पेशे खिदमत है कहानी तीन शहजाद यां एक शहजादा का दूसरा हिसा शहजादा जाने आलम मेहर निगार से इजाजत लेकर रुखसत हुआ मुल्क जर निगार बल्क मेहर निगार के बाग से 40 मंजिल दूर था शहजादे ने उस जमीन पर कदम रखा तो इस तरह के पैरों में छाले थे और होठों पर आह नाले थे 40 मंजिल का यह सफर कई महीनों में तय हुआ था मगर सफर की तकलीफों ने शहजादे को ढाल कर दिया था अब जो दोस्त की नगरी में पहुंचा तो जान में जान आई जो जो पते तोते ने बताए थे वह सब उस
इलाके में पाए चारों तरफ शादाब थी हर समत मीठे और ठंडे पानी के चश्मे बहते थे जंगल हरे भरे थे हर तरफ अनोखी बहार थी हवा खुशबुओं बखे रही थी जाने आलम तेज तेज कदम उठाता मंजिल की तरफ चला जाता था एक रोज चार घड़ी दिन रहे क्या देखता है शुमाल की तरफ कोई चीज सूरज की तरह चमक रही है कि उस पर नजर नहीं ठहर अकल हैरान हुई दिल ने कहा हो ना हो कयामत नजदीक आई कि सूरज मशरिक को छोड़ शुमाल से निकला अंजुमन आरा को देखने की उम्मीद जाती रही कि अब कयामत
आई तो ना हम होंगे ना वह और ना यह दुनिया का कारखाना करीब गया तो पता चला कि दरवाजा है निहायत आलीशान और आसमान से बातें करता हुआ उस पर सोने का काम हो रहा था और उस पर इस कसरत से लालो याकूत जड़े थे कि नजर ना ठहरती थी उससे ऐसी शवाई फटती थी कि सूरज को मांद करती थी शहजादे को यकीन हुआ कि अब मंजिल आ पहुंची और यही वह दरवाजा है जिसकी तलाश में दरबदर आवारा हुआ खुदा का शुक्र किया और सजदे में गिर पड़ा शहजादा शहरे पनाह के दरवाजे में दाखिल हुआ
दरो दीवार को जगमगाता पाया अक्सर मकान बलोर बल्कि याकूत के बने थे जगह-जगह लोहे के बुर्ज नजर आए जिन पर भारी तोपे चढ़ी हुई थी तोपों के दाएं बाएं जवान जवान गोला अंदाज बादल के दगल पहने टहल रहे थे जमीन और आसमान उनकी हैबत से दहल रहे थे गली कूचे साफ थे दरवाजे पर 5000 सवार और लाख प्याद की छावनी जाने आलम ने एक सवार से पूछा भाई इस शहर का नाम क्या है और यहां का हाकिम कौन है उसने गौर से देखा कि एक जवान है खूबसूरत मगर सफर की तकलीफों से निढाल सूरत से
रियासत टपकती है पूछा आप कहां से तशरीफ लाए हैं शहजादे ने कहा वाह साहब यह खूब है सवाल कुछ जवाब कुछ उसने जवाब दिया इस मुल्क को जर निगार कहते हैं यह सुनना था कि शहजादे का चेहरा खुशी से दमक लगा दिल में कहा किस्मत ने यावरी की और आखिर मंजिल पर पहुंचा दिया आगे बढ़ा और शहर को देख के हैरान होने लगा एक से एक उम्दा मकान एक से बढ़कर एक दुकान जा बजा नहरें थी और उनमें फवारणी तरह-तरह के कीमती सामान के ढेर लगे थे खरीददारों की वो कसरत थी कि चलने वालों के
कपड़े फटे जाते थे जाने आलम खुदा की कुदरत देखकर अश अश करता था और दिल में कहता था क्या मुल्क है क्या सल्तनत है और क्या शहर बाजार है कैसे व्यापारी और कैसे खरीदार हैं हर शख्स को आराम और राहत हासिल है क्या उम्दा बंदोबस्त है जब चौक में आया तो पूछा बादशाह सलामत की महल सरा किधर है जवाब मिला दाहिने हाथ को सीधे चले जाओ बाजार तय करके जाने आलम शाही इमारतों के नजदीक आया इन इमारतों को और भी अजीब पाया ऐसे महला किसी बादशाह ने ख्वाब में भी ना देखे होंगे मगर एक अजीब
बात यह देखी कि जो दरबारी या मुलाजिम उधर से गुजरता स्याह मातमी लिबास पहने होता उसका माथा ठनका और पांव मन मन भर हो गए दिल में कहता था खुदा खैर करे बुरा शगून है जरा देर में हटो बचों का शोर उठा देखा एक पुराना ख्वाजा सरा सूरज से निहायत होशियार महब अली खा नाम सवारी में सवार आया मगर वह भी स्याह पोश जाने आलम ने बढ़ के सलाम किया उसने मोहब्बत से जवाब दिया और हैरत से शहजादे को देखने लगा बोला वाह वाह क्या खुदा की कुदरत है अल्लाह ताला ने अपने हाथ से बनाया
है क्या सूरत शक्ल है चेहरे से कैसी रियासत टपकती है फिर शहजादे को मुखातिब करके बोला ए हसीन किस तरफ से आकर इस दयार को रौनक बशी और इस मनहूस शहर में कदम रखने का क्या सबब है ने कहा हम इस शहर और यहां के शहरे यार को देखने की ख्वाहिश दिल में लाए हैं मगर खुदा के लिए यह तो बता दीजिए कि यह किसका मातम है कि जो है स्या पोश है यह सुनकर ख्वाजा सरा यानी रो दिया बोला ऐ नौजवान तूने सुना होगा कि इस मुल्क की शहजादी अंजुमन अरा थी जिसके हुस्न का
दुनिया में कहीं जवाब ना था बहुत से शाह और शहरियार उससे शादी के उम्मीदवार थे कितनों ने उसके लिए जाने दे दी चार पांच दिन से हमारे नसीब ऐसे सोए कि एक जादूगर अया मकार जादू के जोर से उसे उड़ा ले गया जाने आलम ने जो यह वहशत नाक खबर सुनी तो होशो हवास जाते रहे और बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा ख्वाजा सरा समझ गया कि यह बेचारा मोहब्बत का मारा है वह अपनी नादानी पर पछताने लगा कि ऐसी बुरी खबर यूं अचानक सुनानी ना थी हर चंद गुलाब केवड़ा छिड़का मगर होश में ना
आया शहजादे को होश में लाने की सारी तदबीरें बेकार हो गई तो ख्वाजा सरा परेशान बादशाह की खिदमत में हाजिर हुआ अर्ज किया कि यह अंजुमन आरा का गम आज फिर ताजा हो गया बादशाह ने सवाल किया क्या बात है खैर तो है ख्वाजा सरा ने बताया किसी मुल्क का निहायत हसीन शहजादा अंजुमन आरा की मोहब्बत में दीवाना हुआ है और तख्तो ताज से हाथ उठाकर यहां पहुंचा है मैंने बताया कि शहजादी को एक जादूगर जादू के जोर से उठाकर ले गया तो इसकी हालत गैर हो गई और शायद यह सोच कर के जी की
जी ही में रही बात ना होने पाई हैफ है उससे मुलाकात ना होने पाई एक आह भरी और बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा अभी तक तो होश आया नहीं होश में लाने की जितनी तदबीरें की सब बेकार गई खुदा जाने जीता भी है या मर गया ऐसी सज दज का जवान आज तक तो अपनी नजर से नहीं गुजरा इस शहजादे और शहजादी को एक साथ देखे तो ऐसा लगे कि दो सूरज एक साथ निकले हैं अब उस जवान को देखेंगे तो शहजादी को भूल जाएंगे बादशाह बेटी की जुदाई में बेचैन था सोचा उस नौजवान
को बुला के देखूं और दो बातें करूं शायद इस तरह जी बहले दरबारियों को हुक्म दिया कि जल्द जाओ और जिस तरह बन पड़े उस नौजवान को ले आओ लोग दौड़े और शहजादे को मुर्दे की सूरत उठा ले गए बादशाह ने हाथ मुह धुलवा शेर मुश्क छिड़का मुंह में केवड़ा टपकायालु शबू एं सुंघा जब कहीं जाने आलम होश में आया घबरा के उठ बैठा देखा कि पक्की उम्र का एक शख्स चेहरे पर बादशाहों का जलाल सर पर शाही ताज जिस्म में शाहाना पोशाक जुड़ाव तख्त पर बड़ी आन से बैठा है 4000 गुलाम कमर में सुनहरी
