करता। अभी तो मैं आपसे सवाल कर रहा हूं। कुछ देर पहले आप कह रहे थे कि खुदा हरकत करता है। अब आप कह रहे हैं कि खुदा इनफिनिट है। उसकी कोई
बाउंड्री ही नहीं है। जब उसकी कोई बाउंड्री नहीं है। वो हर जगह ही मौजूद है तो वो हरकत कैसे कर रहा है? आप खुद से सवाल करें। जी भाई। अब कुछ क्वेश्चन है जो सॉल्व होना हाल हो गए स्टार्ट में। अल्हम्दुलिल्लाह अल्हम्दुलिल्लाह वो पाक हस्ती है इंशा्लाह ताला जो कोशिश करता है वो उसको नतीजा देती है हिदायत उसके हाथ में किसी बंदे के हाथ में नहीं मगर मैं चाह रहा हूं कि आप खुद से सवाल करें कि ऐ अली कुछ देर पहले तुम कह रहे थे कि अल्लाह हरकत करता है। हे अली अब तुम कह
रहे हो कि वो इनफिनिट है। तो अली मैं क्या करूं? मुझे खुद बताओ अली। यह खुद से सवाल करें आप। आपको आपका सेल्फ जवाब देगा कि नहीं यार वह तो हरकत कर ही नहीं सकता। बिकॉज़ ही इज इनफिनिट या आप उसको फाइनाइट मानो। जी भाई अगर वो इनफिनिट है तो वो हरकत नहीं कर सकता। अगर आप उसको फाइनाइट कर दोगे वो खुदा बाकी नहीं रह सकता। ये चीज़ है। क्यों? क्योंकि व्हेन यू से लेट्स सपोज मेरा भाई अगर कोई बोल दे कि नहीं यार मैंने तो हदीस में पढ़ा है कि वो हरकत करता है। ठीक
है? भाई वहां पर हरकत करना वो लिटरल हमारे वाली हरकत नहीं है। वो कुछ और मायने हैं। अब आपको अगेन आप जब यह सारी चीजें समझते हैं ना जब अकली तौर पर आप वजूद खुदा को समझते हैं और फिर जब आप इस्लाम के दामन में आते हैं, आप जब हदीस कुरान को देखते हैं तो आपके ऊपर फिर असली नूर का नजूल होता है खुदा की तरफ से। फिर आपको समझ में आता है यार मैं किस रहमान खुदा की इबादत कर रहा हूं। फिर आपको वो हकीकत समझ में आने लगती है। वरना आप उसको महदूद एक
जात बना देते हो। अगर आप उसको फाइनाइट कहते हो तो फाइनाइट कहने का मतलब यह है वो महदूद है। महदूद का मतलब यह हो गया कि आप कह रहे हो कि उससे कोई और पावरफुल चीज है उससे जो इससे ज्यादा पावरफुल है और वो उसको लिमिटेड कर रही है। भाई यहां पे आपने इबादत का जिक्र किया हम भाई मेरा एक क्वेश्चन है कि अल्लाह ताला इतनी बड़ी जात है। बेनियाज जात है। तो अल्लाह ताला को मतलब हमारी इबादत की जरूरत क्यों है? मतलब क्या वो क्या वजह है कि अल्लाह ताला चाहते हैं हम कि इबादत
करें। चलिए ठीक है। मैं सवाल का जवाब देता हूं। मगर मैं पहले ही बता दूं सवाल का जैसे ही जवाब दूंगा ना तो अभी हम जो बात कर रहे हैं हम उससे हट जाएंगे। मगर मैं आपको जवाब दे देता हूं। देखो भाई फराज भाई ने बहुत अच्छा जवाब दिया कि खुदा जो है वो खालिक है। वो क्रिएटर है। ठीक है? एक लॉजिकल चीज है कि जब कॉज मौजूद हो और कॉज जो है वह कंप्लीट हो चुका हो तो अफेक्ट होगा। उसका इफेक्ट आपको नजर आएगा। फॉर एग्जांपल अगर मेरे सामने आग जल रही है। मैं आग
में अगर हाथ डालूंगा मेरा हाथ जलेगा। क्योंकि कॉज मौजूद है और वो मुकम्मल तौर पर मौजूद है। मेरा हाथ जलेगा। पर अगर उसी आग के अंदर मैं कोई ऐसा ग्लव पहन लूं जो फायर प्रूफ हो तो मेरा हाथ नहीं जलेगा। यानी अब जो कॉज है वह मुकम्मल नहीं हुई है। बीच में एक बैरियर आ गया तो मेरा हाथ नहीं चलेगा। खुदा क्योंकि खालिक है और वह इनफिनिट भी है। तो उसने क्रिएशन की नंबर वन। नंबर टू जब उसने क्रिएशन की तो खुदा आदिल है। खुदा जबर्र नहीं करता लोगों के ऊपर। ठीक है? वो आदिल है।
तो उसने हमें बनाया। उसने सबको बनाया। ठीक है? मगर बनाने के बाद ये नहीं कर दिया कि जाओ मैं तुम्हें इम्तिहान से गुजारता हूं। ऐसा बिल्कुल भी खुदा ने नहीं किया। खुदा ने खुद कुरान में इसका जिक्र किया कि खुदा ने यह बताया कि देखो मेरे ये अहकामात है। मेरे ये लॉज़ हैं। अगर तुम में से कोई चाहता है तो मैं एक काम करता हूं कि मैं एक फिजिकल वर्ल्ड बना रहा हूं। मैं क्या करूंगा कि जो कबूल करता है कि यार वो इस इम्तिहान से गुजरेगा। वो मेरे इन अहकामात को मानेगा। तो फिर मैं
क्या करूंगा कि मैं जब फिजिकल वर्ल्ड में उसको भेजूंगा तो उसको मैं फ्री विल के साथ भेजूंगा। और यह यह चैलेंजेस ये ये इम्तिहानात उसको आएंगे। नतीजे में उसको क्या मिलेगा? जब वो फिजिकल वर्ल्ड से बाहर आ जाएगा तो फिर उसका हिसाबो किताब के बाद कि जितना वो कामयाब हुआ होगा उसके हिसाब से या जन्नत मिल जाएगी या उसको जहन्नुम में उसी हिसाब से रैंक्स मिल जाएंगे। पर अगर तुम ये कहते हो कि भाई हमें इसमें जाना ही नहीं है। इस प्रोसेस में जाना ही नहीं है हमने। तो फिर क्या होगा? फिर ये होगा कि
ठीक है भाई। फिर तुम्हें यह सारी चीजें करने की जरूरत ही नहीं है। यानी ना तुम्हें फ्री फिर मिलेगी ना अच्छा और बुरा तुम्हारे ऊपर होगा। अब तुम बता दो तुम्हें क्या करना है। कुरान खुद बताता है आप जानते हैं कि इंसान जो है वो जल्दबाज है। इंसान ने बोला यार ये तो बहुत ही अच्छा मौका है। मुझे तो जन्नत चाहिए। तो इंसानों ने कहा भाई हमको तो जाना है। हम तो गुजरेंगे इस प्रोसेस से। कौन से कौन से इंसान? कौन से इंसान? यार आप और मैं आप और मैं भाई वहां पे इंसान नहीं देखो
यह यह बात हो रही है द रम ऑफ़ पार्टिकल्स की। सही है? वह इंशाल्लाह कभी फिर और समझा देंगे। यह एक दुनिया नहीं है। हमारे पास एक आलम नूर है हमारे पास। हमारे पास आलम है उसका सोल्स का। द वर्ल्ड ऑफ सोल्स है। हमारे पास वर्ल्ड ऑफ़ पार्टिकल्स है। हमारे पास ये फिजिकल रम है। फिर इसके बाद हमारे पास वर्ल्ड ऑफ बरजक है। फिर इसके बाद हमारे पास कयामत का मैदान है। फिर इसके बाद जन्नत दोज़क है। फिर इसके बाद भी हमारे पास आलम है। परवरदिगार जो है रब्बुल आलमीन है। एक आलम का रब नहीं
