आदमी ने गांव में चोरी करके सारा सोना पेड़ के पास एक गड्ढा खोद के उसमें दबा दिया फिर जब आदमी ने कुछ दिन बाद गड्ढा खोदा तो सोना वहां नहीं था पुराने जमाने की बात है आगरा के शहर में एक मिरासी रहता था जो शहर की एक गरीब बस्ती में अपनी छोटी सी झोपड़ी में अकेला रहता था सिवाय खुदा के दुनिया में उसका कोई नहीं था वह सीधी सादी और ईमानदार जिंदगी जीता था हाजिर जवाबी उसकी खासियत थी और गाना बजाना उसका पेशा गाने बजाने से उसे कुछ पैसे मिल जाते तो वह खा लेता वरना
भूखा ही सो जाता इस बार वह दिन भर शहर की गलियों में गाना बजाता रहा लेकिन किसी ने उसे एक पैसा तक नहीं दिया रात को वह अपनी झोपड़ी में लौटा और भूखा ही सो गया दूसरे दिन फिर सुबह सवेरे गाना बजाने के लिए निकल पड़ा वह सारा दिन आगरा की गलियों में घूमता और अपने हुनर का प्रदर्शन करता रहा मगर उस दिन भी वह बेचारा खाली हाथ ही लौटा ना तो किसी ने उसे एक पैसा दिया और ना ही रोटी रात को जब वह अपनी झोपड़ी में आया तो भूख के मारे उसे नींद नहीं
आई वह सोचने लगा गाना बजाना ही तो मेरा पेशा है अगर इसमें भी मैं कुछ कमा नहीं पा रहा तो क्या फायदा आखिर लोग मेरे गाने में दिलचस्पी क्यों नहीं लेते इसी उधेड़बुन में उसे एक तरकीब सूझी उसने सोचा हमारे मुल्क का बादशाह बहुत रहम दिल और सखी है क्यों ना कल उसके दरबार में जाकर अपनी किस्मत आजमा माऊ हो सकता है बादशाह या उसके किसी दरबारी को मेरा गाना पसंद आ जाए और खाने पीने को कुछ मिल जाए यही सोचते-सोचते उसने रात गुजारी अगले दिन सुबह सवेरे उसने अपना ढोल उठाया और बादशाह के दरबार
की ओर चल दिया पैदल चलते-चलते दोपहर हो गई जब वह दरबार पहुंचा तो उसने दरबान से निवेदन किया कि बादशाह को इतना कर दी जाए कि एक मिरासी अपना गाना सुनाने के लिए हाजिर हुआ है दरबान ने बादशाह तक खबर पहुंचाई उस वक्त बादशाह का मिजाज अच्छा था चुनांचे उसने मिरासी को गाने की इजाजत दी मिरासी ने वहीं दरवाजे पर खड़े-खड़े गाना बजाना शुरू कर दिया बादशाह को उसका गाना इतना अच्छा लगा कि वह काफी देर तक सुनता रहा गाना सुनते सुनते बादशाह को अचानक याद आया मिरासी लोग तो बड़े मजाकिया और हाजिर जवाब होते
हैं क्यों ना इसकी हाजिर जवाबी भी आजमाई जाए बादशाह ने उसे अंदर बुलाया और उसके गाने की तारीफ करते हुए कहा अरे मिरासी तुम तो छुपे रुस्तम निकले इतना अच्छा गाना बजाना जानते थे तो पहले कभी क्यों नहीं आए तुम्हारा फन वाकई इनाम के काबिल है बादशाह ने मिरासी से पूछा मेरे सिर पर तो इतने घने बाल है लेकिन मेरी हथेलियों पर बाल क्यों नहीं है मिरासी जो पहले ही इनाम का लफ्ज सुनकर खुश हो चुका था चहक कर बोला हुजूर आप बहुत सखी हैं हर वक्त सखावत करते रहते हैं लोगों को इतना देते हैं
कि देते देते आपकी हथेलियों के बाल भी गायब हो गए बादशाह यह जवाब सुनकर बहुत खुश हुआ उसने कहा तुम्हारे गाने बजाने और हाजिर जवाबी ने हमारा दिल खुश कर दिया इसी खुशी में हम तुम्हें एक बंदर इनाम देते हैं बस उसी वक्त एक अच्छा खासा बंदर मिरासी के सामने लाया गया मगर इस शाही इनाम से मिरासी को कोई खुशी महसूस नहीं हुई वह सोचने लगा इस इनाम का क्या फायदा जो गम का कांटा बनकर चुभता रहे वह कभी बंदर को देखता कभी शाही महल को और कभी खुद को उसकी समझ में कुछ नहीं आ
