मैं अपनी स्कूल टीचर के घर ट्यूशन पढ़ने के लिए जाने लगा तो मुझे पता चला कि मेरी टीचर घर में अकेली रहती है टीचर 38 साल की जवान और बहुत खूबसूरत थी मैं 17 साल का हो रहा था मुझे अपनी टीचर बहुत पसंद थी सब बच्चे छुट्टी करके चले जाते लेकिन टीचर मुझे लेट में छुट्टी देती एक दिन टीचर ने मुझे किसी काम से बाहर भेजा वापसी पर बहुत तेज बारिश होने लगी मैं काफी भीग चुका था जब टीचर के घर पहुंचा तो मुझे ठंड लग रही थी मैंने टीचर से इजाजत मांगी तो उन्होंने कहा
कि चाय पी लो फिर घर चले जाना यह कहकर टीचर किचन में चाय बनाने चली गई मैं दिल ही दिल में सोचने लगा कि मेरी टीचर कितनी अच्छी है मेरा कितना ख्याल रखती है 10 मिनट गुजरे थे कि टीचर ने चाय टेबल पर रखी मैंने चाय पी ली लेकिन टीचर ने अपने लिए चाय ना बनाई थी मैंने उनसे घर जाने की इजाजत मांगी तो कहने लगी अभी थोड़ी देर बैठ जाओ जब बारिश कम होगी तो फिर चले जाना मैं टीचर की बात मानकर उनके बेडरूम में चला गया मेरे कपड़े गीले थे जिसकी वजह से मेरा
दिल नहीं कर रहा था कि मैं टीचर के बिस्तर पर लेट इतने में टीचर भी मेरे पीछे कमरे में दाखिल हो गई और मुझे खड़ा देखकर कहने लगी कि फिक्र ना करो मैं बिस्तर साफ कर लूंगी तुम आराम से लेट जाओ मैं जैसे ही बेड पर लेटा तो टीचर मेरे सामने कपड़े बदलने लगी मैंने शर्म से आंखें झुका ली जब आंखें खोली तो देखता ही रह गया टीचर ने छोटे-छोटे कपड़े पहने हुए थे वह धीरे-धीरे चलती हुई मेरे करीब आकर बैठ गई मैं पहली बार किसी औरत को ऐसी हालत में अपने इतने करीब देख रहा
था लेकिन तब मेरा मुंह खुला का खुला रह गया जब टीचर ने मेरे दोनों हाथ पकड़कर अभी बहुत तेज बारिश हो रही थी रात का अंधेरा काफी हद तक फैल चुका था मैं पूरी तरह बारिश में भीग चुका था मुझे अपने घर पहुंचने की भी जल्दी थी क्योंकि घर पर मेरी बीमार मां थी टीचर को किसी दूसरी टीचर के घर कुछ किताबें पहुंचा नहीं थी रास्ते पर टीचर का घर पहले पड़ता था और मेरा घर काफी दूर था इसीलिए मैं भीगते हुए टीचर के घर पहुंच गया मुझे अपनी टीचर बहुत अच्छी लगती थी वह मुझसे
बहुत मोहब्बत से पेश आती थी और मैं भी आसानी से उनसे अपने दिल की हर बात कह देता था वह भी अपने सारे काम मुझसे ही करवाया करती थी मैं टीचर के घर पहुंचा मेरे कपड़े पूरी तरह भीग चुके थे और मेरे होंठ ठंड से नीले पड़ रहे थे टीचर ने जब मेरी इतनी बुरी हालत देखी तो कहने लगी थोड़ी देर के लिए घर में आ जाओ और जब बारिश थोड़ी हल्की हो जाए तो फिर चले जाना मौसम बहुत खराब है तुम्हारा घर यहां से काफी दूर है टीचर के लहजे में मेरे लिए हमेशा की
तरह बहुत मोहब्बत थी मैंने टीचर को यह कहकर मना कर दिया कि मेरे मां-बाप मेरा इंतजार कर रहे होंगे टीचर कहने लगी नहीं उन्हें पता है तुम ट्यूशन पढ़ने आए हुए हो वह बिल्कुल भी परेशान नहीं होंगे लेकिन अगर तुम इतनी बारिश में अपने घर जाने के लिए निकलोगे तो मैं जरूर सारी रात परेशान रहूंगी इसीलिए बेहतर यह है कि तुम कुछ देर रुक जाओ मैं तुम्हें गरम-गरम चाय पिलाती हूं कुछ देर ठहर कर चले जाना चाय का नाम सुनकर मैं रुकने के लिए तैयार हो गया क्योंकि मुझे बहुत ज्यादा सर्दी लग रही थी टीचर