पटके बांधे तलवारें कसे खिदमत में हाजिर हैं अमीर वजीर दरबारी सिपा सालार सब अदब से खड़े हैं शहजादा अदब से उठ खड़ा हुआ और झुककर इस तरह आदाब बजा लाया जिस तरह बादशाहों को सलाम किया करते हैं बादशाह ने गले लगाकर अपने पास बिठा लिया जाने आलम पर जब से बादशाह की नजर पड़ी थी वह उस पर फरिश्ता हो गया था और अफसोस करता था कि ऐसा खूबसूरत दरबार के अदब आदाब से वाकिफ और नेक जवान मिला जिसे वह अपनी दामादी में बिला झिझक कबूल कर सकता था तो शहजादी ना रही सारे दरबारी भी सखते
में रहे ताजो तख्त का ऐसा वारिस हाथ आए और महरूम रह जाए शहजादे की हालत तो कोई ऐसा ही समझ सकता है जो मंजिल पर पहुंच के नाकाम हो गया हो हसरत पर उस मुसाफिर बेकस की रोइए जो थक गया हो बैठ के मंजिल के सामने मगर शरीफों का यह तरीका नहीं कि मजलिस में आओ फरियाद करें शहजादा शर्मो हया का पुतला था महफिलों के तौर तरीकों से वाकिफ था सीने में गम का तूफान उठा मगर उसने सह लिया बादशाह ने नाम और मकाम पूछा बाप दादा के बारे में पूछा शहजादे ने सारे सवालों का
अदब से जवाब दिया फिर शहजादी का हाल पूछा बादशाह ने फरमाया ए अजीज क्या अर्ज करूं मुद्दत से एक जादूगर इस फिक्र में था कि किसी तरह जादू के जोर से शहजादी को उड़ा ले जाए मगर बस ना चलता था मैंने खतरे की बूस सूं के निगरा का बंदोबस्त बहुत सख्त कर दिया था मगर वह बड़ा अर था एक दिन अपनी कोशिश में कामयाब हो ही गया उस हादसे के बाद से आज तक मैं महल में नहीं गया हूं अब महल महल नहीं रहा मातम खाना बन गया है हर तरफ से बराबर रोडने पीटने की
आवाजें आती हैं खाना पना हराम है जाने आलम ने सवाल किया कुछ यह भी अंदाजा है कि वह जादूगर शहजादी को किधर ले गया बादशाह ने फरमाया पांच कोस तक पता चलता है उसके आगे किला है जिसकी फसी ल आसमान से बातें करती है अंदाजा यह होता है कि उस किले में आग भरी है जो हर वक्त रोशन रहती है वहां का हाल नहीं खुलता शायद यह सब जादू का कारखाना है शहजादे ने कहा खैर अगर जिंदगी बाकी है तो उस जादूगर को जहन्नुम की सैर कराता हूं और शहजादी को सही सलामत लेकर आता हूं
अच्छा किबला खुदा हाफिज बादशाह उससे लिपट गया और कहा बाबा खुदा के वास्ते इस ख्याल से बाज आ वो जादू का कारखाना ऐसा है जिसके अंदर दाखिल होना नामुमकिन है फिर यह कि मुझे तेरी जुदाई कब गवारा है बेटी को तो धोखे में खोया तुझे जानबूझ के आग में झोंक दूं मैं बुढ़ापे में यह बदनामी मोल नहीं ले सकता यह सल्तनत हाजिर है मैं तो बूढ़ा हो गया हूं अब तू इस पर राज कर मैं अब किसी गोशे में बैठकर अल्लाह अल्लाह करूं शहजादे ने जवाब में अर्ज किया यह राज पाठ हुजूर को मुबारक रहे
मुझे सल्तनत ऐसी ही अजीज होती तो ख्वा मुखवा अपना घर छोड़कर क्यों दर बदर आवारा फिरता खुदा का दिया सभी कुछ था मैं शहजादी की खातिर सफर की कितनी तकलीफें बर्दाश्त करके यहां तक पहुंचा अब यह तान सुनू के पराई सल्तनत अपना के बैठ गया लोग क्या कहेंगे कि जादूगर शहजादी को उठा ले गया यह बेगैरत था जीता रहा जिस मददगार ने हजार बला से बचाकर यहां तक जिंदा और सालिम पहुंचाया है वही वहां से भी कामयाब और कामरान लाकर फिर आपसे मिलाएगा वरना अपनी मनहूस सूरत हरगिज ना दिखाऊंगा बेहयाई के जीने से मरना बेहतर
जब घर से चला था तो अकल रोकती थी पांव पढ़ती थी कि यह नादानी ना कर जानबूझ के दोजख में ना पड़ सल्तनत सी चीज हर किसी को मुयस्सार नहीं आती आराम से हुकूमत कर मगर इश्क कहता था कि जैसे जी चाहे उसके बगैर जिंदगी गुजारना बेकार है दौलत इज्जत शोहरत सल्तनत सब आनी जानी चीजें हैं अकल कहती थी आबरू का पास कर खानदान के नाम पर धब्बा मत लगा दरबदर आवारा ना हो इश्क समझाता था यार के मिलने में इज्जत है जंगल जंगल भटकने में राहत है अकल कहती थी शाही लिबास की निराली शान
है जो उसे फाड़ फेंके बड़ा नादान है इश्क कहता था अकल दीवानी है सबसे अच्छा लिबास रियानी है यह वो लिबास है जो फटे ना खराब हो ना इसे धोने की जरूरत ना रफू की हाजत ना इसे चोर ले जाए ना कभी यह गले से जुदा हो ना कभी जिस्म पर बोझ हो इस तकरार में इश्क की जीत हुई अकल ने मात खाई मुल्क जर निगार की तलाश में लंबा सफर शुरू हुआ एक परिंदा रहनुमा हुआ बचपन का दोस्त एक वजीर ज्यादा था वह तन्हाई का शरीक और सफर का साथी हुआ काफिला रवाना हुआ मगर
बदकिस्मती यह कि तोता उड़ गया एक रन के मिलने से साथी बिछड़ गया फिर तो तन्हाई ने जंगल जंगल भटका आखिर जादू में फंसाया किस्मत ने हमें रुलाकर दुश्मनों को हंसाया थोड़ी मुसीबत उठाकर रिहाई पाई आखिर मुल्क जर निगार का रास्ता मिल गया मगर सवारी छूटी अब पैदल चलना पड़ा फिर एक परियों के अखाड़े में गुजर हुआ वहां मलका मेहर निगार फरिश्ता हुई तरह-तरह के यकीन दिला के और वादे करके वहां से इजाजत मिली फिर सफर शुरू हुआ आखिर हजार मुसीबतें उठा के अपनी मंजिल तक पहुंचा अब घर पहुंच के धोखा खाना जानबूझकर भूल जाना
कहां तक मुनासिब है मुझे मरना गवारा है मगर इस ख्याल से बाज आना मंजूर नहीं यह खबर महल में पहुंची कि एक ज्यादा अंजुमन आरा पर शैदा हुआ है और उसे पाने के लिए बड़ी तकलीफें उठाकर यहां तक पहुंचा है जब उसने यह सुना कि जादूगर शहजादी को उठा ले गया और आग से भरे किले में कैद कर दिया तो वह भी इस आग में कूदने के लिए तैयार हो गया अंजुमन आरा की मां ने यह माजरा सुना तो महल सरा के दरवाजे तक दौड़ी चली आई ख्वाजा सरा ने यह किस्सा बादशाह को सुनाया और
अर्ज किया कि जल्द शहजादे को लेकर महल में तशरीफ लाइए बादशाह शहजादे को महल में ले गया अंजुमन आरा की मा ने बुलाए ली और दुआएं दी सबने शहजादे का सदका उतारा बादशाह ने बड़ी मुश्किल से शहजादे को उस पर राजी किया कि किसी तरह रात गुजार ले फिर सफर पर रवाना हो दस्तरख्वान पर खाना चुना गया मगर शहजादे ने इंकार किया लेकिन आखिर यह सोचकर दो चार लुक मेंे ले लिए कि जब से अंजुमन आरा बिछड़ी है सबका खाना पना हराम है शायद मेरे बहाने दूसरे भी कुछ चख ले खाने से फारिग होकर शहजादा
सोने के लिए लेट गया मगर नींद कहां वह रात तो पहाड़ हो गई किसी तरह कांटे ना कटती थी आखिर खुदा खुदा करके पौ फटी और दिन निकला शहजादा नवाज से फारिग हुआ कामयाबी के लिए खुदा से दुआ की और सफर के लिए आमादा हुआ रात को यह खबर आम हो गई थी कि कल शहजादा जादूगर से टक्कर लेने रवाना होगा पहर रात रहे से दीवाने खास के दरवाजे पर भीड़ थी अचानक बादशाह की सवारी नजर आई उनके बराबर शहजादा बैठा हुआ था देखने वालों की आंखें रोशन हो गई लोग सवारी के साथ-साथ दूर तक