रहा था वह भूखा प्यासा बादशाह के पास इसलिए आया था कि खाना खाने को कुछ मिल जाए लेकिन बादशाह उसके दिल का दर्द ना समझ सका इनाम भी दिया तो ऐसा बंदर जो ना तो उसकी भूख मिटा सकता था और ना ओढ़ने बिछाने के काम आ सकता था मिरासी का दिल कर रहा था कि वह बंदर बादशाह को लौटा दे और साफ साफ अपने आने का मकसद बता दे मगर वह बेचारा डरता था कहीं उसकी यह हरकत बादशाह को नागवार ना गुजरे इसलिए वह शाही इनाम को लेकर घर लौट गया घर आकर सोचने लगा बादशाह
ने मेरे साथ कितना बड़ा मजाक किया है मुझे तो अपने खाने के लिए दो वक्त की रोटी नहीं मिलती अब इस बंदर को खिलाने के लिए कहां से लाऊंगा अगर इस बंदर की बजाय बादशाह मुझे दो बोरी गेहूं चावल या चने वगैरह कुछ भी दे देते तो चंद दिन पेट भर कर खा लेता और कुछ दिन सुकून से जी भी लेता लेकिन अब तो यह बंदर जीना और भी हराम कर देगा यही सोचते सोचते मिरासी बेचारा रोने लगा जब रोकर उसका दिल कुछ हल्का हुआ तो उसने बंदर को पुछ काते हुए कहा बंदर भाई बादशाह
तो मेरे दिल का हाल नहीं समझ सके और ना मैं ही उन्हें बताने की हिम्मत कर सका अब तुम्हें मैं अपने दिल का हाल सुनाता हूं मेरी बात ध्यान से सुनना जो खुद भटक रहा हो वह किसी दूसरे को रास्ता क्या दिखाएगा मेरे पास अपने खाने के लिए कुछ नहीं है फिर तुम्हें कहां से खिलाऊ अब तुम्हें जरा हिम्मत से काम लेना पड़ेगा हम किसी अमीर गांव चलते हैं यह सोचकर मिरासी बंदर को लेकर दूसरे गांव में चला गया वहां पहुंचकर उसने बंदर से कहा मेरे पास एक फालतू ढोल पड़ा है वही मैं तुम्हें दे
सकता हूं मेरी तरह गां बजाकर तुम भी अपनी रोजी रोटी का इंतजाम करो खाओ पियो और जहां चाहे सो जाओ बस मेरे ऊपर बोझ मत बनो यह कहकर मेरासी अपनी झोपड़ी में गया और बड़ा सा ढोल लेकर आया उसने ढोल बंदर के गले में बांध दिया और उसके साथ एक थैला भी लटका दिया फिर बंदर को अपने साथ लेकर बाजार की ओर चल पड़ा बाजार में जाकर मिरासी ने शाही बंदर की रस्सी छोड़ते हुए कहा मियां बंदर खुदा हाफिज अब तुम खुद ही कमाओ और खुद ही खाओ बंदरों को नकल उतारने की आदत होती है
जैसे ही बंदर ने मिरासी की तरह ढोल बजाना शुरू किया तो डम डम की आवाज निकलने लगी लोगों ने बंदर को ढोल बजाते देखा तो बहुत खुश हुए खुशी-खुशी उन्होंने ढोल के साथ लटके थैले में पैसे डालने शुरू कर दिए आगे-आगे बंदर ढोल बजाता रहा और पीछे-पीछे लोगों का एक बड़ा हुजूम यह अजीब तमाशा देखने लगा गांव के एक जासूस ने यह तमाशा देखा तो वह फौरन आगे बढ़ा और मिरासी से कहने लगा तुम्हारे बंदर ने जो किया है इस के बदले में तुम्हें इस गांव से निकलवाया जा सकता है तुम इसे बंदरों का खेल
कहते हो ढोल बजाकर तुम अपने बंदर को नचा रहे हो मेरी मानो यह बेकार का काम छोड़ दो और कोई दूसरा काम ढूंढो इस काम में कोई पैसा नहीं है यह वक्त की बर्बादी है जो उम्मीद लेकर आए हो वह पूरी नहीं होगी मैं बड़े दुख से कहता हूं यहां से तुम्हें कुछ नहीं मिलने वाला हम मेहनत इसीलिए नहीं करते कि तुम जैसे भिखारियों पर अपना पैसा लुटाए वह नजर जमीन पर झुकाए सोच में डूबा हुआ था ना जाने कितने सालों से वह इस काम को कर रहा था कभी किसी ने उसका मजाक नहीं उड़ाया
था ही कभी उसे इस तरह दुत्का गया था लेकिन यह पहली बार हुआ कि जिस गांव में वह बड़ी उम्मीद लेकर आया था वहां उसे मुंह मांगी रकम मिलने की बजाय जहरीले जुमले सुनने को मिले इससे उसके दिल को गहरी ठेस पहुंची दुकानदार की बात का जवाब मिरासी ने बहुत ही शांति से देते हुए कहा मैं बहुत दूर से सफर करता हुआ यहां आया हूं क्या कुछ दिन यहां पर रह सकता हूं दुकानदार ने कठोरता से कहा नहीं तुम्हारे लिए हमारे गांव में रहने की कोई जगह नहीं है दुकानदार मिरासी को वहां से भगाने पर