है। आलमीन का रब है। अब देखो ना ये ताज्जुब की बात है कि मुसलमान जो कम से कम पांच वक्त की नमाज़ पढ़ता है। जिसमें हर नमाज के अंदर दो रकात के अंदर आपको सू अलहमद की तिलावत करनी होती है। पांच नमाज़ के अंदर 10 दफा बंदा दिन में सूर अलहमद पढ़ता है। यानी इस आयत की तकरार करता है दिन भर में और फिक्र नहीं करता जो आलमीन की बात हो रही है। हम तो एक आलम देख रहे हैं कि अब बाकी आलमीन है कौन से? ठीक है ना दोस्त? तो ये जब बात हो रही
थी तो रैम ऑफ़ पार्टिकल्स में हो रही थी कि जिसमें हम इस जाहिरी तौर पे इस जिस्म के अंदर तो थे ही नहीं। वो तो रैम ऑफ़ पार्टिकल था। यानी हमारी सोल थी और जो भी पार्टिकल था जिस भी तरह से हम थे व्लाहु आलम खुदा उसको बेहतर जानता है। वहां पर ये सारा प्रोसेस हुआ था। ये जितनी भी आप दूसरी यूनिवर्स की चीजें देखते हैं इन सब ने मना कर दिया। बोला कि यार भाई हम नहीं जा रहे इस हिसाब किताब में। ये बहुत चैलेंजिंग चीज है भाई। फंस जाएंगे। कामयाब हो गया तो जन्नत
है। नाकाम हो गए तो फेंटी पड़ जाएगी। नहीं करना हमने ये। उसी के अंदर वो जो मखलूकात थी जिन्होंने कहा कि भाई हमने तो जाना है तो वो इंसान बन के आ गए। दुनिया के अंदर भाई जो क्वेश्चन है इबादत वाला वो अ क्लियर नहीं हुआ कि मतलब इबादत की जरूरत क्यों है? अभी कहा ना भाई उसको जरूरत नहीं है। उसने कहा कि मैं तुम्हारे लिए रख देता हूं एक चीज अगर तुम इससे गुजरते हो तो तुम्हारे को जन्नत और दोज़ख मिलेगी। अगर नहीं चाहिए तुमको तो कुछ भी नहीं है। तो जिसने नहीं मांग मांगा
उसके लिए जन्नत दोज़ख नहीं है। हम भी कह देते हैं कि हमें नहीं चाहिए। यह जो ऑप्शन है हमने खुद चूस किया। डेफिनेटली अगर हम खुद नहीं करेंगे तो खुदा पर जब्र होने का लग जाएगा कि खुदा ने हम पर जब्र किया और खुदा आदिल है वो रहमान है। वो जब्र नहीं करता हमने खुद इसको कबूल किया है। तो भाई यहां पे एक और क्वेश्चन पैदा होता है। आपने कहा कि अल्लाह ताला रब्बुल आलमीन है। मतलब पूरी कायनात में जो इंसान है उनके रब है। तो आवाज आ रही है अभी? मुझे आवाज आ रही है।
मैं आपका सवाल सुन रहा हूं। जी तो भाई जो हिंदू है जो क्रिश्चियन है तो क्या ये जन्नत में जाएंगे कि नहीं? मैं अपनी स्ट्रीम के आगाज में जब आपने ज्वाइन किया था उस वक्त मैं इबने कसीर रहमतुल्लाह की मैं दिखा रहा था तफसीर में से जो सूर असरा की आयत नंबर 15 की उन्होंने जब तफसीर की है तो मैं उसी बात को दिखा रहा था। मैंने कहा ना कि अब हम जब ये गुफ्तगू आपकी शुरू करेंगे इबादत वाली तो हमारा जो असली टॉपिक है हम उससे रह जाएंगे। अब आप मुझे बताएं क्या करूं? इटरनल
बीइंग को क्लियर करूं तो आप ताकि आपको वजूद खुदा असल में समझ में आ जाए या आपके इसी सवाल को लेके चलना है तो फिर मैं इसको बंद करूं। हम उस तरफ निकल जाए। जहां आप बोलेंगे वहां चला जाऊंगा मैं। टॉपिक पे रहते हैं। टॉपिक पे रहते हैं। फिर टाइम टू टाइम मैं आता रहूंगा तो क्वेश्चन क्लियर हो जाएंगे इंशा्लाह। भाई आप लाइव में आओ। लाइव में आप नहीं आ सकते। ईमेल एड्रेस मैंने चैट में भी दे दिया। चैनल पर मौजूद है। ईमेल पे राब्ता कर लो भाई। जब बोलोगे जैसे चाहोगे आपको वैसे एविडेंसेस मिल
जाएंगे। मेरा मकसद सिर्फ एक ही है अपने मुसलमान ना सिर्फ अपने मुसलमान भाइयों दोस्तों बच्चों की मदद करना। जो गैर मुस्लिम भी है उनकी भी मदद करना। मेरा जाती को फायदा तो है ही नहीं। अल्लाह के परवरदिगार इबादत को कबूल कर ले। हमारी बस इबादत से अगेन जो फराज भाई बोल के गए थे। इबादत का मतलब नमाज़ रोजा सिर्फ नहीं है। इबादत का मतलब यह है कि 24 से उसकी बंदगी करना। यानी जो उसने कहा है वो सारे काम करते रहना। मेरे अगर मां-बाप जिंदा है तो उनकी खुशी के लिए हर काम करना। मेरे अगर
घर वाले हैं, बच्चे हैं, बीवी हैं उनकी खिदमत करना। उनको आसाइश आराम सब पहुंचाना। दूसरे लोगों की आसानी के लिए काम करना, अपना माल उन पर खर्च करना, इल्म हासिल करना, नेकी करना ये सारी चीजें हैं। तो इंशाल्लाह हम इसको डिस्क्रिप्टिव नहीं करते। हम जल्दी से इसको खत्म करते हैं ताकि फिर मैं आपका उस सवाल का भी जवाब दे दूं जो मैं आगाज में बात भी कर रहा था। खुदा जो है वो टाइमलेस है। क्यों? भाई वो एब्सोल्यूट इटरनल है। एब्सोल्यूट इटरर्नल का मतलब यह है कि एक तो वो इनफिनिट हो गया। किसी स्पेस में
नहीं आएगा। कुछ भी नहीं आएगा। वो टाइम के अंदर भी नहीं आएगा। जब वो टाइम में नहीं आएगा। अब हम ये इमेजिन कर नहीं सकते। मगर सोच के देखिए कि जब खुदा जो है वो टाइमलेस है। दिस मींस कि खुदा के लिए पास्ट प्रेजेंट फ्यूचर एक्सिस्ट ही नहीं करता। यू एग्री अली भाई? जी। तो अगर खुदा के लिए पास्ट प्रेजेंट फ्यूचर एक्सिस्ट नहीं करता तो इस वक्त हमारा होना और ना होना खुदा के लिए बराबर है। भाई विदाउट टाइम ये कैसे पॉसिबल है हम देखा ये मुश्किल चीज है समझना। इतनी आसान नहीं है। पर इंशाल्लाह
अगर हम इनको समझ जाए तो फिर इसके बाद जो खुदा से आपका जो लगाव होगा ना जो मोहब्बत होगी वो एक अलग ही पीक पर मौजूद होगी इंशा्लाह। देखिए हम टाइम के अंदर कैद हैं। सही है? तो हम कोई भी जब काम करते हैं यानी मेरी जो ये हाथ की जो मूवमेंट अभी है जो आपको कैमरा में नजर आ रही होगी इंशाल्लाह ताला बाकी भाइयों को भी नजर आ रही होगी। ये जो मेरी हैंड की मूवमेंट ये भी टाइम के अंदर हो रही है। सिर्फ स्पेस में नहीं हो रही है बल्कि टाइम में भी हो
रही है। इस सेकंड ये हाथ यहां पर है। इस सेकंड ये हाथ यहां पर है। अगर मैं इस टाइम की बाउंड्री से बाहर निकल जाऊं तो मेरा यह हरकत करने का कोई सेंस बनता है? भाई टाइम के बगैर यह हरकत ही एक्सीलेंट एक्सीलेंट नाउ दिस इज द पॉइंट अगर टाइम नहीं है तो हरकत करना बनता ही नहीं है और हरकत करना नहीं बनता यही हमने अभी पॉइंट सिक्स में बात की थी हमने पॉइंट सिक्स में कहा कि भाई वह तो है ही इनफिनिट वो इनफिनिट है एब्सोल्यूट इटरनल जो है वह इनफिनिट है टाइमलेस है बाउंड्री
