क्या इंफोसिस के कोफाउंडर नारायण मूर्ति गलत है इस हफ्ते बहस छड़ी जब मूर्ति जी ने ये कह दिया कि हमारे यहां वर्क प्रोडक्टिविटी दुनिया में सबसे कम है और देश के युवाओं को 70 घंटे काम करने की जरूरत है अगर देश को प्रगति के राह पर ले जाना है लेकिन इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन का कहना है कि जिनके पास नौकरी है उनमें से भारत का लेबर फोर्स दुनिया में सातवें पैदान पर है 48 घंटे काम करते हैं हम यही नहीं हावर्ड बिजनेस रिव्यू की एक स्टडी हमें ये बलाती है कि विकसित देशों में जैसे कि अमेरिका
सबसे कामकाजी लोग इंडियन और चाइनीज समुदाय से हैं अब रही बात प्रोडक्टिविटी की इसमें कोई प्रमाण नहीं है कि लंबे घंटों से ही बात बनती है नहीं तो गैबिया भूटान कोंगो सबसे ज्यादा विकसित देश होते उल्टा ये देखा गया है कि नॉर्वे डेनमार्क बेल्जियम स्विट्जरलैंड जहां वर्किंग आवर्स कम है वहां ताबड़तोड़ प्रोडक्टिविटी चल रही है सच तो ये है कि हमारे देश के युवा के पास आज नौकरी के अफसर नहीं है लेकिन उसके बारे में मूर्ति जी बोलेंगे नहीं और ना मानेंगे कि उनके कंपनी के सीईओ की सैलरी 80 लाख से 80 करोड़ पहुंच गई
पिछले 10 सालों में लेकिन फ्रेशर्स को आज भी वहां बाबाजी का ठुल्लू ही मिलता है