तुला हुआ था इतने में एक गहरी रोबदार आवाज गूंजी ठहर जाओ ऐसा किसी के साथ नहीं किया जाता क्या इस गांव का यही रिवाज है कि यहां किसी मेहमान को ठहरने नहीं दिया जाता तुम इसे क्यों यहां से निकाल रहे हो यह आवाज गांव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति की थी जिन्हें सब अल्लाह वाले बाबा कहते थे मिरासी हैरत से उन्हें देखने लगा बाबा की उम्र लगभग 90 साल थी उनकी सफेद दाढ़ी उनके तजुर्बे की गवाही दे रही थी उनकी आवाज में मिठास और बातों में समझदारी झलक रही थी जो दुकानदार अभी तक मिरासी को दुत्कार
पर तुला हुआ था वह फौरन खामोश हो गया सबसे बड़ी बात जिसने मिरासी को चौका दिया वह यह थी कि अल्लाह वाले बाबा नबीना अंधे थे एक लाठी के सहारे वे मिरासी की तरफ बढ़ रहे थे ऐसा लग रहा था मानो उन्हें सब दिख रहा हो जबकि सच्चाई यह थी कि वे देख नहीं सकते थे अल्लाह वाले बाबा ने मिरासी से पूछा बेटा तुम कहां से आए हो और क्यों यहां ठहरना चाहते हो मिरासी ने अदब से जवाब दिया बाबा जी मैं दूर दराज के गांव से आया हूं मेरा काम अपने बंदर के जरिए लोगों
को खुश करना है और और बदले में कुछ रोजी कमाना है मैंने सुना था कि यह गांव दौलतमंद लोगों का है इसलिए यहां आया कि शायद मुझे अच्छा इनाम मिलेगा लेकिन यहां के लोग मेरी मेहनत की कदर नहीं कर रहे उल्टा मेरा मजाक उड़ा रहे हैं बाबा ने गहरी सांस लेते हुए कहा यहां के लोग दौलतमंद जरूर हैं लेकिन उनके दिल बहुत छोटे हैं यह अपनी दौलत को बांटने की बजाय उसे संभालने में लगे रहते हैं मगर बेटा यह तुम्हारा कसूर नहीं है तुम मेहनती हो और मेहमान हो इस गांव में जो भी मेहमान आए
उसे ठहरने का ठिकाना देना हमारी जिम्मेदारी है इसके बाद अल्लाह वाले बाबा ने दुकानदार से कहा क्या हम इतने ही बेहिस हो चुके हैं कि अपने मेहमान को धक्के देकर निकालें क्या यही हमारी रिवायत है दुकानदार शर्मिंदा होकर सिर झुका लिया और कहने लगा मैं गलत था आइंदा ऐसा नहीं होगा अल्लाह वाले बाबा ने मिरासी से कहा चलो मेरे साथ मैं तुम्हें ठहरने की जगह दूंगा लेकिन याद रखना यहां के लोगों को खुश करना आसान नहीं है पर अगर नियत साफ हो तो मंजिल आसान हो जाती है मिरासी के दिल में एक नई उम्मीद जागी
बाबा के साथ चलते-चलते वह एक छोटे से घर के सामने पहुंचा जो बहुत साधारण और झोपड़ी जैसा था मिरासी ने हैरानी से अल्लाह वाले बाबा से कहा यहां तो सब लोग अमीर हैं और बड़े-बड़े घर हैं पर आपका घर तो बहुत छोटा है है अल्लाह वाले बाबा मुस्कुराए और कोई जवाब नहीं दिया उन्होंने मिरासी को अपने घर के पास एक छोटे से कमरे में ठहरा दिया और कहा यह जगह तुम्हारे लिए है तुम यहां आराम करो और जितना दिल चाहे यहां रह सकते हो मिरासी ने शुक्र गुजारी के साथ कहा बाबा जी आपकी मेहरबानी मिरासी
ने सोचा कि वह इस गांव में किस बड़ी उम्मीद से आया था और यहां उसे क्या देखने को मिल रहा है वह सोचने लगा इस गांव में सबसे मेहरबान तो यह अल्लाह वाले बाबा हैं पर यह नबीना है देख नहीं सकते मुझे कुछ ऐसा करना होगा जिससे मेरा बड़ा फायदा हो मैं तो अच्छी नियत के साथ यहां आया था पर इन गांव वालों ने मेरे दिल को तोड़ दिया है उसने रात भर बहुत गहराई से सोचा उसे एहसास हुआ कि अगर इन कंजूस गांव वालों की जेब से कुछ निकालना है तो उन्हें ऐसा खेल दिखाना