लेस है वह हरकत नहीं करता वो नहीं करता यह हरकत। यू कांट से कि अल्लाह ने हाथ ऊपर किया, नीचे किया, टांग हिलाई, टांग उधर की, इधर आया, उधर गया, ऊपर गया, नीचे आया। क्यों? क्योंकि कोई ऐसी जगह नहीं है जहां पे वो मौजूद ना हो। बल्कि जहां पे जगह नहीं है वहां पर भी वो है। वो मकाम में भी है वो लाम मका में भी है। अब ये चीज हम नहीं समझ सकते। जी। भाई यहां पे भी एक क्वेश्चन पैदा होता है। हमने एक चीज पढ़ी है कि अल्लाह ताला का तख्त पानी पे था
और फरिश्तों ने उठाया हुआ था। तो अब ये वाली बात यहां पे फिर थोड़ी सी साइड पे हो जाती है जो आप बता रहे हैं। ये आप जिस हदीस की तरफ रेफरेंस कर रहे हैं। ये कुरान की आयत के जमीन के अंदर है। अगर आप मुझसे ये कमिटमेंट कर दें कि यार मैं लाइव में आऊं या ना आऊं इंशाल्लाह मेरे जितने भी सवालात है समर भाई मैं आपसे कनेक्टेड रहूंगा। आपके चैनल से मैं ईमेल एड्रेस ले लूंगा। डोंट वरी आपके सवाल बहुत अच्छे हैं। सबका आपको जवाब मिलेगा इंशा्लाह। इंशा्लाह आपको हर चीज मेरे को मेरा
एमान ना रहे। एमान तो हमारा है बेशक फेथ है वो थोड़ा सा लॉजिकल भी होना चाहिए। इंशा्लाह इंशा्लाह हमारा पक्का पक्का होगा इंशा्लाह। इंशा्लाह इंशा्लाह आपको हर चीज का जवाब मिलेगा। बस मैं आपको एक चीज बता दूं। वहां पर तख्त से मुराद फिजिकल चेयर या फिजिकल कोई भी चीज नहीं है। वहां पर तख्त से मुराद जो है वो अथॉरिटी है। वो उसकी पावर है। वो उसकी कुदरत है। और ये मैं आपको जो एक्सप्लेनेशन दे रहा हूं ना जो मैं आपको अभी बता रहा हूं। इंशा्लाह मैं आपको सही हदीस के अंदर दिखाऊंगा। मैं आपको रसूल खुदा
की हदीस के अंदर ये चीज दिखाऊंगा इंशा्लाह। ये जो ये जो बातें लिखी हुई है हमारी पाक किताबों के अंदर ये मेटाफर में क्यों है? मतलब ईजी ईजी ईजी लैंग्वेज में क्यों नहीं है जो आम इंसान भी समझ सके। नहीं जैसे जैसे आपने इसकी इंटरप्रिटेशन की खुद खुद से की क्योंकि इस ऐसे लिखा नहीं होगा। नहीं मैं आपको कह रहा हूं कि मैं आपको हदीसे दिखाऊंगा। मैं आपको अभी जितनी भी बातें बता भी रहा हूं ना लॉजिकली जो मैं आपको सारी चीजें प्रूफ कर रहा हूं। लेकिन डोंट थिंक के रसूल खुदा ने ये नहीं फरमाया।
डोंट थिंक ये सारी चीजें डोंट डोंट थिंक ये सारी चीजें कुरान के अंदर मौजूद नहीं है। एंड डोंट थिंक मैं सारी चीजें जो कह रहा हूं एक्सजेक्टली मैं क्यों लॉजिकली ये सारी चीजें कह रहा हूं। भाई अगर आपके पास कोई शख्स आता है जो इस्लाम के दामन में अभी दाखिल ही नहीं हुआ। आप उसको ये थोड़ी ना कहोगे मैं आपको कुरान की आयत सुनाता हूं। मैं आपको रसूल खुदा की हदीस सुनाता हूं। आप तो ये कहोगे भाई तुम्हें अकल है। एक्सक्टली आप नहीं कह सकते। आप बस ये कहोगे भ तुम्हें अकल है। आओ लॉजिकल बात
करते हैं। हम लॉजिकल रीजनिंग से चलेंगे। अभी हम जो चलते हुए आ रहे हैं हम लॉजिकल रीजनिंग के तहत चलते हुए आ रहे हैं। इवन दो हमने अभी जंप किया है डायरेक्ट इटरनल बीइंग के ऊपर। वरना मैंने आपको शुरू में कहा सिर्फ चार चीजें समझने की जरूरत है। नथिंग से कुछ भी नहीं बनता। इंफिनिट रिग्रेस पॉसिबल ही नहीं है। सर्कुलर डिपेंडेंसी पॉसिबल नहीं है। सिर्फ एक ही चीज बनती है। वो है इटरनल बीइंग का होना। एब्सोल्यूट इटरर्नल बीइंग का होना। यह सिर्फ चार चीजें आप समझ लें और ज्यादा उसमें टाइम भी नहीं लगता यार। कोई
समझने वाला हो 20 मिनट में समझ जाता है सारी चीजें। ये आप चार चीजें समझ लें। इंशा्लाह आप अकेले हो। पूरी दुनिया आपके खिलाफ करी हुई हो। इंशा्लाह खुदा का साथ आपके साथ होगा तो आपको कोई हरा नहीं सकता। आपके दलील इतने मोहकम होंगे और बंदा सामने वाला मानता चला जाएगा कि यार वो बातें गलत कर रहा है। ये इतनी आसान चीज़ है। एक दफा आप अकली तौर पे समझ जाओ। फिर जब आप इस्लाम के दामन में आते हो तो आपको सारी चीजों के एविडेंसेस मिलना शुरू हो जाते हैं कि कुरान भी यही कह रहा
है। हदीस भी यही कह रही है। असहाब भी यही कह रहे हैं। अहल बैत भी यही कह रहे हैं। मुफसरीन भी यही कह रहे हैं। फर्क कहां पर आता है? फर्क आता है कि हमारी समझ के अंदर जो अभी आपने कहा ना कि इस तरह के अल्फाज़ क्यों इस्तेमाल हुए? देखो दोस्त दो चीजें समझो आप। एक होता है गुफ्तगू करना फसी और बलीग जबान के अंदर। एक होता है बिल्कुल सादा जबान के अंदर गुफ्तगू करना। ठीक है? जिसको लैंग्वेज पे कमाल होता है ना उबूर हासिल होता है। तो वो जब गुफ्तगू करता है ना तो
आपको दिखता है कि यार इसके अल्फाज़ का चुनाव कितना बेहतरीन है। वो अपने अल्फाज़ों को रिपीट नहीं करता। हर दफा नया लफ्ज लेकर आएगा और अल्फाज के अंदर गहराई होती है, डेप्थ होती है। इसलिए आप शोरा की जब शायरी के अंदर देखते हो तो वो इतनी गहराई होती है और सुनने में भी वो चीजें खूबसूरत लगती है। पर उसी के मुकाबले में एक बंदा जिसको इतना कंट्रोल नहीं होता लैंग्वेज पर जैसे मेरे जैसा बंदा वो सादासादा अल्फाज़ इस्तेमाल करता है। फिर एक दूसरा मसला ये होता है कि जब मुझे कम्युनिकेट करना है तो मेरी ऑडियंस
कैसी है? अगर मेरी ऑडियंस जो है वो बहुत सादा है और मैं उसके सामने अगर फंसी और बलीक जबान इस्तेमाल करना शुरू कर दूं उसको पल्ले ही कुछ नहीं पड़ेगा। ये बात क्या हो रही है? और अगर मेरे सामने लोग बड़े ही इल्म से भरपूर इल्म के शाहकार बैठे हुए हो और मैं अगर उनके सामने सादा जबान इस्तेमाल शुरू कर दूं ना उनको मजा नहीं आएगा। वो बोलेगा यार ये इतनी लंबी-लंबी बातें क्यों कर रहा है? ये एक वर्ड कहता तो उसमें पूरा जुमला आ जाता। ये कर क्या रहा है? मैं आपको मिसाल देता हूं।