दौड़ते हुए आए और बराबर शहजादे की कामयाबी की दुआएं मांगते रहे आखिर वह मकाम आ गया जहां से खतरनाक सफर शुरू होता था शहजादे ने खुशामद करके और कसमें दे देकर रुखसत किया बादशाह लाचार होकर लौटा और किले में दाखिल हो गया मगर खबर र सानो की डाक बिठा दी कि पल-पल की खबरें किले में पहुंचाई जाए शहजादे ने तन्हा दशते पुर खतर में कदम रखा आग का किला सामने था जमीन से आसमान तक लपकत हुए शोलो और चटकत हुए अंगारों के सिवा कुछ नजर ना आता था शहजादा दोजख के इस नमूने को गौर से
देखने लगा एक हिरन साग से निकला और उछल कूद के फिर उसी में गायब हो गया शहजादे ने बुजुर्ग की दी हुई लौह निकाल के देखी उसमें तहरीर था कि यह इसम पढ़ के हिरन के तीर मार अगर कामयाब हुआ तो तिल समम टूट जाएगा तीर खता हुआ तो आप जान से जाएगा कोई राग के सिवा पता ना पाएगा शहजादे ने दिल में कहा बिस्मिल्लाह इस काम में देर नहीं करनी चाहिए कामयाब होकर जिए तो जीना है वरना मौत भली या अभी से यह तिलिस्म टूट जाएगा या फिर हम इस दुनिया में ना होंगे तीर
निकाल के कमान से जोड़ लिया और निशाना बांधा उधर वह हिरण आग से निकला और इधर इसने और इधर इसने इसम इलाही पढ़ के तीर छोड़ा एक तो शहजादा बला का निशाना बाज और दूसरे खुदा की मदद शामिल हाल थी तीर हिरण के जिस्म में तराजू हो गया हिर जमीन पर गिरा तो एक दहशत नाक शोर बुलंद हुआ हां हां लेजियो रियो जाने ना पाए करीब था कि खौफ से दम निकल जाए चारों तरफ गुबार बुलंद हुआ और रात की सी तारीख छा गई जरा देर में वह तारी की दूर हुई सूरज नम उदार हुआ
ना आग रही ना किला दूर तक हवार मैदान नजर आता था सामने जादूगर की झुलसी हुई लाश पड़ी थी काला बजंग नंगा बदन होठों से बाहर निकले जर्द जर्द दांत दूर से नजर आते थे बालों की अध जली लट जमीन पर बिखरी थी गले में हड्डियों और खोपड़ का हार था तीर सीने के पार था शहजादा यह समा देखकर खुदा का शुक्र बजा लाया सजदे में गिर पड़ा फिर बहादुरों की तरह आगे बढ़ा बादशाह के हरकारे दूर खड़े तमाशा देख रहे थे वह फौरन शाही किले की तरफ दौड़े बादशाह की खिदमत में हाजिर होकर आदाब
बचा लाए और फतह की खुशखबरी सुनाई और आग के किले का जो अंजाम अपनी आंखों से देखा था वह सब बताया बादशाह और महल के दूसरे लोगों की खुशियां का कोई ठिकाना ना था सब ने खुदा का शुक्र अदा किया बादशाह ने फतह की खबर लाने वालों को इनाम से मालामाल कर दिया और खुश होकर फरमाया कि शहजादा अमल का पुतला और अजम का पक्का है वह जिस काम के इरादे से रवाना हुआ है उसमें इंशाल्लाह जरूर कामयाब होगा उधर शहजादे ने बेखौफ अपना सफर जारी रखा मैदान पुर खतर को पार करके वो उस जगह
जा पहुंचा जहां अंजुमन आरा कैद थी व किला भी अजीब था ना जमीन पर था ना आसमान पर बल्कि हवा में लटका हुआ था यह किला जमीन से कोई चार पांच गज ऊंचा था और कुम्हार के चाक की तरह तेजी से चक्कर लगा रहा था जाने आलम ने नजदीक जाकर कुछ पड़ा किला की गर्दिश तो बंद हो गई मगर वह हवा में लटका रहा अब पता चला कि एक किला है निहायत शानदार और जवाहर निगार दरवाजे चार हैं मगर बुर्ज बेशुमार किला की ऊंचाई इतनी कि गर्दन उठाकर देखो तो पगड़ी पीछे को गिर पड़े अंदर
जाने के सारे रास्ते बंद हैं जहां जहान आलम खड़ा था उसके नजदीक एक जमु का बंग नजर आया उसमें से आवाज आई ऐ अपनी जान के दुश्मन क्यों मौत के फरिश्ते को छेड़ता है और क्यों जिंदगी से मुंह फिरता है मुझे तेरे हुस्नो सूरत पर रहम आता है जल्द से जल्द यहां से चलता बन यह तेरा पहला कसूर था जिसे तेरी शक्लो सूरत की वजह से हमने माफ किया अगर बाज ना आया तो इस बेदर्दी से कत्ल करूंगा कि आसमान तेरे हाल पर रोएगा किसी को तेरी खाक का निशान ना मिलेगा बादशाह अलग तेरे गम
में जान खोएगा जंगल की खाक तेरे खून से सुर्ख हो जाएगी शहजादे ने हंसकर जवाब दिया और नामुराद तू क्या हमारी खता माफ करेगा ख्वा म ख्वा बकवास करके हमें गुस्सा दिलाता है तेरा बड़ा बोल दो घड़ी में तेरे आगे आता है और तो क्या कहूं इंशाल्लाह जरा देर में तुझे भी उस खबीस जादूगर के पास भेजता हूं यह सुनकर वह झिला आया उस बदमाश ने बंगले से सर निकाला और थोड़े माश के दाने फेंके उसके साथ ही आसमान जोर-जोर से चक्कर खाने लगा जमीन थरानी लग उसके बाद सरसों में बनोले और राई मिलाई फिर
तीता तीता और लोना चमारी को पुकारा और वह दाने आसमान की तरफ उछाल दिए एकदम गहरी काली घटा गिराई और शहजादे पर पत्थर और आग का मी बरसने लगा यह भी तोड़ के लिए लोह में देख देख के इमाई इलाही पड़ता था और आगे बढ़ता जाता था आग करीब आई तो पानी बन के बह जाती और पत्थर राख बन के बिखर जाते जादूगर खिसिया खिसिया के नई तदबीरें करता और बकला मुखला के नए हमले करता बहुत देर तक यह सिलसिला चलता रहा आखिरकार शहजादे ने लोह के खानों पर नजर दौड़ाई एक खाने में लिखा था
कि यह किसी तरह लोह को किले की दीवार से लगा दे फिर खुदा की कुदरत का तमाशा देख शहजादे ने हिम्मत से काम लिया दौड़ा और उचक के लौह किले की दीवार से छुआ दी किले पर एकदम आफत टूट पड़ी पहले से भी जोर से चक्कर खाने लगा और उससे ऐसी आवाजें निकलने लगी जैसे 1000 तोपे एक साथ छट रही हो चार घड़ी बाद ना किला था और ना मकाना सामने एक रेत का टीला था उसके गिर्द सरकंडे गड़े हुए थे और उन पर नीले पीले रंग का सूत लिपटा हुआ था उसमें कुछ फंदे पड़े
थे सरकंडी वह चांद की मोरत हूर की सूरत परेशान बधावा बैठी थी कोई आस ना पास जाने आलम ने देखते ही पहचान लिया शहजादी को इस हालत में देखकर उसकी हालत गैर हो गई जिस्म कपक पाने लगा और पांव लड़खड़ा लगे अंजुमन आरा ने शर्मा के सर झुका लिया बोली यह संभलो साहब यह क्या करते हो जो कुछ पास लिहाज भी है बेतकल्लुफ पास चले आओ कोई देखेगा तो कहेगा दीवाने हो शहजादे ने कहने को तो यह कह दिया मगर शहजादे को एक नजर देखते ही उस पर हजार जी से फिदा हो गई उधर शहजादे
का यह हाल हुआ कि खड़े रहने की ताकत ना रही गश खाकर गिर पड़ा अंजुमन आरा यह हालत देख के समझ गई कि यह नौजवान भी हम पर जान खोता है यही वजह है कि ऐसी बला से ना डरा सर बेज के इस खौफनाक मैदान में कदम रखा कोई और इसकी तरह हम पर जान निसार करने वाला ना था इतने दिन यहां बेकसी में गुजरे किसी ने आके हाल ना पूछा कौन अपनी जान किसी के लिए जोखे में डालता है आखिर शर्म रोकती रही लेकिन शहजादे ने जाने आलम का सर अपनी गोद में रख लिया
चेहरे से गर्द पहुंची उस बेचारी ने कब किसी को गश खाते देखा था घबरा के रो पड़ी जाने आलम के मुंह पर आंसुओं की बूंदे टपकी तो होश आ गया आंखें खोल दी अंज आरा ने शर्मा के अपना घुटना सरकाया उसने अद खुली आंखों से शहजादी का चेहरा देखा और बोला कि हमारी होशियारी से तो बेहोशी अच्छी थी उधर तो जाने आलम और अंजुमन आरा में नोक झोंक हो रही थी और इधर शाही हरकारे पलपल की खबरें किले में पहुंचा रहे थे बादशाह ने सुना कि बेटी जादूगर से आजाद हो गई तो बाग बाग हो