होगा जो उनकी उम्मीदों से बिल्कुल अलग हो इसी दौरान उसकी नजर अपने बंदर पर पड़ी जो मासूमियत से उसे देख रहा था मिरासी के दिमाग में एक खतरनाक मगर चालाक तरकीब आई उसने बंदर से कहा मैंने आज तक तुम्हें सिर्फ कतब दिखाने के लिए तैयार किया है लेकिन अब वक्त आ गया है कि तुम्हारे हुनर को एक नए तरीके से इस्तेमाल किया जाए कल से तुम एक अजीब खेल खेलोगे लेकिन इस तरह की किसी को कुछ पता ना चले बंदर ने भी मिरासी की बात पर सहमति में सिर हिलाया मिरासी पूरी रात सो नहीं सका
और अपने बंदर को वह कतब सिखाता रहा सुबह हुई तो किसी ने उसका दरवाजा खटखटाया जब दरवाजा खोला तो नबीना अल्लाह वाले बाबा वहीं खड़े थे उन्होंने मिरासी से पूछा अब क्या इरादा है क्या तुम यहां रुकोगे या यहां से चले जाओगे मिरासी कुछ देर खामोश रहा और फिर कहने लगा आया तो कमाने की गरज से था पर जो सलूक मेरे साथ किया गया उसके बाद यहां रुकना बनता तो नहीं है लेकिन मेरा काम ही यही है कोशिश तो करूंगा अपनी रोजी रोटी छोड़कर यूं ही तो नहीं जा सकता अल्लाह वाले ने कहा ठीक कहते
हो चलो कर लो कोशिश मैं जरा नमाज पढ़ लूं मिरासी अपना सामान और बंदर के साथ बाजार में आ गया वहां घमा घमी थी और हलचल मची हुई थी उसने बाजार के करीब एक खुली जगह पर अपनी चटाई बिछाई और डुगडुगी बजाने लगा गांव के लोग जो कल के वाकए के बाद अल्लाह वाले के डर से संभल गए थे उस का खेल देखने के लिए जमा होने लगे बंदर ने कलाबाज यां दिखानी शुरू की जिससे बच्चे और कुछ बड़े हंसने लगे बच्चे हर कलाबाजी पर तालियां बजा रहे थे मिरासी ने धीरे से बंदर को इशारा
किया बंदर ने खेल-खेल में एक दुकानदार की जेब के पास पहुंचकर चुपके से उसकी जेब में हाथ डाला हैरत की बात यह थी कि दुकानदार को जरा भी शक नहीं हुआ क्योंकि बंदर अपनी हरकतों से सबको हंसा रहा था जब बंदर वापस आया तो उसके हाथ में एक छोटी सी सोने की चैन थी मिरासी ने फौरन उसे अपने सामान में छुपा दिया और खेल जारी रखा मिरासी ने बंदर को खास तरबियत दी थी कि वह हर चोरी को इस कदर चालाकी से करें कि किसी को पता ही ना चले और वह खेल का हिस्सा लगे
अब सुबह से शाम हो गई लोग जमा होते रहे और मिरासी और बंदर थक गए वे अपने कमरे में लौट आए रात को मिरासी ने अपने बंदर के साथ दिन भर का हिसाब लगाया और कहा आज का दिन कामयाब रहा लेकिन यह लोग बहुत चालाक हैं हमें अगले दिन कुछ नया करना होगा ताकि किसी को शक ना हो बंदर ने अपनी खास आवाज में जवाब दिया जैसे वह मेरासी के मंसूबे को समझ रहा हो मेरासी अपने खेल तमाशे दिखाने के साथ-साथ उस गांव में घूम-घूम कर यह भी देखता कि कौन शख्स किस काम में लगा
हुआ है अल्लाह वाले बाबा के बारे में उसने जान लिया था कि वे देख नहीं सकते और बस अल्लाह की इबादत में लगे रहते हैं बाकी लोग अपने-अपने काम में व्यस्त रहते थे यानी कोई किसी को ज्यादा रोकता टोकता नहीं था वह औरतें जिनके शौहर सुनार थे उनके पास एक से बढ़कर एक जेवर थे अल्लाह वाले के कहने पर मिरासी को इस गांव से बाहर तो नहीं किया गया और इसी बात से उसे छूट मिल गई थी एक दिन उसने फैसला किया कि आज वह बंदर का खेल तमाशा नहीं दिखाएगा बल्कि आराम करेगा ताकि गांव
वालों को उस पर कोई शक ना हो इसलिए वह पूरा दिन कमरे में बंद होकर अपने बंदर को नए-नए जहर सिखाता रहा फिर उसने सोचा बाहर निकल कर टहल हूं जब वह कमरे से बाहर निकला तो देखा कि अल्लाह वाले बाबा दरख्त के नीचे बैठे तस्बीह पढ़ रहे थे उसने उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और सोचा उन्हें क्या ही नजर आएगा कि मैं कहां जा रहा हूं चलते-चलते वह उसी कंजूस सुनार की दुकान पर आ गया दुकान पर बड़े-बड़े सोने के देवर लटक रहे थे मिरासी के दिमाग में एक और तरकीब आई उसने सोचा