एक चीज की। ठीक है? अ मैं मैं अगर बोलूं कहना आई सो अ गर्ल एंड शी अट्रैक्टेड मी शी अट्रैक्टेड मी बिकॉज़ ऑफ़ हर हेयर्स एंड हर हाइट एंड एट दिस एंड दैट। और ये वो सारी चीजें मैं कर रहा हूं। ठीक है? मैं चाहूं तो यह 101 जुमले कह सकता हूं। वरना मैं चाहूं तो एक जुमले में बात को खत्म कर सकता हूं। आई सॉ अ गर्ल विद ब्यूटी। खत्म। मैंने एक लड़की देखी जो खूबसूरत थी। जुमला खत्म हो गया। अब खूबसूरती के अंदर वो सारी चीजें आ गई है। अब मुझे वो डिफाइन करने
की जरूरत नहीं है कि भाई उसने मुझे अट्रैक्ट भी किया। उसके बाल भी बहुत अच्छे थे। उसकी हाइट भी बहुत अच्छी थी। ना एक्स वजी ना एक्स व जी। ठीक है? कुरान जिस सोसाइटी में आया है वहां पर जो अरब का जो माशरा था वो अपनी जबान पर कंट्रोल रखता था। अजम जब वो अपने मुकाबले में लोगों को कहते थे। अजमी का मतलब यह होता है गूंगे। अजम जिसको कहा जाता है यानी गूंगा। तो अरब अपने अलावा दूसरों को अजम कहते थे। कहते थे यार ये तो है ही गूंगे। इनकी तो जुबान ही कोई नहीं
है। जबान तो हमारी जुबान है। तो क्योंकि अरबों को अपनी जुबान पे नाज था और उनके अंदर बड़े-बड़े पाए के शोरा थे। तो अगर कुरान वहां पर आके आसान जबान में गुफ्तगू करता ना तो ये लोग कबूल ही नहीं करते। ये कहता है अगर खुदा का कलाम है तो फसी बलीग होना चाहिए था। तो इसीलिए कुरान की जो लैंग्वेज है वो बहुत ही फसी बलीग है। वो आलू चालू किस्म की ज़बान नहीं है। नंबर वन। नंबर टू। मसला इसमें यह आ जाता है जो आप कह रहे हो कि भाई फिर सादा इंसान है वह कैसे
समझेगा? या आज के दौर का जो इंसान है वो तो कंफ्यूज हो के रह जाएगा। अब क्या होगा? खुदा ने कहा कि इसको समझने के लिए मैंने आसान कर दिया। मैंने तुम्हारे दरमियान एक नबी भेजा है। वो इस किताब को तुम्हें समझाएगा। आप रसूल खुदा की पूरी जिंदगी देख लीजिए। रसूल खुदा ने जितनी भी गुफ्तगू की है ना कोई भी फसी बली जबान के अंदर नहीं की है। कुरान की आप लैंग्वेज देख फसी बली है। रसूल खुदा की आप लैंग्वेज देख बिल्कुल सादा और सिंपल एक ऑर्डिनरी इंसान भी समझ जाए। रसूल खुदा ने इतने वाजे
वाजे अल्फाजों में सादासादा सिंपल सिंपल अल्फाज़ इस्तेमाल करके बात की है। क्यों? ताकि हर तरह की ऑडियंस से कम्युनिकेट कर सके। नंबर वन। नंबर टू देखिए कुरान जो है ना वो जिंदा मौजजा है। अगर कुरान की हर आयत अपने अंदर सिर्फ एक मायने रखती ना तो हम एक दफा दो दफा तीन दफा उसको रिसाइट करते और फिर हम बोर हो जाते। हम बोलते यार ये तो मजा ही नहीं आ रहा। मैं उनकी बात नहीं कर रहा हूं कि जिनको आयत समझ में नहीं आती है। वो बस बिस्मिल्लाह की बात से वनास की सीन तक पढ़ते
चले जाते हैं सवाब हासिल करने के लिए। मैं उनकी बात नहीं कर रहा हूं। मैं बात कर रहा हूं कि ऐसे बंदे की जब कुरान की आयात को पढ़ता है तो उसमें गौर फिक्र करता है। तो अगर कुरान के सादे साधे से मायने होते हैं ना हम एक दो दफा पढ़ते हैं हम बोलते हैं यार छोड़ बस क्या करना है मगर आई कैन चैलेंज आप सिर्फ अल्हम्द पर भी अगर आप गौर करना शुरू कर दो ना तो सिर्फ ये एक सूर जिसमें सिर्फ सात आयात है आप उसको डेली अगर आप समझ समझ के पढ़ते जाओ
ना डेली आपको एक नया मतलब दिखाएगी इंशा्लाह ये कुरान का मौजजा है ये उसका एजाज है। अब मसला यह है कि हम समझते किसी चीज को है नहीं और बस फिर हम बैठे-बैठे बोल देते हैं तो उसका तो कुछ नहीं कर सकते। तो कमिंग बैक टू द पॉइंट हम जाते खुदा पे वापस आ जाते हैं क्योंकि मैं चाहता हूं कि मैं एक दफा फिर आपके सवाल का जवाब दे ही दूं कि जो नॉन मुस्लिम है उनके साथ क्या होगा? तो हमने कहा कि वो टाइमलेस भी है। वो बाउंड्री लेस भी है। वो इंडिपेंडेंट है। उसके
ऊपर किसी का कोई कंट्रोल नहीं है। कोई इख्तियार नहीं आता। हम कंटिंजेंसी उसके ऊपर अप्लाई नहीं होती है। यह नहीं है कि वह नहीं था और वह हुआ है। वह बस है। अगर आपको सिर्फ यह सात पॉइंट समझ में आ जाए एब्सोल्यूट इटरर्नल बीइंग के तो ना सिर्फ कोई भी शख्स आपको खुदा के वजूद का इंकार करवा सकता है बल्कि ये आपको कोई यह भी कन्विंस नहीं कर सकता कि अली भाई अल्लाह के सिवा कोई और भी खुदा हो सकता है। क्यों नहीं हो सकता? आप जितने भी मजाहिब उठा के देख लें यू जस्ट नेम
इट। आप किसी भी मजहब को उठा के देख लो। अगर आप हिंदू मजहब की बात करते हो तो वहां पर एक खुदा का कांसेप्ट ही नहीं है। मल्टीपल गॉड का कांसेप्ट है। नंबर वन जब मल्टीपल गॉड्स होंगे जब मल्टीपल इटरनल बीइंग्स होंगे लॉजिकली फ्लॉड या आर्गुमेंट का मल्टीपल इटरनल बीइंग्स हो। हो ही नहीं सकता। इटरनल बीइंग सिर्फ लॉजिकली एक ही हो सकता है। वो मल्टीपल हो नहीं सकता। क्यों? क्योंकि अभी हमने जो पॉइंट डिस्कस किए हैं ना ये हो ही नहीं सकता कि एट अ टाइम मल्टीपल बीइंग्स हो जिसमें ये सारे पॉइंट्स हो। यू नो
व्हाई हम सिर्फ एक ही पॉइंट की हम बात कर लेते हैं। अभी हमने बात की बाउंड्री लेस की। ठीक है? अगर हम मान रहे हैं कि भाई एक ऐसी बीइंग है कि जो बाउंड्री लेस है जिसकी कोई बाउंड्री नहीं है। जिसकी कोई लिमिट नहीं है। तो वो दो कैसे हो सकता है? आप सोच के देखिए दो हो ही नहीं सकते वो। कैन यू इमेजिन कि दो ऐसी बीइंग हो कि जो इनफिनिट हो? नहीं भाई एक ही जात होनी चाहिए। 1% क्यों? क्योंकि अगर आप दो को लेकर भी आओगे ना तो दो का मतलब ये है
कि एक की लिमिट जहां पे खत्म हो रही है वहां से दूसरे की लिमिट शुरू हो रही है। पर हम तो प्रिंसिपली बात ही ये कर रहे हैं कि भाई इसकी तो कोई बाउंड्री नहीं है। तो जब बाउंड्री नहीं है तो लिमिट सेट कैसे हो रही है? और जब लिमिट सेट नहीं हो सकती तो वो फाइनाइट कैसे हो रही है? वो तो इनफिनिट रहेगी। तो अगर दोनों इनफिनिट है दिस मींस वो दो नहीं है वह एक है। आपका हिंदू मजहब फारिक हो जाता है। आपके बुद्धिज्म के अंदर तो यह कांसेप्ट ही नहीं है। उनका तो