ने मुझे बैठने के लिए कहा और खुद मेरे लिए चाय बनाने चली गई मैं दिल ही दिल में सोच रहा था कि टीचर कितनी अच्छी है और मेरा कितना ख्याल रखती है मैं बहुत ही गरीब घराने से बिलोंग रखता था मेरी मां इसी वजह से दूसरे घरों में काम करके गुजारा कर रही थी हम एक किराए के घर में रहते थे और इतनी महंगाई में किराया चुकाना बहुत मुश्किल हो रहा था मैं एक जनरल स्टोर पर काम करने लग गया था लेकिन फिर जब मां को कुछ और घरों का काम मिल गया तो मां ने
जबरदस्ती मुझे एक सरकारी स्कूल में दाखिल करा दिया मैं सुबह स्कूल जाता और वापस आने के बाद जनरल स्टोर पर भी काम करता बहुत मुश्किल से मेरी पढ़ाई चल रही थी क्योंकि मैं स्कूल में भी ज्यादा ध्यान नहीं दे पाता था और मेरे हालात ने मुझे कमजोर कर दिया था मैं नौवीं कक्षा में था लेकिन उम्र में 17 साल का हो गया था और क्लास के सारे लड़कों से मैं बड़ा था इसीलिए बहुत से लड़के तो मेरा मजाक भी बनाते थे मैं ठीक तरह से पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहा था और इसीलिए मैं
टेस्ट में पूरी तरह फेल हो गया था मेरी टीचर ने मेरी मां को मिलने के लिए बुलाया और मेरी कमजोरी को सामने रखा तो मेरी मां ने उन्हें हमारे हालात से आगाह किया यह सुनकर मेरी टीचर कहने लगी कि मैं आपके बेटे को ट्यूशन पढ़ा दूंगी और पैसे भी नहीं लूंगी आपके बेटे का भविष्य का सवाल है मैं चाहती हूं कि शेखर पढ़ लिखकर किसी अच्छी जगह पहुंच जाए टीचर की यह बात सुनकर तो मां खुश हो गई क्योंकि मां चाहती थी कि मैं पढ़ लिखकर किसी अच्छी नौकरी पर लग जाऊं ताकि हमारे हालात सुधर
जाए जब मैंने यह बात सुनी तो मना कर दिया जो कि मैं जनरल स्टोर पर भी काम करता था टीचर कहने लगी तुम जनरल स्टोर का काम छोड़ दो और पढ़ाई के बाद मेरे छोटे-मोटे काम कर दिया करना मैं उसके बदले तुम्हें पैसे दे दूंगी इस तरह तुम्हारा नुकसान नहीं होगा मां ने फौरन हामी भर ली थी और अगले ही दिन से मैं ट्यूशन पढ़ने के लिए अपनी स्कूल टीचर के घर जाने लगा वहां जाकर मुझे पता चला कि मेरी टीचर अकेली रहती है काफी सारे बच्चे उनके पास पढ़ने के लिए आते हैं टीचर ने
मुझे बहुत मेहनत से पढ़ाना शुरू कर दिया और अगले ही टेस्ट में मैंने बहुत अच्छे नंबरों से पास किया मेरी मां मेरी पढ़ाई की तरफ से बिंदास हो गई अब मैं सुबह में स्कूल जाता दोपहर में कुछ वक्त जनरल स्टोर पर बैठ जाता और फिर ट्यूशन जाता वहां पर छुट्टी से पहले टीचर के कुछ छोटे-मोटे काम निपटा करर घर वापस आ जाता सबसे आखरी में मेरी ही छुट्टी हुआ करती थी क्योंकि सब बच्चों के जाने के बाद टीचर अपने-अपने घर का शाग भाजी मंगवाने के बाद टीचर मुझसे कुछ वगैरह वगैरह मंगवाने का काम करवाती मैं
बहुत ज्यादा थक जाया करता था लेकिन घर के हालात ने वक्त से पहले मुझे बहुत जिम्मेदार बना दिया था मेरे बाबा एक मजदूर थे और जब से उन्हें दिल का दौरा हुआ था वो मजदूरी करने के लायक नहीं रहे थे साथ ही उन्हें बहुत सी और बीमारियां भी लग गई थी और उनकी दवाइयों का खर्च बहुत ज्यादा हो जाया करता था मां एक साथ पांच घरों में काम कर रही थी और मेरी मां के चेहरे पर वक्त से पहले ही झुरियां पड़ गई थी गरीबी इंसान को उम्र से पहले ही बूढ़ा कर देती है हमारे