कि अबकी बार वह अपने बंदर के जरिए इस कंजूस और सख्त दिल दुकानदार को सबक जरूर सिखाएगा जिसने पहले उसे गांव से निकालने की कोशिश की थी रात को सब सोचकर वह सो गया दोपहर के वक्त जब दुकानों पर ग्राहकों का रेला कम था मिरासी अपने बंदर के साथ उसी कंजूस दुकानदार की दुकान के पास पहुंचा मिरासी ने दुकान के बाहर डुगडुगी बजानी शुरू की और बुलंद आवाज में लोगों को बुलाने लगा आज देखो मेरे बंदर का ऐसा खेल जो पहले कभी नहीं देखा होगा सब आ जाओ दुकानदार जो अपनी दुकान के अंदर बैठा हिसाब
किताब कर रहा था झुंझला करर बाहर निकला और बोला तुम यहां क्या कर रहे हो मैंने कहा था ना कि यहां से चले जाओ मिरासी ने मासूमियत से कहा अल्लाह वाले बाबा ने मुझे ठहरने की इजाजत दी है और मैं सिर्फ अपना काम कर रहा हूं अल्लाह वाले बाबा बाबा का नाम सुनकर दुकानदार ने उसे दोबारा नहीं टोका बंदर ने दुकान के बाहर खेलना शुरू कर दिया कभी वह दरवाजे के पास छलांग लगाता कभी दुकान के तून पर चढ़ जाता लोग हंसते हुए जमा होने लगे दुकानदार बेजा गुस्से में दिख रहा था लेकिन वह बंदर
की हरकतों से मुतासिर हो रहा था वह बंदर को तमाशा करते देख जोर-जोर से हंस रहा था यही तो मिरासी और बंदर का फन और कमाल था वह किसी की भी तवज्जो अपनी तरफ खींच ही लेते थे इसी दौरान बंदर ने एक नया कतब दिखाने के बहाने दुकान के अंदर छलांग लगाई और सोने के जेवरात के पास पहुंच गया दुकानदार को लगा यह महज खेल का हिस्सा है लेकिन बंदर ने चालाकी से सोने का एक जेवर उठा लिया और तेजी से वापस बाहर आ गया लोगों ने बंदर का खेल देखकर खुश होकर दो-तीन सिक्के मिरासी
की झोली में डाल दिए लेकिन दुकानदार ने एक बार फिर कंजूसी दिखाते हुए कहा मेरे पास अभी छुट्टे पैसे नहीं है कल दूंगा यह सुनकर मिरासी दिल ही दिल में तंजिया मुस्कुराया क्योंकि वह पहले ही दुकानदार की जेब और दुकान से काफी कुछ हासिल कर चुका था मिरासी ने अपना सामान उठाया और बंदर को लेकर अपने कमरे की तरफ बढ़ गया दरख्त के नीचे अल्लाह वाले बाबा अब भी तस्बीह पढ़ रहे थे कुछ सोचकर मिरासी उनके करीब आकर बोला आपका बहुत-बहुत शुक्रिया आप ना होते तो मुझे मेरा हक नहीं मिलता अल्लाह वाले बाबा ने उसकी
आवाज पर उसकी तरफ मुंह फेरते हुए कहा हां जो भी करना सफाई से करना तुम्हारा तजुर्बा ही काम आएगा मिरासी ने जवाब दिया अगर आपकी दुआ रही तो मुझे वह सब कुछ मिल जाएगा जो मेरी चाहत है आपने कुछ ना कहा वह मुस्कुराता हुआ कमरे में चला गया और दरवाजा बंद कर लिया रात को मिरासी ने अपनी गठरी खोलकर बंदर की जेब टटोली तो उसमें से सोने के सिक्के निकले उसने बंदर के सिर पर थपकी दी और कहा शाबाश तुमने बहुत अच्छा काम किया ऐसे ही मेरे सिखाए हुए हुनर पर अमल करते रहो कामयाबी ज्यादा
दूर नहीं है हम भी दौलतमंद हो जाएंगे इधर दुकानदार ने हिसाब किताब के लिए अपना संदूक खोला तो उसे पता चला कि एक सोने का जेवर और बहुत से पैसे गायब हैं क्योंकि वह एक-एक पैसा गिन करर रखता था इसलिए उसे सब समझ आ गया वह गुस्से में था और सोचने लगा कि शायद किसी ग्राहक ने चोरी की है लेकिन उसे मिरासी या बंदर पर शक नहीं हुआ क्योंकि बंदर ने तो उसे इस कदर घुमा दिया था कि वह समझ ही नहीं पा रहा था कि उसके साथ क्या चालबाजी की गई बंदर का असल खेल