गया फौरन दरबारियों के साथ रवाना हुआ और एक सकपाल जो शहजादी की सवारी के लायक था साथ ले लिया बात की बात में बादशाह अपनी बेटी के पास आ पहुंचा कहारिया बादशाह का तख्त करीब लाई अंजुमन आरा मुंह छुपाकर बैठ गई जाने आलम चुपचाप पास से हट गया बादशाह तख्त से उतरा सबसे पहले जाने आलम को गले से लगाया उसकी बेमिसाल बहादुरी की तारीफ की और बहुत सी दुआएं दी फिर बेटी को छाती से लगा केर सुखपाल में सवार किया शहजादे को अपने बराबर तख्त पर बिठा लिया अब सल्तनत के खैर खवा और मुलाज माने
सरकार नजदीक आए उन्होंने मनो सोना चांदी तख्त और सुखपाल पर से निसार किए इस कदर अशरफी रुपया सदके हुआ कि आज तक जो मोहताज मुसाफिर उधर जाते हैं चांदी सोना पाने में नसीब जाग जाते हैं थोड़ी देर में फौज और नौबत निशान बल्कि सारा सामान आ जमा हुआ अहले शहर ने यह खबर सुनी तो खुशी से बावले हो गए खुशी के शादिया बजाते मुबारक सलामत का गुल मचाते हुए जमा हो गए सबकी ईद हो गई शहर की रौनक फिर से लौट आई महल में खुशी की महफिल गर्म हो गई अंजुमन आरा की मां गिर्द फिरती
थी बार-बार जमीन पर सजदे करती थी कहती थी अल्लाह ने जाने आलम की बदौलत हमारे दिन फेरे बादशाह कहता था ए खुदाय पाक जिस तरह हमारी बेटी और हम मिले सारे बिछड़े तेरे कर्म से उसी तरह मिले सबकी मुरादों के फूल खिले सब जाने आलम की बहादुरी की दात देते थे कि यह नामुमकिन काम उसी के दम से मुमकिन हुआ अंजुमन आरा जब यह नाम सुनती खुशी से जाती मगर लोगों को सुनाने को कहती साहिबो बार-बार यह क्या कहते हो मेरा मुकद्दर सीधा ना होता तो वह कौन था जो मेरे दिन फेरता शहजादी की सहेलियां
ताड़ गई कि दिल में कुछ और है जुबान पर कुछ और यह सारी बातें सिर्फ सुनाने के लिए हैं जब अंजुमन आरा की मां पास से सिरकी तो उन्हें छेड़छाड़ करने का मौका मिल गया पास आकर बोली है है हम तो तेरी जुदाई में तड़पते थे जिंदगी के दिन भरते और घड़ियां गिनते थे यह सूरत अल्लाह ने दिखाई बल्कि यूं कहो कि जाने आलम की जूतियां के सदके नजर आई जैसे खुदा ने हम सब की ख्वाहिश पूरी की इसी तरह जाने आलम के जी की मुराद भी खुदा पूरी करे अंजुमन आरा गुस्से की शक्ल बना
तेवरी चढ़ा के कहने लगी शायद तुम सबकी शामत आई है जो यह बकबक मचाई है तुमने खूब मेरी चढ़ निकाली खुदा जाने यह कौन है और कहां से आया है इसे तो क्या कोसू वह बेचारा तो मुसाफिर है जी में आता है उन उनका मुंह नोच लू जो मुझे तंग कर रहे हैं अब कोई मुझे छेड़े तो मैं रो दूंगी और अपना सर पीट लूंगी यह कहकर मुस्कुरा दी शहर में मना दी हो गई कि खुशियां मनाओ सारे शहर को दुल्हन की तरह सजाओ नाच रंग की खूब खूब महफिले जमाओ सल्तनत के खैर ख्वा नजरें
लेकर हाजिर हुए शाही मुलाजिम इनाम से मालामाल हुए गर्ज घर-घर ईद हो गई खूब खूब नजरें नयाज हुई मोहताज ने ऐसी खैरात पाई कि कभी ख्वाब में भी इतना रुपया पैसा और सोना चांदी ना देखा होगा हर तरफ मुबारक सलामत की आवाजें सुनाई देती थी नाचने वालियां नाचती थी और गाने वालियां यह गाती थी शादियो जश्न सजावा मुबारक होवे आज शहजादी का दीदार मुबारक होवे सद वसी साल सलामत रहे बामन अमा हुसन की गर्मीय बाजार मुबारक होए वह भी दिन आए जो सेहरा बंदे सर पर उसके सब खुशी से कहे हर बार मुबारक होवे बाद
शादी के खुदा दे कोई फरजंद ए रशीद हम कहे आके यह दिलदार मुबारक होवे गार रखते हैं कम बखत जो दुश्मन है सरूर दोस्तों को गुलो गुलजार मुबारक होवे आखिर जशन से सबको फुर्सत हुई एक दिन बादशाह महल सरा में आराम करता था कि बीवी से इधर-उधर की बात चल निकली बोला जाने आलम का एहसान जो हम सब पर है उससे तो सभी वाकिफ हैं यह बात भी सबको मालूम है कि अंजुमन आरा के हुस्न का जिक्र सुन के बगैर उस पर फरिश्ता हो गया सल्तनत खो के और अपना चैन आराम तज के यहां तक
पहुंचा यहां आ के जो काम अंजाम दिया उसे हमसे ज्यादा कौन जानता होगा कैसे जबरदस्त और मोजी जादूगर को शिकस्त दी उसके तिलिस्म की धजिया उड़ा दी अपनी जान जोखों में डालकर उसे कैद से छुड़ाया इसके अलावा सूरत और शक्ल ऐसी के आज तक ऐसा ना देखा और ना सुना शहजादा ऐसे बड़े मुल्क का के दूर दूर उसका शहरा है खानदान आला और त वाला मतलब यह कि किसी चीज की कमी नहीं आज क्या है कल क्या हो मसल मशहूर है आज का काम कल परना टा लो अब चाहिए कि फौरन शादी की तैयारी हो
मलिका ने कहा लो जो बात आपके ख्याल में आई है मैं भी दिल से यही चाहती थी बादशाह ने कहा आज अंजुमन आरा से इस सिलसिले में गुफ्तगू कर लो और उसकी रजामंदी हासिल करके कल से तैयारी शुरू कर दो बादशाह यह फरमा के दरबार के लिए तशरीफ ले गया मां ने अंजुमन आरा को तलब किया दो चार मुगला नियां आतो और महल दारे भी बुलाई गई शहजादी की बहुत सी सहेलियां बिन बुलाए चली आई मां ने बेटी को गले लगाया प्यार किया और यूं बात शुरू की सुनो बेटी दुनिया के कारखाने में यह रस्म
है कि बादशाह के घर से फकीर तक बेटी किसी की मां-बाप के पास हमेशा नहीं रहती गैरत दार घर में जवान बेटी मां-बाप के लिए शर्मिंदगी का बायस होती है खुदा और रसूल का हुक्म भी यही है कि जवान बेटी को बिठा ना रखो जितने जल्दी बन पड़े शादी कर दो यह भी ना बोलना चाहिए कि एक शख्स ने तुम्हारे वास्ते घर बार छोड़ा सल्तनत से मुंह मोड़ा हर आफत का मर्दों की तरह सामना किया जी पर खेल गया क्या बलाए झेल गया जब कहीं तुमने हमको देखा हमने तुम्हारी सूरत देखी खुदा ने मुश्किल ऐसी
दी है कि सारा शहर उस पर निसार है अंजुमन आरा ने यह सुनकर सर झुका लिया रोने लगी और कहा अम्मा हुजूर सूरत शक्ल का क्या जिक्र करती हो यह अल्लाह की कुदरत है किसी को बनाया किसी को बिगाड़ा जहां फूल है वहां कांटा भी है बुरे ना हो तो अच्छे अच्छे नजर ना आए एहसान से दब के यह बात कहती हो तो दुनिया का कारखाना इसी तरह चलता है एक का काम दूसरे से होता आया है यह शख्स ना आता और मेरी किस्मत में कैद से रिहाई होती तो कोई ना कोई सामान हो जाता
कोई और अल्लाह का बंदा आकर यह काम अंजाम देता मेरी किस्मत कम बख्त बुरी है एक मुसीबत से छुड़ा दूसरी आफत में फंसाया अपने बेगानों के ताने सुन ने पड़े कि यह आया मुझे कैद से छुड़ाया खुदा जाने वह कौन है कहां से आया है अपने तई शहजादा बनाया है मैं आपकी लौंडी हूं हर तरह फरमाबरदार हूं अगर कुएं में झोंक दो तो गिर पडू उफ ना करूं मगर आप उसकी शक्ल पर रीज कर और उसकी मेहनत पर नजर करके रिश्ता करना चाहती हैं तो मैं राजी नहीं हूं अगर उसकी मेहनत का बदला देना चाहती