कांसेप्ट ही बिल्कुल अलग है। वो तो क्रिएशन के कांसेप्ट पे भी पूरा नहीं उतरता। आप क्रिश्चियनिटी के अंदर अगर आप चले जाओ तो वहां पर द फादर, द सन, द गॉड वो अलग फारिक हो जाता है। आप नेम करो। कोई है ही नहीं। कोई मजहब ही नहीं है। आप अगर जुडिज़्म की बात कर लो। ठीक है? तो जुडिज़्म के अंदर सबसे बड़ा मसला ये है कि आप वहां पर कन्वर्ट नहीं हो सकते। अगर वो दीन हक हो भी। ठीक है? क्योंकि हम जानते हैं कि जुडिज्म बिल्कुल सही है। हक दीन है। अब उसके अंदर टपर
हो गया है। तो अगर अभी भी वो अपनी हकीकत हकीकी हालत में अगर मौजूद होता तो आप उसको एक्सेप्ट ही नहीं कर सकते। तो अगर कोई ऐसी हकीकत है जिसको आप एक्सेप्ट कर नहीं सकते तो वो हकीकत हकीकत रहती नहीं है। वो खुद भी चली जाती है। सिर्फ एक वाहिद इस्लाम ही रहता है कि जिसका जो अल्लाह का कांसेप्ट है वो एब्सोल्यूट इटरनल बीइंग के लॉजिकल बनाए हुए क्राइटेरिया पे पूरा उतरता है। इसके अलावा किसी का खुदा का कांसेप्ट ऐसा नहीं है कि जो अकली तौर पर अकली तौर पर अगेन आई एम रिपीटिंग अकली तौर
पर ना कुरान ना हदीस अकली तौर पर आप जो कंडीशंस खुदा के लिए बनाएंगे जो इटरर्नल बीइंग के लिए बनाएंगे सिर्फ एक अल्लाह की जात है जो इस्लाम के अंदर आपको मिलेगी वो पूरी उतरती किसी और की उतरती नहीं है आई चैलेंज यू भाई मैं अली भाई आपको मोहब्बत में आपको चैलेंज कर रहा हूं आप एक मजहब ऐसा लेकर आओ इस्लाम के अलावा के जिसमें खुदा का ऐसा कांसेप्ट हो कि जो एब्सोल्यूट इटरनल में पूरा उतरता हो आप लेकर आओ मैं $1000 आपको इनाम में दूंगा। ये मैं आपको मोहब्बत में कह रहा हूं। आप ला
भी नहीं सकते। जी भैया ऐसा ही है। तो तो ये चीज़ तो वो जो आपने सवाल किया था आप अल्हम्दुलिल्लाह उसका हमने जवाब देने की कोशिश की। इंशाल्लाह कोशिश करते हैं कि आपको इससे फायदा हुआ होगा। अब हम उस पर आ जाते हैं जल्दी से कि जो आप अर्ज कर रहे थे के काफिरों का क्या होगा? भाई देखो काफिरों की सीधी-सीधी सी बात है के अगर वह ईमान ले आते वेरी गुड। आप ईमान लेकर आओ। सही है। अगर आप ईमान नहीं लेकर आते कुफ्र का मतलब यह होता है कि आपके पास एविडेंसेस आ गए। आपको
पता चल गया कि व्हाट इज द रियलिटी। इसके बाद आपने रियलिटी का इंकार किया है। तो अगर हक पहुंचने के बाद आप इंकार करते हो तो आप जिद्दी हो जाते हो। जो भी जिद्दी है मुसलमान की शक्ल में भी अगर वो जिद्दी शख्स है तो वो भी जहन्नुम में जाएगा। वो जन्नत में नहीं जाएगा। मैं आपके सामने दो रेफरेंसेस दूंगा। एक मैंने क्योंकि स्ट्रीम के आगाज पे दे दिया था। तो अभी मैं पहले यह दिखा दूं। उसके बाद मैं दिखाऊंगा क्योंकि यह मैंने नहीं दिखाया था। तो ये मैं पहले दिखा रहा हूं और फिर मैं
इब्न कसीर की तरफ भी जाऊंगा इंशाल्लाह और वहां पे डिटेल में मैं आपको हदीस दिखाऊंगा इंशा्लाह। कुछ नॉन बिलीवर्स में से ऐसे भी लोग हैं नॉन बिलीवर्स में जो अल्लाह पे ईमान नहीं रखते जो खुदा को नहीं मानते। ऐसे भी लोग हैं जो जन्नत में जाएंगे और वो कब जाएंगे? किस तरह से जाएंगे ये मैं दिखा रहा हूं आपको। इमाम बाकिर की तरफ से मैं आपको दिखा रहा हूं। जो कि रसूल खुदा के ग्रैंड सन है उनकी ये नरेशन है। उसकी तरफ से मैं दिखा रहा हूं। और यहां पर ऐसे सात ग्रुप्स का जिक्र है।
तो जिन्होंने स्ट्रीम के आगाज़ में देख लिया था जो मैंने इब्ने कसी से मैंने जो दिखाया था वहां पे जो हदीस थी रसूल खुदा की वहां पर चार थे। ठीक है? तो वहां जो हदीस थी उसमें चार थे। ग्रुप्स का जिक्र था। यहां पर जो मैं हदीस आपको दिखा रहा हूं जो ग्रैंड सन है रसूल खुदा सल्लल्लाहु अल वसल्लम के यहां पे सात लोगों का जिक्र है। कौन-कौन से? एक तो उस बच्चे की बात हो रही है। ठीक है? जो बच्चा है वो मुशरिक का बेटा है। किसी काफिर की औलाद है। मगर है बच्चा छोटी
उम्र में चला गया। उसकी बात हो रही है। नंबर टू किसकी बात हो रही है? कि जो दो नबियों के दरमियान आया था। यानी एक नबी चले गए दुनिया से। अभी दूसरे नबी आए नहीं है। इसके बीच में वो शख्स पैदा हुआ है। उस तक हक नहीं पहुंचा। तो ऐसा शख्स तीसरा उसकी बात कर रहे हैं हम कि भाई इतना जफ उमरी में चला गया है कि अब उसको कोई चीज समझ ही नहीं आ रही है। उसको अगर मैसेज पहुंच भी जाए नबी सामने देख भी ले नबी को आंखों से भी देख ले तो भी
उसको कोई बात समझ ही नहीं आएगी। यह हो गया यहां पर है एक सिंपल माइंडेड। सिंपल माइंडेड का मतलब यह है कि भाई बहुत ही सादा ज़हन का आदमी। अरबी में यहां वो मौजूद है भाई। अबलाह की बात हो रही है यहां पर। ठीक है? सादा इंसान बेवकूफ पागल की बात नहीं हो रही है। वह अगला है हमारे पास जो मजनू इंसैन है हमारे पास वो हमारे पास इसके बाद मौजूद है। फिर बहरे और गूंगी की बात हो रही है। ये लोग क्या करेंगे रोज़ कयामत ये रोज़ कयामत अल्लाह के पास जाएंगे और अपना उज़र
पेश करेंगे कि या अल्लाह दुनिया में हमारे पास ये ये चैलेंजेस थे। यह यह मसाइल थे कि या तो हम तक हकीकत पहुंची नहीं दीन इस्लाम की या अगर हम तक पहुंची भी तो हम समझ नहीं सके थे और इसमें आई रिपीट ये लाजमी देखना भाई ये सिंपल माइंडेड इसके अंदर शामिल है। तो अगर लेट्स सपोज अभी कोई नॉन मुस्लिम हमारी बात सुन रहा हो उसको अगर बात समझ में नहीं आ रही है। जस्ट बिकॉज़ के उसमें इतनी अकल नहीं है। ये नहीं कि वो जिद्दी है। मेरे को तो मानना नहीं है। मुझे तो ऐतराज
करना है। हम उसकी बात नहीं कर रहे। अगर वह इतना सिंपल इंसान है उसको समझ में नहीं आ रही है तो ऐसे सात ग्रुप होंगे जो अल्लाह के पास अपना उजर ले जाएंगे अल्लाह ने क्या करना है अल्लाह ने एक मैसेंजर वहां पर भेजना है मे बी फरिश्तों में से कोई होंगे और वो वहां पर आग जलाएंगे ठीक है यानी जहन्नुम को करीब लेकर आएंगे शायद ये यहां पर मुराद है और परवरदिगार उनसे कहेगा कि भाई चले जाओ इस जहन्नुम में दाखिल हो जाओ यानी यह लोग अब खुदा को मान गए रोजे कयामत मगर यह