घर का माहौल भी कुछ ऐसा ही था मेरे मां-बाप दोनों हालात से मजबूर थे मैं टीचर के ड्राइंग रूम को देखते हुए अपनी ही सोच में मगन था मेरी टीचर एक अमीर औरत थी उनके घर में हर किस्म की सुविधाएं मौजूद थी और उस वक्त भी इतनी ठंडी बारिश में उनके ड्राइंग रूम में हीटर चल रहा था मैं सोच रहा था कि कुछ लोग कितने खुशकिस्मत होते हैं कि उनके पास जिंदगी की हर सहूलियत मौजूद होती है जबकि हम तो बुनियादी जरूरत के लिए भी जिंदगी से लड़ रहे थे टीचर के पास हर कीमती से
कीमती चीज मौजूद थी मैं इन्हीं सोच में गुम था जब टीचर मेरे लिए गरम-गरम चाय लेकर आई मेरे भीगे हुए कपड़े देखकर कहने लगी इनके पास मुझे देने के लिए कपड़े नहीं है उन्हें इस बात की फिक्र हो रही थी कि कहीं मुझे ठंड ना लग जाए मैंने टीचर से कहा कि परेशान ना हो मैं बस चाय पीकर अपने घर चला जाऊंगा टीचर मुस्कुरा कर कहने लगे लगी कि चले जाना तुम्हें बहुत जल्दी है अपने घर जाने की टीचर की बात सुनकर मैं मुस्कुरा दिया वह हमेशा ही मुझे अक्सर रोक लिया करती थी सब बच्चों
की छुट्टी हो जाती लेकिन मैं बैठा रह जाता और फिर वह मुझसे काफी देर तक बातें करती और उसके बाद मुझसे अपने काम का कह देती उनकी जुबान में इतनी मिठास होती कि मैं उनकी किसी बात को इंकार ही ना कर पाता गरम-गरम भाप उड़ाती हुई चाय टेबल पर रखी थी मैं चाय पीने लगा था मुझे इतनी सर्दी लग रही थी कि गरम-गरम चाय मेरे अंदर एक सुकून पहुंचा रही थी मेरी चाय खत्म हो चुकी थी टीचर अपने लिए चाय बनाकर नहीं लाई थी चाय खत्म करते ही मैंने उनसे इजाजत मांगी तो उन्होंने यह कहकर
मुझे कुछ और देर रुकने पर मजबूर किया कि बारिश अभी बहुत तेज हो रही है वाकई आज अचानक इतनी तेज बारिश हो गई थी कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी मुझे अपने घर की फिक्र भी सता रही थी टीच टीचर मेरे साथ बैठकर मुझसे बातें करने लगी और मुझे उनसे बातें करते हुए अजीब सी शर्मिंदगी का एहसास हो रहा था शायद मैं बहुत ज्यादा थक चुका था टीचर मुझसे कहने लगी तुम थोड़ी देर मेरे कमरे में सुकून से लेट जाओ और जैसे ही बारिश कम होती है तुम चले जाना मेरे मां-बाप के
पास फोन नहीं था कि मैं उन्हें फोन करके यह बात बता देता हमारे पास तो दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से ही होती थी मेरी आंखें नींद से झलक लगी मैं भी टीचर की बात सुनकर उनके बेडरूम में चला गया लेकिन गीले कपड़ों की वजह से मैं उनके बिस्तर पर नहीं लेटना चाहता था टीचर भी मेरे पीछे कमरे में चली आई वह कहने लगी मैं आसानी से उनके बिस्तर में लेट सकता हूं मेरी हिचकिचाहट देखकर टीचर कहने लगी बिस्तर गीला होने की फिक्र ना करो तुम आराम कर लो बाद में यह मैं साफ कर