हैं तो रुपया अशरफी जागीर इनायत कीजिए कि उसका काम हो और आपका नाम हो बेटी की यह बातें सुनकर उसकी मां बहुत हंसी कहा शाबाश बेटी तुमने उसकी जाने सारी की अच्छी कदर की वह तुम्हारे इनाम का मोहताज है अरे नादान वह तो खुद तख्तो ताज का वारिस है शहजादी की सहेलियां भी हंसी के अंजुमन आरा ने शहजादे को मजदूर ठहराया बूढ़ी तजुर्बा का आतो और मुगला निया भी हाजिर थी वह बोली बेटी कुर्बान जाएं मां-बाप का कहा ना मानने से खुदा और रसूल नाखुश होते हैं इंकार मुनासिब नहीं और खुदा नख्वा स्ता यह क्या
तुम्हारी दुश्मन है जो बे देखे भाले किसी के कहने सुनने से तुम्हें किसी राह चलते के हवाले कर दें इंसान अपनी जिंदगी में हर रोज अकल सीखता है ऊंच नीच समझता है अब तुम खैर से स्यानी हो गई मगर अभी तक बचपन की बातें करती हो खेलने कूदने के सिवा कुछ नहीं जानती अंजुमन आरा ने जवाब ना दिया सर जानों पर रख लिया लेकिन वह जो अमीर जदिया उसकी दोस्त और हमनशी थी जिनसे उस बात के रोज मशवरे रहते थे बोली हे है लोगों तुम्हें क्या हुआ है आतो जी साहब बेअदबी माफ आपने धूप में
चूडा सफेद किया है खैर है साबो दुल्हन से साफसाफ कलवाना चाहते हो दुनिया की शर्मो हया निगोड़ी क्या उड़ गई भला मां-बाप का कहा किसी ने टाला है जो यह टाले गी मसल मशहूर है खामोशी आती रजामंदी बड़ों के आगे और क्या कहना यह सुनके पुरानी आतो ने जिसने अंजुमन आरा को पाला पोसा और पढ़ाया लिखाया था मुबारकबाद कहक अंजुमन आरा की मां को नजर दी महल में कह कहे मचे शहजादी रोने लगी सारे दरबारियों ने नजरें पेश की नौबत नकारे भजने लगे तोपे छुटने लगी हर तरफ से मुबारक सलामत की आवाजें आने लगी शादी
की तैयारियों का वक्त आया तो बादशाह ने वजीर आजम से फरमाया कि शहजादा मुसाफिर है हमारा मेहमान है तुम हर तरह के इम्तिहान की सलाहियत रखते हो उसकी तरफ से सारा बंदोबस्त तुम करो वजीर आदाब बजा लाया बादशाह ने उसे हाथी पालकी से सरफराज किया रमाल नजूमी पंडित दरबार में बुलाए गए उन्होंने हिसाब लगा के मुबारक वक्त का पता लगाया ताकि शादी का दिन और वक्त तय किया जाए आखिर सब कुछ तय हो गया शुभ गड़ी माजे का जोड़ा दुल्हन के घर से चला हजारों पुखराज की कश्तियों में जाफरानी जोड़े लगाए गए सुनहरे खानों में
पेंडिया सजी मेवों के तज तैयार हुए दूध के वास्ते अशरफियां के 11 तोड़े तलाई चौकी जवाहर जड़ाऊ जुर्दो बटना मलने का कंगना बेल बूटो वाली मुल्तान की लुंगी कणों में भरा हुआ कश्मीर का इतर और उबटन मोहम्मद शाही अरगजा और तरह-तरह की चीजें सलीके से सजाई गई यह सामान लेकर जुलूस रवाना हुआ जुलूस में हाथी और घोड़े शामिल थे जनानी सवारियां सख पालो और डोलों में सवार थी उन सवारियों को जर्क बर्क पहने कहारिया छमछम करती लिए जाती थी जुलूस के आगे नौबत नगारा बचता था यह जुलूस जिन बाजारों और सड़कों से गुजरा वह खुशबू
में बस गए वहां दुल्हन और यहां दलने मांजे के जोड़े पहने चारों तरफ बना दी हो गई कि सब रंगीन लिबास जिससे खुशबू बरसती हो वह पहने जो सफेद पोश नजर आएगा अपने खून से सुर्ख होगा यानी गर्दन मारा जाएगा खुद बादशाह ने रंगीन लिबास पहना और रंग खेलने लगा सारी रियाया होली की कैफियत भूल गई सारे शहर में सुर्ख और जर्द नाले बह गए गली कचों में अबीर और गुलाबी के ढेर लग गए ऐलान हुआ कि आज से चौथी तक सब लोग कारोबार बंद कर दें अपने-अपने घर में जशन करें नाच देखें जिस चीज
की जरूरत हो वह सरकार से ले ले हिंदुओं में पूरी कचोरी मिठाई अचार तकसीम हुआ मुसलमानों को पुलाव कुलिया जर्दा कोरमा शीर माल फिरने कबाब अता हुए सूबेदार को हुकम भेजा गया कि चारों तरफ दो कोस के फासले से बावरची और हलवाई खाना मिठाई तैयार किए सड़कों पर बैठे रहे कि इस अरसे में जो मुसाफिर गुजरे भूखा ना जाए दूर-दूर शादी का शहरा पहुंच जाए दो मंजिल चार मंजिल बल्कि 1010 20-20 दिन का सफर तय करके तमाशबीन बेफिक्र शहर देखने को आए साचिक का दिन था सारे सामान की तफसील बयान करनी मुमकिन नहीं फिर भी
कुछ चीजों का हाल बयान किया जाता है 500 चौकड़े सोने चांदी के बने सब नकल और मेवे से लबालब भरे 1 लाख ख्वान 50000 में मिसरी के कूज बा में मेवे और कंद की झड़ यां सोने की मटकी जो दही से भरी थी और उसके गले में मछलियां नाड़े से बंदी थी आराय के बेशुमार तख्त जिनकी गिनती मुमकिन नहीं आतिशबाजी के टोकरे कतार दर कतार सरो झाड़ दरख्त मेवा दार हजार दर हजार और इसके अलावा इतना साजो सामान था कि किसी ने ख्वाब में भी ना देखा होगा इस अंदाज से साचिक गई मेहंदी की शब
हुई साचिक दुल्हन के लिबास को कहते हैं वजीर ने कोई कसर ना उठा रखी नारनोल की हजार हा मन मेहंदी मंगाई गई उस मेहंदी का कमाल यह था कि जो एक बार लगा ले सारी जिंदगी उसका हाथ लाल रहे उसे जुड़ाव सेनियो में सजा के उन पर मोमी और काफू शम जला दी गई थी मली दे के ख्वान पर गजब का हुस्नो शबाब था उस जुलूस के दोनों तरफ आतिशबाजी छूटती जाती थी बरात की रात का हाल भी सुनने के काबिल है दीवाने खास से दुल्हन का मकान पांच कोस के फासले पर था दोनों तरफ
आदमी के कद से दुगने 100 100 बत्ती वाले बलोर के झाड़ पांच-पांच गज के फासले पर रोशन थे 10-10 गज के फासले पर सोने और चांदी के पंज शाखे जलते थे थोड़े-थोड़े फासले पर नौबत नकारे बजते थे और रंगीन शामिया के तले नाच गाना होता था आखिर दूहा हाथी पर सवार हुआ चारों तरफ शादिया बजने लगे शहनाइयां बज उठी सवारों के रिसाले जुलूस के साथ-साथ थे हज 1200 तख्त रवा साथ थे जिन पर नाच होता जाता था बरछा और रोशन चौकी वाले हमरा थे बादशाह 12000 हाथियों के साथ बारात के पीछे आता था अमीर वजीर
उसके गिर्द पेश थे अंजुमन आरा का भाई शबा बना था पहर रात रहे बारात दुल्हन के दरवाजे पर पहुंची मामा असीले दौड़ी पानी का तजत हाथ के पांव तले फेंका नाच गाने की महफिल जम गई सुबह होने को थी कि काजी को तलब किया गया उसने निकाह पढ़ाया कई सल्तनत के खराज पर महर बंधा सारे गवाए एक सुर में मुबारकबाद गाने लगे बादशाह ने उन्हें कई लाख रुपए इनाम में दिए दूला जनाने में तलब हुआ वहां रस्में होने लगी आरसी मसेफ की रस्म अदा हुई सूर इखलास खोल के सामने रखी डोमनिक गाने लगी दुल्हन की