यही था बेवकूफ बनाकर चोरी करना मिरासी को अब इस काम की लत लग गई थी कम वक्त में कीमती सोना उसके हाथ लग रहा था और इस काम में उसे बहुत मजा आ रहा था जब वह शराफत से काम करता था तो उसे पैसे नहीं मिलते थे लेकिन अब चोरी करके पैसे कमाने से उसकी जेब भरने लगी थी फिर भी चोर घबराता तो है ही कि चोरी का सामान पकड़ा ना जाए अब मिरासी को फिक्र इस बात की थी कि उसकी यह कमाई किसी के हाथ ना लग जाए उसने सोचा मैं इसको कहीं छुपा देता
हूं गांव के चारों तरफ जो घने दरख्त हैं उनमें से एक की जमीन खोदकर इस गठरी को गाड़ दूंगा जब गांव वाले सो रहे थे तो मिरासी एक घने दरख्त के पास गया और उसकी जमीन में अप पोटली यानी गठरी गाड़ दी फिर खुशी-खुशी गांव वापस आ गया बंदर का खेल अब चोरी में बदल चुका था लेकिन यह बात अभी तक सबसे छुपी थी सुनार की दुकान रोज खाली होती जा रही थी लेकिन मिरासी पर किसी को शक नहीं हुआ क्योंकि वह इतनी चालाकी से अपना फन दिखाता कि सब हंस हंस कर लूटपू हो जाते
वही लोग जो बेजार हो रहे थे अब उसके बंदर के आदि हो गए थे और इसी बात का वह भरपूर फायदा उठाता रहा वैसे तो उस गांव में कोई भी गरीब नहीं था और हर कोई अच्छा खाता पीता था लेकिन एक दिन मिरासी ने देखा कि उस गांव के सबसे अमीर रईस की बीवी सुनार की दुकान पर सोना खरीद रही थी यह देखकर उसके अंदर लालच का तूफान उठ खड़ा हुआ उसने सोचा इस औरत के पास कितनी दौलत है इतना ज्यादा सोना खरीद रही है इसका शौहर तो सुनार से भी बड़ा व्यापारी होगा मुझे इसके
पास चोरी करनी चाहिए पर कैसे पहले इसकी खोज लगानी पड़ेगी जब उस औरत ने दुकान से सोना खरीद लिया तो वह अपने घर की तरफ चल दी मिरासी भी उसके पीछे-पीछे चलने लगा उसने देखा कि वह औरत एक खूबसूरत से घर में दाखिल हो गई मिरासी की आंखें लालच से चमक उठी उसने सोचा अगर यहां का माल मिल गया तो मेरी तो चांदी ही चांदी है फिर मैं यह गांव छोड़ दूंगा और ऐसी जगह गायब हो जाऊंगा कि यह लोग मुझे ढूंढ भी नहीं पाएंगे उसका बंदर उसके कंधे पर सवार था जब वह घर से
बाहर निकला तो उसने देखा कि दरख्त के नीचे अल्लाह वाले बैठे हैं पहले तो वह थोड़ा हैरान हुआ कि रात के इस पहर वे अपने घर को छोड़कर यहां क्यों बैठे हैं उसे वहम हुआ कि कहीं वे उसे देख तो नहीं रहे वह धीरे-धीरे चलता हुआ उनके पास आया और चारों तरफ हाथ हिलाकर अपनी तसल्ली की कि उसे देखा तो नहीं जा रहा अल्लाह वाले आंखें बंद की अपनी दुआ मांगते जा रहे थे और मिरासी की तरफ कोई त नहीं दी मिरासी ने चालाक मुस्कुराहट के साथ उन्हें देखा और वहां से चलता बना अब वह
उस औरत के घर के सामने पहुंच चुका था उसने बंदर को इशारा किया और कहा जाओ अपना काम करो उसने बंदर को वह सब करने के लिए कहा जो उसने उसे सिखाया था साथ ही उसे एक थैला भी दे दिया और कहा जितना माल तुम्हारे हाथ लग सकता है सब लूट कर लाना मेरासी को भरोसा था कि उसका बंदर पकड़ा नहीं जाएगा और ऐसा ही हुआ कुछ देर बाद बंदर उस खाली थैले में बहुत कुछ भरकर वापस आ गया मिरासी ने चारों तरफ देखा वहां कोई नहीं था वह शुक्र अदा करता हुआ बंदर को लेकर
कमरे में आ गया जब उसने थैला खोला तो उसकी आंखें खुशी से चमक उठी थैले में बड़े-बड़े सोने के हार थे बंदर ने इस बार बहुत बड़ा हाथ मारा था लेकिन मिरासी ने देखा कि बंदर उदासी से अपना सिर झुकाए खड़ा है जैसे किसी बात की शर्मिंदगी हो मिरासी ने उसकी पीठ पर हाथ फेरा और कहा तुमने हक अदा कर दिया देखना हमारी किस्मत जरूर चमकेगी मैं तुम्हें कितना फल खिलाऊंगा मिरासी ने बंदर से कहा यह थैला जाकर उसी दरख्त की जमीन में दफना आओ बंदर तो जानता ही था कि उसका मालिक कहां माल का