लूंगी मेरे लिए एक पल भी खड़ा रहना मुश्किल हो रहा था मैं फौरन टीचर के बेड पर लेट गई गया और आंखें बंद करते ही गहरी नींद में चला गया जब मुझे होश आया तो ना जाने कितना वक्त गुजर चुका था मैं अपने घर जाने के लिए उठना चाहता था लेकिन उस वक्त मुझे अंदाजा हुआ कि मेरे साथ क्या हो चुका है मैं जोर-जोर से शोर मचाने लगा मेरी बात पर टीचर कमरे में चली आई और प्यार से कहने लगी शेखर क्या हो गया है मैंने परेशानी के आल में टीचर से पूछा आपने मेरे साथ
क्या किया है टीचर कहने लगी तुम परेशान ना हो कुछ नहीं होगा मैं तुम्हारे साथ हूं तुम्हें फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं तुम मेरे साथ आराम से रह सकते हो टीचर की बात सुनकर मुझे गुस्सा आ गया था मैंने टीचर से कहा कि मैं अपने घर जाना चाहता हूं आपने मुझे बारिश के रुकने तक यहां ठहरने का कहा था लेकिन अब बारिश खत्म हो चुकी है तो मुझे जाने दे लेकिन टीचर ने जैसे ही मेरी बात सुनी तो उन्होंने अनसुनी कर दी वह मुझे अपने कमरे में ब बंद करके बाहर निकल गई थी मैं
उनके पीछे जोर-जोर से चीखने लगा लेकिन जैसे उन्होंने अपने कान ही बंद कर लिए हो थोड़ी देर बाद वह नाश्ते की ट्रे लिए कमरे में चली आई मैं बेड पर ही बैठा हुआ था व मेरे पास बैठ गई और मुझे अपने हाथों से नाश्ता करवाने लगी मैंने अपने होठ बंद कर दिए थे मैं एक निवाला भी नहीं खाना चाहता था मुझे बस अपने घर वापस जाना था टीचर ने बहुत प्यार से मेरे बालों में हाथ फेरा और कहने लगी शेखर तुम रात से भूखे हो मैं तुम्हारे लिए कपड़ों का इंतजाम भी कर दिया है फिर
तुम हमेशा मेरे साथ रहना मुझे लग रहा था कि टीचर का दिमाग खराब हो गया है मैंने उनसे कहा मेरे घर वाले मेरा इंतजार कर रहे होंगे मेरे बाप की हालत ठीक नहीं और मेरी मां भी बीमार है आप मुझे मेरे घर वापस जाने दें यह सुनकर टीचर कहने लगी अब से तुम्हारा घर यही है थोड़ी देर बाद दरवाजा बजने लगा और टीचर मुझे दोबारा कमरे में बंद करके चली गई थी मेरे दोनों हाथ पांव बंधे हुए थे मैं अपनी जगह से हिल भी नहीं सकता था टीचर ना जाने मुझसे क्या कहना चाहती है और
मुझे तो यह भी नहीं मालूम था कि उन्होंने रात भर मेरे साथ क्या किया था थोड़ी देर बाद जब वह पलटक वापस आई तो कहने लगी तुम्हारी मां तुम्हें ढूंढती हुई आई थी मैंने उनसे कह दिया कि तुम रात को ही वापस चले गए थे और वो फिर वापस चली गई टीचर की यह बात सुनकर तो मेरे होश उड़ गए मैं जान गया था मेरी मां मुझे लेकर बहुत ज्यादा परेशान होगी मैंने टीचर से मिन्नत की कि भगवान के वास्ते मुझे छोड़ दो मुझे यूं बंद रखकर आपको क्या मिलेगा टीचर ने मुस्कुराकर मेरी तरफ देखा
और कहने लगी मैं अब तुम्हें नहीं छोड़ सकती बहुत मुश्किल से तुम मुझे मिले हो मैंने बहुत दिन इंतजार किया और अब तुम मेरे हाथ आ गए हो कुछ दिनों की बात है फिर तुम्हारे मां-बाप तुम पर रो रोकर सब्र कर लेंगे मैं तुम्हें एक अच्छी जिंदगी दूंगी और तुम्हें किसी चीज की कमी नहीं होने दूंगी मुझे अब तक समझ ना आया कि टीचर मुझे क्यों यहां पर कैद करके रखना चाहती थी मुझे टीचर के पास एक दिन पूरा गुजर चुका था लेकिन अभी तक मुझे कुछ भी समझ ना आया था रात के वक्त जब