हमजोलियां दूला से छेड़छाड़ करने लगी कोई दुल्हन की जूती दुला के कंधे से छुआ गई किसी ने दूला के जूते छुपा के जूता छुपाई मांगी रुखसत का वक्त आया तो जाने आलम ने अंजुमन आरा को गोद में उठाकर सख पाल में सवार किया सबका दिल भराया बादशाह ने मुल्क सल्तनत खजाना सभी कुछ जहेज में दे दिया जाने आलम की खुशियों का कुछ ठिकाना ना था उधर दुल्हन के घर में कोहराम था हर एक की आंख में आंसू थे शादी का जुलूस बड़े करो फर से रवाना हुआ बाजों का शोर आसमान तक पहुंचता था सारे रास्ते
दूला दुल्हन पर से सोना चांदी निसार किया गया यह जुलूस चौक से गुजर के दीवाने खास में दाखिल हुआ जो रस्में यहां की थी होने लगी बकरा जिबाह किया अंगूठे में खून लगा दिया फिर खीर खिला के रस्मों से फुर्सत हुई रात को शहजादे ने शहजादी को सारी कहानी सुनाई कि किस तरह तोते की जुबान से अंजुमन आरा के हुस्न का बयान सुना किस तरह बेद देखे उस पर फिदा हुआ वजीर जादे और तोते को लेकर सफर पर रवाना हुआ हिरन को देख के उसका पीछा किया तो तोते और वजीर जादे से बिछड़ा लसम में
फंसा महीनों जादूगरनी की कैद में रहा फिर किस-किस तरह कैद से रिहाई पाई मलका महर निगार से मुलाकात हुई शहजादी ने जादूगरनी पर तो अफसोस किया मगर मेहर निगार की बात सुनी तो रुकी सूरत बनाई तेवरी चढ़ाई फिर शहजादे ने जादूगर से लड़ने और अंजुमन आरा को उससे निजात दिलाने का हाल तफसील से सुनाया सुबह को चौथी की रस्म के बाद बादशाह ने शहजादा और शहजादी को एक खूबसूरत बाग रहने को अता किया बाग क्या था पूरा राहत कदा था कौन सा ऐशो आराम था जो उस बाग में मौजूद ना था दोनों बाग में रहने
लगे जाने आलम को इधर जितने ऐश थे मलका मेहर निगार को उधर उतनी ही तकलीफ थी हर वक्त शहजादे को याद करती थी और उससे मुलाकात की दुआएं मांगती थी जिस जगह शहजादे से मुलाकात हुई थी अक्सर वहां जाती और पहरों सर झुकाए बैठी रहती उसकी सहेलियां उसकी हालत पर र्स खाती और खुदा से दुआ करती थी कि ऐ अल्लाह इस मुसीबत की मारी की बिगड़ी बना दे कहते हैं मोहब्बत सच जी हो तो उसमें असर होता है रफ्ता रफ्ता ऐसा हुआ कि शहजादे का वहां जी घबराने लगा अपना वतन याद आने लगा अक्सर ऐसा
होता कि मलका महर निगार की वफाएं याद आती और पहनो जाने आलम को सताती एक दिन अचानक ख्याल आया कि खुदा जाने महर निगार का क्या हाल हुआ होगा क्या खबर जीती भी है या हमारी जुदाई में मर गई इस ख्याल का आना था कि शहजादे का दिल बुरी तरह घबराने लगा अंजुमन आरा से बोला अब वतन और दोस्त अजों की याद बहुत सताती है आज मैं बादशाह सलामत से वतन जाने की इजाजत चाहूंगा यह सुनकर अंजुमन आरा का दिल धक से रह गया मां-बाप और वतन से छूटने का ख्याल सताने लगा मगर शौहर की
फरमाबरदार थी और उसने जो तकलीफें उठाई थी उनकी कद्र करती थी बोली मेरा भी जी चाहता है कि यहां से कदम निकालूं और कोहो बिया बा की सैर करूं सुबह को शहजादा रोज की तरह दरबार में हाजिर हुआ और दिल की बात जुबान पर लाया बादशाह से अपने वतन जाने की इजाजत मांगी बादशाह ने रुखसत की बात सुनी तो बहुत रंजीदा हुआ और बोला ए अजीज यह रुखसत की बात तूने क्या कही मेरे दिल में ऐसी बात सुनने की ताकत कहां सैरो शिकार की ख्वाहिश है तो यहां क्या कमी है हमारा इलाका तो सैरो शिकार
और आबोहवा के लिए दूर-दूर तक मशहूर है चारों तरफ के लोग सैर को आते हैं खजाना मौजूद है फौज हाजिर है इत्मीनान से जिधर जी चाहे जाओ और सैर करके जी बहला हो जाने आलम ने सर झुका के और बहुत अदब से अर्ज किया ए लायक एहतराम शहरियार यह नाचीज मुश्किल से बरस दिन यहां रहा इतनी कम मुद्दत में आपको मुझसे वह मोहब्बत हो गई कि मुल्क माल बल्कि जान से ज्यादा मुझे अजीज रखते हैं जरा सोचिए वह मां-बाप जिन्होंने बड़ी मेहनतों से मुझे पाला दिन को दिन रात को रात ना जाना मेरे लिए कितनी
मेहनत मानी उन्होंने इतने दिनों से मुझे देखा तक नहीं बल्कि यह भी नहीं जानते कि अब तक जीता हूं या मर गया मेरी जुदाई से उन पर कित ने सदमे गुजरे होंगे उन बेसहारों का ख्याल कीजिए और मुझे वतन जाने की इजाजत दीजिए जिंदगी है तो फिर कभी हाजिर होंगा बादशाह समझ गया कि यह अब किसी तरह रुकने वाला नहीं आंखों में आंसू भर के बोला खैर बाबा जैसी खुदा की मर्जी मगर सफर की तैयारी को कम से कम 40 दिन चाहिए दिन के दिन यह खबर आग की तरह फैल गई कि शहजादे शहजादी का
सफर करीब है जाने आलम और अंजुमन आरा के सफर की तैयारियां जोरो शोर से हो रही यहां तक कि रुखसत का वक्त करीब आ पहुंचा अगली सुबह को दोनों रवाना होने वाले थे बादशाह का गम से बुरा हाल था शाम को बादशाह ने अपने अमीरों और वजीर को साथ लिया और शहर से दो कोस दूर चला गया यहां सड़क के करीब एक ऊंचा सा पहाड़ था उस पर जा बैठा वजीर से कहा तुम शहजादे को रुखसत करो हम यहां से जुलूस सवारी और सामान सफर देख लेंगे अहले शहर ने सुना तो क्या औरत क्या मर्द
क्या जवान क्या बूढ़ा और और क्या बच्चा सब के सब दूसरी पहाड़ी पर जमा हो गए झट पटे के वक्त जाने आलम ने सवारी तलब की हरों ने बादशाह को खबर पहुंचाई वह सड़क की तरफ मुतजेंस तोपखाना गुजरा उसके बाद सवारी के 12000 हाथी थे जिन पर होज और अरियां कसी थी उनके पीछे हज 1200 जंगी हाथी थे उनकी सोंडों में बान पट्टे चढ़े थे सोने चांदी की जंजीरें खनक रही थी उनकी झोले जरे बफ की थी और हैकले कलाब तों की फील बान कम ख्वाब की वर्दियां पहने जोड़े दार पकड़िया बांधे कमर में कटार
कसे और हाथों में जड़ाऊ गज बाग लिए हाथियों पर बैठे थे हाथियों के पीछे कई लाख सवारों के परे थे हर जवान की उम्र 2021 बरस की थी हर एक के बदन पर जिरा बक्त जोशन थी वो दोनों बाजुओं पर जोशन चढ़े थे हाथों में फौलादी दस्ताने और सर पर खद यानी लोहे की टोपियां थी मतलब यह कि सारे सवार लोहे से ढके थे उनके हाथों में भारी तलवारें और खंजर थे तपन च करोली कटारे कमरों में कसी हुई थी और हर एक की पीठ पर ढाल सजी थी हर सवार जवानी के नशे में मस्त
और अपनी ताकत पर मगरूर था सांडी सवार अलग अपनी सज दज दिखा रहे थे उनके जिस्मों पर जर्द लिबास और सरों पर सुर्ख पगड़ियन उठाए अकड़ हुए चले जाते थे सांड नियों की छमछम से अजब सामान नजर आता था अब सवारी के खासे नजर आए अरबी तुर्की नाज इराकी यमनी घोड़े कतार अंदर के तार थे हर घोड़ा निराला एक से एक अलबेला किसी पर जुड़ाव जीन बना किसी पर चार जामा कसा साथ साथ नौबत निशान गर्ज जुलूस की अजब शान थी मेरे शिकार भी शिकार का सामान लिए साथ था बाज बहरी बाश शाहीन अकाबदो और