खजाना छुपाता है बस उसने वैसे ही अमल किया और काम करके वापस आ गया आज वह मिरासी बहुत खुश था उसने अपनी ख्वाहिश पूरी कर ली थी इस रात उसे बड़ी चैन की नींद आ थी और वह सोने के लिए लेट गया उसने पक्का फैसला कर लिया था कि वह कल सुबह ही यहां से निकल जाएगा बिना किसी से मिले दिल में चोर जो था लेकिन सुबह सवेरे शोर से उसकी आंख खुल गई दरवाजा खोलकर फौरन बाहर आया तो लोगों की भीड़ जमा थी और कुछ औरतें रो रही थी अचानक उसे याद आया कि रात
में जो कुछ उसने किया था कहीं उसी वजह से तो यह तमाशा नहीं हो रहा औरत उसी आदमी की बीवी थी उसका शौहर उसे दिलासा दे रहा था पर चोर को कोसते हुए वह कह रही थी अल्लाह गारत करे उसको जिसने मेरे जेवर चुराए मिरासी मासूम बनकर लोगों से पूछने लगा यह औरत क्यों रो रही है तो एक आदमी ने मिरासी को बताया इसका शौहर तो बहुत बड़ा ताजिर है घर से बाहर गया हुआ था और औरत घर में अकेली थी बस कोई चोर आया और रात के अंधेरे में सब कुछ चुरा लिया अभी कुछ
दिनों पहले इसने जेवर खरीदे थे वह सब भी गायब हैं ना जाने कौन चोर है जो हमारे गांव में घुस गया है मिरासी ने अपनी मक्कारी से लोगों को बहलाने की कोशिश की चोरी का जिक्र सुनकर वह ऐसे हैरान होने का नाटक करने लगा ताकि खजाना निकालकर फरार हो सके जब उसने दरख्त के पास जाकर देखा तो जमीन पहले से ही खोदी हुई थी और खजाना गायब था मिरासी के पैरों तले से जमीन निकल गई अब वह समझ चुका था कि किसी ने उसकी चोरी का राज जान लिया है वह खौफ जदा हो गया अगर
यह खबर गांव वालो तक पहुंची तो वे उसे जिंदा नहीं छोड़ेंगे पर अब खजाना किधर है किसी को यह तो मालूम नहीं था कि चोरी करके गहने यहां छुपाए गए अब वह फैसला नहीं कर पा रहा था कि गांव वापस जाए या गांव को छोड़कर आगे बढ़ जाए क्योंकि उसके हाथ खाली थे सारे की किराए पर किसी ने पानी फेर दिया था पर किसने वह हिम्मत करके गांव लौटा और देखने लगा कि भीड़ लगी है लोग परेशानी में अभी तक वहीं खड़े हुए थे उनसे तो कुछ पूछ नहीं सकता था सोचने लगा वाकई किसी ने
इसे चोरी करते हुए देख लिया था या यह किसी और की चाल है मिरासी ने दिल में एक नई तरकीब सोची और गांव वालों को यकीन दिलाने के लिए अपना खेल जारी रखा उसने तय किया कि वह अपने कीमती माल को गायब करने वाले को तलाश करेगा लोग इतने फिक्र मंद थे कि उन्होंने देखा भी नहीं कि मिरासी गांव से चला गया था और वापस भी आ गया मिरासी अपनी बेचैनी और घबराहट को छुपाने के लिए गांव वालों के दुख दर्द में शामिल होने का नाटक कर रहा था अचानक अल्लाह वाले हुजूम के बीच से
आगे बढ़े अल्लाह वाले ने कहा ऐ गांव वालों इस मिरासी का हुनर तो तुम सबने देखा है मैं नबीना हूं लेकिन मैं भी जानता हूं कि किस तरह बंदर खेल तमाशा दिखाया करता था चलो मैं भी तुमको एक खेल दिखाता हूं अल्लाह वाले ने कहा मिरासी की सांस तो ऊपर की ऊपर रह गई पर लोग नासमझी की कैफियत में अल्लाह वाले को देख रहे थे अल्लाह वाले ने अपनी छड़ी जमीन पर मारी और बुलंद आवाज में कहा यह चोर ज्यादा दूर नहीं बल्कि यही हमारे दरमियान में है लेकिन याद रखो लालच का अंजाम हमेशा रुसवाई
होता है मिरासी के दिल की धड़कन और बढ़ गई अल्लाह वाले ने कहा चलो गांव से बाहर फिर उस दरख्त की तरफ इशारा किया और कहा यह वह जगह है जहां चोर ने अपनी हराम कमाई छुपाई है अब अल्लाह का कर्म देखो सच्चाई खुद को जाहिर करेगी अल्लाह वाले ने दुआ के लिए हाथ बुलंद किए और एक अजीब बात हुई अचानक बंदर बेकाबू होकर उस दरख्त की तरफ भागा और जमीन खोदने लगा हुजूम हैरत से देख रहा था कुछ लम्हों बाद बंदर ने जमीन से वह गठरी निकाली जो मिरासी ने दफन की थी अल्लाह वाले