टीचर मेरे पास दोबारा खाना लेकर आई तो मैंने फिर एक निवाला भी ना खाया मैं पिछली रात से भूखा था टीचर को मेरी बहुत ज्यादा फिक्र सता रही थी वह कहने लगी शेखर तुम कब तक भूखे रहोगे मैंने टीचर से कहा जब तक आप मुझे यह नहीं बताएंगे कि आपने मुझे यहां क्यों बंद करके रखा है और आप मेरे साथ क्या करना चाहती हैं आप अच्छे से जानती हैं कि मैं एक गरीब लड़का हूं और मैं अपने मां-बाप का इकलौता बेटा हूं मेरी मां तो मेरी गैर मौजूदगी में पागल हो जाएगी बस मुझे इतना बता
दे कि आप मुझसे क्या चाहती हैं टीचर मेरी भू हड़ता ताल से परेशान थी वह मेरे करीब ही बैठ गई और वह मोहब्बत से मेरा चेहरा देखने लगी और फिर जो कुछ उन्होंने मुझे बताया वह सुनकर तो मैं दंग रह गया वह कह रही थी कि टीचर अपने बहन भाइयों में सबसे बड़ी थी और पिता की मौत के बाद उन्हें अपने पिता की जगह सरकारी नौकरी मिल गई थी और वह घर संभालने लगी अपने बहन भाइयों की पढ़ाई का खर्चा उठाया और अपनी जिंदगी में कभी किसी चीज की कमी ना होने दी टीचर की आंखें
नम होने लगी थी और वह कह रही थी कि मैंने अपने बहन भाइयों के पीछे अपनी पूरी जवानी बर्बाद कर दी मैंने उनकी जरूरत और ख्वाहिशों को पूरा करने में कहीं कोई कमी ना रखी कुछ साल बाद मेरी मां की मौत हो गई मैंने बाप के साथ-साथ मां की जिम्मेदारी भी संभाली लेकिन अपने बहन भाइयों को कभी तकलीफ ना होने दी एक-एक करके मैंने अपनी बहनों की शादी कर दी और फिर अपने दोनों छोटे भाइयों को भी सेटल करा दिया बस एक भाई बाकी रह गया था जो अभी तक पढ़ाई कर रहा था मैं खुद
35 साल की हो गई थी लेकिन मैंने अपने बारे में कभी भी कुछ नहीं सोचा था मेरे दोनों भाइयों ने भी शादी कर ली और उन दोनों की शादियों को ज्यादा वक्त ना गुजरा था एक दिन सब बहन भाई घर में जमा हो गए और मुझसे घर का हिस्सा मांगने लगे क्योंकि यह मेरे पिता का घर था मैंने कभी नहीं सोचा था कि जिन बहन भाइयों को परवान चढ़ाने में मैंने अपनी पूरी जवानी खत्म कर दी वह बहन भाई एक दिन मुझसे इस तरह बंटवारे की बात करेंगे मैंने अपने बहन भाइयों से कहा अगर मैं
यह घर बेच दूंगी तो मैं और तुम्हारा छोटा भाई कहां जाएंगे लेकिन उन जालिमों की आंखों पर तो लालच की पट्टी बंद गई थी उन्हें मेरी कोई कुर्बानी नजर नहीं आ रही थी वह सिर्फ घर का हिस्सा चाहते थे मेरे पास इसके सिवा और कोई रास्ता नहीं था मैं पापा का घर बेच कर सबको हिस्सा दे देती मैंने वह घर बेच दिया और सब बहन भाइयों को हिस्सा दे दिया मेरे और छोटे भाई के हिस्से में जो पैसे आए उससे मैंने यह घर खरीद लिया लेकिन मुझे इस बात का बहुत सदमा था कि मेरे बाप
का घर बिक गया था और मेरे बहन भाइयों ने अपना अपना रास्ता हल कर लिया था जिन बहन भाइयों को देखकर मैं जी रही थी वह बहन भाई मुझसे पूरी तरह अलग हो गए थे मैं अपने छोटे भाई से मिलकर एक नई जिंदगी शुरू कर चुकी थी लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था कुछ ही साल बाद मुझे पता चला कि मेरे छोटे भाई को कैंसर है मैंने अपने भाई के इलाज पर अपनी सारी जमा पूंजी खर्च कर दी लेकिन उसकी हालत दिन बदन बिगड़ती जा रही थी मैंने अपने बहन भाइयों को मदद