तरह-तरह के शिकारी परिंदे शिकारी कुत्ते चीते सब मीर शिकार के साथ थे सके खारवेल कियां पहने शानों पर बादल की झं लिए मशको में बैद मुश्क भरे हजारे के फवारा से छिड़काव करते जाते थे बादला पोश गुलाम हाथों में हीरे के कपड़े पहने सोने चांदी की अंगीठी में खुशबूओं जलाते थे और सारा जंगल खुशबू में बसता जाता था उनके बराबर 2000 कम उम्र लड़के बिलोर की साफ शफाफ लाल टने लिए मोमी और काफू शम में रोशन किए साथ थे अजब समा था कि सूरज ने मशरक की खिड़की से सर निकाला शायद उसे भी इस निराली
सज दज का जुलूस देखने का इश्तियाक हुआ हो गर्ज यह कि सुबह नमूद हुई फूलों के खिलने से सारा इलाका मतर हो गया अब खास बरदार का गौल नजर आया कम ख्वाब की मरजाइया गुजराती अंग रखे मशरूम के घुटने अनों में दिल्ली की नागोरी जूतियां सर पर गुलनार पगड़ियन के के लायक थी जरे बफ के लहंगे मसाला टिके मलमल के दुपट्टे बारीक बिंत गोख की कुर्तियां हाथों में जुड़ाव कड़े पैरों में सोने के कड़े कानों में बालियां गर्दा गर्द बीच में शहजादा जाने आलम बराबर में अंजुमन आरा का सुखपाल यानी पालकी जिसे खूबसूरत कहारिया उठाए
हुए थी हश ने तुर्क ने हिफाजत के लिए साथ थी ख्वाजा सरा इंतजाम में मशगूल थे जब यह शानदार जुलूस नजदीक पहुंचा तो बादशाह ने बड़ी हसरत से देखा और सर्द आह भरी बेकरारी बढ़ गई जाने आलम घोड़े से कूदकर तस्लीमा बजा लाया बादशाह का उस वक्त दिल पर काबू ना था उसने शहजादे को कसम देकर कहा इस वक्त हमारे पास ना आओ जाओ तुम्हें खुदा को सौंपा मजबूरन शहजादा मजरा करके घोड़े पर सवार हुआ जब जाने आलम ने घोड़ा बढ़ाया सारी खलकत का जी भराया बादशाह की बेकरारी शहजादा शहजादे की गिरिया जारी किसी से
देखी ना जाती थी सब जारों के तार रोते थे अपना जीक होते थे सबके होठों पर फरयाद थी कि आज शहर की रौनक रुखसत हुई उन दोनों की जुदाई कैसे बर्दाश्त होगी शहर वीरान हो जाएगा कहते हैं सैकड़ों मर्द औरत बगैर कुछ कहे साथ हो गए अपनी मर्जी से अपना घर छोड़ दिया उस काफिले के पीछे शहजादी के सहेलियों अमीर जादिग आं लालकिला और चंडोल थे पेश खिदमत मियानो में सवार थी आतो और मुगला नियां रथों में बैठी चली जाती थी लौंडिया बांध दियां अना चू और द बर्जे और साहिबान में सवार थी खजाने और
सामान के लिए छकड़ा थी बताने वाले बताते हैं कि इमाम जामिन के रुपए और अशरफियां इतनी आई कि तमाम रास्ते सैयद मुसाफिरों ने पाई खजूर कुच का यह हाल हुआ कि रात के सिवा हाथियों को कुलचे मिले खजूर जो बट ना सकी रास्ते में फेंक दी वह उगी और उन दरख्तों से जंगल हो गया हां तो जब काफिला सुधार गया तो बादशाह बेहाल और बदहवास महल को लौटा बसा बस या शहर लुटा उजड़ा और वीरान नजर आया बाजार में चिराग गुल पाए जिस तरफ देखा थके मांदे फिर कर पड़े थे बाजार में तख्ते लगे टटर
जड़े थे दुकाने बंद थी सारी रियाया उदास थी जो जहां पड़ा था शहजादे की रुखसत का जिक्र कर रहा था कोई सोता था कोई चिपका पड़ा रोता था बस्ती सुनसान बाजार में सन्नाटा बादशाह को दूना कलक हुआ महल सरा में पहुंचा तो वहां भी सबको गमगी पाया अंजुमन आरा मां की नजरों में दुनिया अंधेर हो गई ना हिलती जुलती थी ना बोलती चालती थी किस्मत पर इख्तियार ना था हां आंखों पर अपना जोर चलता था रोए जाती थी बादशाह ने समझाया हाथ मुंह लवा और खुशामद करके कुछ खिलाया शहजादा शहजादी का काफिला कूच पर कूच
किए चला जाता था काफिला क्या था पूरा एक शहर था जहां पड़ाव डाल देते पूरी नगरी आबाद हो जाती दुकानें सज जाती बाजार लग जाते दुनिया की कोई चीज ना थी जो वहां मौजूद ना हो जब यह काफिला मलका महर निगार के बाग के पास पहुंचा तो खबरदार ने मलका को खबर पहुंचाई के लो मुबारक हो शहजादा फिर से तशरीफ लाया शहजादे की जुदाई में उसका दिल इतना कमजोर हो गया था कि यह खुशखबरी ना सह सकी सुनते ही गश खाकर गिरी होश आया तो बोली लोगों यह क्या कहते हो कहीं ऐसा भी होता है
कि सोया हुआ मुकद्दर यूं जाग उठे तुम सब मेरा दिल बहलाने को ऐसी बातें करते हो इतने में महर निगार की खवास यानी कनीज दिल आराम बारा दरी से नीचे उतरी और कहने लगी खुदा जाने यह लश्कर कहां से आकर यहां उतरा है मलका ने सुनक ठंडी सांस भरी और सैर के बहाने कनीज के कंधों पर हाथ रख के कोठे पर चढ़ी देखा कि सचमुच एक भारी लश्कर आक उतरा है दूर तक शाही खैम गड़े हैं और फौज पड़ी हैं सवार प्यादे इधर-उधर टहल रहे हैं शहजादी की नजरें इधर-उधर सैर करती रही अचानक शहजादा जाने
आलम पर नजर पड़ी वह एक शानदार घोड़े पर सवार था दोनों तरफ कई-कई सवार थे मेहर निगार ने पहले उसे थका हारा मुसाफिर का मारा देखा था आज इस शान से नजर आया तो और भी हसीन लगा मलका का बदन कपकप आने लगा करीब था कि गश खाक गिर पड़े मगर संभल गई और चेहरे की जर्दी सुर्खी में बदल गई शहजादा घोड़े से उतर के सीधा मलका के वालिद के पास पहुंचा और सलाम बजा लाया उस बुजुर्ग ने दुआएं दी और गले से लगाकर बोला पाक पर परवरदिगार का कम है कि उसने तुम्हें खुश और
खुरम और खैरियत के साथ दिखाया उसके बाद अंजुमन आरा की सवारी आई उसने भी तस्लीम की उस बुजुर्ग ने जवाब में कहा शहजादी जीती रहो खुदा तुम्हारी उम्र में बरकत दे तुमने फकीर के हाल पर रहम किया उसने अर्ज किया कनीज मुद्दत से आपकी तारीफ सुनती थी दिल में आपके कदम चूमने की ख्वाहिश थी आज शहजादे की बदौलत हाजरी नसीब हुई शहजादी धो गड़ी उस बुजुर्ग की खिदमत में बैठी फिर अर्ज किया कि मलका से मुलाकात का बहुत इश्तियाक है अगर इजाजत हो तो उनसे मुलाकात करूं उन्होंने कहा शौक से तुम्हारा घर है इसमें इजाजत
की क्या जरूरत है जाने आलम तो इजाजत लेकर अपने खेमे में आ गया अंजुमन आरा मलका महर निगार से मिलने चली गई वहां पहले से उसके आने की तला हो चुकी थी और जरा देर में उजड़ा हुआ मकान सच बन के इस्तकबाल के लिए तैयार हो चुका था अंजुमन आरा की सवारी उतरी तो मलका इस्तकबाल को बढ़ी और झुक के आदाब बजा लाई अंजुमन आरा ने गले लगा लिया मलका की आंखों में आंसू भर आए बोली तुमने मुझे शर्मिंदा किया मैं फकीर की बेटी तुम शहजादी तुम्हारे कदमों ने इस मकान की इज्जत बढ़ाई वरना मैं
इस काबिल कहां थी कि तुम मेरी मेहमान होती अंजुमन आरा बोली मलिका तुम भी खूब बातें करती हो हमारा तुम्हारा तो बराबरी का रिश्ता है बल्कि एक मामले में तुम हमसे बढ़ के हो शहजादे से तुम्हारी मुलाकात हमसे पहले हुई हम तो दूसरे नंबर पर हैं गर्ज दोनों में खूब हंसी मजाक होता रहा नोक झोंक होती रही सारी रात बातों में गुजर गई दिन निकला तो अंजुमन आरा जाने आलम के पास आई और देर तक मेहर निगार की आदतों की तारीफ करती रही दूसरे दिन जाने आलम ने मलका के बाप से कहा मैं अपना वादा