उज़ लेकर आए हैं कि भाई दुनिया में हमारे पास यह क्योंकि वैलिड उजर है। यह चैलेंजेस थे तो इसलिए हमने इस्लाम को कबूल नहीं किया। नाउ व्हाट अल्लाह कहेगा ठीक है अब तो मानते हो ना मुझे अब एक काम करो अब जाओ जहन्नुम में तो इनमें से जो भी जहन्नुम में चला जाएगा अल्लाह का हुकुम मानते हुए आग उसके ऊपर ठंडी हो जाएगी और वो बच जाएगा और जो रिफ्यूज करेगा जाने से उसको उठा के जहन्नुम में फेंक दिया जाएगा तो यानी अगर आपके पास कोई उजर है वैलिड उज़ है इस दुनिया के अंदर तो
खुदा ने ये नहीं करना है कि ओए तू मुसलमान क्यों नहीं हुआ था चल जहन्नुम के अंदर ये नहीं होगा वहां पर एक छोटा सा इम्तिहान होगा इंशा्लाह और जैसे ही वह इस इम्तिहान से गुजरेंगे जो पास हो जाएगा वह जन्नत में चला जाएगा। जो पास नहीं होगा तो वह चला जाएगा जहन्नुम में। मैं जल्दी से एक काम करूं इबने कसीर की भी वो दिखा दूं ताकि हमारे भाई जो है उसको देख ही ले ताकि किसी के ज़हन में कोई डाउट ना रह जाए। हदीस नंबर चौथी। चलो ये भी स्क्रीन शेयर कर लेते हैं। अली
भाई इबने कसीर से दिखा रहा हूं। एक मिनट जरा इसको आगे की तरफ ले चला जाऊं ताकि आसानी हो जाए। जिसको लिंक चाहिए हो भाई वो लिंक मांग ले वरना तो मैं दिखा ही रहा हूं। सूर असरा चैप्टर नंबर 17 वर्स है इसके 15 उसके तफसीर के अंदर ये आपको मिल जाएगा। आप आराम से देख सकते हैं भाई। ठीक है? सूरत असरा की ही तफसीर के अंदर ये चीज मौजूद है। अह हदीस यहां से शुरू हो रही है। पहली हदीस जो स्ट्रीम के आगाज़ में मैं दिखा चुका हूं। फिर उसी चीज को रिपीट कर रहा
हूं। मुसनद अहमद से है कि चार किस्म के लोग होंगे। इमाम बाकर से जो मैंने दिखाया है वहां पर सात किस्म के लोग थे। यहां पर चार किस्म के लोग थे। जो भी हो हमारा काम हर जगह से हो रहा है। अल्हम्दुलिल्लाह सेम चीज है कि कयामत के दिन ये लोग अपना उजुर लेकर आएंगे। इसमें चार तरह के लोग होंगे। एक जईफ आदमी होगा जो सुन नहीं सकता होगा। अहमक पागल आदमी होगा। तीसरा बिल्कुल बूढ़ा आदमी होगा। और एक वो होगा। वो लोग हैं जो ऐसे जमानों में गुजरे हैं जिनमें कोई पैगंबर या फिर यानी
एक तो वो जमाना है कि जिसमें कोई नबी नहीं आया या फिर उसकी तालीम मौजूद ना थी। यानी आज इस्लाम की तालीम मौजूद है। तो जिसके पास नहीं पहुंची वो भी उज़र लेके जाएगा। जिसके पास पहुंच गई वो नहीं समझ सकता वो भी उज़ लेके जाएगा। इसीलिए मैंने आगाज़ में ये बात की थी कि हम मुसलमानों के ऊपर बाइंडिंग है। हम फंस जाएंगे रोज़ कयामत का। हो सकता है कि अल्लाह ये बोले कि तुम्हारे पास सारी चीजें मौजूद थी। तुमने जाके दूसरे को क्यों नहीं पहुंचाई? और आखिर में होगा क्या? आखिर में होगा यही कि
परवरदिगार कहेगा कि उनकी तरफ एक पैगाम भेजेगा और कहेगा कि जहन्नुम में चले जाओ। अल्लाह की कसम जिसके हाथ में मेरी जान है अगर वह फरमाबरदारी कर ले और जहन्नुम में कूद पड़ेंगे तो जहन्नुम की आग उन पर ठंडी हो जाएगी और सलामती वाली हो जाएगी और रिवायत में यह है कि जो कूद पड़ेंगे उन पर तो सलामती है और ठंडक हो जाए ठंडी हो जाएगी वो आग और जो रुके रहेंगे अल्लाह की बात नहीं मानेंगे हुकुम की अधूली करेंगे तो क्या होगा उनको घसीट कर जहन्नुम में डाल दिया जाएगा वन टू फुटनोट हसन टू
सही और भी दीगर भी रेफरेंसेस यहां पे मौजूद है ये एक हदीस फिर इसके बाद दो फिर तीन फिर आप अगले सफे में जाएंगे तो अली भाई इंशा्लाह ताला और हदीस आपको मिलती चली जाएंगी माशा्लाह इबने कसीर ने हम पर बहुत आसान मरहला कर दिया जाए देखें सारे जवाबात मिल जाएंगे जी अली भाई अब बोलिए जी भाई बिल्कुल भाई आप कब कब लाइव करते हैं आपका टाइम क्या है भाई मेरे लाइव का सिर्फ एक ही टाइम है मैं सैटरडे को आता हूं। पाकिस्तानी टाइम के हिसाब से रात 9:00 बजे। इंडिया टाइम के हिसाब से रात
के 9:30 बजे। मैं सिर्फ एक ही दिन लाइव आता हूं। इसके अलावा एज आई सेड कि मैं प्राइवेट सेशन करता हूं या प्राइवेटली लोगों को डील कर रहा होता हूं पूरे हफ्ते के अंदर। तो आप ईमेल पे मुझसे राब्ता कर लें। मैं ये नहीं कह रहा कि भाई मुझे व्यूज चाहिए लाइव ही आओ। मैं तो बस चाह रहा हूं कि हक पहुंच जाए। तो किसी भी दिन कर लेंगे। अगर आपको लाइव ही आके करना है तो किसी दिन आपके लिए लाइव भी कर देंगे। वो भी कोई इशू नहीं है। हम आपके लिए स्पेशल लाइव भी
कर लेंगे। जी और अगर आपके साथ कोई मुसलमान भाई वगैरह हो जिनके एतराजात हो आपको लगता है कि आप जवाब नहीं दे पा रहे आप उनको लेकर आओ हमें कोई इशू नहीं है अगर कोई अपनी आइडेंटिटी को रिवील नहीं कर रहा अगेन आई एम रिपीटिंग आई टोटली अंडरस्टैंड कि लोगों के साथ परेशानियां होती है नॉट जस्ट बिकॉज़ कि मुसलमान है तो मुसलमान उसको परेशान करता है। नॉन मुस्लिमों में भी हमें पता है कि कितनी परेशानियां होती हैं। अभी एक भाई ने मुझे अपने फोटो वगैरह भेजे थे जो फिलीपाइन में होते हैं। वह पहले एक क्रिश्चियन
थे। जुडिज्म में गए। वहां से इस्लाम के दामन में आए। अल्हम्दुलिल्लाह इस्लाम के आलिम बनकर वो फिलीपीन के अंदर अब इस्लाम का पैगाम पहुंचा रहे हैं और उनको कॉल्स आ रही है और उनको थ्रेट आ रहे हैं और वो उस चीज को बर्दाश्त कर रहे हैं। सो इट इज नॉट कि आप ये बोलो यार मुसलमान तंग करते हैं। भाई सब तंग कर रहे होते हैं। तो सिंपल थिंग इज मैं नहीं कह रहा कि अपने आप आइडेंटिटी को रिवील करें। लाइफ में आए मेरे पास। आई एम जस्ट सेइंग कोई अगर ऐतराज है, कोई सवाल है भाई
करेक्ट कर लो। सुन लो एक दफा बात हमारी। अच्छी लगे कबूल कर लो ना लगे कोई मसला नहीं है ताकि रोज़ कयामत सबके लिए आसानी हो जाए। जी अली भाई कुछ अगर कहना चाहते हैं तो आप कहिए इंशा्लाह वरना फिर हम क्लोज करते हैं। भाई एक और क्वेश्चन मेरा रहता है जो कि ओरिजिन ऑफ लाइफ को लेके साइंस कहती है प्रोकैरियोट यूकैरियोट और बनते बनते इवॉल्व होते होते अब हम यहां तक पहुंच गए हैं। पर जो हमने पढ़ा है जैसे हजरत आदम इस्लाम को पैदा किया गया। फिर अम्मा हवा जो हम हवा थी उनको पैदा