के लिए कहा लेकिन वह सब तो बिल्कुल ही मदद के लिए ना आए और फिर एक वक्त ऐसा आया कि मेरा भाई जिंदगी की बाजी हार गया और मौत उसका मुकद बनी लेकिन उसकी मौत सिर्फ उसकी ही नहीं थी बल्कि मेरी भी मौत थी क्योंकि मेरे पास जिंदा रहने के लिए कुछ भी नहीं बचा था मैं भी मर जाना चाहती थी लेकिन अभी मेरा वक्त नहीं आया था इसीलिए मुझे जिंदा रहना था मैंने अकेले ही जिंदगी गुजारनी शुरू कर दी और स्कूल की नौकरी को भी जारी रखा मेरे लिए जिंदगी सिवाय एक अजियत के कुछ
नहीं थी मैं 38 साल की हो गई थी अभी तक मैंने अपनी सारी जिंदगी अपने बहन भाइयों के पीछे लगाई थी लेकिन अभी मेरे पास ऐसा कोई नहीं था जो मेरे अकेलेपन को दूर करता अपने भाई की मौत का सदमा बर्दाश्त करना मेरे लिए बहुत मुश्किल था मैं अपने अंदर एक जंग लड़ रही थी उन्हीं दिनों तुम स्कूल में पढ़ने के लिए आए और तुम्हें देखकर मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरा भाई जिंदा होकर मेरे सामने आ गया है टीचर मेरे पास से उठकर गई और कमरे की अलमारी से एक एल्बम निकाल कर लाई और
अपने छोटे भाई की तस्वीर मुझे दिखाई तो वाकई में मैं हैरान रह गया था वह तो हूबहू मेरे ही जैसा था टीचर कहने लगी उस दिन मेरा दिल चाहता था कि मैं तुम्हें अपने पास रख लूं और अपनी आंखों से ओझल ना होने दूं लेकिन जब तुम टेस्ट में फेल हुए तो मुझे बहुत दुख हुआ और फिर तो तुम्हारी मां ने तुम्हारे हालात के बारे में बताया तो यह जानकर मेरा दिल डूब गया कि तुम इतनी सी उम्र में इतनी तकलीफ सह रहे हो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा भाई दोबारा से आ गया हो मैं
जब भी तुम्हें देखती तो मेरा दिल चाहता था कि मैं तुम्हें सारी परेशानियों से निकाल लूं मेरा दिल यही चाहता कि बस तुम मेरे साथ रहो और मैं तुम्हें सारी खुशियां दूं तुम्हें याद होगा मैं रात के देर तक तुम्हें रोक कर रखती थी क्योंकि तुमसे बातें करके मुझे सुकून हासिल होता था अपने भाई को खोने के बाद जो हालत मेरे अंदर पैदा हो गई थी तुमसे मिलने के बाद बाद वह हालत पूरी होने लगी थी कई दिनों से मैं यह सोच रही थी कि किस तरह से मैं तुम्हें अपने पास रख लूं और कहीं
जाने ना दूं मैं तुम्हें एक अच्छी जिंदगी देना चाहती हूं और चाहती हूं कि तुम मेरे साथ रहो मुझे तुम में अपने भाई की छवि नजर आती है यह कहकर टीचर रोने लगी और मुझे एहसास हो रहा था कि उनकी दिमागी हालत ठीक नहीं है अपनों के रवैए ने उन्हें पूरी तरह मार दिया था उन्हें यह भी ऐ सास नहीं हो रहा था कि वह मेरे साथ कितना गलत कर रही थी उनकी इस हरकत से मेरे मां-बाप किस परेशानी में होंगे मैंने टीचर से कहा आप मुझे आजाद करें मैं हमेशा आपको अपनी बड़ी बहन की
तरह रखूंगा और हर दिन आपसे मिलने आऊंगा मेरे घर वाले भी तो वह भी मेरे लिए इसी तरह दुखी होंगे जैसा कि आप अपने भाई के लिए है मुझे अंदाजा हो रहा था कि वह अपने होश में नहीं है और उन्हें किसी अच्छे डॉक्टर की जरूरत है मैंने धीरे-धीरे अपनी बातों से टीचर को इस बात के लिए राजी कर लिया था कि वह मुझे आजाद कर दे और उसने मुझे आजाद कर दिया मैं भी उनको अपनी बड़ी बहन बना लिया था और उनका अब बहुत ख्याल रखता हूं अब वह बहुत खुश है धन्यवाद दोस्तों दोस्तों
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