पूरा करने को हाजिर हूं उसने जवाब दिया कि यह तुम्हारा कर्म है वरना हम इस काबिल कहां हैं तुम्हें अपनी बात का पास है कि हम पर यह एहसान करते हो बिस्मिल्लाह मलिका को अपनी कनीज में शामिल कर लो बहरहाल मलिका मेहर निगार का जाने आलम से निकाह हो गया अंजुमन आरा और महर निगार में मोहब्बत इतनी बड़ी कि शहजादे को भूल गई शहजादा भी दोनों को बराबर चाहता था और दोनों का ख्याल रखता था कुछ दिन शहजादा वहां रहा आखिर वतन और अहले वतन याद आए दोनों बीवियों से कहा कि बहुत दिन यहां रह
लिए अब कूछ करना चाहिए वह दोनों तो अपने मियां की खुशी में खुश थी फौरन राजी हो गई फिर शहजादा अपने ससुर की खिदमत में हाजिर हुआ और उससे इजाजत मांगी वह बुजुर्ग जानता था के शहजादा एक मुद्दत से अपने मां-बाप और अजीज से दूर है वह उसकी जुदाई में तड़पते होंगे इसलिए उसने रोकना मुनासिब ना समझा रुखसत की तैयारी हुई मेहर निगार का बाप तख्त ताज छोड़ फकीर बन जंगल में आ बैठा था और यादे खुदा में जिंदगी गुजारता था लेकिन रुखसत के वक्त उसने बेटी को इतना सामान और नकद रुपया दिया कि शहजादी
अंजुमन आरा का जहेज भूल गया रुखसत के वक्त वह नेक बुजुर्ग जाने आलम से बोला मुझ गरीब के पास कुछ ना था जो ते तेरी खिदमत में पेश करके अपना जी खुश करता मगर एक पते की बात बताता हूं अगर ध्यान में रखोगे तो यह कानून के खजाने से ज्यादा काम आएगी फिर अलग ले जाकर शहजादे को समझाया और बार-बार ताकीद की कि यह बात अपने सगे भाई को भी ना बताना अगर बताओगे तो पछताओगे और हजरत यूसुफ अल सलाम से भी ज्यादा दुख उठाओगे हर तरफ नेक कम और बुरे ज्यादा हैं हर तरफ शैतान
ने अपने पंजे गाड़ रखे हैं किसी को अपना राज कहना मुसीबत को देना है चुप रहने में बेहतरी है हजरत आदम अल सलाम के जमाने से यह देखने में आया है कि भाई का भाई दुश्मन है भाग उन बर्दा फरोशों से कहां के भाई बेच ही डाले जो यूसुफ सा बिरादर होवे फिर वह बुजुर्ग अंजुमन आरा के पास आया और बोला शहजादी अपनी मेहरबानी से इस फकीर जादी को साथ लिए जाती हो तो इसका ख्याल रखना इस पर हमेशा कर्म की नजर रखना यह खिदमत गुजारी में कसर ना उठा रखेगी इसे तुमको सौंपा और तुम्हें
इसको सौंपा जिससे बड़ा निगेहबान कोई नहीं और खुदा हाफिज दुनिया में ऐसे-ऐसे इत्तफाक हो जाते हैं कि अकल हैरान रह जाती है वजीर जादा जो शहजादे के साथ वतन से निकला था और हिरन के पीछे घोड़ा डाल के बिछड़ गया था वह मुद्दतों हैरान परेशान घूमता रहा आखिर उसी दिन फिरता फराता उधर आ निकला उसने जो यह लाओ लश्कर देखा तो किसी से पूछा कि यह काफिला किसका है और कहां की तैयारी है लोगों ने वजीर जादे को जाने आलम का सारा किस्सा सुनाया वजीर जदा खुश हुआ जान में जान आई फिर पूछा कि शहजादा
कहां है तो मालूम हुआ कि वह दाना बुजुर्ग कुछ समझाने और नसीहत करने अलग ले गया है जब जाने आलम बुजुर्ग से रुखसत होकर सवार होने लगा तो वजीर दौड़ा और अदा बजा लाया शहजादे ने वजीर जादे को पहचाना और घोड़े से कूद के बगल गीर हो गया उसी दम उसे पोशाक पहनाई और अपने हमराह सवार किया रास्ते में शहजादा अपने दोस्त से सफर का हाल पूछता रहा और वह बताता रहा जब शहजादा खेमे में दाखिल हुआ तो वजीर जादे को भी वहीं तलब किया उससे अंजुमन आरा और मलिका को नजर दिलवाई और बोला यह
वही शख्स है जिसकी जुदाई सीने में कांटे की तरह खटकती थी देखो जब अच्छे दिन आते हैं तो बे तलाश बिछड़े मिल जाते हैं जमाने की गर्दिश ने हमें अपने दोस्त से जुदा कर दिया था तो आखिर मिला भी दिया अब वजीर जादे के दिल का हाल भी सुनो उसने अंजुमन आरा के हुस्नो जमाल को देखा तो दीवाना हो गया होशो हवास जाते रहे अकल खो बैठा दिल में दगा आई नमक पर कमर बांधी और अंजुमन आरा को हासिल करने की तदबीरें सोचने लगा जरा देर यह सोहबत रही फिर सब अपने-अपने खैम में चले गए
वजीर जादे के लिए एक शानदार खैमाह दोनों शहजाद हों के साथ बहुत सी हसीन कनीज थी वह सब वजीर जादे को दिखाई गई कि इनमें से जो पसंद हो उसे शादी कर ले वह नमक हराम तो और ही ख्याल में था बनावट से बोला मेरी यह कहा मजाल कि आपकी किसी कनीज से शादी करने का इरादा करूं जाने आलम इस जवाब से बहुत खुश हुआ कि वजीर जादा हमारा कितना अदब करता है शहजादे और वजीर जादे में हर वक्त हर तरह की बातें होती थी इससे कोई भेद ना था मगर जब कभी वजीर जादा पूछता
कि मलका के बाप ने अलग ले जाकर क्या नसीहत की थी तो वह टाल जाता एक दिन अंजुमन आरा और मलका महर निगार में आपस में सलाह हुई और फिर दोनों ने शहजादे से अर्ज किया कि यह बात कहां तक मुनासिब है कि एक गैर शख्स को जो जवान भी है उसे हर वक्त अपनी महफिलों में शरीक रखा जाए इस तरह हुकूमत का रोब खत्म होने का भी अंदेशा है फिर यह कि शैतान को कभी दूर ना समझना चाहिए और गैर तो क्या अपने पर भी आंखें बंद करके एतमाद ना करना चाहिए जाने आलम ने
गुस्से से कहा ऐसी बात फिर कभी जुबान पर ना लाना उसने तुम्हारी किसी कनीज तक को तो कबूल नहीं किया वह तुम्हें क्या बुरी नजर से देखेगा फिर मैं ऐसा बेवकूफ भी नहीं हूं कि बे सोचे समझे किसी पर भरोसा कर लूं मलका यह सुनक हंसी और अंजुमन आरा से मुखातिब होकर बोली खुदा के लिए जरा तुम ही इंसाफ करो शहजादे की बेवकूफी में किसे शक हो सकता है अगर यह अकल के दुश्मन ना होते दो बे सोचे समझे हौज में कूद के जादूगरनी की कैद में क्यों फंसते तुम चुप क्यों हो गए जरा बोलो
सच कहो शर्माओ मत तुम्हारे जी में क्या आई कि झब से हौज में गौता मार दिया यह ना सोचा कि कहां शहजादी अंजुमन आरहा और कहां जंगल का हौस अंजुमन आरा ना हुई जल परी या पानी की मछली हो गई जाने आलम खिसिया होकर बोला क्या तस्करा पन करती हो कहां की बात कहां जोड़ती हो मोहब्बत में ऐसा ही होता है इंसान की अकल मारी जाती है मुझे तो कहती हो जरा अपनी हिमाक तों का ख्याल करो मलका ने कहा मेरी कहानी तो तुम अपनी शर्मिंदगी दूर करने को सुनाते हो मेरा क्या है मैं तो
औरत जात हूं जरा सी नादानी हो गई तो क्या हुआ खैर शुक्र की बात यह है कि हम दोनों की अकल एक सी ही है इस तरह यह बात हंसी में उड़ गई मगर वह मकार बदजात वजीर जादा मौके के इंतजार में रहा दोस्तों यह दिलचस्प कहानी अभी जारी है मकार और बद नियत वजीर जादे ने शहजादे के साथ क्या सुलूक किया मलका महर निगार और शहजादी अंजुमन आरा का ख्याल कहां तक दुरुस्त था क्या वह वजीर जादे के बारे में सही सोच रही थी यह सब हालात जानने के लिए इसी कहानी की अगली किस्त
मुलाहिजा कीजिए नेक्स्ट वीडियो में जो इस कहानी का तीसरा और हिस्सा है और हमारे चैनल उर्दू कार्नर को सब्सक्राइब कीजिए शुक्रिया