किया गया। तो इन दोनों में आपको कौन सी बेहतर चीज लग रही है जो आपके नॉलेज के मुताबिक यार एक तो मैंने ये बात कही यहां पर फिर से स्क्रीन पे ले आते हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़] अगर आप ये चार प्रिंसिपल को समझ ले ना तो आपको ये बात समझने में कोई मुश्किल नहीं होगी जो ये जो साइंस की जो थ्योरी है इवॉल्व होने की या एवोल्यूशन की वो आती है नथिंग क्रिएट्स समथिंग जो कि लॉजिकल इंपॉसिबल है। लॉजिकली इंपॉसिबल है। फ्लॉड है ये बिल्कुल एब्सर्ड है ये
आईडिया। बिल्कुल ही एब्सर्ट आईडिया है। पर साइंस ऐसे ही काम करती है। तो हम साइंस को क्रिटिसाइज नहीं कर रहे। हम उन चीजों को हम उन लोगों को क्रिटिसाइज कर रहे हैं जो कह रहे हैं कि यार ये जो एवोल्यूशन जो है ये सही है। गलत है। आपको साबित करना होगा कि नथिंग से कोई चीज हो सकती है। नंबर वन। नंबर टू। इस्लाम ये नहीं कहता के हजरत आदम से पहले इंसानों जैसी मखलूकात इस जमीन पर मौजूद नहीं थी। इस्लाम ये बिल्कुल भी नहीं कहता। ठीक है। अब मुझे बस शोर नहीं है कि मेरे एडिटर
ने चैनल पर वो वीडियो अपलोड कर दी है या वीडियो अपलोड नहीं किया। आई गेस कि उसने चैनल पर अभी अपलोड नहीं की है वीडियो। तो इंशा्लाह ताला आज या कल तक इंशा्लाह उसको चैनल पर आ जानी चाहिए। जिस पे हमने इस पर गुफ्तगू की है कि इस्लाम का जो क्लेम है वो ये है कि हजरत आदम से पहले इंसानों की तरह दिखने वाली और भी मखलूकात इस जमीन पर मौजूद थी। डेफिनेटली मौजूद थी। मेरे पास अभी रेफरेंसेस यार जरा सा टाइम लग जाएगा इफ यू अलव मी तो वरना मैं आपको रेफरेंसेस निकाल के वो
दिखा भी दूं। ठीक है? पर चल उसको बाद के लिए रखते हैं। अभी वीडियो आ जाएगी। आजकल में आ जाएगी वो इंशाल्लाह ताला चैनल पे देख लीजिएगा। तो इंसानों से पहले इंसानों की तरह दिखने वाली मखलूकात मौजूद थी। बिल्कुल मौजूद थी। हमारे पास कुरान की आयत मौजूद है। हमारे पास हदीस मौजूद है। इस पर अगेन इमाम बाकर इमाम जाफर सादिक इमाम अली रसूल खुदा सल्लल्लाहु अल वसल्लम कुरान की आयात सूर बकरा की आयत नंबर आप 30 देख लें कि जिसमें फरिश्तों ने दावा ये किया था कि ये तो खून रेजी करेंगे। इल्म गैब तो था
नहीं। उन्होंने कैसे कहा क्योंकि अल्लाह ताला ने दिखलाया उनको जो हजरत आदम से पहले जो इंसानों की तरह दिखने वाली जो थी वो इंसान एक्सजेक्टली नहीं थे जो इंसानों की तरह दिखने वाली जो थी मखलूकात उनके दो नाम आए हमारे पास एक निसनान नाम आया है उसका एक खन्नास नाम आया है ठीक है वो थे जमीन के ऊपर और वो लाखों सालों से थे जमीन के ऊपर फिर अल्लाह ताला ने उनको खत्म किया है यहीं से [गला साफ़ करने की आवाज़] सॉरी भाई एक और क्वेश्चन पैदा हुआ कि उनको खत्म करने की क्यों जरूरत बनी
बनी हमें डायरेक्ट क्यों नहीं पैदा किया गया मतलब ऐसा ही क्यों पैदा नहीं किया गया क्योंकि हम एक अलग रेस है ना बिल्कुल बिलकुल अब वो देखो फिर वही वाली बात हो जाती है कि अल्लाह ने हर चीज में क्यों क्यों क्यों क्यों क्यों भाई वो इनफिनिट बीइंग है तो जब वो इनफिनिट बीइंग है तो उसकी मसलहत भी इनफिनिट है तो उसका हर क्यों का मैं जवाब नहीं दे सकता हां जितना क्योंकि उसने क्यों किया है तो या मुझे कुरान चाहिए या मुझे अहदीस चाहिए तो जो अहदीस के अंदर इसका जवाब मौजूद है वो ये
मौजूद है क्योंकि हजरत आदम की जब अल्लाह ताला ने खिलकत की थी तो वो उनसे नहीं की है हजरत आदम को परवरदिगार ने डायरेक्ट मिट्टी से बनाया है और वो क्यों बनाया है मिट्टी से मे बी द वन ऑफ द रीज़ इस क्योंकि इतना आकिल बनाना था इतना अकलमंद बनाना था तो इसीलिए उनसे अलग बनाया है क्योंकि हमसे पहले जो थे इंसान की तरह दिखने वाले कि जिनके फॉसल रिकॉर्ड्स वगैरह मिलते हैं वो इंटेलेक्चुअली हमारी तरह नहीं थे उनकी अक्लें बहुत कम थी हो सकता है कि खुदा ने उनको जिस भी मटेरियल से बनाया हो
चाहे मट्टी से या किसी और चीज से तो वो उस लेवल पर नहीं हो के जिस लेवल पर अल्लाह ताला चाहता हो तो अल्लाह ने उनको उस तरह से बनाया उनको खत्म और फिर हजरत आदम को बनाया। पर हजरत आदम क्या उनकी औलाद में से है या वहां से इवॉल्व हुए है? नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। वो अल्लाह ताला ने मिट्टी से बनाया है। भाई जब जब हमें बनाया जा रहा था तो अल्लाह ताला कहते हैं अल्लाह ताला फरमाते हैं शैतान से कि सजदा करो। मतलब ये जो इंसान है इन्हें सजदा करो। तो सजदा
तो सिर्फ अल्लाह ताला के लिए है। तो यहां पे जो आवाज आ रही है भाई? सूर अल आवाज आ रही है। सूर अलहमद के अंदर हम कहते हैं इक मतलब [संगीत] जी जी भाई मतलब अली भाई मतलब नब नस्ताईन कहते हैं मतलब ऐ मेरे अल्लाह मुझे सीधा रास्ता दिखा नहीं नहीं मुस्तकी नहींस्त हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझ से मदद मांगते हैं नाउ क्वेश्चन इस मदद मांग किस चीज में रहे हैं भाई और ये जो हम इबादत कर रहे हैं ये नमाज रोजे की बात हो रही है भाई हम रसूल खुदा के लिए
जब हम गवाही देते हैं हम क्या कहते हैं जब किसी को हम कलमा पढ़ाते हैं तश के अंदर जी मेरा क्वेश्चन मेरा क्वेश्चन ये था कि जो सजदा है वो तो सिर्फ अल्लाह ताला के लिए है ना इंसान के लिए तो सजदा यही मैं यही अर्ज कर रहा हूं मेरे दोस्त मैं यही अर्ज कर रहा हूं मैं यही अर्ज कर रहा हूं जब हम कहते हैं ना अशद इलाहा इल्लल्लाह व अशद अन मोहम्मदन अबहु व रसूल हम पहले गवाही ये देते हैं कि वो अल्लाह के बंदे हैं ये जो अब है अरबी जबान के अंदर