ने हुक्म दिया बंदर इस गठरी को खोलो और जो सामान अंदर है उसे बाहर निकाल कर दिखाओ अल्लाह वाले के हुक्म पर जैसे ही बंदर ने उस थैले को उलटा बहुत सारे सिक्के और सोना बाहर निकल आया अब तक मिरासी ने जो चोरी करवाई थी वह सारा सामान उसके अंदर था मिरासी के चेहरे का रंग उड़ गया अल्लाह वाले ने गहरी नजर से मिरासी की तरफ देखा और कहा यही वह चोर है जो अपने फन को धोखा धड़ी के लिए इस्तेमाल करता रहा है यह शख्स गांव वालों के भरोसे का कातिल है बंदर के खेल
के पीछे यह चोरी करवाता था मिरासी के झूठ का पर्दा फाश हो चुका था मिरासी ने बिगड़ते हुए कहा आपको कैसे पता कि मैं ही चोर हूं और मैंने ही यह गठरी इस दरख्त के पास रखी थी आप तो देख नहीं सकते अल्लाह वाले ने कहा अगर तूने कुछ किया ही नहीं तो तेरे बंदर ने मेरे हुक्म पर इसी दरख्त के पास से यह गठरी क्यों निकाली मिरासी शोर मचाते हुए फौरन बोला गांव वालों यही अल्लाह वाले चोर हैं उन्होंने ही बंदर से वह सोना निकलवाया मुझे तो इस बात का पता भी नहीं है अल्लाह
वाले जलाल में थे लेकिन उससे पहले कि वह कुछ कहते वह बंदर अल्लाह के हुक्म से बोलने लगा ऐ बदबख्त इंसान जिस इंसान ने तुम्हें यहां मेहमान ठहराया तुम्हें इज्जत दी अपने घर में जगह दी उसे चोर कहते हो यह चोरी तुमने मुझसे करवाई है क्योंकि तुम्हारी भूख खत्म नहीं हो रही थी बंदर ने कहा गांव वालों सुनो इस दुकानदार से बदला लेने के लिए इस मिरासी ने मुझसे चोरी करवाई पहले उसकी दुकान से सोना चुड़वाया फिर उस औरत के घर से सफाई करवाई मैं तो वही करता हूं जो मेरा मालिक कहता है पर अल्लाह
ने मुझे जुबान दी क्योंकि तुम एक अल्लाह वाले की शान में गुस्ताखी कर रहे थे अब झूठ सामने आ चुका है लोग गुस्से में मिरासी की तरफ बढ़ने लगे लेकिन अल्लाह वाले ने हाथ उठाकर सबको रोक दिया उन्होंने कहा यह शख्स अपने लालच के सबब शैतान के रास्ते पर चल निकला पर तुम लोग क्या कर रहे थे तुम लोगों ने भी तो कंजूसी दिखाई अल्लाह ताला ने तुम्हें नवाजा था पर तुमने इसकी मेहनत पर कभी अपनी जेब खाली नहीं की अरे कोई यहां पसीना बहाकर अपना काम कर रहा था और सबसे बड़ी बात यह बेजुबान
जानवर जो तुम्हें खुश कर रहा था हंसा रहा था तुमने उसके लिए भी पैसा खर्च नहीं किया अल्लाह वाले का इशारा उस दुकानदार की तरफ था उसने भी वह रास्ता चुना जो उसे बुराई की तरफ ले गया और उसने चोरी कर ली उसने बंदर को भी चोर बना दिया कसूरवार तुम सब हो मिरासी अल्लाह वाले के कदमों में गिरकर माफी मांगने लगा गांव वाले भी शर्मिंदा थे उन्होंने कहा हां हमने भी गलत किया अल्लाह ने हमें इतनी दौलत दी थी लेकिन हमने अपनी दौलत को अल्लाह की राह में खर्च नहीं किया अल्लाह वाले ने सारा
माल उनके मालिकों के हवाले कर दिया फिर उन्होंने मिरासी से कहा जिस तरह तुम भटके और वह गुनाह तुमने जो अपने बेजुबान बंदर से करवाया वह अल्लाह को नाराज करता है मिरासी ने वादा किया कि वह अपनी जिंदगी में दुरुस्त रास्ता चुनेगा अल्लाह वाले ने उसे माफ कर दिया गांव वालों ने उसे बहुत सा इनाम दिया जो उसकी मेहनत की कमाई थी और उसके बंदर का हक था मेरासी की मक्कारी का खात्मा हो चुका था वह गांव छोड़कर चला गया लेकिन उसके दिल में अल्लाह वाले की बातों ने एक नई रोशनी पैदा की नई उम्मी
के साथ वह आगे बढ़ गया