अब का मतलब क्या होता है अब का मतलब होता है गुलाम [संगीत] ठीक गुलाम का मतलब क्या होता है कि जिसके पास अपनी कोई अथॉरिटी नहीं है कोई अथॉरिटी नहीं है जो मालिक ने कहना है वही करना है। तो ये हम रसूल खुदा के हवाले से हम गवाही देते हैं कि रसूल खुदा ने कोई काम अपनी मर्जी से नहीं किया जिंदगी के अंदर। जो अल्लाह ने कहा है वही किया है। ठीक है? वही कुरान ने तस्दीक भी कर दी। अनिल हवा इसने अपने हवा से कुछ भी नहीं किया। इसने अपनी मर्जी से कुछ भी नहीं
किया। हमने जो उसको कहा वो वो करता चला गया। ठीक है? तो हम इस चीज की गवाही देते हैं। तो जब हम कह रहे हैं कि इया का नाबूद इसका मतलब यह नहीं है कि मैं बस नमाज रोजा जब करूंगा तेरे लिए करूंगा। नो इसका मतलब ये है कि मैं तेरी बंदगी करूंगा। तू जो बोलेगा मैं वो करूंगा। नंबर वन व इया का नस्तन मैं जो मदद मांगूंगा वो किस चीज में मदद मांगूंगा? ये जो मुझे तेरी बंदगी करनी है ना सुबह शाम जो मुझे तेरी बंदगी करनी है। मैं तेरे से मदद मांग रहा हूं।
इसमें भी मुझे तेरी बंदगी भी कैसे करनी है? ये भी तू ही बताएगा ना सिर्फ मैं तेरी बंदगी करूंगा। यह बंदगी कैसे करनी है? इसमें भी मेरी मदद तू करेगा। अब आ जाओ शैतान वाले केस में। शैतान के केस में हुआ कि अल्लाह ने कहा कि भाई जिसने मेरी बंदगी करनी है वो सजदा करेगा आदम को। व्हिच मींस के आदम के आगे अपनी ओबिडियंस शो करनी है। ठीक है? वरना हम जो फिजिकल सजदा कर रहे हैं वो फिजिकल सजदा फरिश्तों पे अप्लाई नहीं होता। क्योंकि फरिश्तों फरिश्ता जो है वह नूरी मखलूक है। हम मादी हैं।
हम सजदा कर सकते हैं। फरिश्ता कैसे सजदा करेगा? वो नूरी मखलूक है। ठीक है? अब वो सजदे की फॉर्म जैसी भी रही हो। परवरदिगार ने कहा कि जो मेरी बंदगी करेगा वो सजदा करे। ठीक है? शैतान ने कहा इब्लीस ने कहा कि वो सजदा नहीं करता। उसने यही क्लेम किया था। उसने कहा था कि ए मेरे खुदा मैं पूरी जो तेरी कायनात है ना हर जगह मैं तुझे सजदा करूंगा। हर जगह जाऊंगा हर जगह सजदा करूंगा। मैं आदम के आगे सजदा नहीं करूंगा। यानी मैं तेरे को तो कह रहा हूं कि यस यू आर माय
लॉर्ड। मैं तेरे आगे तो ओबिडियंस करूंगा। मैं आदम के आगे अपनी ओबिडियंस शो नहीं करूंगा। मैं ये नहीं करूंगा। अल्लाह ने जवाब में ये कहा था कि मुझे तेरी इबादत नहीं चाहिए। कि जो तू अपनी मर्जी से करेगा। अगर इबादत करनी है तो मैं बताऊंगा। तो अगर अल्लाह कह दे कि भाई तुम्हें सजदा करना है तो हमें सजदा करना है। अगर अल्लाह बोले सजदा नहीं करना तो फिर सजदा नहीं करना। तो ये जो क्या करना है, क्या नहीं करना, कब करना है, कब नहीं करना यह हमें अल्लाह बताएगा। हम डिसाइड नहीं करेंगे। अगर हम डिसाइड
करेंगे तो हम उसकी बंदगी नहीं कर रहे। वो ही बताएगा कि क्या करना है, कैसे करना है, किस तरह से करना है, कितना करना है, कितना नहीं करना। अगर उसने कहा कि वज़ू में चेहरा धोना है तो वो बताएगा चेहरा कितना धोना है, किस तरह से धोना है, कितनी दफा धोना है। मैं अपनी तरफ से फनकारी नहीं दिखाऊंगा। अच्छा चेहरा धोना है और मेरी मर्जी है। मैं एक दफा धो लूं, दो दफा धो लूं, 300 दफा धो लूं। मेरी मर्जी ना धोना ही तो है। मैं ये नहीं कर सकता। फिर क्या होगा? मैं नस्तईन के
दायरे से बाहर निकल जाऊंगा। मैं उसके नाबूतों के दायरे से बाहर निकल जाऊंगा। फिर यानी मैं जबानी तौर पे कह रहा हूं। मैं अमल ही नहीं कर रहा। सो सादे अल्फाज में अगर मैं जवाब दूं तो भाई वो फिजिकल सजदा नहीं था जो हम सोच रहे हैं। वहां पर सजदे से मुराद ओबिडियंस शो करनी थी। ये एक्सेप्ट करना था कि आदम जो है वो हमसे ज्यादा सुपीरियर है। ये चीज थी। जी भाई जी भाई बिल्कुल ठीक है। भाई और भी डिस्कशन होती रहेगी क्योंकि अब तो टाइम हो गया। जी इंशा्लाह इंशा्लाह इंशा्लाह जितने चीजें समझाई
गई है कोशिश कीजिए बिलखसूस वजूद खुदा के ऊपर जो दलाइल है उस पर खुद को महकम करें इस्लाम ना कहता है ना रसूल खुदा ने कहा ना कुरान का यह दावा है कि भाई सिर्फ अल्लाह को मान लो बिना एविडेंस के ये बिल्कुल एक बीमारी सी चीज है पता नहीं क्यों ये बीमारी आ गई है कुछ मुसलमानों के अंदर वो इस चीज को लेके चल रहे हैं कि हमें बस ब्लाइंडली फॉलो करना है इंशाल्लाह कोशिश कीजिए मेहनत कीजिए 20 मिनट से ज्यादा नहीं लगते दोस्त इंशा्लाह एक दफा आप इसमें मजबूत हो जाए तो फिर आप
देखेंगे कि आपको ज्यादातर मैं आपको बता रहा हूं। फिर आप जब नमाज भी पढ़ेंगे ना आपको मजा आएगा। आप मां-बाप की खिदमत भी करेंगे ना आपको मजा आएगा। एक अलग ही आपको खुशी महसूस होगी क्योंकि आपको पता चल रहा होगा मैं किस खुदा की इबादत कर रहा हूं। इंशा्लाह तो आज के लिए फिर इतना ही। अली भाई बस राब्ते में रहिएगा। मैं एक बात ऐड करना चाहता हूं भाई। जी जी जी के हमारा मकसद अल्लाह ताला को मानना भी है और अल्लाह ताला को जानना भी है। इसी वजह से मैंने इतनी डिस्कशन की है। बाकी
इंशा्लाह डिस्कशन होती रहेगी। इंशा्लाह मेरी तरफ से अगर कोई गलती हुई हो तो मैं आपसे माज़रत चाहता हूं। अगर आपको कहीं पे महसूस हुआ हो कि मैंने जोर जबरदस्ती की या कुछ भी की तो उसके लिए माज़रत चाहता हूं। बाकी कनेक्टेड रहिएगा। इंशाल्लाह ताला जो बस में हुआ करने की कोशिश करेंगे। तो बाकी भाइयों से भी यही गुजारिश है कि भाइयों डरने की जरूरत नहीं है। बात कर लिया करो। बात करने से चीजें समझ में आती है। मसले मसाइल हल होते हैं। आप जब डिस्कशन नहीं करेंगे तो अगर आपको कोई शिकायत है, ऐतराज है तो
वो रहेंगे और बाकी मेरे वो दोस्तान जो मुसलमान नहीं है अब वो कमेंट्स में आएंगे जैसे लाइव एंड हो जाएगी और इसके बाद वो माशा्लाह से मेरे कमेंट बॉक्स को भर देंगे। आपकी भी मोहब्बत है। क्या कर सकते हैं? आप लाइव नहीं आता बस कमेंट्स में ही आते हैं। तो बस आप यही कर लें। इंशाल्लाह जिंदगी रही तो फिर मुलाकात होगी। वरना दुआओं में याद रखना। अल्लाह हाफिज।